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अहमदाबाद में बनाए जा रहे 10 नए स्टेडियम, 650 एकड़ में सरदार वल्लभभाई पटेल स्पोर्ट्स एन्क्लेव: कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 के साथ ओलंपिक 2036 पर नजर

कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 अब अहमदाबाद में होने लगभग तय हैं, केवल औपचारिकताएँ बाकी हैं। इन खेलों के लिए भारत के अलावा नाइजीरिया ने भी बोली लगाई थी। लेकिन 15 अक्टूबर 2025 को हुई राष्ट्रमंडल कार्यकारी बोर्ड की बैठक में अहमदाबाद के नाम पर मुहर लगी। नवंबर 2025 में ग्लासगो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में अहमदाबाद की औपचारिक तौर पर घोषणा की जाएगी।

ओलंपिक एसोसिएशन ऑफ इंडिया की अध्यक्ष पीटी उषा ने इस पर खुशी जताते हुए कहा कि भारत के लिए यह गर्व की बात है कि उसे इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन की मेजबानी का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि ये खेल भारत की आयोजन क्षमता दिखाएँगे और 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने की दिशा में भी योगदान देंगे।

पीटी उषा ने आगे कहा कि ये खेल युवाओं को प्रेरित करेंगे, भारत की दूसरे देशों से दोस्ती मजबूत करेंगे और कॉमनवेल्थ देशों के साथ हमारे अच्छे भविष्य को आगे बढ़ाएँगे।

दरअसल, कॉमनवेल्थ गेम्स अहमदाबाद में आयोजित होने की चर्चा लंबे समय से जारी है। गुजरात सरकार भी इसमे सक्रिय रूप से रूचि दिखा रही है। केंद्र और राज्य सरकार दोनों मिलकर अहमदाबाद को एक खेल हब बनाने पर काम कर रही हैं और यहाँ खेलों के लिए ढाँचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) तैयार किया जा रहा है।

अहमदाबाद में खेल हब का विकास किस प्रकार किया जा रहा है?

इसी कड़ी में अहमदाबाद में दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम, नरेंद मोदी स्टेडियम बनाया गया है। इसकी क्षमता एक लाख से ज्यादा दर्शकों की है। इसके अलावा अहमदाबाद में 650 एकड़ में सरदार वल्लभभाई पटेल स्पोर्ट्स एन्क्लेव भी तैयार किया जा रहा है, जो स्टेडियम का ही हिस्सा है।

निर्माणाधीन इस खेल परिसर में कुल 10 नए स्टेडियम बनाए जा रहे हैं, जहाँ जिमनास्टिक, स्केटबोर्डिंग, सॉफ्टबॉल, टेनिस जैसे खेलों के लिए स्थायी और अस्थायी सुविधाएँ होंगी। इन सभी प्रोजेक्ट्स का काम गुजरात स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड कर रही है। यहाँ एक फुटबॉल स्टेडियम, एथलीट विलेज और होटल भी बनाने की तैयारी है। इस एथलीट विलेज में तीन हजार खिलाड़ियों के रहने की सुविधा होगी।

इसके अलावा, हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह ने नारनपुरा में वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का भी उद्घाटन किया। आधुनिक सुविधाओं से लैस इस स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में कई खेलों के लिए आयोजन स्थल भी उपलब्ध होंगे। इस कॉम्पलेक्स को कॉमनवेल्थ गेम्स के मानकों के अनुसार डिजाइन किया गया है। इसमें 20 से ज्यादा खेलों को शामिल किया जाएगा। इस कॉम्पलेक्स पर सरकार ने ₹824 करोड़ खर्च किए हैं।

खेलों के साथ-साथ यातायात सुविधाओं को भी बेहतर किया जा रहा है। अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन 2030 तक शुरू हो जाएगी। सरखेज-गांधीनगर हाईवे पर भी एक बड़ा स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की योजना है।

साथ ही, साबरमती रिवरफ्रंट का पुनर्विकास किया जा रहा है, जहाँ वॉटर स्पोर्ट्स के लिए भी सुविधाएँ तैयार की जा रही हैं। इस तरह अहमदाबाद को एक विश्वस्तरीय खेल शहर बनाने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है ताकि 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स को सफल और यादगार बनाया जा सके।

भारत अपनी ओलंपिक दावेदारी को कैसे मजबूत करेगा?

ये सारी तयारियाँ 2036 ओलंपिक के लिए है, जिसकी मेजबानी के लिए भारत सरकार लगातार काम कर रही है। लेकिन ओलंपिक जैसे विश्वस्तरीय खेल आयोजन से पहले, कुछ अन्य अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों को सफलतापूर्वक आयोजित करना बेहद जरूरी होता है। इसी उद्देश्य से भारत ने 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी के लिए भी पूरी तैयारी और गंभीरता दिखाई है।

कॉमनवेल्थ गेम्स भारत के लिए एक बड़ा मौका होंगे, जहाँ वह दुनिया को यह दिखा सकेगा कि उसके पास विश्वस्तरीय खेल बुनियादी ढाँचा, मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और संगठित खेल व्यवस्था मौजूद है। यह आयोजन भारत को एक जिम्मेदार, आधुनिक और खेलों के लिए तैयार राष्ट्र के रूप में पेश करने में मदद करेगा।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि जब भारत ने 2010 में पहली बार दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेज़बानी की थी तब कई घोटाले और वित्तीय अनियमितताएँ सामने आई थीं, जिससे देश की छवि को नुकसान पहुँचा था। उसके बाद भारत में कोई बड़ा खेल आयोजन नहीं हुआ। अब मोदी सरकार और गुजरात सरकार इस छवि को सुधारने और भारत को खेलों की दुनिया में एक नई पहचान दिलाने की दिशा में काम कर रही हैं।

साल 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले अहमदाबाद में कई अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन होंगे। साल 2025 में यहाँ कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप और एशियाई तैराकी चैंपियनशिप का आयोजन होगा। 2027 में महिला वॉलीबॉल वर्ल्ड चैंपियनशिप, 2028 में विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप और 2029 में विश्व पुलिस और अग्निशमन खेल (World Police and Fire Games) भी अहमदाबाद में ही आयोजित किए जाएँगे। ये सभी आयोजन भारत की मेज़बानी क्षमता को दुनिया के सामने दिखाने का अवसर होंगे।

हालाँकि, यह संभव है कि 2036 ओलंपिक की मेजबानी का फैसला 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले ही हो जाए लेकिन तब तक भारत की तैयारियों, आयोजनों की सफलता और उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि पर दुनिया का ध्यान जा चुका होगा। इन सबका सीधा लाभ भारत की ओलंपिक दावेदारी को मिलेगा।

मोदी सरकार ने G20 जैसे बड़े आयोजन को सफलतापूर्वक कर यह साबित किया है कि वह ऐसे आयोजनों को कितनी गंभीरता और योजना से पूरा करती है। अहमदाबाद में होने वाले सभी आगामी खेल आयोजन भी उसी सोच और तैयारी के साथ किए जाएँगे, जो भारत को खेलों की दुनिया में एक ऊँचा स्थान दिलाएँगे।

(यह रिपोर्ट मूल रूप से गुजराती में मेघल सिंह परमार ने लिखी है, जिसको पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।)

PM मोदी ने जिस मल्लिकार्जुन मंदिर में की पूजा-अर्चना, भगवान शिव और माता पार्वती से है उसका नाता: शैव ही नहीं शाक्यों के लिए भी है महत्वपूर्ण, इतिहास और मान्यताओं को जानिए

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार (16 अक्टूबर 2025) को आंध्र प्रदेश के नंद्याल जिले में स्थित श्री भ्रामराम्बा मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर में पूजा-अर्चना की। यह मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों और 52 शक्तिपीठों में से एक है। इसकी खासियत यह है कि एक ही परिसर में ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ दोनों हैं। ऐसा देश में किसी और मंदिर में नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने पंचमुरलु (दूध, दही, घी, शहद और चीनी से बना पवित्र मिश्रण) से रुद्राभिषेक किया। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण भी मौजूद रहे।

मल्लिकार्जुन मंदिर का परिचय और महत्व

आंध्र प्रदेश का मल्लिकार्जुन मंदिर राज्य का सबसे प्राचीन धार्मिक स्थल माना जाता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और शैव तथा शाक्त दोनों संप्रदायों के लिए पवित्र है। यह भारत का एकमात्र मंदिर है, जहाँ ज्योतिर्लिंग और शक्ति पीठ दोनों एक ही स्थान पर हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार, अमावस्या के दिन भगवान शिव अर्जुन रूप में और पूर्णिमा के दिन माता पार्वती मल्लिका रूप में प्रकट हुईं, इसी कारण इस स्थान का नाम मल्लिकार्जुन पड़ा। यहाँ प्रार्थना करने से मन की शांति, धन और यश की प्राप्ति होती है। मंदिर में सहस्रलिंग (हजार लिंगों वाला शिवलिंग) भी है, जिसे भगवान श्रीराम द्वारा स्थापित माना जाता है।

मंदिर की कलाकृति और इतिहास

मल्लिकार्जुन मंदिर का निर्माण द्रविड़ शैली में हुआ है, जिसमें चार विशाल गोपुरम और कई प्रांगण हैं। प्रारंभिक निर्माण में चालुक्य वंश का प्रभाव देखा जाता है जबकि सातवाहन, पल्लव, रेड्डी और विजयनगर राजवंशों ने इसे आगे बढ़ाया।

सातवाहन राजा सातकर्णि ने अपने नाम में ‘मल्लना’ जोड़कर मंदिर की प्रसिद्धि को दर्शाया। पुलुमावी की नासिक प्रशस्ति (2वीं सदी ई.) में पहली बार श्रीशैल पर्वत का उल्लेख मिलता है।

(फोटो साभार: pilgrimagetour)

विजयनगर वंश के हरिहर द्वितीय ने पाताल गंगा तक सीढ़ियाँ बनवाईं, कृष्णदेवराय के मंत्री चंद्रशेखर ने मंदिर के मंडप बनवाए और छत्रपति शिवाजी ने उत्तर दिशा के गोपुरम के निर्माण की अनुमति दी। अंग्रेजों ने 1929 में मंदिर प्रशासन के लिए समिति बनाई और 1949 में इसे एंडोमेंट्स विभाग के अधीन कर दिया गया।

पौराणिक कथाएँ और आध्यात्मिक परंपरा

मल्लिकार्जुन मंदिर से कई पौराणिक कथाएँ जुड़ी हैं। कहा जाता है कि जब भगवान शिव और पार्वती ने अपने पुत्रों गणेश और कार्तिकेय के विवाह की योजना बनाई तो गणेश का विवाह सिद्धि और बुद्धि से हुआ, जिससे कार्तिकेय नाराज होकर पलनी पर्वत चले गए।

जहाँ शिव-पार्वती रुके, वही स्थान श्रीशैलम कहलाया। अग्नि पुराण के अनुसार राक्षस राजा हिरण्यकश्यप ने यहाँ तपस्या की थी और स्कंद पुराण में बताया गया है कि त्रेता युग में भगवान राम और सीता तथा द्वापर युग में पांडव यहाँ आए और पूजा की।

ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति कथा के अनुसार, ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता विवाद को सुलझाने के लिए शिव ने अनंत ज्योति स्तंभ बनाया। इसमें विष्णु ने सत्य स्वीकार किया जबकि ब्रह्मा ने झूठ बोला, इसलिए विष्णु की पूजा सदा होती रही पर ब्रह्मा की नहीं।

एक और कथा के अनुसार भगवान शिव तीन स्थानों पर शिवलिंग रूप में प्रकट हुए- श्रीशैलम (मल्लिकार्जुन), द्राक्षाराम (भीमेश्वर) और कलेश्वरम। पर्वत ऋषि की कथा के अनुसार, उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें पर्वत बना दिया और स्वयं वहीं निवास किया, जिससे यह स्थान श्रीशैल पर्वत कहलाया। इस मंदिर में आदि शंकराचार्य, सिद्ध नागार्जुन, अल्लम प्रभु और अक्का महादेवी जैसे संतों ने भी तपस्या की थी।

भारत विरोधी पाकिस्तानी इंफ्लुएंसर अलीश्बा से मालाबार गोल्ड ने किया कोलैब, कंपनी का मालिक है MP अहमद: एक्सपोज करने वाले हिंदू कार्यकर्ता को दी जेल भेजने की धमकी, जानें पूरा विवाद

भारत का मशहूर ज्वैलरी कंपनी मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स इन दिनों ‘पाकिस्तान समर्थित’ गतिविधियों से विवादों में है। कंपनी ने हाल ही में पाकिस्तान की एक इंफ्लुएंसर से प्रमोशन करवाया, जिससे सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। यहाँ तक की कंपनी इसकी शिकायत लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट के पास पहुँची। कोर्ट ने भी कंपनी के समर्थन में फैसला सुनाते हुए सभी सोशल मीडिया पोस्ट डिलीट करने का आदेश दिया। इतना ही नहीं अब ये कंपनी अपनी ‘पाकिस्तान समर्थित’ गतिविधियों की आलोचना करने वालों को जेल भी भिजवाना चाहती है।

मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स ने हिंदू कार्यकर्ता विजय पटेल को जेल भेजने की धमकी दी है। कंपनी ने विजय पटेल को कानूनी नोटिस भेजा है। विजय पटेल ने बताया कि मालाबार गोल्ड कंपनी उन्हें जेल भेजना चाहती है क्योंकि उन्होंने कंपनी के भारत की आलोचना करने वाली पाकिस्तानी इंफ्लुएंसर के साथ कोलैब का खुलासा किया था।

विजय पटेल ने एक्स पर पोस्ट में लिखा, “तो एमपी अहमद के स्वामित्व वाली मालाबार गोल्ड मुझे उनके पाकिस्तानी इंफ्लुएंसर के साथ कोलैब का खुलासा करने के लिए जेल भेजना चाहती है, जिन्होंने हमारे ऑपरेशन सिंदूर का मजाक उड़ाया है। मैं अपनी सेना के गौरव के लिए जेल जाने को तैयार हूँ। देखते हैं कौन जीतता है: आपका पैसा, ताकत, या भारतीयों का समर्थन। आप सिर्फ पैसे की ताकत से मुझे चुप नहीं करा सकते।”

इसके साथ पटेल ने कंपनी के कानूनी नोटिस स्क्रीनशॉट भी साझा किया, जिसमें उन्हें तीन महीने तक की सिविल जेल में हिरासत में रखने की धमकी दी गई है। इसके अलावा बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेशानुसार कंपनी के खिलाफ किए गए पोस्ट भी डिलीट करने को कहा है।

मालाबार गोल्ड का पाकिस्तानी इंफ्लुएंसर के साथ कोलैब पर विवाद

तो विवाद शुरू हुआ 06 सितंबर 2025 को मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स कंपनी के ब्रिटेन के बर्मिंघम में नए शोरूम के उद्घाटन समारोह से। इस हाई प्रोफाइल समारोह में मशहूर एक्ट्रेस करीना कपूर भी पहुँची थी। लेकिन विवाद का कारण अलीश्बा खालिद नाम की पाकिस्तानी इंफ्लुएंसर बनीं, जिसे कंपनी के समारोह में देखा गया। इस इंफ्लुएंसर के साथ कंपनी ने प्रमोशन वीडियो भी बनाई, जिसे इंस्टाग्राम पर शेयर भी किया गया।

ये वही पाकिस्तानी इंफ्लुएंसर अलीशबा खालिद है, जो अपने इंस्टाग्राम पर अक्सर भारत की आलोचना करते हुए पोस्ट डालती है। अलीश्बा के अधिकतर पोस्ट मई 2025 में सामने आए, जिसमें उसने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारत पर अपमानजनक टिप्पणी की थी। इन पोस्ट को अब अलीश्बा ने अपने अकाउंट से डिलीट कर दिया है।

इस पोस्ट में अलीश्बा ने ऑपरेशन सिंदूर को ‘कायरतापूर्ण कृत्य’ करार दिया।

इस पोस्ट में अलीश्बा ने पाकिस्तान के प्रति वफादारी पर एक लंबा चौड़ा पैराग्राफ लिखा है और ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ से अंत में #SayNoToWar को सपोर्ट किया है। इसी इंफ्लुएंसर ने पाकिस्तान के प्रति वफादारी को अलग रखते हुए अब भारत की कंपनी के साथ कोलैब किया है।

इसी तरह की एक अन्य पोस्ट ‘शर्म करो भारत’ से शुरू की और भारत को चुनौती दी कि इंतजार करो, पाकिस्तान को मौका मिलेगा तब वह भी सच्चाई के साथ जवाब देगा।

अलीश्बा के इन भारत-विरोधी पोस्ट के कारण मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स की सोशल मीडिया पर आलोचना शुरू हो गई। लोग ‘बॉयकॉट मालाबार’ ट्रेंड करने लगे क्योंकि कंपनी ने एक ऐसी पाकिस्तानी इंफ्लुएंसर के साथ कोलौब किया, जो अक्सर भारत के खिलाफ पोस्ट डालती है।

इन आलोचकों में सबसे ऊपर विजय पटेल का नाम सामने आया। विजय पटेल ने अलीश्बा के इन भारत-विरोधी पोस्ट के साथ मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स की ‘पाकिस्तानी समर्थित’ गतिविधि का खुलासा किया। विजय पटेल ने 10 सितंबर 2025 को एक्स पर पोस्ट किया, जिसमें बताया कि कैसे केरल के उद्यमी एमपी मोहम्मद की मालाबार गोल्ड ने पाकिस्तानी इंफ्लुएंसर के साथ कोलैब किया, जिसने ऑपरेशन सिंदूर को ‘कायरतापूर्ण कृत्य’ करार दिया था।

मालाबार गोल्ड ने बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर किया मुकदमा

सोशल मीडिया की कड़ी आलोचना के बाद मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स कंपनी ने सार्वजनिक रूप से माफी माँगने के बजाए बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया। कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपने खिलाफ किए गए ‘अपमानजनक’ कंटेंट को हटाने की माँग के लिए कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया। इसमें कहा गया कि इन पोस्ट से उनके कारोबार पर असर हो रहा है, खासकर जब भारत में त्योहारों का सीजन है।

हाई कोर्ट ने 29 सितंबर 2025 को मालाबार गोल्ड के मुकदमे पर सुनवाई की। इस दौरान कंपनी ने तर्क दिया कि उन्होंने बर्मिंघम में नए शोरूम के प्रमोशन के लिए एक तीसरी पार्टी, JAB स्टूडियोज नाम की एजेंसी को हायर किया था। उसी एजेंसी ने ब्रिटेन के लोकल सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर को कंपनी के प्रमोशन के लिए बुलाया था। इनमें से एक पाकिस्तानी इंफ्लुएंसर अलीश्बा खालिद भी थी, जो ब्रिटेन की निवासी हैं।

कंपनी ने यह भी दावा किया कि उन्होंने बाद में पता लगा कि अलीश्बा खालिद ने सोशल मीडिया पर भारत की आलोचना करते हुए पोस्ट किए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि अलीश्बा खालिद को अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले से पहले ही हायर किया जा चुका था। कंपनी ने कोर्ट में दलील दी कि उन्हें जानकारी ही नहीं थी कि अलीश्बा खालिद पाकिस्तान से है।

मालाबार गोल्ड एंड डायमंड की इन दलीलों को सुनकर हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी किया, जिसमें इंस्टाग्राम, फेसबुक, व्हाट्सऐप और एक्स (X) से सभी ‘अपमानजनक’ पोस्ट को हटाने को कहा गया और आगे ऐसे किसी भी कंटेंट पर भी रोक लगा दी गई।

जंग में आसमान से दुश्मनों के सामने लैंड करेंगे भारतीय सैनिक, DRDO ने पैराट्रूपर्स के लिए बनाया स्वदेशी पैराशूट: बेहतरीन रही टेस्टिंग, जानें खास बातें

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने स्वदेशी सैन्य लड़ाकू पैराशूट प्रणाली (एमसीपीएस) विकसित किया है। 32,000 फीट की ऊँचाई से सफलतापूर्वक लड़ाकू फ्रीफॉल जंप पर इसका परीक्षण किया गया। यह छलांग भारतीय वायु सेना के जम्परों, विंग कमांडर विशाल लखेश, वीएम (जी), एमडब्ल्यूओ आर जे सिंह और एमडब्ल्यूओ विवेक तिवारी ने लगाई।

आगरा के मलपुरा ड्रॉपिंग जोन में इस पैराशूट प्रणाली को तैनात किया गया था। परीक्षण के दौरान स्वदेशी प्रणाली की दक्षता, विश्वसनीयता और उन्नत डिजाइन का शानदार प्रदर्शन हुआ। इस उपलब्धि के साथ एमसीपीएस ऐसी एकमात्र पैराशूट प्रणाली बन गई है, जो 25,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर तैनाती में सक्षम है। इसका इस्तेमाल भारतीय सेना करेगी।

पैराशूट सिस्टम एमसीपीएस की खासियत

डीआरडीओ की एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिसमेंट (ADRDE) और डिफेंस बायो-इंजीनियरिंग एंड इलेक्ट्रोमेडिकल लैबोरेटरी बेंगलुरु (DEEL) ने मिलकर इस मिलिट्री कॉम्बैट पैराशूट सिस्टम को विकसित किया है। इसे धीरे धीरे उतारा जा सकता है। यानी इसकी स्पीड को कंट्रोल करने की क्षमता बेहतर स्टीयरिंग के कारण है। इसे पहले से निर्धारित ऊंचाई पर तैनात कर, सटीक नेविगेशन करने और टारगेट तक पहुँचना आसान हो जाएगा।

ये सिस्टम भारत के सैटेलाइट आधारित नेविगेशन के अनुकूल भी है। इसे दुश्मन पर स्वतंत्र रूप से भी संचालित किया जा सकता है। इसमें बाहरी हस्तक्षेप या दुश्मन द्वारा टारगेट बदलने की कोशिशों का कोई असर नहीं होगा। यानी ये सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित है।

इसका डिजाइन Ram-Air (Rectangular Canopy) यानी आसानी से नियंत्रित और दिशा बदलने वाला पैराशूट है। इसका इस्तेमाल कॉन्बेट फ्री फॉल मिशन में किया जा सकता है यानी उड़ते हुए विमान से कूदा जा सकता है। इस किट के साथ सैनिक का वजह अधिकतम 150 किलो हो सकता है।

दिन-रात काम करने वाला ब्रीथिंग सिस्टम से लैस

अगर मेन और रिजर्व कैनोपी फट जाए तो दूसरी काम आएगी। यदि जवान बहुत बिजी हो और पैराशूट खोलना भूल जाए, तो सिस्टम खुद ब खुद खुल जाएगा। इसका नेविगेशन सिस्ट जीपीएस और एनएवीआईसी पर आधारित हैं। यानी सही स्थान पर लैंडिंग संभव है। अधिक ऊँचाई पर ऑक्सीजन कम होने पर साँस लेने में दिक्कत न हो, इसके लिए ब्रीथिंग सिस्टम लगाया गया है। इसका इस्तेमाल दिन-रात कभी भी किया जा सकता है क्योंकि इसमें नाइट विजन हेडगियर लगाया गया है।

स्वदेशी पैराशूट सिस्टम को मिलेगी पहचान

इस प्रणाली ने भारतीय स्वदेशी पैराशूट प्रणालियों को व्यापक रूप से अपनाने का रास्ता खोल दिया है। विदेशों से मँगाए जाने वाले उपकरणों की तुलना में इस सिस्टम का रखरखाव और मरम्मत कम समय में और कम खर्च पर किया जा सकेगा। यानी इसका अधिकतम इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे युद्ध या संकट के वक्त विदेशों पर निर्भरता तो कम होगी ही, साथ ही सेना की कार्यक्षमता में भी वृद्धि होगी

रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ और सेना को दी बधाई

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल प्रदर्शन पर डीआरडीओ, सशस्त्र बलों और उद्योग जगत को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने इसे भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर करार दिया। राजनाथ सिंह ने अपने एक्स अकाउंट पर डीआरडीओ के पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा, “देश के लिए गौरव का क्षण! @DRDO_India द्वारा स्वदेश में विकसित सैन्य लड़ाकू पैराशूट प्रणाली (MCPS) ने 32,000 फीट की ऊँचाई से लड़ाकू फ्रीफॉल जंप हासिल किया है।”

महत्वपूर्ण रक्षा तकनीकों में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम उपलब्धि

रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने इस प्रदर्शन में योगदान देने वाली रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की टीम की सराहना की। उन्होंने इसे एयर डिफेंस सिस्टम के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बताया। वहीं डीआरडीओ के दूसरे वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे विदेशी पैराशूट प्रणालियों पर निर्भरता कम होगी। साथ ही मरम्मत और रखरखाव में लगने वाला समय भी कम होगा। युद्ध के वक्त ये काफी काम आने वाला है।

संपूर्ण सफाए से डरे सबसे बड़े नक्सली नेता ने किया आत्मसमर्पण, 6 करोड़ का था ईनाम: 60 साथियों ने भी डाले हथियार, सरकार को शांतिवार्ता का दिया प्रस्ताव

वामपंथी उग्रवाद को बड़ा झटका देते हुए CPI(M) के वरिष्ठ पोलित ब्यूरो सदस्य मल्लोजुला वेणुगोपाल राव, उर्फ ‘सोनू’, ने महाराष्ट्र के गढ़चिरोली पुलिस मुख्यालय में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में 60 नक्सली साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है।

यह आत्मसमर्पण नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति और हिंसा कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अधिकारियों की ओर से उसकी गिरफ्तारी के लिए 6 करोड़ रुपए का इनाम घोषित किया गया था।

आत्मसमर्पण और शांति वार्ता की पहल

70 वर्षीय वेणुगोपाल राव, जो CPI(M) की सबसे ऊँची निर्णय लेने वाली इकाई पोलित ब्यूरो का सदस्य रहा है, उसने सोमवार (13 अक्टूबर 2025) को आत्मसमर्पण करने के बाद मंगलवार (14 अक्टूबर 2025) को हथियार डालते हुए सरकार से औपचारिक शांति वार्ता की इच्छा जताई।

उसने सरकार से एक महीने का संघर्षविराम (सीजफायर) देने की अपील की थी ताकि वह विभिन्न राज्यों और जेलों में बंद अपने साथियों से सलाह-मशविरा कर सकें।

राव ने कहा, “मैं हथियार छोड़ रहा हूँ और अब भारत के शोषितों के लिए शांतिपूर्ण आंदोलनों के साथ काम करूँगा। हमने मार्च 2025 से सरकार से बातचीत की कोशिश की पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला। इसके बजाय, अभियान तेज कर दिए गए।”

उसने बताया कि यह आत्मसमर्पण इस साल की शुरुआत में नक्सलवादी महासचिव बसवराजू द्वारा जारी शांति अपील के अनुरूप है, जो मई 2025 में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था।

राव ने केंद्र सरकार से एक महीने के लिए सभी सुरक्षा अभियानों को रोकने की माँग की थी ताकि नक्सलवादी संगठन आंतरिक विचार-विमर्श कर सके। उसने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी बातचीत के लिए तैयार है।

सरकार की प्रतिक्रिया और नक्सलवाद में गिरावट

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि भारत 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा। उन्होंने बताया कि सरकार की दोहरी नीति, आत्मसमर्पण को बढ़ावा देना और सख्त कार्रवाई जारी रखना, इससे सकारात्मक नतीजे मिले हैं।

शाह ने कहा, “अब ज्यादा लोग हिंसा छोड़कर पुनर्वास का रास्ता अपना रहे हैं। जो हथियार छोड़ते हैं, उनके लिए रेड कार्पेट है, लेकिन निर्दोष जनजातियों को नक्सलवादी हिंसा से बचाना सरकार का कर्तव्य है।”

वेणुगोपाल राव का जीवन और पृष्ठभूमि

मल्लोजुला वेणुगोपाल राव का जन्म तेलंगाना के करीमनगर जिले के पेड्दापल्ली में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। उसके पिता मल्लोजुला वेंकटैय्या और माँ मधुरम्मा स्वतंत्रता सेनानी परिवार से थे। उसके बड़े भाई मल्लोजुला कोटेश्वर राव, जिसे किशनजी के नाम से जाना जाता था, 2011 में पश्चिम बंगाल में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए, जबकि दूसरा भाई अंजन्ना एक मंदिर का पुजारी है।

कॉमर्स स्नातक वेणुगोपाल ने युवा अवस्था में ही घर छोड़ दिया और नक्सवादी आंदोलन में शामिल हो गया। उसने पीपुल्स वॉर ग्रुप (PWG) में भूपति, सोनू, मास्टर, अभय जैसे नामों से काम किया और जल्दी ही नेतृत्व की भूमिका में पहुँच गया।

उसने दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (गढ़चिरोली) की कमान सँभाली और बाद में पश्चिमी घाट क्षेत्र (गोवा से केरल तक) में संगठन के विस्तार की जिम्मेदारी ली। राव पोलित ब्यूरो और सेंट्रल मिलिट्री कमिशन दोनों का सदस्य रहा।

उसे पार्टी का वैचारिक और संचार प्रमुख माना जाता था। 2010 में प्रवक्ता चेरुकुरी राजकुमार उर्फ आजाद की मौत के बाद वेणुगोपाल को पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ता और प्रकाशन विभाग के प्रमुख का दायित्व सौंपा गया।

खुफिया एजेंसियाँ उसे अप्रैल 2010 के दंतेवाड़ा हमले (जिसमें 76 CRPF जवान मारे गए) के रणनीतिकारों में से एक मानती हैं।

परिवार और हाल के घटनाक्रम

उसकी पत्नी तारक्का, जो खुद भी नक्सलवादी कमांडर थी, उसने दिसंबर 2018 में गढ़चिरोली में 10 अन्य नक्सलवादियों (जिनमें 8 महिलाएँ थीं) के साथ आत्मसमर्पण किया था। किशनजी की मौत के बाद वेणुगोपाल ने ऑपरेशन ग्रीन हंट के खिलाफ नक्सलवाद रणनीति को सँभाला और लालगढ़ आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अब उसका आत्मसमर्पण यह दिखाता है कि संगठन अंदरूनी मतभेदों से जूझ रहा है, कुछ नेता शांति का रास्ता चुन रहे हैं, जबकि कुछ अब भी हथियारबंद संघर्ष जारी रखना चाहते हैं।

तालिबानियों से डरे पाकिस्तानी फौजी, कैंप में पतलून छोड़-छोड़कर भागे: सीजफायर के बाद आई तस्वीर, PAK मंत्री अपनी धुलाई के लिए भारत को मान रहे जिम्मेदार

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दावा किया है कि अफगानिस्तान ‘भारत का छद्म युद्ध’ लड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि फैसले काबुल में नहीं, बल्कि नई दिल्ली में लिए जा रहे हैं। उन्होंने अफगानी सीमा पर झड़पों के बाद दोनों पड़ोसियों के बीच हुए युद्धविराम समझौते पर भी संदेह जताया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने हाल ही में अपनी छह दिवसीय भारत यात्रा के दौरान ‘योजनाएँ’ बनाई थीं। जबकि अफगानिस्तान के विदेश मंत्री की पहली भारत यात्रा व्यापार और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक कदम थी। लेकिन आसिफ ने आरोप लगाया कि इसके कुछ और ही उद्देश्य थे।

अफगानिस्तान-पाकिस्तान में 48 घंटे का युद्धविराम जारी

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच फिलहाल 48 घंटे का युद्ध विराम चल रहा है। ये युद्धविराम इस्लामाबाद के समयानुसार शाम 6 बजे (1300 GMT) शुरू हुआ। दोनों सरकारों ने इसकी पुष्टि की। दोनों ने दावा किया कि दूसरे पक्ष ने बढ़ती हिंसा को रोकने का अनुरोध किया था।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्ष युद्धविराम अवधि के दौरान “रचनात्मक बातचीत के माध्यम से सकारात्मक समाधान खोजने के लिए ईमानदारी से प्रयास करेंगे”।

तालिबान सरकार ने कहा कि उसने अपने बलों को निर्देश दिया है कि वे युद्धविराम का सम्मान करें, ‘जब तक कि पाकिस्तान द्वारा इसका उल्लंघन न किया जाए।’

यह युद्धविराम दक्षिणी सीमा पर एक सप्ताह तक चली भीषण लड़ाई के बाद हुआ है, जहाँ तालिबान ने पाकिस्तानी ठिकानों को निशाना बनाया।

अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर इस्लामिक स्टेट के स्थानीय खुरासान विंग का समर्थन करने और अफगान क्षेत्र के अंदर उसके हमलों में मदद करने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, पाकिस्तान तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को पनाह देने का आरोप अफगानिस्तान पर लगाता है।

पाकिस्तानी फौज की पतलूनों को टाँगा गया

हालाँकि 48 घंटे का युद्धविराम लागू हो गया है, लेकिन अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ रहा है, क्योंकि अफगानिस्तान की सीमा में अंदर तक पाकिस्तानी हवाई हमलों में 15 नागरिक मारे गए थे। इससे पहले, तालिबान ने पाकिस्तानी चौकियों पर कब्जा कर लिया था और खाली पड़ी जगहों से वर्दी और हथियार छीन लिए थे। अफगानिस्तान में सार्वजनिक रूप से पतलूनें दिखाई गईं।

काबुल और कंधार में पाकिस्तानी हवाई हमलों में कम से कम 15 अफगान नागरिक मारे गए और 100 से ज़्यादा घायल हुए। यह तब हुआ जब तालिबान ने एक जवाबी हमले में स्पिन-बोल्डक में सीमा चौकियों पर कब्जा कर लिया। जिसका प्रतीक उन पाकिस्तानी फौजियों की पतलून बन गई जिन्होंने अपनी चौकियाँ छोड़ दीं।

बीबीसी के एक अफ़ग़ान पत्रकार दाउद जुनबिश ने लिखा, “डूरंड रेखा के पास पाकिस्तानी सेना द्वारा छोड़ी गई चौकियों से बरामद पतलूनें अफगानिस्तान के पूर्वी नांगरहार प्रांत में बाहर प्रदर्शन के लिए रखी गई हैं।” उन्होंने तालिबान लड़ाकों की एक तस्वीर साझा की, जिसमें वे जवाबी हमले के बाद भागी सीमा चौकियों से ज़ब्त की गई पतलून और हथियार दिखा रहे हैं। जब्त किए गए एक पाकिस्तानी टी-55 टैंक पर तालिबान लड़ाकों का एक वीडियो वायरल हुआ था।

पाकिस्तान-अफगानिस्तान संघर्ष में 200 से ज़्यादा लोग मारे गए

पाकिस्तान-अफगानिस्तान के ताजा संघर्ष में 200 से ज्यादा लोग अब तक मारे जा चुके हैं। पाकिस्तान ने पिछले हफ्ते अफगानिस्तान पर एयरस्टाइक किया था और तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी के शिविरों को निशाना बनाया था। उस वक्त भारत में अपने पहले दौरे पर आए अफगानी विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने पाकिस्तान को चेताया था।

पिछले एक हफ्ते में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को काफी ज्यादा नुकसान पहुँचाने का दावा किया। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने कहा कि उसने अफगानी तालिबान और उसके सहयोगियों के 200 से ज्यादा लड़ाकों को मार गिराया है, जबकि अफगानिस्तान का कहना है कि उसने 58 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया है।

जिस रैप सॉन्ग को Gen Z का गुस्सा बताकर बेच रही कॉन्ग्रेस, वो पार्टी का पेड कैंपेन? जानिए ग्रैंड ओल्ड पार्टी के नाम पर क्यों हो रही रैपर और इंफ्लुएंसर की भर्ती

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक रैप सॉन्ग वायरल हो रहा है, जिसके बोल सरकार विरोधी हैं। इसे एक स्ट्रगलिंग रैपर ने गाया है। कॉन्ग्रेस IT सेल इसे देश के Gen Z का सरकार के प्रति गुस्सा बताकर बेच रही है। ये वही प्रोपेगेंडा है, जो नेपाल में Gen Z प्रदर्शन के बाद भारत में देखने को मिला था।

इस वीडियो में वामपंथियों का वही रोना-धोना रैप के जरिए दिखाया गया है। इसे एक्स यूजर अंकित मयंक ने भी शेयर किया है, जो खुद को राहुल गाँधी के बब्बर शेर बताते हैं। वीडियो शेयर कर अंकित ने लिखा, “तो भारत में Gen Z अब फासीवादी शासन का पर्दाफाश करने और उसके खिलाफ आवाज उठाने के लिए म्यूजिक का इस्तेमाल कर रही है। एक जबरदस्त रैप गीत, जरूर शेयर करें। आगे दिलचस्प समय आने वाला है।”

रैप सॉन्ग की सच्चाई

Gen Z का गुस्सा बताकर पेश किए जा रहे इस वीडियो की सच्चाई कुछ और है। इसे पता लगाने के लिए ऑपइंडिया ने पड़ताल शुरू की। इस पड़ताल में सामने आए कुछ वैकैंसी पोस्ट। ये वैकैेंसी पोस्ट Linkedin पर कॉन्ग्रेस ने जारी करवाए थे।

दरअसल, पिछले तीन महीने से कॉन्ग्रेस रैप सॉन्ग राइटर, कार्टूनिस्ट, फूड और ट्रैवल इंफ्लुएंसर की वैकैंसी के लिए हायरिंग कर रही है। ऑपइंडिया को ऐसी ही वैकेंसी पर जारी की गई तीन वैकेंसी पोस्ट मिली, जो टेकेंद्र शर्मा नाम के व्यक्ति के अकाउंट से पोस्ट की गई। इन पोस्ट में साफ लिखा गया था कि ये हायरिंग कॉन्ग्रेस के लिए की जा रही हैं।

ऑपइंडिया की पड़ताल यही नहीं रुकी। पूरा मामला जानने के लिए ऑपइंडिया ने हायरिंग की पोस्ट करने वाले टेकेंद्र शर्मा से फोन पर बात की। शर्मा ने बताया कि उन्होंने ही कॉन्ग्रेस के लिए भर्ती निकाली थीं और इससे संबंधित पोस्ट भी किए, लेकिन वह कॉन्ग्रेस के सदस्य नहीं हैं। उनका काम केवल CV शॉर्ट लिस्ट करके कॉन्ग्रेस पार्टी को भेजना है। यानी टेकेंद्र शर्मा ने कबूला कि उन्होंने रैप सॉन्ग राइटर, इंफ्लुएंसर और अन्य वैकेंसी पर भर्ती कॉन्ग्रेस के कहने पर ही पोस्ट की।

कॉन्ग्रेस का पक्ष

अब सवाल यह है कि आखिर रैप सॉन्ग राइटर, इंफ्लुएंसर और ब्लॉगर की हायरिंग कॉन्ग्रेस कर क्यों रही है? इस सवाल का जवाब माँगने के लिए ऑपइंडिया ने कॉन्ग्रेस से संपर्क करने की कोशिश की। ऑपइंडिया ने कॉन्ग्रेस के मीडिया प्रमुख जयराम रमेश और प्रवक्ता पवन खेड़ा को एक ई-मेल भेजा।

ई-मेल में कुछ सवाल थे। इसमें सीधे तौर पर पूछा गया कि कॉन्ग्रेस का टेकेंद्र शर्मा से क्या रिश्ता है और क्या वाकई में पार्टी ऐसा कोई भर्ती अभियान (Recruitment Drive) चला रही है? साथ ही पूछा गया कि कॉन्ग्रेस उन सरकार विरोधी कंटेंट को ऑर्गनिक बताएगी या फिर खुद का ही कंटेंट बताएगी?

इस ई-मेल को भेजे 24 घंटे से ऊपर हो गया है लेकिन अब तक जवाब नहीं मिला है। वहीं रैप गाने वाले रैपर का तो कोई अता-पता ही नहीं है। ये कॉन्ग्रेस के लिए आम बात है, पहले प्रोपेगेंडा चलाना और जब फैक्ट्स के साथ पकड़े जाओ तो जवाब देने से बचना। इससे साफ है कि जिस सरकार विरोधी कंटेंट को सोशल मीडिया यूजर्स Gen Z या देशभर का गुस्सा समझकर कंज्यूम कर रहे हैं, वो कॉन्ग्रेस पैसा देकर वायरल कर रही है।

कॉन्ग्रेस का सोशल मीडिया

यह कोई संयोग नहीं है कि रैप सॉन्ग राइटर की वैकेंसी पर भर्ती निकालने के बाद कॉन्ग्रेस के यूट्यूब पेज पर अचानक से रैप सॉन्ग पोस्ट होने लगे हैं। वोट चोरी हो या पीएम मोदी के अमेरिका के साथ रिश्ते। इन सभी मुद्दों पर कॉन्ग्रेस ने सरकार को टारगेट कर रैप सॉन्ग निकाले हैं।

ये हाल ही में कॉन्ग्रेस के यूट्यूब चैनल पर पोस्ट किया गया रैप सॉन्ग है, जिसमें पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के रिश्ते को सोशल मीडिया पर वायरल मीम्स के साथ ट्रोल किया गया है।

इसके अलावा ‘वोट चोरी, गद्दी छोड़’ नाम से भी कॉन्ग्रेस ने रैप सॉन्ग बनाया है। इसमें राहुल गाँधी की छवि को साफ दिखाया गया है और उनके ‘वोट चोरी’ के दावों को सही दावे के साथ पेश किया गया है और चुनाव आयोग के तथ्यों पर सवाल उठाए गए हैं।

इसस पता लगता है कि कॉन्ग्रेस ने रैप सॉन्ग राइटर की पोस्ट के लिए हायरिंग नि कलवाई और क्यों निकलवाई ये भी साफ है। ताकि सोशल मीडिया पर सरकार-विरोधी कंटेंट बना सके और जनता का गस्सा बताकर Gen Z को भड़का सकें।

सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेस इकोसिस्टम का सरकार विरोधी ‘पेड कैंपेन’

यह पहली बार नहीं है जब कॉन्ग्रेस इकोसिस्टम ने ऐसे किसी सोशल मीडिया कंटेंट को Gen Z का गुस्सा बताकर पेश कर रही है। हाल ही में कॉन्ग्रेस ने ‘वोट चोरी’ प्रोपेगेंडा चलाया था। तब भी कॉन्ग्रेस ने सोशल मीडिया पर ‘पेड कैंपेन’ चलाया। कई इंफ्लुएंसर और कंटेंट क्रिएटर इस मुद्दे पर रील बना रहे थे। और कुछ ने तो बाद में माफी तक माँगी थी।

तब भी खुलासा हुआ था कि ये सब कॉन्ग्रेस के ‘पेड कैंपेन’ के तहत किया गया था, जिसके लिए 20 से 30 हजार रुपए खर्चे गए थे। ये सब कॉन्ग्रेस के भारत के Gen Z को ब्रेनवॉश करने के तरीके हैं, जो दुनियाभर की जानकारी केवल सोशल मीडिया से ही लेते हैं। कॉन्ग्रेस इसका पूरा फायदा उठा रही है।

कौन है चीन के लिए जासूसी करने वाला US स्टेट डिपार्टमेंट का वरिष्ठ सलाहकार अश्ले टेलिस? हजारों दस्तावेजों के साथ पकड़ा गया, सीक्रेट पेपर्स की करता था चोरी

अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट के सीनियर सलाहकार अश्ले टेलिस पर सुरक्षित सरकारी जगहों से क्लासिफाइड दस्तावेज चुपके से निकालने का आरोप लगा है। भारतीय मूल का टेलिस एक मशहूर फॉरेन पॉलिसी एक्सपर्ट और डिफेंस स्ट्रैटेजिस्ट है। साल 2023 से ही उसके चीनी अधिकारियों से मीटिंग के आरोप भी हैं।

वर्जीनिया के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट के यूएस अटॉर्नी ऑफिस ने मंगलावर (14 अक्टूबर 2025) को बताया कि अश्ले टेलिस को ‘नेशनल डिफेंस इंफॉर्मेशन को गैरकानूनी तरीके से रखने’ के चार्ज पर गिरफ्तार किया गया है। टेलिस को 11 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया, जब यूएस अथॉरिटीज ने उसके वर्जीनिया के वियना में घर की तलाशी ली।

वर्जीनिया के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट के यूएस अटॉर्नी लिंडसे हेलिगन ने एक स्टेटमेंट में कहा कि वियना के अश्ले टेलिस को वीकेंड पर गिरफ्तार किया गया और क्रिमिनल कंप्लेंट के जरिए नेशनल डिफेंस इंफॉर्मेशन को गैरकानूनी रखने के चार्ज लगाए गए, जो 18 यूएससी § 793(ई) का उल्लंघन है।

स्टेटमेंट में कहा गया, “हम पूरी तरह फोकस्ड हैं अमेरिकी लोगों को हर तरह के खतरे से बचाने पर, चाहे वो विदेशी हो या घरेलू। इस केस में लगे आरोप हमारे नागरिकों की सेफ्टी और सिक्योरिटी के लिए बड़ा खतरा हैं। इस केस के फैक्ट्स और लॉ क्लियर हैं, और हम इन्हें फॉलो करते रहेंगे ताकि जस्टिस हो सके।”

खास बात ये है कि भारतीय मूल का अमेरिकी नागरिक अश्ले टेलिस स्टेट डिपार्टमेंट का अनपेड सीनियर सलाहकार था। वो डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस (डीओडी) के ऑफिस ऑफ नेट असेसमेंट का कॉन्ट्रैक्टर भी था।

एफबीआई स्पेशल एजेंट जेफरी स्कॉट के एफिडेविट के मुताबिक, टेलिस के पास टॉप सीक्रेट सिक्योरिटी क्लीयरेंस था, जिसमें ‘सेंसिटिव कम्पार्टमेंटेड इंफॉर्मेशन’ तक एक्सेस था।

फेडरल प्रॉसिक्यूटर्स के अनुसार, टेलिस के वियना वाले घर पर रेड के दौरान इन्वेस्टिगेटर्स को टॉप सीक्रेट और/या सीक्रेट लेवल के क्लासिफिकेशन मार्क्स वाले 1000 से ज्यादा पेज के पेपर डॉक्यूमेंट्स मिले।

अश्ले टेलिस ने सुरक्षित फैसिलिटी से कैसे निकाले क्लासिफाइड दस्तावेज?

अश्ले टेलिस ने 2001 में यूएस गवर्नमेंट के साथ क्लासिफाइड इंफॉर्मेशन नॉनडिस्क्लोजर एग्रीमेंट पर साइन किया था, लेकिन उसने कथित तौर पर ये एग्रीमेंट तोड़ा और सिक्योर्ड कम्पार्टमेंटेड इंफॉर्मेशन फैसिलिटी (एससीआईएफ) से क्लासिफाइड मटेरियल निकाल लिया।

टेलिस की हरकतें तब स्कैनर पर आईं जब 12 सितंबर 2025 को वीडियो सर्विलांस से देखा गया कि वो वर्जीनिया के मार्क सेंटर के डीओडी फैसिलिटी के अंदर ऑफिस ऑफ नेट असेसमेंट (ओएनए) वाले एससीआईएफ में घुसा। कंप्यूटर रिकॉर्ड्स से पता चला कि टेलिस ने एक आईडेंटिफाइड क्यूबिकल पर कंप्यूटर यूज किया और उसके को-वर्कर ने उसी दिन उसके लिए कई क्लासिफाइड डॉक्यूमेंट्स प्रिंट किए।

एफबीआई एजेंट स्कॉट के एफिडेविट में लिखा है, “उस शाम बाद में, जब टेलिस चला गया, तो इन्वेस्टिगेटर्स को उसी क्यूबिकल में दो रेडवेल्ड फाइल पॉकेट्स मिले, दोनों पर ‘टेलिस’ लिखा था। इनमें वो डॉक्यूमेंट्स थे जो को-वर्कर ने टेलिस के लिए पहले प्रिंट किए थे, जिसमें एक टॉप सीक्रेट लेवल का डॉक्यूमेंट भी था।”

एक और मामले में 25 सितंबर को टेलिस डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट के एचएसटी बिल्डिंग पहुँचा। वो साउथ एंड सेंट्रल एशियन अफेयर्स ब्यूरो के सूट 5247 में घुसा और ‘क्लासनेट’ पर लॉग इन किया, जो डीओएस का सीक्रेट-लेवल कंप्यूटर सिस्टम है। वो करीब एक घंटा रुका और फिर चला गया।

एफिडेविट में लिखा है, “उस शाम बाद में टेलिस एक लेदर ब्रीफकेस लेकर एचएसटी बिल्डिंग लौटा और क्लासनेट पर लॉग इन किया। उसने डेस्कटॉप से एक पीडीएफ फाइल खोली, जिसका फाइलनेम एडवर्सरी फाइटर एयरक्राफ्ट और 2024 का रेफरेंस देता था। फाइल 1288 पेज की खुली, जो टाइटल यूएस एयर फोर्स टैक्टिक्स, टेक्नीक्स एंड प्रोसीजर्स का हिस्सा थी। डॉक्यूमेंट के ऊपर डिपार्टमेंट ऑफ एयर फोर्स का सील था और टॉप-बॉटम पर बैनर मार्किंग्स थे – सीक्रेट//फॉरेन गवर्नमेंट इंफॉर्मेशन/रिस्क सेंसिटिव नोटिस/नोफॉर्न//फॉरेन इंटेलिजेंस सर्विलांस एक्ट।”

टेलिस ने पीडीएफ को ‘ईकॉन रिफॉर्म’ के नाम से री-सेव किया, प्रिंट विंडो खोली और ‘पेजेस’ में ’59-172′ डाला। उसने सेंसिटिव डॉक्यूमेंट के चुनिंदा पेज प्रिंट करने की कई कोशिशें कीं, लेकिन प्रिंट नहीं हुआ। बाद में उसने एक अनक्लासिफाइड डॉक्यूमेंट खोला, जो किसी यूएस गवर्नमेंट ऑफिशियल के पब्लिक स्पीच का था और उसे प्रिंट किया। कुछ मिनट बाद उसने ‘ईकॉन रिफॉर्म’ डॉक्यूमेंट दोबारा खोला, पेज 943-959 प्रिंट किए और फाइल डिलीट कर दी।

फिर उसने एक पीडीएफ डॉक्यूमेंट खोला जो ‘सीक्रेट’ या ‘नोफॉर्न’ क्लासिफाइड था, मतलब ये इंफॉर्मेशन यूएस पर्सन्स के अलावा किसी को नहीं दी जा सकती।

फाइल यूएस एयर फोर्स वेपन्स स्कूल का डॉक्यूमेंट था, जो मिलिट्री एयरक्राफ्ट कैपेबिलिटीज के बारे में था। टेलिस ने डॉक्यूमेंट स्क्रॉल किया और उसके सारे 40 पेज प्रिंट कर दिए।

एफिडेविट में लिखा है, “रात करीब 8:53 बजे टेलिस ने एक पीडीएफ डॉक्यूमेंट खोला जो सीक्रेट//नोफॉर्न क्लासिफाइड था। ये एक और यूएस एयर फोर्स वेपन्स स्कूल का डॉक्यूमेंट था, मिलिट्री एयरक्राफ्ट के बारे में। टेलिस ने उसके सारे 40 पेज प्रिंट कर दिए।”

अथॉरिटीज ने 10 अक्टूबर को टेलिस को फिर मार्क सेंटर के अंदर ओएनए वाले एससीआईएफ सूट में देखा, उसी क्यूबिकल पर बैठे हुए। वीडियो सर्विलांस से 10 बजे के आसपास देखा गया कि वो लेदर ब्रिफकेस लेकर क्यूबिकल पर पहुँचा। उसने डेस्क पर रेडवेल्ड फाइल पॉकेट से कई पेज निकाले और एक पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन जैसा डॉक्यूमेंट (डॉक्यूमेंट ए) रखा। एफिडेविट के अनुसार, ये डॉक्यूमेंट भी टॉप सीक्रेट लगते हैं, क्योंकि ये पहले प्रिंट होकर 12 सितंबर 2025 को उसी क्यूबिकल में छूटे थे जब टेलिस आया था।

टेलिस ने कथित तौर पर क्लासिफाइड डॉक्यूमेंट को अपने नोटपैड्स के पेजों में मिला दिया, ब्रिफकेस में रखा और ऑफिस से चला गया। वो अपनी वियना वाली घर पर ड्राइव करके लौटा।

अश्ले टेलिस और चीन कनेक्शन

कोर्ट फाइलिंग के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में अश्ले टेलिस ने कई बार पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी) के सरकारी अधिकारियों से मुलाकात की। एक मीटिंग 15 सितंबर 2022 को हुई, जब टेलिस और कई पीआरसी ऑफिशियल्स ने वर्जीनिया के फेयरफैक्स में एक रेस्टोरेंट पर डिनर किया। मीटिंग में टेलिस एक मनीला एनवेलप लेकर आया और पीआरसी ऑफिशियल्स गिफ्ट बैग लेकर रेस्टोरेंट में घुसे। फेडरल प्रॉसिक्यूटर्स का आरोप है कि टेलिस ने एनवेलप पीआरसी (चीनी) ऑफिशियल्स को सौंप दिया।

टेलिस ने 11 अप्रैल 2023 को वर्जीनिया के एक रेस्टोरेंट में चीनी गवर्नमेंट ऑफिशियल्स से मीटिंग की। डिनर के दौरान टेलिस और चीनी ऑफिशियल्स को ‘ओवरहीयर्ड’ करते हुए ईरानी-चीनी रिलेशंस और इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज, जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में बात करते सुना गया।

मार्च 2024 में एक इसी तरह की मीटिंग में, टेलिस और चीनी गवर्नमेंट ऑफिशियल्स ने यूएस-पाकिस्तान रिलेशंस पर डिस्कस किया।

जब टेलिस ने 2 सितंबर 2025 को कथित तौर पर क्लासिफाइड डॉक्यूमेंट्स निकालना शुरू किया, उसके कुछ दिन पहले टेलिस और कुछ चीनी ऑफिशियल्स ने फिर डिनर किया। इस बार उन्होंने टेलिस को एक लाल रंग का गिफ्ट बैग दिया।

टेलिस के घर की तलाशी से क्लासिफाइड डॉक्यूमेंट्स मिले

फेडरल कोर्ट के ऑर्डर पर 11 अक्टूबर को इन्वेस्टिगेटर्स ने वर्जीनिया के वियना में टेलिस के घर की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान, घर के अलग-अलग जगहों पर टॉप सीक्रेट या सीक्रेट लेवल के क्लासिफिकेशन मार्क्स वाले 1000 से ज्यादा पेज के पेपर डॉक्यूमेंट्स मिले।

एफिडेविट में डिटेल किया गया है और ये जोड़ा गया कि बेसमेंट होम ऑफिस एरिया में “सीक्रेट” पोरशन मार्क्स वाला एक डॉक्यूमेंट रिकवर किया गया। इसमें डॉक्यूमेंट्स मुख्य रूप से चार जगहों पर मिले-

बेसमेंट होम ऑफिस एरिया के क्लोजेट में एक फोर-ड्रॉअर लॉक्ड फाइलिंग कैबिनेट
बेसमेंट होम ऑफिस एरिया में एक टू-ड्रॉअर लॉक्ड फाइलिंग कैबिनेट
बेसमेंट होम ऑफिस एरिया में डेस्क के आसपास
बेसमेंट के अनफिनिश्ड स्टोरेज रूम में तीन बड़े ब्लैक ट्रैश बैग्स में।

अगर दोषी साबित हुआ, तो टेलिस को 10 साल तक की जेल हो सकती है।

अश्ले टेलिस और उसका परेशान करने वाला ट्रैक रिकॉर्ड

अश्ले टेलिस अभी कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस (सीईआईपी) में टाटा चेयर फॉर स्ट्रैटेजिक अफेयर्स और सीनियर फेलो है। दिलचस्प बात ये है कि सीईआईपी को हंगेरियन-अमेरिकी इन्वेस्टर और रिजीम चेंज स्पेशलिस्ट जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन से फंडिंग मिलती है।

सोरोस की मोदी गवर्नमेंट से दुश्मनी जगजाहिर है और वो नई दिल्ली में अपनी पसंद का पपेट एडमिनिस्ट्रेशन लगाने की कोशिश करता रहा है। सोरोस ने पब्लिक फोरम्स पर भारत के खिलाफ अपनी बुरी नीयत खुलकर जाहिर की है। वो अपनी दौलत का इस्तेमाल भारत को कमजोर करने के लिए करता रहता है।

सीईआईपी को सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन से लगातार फंड्स मिलते हैं। ग्रुप के ग्रांट्स रिकॉर्ड्स के मुताबिक, ओएसएफ ने सीईआईपी को करीब 40 ग्रांट्स में लाखों डॉलर दिए हैं। 2024 में ओएसएफ ने सीईआईपी को ‘जनरल सपोर्ट’ के लिए 3,000,000 डॉलर दिए।

जॉर्ज डब्ल्यू बुश एडमिनिस्ट्रेशन के दौरान वो अंडरसेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर पॉलिटिकल अफेयर्स का सीनियर एडवाइजर था। उसे यूएस-इंडियन सिविल न्यूक्लियर डील नेगोशिएट करने में अहम रोल का क्रेडिट मिलता है। वो यूएस आर्मी वॉर कॉलेज के स्ट्रैटेजिक इंस्टीट्यूट में रिसर्च डायरेक्टर भी रहा।

टेलिस का रैंड कॉर्पोरेशन से भी गहरा कनेक्शन था, जो एक नॉन-प्रॉफिट ग्लोबल पॉलिसी थिंक टैंक है। उसकी इन्वॉल्वमेंट यूएस गवर्नमेंट सर्विस से पहले की है। अश्ले टेलिस रैंड में सीनियर पॉलिसी एनालिस्ट था, जो ओपन सोसाइटी फाउंडेशंस से स्पेसिफिक प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग लेता था।

बिना आश्चर्य के अश्ले टेलिस को इंडियन लेफ्ट लिबरल मीडिया सर्कल में हाइप मिला। लेफ्टिस्ट प्रोपगैंडा पोर्टल और चाइनीज फंडिंग लेने व एफसीआरए रूल्स तोड़ने के आरोपि न्यूजक्लिक से लेकर द वायर तक, टेलिस इंडियन लेफ्ट लिबरल गिरोह का फेवरेट रहा। टेलिस करण थापर के एक इंटरव्यू में आ चुका है, जो इंडियन लेफ्टिस्ट्स और पाकिस्तानियों में पॉपुलर है।

अपने आर्टिकल्स और इंटरव्यूज में टेलिस ने मोदी गवर्नमेंट को बुरा कहने का कोई मौका नहीं छोड़ा। वो अक्सर कहता था कि भारत को अपनी स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी छोड़ देनी चाहिए और चीन को काउंटर करने के लिए यूएस का ‘जूनियर पार्टनर’ बन जाना चाहिए।

फॉरेन अफेयर्स मैगजीन में कंट्रीब्यूटर के तौर पर टेलिस ने एक्सपर्ट जियोपॉलिटिकल एनालिसिस के बहाने एंटी-इंडिया आर्टिकल्स लिखे। एक ऐसे पीस में, “इंडिया’s ग्रेट पावर डेल्यूशंस” टाइटल से टेलिस ने कहा कि भारत का मल्टीपोलैरिटी और स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी में विश्वास ‘इफेक्टिव या रियलिस्टिक नहीं हो सकता।’

उसका चीन प्रेम भी आर्टिकल में झलका, जब उसने पाकिस्तान के बेबुनियाद दावे को बढ़ा-चढ़ाकर बताया कि मई के कॉन्फ्लिक्ट में पाक ने चाइनीज डिफेंस सिस्टम्स से इंडियन फाइटर जेट गिराया, जबकि भारत ने पहलगाम में इस्लामिक टेरर अटैक के बाद दुश्मन पड़ोसी को करारा जवाब दिया था।

टेलिस ने इस साल जून में पब्लिश हुए आर्टिकल में लिखा, “हालाँकि भारत ने पिछले दो दशकों में इकोनॉमिक स्ट्रेंथ बढ़ाई है, लेकिन वो चीन को बैलेंस करने जितनी तेजी से नहीं बढ़ रहा, छोड़िए यूएस को, लॉन्ग टर्म में भी। ये मिडसेंचुरी तक रिलेटिव जीडीपी के टर्म्स में ग्रेट पावर बनेगा, लेकिन सुपरपावर नहीं। मिलिट्री टर्म्स में ये साउथ एशिया की सबसे सिग्निफिकेंट कन्वेंशनल पावर है, लेकिन यहाँ भी लोकल राइवल पर इसका एडवांटेज बहुत बड़ा नहीं।”

लेख का स्क्रीनशॉट

उसने आगे लिखा, “मई की लड़ाई में पाकिस्तान ने चाइनीज-सप्लाइड डिफेंस सिस्टम्स यूज करके इंडियन एयरक्राफ्ट गिराए। चीन एक तरफ और एडवर्सरियल पाकिस्तान दूसरी तरफ होने से, भारत को हमेशा अनपैलेटेबल टू-फ्रंट वॉर का डर रहता है।”

बिना आश्चर्य के टेलिस ने भारत के कथित ‘हिंदू नेशनलिज्म’ को अपनाने और ‘लिबरल डेमोक्रेसी’ को छोड़ने पर भी निराशा जताई।

दिसंबर 2023 में टेलिस ने निक्केई एशिया को बताया, ‘न्यू दिल्ली के लिए गलती होगी ये सोचना कि चीन के खिलाफ यूएस स्ट्रैटेजी में भारत की इंपॉर्टेंस उसे यूएस सिटिजन्स को यूनिलेटरल टारगेट करने की छूट देती है।’ ये उसने खालिस्तानी टेररिस्ट गुरपतवंत सिंह पन्नू को कथित तौर पर एक्सासिनेट करने की प्लॉट के कॉन्टेक्स्ट में कहा।

अब कथित तौर पर क्लासिफाइड डॉक्यूमेंट्स निकालने और चीन के लिए जासूसी करने के आरोपित अश्ले टेलिस की गिरफ्तारी ने वॉशिंगटन के पॉलिसी सर्कल्स में सनसनी फैला दी है। यही नहीं, अब भारत को लेकर अमेरिका की दुश्मनी भरी नीतियों पर भी बहस शुरू हो रही है।

ये रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में श्रद्धा पाण्डेय ने लिखी है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

जैसा जंगलराज वाला शहाबुद्दीन, वैसा ही RJD का लालटेन लेने वाला ओसामा शहाब: अब्बा विरोधियों को तेजाब से नहलाता था, बेटा फायरिंग से लेकर वसूली तक का सरताज

मोहम्मद शहाबुद्दीन का नाम तो आप जानते ही होंगे, वहीं शहाबुद्दीन जो बीच सड़क पर विरोधियों को तेजाब से नेहलाकर मार देता था। लालू प्रसाद यादव की पार्टी राजद ने उसी शहाबुद्दीन के बेटे को रघुनाथपुर सीट से विधानसभा चुनाव का उम्मीदवार बनाया है।

वही ओसामा, जो सीवान में गुंडाराज फैलाने वाले मोहम्मद शहाबुद्दीन का बेटा है। शहाबुद्दीन सीवान का पूर्व सांसद था। 90 के दशक में और 21वीं सदी की शुरुआत में सीवान में वो ऐसा नाम था, जो अपराध और राजनीति की सीमाओं को धुँधला कर देता था। आज भी सीवान के कई लोग उसके खौफ में जीवन जी रहे हैं। उसी शहाबुद्दीन का बेटा ओसामा अब अपने अब्बा के गुंडाराज को रघुनाथपुर में फैलाने के लिए वापस आया है,और उसको RJD ने टिकट देकर अपनी भूमिका भी तय कर ली है।

कौन है शहाबुद्दीन ?

मोहम्मद सैयद शहाबुद्दीन सीवान शहर से पूर्व सांसद था। 90 के दशक में और 21वीं सदी की शुरुआत में उसने शहर में गुंडाराज चलाया। विभिन्न ठेकों का टेंडर हो या फिर मुखिया से लेकर जिला परिषद तक के चुनाव, हर जगह उसकी ही पसंद चलती थी। उसने 1996, 98, 99 और 2004 में यहाँ से सांसद बन कर जीत का चौका लगाया।

मोहम्मद शहाबुद्दीन पर सीधे राजद सुप्रीमो और 15 साल तक बिहार में सत्ता के सर्वेसर्वा रहे लालू प्रसाद यादव का हाथ था। वो राजद की नेशनल एग्जीक्यूटिव कमिटी का हिस्सा था। उसके समर्थक उसे ‘साहेब’ कहकर बुलाते थे। गैंगस्टर शहाबुद्दीन पर अपहरण, हत्या और लूटे के कई मामलों में जेल जा चुका था।

चंदा बाबू के 2 बेटों की तेजाब से नहला कर की हत्या

शहाबुद्दीन ने रंगदारी नहीं देने और उनकी जमीन शहाबुद्दीन के हवाले न करने के कारण चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू के दो बेटों गिरीश और सतीश का अपहरण कर लिया था। इसके बाद उन्हें शहाबुद्दीन के गाँव प्रतापपुर स्थित उसकी कोठी पर ले जाया गया। फिर 16 अगस्त 2004 को वहाँ जो हैवानियत का नंगा नाच हुआ, उसने पूरे देश को हिला कर रख दिया। वहाँ दोनों भाइयों को तेज़ाब से नहलाया गया और तब तक ऐसा किया गया, जब तक उनकी तड़प-तड़प कर मौत न हो गई।

इस मामले में गवाह थे चंदा बाबू के तीसरे बेटे राजीव रौशन, लेकिन कोर्ट जाते समय उनकी भी हत्या कर दी गई। तीनों बेटों की माँ कलावती की शिकायत पर FIR दर्ज की गई थी।लेकिन, इस मामले में शहाबुद्दीन को अभियुक्त बनने में 5 साल लग गए। 2009 में सीवान के तत्कालीन SP अमित कुमार जैन के निर्देश पर केस के IO ने शहाबुद्दीन, असलम, आरिफ और राज कुमार साह को प्राथमिक अभियुक्त बनाया और सभी को उम्रकैद की सजा हुई।

ये मामला स्थानीय कोर्ट और हाई कोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, जहाँ कुछ ही मिनटों में तत्कालीन CJI रंजन गोगोई ने शहाबुद्दीन की याचिका खारिज कर दी और फैसला बरकरार रखा। इस मामले में गवाह थे चंदा बाबू के तीसरे बेटे राजीव रौशन, लेकिन कोर्ट जाते समय उनकी भी हत्या कर दी गई। तीनों बेटों की माँ कलावती की शिकायत पर FIR दर्ज की गई थी।

चंदा बाबू कई सालों तक भय में जीते रहे। उनको डर लगा रहता था कि शहाबुद्दीन उन्हें मरवा देगा। ऐसे में इतने बड़े अपराधी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक जाना उनके हार न मानने वाले जज्बे की ओर इशारा करता है। वहीं, शहाबुद्दीन की बीवी हीना शहाब ने इस मामले में केंद्र सरकार को दोषी माना।

मई 2021 में शहाबुद्दीन की कोविड से मौत

शहाबुद्दीन कई मामलों में तिहाड़ जेल में सजा काट रहा था। इसी दौरान कोरोनाकाल का वक्त आया। तिहाड़ जेल में बंद मोहम्मद शहाबुद्दीन कोरोना पॉजिटिव निकला। उसे दिल्ली के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। हाँ अपराधी और हत्यारे शहाबुद्दीन की 01 मई, 2021 को मौत हो गई।

शहाबुद्दीन के बेटे पर आपराधिक मामले

शहाबुद्दीन के आपराधिक जीवन का साया उसके बेटे ओसामा शहाब पर भी पढ़ा। पिछले साल 2024 में ही ओसामा जेल से बाहर निकला था। ओसामा पर कई आपराधिक मामलों में कुछ महीनों तक जेल में बंद रहा। आखिर में उसे हाई कोर्ट से जमानत मिली। इस वक्त तक ओसामा को शहाबुद्दीन की गुडंराज और डर की राजनीति का विरासत कहा जाने लगा था।

सबसे पहला मामला हुसैनगंज थाना क्षेत्र के छपिया बुजुर्ग स्थित 42 कट्ठा जमीन में दर्ज हुआ था। उसके बाद मोतिहारी में उसके बहनोई से आपसी जमीन विवाद में फायरिंग करने पर भी ओसामा पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी। इसी बीच साल 2023 में ओसामा को राजस्थान के कोटा में ट्रैफिक पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

तभी हुसैनगंज पुलिस ने कोटा पहुँचकर ओसामा को गिरफ्तार कर लिया और वापस ले आई। अब उसपर दर्ज फायरिंग और जमीन विवाद मामले में कोर्ट में पेशी हुई। कोर्ट ने ओसामा को मंडल कारा भेज दिया। कुछ दिन बाद ओसामा को हुसैनगंज मामले में जमानत मिल गई। लेकिन मोतिहारी में दर्ज FIR में वह जेल में बंद रहा। इस मामले में मोतिहारी व्यवहार कोर्ट में उसकी जमानत याचिका खारिज की गई, जिसके बाद पटना हाई कोर्ट से उसे जमानत मिली। आखिर में ओसामा साल 2024 में जेल से रिहा हो गया।

इस बीच शहाबुद्दीन के समर्थकों ने ओसामा के भीतर अपने अब्बा की विरासत को आगे बढ़ाने की ललक देखी क्योंकि शहाबुद्दीन पर भी 19 साल की उम्र में ही पहा आपराधिक केस दर्ज हुआ था, जो साल 2016 तक 39 तक बढ़ गया। शहाबुद्दीन के समर्थकों के मुताबिक, ओसामा भी अब अपराध की बदौलत राजनीति में करियर शुरू कर सकता था।

राजद का शहाबुद्दीन के परिवार पर हाथ

बिहार में राजद सरकार में ‘जंगलराज’ प्रदेश की बर्बादी का कारण रहा है। लालू प्रसाद यादव के इस ‘जंगलराज’ में शहाबुद्दीन का आतंक चरम पर था। इस जंगलराज में शहाबुद्दीन ‘बंदर’ और लालू यादव ‘मदारी‘ थे। लालू यादव और शहाबुद्दीन के बीच रिश्ता अब तक राजद निभा रही है।

शहाबुद्दीन की मौत के बाद भी राजद उसके परिवार का पूरा खयाल रखती है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद ने लोकसभा चुनाव 2024 में सीवान से शहाबुद्दीन की बीवी हिना शहाब को उम्मीदवार बनाया लेकिन उसकी हार के बाद राजद को ये सीट गँवानी पड़ी।

इसके बाद भी खबरें आईं कि बिहार चुनाव 2025 में राजद शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा को दावेदार बना सकती है। जुलाई 2025 में तेजस्वी यादव का शहाबुद्दीन के घर पहुँचकर डिनर करने के बाद ये खबरें और तेज हो गईं।

तेजस्वी यादव का आतंक फैलाने वाले शहाबुद्दीन के परिवार को लेकर काफी ‘नरम’ दिल रहा है। इसीलिए जुलाई 2025 में राजद के स्थापना दिवस पर भी वे शहाबुद्दीन को याद करना नहीं भूले। मंच से तेजस्वी यादन ने ‘शहाबुद्दीन अमर रहे’ के नारे लगवाए।

अब ओसामा शहाब राजद के सिंबल पर बिहार चुनाव में मैदान में है। ये वही समय है जब शहाबुद्दीन पहली बार राजद से चुनाव लड़ा था। फर्क सिर्फ यह है कि अपराधी का चेहरा बदल गया है, चरित्र नहीं। राजद ने ओसामा को टिकट देकर साफ कर दिया कि वह बिहार की राजनीति में अब भी अपराधी छवि को ऊपर मानती है। जबकि नीतीश सरकार में बिहार से जंगलराज हटा है और प्रदेश शिक्षा, विकास की ओर बढ़ा है।


37% शादी कुंडली नहीं मिलाने के कारण टूटी, 63% सनातनी रीतियों की उपेक्षा से… BHU के शोध से सामने आए आँकड़े: 36 गुण ही नहीं, ग्रहों का मिलान भी जरूरी

आज के दौर में शादियाँ टूटने की खबरें आम हो गई हैं। लव अफेयर, लिव-इन रिलेशनशिप और घरेलू हिंसा जैसे कारणों के बीच अब एक नया पहलू सामने आ रहा है- कुंडली मिलान की लापरवाही। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के ज्योतिष विभाग के तीन प्रोफेसरों और दो शोधार्थियों ने इस मुद्दे पर गहन रिसर्च की है। उनके निष्कर्ष चौंकाने वाले हैं।

रिसर्च में पाया गया कि 37 प्रतिशत शादियाँ सिर्फ इसलिए टूट रही हैं क्योंकि वर-वधु की कुंडली ठीक से मिलाई ही नहीं गई। ग्रह दोषों को नजरअंदाज कर शादियाँ कर ली जाती हैं, जिसके बाद रिश्ते बिखर जाते हैं। कभी लव अफेयर में फँसकर एक-दूसरे का मर्डर करवा देते हैं, तो कभी नया साथी तलाशने लगते हैं।

यह रिसर्च बीएचयू के ज्योतिष विभाग में सोमवार (13 अक्टूबर 2025) को आयोजित एक सेमिनार में पेश की गई। सेमिनार में इंदौर के माँ शारदा ज्योतिषधाम अनुसंधान संस्थान ने मेजबानी की। भारत के 15 राज्यों से शोधार्थी पहुँचे, साथ ही नेपाल, सिंगापुर और दुबई से भी विशेषज्ञ शामिल हुए। इस सेमिनार में प्रोफेसर विनय पाण्डेय ने अपना शोधपत्र पढ़ा।

प्रोफेसर विनय पाण्डेय ने कहा, “लड़का-लड़की की कुंडली में 36 में से 32 गुण मिलने के बावजूद ग्रहों का मिलान जरूरी है। लेकिन आजकल लोग मॉडर्न दिखने के चक्कर में सनातन रस्में निभाते ही नहीं। शादी में फोटोशूट और सेल्फी में व्यस्त रहते हैं। मंत्रों का उच्चारण तक नहीं होता। नतीजा? शादियाँ टूट रही हैं, पति-पत्नी एक-दूसरे का खून कर रहे हैं।”

रिसर्च की जरूरत क्यों पड़ी?

प्रोफेसर विनय पाण्डेय से ऑपइंडिया ने खास बातचीत की। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में पति-पत्नी के बीच जघन्य हत्याओं के मामले बढ़े हैं। ज्यादातर केसों में एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर का हाथ होता है। प्रो. विनय ने कहा, “ये चौंकाने वाले हैं। जब कुंडली और ग्रह मिलान ठीक से होता है, तो रिश्ता 100 प्रतिशत सही चलता है। ज्योतिष तो एक तरह की गणित है, वैज्ञानिक तथ्य है।”

रिसर्च की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि हिंदू धर्म में विवाह को अटूट बंधन माना जाता है। लेकिन आधुनिकता के नाम पर परंपराओं को ठुकरा दिया जा रहा है। ज्योतिष विभाग के प्रमुख प्रो. शत्रुघ्न त्रिपाठी कहते हैं, “लोग आधुनिक होने का ढोंग करते हैं। कुंडली मिलान को बकवास मानते हैं। नतीजे आपके सामने हैं – तलाक, हिंसा और हत्याएँ।” रिसर्च टीम ने महसूस किया कि ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक यही समस्या फैल रही है। लिव-इन और लव अफेयर को बढ़ावा मिल रहा है, लेकिन शादी के बाद रिश्ते संभाल नहीं पाते।

रिसर्च कैसे की गई? कितने बड़े दायरे में?

ये रिसर्च करीब डेढ़ साल से चल रही है। आँकड़े आने के बाद उन पर रिसर्च में छह महीने लगे। टीम में प्रो. विनय पाण्डेय, प्रो. आशुतोष त्रिपाठी, प्रो. अमित कुमार मिश्रा, शोधार्थी गणेश प्रसाद और नेपाल की पीएचडी छात्रा रोदना घिनरे शामिल थे।

डेटा इकट्ठा करने के लिए दो तरीके अपनाए गए। पहला बीएचयू ज्योतिष विभाग की ओपीडी से। यहाँ पूरे देश से लोग कुंडली दिखाने आते हैं। दूसरे शोधार्थियों को यूपी के 12 जिलों में भेजा गया। वहाँ उन जोड़ों को चुना गया जिनकी शादी के तीन साल के अंदर तलाक हो गया था। कुल 250 केस इकट्ठे किए गए।

इनके परिवारों से तीन सवाल पूछे गए

  1. शादी से पहले कुंडली मिलाई गई? कितने गुण मिले? कोई ग्रह दोष तो नहीं था?
  2. अगर दोष मिला, तो शादी क्यों की?
  3. शादी के दौरान सनातन रीति-रिवाज पूरी तरह फॉलो किए गए?

ये सवाल सरल थे, लेकिन जवाबों ने सच्चाई उजागर कर दी। प्रो. विनय कहते हैं, “डेटा एनालिसिस में पाया कि 37 प्रतिशत केसों में शादी के एक-दो साल में ही टूटाव आ गया। कारण? कुंडली ठीक से नहीं मिलाई गई। लोग जल्दबाजी में रिश्ता पक्का कर लेते हैं।” बाकी 63 प्रतिशत मामलों में सनातन रीति-रिवाजों की अनदेखी हुई। मुहूर्त होटल बुकिंग के हिसाब से तय किया गया। मंत्रोच्चारण अधूरा रहा। उन्होंने कहा, “शादी एक धार्मिक संस्कार है, लेकिन लोग इसे पार्टी बना देते हैं।”

ज्योतिष आधारित इस रिसर्च का दायरा बड़ा है। यूपी के जिलों के अलावा ओपीडी से राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार जैसे राज्यों के केस शामिल हुए। कुल मिलाकर 250 परिवारों से बातचीत हुई, जो एक मजबूत सैंपल साइज है। अभी शोध को प्रकाशित करने में काफी समय है। डाटा भी और जोड़ा जा रहा है। केसों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है।

शोधार्थी रोदना घिनरे ने नेपाल के परिप्रेक्ष्य से योगदान दिया। उन्होंने बताया कि वहाँ भी कुंडली मिलान की अनदेखी से रिश्ते टूट रहे हैं। हालाँकि प्रो. विनय पाण्डेय कहते हैं कि आँकड़े लगभग इसी राह पर चलने वाले हैं।

इस दौरान प्रो. विनय पाण्डेय से जब सवाल पूछा गया कि जिन लोगों की कुंडलियाँ विवाह के समय नहीं मिलाई जाती, वो भी तो सफल या फिर असफल-दो ही श्रेणियों में आती हैं। ऐसे में सफल और असफल होने के पीछे भी ज्योतिष की गणनाओं को माना जाए? प्रो. विनय पाण्डेय ने कहा, ‘सफल या असफल शादियों, चाहे वो किसी भी धर्म-देश की हों, उनकी भी ज्योतिषीय गणना निकाली जा सकती है। कुंडली न मिलाने का मतलब ये नहीं हुआ कि उनकी कुंडली मिल नहीं रही। पीछे से सबकुछ सही होने पर ही शादियाँ चलती हैं।’

प्रो. विनय पाण्डेय ने कहा कि ज्योतिष को गणितीय नजर से देखेंगे, तो फर्क समझ में आएगा। उन्होंने कहा कि प्रेम-विवाह करने वाली शादियाँ भी टूट रही हैं और वो चल भी रही हैं। अगर उनकी कुंडलियों का मिलान किया जाए, तो सबकुछ सामने आ जाएगा। प्रो. विनय पाण्डेय का कहना है कि गणित हर जगह मौजूद है, चाहे उसकी जानकारी किसी को हो या न हो।

रिसर्च के नतीजों में क्या-क्या सामने आया?

रिसर्च के मुख्य निष्कर्ष यही हैं कि कुंडली मिलान सिर्फ गुणों की गिनती नहीं, बल्कि ग्रहों का गहरा विश्लेषण है। प्रो. विनय ने स्पष्ट किया, “कुंडली मिलान दो तरह का होता है – अष्टकूट (गुण मिलान) और ग्रह मिलान। ज्यादातर ज्योतिषी गुण तो मिला देते हैं, लेकिन ग्रहों की गहराई नहीं देखते। 36 में से 32 गुण मिलने पर भी अगर ग्रह दोष है, तो रिश्ता नहीं चलता।”

हिंदू विवाह
हिंदू विवाह की प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: AI ChatGPT)

मुख्य दोष जो सामने आए

मांगलिक दोष: कुंडली में मंगल पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में हो तो मांगलिक दोष। ऐसे में मांगलिक से ही शादी करनी चाहिए। उपाय तो हैं, लेकिन रिसर्च में पाया कि उपाय के बावजूद 40 प्रतिशत मामलों में समस्या बनी रहती है।

नाड़ी दोष और गण दोष: ये स्वास्थ्य और स्वभाव की असंगति पैदा करते हैं।

चंद्र बल विचार: चंद्रमा वर-वधु की राशि से तीसरा, छठा, सातवाँ, दसवाँ या ग्यारहवाँ भाव शुभ। लेकिन चौथा, आठवाँ या बारहवाँ अशुभ। दान से सुधार संभव, लेकिन अनदेखा करने से वैवाहिक कलह।

शुभ लग्न: तुला, मिथुन, कन्या, वृषभ या धनु लग्न शुभ। लग्न शुद्धि में शनि बारहवें, मंगल दसवें या शुक्र तीसरे भाव में न हो।

मुहूर्त की अनदेखी: पंचांग के आधार पर मुहूर्त चुनना जरूरी। पंचेश्ट अभाव से संतान या रिश्ते की समस्या।

63 प्रतिशत केसों में मुहूर्त होटल बुकिंग पर निर्भर था। प्रो. शत्रुघ्न त्रिपाठी कहते हैं, “36 गुणों में कम से कम 18 का मिलान जरूरी है, लेकिन लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। हिंदू धर्म में तलाक का कोई स्पष्ट वर्णन नहीं है। विवाह मेलापक से पक्का होता है।”

रिसर्च में पाया कि जहाँ कुंडली सही मिलाई गई, वहाँ तलाक की दर शून्य रही। लेकिन लापरवाही से न सिर्फ तलाक, बल्कि घरेलू हिंसा और हत्याएँ बढ़ीं। एक केस में पत्नी ने लव अफेयर के चक्कर में पति का मर्डर करवा दिया। वजह? ग्रह दोष को अनदेखा किया गया।

देशभर में तलाक की दर, जानें – राज्यवार आँकड़े

रिसर्च ने राज्यवार तलाक दरों पर भी रोशनी डाली। भारत में कुल तलाक दर करीब 1 प्रतिशत है, लेकिन शहरी इलाकों में 30 प्रतिशत तक। ग्रामीण क्षेत्रों में कम, लेकिन बढ़ रही है। रिसर्च टीम ने सरकारी आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि ज्योतिषीय लापरवाही ही मुख्य कारण है।

यहाँ राज्यवार प्रमुख आँकड़े दिए जा रहे हैं (प्रतिशत में नवीनतम 2025 डेटा के आधार पर)-

तलाक दर के आँकड़े

ये आँकड़े राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय और विभिन्न सर्वे से लिए गए। उत्तर प्रदेश में 11.6 प्रतिशत दर के साथ रिसर्च के निष्कर्ष मेल खाते हैं – यहाँ कुंडली मिलान की लापरवाही से ही मामले बढ़े। महाराष्ट्र में 18.7 प्रतिशत तक शहरी तलाक, जहाँ फोटोशूट और मॉडर्निटी हावी है। कुल मिलाकर शहरी बनाम ग्रामीण में 30 गुना फर्क है। खास बात ये है कि जॉइंट फैमिली में तलाक दर बेहद कम है, जबकि न्यूक्लियर फैमिली में ये दर ज्यादा है।

सुझाव: परंपराओं को न छोड़ें

रिसर्च टीम ने सुझाव दिए कि शादी से पहले पंडित की सलाह लें। मुहूर्त पंचांग से चुनें, न कि होटल बुकिंग से। ग्रह दोष पर उपाय करवाएँ, लेकिन अनदेखा न करें। प्रो. आशुतोष त्रिपाठी कहते हैं, “लव अफेयर ठीक है, लेकिन शादी के लिए ज्योतिष जरूरी है। ये गणित है, विश्वास नहीं।” सेमिनार में विशेषज्ञों ने कहा कि मॉडर्निटी में परंपरा को अपनाना भी जरूरी है। ऐसे में फोटोशूट तो कराते रहिए, लेकिन मंत्रोच्चार और ज्योतिष की भी भूमिका को स्वीकार करें।

यह रिसर्च न सिर्फ भारत, बल्कि नेपाल-सिंगापुर जैसे देशों के लिए मार्गदर्शक बनेगी। प्रो. अमित कुमार मिश्रा ने कहा, “हमारी कोशिश है कि तलाक की दर 50 प्रतिशत कम हो। बस कुंडली को गंभीरता से लें।”