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किशोरी और महिला के यौन उत्पीड़न के दोषी को इंग्लैंड में गलती से मिली रिहाई, सजा पूरी होने से पहले ही कर दिया डिपोर्ट: संसद में उठा मुद्दा

लंदन की पुलिस उन कैदियों की तलाश में है, जिसे एक हफ्ते के अंदर वेंड्सवर्थ जेल से ‘गलती से’ रिहा कर दिया गया था। इस घटना के बाद ब्रिटेन का जेल प्रशासन सवालों के घेरे में है।

29 अक्टूबर 2025 को ‘गलती’ से छूटा पहला कैदी 24 साल का ब्राहिम कद्दौर-चेरिफ था, जो एक अल्जीरियाई यौन अपराधी था। कुछ दिन बार 3 नवबंर को उसी जेल से दूसरा कैदी विलियम स्मिथ भी ‘गलती’ से रिहा हो गया।

ऐसी ही ‘गलती’ एक और हुई है। इथियोपियाई नागरिक और सजायाफ्ता यौन अपराधी हादुश केबातु को एसेक्स की एक जेल से ‘गलती’ से रिहा कर दिया गया। इन ‘गलतियों’ की वजह से न्याय सचिव डेविड लैमी की देशभर में आलोचना हो रही है। वे राजनीतिक आलोचनाओं के केन्द्र में हैं। हालाँकि उन्होंने केबातु के मामले के बाद भविष्य में ऐसी घटना नहीं होने देने की बात कही थी।

संसद में सवाल और राजनीतिक बवाल

यह मुद्दा इस हफ्ते प्रधानमंत्री से पूछे गए सवालों (पीएमक्यू) में भी था। हालाँकि प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की जगह डेविड लैमी से घटना को लेकर सवाल पूछा गया। सांसद ये जानना चाहते थे कि क्या केबातु के मामले के बाद से किसी शरण माँगने वाले अपराधी को गलती से रिहा किया गया है। हालाँकि, लैमी ने इस सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया।

संसद सत्र के समापन के बाद मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने पुष्टि की कि 29 अक्टूबर को एक विदेशी कैदी को ग़लती से हिरासत से रिहा कर दिया गया था। इसकी सूचना उन्हें लगभग एक हफ्ते बाद मिली।

मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने उस व्यक्ति की पहचान कद्दौर-शेरिफ के रूप में की, जिसके लंदन के टावर हैमलेट्स और वेस्टमिंस्टर से संबंध हैं।

नवंबर 2024 में उसे एक नग्न प्रदर्शन करने के मामले में दोषी ठहराया गया था। और 18 महीने जेल की सजा के साथ साथ यौन अपराधियों की सूची में पाँच साल के लिए शामिल कर दिया गया।

रिपोर्टों के नुसार, कद्दूर-शेरिफ 2019 में विज़िट वीजा पर कानूनी तरीके से यूके आए थे, लेकिन वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी वे नहीं गए। अधिकारियों ने उन्हें 2020 में ही ‘ निर्धारित समय से ज्यादा समय तक रहने वाले’ के रूप में पहचान की थी।

बीबीसी ने बाद में बताया कि वे शरणार्थी नहीं हैं और डेविड लैमी को रातोंरात उनकी ‘गलती’ से हुई रिहाई के बारे में सूचित कर दिया गया था। न्याय सचिव लैमी ने इस गलती को ‘अस्वीकार्य’ बताया। पुलिस के बयान को लेकर लैमी ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘बेहद अपमानजनक और भयावह’ करार दिया। उन्होंने कहा कि दोषियों को सजा मिलनी चाहिए और ऐसी गलतियाँ ‘पूरी तरह से अस्वीकार्य’ हैं।

लैमी ने डेम लिन ओवेन्स के नेतृत्व में एक स्वतंत्र जाँच की घोषणा की। उन्होंने कहा, “मैंने पहले ही कड़ाई से जाँच शुरू कर दी है, लेकिन यह स्पष्ट है कि इन गलतियों को हमेशा के लिए रोकने के लिए और भी कुछ किया जाना चाहिए।”

हालाँकि, विपक्षी दल इससे सहमत नहीं थे। कंजर्वेटिव से जुड़े गृह सचिव क्रिस फिलिप ने कहा, “यह चौंकाने वाला है कि एक बार फिर एक विदेशी अपराधी को गलती से रिहा कर दिया गया। इससे लैमी के दावे की मजाक उड़ रही है। उन्होंने ‘अब तक की सबसे कड़ी जाँच’ शुरू करने की बात कही थी।

दूसरे कैदी को भी गलती से रिहा कर दिया गया

कद्दौर-शेरिफ़ की गलत रिहाई की जब पुलिस ने पुष्टि की, उसके कुछ ही घंटों बाद सरे पुलिस (surrey police) से एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। उन्होंने खुलासा किया कि विलियम स्मिथ को भी इसी हफ्ते उसी जेल वैंड्सवर्थ से, गलती से रिहा कर दिया गया।

स्मिथ को सोमवार, 3 नवंबर को धोखाधड़ी से जुड़े विभिन्न अपराधों के लिए 45 महीने की जेल की सजा सुनाई गई थी, लेकिन उसी दिन वह गलती से रिहा कर दिया गया।

बीबीसी की पड़ताल में सामने आया है कि ऐसा तब हुआ, जब अदालत के कर्मचारियों ने अनजाने में उसे हिरासत में लेने के बजाय छोड़ दिया गया। हालाँकि थोड़ी देर बाद गलती सुधारने की कोशिश की गई। लेकिन जानकारी गलत अधिकारी को दे दी गई, जिसने उसे वापस पकड़ा नहीं जा सका।

पुलिस ने स्मिथ को गोरा, गंजा और क्लीन शेव बताया है। उसे आखिरी बार सफ़ेद नाइकी लोगो वाला नेवी ब्लू जम्पर, नेवी ब्लू ट्रैक पैंट और काले रंग के स्नीकर्स पहने देखा गया था। अधिकारियों ने ऐसे व्यक्ति को देखने पर तुरंत पुलिस को सूचित करने की लोगों से अपील की है।

आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, मार्च 2025 तक इंग्लैंड और वेल्स में 262 कैदियों को गलती से रिहा कर दिया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 128% अधिक है। वैंड्सवर्थ के कर्मचारियों ने बीबीसी को बताया कि इन हालिया गलतियों के बाद से जेल में दहशत फैल गई है। वैंड्सवर्थ में सुरक्षा संबंधी चिंताएँ नई नहीं हैं।

पिछले साल की रिपोर्ट में भी व्यापक अराजकता और कैदियों की खराब ट्रैकिंग का उल्लेख किया गया था। साल 2023 में भी इसी जेल ने तब सुर्खियाँ बटोरीं जब ईरान के लिए जासूसी करने के मुकदमे का इंतजार कर रहे डैनियल खलीफ भाग गया था।

यौन अपराधी हदुश केबातु का मामला

हदुश केबातु एक इथियोपियाई शरणार्थी है, जिसे एसेक्स में एक किशोरी और एक महिला के यौन उत्पीड़न का दोषी ठहराया गया था। उसे 1 साल जेल की सजा हुई थी। लेकिन एक महीने बाद ही वह गलती से रिहा कर दिया गया।

इस मामले में डेम लिन ओवेन्स की अध्यक्षता में एक जाँच पहले से ही चल रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इतनी गंभीर गलती कैसे हुई।

हदुश केबातु (फोटो साभार- इंडिपेंडेंट)

दो दिनों तक तलाशी अभियान चलाया गया और केबातु को 26 अक्टूबर को उत्तरी लंदन के फिन्सबरी पार्क में फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। वह चेम्सफोर्ड से वहाँ आया था। दो दिन बाद उसे निर्वासित कर दिया गया, लेकिन निर्वासन प्रक्रिया में बाधा डालने की धमकी देने पर अधिकारियों ने उसे £500 दिए।

14 वर्षीय पीड़िता के पिता ने आईटीवी न्यूज़ को बताया कि सरकार पूरी तरह फेल रही। अपराधी को पकड़ा गया, फिर उसे निर्वासित कर दिया गया। जिस तरह से इस मामले को हेंडल किया गया, उससे उनका परिवार काफी निराश है।

उन्होंने गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहा, “हमें बस असफलता के बाद असफलता ही हाथ लग रही है। मैं नाराज नहीं हूँ, मैं निराश हूँ।”

उस युवती ने आईटीवी को लिखित बयान साझा किया। बयान में उसने कहा था कि वह ‘सो नहीं पा रही है’ क्योंकि उसे डर था कि वह मुझे ढूँढ़ने के लिए एपिंग वापस आ जाएगा”।

केबातु प्रकरण के बाद शरणार्थियों के होटलों के बाहर विरोध प्रदर्शन हुए। इस दौरान कई हिंसक झड़पें भी हुई।

उन्होंने कहा कि केबातु की गिरफ्तारी से लेकर उसके निर्वासन तक की पूरी प्रक्रिया में सिर्फ़ 17 हफ्ते लगे। परिवार का मानना है कि इससे उनके बेटी के साथ ‘न्याय’ नहीं हुआ।

राहुल गाँधी के सारे ‘हाईड्रोजन बम’ फुस्स, अपने ही कार्यकर्ताओं ने बनाया बेवकूफ: पढ़ें- कॉन्ग्रेस के युवराज के बैक-टू-बैक 8 दावों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने एक बार फिर बुधवार (5 नवंबर 2025) को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके ‘वोट चोरी’ का ‘हाईड्रोजन बम’ फोड़ने का फर्जी दावा किया है। बिहार चुनाव से पहले राहुल गाँधी ने हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 का हवाला देते हुए चुनाव आयोग और बीजेपी पर 25 लाख वोटों की चोरी का गंभीर आरोप लगाया। राहुल गाँधी ने ‘एच फाइल्स‘ के नाम से प्रेजेंटेशन देकर दावा किया कि हर आठ में से एक वोटर फर्जी था, जिसकी वजह से कॉन्ग्रेस हारी।

हालाँकि, जब इन आरोपों की पड़ताल की गई और चुनाव आयोग ने तथ्य सामने रखे, तो राहुल गाँधी के दावे एक बार फिर कमजोर और आधारहीन साबित हुए। अब आपको फैक्ट चेक के आधार पर बताते है कि राहुल गाँधी ने क्या आरोप लगाए और उसके जवाब में क्या सच सामने आया।

आरोप नंबर 1: ‘ब्राजीलियन मॉडल’ ने 22 बार डाला वोट

राहुल गाँधी का आरोप: राहुल गाँधी ने आरोप लगाया कि सोनीपत के राई विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में ब्राज़ील की एक मॉडल का फोटो लगा हुआ था। राहुल गाँधी ने बताया कि इस मॉडल ने अलग-अलग नाम (जैसे स्वीटी या सीमा) से 10 बूथों पर 22 बार वोट डाले। राहुल गाँधी के अनुसार, यह ‘वोट चोरी’ की बड़ी साजिश थी।

फैक्ट चेक का सच: पड़ताल के लिए जब राई क्षेत्र के 8 गाँवों (मच्छरौला, मुरथल, बारोटा आदि) में जाँच की गई, तो सामने आया कि वोट किसी मॉडल ने नहीं डाले, बल्कि असली मतदाताओं ने ही डाले थे। 22 में से 13 महिला मतदाताओं ने पुष्टि की कि उन्होंने विधानसभा चुनाव में अपना वोट खुद डाला था।

मतदाताओं (जैसे मच्छरौला की पिंकी और मुनेश) ने बताया कि वोटर लिस्ट में भले ही उनकी जगह किसी और का फोटो लगा था, लेकिन उनका नाम, पति का नाम और पता बिल्कुल सही था। वोट डालते समय उन्होंने अपना पहचान पत्र (जैसे वोटर आई कार्ड) दिखाया, जिसके बाद चुनाव अधिकारियों ने उन्हें वोट देने दिया।

‘ब्राजीलियन मॉडल’ ने क्या कहा: राहुल गाँधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरियाणा की वोटर लिस्ट में अपनी तस्वीर दिखने के बाद, ब्राजील की डिजिटल इन्फ्लुएंसर और हेयरड्रेसर ने सोशल मीडिया पर इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने वीडियो जारी कर साफ किया, “मेरी तस्वीर का इस्तेमाल… मुझे नहीं पता कि यह चुनाव है या कुछ और, जहाँ वोटिंग जरूरी है। और… भारत में… सच में?? ये लोग मुझे एक भारतीय महिला के रूप में दिखा रहे हैं ताकि दूसरों को धोखा दिया जा सके, दोस्तों। यह मैं नहीं हूँ, मैं कभी भारत गई भी नहीं हूँ, मैं एक ब्राजीलियन डिजिटल इन्फ्लुएंसर और हेयरड्रेसर हूँ, और मैं भारतीय लोगों से बहुत प्यार करती हूँ।”

आरोप नंबर 2: ‘एक ही घर’ में 501 और 66 वोटर

राहुल गाँधी का आरोप: राहुल गाँधी ने दावा किया कि हरियाणा में एक घर में 501 वोटर और दूसरे घर (मकान नंबर 150) पर 66 वोटर दर्ज थे, और ये घर सिर्फ ‘कागजों पर’ थे।

फैक्ट चेक का सच: होडल विधानसभा क्षेत्र के गुदराना गाँव में मकान नंबर 150 की जाँच में पता चला कि यह कोई छोटा मकान नहीं, बल्कि करीब 1 एकड़ में फैला एक बड़ा पुश्तैनी भूखंड है। यहाँ रहने वाले जिला परिषद के वाइस चेयरमैन उमेश ने बताया कि उनके परिवार में करीब 200 सदस्य और 150 वोटर हैं, क्योंकि उनके दादाजी के चार भाई और पिताजी के 9 भाई थे। पूरा परिवार एक ही नंबर पर रजिस्टर्ड होने के कारण वोटों की संख्या ज्यादा दिखती है। मकान नंबर 265 पर 501 वोटर होने का दावा जाँच में मिला ही नहीं, जिससे यह तथ्य पूरी तरह से झूठा साबित हुआ।

आरोप नंबर 3: ’25 लाख वोट चोरी’

राहुल गाँधी का आरोप: राहुल गाँधी ने दावा किया कि 5 लाख से ज्यादा डुप्लीकेट वोटर और 19 लाख बल्क वोटर्स थे, जिससे कुल 25 लाख वोटों की चोरी हुई। राहुल गाँधी ने चुनाव आयोग (EC) पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के बयान को लेकर भी ‘खुलेआम झूठ बोलने’ का आरोप लगाया।

फैक्ट चेक का सच: चुनाव आयोग ने राहुल गाँधी के आरोपों को आधारहीन बताते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस ने मतदाता सूची के रिवीजन (SSR) के दौरान डुप्लीकेट मतदाताओं को हटाने के लिए कोई शिकायत या आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी। EC ने कहा कि अगर आरोप सही हैं, तो कॉन्ग्रेस निर्धारित नियमों के अनुसार हर एक आरोप के संबंध में शपथ पत्र दे, जिसके बाद आयोग हर शिकायत पर कार्रवाई करेगा।

EC ने यह भी बताया कि हरियाणा चुनाव से पहले 4,16,408 दावों और आपत्तियों पर सुनवाई हुई थी, लेकिन चुनाव के बाद किसी भी उम्मीदवार द्वारा मतदान या मतगणना पर कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इसे ‘नाकामी छुपाने का बहाना’ बताया, क्योंकि कॉन्ग्रेस को महाराष्ट्र और हरियाणा में हार मिली।

आरोप नंबर 4: CCTV फुटेज डिलीट और डुप्लीकेट वोटिंग

राहुल गाँधी का आरोप: राहुल गाँधी ने दावा किया कि चुनाव आयोग ने CCTV फुटेज डिलीट कर दिए, ताकि एक ही महिला द्वारा 223 बार वोट डालने जैसे मामले सामने न आ सकें।

फैक्ट चेक का सच: राहुल गाँधी ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई पुख्ता सबूत (जैसे डिलीटेड फुटेज का साक्ष्य) पेश नहीं किया, जबकि चुनाव आयोग नियमों से बँधा होता है और हर चरण की निगरानी होती है। चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि वह बिना शपथ पत्र और निर्धारित शिकायत के स्वतः संज्ञान नहीं ले सकता, क्योंकि इससे आधारहीन आरोपों की जिम्मेदारी तय नहीं हो पाती।

आरोप नंबर 5: नायब सिंह सैनी की प्रेस कॉन्फ्रेंस

राहुल गाँधी का आरोप: राहुल गाँधी ने CM सैनी की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का क्लिप दिखाया। इस क्लिप में सीएम सैनी यह कहते दिख रहे हैं कि ‘बीजेपी अकेले सरकार बनाएगी… हमारे पास सारी व्यवस्थाएँ हैं।’ राहुल गाँधी ने सीएम सैनी के ‘मुस्कुराते चेहरे’ और ‘व्यवस्था’ शब्द पर सवाल उठाया। राहुल का दावा था कि सीएम सैनी का इतना आश्वस्त दिखना और ‘व्यवस्था’ शब्द का उपयोग करना यह साबित करता है कि बीजेपी ने वोट चोरी की कोई ‘सेंट्रलाइज्ड साजिश’ रची थी, क्योंकि एग्जिट पोल कॉन्ग्रेस के पक्ष में थे।

फैक्ट चेक का सच: पूरे संदर्भ में जाँच करने पर पता चला कि सीएम सैनी का बयान ‘वोट चोरी’ या चुनावी धांधली से बिल्कुल संबंधित नहीं था। सीएम सैनी से असल में एक रिपोर्टर ने पूछा था कि क्या बीजेपी सरकार बनाने के लिए किसी अन्य पार्टी के साथ गठबंधन (गठबंधन की संभावना) करेगी। इसके जवाब में सीएम सैनी ने आत्मविश्वास से कहा था, “हमें किसी भी तरह के गठबंधन की जरूरत नहीं पड़ेगी। मैंने शुरू से ही कहा है कि भाजपा अकेले सरकार बनाएगी। हमारे पास सारे इंतजाम हैं…।”

आरोप नंबर 6: मकान नंबर ‘शून्य’ (0) का मतलब फर्जी वोटर

राहुल गाँधी का आरोप: राहुल गाँधी ने दादरी शहर की मतदाता सूची में नरेंद्र नामक एक युवक का उदाहरण दिया, जिसके पास खुद का मकान होने के बावजूद उसका मकान नंबर ‘शून्य’ (0) दिखाया गया था। राहुल गाँधी ने दावा किया कि चुनाव आयोग (CEC) मकान नंबर ‘0’ उन लोगों का दिखाता है, जिनके पास घर नहीं होता (जैसे फुटपाथ या पुल के नीचे सोने वाले), और ऐसा करना मतदाता की जाँच को मुश्किल बनाने का एक तरीका है।

फैक्ट चेक का सच: जमीनी जाँच में पता चला कि यह आरोप भी आधारहीन है और स्थानीय प्रशासनिक समस्या को गलत ढंग से पेश किया गया है। जिस नरेंद्र का जिक्र किया गया, वह अपने परिवार के साथ 30 वर्षों से दादरी में खुद के मकान में रह रहा है।

जाँच में यह सामने आया कि उस वार्ड में नगर परिषद की ओर से कोई मकान नंबर आवंटित यानि अलोट ही नहीं किया गया है। इसी कारण नरेंद्र के ही नहीं, बल्कि उनके माता-पिता और पत्नी के वोटर कार्ड और यहाँ तक कि आधार कार्ड में भी मकान संख्या ‘शून्य’ दर्ज है।

आरोप नंबर 7: वोटर लिस्ट ‘आखिरी मिनट’ मिली

राहुल गाँधी का आरोप: राहुल गाँधी से जब पूछा गया कि आने वाले चुनावों में ‘वोट चोरी’ रोकने के लिए उनकी क्या तैयारी है, तो राहुल गाँधी बोले, “सबसे पहले आपको यह समझना है कि वोटर लिस्ट बहुत मुश्किल से मिलती है।” हरियाणा की वोटर लिस्ट पर राहुल गाँधी ने कहा, “ये जो हरियाणा की वोटर लिस्ट थी, लास्ट मिनट, चुनाव से एकदम पहले हमें दी जाती है, फाइनल लिस्ट।” राहुल गाँधी ने इस दावे का इस्तेमाल यह बताने के लिए किया कि उन्हें तैयारी के लिए समय ही नहीं मिला। वीडियो आप 1:08:29 से सुन सकते हैं।

फैक्ट चेक का सच: राहुल गाँधी के इस दावे पर हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने तुरंत फैक्ट शीट जारी करके सच्चाई सामने रखी। चुनाव आयोग के मुताबिक, हरियाणा चुनाव से लगभग दो महीने पहले (2 अगस्त 2024) ही सभी राजनीतिक दलों के साथ ‘ड्राफ्ट मतदाता सूची’ बाँट दी गई थी।

इसके बाद, आपत्तियों को ठीक करके फाइनल मतदाता सूची भी चुनाव से करीब 40 दिन पहले (27 अगस्त 2024) राजनीतिक दलों के साथ शेयर कर दी गई थी। चुनाव आयोग ने साफ कहा कि राहुल गाँधी का यह दावा कि उन्हें ‘आखिरी वक्त’ पर वोटर लिस्ट दी गई, पूरी तरह गलत है। इसके अलावा, एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई। फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने के बाद, कॉन्ग्रेस या किसी भी दल ने जिलाधिकारी (DM) के पास एक भी शिकायत या अपील दाखिल नहीं की थी।

आरोप नंबर 8: हरियाणा की महिला वोटर का वीडियो क्लिप

राहुल गाँधी का आरोप: राहुल गाँधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक महिला वोटर की वीडियो क्लिप चलाई। क्लिप का इस्तेमाल करते हुए राहुल ने यह बताने की कोशिश की कि हरियाणा में बड़े पैमाने पर धाँधली हुई है और यह महिला उनकी ‘वोट चोरी’ की थ्योरी का सबूत है।

फैक्ट चेक का सच: ऑपइंडिया ने जब उस महिला वोटर से बात की, तो पता चला कि राहुल गाँधी ने उनके वीडियो का इस्तेमाल गलत संदर्भ में किया था। महिला वोटर का नाम अंजलि त्यागी है और वह सोनीपत, हरियाणा की रहने वाली हैं। अंजलि त्यागी ने ऑपइंडिया के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में राहुल गाँधी के दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा, “मेरे वीडियो का गलत संदर्भ में इस्तेमाल किया गया। मैं राहुल गाँधी के आरोपों से सहमत नहीं हूँ।”

दरअसल, राहुल गाँधी का यह ‘हाइड्रोजन बम’ चुनाव आयोग की वैधानिक प्रक्रियाओं की अनदेखी करते हुए, अपनी पार्टी की हार के बाद, राजनीतिक विफलता को बाहर के कारकों पर डालने की एक कोशिश मात्र साबित हुआ है।

‘बाबरी हमारी, मुगल हमारे बाप-दादा’: सिवान में बोला पढ़ा-लिखा मुसलमान, राम मंदिर का निर्माण गलत

बिहार के सिवान में ऑपइंडिया की यात्रा दौरान अनुराग मिश्रा ने कॉलेज पढ़े मुस्लिम युवकों से बात की। एक इंजीनियरिंग स्टूडेंट ने कहा, “राम मंदिर तोड़कर बनाया गया, बाबरी मस्जिद हमारी थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी माना था ना?” दूसरा MA पास युवक बोला, “मुगल हमारे पूर्वज हैं, औरंगजेब ने हिंदू मंदिर तोड़े तो क्या गलत किया? वो इस्लाम फैला रहे थे।”

शहाबुद्दीन को लेकर सब एक स्वर में बोले, “साहेब गरीब मुसलमानों के मसीहा थे, ऊँची जाति वालों से लड़ते थे।”

राम मंदिर पर गुस्सा साफ था। एक टीचर ने कहा, “हिंदू हमेशा मुसलमानों को दबाते हैं, राम मंदिर इसका सबूत है।” लोग मुगलों को गौरवशाली योद्धा बताते हैं और राम मंदिर को अन्याय।

ग्राउंड रिपोर्ट में साफ है – सिवान के पढ़े-लिखे मुस्लिम अभी भी बाबरी को अपनी जमीन और मुगलों को अपना इतिहास मानते हैं।

देखें – ग्राउंड रिपोर्ट

क्या है भारत का IndiaAI मिशन, Meity ने जिसके लिए जारी किए दिशा-निर्देश: 7 सूत्र और 6 बिंदुओं को विस्तार से पढ़कर सब समझिए

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने बुधवार (5 नवंबर 2025) को IndiaAI मिशन के तहत ‘इंडिया AI गवर्नेंस गाइडलाइन्स’ लॉन्च कीं। यह पहल देश में सुरक्षित, जिम्मेदार और समावेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल की दिशा में एक अहम कदम है।

इस कार्यक्रम में देश के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद और MeitY के सचिव एस कृष्णन सहित IndiaAI मिशन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। यह लॉन्चिंग India-AI Impact Summit 2026 से पहले हुई है, जो भारत की जिम्मेदार AI गवर्नेंस में बढ़ती नेतृत्व भूमिका को दर्शाती है।

नई गाइडलाइन्स का उद्देश्य एक मजबूत गवर्नेंस ढाँचा तैयार करना है ताकि नवाचार को बढ़ावा देते हुए AI तकनीक का सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग किया जा सके और इससे समाज या व्यक्ति को होने वाले जोखिमों को कम किया जा सके।

इस फ्रेमवर्क के चार मुख्य घटक हैं –

1. सात मार्गदर्शक सिद्धांत (सूत्र) – जो भारत की नैतिक और जिम्मेदार AI नीति की नींव तय करते हैं।

2. छह स्तंभों पर आधारित सिफारिशें – जो AI गवर्नेंस के विभिन्न पहलुओं को कवर करती हैं।

3. कार्रवाई योजना (Action Plan) – जिसमें अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक लक्ष्यों का खाका तैयार किया गया है।

4. व्यावहारिक दिशानिर्देश (Practical Guidelines) – जो उद्योग, डेवलपर्स, नियामक और अन्य हितधारकों के लिए पारदर्शी और जवाबदेह एआई उपयोग सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई हैं। इन गाइडलाइन्स के माध्यम से भारत का लक्ष्य है कि AI तकनीक का विकास न केवल नवाचार और प्रगति के लिए हो, बल्कि सुरक्षा, पारदर्शिता और नैतिकता को भी प्राथमिकता दी जाए।

सात मार्गदर्शक सिद्धांत (सूत्र)

भारत की नई AI शासन रूपरेखा (AI Governance Framework) को सात मूलभूत सिद्धांतों या ‘सूत्रों’ पर आधारित किया गया है, जिन्हें सभी क्षेत्रों और तकनीकों में लागू किया जाएगा।

ये सूत्र RBI की FREE-AI समिति की सिफारिशों से लिए गए हैं और भारत की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाए गए हैं। समिति का मानना है कि यही सिद्धांत देश में सुरक्षित, जिम्मेदार और मानव-केंद्रित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विकास की दिशा तय करेंगे।

नीचे इन सात मार्गदर्शक सूत्रों का सरल रूप में विवरण दिया गया है –

1. विश्वास ही है आधार (Trust is the Foundation): AI के पूरे मूल्य-श्रृंखला में तकनीक, उसे विकसित करने वाले संगठन, निगरानी संस्थान और उपयोगकर्ता सभी में विश्वास (Trust) जरूरी है। यदि लोगों को AI पर भरोसा नहीं होगा, तो इसका व्यापक लाभ नहीं मिल पाएगा। इसलिए तकनीक के हर स्तर पर पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ भरोसे को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

2. जन प्रथम (People First): AI का केंद्र मानव होना चाहिए। इसका अर्थ है कि AI सिस्टम ऐसे बनाए जाएँ जो लोगों को सशक्त करें, उनकी मूल्यों और आवश्यकताओं के अनुरूप हों और अंतिम निर्णय पर मानव नियंत्रण (human oversight) बना रहे। ‘पीपल-फर्स्ट’ दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करता है कि तकनीक इंसानों की सेवा में रहे, न कि उन पर हावी हो।

3. संयम की बजाय नवाचार (Innovation over Restraint): AI का विकास नवाचार (Innovation) पर आधारित होना चाहिए, न कि अनावश्यक प्रतिबंधों पर। हालाँकि सुरक्षा और जिम्मेदारी जरूरी हैं, लेकिन तकनीक के प्रयोग को केवल डर या सावधानी के कारण रोकना उचित नहीं। उत्तरदायी नवाचार को प्रोत्साहित करते हुए देश के सामाजिक-आर्थिक विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत किया जाना चाहिए।

4. न्याय और समानता (Fairness & Equity): AI का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचना चाहिए। सिस्टम में किसी तरह का भेदभाव या पक्षपात नहीं होना चाहिए। AI का प्रयोग समावेशी विकास (inclusive development) के लिए किया जाए ताकि कोई भी व्यक्ति या समुदाय पीछे न रह जाए।

5. जवाबदेही (Accountability): AI से जुड़ी हर इकाई, डेवलपर, उपयोगकर्ता, संस्था की जवाबदेही स्पष्ट होनी चाहिए। जो भी जोखिम या नुकसान की संभावना है, उसके अनुसार जिम्मेदारी तय की जाए। नीतिगत, तकनीकी और बाजार-आधारित उपायों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी बिना जिम्मेदारी के काम न करे।

6. समझने योग्य डिजाइन (Understandable by Design): AI सिस्टम इतने स्पष्ट और पारदर्शी (transparent) होने चाहिए कि उपयोगकर्ता और नियामक दोनों यह समझ सकें कि सिस्टम कैसे काम करता है। AI का निर्णय ‘ब्लैक बॉक्स’ जैसा न हो, बल्कि उपयोगकर्ता को यह बताया जाए कि उसका परिणाम किस आधार पर आया। यही समझ, भरोसे की नींव रखती है।

7. सुरक्षा, लचीलापन और स्थिरता (Safety, Resilience & Sustainability): AI सिस्टम सुरक्षित, मजबूत और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार (sustainable) होने चाहिए। इनमें ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि किसी भी गड़बड़ी या खतरे का समय रहते पता चल सके। संसाधनों की बचत करने वाले और हल्के (lightweight) मॉडल्स को बढ़ावा दिया जाए ताकि तकनीक पर्यावरण पर बोझ न बने।

अपने संबोधन में  प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार डॉ अजय कुमार सूद ने कहा कि पूरे ढाँचे की भावना ‘Do No Harm’ (किसी को नुकसान न पहुँचाना) पर आधारित है। यानी, AI का हर उपयोग समाज के हित में हो और किसी भी रूप में हानिकारक न साबित हो।

AI शासन के 6 स्तंभ

गाइडलाइंस के दूसरे भाग में छह प्रमुख स्तंभों पर सिफारिशें दी गई हैं, जिन्हें तीन मुख्य क्षेत्रों में बाँटा गया है –

1. इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure): गाइडलाइंस में कहा गया है कि भारत को AI के लिए मजबूत आधारभूत ढाँचा तैयार करना चाहिए, ताकि सभी को समान अवसर मिल सके। इसमें डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) का उपयोग करके AI को बड़े पैमाने पर और समावेशी रूप से फैलाने की बात कही गई है।

सरकार द्वारा 38,231 GPUs स्टार्टअप, शोधकर्ताओं और डेवलपर्स को रियायती दरों पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। 3,000 आधुनिक GPUs वाला सुरक्षित क्लस्टर रणनीतिक कार्यों के लिए तैयार किया जा रहा है।

AIKosh प्लेटफॉर्म पर अब तक 1,500 डेटा सेट और 217 AI मॉडल जोड़े गए हैं, जो 20 सेक्टरों की 34 संस्थाओं से लिए गए हैं। MSME (लघु उद्योग) के लिए टैक्स छूट, AI से जुड़े ऋण और सस्ती कंप्यूटिंग सुविधाओं जैसी प्रोत्साहन योजनाओं की सिफारिश की गई है।

2. क्षमता निर्माण (Capacity Building): यह स्तंभ शिक्षा, प्रशिक्षण और जागरूकता पर केंद्रित है। AI साक्षरता को बढ़ाने के लिए टियर-2 और टियर-3 शहरों, व्यावसायिक संस्थानों और सरकारी अधिकारियों को प्रशिक्षण देने की सिफारिश की गई है।

मौजूदा कार्यक्रम जैसे IndiaAI FutureSkills और FutureSkills PRIME को आगे बढ़ाने और विस्तार करने की जरूरत बताई गई है ताकि AI का लाभ अधिक लोगों तक पहुँचे।

3. नीति और नियमन (Policy & Regulation): इस भाग में एक लचीला और संतुलित नियामक ढाँचा अपनाने की बात कही गई है। सुझाव दिया गया है कि नई ‘AI Act’  लाने के बजाय मौजूदा कानूनों (जैसे IT Act 2000, DPDP Act, कॉपीराइट कानून आदि) में संशोधन करके AI से जुड़े मुद्दों को शामिल किया जाए।

खास तौर पर, IT Act में यह स्पष्ट करने की आवश्यकता बताई गई है कि डिजिटल इंटरमीडियरी और AI सिस्टम की कानूनी जिम्मेदारी किस पर होगी।

4. जोखिम प्रबंधन (Risk Mitigation): गाइडलाइंस में भारत के संदर्भ में एक जोखिम मूल्यांकन ढाँचा (Risk Assessment Framework) तैयार करने की बात कही गई है। शुरुआत में उद्योगों के लिए स्वैच्छिक (voluntary) नियम लागू करने और बाद में कानूनी ढाँचा बनाने की सलाह दी गई है।

संवेदनशील क्षेत्रों जैसे सरकारी सेवाएँ या कमजोर वर्गों से जुड़ी परियोजनाएँ में अतिरिक्त सुरक्षा नियम लागू होंगे। साथ ही डीपफेक, कंटेंट ऑथेंटिकेशन, डेटा स्रोत की सत्यता (dataset provenance) और जेनरेटिव एआई में कंटेंट की पहचान (attribution) पर भी सख्त निगरानी रखने की जरूरत बताई गई है।

5. जवाबदेही (Accountability): जिम्मेदारी तय करने के लिए ग्रेडेड लायबिलिटी सिस्टम की सिफारिश की गई है। यानी किसी के कार्य, जोखिम स्तर और सावधानी के आधार पर उसकी जवाबदेही तय की जाए। AI वैल्यू चेन के हर हिस्से, डेवलपर, डिप्लॉयर और थर्ड-पार्टी प्रदाता के बीच पारदर्शिता आवश्यक बताई गई है, ताकि नियामक संस्थाएँ सही और उचित कार्रवाई कर सकें।

6. संस्थान (Institutions): गाइडलाइंस में ‘Whole-of-Government’ दृष्टिकोण अपनाने की बात कही गई है, यानी सभी सरकारी संस्थाएँ मिलकर एआई गवर्नेंस को लागू करें। एक AI Governance Group (AIGG) बनाया जाएगा जो नीति और क्रियान्वयन की निगरानी करेगा।

इसके तहत एक Technology & Policy Expert Committee (TPEC) और एक तकनीकी निकाय AI Safety Institute (AISI) का गठन प्रस्तावित है। इसके साथ BIS, TEC, राज्य सरकारें और सेक्टोरल रेगुलेटर भी इस ढाँचे में भाग लेंगे।

कार्य योजना: लघु, मध्यम, दीर्घकालिक

भारत की नई AI गवर्नेंस गाइडलाइंस में एक स्पष्ट कार्ययोजना (Action Plan) दी गई है, जिसे तीन चरणों, लघु अवधि (Short-term), मध्यम अवधि (Medium-term) और दीर्घ अवधि (Long-term) – में बाँटा गया है।

लघु अवधि (Short-term) लक्ष्य: AI गवर्नेंस के लिए मुख्य संस्थान (Institutions) स्थापित किए जाएँ। भारत-विशिष्ट जोखिम ढाँचे (Risk Frameworks) तैयार किए जाएँ। उद्योग जगत से स्वैच्छिक प्रतिबद्धताएँ (Voluntary Commitments) ली जाएँ ताकि जिम्मेदार AI उपयोग बढ़े।

कानूनी संशोधन (Legal Amendments) के सुझाव दिए जाएँ और जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था (Liability Regime) स्पष्ट की जाए। कंप्यूटिंग और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुँच बढ़ाई जाए। जनजागरूकता अभियान चलाए जाएँ और AI सुरक्षा उपकरणों (AI Safety Tools) की पहुँच सभी तक सुनिश्चित की जाए।

मध्यम अवधि (Medium-term) लक्ष्य: साझा मानक (Common Standards) प्रकाशित किए जाएँ। संबंधित कानूनों व नियमों में संशोधन किए जाएँ। AI घटनाओं की रिपोर्टिंग प्रणाली (Incident Reporting System) को लागू किया जाए। रेगुलेटरी सैंडबॉक्स (Regulatory Sandbox) परियोजनाएँ शुरू की जाएँ।

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) में AI के एकीकरण को बढ़ाया जाए। क्षमता निर्माण (Capacity Building) और मानकीकरण कार्य लगातार जारी रखा जाए।

दीर्घ अवधि (Long-term) लक्ष्य: समय-समय पर गवर्नेंस फ्रेमवर्क की समीक्षा और अद्यतन (Review & Update) किया जाए ताकि यह टिकाऊ और प्रभावी बना रहे। उभरते जोखिमों और नई तकनीकों के अनुसार नए कानून तैयार किए जाएँ। भारत का डिजिटल इकोसिस्टम मजबूत, लचीला और अनुकूलनशील (Resilient & Adaptive) बना रहे, यह सुनिश्चित किया जाए।

हितधारकों के लिए व्यावहारिक दिशानिर्देश

दस्तावेज का चौथा भाग व्यावहारिक दिशा-निर्देश देता है, जिसमें उद्योग, डेवलपर, नियामक और नीति-निर्माताओं के लिए साफ-साफ सुझाव दिए गए हैं।

उद्योग, डेवलपर्स और AI लागू करने वाले संगठनों के लिए सुझाव: उन्हें मौजूदा भारतीय कानूनों का पालन करना होगा, साथ ही स्वैच्छिक सिद्धांतों और मानकों को अपनाने की सलाह दी गई है। कंपनियों को पारदर्शिता या ‘सेल्फ-असेसमेंट’ रिपोर्ट जारी करने, शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित करने और तकनीकी व कानूनी उपायों के जरिए जोखिम कम करने के निर्देश दिए गए हैं।

नियामकों (Regulators) के लिए सुझाव: नियामकों को नवाचार (innovation) को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ AI से होने वाले संभावित नुकसान या जोखिमों पर सक्रिय रूप से ध्यान देना चाहिए। दिशानिर्देशों में कहा गया है कि नियम इतने कठोर न हों कि वे नवाचार को रोक दें।

इसके बजाय, तकनीक और कानून के मिश्रित (techno-legal) दृष्टिकोण को अपनाने और समय-समय पर नीतियों की समीक्षा करने की सलाह दी गई है ताकि बदलती तकनीक के साथ तालमेल बना रहे।

गाइडलाइंस जारी करते हुए MeitY सचिव एस कृष्णन ने कहा कि भारत का उद्देश्य AI का इस्तेमाल नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए करना है, साथ ही इससे जुड़े खतरों और नुकसानों को भी संबोधित करना है।

उन्होंने जोर दिया कि जहाँ संभव हो, देश मौजूदा कानूनों का ही उपयोग करेगा और मानव-केंद्रित दृष्टिकोण (human-centric approach) को केंद्र में रखेगा। यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 की तैयारियाँ चल रही हैं, जो अगले वर्ष नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी।

BBC ने वामपंथी नैरेटिव गढ़ने के लिए ट्रंप के भाषण से की छेड़छाड़, 5 साल बाद करतूत खुली: जानिए कैसे गलती मानने से बच रहा ब्रिटिश मीडिया, हरकत देख उठी लाइसेंस रद्द की माँग

ब्रिटिश मीडिया संस्थान BBC News अब आए दिन सवालों के घेरे में रहता है। कारण है उसका अपना नैरेटिव, जिसे आगे बढ़ाने के लिए मीडिया संस्थान तथ्यों के साथ छेड़छाड़ कर भ्रमित कंटेन्ट लोगों तक पहुँचाने को भी तैयार है। ऐसा ही कुछ हाल ही में BBC ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भाषण के साथ किया है, जिसे वॉशिंगटन डीसी के कैपिटल हिल्स में दंगा भड़काने को उकसाते हुए पेश किया गया।

पहली नजर में BBC के पैनोरामा प्रोग्राम के इस संपादित वीडियो को देखने में लगता है कि डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के कैपिटल हिल्स में भड़काऊ भाषण दे रहे हैं, जिसमें वह कहते हैं, “हम कैपिटल हिल्स तक चलेंगे और मैं वहाँ तुम्हारे साथ रहूँगा। और हम लड़ेंगे, हम जी-जान से लड़ेंगे।” BBC के संपादित वीडियो में ट्रंप के भाषण को तोड़-मरोड़ कर दिखाया, जो दर्शकों को गुमराह कराने का मकसद है। जबकि वीडियो की असलियत कुछ और है।

BBC के एडिटेड वीडियो कैसे हुए खुलासा?

खुद को निष्पक्ष बताने वाले BBC ने अपने संपादित वीडियो दिखाकर कैपिटल हिल्स में हुए दंगो की एकतरफा सच्चाई दिखाने की कोशिश की है। असलियत में यह वीडियो को BBC ने अपने नैरेटिव के मुताबिक एडिट किया है, जिसका सच अब दुनिया के सामने है। इसका खुलासा BBC में कथित पक्षपात पर 19 पन्नों के डोजियर में हुआ है, जिसे अक्टूबर 2025 में BBC के संपादकीय गाइडलाइंस एवं मानक समिति के पूर्व एक्सटर्नल एडवाइजर माइकल प्रेस्कॉट ने लिखा था। हाल ही में नवंबर 2025 में इस डोजियर को BBC बोर्ड को सबमिट किया गया है।

इस डोजियर में कहा गया है कि BBC के पैनोरामा प्रोग्राम में अमेरिकी राष्ट्रपति से ऐसी बातें कहलवाई गईं जो उन्होंने वास्तव में कभी नहीं कहीं। इसमें ट्रंप के भाषण की शुरुआत के फुटेज को उनके द्वारा लगभग एक घंटे बाद कही गई बातों के साथ जोड़ दिया गया है। डोजियर में कहा गया कि BBC के वरिष्ठ अधिकारियों और अध्यक्ष ने संस्था के अपने मानक निगरानी अधिकारी (Watchdog) द्वारा उठाई गई कई गंभीर शिकायतों को नजरअंदाज कर इसे खारिज कर दिया।

BBC के एडिटेड वीडियो पर अमेरिका से निकालने की धमकी?

अब दुनिया के सामने सच आने के बाद BBC की खूब आलोचना हुई। जिस निष्पक्षता का नैरिटिव बनाकर मीडिया संस्थान ने एडिटेड वीडियो चलाया, अब उसपर पक्षपात के आरोप लगे। यहाँ तक कि BBC को ‘फर्जी खबरें’ फैलाने वाला मीडिया संस्थान बताते हुए अमेरिका से बाहर निकालने की भी माँगे उठीं।

खुद अमेरिकी राष्ट्रपति के बड़े बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर ने भी BBC के एडिटेड वीडियो के जरिए फर्जी सूचना फैलाने पर गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “ब्रिटेन में फर्जी समाचार ‘रिपोर्टर’ उतने ही बेईमान और बकवास से भरे हुए हैं, जितने यहाँ अमेरिका में हैं!!”

अमेरिका के कई मीडिया संस्थान ने भी BBC के एडिटेड वीडियो पर सवाल खड़े किए। यहाँ तक कि BBC को अमेरिका में रद्द करने की भी माँगे उठीं। अमरिकी मीडिया संस्थान GB News से जुड़े लियो हैरिस ने इसे ‘पागलपन’ कहते हुए लिखा, “BBC के ट्रंप-विरोधी वामपंथियों ने अमेरिकी चुनाव से एक हफ्ते पहले यह कार्यक्रम प्रसारित किया। लाइसेंस शुल्क रद्द करो।”

कोलिन वॉल्टर्स नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा, “मैं राष्ट्रपति ट्रंप से आग्रह करता हूँ कि वे BBC को अमेरिका से बाहर निकाल दें और उन पर मुकदमा चलाएँ।”

क्या है BBC के एडिटेड वीडियो की असलियत?

BBC की यह वीडियो मीडिया संस्थान के पक्षपात नैरेटिव को दर्शाता है। कैपिटल हिल्स पर ट्रंप के भाषण को तोड़-मरोड़कर पेश करने से BBC ने अपने नैरेटिव को आगे बढ़ाने की कोशिश की है। जबकि वीडियो की असलित कुछ और है। इस एडिटेड वीडियो की The Telegraph ने BBC के ही मुखबिर के हवाले से सबसे पहले पोल खोली है।

The Telegraph के अनुसार, BBC ने वीडियो में जो ट्रंप का भाषण दिखाया है, वह साल 2021 में हुए अमेरिकी चुनावों का है। BBC के एडिटेड वीडियो के नजरिए से देखें तो डोनाल्ड ट्रंप का कैपिटल हिल्स में हुए दंगों को भड़काने में हाथ है। जबकि असलियत में यह वीडियो ट्रंप के भाषण के दो हिस्सा का जुड़ाव है।

भाषण में डोनाल्ड ट्रंप पहले कहते हैं, “हम कैपिटल हिल्स तक चलेंगे और मैं वहाँ तुम्हारे साथ रहूँगा।” इसी भाषण में 54 मिनट बाद ट्रंप ने कहा, “और हम लड़ेंगे, हम जी-जान से लड़ेंगे।” एक ही समय पर दिए गए ट्रंप के इस भाषण के बीच के अंतराल को जोड़ दिया गया है, जिससे इस बयान को भडकाऊ का रूप दे दिया गया है।

असल में ट्रंप ने कहा था, “हम कैपिटल तक पैदल चलेंगे। और हम अपने बहादुर सीनेटरों, कॉन्ग्रेसियों और महिलाओं का उत्साहवर्धन करेंगे।” The Telegraph अपनी रिपोर्ट में लिखता है, “अमेरिकी चुनाव से एक सप्ताह पहले प्रसारित पैनोरमा कार्यक्रम में दर्शकों को ‘पूरी तरह से गुमराह’ किया गया।”

करतूत पर BBC ने क्या दी प्रतिक्रिया?

दुनिया के सामने BBC के एडिटेड वीडियो का सच उजागर होने के बाद मीडिया संस्थान ने प्रतिक्रिया दी। काफी हल्के शब्दों में संस्थान के बोर्ड सदस्यों ने मामले पर जाँच करने की बात कही। इस संबंध ने BBC ने एक लंबे-चौड़े आर्टकल में एडिटेड वीडियो की हिस्ट्री से लेकर जियोग्राफी तक बता दी। लेकिन न तो माफी माँगी और न ही वीडियो को डिलीट करने जैसे कोई आदेश दिए।

रिपोर्ट में BBC का एक प्रवक्ता कहता है, “हम लीक हुए दस्तावेजों पर टिप्पणी नहीं करते लेकिन जब BBC को फीडबैक मिलता है तो वह उसे गंभीरता से लेता है और उस पर सावधानीपूर्वक विचार करता है।” यहाँ BBC के पक्षपात वाले 19 पन्नों के डोजियर की बात की जा रही है, जिसके लीक होने से BBC के ‘फर्जीवाड़े’ का खुलासा हुआ।

BBC का ‘एथिकल जर्नलिज्म’ की आड़ में पक्षपात

इस घटना से BBC ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि ‘फेक न्यूज़’ फैलाने में उसकी कोई बराबरी नहीं। जो संस्था खुद को निष्पक्ष और विश्वसनीय बताने का दावा करती है, वही अपने एजेंडे के लिए सच्चाई को मरोड़ने से भी नहीं हिचकती। ट्रंप के भाषण को इस तरह तोड़-मरोड़कर पेश करना सिर्फ एक ‘एडिटिंग मिस्टेक’ नहीं बल्कि एक सुनियोजित नैरेटिव का हिस्सा है।

माइकल प्रेस्कॉट के 19 पन्नों वाले डोजियर ने BBC की पोल खोलकर रख दी है। BBC की ‘एथिकल जर्नलिज़्म’ की आड़ में पक्षपात, झूठ और प्रोपेगेंडा का जो जाल बुना गया है, वह अब दुनिया के सामने उजागर हो चुका है। लेकिन सबसे शर्मनाक बात यह है कि BBC ने न तो माफी माँगी, न ही किसी जिम्मेदारी का एहसास दिखाया। उल्टा ‘हम फीडबैक को गंभीरता से लेते हैं’ जैसी रटी-रटाई लाइन बोलकर खुद को बचाने की कोशिश की।

साफ है कि BBC अब पत्रकारिता नहीं, एजेंडा चलाने वाली संस्था बन चुकी है। जो दूसरों को फेक न्यूज फैलाने का पाठ पढ़ाती थी। आज वही अपने झूठ में बुरी तरह फँस गई है। जनता अब समझ चुकी है, ‘BBC के लिए अब एजेंडा ही असली धर्म है।’

खेसारी लाल यादव की मार्केट क्यों हो गई खराब? छपरा में RJD का बुरा हाल

बिहार चुनाव की सरगर्मी में छपरा पहुँची ऑपइंडिया टीम ने पाया कि भोजपुरी सुपरस्टार खेसारी लाल यादव की चमक फीकी पड़ गई है। RJD ने उन्हें टिकट दिया, लेकिन लोग कहते हैं, “ये तो पैराशूट से उतरे हैं, छपरा को जानते तक नहीं।”

एक दुकानदार बोले, “जंगलराज को अच्छा बता रहे हैं, लालू के समय की लूट-मार भूल गए क्या?” खेसारी के पुराने फैन भी नाराज हैं। एक युवक ने कहा, “फिल्मों में हीरो थे, अब वोट माँगने आए तो जंगलराज का बचाव कर रहे। सेलिब्रिटी स्टेटस सिर्फ रीलों तक था, रियल में फेल रहेगा सब।”

इस दौरान महिलाओं ने कहा कि खेसारी की बातों से आम जनता की बातें गायब है, वो सिर्फ स्टारडम बेच रहे। अनुराग मिश्रा की ग्राउंड रिपोर्ट में साफ है – छपरा में खेसारी की मार्केट डाउन होने से RJD को नुकसान पहुँच रहा है।

देखें छपरा से ग्राउंड रिपोर्ट

सिवान का ‘मसीहा’ या माफिया? शहाबुद्दीन की मौत के बाद भी जिंदा है डर

बिहार के सिवान में लालू यादव के जंगलराज के दौर में RJD के बाहुबली शहाबुद्दीन का खौफ इतना था कि लोग दिनदहाड़े काँपते थे। 2021 में कोविड से मौत के बाद भी उनके मुस्लिम समर्थक उन्हें गरीबों का मसीहा और देश का रक्षक बताते नहीं थकते। ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि प्रतापपुर गाँव में शहाबुद्दीन के घर के बाहर समर्थक जुटते हैं और उसके अपराधों को भूलकर तारीफ करते हैं।

एक समर्थक ने कहा, “साहेब ने गरीबों के लिए स्कूल-हॉस्पिटल बनवाए, ऊँची जातियों के गुंडों से मुस्लिमों को बचाया। वो देश के मसीहा थे।” जबकि हकीकत ये है कि शहाबुद्दीन पर हत्या, फिरौती, तेजाब डालने जैसे दर्जनों केस थे। उनके गुर्गों ने चंदा बाबू के बेटों को तेजाब से नहलाया था।

रिपोर्टर अनुराग मिश्रा से बातचीत में युवकों ने ओसामा (शहाबुद्दीन का बेटा) की जीत के लिए धमकी भरे अंदाज में कहा, “पोस्टर फाड़ने वालों को जिंदा जला देंगे।” आम लोग डरते हैं कि जंगलराज लौट रहा है, लेकिन समर्थक गुनाहों पर सफेदी पोत रहे हैं।

देखें ग्राउंड रिपोर्ट

भागलपुर में ‘I Love Muhammad’ पोस्टर विवाद: ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट के बाद पुलिस ने कार्रवाई कर मोहम्मद इफ्तेखाल को किया गिरफ्तार, हिंदुओं को निशाना बनाकर की गई थी हिंसा

बिहार के भागलपुर के हबीबपुर इलाके में ‘I Love Muhammad’ पोस्टर को लेकर भड़की सांप्रदायिक हिंसा के कुछ दिनों बाद पुलिस ने मुख्य आरोपित मोहम्मद इफ्तेखाल उर्फ शेखू को गिरफ्तार कर लिया है। शेखू, मोहम्मद कासिम का बेटा है और हबीबपुर थाना क्षेत्र के चामलीचक मोहल्ले का रहने वाला है।

यह गिरफ्तारी हबीबपुर थाने में दर्ज केस नंबर 188/25 के तहत की गई है, जो 22 अक्टूबर 2025 को दर्ज हुआ था। इस केस में भारतीय दंड संहिता की कई धाराएँ लगाई गई हैं, जिनमें 191(2)(3), 190, 126(2), 115(2), 109, 329(4), 324(4)(5), 299, 351(2)(3) और 352 शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार, 20 और 21 अक्टूबर 2025 को स्टेशन रोड इलाके में एक दुकान पर जबरन ‘I Love Muhammad’ लिखा पोस्टर चिपकाने को लेकर विवाद बढ़ गया था। इस पोस्टर को लेकर स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई थी, जिसके बाद हिंसा भड़क उठी। पुलिस ने पहले ही इस मामले में तीन अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था।

घटना के बाद DSP (टाउन) के नेतृत्व में एक विशेष जाँच टीम बनाई गई, जिसमें थानाध्यक्षों और सर्किल इंस्पेक्टरों को शामिल किया गया। इस टीम ने कई जगहों पर छापेमारी की और संदिग्धों से पूछताछ की। जाँच में पता चला कि इलाके में मजहबी नारों और संदेशों के जरिए माहौल को सांप्रदायिक बनाने की कोशिश की गई थी।

हबीबपुर, जहाँ मुस्लिम आबादी अधिक है, वहाँ हिंसा के दौरान हिंदू परिवारों और व्यापारियों को निशाना बनाए जाने की शिकायतें सामने आईं। कई दुकानदारों ने बताया कि उन्हें दुकानें बंद करने और कुछ मजहबी नारे लगाने के लिए मजबूर किया गया, ताकि उन पर हमला न हो।

फिलहाल इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और लगातार गश्त की जा रही है, ताकि दोबारा तनाव न बढ़े। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हालात अब नियंत्रण में हैं, लेकिन जाँच जारी है और आगे और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।

भागलपुर पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि किसी भी अफवाह या भड़काऊ संदेश पर विश्वास न करें, खासकर सोशल मीडिया पर फैल रही गलत सूचनाओं से बचें।

भागलपुर से ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट

भागलपुर के हबीबपुर इलाके में भड़की हिंसा के पीछे डर, अकेलेपन और लगातार हो रहे उत्पीड़न की दर्दनाक कहानी छिपी है। ऑपइंडिया की टीम जब घटनास्थल पर पहुँची, तो उन्हें एक ऐसे हिंदू परिवार की व्यथा सुनने को मिली जो अब मुस्लिम बहुल इलाके में लगभग अकेला रह गया है।

परिवार की मुखिया गौरी देवी ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि उनका परिवार पीढ़ियों से यहीं रह रहा है, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि उन्हें बार-बार घर बेचकर जाने की धमकियाँ दी जाती हैं। उन्होंने कहा, “हम तो यहीं के हैं, लेकिन 2013 से लगातार कहा जा रहा है कि घर बेच दो, यहाँ हिंदुओं की जगह नहीं है।”

गौरी देवी ने बताया कि साल 2022 में जब वे पूजा के लिए बाहर गई थीं, तब उनके घर पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई। करीब 9 लाख की संपत्ति जलकर खाक हो गई। उन्होंने कहा, “जब हमने घर फिर से बनाना शुरू किया, तो उन्होंने 10,000 या 20,000 रुपए माँगे, सिर्फ इसलिए कि हम दीवार खड़ी कर सकें। पैसे देने के बाद भी हम पर हमला करते रहे।”

उनकी बहू, जो सदमे में थी, उन्होंने बताया कि काली पूजा के दौरान जब उन्होंने काली माँ का बैनर लगाया, तो कुछ लोगों ने उसे फाड़ दिया और कहा, “यहाँ कोई हिंदू त्योहार नहीं मनाया जाएगा।”

उन्होंने बताया, “जब हमने विरोध किया, तो उन्होंने हमारे घर पर पत्थर फेंके। मेरी चाची के दाँत भी टूट गए।” यह कहानी हबीबपुर में एक हिंदू परिवार के उस संघर्ष को दिखाती है जो अपने ही घर में डर और असुरक्षा के साये में जीने को मजबूर है।

‘हम कैदियों की तरह रहते हैं’: हबीबपुर के साए में जीवन

हबीबपुर में गौरी देवी और उनका परिवार अब एक किले में रहने जैसी जिंदगी जी रहा है। उनका घर अब एक मजबूत चौकी की तरह बन गया है, चारों ओर सीसीटीवी कैमरे, लोहे के गेट और ऊँची दीवारें। गौरी देवी के बेटे ने बताया, “हमने अपने घर को किला बना लिया है। हर रात डर के साए में सोते हैं, बाहर जरा सी आवाज आती है तो दिल की धड़कन तेज हो जाती है।”

घर के पीछे बने एक छोटे से तहखाने की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “अगर भीड़ जुटती है तो हम वहीं छिप जाते हैं। ये कोई आराम की जगह नहीं, बल्कि बचने की जगह है।”

उनका पुराना ढाबा, जो कभी सांप्रदायिक सह-अस्तित्व का प्रतीक था, अब बंद पड़ा है। गौरी देवी ने उदास होकर कहा, “उन्होंने धमकी दी, अगर फिर से खाना बेचा तो गोली मार देंगे। अब तो लोगों को खिलाना भी पाप हो गया है, सिर्फ इसलिए कि हम हिंदू हैं।”

हबीबपुर की गलियाँ तंग हैं और ज्यादातर इलाका मुस्लिम बहुल है। चारों ओर मस्जिदें और मजारें हैं और लगभग हर छत पर इस्लामिक झंडे लहराते हैं। ऐसे माहौल में जब कोई हिंदू घर दीवाली पर दीये जलाता है या काली पूजा की सजावट करता है, तो वो जैसे विरोध का प्रतीक बन जाता है।

गौरी देवी ने बताया, “जब हम अपने त्योहार मनाते हैं, तो हमें चिढ़ाते हैं। बच्चे पटाखे जलाते हैं तो वे छीन लेते हैं और कहते हैं, ‘तुम हिंदू बहुत हिम्मती हो गए हो।’ लेकिन ये हमारा घर है, हम क्यों छोड़ें?”

अक्टूबर 2025 में ‘I Love Muhammad’ पोस्टर के विवाद के बाद डर और बढ़ गया। उस रात तनाव के बीच एक भीड़ ने उनके घर पर पथराव किया। तब से यह परिवार लगातार भय में जी रहा है, चारों ओर धर्म के प्रतीक हैं, लेकिन उन्हें अपने धर्म का पालन करने की आजादी नहीं।

यह रिपोर्ट मूल रुप से अंग्रेजी में लिखी गई है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

राहुल गाँधी के ‘वोट चोरी’ प्रोपेगेंडा का निकला दम, जिन पोस्टल बैलट पर मचाया जोर उसका EC के डाटा से जानिए सच: हवा में तीर चला रहे नेता प्रतिपक्ष

राहुल गाँधी ने बुधवार (5 नवंबर 2025) को दावा किया कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में जिन सीटों पर पोस्टल बैलट में कॉन्ग्रेस आगे थी, वहाँ वोट चोरी हुई क्योंकि फाइनल रिजल्ट में हार गए। उनका कहना था कि पोस्टल बैलट काउंटिंग में कॉन्ग्रेस कुछ सीटों पर बीजेपी से आगे थी, लेकिन ईवीएम वोटिंग के बाद बीजेपी जीत गई। अगर उनका दावा सही होता तो हर सीट पर यही होता। लेकिन सच इससे बहुत दूर है।

ऑपइंडिया ने हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 के सभी सीटों के फाइनल रिजल्ट चेक किए और पाया कि चार सीटें ऐसी थीं जहाँ बीजेपी पोस्टल बैलट में आगे थी लेकिन फाइनल में कॉन्ग्रेस से हार गई।

चुनाव आयोग की वेबसाइट के डेटा के मुताबिक जुलाना, हाथिन, नाँगल चौधरी और आदमपुर में बीजेपी पोस्टल बैलट में कॉन्ग्रेस से आगे थी। लेकिन अंत में पार्टी कॉन्ग्रेस से हार गई।

चुनाव आयोग द्वारा जारी डाटा का स्क्रीनशॉट

राहुल गाँधी के दावों पर विचार करते हुए सिर्फ वो उदाहरण चुनना जहाँ कॉन्ग्रेस पोस्टल बैलट में आगे थी और जहाँ पीछे थी उन्हें नजरअंदाज करना… जैसा राहुल गाँधी ने किया। यह दिखाता है कि पोस्टल बैलट फाइनल रिजल्ट एनालिसिस के लिए भरोसेमंद आधार नहीं हैं।

फाइनल रिजल्ट एनालिसिस के लिए भरोसेमंद आधार नहीं पोस्टल बैलट

अब जब राहुल गाँधी के दावे गलत साबित हो गए हैं, तो समझना जरूरी है कि पोस्टल बैलट को फाइनल रिजल्ट एनालिसिस का आधार क्यों नहीं बनाया जा सकता। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, “दूसरी हैरान करने वाली बात यह थी कि हरियाणा में पहली बार पोस्टल वोट रिजल्ट से अलग थे। पोस्टल बैलट में कॉन्ग्रेस को 73 सीटें मिलीं जबकि बीजेपी को 17 सीटें।”

सबसे पहले ज्यादातर विधानसभा क्षेत्रों में पोस्टल बैलट की संख्या कुल वोटों की तुलना में बहुत कम होती है। ज्यादातर मामलों में यह 1% से भी कम होती है। इसलिए कुल रिजल्ट पर इनका कोई खास असर नहीं पड़ता जब तक जीत-हार का अंतर बहुत कम न हो।

उदाहरण के लिए गुहला सीट पर कुल पोस्टल बैलट 589 थे, जबकि ईवीएम वोट 1,33,287 थे, यानी पोस्टल बैलट सिर्फ 0.44% थे। कॉन्ग्रेस के देवेंद्र हंस ने 22,880 वोटों के अंतर से बीजेपी के कुलवंत राम बाजीगर को हराया। ऐसे सीटों पर पोस्टल बैलट का बड़ा रोल बताना बेवकूफी होगी।

उदाहरण के लिए गुहला सीट पर कुल पोस्टल बैलट 589 थे, जबकि ईवीएम वोट 1,33,287 थे, यानी पोस्टल बैलट सिर्फ 0.44% थे। कॉन्ग्रेस के देवेंद्र हंस ने 22,880 वोटों के अंतर से बीजेपी के कुलवंत राम बाजीगर को हराया। ऐसे सीटों पर पोस्टल बैलट का बड़ा रोल बताना बेवकूफी होगी।

तीसरे पोस्टल बैलट पहले गिने जाते हैं, लेकिन ये ग्राउंड लेवल वोटर टर्नआउट पैटर्न या बूथों पर देर से होने वाले उछाल को नहीं दिखाते जहाँ लोकल फैक्टर बहुत असर डालते हैं।

‘वोट चोरी’ की कहानी फर्जी

इन उदाहरणों और पोस्टल बैलट की प्रकृति को नजरअंदाज न करें। जिसमें राहुल गाँधी की ‘वोट चोरी’ कहानी सिर्फ कहानी ही लगेगी, न कि फैक्ट बेस्ड। वही डेटा पॉइंट्स जिनका वे जिक्र करते हैं, आसानी से उल्टा साबित करने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जिससे उनका तर्क आँकड़ों के आधार पर भी खोखला हो जाता है।

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रेप और ड्रग्स केस में घिरे रैपर को केरल सरकार ने किया सम्मानित, प्रकाश राज थे ज्यूरी के चीफ: बचाव पर भड़के आम लोग

केरल राज्य फिल्म पुरस्कारों की 55वीं घोषणा सोमवार (3 नवंबर 2025) को हुई, जिसमें रैपर हीरंदास मुरली ‘वेदन’ को सर्वश्रेष्ठ गीतकार (Best Lyricist) का पुरस्कार दिया गया। इस फैसले का सोशल मीडिया पर विरोध तेज हो गया है।

इस पुरस्कार का चयन जिस ज्यूरी ने किया, उसकी अध्यक्षता विवादित और हिंदू-विरोधी बयानों के लिए चर्चित अभिनेता प्रकाश राज ने की। वेदन को यह सम्मान फिल्म ‘मंजुम्मेल बॉयज’ के गीत ‘कुथंत्रम’ के लिए मिला है।

लेकिन उस पर बलात्कार और यौन शोषण के कई गंभीर आरोप हैं। मेडिकल छात्रा रही पीड़िता ने आरोप लगाया कि वेदन ने वित्तीय शोषण किया और कोच्चि व कोझिकोड में उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया।

इन आरोपों के चलते अब लोगों ने पुरस्कार की नैतिकता और वैधता पर सवाल उठाए हैं, खासकर इसलिए क्योंकि पहले ऐसे मामलों में आरोपित कलाकारों को चयन प्रक्रिया से बाहर रखा जाता था।

प्रकाश राज ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि समिति वेदन के गीतों में झलकती ऊर्जा और संघर्ष को अनदेखा नहीं कर सकती थी। उन्होंने कहा, “वेदन का संगीत आज की पीढ़ी की आवाज है। रैप विद्रोह और जज़्बे की आधुनिक अभिव्यक्ति है और उसे पहचान मिलनी चाहिए।”

इस बार की ज्यूरी में निर्देशक रंजन प्रमोद, जिबू जैकब, स्क्रीनराइटर संतोष एचिक्कनम, साउंड डिजाइनर नितिन लूकोस, प्लेबैक सिंगर गायत्री अशोकन और एक्ट्रेस व डबिंग आर्टिस्ट भाग्यलक्ष्मी शामिल थीं।

इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। कई यूजर्स ने राज्य सरकार और प्रकाश राज दोनों पर सवाल उठाते हुए नाराजगी जताई। लोगों ने पूछा कि जब राज्य की नीति के अनुसार किसी भी आपराधिक आरोप वाले व्यक्ति को पुरस्कार की दौड़ से बाहर रखा जाता है, तो फिर वेदन को नामांकित ही क्यों किया गया? नेटिजन्स ने इस निर्णय को पक्षपाती और अनैतिक बताते हुए कहा कि इससे पुरस्कारों की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है।

एक अन्य यूजर ने राज्य सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वेदन को कोर्ट के फैसले से पहले ही सम्मान देना गलत संदेश देता है। उसने यह भी पूछा कि इस मामले में महिला अधिकारों की बात करने वाली फेमिनिस्ट कार्यकर्ता चुप क्यों हैं। यूजर का कहना था कि सरकार का यह कदम न्याय प्रक्रिया और महिलाओं की सुरक्षा के प्रति लापरवाही दर्शाता है।

एक यूजर ने दोहरा मापदंड (हिपोक्रेसी) पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मलयालम फिल्म इंडस्ट्री की कई महिलाओं ने यौन शोषण के आरोपी वैरामुथु को सम्मान देने का विरोध किया था, तो फिर अब वेदन को पुरस्कार देने पर किसी ने प्रकाश राज से सवाल क्यों नहीं किया। यूजर ने कहा कि दोनों पर समान आरोप हैं, लेकिन इस बार सब चुप हैं, जो स्पष्ट पक्षपात दिखाता है।

एक व्यक्ति ने कहा कि कई महिलाओं के यौन शोषण से जुड़े आपराधिक मामले लंबित होने के बावजूद वेदान को सम्मान देना एक खतरनाक उदाहरण है। उसने नाराज़गी जताते हुए लिखा, “केरल सरकार को शर्म आनी चाहिए।”

एक यूजर ने लिखा कि रेप और एमडीएमए रखने के आरोप में हाल ही में गिरफ्तार रैपर वेदान को सर्वश्रेष्ठ गीतकार का पुरस्कार मिला, जबकि हिजाब पहनने वाली मुस्लिम अभिनेत्री को अपनी पहली फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का सम्मान दिया गया। यूजर ने आरोप लगाया कि इन पुरस्कारों में प्रतिभा से ज्यादा वामपंथी राजनीति का असर दिख रहा है।

कॉन्ग्रेस सांसद हिबी ईडन ने खुलकर रैपर वेदान का समर्थन किया, जबकि कई लोगों ने इस पर कड़ी नाराजगी और असहमति जताई। उनका कहना था कि यह फैसला समाज को गलत संदेश देता है। साथ ही, महिला संगठनों और फेमिनिस्ट समूहों पर भी आरोप लगाया गया कि वे इस मुद्दे पर जानबूझकर चुप्पी साधे हुए हैं।

वेदान का विवादास्पद इतिहास गंभीर आरोपों से जुड़ा है

पुलिस शिकायत के अनुसार, एक महिला ने रैपर वेदन पर 2021 से 2023 के बीच शादी का झांसा देकर यौन शोषण करने का आरोप लगाया। कोच्चि पुलिस ने बताया, “विशेष पूछताछ के बाद उसकी गिरफ्तारी दर्ज की गई है। हमारे पास डिजिटल सबूत भी हैं जो आरोपों की पुष्टि करते हैं।”

मामला एक महिला डॉक्टर की शिकायत से शुरू हुआ, जिसने कहा कि वेदन ने दोस्ती का नाटक किया, संबंध बनाए और फिर दो साल में पाँच बार शादी का वादा करके उसका यौन शोषण किया। उसने यह भी बताया कि वेदान ने गीत रिलीज करने के नाम पर उससे पैसे भी लिए।

वेदन कई हफ्तों तक पुलिस से बचता रहा, जिसके बाद देश छोड़ने से रोकने के लिए लुकआउट नोटिस जारी किया गया। उसके खिलाफ दो और महिलाओं ने भी ऐसे ही आरोप लगाए।

पहली महिला ने बताया कि वह संगीत पर शोध के दौरान वेदान से मिली थी, जिसने होटल में उसके साथ गलत हरकत की, जिससे वह मानसिक आघात के कारण अपना काम छोड़ने को मजबूर हुई। दूसरी महिला ने कहा कि वह अपने दोस्त के घर वेदान से मिली थी और उसके संगीत व राजनीतिक विचारों से प्रभावित होकर करीब आई, लेकिन बाद में वेदन ने कई बार उसका यौन शोषण किया।

इन सभी शिकायतों की कॉपी मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को ईमेल के जरिए भेजी गई। आरोपों के अनुसार, पहली घटना 2020 में और दूसरी 2021 में हुई थी। इसके अलावा, अप्रैल 2025 में वेदान को कोच्चि के वायटिला इलाके से गांजा रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। हिल पैलेस पुलिस की छापेमारी में लगभग 6 ग्राम गांजा बरामद हुआ।

पुलिस ने बताया कि वेदन ने ड्रग्स लेने की बात कबूल की है और मामूली मात्रा होने के कारण उसे स्टेशन बेल पर छोड़ा गया। सितंबर में पुलिस ने चार्जशीट अदालत में दाखिल की। एर्नाकुलम वन विभाग ने भी उसे बाघ के दाँत का लॉकेट पहनने के मामले में पकड़ा, जिसके लिए उसे दो दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया और कोडनाड मलयाटूर डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिस में पूछताछ की गई।

इसके अलावा, पलक्काड नगर परिषद की सदस्य वी एस मिनीमोल ने उस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपमान करने और जातीय भेदभाव फैलाने के आरोप में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने कहा, “वेदन ने प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक और असत्य बयान दिए हैं, जो देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुँचाते हैं।”

वेदन ने 2020 में अपना करियर ‘वॉइस ऑफ द वॉइसलेस’ एल्बम से शुरू किया था और वह एंटी-कास्ट (जातिवाद विरोधी) रैप्स के लिए जाना गया। उसने कई स्वतंत्र गाने और फिल्मी गीत बनाए।

दिलचस्प बात यह है कि पुरस्कारों की घोषणा कुछ ही दिन बाद हुई, जब केरल हाईकोर्ट ने उसकी अग्रिम जमानत की शर्तें ढीली कीं, जिससे उसे विदेश में प्रदर्शन की अनुमति मिल गई। थ्रिक्कक्कारा पुलिस ने इस मामले में अंतिम रिपोर्ट भी जमा कर दी है। गौरतलब है कि हाल के समय में मलयालम फिल्म इंडस्ट्री (मॉलीवुड) में बलात्कार और यौन शोषण के गंभीर आरोपों ने पूरे उद्योग को हिला कर रख दिया है।

(यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में रुक्मा राठौर ने लिखी है जिसको पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करे)