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MP के स्कूलों में होगी रामायण-महाभारत-गीता की पढ़ाई: CM शिवराज सिंह चौहान ने रामचरितमानस के अपमान पर चेताया, कहा- हमारे रोम रोम में राम

मध्य प्रदेश के स्कूलों में रामायण, महाभारत और गीता की पढ़ाई होगी। इन्हें स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की घोषणा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार (23 जनवरी 2023) को की। राज्य सरकार की ओर से इस दिशा में कदम उठाने की बात तब कही गई है जब रामचरितमानस पर कई विवादित बयान सामने आए हैं। ऐसे लोगों को भी सीएम ने चेताया है।

सीएम शिवराज सिंह चौहान राजधानी भोपाल में विद्या भारती के ‘सुघोष दर्शन’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, “हमारे रामायण, महाभारत, वेद, उपनिषद, श्रीमद्भगवद्गीता अमूल्य ग्रंथ हैं। इन ग्रंथों में मनुष्य को नैतिक और पूर्ण बनाने की और संपूर्ण बनाने की क्षमता है। मैं मुख्यमंत्री होने के नाते कह रहा हूँ कि धर्म ग्रंथों की शिक्षा हम शासकीय विद्यालयों में भी देंगे।” उन्होंने कहा है, “हम गीता सार पढ़ाएँगे।रामायण जी, रामचरितमानस जी पढ़ाएँगे। महाभारत के प्रसंग पढ़ाएँगे। क्यों नहीं पढ़ाना चाहिए भगवान राम को? तुलसीदास जी ने इतना महान ग्रंथ लिखा है। ऐसा ग्रंथ कहीं मिलेगा?”

सीएम ने कहा, “रामचरितमानस जैसे ग्रंथ देने वाले तुलसीदास जी को मैं प्रणाम करता हूँ। ऐसे लोग जो हमारे इन महापुरुषों का अपमान करते हैं, वह सहन नहीं किए जाएँगे। मध्य प्रदेश में हमारे इन पवित्र ग्रंथों की शिक्षा देकर हम अपने बच्चों को नैतिक भी बनाएँगे, पूर्ण भी बनाएँगे।” उन्होंने कहा , “कुछ लोग देश में ऐसे भी हैं जिन्हें हमारी संस्कृति, अध्यात्म, धर्म और महापुरुषों की आलोचना करने में ही आनंद आता है। ऐसे लोग मूढ़ हैं। ऐसे लोग यह नहीं जानते कि देश का वे कितना नुकसान कर रहे हैं।”

सीएम शिवराज ने कहा है, “हम सभी तो राम राम बोल रहे हैं। लेकिन जब हम समाचार पत्रों में पढ़ते हैं तो मन में पीड़ा होती है। कुछ लोग देश में ऐसे हो गए हैं जो भगवान राम और तुलसीदास जी के बारे में भी कुछ भी बोलते हैं। मैं उनसे कहना चाहता हूँ कि राम हमारे रोम-रोम में रमे हैं। राम हमारी हर साँस में बसे हैं। बिना राम के यह देश नहीं जाना जा सकता। राम हमारे अस्तित्व हैं, राम हमारे प्राण हैं, राम हमारे भगवान हैं और राम भारत की पहचान हैं।”

बात दें कि रामचरितमानस को लेकर अनर्गल टिप्पणी की शुरुआत बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने 11 जनवरी 2023 को नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में की थी। उन्होंने रामचरितमानस को नफरत फैलाने वाला ग्रंथ कहा था। समाज को बाँटने वाला ग्रंथ बताया था। उन्होंने कहा था कि रामचरितमानस दलितों-पिछड़ों को शिक्षा ग्रहण करने से रोकता है।

इसके बाद रामचरितमानस को लेकर समाजवादी पार्टी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य का भी विवादित बयान सामने आया था। सपा नेता ने कहा था कि करोड़ों लोग इस किताब को नहीं पढ़ते हैं और इसमें सब बकवास है। मौर्य ने रामचरितमानस के कुछ अंश को आपत्तिजनक बताते हुए उसे हटाने की माँग की। उन्होंने कहा कि अगर ये अंश न हट पाएँ तो पूरी किताब को ही बैन कर देना चाहिए।

साउथ के जिस एक्टर ने खाया था ज​हर, उनकी अस्पताल में मौत: पुलिस को बिना बताए परिवार को सौंप दिया शव, सुसाइड की वजह पता नहीं

साउथ फिल्म इंडस्ट्री के अभिनेता सुधीर वर्मा की मौत हो गई है। सोमवार (23 जनवरी 2023) को विशाखापट्टनम के एक अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ा। पिछले कुछ समय से तेलुगू अभिनेता सुधीर मानसिक तनाव में थे। हालाँकि उनकी आत्महत्या की वजह स्पष्ट नहीं है।

सुधीर ने 10 जनवरी 2023 को वारंगल में जहरीला पदार्थ खा कर आत्महत्या करने की कोशिश की थी। उसके बाद उन्हें उस्मानिया हॉस्पिटल ले जाया गया था। बेह​तर इलाज के लिए उन्हें 21 जनवरी को विशाखापट्टनम के एक प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट किया गया था।

सुधीर की मौत की पुष्टि उनके साथी कलाकार सुधाकर ने ट्वीट कर की है। उन्होंने कहा है कि सुधीर की मौत हो चुकी है और इस सच को स्वीकार कर पाना उनके लिए बेहद मुश्किल हो रहा है। सुधीर के साथ अपनी कुछ तस्वीरें भी शेयर की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 10 जनवरी को जहर खाने के बाद सुधीर अपने रिश्तेदार के घर हैदराबाद के कोंडापुर गए थे। वहाँ उन्होंने अपने हालात के बारे में बताया। रिश्तेदारों ने उन्हें उस्मानिया अस्पताल में भर्ती करवाया था, जहाँ से 21 जनवरी को उन्हें विशाखापट्टनम के एक निजी अस्पताल में शिफ्ट किया गया था। यहाँ शिफ्ट होने के 2 दिनों के बाद उनकी मृत्यु इलाज के दौरान हो गई। मृत्यु से पहले महारानीपेटा थाना पुलिस ने अभिनेता का बयान भी दर्ज किया था। मौत के बाद उनका शव अस्पताल ने अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया।

पुलिस का कहना है कि सुधीर की मौत के बाद बिना पुलिस को सूचित किए शव उनके परिवार वालों को सौंपने के कारण अस्पताल को सम्मन जारी किया जाएगा। पुलिस के मुताबिक यह मेडिको लीगल केस था, जिसमें पोस्टमार्टम जरूरी था। गौरतलब है कि साल 2013 से अपने फ़िल्मी कैरियर की शुरुआत करने वाले सुधीर वर्मा की पहली फिल्म ‘स्वामी रा रा’ थी। साल 2016 में आई उनकी फिल्म कुंदनपु बोरम्मा (Kundanapu Bomma) ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया था।

‘मुझे और मेरे परिवार को खतरा, मिले अतिरिक्त सुरक्षा’: ‘गाँधी गोडसे – एक युद्ध’ के निर्देशक राजकुमार संतोषी, प्रेस कॉन्फ्रेंस में घुस गाँधी समर्थकों ने दिखाए थे काले झंडे

जहाँ एक तरफ लोग शाहरुख़ खान की आने वाली फिल्म ‘पठान’ के बॉयकॉट की माँग की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ ‘गाँधी गोडसे – एक युद्ध’ फिल्म को लेकर ताज़ा विवाद छोड़ गया है। राजकुमार संतोषी की फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान ही महात्मा गाँधी के समर्थकों ने पर्दे के सामने आकर हंगामा किया, जिसके बाद उन्होंने अपनी और अपने परिवार की जान को खतरा बताया है। उन्होंने इस संबंध में पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है।

फिल्म निर्देशक राजकुमार संतोषी ने अतिरिक्त सुरक्षा मुहैया कराने की माँग करते हुए कहा है कि आरोपितों पर सख्त कार्रवाई की जाए। वो 9 वर्षों बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रहे हैं, ऐसे में उनकी फिल्म को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। शुक्रवार (20 जनवरी, 2023) को भी फिल्म के कलाकारों को प्रमोशंस के दौरान विरोध का सामना करना पड़ा था। कुछ लोगों ने काले झंडे दिखाते हुए महात्मा गाँधी के समर्थन में नारेबाजी भी की थी।

विवाद इतना बढ़ गया था कि प्रदर्शनकारियों को शांत कराने के लिए पुलिस तक बुलानी पड़ी थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ये हंगामा हुआ था। अँधेरी स्थित सिटी मॉल के PVR सिनेमा मॉल में उस दिन शाम के 4 बजे ये हंगामा हुआ था। निर्देशक का कहना है कि अपना हित साधने के लिए कुछ तत्वों ने ऐसा किया है। उन्होंने बताया है कि इसके बाद फिल्म की रिलीज और प्रमोशन्स रोकने के लिए उन्हें अज्ञात लोगों द्वारा कई धमकियाँ आई हैं।

राजकुमार संतोषी ने शिकायत में लिखा है, “अगर ऐसे लोग खुले छोड़ दिए गए तो वो मुझे और और मेरे परिवार को गंभीर नुकसान पहुँचा सकते हैं। मैं असुरक्षित महसूस कर रहा हूँ। इसीलिए, मुझे और मेरे परिवार के सदस्यों को अतिरिक्त सुरक्षा मुहैया कराई जाए।” 66 वर्षीय राजकुमार संतोषी ‘दामिनी (1993)’, ‘घातक (1996)’, ‘लज्जा (2001)’ और ‘अजब प्रेम की गजब कहानी (2009)’ जैसी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं।

JNU ने PM मोदी पर BBC की प्रोपेगंडा डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग रद्द करने को कहा, वरना होगी कार्रवाई: पोस्टर जारी कर किया गया था ऐलान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) पर आधारित BBC की डॉक्यूमेंट्री ‘इंडिया- द मोदी क्वेश्चन (India- The Modi Question)’ को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया हुआ है। इसी सिलसिले में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में मंगलवार (24 जनवरी, 2023) को दिखाई जाने वाली इस प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को रोकने के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। जेएनयू प्रशासन ने इस एडवाइजरी को जारी करते हुए कहा है कि इस तरह की गतिविधि से विश्वविद्यालय में शांति और सद्भाव भंग हो सकती है।

एडवाइजरी में कहा गया है, “विश्वविद्यालय प्रशासन के यह संज्ञान में आया है कि जेएनयूएसयू (JNUSU) के नाम पर छात्रों के एक समूह ने पैम्पलेट जारी किया है कि टेफ्लास के पास 24 जनवरी, 2023 को  ‘इंडिया- द मोदी क्वेश्चन’ डॉक्यूमेंट्री को रात 9 बजे दिखाई जाएगी। जेएनयू प्रशासन से इस संबंध में कोई भी अनुमति नहीं ली गई है। इस तरह की गतिविधि से विश्वविद्यालय में शांति और सद्भाव भंग हो सकती है। इसलिए संबंधित छात्रों या इससे जुड़े व्यक्ति को यह सलाह दिया जाता है कि प्रस्तावित कार्यक्रम को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दें। ऐसा न करने पर विश्वविद्यालय के नियम के हिसाब से सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

दरअसल, इस डॉक्यूमेंट्री में BBC ने दंगों का दोष वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर डालने की कोशिश की है। यही नहीं, उनकी छवि इस्लाम विरोधी भी दिखाने की कोशिश की है। दो पार्ट में बनाई गई BBC की इस सीरीज में प्रधानमंत्री मोदी और भारत के मुस्लिमों के बीच तनाव की बात कही गई है। बीबीसी ने मोदी सरकार के देश के मुस्लिमों के प्रति रवैये, कथित विवादित नीतियाँ, कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने और नागरिकता कानून को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

दूसरी ओर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक (Rishi Sunak) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बचाव किया था। पाकिस्तान मूल के ब्रिटिश सांसद इमरान हुसैन ने ब्रिटिश संसद में गुजरात दंगे का मुद्दा उठाया था। इस पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने कहा था कि इस डॉक्यूमेंट्री में अपने भारतीय समकक्ष के चरित्र चित्रण से वह सहमत नहीं हैं।

BBC की डॉक्यूमेंट्री पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार के आदेश के बाद ट्विटर और यूट्यूब से डॉक्यूमेंट्री से संबंधित लिंक हटाए जा रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूट्यूब वीडियो के लिंक वाले 50 से ज्यादा ट्वीट्स को ब्लॉक किया गया है। आईटी नियम, 2021 के तहत इमरजेंसी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सरकार ने यह कार्रवाई की है।

Spicejet के विमान में एयर होस्टेस के साथ बदसलूकी, एयरलाइंस ने यात्री को साथी सहित प्लेन से उतारा: बताया – गलत तरीके से छुआ, परेशान किया

दिल्ली से हैदराबाद जा रहे स्पाइसजेट के विमान में हंगामे के बाद 2 यात्रियों को फ्लाइट से उतार कर सुरक्षाकर्मियों को सौंप दिया गया। एयरलाइंस की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, यात्री ने एयर होस्टेस के साथ बदसलूकी की साथ ही जहाज में हंगामा खड़ा कर दिया। इसके बाद यात्री और उसके सहयात्री को विमान से नीचे उतार दिया गया।

घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें एक यात्री एयर होस्टेस और दूसरे यात्रियों के साथ बहस करता नजर आ रहा है। दावा है कि महिला क्रू मेंबर के साथ गलत व्यवहार के बाद यह शख्स दूसरे एयर होस्टेस और यात्रियों के साथ भी उग्र हो रहा था। यात्री के व्यवहार की वजह से उसे और उसके साथ यात्रा कर रहे शख्स को प्लेन से उतार दिया गया।

स्पाइसजेट की तरफ से घटना के संबंध में बयान जारी किया गया है। बयान के मुताबिक, दिल्ली में बोर्डिंग के दौरान, एक यात्री ने एक महिला एयर होस्टेस को गलत तरीके से छूआ और उसे परेशान किया। महिला केबिन क्रू ने पीआईसी (PIC) और सुरक्षा कर्मचारियों को घटना की जानकारी दी। हालाँकि, यात्री ने सफाई दी है कि जगह की कमी के कारण ऐसा गलती से हुआ था। फिर भी यात्री और उसके साथी को विमान से उतार दिया गया।

इससे पहले भी विमान में यात्रियों द्वारा हंगामे की खबरें सामने आती रही हैं। 9 जनवरी, 2023 को दिल्ली से पटना जा रहे विमान में एयर होस्टेस और क्रू मेंबर के साथ नशे में धुत युवकों की बदसलूकी का मामला सामने आया था। दोनों को पटना एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया गया था। 29 दिसंबर, 2022 को बैंकॉक से कोलकाता आ रही थाई एयरवेज की एक फ्लाइट में सीट को लेकर कहासुनी के बाद मामला हाथापाई तक पहुँच गया था।

‘जजों को नहीं करना पड़ता चुनाव का सामना, जनता न सवाल कर सकती है न उन्हें बदल सकती है’: बोले केंद्रीय कानून मंत्री – पब्लिक सब देख रही है

केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने सोमवार (23 जनवरी, 2023) को कहा कि जजों को जनता बदल नहीं सकती है और न ही जजों को जनता का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि लेकिन जज किस तरह से काम करते हैं और वे किस तरह के फैसले दे रहे हैं, उसको जनता देख रही है। लोग जजों के निर्णयों को देखकर ओपिनियन भी बनाते हैं और उस पर बातें भी करते हैं।

कानून मंत्री ने कहा, “जब मैं विपक्ष में था, उस समय इतना सोशल मीडिया नहीं था। बहुत गिने-चुने लोग ही टेलीविजन डिबेट में हिस्सा लेते थे। न्यूजपेपर में भी उन्हीं का नाम छपता था। आम आदमी का कोई आवाज था नहीं। आम आदमी अगर बोलना चाहता था तो भी नहीं बोल सकता था। कहाँ बोलते। कोई प्लेटफॉर्म था ही नहीं। नेता लोग ही बोलते थे। आज तो हर एक लोग सरकार से सवाल करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “जनता को सवाल पूछना भी चाहिए। चुने हुए सरकार को अगर सवाल नहीं करेंगे तो किससे सवाल करेंगे। सरकार पर लगातार हमला होता है, लेकिन हमलोग पीछे हटते नहीं हैं। उनका सामना करते हैं। हम चुने हुए लोग हैं। अगर मैं आज कानून मंत्री के हिसाब से काम कर रहा हूँ। अगर जनता चाहेगी तो हमें सरकार में लाएगी। नहीं तो हम विपक्ष में बैठेंगे। लेकिन जज तो एक बार जज बन गए तो उनको तो चुनाव का सामना करना नहीं है। जजों को तो जनता सवाल भी नहीं कर सकती। जनता जजों को नहीं चुनती है । वह उनको बदल भी नहीं सकती।”

कानून मंत्री ने कहा, “जनता जजों काे देख रही है। आपके (जजों के) जजमेंट को लोग देखते हैं। आप किस तरह से काम करते हैं, आप किस तरह से न्याय देते हैं, वह भी जनता देख रही है। लोग देख कर इसका मूल्यांकन भी करते हैं और ऑपेनियन भी बनाते हैं। सोशल मीडिया के युग में आप कुछ भी छिपा नहीं सकते हैं।” रिजिजू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश ने उनसे आग्रह किया था कि सोशल मीडिया पर जजों की आलोचना को रोकने के उपाय करना चाहिए।

वहीं इससे पहले रिजिजू ने कॉलेजियम विवाद के बीच दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज आरएस सोढ़ी (RS Sodhi) का वीडियो शेयर किया था। वीडियो में पूर्व जज सोढ़ी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘संविधान को हाईजैक’ करने की बात कहते हैं। रिजिजू ने कहा था कि हमारी न्यायपालिका स्वतंत्र है लेकिन हमारा संविधान सर्वोच्च है।

रिजिजू ने पूर्व जज आरएस सोढ़ी का वीडियो शेयर करते हुए कहा था, “एक जज की नेक आवाज: भारतीय लोकतंत्र की असली खूबसूरती इसकी सफलता है। जनता अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से स्वयं शासन करती है। चुने हुए प्रतिनिधि लोगों के हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं और कानून बनाते हैं। हमारी न्यायपालिका स्वतंत्र है लेकिन हमारा संविधान सर्वोच्च है।”

‘मूर्तिपूजा का विरोध करने वाले न करें मंदिर परिसर में कारोबार’: मेले से हटाई गईं गैर-हिन्दुओं की दुकानें, VHP ने पोस्टर में कुकर ब्लास्ट की दिलाई थी याद

कर्नाटक के दक्षिण-कन्नड़ जिले के पंचलिंगेश्वर मंदिर मेले में मुस्लिमों की दुकानें हटाने का मामला सामना आया है। इसे लेकर मेला शुरू होने से पहले ही विश्व हिंदू परिषद ने बॉयकॉट की मुहिम चलाते हुए पोस्टर जारी किए थे। साथ ही इलाके के व्हाट्एप ग्रुपों पर भी गैर-हिंदू व्यापारियों के दुकान लगाने पर प्रतिबंध जैसे संदेश जमकर वायरल हो रहे थे। इन सब के बीच एक मुस्लिम शख्स ने मेले में अपनी दुकान लगाई थी जिसे खाली करवा लिया गया।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक 14 जनवरी से 22 जनवरी तक विट्टल कस्बे में पंचलिंगेश्वर मंदिर मेले का आयोजन किया गया था। इसके पहले ही हिंदू संगठनों खास तौर पर विश्व हिंदू परिषद की तरफ से पोस्टर जारी कर मुस्लिम दुकानदारों को मेले के दौरान स्टॉल न लगाने के लिए कहा गया था। जारी पोस्टर में हिंदू पर्व त्योहारों और मेलों में मुस्लिमों से दुकान न लगाने की बात कही गई थी। पोस्टर में नवंबर 2022 में हुए कुकर ब्लास्ट का जिक्र करते हुए लिखा गया था कि हमलावरों का निशाना काद्री मंजूनाथ मंदिर था।

इसके अलावा पोस्टर में लिखा गया था कि मूर्ति पूजा का विरोध करने वाले लोग पूजा स्थल के पास मेले के दौरान कारोबार नहीं कर सकते। आगे लिखा था कि सिर्फ हिंदू धर्म के रीति-रिवाजों का पालन करने वाले व्यापारियों को ही व्यापार करने की अनुमति होगी। हालाँकि पुलिस ने इन पोस्टरों को हटा लिया था और मंदिर प्रशासन की तरफ से भी पोस्टर पर लिखी बातों को खारिज कर दिया गया था।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, मेले से पहले हिंदू संगठनों की तरफ से एक व्हाट्सएप्प मैसेज भी जारी किया गया था, जिसमें मुस्लिमों को मेले में दुकान न लगाने की बात कही जा रही थी। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस तरह के मैसेज वायरल होने के बाद मेले में दुकानों का टेंडर निकालने वाले गणेश शिनोय ने 2 मुस्लिम दुकानदारों के एडवांस लौटा दिए। खबरों की मानें तो एक मुस्लिम व्यक्ति ने विट्टल कस्बे लगे पंचलिंगेश्वर मंदिर मेले में अपनी दुकान लगाई थी, जिसे खाली करा लिया गया।

बता दें कि मेले में 1 किलोमीटर के दायरे में दुकान लगाए जाते हैं। हर साल यहाँ हिंदुओं के साथ साथ मुस्लिमों की भी दुकानें सजती रही हैं। कर्नाटक हिजाब विवाद और देश भर में घटित हो रही घटनाओं को देखते हुए हिंदू संगठनों ने बायकॉट मुहिम चलाई हुई है। जिसके तहत इस तरह की घटनाएँ देखने को मिल रही हैं।

पिछले साल भी इसी तरह के पोस्टर लगाए गए थे। इसमें मुस्लिम व्यापारियों को कर्नाटक के कई हिस्सों में मंदिरों, त्योहारों और वार्षिक मेलों में स्टॉल लगाने से रोकने की बातें कही गई थी। पोस्टरों में कथित तौर पर लिखा गया था कि गोहत्या में शामिल लोगों को स्थानीय वार्षिक मेलों में व्यापार करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पोस्टरों में मुस्लिम व्यापारियों को यह कहते हुए चेतावनी भी दी गई थी कि जो लोग देश के कानून का सम्मान नहीं करते हैं उन्हें व्यापार करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

‘जरा खिड़की खोल दीजिए, गुटखा थूकना है’: विमान में यात्री ने एयर होस्टेस से लगाई गुहार, सोशल मीडिया में वायरल हुआ वीडियो

आजकल फ्लाइट्स से जुड़ी कई नकारात्मक खबरें सामने आ रही हैं, चाहे एयर इंडिया की फ्लाइट में पेशाब करने का मामला हो या नेपाल में दर्दनाक विमान हादसे की खबर हो। हालाँकि, सोशल मीडिया पर इंडिगो फ्लाइट का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिस पर लोग सोशल मीडिया में जम कर ठहाके लगा रहे हैं। 

दरअसल इंडिगों की फलाइट पर बैठा एक शख्स एयर होस्टेस से अनोखी गुहार लगाता है। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि शख्स हाथों में गुटखा को रगड़ने की एक्टिंग करता है, फिर वह विमान की खिड़की की ओर इशारा करते हुए बड़े ही प्यार से एयर होस्टेस से कहता है, “एक्सक्यूज मी, जरा खिड़की खोल दीजिए, बाहर गुटखा थूकना है।”

बस इतना कहना ही था कि ‘एक्सक्यूज मी’ बोलने वाला शख्स और एयर होस्टेस खिलखिला कर हँस देते हैं। साथ में वहाँ मौजूद लोग भी हँसने लगते हैं। वीडियो देखकर पता चलता है है कि इसे माहौल को हल्का-फुल्का करने के लिए बनाया गया है। इस वीडियो को गोविंद शर्मा नाम के यूजर ने इंस्टाग्राम पर अपलोड किया है। उन्होंने साथ ही वीडियो के कैप्शन में लिखा है कि गुटखा को पसंद करने वाले लोग अपने दोस्तों को इस वीडियो में टैग करें।

वीडियो बहुत तेजी से वायरल हो रहा है और इसे खबर लिखे जाने तक 12 लाख से ज्यादा लोग लाइक कर चुके हैं। इसके साथ ही वीडियो पर यूजर्स मजेदार कमेंट कर रह हैं। पंकज मंडल नाम के यूजर कहते हैं, “कानपुर की फ्लाइट्स ने इस फीचर को अपग्रेड किया है।” वहीं एक यूजर इसपर कमेंट करते हुए लिखता है, “उन्होंने कॉर्नर सीट इसलिए बनाई है ताकि लोग वहाँ थूक सकें।” वहीं एक अन्य यूजर कहता है, “ऐसा लगता है कि यूपी-बिहार के लोग प्लेन में बस यही चाहते हैं।”

HC ने खारिज की 90 हिन्दुओं को ईसाई बनाने वाले भानु प्रताप सिंह की अग्रिम जमानत याचिका: नहीं काम आए वकील राजकुमार वर्मा के तर्क, पादरी विजय है मुख्य आरोपित

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 90 लोगों को ईसाई बनाने के आरोपित को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। आरोपित का नाम भानु प्रताप सिंह है जो एक पादरी बताया जा रहा है। यह मामला उत्तर प्रदेश के ही फतेहपुर जिले का है। धर्मांतरण के इस रैकेट में कुल 35 नामजदों के साथ कुल 55 आरोपित हैं। आरोपित की तरफ से मौके पर मौजूद न होने, अपराध में शामिल न होने और अपने आपराधिक इतिहास न होने की तमाम दलीलें दी गईं। हालाँकि, कोर्ट ने इसे अग्रिम जमानत का आधार नहीं माना और 9 जनवरी, 2023 को याचिका ख़ारिज कर दी।

बार एन्ड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, मामले की सुनवाई जस्टिस ज्योत्सना शर्मा की अदालत में हुई। आरोपित भानु प्रताप की तरफ से एडवोकेट राजकुमार वर्मा पेश हुए थे। उन्होंने कहा कि उनका मुवक्किल अपराध में शामिल नहीं था और जिस दिन यह धर्मांतरण हुआ उस दिन घटनास्थल पर भी उसकी मौजूदगी नहीं थी। आरोपित भानु प्रताप के वकील ने यह भी कहा कि उनके मुवक्किल का कोई भी आपराधिक इतिहास नहीं है और उसे राजनैतिक प्रतिद्वंदिता में फँसाया जा रहा है। हालाँकि, अदालत ने भानु प्रताप के तर्कों को नहीं माना।

अपने आदेश में न्यायमूर्ति ज्योत्सना शर्मा ने कहा कि अग्रिम जमानत तब देने का प्रावधान है जब कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग हो रहा हो। जज के मुताबिक, अग्रिम जमानत के लिए वादी द्वारा कोर्ट को अपने तथ्यों सबूतों से संतुष्ट करना होगा। वहीं इसी मामले में सरकारी वकील का कहना था कि आरोपित भानु प्रताप लोगों को पैसे दे कर धर्म-परिवर्तन करवाने में शामिल था। सरकारी वकील द्वारा बताया गया कि भानु प्रताप को मौके से ही गिरफ्तार किया गया था। इसी मामले में भानु प्रताप की पत्नी भी आरोपित हैं।

क्या है पूरा मामला

यह मामला 14 अप्रैल, 2022 का है जिसकी FIR अगले दिन फतेहपुर जिले के कोतवाली सिटी में दर्ज हुई थी। मामले में शिकायतकर्ता ‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ के सहमंत्री हिमांशु दीक्षित हैं। अपनी शिकायत में उन्होंने 35 नामजद और 20 अज्ञात पर फतेहपुर हरिहरगंज के इवेजलिकल चर्च ऑफ़ इंडिया में हिन्दुओं का लालच दे कर धर्मांतरण का आरोप लगाया है। इस मामले में मुख्य आरोपित चर्च का पादरी विजय मसीह बताया गया है। शिकायत में लिखा गया है कि आरोपितों ने लालच के साथ डरा धमका कर 90 हिन्दुओं को न सिर्फ ईसाई बनाया बल्कि उनके काजगात में भी छेड़छाड़ की।

हिमांशु दीक्षित ने अपनी शिकायत में बताया है कि धर्मान्तरण की प्रक्रिया 40 दिन चलने वाली थी और 14 अगस्त को उसका 34वाँ दिन था। इस ईसाई धर्मांतरण के रैकेट में फतेहपुर के ही मिशन अस्पताल के कर्मचारी भी शामिल बताए गए थे। केस में दर्ज सभी आरोपित देश के अलग-अलग हिस्सों से थे। पुलिस ने इस मामले में IPC की धारा 153A, 506, 420, 467, 468 और उत्तर प्रदेश की धारा 3/5 (1) के तहत धर्म अध्यादेश, 2020 के अवैध धर्मांतरण पर रोक के तहत FIR दर्ज किया था। ऑपइंडिया के पास इस केस की FIR कॉपी मौजूद है।

क्या है केस की वर्तमान स्थिति

ऑपइंडिया ने इस केस के विवेचक इंस्पेक्टर अमित मिश्रा से बात की। उन्होंने बताया कि इस FIR में दर्ज 9 लोग फ़िलहाल जेल में हैं। अमित मिश्रा के मुताबि,क हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका ख़ारिज होने के बाद भानु प्रताप सिंह ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। उन्होंने बताया कि भानु प्रताप की पत्नी अंजू रानी भी इस केस में नामजद आरोपित हैं। विवेचक ने बताया कि अभी इस मामले की जाँच चल रही है और कोर्ट में चार्जशीट पेश नहीं हुई है।

11 साल बाद बरी हुए बंगाल के प्रोफेसर, गुनाह – CM ममता बनर्जी का कार्टून ईमेल किया था: बताया – कोर्ट के 72 चक्कर लगाने पड़े, बदला लेना चाहती थी राज्य सरकार

ममता बनर्जी (Mamta Banerji) के कार्टून को शेयर करने वाले जादवपुर यूनिवर्सिटी (JU) के प्रोफेसर अम्बिकेश महापात्रा (Ambikesh Mahapatra) को आखिरकार 11 साल की लंबी लड़ाई के बाद मामले से बरी कर दिया गया है। महापात्रा के खिलाफ इस मामले में 12 अप्रैल, 2012 को ईस्ट जादवपुर पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कराया गया था। उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं के अलावा आईटी एक्ट की धारा 66ए के तहत मामला दर्ज किया गया था।

एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रोफेसर ने कहा वह मामले में बरी होने के बाद अच्छा महसूस कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि वह उस दिन का भी इंतजार कर रहे हैं जब लोग जागेंगे और फर्जी केसों का यह दौर समाप्त होगा। प्रोफेसर ने कहा, “मैंने इन 10 सालों में अदालतों के 72 चक्कर लगाए। यहाँ तक कि 66ए के रद्द होने के बाद भी मेरा केस चलता रहा।”

प्रोफेसर ने कहा, “मेरी ओर से बिना किसी दंडनीय अपराध के 11 साल तक मामला चलता रहा। यह पुलिस प्रशासन के साथ राज्य सरकार के बदले की भावना को दर्शाता है। मेरा मामला साबित करता है कि बंगाल में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार पर अंकुश लगाया जा रहा है।”

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा धारा 66ए को रद्द किए जाने के बाद भी मामला समाप्त नहीं हुआ। मामला चलता रहा। प्रोफेसर ने कहा कि 2017 में वह हाईकोर्ट पहुँचे, लेकिन वहाँ भी सिर्फ तारीख मिलती रही। आखिरकार 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों को 66ए से संबंधित सभी धाराओं को समाप्त करने का आदेश दिया। इसके बाद वो जिला अदालत गए और वहाँ से उन्हें शुक्रवार (20 जनवरी, 2023) को राहत मिली। दरअसल मार्च 2015 में, सुप्रीम कोर्ट ने ‘श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ‘ मामले में आईटी अधिनियम की धारा 66ए को निरस्त करने का एक ऐतिहासिक फैसला पारित किया था।

उल्लेखनीय है कि प्रोफेसर ने 2012 में  न्यू गरिया डेवलपमेंट को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (New Garia Development Co-Operative Society Limited) के सदस्य को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक कार्टून ई-मेल किया था। इस पर तृणमूल कॉन्ग्रेस के एक कार्यकर्ता अमित सरदार ने 12 अप्रैल, 2012 को  ईस्ट जादवपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। वह शिकायतकर्ता उनके मेल का प्राप्तकर्ता भी नहीं था।

अंबिकेश महापात्रा को गिरफ्तार कर पुलिस हवालात में रखा गया था। हालाँकि अगले दिन उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई। उन्होंने सत्यजीत रे की सोनार केला फिल्म पर आधारित एक कार्टून सीक्वेंस को आगे बढ़ाया था, जिसमें दिनेश त्रिवेदी को रेल मंत्री के पद से हटाए जाने और मुकुल रॉय को रेल मंत्री बनाए जाने को लेकर व्यंग किया गया था।