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‘जय श्रीराम के नारे लगाकर आतंकवाद फैला रहे हो’: मदर मैरी स्कूल की डायरेक्टर और टीचर ने 10 छात्रों की कर दी पिटाई, FIR दर्ज

मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित एक स्कूल में ‘वंदे मातरम’ के साथ ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाने पर छात्रों की पिटाई का मामला सामने आया। दरअसल, स्कूल की ओर से 15 अगस्त को तिरंगा यात्रा निकाली गई थी। इसी दौरान कुछ छात्रों ने ये नारे लगाए। आरोप है कि इसके बाद स्कूल की डायरेक्टर मारिया और टीचर विश्वजीत जायसवाल ने कमरे में बंद कर 10 छात्रों की डंडों से पिटाई कर दी। पीड़ित छात्र की शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला उज्जैन जिले के नागदा स्थित ‘मदर मेरी हायर सेकेंडरी स्कूल’ का है। स्कूल में पिटाई के बाद 16 साल के छात्र ने घर जाकर परिजनों से इसकी शिकायत की। इसके बाद परिजन अपने बेटे सहित थाने पहुँचकर आरोपित स्कूल डायरेक्टर और शिक्षक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

पीड़ित छात्र का आरोप है कि डायरेक्टर मारिया व टीचर विश्वजीत जायसवाल ने स्कूल के हॉल में बंद कर 10 बच्चों को बेरहमी से पीटा। यही नहीं, वंदे मातरम के साथ जय श्रीराम के नारे को लेकर छात्रों को कहा गया कि वे हिंदू-मुस्लिम कर रहे हैं। आतंकवाद फैला रहे हैं। साथ ही परिजनों को भी अपशब्द कहा गया।

छात्र का यह भी कहना है कि शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपित स्कूल डायरेक्टर मारिया शेखवात और विश्वजीत जायसवाल के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। जिन 10 छात्रों के साथ मारपीट हुई, उनमें से 5 का मेडिकल कराया गया। वहीं 5 बच्चे अपने गाँव चले गए हैं। इसलिए उनका मेडिकल नहीं हो सका। छात्र ने यह भी आरोप लगाया है कि स्कूल में राष्ट्रगीत व राष्ट्रगान होने के बाद छात्रों से जय मेरियन्स के नारे लगवाए जाते हैं। हालाँकि इसका मतलब भी उसे नहीं पता है।

इस मामले में स्कूल डायरेक्टर मारिया शेखवात ने छात्रों के साथ मारपीट करने की बात स्वीकार की है। मारिया का कहना है कि स्कूल में मुस्लिम छात्र भी हैं। लड़के जय श्रीराम के नारे लगा रहे थे। इससे माहौल खराब होता है। उन्होंने कहा कि छात्र उत्पात मचा रहे थे, वे लड़कियों पर कमेंट कर रहे थे। उन्हें मना किया गया था, लेकिन वह नहीं माने। इसलिए उनकी पिटाई की। 

नागदा थाना प्रभारी निलिन बुधौलिया का कहना है कि पीड़ित छात्र की शिकायत के आधार पर आरोपित स्कूल डायरेक्टर मारिया शेखवात और टीचर विश्वजीत जायसवाल के खिलाफ धारा 323, 294, 34 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपितों को जल्दी ही गिरफ्तार किया जाएगा।

18 साल की लड़की ने सेक्स से मना किया तो फोड़ डाली खोपड़ी, खुद को बॉलीवुड का ‘कास्टिंग डायरेक्टर’ बताता है आरोपित

शारीरिक संबंध बनाने से मना करने पर 18 साल की एक लड़की को प्रताड़ित करने के मामले में मुंबई पुलिस ने एक कास्टिंग डायरेक्टर दीपक मालाकार को गिरफ्तार किया है। 26 वर्षीय मालाकार की प्रताड़ना के कारण लड़की की मौत हो गई है। पुलिस के अनुसार, उसकी खोपड़ी कई जगह से टूट गई है।

आरोपित मालाकार बिहार का रहने वाला है और 11 अगस्त 2023 को घटना को अंजाम देने के बाद मुंबई से फरार हो गया था। मुंबई से फरार होने के बाद वह गुजरात के सूरत में जाकर छिपा हुआ था। सूचना के आधार पर मुंबई पुलिस सूरत पहुँचकर दीपक मालाकर को सोमवार यानी 14 अगस्त 2023 को गिरफ्तार कर लिया।

घटना के दौरान लड़की के सिर पर कई बार हमला होने के कारण वह बेहोश होकर गिर गई। इसके बाद मालाकर को लगा कि लड़की मर गई और वह वहाँ से भाग गया। कुछ समय के बाद लड़की को होश आया है और उसने मदद माँगी। इसके बाद उसे अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ वह दो दिनों तक ICU में भर्ती रही।

B.Sc प्रथम वर्ष में पढ़ने वाली 18 साल की इस लड़की की दोस्ती पिछले साल मालाकार से सोशल मीडिया साइट फेसबुक के जरिए हुई थी। दो महीने पहले वह लड़की से शादी करने के इरादे थे उसके माँ-बाप से मिला था। लड़की के परिजन इसके लिए तैयार हो गए। इसके बाद मालाकर लड़की के 1 BHK घर में ही रहने लगा।

इस दौरान मालाकार लड़की से शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश करने लगा। लड़की इसके लिए तैयार नहीं हुई और उसने कहा कि वह पहले अपनी पढ़ाई पूरी करनी चाहती है। फिर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में वह अपना भाग्य अजमाएगी। इसके बाद वह शादी करेगी। इससे मालाकार लड़की पर गुस्सा हो गया।

दीपक मालाकार 11 अगस्त 2023 को लड़की को लेकर वर्सोवा स्थित अपने दोस्त के फ्लैट पर गया और वहाँ उसने लड़की का यौन शोषण करने की कोशिश की। इस दौरान लड़की ने उसका विरोध किया था। खुद को फिल्म एडिटर और कास्टिंग डायरेक्टर बताने वाला मालाकार गुस्से से लाल हो गया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दीपक मालाकार ने लड़की का सिर दीवार पर दे मारा और उसके चेहरे पर तब तक वार करता रहा, जब तक वह गिर नहीं गई। जब उसे लगा कि वह वह मर चुकी है तो वह घबरा गया और फ्लैट को बाहर से बंद कर करके शहर से भाग गया। लड़की को जब होश आया तो वह मदद के लिए चिल्लाई। इसके बाद पड़ोसियों ने उसकी मदद की।

पुलिस के अनुसार, मालाकार ने स्वीकार किया है कि वह लड़की को मार डालना चाहता था, क्योंकि वह उसकी इच्छा की पूर्ति करने नहीं दे रही थी। सूरत भागने के बाद मालाकार ने मोबाइल को स्वीच ऑफ कर लिया। हालाँकि, लोकल नंबर से वह अपने दोस्त के संपर्क में था।

उसने सूरत में स्थित एक ATM से पैसे निकाले। इसके बाद पुलिस को उसके लोकेशन के बारे में जानकारी मिली। जानकारी मिलते ही मुंबई पुलिस सूरत पहुँचकर उसे गिरफ्तार कर ली। मालाकार के खिलाफ IPC की धारा 307, 342, 354 और 354D के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

महाराष्ट्र के कॉन्ग्रेस नेताओं पर भड़की शरद पवार की बेटी, कहा- मोदी कैबिनेट में शामिल होने का नहीं मिला है ‘ऑफर’

एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने मोदी कैबिनेट में शामिल होने का प्रस्ताव मिलने के दावों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा है कि उन्हें ऐसे किसी भी ऑफर के बारे में पता नहीं है। एक मीडिया रिपोर्ट में कॉन्ग्रेस के एक पूर्व मुख्यमंत्री के हवाले से दावा किया गया था कि अजित पवार ने चाचा शरद पवार और उनकी बेटी सुप्रिया सुले को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने का प्रस्ताव दिया है।

मीडिया से बात करते हुए सुप्रिया सुले ने कहा है, “मुझे किसी ने कोई ऑफर नहीं दिया है। 15 अगस्त की एक सेल चल रही है बहुत जगह। वही ऑफर मुझे पता है बाकी नहीं पता। किसी ने भी मुझे कुछ ऑफर नहीं किया है और न ही मुझसे कोई बातचीत हुई है। पवार साहब और मैंने इस तरह का कोई बयान नहीं दिया। मुझे नहीं पता कि कॉन्ग्रेस इस तरह के बयान क्यों दे रही है। आपको कॉन्ग्रेस नेताओं से पूछना चाहिए कि वे इस तरह के बयान क्यों दे रहे हैं। मैं व्यक्तिगत रूप से सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, गौरव गोगोई जैसे कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में हूँ। मैं महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के नेताओं के संपर्क में नहीं हूँ।”

दरअसल, टाइम्स ऑफ इंडिया ने कॉन्ग्रेस के एक पूर्व मुख्यमंत्री के हवाले से अजित पवार द्वारा शरद पवार को दिए ऑफर को लेकर दावा किया था। हालाँकि रिपोर्ट में इस नेता की पहचान नहीं बताई गई है। रिपोर्ट में इस अनाम पूर्व मुख्यमंत्री के हवाले से कहा गया है, “अजीत ने अपने चाचा से कहा था कि उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में कृषि मंत्री या नीति आयोग उपाध्यक्ष का पद दिया जाएगा। वहीं सुप्रिया सुले और जयंत पाटिल को क्रमशः केंद्र और राज्य सरकार में शामिल किया जाएगा।” पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया है कि शरद पवार ने भतीजे के इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। साथ ही कहा है कि वह किसी भी तरह से भाजपा के साथ गठबंधन नहीं करेंगे।

शरद पवार और अजित पवार की 12 अगस्त को पुणे के बिजनेसमैन अतुल चोरड़िया के घर पर ‘सीक्रेट मीटिंग’ हुई थी। मीटिंग में शरद पवार के साथ जयंत पाटिल भी थे। चाचा-भतीजे की इस मुलाकात पर महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे, कॉन्ग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने नाराजगी जताई थी। कॉन्ग्रेस और शिवसेना (UBT) का कहना था कि एनसीपी को दो फाड़ करने के बाद अजित पवार एनडीए में शामिल हो गए हैं, इसलिए शरद पवार को उनसे नहीं मिलना चाहिए।

नाना पटोले ने यह भी कहा था कि इस तरह की मीटिंग स्वीकार नहीं की जाएगी। इसके बारे में राहुल गाँधी को भी जानकारी दी गई है। वहीं, यूबीटी शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा है, “अजित पवार को पवार साहब ने बनाया। शरद पवार को अजित पवार ने नहीं बनाया। 60 साल से भी ज्यादा समय पवार साहब संसदीय राजनीति में बिता चुके हैं। 4 बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे। केंद्रीय मंत्री भी रहे। शरद पवार का कद बहुत बड़ा है। ये जूनियर लोग हैं, ये क्या ऑफर देंगे?”

अजित पवार के साथ हुई ‘सीक्रेट मीटिंग’ को शरद पवार ने पारिवारिक मुलाकात करार दिया था। उन्होंने कहा था कि वे उनके भतीजे हैं और परिवार के सदस्य से मुलाकात में कुछ बुराई नहीं है। उन्होंने कहा था कि अगर परिवार के वरिष्ठ व्यक्ति किसी अन्य सदस्य से मिलना चाहता हो तो इससे किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। NCP को अपनी पार्टी बताते हुए कहा था कि वो उनकी पार्टी भाजपा के साथ किसी भी कीमत पर नहीं जाएगी। उन्होंने अजित पवार का नाम लिए बिना कहा था कि पार्टी के कुछ लोगों ने अलग रुख अपनाया है। कुछ शुभचिंतक उनके रुख में बदलाव के लिए प्रयास कर रहे हैं। इसलिए सौहार्दपूर्ण वातावरण में चर्चा हो रही है। बता दें कि 2 जुलाई को अजित पवार के नेतृत्व में एनसीपी का एक गुट महाराष्ट्र की एनडीए सरकार में शामिल हो गया था।

‘भारत में हिंदू ही पीड़ित, हम कहाँ जाएँ’: जिन्हें मोदी-योगी का समर्थन करने पर मार डाला उनकी बेटी पूछ रही सवाल, है आपके पास जवाब

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में 12 जून, 2023 को अमजद नाम के ड्राइवर पर राजेश धर दुबे नाम के व्यक्ति को अपनी बोलेरो गाड़ी से कुचल कर मार डालने का आरोप लगा था। हत्या की वजह राजेश द्वारा PM नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के CM योगी आदित्यनाथ की तारीफ करना था। ऑपइंडिया ने सोमवार (14 अगस्त, 2023) को राजेश धर दुबे के परिवार से मुलाकात की। पीड़ित परिवार ने अभी तक किसी भी प्रकार की मदद न मिलने की जानकारी देते हुए खुद को बेहद आर्थिक तंगी में बताया।

राजेश धर मूल रूप से मिर्जापुर जिले के गाँव कोलाही के रहने वाले थे। यह गाँव विध्यांचल थाना क्षेत्र में पड़ता है। पिछले लगभग 3 दशक से उनका परिवार दिल्ली के संगम विहार इलाके में रहता है। हत्या के समय राजेश की उम्र 52 साल थी। वह एक मेडिकल कम्पनी में परचेज मैनेजर थे। राजेश के भाई राकेश भी अपने परिवार सहित दिल्ली में रहते हैं और वाहन चला कर परिवार का गुजारा करते हैं।

बच्चों की पढ़ाई के भी पैसे नहीं

राजेश धर की 27 वर्षीया बेटी पूजा दुबे B.Ed तक पढ़ाई कर चुकी हैं। पूजा ने हमें बताया कि उनका सपना सरकारी नौकरी का था लेकिन अब उनके पास आगे की कोचिंग और किताबें खरीदने के भी पैसे नहीं बचे हैं। हमें बताया गया कि पूरा घर मृतक राजेश धर दुबे की ही कमाई पर आश्रित था, जिनके चले जाने के बाद उनका परिवार भगवान भरोसे ही चल रहा है। पूजा का एक बड़ा भाई भी है, जो प्राइवेट नौकरी करते हैं लेकिन इस पैसे में उन्हें अपनी पत्नी और एक बच्चे को भी पालना पड़ता है।

राजेश की 50 वर्षीया विधवा शैल दुबे ने भी अपने परिवार को गंभीर आर्थिक संकट से जूझता बताया। उन्होंने भविष्य की चिंता करते हुए कहा कि पढ़ाई के साथ अभी उन्हें एक बेटे और एक बेटी की शादी भी करनी है, जिसके लिए उनके पास कुछ भी नहीं है। शैल दुबे ने हमें यह भी बताया कि अक्सर रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी उन सभी को तंगी से जूझना पड़ रहा है। जिस घर में दुबे परिवार रहता है, वो उनका निजी मकान है। हालाँकि, दिवंगत राजेश की पत्नी ने बताया कि मकान को कई लोगों से कर्ज ले कर बनवाया गया है जिसे उन लोगों को ही चुकाना है।

नहीं मिली कहीं से कोई भी मदद

मृतक राजेश की पत्नी शैल और बेटी पूजा ने हमें बताया कि अभी तक उन्हें कहीं से भी कोई भी सरकारी या व्यक्तिगत मदद नहीं मिली है। शैल दुबे ने हमें बताया कि शुरू में प्रशासनिक अधिकारियों सहित तमाम लोग आए और उन्होंने हमारे परिवार को हर सम्भव मदद का भरोसा भी दिया, लेकिन उसमें से कोई वादा पूरा नहीं हुआ। पूजा दुबे ने कहा कि लोगों ने अब उन्हें भुला दिया है। दोनों ने मिल कर पीएम मोदी, सीएम योगी और उनके प्रशासनिक अधिकारियों से अपने परिवार की मदद की अपील भी की।

‘हमारा तो यही एक देश, हम कहाँ जाएँ’

मुंबई में ट्रेन के अंदर चेतन सिंह द्वारा की गई गोलीबारी की घटना का भी जिक्र मृतक राजेश की बेटी पूजा ने किया। उन्होंने कहा, “कुछ टाइम पहले मैंने न्यूज़ में पढ़ा कि ट्रेन में एक हिन्दू कॉन्स्टेबल से चली गोली से कुछ मुस्लिम लोगों की मौत हो गई। तो उन मुस्लिम लोगों की फैमिली ने बोला कि ये भारत देश हमारे रहने के लिए सेफ नहीं हैं। पर मेरे पापा हिन्दू थे। वो हमेशा योगी-मोदी की तारीफ करते थे। यही उन्होंने उस दिन भी किया जब वो उस गाड़ी में बैठे थे जिसका ड्राइवर एक मुस्लिम अमजद था।”

पूजा ने इस घटना पर आगे कहा, “सिर्फ मोदी-योगी की तारीफ़ करने के चलते अमजद ने पापा को धक्का दे कर उन पर गाड़ी चढ़ा दी और तब तब चढ़ाई जब तक उनकी डेथ नहीं हो गई। हम लोग तो हिन्दू हैं। मेरे पापा हिन्दू थे। हम लोग ये देश छोड़ कर कहाँ जाएँ? हम क्या करें? हमें भी तो इंसाफ चाहिए। हमारे पापा और हमारी फैमिली के लिए।” इतना कहने के बाद पूजा फूट-फूट कर रोने लगीं। पास बैठी उनकी माता भी भावुक हो गईं।

इंसानियत सर्वोपरि रखते थे राजेश

दिवंगत राजेश धर की पत्नी शैल ने हमें बताया कि उनके पति भी लोगों को एक जैसे इंसान की नजर से देखते थे। उनका दावा है कि उनके पति में हिन्दू-मुस्लिम जैसी कोई भावना नहीं थी। फिलहाल अमजद जेल में है और उसकी जमानत नहीं हो पाई है। अमजद की गाड़ी राजेश के भतीजे की शादी में बुक की गई थी। पूजा का दावा है कि उनके गाँव के जिस व्यक्ति ने शादी में आरोपित अमजद की गाड़ी बुक की थी वो अब शर्मिंदा हैं। पीड़ित परिवार ने अमजद को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की माँग की है। पूजा ने कहा कि वो कभी भी अमजद को माफ़ नहीं कर पाएँगी।

मुस्लिमों से डरा है परिवार

राजेश के भाई राकेश ने हमें बताया कि वो अपने भाई के परिवार की मदद के लिए कई बार अधिकारियों को चिट्ठी भी लिख चुके हैं लेकिन उस पर कोई जवाब नहीं आया और न ही उस पर कोई एक्शन हुआ। इस पत्र में 50 लाख रुपए मुआवजे और एक व्यक्ति के लिए सरकारी नौकरी की माँग शामिल है। पत्र में आरोपित अमजद के गाँव विजयपुर से मुस्लिम बहुल आबादी का आना-जाना बताते हुए राकेश धर ने अपने परिवार और अपने गाँव के ग्रामीणों को डरा-सहमा और तनाव में बताया है। साथ ही उन्होंने प्रशासन से परिवार सहित अन्य ग्रामीणों की सुरक्षा की माँग भी की है।

अधिकारियों को भेजा गया पत्र

‘इस देश में हिन्दू ही पीड़ित’

एक सवाल के जवाब में राजेश धर की बेटी पूजा ने बताया कि भारत में हिन्दू ही पीड़ित हैं जिन पर आए दिन मुस्लिम समुदाय का कोई न कोई कहीं न कहीं हमला कर रहा है या मार दे रहा है। पूजा ने आफ़ताब-श्रद्धा काण्ड सहित कई अन्य उदाहरण भी दिए। उन्होंने अपने पिता राजेश को भी प्रताड़ना की इस लिस्ट में गिनाया और हिन्दू को हमलावर कहने वालों को गलत बताया। बता दें कि आफताब द्वारा अपनी गर्लफ्रेंड श्रद्धा वॉकर की हत्या का मामला खासा चर्चा में आया था। उसने श्रद्धा के शव के कई टुकड़े कर के फेंक दिए थे।

भाजपा से मुस्लिमों की नफरत राजेश के कत्ल की वजह

राजेश की बेटी पूजा ने कहा कि सिर्फ भाजपा, मोदी और योगी का समर्थक होने के अलावा उनके पापा का कोई दोष नहीं था जो अमजद ने उन्हें कुचल कर मार डाला। उन्होंने कहा कि तमाम मुस्लिमों को भाजपा से चिढ़ और नफरत इसलिए है क्योंकि उन्हें लगता है कि इस पार्टी के लोग हिंदूवादी हैं। कई भाजपा कार्यकर्ताओं और हिंदूवादियों की हत्या की वजह पूजा ने इसी सोच को बताया।

इसी वाहन से अमजद ने कुचला था राजेश को

राजेश की पत्नी शैल ने बताया कि उनकी शादी 1984 में हुई थी और तब से वो अपने पति को सिर्फ और सिर्फ भाजपा के लिए समर्पित देखा था। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली हो या मिर्जापुर, राजेश हमेशा चर्चा में भाजपा का ही पक्ष लिया करते थे। खासतौर से राजेश PM मोदी और CM योगी से बेहद प्रभावित थे।

सरकारी कामों में अपना खुद का खर्च

मृतक राजेश की पत्नी और बेटी ने हमें बताया कि कभी FIR में किसी काम से उन्हें दिल्ली से मिर्जापुर पुलिस बुलाती है तो कभी बैंक में बीमा वाले। हर माह दिल्ली से मिर्जापुर लगभग 3 से 4 बार उनको दौड़ लगानी पड़ती है। इस काम में भी काफी खर्च आता है। ये पैसा उनकी जमापूँजी से जा रहा है जो उनके लिए और अधिक मुसीबतों को बढ़ाने वाला है। हालाँकि, अमजद पर किसी भी हाल में कार्रवाई और न्याय पाने की धुन में पीड़ित परिवार हर कार्रवाई में शामिल हो रहा है।

क्या था मामला

गौरतलब है कि ये घटना 12 जून. 2023 की है। तब पीड़ित परिवार ने मिर्जापुर पुलिस में शिकायत देते हुए बताया था कि यहाँ के कोलाही गाँव के राजेश दुबे अपने भतीजे की शादी में शामिल होने अमजद की बोलेरो गाड़ी बुक कर के गए थे। इस दौरान राजनैतिक चर्चा हुई जिसमें अमजद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और UP के CM योगी आदित्यनाथ को माँ-बहन की गालियाँ देना शुरू कर दिया। राजेश ने इसका विरोध किया तो उनकी अमजद से तकरार हो गई।

गाड़ी से उतर जाने के बाद अमजद ने घर जा रहे राजेश पर बोलेरो चढ़ा दी। इस घटना से राजेश की मौत हो गई थी। पुलिस ने अमजद पर IPC की धारा 302 और 504 के तहत केस दर्ज किया। अमजद को गिरफ्तार कर लिया गया था जो अभी तक जेल में है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

अलीबाग, फॉर्म हाउस, क्रिकेट पिच: टाइम्स ऑफ इंडिया के रिपोर्ट से बिफरे विराट कोहली, कहा- बचपन से जो अखबार पढ़ा वो भी फेक न्यूज छापने लगा

क्रिकेटर विराट कोहली ने टाइम्स ऑफ इंडिया (टीओआई) में उनके बारे में छपी खबर को फर्जी बताया है और इसके लिए मीडिया संस्थान को फटकार लगाई है। दरअसल, टीओआई ने दैनिक अखबार पत्र मिड-डे के हवाले से अलीबाग स्थित कोहली के नए फार्महाउस में क्रिकेट पिच बनाने की योजना के बारे में खबर छापी थी।

इस खबर में बताया गया था कि क्रिकेटर कोहली अपने अलीबाग फार्महाउस वाली संपत्ति पर क्रिकेट पिच बनाने के इच्छुक हैं और इसे लेकर वहाँ काम जारी है। इसे लेकर क्रिकेटर ने मंगलवार (14 अगस्त) को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक रील शेयर की है।

इसमें उन्होंने टीओआई की खबर का स्क्रीनशॉट लगाने के साथ ही कैप्शन लिखा, “बचपन से जिस अखबार को पढ़ते आ रहा हूँ वो भी अब झूठी खबरें छापने लगा है।” हालाँकि, कोहली की इस पोस्ट के बाद टीओआई ने बुधवार (16 अगस्त) को दोपहर 12 बजे के बाद ये आर्टिकल अपनी वेबसाइट से हटा लिया है।

अलीबाग के जिराड गाँव इलाके में है 8 एकड़ की जमीन

टीम इंडिया के पूर्व कैप्टन और मशहूर बल्लेबाज विराट कोहली और उनकी अभिनेत्री पत्नी अनुष्का शर्मा ने मुंबई के नजदीक अलीबाग के जिराड गाँव इलाके में 8 एकड़ जमीन खरीदी थी। दोनों 19 करोड़ 24 लाख रुपए में खरीदी गई, इस जमीन को देखने के लिए भी गए थे। उनकी ये फोटोज सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थी।

इसी जमीन को लेकर खबरें उड़ीं कि वो वहाँ क्रिकेट पिच बनाने बनाने की तैयारी कर रहे हैं। इसी के साथ टीओआई ने मंगलवार (15 अगस्त 2023) को हेडिंग ‘अनुष्का शर्मा और विराट कोहली अलीबाग फार्महाउस पर क्रिकेट पिच बनाएँगे: रिपोर्ट’ खबर पोस्ट की थी। मीडिया हाउस ने अपने आधिकारिक ट्विटर (अब एक्स) हैंडल पर भी ये खबर पोस्ट की थी।

टीओआई ने हटाई विराट की खबर

इस खबर को लेकर विराट कोहली टीओआई पर बरसे और अपनी इंस्टा पोस्ट के जरिए उसे लताड़ते हुए इस खबर को सिरे से खारिज कर दिया। इसके बाद टीओआई ने अपनी वेबसाइट से बुधवार (16 अगस्त 2023) की दोपहर वो खबर हटा ली और इसकी जगह हेडिंग दी कि ‘ये आर्टिकल हटा लिया गया है। किसी भी तरह की असुविधा के लिए खेद है’।

इससे पहले कोहली की कमाई को लेकर भी कुछ खबरें मीडिया में आई थीं। इनमें ये दावा किया गया था कि उनकी हर इंस्टाग्राम पोस्ट की कमाई करीब 11 करोड़ 40 लाख तक की है। इसको लेकर भी कोहली ने कहा था कि सोशल मीडिया पर उनकी कमाई को लेकर जो भी खबरें आ रही हैं, वो झूठ हैं। उन्होंने कहा था कि जो भी उनके पास है, उसके लिए वो सबके शुक्रगुजार हैं, लेकिन इस तरह की झूठी बातें फैलाना गलत है।

सनी देओल ने शाहरुख़-सलमान सबको पीछे छोड़ा: किसी भी 15 अगस्त पर सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी ‘ग़दर 2’, देखें अब तक के आँकड़े

सनी देओल की फिल्म ‘ग़दर 2’ ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर गुरुवार (15 अगस्त, 2023) को 55.50 करोड़ रुपए का कारोबार कर के इतिहास रच दिया। ये 15 अगस्त वाले दिन किसी भी साल किसी भी फिल्म द्वारा की जाने वाली सबसे ज़्यादा कमाई है। इस तरह सनी देओल ने शाहरुख़ खान और सलमान खान को भी पीछे छोड़ दिया। इस तरह भारत में ‘ग़दर 2’ का नेट कनेक्शन 229 करोड़ रुपए पहुँच गया है, वो भी मात्र 5 दिनों में। फिल्म अभी थमने का नाम नहीं ले रही है और अगले वीकेंड में कमाई और बढ़ने ही वाली है।

उधर अक्षय कुमार की फिल्म ‘OMG 2’ ने स्वतंत्रता दिवस की छुट्टियों का फायदा उठाते हुए 18 करोड़ रुपए की कमाई की, जिसके बाद उसका नेट कलेक्शन 73 करोड़ रुपए पहुँच गया है। वहीं सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्म ‘जेलर’ भी थमने का नाम नहीं ले रही है और इसने तो इस दिन दुनिया भर में 64 करोड़ रुपए का कारोबार कर डाला। फिल्म का वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस कलेक्शन फ़िलहाल 416 करोड़ रुपए पहुँच गया है। उधर रजनीकांत खुद हिमालय पर महावतार बाबाजी की गुफा में 2 घंटे का ट्रेक कर के पहुँचे और वहाँ साधना की।

याद दिला दें कि ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘शोले’ भी 1975 में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ही रिलीज हुई थी, लेकिन इसने कमाई की रफ़्तार दूसरे सप्ताह के बाद पकड़ी थी। 2012 में सलमान खान की ‘एक था टाइगर’ ने 15 अगस्त के दिन रिलीज होकर 32.92 करोड़ रुपए का कारोबार किया था। इसी तरह 2019 में अक्षय कुमार की ‘मिशन मंगल’ ने इस दिन 29.13 करोड़ रुपए बटोरे थे। 2018 में अक्षय कुमार की ‘गोल्ड’ आई थी, लेकिन इसका कलेक्शन भी उस दिन 22 करोड़ रुपए के आसपास रहा था।

शाहरुख़ खान की ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ ने 2013 में 15 अगस्त के दिन 19 करोड़ रुपए से भी अधिक की कमाई की थी। ये फिल्म बाद में उस समय तक की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म बनी। हालाँकि, अब ‘ग़दर 2’ की आँधी में ये सब उड़ गए हैं। ‘ग़दर 2’ अब ‘पठान’ फिल्म के 524 करोड़ रुपए की लाइफटाइम नेट कमाई के आँकड़े का पीछा कर रही है। अगर अगला वीकेंड अच्छा रहता है तो ये रिकॉर्ड भी टूट सकता है। ‘ग़दर 2’ में अमीषा पटेल, उत्कर्ष शर्मा और सिमरत कौर भी हैं।

गोधरा में ट्रेन जलाने के मामले में शौकत, बिलाल और सिद्दीकी को बेल देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कहा- तीनों की सक्रिय भूमिका थी

साल 2002 में गुजरात के गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के डब्बों को जलाने के मामले में आजीवन कारावास की सजा पाए तीन दोषियों को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बेल देने से मना कर दिया। जमानत याचिका को खारिज करते हुए शीर्ष न्यायालय ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर था। बताते चलें कि इस घटना के बाद ही गुजरात में जगह-जगह दंगे भड़के थे।

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा, “यह बहुत ही गंभीर घटना है। यह किसी अकेले व्यक्ति की हत्या का सवाल नहीं है। इस घटना में इन दोषियों को विशिष्ट भूमिकाएँ दी गई थीं।” इसके साथ ही अपील को खारिज कर दी गई।

सर्वोच्च न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा भोग रहे सौकत यूसुफ इस्माइल मोहान, बिलाल अब्दुल्ला इस्माइल बादाम घांची और सिद्दीक को ‘इस स्तर पर’ जमानत पर रिहा करने से इनकार कर दिया। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में गुजरात उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली अपीलों को उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करेगी।

दोषियों की तरफ से सर्वोच्च न्यायालय में उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने कहा कि इन तीनों को ट्रायल कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा दी है। इनमें से एक 17 साल 6 महीने से हिरासत में है, जबकि एक अन्य दोषी 20 साल से जेल में है।

एडवोकेट हेगड़े ने कोर्ट में तर्क दिया कि इन तीनों में से दो छोटे अपराध में जेल में हैं। इनमें से एक पत्थरबाजी करने और एक अन्य शख्स घटना के दौरान लोगों के सामान और जेवरात चुराने का दोषी है। उन्होंने कहा कि ये जेवरात कभी बरामद भी नहीं हुए हैं।

वहीं, गुजरात सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इनमें से एक मुख्य साजिशकर्ता था, जिसने हथियारबंद लोगों को हमले के लिए उकसाया था। इसके बाद बेंच ने कहा कि हिंसा में इन तीनों की अहम भूमिका थी।

बताते चलें कि ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा को गुजरात हाईकोर्ट ने बरकरार रखा था। इसके बाद दोषियों ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। यह याचिका अभी लंबित है।

बताते चलें कि 21 अप्रैल 2023 को इसी मामले में आजीवन कारावास की सजा पाए 8 दोषियों को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी थी। जिन दोषियों को जमानत दी गई थी, वे थे – अब्दुल सत्तार इब्राहिम गद्दी असला, यूनुस अब्दुल हक्क समोल, मोहम्मद हनीफ अब्दुल्ला मौलवी बादाम, अब्दुल रऊफ अब्दुल माजिद ईसा, इब्राहिम अब्दुलरजाक अब्दुल सत्तार समोल, अयूब अब्दुल गनी इस्माइल पटालिया, सोहेब यूसुफ अहमद कलंदर और सुलेमान अहमद हुसैन।

हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने चार दोषियों- अनवर मोहम्मद मेहदा, सौकत अब्दुल्ला मौलवी इस्माइल बादाम, मेहबूब याकूब मीठा और सिद्दीक मोहम्मद मोरा को जमानत देने से इनकार कर दिया था, क्योंकि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने घटना में उनकी भूमिका को उजागर करने वाले उनके आवेदनों का विरोध किया था।

दरअसल, 27 फरवरी 2002 को मुस्लिम भीड़ ने अयोध्या से लौट सबरमती एक्सप्रेस के S-6 बोगी में ज्वलनशील पदार्थ डालकर जला दिया था। कारसेवकों से भरी इस बोगी में छोटे बच्चों एवं महिलाएँ समेत 59 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद पूरे गुजरात में दंगे भड़क उठे थे।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पास से नहीं हटेगा अतिक्रमण, सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे की जमीन से कब्जा हटाने पर लगाई रोक: बुलडोजर कार्रवाई को याकूब शाह ने दी थी चुनौती

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (16 अगस्त, 2023) को मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के आसपास ध्वस्तीकरण की करवाई को लेकर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। बता दें कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पीछे बने अवैध निर्माणों पर रेलवे प्रशासन द्वारा बुलडोजर चलाने की कार्रवाई की जा रही थी। जस्टिस अनिरुद्ध बोस, संजय कुमार और SVN भारती ने इस मामले में वहाँ के निवासियों को राहत प्रदान की है। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांतो चंद्र सेन ने उनकी तरफ से पैरवी की।

उन्होंने दलील दी कि अगर डेमोलिशन ड्राइव यूँ ही चलता रहा तो फिर उसे रोकने के लिए दायर हुई इस याचिका का कोई औचित्य ही नहीं रह जाएगा। उन्होंने दावा किया कि वो सुप्रीम कोर्ट पहुँचे, तब उत्तर प्रदेश में सारी की सारी अदालतें बंद थीं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि इसी का फायदा उठा कर प्रशासन ने 100 से भी अधिक घरों को ध्वस्त कर दिया। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में 200 मकान हैं, जिनमें से मात्र 70-80 बचे हैं।

उन्होंने कहा कि अगर इसे तुरंत नहीं रोका गया तो याचिका बेकार हो जाएगी। उनकी संक्षिप्त दलीलों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नोटिस जारी किया जाता है, इस बारे में भारत सरकार क्र एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड जवाब देंगे। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि प्रभावित इलाके में अगले 10 दिनों तक यथास्थिति बनाए रखा जाए। साथ ही पीठ ने इस याचिका को एक सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एडिशनल एफिडेविट दायर करने की अनुमति भी दे दी। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी इशारा किया कि अंत में इस मामले को सुलझाने के लिए स्थानीय अदालतों को कहाँ जाएगा, जहाँ इन लोगों के संपत्ति विवाद के मामले लंबित हैं। 9 अगस्त को मथुरा की ‘नई बस्ती’ में ये डेमोलिशन ड्राइव शुरू हुआ था। रेलवे द्वारा इसे अवैध अतिक्रमण करार दिया गया था। मथुरा से वृन्दावन तक 21 किलोमीटर की छोटी रेल लाइन को बड़ी लाइन बनाया जाना है, ताकि ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ जैसी ट्रेनों का परिचालन हो सके।

लेकिन, वहाँ के निवासी हटने को तैयार नहीं है। उन्होंने अपने सामान को हटाने और खुद हटने के लिए 3 दिन का समय भी दिया गया था। उन्होंने अदालत का रुख किया। हालाँकि, उत्तर प्रदेश में एक वकील की हत्या के कारण सारे वकील हड़ताल पर थे, इसलिए सुनवाई नहीं हो सकी। अंततः वहाँ के निवासी याकूब शाह ने याचिका दायर की। तुरंत सुनवाई की माँग पर मुख्य न्यायाधीश DY चंद्रचूड़ ने इस याचिका को 16 अगस्त को लिस्ट करने का आदेश दिया।

मोदी सरकार में मंत्री बनेंगे पवार पिता-पुत्री? महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित ने चाचा को दिया ऑफर, पूर्व मुख्यमंत्री के हवाले से रिपोर्ट में दावा

एक मीडिया रिपोर्ट ने फिर से महाराष्ट्र का सियासी पारा चढ़ा दिया है। इसके अनुसार उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार और उनकी सांसद बेटी सुप्रिया सुले को केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री बनने का ऑफर दिया है। कथित तौर पर अजित ने यह प्रस्ताव 12 अगस्त 2023 को शरद पवार के साथ ‘सीक्रेट मीटिंग’ में दी थी।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने अजित के इस ऑफर का दावा कॉन्ग्रेस के एक पूर्व मुख्यमंत्री के हवाले से किया है। हालाँकि रिपोर्ट में इस नेता की पहचान नहीं बताई गई है। रिपोर्ट में इस अनाम पूर्व मुख्यमंत्री के हवाले से कहा गया है, “अजीत ने अपने चाचा से कहा था कि उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में कृषि मंत्री या नीति आयोग उपाध्यक्ष का पद दिया जाएगा। वहीं सुप्रिया सुले और जयंत पाटिल को क्रमशः केंद्र और राज्य सरकार में शामिल किया जाएगा।” पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया है कि शरद पवार ने भतीजे के इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। साथ ही कहा है कि वह किसी भी तरह से भाजपा के साथ गठबंधन नहीं करेंगे।

शरद पवार और अजित पवार की 12 अगस्त को पुणे के बिजनेसमैन अतुल चोरड़िया के घर पर ‘सीक्रेट मीटिंग’ हुई थी। मीटिंग में शरद पवार के साथ जयंत पाटिल भी थे। चाचा-भतीजे की इस मुलाकात पर महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे, कॉन्ग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने नाराजगी जताई थी। कॉन्ग्रेस और शिवसेना (UBT) का कहना था कि एनसीपी को दो फाड़ करने के बाद अजित पवार एनडीए में शामिल हो गए हैं, इसलिए शरद पवार को उनसे नहीं मिलना चाहिए।

नाना पटोले ने यह भी कहा था कि इस तरह की मीटिंग स्वीकार नहीं की जाएगी। इसके बारे में राहुल गाँधी को भी जानकारी दी गई है। वहीं, यूबीटी शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा है, “अजित पवार को पवार साहब ने बनाया। शरद पवार को अजित पवार ने नहीं बनाया। 60 साल से भी ज्यादा समय पवार साहब संसदीय राजनीति में बिता चुके हैं। 4 बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे। केंद्रीय मंत्री भी रहे। शरद पवार का कद बहुत बड़ा है। ये जूनियर लोग हैं, ये क्या ऑफर देंगे?”

अजित पवार के साथ हुई ‘सीक्रेट मीटिंग’ को शरद पवार ने पारिवारिक मुलाकात करार दिया था। उन्होंने कहा था कि वे उनके भतीजे हैं और परिवार के सदस्य से मुलाकात में कुछ बुराई नहीं है। उन्होंने कहा था कि अगर परिवार के वरिष्ठ व्यक्ति किसी अन्य सदस्य से मिलना चाहता हो तो इससे किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। NCP को अपनी पार्टी बताते हुए कहा था कि वो उनकी पार्टी भाजपा के साथ किसी भी कीमत पर नहीं जाएगी। उन्होंने अजित पवार का नाम लिए बिना कहा था कि पार्टी के कुछ लोगों ने अलग रुख अपनाया है। कुछ शुभचिंतक उनके रुख में बदलाव के लिए प्रयास कर रहे हैं। इसलिए सौहार्दपूर्ण वातावरण में चर्चा हो रही है। बता दें कि 2 जुलाई को अजित पवार के नेतृत्व में एनसीपी का एक गुट महाराष्ट्र की एनडीए सरकार में शामिल हो गया था।

NMML हुआ प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय: भड़की कॉन्ग्रेस, कहा- नेहरू की विरासत को बदनाम करना PM मोदी का एकमात्र एजेंडा

नई दिल्ली का नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी (NMML) अब आधिकारिक तौर पर प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय सोसायटी (Prime Minister Museum and Library- PMML) हो गया है। सोमवार (14 अगस्त 2023) को इसका नया नामकरण किया गया। हालाँकि नाम बदलने का फैसला इस साल जून में ही हो गया था। नाम बदले जाने के बाद कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी पर नेहरू की विरासत को बदनाम और नष्ट करने का आरोप लगाया है।

नाम बदले जाने की जानकारी पीएमएमएल के वाइस चेयरमैन ए सूर्या प्रकाश ट्वीट कर दी है। उन्होंने पीएम मोदी, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और संस्कृति मंत्रालय को टैग करते हुए लिखा है, “समाज के दायरे के लोकतंत्रीकरण और विविधिता की तर्ज पर नेहरू मेमोरियल संग्रहालय और पुस्तकालय (एनएमएमएल) अब 14 अगस्त, 2023 से प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय (पीएमएमएल) सोसायटी है। स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ!”

एनएमएमएल का नाम बदलने का जब फैसला हुआ था, तब भी कॉन्ग्रेस ने नाराजगी जताई थी। अब आधिकारिक घोषणा के बाद पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने फिर से पीएम मोदी पर हमला बोला है। कहा है कि पीएम मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को लेकर हमेशा खौफ और असुरक्षा में रहते हैं।

उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “प्रधानमंत्री मोदी भय, हीन भावना और असुरक्षा से भरे नजर आते हैं। खासकर बात जब हमारे पहले और सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री की आती है। उनका एकमात्र एजेंडा नेहरू और नेहरूवादी विरासत को गलत ठहराना, बदनाम करना, तोड़ मरोड़कर पेश करना और नष्ट करना है।”

क्यों बदला NMML का नाम?

जून 2023 के मध्य में NMML का नाम बदलकर प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय (PMML) रखने का फैसला लिया गया था। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक यह फैसला रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में लिया गया था। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2016 में तीन मूर्ति परिसर में भारत के सभी प्रधानमंत्रियों को समर्पित एक संग्रहालय स्थापित करने का विचार रखा था। इसके बाद इस प्रोजेक्ट को एनएमएमएल की एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने 25 नवंबर 2016 में औपचारिक तौर पर मँजूरी दी थी।

बीते साल 21 अप्रैल 2022 को प्रधानमंत्री संग्रहालय को लोगों के लिए खोल दिया गया था। इस संग्रहालय में सारे प्रधानमंत्रियों के योगदान को चित्रित किया गया है। देश के सभी प्रधानमंत्रियों के योगदान को दिखाया गया है। इसके उद्घाटन समारोह में नेहरू-गाँधी परिवार को भी निमंत्रण भेजा गया था। लेकिन परिवार का कोई भी सदस्य इस समारोह में नहीं आया। गौरतलब है कि नेहरू-गाँधी परिवार से पंडित नेहरू, इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी ने देश के प्रधानमंत्री के तौर पर अपनी सेवाएँ दी थी।