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UP में महिला सुरक्षा और सम्मान पर फोकस, नवरात्रि में ‘मिशन शक्ति’ चलाएगी पुलिस: CM योगी ने दिए सख्त निर्देश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार (17 सितंबर 2025) को मिशन शक्ति के पाँचवें चरण की शुभारंभ की घोषणा की। यह मिशन महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण के लिए चलाया जा रहा है। 22 सितंबर को शारदीय नवरात्रि को पाँचवाँ चरण शुरू होगा और अगले 30 दिनों तक चलेगा।

मिशन शक्ति की शुरुआत 2020 में हुई थी। 4 चरणों की सफलता को देखते हुए योगी सरकार अब इस कार्यक्रम को गाँवों और कस्बों तक ले जाना चाहती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, यह मिशन केवल एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि हर महिला सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे, इसके लिए यह एक सामाजिक आंदोलन है।

सुरक्षित महसूस करें लोग: सीएम योगी

मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक की। इस दौरान अधिकारियों को निर्देश दिया कि नवरात्रि के साथ शुरू हो रहे अभियान के लिए विभागों के बीच अच्छा तालमेल दिखना चाहिए, ताकि कार्यक्रम पूरी तरह सफल रहे।

जोनल एडीजी, आईजी से लेकर डीआईजी तक के शीर्ष पुलिस अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे नियमित रूप से क्षेत्र का दौरा करें, लोगों से बातचीत करें और पुलिस गश्त में व्यक्तिगत रूप से शामिल हों।

मुख्यमंत्री ने कहा, “लोगों को पूरी तरह सुरक्षित होने का एहसास होना चाहिए, जबकि अपराधियों को कानून का खौफ होना चाहिए।”

अभियान के केंद्र में महिला पुलिसकर्मी

मिशन शक्ति की सबसे बड़ी ताकत राज्य का महिला पुलिस बल है। राज्य में अभी 44,000 से ज्यादा महिला पुलिसकर्मी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान के दौरान महिला पुलिस अधिकारियों को और अधिक सक्रिय भूमिका दी जानी चाहिए।

मिशन शक्ति की शुरुआत होने पर अगले 30 दिनों तक महिला पुलिस अधिकारी सभी 57,000 ग्राम पंचायतों और 14,000 शहरी वार्डों का दौरा करेंगी। उनके साथ ग्राम प्रधान, पार्षद, आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और स्वास्थ्य कर्मी भी होंगे। वे महिलाओं और लड़कियों से सीधे बातचीत करेंगी, उनकी समस्याएँ सुनेंगी और सुरक्षा, अधिकारों और सरकारी कल्याणकारी कार्यक्रमों के बारे में जागरूकता बढ़ाएँगी।

नवरात्रि और आगे आने वाले त्योहारों पर विशेष व्यवस्था की जाएगी। मंदिरों, धार्मिक स्थलों, मेलों और भीड़-भाड़ वाले आयोजनों में महिला पुलिस तैनात की जाएगी। योगी आदित्यनाथ ने महिला उत्पीड़न से निपटने वाले एंटी-रोमियो स्क्वॉड को भी मजबूत करने का निर्देश दिया है।

स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता अभियान

अभियान में जिला स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया जाएगा। स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों और उद्योगों में सेमिनार, चर्चाएँ और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे। छात्रों को समानता और महिला सुरक्षा के महत्व को खास कर बताया जाएगा। इसके लिए लघु फ़िल्में भी दिखाई जाएँगी।

मुख्यमंत्री ने महिला कैदियों को कानूनी सहायता प्रदान करने, पीड़ितों की तुरंत मदद करने और महिलाओं के खिलाफ अपराधों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि महिला हेल्पलाइन 1090 पर आने वाली हर कॉल को गंभीरता से लेकर उसका समाधान किया जाना चाहिए।

नगर निगमों में पिंक बूथ बनाए जाने की योजना है। प्रशिक्षित महिला पुलिसकर्मी इसे चलाएँगी और ये बूथ चौबीसों घंटे काम करेंगे। मिशन शक्ति केंद्रों को वन-स्टॉप समाधान के रूप में तैयार किया जाएगा, जहाँ महिलाएँ शिकायत दर्ज करा सकेंगी। इन केन्द्रों पर परामर्श, कानूनी सहायता और कार्रवाई करने की भी व्यवस्था होगी।

बूथ कर्मचारियों को डिजिटल साक्ष्य जमा करने और आर्थिक मदद के लिए चल रही योजनाओं के संचालन का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

पिछले 4 मिशन शक्ति अभियान की उपलब्धियाँ

मिशन शक्ति ने पिछले चार चरणों में सफलता के झंडे गाड़ दिए हैं। सिर्फ चौथे चरण के दौरान 3.44 लाख से ज्यादा कार्यक्रम आयोजित किए गए। 2.03 करोड़ से ज़्यादा महिलाओं और लड़कियों तक पहुँच बनाई गई। इसके लिए 18,344 महिला पुलिसकर्मी और 9,172 महिला पुलिस अधिकारी तैनात की गईं।

कई विशेष अभियान भी चलाए गए। इनमें साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाया गया ‘ऑपरेशन गरुड़’, 2,800 से ज्यादा बच्चों को बचाने वाला ‘ऑपरेशन बचपन’, लड़कियों को परेशान करने वाले 74,000 से ज्यादा युवकों के खिलाफ ‘ऑपरेशन मजनू’, नशे से निजात दिलाने के लिए ‘ऑपरेशन नशा मुक्ति’, होटलों और पबों की निगरानी के लिए ‘ऑपरेशन रक्षा’ और 7,000 से ज्यादा अपराधियों को गिरफ्तार करने वाला ‘ऑपरेशन ईगल’ शामिल है।

आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, यौन अपराध के मामलों को सुलझाने में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। यहाँ 98.80% मामले का निपटारा किया गया है। महिला हेल्पलाइन 1090 और पिंक स्कूटी गश्त, पिंक एसयूवी, सीसीटीवी निगरानी और आशा ज्योति केंद्र जैसी अन्य पहलों ने भी इस सफलता में बड़ी भूमिका निभाई है।

राहुल गाँधी के ‘हाइड्रोजन बम’ से समझिए उनकी मानसिकता, आखिर क्यों बार-बार फुस्स हो रहे ‘युवराज’

राहुल गाँधी का ताजा आरोप है कि ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने के लिए किसी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह सब एक टारगेट अभियान के तहत हो रहा है, जिसमें कॉन्ग्रेस मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि चुनाव आयोग ऐसी कोई जानकारी नहीं दे रहा है, जिससे इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने वालों को ट्रैक किया जा सके।

इसके साथ राहुल गाँधी ने एक ‘संदिग्ध’ की ओर इशारा करने के लिए अपनी PPT में अमित शाह के छायाचित्र का भी इस्तेमाल किया। इसमें मीम्स दिखाए गए, जिनमें शाह किसी कंप्यूटर को देखकर इंस्टाग्राम से लेकर EVM तक को हैक कर रहे हैं।

अब चलिए सबसे पहले फॉर्म 7 पर नजर डालते हैं। इस फॉर्म को निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत कोई भी वोटर भर सकता है और चुनाव आयोग से किसी का भी नाम हटाने का अनुरोध कर सकता है। इसे लिए केवल नाम हटाने की ठोस वजह देनी होगी, जैसे उस व्यक्ति का घर बदल गया है या उसकी मृत्यु हो गई या चाहे किसी अन्य मतदाता सूची में पहले से पंजीकृत होने का दावा ही क्यों ना हो।

राहुल गाँधी ने एक ऐसे व्यक्ति को लपेटे में लिया जिसने कहा कि उसने कभी किसी और का नाम मतदाता सूची से हटाने का आवेदन नहीं दिया लेकिन डेटा में दिखाया गया है कि उसने आवेदन किया था। इतना ही नहीं, उस आवेदन में इस्तेमाल मोबाइल नंबर भी उसका नहीं है जिसने आवेदन दिया है।

यह जरूर व्यवस्था में कोई कमी हो सकती है लेकिन धोखाधड़ी नहीं जिसे जाँच की जरूरत हो। राहुल गाँधी ने दावा किया कि इस गड़बड़ी का पर्दाफाश कॉन्ग्रेस पार्टी ने किया है, जिसने एक FIR दर्ज कराई है और अब कर्नाटक सरकार के अधीन काम करने वाली CID का इस्तेमाल करके बाकी की जानकारी भी जुटाई जा रही है।

हालाँकि, चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि FIR चुनाव आयोग के ही एक अधिकारी ने दर्ज कराई थी। यानि चुनाव आयोग खुद इस मामले की जाँच कर रहा है न कि इसे छिपाने की कोशिश कर रहा है। जैसा कि राहुल गाँधी ने दिखाने की कोशिश की।

तो चलिए मान लेते हैं कि कोई ‘हैकर’ वाकई कुछ सॉफ्टवेयर और डमी मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करके कुछ मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन कर रहा है। सच तो यह है कि अगर कोई ‘हैकर’ ऐसा कर रहा है तो ऐसे कई आवेदन (फॉर्म 7) बनाकर जमा कर सकता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि नाम ‘सफलतापूर्वक’ हटा दिए गए।

एक सफल आवेदन से केवल एक प्रक्रिया शुरू होती है, जिसमें चुनाव आयोग के अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जाँच करनी होती है कि क्या फॉर्म 7 पर दी गई जानकारी वास्तविक है और क्या ऐसे व्यक्ति का नाम वास्तव में मतदाता सूची से हटाया जाना चाहिए।

कम शब्दों में समझें तो यह एक मैनुअल सिस्टम है। ऐसा नहीं है कि आप एक नकली फोन नंबर इस्तेमाल करके OTP सबमिट करें और दूसरे व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से गायब हो जाए।

जबकि राहुल गाँधी ने इस बात का कोई सबूत नहीं दिया कि किसी का नाम सूची से गलत तरीके से क्यों हटाया गया। चुनाव आयोग का कहना है कि फॉर्म 7 के संदिग्ध लेकिन सफलतापूर्वक जमा होने के कारण कोई नाम नहीं हटाया गया है।

लेकिन ऐसा भी हो सकता है कि भले ही किसी सॉफ्टवेयर द्वारा किसी की नकल करके जानकारी जमा की गई हो (जो अपराध है और सजा के योग्य है) लेकिन जमा की गई जानकारी सही निकली हो और मामले में व्यक्ति का नाम वास्तव में ही हटाने योग्य हो।

यह भी हो सकता है कि BJP का IT सेल (जो CIA और मोसाद से भी बड़ा और शक्तिशाली है) ज्यादा सतर्क हो और पता लगा लेता है कि जिस भी कॉन्ग्रेसी मतदाता ने घर बदला है, उसका नाम हटाने की कोशिश की हो। पन्ना प्रमुख जैसे लोगों की यही जिम्मेदारी होती है। मैंने इस वीडियो में पहले भी समझाया था:

लेकिन पूरी संभावना है कि राहुल गाँधी ने जिस मामले में आरोप लगाए हैं, उसमें BJP IT सेल या पन्ना प्रमुख का कोई हाथ नहीं है। क्योंकि जिस निर्वाचन क्षेत्र (कर्नाटक के अलंद) में कॉन्ग्रेस के मतदाताओं के नाम हटाए जाने की बात कही गई, उस क्षेत्र में विधानसभा चुनाव कॉन्ग्रेस ने जीता था। इतना ही नहीं पिछले चुनाव में भी BJP ने वो सीट जीती थी। अगर ‘हैकर’ BJP का ही था तो BJP IT सेल से अपने ही समर्थकों के नाम मतदाता सूची से नहीं हटवाएगी।

मजाक से हटते हुए, इस ‘हाइड्रोजन बम’ में आग नहीं थी बल्कि धुएँ का वहीं रंग था जो हमने पहले देखा- असल में राहुल गाँधी मतदान प्रणाली की जानी-पहचानी खामियों और कमियों का इस्तेमाल करके चुनावों में धोखाधड़ी करने की किसी बड़ी साजिश को गढ़ रहे हैं।

राहुल गाँधी का सीधा एजेंडा है- Gen Z को बेवकूफ समझना, जो उनकी साजिशों पर यकीन करके सड़कों पर उतरकर हिंसा करेंगे। उन्होंने देखा है कि ऐसे लगभग 100 युवाओं की मौत सरकारों को हराने में मदद कर सकती है। शायद उन्हें यही रास्ता आसान लगता है, जो उन्हें 2029 तक 100 और संसदीय सीटें जीता सके।

मूल रूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में राहुल रौशन ने लिखी है। इस लिंक पर क्लिक कर विस्तार से पढ़ सकते है।

रियाल पर ‘फौज’ भेजेगा कंगाल पाकिस्तान, सऊदी अरब ने डिफेंस पैक्ट की आड़ में बनाया ‘सिक्योरिटी’ गार्ड: जानें- इस्लामी भाई ‘चारे’ वाली डील से भारत पर क्यों नहीं पड़ेगा असर

सऊदी अरब और पाकिस्तान ने बुधवार (17 सितंबर 2025) को एक ऐसा समझौता साइन कर लिया, जिसे सुनकर लगता है जैसे दोनों देश अब एक-दूसरे के लिए जान देने को तैयार हैं। नाम है इसका ‘स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट’। सुनने में तो बड़ा शानदार लगता है कि अगर एक देश पर हमला हो गया, तो इसे दोनों पर हमला माना जाएगा। मतलब सऊदी पर कोई संकट आया, तो पाकिस्तान की फौज दौड़ेगी। और पाकिस्तान पर कुछ हुआ, तो सऊदी भी कूद पड़ेगा।

अब सोचिए, पाकिस्तान जैसा देश, जो खुद भारत से चार दिन की जंग लड़कर थक गया, वो सऊदी की रक्षा कैसे करेगा? सऊदी तो तेल के धन कुबेर है, उसकी आर्मी मॉडर्न हथियारों से लैस, लेकिन लड़ाई के नाम पर बेचारी काँपने लगती है। इसलिए पाकिस्तान को बुलाया जाता है – सस्ते में फौजी मिल जाते हैं। और अगर कभी पाकिस्तान मुसीबत में फँसता है, जैसे इकोनॉमी डूब रही हो, तो सऊदी बैलआउट पैकेज भेज देता है।

ये रिश्ता इस्लामिक भाईचारे का नाम तो लेता है, लेकिन अंदर से ये बिजनेस डील है। भारत को इससे कोई फिक्र नहीं, क्योंकि सऊदी हमेशा भारत-पाक तनाव में न्यूट्रल रहता है या फिर भारत का साथ देता है। आइए, आपको बताते हैं इस डील से जुड़ी हर एक बात, जो आपको जानना चाहिए।

पाकिस्तान-सऊदी का ये नया समझौता: दिखावा या सच्ची दोस्ती?

रियाद में हुई इस मीटिंग में शरीफ को सऊदी ने खूब तवज्जो दी। एमबीएस ने कहा, “हमारे दोस्त पाकिस्तान के साथ ये समझौता हमारी सुरक्षा को मजबूत करेगा।” समझौते में साफ लिखा है कि बाहरी हमले पर दोनों देश एक साथ जवाब देंगे। इसमें ट्रेनिंग, हथियार शेयरिंग और यहाँ तक कि न्यूक्लियर मदद का जिक्र भी है।

लेकिन सवाल ये है – क्या पाकिस्तान सऊदी की इतनी मजबूत ढाल बन पाएगा? सऊदी की फौज तो दुनिया की सबसे महँगी है, टैंक-असली हथियारों से लैस। पाकिस्तान की फौज? वो तो ज्यादातर बॉर्डर पर भारत को घूरती रहती है और आर्थिक तंगी में डूबी हुई।

असल में ये समझौता इजरायल के हाल के कतर हमले के बाद आया है। कुछ दिन पहले इजरायल ने दोहा में हवाई हमला किया, जिसमें हमास के लीडर्स मारे गए। कतर ने इसे ‘राज्य प्रायोजित आतंकवाद’ कहा। अमेरिका ने भी इजरायल का साथ नहीं दिया।

सऊदी को लगा कि अमेरिका पर भरोसा मत करो, अपने इस्लामी भाइयों की तरफ देखो। बस, पाकिस्तान को बुला लिया। पाकिस्तान ने कहा, “हम आपके साथ हैं।” लेकिन ये साथ कागजों पर ज्यादा है। सऊदी के पास 2 लाख सैनिक हैं, लेकिन लड़ाई में उनकी ट्रेनिंग कमजोर। पाकिस्तान के फौजी सस्ते और तैयार-बस भाड़ा मिले और काम पर लग जाएँ।

पश्चिम एशिया के एक्सपर्ट जहाक तनवीर कहते हैं, “ये कोई नई बात नहीं। सऊदी हमेशा पाकिस्तान को ‘इस्लामिक न्यूक्लियर बम’ मानता रहा है। बदले में पाकिस्तान सैन्य ट्रेनिंग देता है। लेकिन अगर सऊदी पर असली खतरा आया, तो पाकिस्तान की औकात क्या?”

पाकिस्तान क्यों इतना खुश? पैसे की आस में तो नाच रहा है!

शहबाज शरीफ रियाद से लौटे तो चेहरे पर मुस्कान थी। क्यों न हो? पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था तो आईएमएफ के चक्कर काट रही है। महँगाई आसमान छू रही, बिजली-पानी की किल्लत। ऐसे में सऊदी से मदद मिलेगी – निवेश, कर्ज, डिपॉजिट।

इस समझौते से पाकिस्तान को $38 बिलियन का रक्षा निवेश मिलने का वादा है। मतलब, सऊदी पाकिस्तान में हथियार फैक्टरियाँ लगाएगा, जॉब्स आएँगी। लेकिन असल फायदा? पाकिस्तानी सैनिकों को सऊदी में भाड़े पर भेजना। एक फौजी को $500-1000 महीना मिलता है – ये रकम पाकिस्तान सरकार को जाती है, फौजी को थोड़ा-सा।

पाकिस्तान खुश इसलिए भी है क्योंकि सऊदी उसे ‘इस्लामी दुनिया का बड़ा भाई’ मानता है। लेकिन हकीकत में, पाकिस्तान सऊदी का सस्ता सिक्योरिटी गार्ड है। जब भी सऊदी को जरूरत पड़ी, पाकिस्तान ने फौज भेजी। बदले में पैसे।

तनवीर कहते हैं, “पाकिस्तान को लगता है कि न्यूक्लियर बम दिखाकर वो सऊदी को लुभा लेगा। लेकिन सऊदी तो जानता है, पाकिस्तान की बम की औकात क्या? फिर भी भाड़े के फौजी सस्ते पड़ते हैं।” इस डील से पाकिस्तान को तुरंत $1-2 बिलियन का पैकेज मिल सकता है। शरीफ सरकार इसे ‘बड़ी जीत’ बता रही है। लेकिन ये जीत कितनी टिकाऊ होगी, इस पर सवाल हमेशा खड़े होते रहेंगे। हाँ, ये जरूर होगा कि जब सऊदी बोलेगा ‘आओ लड़ो’ तो पाकिस्तान के फौजी मरेंगे और पाकिस्तान की सरकार-फौजी आका पैसे गिनते रहेंगे।

पहले भी हुए समझौते, लेकिन फायदा तो सऊदी का ही निकला

ये रिश्ता नया नहीं। 1960 के दशक से चला आ रहा है। 1969 में ही देख लो – सऊदी के साउथ बॉर्डर पर साउथ यमन ने हमला किया। सऊदी की एयर फोर्स कमजोर थी, तो पाकिस्तानी पायलट्स को बुलाया। उन्होंने सऊदी के लाइटनिंग जेट्स उड़ाए और हमलावरों को भगाया। ये पहला मौका था जब पाकिस्तान ने सऊदी की हवाई रक्षा की।

फिर 1979 में मक्का की ग्रैंड मस्जिद पर कट्टरपंथियों ने कब्जा कर लिया। सऊदी की फौज अकेले नहीं संभाल पाई। पाकिस्तानी कमांडो भेजे गए। दर्जनों पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। सऊदी ने चुपचाप पैसे दे दिए।

साल 1980 में ईरान-इराक वॉर चला। सऊदी डर गया कि ईरान उस पर भी टूट पड़े। 20 हजार पाकिस्तानी सैनिक भेजे गए सऊदी में। नाम था ‘सिक्योरिटी फोर्स’, लेकिन असल में भी मजदूरी। सऊदी ने कहा, “हम पर हमला मत समझो, पाकिस्तान पर।” लेकिन ये बाध्यकारी नहीं था, बस वादा।

1980-88 के ईरान-इराक वॉर में पाकिस्तान ने सऊदी को लिखित आश्वासन दिया – “तुम पर हमला, हमारे पर।” लेकिन कभी टेस्ट नहीं हुआ। 2014-15 में सऊदी ने यमन पर बमबारी की (ऑपरेशन असिफत अल-हज्म)। पाकिस्तान के तत्कालीन आर्मी चीफ राहील शरीफ को इस्लामिक कोलिशन का लीडर बनाया। पाकिस्तानी सैनिक फिर भेजे गए। लेकिन फायदा? सऊदी ने यमन को कुचला, पाकिस्तान को पैसे मिले। तनवीर कहते हैं, “हर समझौता सऊदी-सेंट्रिक रहा। पाकिस्तान की सुरक्षा का क्या? कभी सऊदी ने भारत के खिलाफ पाकिस्तान की मदद की?”

साल 2020 से देखिए- कोविड में सऊदी ने $3 बिलियन का तेल कर्ज दिया। बदले में पाकिस्तानी फौज ने सऊदी नेशनल गार्ड को ट्रेनिंग दी। 2022 में रूस-यूक्रेन वॉर पर सऊदी ने जेएफ-17 जेट्स माँगे। एमबीएस की पाकिस्तान यात्रा पर एमओयू साइन हुए। 2023 में इजरायल-हमास वॉर के बाद $2 बिलियन पैकेज। अल-सम्साम एक्सरसाइज में 5,000 पाकिस्तानी सैनिक। 2024 में $3 बिलियन डिपॉजिट रिन्यू। आसिम मुनीर की यात्रा पर हॉक मिसाइल डील। हर बार वही – पाकिस्तान ट्रेनिंग दे, सऊदी पैसे। अब ये नया समझौता? वही पुरानी कहानी का नया चैप्टर।

पाकिस्तान को कब-कब मिली ‘भीख’?

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था तो सऊदी पर टिकी है। 1960 से अब तक $5 बिलियन से ज्यादा सैन्य-संबंधी मदद मिल चुकी। लेकिन ‘भीख’ कहें तो गलत नहीं। 1990 के दशक में सोवियत-अफगान वॉर के बाद पाकिस्तान कंगाल हो गया। सऊदी ने $1 बिलियन का डिपॉजिट दिया। 2008 के फाइनेंशियल क्राइसिस में फिर $500 मिलियन। 2019 में इमरान खान की सरकार गिरने की कगार पर सऊदी ने $1 बिलियन का तेल पैकेज दिया।

2020 में कोविड – $3 बिलियन। 2021 में बाढ़ – $500 मिलियन। 2022 में इकोनॉमिक क्राइसिस – $2 बिलियन। 2023 में इमरान के बाद शरीफ सरकार – $2 बिलियन। 2024 में चुनावों से पहले $3 बिलियन। हर बार बहाना? सैन्य मदद। सऊदी जानता है, पाकिस्तान बिना पैसे के डूब जाएगा। बदले में पाकिस्तान फौज भेजता है। तनवीर कहते हैं, “ये रिश्ता इस्लामी एकता का नहीं, आर्थिक निर्भरता का है। सऊदी पाकिस्तान को ‘रेंटल आर्मी’ की तरह यूज करता है।”

पाकिस्तान के सैनिक सऊदी में सिक्योरिटी जॉब्स करते हैं। हजारों रिटायर्ड अफसर ट्रेनर बने हैं। ये पैसे पाकिस्तान की आर्मी को मजबूत करते हैं, लेकिन देश की जनता का क्या? महँगाई, बेरोजगारी। फिर भी सरकार खुश – क्योंकि खजाना भरेगा।

भारत को कोई खतरा नहीं, सऊदी की अपनी चालाकी

भारत ने इस समझौते पर कहा, “हम अध्ययन करेंगे।” विदेश मंत्रालय के रणधीर जायसवाल ने बताया, “हमें पहले से जानकारी थी। प्रभाव देखेंगे।” लेकिन चिंता की कोई बात नहीं। क्यों? क्योंकि सऊदी कभी पाकिस्तान के लिए भारत के खिलाफ नहीं खड़ा हुआ। 1965, 1971, कारगिल… हर वॉर में सऊदी ने पाकिस्तान को पैसे दिए, लेकिन फौज नहीं। उल्टा भारत से ट्रेड बढ़ाया। आज सऊदी-भारत का टर्नओवर $50 बिलियन है। पाकिस्तान से? मुश्किल से $3 बिलियन।

बता दें कि 1980 के दशक से ये डील्स हैं, लेकिन भारत-पाक तनाव में सऊदी न्यूट्रल रहा। कभी पाक के आतंकी प्लान्स का साथ नहीं दिया। अभी हाल ही में अप्रैल 2025 में पहलगाम अटैक के बाद भारत की ऑपरेशन सिंदूर चली। चार दिन की झड़प। सऊदी ने पाक को सपोर्ट किया? नहीं। उल्टा खामोश रहा। सऊदी को भारत से सामान चाहिए होता है, बदले में वो तेल बेचता है। वहीं, पाकिस्तान को तो वो ‘भाई’ कहकर पुचकार लेता है, लेकिन बिजनेस भारत से करता है।

अगर सऊदी पर खतरा आया ईरान या इजरायल से तो पाकिस्तान भेजेगा फौज। लेकिन भारत-पाक वॉर में? सऊदी बोलेगा, “हमारे पास सैनिक नहीं।” पाकिस्तान मजबूर होगा उसकी तरफ से लड़ने के लिए, क्योंकि पैसे बंद हो जाएँगे, लेकिन सऊदी कभी अपने नागरिकों को लड़ने नहीं भेजेगा।

पुरानी बोतल में नया शराब?

ये समझौता सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच पुराने रिश्ते का एक नया अध्याय है। सऊदी को अपनी सुरक्षा के लिए भाड़े की फौज और न्यूक्लियर छतरी चाहिए, जबकि पाकिस्तान को पैसे चाहिए। लेकिन भारत के लिए ये समझौता कोई बड़ा खतरा नहीं है। सऊदी अरब भारत के साथ अपने रिश्ते खराब नहीं करेगा, और पाकिस्तान की औकात इतनी नहीं कि वो भारत के खिलाफ सऊदी की मदद से कोई बड़ा खेल खेले।

हाँ अगर सऊदी पर कोई बड़ा हमला होता है, तो पाकिस्तान को अपने वादे के मुताबिक सैनिक भेजने पड़ेंगे। सऊदी कह सकता है कि उसके पास लड़ने के लिए सैनिक नहीं हैं, लेकिन पाकिस्तान को जाना ही होगा, क्योंकि उसे पैसे चाहिए। ये रिश्ता सऊदी के लिए फायदे का सौदा है, और पाकिस्तान के लिए मजबूरी। भारत को बस सतर्क रहने की जरूरत है, लेकिन घबराने की नहीं।

अडानी मानहानि मामले पर कोर्ट से गिरी गाज तो एडिटर्स गिल्ड को आई ‘प्रेस की आजादी’ की याद: PCI ने भी HC के आदेश पर रोया रोना, लोकतंत्र पर उठाए सवाल

पत्रकारों के संगठन प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (PCI) का एक बार फिर प्रेस की आजादी को लेकर ‘रोना’ शुरू हो गया है। इस बार ये ‘रोना’ अडानी एंटरप्राइजेज के मानहानि मामले में सुनाए गए कोर्ट के एक आदेश को लेकर है। इस ex-parte (एकतरफा आदेश) आदेश को ‘बेहद चिंताजनक’ बताते हुए PCI ने कहा कि इससे कॉरपोरेट घरानों के हाथों में ही पूरी सेंसरशिप होगी।

दिल्ली की रोहिणी जिला अदालत का यह आदेश अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड बनाम परंजॉय गुहा ठाकुरता (Adani Enterprises Ltd. Vs Paranjoy Guha Thakurta) मामले में 06 सितंबर 2025 को दिया। इसमें साफ कहा गया है कि गौतम अडानी और अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड के खिलाफ बिना सबूत वाले निराधार कंटेन्ट और आर्टिकल को तमाम प्लेटफॉर्म्स से हटाए जाए।

इस आदेश को लेकर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने कहा है कि इससे कॉरपोरेट घरानों के हाथों बिना रोक-टोक सेंसरशिप का हथियार मिल जाएगा। प्रेस क्लब कहता है कि यह शायद अब तक का सबसे बड़ा उदाहरण है कि कैसे SLAPP (Strategic Litigation Against Public Participation) केस का इस्तेमाल पत्रकारिता को चुप कराने के लिए हो रहा है।

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने आरोप लगाया कि ex-parte आदेश में पत्रकारों को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला, जो कि प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के खिलाफ है। PCI ने कहा कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) ने सिर्फ कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई करते हुए 138 यूट्यूबर लिंक और 83 इंस्टाग्राम पोस्ट हटाने का आदेश दे दिया। आरोप लगाया कि आदेश कानूनी चुनौती के दायरे में था, बावजूद सरकार ने इतनी जल्दी कार्रवाई की, जो और भी ‘चिंताजनक’ है।

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी प्रेस क्लब की तरह ही अदालत के ex-parte आदेश पर रोना चालू रखा। संगठन ने भी आदेश को मीडिया संस्थान और पत्रकारों पर खतरा बताया है। सरकार की निराधार कंटेन्ट से जुड़ी सोशल मीडिया सामग्री हटाने की कार्रवाई को ‘अभिव्यक्ति के अधिकार’ (Freedom of Expression) और लोकतंत्र के खिलाफ बताते हुए सवाल उठाए हैं।

क्या सच में प्रेस की आजादी को खतरा ?

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया और एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया का बयान इस ex parte (एकतरफा आदेश) को बताता है कि इससे पत्रकारों की आवाज दबाई जा रही है। पहले बता दें कि ex-parte आदेश, वो आदेश जो अदालत तब पारित करती है जब कोर्ट में केवल एक पक्ष मौजूद है और दूसरा पक्ष (जिसे नोटिस भेजा गया हो या हाजिर न हुआ हो) अदालत में मौजूद नहीं होता। यह अंतरिम रूप से पारित किया जाता है।

इस मामले में भी यही हुआ। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोर्ट में दूसरे पक्ष के सभी पत्रकार मौजूद नहीं हुए, जिसके कारण मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित किया। लेकिन बाद में कोर्ट में पत्रकारों ने अपनी दलीलें पेश की और सुनवाई भी हुई। सच सामने है कि पत्रकारों की आवाज नहीं दबाई गई।

उधर, संगठन का दूसरा दावा कि अदालत के आदेश पर सरकार ने सोशल मीडिया से तत्काल प्रभाव से अडानी एंटरप्राइजेज से जुड़ी सामग्री हटाने से कॉरपोरेट मनमानी का खतरा है और सेंसरशिप उनके हाथों में चली जाएगी। तो हकीकत यह है कि आदेश में साफ कहा है कि सिर्फ झूठी, अप्रमाणित और मानहानिकारक सामग्री पर रोक है, सही और सबूत-आधारित रिपोर्टिंग पर कोई रोक नहीं है। यानी प्रेस की स्वतंत्रता को खत्म नहीं किया गया बल्कि सिर्फ मानहानि और अफवाह जैसी सामग्री को हटाने का निर्देश दिया गया।

इसीलिए अब प्रेस क्लब ऑफ इंडिया और एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया का ‘रोना’ बंद हो जाना चाहिए और तथ्यों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। क्योंकि कोर्ट का आदेश प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला नहीं है। असल में एक अंतरिम आदेश है ताकि केस की पूरी सुनवाई तक गलत और अप्रमाणति बातें सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर फैलकर किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान न पहुँचा सकें।

‘वोटर लिस्ट से नाम ऑनलाइन नहीं होते डिलीट’: राहुल गाँधी के ‘हाइड्रोजन बम’ वाले खुलासे को EC ने किया खारिज, लगाया था वोट चोरी का आरोप

कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस को ‘हाइड्रोजन बम’ बताया था, जिसमें राहुल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर ‘वोट चोरों’ की रक्षा करने का गंभीर आरोप लगाया था। लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म होते ही चुनाव आयोग ने इन आरोपों का खंडन करते हुए राहुल गाँधी के दावों को बेबुनियाद बताया है।

चुनाव आयोग ने बताया कि किसी आदमी के जरिए ऑनलाइन वोट हटाना संभव नहीं है और किसी भी वोटर का नाम बिना उसे सुनवाई का मौका दिए हटाया नहीं जा सकता। आयोग ने यह भी बताया कि कर्नाटक के आलंद विधानसभा क्षेत्र में 2023 में वोटों को हटाने की कोशिशों के बाद खुद चुनाव आयोग ने इस मामले में FIR दर्ज कराई थी।

चुनाव आयोग का तथ्यों के साथ जवाब

राहुल गाँधी ने कर्नाटक के आलंद विधानसभा क्षेत्र में 6018 वोटरों के नाम हटाए जाने का जिक्र किया था। इस पर चुनाव आयोग ने बताया कि 2023 में आलंद में वोटरों के नाम हटाने की कुछ असफल कोशिशें हुई थीं, जिसके बाद खुद चुनाव आयोग ने इस मामले की जाँच के लिए FIR दर्ज कराई थी।

आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, आलंद विधानसभा सीट 2018 में भाजपा ने जीती थी और 2023 में कॉन्ग्रेस ने। यह राहुल गाँधी के आरोपों को कमजोर करता है, क्योंकि अगर ‘वोट चोरी’ हुई होती, तो कॉन्ग्रेस वहाँ जीत नहीं पाती।

कॉन्ग्रेस पर ही लगे थे गंभीर आरोप

चुनाव आयोग ने राहुल गाँधी पर सीधा पलटवार करते हुए बताया कि बिहार में चल रहे ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ अभियान (SIR) के दौरान कॉन्ग्रेस ने ही 89 लाख वोटरों के नाम हटाने के लिए आवेदन दिया था। यह राहुल गाँधी के उन आरोपों के विपरीत है, जिसमें वह चुनाव आयोग पर कॉन्ग्रेस के वोटरों को हटाने का आरोप लगा रहे थे।

आयोग ने कहा कि यह अभियान फर्जी वोटरों को हटाकर असली वोटरों के अधिकार सुरक्षित करने के लिए चलाया गया है। इस अभियान के दौरान कई विदेशी नागरिकों का भी पता चला है, जो फर्जी आधार कार्ड और अन्य भारतीय दस्तावेजों के सहारे वोटर बने हुए थे।

पुराने आरोपों पर भी जवाब

राहुल गाँधी लगातार चुनाव आयोग पर आरोप लगाते रहे हैं और इसी को देखते हुए आयोग ने 17 अगस्त 2025 को राहुल गाँधी से एक हफ्ते के भीतर अपने दावों के सबूत पेश करने या फिर पूरे देश से माफी माँगने को कहा था। लेकिन राहुल गांधी ने न तो कोई सबूत पेश किए और न ही माफी माँगी।

इस पर चुनाव आयोग ने कहा कि उनके आरोपों को अब अमान्य माना जाता है। आयोग ने यह भी कहा कि अगर किसी को चुनाव परिणाम पर आपत्ति है, तो वह 45 दिनों के भीतर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सकता है, लेकिन किसी विपक्षी नेता ने ऐसा नहीं किया।

चुनाव आयोग ने हर बार तथ्यों और रिकॉर्ड के साथ राहुल गाँधी के आरोपों का जवाब दिया है, जबकि कॉन्ग्रेस ने ज्यादातर मामलों में कोई औपचारिक शिकायत तक नहीं की। इससे यह स्पष्ट होता है कि ये आरोप ज्यादातर राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य लोगों को भड़काना है, न कि किसी सच्ची समस्या का समाधान खोजना।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज नरीमन ने फिर उगला हिंदुओं के खिलाफ जहर, ‘डिवाइन-बोवाइन’ कहकर पूर्व CJI चंद्रचूड़ पर भी उठाई उँगली: कहा- ये संविधान का उल्लंघन

न्यायपालिका के हिंदू विरोधी रुख को और पुख्ता करने वाली विवादित टिप्पणी सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रोहिंटन नरीमन ने राम मंदिर मामले को लेकर विवादित बातें कही हैं। उन्होंने हिंदुओं के पवित्र गोवंश का अनावश्यक उल्लेख किया है, साथ ही राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना की है। नरीमन ने कहा कि निर्णयों को प्रभावित करने के लिए दैवीय या किसी अन्य प्रकार के हस्तक्षेप की अनुमति देना न्यायाधीश द्वारा संविधान के प्रति शपथ का उल्लंघन होगा।

जस्टिस नरीमन ने यह टिप्पणी 1 सितंबर 2025 को तिरुवनंतपुरम के प्रेस क्लब द्वारा आयोजित केएम बशीर स्मृति व्याख्यान के दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए कही थी। एक व्यक्ति ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों द्वारा निर्णय सुनाते समय दैवीय हस्तक्षेप के बारे में बोलने पर उनके विचार पूछे थे। यह टिप्पणी पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के उस बयान के संदर्भ में थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने 2019 में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामले में फैसले के दौरान मार्गदर्शन के लिए प्रार्थना की थी।

न्यायमूर्ति नरीमन ने कहा, “चाहे दैवीय हस्तक्षेप हो या गोवंश हस्तक्षेप या किसी भी दूसरी तरह का हस्तक्षेप। यदि कोई न्यायाधीश इसको लेकर कोई फैसला सुनाता है, तो वह संविधान के प्रति अपनी शपथ का उल्लंघन कर रहा होता है। आपको (न्यायाधीशों को) केवल संविधान और कानूनों के प्रति अपनी शपथ पर ही चलना होता है। और जब आप संविधान और कानूनों के प्रति अपनी शपथ पर चलते हैं, तो आप निश्चित रूप से अपनी नैतिकता को भी साथ लाते हैं।”

पूर्व मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ द्वारा एक महत्वपूर्ण निर्णय पर पहुँचने के लिए आस्था का सहारा लेने पर की गई उनकी टिप्पणी और हिंदुओं द्वारा पवित्र माने जाने वाले गोवंश का उल्लेख, सुप्रीम कोर्ट में गहरी जड़ें जमा चुके हिंदू विरोधी पूर्वाग्रह को रेखांकित करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में हिन्दू विरोधी धारणा का एक और विवादित मामले इस घटना के अगले दिन आया। भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने मुगल आक्रमणकारियों द्वारा अपवित्र की गई खजुराहो में भगवान कृष्ण की खंडित मूर्ति की पुनर्स्थापना के लिए दायर याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता का उपहास उड़ाया। उन्होंने इस दौरान तंज किया, “इसके बजाय जाओ और भगवान से प्रार्थना करो।”

धर्मनिरपेक्ष राज्य के लिए बंधुत्व जरूरी- जस्टिस नरीमन

‘सांस्कृतिक अधिकारों और कर्तव्यों का संरक्षण’ विषय पर अपना व्याख्यान देते हुए न्यायमूर्ति नरीमन ने इस बात पर जोर दिया कि संविधान के मूल में निहित बंधुत्व को प्राप्त करने के लिए धर्मनिरपेक्षता आवश्यक है।

उन्होंने आगे कहा कि 42वें संशोधन के जरिए प्रस्तावना में धर्मनिरपेक्षता शब्द जोड़े जाने से पहले ही यह संविधान में मौजूद था। उन्होंने कहा, “यह कहना गलत होगा कि धर्मनिरपेक्षता सिर्फ 42वें संशोधन द्वारा ही लागू की गई। इसका कुछ हिस्सा पहले से संविधान में मौजूद था… अब मेरे हिसाब से भाईचारा हासिल करने की दिशा में धर्मनिरपेक्षता एक ज़रूरी कदम है। एक धर्मशासित राज्य में भाईचारा नहीं हो सकता।”

न्यायमूर्ति नरीमन ने अपने नए पुस्तक ‘एन ओड टू फ्रेटरनिटी’ के बारे में भी बात की। इसमें दुनिया के अलग-अलग धर्मों के बारे में बताया गया है। जस्टिस नरीमन ने कहा कि इस पुस्तक को लिखने से पहले उन्होंने कई धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन किया था।

सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश रोहिंटन नरीमन ने मंदिर की माँग कर रहे हिंदुओं को ‘तानाशाह-अत्याचारी’ करार दिया। उन्होंने 2019 में अयोध्या में राम जन्मभूमि पर फैसला सुनाने वाली 5 न्यायाधीशों की खंडपीठ की आलोचना की और कहा कि यह फैसला ‘न्याय का मजाक’ है। इसने धर्मनिरपेक्षता के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन किया है।

जस्टिस नरीमन ने कहा, “आज हम देख रहे हैं कि जैसे पूरे देश में हाइड्रा हेड्स (राक्षस) उभर रहे हैं, हर जगह मुकदमें दर्ज हो रहे हैं। अब सिर्फ मस्जिदों से ही नहीं, दरगाहों से भी। यह सब सांप्रदायिक तनाव और वैमनस्य पैदा कर सकता है, जो हमारे संविधान और पूजा स्थल अधिनियम, दोनों में निहित प्रावधानों के बिल्कुल विपरीत है। संविधान पीठ धर्मनिरपेक्षता पर पाँच पन्ने खर्च करती है और कहती है कि इसमें आप पीछे मुडकर नहीं देख सकते। धर्मनिरपेक्षता संविधान के मूल ढाँचे का हिस्सा है… हर धार्मिक पूजा स्थल 15 अगस्त 1947 के हिसाब से रहेगाह। अब, जो कोई भी इसे बदलने की कोशिश करेगा, उसके मुकदमे खारिज हो जाएँगे।”

पूर्व न्यायाधीश ने अपने अतिक्रमित और नष्ट किए गए मंदिरों को पुनः प्राप्त करने के लिए कानूनी उपाय की माँग कर रहे हिंदुओं को ‘हाइड्रा हेड्स’ घोषित किया। एक पूर्व न्यायाधीश ने कानूनी उपाय की माँग कर कानून का पालन करने वाले हिंदुओं को खलनायक बना दिया। सबूतों और योग्यता के आधार पर हिंदूओं के पक्ष में फैसला सुनाने वाले कोर्ट को उसी न्यायाधीश ने मुसलमानों के साथ ‘न्याय का मजाक’ करार दिया।

नरीमन ने विवादास्पद पूजा स्थल अधिनियम को सख्ती से लागू करने की वकालत की, ताकि मंदिरों पर फिर से अधिकार पाने के लिए कोई और मुकदमा दायर न किया जा सके। उनके भाषणों से यह संकेत मिलता था कि ‘धर्मनिरपेक्षता’ को बनाए रखने के लिए हिंदुओं को अपना दावा छोड़ देना चाहिए और चुप रहना चाहिए।

(ये लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई है। इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)

राहुल गाँधी ने ‘हाइड्रोजन बम’ कहकर बनाई जिस प्रेस कॉन्फ्रेंस की हवा, PC शुरू होने पर उसे खुद किया फुस्स: CEC ज्ञानेश कुमार पर लगाए ‘वोट चोरी’ करवाने के इल्जाम

कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने ‘हाइड्रोजन बम’ बताते हुए अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू की थी, लेकिन वो फुस्स हो गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू होते ही राहुल गाँधी ने बता दिया कि ये सीधे तौर पर ‘हाइड्रोजन बम’ नहीं है। राहुल गाँधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’ करवाने का आरोप लगाया है। राहुल गाँधी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ‘वोट चोरों’ की रक्षा कर रहे हैं।

राहुल गाँधी ने यह भी आरोप लगाया कि ये सब काम एक संगठित तरीके से, एक सॉफ्टवेयर और कॉल सेंटर का उपयोग करके कॉन्ग्रेस के वोटरों को निशाना बनाया जा रहा है और उनके नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं।

ज्ञानेश कुमार पर आरोप

राहुल गाँधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सबूत छिपाने और ‘वोट चोरों’ का साथ देने का आरोप लगाया। राहुल गाँधी ने कहा कि कर्नाटक की CID ने चुनाव आयोग को 18 महीने में 18 पत्र लिखकर सबूत माँगे थे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

राहुल गाँधी ने कहा कि ये सब केंद्रीय स्तर पर एक सुनियोजित ऑपरेशन के तहत हो रहा है। इसके अलावा, आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए दूसरे राज्यों के मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कर्नाटक में कर्नाटक के नंबर इस्तेमाल ना होकर, दूसरे राज्यों के मोबाइल नंबर इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

राहुल गाँधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक हफ्ते का समय देते हुए कर्नाटक CID को सारे सबूत देने की बात कहीं है। राहुल गाँधी ने यह भी कहा कि अगर सबूत नहीं मिले, तो यह माना जाएगा कि ज्ञानेश कुमार संविधान की नहीं, बल्कि ‘वोट चोरों’ की रक्षा कर रहे हैं। हालाँकि, राहुल गाँधी के इस ‘हाइड्रोजन बम’ से कोई नया खुलासा नहीं हुआ और उनके ऐसे आरोप पहले भी सुने जा चुके हैं।

सवालों के घेरे में ‘सबूत’

अपनी ‘हाइड्रोजन बम’ वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गाँधी ने आरोपों को साबित करने के लिए कर्नाटक के आलंद में 6018 वोटरों के नाम हटाए जाने का उदाहरण दिया। राहुल गाँधी ने ना सिर्फ कर्नाटक का उदाहरण बताया, बल्कि महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और बिहार जैसे कई राज्यों में भी इसी तरह से ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया है।

इसके अलावा, राहुल गाँधी ने एक स्क्रीन पर ‘Who’s Someone’ नाम से एक तस्वीर दिखाई, जिसमें दो धुंधली छवियाँ थीं। इन छवियों को पीएम मोदी और अमित शाह के रूप में दर्शाया गया। लेकिन, राहुल गाँधी ने सीधे तौर पर नाम नहीं लिया। आखिरी में राहुल गाँधी ने कहा कि ये ‘हाइड्रोजन बम’ नहीं था, वो तो थोड़ी देर बाद टीम से बात करके सामने आएगा। इसका मतलब जिस बम को लेकर इतने दिनों से हवा बना रहे थे राहुल गाँधी, वो साफतौर पर फुस्स निकला।

जिस कट्टर वामपंथी गुट का चार्ली किर्क की हत्या में आया नाम, उसे राष्ट्रपति ट्रंप ने ‘आतंकी संगठन’ घोषित किया: जानिए Antifa के बारे में सब कुछ

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एंटीफा (Antifa) को आतंकी संगठन घोषित कर दिया है। ट्रंप ने इसे खतरनाक और अति वामपंथी, एंटी-फासिस्ट आंदोलन बताया। कुछ दिनों पहले यूटा वैली यूनिवर्सिटी परिसर के एक कार्यक्रम में ट्रंप के समर्थक और करीबी चार्ली किर्क की हत्या कर दी गई थी। उसकी हत्या का आरोपित टायलर रॉबिन्सन का संबंध एंटीफा से माना जा रहा है।

बुधवार (17 सितंबर 2025) को राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर इस कदम की घोषणा की। उन्होंने लिखा, ” मुझे अमेरिका के लोगों को ये बताते हुए खुशी हो रही है कि मैं एंटीफा को आतंकी संगठन घोषित कर रहा हूँ। यह एक बीमार, खतरनाक, कट्टर अति वामपंथी और एक बड़ा आतंकी संगठन है।”

ट्रंप ने आगे लिखा, “मैं यह भी दृढ़ता से अनुशंसा करता हूँ कि एंटीफा को आर्थिक मदद करने वालों की कानूनी रूप से गहनता से जाँच की जाए। इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद!”

अभी ये साफ नहीं है कि राष्ट्रपति ट्रंप एंटीफा पर रोक किस तरह लगाएँगे, क्योंकि इस संगठन का न ही कोई नेतृत्वकर्ता है और न ही संरचना है। ऐसे में किसे टारगेट किया जाएगा, इसके बारे में साफ नहीं किया गया है।

क्या है एंटीफा

एंटीफा शब्द एंटी-फ़ासीस्ट से बना है। अमेरिका में फासीवाद विरोधी, उग्रवादी, अति वामपंथी लोगों को एंटीफा कहा जाता है। इनका कोई आधिकारिक नेता नहीं होता है और संगठन भी काफी ढीला-ढाला होता है। ये अमेरिका में रंगभेद, नव-नाजी, नव-फासीवाद और श्वेत वर्चस्व के खिलाफ हैं। संगठन के लोग दक्षिणपंथी नेताओं और विचारधारा के कट्टर आलोचक होते हैं।

एंटीफा के समर्थक इसे एक आंदोलन मानते हैं। ये लोग अपनी रणनीति और सिद्धांत आपस में शेयर करते हैं। इसका कोई ऑफिस और आधिकारिक लीडर नहीं होता है, इसलिए ये पता लगाना बेहद मुश्किल है कि ये लोग कहाँ रहते हैं और क्या करते हैं। हालाँकि ये शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं।

एंटीफा से जुड़े लोग जिस झंडे का इस्तेमाल करते हैं वह 1917 की रूसी क्रांति के लाल झंडे और 19वीं शताब्दी के अराजकतावादियों के काले झंडे को मिलाकर बनाया गया है। संगठन के लोग दक्षिणपंथी सभाओं और रैलियों का विरोध करते हैं और अक्सर ऐसी सभाओं को रोकने की कोशिश करते हैं। ये लोग एक-दूसरे से सोशल मीडिया, मैसेजिंग सेवाओं, एन्क्रिप्टेड पीयर टू पीयर नेटवर्क और सिग्नल से जुड़े रहते हैं। अमेरिका के कुछ राज्यों में हालाँकि ऐसे लोग मिलकर नियमित बैठकें करते हैं।

एंटीफा को अमेरिका का आतंकी संगठन घोषित किया गया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इसे इस्लामिक स्टेट और अलकायदा जैसे विदेशी आतंकी संगठनों की सूची में शामिल नहीं करेगा।

चार्ली किर्क की हत्या

10 सितंबर 2025 को राष्ट्रपति ट्रंप के समर्थक चार्ली किर्क की हत्या यूटा वैली यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम के दौरान कर दी गई थी। उनके गर्दन में एक गोली मारी गई थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने किर्क की हत्या पर दुख जताते हुए हत्यारों को किसी भी हाल में नहीं छोड़ने की बात कही थी।

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने सीएनएन को बताया, “यह उन कई कदमों में से एक है जो राष्ट्रपति राजनीतिक हिंसा को बढ़ावा देने वाले वामपंथी संगठनों से निपटने के लिए उठा रहे हैं।”

हालाँकि राष्ट्रपति ट्रंप औपचारिक राजकीय यात्रा पर विदेश में हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एंटीफा को आतंकी संगठन घोषित करने की जानकारी दी। ट्रंप ने रूढ़िवादी कार्यकर्ता चार्ली किर्क की हत्या के बाद ओवल ऑफिस से सोमवार (15 सितंबर 2025) को इस कदम के संकेत दे दिए थे।

ट्रंप ने ओवल ऑफिस में कहा, “एंटीफा बहुत बुरा है।” उन्होंने बिना कोई सबूत या विवरण दिए कहा, “हमारे पास कुछ बहुत ही कट्टरपंथी समूह हैं, और वे हत्या करके बच निकलते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “उन्हें जेल में डाल दिया जाना चाहिए, वे इस देश के साथ जो कर रहे हैं वह वास्तव में विध्वंसकारी है।”

किर्क की हत्या के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने भी कहा था कि वे हिंसा भड़काने के एक समन्वित वामपंथी प्रयास के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। हालाँकि कुछ डेमोक्रेट्स ने इस कदम का विरोध किया है। इनका आरोप है कि ट्रंप असहमति या विरोधी विचारों पर नकेल कसने का बहाना बना रहे हैं।

ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में एंटीफा पर लगाम कसने की कोशिश की थी। ट्रंप समर्थक जॉज फ्लॉयड की हत्या के बाद वे एंटीफा को एक आतंकवादी संगठन घोषित करना चाहते थे। उन्होंने तत्कालीन अटॉर्नी जनरल विलियम बार ने कहा था कि इसकी गतिविधियाँ ‘घरेलू आतंकवाद’ को बढ़ाती हैं। उस वक्त एफबीआई के डायरेक्टर क्रिस्टोफर ने अपनी गवाही के दौरान कहा था कि एंटीफा एक संगठन नहीं, बल्कि एक विचारधारा है। इसकी कोई संरचना नहीं है। जबकि किसी संगठन को आतंकी घोषित करने के लिए संरचना का होना जरूरी है।

बुर्ज खलीफा पर चमचमाया PM मोदी का नाम, कोलंबो में बोहरा मुस्लिमों ने खास दुआ पढ़ी: 75वें जन्मदिन पर प्रधानमंत्री को दुनियाभार से आई बधाई

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन के मौके पर बुधवार (17 सितंबर 2025) को दुबई में स्थित दुनिया की सबसे ऊँची इमारत बुर्ज खलीफा को उनकी तस्वीरों और शुभकामनाओं से रोशन किया गया।

इस खास मौके पर बुर्ज खलीफा पर ‘Happy Birthday’, ‘75 Years’, ‘सेवा ही संकल्प और ‘India First – The Inspiration’ जैसे संदेश दिखाई दिए। ये नजारा दुबई के आसमान में दूर-दूर तक दिखा और बहुत से लोगों ने इसे अपने कैमरों में कैद किया।

पीएम मोदी को उनके जन्मदिन पर दुनिया भर से बधाइयाँ मिलीं, जिससे भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय छवि भी झलकती है। यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद ने हिंदी, अरबी और अंग्रेजी में बधाई देते हुए लिखा, “नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपके अच्छे स्वास्थ्य, खुशी और भारत की तरक्की में निरंतर सफलता की कामना करता हूँ।”

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फोन कर पीएम मोदी को जन्मदिन की बधाई दी और यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिशों में समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी व्यक्तिगत रूप से फोन कर जन्मदिन की शुभकामनाएँ दीं।

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “उनकी ताकत, संकल्प और नेतृत्व क्षमता लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है। उनके अच्छे स्वास्थ्य और ऊर्जा की कामना करती हूँ।” यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयन ने भी पीएम मोदी को बधाई दी और भारत-यूरोप साझेदारी को और मजबूत करने की बात कही।

इस खास मौके पर साउथ अफ्रिका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे, मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक सहित तमाम वैश्विक हस्तियों ने पीएम को जन्मदिन की शुभकामनाएँ दी।

इसके अलावा साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस, केन्या के पूर्व प्रधानमंत्री रैलाओडिंगा, त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी पीएम मोदी के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए उन्हें जन्मदिन की बधाई दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 75वाँ जन्मदिन देश और दुनिया में श्रद्धा, उत्सव और शुभकामनाओं के साथ मनाया गया। भारत ही नहीं, विदेशों में भी उनके लिए प्रार्थनाएँ की गईं और शुभकामनाएँ भेजी गईं।

कोलंबो में बोहरा मुस्लिम समुदाय की विशेष प्रार्थना

श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में बोहरा मुस्लिम समुदाय ने अपने मस्जिद में पीएम मोदी के लिए विशेष दुआ की। एक वीडियो में दिखा कि लोग एक साथ उनके अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र और देश सेवा के लिए प्रार्थना कर रहे थे।

वाराणसी में धार्मिक अनुष्ठान

पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में दिनभर धार्मिक और सामाजिक गतिविधियाँ होती रहीं। दशाश्वमेध घाट पर सिटी साउथ विधायक डॉ नीलकंठ तिवारी ने 108 वैदिक आचार्यों के साथ मिलकर दुग्धाभिषेक किया। वैदिक मंत्रों के साथ यह प्रार्थना प्रधानमंत्री की लंबी उम्र और देश की समृद्धि के लिए की गई।

वहीं शाम को नमो घाट पर विशेष गंगा आरती का आयोजन किया गया, जिससे आध्यात्मिक वातावरण और भी भव्य हो गया। जयापुर गाँव, जिसे पीएम मोदी ने 2014 में सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत अपनाया था, वहाँ ग्रामीणों ने पंचायत भवन में उनकी तस्वीर पर माला चढ़ाई और केक काटकर जन्मदिन मनाया।

इस अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर में साधु-संतों ने सहस्रार्चन (1,100 कमल पुष्पों से पूजा) और महरुद्राभिषेक किया। इस पूजा में पीएम मोदी के स्वास्थ्य, देश की एकता और वैश्विक शांति के लिए प्रार्थनाएँ की गईं। इसके अलावा अस्पतालों, अनाथालयों और वृद्धाश्रमों में फलों का वितरण कर जरूरतमंदों के बीच खुशियाँ बाँटी गईं।

पेंटिंग्स से लेकर मूर्तियों तक, ऑनलाइन खरीदें प्रधानमंत्री को मिले अनमोल उपहार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मिले उपहारों की ई-नीलामी भी शुरू हो गई है। यह ई-नीलामी 2 अक्टूबर 2025 तक चलेगी, जिसमें लोग PMMementos नाम की वेबसाइट पर जाकर इन उपहारों के लिए बोली लगा सकते हैं। इस बार इस ई-नीलामी का सातवाँ संस्करण है, जिसमें 1300 से अधिक उपहार नीलामी के लिए रखे गए हैं।

इनमें पेंटिंग्स, कलाकृतियाँ, मूर्तियाँ, देवी-देवताओं की मूर्तियाँ और खेल से जुड़ी चीजें शामिल हैं। इस नीलामी से जो भी पैसा मिलेगा, वह नमामि गंगे परियोजना को दिया जाएगा, जो गंगा नदी की सफाई और संरक्षण के लिए चलाई जा रही है।

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय (NGMA) में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह पहल पहली बार जनवरी 2019 में शुरू हुई थी। तब से अब तक हजारों उपहारों की नीलामी हो चुकी है और 50 करोड़ रुपये से अधिक की राशि नमामि गंगे परियोजना के लिए जुटाई गई है।

गजेन्द्र सिंह शेखावत ने यह भी बताया कि नरेन्द्र मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने अपने सभी उपहार इस सामाजिक कार्य के लिए समर्पित कर दिए हैं।

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस पर ही लगा ‘वोट चोरी’ का इल्जाम, MLA की जाएगी विधायकी?: जानें HC ने सुनाया क्या फैसला, राहुल गाँधी का ‘हाइड्रोजन बम’ गिरने से पहले होगा फुस्स

कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी लगातार बीजेपी और चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाते आ रहे थे, लेकिन अब उन्हीं की पार्टी के विधायक वाई नंजेगौड़ा पर ‘वोट चोरी’ का आरोप खुद कर्नाटक की हाई कोर्ट ने लगाया है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 में मालूर सीट पर कॉन्ग्रेस विधायक के वाई नंजेगौड़ा की जीत को कर्नाटक हाई कोर्ट ने अमान्य कर दिया है।

हाईकोर्ट ने वोटों की गिनती में गड़बड़ियों का हवाला देते हुए फिर से वोटों की गिनती का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद बीजेपी ने कॉन्ग्रेस पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया है। इसी बीच, कॉन्ग्रेस के नेता राहुल गाँधी गुरुवार (18 सितंबर 2025) को प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। इसमें राहुल गाँधी ने बीजेपी पर ‘वोट चोरी’ का ‘हाइड्रोजन बम’ गिराने की बात कही है। इससे पहले राहुल गाँधी ‘एटम बम’ गिराने की बात कर चुके हैं।

हाई कोर्ट का फैसला और नंजेगौड़ा पर असर

कर्नाटक हाई कोर्ट ने मंगलवार (16 सितंबर 2025) को 2023 के विधानसभा चुनाव में नंजेगौड़ा की जीत को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वोटों की गिनती में गड़बड़ी हुई थी और इसकी जाँच होनी चाहिए। जिला चुनाव अधिकारी ने कोर्ट में गिनती की वीडियो रिकॉर्डिंग भी पेश नहीं की।

कर्नाटक HC ने कॉन्ग्रेस विधायक के वाई नंजेगौड़ा की विधायकी रद्द कर दोबारा वोटो की गिनती का आदेश दिया

कोर्ट ने 4 हफ्तों के भीतर फिर से वोटों की गिनती करने का आदेश दिया है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस विधायक नंजेगौड़ा को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए 30 दिनों का समय दिया गया है। नंजेगौड़ा के लिए यह फैसला बड़ा झटका है क्योंकि उनकी गिनती कर्नाटक मिल्क फेडरेशन के अगले अध्यक्ष के तौर पर हो रही थी।

बीजेपी का कॉन्ग्रेस पर पलटवार

इस फैसले के बाद बीजेपी विधायक दल के नेता आर अशोक ने कॉन्ग्रेस पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया है। बीजेपी विधायक ने सवाल उठाया कि क्या राहुल गाँधी नंजेगौड़ा के खिलाफ ‘वोट चोरी यात्रा’ निकालेंगे। यह आरोप तब लग रहे हैं जब राहुल गाँधी लगातार केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगा रहे हैं।

मालूर सीट का चुनावी गणित

मालूर विधानसभा सीट कर्नाटक की कोलार लोकसभा क्षेत्र में आती है, जो अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है। 2023 के चुनाव में कॉन्ग्रेस विधायक नंजेगौड़ा ने 29.4% वोट हासिल किए थे, जबकि भाजपा के मंजीनाथ गौड़ा को 29.26% वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर निर्दलीय उम्मीदवार हुड्डी विजयकुमार थे, जिन्हें 28.48% वोट मिले। जेडीएस उम्मीदवार को सिर्फ 10.17% वोट मिले।

इस सीट पर तीन प्रमुख दावेदार थे और वोट प्रतिशत में बहुत मामूली अंतर था। चुनावी इतिहास में मालूर में कभी भी ऐसे करीबी मुकाबले नहीं देखे गए थे। यहाँ हमेशा जीतने वाले उम्मीदवार को 40% से ज्यादा वोट मिलते थे।

राहुल गाँधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस

राहुल गाँधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस की चर्चा तेज हो गई है। कॉन्ग्रेस के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने बताया कि राहुल गाँधी गुरुवार (18 सितंबर 2025) सुबह 10 बजे इंदिरा भवन में एक विशेष प्रेस ब्रीफिंग करेंगे।

हालाँकि, राहुल गाँधी ने यह नहीं बताया कि वे किस मुद्दे पर बोलेंगे। पहले राहुल ने अपनी ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के समापन कार्यक्रम में कहा था कि कॉन्ग्रेस जल्द ही ‘वोट चोरी’ के खिलाफ एक ‘हाइड्रोजन बम‘ फोड़ेगी, जिसके बाद प्रधानमंत्री मोदी देश का सामना नहीं कर पाएँगे। इससे पहले राहुल गाँधी ‘वोट चोरी’ पर ‘एटम बम’ गिराने की बात कर चुके हैं।

कर्नाटक चुनाव में हुई गड़बड़ियों और ‘वोट चोरी’ के आरोपों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले ने कॉन्ग्रेस विधायक नंजेगौड़ा को झटका दिया है। अब कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सबकी नजरें टिकी हैं, जहाँ वह इस मुद्दे पर या तो अपने विधायक के आरोपों पर पर्दा ढक सकते हैं या फिर कुछ नया खुलासा कर सकते हैं।