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आए थे पहलवानों का समर्थन करने, आपस में झगड़ बैठे खाप नेता: किसानों के मुद्दे को लेकर हुआ बवाल – अब 7 सदस्यीय कमिटी लेगी फैसला

पहलवानों के समर्थन में हरियाणा के कुरुक्षेत्र (Kurukshetra, Haryana) में खाप पंचायत (Khap Panchayat) का आयोजन किया गया। इस दौरान खाप नेताओं के बीच आपस में ही भिड़ंत हो गई। वहाँ मौजूद लोगों ने आपस में लड़ रहे खाप नेताओं को काफी देर तक शांत कराने की कोशिश की। इसके बाद मामला शांत हुआ।

दरअसल, पहलवानों ने कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न समेत कई तरह के आरोप लगाए हैं। साथ ही पहलवान भाजपा सांसद की गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं। इन पहलवानों के समर्थन में जाट समाज के खाप नेताओं ने हरियाणा के कुरुक्षेत्र में महापंचायत करने का ऐलान किया था। इसके बाद खाप नेता शुक्रवार (2 जून 2023) को कुरुक्षेत्र पहुँचे।

चूँकि, खाप पंचायत पहलवानों के समर्थन में बुलाई गई थी, ऐसे में वहाँ सिर्फ पहलवानों की ही बात हो रही थी। ऐसे में वहाँ मौजूद कुछ खाप नेताओं ने पहलवानों के अलावा किसानों का भी मुद्दा उठाने की कोशिश की। खाप नेताओं का कहना था कि पहलवानों की बात तो हो ही रही है, किसानों के कुछ मुद्दे और उनकी माँगें अब तक पूरी नहीं हुई हैं। इस मुद्दे को लेकर खाप नेता दो गुटों में बँट गए। फिर शुरुआती बहस के बाद मामला धक्का-मुक्की और हाथापाई तक पहुँच गया।

खाप नेताओं के बीच हुई झड़प का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में खाप नेताओं के मंच के सामने आकर माइक में बोल रहे एक व्यक्ति को रोकने की कोशिश करते देखा जा सकता है। वहीं, कुछ अन्य नेता गुस्से में एक दूसरे पर चिल्लाते दिखाई दिए। वीडियो के आखिर में खाप नेताओं के बीच हुई धक्का-मुक्की भी देखी जा सकती है।

जाट धर्मशाला में पहुँचे किसान नेता राकेश टिकैत इस मुद्दे को इंटरनेशनल स्तर पर ले जाया जाएगा। बता दें कि इस खाप पंचायत में हरियाणा के अलावा उत्तर प्रदेश और राजस्थान के खाप नेता तथा भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत समेत कई किसान नेता शामिल हुए। इस दौरान राकेश टिकैत ने कहा है कि सरकार की नजर खाप पंचायत के फैसलों पर है।

राकेश टिकैत ने कहा कि उत्तर प्रदेश में हुई खाप पंचायत में फैसला लिया गया था कि कुरुक्षेत्र में होने वाली खाप पंचायत में फैसला होगा। इसलिए हर हाल में यहाँ से फैसला लेकर ही उठेंगे। वहीं, इस दौरान राकेश टिकैत समेत 7 सदस्यों की एक कमिटी का भी ऐलान किया गया। यही कमेटी पहलवानों के मुद्दे पर आगे के फैसले लेगी।

‘चटाई पर लेटी थी आकर टी-शर्ट खींची’: 2 FIR-15 मामले, बृजभूषण सिंह पर केस की डिटेल आई सामने, पेट-पीठ-स्तन पर हाथ फेरने के दावे

भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के अध्यक्ष व बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) के खिलाफ दिल्ली पुलिस (Delhi) द्वारा दर्ज की गई दोनों FIR सामने आ गई हैं। दोनों में उनके खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए हैं। इसमें प्रोफेशनल मदद के बदले सेक्सुअल फेवर माँगने के कम से कम दो मामलों का जिक्र किया गया है।

इसके अलावा भाजपा सांसद के खिलाफ यौन उत्पीड़न के 15 मामलों का भी जिक्र है, जिनमें से 10 में गलत तरीके से छूने की शिकायत की गई है। शिकायत में बिना सहमति के गलत तरीके से छूना, स्तनों और पेट पर हाथ फेरना, पीठ पर हाथ रखना, डराना-धमकाना और पीछा करना शामिल है। यह शिकायत कनॉट प्लेस थाने में 21 अप्रैल 2023 को दी गई थी, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने 28 अप्रैल 2023 को दो एफआईआर दर्ज की थी।

दोनों एफआईआर में IPC की धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से उस पर हमला करना या अपमानित करने के लिए बल का प्रयोग), 354A (यौन उत्पीड़न), 354D (पीछा करना) और 34 (सामान्य इरादे) का हवाला दिया गया है। इन धाराओं में एक से तीन साल की जेल की सजा का प्रावधान है।

पहली प्राथमिकी में 6 बालिग पहलवानों के आरोप हैं। इसमें WFI के सचिव विनोद तोमर का भी नाम है। वहीं, दूसरी प्राथमिकी एक नाबालिग के पिता की शिकायत पर आधारित है, जिसमें POCSO अधिनियम की धारा 10 जोड़ी गई है। इसमें पाँच से सात साल की सजा का प्रावधान है। जिन घटनाओं का उल्लेख किया गया है, वे कथित तौर पर 2012 से 2022 तक भारत और विदेशों में हुई हैं।

नाबालिग के पिता ने अपनी शिकायत में बृजभूषण शरण सिंह पर आरोप लगाया है कि उनकी बेटी के परेशान रहने के बावजूद WFI चीफ द्वारा लगातार उसका यौन उत्पीड़न किया जा रहा था। प्राथमिकी के अनुसार, नाबालिग ने आरोप लगाया है, “उसे कसकर पकड़कर, तस्वीर लेने का नाटक करते हुए आरोपित ने अपनी ओर खींचा। उसके कंधे को जोर से दबाया और फिर जानबूझकर… उसके स्तनों पर हाथ फेरा।”

एफआईआर में आगे बताया गया है, “नाबालिग स्पष्ट रूप से आरोपित से कहा था कि वह पहले ही उसे बता चुकी है कि उसे किसी भी प्रकार के शारीरिक संबंध बनाने में कोई दिलचस्पी नहीं है और उसे उसका पीछा करना बंद कर देना चाहिए।” वहीं, 6 बालिग पहलवानों ने भी अपनी शिकायत में बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं।

एक पहलवान ने आरोप लगाया है, “एक दिन आरोपित ने होटल के रेस्तरां में रात के खाने के दौरान मुझे अपनी मेज पर बुलाया। उसने मेरी सहमति के बिना मुझे टच किया। मेरे स्तन पर अपना हाथ रखा और पेट तक छुआ। रेसलिंग फेडरेशन के ऑफिस में बिना मेरी इजाजत के मेरे घुटनों, कंधों और हथेली को छुआ गया। अपने पैर से मेरे पैर को भी टच किया गया। मेरी साँस चेक करने के बहाने आरोपित ने अपना हाथ मेरे पेट से नीचे सरका दिया।”

इसी तरह अन्य महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर उन्हें गलत तरीके से छूने का आरोप लगाया है। एक अन्य पहलवान ने आरोप लगाया है कि जब वह चटाई पर लेटी हुई थी, तभी भाजपा सांसद उसके पास आए और पहलवान की अनुमति के बिना उसकी टी-शर्ट खींची। इसके बाद उन्होंने अपना हाथ उसकी छाती पर रख दिया और साँस की जाँच करने के बहाने नाभि पर हाथ फेरा।

एक खिलाड़ी ने कहा, “फेडरेशन के ऑफिस में मैं भाई के साथ थी। मुझे बुलाया गया और भाई को रुकने को कहा गया। कमरे में आरोपित ने मुझे जबरदस्ती अपनी तरफ खींचा। उसने मुझे गले लगाया और यौन संबंध बनाने के बदले प्रोफेशनल मदद देने की बात कही।”

एक और शिकायत में खिलाड़ी ने बताया, “मैं लाइन में सबसे पीछे थी, तभी उसने मुझे गलत तरीके से छुआ। जब मैंने दूर जाने की कोशिश की तो उसने मेरे कंधे को पकड़ लिया। तस्वीर के बहाने कंधे पर हाथ रखा, जिसका मैंने विरोध किया। इसके बाद आरोपित ने मुझसे कहा ज्यादा स्मार्ट बन रही है क्या… आगे कोई कॉम्पिटिशन नहीं खेलना क्या तुझे।”

गौरतलब है कि बृजभूषण सिंह ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है। वहीं, विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया समेत तमाम पहलवान 23 अप्रैल 2023 से बृजभूषण सिंह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। पहलवानों ने इस साल जनवरी में भी धरना दिया था, तब उन्होंने यौन शोषण का आरोप लगाकर जाँच की माँग की थी। उस वक्त उन्होंने पुलिस में FIR दर्ज नहीं कराई थी।

नेपाल के PM प्रचंड ने महाकाल के किए दर्शन, पत्नी के स्वास्थ्य के लिए की विशेष पूजा: इंदौर में कचरा मैनेजमेंट भी देखेंगे

नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड भारत के दौरे पर हैं। शुक्रवार (02 जून 2023) को नेपाल के पीएम मध्य प्रदेश के उज्जैन पहुँचे। जहाँ पीएम प्रचंड ने भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकाल के दर्शन किए। इसके पहले प्रचंड इंदौर पहुँचे थे। यहाँ सीएम शिवराज सिंह चौहान ने उनका स्वागत किया।

प्रचंड का स्वागत करने के बाद सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “नेपाल और भारत दोनों ही प्राचीन और महान राष्ट्र हैं। ऐसा लगता है कि शरीर दो हैं लेकिन संस्कृति, सभ्यता और संस्कार एक हैं। उसी भाव से हमने राज्य की परंपरा के अनुरूप नेपाल के प्रधानमंत्री का स्वागत किया है। मुझे उम्मीद है कि उनकी इस यात्रा से दोनों देशों के संबंध और प्रगाढ़ होंगे। इंदौर में कुछ देर ठहरने के बाद वे उज्जैन के लिए रवाना हो गए।”

उज्जैन पहुँचने के बाद महाकालेश्वर मंदिर के पुजारियों ने उनका सत्कार किया और उन्होंने बाबा महाकालेश्वर के दर्शन किए। इतना ही नहीं उन्होंने गर्भ गृह में महाकाल की खास पूजा भी की। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने अपनी बीमार पत्नी के स्वास्थ्य लाभ के लिए विशेष पूजा की। पूजा के दौरान नेपाल के पीएम ने भगवान महाकालेश्वर को नेपाल से लाए 100 रुद्राक्ष और 51 हजार रुपए नकद चढ़ाए।

इसके बाद नेपाल के प्रधानमंत्री इंदौर लौट गए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इंदौर में नेपाल के पीएम कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। पीएम प्रचंड और राज्यपाल मंगुभाई पटेल एक बैठक भी करेंगे। इसके साथ ही प्रचंड इंदौर का कचरा प्रबंधन देखेंगे। बता दें इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर है।

नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड बुधवार (31 मई) को अपने चार दिवसीय दौरे पर भारत पहुँचे थे। गुरुवार (1 जून)को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए। पीएम मोदी और प्रचंड ने गुरुवार (1 जून 2023) की दोपहर दोनों देशों की सीमा पर बसे भारत के सोनौली के समीप केवटलिया गाँव व नेपाल के भैरहवा के समीप इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट का संयुक्त रूप से वर्चुअल शिलान्यास किया। रेलवे के कुर्था-बीजलपुरा खंड की ई-योजना का अनावरण किया।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत और नेपाल के बीच मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)-अमलेखगंज तेल पाइपलाइन के फेज-2 का संयुक्त रूप से शिलान्यास किया। बथनाहा से नेपाल कस्टम यार्ड तक भारतीय रेल कार्गो ट्रेन को झंडी दिखाकर रवाना भी किया। इसके साथ ही सीमा विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने पर भी सहमति व्यक्त की गई।

2660 फर्जी कंपनी बनाकर ₹10 हजार करोड़ का फ्रॉड, 6 लाख 35 हजार पैन कार्ड मिले: नोएडा पुलिस ने मास्टरमाइंड सहित गिरोह के 8 लोगों को दबोचा

उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर पुलिस (नोएडा पुलिस) ने फर्जी कंपनियाँ बनाकर सरकार को 10,000 करोड़ रुपए का चुना लगा चुके एक गिरोह के 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरोह में महिलाएँ भी शामिल हैं। पूरा गिरोह लगभग पाँच सालों से फर्जीवाड़े का खेल खेल रहा था। इनके पास से 6 लाख 35 हजार लोगों के पैन कार्ड मिले हैं। इन लोगों ने 2,660 शेल कंपनियाँ बनाई हुई थीं, जिसके फर्जी बिल तैयार कर सरकार से जीएसटी रिफन्ड प्राप्त कर सरकार को करोड़ों का चुना लगा रहे थे।

पुलिस की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार, 10 मई 2023 को नोएडा फिल्म सिटी (सेक्टर-16) में काम करने वाले एक पत्रकार ने सेक्टर-20 थाने में पैन कार्ड से फर्जीवाड़े की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद जाँच शुरू हुई थी। पता चला कि शिकायतकर्ता के पैन कार्ड का इस्तेमाल कर 2 फर्जी कंपनियाँ चलाई जा रही थीं। एक कंपनी पंजाब के लुधियाना में और दूसरी महाराष्ट्र के सोलापुर में चलाई जा रही थीं।

पुलिस की जाँच जब आगे बढ़ी तो पूरे गिरोह का पता चला। जाँच के दौरान यह भी पता चला कि गिरोह के पास 6 लाख 35 हजार से भी अधिक लोगों के पैन नंबर उपलब्ध हैं। इस गिरोह में कई लोग प्रमुख थे। पहला था दीपक मुरजानी और उसकी पत्नी विनीता। दोनों दिल्ली के रहने वाले हैं।

दूसरा है यासीन शेख, जो मुंबई में वेबसाइट बनाने का काम करता था। इसके अलावा साहिबाबाद के आकाश सैनी, हाथरस के अतुल सेंगर, नोएडा की अवनी, दिल्ली के दीपक मुरजानी, दीपक की पत्नी विनीता, दिल्ली के ही विशाल और राजीव को दिल्ली के मधु विहार स्थित उनके कार्यालय से गिरफ्तार किया गया है।

ऐसे बनाते थे फर्जी कंपनी

फर्जी कंपनी बनाकर सरकार को चूना लगाने वाला गिरोह दिल्ली में मधु विहार, शहादरा और पीतमपुरा में ऑफिस संचालित कर रहा था। इसके अलावा भी इनके कई ऑफिस होने की बात कही जा रही है। गिरोह दो टीमों में काम करता था। पहली टीम के सदस्यों का काम कम जागरूक लोगों के पैन कार्ड और आधार कार्ड हासिल करना होता था।

पहले वे जस्ट डायल के माध्यम से डेटा कलेक्ट करते थे। फिर टीम के सदस्य ऐसे लोगों की तलाश करते थे, जिनके पैन कार्ड और आधार कार्ड का इस्तेमाल कर फर्जी कंपनी बनाई जा सके। इसके लिए वे लोग नशेड़ी लोगों को फँसाते थे। इसके बाद ये लोग रेन्ट एग्रीमेन्ट और बिजली का बिल बनाते थे। यहाँ तक कि उनके नाम पर नया सिम कार्ड भी लिया जाता था, ताकि ओटीपी दर्ज करने में परेशानी न हो।

आधार कार्ड, पैन कार्ड, रेन्ट एग्रीमेन्ट, इलेक्ट्रीसिटी बिल आदि का उपयोग कर जीएसटी नंबर सहित फर्जी फर्म (कंपनी) तैयार कर लिया जाता था। उसके बैंक अकाउंट से लेकर ठगी के लिए जरूरी सभी कागजात तैयार कर लिए जाते थे। यह सब काम गिरोह के लोगों के बीच बँटा हुआ था।

अब दूसरी टीम फर्जी कंपनी को पहली टीम से खरीद करती थी। कंपनियों को 80-90 हजार रुपए नकद में खरीदा जाता था। फिर फर्जी बिल का उपयोग कर जीएसटी रिफन्ड (आईटीसी इंपुट टैक्स क्रेडिट) के रुप में सरकार से करोड़ों रुपए प्राप्त कर लिए जाते थे। इस तरह हर कंपनी के लिए हर महीने 2-3 करोड़ रुपए का ई-बिल जेनरेट करते थे।

पुलिस से हुई पूछताछ में गिरोह के अन्य लोगों का भी पता चला है। पूछताछ और जाँच के आधार पर पुलिस आंछित गोयल, प्रदीप गोयल, अर्चित, मयूर उर्फ मणि नागपाल, चारू नागपाल, रोहित नागपाल, दीपक सिंघल व अन्य की तलाश कर रही है।

जिस लव जिहादी की हुई कुटाई, उसका अब्बा और भाई भी गिरफ्तार: पीड़िता से कहा था- जैसा आसिफ कह रहा करो, नहीं तो तुझे वह मार देगा

राजस्थान के उदयपुर में पेशी के दौरान लव जिहादी मोहम्मद आसिफ भुट्टों की लोगों ने पिटाई कर दी थी। पुलिस ने उसके अब्बा अब्दुल रज्जाक और भाई खालिद को भी गिरफ्तार किया है। तीनों पर हिंदू लड़की पर इस्लाम कबूल कर निकाह के लिए दवाब बनाने का आरोप है। आसिफ ने लड़की को फोन कर टुकड़े-टुकड़े करने की धमकी दी थी।

रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता जिस कॉलेज में पढ़ती है उसकी पार्किंग का ठेका आसिफ के पास है। पार्किंग में ही दोनों की मुलाकात हुई थी। दोस्ती के बाद आसिफ लड़की पर धर्म परिवर्तन कर निकाह का दवाब बनाने लगा। लड़की ने धर्मांतरण और निकाह से इनकार करते हुए आसिफ से दोस्ती खत्म कर ली।

लेकिन पीड़िता का आरोप है कि इसके बाद आसिफ उसे लगातार परेशान करने लगा। वह बार-बार धर्मांतरण और निकाह के लिए दवाब बना रहा था। मना करने पर आसिफ ने उसके साथ मारपीट भी की। एक बार उसकी शिकायत पर आसिफ जेल भी गया था। लेकिन जमानत पर बाहर आने के बाद आसिफ ने उसे फिर से धमकाना शुरू कर दिया। उसका मोबाइल नंबर सोशल मीडिया पर डाल कर बदनाम करने की कोशिश की।

आसिफ की इन हरकतों से तंग आकर पीड़ित लड़की ने आसिफ के अब्बा अब्दुल रज्जाक को पूरी घटना के बारे में बताया। अपने और आसिफ के बीच हुई व्हाट्सएप चैट भी उसने अब्दुल को दिखाई। आसिफ के भाई खालिद से भी उसने शिकायत की थी। लेकिन इन दोनों ने भी उसे डराया धमकाया। उससे कहा कि आसिफ जैसा कहता है वह वैसा करे। नहीं तो आसिफ उसे मार डालेगा।

इस बीच मंगलवार (30 मई, 2023) को मोहम्मद आसिफ ने पीड़ित लड़की को फोन कर धमकाया। बुधवार (31 मई, 2023) को भी जान से मारने की धमकी दी। पीड़िता का आरोप है कि आसिफ ने उससे कहा था- तेरे टुकड़े-टुकड़े कर तेरी माँ को सौंप दूँगा। तेरा हाल भी दिल्ली की साक्षी जैसा कर दूँगा। आसिफ की धमकियों से डरी हुई पीड़िता ने बुधवार दोपहर उदयपुर के अंबामाता थाने में मामला दर्ज कराया। रिपोर्ट के अनुसार, जब पीड़िता थाने पहुँची तो वह बेहद डरी हुई थी। वह डर के मारे काँप रही थी और पुलिसकर्मियों से खुद को बचाने की बात कह रही थी। 

पीड़िता की शिकायत के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मोहम्मद आसिफ, खालिद और अब्बा रज्जाक को बुधवार (31 मई 2023) शाम गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद गुरुवार (1 जून 2023) को पुलिस पेशी के लिए तीनों को कोर्ट लेकर पहुँची थी। जहाँ पीड़िता को देख आसिफ ने उस पर टिप्पणी कर दी। इससे गुस्साई भीड़ ने न केवल आसिफ बल्कि उसके भाई और अब्बा की भी लात घूँसों से जमकर धुनाई कर दी।

जिसके लिए भगवान शिव ‘चिलमबाज’, वह अमेरिका में राहुल गाँधी की बगलगीर: जमात-ISI-जॉर्ज सोरोस से भी सुनीता विश्वनाथ के कनेक्शन

राहुल गाँधी इन दिनों 10 दिन के अपने अमेरिका के दौरे पर हैं। इस बीच हडसन यूनिवर्सिटी ने उनकी बैठक की एक तस्वीर को साझा किया है। इसमें एक महिला सुनीता विश्वनाथ उनके बगल में बैठी है। अब इसी तस्वीर को देखने के बाद भाजपा ने उनपर निशाना साधा है। भाजपा नेता अमित मालवीय ने इस संबंध में एक ट्वीट कर बताया है कि सुनीता विश्वनाथ है कौन और कैसे वो भारत विरोधी कार्यक्रमों में हिस्सा लेती रही हैं और अब राहुल गाँधी के साथ बढ़-चढ़कर हैं।

कौन है सुनीता विश्वनाथ?

बता दें कि सुनीता विश्वनाथ हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स नामक संगठन की सह-संस्थापक हैं जो समय-समय पर हिंदुओं के नाम पर हिंदुओं के खिलाफ झूठ और प्रोपेगेंडा फैलाने का काम करता है। ‘हिंदू बनाम हिंदुत्व’ के नैरेटिव चलाकर लोगों को भ्रमित करने का काम ये संगठन करता रहा है। वहीं खुद सुनीता विश्वनाथ हिंदू देवी देवताओं को बदनाम करने के लिए उल-जुलूस बातें करती भी देखी जा चुकी हैं।

हिंदू देवताओं पर लिखी आपत्तिजनक बातें

कुछ समय पहले विवादित ‘काली’ वेबसीरीज पर उठे विवाद पर इस महिला ने आकर सीरीज की निर्माता के पक्ष में हिंदू देवताओं के लिए उल-जुलूस बातें की थीं। अपने लेख में सुनीता ने महादेव की चिलम फूँकती तस्वीर लगाकर यहाँ तक कहा था कि हिंदुओं में शराब और सिगरेट कुछ निषेध नहीं है। देवताओं को ये सब चढ़ता है। सुनीता ने अपने लेख में सेक्स और समलैंगिकता को घुसाकर ये तक लिखा था कि धर्मग्रंथों में अनगिनत ऐसी कहानियाँ भरी पड़ी हैं जिन्हें पढ़कर समलैंगिकता से पैदा हुए बच्चों का पता चलता है। सुनीता ने यह भी लिखा था कि हिंदुओं के कुछ देवता तो समलैंगिक भी हैं। काली के आपत्तिजनक दृश्यों को सपोर्ट करने के लिए सुनीता ने साफ लिखा था कि हिंदू देवता धूम्रपान, मदिरापान करते हैं। इसके अलावा वो माँस-मीट भी खाते हैं।

भारत विरोधी सुनीता विश्वनाथ

सुनीता के लेखों में भाजपा के प्रति नफरत भी उजागर होती रही है। करण थापर के एक शो में उन्होंने कहा था कि भारत के हिंदुओं के लिए जरूरी है कि वो हिंदुत्व से लड़ें क्योंकि जो आज हो रहा है वो नरसंहार की शुरुआत है। सुनीता का पक्ष देखने के बाद ये भी हैरान करने वाला नहीं है कि उनके संबंध प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष भारत विरोधी इस्लामी संगठनों (जमात-ISI) से हैं। वह भारतीय अमेरिकी मुस्लिम परिषद (IAMC) जैसे इस्लामी संगठनों के साथ कई कार्यक्रमों की मेजबानी करती और साथ ही उनकी एक संस्था ‘वीमन फॉर अफगान वीमन’ एंटी इंडिया जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसायटी फाउंडेशन से खुला फंड पाती है। 

याद दिला दें कि जॉर्ज पिछले कुछ समय में से भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा चलाने के लिए काफी चर्चा में रह चुका है। सुनीता-जॉर्ज के कनेक्शन पर ही अमित मालवीय ने उजागर करते हुए कहा कि सुनीता जॉर्ज सोरोस की प्रतिनिधि हैं, जिन्होंने विपक्षी नेताओं, थिंक टैंक, पत्रकारों, वकीलों और कार्यकर्ताओं के एक नेटवर्क के माध्यम से भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने के लिए $1 बिलियन का वादा किया है।

₹1 हर्जाना वसूलने बॉम्बे हाईकोर्ट पहुँच गया छोटा राजन, पत्रकार की हत्या पर बनी वेब सीरीज से जुड़ा है मामला: गैंगस्टर ने SCOOP को बताया पर्सनालिटी राइट्स का उल्लंघन

दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद गैंगस्टर राजेंद्र निकल्जे उर्फ छोटा राजन (Chhota Rajan) ने वेब सीरीज ‘स्कूप’ के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) में याचिका दायर की है। उसने ‘स्कूप’ के प्रोड्यूसर और फिल्ममेकर्स के खिलाफ मानहानि, निजी अधिकारों और बौद्धिक संपदा के उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए हर्जाने के रूप में 1 रुपए की माँग की है।

हालाँकि, बॉम्बे उच्च न्यायालय ने शुक्रवार (2 जून 2023) को ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स को गैंगस्टर छोटा राजन के मुकदमे पर आधारित ‘स्कूप’ सीरीज को हटाने का निर्देश देने से इनकार कर दिया। वेब सीरीज ‘स्कूप’ शुक्रवार (2 जून 2023) को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई है। कोर्ट की अवकाश कालीन एक पीठ ने शुक्रवार (2 जून 2023) को उसकी याचिका पर सुनवाई की।

जस्टिस शिवकुमार डिगे ने कहा कि यह वेब सीरीज प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो गई है। इसलिए इस मामले को अगले सुनवाई पर देखा जाएगा। अदालत ने छोटा राजन को यह बताने के लिए अपने मुकदमे में संशोधन करने की अनुमति दी कि यह मामला कैसे बौद्धिक संपदा अधिकारों का है। इस पर बुधवार (7 जून 2023) को सुनवाई होगी।

राजन ने अपनी याचिका में कहा कि मई 2023 में उसकी पत्नी ने सीरीज के ट्रेलर के बारे में उसे बताया था। इसमें उसकी सहमति के बिना मानहानि के साथ उसके निजी अधिकारों का उल्लंघन किया गया है। उसने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि इस वेब सीरीज के फिल्ममेकर्स को उसने अपने नाम, छवि, आवाज और उससे संबंधित अन्य चीजों का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी थी।

राजन का कहना है कि इस वेब सीरीज में दिखाई गई जानकारी गलत, झूठ और भ्रामक है। केवल उसके नाम, छवि और अन्य चीजों का दुरुपयोग कर जनता के बीच सनसनी पैदा करने और उसके जरिए लाभ कमाने के लिए ऐसा किया गया है।

‘स्कूप’ वेब सीरीज जाने-माने क्राइम रिपोर्टर ज्योतिर्मय डे की मौत के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनकी 11 जून 2011 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में राजन के साथ 11 अन्य आरोपितों पर केस दर्ज किया गया था और गैंगस्टर को दोषी ठहराया गया था। आरोपितों में से एक पत्रकार जिग्ना वोरा को इस मामले में बरी कर दिया गया था।

छोटा राजन का कहना है कि ट्रेलर में उसे डे की हत्या के मुख्य साजिशकर्ता के रूप में दिखाया गया है। उसने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि सजा के खिलाफ एक अपील बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित थी। इसलिए ट्रायल कोर्ट की सजा का इस्तेमाल उसके खिलाफ नहीं किया जा सकता था।

राजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मिहिर देसाई ने तर्क दिया कि राजन की छवि पर कॉपीराइट है। उन्होंने कहा, “क्या आप उन्हें इस तरह से पूरी दुनिया के सामने दोषी के रूप में दिखा सकते हैं? सेलिब्रिटी के भी अधिकार हैं। एक सेलिब्रिटी सिर्फ एक बॉलीवुड सेलिब्रिटी ही नहीं होता है, यह एक प्रसिद्ध व्यक्ति भी हो सकता है। लाखों लोग इसे देख रहे होंगे। यह उनकी अपील को प्रभावित करेगा।”

वहीं, ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता रवि कदम और एडवोकेट हिरेन कामोद ने कहा कि यह मुकदमा चलने योग्य नहीं है। उन्होंने वादी को पहले सीरीज देखने के लिए कहा और फिर याचिका दायर करने के लिए कहा। इसके बाद अदालत ने वादी को अपनी याचिका में संशोधन करने की अनुमति दी और प्रतिवादियों को अपना जवाब देने का समय दिया है।

राजन ने नेटफ्लिक्स और प्रोड्यूसर्स को सीरीज पर रोक लगाने के के लिए लीगल नोटिस भी भेजा था। लेकिन नेटफ्लिक्स ने ऐसा करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उसने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक की 350वीं वर्षगाँठ: बोले PM मोदी- ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ में उनके विचार, जानिए कैसे आज भी प्रासंगिक है वह शासन प्रणाली

पूरा देश छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक की 350वीं वर्षगाँठ मना रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने कहा है कि सैकड़ों सालों की गुलामी के चलते देशवासियों का आत्मविश्वास कमजोर हो गया था। ऐसे समय में शिवाजी ने न केवल आक्रांताओं का मुकाबला किया, बल्कि लोगों का आत्मविश्वास भी जगाया। वहीं, नागपुर में आयोजित शिवराज्याभिषेक दिवस कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत शामिल हुए।

हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक आज ही के दिन यानी 2 जून को साल 1674 में महाराष्ट्र के रायगढ़ किले में हुआ था। आज से 350 साल पहले 16 वर्ष की आयु में ‘स्वराज्य’ की स्थापना के लिए शिवाजी से छत्रपति शिवाजी महाराज बने थे। छत्रपति शिवाजी महाराज ने हिंदू धर्म और भारत भूमि की रक्षा के लिए इस्लामिक आक्रांताओं से जीवनपर्यंत लड़ाई लड़ी। 

छत्रपति शिवाजी महाराज के 350वीं वर्षगाँठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएम ने कहा है, “छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक दिवस नई चेतना, नई ऊर्जा लेकर आया है। छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक उस कालखंड का एक अद्भुत और विशिष्ट अध्याय है। राष्ट्र कल्याण और लोक कल्याण उनकी शासन व्यवस्था के मूल तत्व रहे हैं। मैं आज छत्रपति शिवाजी महाराज के चरणों में कोटि-कोटि नमन करता हूँ। उन्होंने हमेश भारत की एकता और अखंडता को सर्वोपरि रखा। आज ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के विजन में शिवाजी महाराज के विचारों का ही प्रतिबिंब देखा जा सकता है।”

पीएम मोदी ने यह भी कहा है, “छत्रपति शिवाजी महाराज के कार्य, शासन प्रणाली और नीतियाँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने भारत के सामर्थ्य को पहचान कर जिस तरह से नौसेना का विस्तार किया, वो आज भी हमें प्रेरणा देता है। यह हमारी सरकार का सौभाग्य है कि छत्रपति शिवाजी महाराज से प्रेरणा लेकर पिछले साल भारत ने गुलामी के एक निशान से नौसेना को मुक्ति दे दी। अंग्रेजी शासन की पहचान को हटा कर शिवाजी महाराज की राज-मुद्रा को जगह दी है।”

उन्होंने यह भी कहा है, “इतने वर्ष के बाद भी उनके द्वारा स्थापित किए गए मूल्य हमें आगे बढ़ने का मार्ग दिखा रहे हैं। इन्हीं मूल्यों के आधार पर हमने अमृत काल के 25 वर्षों की यात्रा पूरी करनी है। यह यात्रा होगी शिवाजी महाराज के सपनों का भारत बनाने की। यह यात्रा होगी स्वराज, सुशासन और आत्मनिर्भरता की। यह यात्रा होगी विकसित भारत की।”

वहीं, महाराष्ट्र के नागपुर में राज्याभिषेक दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत समेत हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे। मोहन भागवत ने शिवाजी महाराज की प्रतिमा की आरती की। इस दौरान ढोल-नगाड़ों की थाप और जय शिवाजी के नारों के बीच सांस्कृतिक कार्यक्रम भी किए जा रहे हैं।

छत्रपति शिवाजी महाराज की शासन प्रणाली

क्षत्रिय कुल के शिवाजी महाराज का राज्य वास्तविक और कानूनी दोनों तरह से एक संप्रभु राज्य था। तथ्य यह है कि उनके पत्र… मुहरें, उपाधियाँ और उनके प्रशासन की प्रकृति… ये सभी रामराज्य या धर्मराज्य की भावना पर आधारित थी। महादेव गोविंद रानाडे के अनुसार:

“नेपोलियन प्रथम की तरह शिवाजी अपने समय में एक महान संगठनकर्ता और नागरिक संस्थानों के निर्माता थे।”

शिवाजी के स्वराज्य प्रशासन के प्रमुख सिद्धांत थे

  1. अपने लोगों की भलाई और राज्य के सामान्य कल्याण को बढ़ावा देना
  2. स्वराज्य की रक्षा के लिए एक कुशल सैन्य बल बनाए रखना
  3. कृषि और उद्योग को बढ़ावा देकर लोगों की आर्थिक जरूरतों को पर्याप्त रूप से उपलब्ध कराना

अष्ट प्रधान मंडल

आज के समय में दुनिया भर में शासन और पावर के विकेद्रीकरण की बात होती है। सत्ता के विकेंद्रीकरण पर बड़े-बड़े सेमिनार और व्याख्यान होते हैं, लेकिन 350 साल पहले शिवाजी महाराज ने अपने शासन की बागडोर सुचारु रुप से चलाने के लिए जिस तरह से सत्ता का विकेंद्रीकरण किया, उससे समाज आज भी प्रेरणा ले सकता है। शिवाजी ने अपने शासन के तहत जनहित के कार्यों एवं चहुंमुखी विकास के लिए एक अष्ट प्रधान मंडल की व्यवस्था की थी। इसमें आठ मंत्रियों की सीटें थीं।

छत्रपति शिवाजी के शासन में कृषि व्यवस्था

शिवाजी की कृषि को प्रोत्साहित करने की नीति के बारे में सभासद लिखते हैं:

“जो नए किसान आएँगे, हमारे राज्य में बसने के लिए, उन्हें मवेशी दिए जाने चाहिए। उन्हें बीज देने के लिए अनाज और पैसा दिया जाना चाहिए।”

कृषि और किसानों के हित में शिवाजी ने अनेकों उल्लेखनीय कार्य किए।

शिवाजी की राजमुद्रा

शिवाजी की राजमुद्रा संस्कृत में लिखी हुई एक अष्टकोणीय मुहर (Seal) थी, जिसका उपयोग वे अपने पत्रों एवं सैन्य सामग्री पर करते थे। उनके हजारों पत्र प्राप्त हैं, जिन पर राजमुद्रा लगी हुई है। मुद्रा पर लिखा वाक्य इस तरह है-

प्रतिपच्चंद्रलेखेव वर्धिष्णुर्विश्ववंदिता शाहसुनोः शिवस्यैषा मुद्रा भद्राय राजते।
(अर्थात : जिस प्रकार बाल चन्द्रमा प्रतिपद (धीरे-धीरे) बढ़ता जाता है और सारे विश्व द्वारा वन्दनीय होता है, उसी प्रकार शाहजी के पुत्र शिव की यह मुद्रा भी बढ़ती जाएगी।)

छत्रपति शिवाजी महाराज का शासन भोंसले घराने का शासन नहीं था। उन्होंने परिवारवाद को राजनीति में स्थान नहीं दिया। उनका शासन सही अर्थ में प्रजा का शासन था। शासन में सभी की सहभागिता रहती थी। सामान्य मछुआरों से लेकर विद्वान तक उनके राज्य शासन में सहभागी थे।

20 साल में ही 10 गुना बढ़ गई मुस्लिम आबादी, मस्जिद 15 से बढ़कर हुए 113: जापान के लिए भी जंजाल बना इस्लामी कट्टरपंथ, खुद के पवित्र स्थल बने निशाना

जापान में पिछले 2 दशक में अचानक से मुस्लिमों की संख्या में बढ़ौतरी हुई है। वहाँ मस्जिद जो पहले गिने-चुने होते थे वो भी अब गिनती में काफी बढ़ गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस डेमोग्राफिक चेंज के पीछे कारण जापान में आकर बसने वाले प्रवासी मुस्लिम हैं। इसके अलावा मुस्लिम और जापानियों में शादियों के चलते भी यह बदलाव देखने को मिल रहा है।

हैरान करने वाली बात है कि सन् 2000 में जापान में मुस्लिमों की संख्या सिर्फ 10 से 20 हजार थी लेकिन अब इनकी गिनती 2 लाख पार है। यानी एक ही पीढ़ी में ये लोग जापान में 10 गुना बढ़े हैं। वहीं 2010 तक जापान में मुस्लिम 110,000 हुए थे और अब ये 230,000 पहुँच गए।

इसी तरह जापान में मस्जिद दिखना पहले आसान नहीं था। 1999 में केवल 15 मस्जिद थे। मगर अब वहाँ 113 मस्जिद हैं। बताया जा रहा है जो जगह कभी एक फैक्ट्री हुआ करती थी वहाँ भी मस्जिद खोल लिया गया जिसे इंडोनेशिया फंड देता है।

जापान के पवित्र स्थल पर इस्लामी कट्टरपंथी का हमला

हाल में एक मामला सामने आया था जब जापान के कोबे शहर में जापानियों के (शिंटो धर्म के) पवित्र स्थल पर घुस एक मुस्लिम प्रावासी ने हमला किया था और प्रार्थना के बीच में जाकर जापानी महिला को कहा था, “यहाँ सिर्फ एक ईश्वर है। अल्लाह। और कोई ईश्वर नहीं।”

घटना की वीडियो जब वायरल हुई तो जापानी यह देख नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि जापान में सबको अपना धर्म मानने की आजादी है। लेकिन बावजूद इसके अगर ये लोग इस तरह करते हैं तो हम साथ नहीं रह सकते। ऐसे मुस्लिमों का होना मुस्लिमों के लिए भी खतरनाक है।

जापान में इस्लाम की एंट्री

बता दें कि जापान में मुस्लिमों की एंट्री 16 वीं सदी की बात है। जब जापानी व्यवसायियों ने मि़डल ईस्ट और साउथईस्ट एशिया में व्यापार बढ़ाया। इसी के बाद जापानियों की पहचान इस्लामी रिवाज और तौर-तरीकों से हुई। 19वीं शताब्दी में जापान के औद्योगिक और आर्थिक विकास के साथ कई प्रवासियों का आना हुआ। इनमें कई भारत, तुर्की और मिडल ईस्ट के मुस्लिम पहुँचे। धीरे-धीरे वहाँ इस्लाम फैसना शुरू हुआ। 20वीं शताब्दी तक इस्लामी संगठन बन चुके थे। कुछ जापानियों ने इस्लाम अपनाना शुरू कर दिया था। 1960 में कई पाकिस्तानी-बांग्लादेशी मुस्लिम भी जापान आकर बस गए। धीरे-धीरे इनकी तादाद इतनी बढ़ी कि ये 2 लाख का आँकड़ा पार कर गए हैं।

स्पेन में डेमोग्राफी चेंज

उल्लेखनीय है कि केवल जापान में ही मुस्लिमों की बढ़ती तादाद चिंता का कारण नहीं है। पिछले 30 वर्षों में स्पेन में मुस्लिमों की जनसंख्या 10 गुना बढ़ी है। ये जानकारी खुद स्पेन के ही ‘सेक्रेटरी ऑफ द इस्लामिक कमीशन’ ने अपनी एक रिपोर्ट में दी है। इसके साथ ही दक्षिण-पश्चिम यूरोप के इस देश में मुस्लिमों की जनसंख्या 25 लाख के पार चली गई है। मोहम्मद अजाना ने ‘Anadolu’ मीडिया संस्थान को बताया कि अनाधिकारिक आँकड़ों की मानें तो स्पेन में मुस्लिमों की जनसंख्या 30 लाख के भी पार चली गई है।

खत्म नहीं हो देशद्रोह का कानून, सजा 3 साल से बढ़ाकर करें 7 साल: लॉ कमीशन ने सौंपी रिपोर्ट, आंतरिक सुरक्षा के लिए बताया जरूरी

देशद्रोह कानून को लेकर जारी बहस के बीच लॉ कमीशन (Law Commission) ने गुरुवार (1 जून 2023) को अपनी रिपोर्ट केंद्र को सौंप दी। कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में 132 साल पुराने इस कानून को कुछ संशोधन के साथ बरकरार रखने की सिफारिश की है। इसके साथ ही, इसकी सजा को बढ़ाकर आजीवन कारावास तक करने का सुझाव दिया है।

कर्नाटक उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रितुराज अवस्थी की अध्यक्षता में 22वाँ विधि आयोग का गठन किया गया था। इस आयोग ने अपनी सिफारिश में कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124A में परिभाषित राजद्रोह कानून को बनाए रखा जाना चाहिए। आयोग ने इस कानून के तहत सजा के प्रावधान को कम-से-कम 7 साल से लेकर आजीवन कारावास तक बढ़ाने की सिफारिश की है।

विधि आयोग की इस 279वें रिपोर्ट में कहा गया है, “विधि आयोग की 42वीं रिपोर्ट में धारा 124A के लिए सजा को बहुत ‘विषम’ बनाया गया है। यह या तो आजीवन कारावास या केवल तीन साल तक की कैद हो सकती है। इसके बीच में कुछ भी नहीं। न्यूनतम सजा जुर्माना हो सकती है। एक तुलना IPC के अध्याय VI में दिए गए अपराधों के लिए दिए गए वाक्यों से पता चलता है कि धारा 124A के लिए निर्धारित दंड में स्पष्ट असमानता है। इसलिए, यह सुझाव दिया जाता है कि प्रावधान की सजा को अनुरूप लाने के लिए संशोधित किया जाए।”

अपनी रिपोर्ट में विधि आयोग ने कहा, “धारा 124A को भारतीय दंड संहिता में बनाए रखने की आवश्यकता है। हालाँकि कुछ संशोधन के, जैसा कि सुझाव दिया गया है, साथ इसमें केदारनाथ सिंह बनाम बिहार राज्य के निर्णय को शामिल किया जा सकता है, ताकि प्रावधान के उपयोग के संबंध में और अधिक स्पष्टता लाई जा सके।”

कमीशन ने यह भी कहा कि राजद्रोह केस औपनिवेशिक कानून है, यह कहकर इस पर सवाल उठाया जाएगा तो पूरा भारतीय दंड संहिता (IPC) ही सवालों के घेरे में आ जाएगा। केवल इस तथ्य के साथ कि एक विशेष कानूनी प्रावधान अपने मूल में औपनिवेशिक है और कुछ देशों ने इसे खत्म कर दिया है, इसे निरस्त करने को मान्य नहीं करता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि IPC की धारा 124A जैसे प्रावधान की अनुपस्थिति में सरकार के खिलाफ हिंसा भड़काने वाली किसी भी अभिव्यक्ति पर निश्चित रूप से विशेष कानूनों और आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत मुकदमा चलाया जाएगा। इसमें अभियुक्तों से निपटने के लिए कहीं अधिक कड़े प्रावधान हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसे निरस्त करने से देश की अखंड़ता और सुरक्षा पर प्रभाव पड़ सकता है।

दरअसल, फॉरवर्ड कम्यनिस्ट पार्टी के नेता केदारनाथ सिंह ने 26 मई 1953 में बिहार के मुंगेर जिले के बरौनी गाँव में भाषण देते हुए CID के अधिकारियों के लिए ‘कुत्ता’ और कॉन्ग्रेस के नेताओं के लिए ‘गुंडा’ शब्द का प्रयोग किया था। उन्होंने कहा था कि कॉन्ग्रेस देश के लोगों के साथ वैसा ही व्यवहार कर रही है, जैसा कि अंग्रेज करते थे। इसके बाद उन पर राजद्रोह का मुकदमा चला था और उन्हें एक साल का सश्रम कारावास हुई थी।

बताते चलें कि भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की तीन न्यायाधीशों वाली पीठ ने 11 मई 2022 को इसकी वैधता पर निर्णय लेने के बजाय प्रावधान को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने न्यायालय को बताया था कि वह इसकी जाँच करेगी कि धारा 124A को बनाए रखने की आवश्यकता है या नहीं।