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न करेंगे फोन इस्तेमाल, न देंगे मीडिया को बयान: HC ने मनीष सिसोदिया को दी 7 घंटे की बेल, सिर्फ बीमार पत्नी से मिलने की है इजाजत

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) को कोर्ट से मामूली राहत मिली है। दिल्ली हाईकोर्ट ने AAP नेता को अपनी बीमार पत्नी से मिलने के लिए शनिवार (3 जून 2023) को 7 घंटे की जमानत दी है। उनकी पत्नी सीमा सिसोदिया की तबीयत बिगड़ है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, मनीष सिसोदिया जेल से अपने घर पहुँच गए हैं।

सीमा सिसोदिया की तबीयत फिर से बिगड़ गई है। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कोर्ट के आदेश के बाद मनीष सिसोदिया अपने घर पहुँचे, लेकिन पत्नी से नहीं मिल सके। उनके घर पहुँचने से पहले ही सीमा सिसोदिया को अस्पताल में एडमिट करवाना पड़ा है। सीमा को नजदीकी राममनोहर लोहिया अस्पताल के आपातकालीन वॉर्ड में भर्ती कराया गया है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार (2 जून 2023) को मनीष सिसोदिया की अंतरिम जमानत पर फैसला सुरक्षित रख लिया। हालाँकि, उन्हें शनिवार को सुबह 10 बजे से लेकर शाम को 5 बजे तक सुरक्षा अभिरक्षा में अपनी बीमार पत्नी से मिलने की इजाजत दे दी है। इस दौरान वे मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करेंगे और ना ही मीडिया को कोई बयान देंगे।

हाईकोर्ट ने उन्हें सिर्फ अपने परिवार से बात करने की इजाजत दी है। उन्हें मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही अदालत ने मनीष सिसोदिया को पत्नी की मेडिकल रिपोर्ट शनिवार (3 जून 2023) की शाम तक अदालत में जमा करने के लिए कहा है।

मनीष सिसोदिया की पत्नी सीमा सिसोदिया खतरनाक बीमार से पीड़ित हैं। उन्हें मल्टीपल स्केलेरोसिस (Multiple sclerosis) है। इस बीमारी में इंसान के दिमाग और रीढ़ की हड्डी को अक्षम हो जाती है। यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला करती है, जिसके कारण पीड़ित को अपने शरीर पर नियंत्रण नहीं रहता है।

मनीष सिसोदिया के घर में उनकी पत्नी के अलावा और कोई नहीं है। उनका एक बेटा है, जो अपनी पढ़ाई के लिए विदेश में रहता है। मनीष सिसोदिया ने कहा था कि वे अपनी पत्नी का ख्याल रखने वाले अकेले व्यक्ति हैं। इसके आधार पर उन्होंने कोर्ट से कई बार जमानत की अपील की थी। अप्रैल में भी उनकी पत्नी की तबीयत बिगड़ने पर अपोलो में भर्ती कराया गया था।

‘या खुदा’ बोलकर इमरान ने किया मंत्री गणेश जोशी पर हमला, सुरक्षाकर्मियों ने पकड़कर डंडा छीना: घरवाले बोले- वो ‘सिरफिरा’ है, पता नहीं घर से कैसे निकला

देहरादून में एक युवक द्वारा भाजपा नेता व उत्तराखंड सरकार में मंत्री गणेश जोशी पर हमले की खबर है। हमलावर का नाम इमरान बताया जा रहा है जिस पर बाजार में मौजूद अन्य दुकानदारों से भी मारपीट का आरोप है। हमले के दौरान इमरान ने मजहबी नारेबाजी भी की। आरोपित के घर वालों ने उसकी मानसिक स्थिति ठीक न होने की दलील दी है। स्थानीय लोगों ने हमलावर की पिटाई कर दी। बाद में उसे पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। घटना शुक्रवार (2 जून 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला देहरादून के डाकरा बाजार का है। यहाँ शुक्रवार को राज्य सरकार में सैनिक कल्याण व कृषि मंत्री गणेश जोशी जनसम्पर्क कर रहे थे। इस दौरान वहाँ मौजूद एक इमरान नाम का युवक अचानक ही उनकी तरफ लपका। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हमले के समय इमरान के पास डंडा था। इमरान ने मंत्री जोशी को पकड़ने की कोशिश की। हालाँकि इस दौरान मंत्री के साथ चल रहे सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़ लिया। उन्होंने इमरान के हाथ से डंडा छीन लिया।

हंगामे को देखते हुए घटनास्थल पर आस-पास के लोग भी जमा हो गए। उन्होंने इमरान की पिटाई कर दी। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में इमरान को मंत्री जोशी के सुरक्षाकर्मियों से उलझते देखा जा सकता है। बाद में पुलिस ने इमरान ने इमरान को भीड़ की पिटाई से बचाया और हिरासत में ले लिया। फिलहाल उस से पूछताछ जारी है। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक इमरान मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर का रहने वाला है। वह घटना के 2 दिन पहले ही देहरादून आया था।

लगाया था ‘या खुदा’ का नारा

ऑपइंडिया ने इस मामले में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी से बात की। उन्होंने बताया कि उन पर हमले के दौरान इमरान ने ‘या खुदा’ का नारा लगाया था। उन्होंने कहा कि उन पर हमले से पहले इमरान कई लोगों के साथ न सिर्फ मारपीट कर चुका था बल्कि उसने कई जगहों पर तो चाकू भी लहराए थे। बकौल गणेश जोशी दिल्ली में हुई चाकूबाजी की घटना से लोग और उनके सुरक्षाकर्मी अतिरिक्त सतर्क हैं।

खुद पर इमरान की पिटाई के दौरान चुप रहने के कुछ मीडिया संस्थानों द्वारा लगाए गए आरोपों को मंत्री गणेश जोशी ने बेबुनियाद बताया। मंत्री का दावा है कि उन्होंने ही पुलिस को बुला कर हमलावर को सौंपा था। बाद में इमरान के घर वालों ने मंत्री जोशी से मुलाकत की और हमलावर को सिरफिरा बताया। मंत्री के मुताबिक इमरान के घर वालों का दावा है कि वो उसे एक कमरे में बाँध कर रखते थे लेकिन घटना के दिन वो न जाने कैसे कमरे से निकल कर भाग गया।

गोल्डन टेंपल के पास 4 बम होने की सूचना… अफवाह फैलाने पर 1 निहंग गिरफ्तार: ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी से पहले पंजाब में सुरक्षा टाइट, पुलिस अलर्ट पर

ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी पर पंजाब में पुलिस अलर्ट है। जगह-जगह पुलिस फ्लैग मार्च निकाल रही है। इसी बीच अमृतसर पुलिस कंट्रोल रूम में आधी रात को सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के पास चार बम लगाए जाने की सूचना दी गई। सूचना के तुरंत बाद ही पुलिस के दस बम निरोधक दस्ते श्री हरमंदिर के आसपास चेकिंग करने पहुँचे और जाँच के बाद कहीं बम नहीं मिला। गलत सूचना देने के मामले में पुलिस ने 20 साल के एक निहंग को हिरासत में लिया है।

बता दें कि पंजाब के अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में छिपे आतंकी जरनैल से भिंडरांवाले के खिलाफ प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने ऑपरेशन का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद 1 जून 1984 से 8 जून 1984 तक सेना ने ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाया था। इसके पाँच महीने बाद 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गाँधी की हत्या कर दी गई थी।

ब्लू स्टार की बरसी को देखते हुए पंजाब के शहर-शहर में पुलिस फ्लैग मार्च निकाल रही है। बैरिकेडिंग करके सघन चेकिंग अभियान चला रही है। इतना ही नहीं, प्रमुख इमारतों पर ड्रोन के जरिए नजर रखी जा रही है। इसके लिए संदिग्धों की जाँच के लिए सीसीटीवी कैमरे के फुटेज को खंगाला जा रहा है।

इसी बीच शुक्रवार (2 जून 2023) की रात करीब 1.30 बजे को अमृतसर पुलिस को कंट्रोल को हरमंदिर साहिब में चार बम लगाए जाने की सूचना दी गई। इसके बाद पुलिस फोर्स सुबह चार बजे तक इलाके का कोना-कोना छान मारा। हालाँकि, बम कहीं नहीं मिले।

इसके बाद पुलिस की साइबर टीम ने पुलिस कंट्रोल रूम में सूचना देने वाले व्यक्ति का मोबाइल नंबर किया तो यह 20 साल के एक निहंग का निकला। पुलिस ने उसे हिरासत में लिया है। इसके साथ ही कुछ बच्चों को भी हिरासत में लिया गया है। बताया जा रहा है कि आरोपितों ने शरारत करते हुए कंट्रोल रूम में यह सूचना दी थी।

233 की मौत, 900 घायल: ओडिशा के बालासोर में 3 ट्रेन टकराने से भीषण हादसा, मौके पर पहुँचे रेल मंत्री, रेस्क्यू जारी

ओडिशा के बालासोर में शुक्रवार (3 जून 2023) की शाम को तीन ट्रेनें भीषण दुर्घटना की हो गईं। इस हादसे में अब तक 233 लोगों के शव बरामद किए गए हैं। वहीं, चिपकी हुई बोगियों में अभी भी लाशें पड़ी हुई हैं, जिन्हें निकालने का काम जारी है। हालात को देखकर मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका जाहिर की जा रही है। वहीं, हादसे में 1,000 यात्री घायल बताए जा रहे हैं। ट्रेन की बोगियाँ पटरी से बहुत दूर तक बिखरी हुई हैं।

इस घटना में फँसे हुए यात्रियों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। ऑपरेशन में NDRF के अलावा सेना और एयरफोर्स को भी लगाया गया है। वहीं, रेल मंत्री घटनास्थल पर भी पहुँचे हुए हैं। रेल मंत्री ने इस घटना की जाँच के आदेश दे दिए हैं। वहीं, घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इस हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों और घायल हुए लोगों के लिए मुआवजे का ऐलान किया गया है।

कैसे हुआ हादसा

यह दुर्घटना बालासोर जिले के बाहानगा स्टेशन से करीब दो किलोमीटर दूर पनपना के पास हुई है। वहाँ शालीमार से चेन्नई जा रही कोरोमंडल एक्सप्रेस (12841-अप) बेपटरी हो गई और यशवंतपुर (बंगलुरु) से हावड़ा जा रही एक्सप्रेस ट्रेन से साथ टकरा गईं। कोरमंडला एक्सप्रेस की रफ्तार इतनी ज्यादा थी कि वह पटरी से उतरने के बाद एक मालगाड़ी से जा टकराई।

हादसा इतना भीषण है कि ट्रेन की बोगियाँ दूर तक जा गिरीं। बोगियाँ एक दूसरे के ऊपर चढ़ गई। कहा जा रहा है कि हादसे के बाद ट्रेन की बोगियाँ चिपक गई हैं। उसमें फँसे हुए यात्रियों को निकालने के लिए बोगियों को काटा जा रहा है। लोगों के शरीर एक दूसरे से चिपके हुए हैं। यात्रियों के कटे हुए अंग इधर-उधर पड़े हुए हैं।

कहा जा रहा। है कि जिस वक्त ये हादसा हुआ, उस वक्त शाम का समय था और यात्री लंबे सफर के दौरान नाश्ता कर रहे थे। इस दौरान ये हादसा हो गया। दुर्घटना की शिकार दोनों यात्री ट्रेनें पूरी तरह भरी हुई थीं। दोनों में 3500-4500 यात्री रहे होंगे। यात्रियों की संख्या को देखते हुए मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। इस हादसे में सबसे अधिक प्रभावित कोरोमंडला एक्सप्रेस की यात्री हुए हैं।

हादसा का दृश्य ऐसा है कि देखने वालों की रूह काँप जाए। एक स्थिति तो ऐसी रही कि रेलवे लाइन की पटरी टूट कर नीचे से बोगी में घुस गई और उस पटरी में कई लोग धँस गए। हादसे के कारण लगभग 1 किलोमीटर तक में फैले मलबे में कई ऐसे दृश्य सामने आए हैं, जो सिर्फ फिल्मों में ही देखने को मिलता था।

बचाव कार्य जारी

इस भीषण दुर्घटना में स्थानीय प्रशासन और NDRF के अलावा थलसेना और वायुसेना को तैनात किया गया है। सेना के जवान बोगियों में फँसे लोगों को निकाल रहे हैं। घायलों को वायुसेना का हेलीकॉप्टर नजदीकी अस्पतालों में लेकर जा रहा है। इसके अलावा, घटना स्थल पर 100 से अधिक एंबुलेंस भी तैनात किए गए हैं।

घायलों को नजदीकी अस्पतालों के साथ-साथ कटक सहित अन्य नजदीकी शहरों के अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है। रेलमंत्री वैष्णव ने कहा है कि घायलों को बेहतरीन से बेहतरीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। घायलों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा दी जा रही है।

मृतकों को 10-10 लाख रुपए का मुआवजा

इस घटना में मारे गए लोगों के परिजनों को सरकार मुआवजा देने का ऐलान किया है। रेल मंत्रालय की ओर से हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को 10-10 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा। वहीं, हादसे में घायल लोगों को दो-दो लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं, जिन लोगों को मामूली चोट लगी हैं, उन्हें 50 हजार रुपए दिए जाएँगे।

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रेन दुर्घटना के पीड़ितों को 2-2 लाख रुपए और घायलों को 50,000 रुपए की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। ये राशि पीएमएनआरएफ (PMNRF) फंड से दिए जाएँगे। इस तरह मृतकों को 12 लाख रुपए और गंभीर रूप से घायलों को 1 लाख रुपए देने की घोषणा की गई है।

घायलों को मदद करने वालों की लगी कतार

इस हादसे में घायल हुए लोगों की मदद करने के लिए स्थानीय लोग सामने आए हैं। आमतौर पर ऐसी घटनाओं के समय रक्त की उपलब्धता सबसे बड़ी समस्या होती है। हालाँकि, स्थानीय लोग स्वेच्छा से रक्तदान करने के लिए अस्पतालों में पहुँचे हैं। लोगों की लंबे कतारें लगी हैं।

इस दुर्घटना में घायल हुए कुछ लोगों का कहना है कि जब घटना हुई को स्थानीय लोग सबसे पहले वहाँ पहुँचे और उनकी मदद की। स्थानीय लोगों ने घायलों को बाहर निकाला और जो घायल थे, उन्हें अस्पतालों में भर्ती कराने की कोशिश की। स्थानीय लोगों ने घायलों को पानी आदि उपलब्ध कराया था।

यूँ ही नहीं बन गई बाहुबली… 24% ब्याज पर SS राजमौली ने लिया था ₹400 करोड़ का कर्ज: एक्टर राणा दग्गुबाती का खुलासा

दक्षिण भारत की ब्लॉकबस्टर फिल्मों में से एक बाहुबली को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। फिल्म में भल्लालदेव का किरदार निभाने वाले अभिनेता राणा दग्गुबाती ने कहा है कि बाहुबली बनाने के लिए फिल्म मेकर्स ने ब्याज पर बैंको से मोटा कर्ज लिया था। फिल्म 2 पार्ट में रिलीज की गई थी। दोनों पार्ट मिलाकर फिल्म ने 1100 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया था।

इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू के दौरान राणा दग्गुबाती ने कहा कि पहले फिल्म मेकर्स घर या दूसरी संपत्ति को बेचकर या बैंक में गिरवी रखकर पैसों का इंतजाम करते थे। बैंक इसके लिए 24-28 प्रतिशत तक का ब्याज लेते थे। बाहुबली बनाने के लिए भी 24 प्रतिशत ब्याज दर पर 300-400 करोड़ रुपए लोन लिए गए थे। राणा ने कहा कि बाहुबली -1 के लिए 180 करोड़ का लोन लिया गया था। ब्याज पर लिए पैसों से ही दूसरे पार्ट का भी कुछ हिस्सा शूट कर लिया गया था। मेकर्स ने इस बारे में सोचा ही नहीं कि यदि फिल्म सफल नहीं रही तो क्या होगा?

बता दें कि फिल्म बाहुबली के पहले भाग (बाहुबली: द बिगनिंग) ने 600 करोड़ रुपए और दूसरे पार्ट (बाहुबली 2: द कॉन्क्लूज़न) ने 500 करोड़ रुपए की कमाई की थी। बाहुबली: द बिगनिंग वर्ष 2015 में रिलीज हुई थी। वहीं बाहुबली- 2: द कॉन्क्लूज़न को इसके 2 साल बाद वर्ष 2017 में रिलीज किया गया था। फिल्म में एक्टर प्रभास और राणा दग्गुबाती मुख्य भूमिका में थे। फिल्म ने दक्षिण भारत ही नहीं बल्कि हिंदी भाषी इलाकों में भी धूम मचाई थी। यही वजह रही कि फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।

बाहुबली का निर्देशन एसएस राजामौली ने किया था। अपनी फिल्मों को अलग अंदाज में पेश करने को लेकर मशहूर एसएस राजामौली की फिल्म आरआरआर ने भी बॉक्स ऑफिस पर कमाल दिखाया था। साल 2022 में रिलीज हुई इस फिल्म के गाने नाटू नाटू को बेस्ट ओरिजिनल सॉन्ग के लिए ऑस्कर अवॉर्ड भी मिला था। RRR के माध्यम से एसएस राजामौली ने दुनिया भर में अपने बेहतरीन निर्देशन का लोहा मनवाया था।

बृजभूषण शरण सिंह vs पहलवान: क्या हैं आरोप, क्या हैं कानूनी प्रावधान, अब तक क्यों नहीं हुई गिरफ्तारी… हर सवाल का जवाब एक साथ

भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के अध्यक्ष और यूपी के कैसरगंज से भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह (BJP MP Brij Bhushan Sharan Singh) की गिरफ्तारी की माँग को लेकर पहलवानों के साथ-साथ खाप पंचायतें (Khap Panchayat Leaders) और किसान संगठन भी सामने आए हैं। खाप नेता सरकार को लगातार धमकी दे रहे हैं।

पहलवानों ने भाजपा सांसद पर दो प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई है। इनमें से एक में नाबालिग के साथ यौन दुर्व्यवहार के आरोप में पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। कॉन्ग्रेस सहित विपक्षी दल और खाप पंचायतें एवं पहलवानों बार-बार कह रहे हैं कि पॉक्सो में मुकदमा दर्ज होने के बाद बृजभूषण शरण सिंह की तुरंत गिरफ्तारी होनी चाहिए। इसके लिए वे धरना-प्रदर्शन से लेकर अपने मेडल नदी में बहाने सहित तरह-तरह से दबाव बना रहे हैं।

किसान नेता राकेश टिकैत ने तो शुक्रवार (2 जून 2023) को हरियाणा के कुरुक्षेत्र में खाप की बैठक के बाद ऐलान किया, “केंद्र सरकार के पास 9 जून तक का समय है। हम बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी से कम पर कोई समझौता नहीं करेंगे। अगर ऐसा नहीं होता है तो हम 9 जून को जंतर-मंतर जाएँगे और देश भर में पंचायत करेंगे। पहलवानों पर लगे मुकदमें वापस हों और बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी हो।”

इन सबके साथ कॉन्ग्रेस नेता और सुप्रीम कोर्ट के दिग्गज वकील कपिल सिब्बल ने भी कह दिया था कि पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज होने और 164 के तहत बयान दर्ज होने के बाद तत्काल गिरफ्तारी बृजभूषण सिंह के अलावा, सभी आरोपितों को लागू होती है, क्योंकि वे भाजपा से ताल्लुक रखते हैं। सिब्बल के इन आरोपों के बाद POCSO ऐक्ट के कानूनी पहलुओं को समझने का प्रयास करते हैं।

क्या है यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act)?

POCSO अधिनियम भारत सरकार द्वारा बनाया गया कानून है, जिसमें नाबालिगों बच्चों (लड़का और लड़की दोनों) के खिलाफ यौन अपराध होने पर आरोपितों के इसके तहत मुकदमा चलाया जाता है। इस कानून का उद्देश्य नाबालिगों को यौन शोषण, यौन उत्पीड़न, चाइल्ड पोर्नोग्राफी से बचाने का प्रयास है। इसमें बाल यौन शोषण के वर्गीकरण के साथ-साथ आरोपितों के लिए कठोर सजा का प्रावधान है।

POCSO कानून के तहत नाबालिग यानी 18 साल से कम उम्र के बच्चों के साथ अश्लील हरकत करना, उनके निजी अंगों को छूना, उनसे अपने निजी अंग टच करवाना, बच्चों को अश्लील फिल्में दिखाना, डिजिटल रेप, उनके शरीर को गलत इरादे से छूना आदि को शामिल किया जाता है और आरोपितों को POCSO की धाराएँ लगाई जाती हैं।

इसके तहत होने वाले अपराध को दो वर्गों में विभाजित किया गया है। पहला, 12 साल या उससे कम उम्र की बच्चों के साथ यौन अपराध और दूसरा 12 साल से कम के बच्चों के साथ होने वाला यौन अपराध। दोनों स्थितियों में सजा के अलग-अलग प्रावधान हैं।

POCSO कानून के तहत सजा का प्रावधान

POCSO में दो तरह की सजा का प्रावधान है। अगर यौन अपराध 12 साल से कम उम्र के बच्चे के साथ होता है तो इसमें आरोपितों को सजा के रूप में आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड तक दी जा सकती है। वहीं, नाबालिग की उम्र अगर 12 वर्ष से अधिक और 16 वर्ष या उससे कम है तो सजा के रूप में न्यूनतम 10 वर्ष और अधिकतम 20 वर्ष की कड़ी कैद का प्रावधान है। 

POCSO एक्ट के तहत पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के नियम

यौन अपराध संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। इसलिए आमतौर पर इसमें FIR दर्ज होते ही आरोपित/आरोपितों को पुलिस गिरफ्तार कर लेती है। गिरफ्तारी के साथ ही पुलिस अपनी जाँच भी आगे जारी रखती है। चार्जशीट फाइल होने तक इसमें आरोपित को जमानत नहीं मिलती है।

अधिवक्ता आनंद विजय का कहना है कि POCSO अधिनियम में ऐसा कहीं भी नहीं लिखा है कि FIR दर्ज होते ही आरोपित को गिरफ्तार करना अनिवार्य है। यह पुलिस का विशेषाधिकार है कि वह जाँच में अगर किसी तरह का अवरोध आरोपित की ओर से नहीं पाती है तो उसे तत्काल नहीं भी गिरफ्तार करेगी।

संज्ञेय अपराध होने के बावजूद बृजभूषण सिंह की क्यों नहीं हो रही गिरफ्तारी?

हत्या, बलात्कार, डकैती जैसे गंभीर मामलों में पुलिस आमतौर पर FIR दर्ज होते ही आरोपित को गिरफ्तार कर लेती है। अगर पुलिस को लगता है कि आरोपित अगर बाहर रहता है तो वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है, गवाहों को धमका सकता है, देश छोड़कर भाग सकता है, अन्य किसी तरह का अपराध कर सकता है या फिर जाँच को प्रभावित कर सकता है तो वह आरोपित को गिरफ्तार करती है।

अगर पुलिस को लगता है कि आरोपित ऊपर बताए गए मामलों में से किसी भी तरह का हस्तक्षेप या मामले को प्रभावित नहीं करेगा तो वह उसे गिरफ्तार नहीं भी कर सकती है। अगर कोई व्यक्ति सम्मानित है या संवैधानिक पद है तो पुलिस आमतौर पर आरोपित को गिरफ्तारी करने से पहले शिकायत की गंभीरता से जाँच करती है और उसकी सत्यता के आधार पर ही आरोपित को गिरफ्तार करने या नहीं करने के आगे का फैसला लेती है।

एक मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस हृषिकेश रॉय की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा था, “अगर जाँच अधिकारी के पास यह मानने का कोई कारण नहीं है कि अभियुक्त फरार हो जाएगा या समन की अवहेलना करेगा और वास्तव में उसने जाँच में सहयोग किया है तो हम आरोपित को गिरफ्तार करने की अधिकारी पर एक मजबूरी की सराहना करने में विफल हैं।”

सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम केंद्रीय जाँच ब्यूरो के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी थी कि संज्ञेय अपराध में भी गिरफ्तारी तब तक अनिवार्य नहीं है, जब तक कि केस के जाँच अधिकारी को ऐसा नहीं लगता हो। इसलिए दिल्ली पुलिस के जाँच अधिकारी को बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी जरूरी नहीं लग रही है।

बताते चलें कि बुधवार (31 मई 2023) को यह बात सामने आई थी कि बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ जाँच में अभी तक दिल्ली पुलिस को कुछ भी सबूत नहीं मिला है, जिनके आधार पर उन्हें गिरफ़्तार किया जा सके। दिल्ली पुलिस के उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से यह खबर सामने आई थी। हालाँकि, पहलवानों के दबाव और मीडिया में बहसबाजी को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने बाद में कहा कि जाँच अभी जारी है।

क्या सांसद होने की वजह से बच रहे हैं WFI चीफ?

सांसद विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं। इसलिए प्रोटोकॉल के अनुसार, संसद परिसर के भीतर अध्‍यक्ष या सभापति की अनुमति के बिना किसी आरोपित सांसद को दीवानी या आपराधिक मामले में ना ही कानूनी समन दिया जा सकता है और ना ही उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। इसके लिए अध्यक्ष या सभापति की अनुमति जरूरी है। इसके अलावा, सत्र के शुरू होने से 40 दिन पहले और खत्म होने के 40 बाद भी उनकी गिरफ्तारी नहीं की जा सकती है

आमतौर पर यह स्थिति संसद सत्र के दौरान होती है, जब उसमें भाग लेने के लिए सांसद परिसर में होते हैं। अगर कोई भी सांसद बाहर होता है तो अध्यक्ष या सभापति को सूचित करके गिरफ्तार करने का प्रावधान नहीं है। हालाँकि, भ्रष्टाचार के मामले में ऐसा नहीं है। भ्रष्टाचार के मामलों में सांसदों पर मुकदमा चलाने से पहले लोकसभा स्पीकर अथवा राज्यसभा के चेयरमैन से अनुमति लेनी पड़ती है।

बृजभूषण शरण सिंह के मामले में ‘बर्डन ऑफ प्रूफ’ किस पर?

इंडियन एविडेंस एक्ट 1872 के सेक्शन 101 में ‘बर्डन ऑफ प्रूफ’ का जिक्र है। आमतौर पर मुकदमा दायर करने वाले पर अपराध को साबित करने की जिम्मेदारी होती है। हालाँकि, पॉक्सो एक्ट में इसके उल्टा है। इसमें जिस पर मुकदमा दायर होता है, उस पर खुद को बेगुनाह साबित करने की जिम्मेदारी होती है।

वहीं, ड्रग्स तस्करी से जुड़े NDPS एक्ट और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े PMLA एक्ट में भी जब सरकारी एजेंसी केस दर्ज करती है तो आरोपित को साबित करना होता है कि वह निर्दोष है। अन्य मामलों में आरोप लगाने वाले को सबूत देना होता है कि आरोपित ने ही अपराध किया है।

इसलिए POCSO एक्ट के तहत एक मामले में बृजभूषण शरण सिंह को साबित करना होगा कि वे निर्दोष हैं, जबकि दूसरे FIR में आरोप लगाने वाली पहलवानों को साबित करना होगा कि बृजभूषण शरण सिंह दोषी हैं।

अगर ऊपर के मामलों को ध्यान से देखें तो यह स्पष्ट है कि POCSO के तहत मुकदमा दर्ज होने के बाद तुरंत गिरफ्तारी जरूरी नहीं है और ना ही सांसद होने की वजह से इसका बृजभूषण शरण सिंह को फायदा मिल रहा है। विपक्षी दलों, खाप पंचायतों, पहलवानों आदि द्वारा भाजपा सांसद की तुरंत गिरफ्तारी की माँग दरअसल दबाव की राजनीति के साथ-साथ भारतीय कुश्ती संघ में होने वाले अध्यक्ष पद से भी जुड़ा है।

क्यों चाहते हैं पहलवान बृजभूषण शरण की तुरंत गिरफ्तारी?

बृजभूषण शरण सिंह साल 2011 से ही भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष हैं। इस तरह वे इस पद पर तीन बार रह चुके हैं और उन्होंने भारतीय कुश्ती संघ को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दी है, जिसकी तारीफ खुद आरोप लगाने वाले पहलवान भी करते आए हैं। बृजभूषण सिंह पहलवानों को समर्थन दे रहे हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे दीपेंदर हुड्डा को भी एक अध्यक्ष पद के चुनाव में हरा चुका हैं।

नियमों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति कुश्ती संघ का सिर्फ तीन बार अध्यक्ष रह सकता है। इस तरह यह चार साल के तीन कार्यकाल बृजभूषण शरण सिंह पूरे कर चुके हैं। हालाँकि, महासंघ में उनके दबदबे से इनकार नहीं किया जा सकता। आरोप लगाने वाले पहलवान भी कह चुके हैं कि बृजभूषण सिंह अगर अध्यक्ष नहीं रहेंगे तो उनका ही कोई सहयोगी रहेगा।

दरअसल, पहलवान जानते हैं कि अगर बृजभूषण शरण सिंह बाहर रहते हैं तो दीपेंद्र हुड्डा या उनके किसी चहेते को फिर अध्यक्ष पद नहीं मिल सकता है। इसलिए जाँच जारी रहने के बावजूद पहलवान बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी किसी कीमत पर चाहते हैं। वे चाहते हैं कि कुश्ती संघ के अध्यक्ष का चुनाव होने से पहले बृजभूषण शरण सिंह जेल चले जाएँ, ताकि इस चुनाव में उनका प्रभाव ना रहे।

मंत्रालय ने 13 मई 2023 को कहा था कि अगले 45 दिनों में अध्यक्ष पद का चुनाव होगा। इस तरह जून के अंत में यह चुनाव होने हैं। अध्यक्ष पद का चुनाव होने तक यह दबाव जारी रहने की उम्मीद है। जानकारों का कहना है कि अगर कुश्ती संघ के अध्यक्ष का चुनाव आज हो जाए तो कल से पहलवानों का धरना खत्म हो जाएगा, क्योंकि इसके लिए उनका कोई मकसद नहीं बचेगा।

बताते चलें कि जनवरी में पहलवानों के आरोपों के बाद खेल मंत्रालय ने बृजभूषण सिंह के हाथ से महासंघ की कमान लेकर एक समिति को सौंप दिया था। इसके साथ ही समिति ने जाँच करके भारतीय ओलंपिक संघ (IOC) को रिपोर्ट भी सौंप दी। इस दौरान पहलवानों की ओर से किसी तरह की कोई हलचल नहीं हुई।

16 अप्रैल 2023 को बृजभूषण सिंह ने कुश्ती महासंघ में नई भूमिका निभाने की ओर इशारा किया था। उन्होंने कहा था कि कई लोग हैं जो अब उनसे आँख नहीं मिला पाएँगे। अगर वे खेलना चाहते हैं तो प्रक्रिया सभी के लिए समान होगी। कुश्ती संघ किसी भी पहलवान को ओलंपिक ट्रायल से छूट नहीं देगा, चाहें उसने ओलंपिक कोटा ही क्यों नहीं जीता हो। इसके ठीक एक सप्ताह बाद यानी 23 अप्रैल को धरने पर बैठ गए।

पहलवानों की लगातार बदलती रहीं माँगें

बृजभूषण सिंह पर आरोप लगाते हुए पहलवानों ने जनवरी में भी धरना दिया था। इस दौरान खेल मंत्री मंत्रालय ने उनसे कई राउंड बातचीत की थी। उस दौरान पहलवानों ने भारतीय ओलंपिक संघ को पत्र लिखा बृजभूषण शरण सिंह को अध्यक्ष पद से हटाने समेत चार मुख्य माँगें रखी थीं। ये थीं-

1- यौन उत्पीड़न की शिकायतों की जाँच के लिए कमेटी गठित की जाए।
2- WFI के अध्यक्ष से इस्तीफा लिया जाए।
3- WFI को भंग किया जाए।
4- कुश्ती महासंघ को चलाने के लिए पहलवानों की देख-रेख में एक नई कमेटी बनाई जाए।

महिला पहलवानों ने तब तक भाजपा सांसद के खिलाफ FIR कराने की कोशिश नहीं की थी। इसको लेकर उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल भी किया जा रहा था कि जिनका यौन शोषण होता है, वे पहले पुलिस में जाकर शिकायत दर्ज कराते हैं और फिर कार्रवाई नहीं होने पर प्रदर्शन करते हैं। हालाँकि, पहलवान बिना शिकायत दर्ज कराए ही धरने पर बैठकर अपनी माँगें मनवा रहे थे।

इन माँगों में लगभग तीन माँगें मान ली गई थीं। केंद्रीय खेल मंत्री ने पीटी ऊषा के नेतृत्व में एक जाँच कमिटी गठित थी। इसके साथ ही कुश्ती संग के काम को तत्काल देखने के लिए पहलवानों की सहभागिता वाली कमिटी भी बनाई। इस दौरान बृजभूषण शरण सिंह को कुश्ती संघ के काम से अलग रखा गया। हालाँकि, WFI चीफ ने अपने पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था।

कमिटी की रिपोर्ट में पहलवानों को जैसे ही पता चला की बृजभूषण सिंह के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं तो उन्होंने दोबारा बवाल शुरू कर दिया। उन्होंने आरोप लगाना शुरू कर दिया कि यौन शोषण की शिकायत करने के लिए वे दिल्ली पुलिस के पास गई थीं, लेकिन पुलिस ने शिकायत दर्ज नहीं की। इस मामले को लेकर पहलवान सुप्रीम कोर्ट में गए।

PT ऊषा से बदतमीजी, देश के खिलाफ नारे, मोदी तेरी कब्र खुदेगी

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दिल्ली पुलिस ने दो FIR दर्ज की। इसके बाद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पहलवानों द्वारा FIR दर्ज करने की माँग को दिल्ली पुलिस ने माँग ली तो पहलवान विनेश फोगाट ने कहा था कि उन लोगों को दिल्ली पुलिस पर भरोसा नहीं है। फोगाट ने कहा, “हमारी माँग है कि उन्हें (WFI अध्यक्ष) जेल में डाला जाए। उन्हें हर एक पद से हटाया जाए। सांसद पद से भी इस्तीफा दें।”

वहीं, प्रदर्शन कर रहे बजरंग पूनिया ने कहा, “उनको (बृजभूषण सिंह को) तुरंत जेल मे डाला जाना चाहिए। हम पुलिस की FIR का इंतजार कर रहे हैं कि किन धाराओं में केस दर्ज होता है। हमारा फोन केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने नहीं उठाया।”

पहलवान साक्षी मलिक के साफ लग रहा है कि पहलवान दिल्ली पुलिस को सहयोग नहीं करेंगे और ना ही इस मामले में अपना बयान दर्ज कराएँगे। साक्षी ने कहा, “हम अपना बयान सुप्रीम कोर्ट में दर्ज कराएँगे। उनको (बृजभूषण शरण सिंह) को जेल में डालने और सभी पदों से हटाने के बाद ही हमारा प्रदर्शन खत्म होगा।”

बाद में भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी ऊषा ने कहा था कि पहलवान धरना देकर भारत की छवि को धूमिल कर रहे हैं। उन्होंने पहलवानों की आलोचना करते हुए इसे अनुशासनहीनता बताया था। IOC ने पहलवानों को एथलीट कमीशन में आने के लिए कहा।

इस पर पहलवान साक्षी मलिक ने पीटी उषा पर ही सवाल दाग दिया। साक्षी मलिक ने गुरुवार (27 अप्रैल 2023) को कहा, “मैं पीटी उषा का सम्मान करती हूँ। उन्होंने हमें प्रेरित किया है, लेकिन मैं मैम से पूछना चाहती हूँ कि महिला पहलवानों ने आगे आकर उत्पीड़न का मुद्दा उठाया है। क्या अब हम विरोध भी नहीं कर सकते?

इसके बाद पीटी ऊषा जब जंतर मंतर पर उनसे मिलने गईं तो पहलवानों के समर्थकों ने उनसे बदतमीजी, धक्का-मुक्की की। कुछ-कुछ रिपोर्ट में तो यहाँ तक कहा कि पहलवानों की एक समर्थक महिला ने उन पर थप्पड़ चला दिया। इसके बाद पीटी ऊषा की डबडबाई आँखों वाली तस्वीरें खूब वायरल हुई थीं।

इसके बाद पहलवान जंतर मंतर पर कभी विपक्षी नेताओं को बुलाते तो कभी खाप पंचायतों को तो कभी देशद्रोही तत्वों को। जंतर मंतर पर ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी, हमें चाहिए आजादी’ जैसे नारे लगाए गए। खाप पंचायतों ने दिल्ली को टैक्टरों से पाट देने की धमकी दी। केंद्र को परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। इस तरह ये तरह-तरह सरकार पर अपना दबाव बनाते आ रहे हैं। पहलवानों ने यहाँ तक कह दिया था कि उनके लिए खाप का आदेश सबसे पहले है।

जिस जमीन पर कभी था अतीक अहमद का कब्जा, वहाँ ‘भगवा रंग’ के 76 फ्लैट तैयार: खरीदने के लिए 6071 लोगों ने किया आवेदन, 1 फ्लैट पर 80 दावेदार

प्रयागराज के लूकरगंज में माफिया अतीक अहमद के कब्जे से छुड़ाई गई जमीन पर गरीबों के लिए आवास बनकर तैयार है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने अतीक के कब्जे से जमीन खाली कराकर इस पर गरीबों के लिए फ्लैट बनाने का निर्णय लिया था। दिसंबर 2021 में सीएम योगी आदित्यनाथ ने ही इसका शिलान्यास किया था। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए घरों के आवंटन के लिए 6 जून को लॉटरी निकाली जाएगी।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार लूकरगंज में अतीक अहमद के अवैध कब्जे से खाली कराई गई जमीन पर फ्लैट बनकर तैयार हैं। इन फ्लैटों को प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) ने तैयार किया है। फ्लैटों को भगवा रंग में रंग दिया गया है। अब जल्दी ही इन फ्लैटों को आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। तैयार इमारत में 76 फ्लैट हैं। जिसके लिए कुल 6071 लोगों ने आवेदन दिया है। मतलब एक फ्लैट के लिए लगभग 80 दावेदार हैं।

फ्लैटों के आवंटन के लिए 6 जून को लॉटरी निकाली जाएगी। शनिवार (03 जून 2023) को लॉटरी निकालने संबंधी विज्ञापन जारी किए जाएँगे। फ्लैट की रकम 6 लाख रुपए तय की गई है। जिसमें से 1.5 लाख भारत सरकार और 1 लाख रुपए राज्य सरकार की तरफ से दिए जाएँगे। यानि जिन लोगों की लॉटरी लगेगी उन्हें फ्लैट के लिए कुल साढ़े तीन लाख रुपए पीडीए को देने होंगे। इसमें 45 हजार रुपए आवंटन के समय और शेष बचे तीन लाख रुपए छह माह की किस्त पर देने होंगे।

सभी आवेदनकर्ताओं से रजिस्ट्रेशन के दौरान 5 हजार रुपए की सिक्योरिटी मनी ली गई थी। जिन लोगों की लॉटरी नहीं लगेगी उनकी रकम लौटा दी जाएगी। 4 मंजिला बिल्डिंग में सोलर लाइट लगवाए जाएँगे। फ्लैट में रहने वाले लोगों को पार्किंग की सुविधा भी दी जाएगी। इसके अलावा कम्यूनिटी हॉल और कॉमन एरिया भी दिया जाएगा।

16 साल की आस्था को घर से उठाकर बनाया अमीना, 70 साल के बूढ़े से निकाह: बोले हिंदू- पाकिस्तान में औरत और गोश्त में फर्क नहीं, गोबर से भगवान को लीप कर भागे

पाकिस्तान में हिंदुओं के हालात बद्तर है। किसी को वहाँ खाने के लाले पड़े हैं तो किसी को अपनी जान के। लोग बोरिया-बिस्तर समेटकर भारत आते हैं सिर्फ इस उम्मीद से… कि भारत मे कम से कम उनके साथ भेदभाव तो नहीं होगा। लेकिन उनकी इन उम्मीदों पर पानी तब फिरता है जब यहाँ आकर उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ती है। हाल में राजस्थान में प्रशासन के फैसले के बाद कई हिंदुओं के घर उजड़े थे। ऐसे में उनकी पीड़ा फिर मेनस्ट्रीम मीडिया में चर्चा में आई। पत्रकारों से बात करते हुए किसी ने बताया कि पाकिस्तान में रेप, अपहरणों की घटनाओं से तंग आकर वह लोग भारत आए तो किसी ने बताया कि उन्हें जान का खतरा था।

इसी क्रम में आजतक की मृदुलिका झा ने भी जोधपुर में रिपोर्टिंग की। उन्होंने दिखाया कि घर उजड़ने के बाद पाकिस्तान हिंदू किन हालातों में है। इसके अलावा उन्होंने जो बात की उसमें बताया गया कि पाकिस्तान में मिली प्रताड़ना और भारत में हो रही अनदेखी से उन्हें कैसा महसूस होता है।

पाकिस्तान में जमींदारी प्रथा के तले पीसे जा रहे हिंदू परिवार, बेटी के लिए भारत आने

जोधपुर के चोखां इलाके में उन्हें एक विष्णुमल मिले। वो यहाँ हरिद्वार तीर्थ के नाम पर आए थे। लेकिन आकर जोधपुर में बस गए। बीते दिनों कच्चे मकानों पर जो बुलडोजर चला उनमें एक घर उनका भी था । उन्होंने रोते हुए कहा- वहाँ घर छूटा, यहाँ घर टूटा। एक जन्म में कितनी मौतें देखनी हैं।

जानकर हैरानी होती है कि जो जमींदारी और गुलामी की प्रथा हिंदुस्तान में अब खत्म हो गई है। उस जमींदारी प्रथा के कारण पाकिस्तान में हिंदू आज भी पिस रहे हैं। विष्णुमल ने बताया कि पाकिस्तान के मीरपुर में उनका परिवार गुलाम की तरह महीना भर खेतों में काम करता था। लेकिन उन्हें दिहाड़ी सिर्फ 15 दिन की मिलती थी। स्थिति ऐसी हो गई थी कि वो मान चुके थे कि उन्हें पैसा 15 दिन का मिलता है। 

इसी तरह शिवहरि बताते हैं कि पाकिस्तान में उनकी दुकान तो थी। गद्दों पर बैठकर सामान भी बेचते थे। लेकिन आज अगर वो भारत में फेरी लगा रहे हैं तो वजह सिर्फ बेटी है। पूछने पर शिवहरि कहते हैं कि उनकी बेटी क्लास में फर्स्ट आती थी। लेकिन वो उसे स्कूल नहीं भेज सकते थे। रोकने पर बेटी पूछती थी कि जब पढ़ाना नहीं था स्कूल क्यों भेजा। इसी तरह बेटा स्कूल में पिटता था। लोग उसे काफिर कहकर चिढ़ाते थे।

तुलसी के पत्ते लेकर घर से निकलीं हिंदू महिला, भगवान की तस्वीरों को गोबर से लीपा

एक किशन अपनी कहानी सुनाते हुए कहते हैं कि वो लोग बहुत छोटे बैग लेकर भारत आए थे। आने से पहले सिंध वाले घर की दीवारों पर जो भगवान के पुराने पोस्टर आदि थे उसे गोबर से लीप दिया था ताकि किसी तरह की बेअदबी न हो। किशन कहते हैं कि पाकिस्तान में हिंदुओं का हालत अमीर ससुराल में गरीब घर से आई बहू जैसा है। जिसे काम भी सारा खुद करना है और फिर पाँव भी सबके दबाने हैं।

किशन कहते हैं कि पाकिस्तान से वो हिंदू जरूरत निकलते हैं जिनकी बेटी हैं। फिर उनकी तो तीन बेटियाँ थीं। कब तक घर में बंद रखते। उन्होंने भारत आने का फैसला किया। लेकिन पाकिस्तान से निकलना इतना आसान नहीं था। जब उन्होंने पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया शुरू की तो कानाफूसी होने लगी। उन्हें मजदूरी कम मिलने लगी। हाल ऐसे थे कि पत्नी बच्चों को आटा घोल कर पिलाती थी। बेटा इतना कमजोर हो गया था जैसे हल्की गेंद हो। पाकिस्तान में उनके लिए मंदिर जाना भी ऐसा था जैसे मजदूरी पर जा रहे हो। औरतें थाल लेकर नहीं निकल पाती थीं। बच्चे घर से नहीं बाहर आ पाते थे। किशन कहते हैं कि जब उन्होंने जब घर छोड़ा तो उनकी पत्नी ने आँचल में शगुन के तौर पर तुलसी के पत्ते बाँधे और भारत आ गए। 

70 साल के बुजुर्ग से 16 साल की आस्था का निकाह

हिंदू अपनी आपबीती सुनाते हुए बताते हैं कि पाकिस्तान में लड़कियाँ कितनी असुरक्षित है। एक सिंध के हिंदू ने जानकारी दी कि वहाँ उनकी 16 साल की बेटी की शादी 70 साल के बुजुर्ग से करा दी गई थी। जब वो लोग उससे मिलने गए तो उसे अमीना कहकर आवाज दी गई जबकि उसका नाम कभी आस्था हुआ करता था….। घरवाले पुलिस पर गए तो कहा गया शुक्र मनाओ लड़की रेप के बाद किनारे नहीं मिली।  हिंदू बताते हैं कि पाकिस्तान में लड़कियों की उम्र 8-10 साल होते ही उन्हें स्कूल जाने से रोक दिया जाताहै क्योंकि ये नहीं पता होता कि उसपर कब किसकी नजर पड़ जाए। आस्था की माँ पत्रकार को कहती भी हैं- जैसे तुम घूम रही हो सिर उघाड़े- अंजान लोगों में ऐसे पाकिस्तान में नहीं होता।

4 दिन के नवजात को छोड़कर भागी पूनम

बता दें कि पाकिस्तान से भागकर भारत आए हिंदू यहाँ अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए रोज नई लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन इस बीच उनकी यादों से वो कड़वे पल नहीं मिटे हैं जो उन्होंने पाकिस्तान में झेले। हिंदुओं का कहना है कि पाकिस्तान में औरत और गोश्त में कोई फर्क नहीं है। अगर लोग रुकते तो उनकी औरतों के चीथड़े उड़ा दिए जाते। कई लोग तो अपने बच्चों को छोड़कर भारत आए हैं जिन्हें रह रहकर अपने छोटे-छोटे बच्चों की याद आने लगती है।

एक ऐसी ही पूनम ने रिपोर्टर को बताया कि वो अपने बच्चे को सिर्फ 4 दिन ही दूध पिला सकीं। फिर भारत आ गईं। वो रो-रोकर बोलती हैं-मेरा बच्चा बस दिलवा दो। छाती भर भरके दूध आता है लेकिन वो तो वहाँ भूख से तड़पता होगा। पूनम के साथ कई हिंदू 2023 में ही पाकिस्तान से जोधपुर आए लेकिन कइयों को अपना बच्चा छोड़कर यहाँ आना पड़ा। किसी ने मामा-चाचा को बच्चा दिया तो किसी ने पड़ोसी को। फोन पर जब ये माताएँ अपने बच्चों की आवाज सुनती हैं तो कुछ होश नहीं रहता। एक तो पहाड़ से कूदने को तैयार हो गई थी।

पाकिस्तान में काफिर, भारत में आतंकी

उल्लेखनीय है कि ऐसे इलाकों में पाकिस्तान से आई महिलाएँ कैमरे के पास आने से मना करती हैं। उनका कहना होता है कि वो ऑफ कैमरा बात कर पाएँगी लेकिन कैमरे पर नहीं। उनकी तस्वीरें देखकर उनके परिवारों को पाकिस्तान में दुख दिया जाता है। श्यामा हिंदुओं की पीड़ा बताते हुए कहती हैं कि पाकिस्तान में उन्हें काफिर कहकर प्रताड़ित किया जाता था और यहाँ आकर कुछ लोग उन्हें आतंकवादी कह देते हैं। जिनके पास पाकिस्तान में रहने को छत और चलाने को पंखा कूलर था। आज उनके पास भारत में कुछ भी नहीं है। चूल्हा फूँककर रोटी बनती है। सुविधा होने के बाद भी कुछ हिंदू पाकिस्तान छोड़ चुके हैं क्योंकि वो जानते थे कि भले ही उन्हें पाकिस्तान में सुख मिलेगा लेकिन बेटियाँ असुरक्षित रहेंगी। श्यामा बताती हैं कि स्कूल जाने से लड़कियों को रोकना उनकी मजबूरी होती है क्योंकि बाज की तरह उनपर झपट्टा मारा जाता है, फिर रेप करके, धर्म बदलकर उनसे निकाह कर लेते हैं।

एक भाई ने ममता को पीट-पीटकर मार डाला; दूसरा हिंदू लड़की के घर में चाकू लेकर घुसा, दोस्ती का डालने लगा दबाव: झारखंड में लव जिहादी बेखौफ

जनवरी 2023 में झारखंड के रामगढ़ में एक शादीशुदा हिंदू महिला की पीट पीटकर हत्या कर दी गई थी। हत्यारा अरमान खान उर्फ रॉकी ममता पर पति को छोड़ने का दबाव डाल रहा था। इसके बाद अरमान का भाई आरजू मंसूरी भी ममता की बहन को धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार। अब जमानत पर जेल से बाहर निकलने के बाद इस आरजू ने एक और हिंदू लड़की को धमकी दी है।

लड़की पर हमले की घटना रामगढ़ में बुधवार (31 मई 2023) की है। आरजू मंसूरी पीड़ित लड़की के घर में कुछ लोगों के साथ घुसा। उस पर दोस्ती का दबाव डाला। इनकार करने पर चाकू दिखाकर धमकी दी। लड़की की आवाज सुनकर आसपास के लोग इकट्ठा हुए और आरजू को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।

पीड़ित ने पुलिस को दी शिकायत में बताया है कि 31 मई की रात आरजू उसके घर में घुसा। उसके साथ 8 लोग और थे। आरजू ने उसका गला दबोच लिया। चाकू निकालकर उसके जिस्म पर फेरने लगा। इस दौरान आरजू ने कहा, “मुझसे दोस्ती कर लो नहीं तो जान से मार देंगे।” लड़की के अनुसार इसके बाद वह घबराकर चिल्लाते हुए बाहर की तरफ भागी। शोर सुनकर आसपास के लोग जमा हुए और आरजू को पकड़ लिया। इसके बाद पुलिस को इसकी सूचना दी गई। इस दौरान हिंदुवादी संगठन के लोग भी मौके पर पहुँच गए थे।

इस घटनाक्रम को लेकर भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने प्रदेश की हेमंत सोरेन सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा है, “झारखंड में लव जिहादियों की हिम्मत इतनी बढ़ी हुई है कि सजा काट के आने के बाद भी न प्रशासन का डर है, ना फिर से पकड़े जाने का।” उन्होंने पूछा कि ऐसे लोगों को कौन संरक्षण देता है? जो दोबारा ऐसे अपराध करने से भी नहीं हिचकते। भाजपा नेता ने कहा कि भले ही सीएम सोरेन को ‘द केरला स्टोरी फिल्म’ काल्पनिक लगती हो लेकिन झारखंड में बड़े पैमाने पर ऐसी साजिशें चल रही हैं।

गौरतलब है कि आरजू के भाई अरमान ने 14 जनवरी 2023 को ममता नाम की विवाहिता की हत्या कर दी थी। जब उसने इस घटना को अंजाम दिया था ममता की तीन साल की बेटी भी घर में ही थी। इसके बाद आरजू ने ममता की बड़ी बहन जया से बदसलूकी की थी। जान से मारने की धमकी देने लगा। जया की शिकायत पर पुलिस ने आरजू को गिरफ्तार कर लिया गया था।

पहलवानों के साथ 1983 की वर्ल्ड चैंपियन टीम, टिकैत का अल्टीमेटम- 9 जून तक गिरफ्तारी नहीं तो जाएँगे जंतर-मंतर: बृजभूषण सिंह ने अयोध्या रैली स्थगित की

कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) की गिरफ्तारी की माँग कर रहे पहलवानों को साल 1983 की विश्व कप विजेता टीम का समर्थन मिला है। पूर्व क्रिकेटरों ने संयुक्त बयान जारी कहा है कि पहलवानों के साथ हुए दुर्व्यवहार से वे चिंतित है। उन्होंने पहलवानों से अपने मेडल नदी में नहीं बहाने की भी अपील की। वहीं, बृजभूषण शरण सिंह ने अयोध्या में होने वाली अपनी रैली रद्द कर दी है।

पूर्व क्रिकेटर कपिल देव की अगुवाई वाली साल 1983 की विश्व कप विजेता क्रिकेट टीम ने पहलवानों के समर्थन में बयान जारी किया है। टीम ने बयान में कहा, “हम अपने चैम्पियन पहलवानों के साथ दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए दुर्व्यवहार के दृश्यों से परेशान हैं। हम इस बात से भी काफी चिंतित हैं कि पहलवान अपनी मेहनत से कमाए हुए मेडलों को भी गंगा नदी में बहाने के बारे में सोच रहे हैं।”

बयान में आगे कहा गया है, “ये मेडल उन्होंने अपनी सालों की मेहनत, त्याग, दृढ़ संकल्प और संघर्ष के बाद जीते हैं। मेडल केवल उनके अकेले नहीं हैं, बल्कि देश का गौरव भी है। हम पहलवानों से आग्रह करते हैं कि वे इस मामले में जल्दबाजी ना करें। हम यह भी उम्मीद करते हैं कि उनकी शिकायतों को सुना जाएगा और जल्द से जल्द हल निकाला जाएगा। देश के कानून को काम करने दें।”

इस टीम के सदस्य मदन लाल ने ANI से हुई बातचीत में कहा, “पहलवानों के पदक बहाने की बात सुनने के बाद दिल टूट गया है। पदक हासिल करना आसान नहीं है। इसलिए हम उनके पदक को नदी में बहाने के पक्ष में नहीं हैं। हम सरकार से इस मुद्दे को जल्द से जल्द हल करने की अपील करते हैं।”

बता दें कि साल 1983 का क्रिकेट विश्व कप जीतने वाली टीम के कप्तान कपिल देव थे। वहीं, टीम के अन्य सदस्य सुनील गावस्कर, मोहिंदर अमरनाथ, के श्रीकांत, सैयद किरमानी, यशपाल शर्मा, मदन लाल, बलविंदर सिंह संधू, संदीप पाटिल, कीर्ति आजाद, रोजर बिन्नी और रवि शास्त्री थे।

ज्ञात हो कि पहलवान 30 मई 2023 को अपना मेडल गंगा नदी में बहाने उत्तराखंड के हरिद्वार पहुँचे थे। हालाँकि, किसान नेताओं ने वहाँ पहुँचकर उन्हें समझाया। इसके बाद पहलवानों ने अपने मेडल को BKU नेता नरेश टिकैत को सौंप दिए और वापस आ गए।

स्थगित हुई बृज भूषण शरण सिंह की रैली…

पहलवानों के निशाने पर आए भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने सोमवार (5 जून 2023) को अयोध्या में ‘जन चेतना महारैली’ का आयोजन किया था। इसमें अयोध्या और देश के संत बड़ी संख्या में भाग लेने वाले थे। इस कार्यक्रम को अब स्थगित कर दिया गया है।

यूपी के कैसरगंज से लोकसभा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने इस संबंध में एक बयान जारी किया है। अपने बयान में उन्होंने कहा कि पुलिस उन पर लगे आरोपों की जाँच कर रही है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जो निर्देश दिए हैं, उनका सम्मान करते हुए उन्होंने यह रैली स्थगित कर दी है।

बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, मैंने रैली स्थगित कर दी है। इसे आप सुरक्षा कारणों से कह सकते हैं।” हालाँकि, यह बात भी सामने आ रही है कि 5 जून को पर्यावरण दिवस के होने चलते कार्यक्रम स्थल पर कई कार्यक्रम होने हैं। ऐसे में प्रशासन ने बृजभूषण शरण सिंह को रैली करने की अनुमति नहीं दी।

उधर, पहलवानों के पक्ष में खड़े खाप पंचायतों ने 9 जून 2023 को दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना देने की घोषणा की है। खाप नेताओं ने कहा, “अगर हमें 9 जून को जंतर मंतर पर बैठने की अनुमति नहीं दी गई तो आंदोलन की घोषणा की जाएगी।”

वहीं, किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा, “केंद्र सरकार के पास 9 जून तक का समय है। हम बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी से कम पर कोई समझौता नहीं करेंगे। अगर ऐसा नहीं होता है तो हम 9 जून को जंतर-मंतर जाएँगे और देश भर में पंचायत करेंगे। पहलवानों पर लगे मुकदमे वापस हों और बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी हो।”