Saturday, April 4, 2026
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NCP के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने अजित पवार, चुनाव आयोग को दी शरद पवार को हटाने की जानकारी: भतीजे ने पूछा- 83 के हुए, अब रिटायर कब होंगे

शिवसेना (Shiv Sena) की कहानी राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के साथ ही दोहराई जाती हुई दिख रही है। विधायकों के साथ अपने चाचा शरद पवार से अलग होने के बाद अजित पवार (Ajit Pawar) ने चुनाव आयोग में हलफनामा दाखिल करके खुद को NCP का अध्यक्ष और पार्टी पर दावा ठोका है।

अजित पवार के गुट ने 31 विधायकों और पाँच विधान पार्षदों के समर्थन का दावा किया है। वहीं, शरद पवार गुट की बैठक में 13 विधायक, 3 विधान पार्षद और 5 सांसद मौजूद रहे। बताते चलें कि यही हाल शिवसेना के साथ हुआ था, जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में पार्टी के 40 विधायकों ने उद्धव ठाकरे से किनार कर लिया था।

बताते चलें कि महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेंस पार्टी के कुल 53 विधायक हैं। इनमें 31 विधायक अजित पवार की बैठक में और 13 विधायक शरद पवार की बैठक में शामिल हुए। वहीं, 9 विधायक किसी भी गुट की बैठक में शामिल नहीं हुए।

अजित पवार गुट ने बुधवार (5 जुलाई 2023) को चुनाव आयोग के समक्ष एक हलफनामा दाखिल किया है। उन्होंने कहा है कि NCP के सदस्यों ने 30 जून 2023 को भारी बहुमत के साथ एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें शरद पवार को हटाकर अजित पवार को NCP का अध्यक्ष चुना गया था।

हलफनामा में यह भी बताया गया है कि प्रफुल्ल पटेल राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष थे और वे अभी भी उस पद पर बने हुए हैं। एनसीपी ने अजित पवार को महाराष्ट्र विधानसभा में NCP विधायक दल का नेता नियुक्त करने का भी फैसला किया है।

इसके पहले शरद पवार गुट के नेता जयंत पाटिल ने 3 जुलाई 2023 को चुनाव आयोग को एक ई-मेल भी भेजा था। इस ई-मेल में एक कैविएट दायर की थी। उन्होंने आयोग को महाराष्ट्र विधानसभा के 9 सदस्यों को अयोग्य ठहराने की कार्यवाही के बारे में भी बताया।

महाराष्ट्र के नवनियुक्त उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने बुधवार (5 जुलाई 2023) को कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि शरद पवार ने NCP को इस स्तर पर पहुँचाया। वे कार्यकर्ताओं के लिए हमेशा मार्गदर्शक बने रहेंगे। इसके साथ ही अजित पवार ने उन्हें अब राजनीति से संन्यास लेने की सलाह दी।

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार कहते हैं, “आपने मुझे सबके सामने खलनायक के रूप में चित्रित किया। मेरे मन में अभी भी उनके (शरद पवार) लिए गहरा सम्मान है…लेकिन आप मुझे बताएं, आईएएस अधिकारी 60 साल की उम्र में रिटायर हो जाते हैं…राजनीति में भी

  • अजित पवार ने कहा, “आईएएस अधिकारी 60 साल की उम्र में रिटायर हो जाते हैं…राजनीति में भी बीजेपी नेता 75 साल की उम्र में रिटायर हो जाते हैं। आप लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी का उदाहरण देख सकते हैं। इससे नई पीढ़ी को आगे बढ़ने का मौका मिलता है। आप (शरद पवार) हमें अपना आशीर्वाद दें। आप 83 वर्ष के हैं। क्या आप रुकने वाले नहीं हैं?”

उधर बैठक के दौरान अपने गुट के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए शरद पवार ने कहा, “पार्टी का चुनाव चिह्न हमारे पास है, वह कहीं नहीं जाएगा। जो लोग और पार्टी कार्यकर्ता हमें सत्ता में लाए, वे हमारे साथ हैं। जिन विधायकों ने अलग होने का फैसला किया, उन्होंने हमें विश्वास में नहीं लिया। अजित पवार गुट ने किसी भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया है।”

शरद पवार की बैठक में जो 13 विधायक शामिल हुए, उनमें विधायक अनिल देशमुख, रोहित पवार, राजेंद्र शिंगणे, अशोक पवार, किरण लाहामाटे, प्राजक्त तानपुरे, बालासाहेब पाटिल, जितेंद्र आव्हाड, चेतन विट्ठल, जयंत पाटिल, राजेश टोपे, संदीप और देवेंद्र भूयर शामिल हैं।

मर गया सिख फॉर जस्टिस वाला खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू? ट्विटर पर कार एक्सीडेंट में मरने के लग रहे कयास, ‘द खालसा टुडे’ के संपादक ने किया इनकार

सोशल मीडिया पर कई लोग कह रहे हैं कि खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की अमेरिका में एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई है। हालाँकि, न तो खालिस्तानियों और न ही अमेरिकी सरकार की तरफ से इस संबंध में कोई पुष्टि नहीं की गई है। ‘MJ क्लब’ नामक ट्विटर यूजर ने इसे बड़ा ब्रेकिंग न्यूज़ बताते हुए सूत्रों के हवाले से ये दावा किया। हैंडल ने दावा किया कि पिछले 2 महीनों में मारे गए 3 खालिस्तानी आतंकियों हरदीप सिंह निज्जर, अवतार सिंह खांडा और परमजीत सिंह पंजवार की मौतों के बाद वो छिपा हुआ था।

रिटायर्ड मेजर जनरल हर्ष काकर ने भी इस खबर को ट्वीट किया, लेकिन साथ ही लिखा कि वो इसकी पुष्टि का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर ये सच है तो ये खालिस्तानी आतंकी अभियान के लिए एक बड़ा झटका होगा। लोगों ने इसका जश्न मनाना भी शुरू कर दिया है। एक व्यक्ति ने लिखा कि जिन्होंने भी ऐसा किया है उन्हें दिल से धन्यवाद। एक अन्य ने लिखा कि खालिस्तानी आतंकियों का ’72 हूर’ दिखाने के लिए वन वे टिकट काटा है रहा है।

हालाँकि, कई लोगों को आशंका है कि जैसे भारत विरोधी अरबपति जॉर्ज सोरोस की मौत की अफवाह उड़ी थी, वैसे ही ये फेक भी हो सकता है। वहीं कुछ अति-उत्साहित लोग तो भारतीय एजेंसी R&AW को जम कर धन्यवाद दे रहे हैं। ये भी हो सकता है कि ‘The Alternate Media’ नामक YouTube चैनल पर आए एक वीडियो के बाद ये खबर उड़ी हो, जिसकी हेडिंग है ‘पन्नू को ठोका’। इसमें संस्थान की गायत्री देवी मेजर जनरल (रिटायर्ड) एसपी सिन्हा से बात करती हुई दिखती हैं।

इस वीडियो में एसपी सिन्हा ने अंदेशा जताया कि अचानक से कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में खालिस्तानी गतिविधियाँ शुरू होने के पीछे कोई वजह हो सकती है और उन्हें लगता है कि कहीं पन्नू की मौत के कारण तो ऐसा नहीं हो रहा। उन्होंने पूछा कि क्या कार दुर्घटना हुई, उसकी मौत हुई या फिर वो गंभीर रूप से घायल है। पत्रकार आदित्य राज कौल ने भी एक पोस्टर शेयर किया, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि ये वायरल हो रहा है।

इस पोस्टर में खालिस्तानी आतंकियों की तस्वीरें और नाम हैं, साथ ही उनके जन्म और मौत का साल लिखा हुआ है। इसमें गुरपतवंत सिंह पन्नू का भी नाम है और उसकी मौत का साल नहीं लिखा है। बाकियों पर ‘Deceased (मृत)’ का ठप्पा लगा हुआ है। लिखा है कि ये वॉन्टेड हैं, ज़िंदा या मुर्दा। अभिजीत अय्यर मित्रा ने भी तंज कसते हुए लिखा कि अगर ये खबर सही है तो भारत को 25 दिनों का शोक मनाना चाहिए। उन्होंने लिखा कि वो पुरुष राखी सावंत था, जिसने खालिस्तान को लेकर मजाकिया वीडियोज बनाए।

कई लोगों ने तो ‘इक दिन मर जाएगा कुत्ते की मौत’ वाला वीडियो शेयर करना भी शुरू कर दिया है। गुरपतवंत सिंह पन्नू ने ही ‘सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ)’ नामक आतंकी संगठन की स्थापना की थी और वो अक्सर भड़काऊ वीडियो बनाता रहता था।

‘द खालसा टुडे’ के मुख्य संपादक सुखी चहल ने इन खबरों पर दावा किया है कि कैलिफोर्निया में उनके पड़ोस में हुई कार दुर्घटना के बारे में वो बताना चाहते हैं कि गुरपतवंत सिंह पन्नू की मौत की खबर झूठ है, फर्जी है।

स्वीडन में कुरान जलने पर मुंबई की मीनारा मस्जिद के बाहर जुटी इस भीड़ के खतरे बड़े, क्योंकि इसके पीछे है रजा अकादमी

लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध अधिकार है। इसलिए पहली नजर में मुंबई की मीनारा मस्जिद के बाहर 5 जुलाई 2023 को हुए इस जुटान की तस्वीर में कोई खतरा नहीं दिखता। लेकिन घंटी तब बजती है जब पता चलता है कि स्वीडन में कुरान जलाए जाने की घटना के विरोध में हुए इस प्रदर्शन के पीछे रजा अकादमी (Raza Academy) है।

नाम से रजा अकादमी भले अकादमिक संस्था होने का आभास देता हो, पर यह कुख्यात अपने कट्टरपंथी इस्लामी विचारों को लेकर है।करतूतें इस संगठन की हिंसक मंशा की गवाह हैं। कई राज्यों में इस्लामी भीड़ की हिंसा के पीछे इस संगठन की भूमिका संदेहास्पद रही है। दुनिया के किसी भी कोने में हुई घटना पर मुस्लिमों को उकसाने के लिए यह कुख्यात रहा है।

मुंबई के ही आजाद मैदान में अगस्त 2012 में हुआ दंगा देश अब तक भूला नहीं है। तब म्यामांर में रोहिंग्या मुस्लिमों पर कथित अत्याचार के विरोध के नाम पर भीड़ जुटा गई थी। सऊदी अरब में सिनेमा हॉल खुलने का विरोध हो या फ्रांस के राष्ट्राध्यक्ष के खिलाफ फतवा जारी करने की माँग, CAA और NRC का विरोध हो या COVID प्रोटोकॉल को लचीला बनाकर मस्जिद खोलने की माँग… रजा अकादमी की भूमिका आपको हर जगह दिख जाएगी। नवंबर 2021 में महाराष्ट्र के मालेगाँव, नांदेड़ और अमरावती जिलों में प्रदर्शन के नाम पर मुस्लिमों की भीड़ ने जो कुछ किया था, वह भी पूरे देश ने देखा है। उसके बाद रजा एकेडमी के दफ्तरों पर महाराष्ट्र पुलिस की छापेमारी और गिरफ्तारियों के बारे में भी हम जानते हैं।

अतीत की ये तमाम घटनाएँ हमें बताती हैं कि बकरीद के दिन स्वीडन की एक मस्जिद के बाहर कुरान जलाए जाने की घटना के विरोध के नाम पर हुए इस छोटे जुटान को सामान्य विरोध प्रदर्शन मानकर नजरंदाज नहीं किया जाना चाहिए। वैसे भी इस घटना के बाद वैश्विक स्तर पर जो इस्लामिक गुटबंदी दिख रही है, खुद को कुरान का सबसे बड़ा रखवाला साबित करने की जो होड़ लगी है, वह खतरे को और भी बढ़ा देता है। इसी घटना के विरोध के नाम पर इराक में स्वीडिश दूतावास पर हमला हो चुका है। 57 इस्लामी मुल्क सऊदी अरब में बैठक कर चुके हैं। तुर्की ने नाटो में स्वीडन के प्रवेश को रोकने के लिए एड़ी-चोट का जोर लगा रखा है। शिया मुस्लिमों के खिलाफ बर्बरता के लिए कुख्यात आतंकी संगठन लश्कर-ए-झांगवी पाकिस्तान में चर्चों और ईसाइयों पर हमला कर बदला लेने की धमकी दे रहा है। कंगाली पर खड़े पाकिस्तान का प्रधानमंत्री जुमे पर देशभर में प्रदर्शन का ऐलान कर रहा है। यह सब तब हो रहा है जब स्वीडन का राजनीतिक नेतृत्व से लेकर ईसाई नेता तक इस घटना की निंदा कर चुके हैं।

अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर स्वीडन की मस्जिद के सामने एक इराकी के कुरान जलाने के बाद दुनियाभर के अलग अलग हिस्सों में हो रही इन तमाम गतिविधियों में एक ही चीज साझा है। वह है मजहब। वह मजहब जिसका हवाला देकर भीड़ हिंसा के लिए ही जुटाई जाती है। ऐसे में अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर, लोकतांत्रिक अधिकार के नाम पर, स्वीडन में हुई घटना के विरोध में भारत के शहरों में जुटान करने, प्रदर्शन होने के भी खतरे बड़े है। खासकर तब जब इसके पीछे रजा अकादमी जैसा वह संगठन हो जिसका रिकॉर्ड भीड़ जमा कर उसे अनियंत्रित छोड़ने का पुराना और बदनाम रहा हो।

जरूरी नहीं है कि हर बार हम हिंसा के बाद ही जगे। हर बार दंगों के बाद ही इन संगठनों के दफ्तरों पर छापे पड़े। मुस्लिमों को उकसाने और हिंसा की साजिश रचने वालों की गिरफ्तारी हो। आदर्श व्यवस्था तो वह है जो जुमे की पूर्वसंध्या पर ऐसी कहानियों की पटकथा लिखने का ही मौका न दे। उम्मीद की जानी चाहिए महाराष्ट्र में उफान मारती सियासत के बीच मुंबई पुलिस की नजर मीनारा मस्जिद के बाहर जुटी उस भीड़ पर भी रही होगी जिसने कुरान जलाने वाले को तुरंत फाँसी देने की माँग करते हुए उस देश में प्रदर्शन किया है, जिस देश में आतंकी अजमल कसाब को फाँसी भी कबाब खिलाने के बाद ही मिली थी।

अंदर से आती अश्लील आवाजें, फिर संतुष्टि और शर्म का भाव लिए निकलते कपल्स… विम्बलडन ने फैंस को चेताया – सेक्स के लिए न करें ‘Quiet Rooms’ का इस्तेमाल

विम्बलडन टूर्नामेंट के आयोजकों ने फैंस को चेताया है कि वो ‘Quiet Rooms’ का इस्तेमाल सेक्स के लिए न करें। विम्बलडन ने कहा है कि ‘क्वाइट रूम्स’ को प्रार्थना, ध्यान या फिर ब्रेस्टफीडिंग के लिए बनाया गया है, सेक्स के लिए नहीं। साथ ही कपल्स को चेताया गया है कि ऐसा करने पर कार्रवाई हो सकती है। पिछले साल विम्बलडन टेनिस टूर्नामेंट के दौरान सामने आया था कि कई जोड़ों ने इस जगह का इस्तेमाल रोमांस और सेक्स करने के लिए किया, जिससे अन्य लोगों को खासी परेशानी हुई थी।

‘ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस क्लब’ की चीफ एग्जीक्यूटिव सैली बोल्टोन ने कहा कि पवित्र जगहों का इस्तेमाल भी सम्मान के साथ किया जाना चाहिए और कहा कि प्रेयर के लिए जो जगह आरक्षित की गई है वहाँ सेक्स वगैरह न किया जाए। उन्होंने कहा कि ये एक महत्वपूर्ण स्पेस होता है और इस बार ये सुनिश्चित किया जाएगा कि इसका इस्तेमाल सही तरीके से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी को अगर प्रार्थना करने की ज़रूरत है तो क्वाइट रूम्स का इस्तेमाल करें।

उन्होंने कहा कि जो माताएँ अपने शिशुओं को स्तन से दूध पिलाना चाहती हैं तो ये जगह उनके लिए भी है। 2022 में लोगों ने कहा था कि उन्होंने क्वाइट रूम्स से अक्सर कपल्स को निकलते देखा था जो संकोच के कारण शर्माए हुए से दीखते थे और उनके चेहरों पर पूर्ण संतुष्टि का भाव रहता था। इन कमरों को बनाए जाने के पीछे कारण ये था कि भीड़ से अलग हट कर लोग इनका सही इस्तेमाल करें, जैसे किसी को धूप से बचना है तो इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।

पिछले साल ये भी सामने आया था कि इन कमरों ने रोमांस करते हुए कपल्स की अजीब सी आवाजें आती थीं। इसीलिए, अब अधिकारियों ने चेताया है कि इसका इस्तेमाल रोमांस के लिए न किया जाए। साउथर्न विलेज में इन क्वाइट रूम्स को उपलब्ध कराया गया है। साथ ही विम्बलडन की गाइड में भी बताया गया है कि इनका इस्तेमाल कैसे करना है। किसी को खाली बैठना है, तो भी वो इन कमरों का इस्तेमाल कर सकता है।

केदारनाथ मंदिर के सामने लड़की ने बॉयफ्रेंड को किया प्रपोज, भड़का मंदिर प्रशासन, पुलिस को पत्र लिखकर रील बनाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की

रील बनाने का खुमार आजकल कुछ ऐसा चढ़ा है कि इसके दीवाने ना स्थान देख रहे हैं और ना ही उसकी पवित्रता। दो दिन पहले उत्तराखंड में स्थित केदारनाथ मंदिर के सामने शादी के लिए प्रपोज करने का रील बनाने की घटना के बाद मंदिर प्रशासन सख्त हो गया है। उसने पुलिस से ऐसे लोगों पर कार्रवाई करने की माँग की है।

बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने पुलिस को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि मंदिर परिसर में वीडियो बनाने वाले लोगों पर कड़ी निगरानी रखी जाए। समिति का कहना है कि वीडियो/रील बनाने वाले लोगों की वजह से देश-विदेश के भक्तों की भावनाएँ आहत होती हैं।

मंदिर प्रशासन समिति द्वारा लिखा गया पत्र (साभार: टाइम्स नाऊ हिंदी)

बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने पुलिस को भेजे पत्र में कहा है, “कुछ यूट्यूबर्स, इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर लोगों की धार्मिक भावनाओं के खिलाफ वीडियो, यूट्यूब शॉट्स और इंस्टाग्राम रील्स बना रहे हैं, जिससे मंदिर में आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं की भावनाएँ आहत हो रही हैं।”

कुछ दिन पहले केदारनाथ धाम से एक वीडियो सामने आया था। इस वीडियो में एक लड़की अपने बॉयफ्रेंड से मंदिर के सामने प्रपोज करती दिख रही है। वीडियो वायरल होने के बाद नेटिजन्स ने इसकी जमकर आलोचना की। लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ बताया और केदारनाथ धाम में मोबाइल ले जाने पर बैन लगाने की माँग की।

वीडियो में दिखा एक कपल केदारनाथ मंदिर की ओर मुँह करके हाथ जोड़े खड़ा है। पीछे से कैमरा लिए शख्स को लड़की हाथ के इशारा करती है। इसके बाद कैमरे वाला शख्स आगे बढ़कर चुपके से लड़की के हाथ में अंगूठी दे देता है। फिर लड़की अपने घुटनों पर बैठकर लड़के को प्रपोज कर देती है। लड़की उसे अंगूठी पहनाती है और फिर दोनों गले लगते हैं।

इस वीडियो पर नेटिजन्स की मिली-जुली प्रतिक्रिया आई है। कुछ लोगों ने इसे धार्मिक भावनाएँ आहत करने वाला बताया तो कुछ लोगों ने इसे भक्ति का अपना तरीका बताया। वहीं, मंदिर से बाहर मंदिर समिति द्वारा हस्तक्षेप को गलत बताया।

जिस लड़की ने अपने प्रपोज किया है, वह भारत की पहली फीमेल मोटो ब्लॉगर यानी बाइक पर बैठकर पूरी यात्रा को कैमरे में कैद करने वाली विशाखा नाम की लड़की बताई जा रही है। जिस लड़के को महिला ने प्रपोज किया, वह उसका बॉयफ्रेंड है और हिमाचल प्रदेश का रहने वाला है।

विशाखा को शिवजी की भक्त बताया जा रहा है। विशाखा की माँ ने एक इंटरव्यू में कहा था कि विशाखा की सफलता के पीछे उनकी तीन साल की कड़ी मेहनत है। उनको मणिपुर सहित कई राज्यों के पर्यटन विभाग की तरफ से राज्य का ब्रांड एंबेसडर भी बनाया गया है। वे मुंबई से कन्याकुमारी तक बाइक लेकर गई थीं, जो उनकी सबसे बड़ी मोटो ब्लॉगिंग थीं।

बीवी को अश्लील फिल्में दिखाता, फिर पोर्न स्टार की तरह दिखने को करता था मजबूर: अप्राकृतिक सेक्स और टॉर्चर से परेशान होकर दिल्ली पुलिस से लगाई फरियाद

दिल्ली में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें कथित तौर पर एक व्यक्ति अपनी बीवी को पोर्न स्टारों की तरह दिखने को मजबूर करता था। उसे जबरन अश्लील फिल्में दिखाता था। अप्राकृतिक तरीके से सेक्स करता था। आखिरकार टॉर्चर से परेशान होकर 30 साल की महिला ने दिल्ली पुलिस में पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।

महिला के अनुसार उसका पति पोर्न एडिक्ट है। वह उसे भी जबरन पोर्न वीडियो दिखाता था। उससे पोर्न स्टार की तरह कपड़े पहनने और उनकी तरह अपना शरीर बनाने को कहता था। महिला ने पति पर अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने और मारपीट का भी आरोप लगाया है। साथ ही बताया है कि ससुराल वाले भी दहेज के लिए उसे प्रताड़ित करते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला दिल्ली के शाहदरा थाना क्षेत्र के रोहतास नगर का है। 30 वर्षीय पीड़िता की शादी साल 2020 में हुई थी। कथित तौर पर शादी के तीन बाद से ही पति उसे फिजिकली टॉर्चर करने लगा। महिला ने कहा है कि पति उसके साथ अप्राकृतिक संबंध बनाता था। विरोध करने पर मारपीट कर जान से मारने की धमकी देता था।

पीड़ित महिला का आरोप है कि उसका पति पोर्न वीडियो का आदी हो चुका है। वह उसे जबरन पोर्न वीडियो दिखाता था। साथ ही उसे अपनी फेवरेट पोर्न स्टार की तरह देखना चाहता था। पति कहता था कि वह पोर्न स्टार जैसी नहीं दिखती। इसलिए वो उसे पोर्न स्टार की तरह ही कपड़े पहनने के लिए मजबूर करता था। इसके अलावा महिला ने अपनी शिकायत में पति और ससुराल वालों पर दहेज के लिए मानसिक और शरीरिक उत्पीड़न करने का भी आरोप लगाया है।

पीड़ित महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। डिप्टी कमिश्नर रोहित मीणा ने कहा है, ‘महिला की शिकायत पर हमने IPC की धारा 498 A (किसी महिला का पति या पति का रिश्तेदार उसके साथ क्रूरता करना), 406 (आपराधिक विश्वासघात), 377 (अप्राकृतिक अपराध) तथा 34 (सामान्य इरादा) और दहेज निषेध अधिनियम की धाराओं के तहत केस दर्ज कर किया है।” पुलिस का यह भी कहना है कि मामला दर्ज होने के बाद शुरुआती जाँच के तौर पर गवाहों के बयान रिकॉर्ड किए जा रहे हैं। जाँच के लिए डिजिटल व अन्य सभी तरह के सबूत जुटाए जा रहे हैं।

शक्ति प्रदर्शन में चाचा पर भारी पड़ा भतीजा: शरद पवार की बैठक में आए सिर्फ 13 MLA, NCP पर कब्जे के लिए चुनाव आयोग के पास अजीत पवार ने ठोका दावा

महाराष्ट्र में शरद पवार द्वारा स्थापित ‘राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP)’ टूट गई है। कुछ दिनों पहले ही उनके भतीजे अजित पवार ने नेता प्रतिपक्ष का पद छोड़ कर सरकार में शामिल होने का फैसला लिया और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार में उप-मुख्यमंत्री बने। इसके बाद बुधवार (5 जुलाई, 2023) को दोनों पक्षों ने शक्ति प्रदर्शन के लिए बैठक बुलाई। बैठकों के बाद ये साफ़ हो गया है कि भतीजे अजित पवार अपने चाचा पर भारी पड़ रहे हैं। उन्होंने भारत में करिश्माई नेतृत्व की जरूरत बताते हुए कहा कि सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी PM नहीं बन सकते।

मीडिया में आ रहे आँकड़ों की मानें तो शरद पवार की बैठक में 13 विधायक, 3 विधान पार्षद और 5 सांसद पहुँचे हैं। मुंबई के YB चव्हाण सेंटर में ये बैठक आयोजित हुई। अनिल देखमुख, रोहित पवार, राजेंद्र शिंगने, अशोक पवार, किरण लहमटे, पंकजा तानपुरे, बालासाहेब पाटिल, जितेंद्र अव्हाड, चेतन विट्ठल तुपे, जयंत पाटिल, राजेश टोपे, संदीप क्षीरसागर और देवेंद्र भुयार – ये वो विधायक हैं जो शरद पवार की बैठक में मौजूद रहे। श्रीनिवास पाटिल, सुप्रिया सुले और अमोल कोल्हे – ये तीनों लोकसभा सांसद मौजूद रहे।

राज्यसभा सांसदों की बात करें तो फौजिया खान और वंदना चव्हाण ने शरद पवार का साथ दिया है। शशिकांत शिंदे, बाबाजानी दुर्रानी और एकनाथ खड़से – ये तीनों MLC इस बैठक में मौजूद रहे। उधर अजित पवार ने NCP पर अपने गुट का हक़ जताते हुए चुनाव आयोग को याचिका भी भेज दी है। इसमें NCP के नाम और घड़ी चुनाव चिह्न पर दावा ठोका गया है। वहीं जयंत पाटिल ने मंत्री पद की शपथ लेने वाले अजित पवार समेत सभी 9 विधायकों को अयोग्य घोषित किए जाने की अपील की है।

उधर शरद पवार ने नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि मुंबई में ही NCP का 24 वर्ष पहले गठन हुआ था और हमने खूब मेहनत कर के सरकार बनाई, कई लोग मंत्री-विधायक बने और हमने दिखाया कि गरीब घर से आने वाले भी राज्य चला सकते हैं। उन्होंने कहा कि अब बातचीत की परंपरा खत्म हो गई है। वहीं उनकी बेटी सुप्रिया सुले ने कहा कि NCP में जो पद खाली हैं, उसमें नए लोग आएँगे। वहीं अजित पवार ने कुछ हफ्ते पहले शरद पवार द्वारा इस्तीफा दिए जाने और फिर इसे वापस लिए जाने पर निशाना साधा।

अजित पवार ने चाचा को चेताया कि वो जिद्दी न बनें। उन्होंने कहा कि अभी तो उन्होंने काफी कम कहा है, भविष्य में रैलियाँ होंगी तो वो कई बड़े खुलासे करेंगे। अजित पवार ने महाराष्ट्र की 90 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा करते हुए कार्यकर्ताओं से इमोशनल अपील की। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं और उनके बीच दूरी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि वो 5 बार डिप्टी CM बन चुके हैं, अब राज्य का नेतृत्व करना चाहते हैं। उन्होंने शरद पवार को उनकी उम्र की याद दिलाते हुए कहा कि आप अब 83 के हो गए, हमें आशीर्वाद दीजिए।

अजित पवार की बैठक में 29 विधायक और 4 MLC पहुँचे। ED/CBI के डर से पाला बदलने के आरोपों पर अजित पवार ने कहा कि कई ऐसे विधायक हैं जिनके खिलाफ कोई केस नहीं है। उन्होंने कहा कि शरद पवार ने 2004 में CM पद NCP को मिल रहा था तो ठुकरा दिया था। उन्होंने दावा किया कि 2014 में भी NCP द्वारा भाजपा को समर्थन दिए जाने का निर्णय लिया गया था। उन्होंने कहा कि जो विधायक शरद पवार की बैठक में गए हैं, वो भी उनसे संपर्क में हैं।

बीकानेर से हिंदू छात्रा को लेकर भागी महिला मुस्लिम टीचर चेन्नई में मिली, वीडियो जारी कर कहा था- हम लेस्बियन हैं, एक-दूसरे से प्यार करते हैं

राजस्थान के बीकानेर जिले से गायब हुई 17 वर्षीय हिंदू लड़की और उसकी मुस्लिम टीचर चेन्नई में मिली हैं। पुलिस दोनों को जल्द वापस लाने की बात कह रही है। नाबालिग हिंदू लड़की के परिजनों ने मुस्लिम टीचर निदा वहलीम पर बेटी के अपहरण का आरोप लगाया था। इसके बाद दोनों ने वीडियो जारी कर कहा था कि वे लेस्बियन हैं और एक-दूसरे के बिना नहीं रह सकती।

इस मामले में बीकानेर एसपी तेजस्विनी गौतम का कहना है कि बीकानेर पुलिस और चेन्नई पुलिस के संयुक्त प्रयास के बाद दोनों को पकड़ा गया है। इसमें चेन्नई पुलिस की बड़ी भूमिका रही। हालाँकि एसपी ने यह बताने से इनकार कर दिया है कि दोनों कब, कैसे और कहाँ मिली हैं। लेकिन उन्होंने इस बात की पुष्टि की है कि दोनों सुरक्षित हैं और बीकानेर पुलिस उन्हें जल्द ही वापस लेकर आएगी।

क्या है मामला

बीकानेर जिले के श्रीडूंगरगढ़ तहसील के एजी स्कूल में पढ़ने वाली 17 वर्षीय हिंदू लड़की और उसकी मुस्लिम टीचर निदा वहलीम 30 जून को अचानक गायब हो गईं। इसके बाद लड़की के पिता ने पुलिस को दी शिकायत में कहा था कि महिला टीचर अविवाहित है। वह लगभग 2 माह से छात्रा से नजदीकी बढ़ा रही थी। उन्होंने निदा वहलीम पर अपने भाइयों जुनैद और नावेद के साथ मिलकर बेटी को गायब कराने का आरोप लगाया था। लड़की के पिता ने स्कूल के मालिक अब्दुल गफूर को निदा का रिश्तेदार बताया था। साथ ही स्कूल प्रशासन पर अपनी बेटी के गायब होने की साजिश में शामिल होने आरोप लगाया था।

इसके बाद पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर दोनों की तलाश के लिए 4 टीमें गठित की थी। उधर मामले की जानकारी मिलने के बाद हिंदू संगठनों ने इसका जमकर विरोध किया था। साथ ही घटना को लव जिहाद बताते हुए आरोपित महिला टीचर पर हिंदू लड़की को बरगलाने और ब्रेनवॉश करने का आरोप लगाया था। 

इसके बाद मंगलवार (4 जून 2023) को दोनों का एक वीडियो सामने आया था। वीडियो में दोनों ने खुद को एक-दूसरे के साथ खुश रहने की बात कही थी। साथ ही अपने-अपने परिजनों से उन्हें परेशान करने के लिए माफ़ी माँगी थी। खुद को लेस्बियन बताते हुए कहा था कि वे किसी लड़के से शादी नहीं कर सकतीं। एक-दूसरे से बहुत प्यार करती हैं। निदा वहलीम ने अल्लाह की कसम खाते हुए कहा था कि वह लड़की को बहला-फुसलाकर नहीं लाई है। वहीं हिंदू छात्रा ने कहा था कि निदा वहलीम पर कोई केस न किया जाए क्योंकि वह अपनी मर्जी से आई है। वीडियो सामने आने के बाद हिंदू लड़की के परिजनों ने कहा था कि उनकी बेटी दबाव में ऐसा कह रही है।

मध्य प्रदेश के पेशाब कांड वाले प्रवेश शुक्ला के घर पर चला बुलडोजर, NSA के तहत हो रही है कार्रवाई: BJP ने जाँच कमिटी बनाई

मध्य प्रदेश के सीधी में मानसिक रूप से कमजोर अनुसूचित जनजाति (ST) के एक व्यक्ति पर पेशाब करने के आरोपित प्रवेश शुक्ला के घर को गिरा दिया गया है। शराब के नशे में इस घटना का वीडियो वायरल होने के देश भर में बवाल हो गया है। इसके बाद राज्य के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बुलडोजर की कार्रवाई की बात कही थी।

प्रवेश शुक्ला पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई हो रही है। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रशासन ने प्रवेश के कुबरी स्थित घर पर बुलडोजर चला है। प्रशासन ने उसके घर के उस हिस्से को तोड़ दिया है, जिसे अतिक्रमण करके बनाया गया था। इस दौरान प्रशासन ने पेड़-पौधों को भी नहीं छोड़ा और उन्हें भी ध्वस्त कर दिया।

राज्य सरकार की तरफ से कहा गया है कि प्रवेश शुक्ला के खिलाफ जो कार्रवाई होगी, वह पूरे प्रदेश में एक नजीर बनेगा। इसके साथ ही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने राज्य कोल जनजाति विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रामलाल रौतेल की अध्यक्षता में एक जाँच कमिटी बनाई है। इसमें विधायक शरद कोल, विधायक अमर सिंह और प्रदेश उपाध्यक्ष कांतदेव सिंह को सदस्य बनाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रवेश शुक्ला को भाजयुमो का मंडल उपाध्यक्ष और विधायक प्रतिनिधि बताया जा रहा है। विधायक के बेटे के जन्मदिन पर लगाए गए पोस्टर में भी उसने खुद को विधायक प्रतिनिधि लिखा है। प्रवेश शुक्ला के पिता रमाकांत शुक्ला का कहना है कि उनका बेटा विधायक केदारनाथ शुक्ला का प्रतिनिधि है। वहीं, विधायक का कहना है कि प्रवेश शुक्ला उनका प्रतिनिधि नहीं है।

इस घटना पर भाजपा सरकार द्वारा कठोर कदम उठाए जाने के बाद भी राज्य में खूब राजनीति हो रही है। कॉन्ग्रेस इस घटना को लेकर राज्य की शिवराज सिंह चौहान सरकार पर निशाना साध रही है। कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया ने कहा कि शिवराज सरकार में आदिवासियों पर सबसे ज्यादा अत्याचार हुए हैं। वहीं, घटना सामने आने के बाद ही सीएम और गृहमंत्री ने कठोर कार्रवाई की बात कही थी। 

सेक्स और हिन्दू धर्म का मजाक – बॉलीवुड के हर कंटेंट में यही मसाला: ‘हिप्स एन्ड बूब्स’ से लेकर ‘बिग बॉस’ में चुम्मा-चाटी तक, भारतीय संस्कृति से दूर भागती है इंडस्ट्री

आम लोगों को ज्ञान देने के मामले में भारत की हिंदी फिल्म इंडस्ट्री, जिसे बॉलीवुड भी कहा जाता है – वो सबसे आगे हैं। लेकिन, जब उदाहरण सेट करने की बात आती है तो वो इसके उलट काम करते हैं। जैसे, आपको आम तौर पर बॉलीवुड की अभिनेत्रियाँ महिलाओं के बारे में बात करती हुई मिल जाएँगी और फेमिनिज्म का बीड़ा उठाए कई फ़िल्मी हस्तियाँ मिल जाएँगी। लेकिन, ये वही लोग हैं जिनके गिरोह ने हमेशा से फिल्मों के जरिए महिलाओं एक उपभोग की वस्तु से ज्यादा कुछ नहीं दिखाया गया है।

महिलाओं के बेहूदा चित्रण में बॉलीवुड सबसे आगे रहा है। आप बॉलीवुड के गानों को ही उठा लीजिए। आजकल गानों के बोल और संगीत से ज्यादा चर्चा इस बात की रहती है कि अभिनेत्री को इसमें कितने कम कपड़े पहने हुए दिखाए जाएँगे। अभिनय और कला के ज़्यादा चर्चा इस बात की रहती है कि किस अभिनेत्री ने बिकनी में इंस्टाग्राम पर तस्वीर अपलोड की है। ‘पठान’ फिल्म को ही ले लीजिए, जानबूझकर दीपिका पादुकोण को भगवा बिकनी में दिखाया गया और इस पर कंट्रोवर्सी पैदा की गई।

बॉलीवुड में लंबे समय तक काम करने वाली अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा के एक बयान को देख लीजिए। ‘मिस वर्ल्ड’ रह चुकीं प्रियंका चोपड़ा अमेरिका में गायक निक जोनास के शादी के बाद वहीं रहती हैं और हॉलीवुड में भी सक्रिय हैं। प्रियंका चोपड़ा का जो वीडियो वायरल हुआ है, उसमें वो कहती दिख रही हैं कि बॉलीवुड फ़िल्में केवल ‘हिप्स और बूब्स (जाँघों और स्तन)’ तक ही सिमटी हुई हैं। ये वीडियो एमी अवॉर्ड्स 2016 का है। वीडियो में प्रियंका चोपड़ा डांस करते हुए बताती हैं कि कैसे बॉलीवुड में सिर्फ ‘Hips & Boobs’ चलता है।

इसके बाद कुछ बॉलीवुड के फैंस प्रियंका चोपड़ा की आलोचना करने लगे और कहने लगे कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के साथ कई दिक्कतें हो सकती हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इसका मजाक बनाया जाए। कोई कुछ फिल्मों के नाम गिनने लगा तो किसी ने कह दिया कि प्रियंका चोपड़ा ने भारतीय क्लासिक नृत्य के बारे में नहीं सुना है। कुछ ने प्रियंका चोपड़ा पर व्यक्तिगत हमला करते हुए उन्हें ही फेक बता दिया और उनके मेकअप और व्यवहार पर सवाल उठा दिए

जबकि ज़रूरत ये है कि बॉलीवुड को हम आत्ममंथन करने के लिए मजबूर करें। कितनी बॉलीवुड फिल्मों में आपने भारत के विभिन्न इलाकों के लोक-नृत्यों की प्रस्तुति देखी है? आंध्र प्रदेश की कुचिपुड़ी, असम का बीहू, बिहार का बिदेसिया, हरियाणा का झूमर, हिमचाल प्रदेश का झोरा, जम्मू कश्मीर का रउफ, कर्नाटक का यक्षगान, केरल की कथकली, महाराष्ट्र की लावणी, ओडिशा का गोतिपुआ, बंगाल का लाठी, राजस्थान का घूमर, तमिलनाडु का भरतनाट्यम, उत्तर प्रदेश की कजरी, उत्तराखंड का भोटिया, मध्य प्रदेश का जवारा, छत्तीसगढ़ का गौर मारिया, गोवा का देक्खनी, झारखंड का सरहुल, अरुणाचल प्रदेश का बुइया, मणिपुर का डोल चोलम, मिजोरम का छेरव, नागालैंड का रेंगमा, त्रिपुरा का होजागिरी, सिक्किम का छाम और लक्षद्वीप का लावा – कितनी फिल्मों में ऐसे नृत्य आपको देखने मिलते हैं?

बिहार के अलग-अलग प्रांतों में एक नहीं बल्कि दर्जन भर लोकनृत्य आपको मिल जाएँगी लेकिन कभी बॉलीवुड ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की कोशिश नहीं की। भारत की सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्री के रूप में लंबे समय तक काबिज रहने के बावजूद बॉलीवुड ने अपना कर्तव्य नहीं निभाया। हाँ, गुजरात का गरबा और पंजाब का भांगड़ा ज़रूर दिख जाता है लेकिन इसे भी गलत तरीके से पेश किया जाता रहा है। अगर बॉलीवुड ने इन परंपरागत लोकनृत्यों को गंभीरता से लिया होता तो इनमें से अधिकतर आज विप्लुत होने की कगार पर नहीं होती।

इसके उलट बॉलीवुड ने क्या चुना? जो पश्चिमी फ़िल्में दिखा रही थीं, उसे ही बॉलीवुड ने आधुनिक मान कर उसकी नक़ल करनी शुरू कर दी। यानी, अमेरिका और यूरोप अपनी फिल्मों के जरिए अपनी स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देते रहे और भारत की मनोरंजन इंडस्ट्री ने भी उनकी ही संस्कृति को बढ़ावा देने का बीड़ा उठा लिया। भारतीय वाद्ययंत्रों का प्रयोग कम होता चला गया। विदेश में गाने फिल्माए जाने लगे। कम कपड़ों में लड़कियों को उपभोग की वस्तु की तरह पेश किया जाने लगा। फिर यही सब चलता रहा।

भारतीय पहनावे और पोशाकों को बॉलीवुड ने अपनी फिल्मों में जरा भी स्थान नहीं दिया। हाल ही में आई ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ को ही देख लीजिए। करण जौहर की फिल्म और प्रेम कहानी के अलावा फैमिली ड्रामा के नाम पर इसे खूब प्रचारित किया गया, लेकिन ट्रेलर में क्या दिखा? वही, अपनी छाती उघाड़ कर चलता हुआ एक लड़का, हीरो के सिक्स पैक एब्स पर फोकस और रेन डांस। अब तो स्थिति ये हो गई है कि बॉलीवुड की हर वेब सीरीज गलियों और सेक्स के बिना पूरी ही नहीं होती।

इस संबंध में सलमान खान ने बड़ी-बड़ी बातें की थी और कहा था कि वो ऐसा कुछ नहीं करेंगे जो भारतीय संस्कृति के खिलाफ हो। इसकी भी पोल खुल गई। TRP और व्यूज की चाहत में ‘बिग बॉस OTT’ लाया गया और फिर इसमें भी वही मसाला परोसा गया – चुम्मा वाला। लिपलॉक और सेक्स सीन के नाम पर अब बॉलीवुड की फिल्मों का प्रमोशन होने लगा है। कोई कामधाम करने वाले हीरो को लाखों की गाड़ियों में चलते हुए और एन्जॉय करते हुए दिखाया जाता है – क्या वास्तविकता में ऐसा संभव है?

JioCinema पर आ रहे ‘बिग बॉस ओटीटी’ के दूसरे सीजन का एक वीडियो खूब वायरल हुआ। इसमें लेबनीज एक्टर जैद हदीद ने भारतीय अभिनेत्री आकांक्षा पुरी को जम कर किस किया। बाद में सलमान खान ने ऑडिएंस से माफ़ी माँगते हुए कह दिया कि वो इस तरह के कंटेंट को अपने शो में समर्थन नहीं करते। आकांक्षा पुरी को शो से निकाला भी गया। लेकिन, इसके नाम पर ‘बिग बॉस ओटीटी’ को बेचने की कितनी कोशिश की गई ये तो सभी ने देखा।

आकांक्षा पुरी ने शो से निकलने के बाद कहा है कि वो तो बस अपना टास्क पूरा कर रही थीं और ये किस भी उसी टास्क का हिस्सा था, जिससे उनकी टीम को उस दिन जीत मिली। उन्होंने कहा कि वो तो टास्क पूरा करने के लिए पूजा भट्ट और साइरस ब्रोचा को किस करने के लिए भी तैयार थीं। वैसे ये आश्चर्यजनक नहीं है, क्योंकि आजकल कई वेब सीरीज में ये आम बात हो गई है। ‘उल्लू’ एप के कंटेंट्स हो या हॉटस्टार पर ‘सिटी ऑफ ड्रीम्स’, लेस्बियन रोमांस नया नॉर्मल है।

आकांक्षा पुरी का कहना है कि जैद हदीद के साथ उनका किस 30 सेकेंड्स चलना था लेकिन बाद में वो बह गए और लगातार किस करने लगे। आकांक्षा पुरी ने सफाई दी है कि उनके मन में जैद हदीद के लिए कोई फीलिंग्स नहीं थीं, इसीलिए उन्होंने अपने होठों का इस्तेमाल करना बंद कर दिया था। इसके बाद जैद ने उन्हें ‘बैड किसर’ तक कह दिया। उन्होंने जैद पर दोष मढ़ते हुए कहा कि ये एक सिंपल सा टास्क था, लेकिन वो पूरे पैशन के साथ किस करने लगे।

शो से बाहर निकलने के बाद आकांक्षा को शादी, किस और हुकअप के लिए अलग-अलग विकल्प दिए और इंटरव्यू में उनकी राय माँगी गई तो उन्होंने सलमान खान से शादी की इच्छा जता दी। हुकअप के संबंध में उन्होंने कहा कि ये जितने ज्यादा लोगों से हो उतना अच्छा है। ऐसे ही लोग लाखों फॉलोवर्स लेकर इंस्टाग्राम पर युवाओं के आदर्श बनते हैं और युवा वही करते हैं, जो ये करते और कहते हैं। तभी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की एक नई ब्रीड खड़ी हो गई हो जो आजकल ‘सक्सेस मन्त्र’ भी बाँटती है।

आजकल बॉलीवुड के विमर्श का वो समूह थोड़ा ऊपर आया है, जिसे अब तक दबा कर रखा गया था। इसी का परिणाम है कि हमें ‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘द केरल स्टोरी’ जैसी फ़िल्में देखने को मिलीं और ये ब्लॉकबस्टर हुईं। इन दोनों के अलावा भी इस्लामी धर्मांतरण और आतंकवाद की समस्या से लेकर भारतीय इतिहास और संस्कृति पर कई फ़िल्में बनीं। अंत में बॉलीवुड ने राष्ट्रवाद के युग के दोहन का भी निर्णय लिया और रामायण के नाम पर ‘आदिपुरुष’ परोस दी।

इसमें हनुमान जी से ‘जलेगी तेरे बाप की’ जैसे डायलॉग्स बुलवाए गए, माँ सीता के कपड़ों का ध्यान नहीं रखा गया और भगवान श्रीराम के व्यवहार को ही बदल दिया गया। मनोज मुंतशिर, जिन्होंने फिल्म के डायलॉग्स लिखे थे, ऐसे सवालों पर निर्देशक से पूछने की सलाह देने लगे। फिल्म बुरी तरह फ्लॉप हुई। सैफ अली खान को रावण के रूप में दिखाया गया। पुष्पक विमान की जगह चमगादड़ ने ले ली और सोने की लंका डरावनी और काली हो गई। ये है इन लोगों के रिसर्च का स्तर।

ऐसे समय में जब हॉलीवुड में एक से बढ़ कर एक फ़िल्में बनती आई हैं, जिसने दुनिया भर की अलग-अलग समस्याओं को फिल्मों के जरिए उकेरा है – बॉलीवुड बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड पर ही अटका हुआ है। इनके लिए हर फिल्म लव स्टोरी है, लड़का-लड़की की कहानी है और सब कुछ इसी के इर्दगिर्द चलता है। एक लड़का और एक लड़की रोमांस करते हैं तो ब्रह्मास्त्र अपने नियम बदल लेता है – रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की फिल्म में यही दिखाया गया।

अगर उदाहरण देने की बात आए तो एक एक प्रोपेगंडा के बॉलीवुड में कई उदाहरण मिल जाएँगे। किस तरह ‘OMG’ फिल्म के जरिए हिन्दू धर्म को बदनाम किया गया, ये किसी से छिपा नहीं है। ‘पाताल लोक’ में एक पुजारी को गन्दी गालियाँ बकते हुए और मांस भक्षण करते हुए दिखाया गया। ‘तांडव’ में हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक बनाया गया। ‘PK’ फिल्म में भगवान शिव का जो चित्रण हुआ, क्या दूसरे मजहबों के आराध्यों को उस तरह से प्रदर्शित करने की हिम्मत भी की जा सकती है?

आपको उस घटना के बारे में पढ़ना चाहिए, जब कैसे फिल्म निर्माता फराह खान, अभिनेत्री रबीना टंडन और कॉमेडियन भारती सिंह को सिर्फ इसीलिए वेटिकन सिटी के प्रतिनिधि बिशप के सामने उपस्थित होकर हस्तलिखित माफ़ी माँगनी पड़ी थी, क्योंकि उन्होंने बाइबिल के कुछ शब्दों का मजाक बना दिया था। यहाँ तो हर एक फिल्म में रामायण-महाभारत की कहानियों को ही गलत तरीके से एक्सप्लेन करने की कोशिश की जाती है और साथ ही उनका रेफरेंस भी गलत तरीकों से दिया जाता है।

आप सोचिए, आजकल के बच्चे रील्स बनाने के नाम पर कम से कम कपड़े पहन कर मोबाइल फोन के सामने अश्लील फ़िल्मी गानों पर ही नाच करते हुए क्यों दिखते हैं, वो स्थानीय लोकनृत्य या फिर लोकगीतों की प्रैक्टिस करते क्यों नहीं दिखते? क्योंकि बॉलीवुड ने उनके मन में बिठा दिया है कि कपड़े उतार कर अश्लील गानों पर डांस करना ही ‘कूल’ और ‘मॉडर्न’ है, बाकी सब तो पुरानी चीजें हैं जिन्हें हमें छोड़ देना है, वरना हम पुराने खयालातों के कहाएँगे।

हॉलीवुड फिल्मों को देखिए, कैसे वो पश्चिमी संस्कृति को लेकर दुनिया भर में जाते हैं और दुनिया के कई फिल्म इंडस्ट्रीज पर उनका प्रभाव है। ‘Apollo 13’ (1995) फिल्म के जरिए चाँद पर जाने की अमेरिकी प्रयास को दिखाया गया। ‘Dances With Wolves (1990)’ में अमेरिका के मूलनिवासियों के जीवन को दिखाया गया। ‘Do The Right Thing (1989)’ में स्ट्रीट पर रहने वाले लोगों का जीवन दिखा। ऐसी अनगिनत फ़िल्में हैं। लेकिन, भारत में ऐसा कुछ नहीं होता।

यहाँ अगर भारत की कहानी पर भी फिल्म बनाई जाती है तो प्रेरणा अमेरिका से ही लेकर आते हैं ये लोग। ‘आदिपुरुष’ में एवं को फर और बेल्ट पहनाया जाता है। वानर सेना को चिम्पांजी बना दिया जाता है। रावण के किरदार को डरावना बना दिया जाता है। रावण भारतीय वाद्ययंत्र नहीं बल्कि गिटार बजाता है। जब सब कुछ यहाँ की किताबों में वर्णित है, गाँव-गाँव में रामलीला होती है, तो ऐसे में प्रेरणा लेने के लिए ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’ और ‘लॉर्ड ऑफ द रिंग्स’ सीरीज में घुसना सही है क्या?

कुल मिला कर बात ये है कि बॉलीवुड फिल्मों की 2 ही रेसिपी होती है – अश्लीलता और हिन्दू धर्म का मजाक। कम कपड़ों में हीरोइनें और हिन्दू देवी-देवताओं का कॉमिक चित्रण। जब इस पर आवाज उठाई जाएगी, तो आपको या तो महिला विरोधी बता दिया जाएगा या फिर अभिव्यक्ति की आज़ादी का विरोधी। माँ काली को सिगरेट फूँकने दिखाने और और भगवान शिव को त्रिशूल लेकर भागते हुए दिखाने वाले भला भारतीय संस्कृति और परंपरा का सम्मान करना क्या जानें?

बॉलीवुड जब हॉलीवुड से ही कंटेंट चुरा रहा है तो उसे ये भी सीखना पड़ेगा कि अपनी संस्कृति और परंपरा को बढ़ावा कैसे देते हैं। अपने देश की नीतियों, उपलब्धियों और सरकार के नैरेटिव को कैसे इस तरह आगे बढ़ाते हैं कि सामने वाले को पता तक नहीं चलता और वो उसका अनुसरण करने लगता है। ये ‘हिप्स-बूब्स’ और हिन्दू धर्म के अपमान से निकल कर बॉलीवुड को दिखाना पड़ेगा कि भारतीय परिधान, नृत्य और कलाएँ भी ‘कूल’ और ‘मॉडर्न’ हैं।