Saturday, April 4, 2026
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जुमे पर पूरे पाकिस्तान में होगा प्रदर्शन, PM का ऐलान: स्वीडन में कुरान जलाने का विरोध, ईसाइयों-चर्चों पर हमले की पहले ही धमकी दे चुका है आतंकी संगठन

पाकिस्तान चाहे कितना भी कहे कि वह कट्टरवाद से पीड़ित है, लेकिन वहाँ सरकार ही इसे बढ़ावा देती है, जिसका परिणाम वहाँ के हिंदू जैस अल्पसंख्यकों को भुगतना पड़ता है। आम देशों से उलट, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shahbaz Sharif) ने राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन की अपील की है। यह अपील स्वीडन में जलाए गए कुरान को लेकर है।

इसके पहले आतंकी संगठनों ने कहा था कि स्वीडन में कुरान जलाए जाने का ‘बदला’ पाकिस्तान में ईसाइयों से लिया जाएगा। यह ऐलान आतंकी संगठन लश्कर-ए-झांगवी ने किया है। पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई का संरक्षण इस आतंकी संगठन को हासिल है।

प्रधानमंत्री शरीफ की अध्यक्षता में हुई बैठक में फैसला लिया गया कि शुक्रवार (7 जुलाई 2023) को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों सहित पूरे देश से रैलियों में शामिल होने का आग्रह किया, ताकि पूरा देश एकजुट होकर ‘उपद्रवियों’ को एक संदेश भेज सके।

पाकिस्तान ने ईद अल-अधा (बकरीद) के जश्न के दौरान स्वीडन में एक मस्जिद के बाहर सार्वजनिक रूप से कुरान जलाने की कड़ी निंदा की है। पाकिस्तान की संघीय सरकार कुरान के अपमान के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करने के लिए शुक्रवार को यौम-ए-तकद्दुस-ए-कुरान (कुरान की पवित्रता की रक्षा करने का दिन) मनाएगी।

इसके पहले पाकिस्तान ने स्वीडन में हुई घटना के दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की माँग की थी। 71 वर्षीय शहबाज शरीफ माँग की थी कि स्वीडिश सरकार अपने देश में मुस्लिम आबादी के खिलाफ इस्लामोफोबिक और हेट स्पीच पर ध्यान दे।

इतना ही नहीं, पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र से इस मसले पर बैठक बुलाने का आग्रह किया था। इस आग्रह के बाद संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने एक आपात बैठक बुलाई है। परिषद के एक प्रवक्ता ने कहा कि इस सप्ताह के अंत में स्वीडन में कुरान जलाने और बढ़ती धार्मिक घृणा बहस होने की संभावना है।

वहीं, 57 इस्लामी मुल्कों के संगठन इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने भी कहा है कि वह इस मुद्दे पर चर्चा के लिए एक ‘आपातकालीन बैठक’ आयोजित की जाएगी। यह बैठक सऊदी अरब में लाल सागर के किनारे स्थित शहर जेद्दा में रविवार (9 जुलाई 2023) को होगी।

बताते चलें कि कुरान के अपमान को लेकर पाकिस्तान और आतंकी संगठनों में होड़ लग गई है। शरीफ सरकार की घोषणा से पहले लश्कर-ए-झांगवी ने ईसाइयों और चर्चों पर हमला करने की धमकी दी है। इसके बाद से पाकिस्तानी ईसाई वहाँ की सरकार से सुरक्षा की माँग कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लश्कर-ए-झांगवी के आतंकी नसीर रायसानी ने एक बयान जारी कर कहा है कि पाकिस्तान में कोई भी चर्च और ईसाई सुरक्षित नहीं रहेगा। स्वीडन में कुरान जलाने की घटना का बदला लेने के लिए ईसाइयों को निशाना बनाकर आत्मघाती बम धमाके किए जाएँगे।

आतंकी संगठन ने कहा है, “स्वीडन में कुरान का अपमान कर ईसाइयों ने मुस्लिमों को चुनौती दी है। अगर कोई ईसाई दूसरे देश में कुरान का अपमान करता है तो जिहाद के रास्ते पर चलने वाला झांगवी पाकिस्तान को ईसाइयों के लिए जहन्नुम बना देगा।”

इस धमकी पर अब तक पाकिस्तान की शहबाज शरीफ की खबर लिखे जाने तक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे अलग, खुद देशवासियों से प्रदर्शन का विरोध करने की अपील करके उन पर हमले को एक तरह से मुहर लगा दी है।

यूरोपीय देश स्वीडन में कोर्ट से आदेश मिलने के बाद बकरीद के दिन यानी बुधवार (28 जून 2023) को स्टॉकहोम शहर की सबसे बड़ी मस्जिद के सामने कुरान को फाड़ा और जलाया गया था। इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत अंजाम दिया गया था। इसका वीडियो भी सामने आया था।

इस वीडियो में स्टॉकहोम की एक मस्जिद के सामने दो लोग कुरान को फुटबॉल की तरह पैरों से मारते, उसे जमीन पर फेंकते और पैरों से कुचलते दिखे थे। फिर इराकी प्रदर्शनकारी ने कुरान को फाड़कर आग के हवाले कर दिया था। इस घटना से नाराज 57 इस्लामी मुल्कों ने पिछले दिनों सऊदी अरब में बैठक भी की थी। इराक में स्वीडन के दूतावास पर हमला भी हुआ था।

किसी का नाम गणेश तो किसी का राधे, काम लालच दे हिंदुओं को ईसाई बनाना: सीतापुर हो या इंदौर धर्मांतरण का वही तरीका, 4 गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के इंदौर में गणेश और जॉनी पकड़ा गया है। उत्तर प्रदेश के सीतापुर में बेदराम गुड़िया और राधे निषाद विरासत की गिरफ्तारी हुई है। दो अलग राज्यों के शहरों में हुई इस गिरफ्तारी में समानता यह है कि इन पर हिंदुओं को लालच देकर ईसाई बनाने की कोशिश का आरोप है।

उत्तर प्रदेश के सीतापुर में हिंदुओं को ईसाई बनाने की तैयारी बकायदा सभा लगाकर की जा रही थी। लेकिन बजरंग दल कार्यकर्ताओं के अचानक पहुँच जाने के कारण रंग में भंग पड़ गया। विरोध और हंगामे के बाद मौके पर पुलिस आई और दो लोगों की गिरफ्तारी हुई। यह मामला सीतापुर जिले में सकरन थाना क्षेत्र अंतर्गत पकरिया पुरवा गाँव का है। दैनिक भास्कर रिपोर्ट के अनुसार, गाँव के बेदराम गुड़िया के घर पर सभा लगाकर सैकड़ों हिंदुओं को इकट्ठा किया गया था। आरोप है कि पादरी राधे निषाद विरासत ईसाई मजहब की पुस्तकों और यीशु मसीह के नाम पर लोगों का धर्मांतरण कराने की कोशिश कर रहा था।

स्थानीय ग्रामीणों ने इसकी सूचना बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को दी। उन्होंने मौके पर पहुँचकर धर्मांतरण की गतिविधि को रोकने की कोशिश की। लेकिन इससे सभा में मौजूद महिलाएँ भड़क गईं। कई महिलाओं ने लाठी-डंडे लेकर बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर हमला कर दिया। इससे कुछ लोगों को चोट भी आई है। मौके पर पुलिस भी पहुँची तो आरोपितों के पास से ईसाइयत से जुड़ी किताबें व कुछ अन्य दस्तावेज भी मिले। इसके बाद पुलिस ने धर्मांतरण के लिए सभा का आयोजन करने वाले मकान मालिक बेदराम गुड़िया और पादरी राधे निषाद विरासत को गिरफ्तार कर लिया।

इंदौर में भी लालच देकर धर्मांतरण की कोशिश

धर्मांतरण का दूसरा मामला मध्य प्रदेश के इंदौर में बाणगंगा इलाके का है। रमा देवी कुर्मी नाम की महिला ने अपने पड़ोसी गणेश और जॉनी नामक एक व्यक्ति पर धर्मांतरण के लिए लालच देने का आरोप लगाया है। आरोप है कि गणेश के घर में हर सप्ताह प्रार्थना सभा होती है। इसमें शामिल होने वाले हिंदुओं को पैसों का लालच दिया जाता है।

रमा देवी ने कहा है कि 30 जून 2023 को जॉनी और उसकी पत्नी शाली उनसे अपने घर में सभा रखने को कहा। इनकार करने पर जॉनी और उसकी पत्नी ने हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करना शुरू कर दिया। बहस के बाद रमा देवी ने दोनों को घर से भगा दिया। इसके बाद 3 जून को जॉनी और उसकी पत्नी शाली एक बार फिर रमा देवी के घर आ धमके। इस बार उनके साथ में गणेश भी था।

आरोप है कि इन लोगों ने रमा देवी को लोन माफ कराने, बच्चों की पढ़ाई और शादी के लिए पैसे देने समेत कई तरह के प्रलोभन दिए। इसके बाद रमा देवी ने फोन कर अपने परिचितों और पुलिस को बुला लिया। पुलिस ने 295-A के तहत मामला दर्ज कर गणेश और जॉर्ज को गिरफ्तार कर लिया है।

रमा देवी का कहना है कि गणेश जिस फैक्ट्री में काम करता था, वहाँ भी लोगों को धर्मांतरण के लिए लालच देता था। इसके चलते फैक्ट्री मालिक ने उसे नौकरी से निकाल दिया था। कोरोना के समय जब उसकी पत्नी का निधन हो गया तो वह उसे दफनाने पर अड़ गया था। रमा देवी के अनुसार एक बार वह पूजा कर रहीं थी तो गणेश ने उनसे कहा कि इस तरह की पत्थर की मूर्ति भगवान नहीं हो सकती। यीशू को भगवान मानकर ईसाई बन जाओ।

पहले रात में, अब दिन में… सुप्रीम कोर्ट से तीस्ता सीतलवाड़ को राहत, 19 जुलाई तक गिरफ्तारी पर रोक: गुजरात सरकार को बदनाम करने की साजिश का मामला

आनन-फानन में आधी रात को कोर्ट लगाकर प्रोपेगंडा एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ को जमानत देने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अब इसकी अवधि भी बढ़ा दी है। इस दौरान उन्हें गिरफ्तार से सुरक्षा दी गई है। इस मामले में अगली सुनवाई 19 जुलाई 2023 को होगी। गुजरात दंगों में फर्जी साबूत गढ़कर सरकार को बदनाम करने का आरोप सीतलवाड़ पर है।

न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की विशेष पीठ ने मामले में गुजरात सरकार से जवाब माँगा और मामले को अंतिम निपटान के लिए सुनवाई की अगली तारीख 19 जुलाई तय की। शनिवार (1 जुलाई 2023) को हुई एक विशेष सुनवाई में अदालत ने सीतलवाड़ को सात दिनों की अंतरिम जमानत दी थी, जो 8 जुलाई को समाप्त होने वाली थी।

गुजरात सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने शीर्ष अदालत से कहा कि उन्हें कुछ दस्तावेजों का अनुवाद करने के लिए समय चाहिए। वहीं, सीतलवाड़ की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने मामले की तत्काल सुनवाई की माँग की।

सुप्रीम कोर्ट गुजरात हाईकोर्ट की उस आदेश के खिलाफ सीतलवाड़ की अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्हें नियमित जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। हाईकोर्ट के फैसले में कहा गया था कि उन्हें तुरंत आत्मसमर्पण कर देना चाहिए, क्योंकि जमानत पर बाहर रहने से राज्य में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण गहरा जाएगा।

तीस्ता सीतलवाड़ पर गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली गुजरात सरकार के अधिकारियों को फँसाने के लिए दस्तावेज तैयार करने के आरोप हैं। जून 2022 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के एक दिन बाद गुजरात आतंकवाद विरोधी दस्ते ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2022 में मामले में उन्हें अंतरिम जमानत दे दी थी।

बता दें कि इस पूरे मामले की शुरुआत गुजरात हाईकोर्ट के एक फैसले से हुई। गुजरात हाईकोर्ट ने सीतलवाड़़ की जमानत याचिका रद्द कर उन्हें तुरंत आत्मसमर्पण करने का आदेश सुनाया था। उसी दिन शाम में सुप्रीम कोर्ट बैठी और मामले को बड़े बेंच को हस्तानांतरित कर दिया। रात को फिर सुनवाई हुई और तीस्ता सीतलवाड़़ को एक सप्ताह की राहत प्रदान कर दी गई।

दिलचस्प बात ये है कि सीजेआई चंद्रचूड़ ने भरतनाट्यम का प्रोग्राम देखते हुए उनकी याचिका पर अपनी नजर बनाए रखी और सुनिश्चित किया कि अगले दिन यानी रविवार (2 जुलाई) को ही सुनवाई हो जाए। सीजेआई को करीब 7 बजे पता चला था कि जो पीठ तीस्ता की बेल याचिका सुन रही थी, उसने जमानत पर मत अलग दिए हैं। ऐसे में जस्टिस चंद्रचूड़ की इस मामले में एंट्री हुई। उन्होंने दो अन्य जजों को इस पीठ का हिस्सा बनवाया और फिर इस बेल पर मोहर लगी।

गुजरात हाईकोर्ट ने तीस्ता सीतलवाड़़ को तुरंत सरेंडर करने का आदेश देते हुए कहा था कि उन्हें जमानत देने का अर्थ होगा कि दो समुदायों के बीच दुश्मनी को और बढ़ावा देना। 127 पन्नों के आदेश में जस्टिस निर्जर देसाई ने कहा कि अगर तीस्ता सीतलवाड़़ को बेल दे दी जाती है तो इससे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण बढ़ेगा और सामुदायिक वैमनस्य और गहरा होगा।

गुजरात के तत्कालीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई भाजपा नेताओं और अधिकारियों को फँसाने की साजिश तीस्ता सीतलवाड़ ने रची थी। गुजरात उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि तीस्ता सीतलवाड़ ने पीड़ितों और और गवाहों का अपने फायदे के लिए सीढ़ी की तरह इस्तेमाल किया। उच्च न्यायालय ने कहा कि पत्रकार रहीं तीस्ता सीतलवाड़ ने पीड़ितों और गवाहों का सीढ़ी की तरह इस्तेमाल कर के अपना फायदा कमाया – वो न सिर्फ पद्मश्री से नवाजी गईं, बल्कि उन्हें योजना आयोग के सदस्य का पद भी मिला।

साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और पूरी सरकारी मशीनरी को बदनाम कर के तीस्ता सीतलवाड़़ ने सक्रिय रूप से एक लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को अस्थिर करने के लिए प्रयास किया। इसके तहत विभिन्न अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक झूठे केस दर्ज करवाए गए। पीड़ितों और गवाहों को भड़का कर ऐसा करवाया गया। हाईकोर्ट ने ये भी पाया कि एक समुदाय विशेष की भावनाओं का इस्तेमाल कर के तीस्ता सीतलवाड़़ ने पैसे जुटाए और इन पैसों का इस्तेमाल पीड़ितों के लिए नहीं किया।

गिरफ्तार हुआ जनजातीय व्यक्ति पर पेशाब करने वाला प्रवेश शुक्ला, बुलडोजर भी चलेगा: पीड़ित की पत्नी बोली – किसी का कोई दबाव नहीं

मध्य प्रदेश के सीधी जिले के एक वीडियो से बवाल मचा हुआ है, जिसमें प्रवेश शुक्ला नामक व्यक्ति को जनजातीय समाज के एक शख्स के ऊपर पेशाब करते हुए देखा गया। अब इस मामले में पीड़ित की पत्नी ने बयान आया है। महिला ने कहा कि उनके पति दिन भर इधर-उधर काम-धाम करते थे और खाने-पीने घर आते थे, लेकिन एक दिन पहले वो घर नहीं आए। पत्नी ने कहा कि उन्हें चिंता थी और वो सोच रही थीं। उन्हें नहीं पता था कि वो कहाँ हैं और क्या कर रहे हैं।

महिला ने कहा कि जब उनके पति नहीं आए तो वो रात भर जगी रहीं कि क्यों नहीं आए। उन्होंने कहा कि चाहे वो कैसे भी हों, चिंता हो ही जाती है। उन्होंने कहा कि अगर किसी ने गलत काम किया है तो जो होना है होगा ही। उन्होंने गलत करने वाले को सज़ा देने की भी माँग की। उन्होंने कहा कि उनके घर पुलिस आई थी। उन्होंने कहा कि उन पर पुलिस या किसी का कोई दबाव नहीं है। लेकिन, उन्होंने दोहराया कि अगर कोई गलत करेगा तो सज़ा तो होगी ही।

उधर मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा भी इस मामले को लेकर सख्त हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ही घटना संज्ञान में आई, वैसे ही कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया है कि गिरफ़्तारी हो गई है और आरोपित प्रवेश शुक्ला को थाने में रखा गया है। जब उनसे पूछा गया कि आरोपित को थाने में अकड़ कर चलते हुए देखा गया, तो इस पर मिश्रा ने कहा कि उसे लॉकअप में डाला गया है और कानूनी कार्रवाई हुई है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का आदेश है कि उस पर NSA लगे।

बुलडोजर चलाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी के हिसाब से बुलडोजर नहीं चलता है, कानून के हिसाब से चलता है। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण होगा तो बुलडोजर बिलकुल चलेगा, क्यों नहीं चलेगा। MP के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इसे निंदनीय और घृणित कृत्य बताते हुए कहा कि भाजपा सरकार में कानून का राज है। उन्होंने ये भी आश्वासन दिया कि अतिक्रमण पर बुलडोजर चलेगा।

उधर प्रवेश शुक्ला के परिजन इस वीडियो को फर्जी बता रहे हैं। उसके पिता का कहना है कि बेटा ऐसा कर ही नहीं सकता, उन्हें डर है कि कहीं उसकी हत्या न हो जाए। घटना करौंदी गाँव की है। पीड़ित पल्लेदारी का काम करता है। प्रवेश शुक्ला कुबरी का रहने वाला है। भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि आरोपित पार्टी का कार्यकर्ता नहीं है। गिरफ़्तारी के बाद का प्रवेश शुक्ला का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पुलिस वाले उसे थाने के भीतर ले जा रहे हैं।

चीन के महत्वाकांक्षी BRI प्रोजेक्ट को समर्थन देने से भारत ने फिर किया इनकार, देश की अखंडता का दिया हवाला: प्रोजेक्ट में चाइना-पाकिस्तान इकॉनोमिक कॉरिडोर भी शामिल

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के बीच भारत ने एक बार चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) से खुद को अलग कर लिया है। हालाँकि, चीन और रूस ने इस परियोजना का समर्थन किया है। SCO के सभी 8 सदस्यों में अकेला भारत है, जिसने चीन की इस परियोजना का समर्थन नहीं किया है।

बताते चलें कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) द्वारा शुरू की कई इस परियोजना का भारत शुरू से विरोध करता रहा है। इस परियोजना के तहत बनने वाली सड़क पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरता है। इसके साथ इसमें और भी कई तरह की रणनीतिक समस्याएँ हैं।

दरअसल, 4 जुलाई 2023 को SCO देशों के राष्ट्राध्यक्षों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक हुई। सम्मेलन के अंत में घोषणापत्र (New Delhi declaration) जारी किया गया। इसमें बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI Project) का समर्थन करने वाला एक पैराग्राफ शामिल किया गया था। इसके बाद भारत ने इस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।

साल 2023 के SCO घोषणापत्र में BRI को लेकर लिखा है, ‘चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) को कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान समर्थन करते हैं। इसमें यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (बेलारूस, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान का आर्थिक संघ) और BRI को जोड़ने का प्रयास भी शामिल है।’

यह पहली बार नहीं है कि भारत ने ऐसा किया है। इससे पहले साल 2022 में उज्बेकिस्तान के समरकंद में हुई SCO की बैठक के बाद घोषणा पत्र में चीनी प्रोजेक्ट का समर्थन करने वाला एक पैराग्राफ शामिल था। उस दौरान भी भारत ने उस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था।

समकरंद घोषणा पत्र में BRI को लेकर वही बातें कही गई थीं, जो इस बार भी कही गई है। उस घोषणा पत्र में कहा गया था, ‘कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान चीन की बेल्ट एंड रोड पहल (बीआरआई) के लिए अपना समर्थन देते हैं और इसे संयुक्त रूप से लागू करने के लिए चल रहे काम पर नजर बनाए हैं जिसमें यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन और BRI को जोड़ने का प्रयास शामिल है।’

भारत हमेशा से चीन के BRI प्रोजेक्ट का विरोध करता रहा है। इस परियोजना के जरिए चीन एशिया, मध्य-पूर्व, अफ्रीका और यूरोप से जमीन और समुद्र के जरिए संपर्क बढ़ाने के लिए कई परियोजनाओं पर काम कर रहा है। इसमें पाकिस्तान में चाइना-पाकिस्तान इकॉनोमिक कॉरिडोर भी शामिल है, जिसको लेकर भारत आपत्ति जाहिर करता है। भारत का कहना है कि यह भारत की क्षेत्रीय अखंडता और और संप्रभुता का उल्लंघन करता है।

बताते चलें कि SCO को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार (4 जुलाई 2023) को कहा था कि बेहतर सम्पर्क आपसी व्यापार ही नहीं, आपसी विश्वास भी बढ़ाता है, लेकिन इन प्रयासों में एससीओ चार्टर के मूल सिद्धांतों, विशेष रूप से सदस्य देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना बहुत ही जरूरी है।

मेइती झंडा लेकर मेडल लेने पहुँचा मणिपुर का फुटबॉलर, सोशल मीडिया पर बवाल के बाद कहा- शांति चाहता हूँ: कुवैत को हराकर SAFF चैंपियन बना है भारत

भारतीय टीम ने ने SAFF (साउथ एशियन फुटबॉल फेडरेशन) चैंपियनशिप अपने नाम कर ली है। इसी बीच मेडल सेरेमनी के दौरान एक नया विवाद खड़ा हो गया, जब मणिपुर के 22 वर्षीय फुटबॉलर जैक्सन सिंह ने मेइती हिन्दुओं का झंडा लपेट कर कार्यक्रम में शिरकत की। मणिपुर में ईसाई कट्टरपंथियों ने मेइती हिन्दुओं का नरसंहार किया है और उन पर अभी भी अत्याचार हो रहे हैं। विवाद होने के बाद जैक्सन सिंह ने कहा कि वो अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस बात को उठाना चाहते थे कि मणिपुर में क्या हो रहा है, इसीलिए उन्होंने ऐसा किया।

भारत ने 2023 SAFF चैंपियनशिप में मंगलवार (4 जुलाई, 2023) को कुवैत को हरा कर ट्रॉफी अपने नाम कर ली। इसी के बाद हुए कार्यक्रम में जैक्सन सिंह कई रंगों वाला मेइती समाज का झड़ना ओढ़ कर मेडल लेने पहुँचे। वो मणिपुर के थोउबल जिले से ताल्लुक रखते हैं और भारतीय फुटबॉल टीम में बतौर डिफेंसिव मिडफील्डर खेलते हैं। भारतीय टीम ने 9वीं बार SAFF ट्रॉफी अपने नाम की है और इसमें उनका भी अच्छा योगदान है। इस झंडे को कंगलीपक (Kangleipak) का झंडा भी कहा जाता है।

‘सलाई टेरेट फ्लैग’ के नाम से जाने जाने वाले इस झंडे में 7 रंग होते हैं। ये मणिपुर में प्राचीन काल में मेइती हिन्दुओं के 7 अलग-अलग वंशों का प्रतीक हैं। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के श्री कांतिरवा स्टेडियम में ये मैच और कार्यक्रम आयोजित हुआ था। मणिपुर में मेइती-कुकी का संघर्ष चल रहा है। कुकी सामान्यतः ईसाई हैं। वो नहीं चाहते कि मणिपुर के मूलनिवासियों मेइती समाज को ST का दर्जा मिले। जैक्सन सिंह ने कहा कि वो किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत नहीं करना चाहते, शांति बहाली की उम्मीद में उन्होंने ऐसा किया।

उन्होंने कहा कि वो मणिपुर और पूरे भारत को कहना चाहते हैं कि वो लड़ाई-झगड़े की बजाए शांति से रहें। उन्होंने कहा कि वो शांति चाहते हैं, लेकिन 2 महीने से राज्य में हिंसा चल रही है। उन्होंने कहा कि उनका परिवार सुरक्षित है, लेकिन कई ऐसे परिवार हैं जिन्होंने अपना घर खो दिया और वो प्रताड़ना का शिकार हैं। मेइती समाज मणिपुर का 53% है। जैक्सन के अलावा महेश सिंह और उदांता सिंह भी इस भारतीय फुटबॉल टीम में शामिल हैं। जैक्सन ने इस झंडे को मणिपुर का झंडा बताया

मुख्तार अंसारी पर कॉन्ग्रेस की एक और ‘मेहरबानी’ आई सामने, पंजाब सरकार ने बताया- गैंगस्टर के बेटों को दी गई वक्फ बोर्ड की जमीन

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि सूबे की सत्ता में रहते हुए कॉन्ग्रेस सरकार ने गैंगस्टर मुख्तार अंसारी को बचाने में ‘मदद’ की थी। उन्होंने तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार पर रोपड़ जिले में मुख्तार अंसारी के बेटों को वक्फ बोर्ड की जमीन आवंटित करने का भी आरोप लगाया है। मान ने मंगलवार (4 जुलाई 2023) को मीडिया से बात करते हुए ये आरोप लगाए।

हालाँकि कॉन्ग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थामने वाले पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भगवंत मान के इन आरोपों को खारिज किया है। साथ ही कहा है कि वह कभी भी मुख्तार अंसारी से नहीं मिले। अमरिंदर सिंह के इस जवाब पर पलटवार करते हुए सीएम मान ने कहा कि अमरिंदर सिंह को अपने बेटे रनिंदर सिंह से पूछना चाहिए कि उन्होंने मुख्तार अंसारी से कितनी बार मुलाकात की है। भगवंत मान ने कहा है कि रनिंदर ने मुख्तार से कई बार मुलाकात की है। लेकिन अमरिंदर सिंह लोगों को गुमराह कर रहे हैं।

सीएम भगवंत मान ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार पर रोपड़ में वक्फ बोर्ड की जमीन मुख्तार के बेटों को देने का भी आरोप लगाया। भगवंत मान ने वक्फ बोर्ड की जमीन आवंटन के कागज दिखाते हुए कहा है कि अमरिंदर सिंह को बताना चाहिए कि उनके हस्तक्षेप के बिना मुख्तार के बेटों अब्बास और उमर अंसारी को जमीन कैसे आवंटित की गई। इसके अलावा मान ने तत्कलीन कॉन्ग्रेस सरकार और मुख्तार अंसारी के काले कारनामों से जुड़े कई सबूत जल्द ही पेश करने का दावा किया। 

बता दें कि पंजाब पुलिस ने मुख्तार अंसारी को मोहाली के एक रियल एस्टेट कारोबारी से 10 करोड़ रुपए की फिरौती माँगने के आरोप में गिरफ्तार किया था। भगवंत मान का दावा है कि उत्तर प्रदेश की बांदा जेल में बंद रहे मुख्तार अंसारी को पंजाब पुलिस ऐसे समय में लेकर आई थी, जब उस पर उत्तर प्रदेश की एमपी/एमएलए कोर्ट में केस चल रहा था। उन्होंने आगे कहा है कि अगर मुख्तार अंसारी को यूपी से पंजाब शिफ्ट नहीं किया गया होता तो एमपी/एमएलए कोर्ट में फैसला 3 महीने में ही हो गया होता।

मुख्तार अंसारी को पंजाब ट्रासंफर किए जाने के बाद यूपी पुलिस ने पंजाब सरकार से मुख्तार को सौंपने के लिए 27 बार अनुरोध किया था। लेकिन पंजाब सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद यूपी पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। शीर्ष अदालत के फैसले के बाद यूपी पुलिस को मुख्तार की कस्टडी मिली थी। सीएम भगवंत मान ने बताया कि पंजाब की पूर्ववर्ती कॉन्ग्रेस सरकार ने मुख्तार को बचाने के लिए वकीलों पर बहुत अधिक पैसा खर्च किया था।

भगवंत मान ने यह भी कहा है कि मुख्तार अंसारी के जेल में रहने के दौरान सरकार का 55 लाख रुपए खर्च हुआ था। उनकी सरकार पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा से यह पैसा वसूल करेगी। पंजाब सरकार ने मुख्तार को यूपी ट्रांसफर करने से रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे को अपना वकील नियुक्त किया था। दवे को फीस के तौर पर 55 लाख रुपए दिए जाने थे। हालाँकि इसके बाद सरकार गिर गई और यह पैसा दवे को नहीं मिल सका।

इस पैसे को लेकर भगवंत मान ने एक बयान में कहा कि वह वकील दुष्यंत दवे को सरकारी खजाने से पैसा नहीं देंगे, बल्कि तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार के मुखिया से इसकी वसूली होगी। भगवंत मान ने यह भी कहा है कि जब मुख्तार पंजाब की जेल में बंद था तब अमरिंदर सिंह सरकार द्वारा उसे वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जा रहा था। सीएम मान ने दावा किया है कि मुख्तार अंसारी जब रोपड़ जेल में बंद था, तब उसकी पत्नी जेल के पीछे बनी एक कोठी में रहती थी।

टेस्ट में 0 का रिकॉर्ड, जो तेंदुलकर नहीं कर पाए वह भी किया हासिल: भारत के चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर की शादी में ‘मजहब’ बन गया था रोड़ा

भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम (Team India) को मुख्य चयनकर्ता (Chief Selector) मिल गया है। पूर्व तेंज गेंदबाज अजीत अगरकर (Ajit Agarkar) को यह जिम्मेदारी मिली है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने मंगलवार (4 जुलाई 2023) को उनके नाम की घोषणा की। वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाली टी20 सीरीज के लिए खिलाड़ियों के चयन के साथ ही अगरकर का कार्यकाल शुरू हो जाएगा। इस साल वनडे वर्ल्ड कप (ICC World Cup 2023) भी होना है। ऐसे में अगरकर के सामने वर्ल्ड कप विजेता टीम चुनने की चुनौती होगी।

ज्ञात हो कि स्टिंग ऑपरेशन में फँसने के बाद पूर्व मुख्य चयनकर्ता चेतन शर्मा को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद 5 महीने के लंबे अंतराल के बाद टीम इंडिया को नया मुख्य चयनकर्ता मिला है। अगरकर ने अपने 16 साल के लंबे करियर में टीम इंडिया के लिए कई बार मैच जिताऊ प्रदर्शन किया है। उन्होंने अपने करियर में 26 टेस्ट, 191 वनडे और 4 टी20 मैच खेले। अगरकर ने अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर में कुल 349 विकेट हासिल किए। उन्हें टेस्ट में 58, वनडे में 288 और टी-20 इंटरनेशनल में 3 विकेट मिले। अगरकर साल 1999, 2003 और 2007 वनडे वर्ल्ड कप टीम का हिस्सा थे। इसके अलावा साल 2007 के टी20 विश्व कप में टीम इंडिया की जीत में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी।

अजीत अगरकर वनडे क्रिकेट में टीम इंडिया की ओर से तीसरे सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं। यही नहीं, वनडे क्रिकेट में भारत की ओर से सबसे तेज अर्धशतक जड़ने का रिकॉर्ड भी उनके ही नाम है। उन्होंने साल 2002 में जिम्बाब्वे के खिलाफ 21 गेंदों में ताबड़तोड़ अर्धशतक जड़ा था।

इसके अलावा लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड में शतक जड़कर भी उन्होंने अपने करियर में एक ऐसा कीर्तिमान जोड़ा है जो हर क्रिकेटर का सपना होता है। दिलचस्प बात यह है कि सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग, विराट कोहली जैसे बल्लेबाज अपने करियर में लॉर्ड्स में शतक नहीं जड़ पाए हैं। अगरकर के करियर में एक अनचाहा रिकॉर्ड भी जुड़ा हुआ है। यह रिकॉर्ड लगातार 5 पारियों में शून्य पर आउट होने का है। साल 1999-2000 के ऑस्ट्रेलिया दौरे में अजित अगरकर लगातार 5 पारियों में बिना खाता खोले पवेलियन लौटे थे।

अजीत अगरकर के क्रिकेट करियर की तरह उनकी लव लाइफ भी काफी दिलचस्प है। अगरकर ने अपने दोस्त मजहर घड़ियाली की बहन फातिमा घड़ियाली (Fatema Ghadially) से शादी की है। मजहर और अगरकर ने 1990 के दशक में घरेलू स्तर पर साथ में क्रिकेट खेला था। इसके चलते दोनों अच्छे दोस्त थे। फातिमा अपने भाई मजहर के साथ अक्सर क्रिकेट मैचों और अन्य कार्यक्रमों में जातीं थीं।

इसी दौरान साल 2000 में दोनों की मुलाकात हुई। शुरुआती बातचीत के बाद दोस्ती और फिर प्यार का सिलसिला शुरू हो गया। इसी बीच साल 2001 में दोनों के घरवालों को उनके रिश्ते के बारे में पता चल गया। चूँकि फातिमा मुस्लिम थीं और अगरकर महाराष्ट्रियन ब्राह्मण परिवार से थे। ऐसे में परिवार शादी के लिए तैयार नहीं थे। लेकिन दोनों अड़े रहे और अंत में घरवालों को उनके आगे झुकना पड़ा। फिर 9 फरवरी 2002 को अगरकर और फातिमा ने शादी कर ली। 

स्वीडन में जली कुरान, पाकिस्तान में बदला लेगा आतंकी संगठन: चर्चों पर हमले की धमकी, कहा- ईसाइयों के लिए जहन्नुम बना देंगे

स्वीडन में कुरान जलाए जाने का ‘बदला’ पाकिस्तान में ईसाइयों से लिया जाएगा। यह ऐलान आतंकी संगठन लश्कर-ए-झांगवी ने किया है। पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई का संरक्षण इस आतंकी संगठन को हासिल है। यह आतंकी संगठन पाकिस्तान में शिया मुस्लिमों के खिलाफ हिंसक और बर्बर अभियान चलाए जाने के लिए भी पहचान रखता है।

लश्कर-ए-झांगवी ने ईसाइयों और चर्चों पर हमला करने की धमकी दी है। इसके बाद से पाकिस्तानी ईसाई वहाँ की सरकार से सुरक्षा की माँग कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लश्कर-ए-झांगवी के आतंकी नसीर रायसानी ने एक बयान जारी कर कहा है कि पाकिस्तान में कोई भी चर्च और ईसाई सुरक्षित नहीं रहेगा। स्वीडन में कुरान जलाने की घटना का बदला लेने के लिए ईसाइयों को निशाना बनाकर आत्मघाती बम धमाके किए जाएँगे।

आतंकी संगठन ने कहा है, “स्वीडन में कुरान का अपमान कर ईसाइयों ने मुस्लिमों को चुनौती दी है। अगर कोई ईसाई दूसरे देश में कुरान का अपमान करता है तो जिहाद के रास्ते पर चलने वाला झांगवी पाकिस्तान को ईसाइयों के लिए जहन्नुम बना देगा।” इस धमकी पर अब तक पाकिस्तानी सरकार की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, धमकी मिलने के बाद पाकिस्तान में रह रहे ईसाई डर के साए में जीने को मजबूर हो गए हैं। ईसाई संगठनों ने स्वीडन में कुरान जलाए जाने की घटना की निंदा करते हुए पाकिस्तानी सरकार से सुरक्षा की माँग की है।

UCA की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान कैथोलिक बिशप कॉन्फ्रेंस के अधिकारी नईम यूसुफ गिल ने कहा है, “स्वीडन में हुए कुरान के अपमान की कड़ी निंदा करता हूँ। धार्मिक अल्पसंख्यक के रूप में हम शांति और भाईचारे के साथ रहते हैं। हमने हमेशा ही बहुसंख्यक वर्ग का समर्थन किया है। हम कानूनों के उल्लंघन के बारे में सोच भी नहीं सकते। इस धमकी के बाद सभी से सतर्क रहने की अपील करता हूँ।”

पाकिस्तान के फैसलाबाद में एक अन्य ईसाई संगठन के डायरेक्टर फादर खालिद राशिद असी ने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की है। बता दें कि फैसलाबाद में करीब 4000 ईसाई रहते हैं। ऐसे में खालिद राशिद असी ने पुलिस से सुरक्षा की माँग की है। साथ ही पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में साल 2009 में हुए ईसाई विरोधी दंगों के दोहराए जाने की आशंका जताई है। दरअसल, 2009 में कुरान का अपमान होने के बाद लश्कर-ए-झांगवी ने पंजाब प्रांत में ईसाइयों के घरों पर हमला किया था। इस घटना में 10 ईसाई मारे गए थे।

स्वीडन में बकरीद पर मस्जिद के सामने जली थी कुरान

यूरोपीय देश स्वीडन में कोर्ट से आदेश मिलने के बाद बकरीद के दिन यानी बुधवार (28 जून 2023) को मस्जिद के सामने कुरान को फाड़ा और जलाया गया था। इसका वीडियो भी सामने आया था। इस वीडियो में स्टॉकहोम की एक मस्जिद के सामने दो लोग कुरान को फुटबॉल की तरह पैरों से मारते, उसे जमीन पर फेंकते और पैरों से कुचलते दिखे थे। फिर इराकी प्रदर्शनकारी ने कुरान को फाड़कर आग के हवाले कर दिया था। इस घटना से नाराज 57 इस्लामी मुल्कों ने पिछले दिनों सऊदी अरब में बैठक भी की थी। इराक में स्वीडन के दूतावास पर हमला भी हुआ था।

अफगानिस्तान में एक और ‘तालिबानी’ फरमान: ब्यूटी पार्लर पर लगाया प्रतिबंध, कहा- आदेश न मानने पर होगी कड़ी कार्रवाई

अफगानिस्तान में कब्जा करने के बाद से तालिबान ने वहाँ की महिलाओं पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं। अब तालिबान ने महिलाओं के सभी सैलून और ब्यूटी पार्लर बंद करने का फरमान जारी किया है। तालिबान के वाइस और सदाचार मंत्रालय ने रविवार (2 जुलाई, 2023) को आदेश जारी कर सैलून मालिकों को एक महीने का समय दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तालिबान के सदाचार मंत्रालय ने कहा है, “महिलाओं द्वारा संचालित सभी ब्यूटी पार्लर को तुरंत बंद किया जाना चाहिए। काबुल समेत सभी प्रांतों में हमारे आदेश का पालन किया जाए। आदेश का उल्लंघन करने वालों को कड़ी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।” वहीं मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा है कि इस फैसले के बारे में उसे 2 जुलाई को बताया गया था। इसके बाद सैलून और ब्यूटी पार्लर चलाने वालों को एक महीने का समय दिया गया। 

तालिबानी शासन के चलते अफगानिस्तान के भागकर अब तुर्की में रहने वाली एक अफगान महिला कार्यकर्ता जमीला ने ब्लूमबर्ग से हुई बातचीत में कहा है, “तालिबान का नया फरमान हजारों मेकअप आर्टिस्टों को प्रभावित करेगा। इस आदेश के चलते सैकड़ों ब्यूटी पार्लर बंद हो जाएँगे। तालिबान महिलाओं को इंसान के रूप में नहीं बल्कि दमन करने वाली वस्तु के रूप में देखता है।”

बता दें कि इससे पहले 1996 से लेकर 2001 तक अफगानिस्तान में शासन के दौरान भी तालिबान ने वहाँ ब्यूटी पार्लर पर बैन लगा दिया था। अब अगस्त 2021 में अफगानिस्तान पर एक बार फिर कब्जा करने के 2 साल के भीतर ही तालिबान ने ब्यूटी पार्लर पर बैन लगाने का फरमान जारी कर दिया है।

पुतलों पर नकाब

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद नकाब और हिजाब वाले पुतले वहाँ की पहचान बनते जा रहे हैं। दरअसल, तालिबान ने पुतलों को लेकर फरमान जारी किया था। इस फरमान में पुतलों को हटाने या फिर उनका गला काटने की बात कही गई थी।

इसके बाद दुकानदारों ने गुजारिश करते हुए कहा था कि यदि पुतले हट जाएँगे तो उन्हें कपड़े बेचने में समस्या होगी। इसलिए अब तालिबान ने कहा है कि सभी पुतलों पर नकाब होना चाहिए। इस आदेश के बाद दुकानदारों ने पुतलों के चेहरे को प्लास्टिक या एल्युमिनियम फाइल से ढँक दिया है।

प्रतिबंधों के बोझ तले दबी अफगान महिलाएँ

साल 2021 में अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने कहा था कि वह महिलाओं के अधिकारों की बात करेगा। हालाँकि, सत्ता में काबिज होने के बाद तालिबान ने महिलाओं के अधिकारों का लगातार हनन किया है। दुनिया भर में निंदा के बावजूद अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार आए दिन महिलाओं के खिलाफ नए-नए पाबंदियों वाले फरमान जारी करती रहती है। 

अफगानिस्तान में महिलाओं पर लगे प्रतिबंधों की लंबी फेहरिस्त है। अफगान महिलाओं को अकेले घर से बाहर निकलने की मनाही है। साथ ही, यदि कोई महिला सार्वजनिक स्थानों पर बिना हिजाब के देखी जाती है तो उसके अभिभावक को जुर्माना और जेल की सजा होगी।

तालिबान ने हमेशा ही महिलाओं को शिक्षा से दूर रहने की वकालत की है। इसलिए, वहाँ छठी कक्षा के बाद लड़कियों की उच्च शिक्षा पर प्रतिबंध लगा हुआ है। इसके अलावा, एनजीओ या किसी अन्य संस्थान में महिलाओं की नौकरी पर भी कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं।