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भागलपुर में ‘I Love Muhammad’ पोस्टर विवाद: ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट के बाद पुलिस ने कार्रवाई कर मोहम्मद इफ्तेखाल को किया गिरफ्तार, हिंदुओं को निशाना बनाकर की गई थी हिंसा

यह गिरफ्तारी हबीबपुर थाने में दर्ज केस नंबर 188/25 के तहत की गई है, जो 22 अक्टूबर 2025 को दर्ज हुआ था। इस केस में भारतीय दंड संहिता की कई धाराएँ लगाई गई हैं।

बिहार के भागलपुर के हबीबपुर इलाके में ‘I Love Muhammad’ पोस्टर को लेकर भड़की सांप्रदायिक हिंसा के कुछ दिनों बाद पुलिस ने मुख्य आरोपित मोहम्मद इफ्तेखाल उर्फ शेखू को गिरफ्तार कर लिया है। शेखू, मोहम्मद कासिम का बेटा है और हबीबपुर थाना क्षेत्र के चामलीचक मोहल्ले का रहने वाला है।

यह गिरफ्तारी हबीबपुर थाने में दर्ज केस नंबर 188/25 के तहत की गई है, जो 22 अक्टूबर 2025 को दर्ज हुआ था। इस केस में भारतीय दंड संहिता की कई धाराएँ लगाई गई हैं, जिनमें 191(2)(3), 190, 126(2), 115(2), 109, 329(4), 324(4)(5), 299, 351(2)(3) और 352 शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार, 20 और 21 अक्टूबर 2025 को स्टेशन रोड इलाके में एक दुकान पर जबरन ‘I Love Muhammad’ लिखा पोस्टर चिपकाने को लेकर विवाद बढ़ गया था। इस पोस्टर को लेकर स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई थी, जिसके बाद हिंसा भड़क उठी। पुलिस ने पहले ही इस मामले में तीन अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था।

घटना के बाद DSP (टाउन) के नेतृत्व में एक विशेष जाँच टीम बनाई गई, जिसमें थानाध्यक्षों और सर्किल इंस्पेक्टरों को शामिल किया गया। इस टीम ने कई जगहों पर छापेमारी की और संदिग्धों से पूछताछ की। जाँच में पता चला कि इलाके में मजहबी नारों और संदेशों के जरिए माहौल को सांप्रदायिक बनाने की कोशिश की गई थी।

हबीबपुर, जहाँ मुस्लिम आबादी अधिक है, वहाँ हिंसा के दौरान हिंदू परिवारों और व्यापारियों को निशाना बनाए जाने की शिकायतें सामने आईं। कई दुकानदारों ने बताया कि उन्हें दुकानें बंद करने और कुछ मजहबी नारे लगाने के लिए मजबूर किया गया, ताकि उन पर हमला न हो।

फिलहाल इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और लगातार गश्त की जा रही है, ताकि दोबारा तनाव न बढ़े। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हालात अब नियंत्रण में हैं, लेकिन जाँच जारी है और आगे और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।

भागलपुर पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि किसी भी अफवाह या भड़काऊ संदेश पर विश्वास न करें, खासकर सोशल मीडिया पर फैल रही गलत सूचनाओं से बचें।

भागलपुर से ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट

भागलपुर के हबीबपुर इलाके में भड़की हिंसा के पीछे डर, अकेलेपन और लगातार हो रहे उत्पीड़न की दर्दनाक कहानी छिपी है। ऑपइंडिया की टीम जब घटनास्थल पर पहुँची, तो उन्हें एक ऐसे हिंदू परिवार की व्यथा सुनने को मिली जो अब मुस्लिम बहुल इलाके में लगभग अकेला रह गया है।

परिवार की मुखिया गौरी देवी ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि उनका परिवार पीढ़ियों से यहीं रह रहा है, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि उन्हें बार-बार घर बेचकर जाने की धमकियाँ दी जाती हैं। उन्होंने कहा, “हम तो यहीं के हैं, लेकिन 2013 से लगातार कहा जा रहा है कि घर बेच दो, यहाँ हिंदुओं की जगह नहीं है।”

गौरी देवी ने बताया कि साल 2022 में जब वे पूजा के लिए बाहर गई थीं, तब उनके घर पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई। करीब 9 लाख की संपत्ति जलकर खाक हो गई। उन्होंने कहा, “जब हमने घर फिर से बनाना शुरू किया, तो उन्होंने 10,000 या 20,000 रुपए माँगे, सिर्फ इसलिए कि हम दीवार खड़ी कर सकें। पैसे देने के बाद भी हम पर हमला करते रहे।”

उनकी बहू, जो सदमे में थी, उन्होंने बताया कि काली पूजा के दौरान जब उन्होंने काली माँ का बैनर लगाया, तो कुछ लोगों ने उसे फाड़ दिया और कहा, “यहाँ कोई हिंदू त्योहार नहीं मनाया जाएगा।”

उन्होंने बताया, “जब हमने विरोध किया, तो उन्होंने हमारे घर पर पत्थर फेंके। मेरी चाची के दाँत भी टूट गए।” यह कहानी हबीबपुर में एक हिंदू परिवार के उस संघर्ष को दिखाती है जो अपने ही घर में डर और असुरक्षा के साये में जीने को मजबूर है।

‘हम कैदियों की तरह रहते हैं’: हबीबपुर के साए में जीवन

हबीबपुर में गौरी देवी और उनका परिवार अब एक किले में रहने जैसी जिंदगी जी रहा है। उनका घर अब एक मजबूत चौकी की तरह बन गया है, चारों ओर सीसीटीवी कैमरे, लोहे के गेट और ऊँची दीवारें। गौरी देवी के बेटे ने बताया, “हमने अपने घर को किला बना लिया है। हर रात डर के साए में सोते हैं, बाहर जरा सी आवाज आती है तो दिल की धड़कन तेज हो जाती है।”

घर के पीछे बने एक छोटे से तहखाने की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “अगर भीड़ जुटती है तो हम वहीं छिप जाते हैं। ये कोई आराम की जगह नहीं, बल्कि बचने की जगह है।”

उनका पुराना ढाबा, जो कभी सांप्रदायिक सह-अस्तित्व का प्रतीक था, अब बंद पड़ा है। गौरी देवी ने उदास होकर कहा, “उन्होंने धमकी दी, अगर फिर से खाना बेचा तो गोली मार देंगे। अब तो लोगों को खिलाना भी पाप हो गया है, सिर्फ इसलिए कि हम हिंदू हैं।”

हबीबपुर की गलियाँ तंग हैं और ज्यादातर इलाका मुस्लिम बहुल है। चारों ओर मस्जिदें और मजारें हैं और लगभग हर छत पर इस्लामिक झंडे लहराते हैं। ऐसे माहौल में जब कोई हिंदू घर दीवाली पर दीये जलाता है या काली पूजा की सजावट करता है, तो वो जैसे विरोध का प्रतीक बन जाता है।

गौरी देवी ने बताया, “जब हम अपने त्योहार मनाते हैं, तो हमें चिढ़ाते हैं। बच्चे पटाखे जलाते हैं तो वे छीन लेते हैं और कहते हैं, ‘तुम हिंदू बहुत हिम्मती हो गए हो।’ लेकिन ये हमारा घर है, हम क्यों छोड़ें?”

अक्टूबर 2025 में ‘I Love Muhammad’ पोस्टर के विवाद के बाद डर और बढ़ गया। उस रात तनाव के बीच एक भीड़ ने उनके घर पर पथराव किया। तब से यह परिवार लगातार भय में जी रहा है, चारों ओर धर्म के प्रतीक हैं, लेकिन उन्हें अपने धर्म का पालन करने की आजादी नहीं।

यह रिपोर्ट मूल रुप से अंग्रेजी में लिखी गई है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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