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‘बिना अधिकार मुलायम सरकार ने ज्ञानवापी में रोक दिया पूजा-पाठ’: जानिए वाराणसी कोर्ट के आदेश में क्या-क्या, तहखाने में मूर्ति और पूजा सामग्री भी

काशी में जब मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब का कहर बरपा था, तब उसने बाबा विश्वनाथ के मंदिर को तोड़ कर उसके ऊपर एक ढाँचा बना दिया और उसे मस्जिद कहा जाने लगा। इसकी संरचना में स्पष्ट देखा जा सकता है कि ये कभी मंदिर हुआ करता था, लेकिन इसके ऊपर मस्जिद बना दी गई। भीतर वजूखाना के नाम पर शिवलिंग के ऊपर हाथ-पाँव धोए गए। अब कोर्ट ने हिन्दुओं को ज्ञानवापी के भीतर पूजा-पाठ करने की अनुमति दे दी है। इसे हिन्दू पक्ष की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।

इस संबंध में शैलेन्द्र कुमार पाठक ने मस्जिद कमिटी के विरुद्ध याचिका दायर की थी। वाराणसी के जिला न्यायाधीश अजय कृष्ण विश्वेश ने इस मामले में फैसला सुनाया। बता दें कि अदालत ने 17 जनवरी, 2024 को ही वाराणसी के DM को ज्ञानवापी ढाँचे के दक्षिण की तरफ स्थित इस तहखाने का सिसीवर नियुक्त किया था। इसी संपत्ति को लेकर याचिका दायर की गई थी। जिलाधीश को आदेश दिया गया कि वो इस तहखाने को अपनी अभिरक्षा एवं नियंत्रण में लें।

साथ ही उसे सुरक्षित रखने और अंतिम फैसला आने तक उसकी यथास्थिति बनाए रखने के लिए भी अदालत ने उन्हें कहा था। याचिका में कहा गया था कि उक्त तहखाने में मूर्तिपूजा की जाती थी। अदालत ने माना कि दिसंबर 1993 में पुजारी सोमनाथ व्यास को तहखाने में घुसने से रोक दिया गया था और इसकी बैरिकेडिंग कर दी गई थी। ब्रिटिश काल से ही वो वहाँ पूजा करते आ रहे थे। उन्हें रोके जाने के बाद राग-भोग आदि संस्कार भी रुक गए। बाद में तहखाने का दरवाजा रोक दिया गया।

अदालत ने ये भी माना है कि हिन्दू धर्म से संबंधित कई सामग्रियाँ एवं प्रतिमाएँ आज भी उक्त तहखाने में मौजूद हैं। मूर्तियों की नियमित रूप से पूजा की जानी आवश्यक है। अदालत ने बड़ी बात ये कही कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने बिना किसी विधिक अधिकार के दिसंबर 1993 में पूजा बंद करवा दी थी। उसी महीने में मुलायम सिंह यादव ने बसपा सुप्रीमो कांशीराम के समर्थन से सरकार बनाई थी और मुख्यमंत्री बने थे। ‘मिले मुलायम-कांशीराम, हवा में उड़ गए जय श्री राम’ का नारा लगाया गया था।

जबकि मुस्लिम पक्ष का दावा है कि व्यास द्वारा उक्त तहखाने में कभी पूजा की ही नहीं गई। साथ ही वहाँ कोई मूर्ति होने की बात भी नकार दी गई। अदालत ने आदेश दिया कि 7 दिनों के भीतर वहाँ लोहे के बाड़ में पूजा-पाठ की व्यवस्था की जाए। कोर्ट को ये भी बताया गया था कि परिक्रमा वाले मार्ग पर मस्जिद कमिटी वालों ने लोहे की बैरिकेडिंग कर रखी है। साथ ही कोर्ट ने व्यास परिवार की वंशावली और वसीयत का भी जिक्र किया। इस फैसले के बाद काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में महादेव का दर्शन करने जाने वाले भक्त ज्ञानवापी में भी पूजा-पाठ कर सकेंगे।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान भी कई बार पूछा गया कि ज्ञानवापी में बैरिकेडिंग किसके आदेश पर हुई और श्रृंगार गौरी का पूजन बंद हुआ, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया। दिसंबर 1993 में जब पूजा रुकी, तब केंद्र में कॉन्ग्रेस की सरकार थी और नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री थे। उत्तर प्रदेश सरकार का कहना था कि इस संबंध में कोई लिखित आदेश नहीं मिला है। पहले बाँस, फिर लोहे की बैरिकेडिंग की। स्वयंभू विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग की तरफ से वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी ने 1991 में बताया था कि बैरिकेडिंग से पहले चारों तरफ 4 फ़ीट का परिक्रमा पथ था।

न सिर्फ माँ श्विंगर गौरी की पूजा होती थी, बल्कि ज्ञानवापी मंदिर की परिक्रमा भी करते थे। हिन्दुओं के प्रवेश पर रोक लगने के बाद अदालत का रुख किया गया। अब माँग है कि शिवलिंग को नुकसान पहुँचाए बिना ASI द्वारा सर्वे कराया जाए। फ़िलहाल ये क्षेत्र सील है और इसे छोड़ कर बाकी के ढाँचे का सर्वे हो चुका है। मस्जिद पक्ष ने हिन्दू पक्ष की माँगों को चुनौती देते हुए भी याचिकाएँ दायर कर रखी हैं। वाराणसी की जिला अदालत से लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक में इससे जुड़े मामले चल रहे हैं।

बिहार में ‘सुशासन’ लौटते ही पकड़ा गया ‘साहेबगंज का रावण’, गुजरात से लेकर दिल्ली तक थी तलाश: हत्या से लेकर तस्करी तक में वांछित

दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे अपराधी को गिरफ्तार किया है जिसे ‘साहेबगंज का रावण’ के नाम से जाना जाता है। इसका असली नाम राम नरेश सहनी है। उसके खिलाफ 25 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। राम नरेश सहनी लम्बे समय से फरार चल रहा था। वह वर्तमान में 50 से अधिक बदमाशों का गैंग चला रहा है।

सहनी 2005 से लगातार अपराध करता आ रहा है। उसने गुजरात, दिल्ली और बिहार में तमाम अपराध कर रखे थे। इसके कारण पुलिस उसे ढूंढ रही थी। सहनी बिहार के मुजफ्फरपुर का रहने वाला है। उसे हाल ही में बिहार में गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद दिल्ली पुलिस उसे ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली ले आई।

सहनी ने वर्ष 2005 में गुजरात के सूरत शहर में दशहरा के त्यौहार में कुमोद नाम के एक व्यक्ति की हत्या कर दी थी। इसके बाद वह फरार हो गया था। इसके बाद वर्ष 2012 में उसे दिल्ली में गाँजा बेचते हुए पकड़ा गया था। इस मामले में उसे 2013 में जमानत मिली थी। वह जमानत के बीच से ही फरार हो गया। तबसे उसकी तलाश थी।

सहनी के खिलाफ लूट, हत्या, फिरौती के लिए अपहरण, रंगदारी, गाँजा बेचने समेत 25 आपराधिक मामले दर्ज हैं। यह भी सामने आया है कि वह वर्तमान में मुजफ्फरपुर में अवैध शराब का कारोबार कर रहा था। उसने इसके लिए उसने गैंग बना रखा था। उसके गैंग में 50 से अधिक बदमाश थे। उसको ढूँढने के लिए पुलिस लम्बे समय से सक्रिय थी।

राम नरेश सहनी उर्फ ‘साहेबगंज का रावण’ लगातार अपना हुलिया और पता-ठिकाना भी बदलता रहता था। उसे कोर्ट ने भी भगोड़ा घोषित कर रखा था। इस इलाके में इतना खौफ था कि उसके विषय में कोई खुलकर नहीं बोलता था। उसने बिहार में शराबबंदी के बाद से अवैध शराब बेचनी शुरू कर दी और इससे काफी सम्पत्ति भी अर्जित की है।

दिल्ली पुलिस ने बताया है कि सहनी को पकड़ने के लिए 5 जनवरी 2024 को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एक टीम बिहार के मुजफ्फरपुर भेजी गई थी। दिल्ली पुलिस ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से मोतीपुर थाना क्षेत्र से उसे पकड़ा। सहनी से शुरुआती पूछताछ के बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया गया है।

सरकारी माल बाजार में बेचा: इमरान खान और बीवी बुशरा को 14 साल की जेल, करोड़ों का जुर्माना भी; चुनाव से 8 दिन पहले पूर्व PM की मुश्किलें और बढ़ी

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को एक अदालत ने तोशाखाना मामले में 14 साल जेल की सजा सुनाई है। दोनों पर ₹78-78 करोड़ का जुर्माना भी लगाया गया है। यह निर्णय पाकिस्तान में आम चुनावों से मात्र 8 दिन पहले आया है। इससे पहले 30 जनवरी 2024 को इमरान खान को साइफर मामले में 10 वर्ष की सजा सुनाई गई थी। अब जिस मामले में सजा सुनाई गई है वह सरकारी गिफ्ट की गड़बड़ियों से जुड़ा है।

यह निर्णय इस्लामाबाद की एक NAB (नेशनल अकाउंटीबिलिटी ब्यूरो) कोर्ट ने सुनाया। इमरान खान के साथ ही उनकी बीवी बुशरा को भी इस मामले में दोषी करार देते हुए सजा सुनाई गई है। दोनों अगले 10 वर्षों तक किसी भी सरकारी पद लेने पर रोक लगा दी गई है। बुशरा बीबी को भी इस मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले की सुनवाई के दौरान इमरान के वकीलों ने और समय माँगा जिसे अदालत ने नकार दिया।

गौरतलब है कि इमरान खान और उनकी बीवी को जिस मामले में आज सजा सुनाई गई है, वह उनके प्रधानमंत्री रहते हुए विदेशों से गिफ्ट प्राप्त करने का है। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में 108 गिफ्ट लिए, लेकिन उन्हें कोषागार (तोशाखाना) में नहीं जमा करवाया। इनमें से कुछ गिफ्ट बाजार में बेच दिए, जिससे कथित तौर पर इमरान दंपती को करीब 14 करोड़ रुपए मिले थे।

इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक ए इन्साफ पार्टी (PTI) ने कोर्ट के आदेश का विरोध किया है। इसे एक कंगारू कोर्ट का निर्णय बताया है और कहा है कि यह नवाज शरीफ के इशारे पर दिया गया फैसला है। PTI ने एक्स/ट्विटर पर लिखा, “2 दिन में पाकिस्तान में मौजूद हर कानून को पूरी तरीके से बर्बाद कर दिया गया है। इमरान खान और बुशरा बीबी को एक और फर्जी मुकदमे का सामना करना पड़ा है, जिसमें दोनों को खुद को बचाने का कोई अधिकार नहीं दिया गया। साइफर की तरह इस मामले का भी किसी ऊँची अदालत में टिकने का कोई आधार नहीं है। यह शर्मनाक है कि कानून को नजरअंदाज किया जा रहा है।”

इमरान खान को इससे पहले कल भी एक मामले में 10 वर्ष की सजा सुनाई गई थी। इस मामले में इमरान सरकार में विदेश मंत्री रहे शाह महमूद कुरैशी को भी 10 वर्ष की सजा सुनाई गई थी। यह मामला अमेरिका में मौजूद पाकिस्तान के राजदूत द्वारा भेजे गए एक नोट की जानकारियाँ सार्वजनिक करने को लेकर था। इससे पहले 5 अगस्त 2023 को भी इमरान खान को एक मामले में सजा सुनाई गई थी। इमरान वर्तमान में अडियाला जेल में बंद हैं।

गौरतलब है कि इमरान को सजा देने के निर्णय तब आए हैं, जब पाकिस्तान में आम चुनाव चल रहे हैं। 8 फरवरी को मतदान होना है। इन चुनावों में लड़ने से भी PTI को अप्रत्यक्ष तरीके से रोक दिया गया है। उसका चुनाव चिन्ह बैट छीन लिया गया है और उसके उम्मीदवारों को अब निर्दलीय बनकर लड़ना पड़ रहा है। इमरान के अलावा भी पार्टी के कई नेता जेलों में बंद हैं। इमरान की पार्टी इसे पाकिस्तानी फ़ौज की साजिश करार देती रही है।

नाबालिग दूल्हे, बाल-बच्चेदार दुल्हनें… 500+ महिलाओं की फर्जी शादी करा के सरकारी योजना में बंदरबाँट की थी साजिश, वीडियो के बाद एक्शन में प्रशासन

उत्तर प्रदेश के बलिया से एक ऐसा मामला सामने आया, जिसके बाद राज्य सरकार को कार्रवाई करनी पड़ी। असल में ‘मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना’ से गुरुवार (25 जनवरी, 2024) को 568 जोड़ों की शादी हुई। लेकिन, इसमें कुछ ऐसा हो गया जिस पर प्रशासन को हरकत में आना पड़ा। दूल्हे का अता-पता भी नहीं था और बड़ी संख्या में दुल्हनों को माला पहना दिया गया। इनमें से कई ऐसी महिलाएँ भी हैं, जिनकी शादी वर्षों पूर्व भी हो चुकी है।

वहीं इनमें कुछ ऐसी जोड़ियाँ भी थीं, जो आपस में भाई-बहन भी हैं। दिखावे के लिए उनकी भी फर्जी शादी करा दी गई। ये सब इसीलिए किया गया, ताकि फोटो-वीडियो के जरिए सिर्फ कागज पर दिखाया जा सके कि शादी हुई है और सरकार योजना के तहत आने वाले पैसों का बँटाधार हो। इस मामले में स्थानीय ADO समेत 9 लोगों पर FIR दर्ज कराई गई है। बता दें कि इस योजना के तहत गरीब कन्या को शादी के लिए राज्य सरकार की तरफ से 51,000 रुपए दिए जाते हैं।

इसी राशि में बंदरबाँट के लिए ये सब किया गया। इसके जो वीडियो सामने आए हैं, उसमें देखा जा सकता है कि जहाँ कुछ पुरुष कुछ महिलाओं को माला पहना रहे हैं वहीं कई ऐसी हैं जिनके गले में माला डली हुई है लेकिन उनके दूल्हे का कोई अता-पता नहीं है। नकली दूल्हे-दुल्हन वाले इस फैसले के बाद एक्शन में आए प्रशासन ने मामला दर्ज कर करवाया। घटना मनियार नगर पंचायत की है। शादी में आई कई महिलाएँ बाल-बच्चेदार भी थीं।

इस समारोह को देखने आए कुछ नाबालिग लड़कों को भी दूल्हा बना कर बिठा दिया गया। उन्हें इसके लिए 2-3 हजार रुपयों का लालच दिया गया था। इन नाबालिग फर्जी दूल्हों को अपना चेहरा गमछे से छिपाते हुए भी देखा जा सकता है। बलिया के CDO ओजस्वी राज ने बताया कि लाभार्थियों के लिए भेजी गई राशि रोक दी गई है। जाँच के लिए 20 सदस्यीय टीम गठित की गई है। बाँसडीह के भाजपा विधायक केतकी सिंह ने भी कार्रवाई की माँग की है।

₹15000 दो, तार के नीचे से भारत में घुसो: अजमेर के दरगाह क्षेत्र से पकड़े गए भाई-बहन, बांग्लादेश से घुसपैठ का मॉडल आया सामने

बांग्लादेश से भारत में अवैध रूप से घुसने का सिलसिला जारी है। बांग्लादेशी सिर्फ 15 हजार रुपए देकर भारत में एंट्री पा लेते हैं और फिर फर्जी दस्तावेज के सहारे पहचान बदलकर यहाँ बस जाते हैं और काम-धंधा करते रहते हैं। हालाँकि, अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ सरकार लगातार अभियान चला रही है। ऐसे ही एक मामले में राजस्थान के अजमेर से पुलिस ने एक बांग्लादेशी भाई-बहन को गिरफ्तार किया है।

ये दोनों भाई-बहन अजमेर के दरगाह क्षेत्र में फर्जी पहचान पत्र बनाकर किराए पर रह रहे थे। ये दोनों दूसरी बार भारत में घुसे थे। इनके पास से फर्जी आधार कार्ड मिला है। इसमें दोनों को पश्चिम बंगाल के चौबीस परगना इलाके का निवासी बताया गया है। दोनों करीब दो महीने से अजमेर में रहकर कपड़ों का कारोबार कर रहे थे। सीआईडी ने शक के आधार पर इन्हें गिरफ्तार किया है।

युवती महमूदा अख्तर पहले दो बार वीजा लेकर भारत आ चुकी है। उस दौरान महमूदा ने हैदराबाद, कलकत्ता, अजमेर सहित भारत के अलग-अलग जगहों पर घूम-घूमकर काम किया था। हालाँकि, जब कोविड का प्रकोप फैला तो वह वापस बांग्लादेश लौट गई थी। महमूदा ने पुलिस को बताया कि इस बार वीजा नहीं मिला तो वह एजेंटों के जरिए अवैध रूप से भारत में घुस आई। 

महज 15 हजार में एंट्री!

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजस्थान पुलिस की गिरफ्त में आए बांग्लादेशी भाई-बहन के नाम नाहिद हुसैन (21) और महमूदा अख्तर (30) हैं। ये बांग्लादेश के मुंशीगंज जिले के रहने वाले हैं। बांग्लादेश की राजधानी ढाका से सटे मुंशीगंज जिले में कामकाज की कमी को देखते हुए दोनों भाई-बहन ने भारत में आने की योजना बनाई थी। दोनों दो माह से अजमेर में रह रहे थे।

पुलिस से पूछताछ में उन्होंने बताया है कि सिर्फ 15 हजार रुपए में बांग्लादेश के लोगों को भारत में एंट्री मिल जाती है। ये कोई मुश्किल काम नहीं है। उनका कहना है कि बॉर्डर पर भारत और बांग्लादेश के लोग मिले हुए होते हैं। बॉर्डर इलाके में कई दलाल सक्रिय हैं, जो रुपए लेकर बॉर्डर पार कराने का काम करते हैं। 

बाड़ के नीचे से मिलती है एंट्री

बांग्लादेशी घुसपैठियों ने बताया कि उन्हें बाड़ के नीचे से एंट्री मिल जाती है। ऐसा किसी एजेंट के जरिए ही किया जाता है। भारत में आने के बाद वो फर्जी कागज और पहचान पत्रों के दम पर अपनी आगे की जिंदगी जीते हैं। दोनों ने बताया कि लॉकडाउन से पहले भी वे भारत में ही थे। इस बार वो दूसरी बार भारत आए हैं।

दोनों भाई-बहन अजमेर के नाला बाजार में किराए पर कमरा लेकर रहते थे। दोनों ने नाम भी बदल लिया था। इस तरह सुरक्षा एजेंसियों की आँखों में धूल झोंक कर दोनों भाई-बहन अजमेर में रहकर बिजनेस कर रहे थे। हालाँकि, उनकी पोल खुल गई और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उन्हें अलवर स्थित डिडक्शन सेंटर पर भेज दिया है।

अजमेर बना हुआ है घुसपैठियों का अड्डा

बता दें कि अजमेर के भाजपा नेताओं और पदाधिकारियों ने कई बार जिला पुलिस और इंटेलिजेंस को दरगाह के साथ ही अजमेर के अलग-अलग इलाकों में बांग्लादेशियों के अवैध रूप से रहने की शिकायत दर्ज कराई थी। हालाँकि, कॉन्ग्रेस सरकार की तुष्टिकरण की नीतियों के कारण इन पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। अब सरकार बदलते ही कार्रवाई शुरू हो गई।

माना जाता है कि राजस्थान के अजमेर में अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों की एक बड़ी संख्या है। पिछले कई सालों में यहाँ कई बांग्लादेशी घुसपैठिए गिरफ्तार किए गए हैं। इस समस्या को देखते हुए राजस्थान सरकार ने पुलिस उपाधीक्षक गौरी शंकर को नोडल अधिकारी बनाया गया है। उन पर बांग्लादेशियों को योजनाबद्ध तरीके से दबोचने का जिम्मा दिया गया है।

अब ज्ञानवापी में भी करिए पूजा-पाठ: कोर्ट ने व्यास तहखाने में दिया पूजा का अधिकार, कहा – 7 दिन में करो व्यवस्था; मुलायम ने लगाई थी रोक

वाराणसी स्थित ज्ञानवापी ढाँचे के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बुधवार (31 जनवरी, 2024) को ‘अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमिटी’ को नोटिस जारी किया है। असल में हिन्दू पक्ष ने उस क्षेत्र के वैज्ञानिक सर्वे की माँग की थी, जिसे मुस्लिम वजूखाना बताते हैं लेकिन वहाँ शिवलिंग मिला था। इसी पर हाईकोर्ट ने वजूखाना से जवाब माँगा था। उधर ज्ञानवापी के व्यास तहखाने में पूजा-पाठ की अनुमति हिन्दुओं को मिल गई है। वाराणसी की जिला अदालत ने ये फैसला सुनाया है।

जिला प्रशासन को आदेश दिया गया है कि बैरिकेडिंग लगाया जाए और और एक सप्ताह के भीतर पूजा-पाठ की व्यवस्था की जाए। ये तहखाना ढाँचे के नीचे है। मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद बताता है। अब यहाँ नियमित पूजा-अर्चना के लिए मार्ग प्रशस्त हो गया है। हिन्दू पक्ष ने इसे बड़ी जीत करार दिया है। बता दें कि नवंबर 1993 तक पूजा होती थी। मुलायम सिंह यादव की सरकार ने पूजा-पाठ पर रोक लगा दी थी। शैलेन्द्र कुमार पाठक ने इस संबंध में याचिका दाखिल की थी, जिस पर अब फैसला आया है।

वहीं मुस्लिम पक्ष इस मामले में ‘वर्शिप एक्ट’ का हवाला देते हुए कह रहा था कि पूजा-पाठ की अनुमति यहाँ नहीं दी जा सकती है। लेकिन, कोर्ट ने हिन्दू पक्ष की याचिका स्वीकार कर ली। 17 जनवरी को ही ‘व्यास तहखाने’ को जिला प्रशासन ने अपने नियंत्रण में ले लिया था। ASI ने यहाँ सर्वे किया था, साथ ही साफ़-सफाई भी की गई थी। इसे ‘व्यास तहखाना’ कहा जाता है, क्योंकि सोमनाथ व्यास नामक पुजारी और उनका परिवार यहाँ 1993 तक पूजा-अर्चना करता आ रहा था।

हिन्दू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि जिला प्रशासन व्यवस्था करेगा, वहाँ पूजा-पाठ शुरू हो जाएगी। इस फैसले के बाद ‘हर-हर महादेव’ के नारे भी लगे। उन्होंने इस घटना की तुलना 1986 के उस आदेश से की, जब केएम पांडेय ने यहाँ का ताला खुलवाया था। उन्होंने कहा कि वजूखाने का सर्वे अगला लक्ष्य है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद लोगों में उम्मीद जगी है कि काशी विश्वनाथ में भी उन्हें जीत मिलेगी।

‘राहुल चोर है, मुँह छिपा के चल दिए, सामने कहाँ आए… हम लोग ‘गोस्सा’ हो गए उनसे’: रोती महिला कार्यकर्ता ने पूछा, काहे चले गए, कैसे जुटेगा भारत?

राहुल गाँधी की न्याय यात्रा कॉन्ग्रेस पार्टी और खुद उनके लिए पनौती बनती जा रही है। यात्रा के दौरान राहुल गाँधी के काफिले की गाड़ी का शीशा तो टूट ही, उनके सहयोगी भी साथ छोड़ रहे हैं। अब कार्यकर्ता भी काफी गुस्से में हैं। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता ही राहुल गाँधी को चोर बोल रहे हैं। यही नहीं, मंच से कार्यकर्ता सामूहिक इस्तीफे भी दे रहे हैं। जिस न्याय यात्रा पर राहुल गाँधी को इतना भरोसा था कि उन्हें राजनीतिक फायदा मिलेगा, वो न्याय यात्रा उनके लिए पनौती बनती जा रही है।

राहुल गाँधी की न्याय यात्रा बिहार के कटिहार में पहुँची उनसे मिलने की आस लगाकर बैठे कार्यकर्ताओं को मायूसी ही हाथ लगी। ये मायूसी गुस्से में बदल गई। वही कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ता राहुल गाँधी को चोर कह दे रहे हैं। पार्टी के पदाधिकारी तक कॉन्ग्रेस से नाराज हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में उनकी मायूसी और उनका गुस्सा साफ झलकता है। इसका एक वीडियो भी सामने आया है। इस वीडियो में एक महिला कहती है, “राहुल चोर है। चोर नहीं तो और क्या? मुँह छिपाकर चले गए। सामने कहाँ आए। सामने आते तब न जानते कि सामने आते।”

एक अन्य कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ता ने कहा, “हम सारे कार्यकर्ता रात भर जग करके, रात-दिन एक करके राहुल जी के दीदार के लिए बेचैन थे। एक महिला रो रही थी। उसकी भी आवाज उन तक नहीं पहुँची। तारिक अनवर यहाँ से सांसद का चुनाव लड़ते हैं, शकील साहब हैं। तौकीर जी हैं। तमाम लोगों के रहते हुए भी जब कार्यकर्ता का ही मान-सम्मान नहीं है तो कैसे जुटेगा भारत। पहले कार्यकर्ताओं को सम्मान दें। हम लोग बहुत मायूस हैं। जो पॉकेट से पार्टी को चलाने का काम करते हैं, वैसे लोगों को मैं कहना चाहता हूँ कि जनता और कार्यकर्ता से अगर नेता को दूर कीजिएगा तो उसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ेगा।”

एक अन्य महिला ने कहा, “राहुल गाँधी कहते हैं कि महिला के लिए ये करेंगे… वो करेंगे… क्या करेंगे? हम लोग रात से मेहनत कर रहे थे। झाड़ू मार रहे थे। सोच रहे थे कि सर आएँगे तो मुलाकात करेंगे। यहाँ से काफिला गुजरा तो हमलोगों से बात तक नहीं किया। हम लोग गुस्सा हो गए हैं।”

बता दें कि राहुल गाँधी की न्याय यात्रा असम से गुजरी तो पार्टी के कई नेता एक साथ पार्टी से निकल लिए। यात्रा पश्चिम बंगाल पहुँचती, तभी ममता बनर्जी ने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। वो पश्चिम बंगाल को पार करके बिहार पहुँचने पहले ही इंडी गठबंधन बनाने वाले नीतीश कुमार ने साथ छोड़ दिया। जिस महागठबंधन की तर्ज पर इंडी गठबंधन को बनाया गया था, वो भी धराशायी हो गया। पंजाब में आम आदमी पार्टी पहले ही ऐलान कर चुकी है कि कॉन्ग्रेस को यहाँ कुछ नहीं मिलेगा और रही-सही कसर अब कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ताओं का गुस्सा पूरा कर दे रहा है।

राहुल गाँधी के काफिले की गाड़ी का शीशा टूटा

खबर है कि बिहार के कटिहार में राहुल गाँधी के काफिले में चल रही एक गाड़ी का शीशा टूट गया, जिससे अफरा-तफरी की नौबत आ गई। पश्चिम बंगाल से होकर बिहार में यात्रा कर रहे राहुल गाँधी बुधवार को फिर से पश्चिम बंगाल चले गए, लेकिन उससे पहले कटिहार में यह घटना हो गई। जिस समय ये घटना हुई, उस समय उनका काफिला डीएस कॉलेज के पास से गुजर रहा था।

कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने एक्स पर लिखा, “ग़लत खबर का स्पष्टीकरण ज़रूरी है। राहुल जी से मिलने अपार जनसमूह आया हुआ था। एक महिला उनसे मिलने के लिए जब एकदम से आगे आ गई, तब कार को अचानक रोकना पड़ा। सुरक्षा घेरे में इस्तेमाल किए जाने वाले रस्से से कार की विंडशील्ड टूट गई। राहुल जी न्याय की लड़ाई मुस्तैदी से लड़ रहे हैं और यह देश ना सिर्फ उनके साथ खड़ा है, बल्कि उनको सुरक्षित भी रखे रहेगा। ?”

दरअसल, कटिहार में रोड शो के दौरान शहीद चौक पर स्थित महात्मा गाँधी के प्रतिमा पर बिना माल्यार्पण किए ही राहुल गाँधी आगे बढ़ गए। वहाँ राहुल गाँधी बस से उतरकर अपनी काले रंग की एक्सयूवी के ऊपर सवार होकर आगे बढ़े। डीएस कॉलेज चौक के समीप युवा कार्यकर्ता मंच सजाकर राहुल गाँधी का इंतजार कर रहे थे।

मंच से युवा कार्यकर्ता इजहार अली, निक्कू सिंह सहित सैकड़ों महिला और पुरुष कार्यकर्ता राहुल गाँधी को माइक से आवाज लगाकर बुलाते रह गए। हालाँकि, राहुल गाँधी वहाँ नहीं रूके और ना ही मंच पर आए। इस बात से कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता काफी नाराज हो गए। राहुल गाँधी के लिए जिस मंच को सजाया गया था, उसी मंच से दर्जनों कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया।

वैसे, राहुल गाँधी कितनी मुस्तैदी से न्याय यात्रा पूरी कर रहे हैं, वो दिख भी रहा है। असम में पूर्व महिला विधायक के ब्लॉउज पर कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ता मजे ले रहे हैं तो उत्पीड़न के दोषी लोग यूथ कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष पद पर निडर होकर जमे बैठे हैं। भले ही इसके लिए कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ताओं-नेताओं को पार्टी छोड़नी पड़ रही है।

बैंक अकाउंट में ₹41, ठाठ लूटे लग्जरी: दिल्ली के होटल को महिला ने लगाया 6 लाख का चूना, ₹2 लाख के स्पा का भी लिया मजा

दिल्ली के एक लग्जरी होटल से फर्जीवाड़े के आरोप में आंध्र प्रदेश की एक महिला को गिरफ्तार किया गया है। महिला ने 15 दिन तक होटल के स्टाफ को बेवकूफ बनाया और सभी सुविधाओं का लाभ लेती रही। जब पुलिस ने उसकी जाँच की तो पता चला कि उसके खाते में मात्र 41 रुपए हैं।

जानकारी के अनुसार, आंध्र प्रदेश की रहने वाली महिला झाँसी रानी सैमुअल ने दिल्ली के एरोसिटी स्थित पुलमैन होटल में 13 दिसम्बर 2023 को एक कमरा लिया। उसने यह कमरा लेने के लिए एक फर्जी पहचान-पत्र दिखाया, जिस पर ईशा दवे नाम लिखा हुआ था। वह इस कमरे में 15 दिन तक रुकी रही।

इस दौरान वह होटल में मौजूद स्पा जैसी लग्जरी सुविधाओं का भी लाभ उठाती रही। उसने यहाँ ₹2.11 लाख की स्पा सुविधाओं का लाभ लिया। इस होटल में उसका कुल बिल लगभग ₹6 लाख पहुँच गया। इस दौरान जब भी उससे पैसे माँगे गए तो उसने ICICI बैंक के एप में भुगतान दिखा दिया।

होटल स्टाफ ने जब बाद में जाँच की तो पता चला कि उनके खाते में कोई पैसा नहीं आया है। इसके बाद उन्होंने इस महिला से पूरी जानकारी ली और शक होने पर पुलिस बुलाई। इसके बाद पता चला कि महिला जिस एप से भुगतान दिखा रही थी, वह फर्जी था।

जब पुलिस ने महिला को गिरफ्तार किया तो सामने आया कि उसके खाते में मात्र ₹41 थे। उसने पुलिस को बताया कि वह एक डॉक्टर है और उसका अमेरिका के न्यूयॉर्क में रहने वाला पति भी डॉक्टर है। पुलिस उसकी असली पहचान का पता लगा रही है।

महिला 13 जनवरी 2024 से पुलिस की गिरफ्त में है। बताया जा रहा है कि जाँच में वह दिल्ली पुलिस के साथ कोई सहयोग नहीं कर रही है। उससे पुलिस ने उसकी बैंक की जानकारी दिखाने को भी कहा, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उसके बारे में पता लगाने के लिए आंध्र प्रदेश पुलिस से मदद माँगी है। उनसे आरोपित महिला के परिवार या उसके पति के बारे में जानकारी माँगी है।

गौरतलब है कि आरोपित महिला जिस होटल में रुकी थी, वह दिल्ली एयरपोर्ट के पास स्थित एक लग्जरी होटल है। यहाँ पर सामान्य तौर पर एक दिन का किराया लगभग ₹20,000 रहता है। इस होटल में स्पा और जिम जैसी महँगी सुविधाएँ भी उपलब्ध होती हैं।

‘माफ़ी माँगो या सोसाइटी छोड़ कर जाओ’: राम मंदिर के खिलाफ अनशन करने वाली मणिशंकर अय्यर की बेटी को RWA का नोटिस, कहा – घृणा मत फैलाओ, हमारा नाम खराब हो रहा

कॉन्ग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर की बेटी सुरन्या ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के विरोध में अनशन रखा था, जिसके बाद अब वो मुसीबतों में घिर गई हैं। उन्होंने 3 दिनों का अनशन किया था और सनातन धर्म के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किए थे। अब वो जहाँ रहती हैं उसी सोसाइटी ने उनका विरोध किया है। सोसाइटी ने उन्हें पत्र लिख कर कहा कि या तो वो अपनी हरकत के लिए माफ़ी माँगें, या फिर सोसाइटी छोड़ कर चली जाएँ। सरन्या अय्यर दिल्ली के जंगपुरा इलाके में रहती हैं।

हालाँकि, सुरन्या अय्यर ने फेसबुक पर सफाई देते हुए कहा है कि जिस रेसिडेंट्स वेलफेयर सोसाइटी (RWA)’ की बात हो रही है, वहाँ वो रहती ही नहीं हैं। साथ ही उन्होंने मीडिया से बात न करने का ऐलान करते हुए कहा कि मीडिया भारत में और विदेश में ज़हर व भ्रम फैलाने में लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि वो पिछले 50 वर्षों से विभिन्न राजनीतिक दृष्टिकोणों के बीच पली-बढ़ी हैं, और एक्टिविज्म किया है। उन्होंने कहा कि वो सोशल मीडिया के माध्यम से ही अपनी बात रखेंगी।

इससे पहले मणिशंकर अय्यर की बेटी ने एक तस्वीर शेयर की थी, जिसमें उनकी माँ उन्हें शहद पिला कर उनका अनशन तुड़वाते हुए दिख रही हैं। इससे सोसाइटी के लोगों में नाराज़गी का माहौल पनप आया। लोग कह रहे हैं कि कॉन्ग्रेस नेता की बेटी माफ़ी माँगे। कुछ दिनों पहले मणिशंकर अय्यर की दूसरी बेटी यामिनी से जुड़े थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (CPR)’ का अवैध गतिविधियों में लिप्त रहने के कारण केंद्रीय गृह मंत्रालय ने FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया था।

RWA सुरन्या अय्यर को भेजे गए पत्र में कहा है कि वहाँ के सभी बाशिंदे शांति से रहें और उनकी भावनाओं को ठेस न पहुँचे, ये ध्यान रखना उनकी जिम्मेदारी है। RWA ने सुरन्या अय्यर के फेसबुक पोस्ट की निंदा करते हुए कहा कि सुरन्या अय्यर को पता होना चाहिए कि ये मंदिर 500 वर्षों के संघर्ष के बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा 5-0 से दिए गए फैसले के बाद बन रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों के बीच अविश्वास और घृणा नहीं फैलाया जाना चाहिए, इससे कॉलोनी का नाम खराब हो रहा है।

इससे पहले अनशन की सूचना देते हुए फेसबुक पर सुरन्या ने लिखा था, “दिल्ली सल्तनत ने भी भारत को बेशकीमती चीजें दी हैं, क्योंकि सूफी और अमीर खुसरो के अब्बा उनके साथ ही आए थे। उत्तर भारत की भाषा और संस्कृति खुसरो की एहसानमंद है। मुग़ल यहाँ मुस्लिमों को ही हरा कर आए थे। बाबर ने पंजाब में दौलत खान और दिल्ली में इब्राहिम लोदी को हराया। मुगलों ने राजपूतों के साथ वैवाहिक संबंध बनाए। मुगलों की नीति मंदिर तोड़ने की नहीं थी, उन्होंने तो मंदिर बनवाए। झूठ, हिंसा, द्वेष और प्रतिशोध पर बने मंदिर पर कोई कैसे ख़ुशी बना सकता है?”

‘बचपन से सुन रही गरीबी हटाओ का नारा, अब साकार होते देखा’: संसद में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राम मंदिर का भी किया जिक्र, बजट सत्र शुरू

लोकसभा चुनाव 2024 से पहले बुधवार (31 जनवरी 2024) को संसद के आखिरी बजट सत्र की शुरुआत हो गई। सत्र की शुरुआत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दोनों सदनों को संबोधित किया और सरकार के कामों को संसद को बताया। राष्ट्रपति ने कहा, “हमने बचपन से गरीबी हटाओ का नारा सुना था, लेकिन अब इसे साकार होते देख रहे हैं।” अगले दिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को अंतरिम बजट पेश करेंगी।

अपने अभिभाषण में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि नए सदन में यह उनका पहला संबोधन है। उन्होंने कहा, “आज़ादी के अमृतकाल की शुरुआत में यह भव्य भवन बना है। यहाँ एक भारत श्रेष्ठ भारत की महक भी है। भारत की सभ्यता और संस्कृति की चेतना भी है। इसमें हमारी लोकतांत्रिक और संसदीय परंपराओं के सम्मान का प्रण भी है। आजादी के अमृतकाल उत्सव के दौरान मेरी माटी मेरा देश अभियान के तहत गाँवों की मिट्टी की अमृत कलश यात्रा निकाली गईं।”

राष्ट्रपति ने आगे कहा, “सत्तर हजार अमृत सरोवर बनाए हैं। दो करोड़ से ज्यादा पेड़ लगवाए। कर्त्तव्यपथ को नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रतिमा स्थापित की गई। पीएम स्मारक खोला गया है। तमाम संकटों के बीच भारत एक अग्रणी अर्थव्यवस्था बन गया है। भारत चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर झंडा फहराने वाला दुनिया का पहला देश बन गया। हमने अनुच्छेद 370 हटा दिया। हमने बचपन से गरीबी हटाओ का नारा सुना था, अब हम इसे साकार होते देख रहे हैं।”

आजादी के अमृत महोत्सव में हुए अभूतपूर्व काम

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, “यह हमारे संविधान के लागू होने का भी 75वाँ वर्ष है। इसी कालखंड में आजादी के 75 वर्ष का उत्सव, अमृत महोत्सव भी संपन्न हुआ है। इस दौरान देश भर में अनेक कार्यक्रम हुए। देश ने अपने गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया। 75 साल बाद युवा पीढ़ी ने फिर स्वतन्त्रता संग्राम के उस कालखंड को जिया।” राष्ट्रपति ने कहा, “इस उत्सव के दौरान 2 लाख से ज्यादा शिला-फलकम स्थापित किए गए। 3 करोड़ से ज्यादा लोगों ने पंच प्राण की शपथ ली।”

उन्होंने आगे कहा, ” 70 हजार से ज्यादा अमृत सरोवर बने। 2 लाख से ज्यादा अमृत वाटिकाओं का निर्माण हुआ। 16 करोड़ से ज्यादा लोगों ने तिरंगे के साथ सेल्फी अपलोड की। शांति निकेतन और होयसला मंदिर वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल हुए। साहिबज़ादों की याद में वीर बाल दिवस घोषित हुआ। भगवान बिरसा मुंडा के जन्म दिवस को जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया गया। विभाजन की विभीषिका को याद करते हुए 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस घोषित किया गया।”

सरकार ने किए कई अहम बदलाव

राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में सरकार द्वारा लाए गए महत्वपूर्ण विधेयकों के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, “बीते 12 महीनों में मेरी सरकार अनेक महत्वपूर्ण विधेयक लेकर भी आई। ये विधेयक, आप सभी संसद सदस्यों के सहयोग से आज कानून बन चुके हैं। ये ऐसे कानून हैं जो विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि के मजबूत आधार हैं। 3 दशक बाद नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित करने के लिए मैं आपकी सराहना करती हूँ। इससे लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं की ज्यादा भागीदारी सुनिश्चित हुई है। यह वीमेन लेड डेवलपमेंट के मेरी सरकार के संकल्प को मजबूत करता है। रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के अपने कमिटमेंट को मेरी सरकार ने लगातार जारी रखा है।”

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, “सभ्यताओं के कालखंड में ऐसे पड़ाव आते हैं, जो सदियों का भविष्य तय करते हैं। भारत के इतिहास में भी ऐसे अनेक पड़ाव आए हैं। इस वर्ष 22 जनवरी 2024 को भी देश ऐसे ही एक पड़ाव का साक्षी बना है। सदियों की प्रतीक्षा के बाद अयोध्या में रामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान हो गए हैं। ये करोड़ों देशवासियों की आस्था है।” इस दौरान सांसदों ने सदन की मेज थपथपाकर स्वागत किया।

राष्ट्रपति बोलीं- 10 वर्ष की साधना का विस्तार हैं ये उपलब्धियाँ

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, “ये उपलब्धियाँ जो आज दिख रही हैं, वे बीते 10 वर्षों की साधना का विस्तार हैं। हम सभी बचपन से गरीबी हटाओ के नारे सुनते आ रहे थे। अब हम जीवन में पहली बार बड़े पैमाने पर गरीबी को दूर होते देख रहे हैं। नीति आयोग के अनुसार, मेरी सरकार के एक दशक के कार्यकाल में करीब 25 करोड़ देशवासी गरीबी से बाहर निकले हैं। यह प्रत्येक गरीब में नया विश्वास जगाने वाली बात है। जब 25 करोड़ लोगों की गरीबी दूर हो सकती है तो उसकी भी गरीबी दूर हो सकती है। आज अर्थव्यवस्था के विभिन्न आयामों को देखें तो यह विश्वास बढ़ता है कि भारत सही दिशा में है तथा सही निर्णय लेते हुए आगे बढ़ रहा है।”

डिजिटल इंडिया से जीवन और बिजनेस दोनों हुए आसान

अपने अभिभाषण में राष्ट्रपति ने लगभग प्रत्येक मुद्दे को जगह दी। उन्होंने कहा, “मेरी सरकार का एक और बड़ा रिफॉर्म, डिजिटल इंडिया का निर्माण है। डिजिटल इंडिया ने भारत में जीवन और बिजनेस, दोनों को बहुत आसान बना दिया है। आज पूरी दुनिया मानती है कि यह भारत की बहुत बड़ी उपलब्धि है। विकसित देशों में भी भारत जैसा डिजिटल सिस्टम नहीं है। गाँवों में भी सामान्य खरीद-बिक्री डिजिटल तरीके से होगी, यह कुछ लोगों की कल्पना से भी परे था। आज दुनिया के कुल रियल टाइम डिजिटल लेनदेन का 46 प्रतिशत भारत में होता है। पिछले महीने UPI से रिकॉर्ड 1200 करोड़ ट्रांजेक्शन हुए। इसके तहत 18 लाख करोड़ रुपए का रिकॉर्ड लेनदेन हुआ है।”

बता दें कि लोकसभा चुनाव 2024 से पहले इस सरकार का ये आखिरी बजट सत्र है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2024 को सरकार का अंतरिम बजट पेश करेंगी। चूँकि कुछ समय बाद ही लोकसभा चुनाव हैं, ऐसे में पूर्ण बजट नहीं पेश होगा। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर दोनों सदनों में 2 फरवरी 2024 से चर्चा शुरू होगी। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 फरवरी 2024 को दोपहर 2 बजे राज्यसभा में चर्चा का जवाब देंगे।