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पब्लिक पूछ रही कौन बनेंगे CM, इधर BJP ने चुनाव जीतने वाले 9 MP और मोदी के 2 मंत्रियों का इस्तीफा लेकर बढ़ा दिया सस्पेंस

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा ने अपने 21 सांसदों को चुनाव लड़ाया था, जिनमें से 12 जीत कर आए हैं। अब इन सभी से इस्तीफा ले लिया गया है। बुधवार (6 दिसंबर, 2023) को पार्टी ने ये फैसला लिया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा ने इन सभी सांसदों के साथ बैठक की, फिर उनके साथ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलने पहुँचे। उनकी मौजूदगी में सभी सांसदों ने स्पीकर को इस्तीफा सौंपा। इसके साथ ही केंद्रीय कैबिनेट से 3 मंत्री भी कम हो गए हैं।

राजस्थान से जिन सांसदों ने इस्तीफा दिया है, वो हैं – जयपुर (ग्रामीण) के राज्यवर्धन सिंह राठौड़, राजसमंद से दीया कुमारी, अलवर से बाबा बालकनाथ और राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा। मध्य प्रदेश से जिन सांसदों ने इस्तीफा दिया है, वो हैं – मोरेना से नरेंद्र सिंह तोमर, दमोह से प्रह्लाद पटेल, जबलपुर से राकेश सिंह, सीधी से रीति पाठक और नर्मदापुरम से उदय प्रताप सिंह। छत्तीसगढ़ से इन सांसदों ने इस्तीफा दिया – रायगढ़ से गोमती साईं, बिलासपुर से अरुण साव और सुरगुजा से रेणुका सिंह।

इस तरह राजस्थान से 4, मध्य प्रदेश से 5 और छत्तीसगढ़ से 3 सांसदों ने इस्तीफा दिया। राठौड़ ने झोटवाड़ा, दीया ने विद्याधर नगर, बालकनाथ ने तिजारा, मीणा ने सवाई माधोपुर, तोमर ने दिमनी, पटेल ने नरसिंहपुर, राकेश ने जबलपुर पश्चिम, पाठक ने सीधी, उदय प्रताप ने गाडरवारा, साईं ने पथलगाँव, साव ने लोरमी और रेणुका ने भरतपुर-सोनहत से जीत दर्ज की है। मध्य प्रदेश में भाजपा ने 163, राजस्थान में 115 और छत्तीसगढ़ में 54 सीटें अपने नाम की हैं। महंत बालकनाथ योगी ने अभी इस्तीफा नहीं दिया है, लेकिन चर्चा है कि वो भी इस्तीफा दे देंगे।

भाजपा के कई सांसद चुनाव हार भी गए। राजस्थान में भगीरथ चौधरी (सांसद अजमेर से, चुनाव हारे किशनगढ़ से), नरेंद्र खीचड़ (लोकसभा सांसद झुंझनूँ से, हारे मंडावा विधानसभा क्षेत्र से) और देवजी पटेल (सांसद जालौर से, चुनाव हारे सांचौर से) चुनाव है गए। मध्य प्रदेश में मंडला से सांसद सिंह कुलस्ते जिन्हें निवास से लड़ाया गया था और सतना के गणेश सिंह चुनाव हार गए। इसी तरह छत्तीसगढ़ में विजय बघेल हार गए। उन्हें दुर्ग से लड़ाया गया था, जबकि वो पाटन से सांसद थे।

अमेरिकी संसद में भी हार्वर्ड, पेन और MIT अध्यक्षों की दिखी ‘यहूदी घृणा’, कहा- नरसंहार के नारे गलत नहीं, हत्याएँ होंगी तो देखेंगे

अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में 5 दिसम्बर को सुनवाई हुई है, जिसमें ‘कैम्पस के नेताओं को जिम्मेदार ठहराए जाने और यहूदी विरोधी भावनाओं को बढ़ावा देने’ को लेकर सुनवाई हुई। कॉलेजों में यहूदी विरोधी घृणा के कारण ये सुनवाई करनी पड़ी।

गौरतलब है कि 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल पर इस्लामी आतंकी संगठन हमास के हमले के बाद अमेरिका के कई विश्वविद्यालयों में छात्रों ने इसका जश्न मनाया था और यहूदियों के विरोध में नारे लगाए थे। यहूदी छात्रों को परेशान भी किया गया था। हार्वर्ड के छात्रों ने हमास के समर्थन में एक प्रेस रिलीज भी जारी किया था।

इस मामले में अब ‘कॉन्ग्रेस’ (अमेरिकी संसद) सुनवाई कर रही है। संसद ने अमेरिका के हार्वर्ड (Harvard) की अध्यक्ष क्लाऊडीन गे, मैसाचुएट्स इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (MIT) की अध्यक्ष सैली कोर्नब्लथ और पेन (Penn) विश्वविद्यालयों की अध्यक्ष एलिज़ाबेथ मैगिल को सुनवाई में बुलाया गया था।

इस दौरान जब कॉन्ग्रेस सदस्य एलिसी स्टेफनिक ने इन तीनों से यूनिवर्सिटी कैम्पस में यहूदियों के नरसंहार के नारे लगाए जाने की निंदा करने को कहा तो इससे इन्होंने मना कर दिया। उनका कहना था कि उनके विश्वविद्यालयों के नियमों के अंतर्गत यह गलत नहीं है। इसलिए वह इसको गलत नहीं ठहराएँगी।

अब स्टेफनिक ने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर इनके त्यागपत्र की माँग की है। उन्होंने एक्स पर लिखा, “हार्वर्ड, पेन और MIT की अध्यक्षों ने यह मानने से इनकार कर दिया है कि यहूदियों के नरसंहार का ऐलान उनके नियमों के अनुसार किसी की बेइज्जती या उत्पीड़न है। उन्होंने यहाँ तक कह दिया है कि यह नरसंहार के नारे कार्रवाई में बदलने जरूरी हैं। यानी नरसंहार हो। यह अस्वीकार्य और यहूदी विरोधी है। इन सभी को आज ही त्याग पत्र दे देना चाहिए।”

इस सुनवाई के दौरान स्टेफनिक ने प्रश्नों का इन तीनों से स्पष्ट रूप से ‘हाँ’ या ‘ना’ में उत्तर देने को कहा कि यहूदियों के नरसंहार के नारे लगाना उनके विश्वविद्यालयों के नियमों के अनुसार उत्पीड़न है या नहीं। हालाँकि, यह तीनों स्पष्ट जवाब देने से बचती रहीं और इधर-उधर घुमा कर उत्तर दिया।

इस पर MIT की अध्यक्ष कोर्नब्लथ ने कहा कि यहूदियों के नरसंहार के नारों को तभी उत्पीड़न माना जाएगा जब वह सच में बदल जाएँ। पेन विश्वविद्यालय की अध्यक्ष मैगिल ने कहा कि यह तबी उत्पीड़न जाएँगे जब यह आचरण बन जाएँ। हार्वर्ड की अध्यक्ष गे ने भी कुछ ऐसी ही बात की। इनके इस जवाबों से स्टेफनिक गुस्सा हो गईं और कहा कि इन जवाबों में कोई स्पष्टता नहीं है। उनका कहना था कि यह तीनों इस मामले में स्पष्ट जवाब नहीं दे रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह तीनों अपने विश्वविद्यालयों में यहूदियों के विरुद्ध नारों पर सही एक्शन नहीं ले पाईं।

स्टेफनिक की इन तीनों से काफी तगड़ी बहस हुई। स्टेफनिक का कहना था कि इन लोगों का जवाब हाँ में होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि इन तीनों का आचरण अस्वीकार्य है। उनका कहना था कि यहूदियों के खिलाफ नारों पर एक्शन ना ले पाना इन तीनों की भारी चूक है।

बीवी को खुश करने के लिए दूसरे का जला दिया प्राइवेट पार्ट, कार से फायर किए क्रैकर्स: पुलिस को वीडियोग्राफर ऑटो वाले की भी तलाश

सालगिरह पर अपनी पत्नी को इम्प्रेस करने के चक्कर में एक रईसजादे ने दूसरे व्यक्ति का प्राइवेट पार्ट जला दिया। घटना पंजाब के मोहाली की है। आरोपित रचित कपूर सालगिरह पर कार से पटाखे फोड़ रहा था। इसकी चपेट में पीछे से आ रहा एक स्कूटर सवार युवक आ गया और कथित तौर पर उसके प्राइवेट पार्ट जल गए।

घटना शनिवार (2 दिसंबर 2023) की है। पुलिस ने आरोपित को घटना के बाद गिरफ्तार कर लिया। घायल युवक का अस्पताल में इलाज चल रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना मोहाली के सेक्टर-69 से एयरपोर्ट रोड की है। यहाँ 2 दिसंबर की रात रचित कपूर ढाई करोड़ रुपए की लग्जरी कार मस्टैंग ले कर पहुँचा। कार में रचित की पत्नी भी सवार थी।

वह सड़क पर ही अपनी शादी की सालगिरह मनाने लगा। उसने अपनी कार पर पटाखे रख कर हवाई शॉट चलाया। पीछे से वीडियो बनाने के लिए उसने एक ऑटो ड्राइवर को पैसे दे रखे थे। इस स्टंट का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इसी आतिशबाजी के बीच एक स्कूटर सवार रचित की कार के बगल से गुजरा। स्कूटर सवार का आरोप है कि कार सवार द्वारा छोड़ा गया हवाई शॉट उसके कपड़ों पर आ गिरा। इस वजह से उसके कपड़ों के साथ प्राइवेट पार्ट भी जल गया।

पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने रचित कपूर के खिलाफ केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। आगे की जाँच और कार्रवाई के लिए पुलिस ने उसको 2 दिनों के कस्टडी रिमांड पर लिया था। शुरुआती पूछताछ में रचित ने बताया कि वो पटाखों वाला स्टंट कर अपनी बीवी को इम्प्रेस करना चाहता था।

जाँच में सामने आया है कि रचित की मस्टैंग कार का अब तक 14 बार चालान हो चुका है। इसमें 13 चालान चंडीगढ़ और 1 चालान केरल में हुआ है। घटना के बाद आरोपित अपनी कार को दिल्ली में छोड़ आया था। पुलिस कार बरामद करने दिल्ली रवाना हो चुकी है। पीछे से वीडियो बना रहे ऑटो ड्राइवर की भी तलाश की जा रही है। आरोपित रचित कपूर का चंडीगढ़ के सेक्टर-19 में कपड़ों का शोरूम है।

गुजरात का ध्वज, बिहार का स्तंभ: 7000 को राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा का निमंत्रण, विराट-सचिन से लेकर अमिताभ-अंबानी तक शामिल

अयोध्या में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम 22 जनवरी, 2024 को होना है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और RSS प्रमुख मोहन भागवत उपस्थित रहेंगे। 450 वर्षों के संघर्ष के बाद हिन्दुओं को राम मंदिर मिल रहा है, ऐसे में स्वाभाविक है कि उत्साह चौगुने स्तर पर होगा। ऐसे में ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ ने आम लोगों से अपील की है कि वो जहाँ हैं वहीं भजन-कीर्तन करें, आसपास के मंदिरों में कार्यक्रम आयोजित करें, अयोध्या में बहुत अधिक भीड़ न लगे इसके लिए ये कहा गया है।

राम मंदिर में गुजरात का ध्वज

राम मंदिर में गुजरात से आया ध्वज लहराएगा। द्वारकाधीश की भूमि पर अयोध्या नरेश के मंदिर के लिए ध्वज स्तम्भ बनाने का कार्य शुरू हो गया है। अहमदाबाद में ऐसे 7 ध्वस्त स्तम्भों का निर्माण चल रहा है। ‘श्री अंबिका इंजीनियरिंग वर्क्स’ को इन ध्वस्त स्तम्भों के निर्माण का कार्य सौंपा गया है। मुख्य स्तम्भ सहित इनका वजन 5500 किलोग्राम होगा। कंपनी के MD भारत मेवाड़ा ने भी इसकी पुष्टि की है। राम मंदिर के चारों ओर 800 मीटर लंबी रिंग रोड भी तैयार की गई है।

इस पथ पर चल कर मंदिर की पूरी परिक्रमा की जा सकेगी। परिक्रमा का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है। फर्श के 60% हिस्से पर मार्बल लगाया भी जा चुका है। नृत्य मंडप के साथ-साथ रंग मंडप का भी शिखर तैयार कर लिया गया है। वहीं गुजरात में जो स्तम्भ बनाए जा रहे हैं, उनकी लंबाई 44 फ़ीट है और उन्हें नागर शैली में बनाया जा रहा है। एक ध्वज स्तम्भ है, जबकि बाकी 6 ध्वज दंड। इन्हें बनाने के लिए पीतल की धातु का इस्तेमाल किया जा रहा है। शास्त्रों के हिसाब से इन्हें बनाया जा रहा है। मंदिर में प्रतिमा के बाद मुख्य केंद्र यही होगा।

बिहार के समाजसेवी राकेश पांडेय लगवा रहे ‘राम स्तम्भ’

वहीं ‘ब्रावो फार्मा’ के संस्थापक राकेश पांडेय ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए ‘राम स्तम्भ’ के निर्माण कार्य का बीड़ा उठाया है। हाल ही में चम्पारण के 100 युवाओं को कश्मीर के तीर्थस्थलों की निःशुल्क यात्रा कराने वाले राकेश पांडेय बिहार में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई सामाजिक कार्य कर रहे हैं। स्थानीय डिविजनल कमिश्नर द्वारा स्थापित ‘अयोध्या संरक्षण एवं विकास निधि समिति’ ने बताया कि 2 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा ये ‘राम स्तम्भ’ राम जन्मभूमि मंदिर की तरफ जाने वाले रास्ते में लगेगा और नगर के समृद्ध इतिहास को बताएगा।

अयोध्या में निर्माणाधीन राम मंदिर के दर्शन को पहुँचे उद्योगपति राकेश पांडेय

ऐसे 25 ‘राम स्तम्भ’ ‘ब्रावो फाउंडेशन’ द्वारा लगवाए जाएँगे। इनकी ऊँचाई 6 मीटर और चौड़ाई 1.5 मीटर होगी। ‘अयोध्या संरक्षण एवं विकास निधि समिति’ ने ‘ब्रावो फाउंडेशन’ का स्वागत करते हुए अयोध्या की महिमा में योगदान के लिए धन्यवाद दिया। संस्था ने कहा कि इन ‘राम स्तम्भ’ से न सिर्फ अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत में इनका अलग स्थान होगा। साथ ही ये स्तम्भ आर्किटेक्चर के मामले में दर्शनीय होंगे और श्रद्धा का भी केंद्र होंगे। राकेश पांडेय राम मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम में भी मौजूद रहेंगे।

राम मंदिर के लिए 8000 विशेष अतिथियों को न्योता

राम मंदिर के लिए 8000 गणमान्य अतिथियों को न्योता दिया गया है, जो प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। इनमें पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रहे विराट कोहली, वयोवृद्ध अभिनेता अमिताभ बच्चन और देश के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी को भी आमंत्रण भेजा गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। सचिन और विराट अक्सर धार्मिक कार्यक्रमों का हिस्सा बनते रहते हैं।

विराट कोहली को वृन्दावन स्थित प्रेमानंद महाराज के आश्रम में और महाकाल मंदिर में भी पूजा-अर्चना करते हुए पत्नी अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के साथ देखा गया था। इसी तरह सचिन तेंदुलकर भी अक्सर गणेश चतुर्थी पर विधि-विधान से पूजा करते रहे हैं। 1990 के राम मंदिर आंदोलन में बलिदान देने वाले कारसेवकों के परिवारों को भी बुलाया गया है। साथ ही 4000 साधु-संत देश भर से इस कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। कार्यक्रम काफी भव्य होने वाला है और इसमें सभी देशों के राजदूत भी उपस्थित रहेंगे।

कर्नाटक हाई कोर्ट में पोर्न, 6 अलग-अलग कोर्ट हॉल में चलती रही: देखने के बाद जज ने बंद करवाया ऑनलाइन काम

कर्नाटक हाईकोर्ट ने ऑनलाइन सुनवाई के दौरान पोर्न चलने के कारण इन सुविधाओं को कुछ समय के लिए निलम्बित कर दिया है। बताया जा रहा है कि किसी शरारती तत्व ने हाईकोर्ट के सर्वर में सेंध लगा कर पोर्न चला दी, जो कि 6 अलग-अलग कोर्ट हॉल में चलती रही।

जानकारी के अनुसार, यह वाकया सोमवार 4 दिसम्बर 2023 की दोपहर को हुआ, जब कोर्ट की सुनवाई चल रही थी। इसी दौरान कोर्ट के ऑनलाइन सुनवाई प्लेटफॉर्म ज़ूम के एक सर्वर को किसी शरारती तत्व ने हैक करके उस पर पोर्न चला दी। यही पोर्न अन्य कोर्ट रूम में भी चलने लगी।

इसके अगले दिन जब कोर्ट कर्मचारियों ने दोबारा ऑनलाइन कॉन्फ्रेंसिंग को शुरू करना चाहा तो दुबारा से शरारती तत्वों ने पोर्न चलाने की कोशिश की। इसके पश्चात कोर्ट ने निर्णय लिया कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधाओं को बंद कर दिया जाए। कर्नाटक हाईकोर्ट ऑनलाइन सुनवाई की सुविधा के लिए चीनी कम्पनी ज़ूम के प्लेटफॉर्म का उपयोग करता है।

कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रसन्ना बी वराले ने कहा, “एक गंभीर समस्या पैदा हुई है। हम लाइवस्ट्रीमिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को रोक रहे हैं। तकनीक का गलत इस्तेमाल करके कुछ गड़बड़ की जा रही है।”

कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा, “कर्नाटक हाईकोर्ट तकनीक को लोगों की भलाई के लिए उपयोग करने का हमेशा पक्ष लेता है। हालाँकि, इस परिस्थिति के चलते हमें यह सुविधा बंद करने का निर्णय लेना पड़ रहा है।”

कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस घटना पर अब एक FIR भी दर्ज करवा दी है। कर्नाटक पुलिस ने इस मामले में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ अश्लील सामग्री चलाने और IT एक्ट 2000 का उल्लंघन करने के आरोप में FIR दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि उसने वह आईपी एड्रेस पता लगा लिए हैं, जहाँ से यह पोर्न चलाई गई।

द हिन्दू की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि जब मंगलवार को सीमित एक्सेस के साथ ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई चालू करने का प्रयास किया गया तो फिर से पोर्न चलाए जाने की कोशिश हुई। ऐसा तब हुआ जब इस दौरान केवल वकीलों को ही इसका एक्सेस दिया गया था।

3500 मंदिर तोड़े, 2400 महिलाओं का बलात्कार और नंगा करके परेड… बांग्लादेश में बाबरी से पहले ही शुरू हो गया था आतंक, पुलिस के सामने आग लगा रही थी इस्लामी भीड़

6 दिसंबर, 1992 – ये वो तारीख़ है जिसकी बरसी हर साल हिन्दू संगठनों द्वारा ‘शौर्य दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। हालाँकि, हिन्दू विरोधी इस दिन हिन्दुओं को ये एहसास दिलाने की कोशिश करते हैं कि उन्होंने एक दूसरे मजहब के इबादतगाह को ध्वस्त कर दिया। जबकि सचाई ये है कि उस ढाँचे को इस्लामी आक्रांताओं द्वारा राम मंदिर को ध्वस्त कर के बनवाया गया है। इस दौरान यही वामपंथी-लिबरल गिरोह ये भूल जाता है कि जब हिन्दू राम मंदिर के लिए संघर्ष कर रहे थे, उस दौरान बांग्लादेश में क्या हो रहा था।

असल में राम मंदिर के लिए जब भारत में संघर्ष चल रहा था और बाबरी ढाँचे के ध्वस्त होने की अफवाह भर फैली थी, तभी बांग्लादेश में हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा शुरू हो गई थी। हिन्दुओं ने तो 5 शताब्दी तक संघर्ष कर के न्यायिक रास्ते से राम मंदिर का अधिकार प्राप्त किया, लेकिन इस्लामी भीड़ नियम-कायदे नहीं मानती है। 2 नवंबर, 1989 – ये वो दिन था जब प्रतीकात्मक रूप से राम मंदिर के लिए पहला पत्थर उस विवादित स्थल पर रखा गया था।

जैसे ही बांग्लादेश में इसकी खबर पहुँची, वहाँ हिंसा शुरू हो गई। अक्टूबर 1990 में ही बांग्लादेश की मीडिया द्वारा ये अफवाह फैला दी गई थी कि भारत में बाबरी ढाँचे को ध्वस्त कर दिया गया है। वहाँ की मीडिया ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई। बांग्लादेश में उस समय कैसा माहौल था उसे इसी से समझ सकते हैं कि 1988 में तत्कालीन तानाशाह राष्ट्रपति हुसैन मुहम्मद इरशाद ने इस्लाम को बांग्लादेश का आधिकारिक मजहब घोषित कर दिया। अब आते हैं 30 अक्टूबर, 1990 वाले दिन।

इरशाद उस दिन ‘बंग भवन’ में एक यूथ कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। वो कह रहे थे कि जब वो वो वहाँ हैं अल्पसंख्यकों के खिलाफ कोई हिंसा नहीं होगी। ठीक उसी समय कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ हिन्दुओं की दुकानों पर हमले कर रही थी। भीड़ ने गौरी मठ को निशाना बनाया। जो ‘बंग भवन’ के दक्षिण में स्थित था। यानी, इरशाद के कार्यक्रम से कुछ किलोमीटर की दूरी पर हिन्दुओं से जुड़ी संपत्तियों को आग के हवाले किया जा रहा था। ‘ह्यूमन राइट्स कॉन्ग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज (HRCBM)’ ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ये सब पुलिस-प्रशासन के सामने हुआ।

रिपोर्ट में कहा गया कि 1989-90 में बांग्लादेश में हिन्दुओं के खिलाफ जो हिंसा हुई उसे दंगा नहीं कहा जा सकता, क्योंकि ये एक ही पक्ष द्वारा किया गया था 1964 की तरह। इन अत्याचारों में तब की सत्ताधारी पार्टियाँ भी शामिल थीं। 1992 में सत्ताधारी पार्टी BNP (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) का साथी जमात-ए-इस्लामी खुद हिंसा में शामिल था। रिपोर्ट में बताया गया है कि सिर्फ 1989-90 में 1000 से ज़्यादा महिलाओं का बलात्कार हुआ, सैकड़ों मंदिरों को ध्वस्त कर दिया गया और हिन्दू अल्पसंख्यकों के घरों को लूट कर आग के हवाले कर दिया गया।

6 दिसंबर, 1992 की रात को तो चटगाँव में हिन्दुओं के खिलाफ आतंक का नंगा नाच हुआ। कुतुब्दीया में 3 बच्चों को ज़िंदा जला दिया गया। इसके बाद राजधानी ढाका और मुल्क के अन्य हिस्सों में हिंसा फैली। HBCUC (हिन्दू, बौद्ध, क्रिस्चियन यूनिटी काउंसिल) ने ग्राउंड पर दौरा कर के रिपोर्ट तैयार की थी और नुकसान का पता लगाया था। इस रिपोर्ट में सामने आया था कि हिन्दुओं के 28000 घरों, 3500 मंदिरों/धार्मिक संस्थानों और 2500 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को या तो नुकसान पहुँचाया गया था या उन्हें पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया था।

इस रिपोर्ट की मानें तो 15 लोगों की हत्या कर दी गई थी और 2400 हिन्दू महिलाओं का बलात्कार हुआ था। सरकार ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए न तो कोई प्रयास किया और न ही इस्लामी कट्टरपंथियों को रोकने की कोई कोशिश की। अनुमान लगाया गया था कि हिन्दुओं के 14.80 करोड़ टका की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया। उस समय ये 46.25 लाख डॉलर के करीब होगा, जिसकी वैल्यू आज की तारीख़ में 39 करोड़ रुपए के आसपास होगी।

ओल्ड ढाका स्थित शंखरी बाजार में तो हिन्दुओं की एक भी दुकान को नहीं छोड़ा गया था। सिलहट जिले में तो अल्पसंख्यकों के साथ ऐसा बुरा बर्ताव हुआ कि उनकी आने वाली कई पीढ़ियों को ये याद रहेगा। भोला से तत्कालीन सांसद तौफ़ीद अहमद और ‘ऑल पार्टी अलायंस’ के सेक्रेटरी नरुल इस्लाम नाहिद का मानना था कि ऊपर जो आँकड़े हैं, वो कम ही थे। मतलब अत्याचार इससे ज़्यादा हुआ था। महिलाओं के साथ न सिर्फ सामूहिक बलात्कार हुआ था, बल्कि उन्हें सड़क पर नग्न चलने के लिए बाध्य कर दिया गया था।

कई कम उम्र की लड़कियों का भी बलात्कार हुआ, जिनमें 5 साल की लड़कियाँ भी शामिल थीं। कुछ गाँवों में तो 5 साल से लेकर 70 साल तक की किसी भी महिला को नहीं छोड़ा गया था। तस्लीमा नसरीन ने अपने उपन्यास ‘लज्जा’ में भी इसका जिक्र किया है कि कैसे 1992 में ढाकेश्वरी मंदिर पर हमला किया गया था। मुख्य मंदिर को फूँक दिया गया। देवी-देवताओं के मनोरंजन के लिए बने ‘नाटमंदिर’ को भी आग के हवाले कर दिया गया। मंदिर के पास स्थित श्रीदम घोष को भी जला दिया गया।

माधव गुड़िया मठ को भी ध्वस्त कर दिया गया। जयकाली मंदिर को भी नहीं छोड़ा गया। ब्रह्मो समाज के परिसर में घुस कर सब कुछ तबाह कर दिया गया। डेमरा में शोणि अखाड़ा मंदिर को लूट लिया गया। बृहभद्र और लोकी बाजार में जहाँ तक नज़र जाती थी तबाही ही दिखती थी। इस्लामपुर रोड पर छाता और आभूषण बेचने वाले दुकानों को लूट लिया गया। 300 आतंकियों ने मिल कर 25 घरों को निशाना बनाया। कई हिंदू दुकानों के नाम को उर्दू नामों से बदल दिया गया।

लेखिका तस्लीमा नसरीन ने इन घटनाओं का जिक्र ‘लज्जा’ में किया है। वो लिखती हैं कि कैसे नोबाबपुर रोड पर स्थित ‘मोरोचंद’ नाम की एक मिठाई की दुकान को तोड़ डाला गया। साथ ही रयेर बाजार स्थित माँ काली के मंदिर में उनकी प्रतिमा को तोड़ कर जमीन पर गिरा दिया गया। ठठरी बाजार में बट्टाली मंदिर को तबाह कर के लूट लिया गया। नोबाबपुर में ‘कामधोन पोशारी’ और ‘शुक्ल मिष्ठान्न भण्डार’ जैसी दुकानों को लूट लिया गया। जतिन एन्ड कंपनी की एक फैक्ट्री को ही आग के हवाले कर दिया गया।

सोडोरघट रोड पर स्थित रतन शंकर बाजार को पूरी तरह तबाह कर दिया गया। इसी तरह नाग देवता के मंदिर को धूल में मिला दिया गया। तस्लीमा नसरीन लिखती हैं कि ये दंगे नहीं थे, क्योंकि दंगा में दोनों पक्ष झगड़ते हैं। जबकि ये एक पक्ष द्वारा दूसरे समुदाय पर अत्याचार था। क्या आपने बाबरी पर हंगामा मचाने वालों को कभी इस तबाही का जिक्र करते हुए देखा है? जिस इस्लामी भीड़ ने बांग्लादेश में 1989-92 में ये तबाही मचाई, हिन्दुओं पर प्रताड़ित किया – इस पर बात क्यों नहीं की जाती है।

लालबाग रोड पर स्थित दुर्गा मंदिर, पुष्पराज साहा लेन पर स्थित गिरीगोवर्धन जीतू मंदिर, हरनाथ घोष लेन पर स्थित रघुनाथ जिउ अखाड़ा और लालबाग़ स्थित कमरांगीचर शमशान – इन सभी को 1990 में ही बर्बाद कर दिया गया था। भारतीय दूतावास की तरफ हजारों मुस्लिमों ने मार्च किया। इसी भारत ने बांग्लादेश को आज़ादी दिलाई थी। उस दौरान सूत्रपुर में 14 मंदिरों को ध्वस्त किया गया था। नगर बेलटोली लेन में 17 हिन्दुओं को चाकू घोंप दिया गया था।

10 सुरक्षाबलों का हत्यारा आतंकी हंजला अदनान कराची में खल्लास: ‘अज्ञात बंदूकधारियों’ ने चलाई गोली, पाकिस्तानी सेना करवा रही थी इलाज

लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी हंजला अदनान (Hanzla Adnan) मारा गया है। हंजला अदनान ने जम्मू कश्मीर में 2015 और 2016 के दौरान सुरक्षा बलों के काफिलों पर हमला करवाया था। इनमें 10 सुरक्षाबल बलिदान हुए थे। हंज़ला की हत्या पाकिस्तान के शहर कराची में अज्ञात बंदूकधारियों ने कर दी। वह लश्कर के सरगना हाफिज सईद का ख़ास था।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, कराची में 2 और 3 दिसम्बर 2023 की रात को हंज़ला अदनान को उसके घर के बाहर अज्ञात बंदूकधारियों ने मार दिया। आश्चर्य की बात यह कि इसके बाद इस आतंकी को पाकिस्तानी सेना अस्पताल ले गई, जहाँ उसकी मौत हो गई। इस हमले में उसे चार गोलियाँ लगी थीं। इलाज के दौरान 5 दिसम्बर 2023 को हंजला की मौत हो गई।

हंज़ला अदनान हाफिज सईद के साथ ही उसके दामाद खालिद वलीद के लिए काम करता था। 5 अगस्त 2015 को इसी हंजला के आदेश पर दो आतंकियों ने साथ मिल कर जम्मू श्रीनगर हाइवे पर सीमा सुरक्षा बल के एक काफिले पर हमला कर दिया था। इस हमले में 2 BSF जवानों की मौत हो गई थी जबकि 10 जवान घायल हो गए थे।

इस हमले में जवानों ने जवाबी कार्रवाई में एक आतंकी को मार गिराया था जबकी दूसरे को जिंदा पकड़ लिया गया था। इससे पूछताछ में यह जानकारी सामने आई थी कि यह दोनों ही आंतकी पाकिस्तान से भारत में घुसपैठ करके आए थे। हंज़ला अदनान इन आतंकियों का हैंडलर था, जो पाकिस्तान में बैठ कर इन हमलों की साजिश रच रहा था।

इसके बाद हंज़ला अदनान ने इसके बाद 25 जून 2016 को कश्मीर के पंपोर इलाके में एक CRPF के काफिले पर हमला करवाया था। इस हमले में 8 CRPF जवानों की मौत हुई थी। हमले में बड़ी संख्या में जवान घायल भी हुए थे।

CRPF के ये जवान पास की एक फायरिंग रेंज से प्रैक्टिस करके वापस लौट रहे थे, तब लश्कर के तीन आतंकियों ने इन पर हमला कर दिया था। इस हमले की जवाबी कार्रवाई में दो आतंकी मौके पर मार गिराए गए थे, जबकि एक हमलावर फरार होने में सफल रहा था। यह तीनों आतंकी पाकिस्तानी बताए गए थे।

यह भी बताया गया था कि कश्मीर में नया बना आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट की जिम्मेदारी भी यही हंज़ला ही सम्भाल रहा था। यह उत्तरी कश्मीर में इस आतंकी समूह की गतिविधियों को हैंडल करता था। यहाँ नए आतंकी भेजने और हमले करवाने की जिम्मेदारी पाकिस्तान ने इसे दी थी।

बताते चलें कि इससे पहले इसी सप्ताह में 26/11 के मुंबई हमलों के साजिशकर्ता साजिद मीर के खाने में जहर मिलाकर उसे खिला दिया गया था। इस काम को भी किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा किया गया बताया गया। जानकारी के अनुसार, साजिद अब वेंटीलेटर पर है।

अज्ञात बन्दूकधारियों ने बीते दिनों पाकिस्तान के भीतर ऐसे कई आतंकियों को मारा है, जो भारत में हमले कराने के दोषी रहे हैं। मार्च 2022 से लेकर अक्टूबर 2023 के बीच ऐसे कम से कम 15 आतंकियों की हत्या अज्ञात बंदूकधारियों ने की है। इनमें खालिस्तानी आतंकी परमजीत पंजवार और एअर इंडिया विमान का अपहरण करने वाले आतंकी ज़हर मिस्त्री जैसे नाम शामिल हैं।

जिसके घर 5 करोड़ रुपए, उसके पिता चौकीदार… अब कुएँ में लाश: महादेव ऐप घोटाला और CM भूपेश बघेल को ₹508 करोड़ रिश्वत से है कनेक्शन

छत्तीसगढ़ के महादेव बुक सट्टा घोटाले में गिरफ्तार एक आरोपित असीम दास के पिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। उनका शव एक कुँए में तैरता पाया गया है। जिस फार्म हाउस में सुशील दास की मौत हुई, वहाँ वह चौकीदारी का काम करते थे। पूरे मामले में आश्चर्यजनक यह भी है कि असीम के घर पर 2 नवम्बर 2023 को ED ने जब छापा मारा था, तब 5 करोड़ रुपए बरामद हुए थे।

असीम दास के 62 वर्षीय पिता सुशील दास की मौत दुर्ग जिले के अंडा थाना क्षेत्र में अछौती गाँव में हुई, जहाँ पुलिस ने उनका शव एक कुँए में तैरता पाया। आशंका यह भी जताई गई है कि सुशील दास ने मौत से पहले शराब पी थी और इसके बाद कुँए में छलाँग लगाकर उन्होंने आत्महत्या कर ली।

यह भी जानकारी सामने आई है कि असीम दास के पिता उसके गिरफ्तार होने के बाद से काफी परेशान थे और इसी कारण से वह लगातर शराब पीने लगे थे। महादेव बुक सट्टा घोटाले में आरोपित असीम के घर पर 2 नवम्बर 2023 को ED ने छापा मारा था। इसके पश्चात न्यायालय में पेश करके उसे जेल भेज दिया था। वह तबसे ही जेल में बंद है। ED का कहना था कि असीम दास ही नेताओं को इस घोटाले के पैसे पहुँचाता था।

गौरतलब है कि महादेव बुक घोटाला में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नाम भी आया था। यह कहा गया था कि इस घोटाले के सम्बन्ध में उन्हें ₹508 करोड़ की धनराशि दी गई। यह खुलासा असीम दास के हवाले से ही ED ने किया था।

ED ने कहा था, “महादेव ऐप के कुछ बेनामी बैंक खातों का पता लगाया है, जिसमें 15.59 करोड़ रुपए की शेष राशि फ्रीज कर दी गई है। असीम दास को गिरफ्तार कर लिया है। उससे पूछताछ और उसके पास से बरामद फोन की फॉरेंसिक जाँच से शुभम सोनी (महादेव नेटवर्क के उच्च पदस्थ आरोपितों में से एक) द्वारा भेजे गए एक ईमेल में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पूर्व में नियमित भुगतान किए गए हैं और अब तक महादेव ऐप द्वारा लगभग 508 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है।”

इस महादेव बुक घोटाला ऐप में नाम आने के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की छवि को काफी धक्का लगा था। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में इस मुद्दे को प्रधानमंत्री मोदी ने भी उठाया था। राज्य में कॉन्ग्रेस की हार में इस घोटाले का भी बड़ा रोल माना जा रहा है। महादेव ऐप के मालिक शुभम सोनी का एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें वह भूपेश बघेल को पैसे देने की बात कहता दिखा था।

कैसे काम करता था महादेव बुक ऐप?

महादेव ऐप दुबई से ऑपरेट होता था। इसके अधिकांश यूजर छत्तीसगढ़ के थे। लोग ऐड के साथ-साथ एजेंटों के जरिए सट्टेबाजी के इस जाल में फँसते थे। इसके बाद वे दिए गए या बताए गए नंबर पर संपर्क करते थे। इस ऐप की खास बात यह थी कि यूजर दिए गए नंबर पर सिर्फ ह्वाट्सएप के जरिए ही संपर्क कर सकते थे। संपर्क करने के बाद उन्हें एक प्राइवेट ग्रुप में जोड़ा जाता था, जहाँ सट्टेबाजी का खेल शुरू होता था।

प्राइवेट ग्रुप में जोड़ने के बाद यूजर को कंपनी से संबंधित 5-6 वेबसाइटों पर अपना अकाउंट बनाना पड़ता था। इसके बाद यूजर को एक कॉन्टैक्ट नंबर दिया जाता था। इस नंबर के जरिए यूजर अपने अकाउंट में पैसे जमा करते थे। इससे उन्हें प्वॉइंट मिलते थे। इन प्वॉइंट के आधार पर ऐप पर विभिन्न खेलों में सट्टेबाजी की जाती थी।

शुरुआत में यूजर को खूब जिताया जाता था। इससे उसमें उत्साह जगता था और वह अधिक पैसे जमा करके प्वॉइंट्स बटोर कर सट्टेबाजी करता था। हालाँकि, बाद में वह अपना सारा पैसा हार जाता था। इससे कंपनी को फायदा होता था। जो यूजर शुरुआत में जीतने के बाद अपने प्वॉइंट को एनकैश कराना चाहता था, उसे एक और नंबर दिया जाता था। उससे संपर्क करने पर उसे भुगतान हो जाता था। ये सारे लेनदेन बेनामी खातों से होते थे।

ED ने अपनी जाँच में पाया कि सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल सट्टेबाजी से होने वाली कमाई को अपने विदेशी खातों में भेजने के लिए हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल करते थे। महादेव ऐप के हवाला का सारा काम कोलकाता का रहने वाला विकास छपरिया देखता था। इस मामले की जाँच में जब ED ने दबाव जारी रखा, तो सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के परिवार के ज्यादातर लोग दुबई में शिफ्ट हो गए।

कुल मिलाकर ये लोग दुबई में बैठकर भारत से कमाई करते थे, लेकिन भारत सरकार को किसी तरह का टैक्स नहीं देते थे। भारत सरकार ही नहीं, बल्कि यूजर्स को भी हजारों करोड़ रुपए का चूना इस ऐप के जरिए लगाया गया। इससे हुई कमाई को फिल्म इंडस्ट्री, होटल व्यापार, रियल एस्टेट सहित विभिन्न जगहों पर इन्वेस्ट करने के साथ-साथ हवाला के जरिए नौकरशाहों और सफेदपोशों को भी भुगतान की गई।

नेशनल खिलाड़ी, लॉरेंस बिश्नोई का ‘मैनेजर’, सब-इंस्पेक्टर का बेटा… करणी सेना अध्यक्ष की हत्या की साजिश रचने वाला संपत नेहरा, करता सलमान खान का भी मर्डर

राजस्थान की राजधानी जयपुर में मंगलवार (5 दिसंबर, 2023) को करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की घर में घुस कर हत्या कर दी गई, जिसका CCTV वीडियो भी सामने आया। इसके बाद राजपूत समाज ने पूरे राजस्थान में बंद का आह्वान किया है। अब सामने आया है कि पंजाब के बठिंडा स्थित जेल में बंद गैंगस्टर संपत नेहरा ने इस हत्याकांड की साजिश रची। वो लॉरेंस बिश्नोई का गैंगस्टर है। इस हत्याकांड की साजिश के संबंध में 10 महीने पहले ही राजस्थान पुलिस के पास इनपुट आ गया था।

संपत नेहरा कभी राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी हुआ करता था, लेकिन फिर वो अपराध की दुनिया में घुस गया। कॉलेज के दिनों में लॉरेंस बिश्नोई से उसकी दोस्ती हुई थी। उसे एक ऐसा अपराधी माना जाता है, जिस पर लॉरेंस बिश्नोई आँख बंद कर के भरोसा करता रहा है। खेल में संपत नेहरा ने कई अवॉर्ड जीते थे। उसे लॉरेंस बिश्नोई का सबसे खास गुर्गा माना जाता है। कई गैंगवॉर, हथियारों की सप्लाई और हवाला के पैसों को इधर-उधर भेजना – इन सब में संपत नेहरा एक्सपर्ट है।

वो भी लॉरेंस बिश्नोई की तरह ही जेल से ही अपराध का गिरोह चलाता है। संपत नेहरा को लॉरेंस बिश्रोई गैंग में नए लड़कों को जोड़ने और उन्हें हथियार उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। संपत नेहरा एक तरह से बिश्नोई गैंग का ‘मैनेजर’ है। संपत नेहरा जब जेल से बाहर था तब वो अपराध को अंजाम देने के बाद अपनी पहचान बदल कर दक्षिण भारत में भाग जाता था और वहाँ रहने लगता था। उसे अभिनेता सलमान खान की हत्या की साजिश रचने के मामले में गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें लॉरेंस बिश्नोई कई बार धमकी दे चुका है।

संपत नेहरा राजस्थान के रायगढ़ का रहने वाला है और उसके पिता रामचंदर चंडीगढ़ पुलिस में ASI हुआ करते थे। उसका बचपन पंजाब में ही बीता। पंजाब यूनिवर्सिटी में उसकी मुलाकात लॉरेंस बिश्नोई से हुई। DAV कॉलेज में वो बिश्नोई का जूनियर था। डीकैथलॉन हर्डल रेस खेल में उसने राष्ट्रिय स्तर पर सिल्वर मेडल जीता। लॉरेंस बिश्नोई ने कॉलेज में SOPU (स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ऑफ पंजाब यूनिवर्सिटी) नामक ग्रुप बनाई थी, जिसका मुखिया संपत नेहरा ही था। 2016 में कार लूट में वो पहली बार गिरफ्तार हुआ।

उस पर रंगदारी से जुड़े कई मामला दर्ज हैं और वो पहचान छिपाने में एक्सपर्ट है। उस पर 25 मामले दर्ज हैं, जिनमें 12 केस मर्डर के हैं। उस पर 2 लाख रुपए का इनाम है। पंजाब, राजस्थान और हरियाणा – 3 राज्यों में उसने आतंक फैलाया। संपत नेहरा ने मुंबई जाकर सलमान खान के घर की रेकी भी की थी। उसे ही सलमान खान की हत्या का काम लॉरेंस बिश्नोई को सौंपा था। उन्हें निशाना बनाने के लिए खरीदी गई राइफल उसने ही 4 लाख रुपए में खरीदी थी।

वो तेलंगाना में पहचान छिपा कर इस साजिश में रचा हुआ था, लेकिन हरियाणा पुलिस ने उससे पहले ही उसे गिरफ्तार कर लिया। लॉरेंस बिश्नोई ने एक बुकी को ‘कच्चा चबा जाऊँगा’ कह कर धमकाया था, साथ ही पंजाब के गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या में भी उसका नाम आया था। इन मामलों में दिल्ली पुलिस ने संपत नेहरा को हिरासत में लेकर पूछताछ की। कुछ अन्य पंजाबी गायक भी बिश्नोई गैंग के निशाने पर हैं। संपत नेहरा पहले दिल्ली की मंडोली जेल में बंद था और उसने अपनी जान को खतरा बताया था जिसके बाद उसे तिहाड़ में भेजा गया था।

बठिंडा जेल में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के कुछ अन्य अपराधी भी बंद हैं। उस पर 12 हत्याओं के अलावा गैर-इरादतन हत्या के 6 और डकैती के भी 5 मामले दर्ज हैं। साथ ही फिरौती के 3 मामले उस पर दर्ज हैं। साइबराबाद से गिरफ्तार संपत नेहरा 17 जनवरी, 2018 को राजस्थान के सादुलपुरा कोर्ट परिसर में हिस्ट्रीशीटर अजय जैतपुरा की हत्या में भी वॉन्टेड है। हरियाणा पुलिस को उसे गिरफ्तार करने में कई दिन लगे थे, जिस दौरान ह्यूमन इंटेलिजेंस से लेकर तकनीकी सर्विलांस तक का सहारा लिया गया।

15 दिन हरियाणा पुलिस ने उसकी गिरफ़्तारी के लिए तेलंगाना में डेरा डाला। ऑपरेशन 3 दिनों तक चला। हैदराबाद में 2 MBA ग्रेजुएट्स के साथ उसने फ़्लैट ले रखा था। 8 हत्या के प्रयासों के मामले में भी शामिल होने की बात उसने कबूल की है। मानेसर में बेस बना कर वो गुरुग्राम में अपना नेटवर्क फैला रहा था। उसने अनिल चिप्पी और काला जठेरी गैंग से हाथ मिलाया था। गुरुग्राम में प्रभाव रखने वाले कुशाल और अमित डगर गैंग को हटाने की उसने साजिश रची थी।

संपत नेहरा ने 5 साल पहले कोर्ट में गिड़गिड़ाते हुए अपने लिए बुलेटप्रूफ जैकेट तक की माँग कर दी थी। उसने कहा था कि विरोधी गैंग उसकी हत्या करा सकते हैं। कोर्ट ने पुलिस को उसकी सुरक्षा के बंदोबस्त करने के निर्देश दिए थे। जब हत्या के मामले में पहलवान सुहील कुमार मंडोली के जेल में डाले गए, तब संपत नेहरा ने खुद को जान का खतरा बताया था। तभी उसे शिफ्ट किया गया था। अब करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या में वो फिर से सुर्ख़ियों में है।

इस मामले में पुलिस ने जयपुर के झोटवाड़ा निवासी रोहित राठौड़ को गिरफ्तार किया है। वो मूल रूप से नागौर के मकराना का रहने वाला है। वहीं हरियाणा के महेंद्रगढ़ के रहने वाले नितिन फौजी को भी गिरफ्तार किया गया है। बाड़मेर, चूरू और राजसमंद में भी विरोध प्रदर्शन चालू है और बाजार बंद करवा दिए गए हैं। बता दें कि सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के घर में घुस कर हत्यारों ने बातचीत करते-करते अचानक 20 सेकेण्ड में ताबड़तोड़ 17 राउंड फायरिंग कर डाली जिसमें उनकी मौत हो गई।

जिन सनातनियों को डेंगू-मलेरिया बताया CM के बेटे ने, उसी राज्य में तूफान-बारिश के बीच राहत पहुँचा रही BJP-RSS

तमिलनाडु में तूफ़ान मिचौंग (Cyclone Michaung) से भारी तबाही मची है। तमिलनाडु में इस तूफ़ान से अब तक 17 मौतें हो चुकी हैं। अभी भी चेन्नई समेत कई शहरों के बड़े हिस्से पानी में डूबे हैं। इस बीच लोगों की मदद और राहत बचाव के लिए भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे हुए हैं।

मौसम विभाग का कहना है कि मिचौंग से होने वाली बारिश अब पूरी हो गई है। चेन्नई में ट्रेनों का संचालन भी दोबारा चालू हो गया है। चेन्नई के एयरपोर्ट पर भी पानी भर गया था, जिसे निकाल कर अब उड़ानें भी चालू कर दी गई हैं।

तूफ़ान मिचौंग के कारण चेन्नई शहर में हुई बारिश बीते सात दशक में सबसे अधिक हुई है। इस दौरान चेनई के अधिकांश इलाके जलमग्न हो गए। इनमें कई पॉश कॉलोनी भी शामिल हैं। इन सभी इलाकों में राहत बचाव टीमें अब पहुँच रही हैं।

इस मिचौंग तूफ़ान के बाद बनी गंभीर परिस्थितयों में भाजपा के कार्यकर्ता लगातार लोगों को राहत पहुँचा रहे हैं। भाजपा के कार्यकर्ता तूफ़ान से प्रभावित इलाकों में लोगों को फ़ूड पैकेट, दवाइयाँ और अन्य राहत का सामान बाँट रहे हैं।

चेन्नई के अंदर जलमग्न इलाकों में भाजपा कार्यकर्ता घर-घर जाकर उन्हें राहत पहुँचा रहे। तमिलनाडु भाजपा के इस कदम की अब प्रशंसा हो रही है। इन कार्यकर्ताओं ने कई जगह पर फ़ूड स्टाल भी लगाए हैं, जहाँ से लोगों को खाना बाँटा जा रहा है।

तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के अन्नामलाई खुद राहत बचाव कार्यक्रम को देख रहे हैं। अन्य प्रदेशों की भाजपा यूनिट ने भी तमिलनाडु में राहत सामग्री भेजी है। गोवा, कर्नाटक, केरल समेत अन्य राज्यों से भाजपा कार्यकर्ता राहत सामग्री लेकर तमिलनाडु के भीतर पहुँच रहे हैं।

इस बीच मौसम विभाग ने बताया है कि अब यह तूफ़ान आंध्र प्रदेश पहुँच कर एक दबाव क्षेत्र में बदल चुका है। इसके कारण आज आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भारी बारिश होने की संभावना है।

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को डेंगू मलेरिया के समान बताया था। हालाँकि अब अधिकांश सनातनी कार्यकर्ता ही तमिलनाडु में राहत बचाव में जुटे हुए हैं।

तमिलनाडु में इस तूफ़ान के कारण हजारों एकड़ फसलें भी डूबी हुई हैं। राज्य के बड़े हिस्से में बिजली और मोबाइल नेटवर्क भी बाधित है, इसे दोबारा चालू करने का प्रयास किया जा रहा है। अब आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा को हाई अलर्ट पर रखा गया है।