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सीएम के निर्देश पर बिहार में मछलियों पर लगे बैन पर मिली राहत

मुख्यमंत्री नितीश कुमार के निर्देश पर बिहार की राजधानी पटना में मछलियों पर लगा बैन आंशिक रूप से हटा दिया गया है। मछिलयों पर लगे बैन के दौरान मछली विक्रेताओं के भारी विरोध प्रदर्शन के कारण नीतीश सरकार के मंत्री मदन साहनी ने सीएम से मुलाकात कर इस बैन को हटाने का आग्रह किया था।

रिपोर्ट के अनुसार, ज़िन्दा मछलियों पर लगा बैन हटा दिया गया हैं क्योंकि ज़िन्दा मछलियों में किसी भी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं पायी गई है। लेकिन, मृत मछलियों की सभी किस्मों की बिक्री, परिवहन और भंडारण पर 15 दिन का लंबा प्रतिबंध जारी रहेगा।

मालूम हो कि बिहार में आंध्र प्रदेश, बंगाल सहित अन्य राज्यों से आने वाली मछलियों पर सरकार ने 14 जनवरी को बैन लगा दिया था क्योंकि इन मछलियों में जानलेवा रसायन पाया गया था। सरकार ने 14 जनवरी को आदेश ज़ारी कर बिहार के अंदर किसी भी तरह की मछली की खरीद बिक्री और उसके खाने पर रोक लगा दी थी। आदेश का पालन नहीं करने वालों पर 10 लाख रुपए जुर्माना और 7 साल तक की सज़ा का प्रावधान किया था। खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 59 के तहत, जो असुरक्षित भोजन के लिए दंड से संबंधित है।

बता दें कि बिहार सरकार के इस निर्णय के ख़िलाफ़ मछली व्यापारियों ने कड़ा विरोध दर्ज़ कराया था। उन्होंने कहा कि उन्हें ये बातें अख़बारों से माध्यम से पता चलीं। राज्य सरकार के इस निर्णय के ख़िलाफ़ विरोध दर्ज़ कराने के लिए क़रीब 500 मछली व्यापारियों ने पटना की मछली मंडी में शनिवार (जनवरी 12, 2019) को एक बैठक आयोजित की थी। इस बैठक में व्यापारियों ने बिहार सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि जिस फार्मलिन की बात सरकारी महक़मों द्वारा की जा रही है, वो सरासर झूठी और बेबुनियाद है।

सरकार का बड़ा फ़ैसला: शहीद हुए जवानों की विधवाओं और सेवानिवृत्त सैनिकों को मिलेगी कानूनी सहायता

भारत सरकार ने शहीद जवानों की विधवाओं और सेवानिवृत्त सैनिकों के लिए बड़ा फ़ैसला लिया है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन ने शहीद जवानों की विधवाओं व सेना के सेवानिवृत्त जवानों के लिए किसी भी तरह की कानूनी सहायता के प्रावधान को मंजूरी प्रदान की है। उन्होंने यह निर्णय
बुधवार 16 जनवरी को लिया।

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद ने मीडिया को इसकी जानकारी दी है। सरकार का यह फ़ैसला बलिदानी सैनिकों की लाखों विधवाओं के लिए लाभकारी साबित होगा। ऐसा देखा गया है कि जवानों के शहीद होने के बाद किसी भी तरह की कानूनी सहायता के लिए विधवाओं को कई सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

पति के शहीद होने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति सही नहीं होने पर किसी भी कानूनी समस्या को हल करने के लिए या महंगे वकील की व्यवस्था करने के लिए विधवा को दर-दर भटकना पड़ता है। ऐसे में सरकार का यह फ़ैसला सेवानिवृत्त जवानों और शहीदों की विधवाओं के लिए बेहद राहत भरा साबित हो सकता है।

इस प्रस्ताव पर फ़ैसला लेने के लिए रक्षा मंत्री ने मंत्रालय के उच्च स्तरीय अधिकारियों के साथ मीटिंग की। इस मीटिंग में रक्षा मंत्रालय के आला अधिकारियों के अलावा आर्मड फोर्स ट्रिब्यूनल के चेयरमैन जस्टिस विरेंद्र सिंह भी मौजूद थे।

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता के ने बताया कि मंत्रालय के इस फैसले को लागू करने में केंद्रीय सैनिक बोर्ड व ज़िला सैनिक बोर्ड के अधिकारी मदद करेंगे।

लोकसभा चुनाव की तारीख़ों से जुड़ी अफ़वाह फ़ैलाने वालों पर चुनाव आयोग सख्त

आगामी लोकसभा चुनावों की तारीख़ों से संबंधित झूठी खबर फ़ैलाने वालों पर संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग ने दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी को ऐसी ख़बरें फ़ैलाने वालों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज़ कराने को कहा है।

सोशल मीडिया पर 15 जनवरी से लोकसभा चुनाव को लेकर एक झूठी ख़बर फ़ैलाई जा रही है। इस ख़बर में दावा किया गया है कि लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया 7 अप्रैल से शुरू होगी और 17 मई को समाप्त होगी।

सोशल मीडिया में फ़ेसबुक व वाट्सअप जैसे माध्यम के ज़रिए फैलाई जा रही इस झूठी ख़बर पर चुनाव आयोग ने सख़्त रुख़ अपनाया है। चुनाव आयोग की नोटिस के बाद दिल्ली चुनाव आयोग ने दिल्ली पुलिस को पत्र लिखकर इस मामले में स्पेशल सेल व तकनीकी सेल की मदद लेने का आग्रह किया है।

आमतौर पर यह देखा गया है कि लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया आरंभ होने से एक या दो महीने पहले चुनाव आयोग तारीख़ों की घोषणा करता है। लेकिन सोशल मीडिया पर ट्रैफ़िक लाने व ट्रेंड बढ़ाने करने के चक्कर में शरारती तत्वों द्वारा लोकसभा चुनाव से जुड़ी झुठी ख़बर को सोशल मीडिया पर फ़ैलाया जा रहा है।  

पहले भी प्रधानमंत्री से जुड़ी अफ़वाह को फ़ैलाया गया है

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 15 जनवरी को खुर्दा-बलांगिर रेलवे लाइन को हरी झंडी दिखाने के लिए ओडिशा के बलांगिर पहुँचे थे। प्रधानमंत्री का यह दौरा हेलिपेड निर्माण के लिए हजारों पेड़ काटे जाने की झूठी ख़बर के बाद विवाद में आ गया था।

दरअसल 14 जनवरी को पीटीआई ने एक ख़बर अपडेट की थी, जिसके बाद इस ख़बर को आधार बनाकर मुख्यधारा की मीडिया वेबसाइटों ने प्रधानमंत्री के हेलीपेड के लिए 1000-1200 पेड़ काटे जाने की ख़बर को प्रमुखता से प्रचारित किया था।

पीटीआई ने डिविजनल फ़ॉरेस्ट ऑफिसर (बलांगिर) समीर सतपथी के स्टेटमेंट को आधार बनाकर यह रिपोर्ट तैयार कर दी थी। अपने स्टेटमेंट में सतपथी ने कहा कि फ़ॉरेस्ट विभाग से अनुमति लिए बग़ैर हेलीपेड बनाने के लिए पेड़ों को काटा गया, इस मामले में जाँच का आदेश दे दिया गया है।

फ़ॉरेस्ट विभाग के एक अधिकारी के बयान के बाद पीटीआई जैसे संस्थान में काम करने वाले रिपोर्टर ने ग्राउंड पर जाकर सच जानने की कोशिश नहीं की। हालाँकि, PTI की ख़बर में ‘alleged’ शब्द का इस्तेमाल हो रहा है फिर भी देश के इतने बड़े मीडिया संस्थान के द्वारा ऐसी ख़बर को ‘कथित’ (alleged) कहकर आगे बढ़ा देना आलस्य ही कहा जाएगा।

इसका परिणाम यह हुआ कि प्रधानमंत्री से जुड़ी गलत ख़बर को लगभग सभी संस्थानों ने अपनी वेबसाइट पर अपडेट किया। इसके बाद 13 जनवरी 2019 को द हिन्दू ने अपने वेबसाइट पर एक ख़बर प्रकाशित की। इस ख़बर में इस बात का उल्लेख है कि ‘अर्बन प्लांटेशन प्रोग्राम’ के अंतर्गत 2.25 हेक्टेयर जमीन रेलवे विभाग ने 2016 में अपने अधीन ली थी।

हेलीपेड बनाने के लिए कुछ खाली ज़मीन की ज़रूरत थी जिसके के लिए 1.25 हेक्टेयर ज़मीन को साफ़ किया गया। बाद में ऑपइंडिया ने फ़ैक्ट चेक में पाया कि यह महज अप़वाह है। प्रधानमंत्री के दौरे से पहले हेलीपेड बनाने के लिए इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों को नहीं काटा गया था।

प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना ने कीर्तिमान बनाया; एक करोड़ से अधिक युवा हुए लाभान्वित

रोजगार सृजन के लिए सरकार की महत्वपूर्ण योजना प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना (पीएमआरपीवाई) ने 14 जनवरी, 2019 तक एक करोड़ से अधिक लोगों को लाभ पहुँचा कर कीर्तिमान स्थापित किया है।

पीएमआरपीवाई की घोषणा 7 अगस्त, 2016 को की गई थी और इसे कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के ज़रिए श्रम एवं रोजगार मंत्रालय लागू कर रहा है। योजना के तहत भारत सरकार नियोक्ता के योगदान का पूरा 12 प्रतिशत का भुगतान कर रही है। इसमें कर्मचारी भविष्य निधि और कर्मचारी पेंशन योजना दोनों शामिल हैं।

सरकार का यह योगदान उन नए कर्मचारियों के संबंध में तीन वर्षों के लिए है, जिन्हें ईपीएफओ में 1 अप्रैल, 2016 या उसके बाद पंजीकृत किया गया है तथा जिनका मासिक वेतन 15 हजार रुपए तक है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2016-17, 2017-18 और 2018-19 (जनवरी 15 , 2019 तक) के दौरान क्रमशः 33,031; 33,27,612 और 69,49,436 लाभार्थियों ने पीएमआरपीवाई के तहत ईपीएफओ में पंजीकरण कराया है। योजना के कार्यान्वयन के दौरान लाभान्वित होने वाले प्रतिष्ठानों की संख्या 1.24 लाख है। यह पूरी प्रणाली ऑनलाइन और आधार के ज़रिए चलाई जा रही है।

प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्‍साहन योजना क्या है?

प्रधानमंत्री रोजगार योजना एक तरह से देश के करोड़ों युवाओं के लिए शुरू की गई ऋण योजना है। इस योजना का उद्देश्य विनिर्माण, व्यापार या सेवा क्षेत्र में बिजनेस शुरू करने के इच्छुक भारत के शिक्षित लेकिन बेरोजगार युवाओं को सब्सिडी युक्त वित्तीय सहायता देना है।

इस योजना का लाभ पाने के लिए आवेदक की आयु 18 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए। महिलाओं, अनुसूचित जाति/जनजाति, पूर्व सैनिकों और शारीरिक रूप से विकलांगों के लिए आयु सीमा में 10 वर्ष की छूट प्रदान की जाएगी। वहीं उत्तर-पूर्वी राज्यों के निवासियों के लिए आयु सीमा 18 से 40 वर्ष है।

पीएमआरपीवाई के तहत अलग-अलग सेक्‍टर में मिलने वाली अधिकतम राशि कुछ इस प्रकार है: बिजनेस सेक्‍टर में ₹2 लाख, सर्विस सेक्‍टर में ₹5 लाख और इंडस्‍ट्री सेक्‍टर ₹5 लाख। वहीं पाटर्नशिप के लिए अगर दो या दो से अधिक लोग शामिल हैं तो ₹10 लाख का लोन मिल सकता है।

साभार: पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार

बिहार के सेनारी कांड में 35 गरीब सवर्णों को मारे जाने के लिए RJD ही जिम्मेदार है तेजस्वी जी!

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को दिए जाने वाले आरक्षण के मामले में कहा, “हम गरीब सवर्णों के विरोधी नहीं हैं।”

दरअसल तेजस्वी ने ट्विटर चौपाल के नाम से एक कार्यक्रम का आयोजन किया था। इसी कार्यक्रम में सवर्णों से जुड़े एक सवाल के बाद राजद नेता ने यह जवाब दिया। लेकिन यह सोचने वाली बात है कि क्या सच में तेजस्वी और उनकी पार्टी गरीब सवर्णों की हितैषी है! इस सवाल के जवाब के लिए आपको आज से 20 साल पहले साल मार्च 1999 की दौर में जाना होगा।

18 मार्च 1999 को जहानाबाद के सेनारी गाँव में सवर्ण समुदाय के 34 लोगों को बेरहमी से मार दिया गया था, जबकि 6 लोग गंभीर रूप से जख्मी अवस्था में पाए गए थे। इस घटना के बाद पटना हाई कोर्ट में रजिस्ट्रार की नौकरी करने वाले पद्मनारायण सिंह जब घर लौटे और अपने परिवार के 8 लोगों की लाशों को देखा, तो मौके पर पद्मनारायण सिंह को दिल का दौरा पड़ा, और वो तुरंत मर गए।

इस घटना के बाद राज्य भर के सवर्णों के बीच भय का माहौल पैदा हो गया था। इस समय तेजस्वी की पार्टी राजद पार्टी की ही बिहार में सरकार थी। लालू और राबड़ी के राज में खुलेआम जाति आधारित हिंसा हो रही थी। सेनारी कांड की तरह ही राज्य में लालू के शासन में दर्जनों जाति आधारित हिंसा की घटनाएँ हुई।

राजद की सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। इसी दौर में जातीय हिंसा का जवाब देने के लिए सवर्णों की तरफ़ से रणवीर सेना नाम का एक संगठन बना। इसके बाद लालू जी पटना में बैठकर झुनझुना बजाते रहे और राज्य में, क्या दलित और क्या सवर्ण, हर तरह के लोग हिंसा में मारे जाते रहे।

रघुवंश ने आरक्षण पर पार्टी लाइन से हटकर बयान दिया

जानकारी के लिए बता दें कि अभी कल ही राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने कोटा बिल पर पार्टी के फ़ैसले के खिलाफ़ बयान दिया है। रघुवंश प्रसाद ने कहा: “लालू यादव ने मुझसे कहा था कि वो गरीब सवर्णों को आरक्षण देने के ख़िलाफ़ नहीं हैं। हमारी पार्टी ने तो हमेशा गरीबों के लिए काम किया है। हम तो यह चाहते थे कि ओबीसी, दलित व अति पिछड़ा वर्ग को आबादी के हिसाब से उनका आरक्षण बढ़ाया जाए। संसद में कोटा बिल का समर्थन न करना हमारी भूल थी। हमसे चूक तो हुई है।”

रघुवंश प्रसाद के इस बयान में हिंदी की कहावत – ‘अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत’ – की टीस मालूम होती है। लेकिन, रघुवंश सिंह ने भरोसा नहीं छोड़ा है। उन्होंने कोटा बिल पर पार्टी के स्टैंड के खिलाफ़ बयान देकर राजपूत जाति के लोगों को अपनी तरफ झुका कर रखने का प्रयास किया है।

संसद में सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़ों के लिए लाए गए बिल के विरोध का झुनझुना बजाकर राजद प्रवक्ता मनोज झा ने विरोध किया। अपने भाषण में मनोज झा ने संविधान संशोधन बिल के महत्व पर ही सवाल खड़ा कर दिया था।

निवेश आकर्षित करने के लिए नौवीं ‘वाइब्रेंट गुजरात समिट’ का उद्घाटन आज

‘वाइब्रेंट गुजरात समिट’ के नौवें संस्‍करण का शुभारंभ आज गांधीनगर स्थित महात्‍मा मंदिर प्रदर्शनी सह सम्‍मेलन केन्‍द्र में होगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी इस शिखर सम्‍मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे। इस शिखर सम्‍मेलन का लक्ष्‍य गुजरात में निवेश आकर्षित करने की गति को और तेज करना है।

‘वाइब्रेंट गुजरात समिट’ का आयोजन 18-20 जनवरी, 2019 के दौरान किया जाएगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने इस शिखर सम्‍मेलन के शुभारंभ से पहले आयोजित प्रमुख कार्यक्रम ‘ग्लोबल ट्रेड शो’ का उद्घाटन कल (जनवरी 17, 2019) गांधीनगर स्थित प्रदर्शनी केन्‍द्र में किया। साथ ही, अहमदनगर में 750 करोड़ रुपए की लागत से बने सरदार वल्लभ भाई पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च सेंटर का भी उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री ने विभिन्‍न पवेलियनों का अवलोकन किया और इसरो, डीआरडीओ, खादी इत्‍यादि के स्‍टॉल में विशेष रुचि दिखाई और इसके साथ ही इस अवसर पर एक उपयुक्त टैगलाइन ‘चरखे से चंद्रयान तक’ के साथ मेक इन इंडिया संबंधी उनके अभिनव दृष्टिकोण को प्रस्‍तुत किया गया। प्रधानमंत्री के साथ गुजरात के मुख्‍यमंत्री श्री विजय रूपाणी और अन्‍य गणमान्‍य व्‍यक्ति भी उपस्थित थे। ‘ग्‍लोबल ट्रेड शो’ का आयोजन 2,00,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में किया गया है। इस दौरान 25 से भी अधिक औद्योगिक और व्‍यवसायिक सेक्‍टर एक ही स्‍थान पर अपने-अपने अनूठे विचारों या आइडिया, उत्‍पादों और डिजाइनों को दर्शा रहे हैं।



अहमदाबाद शॉपिंग फेस्‍टि‍वल 2019 में प्रधानमंत्री मोदी के साथ गुजरात के मुख्‍यमंत्री विजय रूपाणी (तस्वीर: PIB)

शिखर सम्‍मेलन के साथ-साथ अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। एक प्रमुख आकर्षण ‘अहमदाबाद शॉपिंग फेस्‍टि‍वल 2019’ भी है जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री ने कल शाम किया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर ‘वाइब्रेंट गुजरात अहमदाबाद शॉपिंग फेस्टिवल’ के शुभंकर का भी अनावरण किया। ‘अहमदाबाद शॉपिंग फेस्‍टि‍वल 2019’ भारत में अपनी तरह का पहला आयोजन है और यह शहर के उद्यमों को अपने-अपने उत्‍पादों को दर्शाने का बेहतरीन अवसर सुलभ करा रहा है।

वाइब्रेंट गुजरात समिट के हिस्‍से के रूप में कई प्रमुख कार्यक्रमों के आयोजन के अलावा इस शिखर सम्‍मेलन का नौवाँ संस्‍करण अनेक पूर्णरूपेण नए मंचों (फोरम) के शुभारंभ का भी साक्षी बनेगा जिनका उद्देश्‍य इस शिखर सम्‍मेलन के दौरान ज्ञान साझा करने के स्‍वरूप में विविधता लाना और प्रतिभागियों के बीच नेटवर्किंग के स्‍तर को बढ़ाना है।

क्या है ‘वाइब्रेंट गुजरात समिट’

‘वाइब्रेंट गुजरात समिट’ की परिकल्‍पना वर्ष 2003 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा की गई थी जो उस समय गुजरात के तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री थे। इस शिखर सम्‍मेलन के आयोजन का मुख्‍य उद्देश्‍य गुजरात को फिर से एक पसंदीदा निवेश गंतव्‍य या राज्‍य के रूप में स्‍थापित करना था। यह शिखर सम्‍मेलन वैश्विक सामाजिक-आर्थिक विकास, ज्ञान साझा करने और प्रभावकारी साझेदारियाँ करने से जुड़े एजेंडे पर विचार मंथन करने के लिए एक उपयुक्‍त प्‍लेटफॉर्म सुलभ कराएगा।

वाइब्रेंट गुजरात समिट 2019 की प्रमुख बातें निम्‍नलिखित हैं:

  1. भारत में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) से जुड़ी शिक्षा एवं शोध में उपलब्‍ध अवसरों पर गोलमेज बैठक आयोजित की जाएगी। ‘भारत में स्‍टेम शिक्षा एवं शोध में उपलब्‍ध अवसरों के लिए रोडमैप’ तैयार करने के उद्देश्‍य से इस गोलमेज बैठक में प्रख्‍यात शिक्षाविद एवं महत्‍वपूर्ण नीति-निर्माता शिरकत करेंगे।
  2. विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (स्‍टेम) पर अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन आयोजित किया जाएगा।
  3. अत्‍याधुनिक अथवा भविष्‍यवादी प्रौद्योगिकियों और अंतरिक्ष अन्वेषण पर प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी जो अंतरिक्ष यात्रा के भविष्य के बारे में उपयुक्‍त विजन प्रस्‍तुत करेगी।
  4. भारत को एशिया के वाहनांतरण (ट्रांस-शिपमेंट) हब के रूप में स्थापित करने के लिए बंदरगाह आधारित विकास और रणनीतियों पर संगोष्‍ठी आयोजित की जाएगी।
  5. ‘मेक इन इंडिया’ से जुड़े कार्यक्रम और सरकार के महत्‍वपूर्ण उपायों या कदमों से मिली सफलता की गाथाओं को प्रदर्शित करने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ पर संगोष्‍ठी आयोजित की जाएगी।
  6. रक्षा और एयरोस्‍पेस में उद्योग के लिए उपलब्‍ध अवसरों पर संगोष्‍ठी आयोजित की जाएगी, ताकि गुजरात में रक्षा और वैमानिकी में उपलब्‍ध अवसरों के प्रति प्रतिभागियों को संवेदनशील बनाया जा सके और इसके साथ ही रक्षा एवं वैमानिकी के क्षेत्र में एक विनिर्माण केन्‍द्र (हब) के रूप में भारत और गुजरात के  उभरने से जुड़ी आगे की राह पर विचार-विमर्श किया जा सके।

वर्ष 2003 में अपनी शुरुआत से ही लेकर वाइब्रेंट गुजरात समिट ने एक उत्‍प्रेरक की भूमिका निभाई है जिसकी बदौलत कई अन्‍य राज्‍य भी अपने यहाँ व्‍यापार एवं निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य से इस तरह के शिखर सम्‍मेलनों के आयोजन के लिए प्रेरित हुए।  

साभार: पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार

कांशीराम की चेली हूँ, जैसे को तैसा जवाब देना जानती हूँ: मायावती

विगत दिनों उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी के गठबंधन के साथ ही दोनों दलों के नेता लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। इसी बीच बसपा प्रमुख मायावती ने अपने जन्मदिन पर भतीजे आकाश को विरासत सौंपने को लेकर मीडिया में आई खबरों पर गहरी नाराज़गी जताई है। उन्होंने कुछ टीवी चैनलों की दलित-विरोधी मानसिकता को इन ख़बरों के लिए ज़िम्मेदार ठहराया।

अपने भतीजे आकाश को विरासत सौंपने को लेकर मीडिया में आई खबरों पर बीएसपी प्रमुख मायावती ने अपने विचार व्यक्त करते हुए मीडिया के सामने कहा कि अगर मीडिया के जातिवादी और दलित विरोधी एक तबके को आपत्ति है तो रहे, हमारी पार्टी को इसकी कोई चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि मैं कांशीराम की चेली हूं और उनकी तरह जैसे को तैसा जवाब देना जानती हूँ। इसी दौरान उन्होंने घोषणा की कि वह अपने भतीजे आकाश को बीएसपी मूवमेंट में शामिल करेंगी और उसे सीखने का अवसर प्रदान करेंगी।

मायावती ने मीडिया पर आरोप लगाते हुए कहा कि मीडिया दलित-विरोधी है। मायावती ने कहा, “बीएसपी की बढ़ती लोकप्रियता और एसपी के साथ गठबंधन ने दलित-विरोधी पार्टियों और जातिवादी नेताओं में खलबली मचा दी है। वे लोग हमसे सीधी राजनीतिक लड़ाई लड़ने के बजाए हमारे खिलाफ़ अनर्गल बयान दे रहे हैं। दलित विरोधी मानसिकता रखने वाले टीवी चैनलों के साथ षड्यंत्र करके शरारती ख़बरें भी दिखाना शुरू कर दिए हैं, ताकी पार्टी और उसके सर्वोच्च नेतृत्व को बदनाम किया जा सके।”

हाल ही में ख़बरें आई थीं कि मायावती अपने भतीजे आकाश के राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाने जा रही हैं। मायावती ने कहा कि गरीबों के द्वारा ज्यादा केक खाने को लूट बताकर बदनाम किया गया। इसी प्रकार छोटे भाई के बेटे आकाश आनंद को लखनऊ में पार्टी में शामिल रहने को लेकर मेरे उत्तराधिकारी के तौर पर पेश करना, यह सब बीएसपी विरोधी षड्यंत्र हैं। इसी प्रकार कुछ मीडिया द्वारा साजिश के तहत चरित्र हनन का आरोप लगाने का प्रयास भी किया गया है। उन्होंने एक चैनल का नाम भी लिया।

उन्होंने कहा, “नौजवान भतीजे आकाश को जानबूझकर विवाद में घेरा जा रहा है। मेरे छोटे भाई आनंद और उनके परिवार ने 2003 के बाद से लगातार 24 घंटे हमारा हर पल साथ दिया है, इसलिए पार्टी के अधिकांश लोगों की सलाह पर मैंने कुछ समय पहले गैरराजनीतिक कार्यों के लिए उसे पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया था। हालाँकि, परिवारवाद का आरोप न लगे इसलिए आनंद ने खुद ही पद छोड़ दिया। उनके इस कदम को काफी सराहा गया। अब उनका परिवार पहले से भी ज्यादा तत्परता से बीएसपी मूवमेंट के लिए समर्पित है।”

अपने इंटरव्यू में मायावती ने कहा, “मेरे जन्मदिन पर आनंद के बेटे आकाश की मौजूदगी को लेकर संकीर्ण व जातिवादी मानसिकता रखने वाले कुछ मीडिया समूह सस्ती और राजनीतिक षडयंत्र रच रहे हैं।”

मायावती ने चेतावनी देते हुए कहा, “हम दब्बू किस्म के लोग नहीं हैं, जो सुनकर बैठ जाएँगे, घबरा जाएंगे। उसका मुँहतोड़ जवाब देना भी हमें आता है। अब मैं आकाश को बीएसपी मूवमेंट से जरूर जोडू़ंगी और उसे आगे बढ़ाऊंगी।”

उन्होंने नाराज़गी जताते हुए कहा कि जातिवादी मीडिया को अगर तकलीफ़ होती है तो हो। यही मीडिया दूसरी पार्टियों में परिवारवाद को लेकर अपनी आँखें क्यों मूँद लेता है। उन्होंने कहा कि पहले मीडिया ने मेरे चप्पल आदि को लेकर काफी घिनौना षड्यंत्र रचा था। इसी तरह मीडिया के लोग अब आकाश की चप्पलों की कीमतें ऐसे बता रहे हैं, जैसे उन्होंने ही इसे खरीद कर दिया हो।

शत्रुघ्न सिन्हा पर जमकर बरसे सुशील मोदी, कहा उन्हें पार्टी छोड़ देनी चाहिए

बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी पिछले दिनों एक निजी समाचार चैनल के कार्यक्रम में शत्रुघ्न सिन्हा पर हमलावर दिखे। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने उन्हें मंत्री और संसद बनाया, अब उसी पार्टी के वे शत्रु हो गए हैं। कार्यक्रम के दौरान मोदी ने यह भी कहा कि उन जैसे लोगों को पार्टी छोड़ देनी चाहिए।

इस कार्यक्रम के दौरान सुशील मोदी ने कहा कि लगता है शत्रुघ्न सिन्हा को अपने बारे में कुछ ज्यादा ही गलतफ़हमी हो गई है। इसके बाद एक सवाल के जवाब में मोदी ने यह भी कहा कि भाजपा का डीएनए पहले जैसा ही है, फ़र्क़ यह है कि रामविलास जी इससे जुड़ गए हैं। अब यह डीएनए प्लस हो गया है।

शत्रुघ्न सिन्हा ने स्मृति ईरानी पर दिया था विवादित बयान

पिछले दिनों फ़िल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा, जो कि बिहार की पटना साहिब सीट से भारतीय जनता पार्टी के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री भी हैं, ने मोदी सरकार से नाराज़गियों के चलते एक निजी समाचार चैनल के कार्यक्रम में केन्द्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी को निशाना बनाते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक टेलिविज़न एक्ट्रेस को मानव संसाधन विकास मंत्रालय देकर गलत किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पिछले कुछ समय से शत्रुघ्न सिन्हा लगातार हमला करते आए हैं, विवादित बयानों से चर्चा में रहने वाले शत्रुघ्न सिन्हा अटल बिहारी वाजपेई सरकार के समय स्वास्थ्य मंत्री भी रह चुके हैं। उन्होंने अपने बयान में कहा, “मंत्री बनाना प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है, लेकिन किसी टेलीविज़न एक्ट्रेस को सीधे मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ज़िम्मेदारी दे देना कहाँ तक उचित है?”

शत्रुघ्न सिन्हा ने भाजपा को अपनी पार्टी बताते हुए कहा कि उन्होंने कभी पार्टी के ख़िलाफ़ नहीं बोला और अब भी पार्टी के ख़िलाफ़ नहीं बोल रहे हैं, बल्कि पार्टी को आईना दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं सच बोलता रहा हूँ और बोलता रहूँगा।” अगला लोकसभा चुनाव उत्तर प्रदेश के वाराणसी क्षेत्र से लड़ने का संकेत देते हुए उन्होंने कहा, “सिचुएशन चाहे जो भी हो, लोकेशन यही होगा।”

फ़िल्म अभिनेता सिन्हा ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी की तारीफ़ करते हुए कहा कि उनमें बहुत कम समय में जो परिपक्वता आई है, उससे अन्य पार्टी के अध्यक्षों को भी सीख लेनी चाहिए। शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, “मैं शुरू से ही गाँधी परिवार का फ़ैन रहा हूँ। मैं नेहरू से लेकर सोनिया गाँधी तक का प्रशंसक रहा हूँ और अब राहुल गाँधी का भी प्रशंसक हूँ।”

प्रधानमंत्री मोदी ने किया सरदार वल्लभ भाई पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च सेंटर का उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के अहमदनगर में 750 करोड़ रुपए की लागत से बने सरदार वल्लभ भाई पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च सेंटर का उद्घाटन किया। इस अस्पताल के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी नें इस विश्व स्तरीय अस्पताल के लिए सभी देशवासियों को बधाई दी।

उन्होंने कहा कि ये अस्पताल देश में सरकारी अस्पतालों के लिए एक मॉडल सिद्ध होने वाला है। यहाँ के कमरे हों या फिर पूरा कैंपस, आधुनिकता और पर्यावरण का पूरा ध्यान रखा गया है। 1500 बेड वाला ये अस्पताल अहमदाबाद की स्वास्थ्य सुविधाओं को उच्च स्तर पर ले जाने वाला है।

उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों में जाने से लोग बचते थे और प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कर पाना सिर्फ़ साधन सम्पन्न लोगों के ही बस में था। ये देखकर बड़ी पीड़ा होती थी इसी स्थिति से बाहर निकालने के लिए सरकार ने अनेक फ़ैसले लिए थे नए सरकारी अस्पताल बनवाने, नए मेडिकल कॉलेज बनवाने पर ज़ोर दिया।

बीते चार वर्ष में स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ मेडिकल एजुकेशन का भी अभूतपूर्व विस्तार किया गया है। इस दौरान 18 हज़ार से अधिक MBBS और 13 हज़ार से ज़्यादा पोस्ट ग्रेजुएट सीटें बढ़ाई गई हैं। यहाँ गुजरात में भी हज़ारों नई सीटें जोड़ी गई हैं।

आयुष्मान भारत जैसी योजना के कारण छोटे-छोटे क़स्बों में भी ज़रूरत बढ़ रही है, नए अस्पताल भी तेज़ी से खुल रहे हैं, नए अस्पताल खुल रहे हैं, तो डॉक्टरों और पैरामेडिक स्टाफ़ की भी माँग बढ़ रही है, युवाओं के लिए रोज़गार के अनेक अवसर हेल्थ सेक्टर में आने वाले समय में बनने वाले हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आमतौर पर बड़ी बिज़नेस समिट के साथ इस प्रकार के आयोजन हम विदेश में ही देखते थे। अब वाइब्रेंट गुजरात के साथ ही अहमदाबाद शॉपिंग फेस्टिवल की शुरुआत, एक सराहनीय पहल है।

प्रधानमंत्री ने ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए कहा कि मुझे पता चला है कि गुजरात के अलग-अलग हिस्सों से स्ट्रीट वेंडर से लेकर शॉपिंग मॉल तक के व्यापारी इस फेस्टिवल में शामिल हुए हैं। हस्तशिल्पियों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स और होटल-रेस्तरां से जुड़े कारोबारी अपने उत्पादों का प्रचार प्रसार करने यहाँ आए हैं।

इसके बाद उन्होंने कहा कि देश में व्यापार के लिए अनुकूल माहौल बनाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। बीते 4 वर्ष में सैकड़ों नियमों को आसान बनाया गया है, पुराने क़ानूनों को समाप्त किया गया है। इन्हीं का नतीजा है कि 4 वर्ष पहले जहाँ हम Ease of Doing Business में 142 नंबर पर थे, आज 77 रैंक पर हैं।

सरकार का प्रयास है कि छोटे उद्यमियों के लिए प्रक्रियाओं को आसान किया जाए। हम उस व्यवस्था की तरफ बढ़ रहे हैं जब GST और जो दूसरे रिटर्न हैं, उन्हीं के आधार पर बैंक छोटे उद्यमियों को ऋण की सुविधा दें। 59 मिनट में एक करोड़ रुपए तक के ऋण की सैधांतिक मंज़ूरी मिल रही है।

परमादरणीय रवीश कुमार! अपना ‘कारवाँ’ रोक दीजिए, आपको हिंदी पत्रकारिता का वास्ता

पिछले साल ही भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह पर झूठे आरोप लगाने के बाद जय शाह द्वारा दायर मानहानि याचिका पर न्यायलय की फटकार खा चुके ‘द वायर’ और जस्टिस लोया की मौत को संदिग्ध मानने की आशंका को सुप्रीम कोर्ट द्वारा नकारने के बावज़ूद उसे ‘साज़िश’ ठहराने के अथक प्रयास करने वाली ‘कारवाँ’ मैगज़ीन का हवाला देकर सत्यान्वेषी पत्रकार, यानि रवीश कुमार आदतानुसार एक बार फिर जनता के सामने सनसनी बनकर आए हैं।

इस बार ‘The D-Companies’ शीर्षक के साथ ‘कारवाँ’ ने  NSA अजीत डोभाल के बेटे पर आरोप लगाते हुए लिखा है, “NSA अजीत डोभाल के बेटे विवेक पर बड़ा खुलासा, कालेधन का कारोबार करने वाले देश में बनाई कंपनी”।

रवीश कुमार ने इस पत्रिका का ज़िक्र देते हुए अपने फ़ेसबुक पेज पर लिखा है, “डी-कंपनी का अभी तक दाऊद का गैंग ही होता था। भारत में एक और डी कंपनी आ गई है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और उनके बेटे विवेक और शौर्य के कारनामों को उजागर करने वाली ‘कारवाँ’ पत्रिका की रिपोर्ट में यही शीर्षक दिया गया है। साल दो साल पहले हिन्दी के चैनल दाऊद को भारत लाने के कई प्रोपेगैंडा प्रोग्राम करते थे। उसमें डोभाल को नायक की तरह पेश किया जाता था। किसने सोचा होगा कि 2019 की जनवरी में जज लोया की मौत पर 27 रिपोर्ट छापने वाली कैरवां पत्रिका डोभाल को डी-कंपनी का तमगा दे देगी।”

‘कारवाँ’ ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि अजीत डोभाल के बेटे विवेक डोभाल की कंपनी में काम करने वाले कई अधिकारी शौर्य डोभाल की कंपनी में काम करते हैं। पत्रिका ने लिखा है कि इसका मतलब यह हुआ है कि कोई बहुत बड़ा फाइनेंशियल नेटवर्क चल रहा है और यह भी दावा किया गया है कि यह हेरफ़ेर नोटबंदी के बाद की गई है।

रवीश कुमार ने लिखा है, “कौशल श्रॉफ नाम के एक खोजी पत्रकार ने अमरीका, इंग्लैंड, सिंगापुर और केमैन आइलैंड से दस्तावेज़ जुटा कर डोभाल के बेटों की कंपनी का ख़ुलासा किया है। कारवाँ पत्रिका के अनुसार, “ये कंपनियाँ ‘हेज फंड’ और ‘ऑफशोर’ के दायरे में आती हैं। ‘टैक्स हेवन’ वाली जगहों में कंपनी खोलने का मतलब ही है कि संदिग्धता का प्रश्न आ जाता है और नैतिकता का भी।”

हालाँकि, इस बात की प्रामाणिकता पर अभी प्रश्न चिन्ह ही हैं। क्योंकि कारवाँ पत्रिका का सनसनीखेज ख़ुलासों का इतिहास अगर देखा जाए तो शायद ही उनका कोई दावा और आरोप कभी सच साबित हुआ हो। बताना चाहूँगा कि पिछली तमाम सनसनीखेज़ ख़बरों के अनुसार ही ‘कारवाँ’ पत्रिका का यह भी अभी तक एक नया सनसनी भरा शीर्षक मात्र ही है, लेकिन ख़ास बात यह है कि ‘द वायर‘ जैसे प्रोपैगेंडा-परस्त मीडिया गिरोहों और रवीश कुमार ने इसे हाथों-हाथ लेकर न्यायाधीश होने की अपनी ज़िम्मेदारी पूरी कर ली है।

कारवाँ पत्रिका के इस आरोप का ख़ुलासा होना अभी बाकी है। इस पत्रिका और इसके अन्य गिरोह का पिछला रिकॉर्ड देखकर ही इनकी विश्वसनीयता का मूल्यांकन किया जा सकता है और उनकी विश्वसनीयता के चलते यह अभी ख़बरों के बाज़ार में एक अफ़वाह से ज्यादा कुछ नहीं है। लेकिन बावज़ूद इसके, हिंदी पत्रकारिता के एक बड़े स्तम्भ (खोखले ही सही) माने जाने वाले रवीश कुमार की दिलचस्पी इस ख़बर में देखी गई है और उन्होंने इसे बहुत तत्परता से लिया भी है और अब इसके प्रचार में भी लगे हैं।

अपने पिछले तमाम एजेंडों में मोदी सरकार और उससे सम्बंधित पदाधिकारियों को नीचा दिखाने और अपमानित करने के तमाम नाकाम प्रयासों के बाद रवीश कुमार एक बार फिर से एक काल्पनिक वाकया लेकर जनता के सामने आए हैं। हर बार की तरह ही इस बार भी NDTV उनके लगाए गए आरोपों को उनके व्यक्तिगत मत होने का एक ‘डिस्क्लैमर’ अंत में लगा देता है। जिसका सीधा सा मतलब है कि यह एक और ‘ट्रायल बेस्ड’ एजेंडा है जिसका उद्देश्य सिर्फ़ और सिर्फ़ ऐसी अल्पकालीन क्षति पहुंचाना है जिसके दूरगामी नतीज़े निकल सकें। यानि, साँप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे।

रवीश के लेख के साथ NDTV वेबसाईट द्वारा दी गई सूचना

गौर करने की बात है कि अगर महाशय के पिछले 4 साल के रिकॉर्ड में देखें, तो रवीश कुमार ने ‘द वायर’, ‘स्क्रॉल’, ‘ऑल्ट’ और ‘कारवाँ’ जैसे तमाम फ़र्ज़ी ख़बरों द्वारा अपना नेटवर्क बनाने वाले मीडिया गिरोहों के कंधे पर बन्दूक रखकर सरकार के ख़िलाफ़ प्रोपेगैंडा चलाने की भरपूर कोशिश में लगे हुए हैं, फिर चाहे उनके बाग़ों में बहार का प्रश्न हो या फिर हिंदी पत्रकारिता को ज़लील करने के उद्देश्य से लिखे गए उनके कुंठा से भरे हुए कटाक्ष।

एक ओर जहाँ रवीश कुमार ने ही पत्रकारिता में ‘प्रोपेगेंडा’ और ‘गोदी मीडिया’ जैसे नामकरण कर लोगों को TV कम देखने और ज्यादा पढ़ने के लिए प्रेरित किया, वहीं दूसरी ओर सच्चाई यह रही है कि उनके पिछले तमाम लम्बे-लम्बे लेख और ब्लॉग, जो कि राजनीतिक विरोधाभासों के कारण पढ़ने और सुनने में अच्छे (सत्संगी प्रवृत्ति के) भी महसूस होते हैं, लिखे और प्रशंसकों ने उन्हें हाथों-हाथ खूब ‘व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी’ से लेकर सोशल मीडिया पर प्रचारित भी किया, एक तरफ से झूठे और प्रोपैगेंडा मात्र साबित होते आए हैं।

रवीश कुमार द्वारा चलाए गए पिछले कुछ किस्सों में जस्टिस लोया मर्डर केस ने लोगों का सबसे अधिक ध्यान बटोरा, जिस पर कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही फ़ैसला भी सुना चुका था। लेकिन अपनी ‘खोजी’ और सत्यान्वेषी प्रवृति से मजबूर रवीश कुमार ने उसमें भी नए मोड़ खोजने के भरसक प्रयास किए।

जय शाह मामला:

इसके बाद रवीश कुमार भाजपा पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह को लेकर न्यूज़ पोर्टल ‘द वायर’  के माध्यम से आरोप लगाते हैं कि उन्होंने ज़रूरत से ज्यादा धन कमाया है। जय अमित शाह ने संपत्ति की स्टोरी करने वाली ‘द वायर’ वेबसाइट के संपादक समेत 7 लोगों के खिलाफ अहमदाबाद कोर्ट में आपराधिक मानहानि का केस दायर कर दिया था।

जय शाह ने बयान देते हुए कहा था, “लोगों के मन में ऐसी छवि बनाने की कोशिश की गई कि मेरे व्यवसाय में सफलता मेरे पिता अमित शाह की राजनीतिक हैसियत की वजह से है। मेरा व्यवसाय पूरी तरह से कानून का पालन करता है, जो कि मेरे टैक्स रिकॉर्ड और बैंक ट्रांजेक्शन से पता चलता है।”

उस वक़्त सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड़ की 3 सदस्यीय खंडपीठ ने इस याचिका पर टिप्पणी की थी कि मीडिया को और अधिक जिम्मेदार होना चाहिए और वह किसी भी व्यक्ति के बारे में जो मन में आए नहीं लिख सकता है। प्रधान न्यायाधीश ने बार-बार यह दोहराया कि वह पेश मामले के संदर्भ में टिप्पणियाँ नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई बार तो पत्रकार इस तरह से लिखते हैं, जो न्यायालय की अवमानना होता है।

तत्कालीन CJI दीपक मिश्रा ने कहा था, “मैंने कई बार बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बारे में कहा है। हम मीडिया पर अंकुश लगाने नहीं जा रहे। मीडिया पर अंकुश लगाने का सवाल ही नहीं उठता, परन्तु प्रेस को और अधिक ज़िम्मेदार होना चाहिए।”

मानहानि मामले में न्यायलय ने न्यूज़ पोर्टल ‘द वायर’ की मानहानि के ख़िलाफ़ याचिका इस आधार पर निरस्त कर दी थी कि ‘गोल्डन टच ऑफ़ जय अमित शाह‘ शीर्षक से प्रकाशित लेख वास्तव में ‘मानहानिकारक’ है और निचली अदालत को इस मामले में आगे कार्यवाही करनी चाहिए।

जस्टिस लोया प्रकरण:

CBI के स्पेशल जज बीएच लोया की मौत की जाँच कराने की माँग करने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि इस मामले में कोई जाँच नहीं होगी, केस में कोई आधार नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि इस मामले के ज़रिए न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही, जस्टिस लोया के बेटे अनुज ने मीडिया के सामने आकर स्पष्ट कहा था कि पिता की मौत को लेकर उन्हें किसी तरह का संदेह नहीं है और उनके परिवार का किसी पर आरोप भी नहीं है। अनुज ने ये भी कहा था कि वो इसे लेकर आगे किसी तरह की जाँच नहीं चाहते हैं।

फिर भी, सत्यान्वेषी पत्रकार को इसमें अपना व्यक्तिगत दृष्टिकोण डालने में कोई समस्या नहीं हुई। रवीश कुमार ने जज लोया के केस में हिंदी पत्रकारिता पर अपनी कुंठा निकालते हुए कहा कि हिंदी के अख़बार लोगों को कूड़ा परोस रहे हैं और उन्हें जस्टिस लोया की मौत पर ‘कारवाँ’ की रिपोर्ट पढ़नी चाहिए। रवीश कुमार ने कहा था, “कारवाँ के सच्चे और निडर पत्रकार कैसे जान पर खेल कर सच निकालते हैं, जज लोया की मौत की कहानी सुनकर आपका दिल दहल जाएगा।”

अब, जबकि जस्टिस लोया की मौत में किसी भी साज़िश को न्यायालय नकार चुका है, तो क्या आप स्पष्टीकरण देते हुए स्वीकार करेंगे कि हिंदी पत्रकारिता में अगर कोई कूड़ा परोस रहा है, तो वो कोई और नहीं बल्कि स्वयं आप हैं?

देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करते हुए जब आपके चैनल NDTV पर पठानकोट हमलों की कवरेज़ के दौरान संवेदनशील जानकारियाँ देने के आरोप में एक दिन का प्रतिबंध लगाया जाता है, तब आप अपनी ‘लप्रेक’ शैली का प्रयोग कर सवाल उठाते हैं कि ‘क्या बाग़ों में बहार है?’ आप इसे अघोषित आपातकाल ठहराते हैं और कहते हैं कि यह मीडिया की हत्या है।

क्या आदतानुसार बरगलाने वाले तथ्यों को लाकर लगातार ‘फ़ुट इन माउथ’ जैसे ज़ुमलों का शिकार होने के बावज़ूद रवीश कुमार को यह नहीं लगता है कि आज वो ख़ुद एक चलती-फिरती व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी बन चुके हैं? आज रवीश कुमार गोदी मीडिया के साथ-साथ ‘प्रोपैगेंडाबाज़’ और स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए आतंकवाद मात्र बनकर रह गए हैं। हालात ये हैं कि शायद दूसरों को टेलिविज़न कम देखने की सलाह देने वाले रविश कुमार खुद टेलिविज़न पर जासूसी और ‘साज़िशों’ से भरे धारावाहिक देखने के अभ्यस्त हो चुके हैं।

JNU प्रकरण के बाद आपने किस तरह अपने प्राइम टाइम और ब्लॉग के माध्यम से दोनों भटके हुए युवाओं को सान्निध्य और सराहना दी, यह भी छुपा हुआ नहीं है। फिर भी आप इस बात पर आए दिन माथा पीटते हुए देखे जाते हैं कि TRP नहीं आ रही है और मोदी जी लोगों की छतों पर जाकर आपके चैनल वाली केबल काट रहे हैं।

आप इसके बाद कहते हैं कि छोड़िए इस हिंदी मीडिया को यह सब गोदी मीडिया है, ‘कारवाँ’ पर जाकर पढ़िए कि अमित शाह के लड़के ने कितना ‘माल’ बनाया है। फिर आपकी इस सनसनी को भी न्यायालय नकार देते हैं।

अब आप एक बार फिरसे उसी ‘कारवाँ’ मैगज़ीन का हवाला देकर NSA अजीत डोभाल के बेटे पर आरोप लगा रहे हैं और इस देश के रिसोर्सेज़ को एक बार फिर से दिशा भटकने पर मजबूर किया है। आप हाईलाईट करना चाह रहे हैं कि विवेक डोभाल इस देश के नागरिक नहीं हैं, लेकिन, अगर विवेक डोभाल भारत देश के नागरिक ही नहीं हैं तो फिर आप क्यों विदेशियों के मामले में सिर खपाते हैं? आपको तो जा कर ब्रिटेन के न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहिए।

रवीश जी! यह किस प्रकार का दोमुँहापन है, जिसमें आप कभी सुप्रीम कोर्ट और संविधान को माई-बाप बताते हैं और जब वही न्यायालय आपके तमाम सनसनी की चासनी में डूबे ‘प्रोपैगेंडों’ को नकारते हुए आपके मुताबिक़ निर्णय नहीं सुनाते हैं, तब आप तमाम संस्थाओं पर सवाल खड़ा कर देते हैं, और संस्थाओं के बिके हुए होने के साथ ही ‘लोकतंत्र की हत्या’ जैसे मुहावरे इजाद करते हैं।

यही न्यायालय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गुजरात दंगों के लिए क्लीन चिट देते हैं, जस्टिस लोया की मृत्यु पर निर्णय देते हैं और UPA सरकार में हुए घोटालों पर भी निर्णय देते हैं। लेकिन आप केवल अपने पसंदीदा निर्णयों पर ही नाराज़गी ज़ाहिर नहीं करते हैं, जबकि और निर्णयों पर आप बवाल खड़ा कर देते हैं।

आप तमाशा खड़ा कर देते हैं और दूसरे पत्रकारों को बेझिझक ‘दरबारी मीडिया’ की संज्ञा दे देते हैं। क्या यह सही समय नहीं आ गया है कि आप अपनी ‘सत्यान्वेषी जिज्ञासाओं’ को एकांत में हिमालय पर जा कर शांत करें और देश की संस्थाओं का समय ख़राब ना करें? आपको मानना चाहिए कि आपके ऊपर उन्माद सवार हो गया है।

स्वयं को ही निष्पक्ष और सही ठहराने का यह उन्माद देश-हित और ख़ासकर पत्रकारिता के लिए ज़हरीला साबित हो रहा है। लोगों ने ख़बरों पर विश्वास करना बंद कर दिया है और दर्शक इस उन्माद के कारण अफ़वाह और सनसनी-परस्त होता जा रहा है।

आप कूड़ा पेश करते हैं, लोगों और संस्थाओं का समय बर्बाद करते हैं, मुद्दों से भटकाते हैं, कोर्ट में हारते हैं। आपको चिंतन की आवश्यकता है, सत्य की खोज के लिए देश में कई और संस्थाएं हैं और वो अपना काम बहुत बेहतर तरीके से कर रहे हैं।

आपको पढ़ते ही राँझना फ़िल्म का एक डायलॉग दिमाग में गूँजता है, “साँप के फन से **** मत खुजाइये, वर्ना सैप्टिक हो जाएगा”। हो सके तो अपने इस प्रोपैगंडा के कारवाँ को रोक दीजिए, क्या पता बाग़ों में बहार आ जाए।