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शुरू होते ही खत्म हो गया ‘I.N.D.I.A.’: कॉन्ग्रेस ने दिल्ली की सातों सीटों पर लड़ने का किया ऐलान, कहा – AAP के 2 बड़े नेता भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में

लोकसभा चुनाव को देखते हुए विपक्षी दलों को एकजुट करने के लिए बनाया गया गठबंधन खटाई में पड़ता दिख रहा है। दरअसल, कॉन्ग्रेस ने आगामी लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सभी 7 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। पार्टी हाईकमान की बैठक के बाद कॉन्ग्रेस नेता अलका लांबा ने इसकी जानकारी दी।

मीडिया से बात करते हुए अलका लांबा ने कहा है, ”तीन घंटे तक चली बैठक में राहुल गाँधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, केसी वेणुगोपाल और दीपक बाबरिया मौजूद थे। हमें आगामी लोकसभा चुनाव के लिए तैयारी करने को कहा गया है। यह निर्णय लिया गया है कि हम सभी सात सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। 7 महीने बचे हैं और पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं को सभी सात सीटों के लिए तैयारी करने को कहा गया है।”

अलका लांबा ने यह भी कहा है, “आंदोलन की शुरुआत से लेकर बाद तक केजरीवाल कॉन्ग्रेस को ही कोसते रहे। हमारा ही वोट आम आदमी पार्टी की तरफ गया है। आम आदमी के दो बड़े नेता इस वक्त भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में हैं। मुख्यमंत्री पर भी शिकंजा कस सकता है। इस बात की भी चिंता जाहिर की गई है।” लांबा ने यह भी कहा है, “लोकसभा की तैयारियों को लेकर दिल्ली से पहले 18 राज्यों की बैठक हो चुकी है। दिल्ली 19वाँ राज्य था जिसे लेकर चर्चा की गई है। यह आदेश हुआ है कि हमें सभी सातों सीटों पर मजबूत संगठन के साथ हर नेता को आज से और अभी से निकलना है।”

कॉन्ग्रेस के इस बयान के बाद आम आदमी पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज का भी बयान आया। उन्होंने कहा है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस पर फैसला लेगा। पार्टी की राजनीतिक समिति I.N.D.I.A. गठबंधन के साथ बैठक करेगी। इसके बाद इस पर चर्चा की जाएगी।

गौरतलब है कि सत्ताधारी पार्टी भाजपा के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने के लिए कॉन्ग्रेस, आम आदमी पार्टी, तृणमूल कॉन्ग्रेस, जदयू, राजद समेत कई विपक्षी पार्टियों ने I.N.D.I.A. गठबंधन तैयार किया है। हालाँकि गठबंधन में शामिल कुछ पार्टियों के अब तक के रुख को देखें तो पार्टियों में एकता की अपेक्षा गठबंधन में फूट के आसार अधिक नजर आ रहे हैं।

पाकिस्तान में भीड़ ने चर्च जलाया, ईसाई सफाईकर्मी का घर ध्वस्त कर दिया: ईशनिंदा का आरोप लगा कर आगजनी-तोड़फोड़, सहमे ईसाई संगठनों ने बयाँ किया दर्द

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय पर हमले की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। अब पंजाब प्रांत के फैसलाबाद जिले में कई चर्चों में तोड़फोड़ और आगजनी की घटना सामने आई। यह घटना एक ईसाई सफाईकर्मी पर ईशनिंदा का आरोप लगने के बाद हुई। इस्लामवादी भीड़ ने ईसाइयों को निशाना बनाते हुए उनके घरों पर भी हमला किया।

मीडिया संस्थान ‘डॉन’ ने फैसलाबाद जिले के जारनवाला तहसील के पादरी इमरान भट्टी के हवाले से कहा है कि ईसा नगरी इलाके में स्थित साल्वेशन आर्मी चर्च, यूनाइटेड प्रेस्बिटेरियन चर्च, एलाइड फाउंडेशन चर्च और शेहरूनवाला चर्च में तोड़फोड़ की गई। साथ ही ईशनिंदा के कथित आरोपित ईसाई सफाईकर्मी का घर भी गिरा दिया गया।

इस घटना पर पाकिस्तान बिशप चर्च के अध्यक्ष आजाद मार्शल ने ट्वीट कर कहा है, “जब मैं यह लिख रहा हूँ तो मुझे शब्द नहीं मिल रहे हैं। हम, बिशप, प्रीस्ट और आम लोग पाकिस्तान के फैसलाबाद जिले के जारनवाला में हुई घटना पर बहुत दुखी हैं। जब मैं यह ट्वीट टाइप कर रहा हूँ तब एक चर्च चलाया जा रहा है।”

उन्होंने आगे कहा है कि यहाँ बाइबिल का अपमान किया गया है और ईसाइयों पर कुरान का अपमान करने का झूठा आरोप लगाकर और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है है। वह प्रशासन से न्याय और कार्रवाई की माँग करते हैं। साथ ही लोगों की सुरक्षा व्यवस्था की भी माँग करते हैं।

एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा है, “यह चरमपंथियों और आतंकवादियों के देश इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान का असली चेहरा है। पंजाब के फैसलाबाद के जरानवाला में एक स्थानीय ईसाई परिवार पर स्थानीय मुस्लिमों ने ईशनिंदा का आरोप लगाया। अब स्थानीय मुस्लिमों ने एक चर्च पर हमला किया है और तोड़फोड़ कर रहे हैं।”


इस घटना के कई चौंकाने वाले वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। वायरल वीडियो में भीड़ द्वारा लोगों पर हमला करते देखा जा सकता है। एक यूजर ने दावा किया है कि ‘खून की प्यासी भीड़’ से अपनी जान बचाने के लिए लोग अपने घरों से भाग रहे हैं। इलाके में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।

इस्लामवादी भीड़ के हमले के बाद जारनवाला के सबसे पुराने चर्च पर लगी और धुँआ देखा जा सकता है।

इस बीच, पुलिस ने पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 295बी (कुरान का अपमान करना) तथा 295सी (पैगंबर को लेकर अपमानजनक टिप्पणी करना) के तहत आरोपित ईसाई सफाईकर्मी के खिलाफ FIR दर्ज की है। 

नूहं की अदालत ने बिट्टू बजरंगी को पुलिस रिमांड में भेजा: वकील ने कहा – ‘गलत धाराएँ लगाई गईं, पुलिस के पास तलवार-भाला वाला कोई वीडियो ही नहीं’

नूहं हिंसा मामले में गिरफ्तार फरीदाबाद के हिंदूवादी कार्यकर्ता बिट्टू बजरंगी उर्फ राजकुमार को कोर्ट ने 16 अगस्त 2023 दिन बुधवार को एक दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया है। बिट्टू बजरंगी को मंगलवार को तावड़ू की सीआईए पुलिस ने फरीदाबाद के चाचा चौक से गिरफ्तार किया था। एक दिन की रिमांड के बाद बिट्टू को फिर गुरुवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा।

गिरफ्तारी के बाद बिट्टू को हरियाणा की नूहं जिला अदालत में पेश किया गया। कोर्ट में पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने बजरंगी की 5 दिन की रिमांड माँगी थी, लेकिन एसीजीएम अंजलि जैन ने सुनवाई के बाद बिट्टू बजरंगी को एक दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया।

बिट्टू के वकील ने कहा कि पुलिस ने जो धाराएँ लगाई गई हैं, वह गलत हैं। इसके अलावा, हथियारों से संबंधित जो धाराएँ लगाई गई हैं, वह भी गलत हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस के पास ना तो कोई वीडियो है, जिसमें बिट्टू बजरंगी तलवार, भाले इत्यादि लेकर आ रहे हैं। यह सब अब संदेह के घेरे में हैं।

बिट्टू बजरंगी और 15-20 अन्य के खिलाफ अवैध हथियार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। FIR में बिट्टू पर डकैती, अवैध अस्त्र रखना, सरकारी अधिकारियों के काम में बाधा डालना और उनसे मारपीट करना सहित 11 धाराएँ लगाई गई हैं। पुलिस बिट्टू के साथियों की भी तलाश कर रही है।

बिट्टू की गिरफ्तारी नूहं जिले की ASP उषा कुंडू की शिकायत पर दर्ज एफआईआर में हुई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। इसमें कहा गया है कि 31 जुलाई 2023 को 15 से 20 व्यक्तियों का एक समूह नल्हड़ मंदिर की ओर जा रहा था। इनमें से कुछ के हाथ में तलवारें और त्रिशूल जैसे हथियार थे।

FIR के अनुसार, बिट्टू से पुलिसकर्मियों ने हथियार लेने की कोशिश की तो वे नारेबाजी करने लगे और हाथापाई पर उतर आए। हालाँकि इनसे हथियार लेने में पुलिस कामयाब रही। बाद में बिट्टू बजरंगी और उसके साथी सरकारी गाड़ी से फिर हथियार छीनकर ले गए। एएसपी कुंडू के अनुसार, सोशल मीडिया के जरिए उन्होंने इस समूह में शामिल बिट्टू बजरंगी की पहचान की।

गौरतलब है कि मेवात के नूहं में 31 जुलाई को जलाभिषेक यात्रा में शामिल हिंदुओं पर ही इस्लामी भीड़ ने हमला किया था। इस दौरान नल्हड़ शिव मंदिर में श्रद्धालु घंटों बंधक की तरह फँसे रहे। पहाड़ियों से दंगाई इस मंदिर को भी निशाना बना रहे थे।

मदरसे में नाबालिग छात्र की गला काट कर हत्या: पुलिस ने इमाम रहमान खान को गिरफ्तार किया, सील किया गया मदरसा

असम के काछार में एक मदरसे के अंदर नाबालिग छात्र की गला काट कर हत्या कर दी गई है। मृत छात्र का शव रविवार (13 अगस्त, 2023) को बरामद हुआ है। आरोपित का नाम रहमान खान है जो उसी मदरसे का इमाम है। रहमान खान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। हत्या की वजह मृतक द्वारा बिना बताए मदरसे के बाहर जाना बताया जा रहा है। प्रशासन ने मदरसे को सील कर के जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना काछार जिले के लैलापुर की है। यहाँ दारुस सलाम हफ़ीज़िया मदरसे में मुकचिल रहमान खान इमाम के तौर पर काम करता है। मदरसे में एक हॉस्टल है जहाँ तमाम छात्र रह कर दीनी तालीम हासिल करते हैं। लगभग 3 माह पूर्व 12 साल के एक छात्र ने यहाँ एडमिशन लिया था। बताया रहा है कि घटना के दिन वह बिना इमाम को बताए हॉस्टल से कहीं बाहर चला गया था। आरोप है कि इमाम रहमान खान इस बात से नाराज था। पुलिस को आशंका है कि छात्र की हत्या इसी नाराजगी की वजह से हुई है।

मृत छात्र का शव हॉस्टल के अंदर मिला। घटना का खुलासा तब हुआ जब मृतक के साथी उसे सुबह की नमाज़ के जगाने गए थे। आशंका जताई जा रही है कि छात्र की हत्या सुबह 3 से 4 बजे के बीच हुई होगी। शव मिलने के बाद पुलिस को सूचना दी गई। आरोपित इमाम की गिरफ्तारी चश्मदीद के बयान के आधार पर हुई है। उस पर IPC की धारा 302 (हत्या) के तहत FIR की गई है। आरोपित मुकचिल रहमान खान को गिरफ्तार कर के पूछताछ की जा रही है। मृतक छात्र के शव को सिल्चर मेडिकल कॉलेज में पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

बताया जा रहा है कि वह खुद पर लगे आरोपों से इनकार कर रहा है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, मदरसे के 13 अन्य छात्रों को भी हिरासत में ले कर पूछताछ चल रही है। पुलिस मदरसे को सील कर रही है। काछार जिले के पुलिस अधीक्षक नुमल महत्ता ने मीडिया से बातचीत के दौरान इस कार्रवाई की पुष्टि की है।

कलावा बाँध कर इरशाद अली बन गया ‘ईश्वर’, हिन्दू लड़की को प्रेम जाल में फँसा कर ली शादी: मौलाना को बुला कर धर्मांतरण करवाया, पीटा

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लव जिहाद का मामला सामने आया। आरोप है कि इरशाद अली ने खुद को ईश्वर बताते हुए लड़की को प्रेम जाल में फँसाया। फिर हिंदू रीति-रिवाज से उससे शादी कर ली। इसके बाद मारपीट कर जबरन धर्मांतरण करा दिया। पीड़िता के पिता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज कर जाँच शुरू कर दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला लखनऊ के नाका थाना क्षेत्र का है। पीड़िता के पिता ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में कहा है कि आरोपित इरशाद अली उनके घर के पास ही एक किराए के मकान में रहता था। खुद को हिंदू दिखाने के लिए वह अपना नाम ईश्वर बताता था और हाथ में कलावा बाँधता था। शुरुआती जान-पहचान के बाद उसने लड़की से दोस्ती कर ली। इसके बाद प्रेम जाल में फँसा कर हिंदू रीति रिवाज से शादी भी कर ली।

पीड़िता के पिता का आरोप है कि 6 महीने पहले आरोपित इरशाद उनकी बेटी को अपने साथ ले गया। काफी तलाश करने के बाद भी लड़की का पता नहीं चला। हालाँकि इस दौरान उन्हें पता चला कि जिस लड़के से उनकी शादी हुई है वह हिंदू नहीं बल्कि मुस्लिम है। साथ ही वह ईश्वर नहीं बल्कि इरशाद अली है और बाराबंकी जिले का रहने वाला है। यह भी सामने आया कि 24 अप्रैल, 2023 को इरशाद अली ने मौलाना और अपने माता-पिता को बुलाकर बेटी का जबरन धर्मांतरण करा दिया। लड़की के विरोध करने पर इरशाद अली ने उसके साथ मारपीट की।

बेटी के साथ हुई इस घटना और उसके लापता होने को लेकर पीड़िता के पिता ने मामले की शिकायत पुलिस से की। पीड़िता के पिता ने पुलिस पर भी टालमटोल करने का आरोप लगाया। पीड़ित पिता का कहना है कि उन्होंने 12 जुलाई, 2023 को तत्कालीन दारोगा संतोष सोनकर से मामले की शिकायत की थी। इस पर उन्होंने जाँच करने की बात कही थी। दोबारा शिकायत करने पर उन्होंने शिकायती पत्र फाड़ दिया। वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। हालाँकि नाका थाने के इंस्पेक्टर तेज बहादुर सिंह ने शिकायत फाड़ने के आरोपों को निराधार बताया है।

वहीं, इस पूरे मामले में डीसीपी अपर्णा रजत कौशिक का कहना है कि पीड़ित परिवार द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज हुआ है। पीड़ित परिवार ने इरशाद अली पर कई तरह के आरोप लगाए हैं। आरोपित की तलाश की जा रही है। पीड़िता का मोबाइल नंबर भी सर्विलांस पर डाला गया है।

विश्वकर्मा योजना को मोदी सरकार ने दी मंजूरी, लाल किले से PM ने किया था ऐलान: 100 शहरों में ई-बस ट्रायल, रेलवे के 7 प्रोजेक्ट पर भी मुहर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 16 अगस्त 2023 दिन बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में विश्वकर्मा योजना, रेलवे की सात मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं और ई-बस सेवा को मंजूरी दी गई। ई-बस का ट्रायल देश भर के 100 शहरों में किया जाएगा। इसके साथ ही बैठक में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के विस्तार को भी मंजूरी दी गई।

कैबिनेट के फैसलों के बारे में जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर (Anurag Thakur) ने कहा कि ई-बस सेवा पर 57,613 करोड़ रुपए खर्च किए जाएँगे। इनमें से 20,000 करोड़ रुपए केंद्र सरकार देगी। इस योजना के तहत देश भर में लगभग 10,000 नई इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध कराई जाएँगी।

अनुराग ठाकुर ने कहा कि इस योजना के तहत 3 लाख और उससे अधिक आबादी वाले शहरों को कवर किया जाएगा। इसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर संचालित किया जाएगा। यह योजना 10 सालों तक बस संचालन का समर्थन करेगी।

विश्वकर्मा योजना

विश्वकर्मा योजना को लेकर वहीं केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में कारीगरों के लिए विश्वकर्मा योजना की घोषणा की थी। कैबिनेट ने 13,000 करोड़ रुपए की विश्वकर्मा योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना से 30 लाख शिल्पकार परिवारों को लाभ होगा।

वैष्णव ने कहा कि इस योजना के तहत शिल्पकारों को 1 लाख रुपए तक का लोन 5 प्रतिशत के ब्याज पर दिया जाएगा। इसका पूरा नाम ‘पीएम विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना’ या ‘पीएम विकास योजना’ (PM Vishwakarma Kaushal Samman Yojana – PM VIKAS) है। ‘विश्वकर्मा योजना’ को 17 सितंबर 2023 को विश्वकर्मा पूजा के मौके पर लॉन्च किया जाएगा। इस दिन पीएम मोदी का जन्मदिन भी है। 

यह योजना में सबसे ज्यादा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, महिलाएँ और कमजोर वर्ग को लाभ पहुँचाया जाएगा। इसका सीधा फायदा बढ़ई, सोनार, मूर्तिकार और कुम्हार आदि को मिलेगा। इसके जरिए सरकार शिल्पकारों के उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता को बढ़ाकर उन्हें घरेलू एवं वैश्विक बाजार के साथ जोड़ना चाहती है।

डिजिटल इंडिया

इसके साथ ही, कैबिनेट ने 14,903 करोड़ रुपए के खर्च के साथ डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के विस्तार को मंजूरी दी। डिजीलॉकर वर्तमान में केवल नागरिकों के लिए उपलब्ध है और फिलहाल इसके 40 करोड़ से अधिक ग्राहक हैं। जल्द ही एमएसएमई के लिए डिजीलॉकर का नया एक्सटेंशन लॉन्च किया जाएगा।

रेलवे को लेकर मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय रेलवे की सात मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। ये परियोजनाएँ नई रेल लाइन बिछाने और लाइनों को अपग्रेडशन करने से संबंधित हैं। इस योजना की अनुमानित लागत 32,500 करोड़ रुपए है।

इसमें 4,195 करोड़ रुपए की लागत से देश के 508 रेलवे स्टेशनों का पुनर्रुद्धार भी शामिल है। इनमें से 608 करोड़ रुपए की लागत से हरियाणा के 16 स्टेशनों का विकास किया जाएगा। मंजूरी दी गई परियोजनाओं के जरिए भारत के वर्तमान रेलवे नेटवर्क में 2,339 किलोमीटर लाइन और जोड़ी जाएगी।

 

कस्तूरबा को गाँधी ने ‘पेनिसिलिन’ भी नहीं लेने दिया, हो गई मृत्यु: खुद अंग्रेज डॉक्टर से कराई सर्जरी, ‘ब्रह्मचर्य के प्रयोग’ वाली मनु का भी कराया ऑपरेशन

मोहनदास करमचंद गाँधी और उनके बेटे देवदास के बीच 21 फरवरी, 1944 को जोरदार झगड़ा हुआ था। देवदास अपनी बीमार पड़ी माँ कस्तूरबा गाँधी के लिए पेनिसिलिन का इंजेक्शन कोलकाता से लेकर पहुँचे थे और कस्तूरबा गाँधी निमोनिया की वजह से अपनी आखिरी साँसें गिन रहीं थी। मोहनदास गाँधी की जिद भारी पड़ी। उन्होंने पेनिसिलिन नहीं लेने दी और अगले दिन कस्तूरबा गाँधी की मौत हो गई। ऐसा इसलिए, क्योंकि गाँधी अंग्रेजी दवाओं के बेहद विरोधी थे, हद दर्जे तक जिद्दी भी।

उन्होंने कस्तूरबा के लिए भजन का इंतजाम किया, प्रार्थना करवाई और ‘मौत’ का इंतजार किया। उन्होंने इस बात की सफाई भी दी कि एक अंग्रेजी दवा उनकी जिद पर भारी कैसे पड़ सकती है। इस खास मुद्दे पर अंग्रेज लेखक एलेक्स वॉन तंजेलमन ने अपनी किताब ‘Indian Summer: The Secret History of the End of an Empire’ के आठवें अध्याय ‘A New Theater’ में काफी गहराई से लिखा है। उस पृष्ठ को आप खुद पढ़ सकते हैं।

तुम ईश्वर पर भरोसा क्यों नहीं करते?

MK गाँधी ने कस्तूरबा को दवाई लेने से साफ मना कर दिया, जबकि कस्तूरबा मौत के बेहद थीं। वहीं, देवदास उन्हें हर हाल में पेनिसिलिन देना चाहते थे, क्योंकि वो उनके इलाज के लिए पेनिसिलिन कलकत्ता (अब कोलकाता) से लेकर पहुँचे थे। लेकिन, गाँधी के तीखे विरोध की वजह से वो कुछ कर नहीं सके। उन्होंने अपने पिता से जब बहस की, तो गाँधी ने कहा, “तुम ईश्वर पर भरोसा क्यों नहीं करते?”

इस किताब के मुताबिक, एमके गाँधी ने दवाई देने की जगह भजन गाने वालों को कस्तूरबा के कमरे में बुला लिया। उसके अगले ही दिन 22 फरवरी, 1944 को कस्तूरबा गाँधी की मृत्यु हो गई। गाँधी ने अपनी खास सहायिका, डॉक्टर और उनके ‘ब्रम्हचर्य के प्रयोग‘ में साथी रहीं सुशीला नैय्यर से बातचीत में कहा, “भगवान मेरी कितनी परीक्षा लेंगे? मैं अगर तुम्हें कस्तूरबा को पेनिसिलिन देने की आज्ञा दे देता, तो भी वो नहीं बचती। लेकिन ये मेरी आस्था की धज्जियाँ उड़ाने जैसा होता। वो मेरी गोद में मरी, इससे बेहतर कुछ हो सकता था? मैंने उन उपायों (अंग्रेजी दवा) को दूर रखकर अच्छा ही किया। “

इस घटनाक्रम का जिक्र सिबी के जोसेफ की पुस्तक ‘Kasturba Gandhi – An Embodiment of Empowerment‘ में भी किया गया है। इस पुस्तक के 22वें अध्याय ‘The Road to Martyrdom’ में सुशीला नैय्यर ने खुद इस बात का जिक्र किया है। अपने नोट्स में उन्होंने लिखा है कि गाँधी ने उन्हें बुलाया और सभी दवाइयों को बंद करने के लिए कहा। उन्होंने अपने बच्चों तक को गंभीर बीमारियों में भी अंग्रेजी दवा देने पर रोक लगाई थी।

गाँधी जी चाहते थे कि कस्तूरबा को खाना देने की जगह सिर्फ पानी और शहद दिया जाए। इस पुस्तक में गाँधी और उनके बेटे देवदास के बीच दवा देने के मुद्दे पर बहस की विस्तार से जानकारी दी गई है।

कस्तूरबा और बच्चों को अंग्रेजी दवाइयाँ लेने नहीं दी, लेकिन ये नियम खुद पर नहीं लगाया!

आधुनिक दवाओं के प्रति कठोरता दर्शाने वाले गाँधी अपने लिए व अपने अन्य करीबियों के लिए ये कठोरता नहीं बरत सके। कस्तूरबा को पेनिसिलिन देने तक से मना कर देने वाले मोहनदास करमचंद गाँधी खुद की जिंदगी पर खतरा महसूस हुआ, तो न सिर्फ उन्होंने कई मेडिकल टेस्ट कराए, बल्कि सर्जरी का भी सहारा लिया। साल 2019 में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने गाँधी की 150वें जयंती के अवसर पर गाँधी और उनके स्वास्थ्य पर किताब प्रकाशित की थी। इसके अध्याय ‘गाँधी के स्वास्थ्य के साथ प्रयोग’ जिसके नेशनल गाँधी म्यूजियम के अन्नाललाई ने लिखा है, इसमें 12 जनवरी 1924 को गाँधी के अपेंडिक्स के ऑपरेशन के बारे में विस्तार से लिखा है।

किताब में लिखा है, “गाँधी पुणे के सैसून अस्पताल के आपात विभाग में भर्ती हुए थे। साल 1922 से वो सेडिसन केस में 6 साल की सजा काट रहे थे। दो साल बाद ही उनके अपेंडिक्स में दिक्कत हुई, जिसका ऑपरेशन 12 जनवरी, 1924 में किया गया। वहाँ बिजली नहीं थी। तूफान चल रहा था। लैंप की रोशनी में ये ऑपरेशन पूरा किया गया। गाँधी का ऑपरेशन ब्रिटिश कर्नल मैडोक ने किया था। ऑपरेशन के बाद सर्जन, नर्स और पूरी मेडिकल टीम को गाँधी और कस्तूरबा ने धन्यवाद कहा था और उनके साथ तस्वीर भी खिंचाई थी। साल 1931 में जब वो लंदन गए, तो उन्होंने कर्नल मैडोक से भी मुलाकात की थी।”

गाँधी के ऑपरेशन का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन मौजूद है, इसे आप यहाँ भी चेक कर सकते हैं। ‘इंडिया टुडे’ की एक रिपोर्ट में लिखा गया है कि गाँधी चाहते थे कि उनकी सर्जरी डॉ दलाल और डॉ जीवराज करें, लेकिन वो उस समय मुंबई में थे। ऐसे में अंग्रेज चिकित्सक डॉ कर्नल मैडोक ने जब कहा कि उन्हें तुरंत ऑपरेशन कराना जरूरी है, तो फिर पुणे के सैसून अस्पताल में उनकी इस सर्जरी को अंजाम दिया गया। अब इस अस्पताल को मेमोरियल में बदल दिया गया है।

मनु के ऑपरेशन के समय ऑपरेशन थिएटर में ही मौजूद रहे गाँधी

डीडी न्यूज के वरिष्ठ सलाहकार संपादक प्रखर श्रीवास्तव ने पत्रकार राहुल देव के गाँधी की अंग्रेजी दवाओं की जिद के दावे पर जवाब दिया है। उन्होंने लिखा, “ये बात सही है कि गाँधी जी अंग्रेजी दवाओं और इलाज के विरोधी थे, लेकिन जब बात उनकी पोती मनुबेन की जीवन रक्षा की आई तो उन्होंने अंग्रेजी शल्य-चिकित्सा की तरफ रुख कर लिया था। मनुबेन को जब अपेंडिक्स की समस्या हुई तो गाँधी जी ने उनका ऑपरेशन पटना के अस्पताल में करवाया था। 15 मई, 1947 को हुए इस पूरे ऑपरेशन के दौरान गाँधी जी ऑपरेशन थिएटर में मौजूद रहे और अपनी आँखों से पूरी शल्यक्रिया देखी।”

राहुल देव ने लिखा था, “अंग्रेज़ी दवाओं का विरोध-प्राकृतिक चिकित्सा-आयुर्वेद और राम नाम पर गाँधी की आस्था इतनी प्रबल थी कि उन्होंने बार-बार अपनी-बा और बेटे की ज़िंदगी को दाँव पर लगाया।”

गाँधी ने खुद अपनी डायरी में 15 मई, 1947 को इस बात का ब्यौरा दर्ज किया है, “मनु को पेट में भयंकर दर्द हो रहा है। उसे उल्टियाँ हो रही हैं और बुखार बढ़ता जा रहा है। मैंने डॉक्टरों को उसकी जाँच के लिए बुलाया। उसे अपेंडिक्स की समस्या निकली। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया जा रहा है, रात में उसका ऑपरेशन किया जाएगा। मैंने सर्जिकल मास्क पहना और पूरे ऑपरेशन की प्रक्रिया को देखा। उसे रात में 10.30 बजे ऑपरेशन रूम में ले जाया गया और 11.10 तक उसका ऑपरेशन हुआ। डॉ कर्नल भार्गव ने उसका ऑपरेशन किया था। मैं 11.30 बजे सोने चला गया।”

आईसीएमआर की किताब के मुताबिक, गाँधी ने अपने नोट्स में लिखा था कि उन्होंने मिट्टी से दर्द को कम करने की कोशिश की थी। उन्होंने अगले दिन मनु के पिता और अपने पुत्र जयसुखलाल गाँधी को बुलाया और कहा, “दिल्ली में ही मुझे इसके अपेंडिक्स होने का शक था। पर मुझे उम्मीद थी कि मैं मिट्टी के पैक से उसे ठीक कर ले जाऊँगी, लेकिन वो कारगर साबित नहीं हुआ। इसकी मैंने कल डॉक्टरों को बुलाया था। उन्होंने ऑपरेशन की सलाह दी और मैंने उन्हें ऐसा करने की अनुमति दे दी।”

बता दें कि मनु गाँधी की पोती थी और उनके कथित ‘ब्रह्मचर्य के प्रयोग’ में शामिल की जाती थी। इसमें गाँधी नग्नावस्था में लड़कियों के साथ सोते थे और नग्न लड़कियाँ ही उन्हें स्नान कराती थीं। वो गाँधी के साथ ही दिखती थी, साथ में गाँधी की एक और पोती आभा होती थी, जो उन्हें चलने-फिरने में भी मदद करती थीं।

‘इंडिया टुडे’ ने साल 2013 में मनुबेन की डायरियाँ हासिल की थी। इसमें खुलासा हुआ था कि गाँधी उनके जीवन को हर तरह से अपने कंट्रोल में रखते थे, यहाँ तक कि भोजन, शिक्षा, सोना, आराम करने का समय और क्या कपड़े वो पहनेंगी, इस पर भी गाँधी की ही मनमानी चलती थी। मनुबेन को उनके साथ उसी बेड पर सोना पड़ता था, जिसपर मोहनदास करमचंद गाँधी सोते थे। वैसे, मनु के ऑपरेशन के समय ऑपरेशन थिएटर में बैठे गाँधी की तस्वीरें पब्लिक डोमेन में मौजूद हैं। आप इन्हें यहाँ और यहाँ भी देख सकते हैं।

₹266 करोड़/km से सड़क बनाने वाली AAP सरकार ₹251 करोड़/km के द्वारका एक्सप्रेसवे पर कर रही राजनीति: केजरीवाल के घड़ियालू आँसू कब तक?

द्वारका एक्सप्रेसवे (Dwarka Expressway) और उसकी लागत को लेकर आम आदमी पार्टी ने केंद्र की भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। आम आदमी पार्टी की मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि यह इतना बड़ा घोटाला है, जिसे खुद केंद्रीय एजेंसी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG: Comptroller and Auditor General) भी नहीं दबा पाई। इस बारे में बात करते हुए उन्होंने 18 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर और 251 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर जैसे आँकड़े गिनाए।

AAP की प्रियंका कक्कड़ ने 16 अगस्त 2023 को समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि द्वारका एक्सप्रेसवे की लागत को बिना अप्रूवल के ही बढ़ा दिया गया। आम आदमी पार्टी के सर्वेसर्वा अरविंद केजरीवाल का उदाहरण देते हुए उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि दिल्ली में कई सड़कें, कई फ्लाईओवर तय लागत से कम कीमत पर बना डाले।

द्वारका एक्सप्रेसवे को लेकर 251 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर की लागत पर आम आदमी पार्टी जो राजनीति कर रही है, दिल्ली में उसके खुद के आँकड़े कितने कम हैं – यह एक सवाल है। इस सवाल का जवाब दिल्ली में AAP सरकार द्वारा बनाई गई सड़क/ब्रिज/फ्लाइओवर में छिपा है।

प्रियंका कक्कड़ ने शायद सिग्नेचर ब्रिज (signature bridge) का नाम नहीं सुना होगा। 2004 में इस प्रोजेक्ट के बारे में घोषणा की गई, बजट था – 887 करोड़ रुपए। 2007 में दिल्ली की शीला दीक्षित सरकार की कैबिनेट ने इसका बजट किया – 1131 करोड़ रुपए। 2015 में अरविंद केजरीवाल की सरकार थी। प्रियंका कक्कड़ को इसी सिग्नेचर ब्रिज के 2015 के बजट को याद करना चाहिए – 1594 करोड़ रुपए

675 मीटर लंबी है सिग्नेचर ब्रिज। ब्रिज को कनेक्ट करने वाली सड़क सहित इस पूरे प्रोजेक्ट की लंबाई है लगभग 6 किलोमीटर। 1594 करोड़ रुपए को 6 से भाग देने पर प्रति किलोमीटर लागत बैठती है – 266 करोड़ रुपए। जिस आम आदमी पार्टी की सरकार ने 266 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर की लागत से साल 2018 में सड़क बनाई, उसकी राष्ट्रीय प्रवक्ता साल 2023 में 251 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर की लागत से बने द्वारका एक्सप्रेसवे को लेकर सवाल खड़े कर रही हैं, यह हास्यास्पद है।

द्वारका एक्सप्रेसवे की लागत, राजनीति, सड़क मंत्रालय का जवाब

द्वारका एक्सप्रेसवे की लागत से संबंधित नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट आने के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 14 अगस्त 2023 को ही आँकड़ों सहित विस्तृत जवाब दे दिया था। मंत्रालय ने बताया था कि भारतमाला परियोजना के तहत 18.2 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर की लागत का आँकड़ा पूरी परियोजना के लिए था न कि सिर्फ द्वारका एक्सप्रेसवे के लिए।

मंत्रालय ने यहाँ तक बताया था कि 18.2 से बढ़ कर 251 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर का जो आँकड़ा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने दिया, वो तथ्यात्मक तौर पर सही नहीं है।

मंत्रालय ने हालाँकि स्वीकार किया है कि CAG के सुझाव पर ग्रेड आधारित निर्माण अगर किया जाता तो द्वारका एक्सप्रेसवे बनाने की औसत लागत 1200 करोड़ रुपए तक कम हो सकती थी। लेकिन इसमें एक बाधा थी। निर्माण की गति में कमी होती। इसके लिए मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग-48 का उदाहरण भी दिया।

आपको बता दें कि द्वारका एक्सप्रेसवे दिल्ली के द्वारका और हरियाणा के गुरुग्राम के बीच देश का पहला 8-लेन एलिवेटेड शहरी एक्सप्रेसवे होगा। 29 किलोमीटर लंबे द्वारका एक्सप्रेसवे का 18.9 किलोमीटर हिस्सा गुरुग्राम में और 10.1 किलोमीटर दिल्ली में पड़ता है। इस एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई में से 23 किलोमीटर एलिवेटेड (जमीन से ऊपर) है जबकि लगभग 4 किलोमीटर सुरंग है।

क्या है भारतमाला परियोजना

मोटा-मोटी इसे आप देश भर में राष्ट्रीय राजमार्गों का वृहद स्तर पर निर्माण समझ सकते हैं। 74942 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए 2017 में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने भारतमाला परियोजना को मंजूरी दी थी। उस समय 34800 किलोमीटर लंबी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के लिए 535000 करोड़ रुपए का बजट रखा गया था।

भारतमाला परियोजना और इसके लिए शुरुआत में जो बजट कैबिनेट समिति ने आवंटित की थी, उसके साथ द्वारका एक्सप्रेसवे को जोड़ कर देखने से समस्या होगी। अभी हो रही राजनीति भी इसी कारण से है। जमीन पर सड़क बनाने के औसत बजट को पूरी तरीके से एलिवेटेड और सुरंगों वाली प्रोजेक्ट (द्वारका एक्सप्रेसवे) के साथ कॉम्पेयर करना आम और संतरे की तुलना के बराबर है। तुलना अगर करनी ही है तो दिल्ली के सिग्नेचर ब्रिज और उसमें लगे बजट के साथ कीजिए (2018 और 2023 के बीच 5 साल में लागत के बढ़ते आँकड़ों को अगर दरकिनार कर भी दिया जाए तो)।

‘त्रिशूल-तलवार लेकर जा रहे थे नल्हड़ मंदिर’: जानिए क्यों हुई बिट्टू बजरंगी की गिरफ्तारी, VHP ने बजरंग दल से जुड़ाव को किया खारिज

नूहं हिंसा मामले में गिरफ्तार फरीदाबाद के हिंदुवादी कार्यकर्ता बिट्टू बजरंगी का बजरंग दल से कोई संबंध नहीं है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है। संगठन ने कहा है, “राज कुमार उर्फ बिट्टू बजरंगी को बजरंग दल कार्यकर्ता बताया जा रहा है। उसका बजरंग दल से कभी कोई संबंध नहीं रहा। उसके द्वारा कथित रूप से जारी किए गए वीडियो की सामग्री को भी विश्व हिन्दू परिषद उचित नहीं मानती।”

बिट्टू बजरंगी के खिलाफ दर्ज FIR में क्या है?

बिट्टू की गिरफ्तारी नूहं जिले की ASP उषा कुंडू की शिकायत पर दर्ज एफआईआर में हुई है। इसमें कहा गया है कि 31 जुलाई 2023 को 15 से 20 व्यक्तियों का एक समूह नल्हड़ मंदिर की ओर जा रहा था। इनमें से कुछ के हाथ में तलवारें और त्रिशूल जैसे हथियार थे। इनसे पुलिसकर्मियों ने हथियार लेने की कोशिश की तो वे नारेबाजी करने लगे और हाथापाई पर उतर आए। हालाँकि इनसे हथियार लेने में पुलिस कामयाब रही। लेकिन शिकायत के अनुसार बाद में बिट्टू बजरंगी और उसके साथी सरकारी गाड़ी से फिर हथियार छीनकर ले गए। एएसपी कुंडू के अनुसार सोशल मीडिया के जरिए उन्होंने इस समूह में शामिल बिट्टू बजरंगी की पहचान की।

ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। गौरतलब है कि मेवात के नूहं में 31 जुलाई को जलाभिषेक यात्रा में शामिल हिंदुओं पर ही इस्लामी भीड़ ने हमला किया था। इस दौरान नल्हड़ शिव मंदिर में श्रद्धालु घंटों बंधक की तरह फँसे रहे। पहाड़ियों से दंगाई इस मंदिर को भी निशाना बना रहे थे।

16 अगस्त को पुलिस ने बिट्टू बजरंगी को नूहं की जिला अदालत में पेश किया। उसे 15 अगस्त को फरीदाबाद के उसके घर से हिरासत में लिया गया था। FIR में बिट्टू पर डकैती, अवैध अस्त्र रखना, सरकारी अधिकारियों के काम में बाधा डालना और उनसे मारपीट करना सहित 11 धाराएँ लगाई गईं हैं। पुलिस बिट्टू के साथियों की भी तलाश कर रही है।

बंगाल में उपचुनाव, BJP ने पुलवामा के बलिदानी की विधवा को बनाया उम्मीदवार: बोलीं – बच्चियों-माताओं के लिए कुछ करना चाहती हूँ, विकास पहला लक्ष्य

पश्चिम बंगाल के उत्तर बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के धूपगुड़ी उपचुनाव के लिए बीजेपी ने मंगलवार (15 अगस्त, 2023) को अपने उम्मीदवार का ऐलान कर दिया है। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव एवं मुख्यालय प्रभारी अरुण सिंह ने पार्टी उम्मीदवार के नाम के नाम का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति ने इस पर अपनी मंजूरी दी है। पार्टी ने पुलवामा हमले के बलिदानी की पत्नी तापसी रॉय को अपना उम्मीदवार बनाया है।

दिलचस्प बात ये है कि राजनीति में सक्रिय न होने के बावजूद उन्हें उम्मीदवार चुना गया। ये सीट भाजपा विधायक के निधन के बाद खाली हुई है राजनीतिक गलियारों में इस उपचुनाव को लेकर खासी चर्चा है। इस सीट के लिए सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस पहले ही अपने उम्मीदवार का ऐलान कर चुकी है। उपचुनाव के लिए मतदान 5 सितंबर को होगा और नतीजे 8 सितंबर को घोषित किए जाएँगे।

तापसी वर्तमान में धूपगुड़ी सरतपल्ली इलाके में रहती हैं। उनका एक चार साल का बच्चा है। पागुड़ी ब्लॉक के जुरापानी इलाके के सीआरपीएफ जवान जगन्नाथ रॉय 14 फरवरी, 2019 कश्मीर में हुए पुलवामा आतंकी हमले में बलिदान हो गए थे। जब वो बलिदान हुए थे तो पत्नी तापसी की गोद में नवजात बच्चा था। इस दिल को झकझोर कर देने वाली घटना के चार साल बाद 32 साल की तापसी चुनाव लड़ने जा रही हैं। बीजेपी के उम्मीदवार बनाने जाने के बाद तापसी ने कहा कि वह अपने क्षेत्र का विकास करना चाहती हैं, लोगों को सेवाएँ मुहैया कराना चाहती हैं। उन्होंने कहा, “मैं अपने माता-पिता के लिए कुछ करना चाहती हूँ। मैं चाहती हूँ कि हर कोई मेरे साथ रहे, मुझे आशीर्वाद दे।”

उन्होंने कहा, “मैंने कभी सोचा नहीं था कि मैं चुनाव लड़ूँगी। मेरे पति ने देश के लिए जान दी है।” उन्होंने कहा कि धूपगुड़ी की बच्चियों, माताओं के लिए वह कुछ करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि धूपगुड़ी महकमा और धूपगुड़ी ग्रामीण अस्पताल का विकास ही उनका पहला लक्ष्य है।

धूपगुड़ी विधानसभा सीट बीजेपी विधायक विष्णुपद रॉय की मौत के बाद से खाली है। इस वजह से बीजेपी के लिए इस सीट को जीतना अहम माना जा रहा है। हाल ही में यहाँ उपचुनाव की घोषणा हुई है। अगले महीने 5 सितंबर इस सीट के लिए मतदान होगा और नतीजों का ऐलान 8 सितंबर को किया जाएगा।

टीवी 9′ की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ दिन पहले ही टीएमसी ने अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा की थी। पार्टी ने यहाँ से डॉ निर्मल चंद्र राय को उम्मीदवार बनाया गया है। धूपगुड़ी के मागुरमारी निवासी निर्मल रॉय किताबें भी लिखते हैं। वहीं, लेफ्ट ने सेवानिवृत्त शिक्षक और संगीत कलाकार ईश्वरचंद्र रॉय को मैदान में उतारा है।

इस चुनाव में लेफ्ट और कॉन्ग्रेस गठबंधन के तौर पर लड़ेंगे। इन सबसे मुकाबला करने के लिए बीजेपी ने तापसी रॉय को मैदान में उतारा है। धूपगुड़ी सीट पर 1977 से 2016 तक माकपा के कब्जे में थी। इसके बाद यहाँ तृणमूल कॉन्ग्रेस आई। वहीं, 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के बिष्णु पद रॉय ने इस सीट पर जीत हासिल की थी, हालाँकि, फेफड़ों की बीमारी की वजह से एसएसकेएम अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली। इसके बाद ये सीट खाली हो गई।