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रियासत के ‘रोहित स्टील’ से होता था शोर, कविता के परिवार ने कर दी शिकायत: घर में घुसकर पीटा, फरीदाबाद की घटना

हरियाणा के फरीदाबाद में एक हिन्दू परिवार ने पड़ोस के वर्कशॉप मालिक पर घर में घुस कर पिटाई का आरोप लगाया है। बताया जा रहा है कि हिन्दू परिवार ने वर्कशॉप से होने वाले शोर को लेकर प्रशासन से शिकायत की थी। इससे नाराज होकर रियासत और राहत अली ने हिन्दू परिवार की पिटाई कर दी। मंगलवार (17 जनवरी 2023) को पुलिस से इसकी शिकायत की गई। रियासत और राहत रिश्ते में बाप-बेटे हैं तथा रोहित स्टील नाम से वर्कशॉप चलाते हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक मामला सेक्टर 23 की संजय कॉलोनी का है। पीड़ित परिवार ने स्थानीय चैनल फरीदाबाद न्यूज़ पर अपनी व्यथा बताई है। पीड़ित परिवार ने बताया कि उनके घर के ठीक सामने रियासत और राहत का रोहित वर्कशॉप है। यहाँ लोहे और वेल्डिंग का काम होता है। वर्कशॉप से अक्सर मशीनों के चलने और हथौड़े आदि से पीटने की जोर-जोर से आवाजें आती हैं। पीड़ितों ने कहा कि इन आवाजों से उन्हें काफी परेशानी होती थी, जिसकी शिकायत उन्होंने अधिकारियों से की थी। इस की शिकायत 15 सितम्बर 2022 को मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई थी।

मुख्यमंत्री पोर्टल पर हुई इस शिकायत पर 13 दिसंबर 2022 को जिलाधिकारी ने संज्ञान लिया और कार्रवाई के निर्देश दिए। क्षेत्र के SDM ने स्थानीय नायब तहसीलदार को 16 जनवरी 2023 तक जाँच कर के आख्या पेश करने को कहा था। ऑपइंडिया के पास शिकायत और SDM के आदेश की कॉपी मौजूद है। इस शिकायत पर अधिकारियों ने वर्कशॉप की जाँच की। अपनी शिकायत में पीड़ित परिवार ने कहा है कि आरोपितों ने वर्कशॉप की जाँच करने वाले अधिकारियों के लौट जाने के बाद उन पर हमला कर दिया। इस हमले में घर में घुस कर मारपीट के साथ सोने की चेन भी छीन ली गई। हमलावरों की संख्या 4 बताई जा रही है। पीड़िता कविता के मुताबिक उनके हाथों को मरोड़ दिया गया और बेरहमी से पिटाई की गई। पीड़ित परिवार का यह भी कहना है कि पुलिस में शिकायत करने के बाद आरोपितों ने फिर से घर में घुस कर मारा और पथराव किया।

पीड़ित परिवार का कहना है कि दोबारा हमले की वजह पुलिस द्वारा पहली शिकायत में की गई शिथिलता है। एक अन्य पीड़ित अजय के अनुसार उन्हें 9 टाँके लगे हैं। हमले में सुनयना, दयानन्द और शुभम को भी चोटें आईं हैं। कविता का कहना है कि सम्भव है कि दुबारा उन पर हमला किया जाए। हमले में रॉड के साथ कुल्हाड़ी और बेलचे का प्रयोग किया गया है। हमलावरों में हरेराम शर्मा और अनिल शर्मा के भी शामिल होने का आरोप है।

BJP ने पार्टी से निकाला, अगले दिन सपा नेता की बेटी को लेकर चला गया: पुलिस कर रही तलाश, दावा- शादी का झाँसा देकर ले भागा

उत्तर प्रदेश के हरदोई में भाजपा के एक कार्यकर्ता (अब निलंबित) आशीष शुक्ला और सपा नेता की बेटी के बीच प्रेम प्रसंग का मामला सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों घर छोड़कर भाग गए हैं। सपा नेता ने 47 साल के शादीशुदा आशीष शुक्ला पर बेटी को बहका कर भगाने का आरोप लगाया है। इसकी शिकायत पुलिस से भी की गई है। भाजपा जिलाध्यक्ष सौरभ मिश्रा ने पार्टी विरोधी गतिविधियों का हवाला देते हुए आशीष शुक्ला को पहले ही पार्टी से निकाल दिया है।

मामला हरदोई कोतवाली इलाके का है। जानकारी के मुताबिक, 13 जनवरी को आशीष और सपा नेता की बेटी फरार हो गए। सपा नेता ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में कहा है कि भाजपा के नगर महामंत्री आशीष शुक्ला उर्फ राजू ने उनकी 26 साल की बेटी को शादी का झाँसा दिया और बहला कर भगा ले गया। शिकायत में कहा गया है कि आशीष शुक्ला शादीशुदा है और उसके 2 बच्चे भी हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सपा नेता की बेटी और भाजपा नेता आशीष शुक्ला के बीच प्रेम प्रसंग चल रहा था। सपा नेता अपनी बेटी की शादी की तैयारियाँ कर रहे थे। इस बीच दोनों घर से भाग गए।

पुलिस को जानकारी दी गई है कि आशीष भाजपा कार्यकर्ता होने के साथ साथ बीमा एजेंट का भी काम करता है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आशीष के खिलाफ युवती को बहला-फुसलाकर भगाने का मामला दर्ज कर दोनों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि बहुत जल्द उन्हें बरामद कर लिया जाएगा।

आशीष के भाजपा से जुड़े होने की बात सामने आने के बाद हरदोई भाजपा अध्यक्ष सौरभ मिश्रा का भी बयान सामने आया है। सौरभ ने कहा है कि 12 जनवरी 2023 को ही पार्टी विरोधी आचरण के कारण आशीष को पार्टी से निकाल दिया गया था। सौरभ ने कहा है कि गलत काम करने वालों को कानून सजा देगा। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी समाज विरोधी लोगों के साथ खड़ी नहीं हो सकती।

9 साल में बना दिए 9600 मस्जिद, खर्च कर डाले ₹3287 करोड़: अब खाने को मोहताज हुआ मिस्र, पाकिस्तान की तरह कंगाल हुआ एक और इस्लामी मुल्क

एशिया और अफ्रीका से जुड़ा मुस्लिम मुल्क मिस्र (Egypt) की हालत भी खस्ता है। पाकिस्तान की तरह ही वहाँ के लोग भी महँगाई की मार झेल रहे हैं और गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। लोगों के पास अब रोटी खरीदने तक के पैसे नहीं हैं।

आर्थिक संकट के दौरान भी मिस्र की सरकार द्वारा लोगों को बेसिक चीजें उपलब्ध कराने के बजाए मस्जिदों के निर्माण (Construction of Masjid) और उसके रख-रखाव पर पैसे पानी की तरह बहाए जा रहे हैं। इसको लेकर वहाँ के लोग सरकार पर सवाल उठा रहे हैं।

पिछले महीने मिस्र के धार्मिक बंदोबस्ती मंत्रालय ने बताया था कि साल 2013 में राष्ट्रपति अब्देल फत्तह अल-सिसी के पद सँभालने के बाद से 10.2 बिलियन मिस्र पाउंड (लगभग 404 मिलियन डॉलर यानी लगभग 3,287 करोड़ रुपए) की लागत से 9,600 मस्जिदों का निर्माण या नवीनीकरण किया गया है।

अल-मॉनिटर के अनुसार, मिस्र की राजधानी काहिरा (Cairo) के 20 वर्षीय महमूद अब्दो सरकार के इस फैसले से बहुत नाराज हैं। अब्दो कहते हैं, “पहले हम लोगों को यह कहते सुना करते थे कि गरीब परिवारों के लिए जिस पैसे की ज़रूरत होती है, उसे मस्जिदों पर खर्च नहीं किया जाना चाहिए।”

अब्दो का कहना है कि आज देश के मस्जिदों में जकात के नाम पर चंदा वसूलने के लिए बक्से बने हुए हैं। हालाँकि, पिछले साल नवंबर में मिस्र के धार्मिक बंदोबस्ती मंत्रालय ने दान पेटियों को हटाने के लिए कहा था। उन्होंने कहा कि जिन्हें चंदे देने होंगे वे मस्जिदों के खाते में सीधे जमा करा सकते हैं।

बता दें कि मिस्र की लगभग 10.30 करोड़ जनसंख्या है। मिस्र भर में मस्जिदों की कुल संख्या 1,40,000 से भी अधिक हैं। इनमें से 1,00,000 बड़ी मस्जिदें शामिल हैं। हालाँकि, मिस्र के ऐसे लोगों की संख्या भी खूब है, जो मस्जिद नहीं जाते हैं। इसके बावजूद वहाँ की सरकार मस्जिदों पर पैसे बहा रही है।

मिस्र के पत्रकार और डॉक्टर खालिद मॉन्टेसर ने पिछले महीने ट्विटर पर खर्च की आलोचना की थी। उन्होंने तर्क दिया था कि प्रार्थना कहीं भी की जा सकती है, लेकिन शैक्षिक सेवाओं के लिए स्कूलों की आवश्यकता होती है और चिकित्सा उपचार के लिए अस्पतालों की आवश्यकता होती है।

बता दें कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मिस्र के पाउंड के अवमूल्यन के अलावा मिस्र में खाद्य पदार्थों के साथ-साथ आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा रही है। अगर अरब देशों की तुलना करें तो मिस्र में लोगों की आय सबसे कम है। इसके बावजूद मिस्र के मंत्री मस्जिद निर्माण को सही ठहरा रहे हैं।

मिस्र के धार्मिक बंदोबस्ती विभाग के मंत्री मोहम्मद मुख्तार गोमा ने धार्मिक नेताओं के साथ एक बैठक में मस्जिद-निर्माण कार्यक्रम की प्रशंसा की थी। उन्होंने कहा था कि मिस्र और किसी अन्य देश के इतिहास में मस्जिद निर्माण की यह अभूतपूर्व संख्या है। बंदोबस्ती मंत्रालय से संबद्ध इस्लामी मामलों की सर्वोच्च परिषद के सदस्य शेख खालिद अल-जुंदी ने कहा था कि मस्जिद निर्माण ‘धर्म के संरक्षण’ का संकेत है।

10वीं के टेस्ट पेपर में बच्चों को ‘आज़ाद कश्मीर’ चिह्नित करने को कहा: बंगाल में WBBSE का कारनामा, भाजपा ने बताया TMC की जिहादी साजिश

;पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (West Bengal Board Of Secondary Education)’ की तरफ से 10वीं के छात्रों के लिए जारी टेस्ट पेपर में नक्शे पर ‘आजाद कश्मीर’ चिह्नित करने के लिए कहा गया है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को आजाद कश्मीर लिखे जाने को लेकर भाजपा ने पश्चिम बंगाल के टीएमसी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और इसे जिहादी साजिश करार दिया है। टेस्ट पेपर के पेज नंबर 132 का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है।

बवाल मचने के बाद केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से मामले की जाँच के लिए कहा है। राज्य सरकार ने कहा है कि मामले की जाँच जारी है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (WBBSE) हर साल बोर्ड की परीक्षा से पहले छात्रों की प्रैक्टिस के लिए टेस्ट पेपर का संग्रह जारी करता है। इसमें अलग-अलग स्कूलों द्वारा तैयार किए गए कक्षा 10 के लिए प्रश्न होते हैं। इस संग्रह के वायरल हो रहे पेज नंबर 132 के उपविभाग संख्या 2.4 में 4 स्थानों को मानचित्र पर दिखाने के लिए कहा गया है। सबसे पहले संख्या 2.4.1 पर आजाद कश्मीर को चिह्नित करने के लिए कहा गया है।

उसके बाद क्रमशः मोपला विद्रोह का स्थान, गाँधी जी के नेतृत्व में शुरू किए गए पहले सत्याग्रह स्थल और अंत में चटग्राम को मानचित्र में दिखाने के लिए कहा गया है। टेस्ट पेपर का विवादास्पद प्रश्न मालदा के रामकृष्ण मिशन विवेकानंद विद्यामंदिर का बताया जा रहा है।

इसे राज्य की भाजपा इकाई ने बड़ा मसला करार दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और मेदिनीपुर से सांसद दिलीप घोष ने 17 जनवरी को ट्विटर पर ममता सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, “ममता सरकार अलगाववादियों की समर्थक है। मध्यमिक टेस्ट पेपर 2023 के पृष्ठ 132 पर इतिहास के प्रश्न पत्र के चिह्नित हिस्से को देखें। छात्रों को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के हिस्से को आज़ाद कश्मीर के रूप में पहचानने के लिए कहा गया है। राज्य सरकार न सिर्फ उग्रवादियों का समर्थन कर रही है, बल्कि छात्रों में भारत विरोधी मानसिकता पैदा करने की भी कोशिश कर रही है।”

केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉक्टर सुभाष सरकार ने प्रश्न पत्र बनाने वालों को राष्ट्र द्रोही करार दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रश्नों के जरिए आतंकवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य सरकार के शिक्षा मंत्री को टेस्ट पेपर की बिक्री बंद कर के उन्हें पत्र लिखना चाहिए, साथ ही मामले की जाँच होनी चाहिए।

‘भारतीय जनता पार्टी (BJP)’ के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर सुकान्त मजूमदार ने ट्विटर पर लिखा, “छात्रों से माध्यमिक परीक्षा के पेपर में ‘आजाद कश्मीर’ को मार्क करने के लिए कहा गया है। क्या मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ऐसे विचारों का समर्थन करती हैं?” उन्होंने टीएमसी पर तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की माँग की। बीजेपी नेता राहुल सिन्हा ने मामले की उच्च स्तरीय जाँच की माँग की। उन्होंने कहा इस घटना से साबित होता है कि राज्य सरकार अपने वोट बैंक को खुश करने के लिए जिहादी विचारों को बढ़ावा देती है।

दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल सरकार ने इसे भूल करार दिया है। टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने भाजपा के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि यदि किसी ने गलती से इस तरह का सवाल पूछा है तो यह गलत किया है। उन्होंने कहा कि हम ऐसे कृत्यों का समर्थन नहीं करते हैं। टीएमसी एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी है जो किसी समुदाय विशेष को खुश करने में विश्वास नहीं रखती है। उन्होंने दावा किया किभाजपा द्वारा हमारी पार्टी के खिलाफ निराधार टिप्पणी की जा रही है।

वहीं, पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष रामानुज गंगोपाध्याय ने कहा कि हम लोग प्रश्न पत्र तैयार करने वालों और इसे संपादित करने वालों से बात करेंगे और दोषियों पर कार्रवाई भी की जाएगी। उन्होंने जानकारी दी कि बोर्ड की वेबसाइट पर संशोधित प्रश्न पत्र जारी किया जा रहा है।

500km की पदयात्रा-357 दीक्षा, 9 साल की देवांशी ने लिया संन्यास: हीरा कारोबारी की बेटी पर कभी नहीं देखा TV

गुजरात के सूरत में 9 साल की देवांशी ने संन्यास ग्रहण किया है। वह हीरा कारोबारी संघवी मोहन भाई की पोती और धनेश-अमी बेन की बेटी हैं। उन्होंने जैनाचार्य कीर्तियशसूरीश्वर महाराज से दीक्षा प्राप्त की है। देवांशी का दीक्षा महोत्सव शनिवार (14 जनवरी 2023) को शुरू हुआ था। आज बुधवार (18 जनवरी 2023) को पूरा हुआ।

देवांशी के संन्यास लेने से पहले दीक्षा महोत्सव के अवसर पर सूरत में वर्षीदान यात्रा निकाली गई थी। इसमें 4 हाथी, 11 ऊँट और 20 घोड़ों को शामिल किया गया था। यात्रा में हजारों की संख्या में लोग शामिल थे। देवांशी के दीक्षा ग्रहण करने कार्यक्रम में करीब 35 हजार लोग शामिल हुए।

देवांशी के घरवालों का कहना है कि बचपन से ही उनकी रुचि धार्मिक क्रियाओं में थी। उन्होंने आज तक कभी टीवी नहीं देखा है। यही नहीं, वह इस छोटी से उम्र में ही 357 दीक्षा प्राप्त कर चुकी हैं। साथ ही करीब 500 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर विहार और जैन समुदाय से जुड़े रीति-रिवाजों को समझा है।

देवांशी 5 भाषाओं की जानकार हैं। देवांशी के घरवाले कहते हैं कि उन्होंने हमेशा ही जैन समुदाय से जुड़े कार्य ही किए हैं। कभी भी ऐसा कोई काम नहीं किया जो जैन समुदाय में प्रतिबंधित हो। यहाँ तक कि देवांशी ने कभी भी अक्षर लिखे हुए कपड़े तक नहीं पहने हैं। इसके अलावा, देवांशी ने धार्मिक शिक्षा में आयोजित क्विज में गोल्ड मेडल हासिल किया था। वह संगीत, स्केटिंग, मेंटल मैथ्स और भरतनाट्यम में भी एक्सपर्ट हैं। देवांशी को जैन समुदाय से जुड़े वैराग्य शतक और तत्वार्थ के अध्याय जैसे महाग्रंथ कंठस्थ हैं।

देवांशी की माँ अमी बेन धनेश भाई संघवी कहतीं हैं कि उनकी बेटी जब महज 25 दिन की थी, तब से उसने नवकारसी का पच्चखाण लेना किया। देवांशी जब 4 महीने की हुई तब से ही शाम के बाद भोजन करना बंद कर दिया। जब वह 8 महीने की थी तो रोज त्रिकाल पूजन करती थी। 1 साल की हुई तब से प्रतिदिन नवकार मंत्र का जाप कर रही है। 2 साल और 1 माह की माह से गुरुओं से धार्मिक शिक्षा लेनी की शुरुआत की। देवांशी के जीवन का सबसे बड़ा बदलाव तब आया जब उसने 4 साल और 3 माह की उम्र से गुरुओं के साथ रहना शुरू किया।

बता दें कि देवांशी की दीक्षा से पहले उनके परिवार ने यूरोपीय देश बेल्जियम में भी सूरत की ही तरह जुलूस निकाला था। देवांशी का परिवार संघवी एंड संस कंपनी चलाता है। यह कंपनी हीरा का कारोबार करने वाली सबसे पुरानी कंपनियों में से एक है। संघवी एंड संस हर साल करोड़ों का कारोबार करती है। देवांशी के पिता धनेश संघवी अपने पिता मोहन संघवी के इकलौते बेटे हैं। देवांशी अपने परिवार की बड़ी बेटी हैं। उनकी छोटी बहन काव्या अभी 5 साल की है।

‘यदि हम पागल हुए तो कौन जिम्मेदार होगा’: SET Max को लिखी चिट्ठी, कहा- कितनी बार दिखाओगे सूर्यवंशम, हम हीरा ठाकुर के परिवार को जान चुके

बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) की फैमिली ड्रामा फिल्म ‘सूर्यवंशम’ (Sooryavansham) टीवी पर सबसे ज्यादा दिखाई जाने वाली फिल्मों में से एक है। सोनी टीवी के चैनल सेट मैक्स (अब सोनी मैक्स) पर इसका बार बार प्रसारण होता है। इससे परेशान एक व्यक्ति ने सेट मैक्स को पत्र लिखा है। पत्र में उसने खुद को ‘सूर्यवंशम पीड़ित’ बताया है। सोशल मीडिया पर ‘सूर्यवंशम’ पीड़ित का यह पत्र खूब वायरल हो रहा है।

पत्र में लिखा है, “आपके चैनल को ‘सूर्यवंशम’ फिल्म के प्रसारण का ठेका प्राप्त हुआ है। आपकी कृपा से हम और हमारा परिवार हीरा ठाकुर (अमिताभ बच्चन के किरदार का नाम) और उसके परिवार (राधा, गौरी व अन्य) को अच्छे से जान चुके हैं। हम लोगों को ‘सूर्यवंशम’ नामक फिल्म की एक्स्ट्रा इनिंग देख-देख कंठस्थ हो चुकी है।”

सूर्यवंशम पीड़ित ने अपनी मानसिक स्थिति का जिक्र करते हुए आगे लिखा, “मैं आपके चैनल से यह जानना चाहता हूँ कि आपका चैनल अब तक कितनी बार इस फिल्म का प्रसारण कर चुका है? भविष्य में कितनी बार और इस फिल्म का प्रसारण किया जाएगा? यदि हमारी मानसिक स्थिति पर इसका विपरीत असर (पागलपन) पड़ता है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? कृपया सूचना देने का कष्ट करें।” सूर्यवंशम पीड़ित का नाम डीके पांडेय है। उन्होंने अपने फेसबुक पर यह लेटर शेयर किया है।

सोशल मीडिया पर यह लेटर वायरल होने के बाद यूजर्स जमकर मजे ले रहे हैं। निधि तिवारी इसका स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखती हैं कि बेचारा जहर वाली खीर देख-देख के परेशान हो गया।

नीरज कुमार चतुर्वेदी लिखते हैं, “आखिरकार सूर्यवंशम फिल्म से प्रताड़ित होकर पांडेय जी ने चिट्ठी लिख ही दी। अब मत दिखाओ बे सोनी वालों।”

कुछ यूजर्स पूछ रहे हैं कि क्या ये सवाल आपका भी है?

बता दें कि ‘सूर्यवंशम’ तमिल फिल्म की हिन्दी रीमेक है। इस फिल्म को 21 मई 1999 को रिलीज किया गया था। उसी साल मैक्स चैनल को भी लॉन्च किया गया था। यानी फिल्म और चैनल दोनों एक ही साल में आए थे। चैनल ने बिग बी के डबल रोल वाली इस फिल्म के 100 साल के राइट्स खरीद रखे हैं।

यही कारण है कि यह फिल्म इस चैनल पर बार-बार दिखाई जाती है। अब सैट मैक्स चैनल सोनी मैक्स में बदल चुका है। टीवी पर ‘सूर्यवंशम’ के बार-बार टेलीकास्ट होने की वजह से इससे पहले भी इस पर कई मीम्स बन चुके हैं।

हिजाब में हो महिला पत्रकार, नहीं तो कर देंगे बैन: तालिबान का फरमान, पुतलों को भी पहना चुका है नकाब

अफगानिस्तान (Afghanistan) पर कब्जा करने के बाद तालिबान (Taliban) ने महिलाओं पर कई प्रतिबंध लगा दिए हैं। तालिबान ने अब मीडिया को चेतावनी दी है। तालिबान ने कहा है कि यदि मीडिया संस्थानों में महिला कर्मचारी हिजाब नहीं पहनतीं और पुरुषों के साथ घुलती-मिलती हैं तो मीडिया को बैन किया जाएगा। यही नहीं, अब अफगानिस्तान में महिलाओं के पुतलों का चेहरा ढँकना भी जरूरी हो गया है।

अफगान पत्रकार नातिक मलिकजादा ने एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में तालिबानी नेता ने कहा है कि उन्होंने मीडिया संस्थानों को हिजाब का पालन करने के लिए सख्त आदेश जारी किया है। मीडिया में काम करने वाली महिला कर्मचारियों को अच्छे ढंग से हिजाब बनना होगा। साथ ही, ऑफिस में काम करने वाले पुरुष कर्मचारियों के साथ महिलाएँ घुल-मिल भी नहीं सकतीं।

तालिबान ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि मीडिया इन नियमों का पालन नहीं करती है तो उस पर बैन लगाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा है कि हर चीज की एक सीमा होती है। जो चीजें खराब हैं और युवाओं को बर्बाद करने का कारण बन सकती हैं उनके बारे में चुप नहीं रहा जा सकता। इसलिए, मीडिया को खुद ही इस मामले में जरूरी फैसले लेने की जरूरत है।

पुतलों पर नकाब

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद नकाब और हिजाब वाले पुतले वहाँ की पहचान बनते जा रहे हैं। दरअसल, तालिबान ने पुतलों को लेकर फरमान जारी किया था। इस फरमान में पुतलों को हटाने या फिर उनका गला काटने की बात कही गई थी।

इसके बाद दुकानदारों ने गुजारिश करते हुए कहा था कि यदि पुतले हट जाएँगे तो उन्हें कपड़े बेचने में समस्या होगी। इसलिए अब तालिबान ने कहा है कि सभी पुतलों पर नकाब होना चाहिए। इस आदेश के बाद दुकानदारों ने पुतलों के चेहरे को प्लास्टिक या एल्युमिनियम फाइल से ढँक दिया है।

तालिबान के इस फैसले से पीड़ित दुकानदार अजीज ने कहा, “तालिबान के सदाचार मंत्रालय के एजेंट नियमित रूप से दुकानों और मॉल में गश्त करते हैं। एजेंट यह देखते हैं कि पुतलों के सिर पर नकाब है या नहीं।” उन्होंने यह भी कहा, “हर कोई जानता है कि पुतले मूर्ति नहीं हैं। यहाँ कोई भी पुतलों की पूजा करने वाला नहीं है। सभी इस्लामी देशों में कपड़े बेचने लिए पुतलों का इस्तेमाल होता है।”

प्रतिबंधों के बोझ तले दबी अफगान महिलाएँ

साल 2021 में अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने कहा था कि वह महिलाओं के अधिकारों की बात करेगा। हालाँकि, सत्ता में काबिज होने के बाद तालिबान ने महिलाओं के अधिकारों का लगातार हनन किया है।

अफगानिस्तान में महिलाओं पर लगे प्रतिबंधों की लंबी फेहरिस्त है। अफगान महिलाओं को अकेले घर से बाहर निकलने की मनाही है। साथ ही, यदि कोई महिला सार्वजनिक स्थानों पर बिना हिजाब के देखी जाती है तो उसके अभिभावक को जुर्माना और जेल की सजा होगी।

तालिबान ने हमेशा ही महिलाओं को शिक्षा से दूर रहने की वकालत की है। इसलिए, वहाँ स्कूल और यूनिवर्सिटी में महिलाओं के प्रवेश को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है। इसके अलावा, एनजीओ या किसी अन्य संस्थान में महिलाओं की नौकरी पर भी कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं।

इंडिया गेट पर ‘व्हाट्सएप्प ज्ञान’ बाँटते पकड़े गए बिहार के शिक्षा मंत्री: रामचरितमानस का किया था अपमान, इस्लाम का करते हैं गुणगान

हाल ही में बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव ने तुलसीदास कृत रामचरितमानस को घृणा फैलाने वाला ग्रन्थ करार दिया था। उन्होंने पटना में आयोजित ‘नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी’ के दीक्षांत समारोह में भाषण देते हुए ये बात कही थी, जिसके बाद उनकी आलोचना करते हुए हिन्दू संगठनों ने आपत्ति जताई थी। वहीं अब बिहार के शिक्षा मंत्री, जो कि प्रोफेसर भी हैं, उनका दिल्ली स्थित इंडिया गेट को लेकर गलत दावा वायरल हो रहा है।

RJD नेता ने 20 अप्रैल, 2020 को ट्विटर पर इंडिया गेट की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था, “संघियों एवं मनुवादियों के देश में योगदान की क्रोनोलॉजी – इंडिया गेट, दिल्ली के शिलापट्ट पर फिरंगियों के खिलाफ जंग में आहूति देने वाले 95,395 अमर बलिदानियों में 61395 मुस्लिम, 8050 सिख, 14480 पिछड़े, 10777 दलित, 598 सवर्ण, 00 (शून्य) संघी। मनुवादी संघियो को ढूँढें।” उन्होंने जो तस्वीर शेयर की, उस पर भी ये आँकड़े लिखे थे।

साथ ही तस्वीर में ये भी दावा किया गया था कि इंडिया गेट पर स्वतंत्रता सेनानियों के नाम लिखे हैं। इस तस्वीर को देखने से ही ऐसा लग रहा है कि किसी ने उन्हें व्हाट्सएप्प पर भेजा था और उन्होंने उसे वैसे ही उठा कर शेयर कर दिया। रामचरितमानस को घृणा फैलाने वाला ग्रन्थ बताने वाले चंद्रशेखर यादव इस्लाम को प्यार का सन्देश देने वाला मजहब बताते रहे हैं, ऐसे में उनकी हिन्दू विरोधी मानसिकता को लेकर कोई शक तो नहीं ही है।

बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव द्वारा किया गया ट्वीट

अब हम आपको बताते हैं कि सच्चाई क्या है। असल में इसमें स्वतंत्रता सेनानियों के नाम लिखे ही नहीं है। इस पर प्रथम विश्व युद्ध (1914-18) और तीसरे एंग्लो-अफगान युद्ध (1919) में मृत ‘ब्रिटिश इंडिया आर्मी’ के सैनिकों के नाम लिखे हैं। ये एक वॉर मेमोरियल है, जिस पर 13,000 से भी अधिक सैनिकों के नाम लिखे हैं। ये ‘ब्रिटिश इंडियन आर्मी’ के उन सभी 70,000 सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करता है, जो इन युद्धों में मारे गए थे।

दिसंबर 1917 में गठित ‘इम्पीरियल वॉर ग्रेव्स कमीशन’ के अंतर्गत इसे बनाया गया था। 10 फरवरी, 1921 को इसका शिलान्यास हुआ था और 2 फरवरी, 1931 को इसका उद्घाटन किया गया था। जबकि भारत 1947 में आज़ाद हुआ। आज़ादी से 16 वर्ष पहले ही बन कर तैयार हुए इस स्मारक में स्वतंत्रता सेनानियों के नाम हैं ही नहीं। इसीलिए, इस पर 61,000 मुस्लिम सैनिकों के नाम होने की बात झूठी है। कई बार ये दावा शेयर होता रहा है।

पुलिस की 17 साल की नौकरी में 24 रेप, 12 महिलाओं को बनाया सेक्स स्लेव: पीड़िताओं पर करता था पेशाब, नंगा कर घर साफ करवाता

इंग्लैंड की राजधानी लंदन (London, England) में ब्रिटिश पुलिस डिपार्टमेंट ने डेविड कैरिक नाम के अपने अधिकारी को बर्खास्त कर दिया है। डेविड पर 12 महिलाओं के साथ रेप का दोष सिद्ध हुआ है। बर्खास्त पुलिस अधिकारी पर साल 2003 से 2023 के बीच बलात्कार के 24 मामलों सहित कुल 49 केस दर्ज हुए थे। अब डेविड को ब्रिटेन के सबसे बड़े सेक्स अपराधियों में गिना जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बर्खास्त 48 वर्षीय पुलिस अधिकारी डेविड कैरिक लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस में साल 2001 से तैनात हुआ था। साल 2009 से वह संसदीय और राजनीतिक सुरक्षा कमान में काम कर रहा था। पुलिस में आने से पहले डेविड ब्रिटिश फ़ौज में पोस्टेड था। रेप के आरोपों के बाद साल 2021 में डेविड को गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद से वह जेल में है। उसे पुलिस फोर्स से टर्मिनेट कर दिया गया है।

डेविड का सबसे पहले भंडाफोड़ उसकी गर्लफ्रेंड ने किया था। अदालत में डेविड ने कुल 49 यौन अपराध कबूल किए। इनमें से 24 अपराध रेप के हैं। हालाँकि, अलग-अलग रिपोर्ट में डेविड द्वारा कबूल किए गए गुनाहों की संख्या अलग-अलग हैं। कुछ जगहों पर उसके द्वारा किए गए यौन अपराधों की संख्या 80 से भी अधिक बताई जा रही है। इस खुलासे के बाद ब्रिटिश पुलिस सवालों के घेरे में आ गई है।

डेविड महिलाओं को सोशल डेटिंग ऐप के साथ-साथ सोशल गेदरिंग में फँसाता था। वह महिलाओं को लुभाने के लिए अपने पद का इस्तेमाल करता था। जब महिलाओं उसके जाल में फँस जाती थीं तो वह उन्हें सेक्सुअली प्रताड़ित करता था। इतना ही नहीं, उन्हें चुप कराने के लिए भी वह अपने पद का डर दिखाता था। डेविड पीड़िताओं को यह कह चुप करा देता था कि वह एक पुलिसकर्मी है और पीड़िताओं की बातों पर कोई विश्वास नहीं करेगा।

डेविड महिलाओं को ‘सेक्स स्लेव’ (यौन गुलाम) की तरह ट्रीट करता था। वह महिलाओं को अपमानित करता था और उन्हें गुलाम कहता था। डेविड ने कुछ पीड़ितों को सीढ़ियों के नीचे एक छोटी अलमारी में 10 घंटे तक बिना खाना दिए रखा। वहीं, कुछ महिलाओं को उसने बेल्ट से पीटा और उसके घर को नंगा होकर साफ करने को मजबूर किया।

डेविड पर कई तरह आपराधिक मामले होने के बाद भी उसे एलिट आर्म्ड यूनिट और संसदीय एवं कूटनीतिक आर्म्ड कमांड ने तैनात किया गया। पिछले साल दिसंबर में उसकी शुरुआती दोष सिद्ध होने के बाद कोर्ट ने डेविड का वेतन रोकने का आदेश दिया था। अब उसे बर्खास्त कर दिया गया है।

इंग्लैंड के महिला संगठनों ने दोषी डेविड कैरिक के साथियों और सीनियरों पर सब कुछ जानते हुए उसे बचाने का आरोप लगाया है। महिला संगठनों ने पुलिस को ‘संकट संस्थान’ कहा है। मामलों के उजागर होने पर अब ब्रिटेन का पुलिस बल अन्य यौन अपराधों की गंभीरता से जाँच कर रहा है।

बताया जा रहा है कि 1000 शिकायतों में लगभग 800 अधिकारी आरोपित हैं, जिन पर जल्द ही फैसला लिया जाएगा। डेविड कैरिक की करतूत पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने भी दुःख जताया है। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति को पुलिस में होना ही नहीं चाहिए था।

प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने स्वीकार किया है कि डेविड की हरकत से आम लोगों का पुलिस में विश्वास कम हो गया है। लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस के कमिश्नर मार्क राउली ने भी डेविड की करतूत उजागर होने के बाद आम लोगों से माफी माँगी है।

नेपाल से सरकारी खर्च पर आएगा UP के 4 युवकों का पार्थिव शरीर, CM योगी ने परिजनों को ₹5 लाख देने का किया ऐलान: विमान हादसे में हुई थी मौत

नेपाल विमान हादसे में उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में रहने वाले 4 युवकों की मौत हो गई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे का शिकार हुए युवकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता का ऐलान किया।

मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने के संबंध में जारी बयान में कहा गया है, “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महाराज ने नेपाल में हुई विमान दुर्घटना में जनपद गाजीपुर के सभी दिवंगतों के आश्रितों को 5-5 लाख रुपए की सहायता राशि प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। महाराज जी ने कहा है कि सभी पार्थिव शरीरों को आश्रितों के घर तक पहुँचाने का खर्च भी उत्तर प्रदेश सरकार स्वयं वहन करेगी।”

दरअसल, रविवार (15 जनवरी, 2023) को नेपाल के पोखरा में यात्री विमान क्रैश हो गया था। इस विमान में सवार सभी 72 लोगों की मौत हो गई। इसमें गाजीपुर के अलावपुर सिपाह और धरवा गाँव के रहने वाले 4 युवकों की मौत हो गई थी। मृतकों की पहचान अभिषेक कुशवाहा, सोनू जायसवाल, विशाल शर्मा और अनिल कुमार राजभर के रूप में हुई।

बता दें कि मृतकों के शव लेने के लिए प्रशासन ने सोमवार (16 जनवरी, 2023) को परिजनों को सड़क मार्ग से रवाना किया था। इस संबंध में जानकारी देते हुए गाजीपुर की जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने कहा था कि नेपाल विमान दुर्घटना का शिकार हुए 4 युवकों के परिजनों और ग्राम प्रधान को प्रशासन ने सड़क मार्ग से नेपाल भेजा है। आवश्यक कार्रवाई के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएँगे। शवों को सड़क मार्ग से जिले में लाया जाएगा। इसमें 2-3 दिन का समय लग सकता है।

उन्होंने यह भी कहा है कि भारत-नेपाल सीमा पर परमिट के लिए पीड़ित परिवारों के साथ जिला प्रशासन के दो अधिकारियों को भी भेजा गया है। नेपाल में स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारी भी इसमें सहयोग कर रहे हैं। मृतकों के शवों को काठमांडू ले जाया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर उनकी पहचान के लिए डीएनए टेस्ट भी होगा। मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष व अन्य सरकारी योजनाओं के अंतर्गत उचित सहायता दी जाएगी।