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ऑस्कर के लिए नॉमिनेट होने वाला पहला भारतीय गाना बना ‘RRR’ का ‘नाटू-नाटू’, गोल्डन ग्लोब के बाद SS राजामौली की फिल्म के लिए दोहरी ख़ुशी

‘RRR’ फिल्म के गाने नाटू-नाटू ने गोल्डन गलोब्स अवार्ड के बाद अब एक और इतिहास रच दिया है। फिल्म के गाने नाटू-नाटू को 95वें अकादमी पुरस्कार अवॉर्ड्स के लिए नॉमिनेट किया गया है। इस गाने को ओरिजनल सॉन्ग के लिए नॉमिनेट किया गया है। ‘द एकेडमी’ ने ट्वीट कर यह जानकारी दी।

वहीं ‘RRR’ फिल्म ने ट्वीट कर कहा,”हमने इतिहास रच दिया है। यह साझा करते हुए गर्व और सौभाग्य की बात है कि नाटू-नाटू को 95वें अकादमी पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ मूल गीत के लिए नामांकित किया गया है।” रिज अहमद और एलिसन विलियम्स ने अकादमी अवॉर्ड के लिए नामांकन की घोषणा की है।

वहीं इससे पहले बॉक्स ऑफिस पर झंडे गाड़ने वाली एसएस राजामौली की फिल्म ‘RRR’ ने गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड (Golden Globe Awards) में भी इतिहास रचा था । फिल्म के गाने ‘नाटू-नाटू’ को बेस्ट ऑरिजिनल सॉन्ग का पुरस्कार मिला था। इस गाने के तेलुगू वर्जन को एमएम कीरावानी (MM Keeravaani) ने कंपोज किया है।

कीरावानी ने गोल्डन ग्लोबन अवॉर्ड ग्रहण करते हुए ख़ुशी का इजहार किया था और फिल्म के कलाकार एन टी रामाराव जूनियर और रामचरण को गाने में शानदार प्रस्तुति देने के लिए धन्यवाद दिया था। उन्होंने कहा था, “राम चरण और रामा राव को पूरी ताकत के साथ डांस करने के लिए शुक्रिया।” इस गाने ने इस श्रेणी में बड़े-बड़े दिग्गजों को हराकर यह पुरस्कार प्राप्त किया है। ‘नाटू-नाटू’ के साथ टेलर स्विफ्ट और लेडी गागा समेत कई दिग्गजों के गाने को भी पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया गया था।

पादरी ने चर्च में की सेक्स पार्टी, फिर कर ली आत्महत्या

ब्रिटेन की राजधानी लंदन के एक चर्च में सेक्स पार्टी का खुलासा हुआ है। इस खुलासे के बाद पोप ने जाँच के आदेश दिए हैं। सेक्स पार्टी पादरी माइकल मैककॉय ने लॉकडाउन के दौरान आयोजित की थी। सेक्स पार्टी का आरोप जिस पादरी पर लगा है, उसने साल 2021 में आत्महत्या कर ली थी। मामले की जाँच लीवरपूल के आर्कबिशप को सौंपी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, सेक्स पार्टी का खुलासा पूर्व पादरी रॉबर्ट बयर्ने के इस्‍तीफे की जाँच के दौरान हुआ है। जाँच में सामने आया कि रॉबर्ट ब्रायन के इस्तीफे के बाद मैककॉय पादरी बनने जा रहा था।

हालाँकि, इस बीच दिसंबर 2020 में मैककॉय ने चर्च के अंदर बने अपने घर में कुछ ईसाइयों को कथित तौर पर सेक्‍स पार्टी के लिए तैयार किया। कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण लंदन में लॉकडाउन लगा हुआ था। ऐसे में चर्च खाली पड़ा था। मौके का फायदा उठाकर मैककॉय ने यह पार्टी आयोजित की थी।

दिलचस्प बात यह है कि इस मामले में इससे पहले कोई भी शिकायत नहीं हुई थी। लेकिन, मामले का खुलासा होने के बाद मैककॉय के खिलाफ गवाही देने के लिए बड़ी संख्या में लोग सामने आ रहे हैं।

‘संडे टाइम्‍स’ ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा है कि मामले का खुलासा होने के बाद कई लोगों ने इस मामले की शिकायत की है। मैककॉय के खिलाफ गवाही देने वालों का आरोप है कि उसने चर्च के अंदर बने अपने घर में सेक्‍स पार्टी आयोजित की थी।

हालाँकि,ऑपइंडिया इस आरोप की पुष्टि नहीं करता। लेकिन, ये आरोप काफी हद सही इसलिए लग रहे हैं क्योंकि पादरी मैककॉय पर बच्चों के यौन शोषण करने का आरोप लगा था। इन आरोपों के बाद जब पुलिस ने उसके खिलाफ जाँच शुरू की तो 4 दिन बाद ही उसने आत्महत्या कर ली थी। बता दें कि ‘सेक्स पार्टी’ की जाँच कर रहे अधिकारियों को इस बात के सबूत नहीं मिले हैं कि मैककॉय से पहले चर्च के पादरी रहे रॉबर्ट ब्रायन इसमें शामिल हुए थे या नहीं। चर्च में हुई सेक्स पार्टी के इस खुलासे के बाद पूरी दुनिया में इसकी आलोचना हो रही है।

DU की नाबालिग छात्रा से जहाँगीरपुरी के शाकिब ने किया बलात्कार, धर्मांतरण-निकाह का भी दबाव: घर पर की पत्थरबाजी, अश्लील वीडियो से कर रहा ब्लैकमेल

देश की राजधानी दिल्ली में एक नाबालिग लड़की से रेप और इस्लामी धर्मांतरण के दबाव का मामला सामने आया है। पीड़िता डीयू (Delhi University) की छात्रा है। नाबालिग का आरोप है कि जहाँगीरपुर का रहने वाला शाकिब उसे निकाह के लिए ब्लैकमेल कर रहा है। शाकिब पर पीड़िता के अश्लील फोटो और वीडियो बनाने का भी आरोप है। शाकिब पर रविवार (22 जनवरी 2023) को लड़की के घर पर पत्थरबाजी करने का भी आरोप लगा है। पुलिस ने आरोपित पर पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। FIR होने के बाद शाकिब फरार हो गया है जिसकी तलाश पुलिस कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामले की शिकायत पुलिस में रविवार-सोमवार की गई है। शिकायत करने वाली नाबालिग लड़की ने बताया कि वह दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा है। कुछ दिनों पहले अपने एक परिचित दोस्त के माध्यम से उसकी मुलाक़ात जहाँगीरपुरी के शाकिब से हुई। कुछ दिनों की बातचीत के बाद शाकिब और लड़की में नजदीकियाँ बढ़ गईं। इसी बीच शाकिब ने लड़की को अपने जहाँगीरपुरी स्थित घर पर बुलाया। लड़की वहाँ गई तो कोई और मौजूद नहीं था। लड़की को विश्वास में ले कर शाकिब ने उसे जूस पीने के लिए दिया।

पीड़िता का आरोप है कि शाकिब ने जूस में कोई नशीली चीज मिला रखी थी। जूस पीते ही लड़की बेहोश हो गई। आरोप है कि इसी बेहोशी के दौरान शाकिब ने उसे से रेप किया और उसकी अश्लील वीडियो बना ली। छात्रा को अपने सात हुई अनहोनी का एहसास होश में आने के बाद हुआ। लड़की का कहना है कि उसके आपत्तिजनक फोटो और वीडियो दिखा कर तब से शाकिब उस से 2-3 बार और रेप कर चुका है। शिकायत में बताया गया है कि शाकिब ने अपनी बात न मानने पर लड़की के फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी दी है। पीड़िता का कहना है कि उसने डर कर अपने माता-पिता से इन बातों को छिपा रखा था।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में आगे बताया है कि शाकिब उस पर खुद से निकाह करने और धर्म बदलने का भी दबाव डाल रहा है। जब वह ऐसा करने से मना करती है तब उसे अंजाम ठीक न होने की धमकियाँ दी जाती हैं। शाकिब की हरकतों से तंग आ कर लड़की ने उस से अपनी बातचीत भी बंद कर ली थी। इस बात से नाराज हो कर आरोपित ने रविवार (22 जनवरी, 2023) को लड़की के घर पर पत्थर और अंडे फेंके। आख़िरकार पीड़िता ने अपने परिजनों को सारी बात बता दी। लड़की द्वारा मिली जानकारी के बाद उसके माता-पिता ने पुलिस को बुलाया और शाकिब के खिलाफ केस दर्ज करवाया।

पुलिस ने मिली शिकायत पर आरोपित के खिलाफ IPC की धारा 328, 376 और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया। केस दर्ज होते ही शाकिब फरार हो गया। पुलिस का कहना है कि आरोपित को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। ऑपइंडिया ने इस मामले की पुष्टि के लिए दिल्ली पुलिस की नार्थ वेस्ट DCP से बात की। DCP ने हमें बताया कि जहाँगीरपुरी थाने में पॉक्सो का एक केस दर्ज हुआ है। हालाँकि, उन्होंने इस मामले में अधिक जानकारी न होने की बात कही। से बात करते हुए ACP जहाँगीरपुरी ने बताया कि आरोपित की गिरफ्तारी के प्रयास चल रहे हैं।

मंत्री नसर ने अपने ही कार्यकर्ताओं पर की पत्थरबाजी, कुर्सी लाने में देरी से भड़के थे DMK नेता: तमिलनाडु का वीडियो हुआ वायरल

तमिलनाडु के एक मंत्री का अपने कार्यकर्ताओं पर पत्थर फेंकते हुए वीडियो मंगलवार (24 जनवरी, 2023) को वायरल हो गया है। दरअसल राज्य के दूध एवं डेयरी विकास मंत्री एसएम नसर (SM Nasar) मुख्यमंत्री एमके स्टालिन (MK Stalin) के एक कार्यक्रम का निरीक्षण करने तिरुवल्लुर (Tiruvallur) पहुँचे थे। वहाँ पहुँचने के बाद वह बैठने के लिए कुर्सी का इंतजार कर रहे थे। हालाँकि, जब कुर्सी लाने में देरी हुई तो मंत्री ने अपना आपा खो दिया और अपने ही कार्यकर्ताओं पर पत्थर चला दिया।

घटना का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि मंत्री पहले हाथ से कुर्सी लाने का इशारा करते हैं। फिर अचानक वह काफी गुस्से में आ जाते हैं और जमीन से पत्थर उठाकर जोर से कार्यकर्ताओं की तरफ मारते हैं। वहाँ मौजूद लोग मंत्री की हरकत देख हँस पड़ते हैं। इस बीच तेजी से एक कार्यकर्ता उनकी ओर कुर्सी लाता दिखता है। इस दौरान मंत्री कुछ बड़बड़ाते हुए भी दिखते हैं। इतना ही नहीं, मंत्री को इस तरह से पत्थर चलाता देख उनके सुरक्षा गार्ड्स भी हँस पड़ते हैं।

दरअसल, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन बुधवार (25 जनवरी, 2023) को आने वाले हैं। इसी कार्यक्रम के बंदोबस्त और तैयारी का निरीक्षण करने मंत्री नसर यहाँ पहुँचे थे। सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वहीं लोग इस वीडियो को देख तरह-तरह की प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं। एक यूजर लिखते हैं, “वह अप्रत्यक्ष रूप से जनता को बता रहे हैं कि सत्ता में बैठे लोगों की सेवा में देरी होने पर लोगों को शरिया कानून के तहत दंडित किया जा सकता है।”

वहीं मंत्री पिछले साल भी झूठी खबर फैलाने के बाद सुर्खियों में आ गए थे। उन्होंने कहा था कि नरेंद्र मोदी सरकार ने दूध के लिए गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) लगाया है, जिसके कारण दूध की कीमतें बढ़ी हैं। उन्होंने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा था, “केंद्र सरकार ने दूध पर भी GST लगाया है। यह एक आश्चर्यजनक घटना है। दूध पर जीएसटी लगाने के परिणामस्वरूप दूध का बिक्री मूल्य बढ़ गया है।”

जिसे कहा जाता था चीन का सबसे सफल अरबपति, ₹3.18 लाख करोड़ (93%) घट गई उसकी संपत्ति: कंपनी पर ₹24 लाख करोड़ का कर्ज

चीन के सबसे सफल अरबपति माने जाने वाले हुइ का यान (Hui Ka Yan) कभी एशिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति थे। लेकिन देश में रियल एस्टेट संकट के कारण एवरग्रांडे ग्रुप के चेयरमैन की पिछले लगभग पाँच साल में 93 फीसदी, यानी 39 अरब डॉलर (3.18 लाख करोड़ रुपए) संपत्ति घट गई है। 2017 में उनकी नेटवर्थ 42 अरब डॉलर थी, अब 3 अरब डॉलर ही बची है। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, एवरग्रांडे (Evergrande) 300 अरब डॉलर (24.47 लाख करोड़ रुपए) की देनदारियों के साथ सबसे ज्यादा कर्ज में डूबी कंपनी है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, 2021 के बाद से चीन रियल एस्टेट संकट से जूझ रहा है। हुइ (Hui) को मंदारिन में जू जियायिन (Xu Jiayin) के नाम से भी जाना जाता है, जिसने अपनी कंपनी को बचाने के लिए अपने घरों और निजी जेट विमानों को भी बेच दिया।

कर्ज में डूबी कंपनी को 2019 से अपने फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स पर चाइना सिक्योरिटीज रेगुलेटरी कमिशन (CSRC) द्वारा एक जाँच का भी सामना करना पड़ रहा है। इससे भी इन्वेस्टर्स की चिंता बढ़ी है। बताया जाता है कि कर्जदारों, सप्लायर्स और इनवेस्टर्स को पैसा चुकाने के लिए कई महीने तक जूझने के बाद दिसंबर 2021 में Evergrande ने अपने यूएस डॉलर बॉन्ड्स को डिफॉल्ट कर दिया था। एवरग्रांडे चीन की बड़ी कंपनी है और उसके पास लगभग 200000 कर्मचारी हैं। 2020 में कंपनी की सेल्स 100 अरब डॉलर (816215000000) से ज्यादा रही थी। 280 शहरों में उसके 1300 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स हैं।

हालाँकि, इन सबके बावजूद हुइ और एवरग्रांडे ने एक नई सोच और उम्मीद के साथ 2023 की शुरुआत की। एएफपी के मुताबिक, एक ईमेल में हुइ का यान ने कर्मचारियों से कहा था, “2023 एवरग्रांडे के लिए कॉर्पोरेट जिम्मेदारी को पूरा करने और निर्माण परियोजनाओं में काफी कुछ करने के एक महत्वपूर्ण वर्ष है।”

हुइ ने यह भी लिखा था, “जब तक एवरग्रांडे में सभी एकजुट होकर काम करते रहेंगे, कभी हार नहीं मानेंगे, कड़ी मेहनत जारी रखेंगे। हम निश्चित रूप से कामयाब होंगे। साथ ही सभी प्रकार के कर्ज चुकाने और जोखिमों को हल करने के कार्यों को पूरा करने में सक्षम होंगे।”

जिस थाली में खाना उसमें ही छेद: फ्लिपकार्ट के डिलीवरी बॉय अनस ने फर्जी अकाउंट से मँगवाए कीमती सामान, फिर गिट्टी भर वापस कर दिया

ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) को उसके ही एक कर्मचारी द्वारा चूना लगाने का मामला सामने आया है। मामला उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले का है। फ्लिपकार्ट के डिलीवरी बॉय को अनस को गिरफ्तार कर पुलिस ने इस फर्जीवाड़े का सोमवार (23 जनवरी 2023) को खुलासा किया।

मोहम्मद अनस पर आरोप है कि वह फर्जी अकाउंट के जरिए फ्लिपकार्ट से कीमती समान के ऑर्डर करता। फिर डिलीवरी बॉय बनकर वह सामान ले जाता। उसके बाद पैकेट में नकली माल डालकर ब्रांच में यह कहकर जमा कर देता कि कस्टमर ने वापस कर दिया है। अनस मिर्जापुर का ही रहने वाला है। उसके पास से मोबाइल, घड़ियाँ और मोबाइल के चार्जर बरामद हुए हैं।

यह मामला कोतवाली कटरा क्षेत्र का है। मिर्जापुर पुलिस के मुताबिक 21 जनवरी 2023 (शनिवार) को फ्लिपकार्ट के ब्रान्च मैनेजर अनुपम गुप्ता ने इस संबंध में थाने में तहरीर दी थी। इसके मुताबिक डिलीवरी बॉय 38 वर्षीय अनस ब्रान्च से लाखों रुपए के सामान सप्लाई करने लेकर निकला था। इसमें से कुछ सामान वह लेकर ब्रांच लौट गया। बताया कि ग्राहकों ने सामान वापस कर दिए हैं। जब वापस किए गए सामानों को ब्रांच में चेक किया गया तो वो सभी डुप्लीकेट कंपनी के निकले।

पुलिस ने इस मामले में IPC की धारा 419,420,421,467,407 और 381 के तहत केस दर्ज किया और मामले की जाँच शुरू कर दी। जाँच के दौरान पुलिस ने अनस को इसके पीछे जिम्मेदार पाया। उसे 23 जनवरी को कटरा क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक अनस ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। उसने बताया है कि 24 अलग-अलग नंबरों से उसने फ्लिपकार्ट के अलग-अलग अकाउंट बनाए थे। इन अकाउंट से उसने खुद ही कई कीमती चीजों का ऑर्डर किया था।

अनस ने बताया कि घटना के दिन हर रोज की तरह वह सामान सप्लाई करने निकला। इस दौरान उसने फर्जी एकाउंट से ऑर्डर किए गए असली सामान निकाल लिए और डिब्बे में डुप्लीकेट सामान भर दिए। एक डिब्बे में तो उसने गिट्टी तक डाल दी थी। बाद में उसने ये सभी सामान वापसी का बता कर ब्रान्च में जमा करवा दिया। पुलिस ने अनस के पास से सैमसंग गैलेक्सी का 1 A73 मोबाइल फोन, एप्पल और सैमसंग की 1-1 घड़ी, 3 चार्जर केबल और एप्पल के 3 एयर पॉड बरामद किए हैं। सामान की बरामदगी के बाद पुलिस ने केस में IPC 411 भी जोड़ा है। आरोपित को चालान कर कोर्ट में पेश कर दिया गया है।

3 साल बाद आया ‘हिटमैन’ का शतक, जयसूर्या से आगे-पोटिंग की बराबरी: शुभमन गिल ने भी सेंचुरी ठोक बना लिया बाबर आजम वाला रिकॉर्ड

न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे एकदिवसीय मैच में मंगलवार (24 जनवरी 2023) को भारत ने पहले बैटिंग करते हुए 9 विकेट के नुकसान पर 385 रन ठोक दिए। भारत के दोनों ओपनर रोहित शर्मा और शुभमन गिल ने शतक जड़ा है। हिटमैन के नाम से मशहूर शर्मा का वनडे में यह शतक करीब तीन साल बाद आया है। यह उनका 30वाँ शतक है। वहीं गिल ने चार मैचों में तीसरा शतक ठोका है।

इंदौर के होल्कर स्टेडियम में खेले जा रहे इस मैच में रोहित शर्मा ने 85 गेंदों में 101 रन बनाए हैं। उनकी इस पारी में 9 चौके और 6 आसमानी छक्के शामिल थे। इस मैच में चौथा छक्का जड़ते ही रोहित ने श्रीलंकाई दिग्गज सनथ जयसूर्या के छक्कों का रिकॉर्ड तोड़ दिया।

इस मैच से पहले रोहित शर्मा के नाम 267 छक्के थे। वहीं, जयसूर्या के नाम 270 छक्के हैं। इस मैच में, 6 छक्के जड़ने के बाद रोहित शर्मा के नाम अब 273 छक्के हो गए हैं। यही नहीं, अब रोहित शर्मा वनडे क्रिकेट में छक्के जड़ने वाले प्लेयर्स की सूची में टॉप 3 में पहुँच गए हैं। इस सूची में 331 छक्कों के साथ क्रिस गेल दूसरे और 351 छक्कों के साथ शाहिद अफरीदी नंबर 1 पर हैं।

यही नहीं, शतक जड़ने के मामले में रोहित शर्मा ने अब पूर्व ऑस्ट्रेलिया कप्तान रिकी पोंटिंग के रिकॉर्ड की भी बराबरी कर ली। रोहित शर्मा के करियर का यह 30वाँ शतक है। अब उनसे आगे, विराट कोहली और सचिन तेंदुलकर हैं। इन दोनों के नाम क्रमशः 46 और 49 शतक हैं।

इस मैच में टीम इंडिया की पारी के दूसरे स्टार शुभमन गिल ने 78 गेंदों में 112 रनों की पारी खेली। उनकी इस पारी में 13 चौके और 5 गगनचुंबी छक्के शामिल थे। इस शतकीय पारी के साथ ही शुभमन गिल ने पाकिस्तानी कप्तान बाबर आजम के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली।

दरअसल वनडे क्रिकेट में तीन मैचों की श्रृंखला में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड बाबर आजम के नाम है। आजम ने साल 2016 में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेली गई श्रृंखला में 360 रन बनाए थे। उन्होंने तीनों मैचों में शतक जड़ा था।

वहीं शुभमन गिल ने न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले मैच में दोहरा शतक जड़ते हुए 208 रन बनाए थे। दूसरे मैच में, वह 40 रनों पर नाबाद रहे। अब तीसरे एकदिवसीय मैच में उन्होंने 112 रनों की पारी खेली है। इस तरह उन्होंने तीन मैचों की सीरीज में सबसे अधिक रन बनाने के मामले में बाबर आजम की बराबरी कर ली है।

जैन साध्वी और नन के बीच का फर्क भी भूला BBC, सब कुछ त्यागने वाली 8 साल की बच्ची पर दुष्प्रचार में गार्जियन जैसे मीडिया हाउस भी शामिल

हाल ही में गुजरात के सूरत में हीरा व्यापारी की 9 साल की बेटी देवांशी ने भौतिक सुख-सुविधाओं को त्याग कर संन्यास ग्रहण किया। पाँच भाषाओं की जानकार देवांशी ने जैनाचार्य कीर्तियशसूरीश्वर महाराज से दीक्षा प्राप्त की है। लेकिन, कई विदेशी मीडिया संस्थानों ने उन्हें अपनी रिपोर्ट में नन लिखा है। गुजरात में भाजपा के मीडिया समन्वयक जुबिन अशरा ने उन मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट्स को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर भी साझा किया है। उन्होंने लिखा, “बीबीसी, द गार्जियन जैसे मीडिया पोर्टल इस तरह से झूठ फैलाते हैं। वह नन नहीं, बल्कि जैन साध्वी बन गई है। इनकी हेडलाइन्स देखिए।”

सूरत में लगभग तीन दशक पुरानी डायमंड पॉलिशिंग और ‘एक्सपोर्ट फर्म संघवी एंड संस’ के मालिक की बड़ी बेटी आने वाले कुछ सालों में करोड़ों की हीरा कंपनी की मालिक होती, लेकिन उसने यह स‍ब कुछ त्‍याग कर दीक्षा लेना स्वीकार किया। वेसु इलाके में देवांशी का दीक्षा का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें 30 हजार से अधिक लोग जुटे। लेकिन, बीबीसी ने एक बार फिर दुष्प्रचार करते हुए गलत रिपोर्ट प्रकाशित की।

बीबीसी की रिपोर्ट का ​स्क्रीनशॉट

इसी तरह द गार्जियन, इंडिपेंडेंट, द इंटरनेशनल जैसे कई मीडिया संतानों ने अपने पोर्टल पर जैनाचार्य कीर्तियशसूरीश्वर महाराज से दीक्षा लेने वाली देवांशी को नन लिखा।

द गार्जियन का स्क्रीनशॉट

इंडिपेंडेंट ने भी अपनी रिपोर्ट में सूरत के हीरा कारोबारी की बेटी को नन लिखा है।

इंडिपेंडेंट का स्क्रीनशॉट

इसी तरह UAE के ‘द इंटरनेशनल’ न्यूज पोर्टल ने अपनी रिपोर्ट में मासूम बच्ची को नन लिखा है।

इंटरनेशनल का स्क्रीनशॉट

‘द इंटरनेशनल’ ने अपनी फोटो गैलरी में देवांशी की जैन समुदाय में संन्यास लेने वाली साध्वी जैसे कपड़े पहने हुए तस्वीर भी लगाई है। इसके बावजूद उसने अपनी रिपोर्ट में गलत हेडलाइन दी कि वह नन बन गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ये मीडिया पोर्टल एक नन और जैन साध्वी के अंतर को नहीं जान पाए। या फिर उन्होंने ऐसा जानबूझ किया है?

दरअसल, देवांशी की दीक्षा से पहले उनके परिवार ने यूरोपीय देश बेल्जियम में भी सूरत की ही तरह जुलूस निकाला था। ऐसे में यह खबर केवल भारत तक ही सीमित नहीं थी। बच्ची के बारे में दुनिया भर के लोगों को अच्छे से पता था। फिर भी इन मीडिया संस्थानों ने एक बार फिर अपनी रिपोर्ट से यह साबित कर दिया कि वह पाठकों को गुमराह करने के लिए गलत खबरें प्रकाशित करते रहते हैं।

वहीं, देवांशी के परिवार वालों के मुताबिक, उनकी बेटी ने आज तक कभी भी टीवी नहीं देखा है। बचपन से ही उसकी रुचि धार्मिक क्रियाओं में रही है। वह इस छोटी से उम्र में ही 357 दीक्षा प्राप्त कर चुकी है। साथ ही बच्ची ने करीब 500 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर विहार और जैन समुदाय से जुड़े रीति-रिवाजों को समझा है। घरवालों का कहना है कि उन्होंने हमेशा ही जैन समुदाय से जुड़े कार्य ही किए हैं। कभी भी ऐसा कोई काम नहीं किया जो जैन समुदाय में प्रतिबंधित हो। यहाँ तक कि देवांशी ने कभी भी अक्षर लिखे हुए कपड़े तक नहीं पहने हैं।

इसके अलावा, देवांशी ने धार्मिक शिक्षा में आयोजित क्विज में गोल्ड मेडल हासिल किया था। वह संगीत, स्केटिंग, मेंटल मैथ्स और भरतनाट्यम में भी एक्सपर्ट हैं। देवांशी को जैन समुदाय से जुड़े वैराग्य शतक और तत्वार्थ के अध्याय जैसे महाग्रंथ कंठस्थ हैं।

2024 से पहले ‘डरा हुआ मुसलमान’ नैरेटिव गढ़ने की कोशिश भर ही नहीं, BBC की प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री के हैं खतरे बड़े

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टारगेट करते हुए बीबीसी ने एक प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री बनाई है। इसका मकसद यह प्रचारित करना है कि गुजरात के मुख्यमंत्री रहते नरेंद्र मोदी ने मुस्लिमों को मरने के लिए छोड़ दिया था। 59 कारसेवकों को मुस्लिम भीड़ द्वारा ट्रेन में जलाने की घटना के बाद गुजरात में दंगे भड़क गए थे। प्रतिबंध के बावजूद कुछ राजनीतिक समूह और इस्लामी छात्र संगठन इस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग कर रहे हैं। विश्वविद्यालयों में स्क्रीनिंग हो रही है, जिनमें कुछ केंद्र सरकार द्वारा भी संचालित हैं।

ब्रिटिश सरकार के पैसे पर आश्रित बीबीसी का यह डॉक्यूमेंट्री 2024 आम चुनावों पहले पीएम मोदी को ‘मुस्लिम विरोधी’ दिखाने का एक प्रयास है। हमेशा की तरह भारत के विपक्षी नेता राजनीतिक फायदे के लिए इस डॉक्यूमेंट्री का इस्तेमाल कर रहे हैं। विपक्षी नेताओं की इस हरकत से पता चलता है कि उन्होंने स्वीकार कर लिया है कि वे मोदी को अपने दम पर नहीं हरा सकते हैं। इसके बदले वे 2024 में मोदी को हराने के लिए ‘डरा हुआ मुसलमान’ नैरेटिव को विदेशी मदद से आगे बढ़ा रहे हैं।

लेकिन यह मामला राजनीति से इतर भी है, जिससे हमें चिंतित होना चाहिए। यह कट्टरपंथ के प्रति मुस्लिम युवकों के रूझान को भी प्रदर्शित करता है। हैदराबाद यूनिवर्सिटी में डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग के पीछे स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन (SIO) के सदस्य थे। SIO के सदस्य CAA विरोधी प्रदर्शनों के लिए भीड़ जुटाने में शामिल रहे हैं, जिसके कारण फरवरी 2020 में दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगे हुए थे। SIO के सदस्यों में से एक आसिफ तन्हा पर दिल्ली में हिंसा का मामला दर्ज किया गया था।

1981 में स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) के अलग होने के बाद, 1982 में जमात-ए-इस्लामी ने SIO की स्थापना की। 2008 में लाइव मिंट ने अपनी रिपोर्ट में इन दोनों संगठनों के बीच संबंध को कुछ इस तरह बताया था, वे भले सगे भाइयों की तरह हों लेकिन उनके सिद्धांतों और कार्यों में भिन्नता दिखती है। सरकारी कार्रवाई के बाद सिमी काफी हद तक भूमिगत हो चुका है, जबकि SIO उभर रहा है। वह इस्लाम को कट्टरवांद और हिंसा के रूढ़िवादी लीक से बाहर ले जा रहा है। उसका मिशन इस्लामी सिद्धांतों के आधार पर छात्रों, मुस्लिमों और गैर मुस्लिमों के सहयोग से शांतिपूर्ण तरीके से भारत का पुनर्निर्माण करना है।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे में केंद्र सरकार ने बताया कि SIMI छिपकर अपनी गतिविधियों में लगा है और फंड जुटा रहा है। इसमें कहा गया था कि संगठन को किसी भी स्थिति में ‘भारत में इस्लामी शासन स्थापित करने के मकसद’ को पूरा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। केंद्र ने बताया था कि SIMI के हर नए सदस्य को ‘इस्लामी शासन की स्थापना’ के लिए काम करने की शपथ दिलाई जाती है। केंद्र ने यह भी कहा था कि वह न केवल भारत की संप्रभुता और अखंडता को अस्वीकार करता है, बल्कि भारत और भारत के संविधान के खिलाफ भी भड़काता है।

अब ये लोग ऐसे प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग में संलिप्त हैं जो न केवल एकतरफा, बल्कि तथ्यात्मक तौर पर भी गलत है। पूर्वाग्रह पर आधारित है। भले भारत एक लोकतांत्रिक देश है और सभी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, लेकिन इसके नाम पर युवाओं को इस तरह की डॉक्यूमेंट्री दिखाना इसका एक स्याह पक्ष है।

2016 में दिल्ली पुलिस ने जैश-ए-मोहम्मद (JEM) के तीन आतंकवादियों के खिलाफ दायर चार्जशीट में एक अदालत को बताया था कि उन्हें गुजरात और मुजफ्फरनगर दंगों के वीडियो दिखाए कर आतंकवादी गतिविधियों के लिए तैयार किया गया था। JEM प्रमुख मौलाना मसूद अजहर से प्रेरित हो वे आतंकी संगठन में शामिल हुए थे। JEM के एक आतंकवादी साजिद ने स्वीकार किया था कि जब दिसंबर 2015 में कट्टरपंथी युवकों और आतंकी बनने की इच्छा रखने वाले लोग एक घर में मिले थे, तो उन्हें ‘गुजरात दंगों और मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान मुसलमानों के उत्पीड़न’ के बारे में बताया गया था।

साजिद ने तब सुझाव दिया था कि प्रशिक्षु आतंकवादियों को मौलाना मसूद अजहर की तकरीरों को सुनना चाहिए। ये तकरीर राम जन्मभूमि पर स्थित विवादित ढाँचे ‘बाबरी मस्जिद’ के विध्वंस का बदला भारत में हिंसक जिहाद से लेने के बारे में थे। इनमें भारत में मुसलमानों पर तथाकथित अत्याचार और कश्मीर की ‘मुक्ति’ की भी बात की गई थी। मौलाना मसूद अजहर के इन वीडियो ने प्रशिक्षु आतंकियों को जिहाद के लिए उकसाया था।

दंगों के वीडियो की स्क्रीनिंग मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और उन्हें आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के लिए उकसाने को लेकर किया गया था। मुस्लिम छात्र संगठन ऐसे प्रोपेगेंडा वीडियो विशेष तौर पर दिखाते हैं जिसमें ‘मुस्लिम उत्पीड़न’ का रोना होता है।

ऑपइंडिया ने पहले बताया था कि कैसे 2002 के गुजरात दंगों के वीडियो का भी जबरन धर्म परिवर्तन के लिए इस्तेमाल किया गया था। ऑपइंडिया से बात करते हुए, आदिवासी वसावा समुदाय के एक सदस्य प्रकाश वसावा (बदला हुआ नाम) ने बताया था कि उसे इस्लाम में परिवर्तित होने का लालच दिया गया था। वसावा ने जबरन धर्मांतरण रैकेट के आरोपितों में से एक हाजी फेफड़ावाला के बारे में बताया था, “हमें बताया गया कि गोधरा कांड में असल में (पीएम) मोदी और (एचएम) शाह ने ट्रेन के अंदर मुस्लिमों को जिंदा जला दिया था और दावा किया गया कि हिंदुओं को मार दिया गया था। उन्होंने हमें बताया कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद स्थल पर कोई मंदिर नहीं था और यह हमेशा एक मस्जिद रहेगा।”

ऐसे समय में जब ध्रुवीकरण चरम पर है, प्रोपेगेंडाबाज, इस्लामवादी और ‘भारत के टुकड़े’ करने का इरादा रखने वाली ताकतें, ‘पत्रकारिता’ की आड़ में सांप्रदायिक कलह फैलाने में सबसे आगे हैं, ये एकतरफा दुष्प्रचार आग में घी डालने का ही काम करता है। एक आम मुस्लिम जो सामान्य आदमी की तरह अपना जीवन जी रहा होता है, प्रोपेगेंडा फ़ैलाने वाले अचानक उसे उसकी मुस्लिम पहचान के बारे में बताने लगते है और अंततः यही उसकी एकमात्र पहचान बन जाती है और यह अक्सर कट्टरता की ओर पहला कदम होता है।

(मूल रूप से अंग्रेजी में लिखे गए निरवा मेहता के इस लेख को आप इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं। इसका हिंदी अनुवाद राहुल आनंद ने किया है।)

PM मोदी पर BBC की प्रोपेगंडा डॉक्यूमेंट्री: केरल में स्क्रीनिंग के लिए साथ आए कम्युनिस्ट-कॉन्ग्रेस, हैदराबाद में इस्लामी संगठनों ने प्रदर्शित किया वीडियो

बीबीसी की प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री (BBC Documentary) को केंद्र सरकार ने बैन कर दिया है। इस बैन के बाद जहाँ एक ओर हैदराबाद यूनिवर्सिटी में इस्लामी छात्र संगठनों ने स्क्रीनिंग इसकी की है, वहीं दूसरी ओर केरल में कॉन्ग्रेस और वामपंथी दलों ने भी स्क्रीनिंग करने का ऐलान किया है। इस बीच, जेएनयू में इस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (JNUSU) के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केरल प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी (KPCC) के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ ने कहा है कि गणतंत्र दिवस पर राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री दिखाई जाएगी। इसको लेकर केपीसीसी के प्रवक्ता शिहाबुद्दीन ने कहा है, “डॉक्यूमेंट्री पर प्रतिबंध लगाना संविधान के खिलाफ है। मोदी सरकार इस पर कैसे प्रतिबंध लगा सकती है? यह केंद्र के खिलाफ हमारा विरोध है।”

वहीं, केरल में सत्तारूढ़ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की छात्र इकाई डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) ने भी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग करने का ऐलान किया है। डीवाईएफआई मंगलवार (24 जनवरी 2023) को शाम 6 बजे बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग करेगा।

इसके अलावा, बीबीसी की प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संगठन (JNUSU) के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। इससे पहले, छात्र संगठन ने जेएनयू में मंगलवार (24 जनवरी 2023) को डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की प्लानिंग की थी। यहाँ तक कि इसके पम्पलेट भी बाँटे गए थे।

इसके बाद, जेएनयू प्रशासन ने एडवाइजरी जारी कर स्क्रीनिंग कर रोक लगा दी थी। एडवाइजरी में कहा गया था कि इस तरह की गतिविधि से विश्वविद्यालय में शांति और सद्भाव भंग हो सकती है। लेकिन, इसके बाद भी स्क्रीनिंग को लेकर तैयारियाँ की जा रहीं थीं। इसलिए वकील और सामाजिक कार्यकर्ता विनीत जिंदल ने यह एफआईआर कराई है।

विनीत जिंदल ने कहा है कि इस डॉक्यूमेंट्री का मुख्य उद्देश्य देश में अशांति फैलाना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम करना है। केंद्र सरकार द्वारा डॉक्यूमेंट्री पर बैन लगाने के बाद भी इसकी स्क्रीनिंग करके धार्मिक अलगाव और नफरत को बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

इससे पहले, सोमवार (23 जनवरी, 2023) को हैदराबाद विश्वविद्यालय में स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन और मुस्लिम स्टूडेंट फेडरेशन ने इसकी स्क्रीनिंग की है। इस स्क्रीनिंग में दोनों इस्लामिक छात्र संगठनों के 50 से अधिक छात्र मौजूद रहे। इसको लेकर छात्र संगठन एबीवीपी ने विरोध दर्ज कराते हुए यूनिवर्सिटी में शिकायत की है।

वहीं, केंद्र सरकार के बैन के बाद भी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को भाजपा ने देश विरोधी गतिविधि करार दिया है। भाजपा प्रवक्ता टॉम वडक्कन ने कहा है, “यह भारत को बाँटने का काम करने वाले देशद्रोहियों के तंत्र की करतूत है। यह सब सुप्रीम के फैसले के खिलाफ किया जा रहा है।”

दरअसल, इस डॉक्यूमेंट्री में BBC ने दंगों का दोष वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर डालने की कोशिश की है। यही नहीं, उनकी छवि इस्लाम विरोधी भी दिखाने की कोशिश की है। दो पार्ट में बनाई गई BBC की इस सीरीज में प्रधानमंत्री मोदी और भारत के मुस्लिमों के बीच तनाव की बात कही गई है। बीबीसी ने मोदी सरकार के देश के मुस्लिमों के प्रति रवैये, कथित विवादित नीतियाँ, कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने और नागरिकता कानून को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

BBC की डॉक्यूमेंट्री पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार के आदेश के बाद ट्विटर और यूट्यूब से डॉक्यूमेंट्री से संबंधित लिंक हटाए जा रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूट्यूब वीडियो के लिंक वाले 50 से ज्यादा ट्वीट्स को ब्लॉक किया गया है। आईटी नियम, 2021 के तहत इमरजेंसी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सरकार ने यह कार्रवाई की है।