Homeवीडियोबिहार चुनाव 2025सिवान का 'मसीहा' या माफिया? शहाबुद्दीन की मौत के बाद भी जिंदा है डर

सिवान का ‘मसीहा’ या माफिया? शहाबुद्दीन की मौत के बाद भी जिंदा है डर

ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि प्रतापपुर गाँव में शहाबुद्दीन के घर के बाहर समर्थक जुटते हैं और उसके अपराधों को भूलकर तारीफ करते हैं। हकीकत ये है कि शहाबुद्दीन पर हत्या, फिरौती, तेजाब डालने जैसे दर्जनों केस थे। उनके गुर्गों ने चंदा बाबू के बेटों को तेजाब से नहलाया था।

बिहार के सिवान में लालू यादव के जंगलराज के दौर में RJD के बाहुबली शहाबुद्दीन का खौफ इतना था कि लोग दिनदहाड़े काँपते थे। 2021 में कोविड से मौत के बाद भी उनके मुस्लिम समर्थक उन्हें गरीबों का मसीहा और देश का रक्षक बताते नहीं थकते। ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि प्रतापपुर गाँव में शहाबुद्दीन के घर के बाहर समर्थक जुटते हैं और उसके अपराधों को भूलकर तारीफ करते हैं।

एक समर्थक ने कहा, “साहेब ने गरीबों के लिए स्कूल-हॉस्पिटल बनवाए, ऊँची जातियों के गुंडों से मुस्लिमों को बचाया। वो देश के मसीहा थे।” जबकि हकीकत ये है कि शहाबुद्दीन पर हत्या, फिरौती, तेजाब डालने जैसे दर्जनों केस थे। उनके गुर्गों ने चंदा बाबू के बेटों को तेजाब से नहलाया था।

रिपोर्टर अनुराग मिश्रा से बातचीत में युवकों ने ओसामा (शहाबुद्दीन का बेटा) की जीत के लिए धमकी भरे अंदाज में कहा, “पोस्टर फाड़ने वालों को जिंदा जला देंगे।” आम लोग डरते हैं कि जंगलराज लौट रहा है, लेकिन समर्थक गुनाहों पर सफेदी पोत रहे हैं।

देखें ग्राउंड रिपोर्ट

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अनुराग
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