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रक्तदान करने पहुँचे RSS कार्यकर्ताओं की भीड़ देख डॉक्टर भी हैरान, सब कुछ छोड़ राहत कार्य में जुटे रहे संघ कार्यकर्ता: सबसे पहले पहुँच शुरू किया था कार्य

ओडिशा के बालासोर में हुए भयानक ट्रेन हादसे की तस्वीरें दिल दहलाने वाली हैं। इस हादसे में अब तक 280 लोगों की मौत हो चुकी है। लेकिन यदि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यकर्ता यदि समय पर नहीं पहुँचते तो मौत का यह आँकड़ा कहीं अधिक हो सकता था। बताया जा रहा है कि NDRF की टीम के पहुँचने से पहले ही RSS कार्यकर्ता मौके पर पहुँचकर राहत और बचाव कार्य में जुट गए थे।

एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसार, बालासोर में हुए ट्रेन हादसे का शिकार लोगों की मदद के लिए आरएसएस के कार्यकर्ता तन, मन, धन से जुटे हुए हैं। इस हादसे की जानकारी मिलते ही करीब 250 कार्यकर्ता मौके पर पहुँच गए थे। वहाँ मची चीख-पुकार के बीच आरएसएस कार्यकर्ताओं ने घायलों को इलाज के लिए तुरंत ही हॉस्पिटल ले जाना शुरू कर दिया था। आरएसएस कार्यकर्ताओं के राहत और बचाव कार्य शुरू होने के बाद NDRF की टीम भी हादसे वाली जगह पहुँच गई। इसके बाद संघ कार्यकर्ता उनके साथ मिलकर लोगों को बचाने में जुट गए।

एक ओर जहाँ आरएसएस के कुछ कार्यकर्ता ट्रेन मेंदबे हुए लोगों व घायलों की मदद कर रहे थे। वहीं, कुछ अन्य कार्यकर्ता घायलों को खून देने के लिए हॉस्पिटल पहुँच गए। रक्त दान करने आए युवाओं की भीड़ देखकर हॉस्पिटल के डॉक्टर भी हैरान हो गए थे। दरअसल, बालासोर के RSS के व्हाट्सएप ग्रुप में हादसे की जानकारी के साथ ही रक्तदान करने की अपील की गई थी। इसके बाद कार्यकर्ता हॉस्पिटल पहुँच गए।

ओडिशा के आरएसएस के प्रांत प्रचार प्रमुख रविनारायन पंडा ने कहा है कि हादसा बालासोर के महानगा गाँव के पास हुआ। महानगा में RSS के कई कार्यकर्ता रहते हैं। इसके अलावा जिले में भी संघ कार्यकर्ता सक्रिय हैं। हादसे 6:50 पर हुआ था। इसके बाद व्हाट्सएप मैसेज से जानकारी मिलने के बाद संघ कार्यकर्ता 7 बजे तक हादसे वाली जगह पहुँच गए थे। इसके बाद उन लोगों ने ट्रेन के दरवाजे खोलकर घायलों को बाहर निकालना शुरू किया। साथ ही स्थानीय लोगों की सहायता से ट्रैक्टर, बाइक और कार के माध्यम से घायलों को हॉस्पिटल पहुँचाया।

आरएसएस के स्थानीय कार्यकर्ता हरेंद्र का कहना है कि एक हजार से अधिक आरएसएस कार्यकर्ता लोगों की मदद करने के लिए आगे आए हैं। जिन लोगों ने रात में रक्त दान किया था वे सुबह से घायलों और उनके परिजनों के भोजन पानी की व्यवस्था कर रहे थे। इसके अलावा, घायलों को उनके परिजनों से मिलवाने में RSS कार्यकर्ता सहयोग कर रहे हैं।

‘वो मुझे यहीं मारेगा, बोल क्या करेगा तू?’: हिन्दू लड़की को पीट रहा था मुस्लिम युवक, हिन्दू कार्यकर्ताओं ने टोका तो बोलने लगी – ये मेरे साथ है चाहे कुछ हो जाए

देश में लव जिहाद की घटनाएँ बढ़ती जा रहीं हैं। मुस्लिम युवक हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए तरह-तरह की हरकतें करते पकड़े जा चुके हैं। हालाँकि ऐसे कुछ मामलों में लड़कियों की नासमझी भी उन पर भारी पड़ती है। लव जिहाद से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में हिंदू लड़की मुस्लिम युवक के साथ दिखाई दे रही है। जब उसे हिंदू युवक रोकने की कोशिश करता है तो वह उल्टा उसे ही धमकाते नजर आ रही है।

यह वीडियो संजू तिवारी नामक यूजर ने ट्विटर पर शेयर किया। वीडियो में मुस्लिम युवक हिंदू लड़की को धक्का देकर घर जाने के कहता दिखाई दे रहा है। वहीं, वीडियो बना रहा व्यक्ति खुद को ‘बजरंग दल’ का कार्यकर्ता बताते हुए मुस्लिम युवक से कहता है, “बहुत देर से देख रहा हूँ तो उसको मार रहा था।” इसके बाद वह लड़की को वापस बुलाकर उससे बातचीत करने की कोशिश करता है। वहीं, इस बीच मुस्लिम युवक लड़की को चिल्लाकर घर जाने के लिए कहता दिखाई दे रहा है।

वहीं, खुद को बजरंग दल का कार्यकर्ता बता रहा व्यक्ति लड़की से उसका नाम पूछता है। इस पर लड़की अपना नाम प्रिया बताती है। इसके बाद वह लड़की से कहता है कि यह लड़का मुस्लिम है और तुम्हें बिल्कुल भी शर्म नहीं है। अभी तुमने केस नहीं सुना तुमने। (शायद वह दिल्ली के शाहबाद इलाके में हुई साक्षी की हत्या की बात कर रहा है।) इस पर लड़की कहती है ये मुस्लिम है इससे तुम्हें क्या मतलब है। एक वीडियो वायरल हो गया तो तुम बतंगड़ बनाकर बैठ जाओगे। ये मेरे साथ है चाहे कुछ भी हो जाए।

इस पर वीडियो बना रहा व्यक्ति कहता है कि वह तुम्हें इतनी देर से मार रहा है तब तुमने कुछ नहीं किया। इस पर लड़की पलटकर जवाब देते हुए कहती है वह मुझे यहाँ भी मारेगा, बोल क्या करेगा तू? इसके बाद लड़की चली जाती है। इसके बाद मुस्लिम युवक वीडियो बना रहे व्यक्ति को धौंस दिखाते हुए कहता है कि वह दिल्ली क्राइम प्रेस में काम करता है। हालाँकि जब उसे आईडी प्रूफ माँगा गया तो वह कुछ भी बोलने की जगह फोन पर बात करते हुए आगे बढ़ जाता है।

ट्रेन दुर्घटना के बाद अब बस हुई दुर्घटनाग्रस्त: बालासोर हादसे के घायलों को ले जाया जा रहा था अस्पताल, पिकअप वैन से आमने-सामने हुई टक्कर

बालासोर में ट्रेन दुर्घटना के बाद अब घायलों को ले जा रही बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई है। ये दुर्घटना पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर में हुई है, जिसके बाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर काम भी लग गया। ऐसे में ये लगातार दूसरी दिन यात्रियों के लिए बुरी खबर आई है। ये बस ट्रेन दुर्घटना में घायल लोगों को लेकर अस्पताल जा रही थी। घायलों को अलग-अलग इलाकों में अस्पतालों में पहुँचाने का काम किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि पिकअप वैन से टक्कर के बाद ये घटना हुई।

ये हादसा नेशनल हाइवे 60 पर हुआ है। पिकअप वैन और बस की आमने-सामने की टक्कर हुई है। प्रधानमंत्री ने ग्राउंड पर जाकर घटना की समीक्षा के बाद कहा कि जो भी घायल हुए हैं, सरकार उनके उत्तम स्वास्थ्य के लिए भी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जो परिजन हमने खोए हैं, वो तो वापस नहीं लौटा पाएँगे, लेकिन सरकार उनके परिजनों के दुःख में उनके साथ है। पीएम मोदी ने कहा कि सरकार के लिए यह घटना अत्यंत गंभीर है और हर प्रकार की जाँच के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी दोषी पाया जाएगा उसको सख्त से सख्त सज़ा होगी, उसे बख्शा नहीं जाएगा। पीएम मोदी ने कहा, “मैं ओडिशा सरकार और यहाँ के प्रशासन के सभी अधिकारियों का, जिन्होंने इस तरह की परिस्थिति में, उनके पास जो भी संसाधन थे, लोगों की मदद करने का प्रयास किया – धन्यवाद करता हूँ। मैं यहाँ के नागिरकों का हृदय से अभिनंदन करता हूँ। मैं इस दुःख की घड़ी में घटनास्थल पर जाकर देखकर आया हूँ। अस्पताल में जो घायल नागरिक थे, उनसे मैंने बात की है।”

इस हादसे में माँ-बाप की मौत के बाद एक बच्चे ने रो-रोकर अपनी जान दे दी। वहीं, पश्चिम बंगाल के तीन भाइयों की भी मौत हो गई। इसी तरह परिवार पर चढ़े कर्ज को उतारने निकले बाप-बेटे में से बेटा लापता है। वहीं, माँ के निधन के कारण 14 साल बाद घर लौटे एक व्यक्ति की मौत हो गई। उसके भाई लाशों के ढेर में अपने भाई की पहचान करने में जुटे हुए हैं। बालासोर में कोरोमंडल एक्सप्रेस में हुए हादसे में एक ही परिवार के तीन लोग काल के गाल में समा गए।

मजदूरी से परिवार चलाने वाले 3 भाइयों की मौत, माँ के निधन पर लौटे बेटे की भी गई जान… मानवता की भी परीक्षा ले रही ओडिशा ट्रेन दुर्घटना

ओडिशा के बालासोर में हुए भीषण ट्रेन हादसे में अब तक 280 लोगों की मौत हो चुकी है। इस हादसे में घायल हुए कई लोगों की हालत बेहद गंभीर है। ऐसे में मौत का आँकड़ा बढ़ सकता है। इस हादसे में माँ-बाप की मौत के बाद एक बच्चे ने रो-रोकर अपनी जान दे दी। वहीं, पश्चिम बंगाल के तीन भाइयों की भी मौत हो गई। 

इसी तरह परिवार पर चढ़े कर्ज को उतारने निकले बाप-बेटे में से बेटा लापता है। वहीं, माँ के निधन के कारण 14 साल बाद घर लौटे एक व्यक्ति की मौत हो गई। उसके भाई लाशों के ढेर में अपने भाई की पहचान करने में जुटे हुए हैं।

माँ-बाप की की मौत के बाद बेटे ने रो-रो कर त्यागे प्राण

बीबीसी से हुई बातचीत में एक स्थानीय चश्मदीद टूटू विश्वास ने कहा है कि घटना के समय अपने घर पर थे। तभी धमाके जैसी आवाज आई। घर से बाहर आकर देखा तो ट्रेन माल गाड़ी के ऊपर चढ़ी हुई थी। ट्रेन के करीब जाने पर उन्हें बहुत सारे लोग दिखाई दिए। इनमें अधिकांश लोग घायल थे। वहीं कई लोगों की मौत हो चुकी थी। ट्रेन के करीब ही एक बच्चा रो रहा था। उसके माता-पिता की मौत हो चुकी थी। थोड़ा देर बार रोते-रोते बच्चे की भी मौत हो गई।

एक ही परिवार के तीन भाइयों की मौत

‘आज तक’ की रिपोर्ट के अनुसार, बालासोर में कोरोमंडल एक्सप्रेस में हुए हादसे में एक ही परिवार के तीन लोग काल के गाल में समा गए। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बसंती इलाके में रहने वाले तीनों आपस में भाई थे। मृतकों की पहचान हरन गायेन, निशिकांत गायेन, दिबाकर गायेन के रूप में हुई। ये तीनों मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण करते थे। मजदूरी के सिलसिले में ही तीनों आंध्र प्रदेश जा रहे थे। लेकिन, उससे पहले ही यह हादसा हो गया।

बेटे की लाश तलाशता फिर रहा बाप

बाप-बेटे अपने परिवार पर चढ़े 15 लाख रुपए का कर्ज उतारने के लिए घर से कमाने के लिए निकले थे। हादसे के बाद बेटा लापता हो गया है। लाशों के ढेर के बीच बाप बेटे को तलाशता फिर रहा है। एनबीटी से हुई बातचीत में 53 वर्षीय रवींद्र शॉ ने कहा है वह और उनका बेटा ट्रेन में बैठकर कर्ज उतारने के बारे में बात कर रहे थे। दोनों भविष्य को लेकर चिंतित थे कि आखिर कितना पैसा कमाने के बाद वे कर्ज मुक्त हो पाएँगे। इसी दौरान यह हादसा हो गया। 

रवींद्र शॉ ने आगे कहा है हादसे के बाद जब उन्हें होश आया तो उनका बेटा लापता हो चुका था। हर तरफ लाशें और लोगों के शरीर के टुकड़े दिखाई दे रहे थे। कटे सर से लेकर धड़ों को वह गौर से देख रहे थे। किसी के शरीर का कोई अंग देखकर वह उसे उठाकर देखते कि कहीं वह उनके बेटे का तो नहीं। यहाँ तक कि लाशों के ढेर में भी उन्होंने अपने बेटे को तलाश करने की कोशिश की। लेकिन उनका बेटा नहीं मिल सका।

माँ के निधन पर 14 साल बाद घर वापस आया, अब मौत

ओडिशा के बालासोर में हुए इस हादसे में स्थानीय लोग भी घटना का शिकार हो गए। बालासोर के रहने वाले रमेश चेन्नई में रहते हैं। वह अपनी माँ के निधन के बाद 14 साल बाद घर वापस आए थे। सभी क्रियाकर्म करने के बाद वह वापस चेन्नई लौट रहे थे। तभी यह हादसा हो गया। रमेश के दोनों भाई अब घटना स्थल से लेकर हॉस्पिटल तक अपने भाई को ढूँढ़ने में लगे हुए हैं। मृतक रमेश के भाई ने जागरण से हुई बातचीत में कहा है कि उनका भाई शाम 6 बजे ट्रेन में सवार हुआ था और करीब एक घण्टे बाद यह हादसा हो गया। 

32 साल की उम्र में भी निकाह न होने पर चिढ़ाता था 12 साल का बच्चा… चचेरे भाई ने किडनैप करके मार डाला, शव 5 दिन बाद बरामद

राजस्थान के जयपुर के लालकोठी में 12 साल के जावेद (बदला हुआ नाम) के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी गई। हत्यारा चचेरा भाई अकील (बदला हुआ नाम) निकला। मृतक की अम्मी ने बताया कि अकील ने जावेद को किडनैप करके घर के सामने ही रखा हुआ था। लेकिन किसी को कुछ पता नहीं चलने दिया। बुधवार (31 मई) को पुलिस ने बताया कि रिश्तेदार अकील ने ही जावेद के शरीर को जगह-जगह से काटकर उसे मार डाला।

दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, मृतक के घरवालों ने बताया कि अकील ने जावेद को 6 महीने पहले धमकी दी थी कि वो जावेद को बहुत बुरी मौत मारेगा और देखो मार दिया। अकील की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को जावेद का शव मिल गया है। उसकी हालत देख घरवालों का बुरा हाल है। सब सिर्फ यही चाहते हैं कि जैसे जावेद को अकील ने मारा, वैसी मौत उसे भी मिले। परिवार कह रहा है कि उनके बच्चे का जनाजा तभी उठेगा जब अकील मरेगा।

मृतक के अब्बू बताते हैं कि 24 मई को उनका बेटा क्रिकेट खेलने गया था। जब देर शाम तक वह नहीं लौटा तो उसे ढूँढा गया। कहीं जावेद का सुराग न मिलने पर 25 मई को लालकोठी थाने में केस दर्ज हुआ। 31 मई को जाकर पुलिस ने छानबीन के बाद बताया कि सामने रहने वाले रिश्तेदार अकील ने उनके बेटे से गलत काम करके उसे मार दिया।

पुलिस ने इस बाबत जानकारी दी कि अकील ने जावेद को जिस दिन पकड़ा था उसी दिन उसके साथ दुष्कर्म करके उसे मार दिया था। अपराध का पता चलने तक उसका शव सड़-गल चुका था। पुलिस ने इस छानबीन में 60 पुलिसकर्मियों को लगाया था। 100 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज खंगालकर 20 से ज्यादा ठिकानों पर जावेद की तलाशी हुई लेकिन सब कोशिशें बेनतीजा रहीं।

सुराग तब मिला जब आउटर सीसीटीवी की छानबीन हुई। यहाँ जावेद को अकील के साथ देखा गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अकील को पकड़ा। पूछताछ में उसने जुर्म कबूला। मीट की दुकान पर काम करने वाले अकील ने बताया कि 32 साल का होने के बाद उसका निकाह नहीं हुआ था। जावेद इस बात के लिए उसे चिढ़ाता था। इसलिए उसने प्लॉन बनाया कि वो जावेद को सबक सिखाएगा।

किडनैपिंग के दिन अकील ने जावेद को सफेद कबूतर दिलाने के नाम पर किडनैप किया। वो जावेद को अपनी बहन के आयशा कॉलोनी स्थित बंद पड़े घर ले गया। यहाँ पहले उसने जावेद को हाथ-पाँव बाँधकर उससे कुकर्म किया फिर उसका रस्सी से गला घोंट दिया। इसके बाद उसने शव को प्लास्टिक के कट्टे में बाँधकर छोड़ दिया। गिरफ्तारी के बाद अकील ने शव के बारे में बताया और पुलिस ने जावेद की बॉडी बरामद की। अकील गिरफ्तार है। उसका आपराधिक रिकॉर्ड जाँचा जा रहा है।

‘दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, मिलेगी सख्त से सख्त सज़ा’: घटनास्थल का दौरा और घायलों से मिल कर बोले PM मोदी – रक्तदान-रेस्क्यू में ओडिशा के लोगों ने रात भर की मेहनत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओडिशा के बालासोर में ट्रेन दुर्घटनास्थल पर पहुँच कर स्थिति का जायजा लिया, साथ ही अस्पताल जाकर घायलों से भी मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने कहा कि कल शाम को एक भयंकर हादसा हुआ, असहनीय वेदना मैं अनुभव कर रहा हूँ। पीएम मोदी ने कहा कि इस यात्रा में अनेक राज्यों के नागरिकों ने कुछ न कुछ गँवाया है, कई लोगों ने अपना जीवन खोया है। उन्होंने इसे बहुत दर्दनाक और मन को विचलित करने वाला करार दिया।

प्रधानमंत्री ने ग्राउंड पर जाकर घटना की समीक्षा के बाद कहा कि जो भी घायल हुए हैं, सरकार उनके उत्तम स्वास्थ्य के लिए भी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जो परिजन हमने खोए हैं, वो तो वापस नहीं लौटा पाएँगे, लेकिन सरकार उनके परिजनों के दुःख में उनके साथ है। पीएम मोदी ने कहा कि सरकार के लिए यह घटना अत्यंत गंभीर है और हर प्रकार की जाँच के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी दोषी पाया जाएगा उसको सख्त से सख्त सज़ा होगी, उसे बख्शा नहीं जाएगा।

पीएम मोदी ने कहा, “मैं ओडिशा सरकार और यहाँ के प्रशासन के सभी अधिकारियों का, जिन्होंने इस तरह की परिस्थिति में, उनके पास जो भी संसाधन थे, लोगों की मदद करने का प्रयास किया – धन्यवाद करता हूँ। मैं यहाँ के नागिरकों का हृदय से अभिनंदन करता हूँ। मैं इस दुःख की घड़ी में घटनास्थल पर जाकर देखकर आया हूँ। अस्पताल में जो घायल नागरिक थे, उनसे मैंने बात की है। मेरे पास इस वेदना को प्रकट करने के लिए शब्द नहीं है, लेकिन परमात्मा हम सबको शक्ति दे कि जल्द से जल्द हम इस दुख की घड़ी से निकलें।”

उन्होंने ओडिशा के स्थानीय लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि चाहे ब्लड डोनेशन की बात हो या रेस्क्यू ऑपरेशन में मदद की बात हो, नागरिकों ने रात भर मेहनत की है। उन्होंने कहा कि जल्द से जल्द ट्रैक ठीक कर के यातायात अच्छे से चालू हो, इसके लिए काम चल रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस घटना से हम बहुत कुछ सीखेंगे और व्यवस्थाओं को नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए दुरुस्त करेंगे। इस दौरान केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और ओडिशा से ही आने वाले केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी उनके साथ मौजूद थे।

जो नेहरू की नज़र में हिंसक और कट्टरपंथी, उसे राहुल गाँधी अमेरिका में बैठ कर बता रहे सेक्युलर: केरल वाले ‘मुस्लिम लीग’ का जिन्ना से कनेक्शन

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी 10 दिवसीय यात्रा पर अमेरिका में हैं। वहाँ पर दिए गए उनके बयान के कारण देश में राजनीति चरम पर है। पीएम पर बयान देने के साथ-साथ राहुल गाँधी ने मुस्लिम लीग को धर्मनिरपेक्ष पार्टी बता दिया। दरअसल, उसी मुस्लिम लीग की एक शाखा से कॉन्ग्रेस का केरल में गठबंधन भी है।

राहुल गाँधी मुस्लिम तुष्टिकरण में भले ही मुस्लिम लीग को सेक्युलर बता रहे हों, लेकिन सच्चाई यही है कि जिन्ना की यह पार्टी देश के बँटवारे के लिए पूरी तरह जिम्मेदार थी। जब मुस्लिम लीग की माँग पर पाकिस्तान बन गया, तब जिन्ना वाली मुस्लिम लीग भारत में खत्म हो गई। हालाँकि, इसके सदस्य और तमिल नेता मोहम्मद इस्माइल पाकिस्तान जाने के बजाय भारत में ही रह गए।

भारत में रहकर मोहम्मद इस्माइल ने फिर से मुस्लिम लीग बनाने की घोषणा की। इसका बड़े पैमाने पर विरोध हुआ। मुस्लिम लीग के इतिहास और खून-खराबे को देखते हुए उस समय के प्रधानमंत्री जवाहलाल नेहरू ने भी मुस्लिम लीग बनाने का विरोध किया था। नेहरू ने कहा था कि सांप्रदायिक और कट्टरपंथी आंदोलन भारत की एकता के लिए सही नहीं है।

हालाँकि, मोहम्मद इस्माइल नहीं माने और जिन्ना के मुस्लिम लीग से जुड़े उन नेताओं के साथ मिलकर एक बैठक की, जो भारत में ही रह गए थे। इस्माइल ने मद्रास में 1948 में जिन्ना की मुस्लिम लीग से जुड़े रहे लोगों की बैठक बुलाई। उस वक्त देश में मुस्लिम लीग की नेशनल काउंसिल से जुड़े 100 से ज्यादा सदस्य थे, लेकिन बैठक से 33 लोग पहुँचे।

बैठक में मुस्लिम लीग से जुड़े उत्तर भारतीय नेता इस बैठक से दूर रहे, लेकिन मद्रास, मैसूर और बॉम्बे क्षेत्र के लीगी नेता इसमें पहुँचे। बैठक में सबसे ज्यादा मद्रास प्रांत से लगभग 15 सदस्य थे। यह इलाका देश का एकमात्र ऐसा इलाका था, जिसने देश के बँटवारे के समय सबसे कम परेशानी झेली थी। बैठक में मालाबार के प्रतिनिधियों में से एक और कालीकट के व्यवसायी एवं मद्रास प्रांतीय असेंबली के सदस्य पीपी हसन कोया भी मौजूद थे।

बैठक में कोया ने एक प्रस्ताव पेश किया कि मुस्लिमों के लिए एक नए राजनीतिक दल का विरोध करते हुए कहा कि यह समुदाय के हितों के लिए सही नहीं है। हालाँकि, कुछ नेता नई पार्टी के समर्थन में थे और कुछ विरोध में। इसमें एक प्रस्ताव पारित किया गया कि नया संगठन बनाया जाएगा, जो मुस्लिम समुदाय की आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक प्रगति के लिए काम करेगा।

सन 1948 में इस संगठन का नाम इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) रखा गया। इसका झंडा पाकिस्तान के झंडे से मिलता-जुलता रखा गया। इसकी राजनीतिक भूमिका 1951 में शुरू हुई। इसके पहले अध्यक्ष जिन्ना की मुस्लिम लीग से जुड़े मुहम्मद इस्माइल को बनाया गया। हालाँकि, बाद में मुस्लिम लीग से जुड़े संगठन बनाने का विरोध करने वाले अधिकांश नेताओं ने पार्टी छोड़ दी या राजनीति से अलग हो गए।

IUML की स्थापना के बाद पंडित नेहरू ने इसे डेड हॉर्स कहा था और प्रतिज्ञा ली कि कॉन्ग्रेस इसे खत्म कर देगी। नेहरू ने कहा था, “मुझे नहीं पता कि मुस्लिम लीग विभाजन के दौरान दुखद के अलावा और क्या प्रतिनिधित्व करती है। केरल को छोड़कर, मुस्लिम लीग के झंडे भारत में कहीं भी नहीं देखे जाते हैं। मुस्लिम लीग और कुछ नहीं बल्कि दंगों की पार्टी है।”

सन 1958 में अपनी केरल यात्रा के दौरान अलाप्पुझा में एक भाषण में IUML की आलोचना करते हुए नेहरू ने इसे दंगों की पार्टी कहा, जो दुनिया में मौजूद सभी बुराइयों का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने विभाजन के दौरान हुई दुखद घटनाओं के लिए भी पार्टी को जिम्मेदार ठहराया।

आज केरल और तमिलनाडु की राजनीति में IUML की मजबूत पकड़ है। इसे केरल में राज्यस्तरीय पार्टी का भी दर्जा प्राप्त है। केरल में वह कॉन्ग्रेस की सहयोगी पार्टी भी है। केरल में केरल विधानसभा में IUML के 15 विधायक और 4 लोकसभा सांसद हैं।

IUML कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली UPA में भी शामिल रही है। केरल में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी UDF का हिस्सा मुस्लिम लीग है। हालाँकि, साल 2012 में नागपुर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के चुनाव में मेयर बनाने के लिए भाजपा ने भी IUML के दो पार्षदों का समर्थन लिया था।

 

पाकिस्तान में ईसाई लड़के को सज़ा-ए-मौत: मैसेज में पैगंबर के अपमान का आरोप, पिता को ‘गॉड’ पर भरोसा

अल्पसंख्यकों के लिए नर्क कहे जाने वाले इस्लामिक मुल्क पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोप में एक ईसाई लड़के को मौत की सजा सुनाई गई है। सजा पाए दोषी का नाम नौमान मसीह है जिसकी उम्र 22 साल है। नौमान मसीह के खिलाफ 4 साल पहले शिकायत दर्ज हुई थी। अदालत ने नौमान को मैसेजिंग ऐप पर इस्लाम विरोधी सामग्री भेजने का दोषी पाया। बहावलपुर की जिला अदालत से इस सजा का ऐलान मंगलवार (30 मई 2023) को हुआ। मौत की सजा के साथ नौमान पर 20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला पाकिस्तान के बहावलपुर का है। लाहौर से लगभग 400 किलोमीटर दूर इस्लमी कॉलोनी के रहने वाले नौमान मसीह पर 4 साल पहले मुस्लिमों के पैगंबर मोहम्मद की निंदा करने का आरोप लगा था। 1 जुलाई 2019 में नौमान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। उसकी गिरफ्तारी तब हुई जब वह एक पार्क में सो रहा था। नौमान की गिरफ्तारी से 1 दिन पहले पुलिस ने उसके चचेरे भाई सनी वकास को ईशनिंदा के आरोप में हिरासत में लिया था। थोड़े समय के बाद सनी वकास को अदालत ने जमानत दे दी थी।

पाकिस्तान की पुलिस ने कोर्ट में नौमान को सजा दिलाने के लिए तमाम सबूत पेश किए। इन सबूतों में नौमान के मोबाइल से निकालकर कुछ संदेश दिखाए गए जो पैगंबर मोहम्मद को लेकर किए गए थे। गिरफ्तारी के समय नौमान का मोबाइल पुलिस ने जब्त कर लिया था। पाकिस्तानी पुलिस ने उस पर 295- C की धारा लगाई थी। इस धारा में मौत की सजा का प्रावधान है। यह मामला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मोहम्मद हफीज उर रहमान खान की अदालत में सुना गया था।

मौत की सजा पाए नौमान मसीह के परिजनों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने नौमान को बेगुनाह बताया है। नौमान के पापा असगर मसीह के मुताबिक पुलिस ने उनके बेटे को फँसाया है। सजा के बाद अपना और अपनी पत्नी का दिल टूट जाने की बात करते हुए असगर मसीह ने गॉड पर भरोसा होने और अपने बेटे के सही सलामत वापस आने की उम्मीद जताई है। वहीं पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता इलियास सैमुअल ने इस फैसले को दोषपूर्ण बताते हुए इसे हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।

मात्र 35 पैसे में ₹10 लाख का बीमा कवरेज! इलाज का खर्च भी मिलता है, रेलवे के ट्रेवल इंश्योरेंस के बारे में जानें सब कुछ

ओडिशा के बालासोर में तीन ट्रेनों की टक्कर (Odisha Balasore Train Accident) 260 से अधिक लोगों की मौत हो गई है, जबकि लगभग 1000 लोग घायल हो गए हैं। अनुग्रह राशि के तौर पर रेलवे की ओर से हर मृतक के परिवार को 10 लाख रुपए और पीएमएनआरएफ फंड से 2 लाख रुपए दिए जाएँगे।

वहीं, गंभीर रूप से घायलों को रेलवे 2-2 लाख रुपए का मुआवजा देगा, जबकि मामूली रूप से घायलों को 50,000 रुपए की अनुग्रह राशि दी जाएगी। वहीं, पीएमएनआरएफ की तरफ से सभी घायलों को 50 हजार रुपए की सहायता राशि दी जाएगी। इससे अलग, ट्रेन यात्रा के दौरान होने वाले ट्रैवल इंश्योरेंस से भी परिजन सहायता राशि ले सकते हैं।

ऑनलाइन टिकट बुकिंग पर ट्रैवल इंश्योरेंस

IRCTC की वेबसाइट या ऐप से टिकट बुक करने वाले यात्रियों को 35 पैसे में ट्रैवल इंश्योरेंस मिलता होता हैं। इस 35 पैसे में सारे टैक्स भी शामिल होते हैं और यात्रा के शुरुआती स्टेशन से लेकर यात्रा के अंतिम स्टेशन तक इसमें यात्री को कवरेज मिलता है। हालाँकि, बुकिंग के दौरान इस इंश्योरेंस को छोड़ने का भी विकल्प होता है।

अब जबकि ओडिशा के बालासोर में जो ट्रेन हादसा सामने आई है, उसमें 260 से अधिक लोगों की मौत हो गई है, जबकि लगभग 1000 लोग घायल हो गए हैं। ऐसे में ट्रैवल इंश्योरेंस का महत्व समझ में आता है। ट्रैवल इंश्योरेंस से पीड़ित परिवार का दुख तो कम नहीं होता, लेकिन इससे मिलने वाली रकम उनके अन्य कार्यों में सहायक साबित होती है।

ट्रैवल इंश्योरेंस के लिए कौन करता सकता है क्लेम और कितनी मिलेगी राशि

यात्रा के दौरान हादसे में यात्री मौत हो जाती है तो उसके परिजनों को इंश्योरेंस कंपनी 10 लाख रुपए मुआवजा देती है। अगर यात्री पूरी तरह दिव्यांग हो जाता है तो भी उसे 10 लाख रुपए मिलेंगे। वहीं, आंशिक स्थायी दिव्यांगता पर यात्री को 7.5 लाख रुपए मुआवजा मिलता है, जबकि घायलों को अस्पताल के खर्चे के लिए 2 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाता है।

ट्रैवल इंश्योरेंस लेने वाले यात्री के साथ दुर्घटना होने पर मुआवजा के लिए कुछ शर्तें पूरी करनी होती है। मुआवजे का दावा वे यात्री या उनके परिजन ही करते हैं, जिन्होंने IRCTC की वेबसाइट या ऐप से टिकट बुक की है। ट्रैवल इंश्योरेंस की ये सुविधा केवल कंफर्म या आरएसी टिकट वाले यात्रियों को ही मिलेंगे। ट्रैवल इंश्योरेंस के लिए 5 साल से कम उम्र के बच्चे योग्य नहीं होते हैं।

मुआवजे का दावा

IRCTC का फिलहाल तीन कंपनियों के साथ भागीदारी है। ये कंपनियाँ हैं- श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी और रॉयल सुंदरम जनरल इंश्योरेंस कंपनी। ऑनलाइन टिकट बुक करने और ट्रैवल इंश्योरेंस लेने पर इन्हीं में से किसी कंपनी का इंश्योरेंस मिलता है, जो यात्री के पंजीकृत मोबाइल और ईमेल पर आता है।

दुर्घटना के बाद, यात्री का जिस कंपनी का ट्रैवल इंश्योरेंस है, उस बीमा कंपनी के ऑफिस में जाकर आधार कार्ड, पैन कार्ड और पहचान प्रमाण सहित आवश्यक दस्तावेज देने पड़ते हैं। रेल दुर्घटना की तारीख से अगले चार महीने की अवधि के भीतर बीमा के लिए यात्री या उसके परिजन दावा कर सकते हैं।

जिस यात्री के लिए बीमा का दावा किया जा रहा है, उसका विवरण पहले से ही इंश्योरेंस कंपनी के पास होता है। बीमा का दावा करते समय सबसे महत्वपूर्ण मृत्यु अथवा अपंगता का प्रमाण जरूरी होता है। बीमा कंपनी को इसे भी देना जरूरी होता है।

हिन्दू लड़की से बलात्कार, गोमांस खिलाया, अब्बा से करवाया ‘हलाला’: तिलक और कलावा पहनता था आबिद, ‘बबलू’ बन फाँसा था

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ एक ब्यूटी पार्लर संचालिका ने आबिद पर बबलू नाम बता कर खुद को प्रेम जाल में फँसाने और बाद में धर्म परिवर्तन का आरोप लगाया है। पीड़िता के मुताबिक उसे गौमांस खाने पर भी मजबूर किया गया और अब्बा के साथ हलाला का दबाव बनाया गया। 21 मई 2023 को पुलिस ने आबिद और उसके घर के कुछ अन्य सदस्यों पर मतांतरण, रेप सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला बरेली के सुभाषनगर थानाक्षेत्र का है। पीड़िता का कहना है कि वह ब्यूटी पार्लर चलाती थी। यहाँ आबिद ने उसकी किसी सहेली से नंबर हासिल किया और फोन करने लगा। फोन पर आबिद ने खुद को बबलू बताया। कुछ दिनों बाद आबिद का ब्यूटी पार्लर पर आना-जाना भी शुरू हो गया। पीड़िता का दावा है कि खुद को बबलू बताने वाला आबिद तिलक लगाता था और हाथ में कलावा बाँधता था। दिसंबर 2018 में आबिद ने बहाने से पीड़िता को अपने घर बुलाया। यहाँ बंधक बना कर उसने लड़की से रेप किया। बाद में आबिद के घर वालों ने लड़की को इस्लाम कबूल कर के निकाह का विकल्प दिया।

पीड़िता के मुताबिक निकाह से पहले हुए रेप और धर्मान्तरण को आबिद के घर वालों ने अपने परिवार की परम्परा बताया था। धर्म परिवर्तन के बाद पीड़िता का नया इस्लामी नाम अंजुम बेगम रखा गया। अंजुम बेगम के मुताबिक निकाह के लिए उनके दबाव में होने की वजह आबिद द्वारा उसके खींचे गए आपत्तिजनक फोटो और बनाए गए अश्लील वीडियो भी थे। कुछ दिनों बाद आबिद ने अंजुम बेगम को बीवी का दर्जा देने के लिए अपने अब्बू मोहम्मद रज़ा से हलाला की शर्त रखी।

शिकायत के मुताबिक पीड़िता के मना करने के बावजूद आबिद के अब्बू मोहम्मद रज़ा ने भी उसके साथ रेप किया। इस दौरान लड़की को जबरन गोमांस खिलाया गया और कहीं भी मुँह खोलने पर टुकड़ों में काट कर नहर में फेंक देने की धमकी दी जाती रही। लड़की का ये भी आरोप है कि उस पर आबिद के घर वाले 24 घंटे नजर रखते थे और खिड़की से झाँकने पर भी पिटाई की जाती थी। एक दिन जैसे-तैसे वह घर से निकल पाई और सीधे थाने पहुँच कर केस दर्ज करवाया।

पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आबिद उर्फ बबलू, उसके भाई आरिफ, अम्मी मुन्नी बेगम व भाभी सोनी के खिलाफ धर्मान्तरण, रेप, दहेज उत्पीड़न, मारपीट और धमकी सहित अन्य धाराओं में FIR दर्ज कर ली है। केस दर्ज होने के बाद से आबिद फरार है जिसकी तलाश की जा रही है। विश्व हिन्दू परिषद ने इस मामले में पुलिस से आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।