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‘हमारे आका पर हाथ डाला तो शहर का शहर कर्बला बना देंगे’: जदयू नेता गुलाम रसूल बलियावी का भड़काऊ बयान, नूपुर शर्मा को कहा ‘पागल औरत’

जदयू नेता गुलाम रसूल बलियावी के भड़काऊ बयान दिया है। राज्य सभा और विधान परिषद के सदस्य रह चुके गुलाम रसूल बलियावी ने झारखंड के हजारीबाग में गुरुवार (18 जनवरी, 2023) को मजहब के नाम पर भड़काऊ बातें की। उन्होंने भाजपा की प्रवक्ता रहीं (अब पार्टी से निलंबित) नूपुर शर्मा पर निशाना साधते हुए ये बातें कही। नूपुर शर्मा के बयान के नाम पर पहले ही राजस्थान के उदयपुर से लेकर महाराष्ट्र के अमरावती तक इस्लामी कट्टरपंथियों ने हत्याएँ की थीं।

जदयू नेता ने कहा , “मेरे आका की इज्जत पर हाथ डालोगे तो अभी तो हम कर्बला मैदान में इकट्ठा हुए हैं, उनकी इज्जत के लिए हम शहरों को भी कर्बला बना देंगे। खुद को सेक्युलर बताने वाली राजनीतिक पार्टियों ने भी नूपुर शर्मा की गिरफ़्तारी की माँग नहीं की। कोई रियायत नहीं होगी, क्योंकि मेरी ज़िन्दगी मेरी नहीं है और मेरी साँसें भी मेरी नहीं हैं। जीने की तमन्ना वो करे, जिसके पास रसूल का नूर न हो। हम तो इसी आरजू-तमन्ना से जीते आए हैं कि मरने के बाद एक ऐसा दिन तो आएगा, जब कोई नहीं रहेगा।”

गुलाम रसूल बलियावी ने ये भी कहा कि किसी भी ‘तथाकथित धर्मनिरपेक्ष’ पार्टियों के नेताओं ने नूपुर शर्मा की गिरफ़्तारी की माँग नहीं की। इतना ही नहीं, उन्होंने नूपुर शर्मा को ‘पागल औरत’ करार देते हुए कहा कि उनकी गिरफ़्तारी के लिए किसी ने आवाज़ नहीं उठाई। उन्होंने मुस्लिमों को भड़काते हुए पूरे राँची को जाम करने को कहा। उन्होंने कहा कि तुमलोग हमेशा गैरों का झंडा लेकर निकलते हो, हुक्मरानों को बताना पड़ेगा कि हम राख के नीचे दबे ज़रूर हैं, पर बुझे नहीं हैं।

उन्होंने किसी 17 एजेंडे की बात करते हुए कहा कि मुस्लिम दिल से इन मुद्दों पर साथ दें। उन्होंने ‘नामूस-ए-रिसालत’ की बात करते हुए कहा कि दलितों की तरह मुस्लिमों के लिए भी ‘सेफ्टी एक्ट’ बनाया जाना चाहिए। उन्होंने दहेज़ को खत्म करते हुए मुस्लिमों के बच्चों को रोजगार दिए जाने और मुस्लिमों को सत्ता में हिस्सेदारी दिए जाने की भी माँग की। जदयू नेता ने कहा कि जब कोई नहीं रहेगा, तब भी मेरा रसूल था और हमेशा रहेगा।

‘वो भोंक रहे हैं, सामने आएँगे तो गीले हो जाएँगे’: अंधविश्वास के आरोपों पर बोले बागेश्वर धाम के महंत – घर वापसी कराता हूँ, इसीलिए हो रही साजिश

बागेश्वर धाम और वहाँ के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने कथित चमत्कारों के लिए विवादों में हैं। उन पर समाज में अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगा है। धीरेंद्र शास्त्री ने इन अंधविश्वास फैलाने के आरोपों को साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा है कि वह हिंदुओं की घर वापसी करवा रहे हैं। इसलिए कुछ लोगों को समस्या हो रही है।

धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने कहा है, “धर्म विरोधी लोग ये सब कर रहे हैं। ये वही लोग हैं, जिन्होंने भगवान राम के होने और अयोध्या का सबूत माँगा था। हर बार सनातनी साधुओं को ही टारगेट किया जा रहा है। हमने जबसे लोगों की घर वापसी करवाई है, तब से इन लोगों को समस्या हो रही है। हमने छतारी की कथा में ऐलान किया था कि हमारे खिलाफ साजिशें होंगीं। लेकिन, हमें इनसे डर नहीं है। वो अपनी जगह बोलते ही रहते हैं। वो अपनी जगह भोंक रहे हैं। सामने आएँगे तो गीले हो जाएँगे।”

उन्होंने यह भी कहा है, “सनातन के लिए सनातनी जाग रहे हैं। इसका प्रमाण यही है कि धर्म विरोधी मुँह चला रहे हैं। हमने इन सब पर बात करना बंद कर दिया है। उन्हें साफ कह दिया है कि यदि आपको हमारे दरबार से दिक्कत है तो आकर देखिए और समझिए। आपकी चुनौती हमें कानूनी रूप से नहीं मिली है।”

उन्होंने महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के राष्ट्रीय संयोजक श्याम मानव की चुनौती पर सवाल उठाते हुए कहा, “जब हम वहाँ (नागपुर) में 7 दिन थे, तब चुनौती क्यों नहीं दी? उन्होंने व्यक्ति क्यों नहीं भेजा? उन्होंने लेटर क्यों नहीं भेजा?”

उन्होंने श्याम मानव को जवाब देते हुए कहा, “यहाँ (रायपुर) भी आना तो बताकर आना। ऐसा न हो कि यहाँ आकर भाग जाओ फिर कहो कि हमसे मिले नहीं। जब मिलने आओ तो हमारे नीतेंद्र चौबे या केशव मेहता जी, इन लोगों को बता देना कि हम फलां जगह से आए हैं। इसके बाद हम ठठरी बाँध देंगे।”

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने आगे कहा है, “हमारे पास किसी प्रकार की सिद्धि नहीं है, लेकिन जो दरबार है उसमें किंचित मात्र भी संदेह नहीं है। वो और उनके जैसे लोग आएँ और दरबार में बैठें। हमें जो प्रेरणा मिलेगी हम बेझिझक बताएँगे, क्योंकि न तो हम कमरे में मिलते हैं और न हम अंधविश्वास फैला रहे हैं। हम तो सिर्फ हनुमान जी से जोड़ रहे हैं। संविधान के अनुच्छेद 25 के अंतर्गत अपने धर्म का प्रचार करने का अधिकार है। हमारे पूर्वजों ने संविधान स्वीकार किया है।”

सुदर्शन न्यूज से बात करते हुए उन्होंने कहा, “इन लोगों ने भगवान राम को नहीं छोड़ा, फिर हम तो आम हैं। ये हमें कब छोड़ेंगे। हमें इनसे डिगना या डरना नहीं है। हम सभी ये प्रार्थना करेंगे कि इन लोगों की कोई भी बात सुनने से पहले एक बार हमारा तथ्य जरूर जान लेना। तब इनको मानना, क्योंकि ये सोची समझी साजिश है।”

उन्होंने आगे कहा, “हम घर वापसी करवा रहे हैं। वो लोग धर्मांतरण पर करोड़ों खर्च कर रहे हैं। फिर हम पर 10 करोड़ खर्च करने में क्या बुराई है।” कहा जाता है कि क्रिसमस के दिन अपने पैतृक गाँव में स्थित बागेश्वर धाम में धीरेंद्र शास्त्री ने 300 लोगों की घर वापसी करवाई थी।

उन्होंने आगे कहा है, “लोगों से हम यही कहना चाहते हैं कि हम वचन देते हैं कि ऐसा कोई कृत्य नहीं करेंगे जिससे हिंदुओं की नाक और साख को नुकसान हो। चाहे हमें उसके लिए प्राणों की आहुति देना पड़े।” उन्होंने कहा कि यदि अपने धर्म का प्रचार करने पर एफआईआर दर्ज होती है तो देश के सभी हनुमान भक्तों पर एफआईआर होनी चाहिए।

धीरेंद्र शास्त्री ने सवाल उठाते हुए यह भी कहा है, “भारत में चादर चढ़ाना श्रद्धा है, लेकिन हनुमान जी की भक्ति बताना अंधविश्वास है। भारत में कैंडल जलाना श्रद्धा है, लेकिन कलावा बाँधना और हनुमान चालीसा का उपाय बताना या सनातन की बात करना अंधविश्वास है। ये दोगलापन लाते कहाँ से हैं भारत में?”

उन्होंने आगे कहा है कि जिन लोगों को भी समस्या है वह रायपुर में 20 और 21 फरवरी 2023 को दिव्य दरबार लग रहा है, वहाँ पहुँच सकते हैं। वे उनके आने-जाने का किराया और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी लेते हैं कि उनकी पुजाई (मारपीट) नहीं होगी।

दरअसल, बागेश्वरधाम के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा नागपुर में 5 जनवरी से 11 जनवरी तक तक रामकथा के लिए पहुँचे थे। पहले यह कथा 13 फरवरी तक होनी थी। हालाँकि, किन्हीं कारणों से यह कथा 2 दिन पहले ही समाप्त हो गई थी।

इस कथा के समापन के बाद महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के राष्ट्रीय संयोजक श्याम मानव ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया था। साथ ही, कहा था कि उन्होंने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को चुनौती थी। इसलिए वे दो दिन पहले ही नागपुर से भाग गए।

श्याम मानव ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर दरबार के दौरान चमत्कार दिखाने पर 30 लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा की थी। बाद में उन्होंने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई है।

(फोटो साभार: बागेश्वरधाम का इंस्टाग्राम अकाउंट)

‘केंद्र सरकार से शिकायत नहीं, वो करती है हमारा सपोर्ट’: खेल मंत्रालय के साथ पहलवानों की बैठक बेनतीजा, कहा – जब तक नहीं हटेंगे WFI अध्यक्ष, जारी रहेगा धरना

दिल्ली के जंतर मंतर पर धरने पर बैठे पहलवानों के डेलीगेशन ने खेल मंत्रालय में बातचीत के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। पहलवान विनेश फोगाट ने मीडिया से कहा कि हमें संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया है। बजरंग पुनिया ने कहा है कि हम सरकार से सकारात्मक आश्वासन का इंतजार कर रहे हैं। जब तक संतोषजनक आश्वासन नहीं दिया जाता हमारा धरना जारी रहेगा। बजरंग पुनिया ने कहा कि हमारी लड़ाई फेडरेशन के खिलाफ है, राज्य या केंद्र की सरकार से नहीं।

देश के कई बड़े पहलवान भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष के खिलाफ धरना दे रहे हैं। विनेश फोगाट ने कुश्ती संघ के अध्यक्ष और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण पर यौन शोषण का आरोप लगाया गया है। महिला खिलाड़ियों और महिला कोचों के साथ बदसलूकी और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया जा रहा है।

मीडिया से बात करते हुए विश्व चैंपियन पहलवान विनेश फोगाट ने कहा कि खेल मंत्रालय के साथ बातचीत में हमें संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि हम सरकार के जवाब का इंतजार कर रहे हैं और जब तक माँगे पूरी नहीं होती धरना जारी रहेगा। विनेश फोगाट ने कहा कि हमारे पास लगाए गए आरोपों के सबूत हैं। विनेश ने आगे कहा कि फेडरेशन के अध्यक्ष ने गलत किया है। यदि उनपर कार्रवाई नहीं हुई तो हमें मजबूरन एफआईआर करवानी पड़ेगी।

विनेश ने कहा कि यौन शोषण के कारण यूपी की कुश्ती खत्म हुई है। पहलवान साक्षी मलिक ने कहा कि शोषित लड़कियों के फोन आ रहे हैं। हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मामले में दखल देकर न्याय की अपील करते हैं।

पहलवान बजरंग पुनिया ने कहा कि हमारी लड़ाई फेडरेशन से है और हम इसे भंग करना चाहते हैं। बजरंग ने कहा कि राज्यों के कुश्ती संघ में भी उन्हीं के लोग बैठे हैं, हम चाहते हैं फेडरेशन भंग कर के नए सिरे से इसे बनाया जाए। बजरंग ने कहा कि खेल मंत्रालय के साथ बैठक में दिए गए आश्वासन से हम खुश नहीं हैं। इस दौरान उन्होंने साफ किया कि हमें हरियाणा की सरकार और देश की सरकार से कोई शिकायत नहीं है। सरकार हमें सपोर्ट करती है।

उन्होंने कहा कि हमारी लड़ाई सरकार से नहीं व्यक्ति विशेष है। हम तब तक धरने पर बैठे रहेंगे, जब तक फेडरेशन के अध्यक्ष को हटा कर इसे भंग करने की घोषणा नहीं कर दी जाती। बजरंग ने कहा कि अब तक 6 लड़कियों ने अपने साथ गलत होने का दावा किया है।

आपको बता दें कि बृजभूषण सिंह ने पहलवानों पर ही मनमानी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “ये चाहते हैं कि हम ओलंपिक विजेता हैं, हमारा ट्रायल ना कराया जाए और ट्रायल कराया भी जाए तो पहले नेशनल के विजेता का ट्रायल हो, फिर जो जीत कर आए उनके साथ फाइनल इनका कराया जाए। इससे इन्हें दिक्कत हो रही है। वहीं गुस्सा इनका आज फूटा है।”

बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, “जहाँ तक इन खिलाड़ियों का सवाल हैं ये ओलंपिक पदक विजेता हैं। उसमें हमारा भी सहयोग है। ओलंपिक के बाद इन्होंने एक भी राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया और सब सरकार की स्कीमों का फायदा ले रहे हैं। जब राष्ट्रीय प्रतियोगिता की बात आती है तो इनकी तबीयत खराब हो जाती है। अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में इनकी तबीयत ठीक हो जाती है। अभी फेडरेशन ने निर्णय लिया कि कोई भी विजेता हो उसे नेशनल खेलना होगा, अगर वे बीमार है तो उसका मेडिकल दे।”

Free the Nipple… फेसबुक और इंस्टाग्राम पर न्यूड सेल्फी भी डाल सकेंगे कुछ लोग, दशकों पुराना प्रतिबंध हटाने जा रहा है मेटा

फेसबुक (Facebook) की पैरेंट कंपनी मेटा (Meta) जल्द ही कुछ लोगों को फेसबुक और इंस्टाग्राम (Instagram) पर नग्न शरीर वाली तस्वीरों को पोस्ट करने की अनुमति देगा। फेसबुक ऐसी तस्वीरों पर प्रतिबंध लगाने के लगभग 10 साल बाद अपने नियमों में बदलाव करने का फैसला लिया है।

दरअसल, एक दशक पहले फेसबुक ने नंगी तस्वीरों, खासकर महिलाओं की नग्न स्तन वाली तस्वीरों को प्रतिबंधित कर दिया था। इन प्रतिबंधों का स्तनपान कराने वाली महिलाओं ने विरोध किया था। उन्होंने कहा कि फेसबुक उनके साथ पोर्नोग्राफर की तरह व्यवहार कर रहा है।

इन महिलाओं ने 2008 में फेसबुक मुख्यालय के बाहर प्रतिबंध के विरोध में प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनों करने वालों में ‘फ्री निप्पल मूवमेंट’ (Free Nipple Movement) की महिलाएंँ शामिल थीं।

‘फ्री द निप्पल’ नाम से कई महिलाओं ने ग्लोबल मूवमेंट चलाया है। इस मूवमेंट की महिलाओं की माँग है कि उन्हें भी पुरुषों की तरह टॉपलेस घूमने का अधिकार दिया जाए। इन महिलाओं की माँग पर अमेरिका के छह राज्यों ने सितंबर 2019 में टॉपलेस घुमने की अनुमति दे दी थी।

फेसबुक पर इन्हीं महिलाओं की माँग को देखते हुए ओवरसाइट बोर्ड ने मेटा को सलाह दी कि वह महिलाओं और ट्रांसजेंडर को नंगी छाती वाली तस्वीरों पर प्रतिबंध लगाने के अपने फैसले पर फिर से विचार करे। ओवरसाइट बोर्ड में शिक्षाविद, नेता और पत्रकार शामिल होते हैं, जो कंपनी को उसकी सामग्री-मॉडरेशन नीतियों पर सलाह देते हैं।

दरअसल, एक ट्रांसजेंडर और गैर-बाइनरी जोड़े ने मेटा के आदेश को लेकर बोर्ड से संपर्क किया था। इस जोड़े ने आरोप लगाया कि उन्होंने 2021 और 2022 में इंस्टाग्राम पर दो अलग-अलग कंटेंट पोस्ट की थी। पोस्ट की तस्वीरों में कैप्शन में स्वास्थ्य देखभाल के बारे में बात किया गया था।

हालाँकि, मेटा ने दोनों पोस्ट को सेक्सुअल सॉलिसिटेशन कम्युनिटी स्टैंडर्ड का उल्लंघन करने के आरोप में हटा दिया। बोर्ड ने अपने निष्कर्षों में कहा कि इन पोस्ट को हटाना मेटा के सामुदायिक मानकों, मूल्यों या मानवाधिकारों की जिम्मेदारियों के अनुरूप नहीं है। ये मामले मेटा की नीतियों के मूलभूत मुद्दों को भी उजागर करते हैं।

दिल्ली में दीवारों पर लिख दिए ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे, पुलिस ने हटवाए: पश्चिम विहार की घटना

गणतंत्र दिवस से ठीक पहले दिल्ली (Delhi) के पश्चिम विहार इलाके में एक दीवार पर ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ और ‘रेफरेंडम 2020’ के नारे लिखने का मामला सामने आया है। गुरुवार (19 जनवरी 2023) को इसकी सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुँची पुलिस ने दीवार पर लिखे नारों को हटवा दिया।

दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की पीआरओ सुमन नलवा ने समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) को बताया कि दिल्ली के कुछ स्थानों पर देश विरोधी नारे लिखे गए थे। मामले में जाँच की जा रही है और इसे लिखने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला सुरक्षा-व्यवस्था से संबंधित नहीं है।

उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली पुलिस का हर सेक्शन यह सुनिश्चित कर रहा है कि गणतंत्र दिवस से पहले कोई गलत गतिविधि न हो। इससे हमारी सुरक्षा प्रभावित नहीं होती है। सिख फॉर जस्टिस (SFJ) एक प्रतिबंधित संगठन है, इसलिए यह खुद को चर्चा में लाने की कोशिश कर रहा है। वह खबरों में बना रहना चाहता है।

हाल ही में दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की स्पेशल सेल ने भलस्वा डेयरी से आतंकी जगजीत उर्फ याकूब और नौशाद को गिरफ्तार किया था। रिपोर्ट्स में बताया गया था कि दोनों पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के K2 (कश्मीर-खालिस्तान) डेस्क के ऑर्डर पर काम कर रहे थे। इनके निशाने पर हिंदुवादी नेता थे। इन्होंने दिल्ली में एक हिंदू के टुकड़े-टुकड़े कर वीडियो बनाए थे। यह वीडियो पाकिस्तान में अपने आकाओं को भेजे भी थे। दोनों आतंकियों को पंजाब में 4 हिंदुवादी नेताओं को खत्म करने का टारगेट दिया गया था। इनमें दो नेता शिवसेना के थे।

दोनों आतंकियों की गिरफ्तारी 12 जनवरी 2023 को हुई थी। 56 साल का नौशाद पाकिस्तानी आतंकी समूह हरकत-उल-अंसार से जुड़ा बताया गया था। वह हत्या के 2 मामलों में उम्रकैद और विस्फोटक अधिनियम के एक केस में 10 साल की सजा भी काट चुका है। वहीं, जगजीत सिंह के देविंदर बंबीहा गिरोह समूह से जुड़े होने के बारे में खबर आई थी। 29 साल के जगजीत के खालिस्तानी आतंकी अर्शदीप से भी संबंधों का शक जताया गया था।

न्यूजीलैंड की जिस PM का कायल रवीश-राठी समेत लिबरल गिरोह, वो नहीं सँभाल पाई सरकार: देना पड़ा इस्तीफा, जनता में लोकप्रियता भी गिरी

न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डर्न ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया। उन्होंने कहा है कि वह आगामी 7 फरवरी से पहले इस्तीफा दे देंगी। साथ ही, उन्होंने चुनाव लड़ने से भी इनकार किया है। अपने इस्तीफे का ऐलान करते हुए जैसिंडा अर्डर्न ने कहा है कि वह इसलिए इस्तीफा नहीं दे रही हैं कि उन्हें हारने का डर है। बल्कि, उन्हें अब भी विश्वास है कि आगामी चुनाव में उनकी ही पार्टी जीतेगी। हालाँकि, उन्होंने सांसद पद से इस्तीफा देने से इनकार किया।
 
अर्डर्न ने कहा है कि उनके इस्तीफे के पीछे कोई रहस्य नहीं है। बल्कि, वह साफ तौर पर कहना चाहती हैं कि वह भी इंसान हैं। वह जितना अच्छा कर सकतीं थीं, उतना करने का प्रयास किया है। लेकिन, अब यह समय उनके लिए फैसला लेने का है। उन्होंने कहा है, “मैं अब जा रही हूँ। क्योंकि इस तरह के पद के साथ ही बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है। इसके साथ ही यह भी जिम्मेदारी आती है कि आप ये भी तय करें कि आप लीडरशिप करने के लिए कब फिट हैं और कब नहीं?”

अर्डर्न ने आगे कहा है, “पिछले साढ़े पाँच साल मेरी जीवन के लिए सबसे संतोषजनक रहे हैं। लेकिन, इस दौरान चुनौतियों का भी सामना किया। आवास, बाल गरीबी और जलवायु परिवर्तन पर केंद्रित एजेंडे के बीच, हमें आतंकी घटनाओं, एक बड़ी प्राकृतिक आपदा (ज्वालामुखी), एक वैश्विक महामारी (कोरोना) और एक आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा।”

न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री ने यह भी कहा है कि साल 2022 के अंत में उन्होंने अपने भविष्य को लेकर विचार किया। उन्हें उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री पद पर बने रहने के लिए दिल और ऊर्जा दोनों मिल जाएँगे। लेकिन, अब उन्हें लगता है कि यदि वह इस पद पर बनी रहेंगी तो न्यूजीलैंड को नुकसान होगा। बता दें कि अर्डर्न साल 2017 में 37 साल की उम्र में न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री बनीं थीं। वह दुनिया की सबसे युवा प्रधानमंत्री थीं।

उनके द्वारा लिए गए कई फैसलों की चर्चा न केवल न्यूजीलैंड बल्कि भारत के लिबरल गिरोह में भी हुई। हालाँकि, किसी भी देश के मुखिया द्वारा किए गए कामों की सच्चाई वहाँ की जनता ही जानती है। भारत से काफी कम जनसंख्या वाले न्यूजीलैंड से तुलना कर-कर के वामपंथी गिरोह ने अपने ही देश को नीचा दिखाना शुरू कर दिया था।

दरअसल, यह इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि न्यूजीलैंड में इसी साल अक्टूबर में चुनाव होने हैं। इन चुनावों से पहले सामने आए सर्वे में अर्डर्न पिछड़ती हुई दिख रहीं हैं। सर्वे के अनुसार, न्यूजीलैंड में उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता न्यूनतम स्तर पर पहुँच गई है। पार्टी में भी अब उनके लिए पहले जैसा माहौल नहीं है। ऐसा माना जा रहा है कि इन सब चीजों को देखते हुए ही उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस कंट्रोल करने को लेकर भारतीय वामपंथी जैसिंडा अर्डर्न का गुणगान करते फिर रहे थे। चाहे वह यूट्यूब पत्रकार बन चुके रवीश कुमार हों या फिर वामपंथियों की सड़ी हुई मानसिकता का ढिंढोरा पीटने वाले ध्रुव राठी।

हालाँकि, जब न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था डगमगा रही और लोग न्यूजीलैंड छोड़कर दूसरे देशों में बस रहे हैं, तब इन लोगों ने कुछ भी नहीं कहा। और अब, अर्डर्न के इस्तीफे के ऐलान के बाद भी लिबरल गैंग खामोश बैठी हुई है।

DCW अध्यक्ष स्वाति मालीवाल को 15 मीटर तक घसीटा: नशे में धुत था कार चालक, AIIMS के बाहर हुई छेड़छाड़ की घटना

महिलाओं को न्याय दिलाने वाली संस्था दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल भी राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षित नहीं हैं। उन्हें भी छेड़छाड़ का शिकार होना पड़ा। दरअसल मालीवाल निरीक्षण के लिए गई थीं। उसी वक्त एक नशेड़ी ने उनके साथ छेड़छाड़ को अंजाम दिया।

स्वाति मालीवाल ने अपने साथ घटी इस दुर्घटना को ट्विटर पर शेयर किया है। उन्होंने लिखा, “कल देर रात मैं दिल्ली में महिला सुरक्षा के हालात Inspect कर रही थी। एक गाड़ी वाले ने नशे की हालत में मुझसे छेड़छाड़ की।”

उन्होंने आगे लिखा, “जब मैंने उसे पकड़ा तो गाड़ी के शीशे में मेरा हाथ बंद कर मुझे घसीटा। भगवान ने जान बचाई। यदि दिल्ली में महिला आयोग की अध्यक्ष सुरक्षित नहीं, तो हाल सोच लीजिए।” हालाँकि, आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है।

मामला गुरुवार (19 जनवरी 2023) के तड़के 3 बजे की। स्वाति मालीवाल AIIMS के गेट नंबर-2 के पास इंस्पेक्शन कर रही थीं। इसी दौरान शराब के नशे में धुत 47 वर्षीय एक व्यक्ति ने उनके साथ छेड़छाड़ की। जब उन्होंने पकड़ने की कोशिश की तो आरोपित ने शीशे को बंद कर उनके हाथ को फँसा दिया और 15 मीटर तक घसीटता रहा।

DCP चंदन सिंह ने बताया कि हौज़ खास थाने से एक कॉल आया था कि एक महिला को एक कार वाले ने गलत इशारे किए और 10-15 मीटर तक घसीटा। इस दौरान पुलिस ने बताया कि जिस महिला के साथ बदसलूकी हुई है, वह दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल है। आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसकी पहचान हरीश चंद्र के रूप में हुई है।

नीतीश कुमार के काफिले के लिए 15 मिनट तक रोकी गईं 2 ट्रेनें, पूछने पर बिहार CM ने दोहराया अपना वही डायलॉग – ‘हमको नहीं पता’

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बक्सर दौरे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। खबर है कि बक्सर में नीतीश के काफिले के गुजरने के लिए एक रेलवे क्रॉसिंग के पास 2 ट्रेनों को रोक दिया गया। इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने ट्रेनें रोके जाने को लेकर उच्च स्तरीय जाँच की बात कही है। वहीं जब सीएम नीतीश कुमार से पत्रकारों ने रेल रोके जाने को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक सीएम नीतीश कुमार बुधवार (18 जनवरी, 2023) को समाधान यात्रा के तहत बक्सर पहुँचे थे। इस दौरान उनका काफिला पुलिस लाइन से निकल कर जिला अतिथि गृह (District Guest House) की तरफ जा रहा था। इस बीच इटाढ़ी रेलवे कॉसिंग के पास पटना-बक्सर पैसेंजर ट्रेन और कामाख्या दिल्ली एक्सप्रेस को रोक दिया गया। सीएम के काफिले के गुजरने के बाद ट्रेनों को रवाना किया गया। दावा है कि सीएम के काफिले के कारण ट्रोनों को 15 मिनट तक रोककर रखा गया।

बक्सर से सांसद एवं केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने मामले को लेकर सीएम नीतीश कुमार को घेरा है। उन्होंने मामले की जाँच करवाने की बात कही है। अश्विनी चौबे ने कहा कि बक्सर में समाधान करने आए नीतीश ने व्यवधान उत्पन्न कर दिया। अश्विनी चौबे ने पूछा कि किसके आदेश पर ट्रेनों को रोका गया? केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ट्रेन रोके जाने से बच्चे-बूढ़े सभी लोग परेशान हो रहे थे। उन्होंने केंद्रीय रेल मंत्री से मामले की जाँच कराने की अपील की।

ट्रेन रोके जाने से यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रेन में सवार कुछ लोग तो पैदल ही स्टेशन की तरफ जाने लगे। एक यात्री ने स्थानीय पत्रकार को बताया कि गाड़ी रोक दिए जाने की वजह से पैदल चलना पड़ रहा है। हमें दिलदार नगर जाना है। आगे जाकर दूसरी गाड़ी पकड़ेंगे।

सीएम नीतीश कुमार ने ट्रेन रोके जाने की घटना से इनकार कर दिया है। पत्रकारों द्वारा पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा, “कहाँ, किसको रोका गया? कौन सी ट्रेन रोकी गई? हमको नहीं पता। हमें पहली बार मीडिया से जानकारी मिल रही है।” बता दें पिछले कई घटनाओं पर नीतीश कुमार ने इसी तरह की प्रतिक्रिया दी है। इससे पहले 4 जनवरी को बिहार में BSSC सचिवालय सहायक की परीक्षा के पेपर आउट होने को प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए लाठी चार्ज पर भी सीएम नीतीश ने इसी तरह का बयान दिया था। पुलिस की लाठीचार्ज में कई छात्रों के घायल होने की खबर सामने आई थी।

‘दाल किसानों को दिए ₹60000 करोड़, छोटे कृषक हमारी प्राथमिकता’: कर्नाटक में राजा वेंकटप्पा की धरती पर PM मोदी, कई विकास परियोजनाओं की दी सौगात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने गुरुवार (19 जनवरी, 2023) को कर्नाटक के यादगिरि, कोडेकल और कलबुर्गी में सिंचाई, पेयजल और राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना से संबंधित विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और उनका शिलान्यास किया। वहीं, मालखेड़ में नव घोषित राजस्व गाँवों के लाभार्थियों को ‘हक पत्र’ सौंपा।

इस दौरान पीएम मोदी ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि सूरत-चेन्नई इकोनॉमी कॉरिडोर का जो हिस्सा कर्नाटक में पड़ता है, उस पर भी आज से काम शुरू हो गया है। इससे यादगिरि, रायचूर और कलबुर्गी सहित इस पूरे क्षेत्र में ‘ईज ऑफ डूइंग’ भी बढ़ेगी और रोजगार को बल मिलेगा। विकास के इन सभी प्रोजेक्ट्स के लिए कर्नाटक के लोगों को बहुत-बहुत बधाई।

‘यादगिरी का एक महान इतिहास है’

पीएम मोदी ने कहा, “यादगिरी का एक महान इतिहास है। इसमें अद्भुत स्मारक हैं और समृद्ध संस्कृति और परंपराएँ हैं। इस जगह पर राजा वेंकटप्पा नायक का महान शासन इतिहास में एक अद्भुत निशान छोड़ गया है। मैं यादगिरी की ऐतिहासिक और विरासत भूमि को नमन करता हूँ।” उन्होंने यह भी कहा कि चल रही विकासात्मक परियोजनाएँ यादगिरी, कलबुर्गी और रायचूर के क्षेत्रों में जीवन को आसान बनाएँगी।

‘आजादी के अमृतकाल में विकसित भारत का निर्माण’

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ‘आजादी के ‘अमृत काल’ का जिक्र करते हुए कहा, “आजादी के अमृत काल में हमें विकसित भारत का निर्माण करना है। भारत विकसित तब हो सकता है, जब देश का हर नागरिक, हर परिवार, हर राज्य इस अभियान से जुड़े। यह किसानों से लेकर व्यापारियों के सामूहिक प्रयास से ही साकार होगा, इसलिए सभी को आगे आना चाहिए और अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहिए।”

पीएम ने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा, “हमारी सरकार ने यादगिरि सहित देश के 100 से अधिक ऐसे जिलों में आकांक्षी जिला कार्यक्रम शुरू किया। हमने इन जिलों में सुशासन पर बल दिया। विकास के हर पैमाने पर काम शुरू किया। हमारे देश में दशकों तक करोड़ों छोटे किसान भी हर सुख-सुविधा से वंचित रहे, सरकारी नीतियों में उनका ध्यान तक नहीं रखा गया। आज यही छोटे किसान देश की कृषि नीति की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।”

‘किसानों से 80 गुना दाल MSP पर खरीदी’

वह आगे कहते हैं, “केंद्र सरकार ने भी इन 8 वर्षों में किसानों से 80 गुना दाल MSP पर खरीदी है। 2014 से पहले ​दाल के लिए किसानों को 100 करोड़ रुपए मिलते थे, तो वहीं हमारी सरकार ने दाल किसानों को 60 हजार करोड़ रुपए दिए हैं। यादगिरि दाल का कटोरा है, यहाँ की दालें देश भर में पहुँचती हैं। पिछले 7-8 वर्षों में अगर भारत ने दालों के लिए विदेशी निर्भरता को ​कम किया है तो इसमें उत्तर कर्नाटक के किसानों की बहुत बड़ी भूमिका है।”

प्रधानमंत्री ने वोट बैंक की बजाए विकास को अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा, “2014 में आपने मुझे आशीर्वाद दिया और बहुत बड़ी जिम्मेदारी सौंपी। मैं जानता हूँ कि जब तक भारत का एक भी जिला विकास के पैमाने पर पीछे रहेगा, तब तक देश विकसित नहीं हो सकता।”

जंतर-मंतर पर पहलवान नहीं बन पाए वामपंथी: वृंदा करात को मंच से उतारा-नहीं दी माइक, कहा- इसे राजनीति का मुद्दा न बनाएँ

भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष के खिलाफ हरियाणा के पहलवान दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे हुए हैं। इस दौरान माकपा की नेता वृंदा करात (Brinda Karat) इसमें हिस्सा लेने के लिए पहुँची, लेकिन खिलाड़ियों ने उन्हें मंच से उतार दिया। खिलाड़ियों ने कहा कि इस धरने को राजनीतिक ना बनाएँ।

धरने में शामिल बजरंग पुनिया ने वृंदा करात को मंच से नीचे जाने के लिए कहा। पुनिया ने कहा, “आप से अनुरोध है कि आप नीचे आ जाइए। माइक किसी को नहीं मिलेगा। आप से अनुरोध है कि इसे राजनीतिक मुद्दा न बनाएँ।”

बता दें कि महिला पहलवान विनेश फोगाट ने बुधवार (18 जनवरी 2023) को कुश्ती संघ के अध्यक्ष और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। फोगाट ने आगे कहा कि कोच महिलाओं को प्रताड़ित कर रहे हैं और फेडरेशन के चहेते कुछ कोच महिला कोचों के साथ भी बदसलूकी करते हैं। वे लड़कियों का यौन उत्पीड़न करते हैं।

उधर बृजभूषण सिंह ने पहलवानों पर ही मनमानी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “ये चाहते हैं कि हम ओलंपिक विजेता हैं, हमारा ट्रायल ना कराया जाए और ट्रायल कराया भी जाए तो पहले नेशनल के विजेता का ट्रायल हो फिर जो जीत कर आए उनके साथ फाइनल इनका कराया जाए। इससे इन्हें दिक्कत हो रही है। वहीं गुस्सा इनका आज फूटा है।”

बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, “जहाँ तक इन खिलाड़ियों का सवाल हैं ये ओलंपिक पदक विजेता हैं। उसमें हमारा भी सहयोग है। ओलंपिक के बाद इन्होंने एक भी राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया और सब सरकार की स्कीमों का फायदा ले रहे हैं। जब राष्ट्रीय प्रतियोगिता की बात आती है तो इनकी तबीयत खराब हो जाती है। अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में इनकी तबीयत ठीक हो जाती है। अभी फेडरेशन ने निर्णय लिया कि कोई भी विजेता हो उसे नेशनल खेलना होगा, अगर वे बीमार है तो उसका मेडिकल दे।”