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‘नापाक औरत से बच गया तू’: सिंगर हिमांशी खुराना से ‘अलग धर्म’ के कारण आसिम रियाज का ब्रेकअप, कट्टरपंथी दिखा रहे नफरत

बिग बॉस 13 शो के दौरान एक दूसरे के साथ रिलेशनशिप में आने वाले आसिम रियाज और हिमांशी खुराना का ब्रेकअप हो गया है। इस संबंध में उन्होंने खुद सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी। हिमांशी खुराना ने बताया कि एक दूसरे के धर्म का सम्मान करते हुए वह दोनों एक दूसरे से अलग हो गए है। उनके इस पोस्ट के बाद आसिम के फैंस उन्हें ट्रोल करने में लगे हैं।

हिमांशी ने अपने सोशल मीडिया अकॉउंट एक्स पर एक पोस्ट डालते हुए बताया-

“हाँ, हम लोग अब साथ में नहीं हैं। जितना भी हमने साथ में समय बताया वो बहुत बढ़िया था लेकिन अब हमारा साथ खत्म हो गया है। हमारा सफर बहुत बढ़िया था और अब हम जीवन में आगे बढ़ रहे हैं। अपने अलग-अलग धर्मों का सम्मान करते हुए अपनी धार्मिक मान्यताओं के मद्देनजर हम अपना प्रेम कुर्बान कर रहे हैं। हमारे मन में एक दूसरे के खिलाफ कुछ नहीं है। आपसे अनुरोध है हमारी निजता का सम्मान करें।”

हिमांशी ने अपने एक और पोस्ट में लिखा है कि उन दोनों ने बहुत कोशिश की लेकिन उनको कोई हल नहीं मिला। वह लिखती हैं, “हमने प्रयास किया… पर हमें हमारी जिंदगी के लिए कोई समाधान नहीं मिला… आप एक दूसरे को प्यार करते हो लेकिन किस्मत आपका खुशी से साथ नहीं देती… कोई नफरत नहीं है बस प्यार है…. इसे परिपक्व निर्णय कहते हैं।”

हिमांशी खुराना ने जहाँ आसिम के साथ अपने ब्रेक पर दो पोस्ट डाले हैं वहीं आसिम रियाज का अभी तक इस मुद्दे पर कोई रिएक्शन नहीं आया है। हिमांशी के पोस्ट देखने के बाद आसिम के फैंस उन्हें खरी खोटी सुना रहे हैं।

मोइन खान ने लिखा- आंटी जब आपने 4 साल पहले प्यार किया जब नहीं लगा था आपको धर्म का… अब फेम मिल गया तो अलग मजहबों का टैग लगा दिया।

मोहम्मद अजीम ने लिखा- बहुत सही किया आसिम, नापाक औरत से बच गया मेरा भाई।

बता दें कि हिमांशी खुराना एक पंजाबी सिख परिवार से हैं जबकि आसिम रियाज कश्मीरी मुस्लिम। दोनों की मुलाकाता बिग बॉस में हुई थी। आसिम को वहीं हिमांशी पसंद आ गई थीं और आसिम के लिए हिमांशी ने अपना पुराना BF तक छोड़ दिया था। बिग बॉस से निकलने के बाद दोनों के साथ में कई गाने भी आए। मगर अब धर्म को वजह बताकर दोनों ने रास्ते अलग कर लिए हैं।

‘महंत बालकनाथ CM, किरोड़ीलाल मीणा और दीया कुमारी डिप्टी CM’: BJP के नाम से सोशल मीडिया में वायरल प्रेस नोट की जानिए हकीकत

हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में शानदार जीत हासिल की है। अब लोग इन राज्यों के अगले मुख्यमंत्री का नाम जानने को उत्सुक है। इसी बीच सोशल मीडिया में बीजेपी के नाम से एक प्रेस नोट वायरल हुआ है जिसके अनुसार महंत बालकनाथ योगी राजस्थान के अगले मुख्यमंत्री होंगे।

इस प्रेस नोट में किरोड़ी लाल मीणा और दीया कुमारी के नाम के आगे उप मुख्यमंत्री लिखा हुआ है। इस प्रेस नोट पर भारतीय जनता पार्टी का नाम है। उसका कमल निशान है। उसके केंद्रीय कार्यालय का पता लिखा हुआ है। 6 दिसंबर 2023 की तारीख के साथ जारी प्रेस नोट पर बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और मुख्यालय प्रभारी के तौर पर अरुण सिंह का नाम और हस्ताक्षर है।

इस प्रेस नोट को सोशल मीडिया में कई हैंडल से शेयर किया गया है। @neetenbiswas1 (सुल्तानपुर टाइम्स) नाम के X हैंडल ने शाम 6:33 पर इसे शेयर करते हुए लिखा है, “राजस्थान के मुख्यमंत्री महंत बालकनाथ योगी।”

वेरिफाइड हैंडल वाली रौनक चौधरी ने भी इसे अपने X हैंडल पर शेयर किया है। साथ ही उन्होंने नेटिज़ेंस से इसकी सच्चाई पूछी है।

अशरफ ने भी इसी पत्र को शेयर किया है। उसने लिखा है, “राजस्थान के मुख्यमंत्री बाबा बालकनाथ, उपमुख्यमंत्री किरोड़ीलाल मीना, उपमुख्यमंत्री दीयाकुमारी।”

बताते चलें कि महंत बालकनाथ योगी राजस्थान की तिजारा विधानसभा सीट से जीत कर विधायक बने हैं। वे अलवर से सांसद भी हैं। विधानसभा चुनाव में उन्हें कुल 110209 वोट मिले हैं। वहीं उनके निटकतम प्रतिद्वंदी कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रत्याशी इमरान खान को 104036 वोट मिले हैं।

वहीं दीया कुमारी विद्याधर नगर विधानसभा सीट से निर्वाचित हुईं हैं। यह इस विधानसभा चुनाव में राजस्थान में सबसे बड़ी जीत है। दीया कुमारी को कुल 158516 वोट मिले। यहाँ दीया कुमारी का मुकाबला कॉन्ग्रेस के सीताराम अग्रवाल से हुआ, जिन्हें कुल 89780 वोट ही मिल पाए। दीया कुमारी भी भारतीय जनता पार्टी से वर्तमान में राजसमंद से लोकसभा सांसद हैं। वहीं डॉ. किरोणी लाल मीणा राजस्थान की सवाई माधोपुर विधानसभा सीट से जीत कर विधायक बने हैं। उन्होंने यहाँ कॉन्ग्रेस के दानिश अबरार को 22510 वोटों से हराया है। डॉ. मीणा भी भाजपा के राज्यसभा सांसद हैं।

बताते चलें कि इस बार विधानसभा चुनाव में कई सांसदों को बीजेपी ने मैदान में उतारा था। इनमें से 12 चुनाव जीतने में कामयाब रहे हैं। चुनाव जीत कर आए इन सांसदों में से 11 ने बुधवार (6 दिसंबर, 2023) को संसद की सदस्य्ता से इस्तीफा दे दिया है। इनमें दीया कुमारी और डॉ. किरोड़ी लाल मीणा शामिल हैं। महंत बालकनाथ ने फिलहाल संसद सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया है। पर जल्द ही उनके इस्तीफे की भी चर्चा है।

भाजपा ने लिस्ट को बताया फर्जी

इस्तीफे के बाद ही यह प्रेस नोट वायरल हुआ। बालकनाथ को शुरुआत से ही सीएम की रेस में बताया जा रहा है। लेकिन राजस्थान बीजेपी ने अपने आधिकारिक X/ ट्विटर हैंडल से पोस्ट कर इस प्रेस नोट को फेक बताया है।

स्पष्ट है कि बीजेपी ने राजस्थान के अगले मुख्यमंत्री कौन होंगे इसका अभी तक कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया है। न ही इस बात का फैसला किया है कि राज्य में उपमुख्यमंत्री होंगे या नहीं।

मौलवी ने मजार पर बुला कबूल करवाया इस्लाम, पीड़िता का दावा- एक बेटी से रेप किया, अब दूसरी बेटी माँग रहे: विरोध करने पर थूक चटवाया

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में एक हिन्दू परिवार के सामूहिक धर्मान्तरण का मामला सामने आया है। आरोप एक मजार पर रहने वाले मौलवी और उसके परिवार के अन्य सदस्यों पर लगा है। पीड़िता का आरोप है कि आरोपितों ने न सिर्फ उनकी बेटी के साथ रेप किया, बल्कि खुद उसके साथ भी अश्लील हरकतें की।

विरोध करने पर पीड़िता की बाल पकड़ कर पिटाई की गई और थूक भी चटवाया गया। इस दौरान मजार न आने पर पीड़िता को जान से मार डालने की धमकी भी दी गई। पुलिस ने इस मामले में मंगलवार (5 दिसंबर 2023) को FIR दर्ज कर 1 आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

यह केस प्रयागराज जिले के कर्नलगंज थाना क्षेत्र का है। यहाँ 3 दिसंबर 2023 को एक पीड़िता ने शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में पीड़िता द्वारा बताया गया कि उनके पिता की प्रयागराज में मिठाई की दुकान है। यहाँ पर काफी पहले मुश्ताक नाम का मौलवी आता था। मुश्ताक ने खुद को झाड़-फूँक करने वाला बताया। मुश्ताक ने छोटा बघाड़ा स्थित एक मजार का जिक्र करते हुए उसे ‘चमत्कारी’ बताया और वहाँ आ कर चादरपोशी की सलाह दी। ऐसा करने पर मुश्ताक ने तमाम मुसीबतों से छुटकारा पाने का झाँसा दिया।

मुश्ताक की बातों में आ कर पीड़िता के पिता ने बघाड़ा की मजार पर जा कर चादर चढ़ाया। यहाँ पर मौलवी मुश्ताक ने मौत का डर दिखा कर उन्हें और पीड़िता को इस्लाम कबूल करवा दिया। थोड़े समय बाद मुश्ताक पीड़िता पर हिन्दू देवी-देवताओं की पूजा न करने, घर के अंदर मजारनुमा चौकी बनवाने और सिर्फ मजार को पूजने का दबाव बनाने लगा। वह पीड़िता को मजार पर आने के लिए मजबूर करते हुए ऐसा न करने पर पूरे परिवार की बीमारी और मौत का भय दिखाने लगा। उसने कुछ लोगों के नाम भी बताए जिनकी नाफरमानी की वजह से मौत हो चुकी थी।

मौलवी मुश्ताक के दबाव में पीड़िता के पिता (अब स्वर्गीय) ने घर में मजारनुमा चौकी बनवा डाली। थोड़े समय बाद मौलवी मुश्ताक पीड़िता की बेटी को मजार पर लाने का दबाव बनाया। यहाँ उसने एक कमरे में पीड़िता की बेटी के बलात्कार किया। बेटी ने जब अपनी माँ को मौलवी मुश्ताक की करतूत बताई तो पीड़िता ने विरोध किया। तब मौलवी ने कहा कि उसने ही जादू से पीड़िता के पिता को मारा है और अब वही जादू वो रेप की शिकार बेटी पर भी करेगा। 28 दिसंबर 2012 को पीड़िता की बेटी की मृत्यु हो गई। ऑपइंडिया से बातचीत में पीड़िता ने मृत्यु की वजह दोनों किडनी फेल होना बताया।

मौलवी मुश्ताक ने इस मौत को भी अपना ही कहर बताया और आगे से मजार पर रुपया-पैसा चढ़ाते रहने का दबाव बनाया। डर से पीड़िता ऐसा ही करती रही और अपने जेवर तक मजार पर चढ़ा आई। साल 2023 में मौलवी मुश्ताक की मौत हो गई। इस बीच 22 अक्टूबर 2023 को मुश्ताक के 3 बेटे अकरम, जुनैद और फैजान 2 अन्य अज्ञात लोगों को लेकर पीड़िता के घर आ धमके। उन्होंने बताया कि उनके अब्बा का मौत से पहले फरमान था कि अगर पीड़िता मजार आना बंद कर दे तो उसे घसीट कर लाना।

घर आए सभी आरोपितों ने पीड़िता को माँ-बहन की गालियाँ दी और जल्द से जल्द मजार पर आने की धमकी दी। इन धमकियों से डर कर पीड़िता 23 अक्टूबर को शाम 4 बजे बघाड़ा इलाके में मौजूद मजार पर पहुँच गई। कुछ समय पहले मर चुके मौलवी मुश्ताक के 2 बेटों अकरम और जुनैद ने पीड़िता को बाल पकड़ कर पीटा। इसके बाद तीनों ने एक कमरे में पीड़िता को बंधक बना कर उससे थूक चटवाया। साथ ही प्राइवेट पार्ट्स पर बुरी नीयत से हाथ फेरा।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में आगे बताया है कि अकरम और जुनैद ने पीड़िता पर दबाव बनाया कि वो अपनी दूसरी बेटी को भी मजार पर लाना शुरू करे। पीड़िता का दावा है कि मजार से जुड़े आरोपितों के चंगुल में उनके अलावा कई अन्य महिलाएँ भी फँसी हैं जो धर्मान्तरण, ठगी और रेप का शिकार हो रही हैं। बकौल पीड़िता अन्य महिलाएँ डर और लाज की वजह से मुँह नहीं खोल पा रहीं हैं। इस साजिश में मौलवी मुश्ताक का पूरा परिवार शामिल बताया गया है, जिसमें नाती-पोते भी शामिल हैं। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी मौजूद है।

इस मामले में पुलिस कमिश्नर ने मामले में जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रयागराज के कर्नलगंज थाना पुलिस ने अकरम, जुनैद और फैज़ान को नामजद करते हुए 2 अन्य अज्ञात लोगों पर FIR दर्ज की है। मामले में IPC की धारा 147, 323, 506, 504, 342 और 354 (क) के साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की धारा 3/5 के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया से बात करते हुए SHO कर्नलगंज ने बताया कि अकरम को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले की जाँच जारी है।

मजार कर सिखाते थे चोरी करना

ऑपइंडिया ने इस मामले में पीड़िता से बात की। पीड़िता ने बताया कि मजार पर उसे चोरी करना सिखाया जाता था। मौलवी मुश्ताक उनसे कहता था कि भले ही कहीं से पैसे चुरा कर लाओ, पर लेकर आओ। उसके अनुसार मजार के एक कोने में ऐसी जगह है जहाँ कोई महिला चीखे भी तो किसी को सुनाई न दे। पीड़िता का यह भी दावा है कि उसने मजार पर ज्यादातर विधवा महिलाओं को जाते देखा है।

पहले प्यार से बात, फिर शुरू होता है डर का खेल

पीड़िता ने आरोपितों का एक बहुत बड़ा गैंग बताया है। उसने बताया कि आरोपित पहले हिन्दुओं की दुकानों या मकान आदि पर भाईचारे की बात कर के आते है और फिर उनको सब धर्म एक जैसा बता कर एकाध बार चादर चढ़ाने के लिए कहते हैं। बकौल पीड़िता जब कोई उनकी मजार पर थोड़े समय के लिए चला जाता है तब उसको आना बंद करने पर मरने और बीमार कर देने का भय दिखाया जाता है। पीड़िता ने ऑपइंडिया को एक वीडियो भी भेजा जिसमें वो मजार पर पुलिस लेकर पहुँची है। इस दौरान पीड़िता की दूसरे पक्ष से बहस भी हो रही थी।

देवी-देवताओं की पूजा करोगे तो हमें बता देंगे जिन्न

पीड़िता ने ऑपइंडिया को बताया कि मौलवी मुश्ताक और उसके बेटों द्वारा उन्हें जिन्नों का डर दिखाया जाता था। आरोपित कहते थे कि इस्लाम कबूल करने के बाद अगर पीड़िता के घर में कभी हिन्दू देवी-देवताओं की पूजा हुई तो जिन्न सारी बात बता देंगे। साथ ही मौलवी ने अपने गुलाम जिन्नों को बहुत ताकतवर और किसी को भी बीमार करने या मार देने में सक्षम बताया था। दावा यह भी है कि आरोपित मर्दों से बात व्यवहार बना कर सीधे घर की महिलाओं तक पहुँच जाते हैं।

2015 में टाल दिया था पुलिस ने, योगी सरकार में हो रही सुनवाई

पीड़िता ने हमें बताया कि उसने इस मजार के खिलाफ साल 2015 में ही आवाज बुलंद की थी। तब पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दी थी और मजार से जुड़े लोगों पर कार्रवाई की माँग की थी। बकौल पीड़िता तब वो SP सिटी से मिली थीं जिन्होंने उसे थाना कर्नलगंज भेज दिया था। लेकिन कर्नलगंज के तत्कालीन प्रभारी ने आरोपितों पर कोई केस न बनने की बात कह कर पीड़िता को वापस लौटा दिया था।

पीड़िता का यह भी दावा है कि साल 2015 में कोई एक्शन न होने के बाद मौलवी मुश्ताक और उसके बेटों ने उन्हें धमकी दी थी कि पुलिस और प्रशासन उनका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकती। हालाँकि पीड़िता ने हमें आगे बताया कि अब योगी सरकार में उनकी सुनवाई हो रही है और पुलिस ने केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। पीड़िता ने प्रशसन से सभी आरोपितों को जेल भेजने और कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की उम्मीद जताई।

लाल चौक पर तिरंगा लहराने के बाद से ही करणी सेना के अध्यक्ष को मिल रही थी धमकियाँ, हत्या की जाँच के लिए SIT: जयपुर आ सकती NIA भी

राजस्थान के जयपुर में मंगलवार (5 दिसंबर 2023) को ‘श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना’ के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की घर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या की जाँच के लिए राजस्थान पुलिस ने SIT का गठन किया है।

रिपोर्टों के अनुसार गोगामेड़ी को पाकिस्तान से भी जान से मारने की धमकी मिली थी। इसके कारण केस NIA को सौंपे जाने की भी संभावना जताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 15 अगस्त 2018 को सुखदेव सिंह गोगामेड़ी करणी सेना के अन्य सदस्यों के साथ जम्मू-कश्मीर गए थे। यहाँ उन्होंने श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा झंडा फहराया था।

बताया जा रहा है कि इसके बाद से उनको लगातार धमकियाँ दी जा रही थी। खुद सुखदेव सिंह गोगामेड़ी ने पाकिस्तान से धमकियाँ मिलने की शिकायत प्रशासन से की थी। इसके चलते ही वे लंबे समय से पुलिस सुरक्षा की माँग कर रहे थे। इस बावत उन्होंने साल 2022 में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी।

सुखदेव सिंह का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वो प्रशासन पर अपनी सुरक्षा को ले कर ढुलमुल रवैया अपनाने का आरोप लगा रहे। वीडियो में वे कह रहे हैं कि प्रशासन यह तक जाँच नहीं करा रहा है कि उनको मिल रहीं धमकियाँ पाकिस्तान से हैं या किसी ने इंटरनेट कॉल के जरिए दी हिअ। इसी वीडियो में उन्होंने भारत के भी कुछ नंबरों से खुद को धमकियाँ मिलने की बात कही है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि उनकी हत्या की जाँच NIA (राष्ट्रीय जाँच एजेंसी) को दी जा सकती है। जल्द ही NIA के 4 सदस्यों की टीम के जयपुर पहुँचने की बात भी कही जा रही है।

भाजपा नेता राजेंद्र राठौर ने भी केंद्रीय गृहमंत्री को एक पत्र लिख कर मामले की जाँच NIA से कराए जाने की माँग की है। वहीं राजस्थान पुलिस ने सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड की जाँच के लिए SIT का गठन कर दिया है। इस विशेष जाँच दल का नेतृत्व जयपुर पुलिस के एडिशनल कमिश्नर कैलाश चंद विश्नोई कर रहे हैं।

इस मामले में 2 शूटरों को गिरफ्तार किया गया है। एक मकराना का रोहित और दूसरा हरियाणा स्थित महेंद्रगढ़ का नितिन फौजी। नितिन फौजी भारतीय सेना में है। उसने ही करणी सेना के अध्यक्ष के सिर में गोली मारी थी। वो पंजाब के बठिंडा के जेल में बंद संपत नेहरा से संपर्क में था, जिसने इस हत्याकांड की साजिश रची।

संपत नेहरा को लॉरेंस बिश्नोई का ‘मैनेजर’ कहा जाता है। पहले वो राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी हुआ करता था, लेकिन पंजाब यूनिवर्सिटी के DAV कॉलेज में लॉरेंस बिश्नोई के संपर्क में आने के बाद उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा। गैंगस्टर रोहित गोदारा के गुर्गों से भी पूछताछ चल रही है, जिसने फेसबुक के माध्यम से इस हत्याकांड की जिम्मेदारी ली थी। राजस्थान में संपत नेहरा और रोहित गोदारा ने मिल कर कई वारदातों को अंजाम दिया है।

सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या के लिए उनके ही पुराने गनर को माध्यम बना कर बदमाश उनके घर में घुसे थे। एक डील का लालच दिया गया था। बातचीत के लिए इंटरनेट कॉलिंग का इस्तेमाल किया गया था।

Melodi मुलाकात के बाद चीन को करारा झटका, इटली ने जिनपिंग के ड्रीम प्रोजेक्ट BRI से किया किनारा: दिल्ली के G20 के बाद ही दे दिए थे संकेत

यूरोपीय देश इटली ने चीन को करारा झटका दिया है। उसकी महत्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) से आधिकारिक तौर पर किनारा कर लिया है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए यह रणनीतिक तौर पर बड़ा झटका है।

यह खबर ऐसे समय में सामने आई है जब पिछले दिनों दुबई में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP 28) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी इतालवी समकक्ष जॉर्जिया मेलोनी की मुलाकात हुई थी। इस दौरान दोनों के संबंधों में काफी गर्मजोशी देखी गई थी। मेलोनी ने पीएम मोदी के साथ सेल्फी लेते हुए उसे Melodi हैशटैग के साथ सोशल मीडिया में पोस्ट भी किया था।

वैसे इस परियोजना से इटली के मोहभंग होने की जानकारी दिल्ली में जी 20 शिखर सम्मेलन के दौरान ही आ गई थी। उस समय यह बात सामने आई थी कि चीन के प्रधानमंत्री को इटली ने इस परियोजना से हाथ खींचने के बारे में बता दिया है। इसी सम्मेलन में चीन-पाकिस्तान जैसे पारंपरिक विरोधियों की नींद उड़ाते हुए भारत ने इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट की घोषणा की थी।

अब खबर आ रही है कि चार महीनों की बातचीत के बाद इटली ने आधिकारिक तौर पर बीआरआई से अलग होने का निर्णय ले लिया है। इटली G7 समूह का अकेला देश था जो चीन के इस इनिशिएटिव से जुड़ा था। अब उसने चीन के साथ चार वर्ष पूर्व किए गए समझौते को रद्द कर दिया है। इतालवी अखबारों का कहना है कि जॉर्जिया मेलोनी का प्रधानमंत्री पद पर होना इस फैसले की सबसे बड़ी वजह है।

चीन ने वर्ष 2019 में इटली के साथ यह समझौता किया था। इसके तहत चीन, इटली में 20 बिलियन यूरो (लगभग ₹18,000 करोड़) के प्रोजेक्ट विकसित करता। इससे दोनों देशों के बीच कनेक्विटिविटी को और मजबूत करने का उद्देश्य रखा गया था। इटली ने इससे पहले अक्टूबर में नई दिल्ली में हुई G20 समिट के समय ही चीन को यह स्पष्ट कर दिया था कि वह आगे और ज्यादा दिन BRI के साथ नहीं रह पाएगा। इटली का कहना था कि इस पूरे समझौते से उनको वैसे परिणाम नहीं मिले जैसी उन्हें आशा थी।

इटली पर अमेरिका समेत तमाम पश्चिमी देशों ने दबाव बनाया हुआ था कि वह चीन के साथ किए गए इस समझौते पर आगे ना बढ़े। जॉर्जिया मेलोनी की सरकार आने के बाद इसको लेकर संभावनाएँ बढ़ गईं थी कि अब इटली इससे बाहर आ जाएगा। इसके लिए बीते 4 माह से चीन के साथ गुप्त तौर पर बातचीत चल रही थी।

इटली चाहता था कि वह चीन के बाजार में बड़े स्तर पर सामान निर्यात करे, लेकिन यह सम्भव नहीं हो पाया क्योंकि 2019 में समझौता करने के तुरंत बाद कोविड आ गया जिससे आवाजाही बंद हो गई। इसी बीच चीन की दादागीरी भी सामने आई। इटली का यह निर्णय नई दिल्ली में चीन को बताना और फिर प्रधानमंत्री मोदी से इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी के मुलाक़ात के बाद फैसले का ऐलान करना बड़ा संकेत है।

क्या है चीन का BRI

बेल्ट एण्ड रोड इनिशिएटिव अथवा वन बेल्ट-वन रोड चीन की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। इस परियोजना के माध्यम से चीन अपने देश को एशिया, अफ्रीका और यूरोप के कई देशों से रोड और रेलवे लाइन के माध्यम से जोड़ना चाहता है। उसकी यह परियोजना प्राचीन सिल्क रूट का ही आधुनिक संस्करण है।

हालाँकि चीन इसे व्यापार सुगमता और वैश्विक व्यापार के अवसरों की वृद्धि की एक पहल के रूप में प्रचारित करता है, किन्तु भारत समेत कई देश इसे चीन की एक गहरी साजिश बताते हैं। एक ऐसी साजिश जिसके तहत चीन अल्पविकसित और विकासशील देशों में विकास के नाम पर उन्हें भारी कर्ज में लाद देता है।

इसका उदाहरण भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका में दिख चुका है, जहाँ चीन ने हम्बनटोटा बंदरगाह को विकसित किया और जब इसके लिए दिए गए लोन को श्रीलंका वापस नहीं कर पाया तो उसने इस बंदरगाह पर कब्जा कर लिया। इसके पश्चात चीन के कर्ज को श्रीलंका वापस नहीं कर पाने के कारण भारी आर्थिक संकट में भी आ गया।

इससे पहले पश्चिमी गुट के एक अन्य बड़े देश ऑस्ट्रेलिया ने भी 2021 में BRI से किनारा कर लिया था। ऑस्ट्रेलिया ने कहा था कि वह चीन के साथ चार समझौतों को रद्द कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया ने इस फैसले को राष्ट्रहित में बताया था।

अमित शाह ने संसद में गिनाई नेहरू की 2 गलती, लोकसभा ने पास कर दिया जम्मू-कश्मीर पर 2 बिल: कहा- यह कश्मीरी पंडितों को अधिकार देगा

लोकसभा ने बुधवार (6 दिसंबर 2023) को जम्मू-कश्मीर से जुड़े दो महत्वपूर्ण विधेयकों को पास कर दिया। इनके नाम हैं- जम्मू और कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक 2023 तथा जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2023। बिल पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कश्मीर पर देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की ओर से की गई दो गलतियों का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि पहली गलती यह थी कि हमारी सेना जीत रही थी और नेहरू ने सीजफायर कर दिया। ऐसा नहीं होता तो आज पीओके भी भारत का हिस्सा होता। उनकी दूसरी गलती जम्मू-कश्मीर के मसले को संयुक्त राष्ट्र में ले जाना था। शाह ने बताया कि शेख अब्दुल्ला को लिखे एक पत्र में नेहरू ने अपनी इन गलतियों को स्वीकार भी किया था।

अमित शाह ने कहा, “दो बड़ी गलतियाँ जो पंडित जवाहर लाल नेहरू के प्रधानमंत्री काल में हुई। उनके लिए गए निर्णयों के कारण सालों तक कश्मीर में शांति नहीं हुई। एक जब हमारी सेना जीत रही थी तब पंजाब के इलाके आते ही सीजफायर कर दिया गया और पाक अधिकृत कश्मीर का जन्म हुआ। अगर सीजफायर तीन दिन लेट हुआ होता तो POK भारत का हिस्सा होता। कश्मीर जीते बगैर सीजफायर कर लिया और दूसरा संयुक्त राष्ट्र के भीतर कश्मीर के मसले को ले जाने की बहुत बड़ी गलती की।”

विधेयकों पर चर्चा करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि इसके जरिए विधानसभा में दो सीटें कश्मीर विस्थापितों और एक सीट पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर से भारत आने वालों के लिए आरक्षित होंगी। इसी तरह विधानसभा में सीटों की भी संख्या बढ़ाई गई है। जम्मू में पहले 37 सीटें थीं, अब 43 हो जाएँगी। कश्मीर की सीटें 46 से बढ़कर 47 हो जाएँगी। शाह ने कहा, “PoK के लिए 24 सीटें आरक्षित कर दी गई हैं, क्योंकि PoK हमारा है।”

चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री ने कश्मीरी पंडितों के विस्थापन का जिक्र करते हुए कहा कि ये बिल उनके अधिकार दिलाने का काम करेगा। उन्हें प्रतिनिधित्व देने का काम करेगा। गृह मंत्री ने चर्चा के दौरान कहा कि जो लोग पूछते हैं कि अनुच्छेद 370 के हटने के बाद से जम्मू-कश्मीर में क्या बदला है, उन्हें जानना चाहिए कि 5 अगस्त 2019 के बाद उन लोगों की आवाज सुनी गई है जिनकी पहले नहीं सुनी गई थी।

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “जब आतंकवाद शुरू हुआ और आतंकवाद ने हर किसी को निशाना बनाकर भगाया, तो घड़ियाली आँसू बहाने वाले मैंने बहुत नेता देखे। शब्दों से सांत्वना देने वाले मैंने बहुत नेता देखे, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने सही मायने में पीड़ितों के आँसू पोछने का काम किया है।”

गृह मंत्री ने आतंकवाद पर बोलते हुए कहा, “1994-2004 के बीच आंतकवाद के 40,164 मामले सामने आए। 2004-2014 के बीच 7217 मामले सामने आए। 2014-23 के बीच आतंक के मामलों में 70% की कमी आई है। इसीलिए मैंने कहा कि आतंकवाद और अलगाववाद की मूल जड़ में अनुच्छेद 370 था।”

अब ये बिल राज्यसभा में पेश किए जाएँगे। वहाँ से भी इन विधेयकों के इसी सत्र में पारित होने की संभावना है।

‘वह मुझे PM नहीं बनाएँगी’: प्रणब मुखर्जी ने बेटी को पहले ही बता दिया था सोनिया गाँधी के मन की बात, राहुल लगते थे अपरिपक्व

भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपने पिता पर एक किताब लिखी है। इसमें कॉन्ग्रेस और सोनिया गाँधी से जुड़े कई प्रकरण का जिक्र है। शर्मिष्ठा मुखर्जी ने यह किताब अपने पिता की डायरी, उनसे हुए संवाद और अपने शोध के आधार पर लिखी है।

किताब का नाम- इन प्रणब, माई फादर:ए डॉटर रिमेम्बर्स (In Pranab, My Father: A Daughter Remebers) है। इसका विमोचन 11 दिसम्बर 2023 को दिल्ली में होगा। इसमें शर्मिष्ठा ने 2004 के लोकसभा चुनावों के बाद प्रधानमंत्री पद को लेकर पिता के साथ हुई अपनी बातचीत के बारे में भी बताया है। इसी दौरान प्रणब मुखर्जी ने उन्हें बता दिया था कि वे प्रधानमंत्री नहीं होंगे।

शर्मिष्ठा ने किताब में सोनिया गाँधी और प्रणब के बीच के रिश्ते, राहुल गाँधी को लेकर उनके विचार और देश के राजनीतिक माहौल पर उनके विचारों को लेकर लिखा है। गौरतलब है कि प्रणब मुखर्जी कॉन्ग्रेस के वरिष्ठतम नेताओं में से एक थे। वह रक्षा, वित्त और विदेश जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय सँभाल चुके थे। वह 2012 से लेकर 2017 तक देश के राष्ट्रपति भी रहे थे। प्रणब मुखर्जी का निधन अगस्त 2020 में हो गया था।

2004 के आम चुनावों में एनडीए की हार के बाद कॉन्ग्रेस नेता सोनिया गाँधी से प्रधानमंत्री बनने की अपील कर रहे थे। लेकिन विपक्ष के विरोध के चलते सोनिया को खुद की इस दौड़ से बाहर होने के लिए मजबूर होना पड़ा था। इसके बाद कॉन्ग्रेस के तब के वरिष्ठ नेता प्रणब मुखर्जी और मनमोहन सिंह में से किसी के प्रधानमंत्री बनने की खबरें तैरने लगी थी।

आजतक के अनुसार, शर्मिष्ठा ने इस विषय में किताब में लिखा है, “इस पद के लिए शीर्ष दावेदारों के रूप में डॉ. मनमोहन सिंह और प्रणब मुखर्जी के नामों पर चर्चा हो रही थी। मुझे कुछ दिनों तक बाबा से मिलने का मौका नहीं मिला, क्योंकि वह बहुत व्यस्त थे। लेकिन मैंने उनसे फोन पर बात की। मैंने उनसे उत्साहित होकर पूछा कि क्या वह पीएम बनने जा रहे हैं। उनका दो टूक जवाब था- नहीं, वह मुझे पीएम नहीं बनाएँगी। वह मनमोहन सिंह होंगे।” उन्होंने आगे कहा, “लेकिन उन्हें जल्द इसकी घोषणा करनी चाहिए। यह अनिश्चितता देश के लिए अच्छी नहीं है।”

प्रधानमंत्री बनने को लेकर प्रणब मुखर्जी से उनकी बेटी ने प्रश्न पूछा था कि क्या वह देश का प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं? इसके जवाब में प्रणब मुखर्जी ने कहा था, “बेशक, मैं प्रधानमंत्री बनना चाहूँगा। किसी भी योग्य राजनेता की यह महत्वाकांक्षा होती है। लेकिन सिर्फ इसलिए कि मैं इसे चाहता हूँ इसका मतलब यह नहीं है यह नहीं है कि मुझे यह मिल जाएगा।”

सोनिया गाँधी के विषय में प्रणब मुखर्जी का मानना था कि वह एक मेहनती और प्रतिभाशाली नेता हैं और भारत की जटिलताओं को समझने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। लेकिन राहुल गाँधी को लेकर उनका मानना था कि वह राजनीतिक रूप से परिपक्व नहीं हैं। उन्होंने राहुल को मनमोहन कैबिनेट में शामिल होकर अनुभव लेने की सलाह भी दी थी, पर कॉन्ग्रेस नेता ने इस पर भी अमल नहीं किया था।

7 महीने से फरार IPS का बिहार की कोर्ट में सरेंडर, दोस्त को हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बना DGP को करवाया था कॉल: कहा था- केस हटाओ, बढ़िया पोस्टिंग दो

बिहार में 7 महीने से फरार चल रहे IPS आदित्य कुमार ने आखिरकार मंगलवार (5 दिसंबर 2023) को कोर्ट में सरेंडर कर दिया। सरेंडर के बाद उन्हें बेउर जेल भेज दिया गया है। भारतीय पुलिस सेवा 2011 बैच के अधिकारी आदित्य पर 15 अक्टूबर 2022 को शराब माफियाओं के खिलाफ लापरवाही बरतने एक आरोप में FIR दर्ज हुई थी। अपने बचाव में आदित्य कुमार ने बिहार के तत्कालीन DGP को पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नाम से फर्जी कॉल भी करवाई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आदित्य कुमार पर 15 अक्टूबर 2022 को आर्थिक अपराध ईकाई (EOW) ने FIR दर्ज करवाई थी। FIR में IPS आदित्य पर शराब माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया था। यह केस गया जिले के थाना फतेहपुर में दर्ज हुआ था। केस दर्ज होने के बाद शासन ने आदित्य कुमार को सस्पेंड कर दिया था। अपनी गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए आदित्य कुमार फरार हो गए।

इस बीच बिहार के तत्कालीन DGP एस के सिंघल को एक फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को पटना हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बताया था। उसने DGP से कहा कि वो आदित्य कुमार के खिलाफ चल रही कार्रवाई बंद करवा दें। साथ ही कॉलर ने आदित्य कुमार को किसी बढ़िया जगह तैनाती देने के लिए भी कहा। DGP को शक हुआ तो उन्होंने नंबर की जाँच करवाई। जाँच में वो नंबर आदित्य कुमार के ही दोस्त अभिषेक अग्रवाल का निकला। इस मामले में भी केस दर्ज हुआ था। इसमें आदित्य और उसके दोस्त अभिषेक अग्रवाल को नामजद किया गया था।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आदित्य के दोस्त अभिषेक को गिरफ्तार कर लिया। हालाँकि खुद IPS आदित्य पुलिस के हत्थे नहीं चढ़े और फरार रहे। नवंबर 2023 को आदित्य कुमार ने गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। बिहार शासन से तलब की गई रिपोर्ट आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आदित्य कुमार की जमानत अर्जी खारिज कर दी। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने आदित्य को 2 हफ्तों में सरेंडर करने का आदेश दिया। 2 हफ्तों की समय सीमा बीत जाने के अंदर ही आखिरकार मंगलवार को आदित्य ने पटना की एक अदालत में सरेंडर कर दिया।

9 नवंबर को घर से गाड़ी ठीक कराने निकला सेना का जवान, 5 दिसंबर को वीडियो में करणी सेना के अध्यक्ष को सिर में गोली मारते दिखा

राजस्थान के जयपुर में मंगलवार (5 दिसंबर, 2023) को ‘श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना’ के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की घर में घुस कर हत्या कर दी गई, जिसका CCTV फुटेज भी सामने आया। इस मामले में 2 शूटरों को गिरफ्तार किया गया है – मकराना के रोहित और हरियाणा स्थित महेंद्रगढ़ के नितिन फौजी। नितिन फौजी भारतीय सेना में है। उसने ही करणी सेना के अध्यक्ष के सिर में गोली मारी थी। वो पंजाब के बठिंडा के जेल में बंद संपत नेहरा से संपर्क में था, जिसने इस हत्याकांड की साजिश रची।

संपत नेहरा को लॉरेंस बिश्नोई का ‘मैनेजर’ कहा जाता है। पहले वो राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी हुआ करता था, लेकिन पंजाब यूनिवर्सिटी के DAV कॉलेज में लॉरेंस बिश्नोई के संपर्क में आने के बाद उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब में भी इस हत्याकांड के बाद छापेमारी चल रही है। पूरे राजस्थान में बंद के आह्वान के बाद प्राइवेट स्कूल भी नहीं खुले। बसों का परिचालन बाधित कर दिया गया है और दुकानें बंद हैं।

महेंद्रगढ़ के डोंगरा का रहने वाला नितिन फौजी भारतीय सेना में है और नवंबर महीने में ही वो छुट्टी पर आया था। 9 नवंबर को वो ये कह कर निकला कि वो गाड़ी ठीक कराने जा रहा है, लेकिन उसके बाद वो वापस नहीं लौटा। परिजनों से भी उसका कोई संपर्क नहीं है। वहीं राजस्थान पुलिस को पंजाब पुलिस ने 10 महीने पहले ही सूचना भेजी थी कि सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या की साजिश संपत नेहरा रच रहा है। DGP उमेश मिश्रा ने कहा कि अपराधियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।

गैंगस्टर रोहित गोदारा के गुर्गों से भी पूछताछ चल रही है, जिसने फेसबुक के माध्यम से इस हत्याकांड की जिम्मेदारी ली थी। राजस्थान में संपत नेहरा और रोहित गोदारा ने मिल कर कई वारदातों को अंजाम दिया है। सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या के लिए उनके ही पुराने गनर को माध्यम बना कर बदमाश उनके घर में घुसे थे। एक डील का लालच दिया गया था। बातचीत के लिए इंटरनेट कॉलिंग का इस्तेमाल किया गया था। सरदारशहर में 2019 में भींवराज सारण की हत्या के मामले में भी रोहित गोदारा आरोपित है।

दोगड़ा जाट निवासी नितिन फौजी के बारे में और जानकारियाँ सामने आई हैं। अब उसका मकान सुनसान पड़ा हुआ है। घर में उसके माँ-बाप हैं, जबकि उसकी पत्नी बहरोड़ स्थित मायके में रहती है। नितिन फौजी के पिता कृष्ण कुमार भी भारतीय सेना से रिटायर्ड हैं। दोगड़ा पुलिस ने कहा कि राजस्थान पुलिस ने अब तक कोई संपर्क नहीं किया है। नितिन फौजी 19 जाट बटालियन में कार्यरत है। 1 साल पहले उसकी शादी हुई थी। फ़िलहाल उसका कोई बच्चा नहीं है।

नेपाल बॉर्डर पर 108 मदरसे, खाड़ी देशों से आए ₹150 करोड़: तालीम के नाम पर विदेश से आया पैसा कहाँ हुआ खर्च, जाँच कर रही यूपी SIT

नेपाल की सीमा से लगे उत्तर प्रदेश के इलाकों में चल रहे 108 मदरसों में विदेशी फंडिंग के सबूत मिले हैं। पता चला है कि तालीम के नाम पर इन मदरसों को खाड़ी देशों से करीब 150 करोड़ रुपए की फंडिंग हुई है। यह पैसा कहाँ खर्च हुआ, इसकी जाँच उत्तर प्रदेश SIT कर रही है।

ऑपइंडिया ने अक्तूबर 2022 में भारत-नेपाल सीमा पर चल रहे अवैध मस्जिद और मदरसों का खुलासा किया गया था। इसके बाद मदरसों को हो रही फंडिंग की जाँच के लिए यूपी सरकार ने एडीजी मोहित अग्रवाल के नेतृत्व में तीन सदस्यीय एसआइटी का गठन किया था। रिपोर्ट के अनुसार एसआईटी की पड़ताल में 108 मदरसों को विदेशी फंडिंग के प्रमाण मिले हैं। इन मदरसों से उनके बैंक खातों का पूरा ब्यौरा माँगा गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक SIT जाँच में खुलासा हुआ है कि बीते 2 वर्षों में भारत-नेपाल सीमा पर बने मदरसों के लिए लगभग 150 करोड़ रुपए की विदेशी फंडिंग हुई है। इस फंडिंग का लाभ लगभग 108 मदरसों को मिला है। ज्यादातर पैसे सऊदी अरब और उसके आसपास के खाड़ी देशों से भेजे गए हैं।

SIT टीम की जाँच के दायरे में कुल 25 हजार मदरसे हैं। जाँच के पहले चरण में उन मदरसों को चिन्हित किया गया है जो गैर मान्यता प्राप्त हैं। नेपाल बॉर्डर के अलावा देवबंद और कुछ अन्य हिस्सों में भी ऐसे कई मदरसे मिले हैं जिनको चलाने के लिए विदेश से पैसे आए। जाँच एजेंसी की नजर विदेशी पैसे के अलावा दिल्ली के एक NGO पर भी है। इस NGO से 3 वर्षों के अंदर कई मदरसों को लगभग 20 करोड़ रुपयों की फंडिंग की गई है। इस NGO से यह पता लगाने का प्रयास चल रहा है कि उनके पास ये पैसा कैसे और कहाँ से आया। साथ ही इसके द्वारा दिया गया पैसा मदरसों ने किस काम के लिए खर्च किया।

इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि विदेशों से मिले इन पैसों को तालीम की जगह देश विरोधी कार्यों पर खर्च किया गया हो। बताते चलें कि नेपाल सीमा पर अवैध इबादतगाहों व मदरसों को ले कर ऑपइंडिया की टीम अक्टूबर 2022 में लगभग 15 दिनों तक ग्राउंड पर रही। इस दौरान नेपाल के भी सांसद ने यह स्वीकार किया था कि भारत-नेपाल सीमा पर संदिग्ध गतिविधियाँ जोर पकड़ रही हैं।