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एक घर, नीम का पेड़, दो मजार… उस जगह पहुँची ऑपइंडिया जहाँ बाप-बेटी को बनाया मुस्लिम, रेप से लेकर थूक चटवाने तक का दावा

5 दिसंबर 2023 को प्रयागराज पुलिस ने एक हिंदू परिवार के जबरन धर्मांतरण को लेकर मामला दर्ज किया था। पीड़िता का दावा है कि मौलवी मुश्ताक ने उसे और उसके पिता को बहला-फुसलाकर मजार पर बुलाया। फिर इस्लाम कबूल करने को मजबूर किया। पीड़िता ने अपनी एक बेटी से रेप का आरोप भी मौलवी मुश्ताक पर लगाया है। यह भी दावा किया है कि मौलवी मुश्ताक की मौत के बाद उसके बेटे भी उसे प्रताड़ित कर रहे हैं और उसकी दूसरी बेटी को मजार पर लाने का दबाव बना रहे हैं।

गुरुवार (7 दिसंबर 2023) को ऑपइंडिया प्रयागराज के छोटा बघाड़ा स्थित उस मजार तक पहुँची, जहाँ कथित तौर पर बाप-बेटी को मुस्लिम बनाया गया। जिस जगह पर रेप से लेकर थूक चटवाने तक का आरोप पीड़िता ने लगाया है।

संकरी गलियों से होकर हम प्रयाग रेलवे स्टेशन के पीछे मौजूद उस परिसर तक पहुँचे जहाँ यह मजार मौजूद है। हमने पाया कि एक घर के अहाते में मौजूद नीम के पेड़ के नीचे दो मजार बनी हुई है। पेड़ पर लाल कपड़े और फूल-माला चढ़े हुए थे। मजार के पास ही हमें मौलवी मुश्ताक की तस्वीर भी देखने को मिली। मजार परिसर और जिस कमरे में रेप का दावा है उसमें ताला लगा हुआ था।

नीचे लगे ट्वीट में आप मजार का वीडियो देख सकते हैं

हमें पता चला कि अमूमन गुरुवार के दिन मजार पर काफी भीड़ रहती है। लेकिन केस दर्ज होने के बाद से यहाँ सन्नाटा पसरा हुआ है। मजार जिस इलाके में है, वहाँ बहुसंख्यक आबादी हिंदुओं की है। सिविल सर्विसेज की परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र इसके आसपास किराए पर कमरे लेकर रहते हैं। इन छात्रों से बातचीत में पता चला कि मजार परिसर में बाहरी लोगों का आना-जाना लगा रहता है। गुरुवार को यहाँ विशेष कार्यक्रम होता है। उस दिन ज्यादा लोग जुटते हैं। हालाँकि केस दर्ज होने और अकरम की गिरफ्तारी के बाद गुरुवार के दिन ही जब हम मौके पर पहुँचे तो सन्नाटा था।

मजार वाले परिसर के पास रहने वाले एक व्यक्ति ने अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया, “मौलवी मुश्ताक के जिंदा रहते उसके बेटे अकरम, जुनैद और फैजान अलग-अलग कारोबार करते थे। अकरम कैटरिंग का काम करता था और जुनैद महिलाओं के कपड़े सिलता था। कपड़े सिलने के ही दौरान ही वह म​हिलाओं को अपने झाँसे में लेता था और मजार तथा अपने अब्बू का जिक्र कर उन्हें अपनी मुसीबतें दूर करने के लिए वहाँ जाने की सलाह देता था।”

पीड़ित महिला के मुताबिक मौलवी मुश्ताक पहले लड़कियों को अपने घर पर बुलाया करता था। लेकिन इसके चलते जब उसके घर मे झगड़े शुरू हो गए तो उसने मजार परिसर में ही एक कमरा बनवा लिया। पीड़िता का यह भी दावा है कि मजार पर भले भीड़ गुरुवार को जुटती थी, लेकिन महिलाओं को मौलवी मुश्ताक किसी भी दिन किसी भी समय बुला लेता था।

क्या है मामला

पीड़िता के अनुसार प्रयागराज में उसके पिता की मिठाई की दुकान है। मौलवी मुश्ताक उनकी दुकान पर आता था। उसने मुसीबतों से छुटकारा दिलाने का झाँसा देकर बाप-बेटी को मजार पर बुलाया।

कथित तौर पर मजार पर आने के बाद मौलवी मुश्ताक ने मौत का डर दिखा कर बाप-बेटी से इस्लाम कबूल करवाया। उन पर हिन्दू देवी-देवताओं की पूजा न करने, घर के अंदर मजारनुमा चौकी बनवाने और सिर्फ मजार को पूजने का दबाव बनाया। पीड़िता के पिता की मौत हो चुकी है। उसने अपनी जिस बेटी से रेप करने का आरोप मौलवी मुश्ताक पर लगाया है, उसकी भी मौत हो चुकी है। मौलवी मुश्ताक का भी इंतकाल हो चुका है।

पीड़िता का कहना है कि मौलवी मुश्ताक की मौत के बाद उसके बेटे उसे प्रताड़ित कर रहे हैं। मजार न आने पर जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। विरोध करने पर बाल पकड़ कर उसकी पिटाई की गई। थूक चटवाया गया। उसके प्राइवेट पार्ट्स पर हाथ फेरा।

पीड़िता के आरोपों और इस केस के बारे में विस्तार से जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

आगे-आगे सोनियम्मा, पीछे पीछे रेवंत रेड्डी… तेलंगाना के नए CM ने ली शपथ, जानिए कैबिनेट में किनको मिली जगह

रेवंत रेड्डी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। शपथग्रहण समारोह में सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी के अलावा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी मौजूद रहे। CM के रूप में पार्टी द्वारा चुने जाने के रेवंत रेड्डी ने सोनिया गाँधी को ‘तेलंगाना की माँ’ और ‘सोनियम्मा’ कह कर संबोधित किया था। KCR के बाद रेवंत रेड्डी दूसरे ऐसे नेता हैं, जिन्होंने मुख्यमंत्री की शपथ ली है। इससे पहले राज्य में एक दशक तक KCR की पार्टी BRS का ही शासन था।

तेलंगाना की राजधापाल तमिलसाई सुंदरराजन ने रेवंत रेड्डी को मुख्यमंत्री की शपथ दिलाई। हैदराबाद स्थित लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में आयोजित शपथग्रहण समारोह में 1 लाख से भी अधिक लोग मौजूद रहे। विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस ने 64 सीटें अपने नाम की हैं, जबकि BRS को 39 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। वहीं भाजपा भी 8 सीटें जीतने में कामयाब रही। रेवंत रेड्डी के अलावा 11 अन्य मंत्रियों ने शपथ ली। दलित समाज से आने वाले मल्लू भट्टी विमरमार्क ने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

तेलंगाना में कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे N उत्तम कुमार रेड्डी ने भी मंत्री पद की शपथ ली। इन दोनों ने रेवंत रेड्डी को सीएम बनाए जाने का विरोध किया था। इनके अलावा श्रीधर बाबू, पोन्नम प्रभाकर, कोमाटीरेड्डी वेंकट रेड्डी, दामोदर राजनरसिंह, पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी, दाना अनुसूया, तुम्मला नागेश्वर राव, कोंडा सुरेखा और जुपल्ली कृष्णा राव ने भी शपथ ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रेवंत रेड्डी को बधाई दी है और राज्य के विकास और जनता के कल्याण के लिए हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया है।

शपथ लेने से पहले रेवंत रेड्डी ने सोनिया गाँधी के साथ गाड़ी में घूम कर विजय जुलूस भी निकाला। रेवंत रेड्डी TDP से 2017 में कॉन्ग्रेस में आए थे और 2021 में पार्टी ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया था। ABVP से अपनी राजनीति शुरू करने वाले रेवंत रेड्डी महबूबनगर में खासे लोकप्रिय हैं। तेलंगाना में कॉन्ग्रेस ने जिन लोगन को टिकट दिया, उनमें अधिकतर उनके ही लोग हैं।

तुम्मला नागेश्वर राव साथुपल्ली से 1985, 1994 और 1999 में जीत दर्ज कर चुके हैं। वहीं जुपली कृष्णा राव 6 बार के विधायक हैं, जो YSR रेड्डी और किरण रेड्डी की आंध्र प्रदेश कैबिनेट में मंत्री रहे हैं। रेड्डी के ही मंत्रिमंडल में रही उनकी विश्वस्त सुरेखा भी मंत्री बनीं। वहीं दनसरी अनुसूया को ‘सीताक्का’ के नाम से जाना जाता है, जो 14 वर्ष की उम्र में ही ‘जन शक्ति’ नामक नक्सली समूह की सदस्य बन गई थीं। वहीं पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने 2014 में YSRCP के टिकट पर खम्मम लोकसभा सीट से जीत दर्ज की थी, लेकिन फिर वो BRS में चले गए थे।

2009 में करीमनगर से सांसद चुने गए प्रभाकर यूथ कॉन्ग्रेस में राजनीति कर चुके हैं और लंबे समय से पार्टी के साथ हैं। कोमाटीरेड्डी वेंकट रेड्डी नलगोंडा से 5 बार विधायक रहे हैं, वहीं भुवनगिरि से सांसद भी रहे हैं। YSR रेड्डी के कैबिनेट में वो आईटी मंत्री हुआ करते थे। श्रीधर बाबू मन्थनी से 5 बार विधायक रहे हैं। N उत्तम कुमार रेड्डी 6 बार के विधायक रहे हैं। वो पहले भारतीय वायुसेना में पायलट थे। कोडक और हुजूरनगर से वो चुने जाते रहे हैं। नरसिम्हा अविभाजित आंध्र प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री हुआ करते थे।

मोदी है तो मुमकिन है, INDI गठबंधन चाय-समोसा पार्टी, नेहरू से गलती हुई… क्या जदयू MP के मार्फत ‘मन की बात’ कहलवा रहे नीतीश कुमार

अगस्त 2022 में जदयू ने बीजेपी को धोखा देकर बिहार में राजद, कॉन्ग्रेस और वाम दलों के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। उसके बाद से ही जदयू के फिर से एनडीए में लौट आने के कयास लगते रहते हैं। नीतीश कुमार के पाला बदलने की अटकलों ने हालिया विधानसभा चुनावों में बीजेपी की शानदार जीत के बाद फिर से जोर पकड़ लिया है।

इन चुनाव के नतीजों के बाद नीतीश ने INDI गठबंधन की बैठक से भी किनारा कर लिया था, जबकि विपक्ष के कुनबा को एक मंच पर लाने के प्रयास उन्होंने ही एनडीए से अलग होने के बाद शुरू किए थे। हालाँकि यह दूसरी बात है कि INDI गठबंधन बनने के बाद नीतीश कुमार को वह भाव नहीं मिला जिसके सपने उन्होंने पाल रखे थे।

विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद नीतीश कुमार की पार्टी के एक सांसद के भी अचानक से सुर बदल गए हैं। ये सांसद हैं बिहार के सीतामढ़ी से चुने गए सुनील कुमार पिंटू। पिंटू ने पहले नतीजों को लेकर कहा कि मोदी है तो मुमकिन है। फिर उन्होंने INDI गठबंधन को चाय-समोसा पार्टी तक सीमित बताया। अब उन्होंने माना है कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कश्मीर के मसले पर वो गलतियाँ की थी, जिनका जिक्र केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 6 दिसंबर 2023 को लोकसभा में किया था।

अमित शाह ने लोकसभा में कहा था कि नेहरू की गलतियों के कारण ही पाक अधिकृत कश्मीर की समस्या पैदा हुई। इस पर पिंटू ने कहा कि जो भी बातें सदन में कही गई वह इतिहास के पन्नों में दर्ज है। यह तत्कालीन प्रधानमंत्री की चूक ही है कि कश्मीर के एक हिस्से पर आज पाकिस्तान का कब्जा है। इतना ही नहीं उन्होंने अगड़े-पिछड़े की राजनीति पर भी कॉन्ग्रेस को घेरा। कहा, “आज 70 साल के बाद राहुल गाँधी पिछड़ा-अति पिछड़ा कर रहे हैं। 70 साल तक कहाँ थे। उसके करना समाज का एक तबका बहुत पीछे है। जिसे पीछे होने के कारण समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए आरक्षण दिया जा रहा है।”

नेहरू की आलोचना पर सुनील कुमार पिंटू ने कहा कि वे पार्टी लाइन से अलग नहीं हो रहे हैं। लेकिन अगर हैदराबाद हमारे कब्जे में है और PoK पर दूसरे का कब्जा है तो इसका सीधा जिम्मेवार तत्कालीन प्रधानमंत्री को माना जाएगा। इससे पहले राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा के जीतने पर उन्होंने कहा था कि जनता ने इस बात मुहर लगा दी है कि ‘मोदी है तो मुमकिन है’।

पिंटू के बदले सुर को लेकर राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग तरह के कयास लग रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि उनके जरिए नीतीश कुमार राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। अतीत में भी यह देखने को मिला है कि कोई फैसला लेने से पहले इसी तरह नीतीश अपनी पार्टी के नेताओं से राजनीतिक संदेश देते रहते हैं। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि 2024 के आम चुनावों से पहले पिंटू बीजेपी नेतृत्व से करीबी साधने की कोशिश में हैं। वैसे भी 2019 का चुनाव उन्होंने तब जीता था, जब जदयू को बीजेपी का समर्थन हासिल था।

महिला सांसद की बेटी ‘एनिमल’ देख रोने लगी, बीच में ही फिल्म छोड़कर भागी: संसद में बताया, रणबीर कपूर की ‘बहन’ ने भी माना टॉक्सिक है कंटेंट

‘एनिमल’ फिल्म में दिखाए गए हिंसक दृश्यों पर कॉन्ग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने संसद में बताया कि उनकी बेटी इस फिल्म को देखने के बाद रोने लगी थी। रंजीत के अलावा इस फिल्म में काम करने वाली एक्ट्रेस ने भी फिल्म को ‘टॉक्सिक’ कहा।

छत्तीसगढ़ से कॉन्ग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने संसद में ‘युवाओं पर सिनेमा के पड़ते बुरे प्रभाव’ का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सिनेमा समाज का आईना होता है जिसका युवाओं पर बुरा असर होता है। आजकल कुछ इस तरह की पिक्चरें आ रही हैं जिसमें हिंसा को दिखाया गया है। उन्होंने कबीर सिंह पुष्पा जैसी फिल्मों का जिक्र करते हुए एनिमल पर बात की।

उन्होंने कहा, “मैं आपको कह नहीं पाऊँगी कि मेरी बेटी के साथ बहुत सारी बच्चियाँ कॉलेज में पढ़ती हैं। लेकिन वो आधी पिक्चर में ही उठकर रोती हुई हॉल से बाहर चली आईं।” उन्होंने पूछा कि आखिर क्यों कबीर सिंह और एनिमल जैसी फिल्मों में इतनी हिंसा और महिलाओं के साथ अपमान को जस्टिफाई किया जा रहा है… ये एक सोचनीय विषय है।

रंजन ने कहा, “इन पिक्चरों का, ऐसी हिंसा का, गलत नेगेटिव रोल को हीरो की तरह पेश करने में युवाओं पर काफी असर पड़ता है। 11वीं और 12वीं के बच्चे इनको रोलमॉडल मानने लगे हैं। कई इस तरह की हिंसा हमें समाज में देखने को मिल रही, जो ये उदाहरण पिक्चरों से लेकर आते हैं।”

उन्होंने फिल्म के गाने ‘फड़के गंडासी’ पर भी सवाल उठाए। वह बोलीं- उच्च कोटि का इतिहास है पंजाब का। हरि सिंह नलवा का। फिल्म में एक गाना है कि फड़के गंडासी मारी। ये इतिहास को एक गैंगवॉर में, दो परिवारों की नफरत की लड़ाई में, जिसका बेटा अपने बाप के प्यार के लिए मरता है, वो भी ये पिक्चर जस्टिफाई नहीं कर पाई। वो हॉस्टल, बिल्डिंग में हथियार लेकर मारता है और कोई भी कानून उसको सजा नहीं देता है। ये भी पिक्चर में हम जस्टिफाई कर रहे हैं।

सलोनी बत्रा ने फिल्म को कहा ‘टॉक्सिक’

ऐसे ही सलोनी बत्रा, जिन्होंने फिल्म में रणबीर सिंह की ऑनस्क्रीन बहन का किरदार निभाया है, उन्होंने फिल्म को टॉक्सिक बताते हुए कहा कि वो तो आर्टिस्ट हैं उनका काम है कैरेक्टर को करना लेकिन एक दर्शक के तौर पर यह देखना और तय करना जिम्मेदारी है कि क्या सही है और क्या गलत। अगर वह किरदार कॉलेज में बंदूक चला रहा है, तो इसका मतलब ये नहीं है कि वो सही है। ये एंटरटेनमेंट के लिए एक आर्टिस्ट का विजन है। इस दुनिया में ऐसे किरदार सच में है, लेकिन जैसा मैंने कहा, ये हमारी जिम्मेदारी है कि एक दर्शक के तौर आप इसे घर पर न ले जाए।

सलोनी बत्रा ने कहा, “आप थिएटर्स तक आए और एंटरटेन हुए, सिनेमा का काम यही है। आपको इससे सीख लेने की जरूरत है। आपको इसे घर लेकर जाने की जरूरत नहीं। एक महिला होने के नाते बताऊँ तो अगर कोई मेरे साथ भी ऐसी बात करेगा तो मुझे बुरा लगेगा। लेकिन सच ये है कि ऐसे लोग मौजूद हैं।”

बता दें कि रणबीर कपूर, बॉबी देओल, रश्मिका मंदाना की फिल्म एनिमल सिनेमाघरों में छाई हुई है। फिल्म ने 6 दिन में 300 करोड़ रुपए का बिजनेस कर लिया है। इस फिल्म ने इस वर्ष आई जवान और पठान के रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया है। इस फिल्म का निर्देशन कबीर सिंह बनाने वाले संदीप रेड्डी वांगा ने ही किया है। उन्हें इस फिल्म के लिए सराहना और आलोचना दोनों मिल रही है।

शाम का भूला सुबह ही आ जाए तो उसे राहुल गाँधी कहते हैं: प्रणब मुखर्जी ने कहा था, जिसे AM/PM का पता नहीं, वो प्रधानमंत्री कार्यालय कैसे संभालेगा – किताब में खुलासा

  • कॉन्ग्रेस के ‘युवा’ नेता राहुल गाँधी पीएम मैटेरियल हैं।
  • राहुल गाँधी विदेश में पढ़े-लिखे हैं, इसलिए प्रधानमंत्री बनने की क्षमता उनमें है।

ऊपर जो 2 वाक्य हैं, वो सिर्फ उदाहरण भर। ऐसे 10-20 लाइन आपको हर कॉन्ग्रेसी या कथित लिबरल सुनाते रहते हैं, सोशल मीडिया पर लिखते रहते हैं। राहुल गाँधी की असली सच्चाई लेकिन बताई है शर्मिष्ठा मुखर्जी ने। राहुल गाँधी मतलब नेहरू-गाँधी खानदान वाला अहंकार, राहुल गाँधी मतलब सरेआम भारत के प्रधानमंत्री को अपमानित करने वाला। राहुल गाँधी मतलब राजनीतिक की जीरो समझ।

PRANAB, MY FATHER: A Daughter Remembers नाम की एक किताब है। इसको लिखा है शर्मिष्ठा मुखर्जी ने। राहुल गाँधी पर डायरेक्ट इतने बड़े-बड़े आरोप लगाने वालीं आखिर कौन हैं ये शर्मिष्ठा मुखर्जी? इसका जवाब है – शर्मिष्ठा मुखर्जी खुद भी कभी कॉन्ग्रेसी नेता रही हैं। एक पीढ़ी ऊपर देखें तो वो उस प्रणब मुखर्जी की बेटी हैं, जो एक समय में कॉन्ग्रेस के सबसे बड़े नेता तो जरूर थे लेकिन नेहरू-गाँधी परिवार की मानसिकता के कारण उन्हें प्रधानमंत्री बनने नहीं दिया गया।

शर्मिष्ठा मुखर्जी की किताब, कॉन्ग्रेस/राहुल-विरोधी?

एक समय की बात है। तब भारत के राष्ट्रपति थे प्रणब मुखर्जी। और राहुल गाँधी सिर्फ सांसद। कोई भी सांसद भारत के राष्ट्रपति से ऐसे ही मुँह उठा कर मिलने नहीं जा सकता है। लेकिन राहुल गाँधी अपने को ‘कोई भी सांसद’ समझते नहीं थे शायद। एक दिन सुबह-सुबह पहुँच गए राष्ट्रपति भवन। प्रणब मुखर्जी तब मुगल गार्डन (जिसका नाम अब बदल कर अमृत उद्यान कर दिया गया है) में टहल रहे थे। टहलने के पसंदीदा काम पर ब्रेक लगने से वो झल्लाए जरूर लेकिन मिल लिए। सांसद और राष्ट्रपति के इस मिलन की असली कहानी इससे भी मजेदार है।

सांसद राहुल गाँधी को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलना था शाम में… लेकिन पहुँच गए सुबह ही। हुआ यह कि राहुल गाँधी के ऑफिस ने शाम की जगह सुबह का प्लान बता दिया था सांसद महोदय को। इस पूरे मामले पर जब शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपने पिताजी से पूछा तो उनका जवाब व्यंग्य से भरा हुआ था:

“अगर राहुल का दफ्तर ‘AM’ और ‘PM’ के बीच अंतर नहीं कर सकता है तो वह भविष्य में प्रधानमंत्री कार्यालय को संचालित करने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?”

राहुल गाँधी अहंकारी… लेकिन राजनीतिक कौशल जीरो

राहुल गाँधी को लेकर प्रणब मुखर्जी क्या सोचते थे, यह उनकी डायरी से स्पष्ट है। शर्मिष्ठा मुखर्जी की किताब के अनुसार उनके पिताजी ने लिखा है – “राहुल के अंदर गांधी-नेहरू वंश से होने वाला सारा अहंकार भरा हुआ है, लेकिन बिना राजनीतिक कौशल के।”

कोई भी नेता अगर अपराधी साबित हो जाए तो उसे तुरंत अयोग्य घोषित कर दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा एक फैसला दिया था। मनमोहन सिंह की तब देश में सरकार थी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पलटने के लिए यूपीए कैबिनेट एक अध्यादेश लेकर आई थी। राहुल गाँधी कैबिनेट में थे भी नहीं, सिर्फ सांसद थे। लेकिन फिर से वही बात… वो खुद को शायद ‘कोई भी सांसद’ समझते नहीं थे। इस अध्यादेश की प्रेस कॉन्फ्रेस में बिना बुलाए पहुँच इसे बेहूदा बताया था, कूड़े में फेंकने लायक कहा था। इस पूरे घटनाक्रम पर प्रणब मुखर्जी ने क्या कहा था, पढ़ने लायक है:

“राहुल गाँधी खुद को समझता क्या है? वो तो कैबिनेट मंत्री भी नहीं। फिर कैबिनेट के फैसले को सार्वजनिक रूप से कूड़े के लायक बताने वाला वो है कौन? विदेश दौरे पर गए प्रधानमंत्री को इस तरह से वो अपमानित कैसे कर सकता है, उसका अधिकार क्या है?”

PRANAB, MY FATHER: A Daughter Remembers

अब करते हैं किताब की बात। प्रणब मुखर्जी को डायरी लिखने की आदत थी। उनकी बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपने पिता की डायरी के हिस्सों और पिता-पुत्री संवाद को ही किताब की शक्ल दी है। इसलिए नाम भी किताब का कुछ ऐसा ही रखा है, जिससे वो भाव निकल कर आ रहे हैं। हिंदी में यह मोटा-मोटी कुछ ऐसा होगा – ‘प्रणब, मेरे पिता: बेटी की यादों में’ (PRANAB, MY FATHER: A Daughter Remembers)

इस किताब को पब्लिश किया है रूपा पब्लिकेशन ने। 11 दिसंबर 2023 को इसे लॉन्च किया जाना है। शर्मिष्ठा मुखर्जी के अनुसार अपने पिता प्रणब मुखर्जी की डायरी और पिता-पुत्री संवाद के अलावा कुछ हिस्सों के लिए उन्होंने खुद रिसर्च भी की है इसे लिखने में।

आपको बता दें कि इसी किताब में शर्मिष्ठा मुखर्जी ने दावा किया है कि सोनिया गाँधी ने उनके पिता को प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया। किताब में इसका भी जिक्र है कि राहुल गाँधी के बार-बार गायब होकर विदेश पर निकल जाने की आदत से प्रणब मुखर्जी खफा रहते थे। उनके अनुसार राजनीति मतलब 247365 दिन वाला जॉब। ऐसे में देश की जनता के बीच से गायब हो जाना मतलब राजनीतिक मोर्चे पर हार।

‘हिन्दू मंदिरों में लूटी जाती है बहन-बेटियों की इज्जत, होती है हत्या’: अरविंद केजरीवाल के विधायक ने उगला ज़हर, लोगों को भड़काते हुए कहा – वहाँ जाना बंद करो

‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ के विधायक और दिल्ली सरकार में मंत्री रहे राजेन्द्र पाल गौतम ने हिन्दू धर्म और हिन्दू मंदिरों के विरुद्ध एक बार फिर जहर उगला है। राजेन्द्र पाल का कहना है कि मंदिरों में जाने पर लोगों की हत्या होती है और बहन बेटियों की इज्जत लूटी जाती है। उनका यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है।

दिल्ली सीमापुरी विधानसभा क्षेत्र से विधायक राजेन्द्र पाल गौतम इस वीडियो में कहते हुए दिखते हैं, “आप ऐसी चीजों में भरोसा मत करो जो आपको नुकसान पहुँचाती हो। आप एक बात बताइए, अगर कहीं मंदिर में जाने से हमारे लोगों की हत्या होती हो, अगर मूर्ति छू लेने से हमारे युवाओं की हत्या हो गई हो, तो आप ऐसी जगह क्यों जाते हो जहाँ आपका अपमान हो।”

आगे राजेन्द्र पाल गौतम इस वीडियो में आगे कहते हैं, “जहाँ आपकी बहन-बेटी की इज्जत लूटी जाए, जहाँ आपका क़त्ल कर दिया जाए, जहाँ अपमान हो वहाँ जाना बंद कर दो।” अब राजेंद्र गौतम के लगभग 30 सेकंड इस वीडियो पर प्रश्न उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, यह वीडियो हरियाणा के सोनीपत जिले का है जहाँ वह लहराड़ा गाँव में एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने इस प्रश्न उठाया है कि आखिर खुद को कट्टर हनुमान भक्त बताने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल राजेन्द्र पाल गौतम को अपनी पार्टी से निष्कासित क्यों नहीं कर रहे हैं जो कि लगातार हिन्दुओं के खिलाफ जहर उगलते आए हैं।

हालाँकि, यह कोई पहली बार नहीं है कि राजेन्द्र पाल गौतम ने हिन्दू धर्म पर विवादित बयान दिया हो या हिन्दू धर्म का अपमान किया हो। इससे पहले वह कई मौकों पर ऐसा ही कर चुके हैं। अक्टूबर 2022 में एक हिन्दू विरोधी कार्यक्रम में शामिल होने के कारण उन्हें दिल्ली सरकार के मंत्री पद से भी हाथ धोना पड़ा था।

अक्टूबर 2022 में AAP नेता ने झंडेवालान में आयोजित जिस कार्यक्रम में शामिल हुए थे उसमें 10,000 हिंदुओं का धर्मांतणरण हुआ था। शपथ में कहते सुना गया था – “मैं इस बात को नहीं मानता और न ही मानूँगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार थे। मैं इसे केवल पागलपन और झूठा प्रचार मानता हूँ। मैं श्राद्ध नहीं करूँगा और न ही पिंडदान करूँगा।”

भगवा वस्त्र पहने हुए व्यक्ति ने इस शपथ को दिलाते हुए कहा था, “मैं ब्राह्मणों द्वारा किसी भी समारोह को करने की अनुमति नहीं दूँगा। मैं हिंदू धर्म का त्याग करता हूँ, जो मानवता के लिए हानिकारक और उनके विकास में बाधक है, क्योंकि यह असमानता पर आधारित है। मैं बौद्ध धर्म को अपना धर्म स्वीकार करता हूँ।”

कार्यक्रम के दौरान, AAP के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम इन विवादास्पद लाइनों को दोहराते हुए और उस व्यक्ति के साथ मंच साझा करते हुए दिखाई दिए थे। उनके इस वीडियो के कारण केजरीवाल को गुजरात में काफी विरोध झेलना पड़ा था। राजेन्द्र पाल गौतम ने इसके पश्चात इस्तीफ़ा दिया था।

नवम्बर 2022 में राजेन्द्र पाल गौतम ने भारत में हिन्दुओं को अल्पसंख्यक बनाने को लेकर भी बयान दिया था। प्रोपेगंडा पोर्टल ‘द वायर’ की एंकर आरफा खान शेरवानी के साथ के इंटरव्यू में राजेन्द्र पाल ने कहा था, “इस देश के 110 करोड़ लोग अनुसूचित जाति/जनजाति समाज से हैं, वो सभी 5-6 वर्षों में बौद्ध धर्म अपना लेंगे। उसके बाद देखते हैं कि कौन बहुसंख्यक होता है।”

जनवरी 2023 में एक कार्यक्रम में राजेन्द्र पाल ने श्रीरामचरितमानस पर भी विवादित बयान दिया था। इसका वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो में वह कहते हुए दिखते हैं, “क्या रामचरितमानस में नहीं लिखा है ‘ढोल गँवार शूद्र पशु नारी ये सब ताड़न के अधिकारी।’ वो व्याख्या कर रहे हैं कि ताड़न का मतलब देखना है, जबकि क्लीयर है कि ताड़न का मतलब पीटना। यदि इसका मतलब देखना ही है तो क्या नारी को घूरना चाहिए? क्या पीटना चाहिए? आपके धर्मशास्त्र हमें इंसान का दर्जा देने को तैयार नहीं है।”

राजेन्द्र पाल गौतम लगातार ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेते रहे हैं जहाँ हिन्दू धर्म, मंदिरों और ग्रन्थों के विरुद्ध अपमानजनक बातें की जाती हैं। अब मंदिरों में बलात्कार और हत्या वाले वीडियो को लेकर भी प्रश्न उठ रहे हैं लेकिन आम आदमी पार्टी के मुखिया केजरीवाल या पार्टी की तरफ से कोई स्पष्टीकरण नहीं सामने आया है। राजेन्द्र पाल गौतम ने भी अब तक इस बयान पर माफ़ी नहीं माँगी है।

‘प्रणब मुखर्जी ने जिस थाली में खाया उसी में छेद किया’: अपने ही दिवंगत नेता को भला-बुरा कह रहे कॉन्ग्रेसी, किताब में राहुल गाँधी पर खुलासों से भड़की पार्टी

दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा ने ‘Pranab, My Father: A Daughter Remembers’ नामक पुस्तक लिखा है, जिसमें कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को लेकर कुछ ऐसे खुलासे हुए हैं जिसके बाद कॉन्ग्रेस नेता बिफर गए हैं। हालाँकि, 2 साल पहले सक्रिय राजनीति छोड़ चुकीं शर्मिष्ठा मुखर्जी का कहना है कि वैचारिक रूप से वो कॉन्ग्रेस पार्टी में विश्वास करती हैं, क्योंकि ये पार्टी लिबरल और सेक्युलर विचारधारा पर चलती है।

साथ ही उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस अब वही सब कुछ कर रही है, जिसका आरोप वो भाजपा पर लगाती रही है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस का आलाकमान ऐसे किसी भी व्यक्ति को बर्दाश्त नहीं करता, जो अपने अलग विचार रखता हो। उन्होंने कॉन्ग्रेस आलाकमान और उसके समर्थकों पर असहिष्णुता का आरोप मढ़ा। शर्मिष्ठा मुखर्जी ने ये भी बताया कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा उनके पिता के पाँव छूटे थे, निजी मुलाकातों में भी। उन्होंने कहा कि अलग-अलग वैचारिक पक्षों के 2 लोगों ने अच्छे से साथ काम किया, ये आश्चर्यजनक था।

इस किताब से खुलासा हुआ है कि प्रणब मुखर्जी मानते थे कि राहुल गाँधी को और परिपक्व होने की ज़रूरत है। वो राहुल गाँधी को ‘विनम्र’ और ‘काफी सवाल पूछने’ वाला तो मानते थे, लेकिन कहते थे कि उन्हें राजनीतिक रूप से और परिपक्व होने की ज़रूरत है। शर्मिष्ठा ने एक घटना का जिक्र भी किया है। एक बार सुबह-सुबह राहुल गाँधी अमृत उद्यान (तब मुग़ल गार्डन) प्रणब मुखर्जी से मिलने पहुँच गए। प्रणब मुखर्जी सुबह टहलने और अपनी पूजा के दौरान किसी प्रकार का व्यवधान नहीं पसंद करते थे।

जब उन्होंने प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की तो पता चला कि ये बैठक शाम में तय थी, लेकिन राहुल गाँधी के कार्यालय ने उन्हें सुबह का समय बता दिया। प्रणब मुखर्जी ने तब कहा था कि राहुल गाँधी का दफ्तर जब AM और PM का अंतर नहीं समझता, तो एक दिन वो PMO कैसे चलाएँगे? प्रणब मुखर्जी मानते थे कि राहुल गाँधी में उनके पूर्वजों जैसा ही दम्भ है लेकिन वैसी क्षमता नहीं है। साथ ही उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होकर सरकार का अनुभव लेने की सलाह भी उन्होंने दी थी।

इन खुलासों पर भड़के ‘अनऑर्गेनाइज्ड वर्कर्स एन्ड एम्प्लाइज कॉन्ग्रेस’ के अध्यक्ष उदित राज ने कहा, “कॉन्ग्रेस ने ही प्रणब मुखर्जी जी को फ़र्श से अर्श तक पहुँचाया और उसी में बुराई देखी। मोदी जी में अच्छाई देखी जिनकी इन्हें बनाने में कोई भूमिका न थी। इसे कहते हैं जिस थाली में खाया और उसी में छेद कर दिया। कॉन्ग्रेस की गलती रही हो कि जिसका वोट बैंक न हो उसे अर्श तक पहुँचाया। बड़े काबिल थे तो बंगाल में कॉन्ग्रेस को खड़ा किए होते।”

इसी तरह राज्यसभा में कॉन्ग्रेस के उप-नेता प्रमोद तिवारी ने दावा किया कि दुनिया गाँधी के निर्देश पर ही प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति बने थे। उन्होंने कहा कि सोनिया गाँधी ने ही प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति बनाया था। उन्होंने कहा कि प्रणब मुखर्जी को हमेशा वरिष्ठतम कैबिनेट मंत्री के रूप में रखा गया। उन्होंने याद दिलाया कि शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपने पिता की ही आलोचना कर दी थी, जब वो नागपुर गए थे। बता दें कि राष्ट्रपति का कार्यकाल पूरा कर चुके प्रणब मुखर्जी ने जून 2018 में RSS मुख्यालय पर एक कार्यक्रम को संबोधित किया था।

तालियों की गड़गड़ाहट, फूलों का हार और भारत माता की जय के नारे: 3 राज्यों में जीत के बाद इस तरह BJP सांसदों ने किया PM मोदी का स्वागत, Video

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तीन राज्यों में जीत हासिल करने के बाद भारतीय जनता पार्टी के सांसदों ने पीएम मोदी का अभिवादन किया। संसदीय सत्र से पहले हुई पार्टी की बैठक में नरेंद्र मोदी को देख पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उनका स्वागत किया। इसकी एक वीडियो भी सामने आई है।

भाजपा के सांसद बैठक में चिल्लाए– “मोदी जी का स्वागत है।” इसके बाद सबने उनके लिए तालियाँ बजाईं। उनका स्वागत फूलों के हार और शॉल से जेपी नड्डा द्वारा किया गया।

इसकी वीडियो भाजपा ने सोशल मीडिया पर भी डाली है। इसमें सांसदों को तालियों के साथ कहते सुना जा सकता है- स्वागत है भाई स्वागत है पीएम मोदी का स्वागत है। इसके अलावा मोदी का मतलब गारंटी और भारत माता की जय के नारे भी लगाते सुने जा सकते हैं।

बता दें कि भाजपा द्वारा यह बैठक तीन राज्यों में प्रचंड जीत हासिल करने के बाद वहाँ मुख्यमंत्रियों के चुनाव को लेकर थी। इसे संसद भवन परिसर के बालयोगी ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया था।

इस बैठक में पीएम मोदी ने तीनों राज्यों में मिली जीत को पार्टी कार्यकर्ताओं को समर्पित किया। उन्होंने कहा इस जीत के लिए राज्य के तमाम कार्यकर्ताओं ने आहुति दी है। सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाया गया है। पीएम ने कहा ये जीत किसी एक की मेहनत नहीं है। पार्टी जीती इसके लिए सबकी जय-जयकार होनी चाहिए। जातियाँ में नहीं बँटना चाहिए। हमारी जाति युवा, महिला, गरीब और किसान की है।

‘दगा कर शेर को गीदड़ों ने मारा है, यहाँ से हिलना नहीं’: दहाड़ी सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की पत्नी, हत्या की FIR में अशोक गहलोत का भी नाम

राजस्थान के जयपुर में  ‘श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या के बाद आज (7 दिसंबर 2023) उनका अंतिम संस्कार होना तय हुआ है। गोगामेड़ी हत्याकांड में पुलिस ने 28 घंटे बाद FIR लिखी। मृतक की पत्नी शीला शेखावत ने यह प्राथमिकी दर्ज करवाई। FIR में शीला शेखावत ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और राजस्थान के डीजीपी का का नाम लिया।

उन्होंने शिकायत में कहा कि इन लोगों को हर जगह से सूचना आ रही थी कि गोगामेड़ी की हत्या की साजिश रची जा रही है। लेकिन फिर भी इन्होंने कोई एक्शन नहीं लिया। शीला शेखावत ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए प्रदर्शनकारियों से माँग की कि जब तक आरोपितों का एनकाउंटर नहीं हो जाता तब तक धरने से हिलें नहीं। आश्वासन देकर भगाने का प्रयास हो रहा है।

उन्होंने अपने पति की हत्या पर कहा- “दगा करके शेर (सुखदेव) को गीदड़ो ने मारा है। इसलिए जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं यहाँ से हिलना नहीं है। अगर, आंदोलन उग्र करना पड़ा तो वह भी करेंगे।”

अशोक गहलोत को मिले थे हत्या की साजिश के इनपुट

FIR में सुखदेव सिंह की पत्नी ने बताया कि उनके पति की जान को पिछले दो सालों से लगातार जान का खतरा था। इसे लेकर सुखदेव ने राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पुलिस महानिदेशक सहित कई उच्चाधिकारियों को 24 फरवरी 2023 और 25 मार्च 2023 को पत्र भी लिखा था।

एटीएस जयपुर ने भी अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (इंटेलीजेंस) राजस्थान को बताया था कि सुखदेव सिंह गोगामेड़ी को मारने का षडयंत्र रचा जा रहा है। ऐसे ही पंजाब पुलिस ने भी 14 फरवरी 2023 को डीजीपी राजस्थान को इस संबंध में पत्र लिखकर ‘साजिश’की सूचना दी थी। लेकिन, इन सब इनपुट्स के बाद भी सुखदेव सिंह को सुरक्षा नहीं दी गई। शीला शेखावत ने इस मामले में आरोपितों के एनकाउंटर की माँग की है।

गैंगस्टर ने लिया गहलोत के बेटे का नाम

वहीं इस बीच हत्या की जिम्मेदारी लेने वाले गैंगस्टर रोहित गोदारा का कथितौर पर नया पोस्ट आया है। इसमें उसने हत्या की वजह बताते हुए कहा है कि उनका डिस्ट्रिब्यूशन से जुड़े किसी मामले में गोगामेड़ी के साथ विवाद हुआ था। जिसमें उन लोगों को पूर्व सीएम गहलोत के बेटे वैभव ने शामिल कराया था। इस पोस्ट में आरोप है कि गहलोत का बेटा उन लोगों से वसूली का हिस्सा लेता था जिसके उनके पास सबूत भी हैं।

वायरल होता गैंगस्टर का पोस्ट

5 दिन से कर रहे शूटर सुखदेव सिंह की रेकी

बता दें कि हत्या को अंजाम देने से पहले आरोपित 5 दिन से करणी सेना अध्यक्ष की रेकी कर रहे थे। इसके बाद ही उन्होंने हत्याकांड को अंजाम दिया। गोली चलाने वाले दो आरोपितों में से एक का नाम रोहित राठौड़ है तो दूसरे का नाम नितिन फौजी है।

लग्जरी गाड़ियों का शौक रखने वाले रोहित राठौड़ के ऊपर नाबालिग से रेप का केस भी दर्ज है जिसके कारण वह 5 साल जेल में था। जमानत मिलने के बाद वह आर्म्स एक्ट में अरेस्ट हुआ। इसके अलावा उसपर मारपीट के भी केस थे। इसी तरह दूसरा शूटर नितिन फौजी था, जो भारतीय सेना में नौकरी करता था। वो इस हत्या को अंजाम देने के लिए छुट्टी लेकर आया था। इसके बाद 9 नवंबर को गायब हुआ और फिर सीधे 5 दिसंबर को करणी अध्यक्ष को गोली मारते दिखा।

UP में अब परमानेंट नौकरी के लिए नहीं देनी पड़ेगी उर्दू इमला की परीक्षा, उर्दू-फारसी घटेगा इस्तेमाल: 115 साल पुराना नियम बदलेगी योगी सरकार

रकबा, बैनामा, रहन, साकिन, खुर्द… ऐसे ढेरों उर्दू-फारसी के शब्द हैं, जिनका आप अर्थ भले न जानते हो पर रजिस्ट्री के दस्तावेजों में इनसे आपका पाला पड़ता होगा। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने इन शब्दों को हटाने और इनकी जगह हिंदी के सामान्य शब्दों का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 में बदलाव किया जाएगा।

इसके अलावा अब सब रजिस्ट्रार को उर्दू इमला की परीक्षा भी नहीं देनी होगी। अब तक लोक सेवा आयोग से चुनकर आने के बाद भी स्थायी नौकरी के लिए सब रजिस्ट्रार को यह परीक्षा पास करनी होती थी। ऐसा सरकारी दस्तावेजों में उर्दू-फारसी के शब्दों के इस्तेमाल के कारण था।

जानकारी के अनुसार, योगी सरकार उत्तर प्रदेश में होने वाली रजिस्ट्रियों के लिए वर्ष 1908 में बने रजिस्ट्रेशन एक्ट को बदलने जा रही है। यह कानून अंग्रेजों द्वारा लाया गया था। इस एक्ट के तहत उर्दू-फ़ारसी को सरकारी कामकाज में बढ़ावा दिया गया था। इसी कारण से अधिकांश रजिस्ट्रियों में उर्दू और फ़ारसी के काफी शब्द होते हैं।

यह शब्द इतने जटिल होते हैं कि आम हिंदी भाषी जनता को समझ नहीं आते हैं। उर्दू-फारसी के इस्तेमाल के चलते रजिस्ट्री करने वाले अफसरों को भी इन्हें सीखना पड़ता है। इसके लिए सब रजिस्ट्रार स्तर से भर्ती होने वाले अफसरों को उर्दू इमला की परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है।

इन अफसरों को उर्दू इसलिए सिखाई जाती है क्योंकि रजिस्ट्रियों में अभी तक बड़े स्तर पर उर्दू-फारसी शब्द का इस्तेमाल होता रहा है। इस परीक्षा में अभ्यर्थी उर्दू लिखना, बोलना, व्याकरण और अनुवाद जैसी चीजें सीखते हैं। हालाँकि योगी सरकार अब इसे नई टेक्नोलॉजी से बदलने वाली है।

उर्दू सीखने की यह अवधि दो वर्ष होती है और इस दौरान चयनित अभ्यर्थी प्रोबेशन पर रहते हैं। इसके बिना सीखे अभ्यर्थियों की नौकरी स्थायी नहीं की जाती। योगी सरकार ने निर्णय लिया है कि इस उर्दू की परीक्षा को अब सामान्य कम्प्यूटर ज्ञान से बदला जाएगा।

इससे अभ्यर्थियों को भी आसानी होगी और साथ ही जनता को सरकारी कागजों की भाषा समझने में आसनी होगी। अभी तहसीलों में होने वाली सम्पत्ति की रजिस्ट्रियाँ, कोर्ट में किए जाने वाले मुकदमों और थानों में लिखी जाने वाली शिकायतों में बड़े स्तर पर फ़ारसी शब्दों का इस्तेमाल होता है।