Saturday, April 4, 2026
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‘इस्लाम का अपमान कर रहे, मुस्लिमों की छवि धूमिल हो रही’: रिलीज से पहले ’72 हूरें’ के निर्माताओं के खिलाफ शिकायत

इस्लामिक आतंकवाद के काले सच को उजागर करने वाली फ़िल्म ’72 हूरें’ टीजर आने के बाद से ही लगातार चर्चा में है। अब फिल्म के मेकर्स और डायरेक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ता सैय्यद आरिफअली ने फिल्म से जुड़े लोगों पर इस्लाम का अपमान करने, मुस्लिम समुदाय की छवि को गलत तरीके से पेश करने के आरोप लगाए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सैयद आरिफअली महमूदअली नामक व्यक्ति ने मुंबई के गोरेगाँव पुलिस स्टेशन में ’72 हूरें’ के मेकर्स और डायरेक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। सैयद आरिफअली के वकील आसिफ अली खान देशमुख ने शिकायत में कहा कहा है, “फिल्म के डायरेक्टर संजय पूरन सिंह चौहान व फिल्म मेकर अशोक पंडित, गुलाब सिंह तंवर, अनिरुद्ध तंवर और किरन डागर ने मेरे मुवक्किल सैयद आरिफअली महमूद अली के धर्म का अपमान किया है। यह कृत्य IPC की धारा 153A, 153ए, 1538, 295A, 298, 500, 505(2) के अंतर्गत आता है।”

वकील ने आगे कहा है, “फिल्म ’72 हूरें’ सांप्रदायिक वैमनस्य, भेदभाव और घृणा को बढ़ावा दे रही हैं। यह फिल्म बड़े पैमाने पर सार्वजनिक रूप से मुस्लिम समुदाय की छवि को खराब कर रही है। इसका उद्देश्य धार्मिक दृष्टिकोण का उपयोग करके प्रोपेगेंडा फैलाकर पैसा कमाना है।”

बता दें कि ’72 हूरें’ की रिलीज से पहले ही फिल्म विवादों से घिरी हुई है। फिल्म के डायरेक्टर संजय पूरन सिंह चौहान को कट्टरपंथी गालियाँ और उनकी माँ से रेप करने की धमकी दे रहे हैं। ऑपइंडिया ने इस मामले को बड़े पैमाने पर उठाया था। ज्ञात हो कि इससे पहले, फिल्म को लेकर अफवाह फैलाई जा रही थी कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म को सार्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया है। हालाँकि बाद में सेंसर बोर्ड ने बयान जारी कर कहा था कि फिल्म ’72 हूरें’ को ‘A सर्टिफिकेट’ दिया गया है।

गौरतलब है कि फिल्म ’72 हूरें’ शुक्रवार (7 जुलाई 2023) को देशभर के सिनेमाघरों में एक साथ रिलीज हो रही है। फिल्म IMDB पर 29.5% रेटिंग के साथ मोस्ट अवेटेड फिल्मों की लिस्ट में टॉप पर बनी हुई है। दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म ने ‘गदर-2’ को भी पीछे छोड़ दिया है।

जिसने जनजातीय समाज के व्यक्ति पर किया पेशाब, उस पर NSA के तहत कार्रवाई: CM चौहान का ऐलान, प्रदेश भाजपा बोली – आरोपित से कोई संबंध नहीं

मध्य प्रदेश के सीधी से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वक व्यक्ति को एक गरीब के ऊपर पेशाब करते हुए देखा जा सकता है। आरोपित का नाम प्रवेश शुक्ला बताया जा रहा है, जो गरीब और बेसहारा शख्स के ऊपर पेशाब पेशाब करते हुए सिगरेट भी फूँक रहा होता है। वीडियो वायरल होने के बाद इसे भाजपा नेता बताया जाने लगा, लेकिन सीधी के विधायक केदारनाथ शुक्ला के बेटे गुरुदत्त शरण शुक्ल ने साफ़ कर दिया है कि ये व्यक्ति भाजपा का पदाधिकारी नहीं है।

उधर जैसे ही ये घटना सामने आई, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रशासन को सख्ती से कार्रवाई करने का निर्देश दिया और खुद इसकी निगरानी की। उन्होंने कहा कि सीधी जिले का ये वीडियो उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिया है कि न सिर्फ आरोपित को तुरंत गिरफ्तार किया जाए, बल्कि उस पर NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) लगा कर उसके ऊपर सख्त कार्रवाई की जाए। सीएम चौहान ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी।

सोशल मीडिया में सीढ़ियों पर बैठे जनजातीय समाज के व्यक्ति पर पेशाब करने वाला को स्थानीय विधायक केदार शुक्ला का प्रतिनिधि बताया गया, लेकिन खुद विधायक ने इससे इनकार किया है। पीड़ित की पहचान पाले कोल के रूप में हुई है। भाजपा MLA केदार शुक्ला ने स्पष्ट किया है कि प्रवेश शुक्ला उनका प्रतिनिधि नहीं है। कॉन्ग्रेस ने इस मामले पर राजनीति शुरू कर दी है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दावा किया है कि जनजातीय समाज पर अत्याचार में मध्य प्रदेश नंबर वन है।

भाजपा के मीडिया विंग ने भी स्पष्ट किया है कि आरोपित पार्टी का नेता नहीं है। मध्य प्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने कहा कि प्रवेश शुक्ला नाम के व्यक्ति का भारतीय जनता पार्टी से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने साफ़ किया कि हर कुत्सित कृत्य जो आदिवासी समाज के विरोध में किया जाएगा, भारतीय जनता पार्टी उसका सदैव विरोध करेगी। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि प्रदेश भाजपा इस व्यक्ति के ऊपर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की माँग करती है।

सिर मुंडवाया, गले में रुद्राक्ष की माला… बच्चों और माता-पिता संग तिरुपति मंदिर में दर्शन के लिए पहुँचे धनुष

साउथ के सुपरस्टार धनुष (Dhanush) अपनी अपकमिंग फिल्म ‘कैप्टन मिलर (Captain Miller) और ‘D 50’ को लेकर व्यस्त हैं। इस बीच वह तिरुपति बालाजी पहुँचे। जहाँ की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहीं हैं। फोटोज में धनुष को सिर मुंडाए हुए देखा जा सकता है। मंदिर की परंपरा के तहत उन्होंने अपना सिर मुंडवाकर बाल बालाजी को समर्पित किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, धनुष सोमवार (3 जुलाई 2023) अपने दोनों बेटों लिंगा और यात्रा तथा माता-पिता के साथ तिरुपति बालाजी के दर्शन करने पहुँचे थे। इस दौरान धनुष के साथ ही उनके बेटे लिंगा ने भी अपने बाल दान करते हुए सिर मुंडवा लिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही फोटोज में धनुष को क्लीन हेड शेव में नजर आ रहे हैं। साथ ही वह गले में रुद्राक्ष की माला पहने दिखाई दिए।

एक ओर जहाँ कहा जा रहा है कि धनुष ने तिरुपति बालाजी मंदिर की परंपरा के तहत अपना सिर मुंडवाया है। वहीं, दूसरी ओर उनके फैंस का कहना है कि धनुष ने अपनी अपकमिंग फ़िल्म ‘D 50’ के लिए अपना सिर मुंडवाया है। साथ ही धनुष के इस नए लुक से कई फैंस हैरान भी नजर आए। श्रीदेवी श्रीधर नामक यूजर ने ट्वीट कर कहा, “धनुष ने अपना सिर मुंडवा लिया है। कैप्टन मिलर में वह लंबे बाल और दाढ़ी के साथ दिखाई दे रहे थे। लेकिन उसकी शूटिंग पूरी हो चुकी है। इसलिए अब वह D 50 में नए लुक में नजर आएँगें।”

लक्ष्मी कांत नामक यूजर ने हैरान होने वाली इमोजी और #D50 के साथ लिखा, “तिरुपति से धनुष का नया लुक”

वहीं, धनुष अप्पू ने #CaptainMillerके साथ ट्वीट कर कहा, “धनुष सर आज अपने परिवार के साथ तिरुपति में”। शायद यूजर का मानना है कि धनुष का यह नया लुक कैप्टन मिलर में दिखाई देगा।

थारानी नामक यूजर ने ट्वीट कर कहा, “धनुष सर तिरुपति मंदिर में। उन्होंने सिर मुंडवा लिया। D50 का एक और नया लुक लोड हो रहा है।”

वर्क फ्रंट की बात करें तो धनुष जल्द ही अपनी फिल्म ‘कैटन मिलर’ में दिखाई देंगे। इस फिल्म के नवंबर 2023 में बड़े पर्दे पर आने की उम्मीद है। ‘कैटन मिलर’ एक पीरियड ड्रामा फिल्म है। इसकी कहानी 1930 और 40 के दशक में मद्रास प्रेसिडेंटी पर आधारित है। इस फिल्म के फर्स्ट लुक में धनुष लंबे बाल और दाढ़ी के साथ दिखाई दिए थे। हालाँकि हो सकता है कि फिल्म के कुछ हिस्सों में धनुष एक नए लुक में नजर आएँ।

जिसने छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के सामने किया पेशाब, उसके समर्थन में हैदराबाद में हिंसा और तनाव: कई हिन्दू घायल

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में एक व्यक्ति द्वारा छत्रपति शिवाजी महराज की प्रतिमा के पास एक व्यक्ति द्वारा पेशाब करने से तनाव फ़ैल गया है। हिन्दू संगठनों ने आरोपित की पिटाई के बाद सड़क पर उसकी परेड करवाई। इस दौरान मुस्लिम पक्ष के लोग भी जमा हुए जिस से हालात तनावपूर्ण हो गए। पुलिस ने पेशाब करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है। घटना सोमवार (3 जुलाई, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना हैदराबाद के सिद्दीपेट इलाके के गजवेल की है। सोमवार की रात लगभग 8:30 पर एक व्यक्ति छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के पास पेशाब कर रहा था। कई रिपोर्ट्स में आरोपित को मुस्लिम समुदाय का बताया जा रहा है। आस-पास से गुजर रहे कुछ लोगों ने पेशाब कर रहे व्यक्ति को डाँटा। इस बीच वहाँ हिन्दू संगठन से जुड़े कुछ युवक पहुँच गए। उन्होंने आरोपित को अर्धनग्न हालत में शहर के अलग-अलग हिस्सों में घुमाया। इस जुलूस में भारत माता की जय, छत्रपति शिवाजी महाराज की जय और जय श्री राम के नारे गूँज रहे थे।

इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि हिन्दू संगठन के लोगों ने पेशाब कर रहे व्यक्ति की पिटाई की और पेशाब वाली जगह को चाटने पर मजबूर किया। घटना के समय आरोपित को नशे में बताया जा रहा है। जब हिन्दू संगठन आरोपित को ले कर सड़क पर जुलूस निकाल रहे थे इस दौरान दूसरी तरफ से मुस्लिम समुदाय के लोग भी एकजुट होने लगे थे। हालत तनावपूर्व देखते हुए बीच में पुलिस ने मोर्चा संभाला। इस विवाद में कुछ हिन्दू घायल बताए जा रहे हैं।

हिन्दू संगठनों ने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए मंगलवार (4 जुलाई) को गजवेल बंद का आह्वान किया। पुलिस ने पेशाब करने वाले आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। उस पर IPC की धारा 294, 294 (बी), 295- ए और 506 के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस के मुताबिक वीडियो में दिख रहे आरोपितों को भी चिह्नित कर के कार्रवाई की जा रही है। हिंसक झड़प के आरोपितों पर भी केस दर्ज किया गया है जिनकी तलाश की जा रही है। इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया और हालत नियंत्रण में हैं।

PUBG वाला प्यार या लव ट्रैप? पाकिस्तानी पुलिस में भाई-दुबई में शौहर, 4 बच्चों की अम्मी हिंदू बनकर रहती थी पर बकरीद से खुल गई पोल

नोएडा से गिरफ्तार हुई पाकिस्तानी महिला सीमा गुलाम हैदर की असली पहचान क्या है? क्या सच में चार बच्चों की यह अम्मी PUBG खेलते-खेलते सचिन के प्यार में कैद हो गई? अपने बच्चों के साथ भारत आकर सचिन के साथ रहने लगी? या फिर सचिन पाकिस्तानी लव ट्रैप का शिकार है? मीडिया रिपोर्टों की माने तो पुलिस और एजेंसियों को सीमा के पाकिस्तानी जासूस होने का शक है। उससे पूछताछ चल रही है।

भारत आने के बाद सीमा पहचान छिपाने के लिए हिंदू महिलाओं की तरह साड़ी, सिंदूर और मङ्गलसूत्र पहनकर रहती थी। लेकिन गुपचुप बकरीद मनाते देख पड़ोसियों को उस पर शक हुआ। बात पुलिस तक पहुँची और उसकी असली पहचान सामने आ गई। पुलिस ने उसके कथित प्रेमी सचिन और उसके पिता नेत्रपाल को भी गिरफ्तार किया है।

बताया जा रहा है कि सीमा हैदर का शौहर दुबई में नौकरी करता है। उसका भाई पाकिस्तानी पुलिस में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि 27 साल की सीमा हैदर मूल रूप से पाकिस्तान के सिंध प्रांत की है। भारत आने से पहले वह कराची में रहती थी। साल 2014 में उसका निकाह गुलाम हैदर से हुआ। उससे उसके 4 बच्चे हैं। साल 2019 में उसका शौहर नौकरी करने के लिए दुबई चला गया।

लंबे समय तक शौहर के वापस नहीं आने के बाद वह अपने अब्बा के साथ कराची आकर रहने लगी। इसी दौरान पबजी खेलते हुए उसकी बातचीत नोएडा के रबूपुरा के सचिन से होने लगी। बातचीत आगे बढ़ी और दोनों में प्यार हो गया। सीमा ने भारत आकर सचिन से मिलने का फैसला किया। पैसों के लिए अपना घर बेच दिया।

सीमा पहले भी एक बार अपने शौहर के साथ टूरिस्ट वीजा पर नेपाल के काठमांडू आ चुकी थी। इसलिए उसने इस बार भी उसने खुद का और अपने 4 बच्चों का टूरिस्ट वीजा बनवाया। पूर्व में काठमांडू आने के कारण उसे भारत आने के लिए नेपाल का रास्ता ही सबसे बेहतर लगा। इसके लिए उसने कई वीडियो भी देखे। पाकिस्तान से वह अपने बच्चों फरहान, फरवा, फराह, फरीहा के साथ दुबई पहुँची। 11 मई 2023 को दुबई से नेपाल के काठमांडू पहुँची। फिर भारत में दाखिल हुई और 13 मई को रबूपुरा में सचिन के पास पहुँच गई। 

इसके बाद सचिन ने रबूपुरा के अंबडेकर नगर मोहल्ले में किराए पर एक मकान लिया। सचिन ने मकान मालिक समेत अन्य लोगों को बताया था कि सीमा उसकी रिश्तेदार है। अपनी पहचान छिपाने के लिए सीमा हिंदू महिलाओं की तरह रहने लगी। लेकिन उसके बच्चे आसपड़ोस के लोगों को अपना नाम मुस्लिमों की तरह बताते थे। जब वे मोहल्ले में खेलने आते तब भी उनके पहनावे, भाषा और चाल-ढल देख कर लोगों को शक होता था। इसके बाद सीमा को घर में बकरीद मनाते देख लोगों का शक बढ़ गया और बात पुलिस तक पहुँच गई।

पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि सीमा महज 5वीं तक ही पढ़ी है। पड़ोसियों का कहना है कि उसके पास कई स्मार्टफोन थे। पुलिस ने उसके पास से 5 फोन बरामद किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार इनमें से अधिकांश मोबाइल का डाटा डिलीट किया जा चुका है। जाँच एजेंसियाँ डाटा बैकअप करने में जुटी हुई हैं। साथ ही पुलिस सीमा की कॉल डिटेल और भारत आने के बाद उसने किन-किन लोगों से मुलाकात की है, इसका भी डाटा निकाल रही है।

NBT ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि पुलिस और जाँच एजंसियों ने सीमा से करीब 150 सवाल पूछे हैं। उसने बेधड़क तरीके से इन सभी सवालों के जवाब दिए हैं। ऐसे में पुलिस को उसके पाकिस्तानी एजेंट होने का भी संदेह है। इसलिए उससे अलग-अलग एंगल से अब पूछताछ की जा रही है। 

माँ काली के भक्त जिनमें जनजातीय समाज ने देखा ‘राम’, मिशनरियों की नाक में दम कर देने वाले साधु: अंग्रेजों ने पेड़ से बाँध कर दी थी हत्या

भारत के सबसे उम्दा फिल्म निर्देशकों में से एक SS राजामौली की मूवी ‘RRR’ का वो दृश्य तो आपको याद ही होगा जब जंगल में अंग्रेजों से युद्ध के समय धनुष-तीरके साथ रामचरण तेजा की एंट्री होती है। इस दृश्य के दौरान थिएटर तालियों और सीटियों से गूँज उठता था, ‘जय श्री राम’ के नारे लगते थे। फिल्म में राम चरण का किरदार जनजातीय समाज के क्रांतिकारी अल्लूरी सीताराम राजू से प्रेरित था। ‘रामम्, राघवम्, रणधीरम्’ गाने के साथ राम चरण के वो दृश्य लोगों के दिलों में बस गए थे।

फिल्म की बात तो दुनिया भर में हुई और इसके गाने ‘नाटू-नाटू’ को ऑस्कर भी मिला। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि जिन योद्धा अल्लूरी सीताराम राजू से ये किरदार प्रेरित था वो कौन थे? आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में उनका इतना सम्मान क्यों है? आखिर उन्होंने ऐसा क्या किया था कि अंग्रेज भी उनसे खौफ खाते थे और हाथ धो कर उनके पीछे पड़े थे? आइए, आज हम सशस्त्र जनजातीय विद्रोह के इस नायक के बारे में आपको बताते हैं, जिनके जीवन से हम सबको प्रेरणा लेनी चाहिए।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर अध्ययन करने वालों की मानें तो सन् 1769 से लेकर हमारे देश को आज़ादी मिलने तक जनजातीय समाज के 72 बड़े विद्रोह हुए। इन्हें इतिहास की पाठ्य पुस्तकों में उतना सम्मान नहीं मिला और न ही इनके नायकों को लोगों ने याद रखा। अंग्रेजों ने जल, जंगल और जमीन में दखल देकर जनजातीय समाज के जीवन पर बड़ा प्रहार किया था। ओडिशा में कोंध जनजाति के नेतृत्व में पहला बड़ा विद्रोह हुआ। सन् 1772 में झारखंड में पहाड़िया विद्रोह हुआ।

सन् 1785 से पहले तक बिहार के भागलपुर में तिलका माँझी ने क्रांति की ज्वाला थामे रखी थी। अगस्त 1922 में आंध्र प्रदेश की पहाड़ियों और जंगलों में अल्लूरी सीताराम राजू के नेतृत्व में विद्रोह उठ खड़ा हुआ। जनजातीय समाज के लोगों ने गुरिल्ला युद्धकला का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अंग्रेजों से लोहा लिया। इसे दबाने के लिए अंग्रेजों को ‘मालाबार स्पेशल फोर्स’ को बुलाना पड़ा। आज भी तेलुगु राज्यों में अल्लूरी सीताराम राजू की वीरता की गाथाएँ सुनाई जाती हैं।

अल्लूरी सीताराम राजू जब बच्चे थे, तभी उनके पिता वेंकटराम राजू का देहांत हो गया है, ऐसे में अन्याय के खिलाफ लड़ने की शिक्षा उन्हें उनकी माँ सूर्यनारायणअम्मा से मिली। उनका जन्म विशाखापत्तनम के पंडरंगी गाँव में 4 जुलाई, 1897 को हुआ था। जंगल से लकड़ियाँ तोड़ कर लाना और काश्तकारी या मजदूरी का कार्य करना – यही उनके परिवार का पेशा था। माँ-बेटे जब हिमालय की तीर्थयात्रा के लिए निकले, तो रास्ते में अल्लूरी सीताराम राजू की मुलाकात क्रांतिकारी पृथ्वीसिंह आज़ाद से हुई।

यहीं उन्हें चटगाँव के क्रांतिकारियों के बारे में भी पता चला। ‘ग़दर पार्टी’ के संस्थापकों में से एक पृथ्वीसिंह आज़ाद से अंग्रेज इतना खार खाए रहते थे कि उन्हें कलकत्ता और मद्रास से लेकर सेल्युलर जेल तक में डाला गया था। 1977 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। जहाँ तक चटगाँव क्रांति की बात है, ये बंगाल में अप्रैल 1930 को हुआ था। उस समय अल्लूरी सीताराम राजू जीवित नहीं थे, लेकिन वहाँ सक्रिय क्रांतिकारियों के बारे में उन्हें अपने जीवन काल में जानकारी मिली थी।

अपनी माँ के साथ उन्होंने वाराणसी और ऋषिकेश से लेकर बद्रीनाथ और नेपाल तक की तीर्थयात्रा की। अल्लूरी सीताराम राजू के नेतृत्व में विद्रोह का एक बड़ा कारण था – 1882 का ‘मद्रास फॉरेस्ट एक्ट’। इसके तहत आंध्र प्रदेश के एक बड़े इलाके में आने वाले जंगलों को बंद कर दिया गया। जनजातीय समाज को वहाँ से लकड़ियाँ लाने या फिर वहाँ अपने पशु चराने से भी मना कर दिया गया। उन्हें वहाँ खेती भी नहीं करने दी जाती थी।

कुल मिला कर बात ये है कि सदियों से जो जंगल जनजातीय समाज का घर हुआ करते थे, वहाँ अब उनके लिए घूमना-फिरना भी प्रतिबंधित हो गया। अल्लूरी सीताराम राजू के नेतृत्व में हुए विद्रोह को ‘मन्यम क्रांति’ या फिर ‘राम्पा क्रांति’ के रूप में भी जाना जाता है। इसका मुख्य केंद्र आज के आंध्र प्रदेश का गोदावरी जिला था। इसकी शुरुआत चिंतापल्ली, कृष्णदेवीपेट और राजावोम्मांगी के पुलिस थानों को लूटने के साथ हुई थी। अल्लूरी सीताराम राजू ने जनजातीय समाज को असहयोग और स्वराज के बारे में शिक्षित किया।

मालाबार फोर्स बुलाए जाने से पहले क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों को 5 बार हराया था। 2 साल तक उन्होंने आक्रांताओं की नाक में दम कर के रखा। भड़के अंग्रेजों ने गाँव वालों पर टैक्स का बोझ बढ़ा दिया और मार्शल लॉ लागू कर दिया। 7 मई, 1924 का वो काला दिन था जब अंग्रेजों ने अल्लूरी सीताराम राजू की निर्मम हत्या कर दी थी। बचपन से ही अल्लूरी सीताराम राजू क्रांतिकारी स्वभाव के थे, क्योंकि 13 साल की उम्र में जब उन्हें उनके किसी दोस्त ने किंग जॉर्ज की तस्वीर वाले कुछ बैज दिए थे, तो उन्होंने सबको फेंक दिया था, सिवाए एक के।

एक बैज कोउन्होंने अपने शर्ट पर लगा कर अपने दोस्तों से कहा था कि वो इसे इसीलिए नहीं फेंक रहे हैं ताकि सबको याद रहे कि एक विदेशी आक्रांता हम पर शासन कर रहा है, हमें रौंद रहा है। बचपन में पढ़ाई-लिखाई छूट जाने के कारण उन्हें माँ के साथ तीर्थयात्रा पर जाना पड़ा था। जिस चटगाँव के क्रांतिकारियों से उन्हें प्रेरणा मिली, वो आज बांग्लादेश में है। इसके बाद उन्होंने ईस्टर्न घाट के जनजातीय समाज को एकजुट करने की ठानी। उस समय अंग्रेजों की पुलिस जंगल से जनजातीय लोगों को भगा रही थी।

अपनी यात्रा के दौरान उन्हें जो ज्ञान प्राप्त हुआ था, उसका इस्तेमाल करते हुए उन्होंने अपने समाज के लोगों को शिक्षित करना शुरू किया, उन्हें मेडिकल सुविधाएँ दिलाने का भी प्रयास किया। ‘मन्यम (जंगल)’ के क्षेत्र में जनजातीय समाज को प्रताड़ित करने वाली पुलिस और राजस्व अधिकारियों के विरुद्ध उन्होंने संघर्ष छेड़ दिया। उन्होंने अपने जीवन में मात्र एक रिपोर्टर को इंटरव्यू दिया था, जिसमें उन्होंने बड़े गर्व के साथ ऐलान किया था कि वो 2 वर्षों में अंग्रेजों की सत्ता को उखाड़ फेंकेंगे।

जंगल और पहाड़ियों की भौगोलिक स्थिति को समझने के कारण उन्हें गुरिल्ला युद्ध में आसानी हुई। वो एक जगह साथियों के साथ आते, अपना काम कर के कहीं और निकल लेते। अंग्रेजों की नींद हराम हो गई। तीर-धनुष और बरछे – यही उनलोगों के हथियार थे। उनकी कहानियाँ लोकप्रिय होने लगीं। सीटियों और ड्रम पीटने का इस्तेमाल किया गया, क्रांतिकारियों को आपस में संदेशों का अदन-प्रदान करने के लिए। परंपरागत तौर-तरीकों को उन्होंने अपने हिसाब से ढाला।

जब उन्हें लगने लगा कि तीर-धनुष या भालों से अंग्रेजों से युद्ध नहीं जीता जा सकता, तब जाकर उन्होंने पुलिस थानों को लूटने की योजना बनाई। 22 अगस्त, 1922 को 300 साथियों के साथ चिंतापल्ली पुलिस थाने को लूटना पहला ऐसा हमला था जो सफल रहा। फिर दो ऐसे बड़े हमले और किए गए। 24 सितंबर, 1922 को स्काउट और हीटर नाम के दो अंग्रेज अधिकारियों को उन्होंने मौत की नींद सुला दी, कई अन्य घायल हुए।

एजेंसी कमिश्नर जेआर हिग्गिन्स ने उनके ऊपर 10, 000 रुपए का इनाम रखा। साथ ही उनके करीबी साथियों गणतम डोरा और मल्लू डोरा पर एक-एक हजार रुपए का इनाम रखा गया। अप्रैल 1924 में अंग्रेजों ने अपने अधिकारी टीजी रदरफोर्ड को जनजातीय विद्रोह से निपटने की जिम्मेदारी सौंपी, जिन्होंने अल्लूरी सीताराम राजू और उनके साथियों का पता लगाने के लिए निर्दोषों को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। उस ज़माने में उन्हें पकड़ने के लिए अंग्रेजों को 40 लाख रुपए खर्च करने पड़े थे।

अल्लूरी सीताराम राजू आज़ादी की लड़ाई में महात्मा गाँधी से भी प्रेरित थे, लेकिन उनकी अहिंसा उन्हें समझ में नहीं आती थी। वो कहते थे कि हिंसा ज़रूरी है ऐसी परिस्थिति में। वो कहते थे कि कई बार वो सिर्फ इसीलिए आक्रांता यूरोपियनों को मारने में सफल नहीं हो पाते हैं, क्योंकि अंग्रेजों के इर्दगिर्द कई भारतीय रहते थे जिन्हें वो नुकसान नहीं पहुँचाना चाहते थे। सितंबर 2022 में दमरापल्ली में उन्होंने सभी भारतीयों को जाने दिया था, तब अंग्रेजों पर गोली चलाई थी।

उस समय ईसाई मिशनरियों ने भी जनजातीय समाज को निशाना बनाना शुरू कर दिया था, लेकिन अल्लुरी सीताराम राजू धर्मांतरण के खिलाफ थे। अंग्रेजों ने गनतम डोरा को मार डाला था और मल्लू डोरा को पकड़ कर आजीवन कारावास की सज़ा सुना दी थी। बाद में मल्लू डोरा लोकसभा सांसद भी बने। अल्लुरी सीताराम राजू की शुरू में एक साधु की छवि थी, जो आयुर्वेद से लोगों को ठीक भी करते थे। 7 मई, 1924 को बिना किसी सुनवाई वगैरह के एक पेड़ से बाँध कर अंग्रेजों ने उनकी हत्या कर दी थी।

जनजातीय समाज के लोग अल्लूरी सीताराम राजू के नाम और उनकी युद्धकला के कारण उन्हें भगवान श्रीराम के रूप में भी देखा करते थे। उनकी हत्या के बाद महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस – सभी ने उनकी प्रशंसा की थी। गोंड और कोया जनजातीय समाज ने उन्हें अपना नायक माना। आंध्र प्रदेश ही नहीं, बल्कि ओडिशा में भी उनकी गाथा प्रचलित हुई, क्योंकि आंध्र-ओडिशा सीमा पर वो खासे सक्रिय रहे थे। वो काली के पुजारी थे।

उत्तराखंड में हिंदू युवती से छेड़छाड़, विरोध करने पर मुस्लिम भीड़ ने लगाए ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे: हल्द्वानी में गर्भवती महिला तक को पीटा

उत्तराखंड में हिंदू युवती से छेड़छाड़ का विरोध किए जाने पर मुस्लिम भीड़ द्वारा ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगाने की घटना सामने आई है। घर जा रही युवती से दो मुस्लिम युवकों ने देहरादून के हरबर्टपुर में सहारनपुर रोड पर शनिवार (1 जुलाई 2023) को छेड़खानी की। बताया जा रहा है कि छेड़छाड़ के बाद दोनों आरोपित मस्जिद में घुस गए। उनकी तलाश में हिन्दू संगठन के लोग मौके पर पहुँचे तो मुस्लिम भीड़ जमा होकर नारेबाजी करने लगी। वहीं एक अन्य घटना में हल्द्वानी में सोमवार (3 जुलाई 2023) को एक हिन्दू परिवार पर इमरान और उसके साथियों ने हमला कर दिया। इस दौरान गर्भवती महिला के पेट में लात मारने का भी आरोप है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विकास नगर से युवती खरीदारी कर घर लौट रही थी। इसी दौरान मुस्लिम समुदाय के 2 युवकों ने उससे छेड़छाड़ की। लड़की ने घर लौट कर इसकी जानकारी परिजनों को दी। लड़की के परिजन अन्य स्थानीय निवासियों को साथ ले कर पुलिस के पास पहुँचे। आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की गई।

इस मामले की जानकारी हिन्दू संगठन के लोगों को भी हुई। उन्हें आरोपितों के ढकरानी इलाके की एक मस्जिद में छिपे होने की सूचना मिली। जानकारी मिलते ही हिन्दू मस्जिद के बाहर पहुँच गए और वहाँ जमा हो गए। कुछ ही समय में वहाँ मुस्लिम समुदाय के लोगों की भी भीड़ जमा होने लगी। कहा जा रहा है कि यह भीड़ सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफार्म पर मैसेज डाल कर देहरादून के अलग-अलग हिस्सों से जमा की गई थी। सैकड़ों की सँख्या में पहुँची मुस्लिमों की भीड़ मस्जिद के आगे जमा हो गई।

इस भीड़ ने अल्लाह हू अकबर के नारे लगाए जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है। पुलिस आरोपित युवकों की तलाश कर रही है।

हल्द्वानी में हिंदू परिवार को पीटा

उत्तराखंड के ही नैनीताल जिले के हल्द्वानी में राजेंद्र मौर्या ने अपने परिवार पर हमले की शिकायत की है। शिकायत में बताया है कि वनभूलपुरा इलाके में 3 जुलाई को इमरान ने 20-30 हमलावरों के साथ उनके परिवार पर हमला किया। इस हमले में एक गर्भवती महिला के पेट पर लात मारी गई और अन्य महिलाओं के कपड़े फाड़ दिए गए। पीड़ित परिवार ने इसका विरोध किया तो हमलावरों ने पत्थरबाजी की।

शिकायत में राजेंद्र मौर्य ने इमरान और उनके साथियों पर घर की महिलाओं के मंगलसूत्र सहित अन्य जेवर छीनने के भी आरोप लगाए हैं। खुद को डरा बताते हुए आरोपितों पर कार्रवाई की माँग की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत की कॉपी मौजूद है। इस घटना का भी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बताते चलें कि यह वही वनभूलपुरा क्षेत्र है जहाँ रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जे का मामला कुछ समय पहले सुर्ख़ियों में था।

दिल्ली सरकार के 400 ‘विशेषज्ञों’ को LG ने निकाला, नियुक्ति में कई तरह की अनियमितता आई सामने: बोली BJP- केजरीवाल के खास लोगों को दी नौकरी

अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली की AAP सरकार में काम कर रहे 400 ‘विशेषज्ञों’ की सेवा उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने समाप्त कर दी है। नियुक्ति में कई तरह की अनियमितता सामने आने के बाद इन्हें बर्खास्त किया गया है। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर और बिना विभागीय अनुमति के ये नियुक्तियाँ की गई थी। सेवा विभाग ने इन ‘विशेषज्ञ कर्मचारियों’ को हटाने का प्रस्ताव दिया था। उपराज्यपाल ने सोमवार (3 जुलाई 2023) को इसे मँजूरी दे दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उपराज्यपाल कार्यालय की ओर से कहा गया है कि इन नियुक्तियों में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग द्वारा एससी, एसटी, ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए निर्धारित आरक्षण नीति का पालन नहीं किया गया है। उपराज्यपाल ने सभी विभागों को सेवा विभाग के आदेशों का पालन करने के लिए कहा है। आदेशों का पालन नहीं होने पर संबंधित प्रशासनिक सचिव के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है।

जिन्हें बर्खास्त किया गया है उन्हें दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों और एजेंसियों में फेलो/सहायक फेलो, सलाहकार/उप सलाहकार, विशेषज्ञ/सीनियर रिसर्च अधिकारी और कंसल्टेंट पदों नियुक्त किया गया था। सेवा विभाग ने अपनी जाँच में पाया कि इन पदों पर नियुक्त किए गए कर्मचारियों के पास पर्याप्त योग्यता नहीं थी। नियुक्त किए गए लोग नौकरी के लिए जारी विज्ञापन में दिए गए आवश्यक मानदंडों को पूरा नहीं कर रहे थे। इसके अलावा संबंधित विभागों ने इनके अनुभव प्रमाण-पत्र को वेरिफाई भी नहीं किया था। जाँच में कई के अनुभव प्रमाण-पत्र फर्जी पाए गए।

सेवा विभाग की जाँच में यह भी सामने आया कि पुरातत्व, पर्यावरण, दिल्ली अभिलेखागार तथा महिला एवं बाल विकास जैसे विभागों ने इन कर्मचारियों को नियुक्त तो कर लिया, लेकिन इसके लिए संबंधित अधिकारियों से मँजूरी नहीं ली। कुल 69 कर्मचारी बिना किसी अनुमति के पुरातत्व, पर्यावरण, दिल्ली अभिलेखागार, महिला और बाल विकास और उद्योग विभाग में काम कर रहे थे। इसके अलावा, दिल्ली सरकार के 13 बोर्डों में भी 155 लोगों की नियुक्ति के लिए किसी भी प्रकार की आवश्यक मँजूरी नहीं ली गई थी। यही हाल दिल्ली एसेंबली रिसर्च सेंटर, डायलॉग एंड डेवलपमेंट कमिशन ऑफ दिल्ली और डिपार्टमेंट ऑफ प्लानिंग का है। इन विभागों में 187 लोगों को नौकरी पर रखा गया था। लेकिन इसकी जानकारी सेवा विभाग को नहीं दी गई थी।

इस मामले में BJP का कहना है कि इन नियुक्तियों के में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। दिल्ली बीजेपी प्रमुख वीरेंद्र सचदेवा ने कहा है, “400 पदों पर नियुक्त किए गए लोग कोई विशेषज्ञ नहीं थे। ये लोग सीएम अरविंद केजरीवाल के खास व्यक्ति थे।” उन्होंने कहा कि ये नियुक्तियाँ अपने आप में बहुत बड़ा भ्रष्टाचार हैं। इसके पीछे सीएम केजरीवाल और अन्य मंत्रियों का हाथ है। कर्मचारियों को बर्खास्त करना पर्याप्त नहीं है। दिल्ली सरकार द्वारा उन लोगों को दिए गए वेतन की भी वसूली होनी चाहिए। वहीं, दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने एक बयान में कहा है कि उपराज्यपाल के पास इन लोगों को नौकरी से निकालने का कोई अधिकार नहीं है। वह असंवैधानिक रूप से काम कर रहे हैं। उपराज्यपाल के इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

‘कुछ देशों ने आतंकवाद को बनाया हथियार, उनकी आलोचना में न हो दोहरा मापदंड’: SCO समिट में PM मोदी की खरी-खरी, सुन रहे थे पुतिन-जिनपिंग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ‘शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (SCO)’ के समिट को संबोधित किया, जिसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी मौजूद रहे। 23वीं SCO समिट में पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 2 दशक में ये संगठन यूरेशियाई क्षेत्र में शांति, समृद्धि और विकास के क्षेत्र में एक बड़े मंच के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के साथ भारत के हजारों वर्ष पुरानी संस्कृति और लोगों का आपसी संपर्क हमारी साझा विरासत का जीवन प्रमाण है।

पीएम मोदी ने कहा कि वो इस क्षेत्र को ‘एक्सटेंडेड नेबरहुड’ नहीं, बल्कि एक बड़े परिवार के रूप में देखते हैं। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के बारे में बात करते हुए कहा कि विश्व को परिवार मानने का सिद्धांत प्राचीन काल से हमारे आचरण का हिस्सा रहा है और आज भी प्रेरणा का स्रोत है। दूसरा मूलभूत सिद्धांत उन्होंने बताया – SECURE (सिक्योरिटी, इकोनॉमिक डेवलपमेंट, यूनिटी, रेस्पेक्ट फॉर सॉवर्निटी, टेरीटोरियल इंटीग्रिटी और एनवीरोंमेंट प्रोटेक्शन)।

उन्होंने कहा कि भारत ने SCO में सहयोग के 5 नए स्तम्भ बनाए हैं। वो हैं – स्टार्टअप्स एवं इनोवेशन, परंपरागत दवाएँ (आयुर्वेद इत्यादि), युवाओं का सशक्तिकरण, डिजिटल इन्क्लूजन और साझा बौद्ध विरासत। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में वैश्विक स्थिति के महत्वपूर्ण पड़ाव पर है। विवादों, तनावों और महामारी से घिरे विश्व में फ़ूड, फ्यूल और फर्टिलाइजर की किल्लत है। बकौल पीएम मोदी, हमें मिल कर विचार करना चाहिए कि एक संगठन के रूप में लोगों की अपेक्षाओं-आकाँक्षाओं को पूरा कर पाने में समर्थ हैं?

उन्होंने पूछा कि क्या हम आधुनिक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हैं? उन्होंने इस सवाल पर जोर दिया कि क्या SCO ऐसा संगठन बन रहा है जो भविष्य के लिए तैयार हो? उन्होंने आतंकवाद और वैश्विक और क्षेत्रीय शांति के लिए बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए निर्णायक कार्रवाई ज़रूरी है। उन्होंने जोर दिया कि आतंकवाद चाहे किसी भी रूप या अभिव्यक्ति में हो, हमें इसके खिलाफ मिल कर लड़ाई लड़नी चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “कुछ देश क्रॉस-बॉर्डर आतंकवाद को अपनी नीतियों के इंस्ट्रूमेंट के रूप में इस्तेमाल करते हैं। आतंकवादियों को पनाह देते हैं। SCO को ऐसे देशों की आलोचना करने में कोई संकोच नहीं करना चाहिए। ऐसे गंभीर विषय पर दोहरे मापदंड के लिए कोई जगह नहीं होने चाहिए। अफगानिस्तान को लेकर भारत की अपेक्षाएँ और चिंताएँ SCO के अन्य देशों के समान ही हैं। अफगानिस्तान के लोगों के कल्याण के लिए हमें मिल कर प्रयास करना चाहिए।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दौरान टेरर फाइनेंसिंग और युवाओं को भड़का कर कट्टर बनाए जाने की घटनाओं के खिलाफ भी मिल कर काम करने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अफगानिस्तान की स्थिति का SCO में शामिल सभी देशों की सुरक्षा का असर पड़ा है। उन्होंने अफगान नागरिकों को मानवीय सहायता, वहाँ समावेशी सरकार का गठन, ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई और महिलाओं-अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

काॅन्ग्रेसी दबंग ने BJP का झंडा लगाने पर कर दी हत्या, फिर खुद को पागल बताकर कानून को देता रहा झाँसा: कोर्ट की सख्ती से खुली पोल, 19 साल बाद उम्रकैद की सजा

2004 में मध्य प्रदेश के जबलपुर एक 30 साल के व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी। इस व्यक्ति का ‘कसूर’ बीजेपी समर्थक होना था। अपने घर पर बीजेपी का झंडा लगाना था। उसे गोली मारने वाला दबंग काॅन्ग्रेस से जुड़ा था। 19 साल बाद इस हत्यारे को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस बीच हत्यारा खुद को पागल बताकर कानून को झाँसा देता रहा। पागल होने के उसके नाटक की पोल भी कोर्ट की सख्ती के बाद हुई जाँच से ही खुली थी।

उम्रकैद की सजा पाने वाले हत्यारे का नाम नन्हू उर्फ घनश्याम पटेल है। उस पर आरोप था कि उसने साल 2004 में भाजपा का झंडा लगाने से नाराज होकर 30 वर्षीय रवींद्र पचौरी की गोली मार कर हत्या कर दी थी। नन्हू कॉन्ग्रेस पार्टी का समर्थक था। उसने लोगों को BJP का झंडा नहीं लगाने की चेतावनी दी थी।

दैनिक भास्कर के मुताबिक मामला जबलपुर के पाटन विधानसभा क्षेत्र का है। यहाँ के गाँव चंदवा में घनश्याम पटेल 2004 के लोकसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए वोट माँग रहा था। कॉन्ग्रेस समर्थकों ने किसी को भी भाजपा का न तो झंडा लगाने और न ही वोट देने की चेतावनी जारी की थी। इसी गाँव का 30 वर्षीय रवींद्र पचौरी भाजपा समर्थक था। उसने घर पर बीजेपी का झंडा लगा रखा था। इसी बात से नाराज हो कर 28 अप्रैल 2004 को नन्हू रायफल ले कर रविंद्र के घर पहुँचा और उसे गोली मार दी।

रवींद्र के घर पहुँचकर नन्हू उर्फ़ घनश्याम पटेल ने सबसे पहले उसकी माँ को गालियाँ दी। फिर रवींद्र को गोली मारी। इसके बाद रायफल को मिट्टी में दबा दिया। मामले ने तूल पकड़ा और पुलिस ने 30 अप्रैल 2004 को घनश्याम पटेल को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने रायफल और कारतूस भी बरामद कर लिया। हत्या की धारा 302 के साथ आर्म्स एक्ट की धारा 27 में उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

लेकिन 224 दिनों तक जेल में रहने के बाद घनश्याम पटेल को जमानत मिल गई थी। जमानत के लिए उसके परिजनों ने कुछ कागजात पेश किए। इन कागजातों में उसे मानसिक बीमार बताते हुए इलाज चलने का दावा किया गया था। कोर्ट को यह भी बताया गया कि हत्या के बाद भी उसे मानसिक बीमारी की दवाएँ दी जा रही है। जेल में भी उसका इलाज हो रहा है। बेहतर इलाज के लिए जमानत भी मिल गई।

इसके बाद घनश्याम पटेल की पत्नी जबलपुर हाईकोर्ट चली गई। पति को मानसिक तौर पर बीमार बताकर उसके खिलाफ ट्रायल रोकने की माँग की। हाई कोर्ट ने आरोपित की मानसिक हालत की जाँच करवाने का आदेश दिया। जाँच करने वाली जबलपुर मेडिकल कॉलेज की 5 डॉक्टरों की टीम को डॉ. आफताब अहमद खान लीड कर रहा था। हाई कोर्ट को दी रिपोर्ट में पटेल को सीजोफ्रेनिया नाम की बीमारी से पीड़ित बताया गया। इस रिपोर्ट के आधार पर हाई कोर्ट ने ट्रायल पर रोक लगा दी।

इसके बाद मृतक के परिजनों ने ट्रायल शुरू करने की गुहार लगाते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की। अदालत को बताया कि पटेल अपने नाम से लोन ले रहा है। गाड़ी फाइनेंस करवा रहा है। हथियार का लाइसेंस बनवा रहा। काॅन्ग्रेस का प्रचार कर रहा है। शादी समारोह में शिरकत कर रहा है। इसके बाद हाई कोर्ट ने फिर से उसकी मानसिक स्थिति की जाँच के आदेश दिए। इस बार उसे जबलपुर में डाक्टरों की टीम ने 10 दिनों तक ऑब्जर्वेशन में रखा और कोर्ट को बताया कि वह पागल नहीं है।

इस रिपोर्ट के बाद हाई कोर्ट के आदेश पर 2020 में पाटन एडिशनल सेशंस जज की कोर्ट में केस का ट्रायल शुरू हुआ। तीन साल चले ट्रायल के दौरान मामले के तीन विवेचकों और 15 गवाहों के बयान दर्ज हुए हुए। आखिरकार 27 जून 2023 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विवेक कुमार ने आरोपित नन्हू उर्फ घनश्याम पटेल को रवींद्र की हत्या का दोषी पाया। 30 जून को अदालत ने उसे आजीवन कारावास और 6 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।