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हिटलर का निशान शेयर करने पर किम कार्दशियन के पूर्व पति का ट्विटर हैंडल सस्पेंड: फिर से ईसाई हेकनक्रेज को हिन्दू स्वस्तिक बता रहे लोग, नहीं समझ रहे अंतर

अमेरिकी रैपर कान्ये वेस्ट एक बार फिर विवादों में फँस गए हैं। असल में उन्होंने ईसाई हेकनक्रेज (हुक्ड क्रॉस) की तस्वीर शेयर करते हुए जर्मनी के तानाशाह हिटलर की तारीफ़ की, जिसके बाद ट्विटर पर उनका हैंडल ही सस्पेंड कर दिया गया। कान्ये वेस्ट के बारे में बता दें कि वो अमेरिकी मॉडल और कारोबारी किम कार्दशियन के पूर्व पति हैं। किम कार्दशियन अकसर अपने कपड़ों की वजह से चर्चा में रहती हैं और दोनों के तलाक का मुद्दा मीडिया में काफी दिनों तक गर्म रहा है।

आइए, देखते हैं किस तरह लोगों ने फिर से एक ईसाई प्रतीक हेकनक्रेज को हिन्दू स्वस्तिक बताना शुरू कर दिया है, जबकि दोनों बिलकुल अलग हैं। हिन्दू स्वस्तिक शुभ-लाभ का प्रतीक है, जबकि हेकनक्रेज हिटलर के कारण रक्तपात का। ‘Meidas Touch’ नामक संस्था ने हेकनक्रेज को स्वस्तिक बताते हुए लिखा कि ये घृणित और खतरनाक है। उसने कहा कि ये यहूदियों के नरसंहार का प्रतीक है। लोगों ने संस्था को समझाया कि कान्ये वेस्ट ने जो शेयर किया था वो हेकनक्रेज है, स्वस्तिक नहीं।

लेखक आभास ने समझाया कि कैसे हिटलर जब 19वीं सदी में ऑस्ट्रिया के लांबच स्थित ‘बेनेडिक्टिन मोनेस्ट्री’ में पढ़ता था, तब उसने रोज इस ईसाई प्रतीक को देखा था। साथ ही उन्होंने चर्च के भीतर से एक चिह्न की तस्वीर भी शेयर की। अमेरिका की राजनीतिक विश्लेषक लिंडी ली ने भी दावा किया कि कान्ये वेस्ट ने स्वस्तिक की तस्वीर साझा की है। इससे लाखों लोगों के बीच ये सन्देश जा रहा है कि स्वस्तिक और हेकनक्रेज एक ही हैं।

एडम कींजिंगर नामक यूजर ने दावा कर दिया कि जब ट्विटर पर स्वस्तिक ट्रेंड हो रहा है तो एक देश के रूप में हमें आत्म-विश्लेषण करने की ज़रूरत है। बता दें कि ट्विटर पर 1 लाख से भी अधिक बार ट्वीट किया जा चुका है। शर्मिंदगी ईसाई हेकनक्रेज के ट्रेंड होने पर होनी चाहिए, स्वस्तिक पर नहीं। ट्विटर को हाल में खरीदने वाले एलन मस्क ने भी कहा है कि कान्ये वेस्ट ने नियमों का उल्लंघन किया, जिसके बाद उनका हैंडल निलंबित किया गया।

बता दें कि पश्चिमी मीडिया नाजियों के हुक्ड क्रॉस को हिंदू धर्म के शुभ प्रतीक स्वस्तिक बताकर प्रोपेगेंडा फैलाते रहे हैं। इससे विश्व भर में हिंदुओं के खिलाफ और उनके धर्मस्थलों पर हमले बढ़ रहे हैं। कनाडा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन में हिंदुओं पर हमले हाल के दिनों में कई गुना बढ़े हैं। इन हमलों को लेकर भारत सरकार को विदेशों में रहने वाले हिंदुओं को लेकर चेतावनी जारी करनी पड़ी। कैलिफोर्निया के एक विधेयक में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि हेकनक्रेज जैसा दिखता है, लेकिन यह बिल हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म से जुड़े स्वस्तिक के प्रदर्शन को अपराधीकरण नहीं करता।

जिस बैंक में था मैनेजर, वहीं से गायब कर दिया 15 करोड़ रुपए… ऑनलाइन गेम्स में उड़ाए ₹8 करोड़: केरल पुलिस कर रही तलाश

केरल के कोझिकोड से करोड़ों रुपए के बैंक फ्रॉड का मामला सामने आया है। कोझिकोड नगर निगम के 7 खातों से लगभग 15 करोड़ रुपए की ठगी सामने आई है। सारी ठगी निगम के पंजाब नेशनल बैंक के खातों के साथ की गई है।

निगम के मुताबिक इसके कुदुम्बश्री योजना खाते से 10 करोड़ 50 लाख रुपए उड़ाए गए। इसके अलावा एमपी-एमएलए फंड, एएमआरयूटी ऑफिस नवीनीकरण फंड और गैर-बायोडिग्रेडेबल अपशिष्ट निपटान निधि के तीन खातों से 1.89 करोड़ रुपए गायब कर दिए गए।

हैरानी की बात तो यह है कि निगम की जानकारी के बिना ही खातों से रुपए गायब होते गए। रुपए की चोरी का पता विभिन्न खातों के विवरणों की छानबीन के दौरान चला। पंजाब नेशनल बैंक ने फिलहाल नगर निकाय को 2.53 करोड़ रुपए वापस कर दिए हैं। बैंक ने 3 दिनों में बाकी की राशि लौटाने का वादा किया है।

स्थानीय मेयर बीना फिलिप के मुताबिक कोझिकोड निगम के 7 खातों से 15 करोड़ 24 लाख रुपए गायब हुए हैं। धोखाधड़ी का आरोप पंजाब नेशनल बैंक के एरंजीपलम शाखा के मैनेजर एम पी रिजिल पर लगा है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर एम पी रिजिल को गिरफ्तार करने की कोशिश तेज कर दी है।

मिली जानकारी के मुताबिक रिजिल ने ऑनलाइन गेम और स्टॉक्स में रुपए खर्च किए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रिजिल ने 8 करोड़ रुपए ऑनलाइन गेम्स में खर्च किए। पुलिस ने जाँच में पाया है कि रिजिल ने चोरी छिपाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग कर बैंक के दस्तावेज के साथ छेड़-छाड़ किया।

पुलिस के मुताबिक रिजिल ने छोटे-छोटे किस्तों में रुपए अपने पिता के अकाउंट में भेजे और फिर अपने निजी खाते में ट्रांसफर कर लिए। पूरे मामले की जाँच जिला क्राइम ब्राँच को सौंपी गई है। पुलिस के मुताबिक रिजिल अब भी फरार है और उसे गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है।

श्रीराम और सीताराम का अंतर बता बुरे फँसे राहुल गाँधी: BJP-RSS पर साध रहे थे निशाना, उड़वा लिया अपना मजाक

‘भारत जोड़ो यात्रा’ पर निकले कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) रह-रहकर ऐसे तर्क दे देते हैं, जिसके कारण लोग उनकी खिल्ली उड़ाने लगते हैं। हिंदूवाद बनाम हिंदुत्व के बाद अब उन्होंने श्रीराम बनाम सियाराम का तर्क पेश किया है। इस तर्क पर लोग राहुल गाँधी का मजाक उड़ा रहे हैं।

राहुल गाँधी ने कहा कि राम और सीता अलग नहीं हैं। इसलिए जब भी राम का नाम लिया जाए तो जय श्रीराम की जगह जय सीताराम या जय सियाराम कहा जाए। उन्होंने परोक्ष रूप से भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) वार करते हुए कहा सियाराम कहने के बजाए आजकल श्रीराम कहा जा रहा है।

राजस्थान के आगर में राहुल गाँधी ने कहा कि यात्रा के दौरान उन्हें एक पंडित मिले थे और उन्होंने हे राम, जय सियाराम और जय श्रीराम में अंतर बताया था। उन्होंने कहा कि पंडित ने यह भी कहा कि अपनी स्पीच में पूछिएगा कि भाजपा के लोग जय सियाराम क्यों नहीं कहते, सिर्फ जय श्रीराम क्यों कहते हैं।

राहुल गाँधी ने कहा, “जय सियाराम… जय सियाराम का मतलब है जय सीता, जय राम। ये सीता और राम एक ही हैं। इसलिए नारा है- जय सियाराम या जय सीताराम। …राम का जो जीने का तरीका था या जो उन्होंने सीता के लिए किया… वे लड़े। जब हम जय सियाराम कहते हैं तो सीता को भी याद करते हैं और समाज में जो सीता की जगह होनी चाहिए उसका आदर करते हैं।”

BJP और RSS पर निशाना साधते हुए उन्होंने आगे कहा, “बीजेपी के लोग जय श्रीराम कहते हैं। वे जय सियाराम या हे राम क्यों नहीं कहते? … इस संगठन में महिला नहीं है। वो जय सियाराम का संगठन ही नहीं है, क्योंकि उनके संगठन में महिला तो आ ही नहीं सकती, सीता तो आ ही नहीं सकती। सीता को तो बाहर कर दिया।”

इस तरह का बयान देकर राहुल गाँधी ने अपने विरोधियों को एक बार फिर मौका दे दिया है। राहुल गाँधी ने शास्त्रों का अध्ययन नहीं किया है, ये तो उनके पुराने बयानों को देख-सुनकर समझा जा सकता है, लेकिन उनके जिस भी सलाहकार ने इस तरह का बयान देने के लिए कहा होगा, संभवत: उसने भी शास्त्रों का अध्ययन नहीं किया होगा।

शास्त्रों में देवी को श्री कहा गया है। श्री का मतलब ही लक्ष्मी, सरस्वती, शक्ति, श्रद्धा, सौंदर्य, ऐश्वर्य, शुभ आदि है। विष्णु को भी श्रीपति कहा गया है, यानी लक्ष्मी के पति। श्री को ब्रह्मांड की प्राण-शक्ति भी कहा जाता है। इस तरह अगर जय श्रीराम कहा जाता है तो इसका मतलब ही है- जय सीताराम या जय सियाराम। हालाँकि, राहुल गाँधी ने इसे हिंदू पुरुषों के नाम के आगे लगाया जाने वाला एक विशेषण मात्र है।

राहुल गाँधी जिस श्री को नए रूप में परिभाषित कर रहे हैं, उस विषय पर ISKCON भी अपनी राय दे चुका है। इस्कॉन ने साल 2019 में कहा था, “जय श्रीराम और जय सीताराम दोनों का अर्थ एक ही है और यह शास्त्र सम्मत है। संस्कृत शब्दकोश के अनुसार संज्ञा के रूप में “श्री” का अर्थ है श्रीमती राधारानी, लक्ष्मी देवी, सीता माता, धन, ऐश्वर्य, सौंदर्य, प्रसिद्धि, ज्ञान, शक्ति, कोई गुण या उत्कृष्टता आदि है।”

संस्कृत के जानकार बताए जाने वाले ट्विटर यूजर नित्यानंद मिश्रा कहते हैं, “जय श्री राम (3 शब्द) हिंदी में सही है, लेकिन संस्कृत में नहीं। इसका अर्थ है ‘श्री (= सीता) और राम की जय’। जय श्रीराम (2 शब्द) हिंदी और संस्कृत दोनों में सही है। हिंदी में, इसका अर्थ है ‘श्रीराम (= सीता के साथ राम) की जय’। संस्कृत में, इसका अर्थ है ‘हे श्रीराम! आप जीतें’!”

राहुल गाँधी की इस व्याख्या के बाद सोशल मीडिया पर उनका मजाक उड़ा रहे हैं। विपक्षी दल भाजपा को कोसने के चक्कर में राहुल गाँधी ने ऐसी बात कह दी है, जिसका कोई तुक नहीं है। यह बात विद्वान और धर्मार्थ संस्थान भी मान रहे हैं।

‘श्रद्धा के 35 टुकड़े किए, तुम्हारे 70 कर देंगे’ – अरशद ने हिंदू नाम रख फँसाया, बाप सलीम से रेप भी करवाया… विरोध करने पर मौत की धमकी

महाराष्ट्र के धुले जिले से लव जिहाद का मामला सामने आया है। धुले के देवपुर थाने में अरशद मलिक और उसके पिता सलीम मलिक के खिलाफ एक हिंदू महिला को पहचान छुपाकर फँसाने और 2 सालों तक उसका यौन उत्पीड़न करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 376(2)(एन), 377, 327, 504, 506, 34 और 323 के तहत मामला दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी गई है।

24 साल की पीड़िता हिंदू युवती ने गुरूवार (1 दिसंबर 2022) को पश्चिम देवपूर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता की मानें तो आरोपित अरशद मलिक ने खुद को हर्षद माली नाम का एक हिंदू व्यक्ति बताया था और फिर पीड़िता को शादी करने के लिए राजी किया। शिकायत में कहा गया है कि पीड़िता के साथ अरशद के पिता सलीम मलिक ने भी कई बार उनका बलात्कार किया। सलीम इस मामले में दूसरा आरोपित है।

एफआईआर की कॉपी

पीड़िता के मुताबिक 4 अप्रैल, 2016 को उसकी पहली शादी गौरव नाम के युवक के साथ हुई थी। 2017 में उसने बेटे को जन्म दिया था। 2019 में एक सड़क हादसे में गौरव की मौत हो गई। इसके बाद पीड़िता ने सरकारी नौकरी प्राप्त करने के लिए महाराष्ट्र पुलिस भर्ती क्लासेस में दाखिला लिया। यहाँ उसकी मुलाकात अरशद मलिक से हुई, जिसने पीड़िता को अपना नाम हर्षल माली बताया। दोनों के बीच दोस्ती हो गई। पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार अरशद घूमने के बहाने पीड़िता को पास के जंगलों में ले गया, जहाँ उसने पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने लगा।

इस घटना के बाद से पीड़िता ने हर्षल बने अरशद से दूरी बनानी शुरू कर दी। अरशद ने पीड़िता को यकीन दिलाया कि वह उससे बहुत प्यार करता है। उसने दोस्ती तोड़ने पर वीडियो वायरल कर देने की धमकी भी दी। मजबूरन पीड़िता ने अरशद के साथ रहने का फैसला किया।

जुलाई 2021 में पीड़िता को पता चला कि उसका दोस्त दरअसल हर्षल माली नहीं बल्कि अरशद मलिक है। सच्चाई पता चलने के बाद अरशद ने पीड़िता से कहा कि प्यार में नाम और मजहब मायने नहीं रखता। इसके बाद पीड़िता अपने बेटे विवेक और लिव इन पार्टनर अरशद के साथ अमलनेर और उल्हासनगर शहरों में रहने के लिए चली गई।

एफआईआर की कॉपी में आरोपितों के नाम

इस दौरान अरशद ने पीड़िता से उनके पहले पति से प्राप्त जमा पूँजी 2.5 लाख रुपए भी हड़प लिए। इतना ही नहीं, अरशद की नजर पीड़िता के सोने की उस चेन पर भी थी, जो पहले पति गौरव ने उसे तोहफे के रूप में दिया था। अरशद ने वह चेन भी उससे छीन ली। इसके बाद अरशद ने साजिश के तहत अपने परिवारवालों को पीड़िता के साथ रिश्ते की जानकारी दी। तब पीड़िता अपने बेटे विवेक और अरशद के साथ उल्हासनगर पहुँची।

इसके कुछ दिनों के बाद अरशद का पिता सलीम मलिक उल्हासनगर पहुँचता है। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार सलीम ने बेटे अरशद की इजाजत के बाद पीड़िता के साथ न सिर्फ बलात्कार किया बल्कि अप्राकृतिक यातनाएँ भी दीं। इसके चार महीने बाद अरशद उसे धुले शहर के विटा भट्टी इलाके में अपने घर ले आया। दोनों की इस्लामिक रिवाज के साथ निकाह पढ़ाई गई।

पीड़िता के मुताबिक इस बीच वह गर्भवती हो गई। गर्भावस्था में भी अरशद और उसके पिता सलीम दोनों उसके साथ जबरदस्ती करते थे। 26 अगस्त 2022 को पीड़िता ने दूसरे बेटे को जन्म दिया। इसके बाद भी सलीम पीड़िता के साथ बार-बार अप्राकृतिक दुर्व्यवहार करता रहा।

पीड़िता की शिकायत के अनुसार उसे नया इस्लामिक नाम देकर जबरन धर्म परिवर्तन करा दिया गया। साथ ही उसके पहले पति से हुए बेटे का भी धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश की गई। अरशद के घरवाले उसके बेटे विवेक का खतना करना चाहते थे। तब पीड़िता ने विवेक को अपने दादी के पास भेज दिया।

पीड़िता की तरफ से दी गई शिकायत

विरोध करने पर दिल्ली की श्रद्धा वालकर हत्याकांड के बाद से अरशद और उसके घरवाले पीड़िता को जान से मारने की धमकी देने लगे। उन लोगों ने पीड़िता को यह कह कर धमकाया, “श्रद्धा के सिर्फ 35 टुकड़े किए थे, तुम्हारे 70 टुकड़े कर देंगे।”

जान से मारने की धमकी मिलने के बाद पीड़िता किसी तरह अरशद के घर से फरार हो गई। वह अपने पहले पति के घर पहुँची और अपनी सास से मदद माँगी। इस मामले में अरशद और उसके पिता सलीम दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस इस संबंध में आगे की जाँच कर रही है।

इंडोनेशिया में शादी से पहले सेक्स पर सजा, पति-पत्नी के अलावा दूसरे से संबंध बनाने पर जेल: नए कानून का ड्राफ्ट तैयार

शादी से पहले सेक्स और अवैध संबंधों को इंडोनेशिया सरकार दंडनीय अपराध बनाने जा रही है। इसके दोषियों को जेल की सजा काटनी होगी। इंडोनेशिया की संसद में एक नया क्रिमिनल कोड (Criminal Code) पास होने वाला है, जिसके तहत शादी से पहले सेक्स (Sex Before Marriage) को अपराध मानते हुए दोषियों को एक साल तक जेल की सजा का प्रावधान किया जाएगा।

इस कानून को इंडोनेशिया की संसद जल्दी ही पास करने वाली है। नए कानून के तहत सिर्फ पति और पत्नी ही आपसी यौन संबंध स्थापित कर सकेंगे। पराए पुरुष या महिला से संबंध बनाने वालों को दंडित किया जाएगा। इसके राष्ट्रपति का अपमान और सरकारी विचारधारा का विरोध माना जाएगा। बता दें कि ये दोनों ही इंडोनेशिया में प्रतिबंधित हैं।

इस क्रिमिनल कोड के आर्टिकल 413 के पैराग्राफ 1 में कहा गया है, “कोई भी व्यक्ति अगर किसी ऐसे शख्स से संबंध बनाता है, जो उसका पति या पत्नी नहीं है तो उसे व्यभिचार का दोषी माना जाएगा। ऐसी स्थिति में उस पर जुर्माना लगाया जाएगा या उसे एक साल की सजा सुनाई जाएगी।” इसमें लिव-इन रिलेशन पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

हालाँकि, इसमें एक शर्त भी जोड़ी गई है। शर्त में कहा गया है कि किसी व्यक्ति या महिला पर कार्रवाई तभी की जाएगी, जब ऐसा करने वाले के पति या पत्नी व्यभिचार की शिकायत दर्ज कराए। अगर आरोपित नाबालिग है तो उसके माता-पिता की ओर से शिकायत दर्ज करानी होगी। नए कानून पर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई है।

बता दें कि तीन साल पहले भी इस कानून को लागू करने की कोशिश की गई थी। उस दौरान दुनिया की सबसे अधिक आबादी अधिक मुस्लिम आबादी इस मुल्क में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए थे और इसका विरोध किया था। प्रदर्शनकारियों ने इसे ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच’ का हनन बताया था। इसके बाद वहाँ की सरकार ने अपने कदम वापस खींच लिए थे।

प्रस्तावित कानून को लेकर इंडोनेशिया के उप न्याय मंत्री एडवर्ड उमर शरीफ हियरीज ने कहा है कि नई आपराधिक संहिता 15 दिसंबर को पारित होने की उम्मीद थी। उन्होंने कहा, “हमें इस क्रिमिनल कोड पर गर्व है और यह इंडोनेशियाई मूल्यों के अनुरूप है।” कानून का मसौदा बनाने में शामिल विधायक बंबांग वुरियन्टो ने कहा कि इसे अगले सप्ताह की शुरुआत में पारित किया जा सकता है।

अगर यह कानून पारित हो जाता है तो यह इंडोनेशिया के नागरिकों के साथ-साथ विदेशी यात्रियों पर भी लागू होगा। हालाँकि, इस कानून में समलैंगिकों को शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि उन्हें इंडोनेशिया में विवाह करने का अधिकार प्राप्त नहीं है। वहीं, बलात्कार के मामलों को छोड़कर गर्भपात करना या कराना भी प्रतिबंधित रहेगा।

इसको लेकर सोशल एक्टिविस्ट नुरीना सावित्री का कहना है कि इसमें 88 ऐसे अनुच्छेद हैं, जिनका अधिकारियों द्वारा गलत व्याख्या की जा सकती है और उनका दुरुपयोग हो सकता है। वहीं, इसके दर्जनों अनुच्छेदों का इस्तेमाल असहमति को दबाने के लिए किया जा सकता है। उनका कहना है कि इसमें शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को अपराध घोषित किया गया है। वहीं, महिलाओं, अल्पसंख्यकों और समलैंगिकों के खिलाफ भेदभाव पूर्ण रवैया अपनाया गया है।

‘मंदिर की जमीन पर शव दफनाने की अनुमति नहीं’: मद्रास हाईकोर्ट ने दिया अतिक्रमण हटाने का निर्देश

मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि शवों को दफनाने के लिए मंदिर की जमीन को कब्रिस्तान बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। हाईकोर्ट ने कहा कि मृत लोगों को भी सम्मान सहित दफनाने या दाह संस्कार करने का अधिकार है, लेकिन मंदिर की भूमि में इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।

जस्टिस आर महादेवन और जे सत्य नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि मंदिर की जमीन हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के अधीन आती है और यह मंदिर की संपत्ति की कस्टोडियन है। कोर्ट ने बंदोबस्ती विभाग को अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया।

दरअसल, तमिलनाडु के तेरुचिंदुर में स्थित अरुलमिगु सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर के रास्ते में टोपी बेचने वाले एसपी सत्यानारायण ने साल 2018 में एक याचिका दी थी। अपनी याचिका में उन्होंने कहा था कि त्योहारों के मौसम में बड़ी संख्या श्रद्धालु मंदिर में आते हैं, लेकिन उन्हें आराम करने के लिए आसपास जगह नहीं बची है।

सत्यनारायण ने याचिका में कहा कि मंदिर के पास लगभग 30 एकड़ जमीन है, जिसका इस्तेमाल पहले आने वाले श्रद्धालुओं की गाड़ियों को पार्किंग करने और उनके आराम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। अब इसका इस्तेमाल शवों को दफनाने और रात में अवैध गतिविधियों के लिए किया जाता है।

इस मामले में जिले के कलेक्टर को और मंदिर प्रशासन को साल 2017 में कार्रवाई करने के लिए आग्रह किया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। कोर्ट ने कहा कि राजस्व विभाग द्वारा यह जानते हुए कि जमीन मंदिर की है और वहाँ शवों को दफनाया जा रहा है, कोई कार्रवाई नहीं करना अक्षम्य है।

लाइव लॉ के अनुसार, कोर्ट ने मंदिर की जमीन को तीन महीने में अतिक्रमण मुक्त करने का आदेश दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने जिले के कलेक्टर को शवों को दफनाने के लिए वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराने के लिए भी कहा।

हिंदुओं के 40 साल तक अवैध पार्टनर, मुस्लिम फॉर्मूला से 18 साल में लड़की की शादी करो… उपजाऊ जमीन में बीज बोओ: बदरुद्दीन अजमल

ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के नेता बदरुद्दीन अजमल ने हिंदुओं को लेकर बेहद विवादित बयान दिया है। जनसंख्या वृद्धि पर बदरुद्दीन ने कहा कि मुस्लिम लड़कियों की शादी 18 साल की उम्र में हो जाती है, लेकिन हिंदू लड़कियों की शादी 40 साल की उम्र तक नहीं होती। हिंदू 40 साल के बाद शादी करते हैं, तब तक बच्चा पैदा करने की क्षमता नहीं रहती।

एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने हिंदुओं को नसीहत दी कि उन्हें मुस्लिमों की तरह अपनी लड़कियों की शादी 18 साल की उम्र में कर देनी चाहिए। बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि मुस्लिम लड़कियों की शादी 18 साल की उम्र में हो जाती है, लेकिन हिंदू लड़कियों की शादी 40 साल की उम्र में भी नहीं होती। हिन्दू 40 साल की उम्र तक अवैध पार्टनर रखते हैं। बच्चे नहीं पैदा करते और पैसे बचाते हैं।

बदरुद्दीन अजमल के अनुसार हिंदू 40 साल की उम्र के बाद माँ-बाप के दबाव में या कहीं फँस गए तो शादी करते हैं। सवालिया लहजे में इसके बाद वो कहते हैं कि 40 की उम्र के बाद बच्चा पैदा करने की सलाहियत (क्षमता) कहाँ रहती है।

अपनी बात जारी रखते हुए उन्होंने सलाह दिया कि हिंदुओं को मुस्लिम फॉर्मूले को स्वीकार करना चाहिए और अपने बच्चों की शादी 20-22 साल की उम्र में कर देनी चाहिए। उनके अनुसार 18-20 साल की उम्र में लड़कियों की शादी करा दो और फिर देखो कितने बच्चे पैदा होते हैं। बदरुद्दीन ने आगे कहा कि जब आप उपजाऊ जमीन में बीज बोएँगे, तभी खेती अच्छी होगी। उसके बाद तरक्की ही तरक्की होगी।

एआईयूडीएफ चीफ बदरुद्दीन अजमल इस दौरान बीजेपी पर भी निशाना साध रहे थे। बदरुद्दीन अजमल ने कहा, “बीजेपी सरकार मुसलमानों को हर जगह अलग-थलग करने में लगी हुई है। मोदी सरकार सिर्फ हिंदुओं को मजबूत बनाने का काम कर रही है।”

असम से भाजपा विधायक डी कलिता ने बदरुद्दीन अजमल के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कलिता ने कहा, “आप मुसलमान हो और हम हिन्दू। क्या हमें आपसे सीखना है? यह भगवान राम और देवी सीता का देश है। हमें मुसलमानों से सीखने की जरूरत नहीं है।”

भाजपा विधायक डी कलिता ने बदरुद्दीन अजमल को राजनीतिक फायदे के लिए इस तरह के बयान न देने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि या तो आप अपने माताओं और बहनों को कलंकित करने वाले बयान न दें और अगर ऐसे बयान देने हैं तो बांग्लादेश चले जाएँ। उन्होंने कहा कि हिंदू इस तरह के बयान बर्दास्त नहीं करेंगे।

चीन से हैक हुए दिल्ली AIIMS के प्रमुख 5 सर्वर, डार्क वेब पर बेचा जा रहा 4 करोड़ मरीजों का डेटा: रिपोर्ट

लगभग सप्ताह भर से अधिक समय से हैक हुए देश के सबसे बड़े अस्पताल और दिल्ली स्थित AIIMS के सर्वर के मामले में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। इस हैकिंग के पीछे चीन (China) का हाथ बताया जा रहा है। यह कहा जा रहा है कि चीन AIIMS के लगभग 4 करोड़ लोगों का डेटा चुरा लिया है और इसे डार्क वेब पर बेच दिया है। इन डेटा में राजनेता, सेलिब्रिटी और बड़े अधिकारियों के डिटेल शामिल हैं।

हैकरों ने AIIMS के पाँच सबसे महत्वपूर्ण सर्वरों को निशाना बनाते हुए उन्हें हैक कर लिया था। इसके बदले हैकरों ने AIIMS से 200 करोड़ रुपए की फिरौती क्रिप्टोकरेंसी में माँगी थी। अब सामने आया है कि हैक किए गए डेटा को इंटरनेट के गुप्त हिस्से डार्क वेब पर इन्हें बेच दिया गया है। कहा जाता है कि डार्क वेब पर AIIMS डेटा के नाम से 1600 बार सर्च किया गया है।

दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटजिक ऑपरेशन (IFSO) यूनिट के सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि AIIMS के कुल पाँच मुख्य सर्वर को हैक किया गया था। FSL की टीम अब डाटा लीक की जाँच कर रही है। उधर, IFSO के अधिकारियों का कहना है कि कोई अस्पताल का कोई भी डेटा गायब नहीं हुआ है। यह पहली बार हैकिंग का मामला IFSO द्वारा सँभाला जा रहा है।

कहा जा रहा है कि साइबर अटैक का उद्देश्य देश की मेडिकल सेवाओं को ठप करना और फिरौती की रकम वसूल करना था। इस हमले के बाद देश की सुरक्षा एजेंसियाँ चौकन्नी हो गई हैं, क्योंकि AIIMS में हाई प्रोफाइल लोगों का भी इलाज होता है और उनके स्वास्थ्य से संबंधित डिटेल होता है। साइबर हमले से स्वास्थ्य सेवाएँ ठप हो जाती हैं और की मरीजों की जान खतरे में आ जाती है। मेडिकल डेटा ना मिलने से मरीजों के जरूरी ऑपरेशन रुक जाते हैं।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर (Rajeev Chandrasekhar) ने इसे बड़ी साजिश माना है। उन्होंने आशंका जताई है कि इसके पीछे बड़े संगठित गैंग हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि AIIMS सर्वर अटैक कोई सामान्य अटैक नहीं है। यह एक बड़ी साजिश का हिस्सा है।

राजीव चंद्रशेखर ने आगे कहा कि सरकार डेटा ब्रीच को लेकर डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल लाने जा रही है। उसके लागू होने के बाद एम्स जैसी घटना होने पर पीड़ित व्यक्ति अपनी डेटा प्राइवेसी को लेकर डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड के पास ईमेल भेजकर शिकायत कर सकता है।

बता दें कि हैक होने के 10 दिन बाद भी AIIMS के सर्वर को अभी बहाल नहीं किया जा सका है। हैकरों ने 23 नवंबर 2022 को सर्वर को हैक कर लिया था। सर्वर डाउन होने की वजह से AIIMS में मैनुअली काम हो रहा है। इसके कारण कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

एम्स में नेटवर्क सैनिटाइजेशन का काम चल रहा है। सर्वर और कंप्यूटर के लिए एंटीवायरस की व्यवस्था की गई है। अस्पताल के 5,000 कंप्यूटरों में से लगभग 1,200 कंप्यूटरों पर एंटीवायरस इंस्टॉल कर दिया गया है। वहीं, 50 में से 20 सर्वरों को स्कैन किया जा चुका है।

राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि CERT, NIA और दिल्ली पुलिस मामले की जाँच कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार सरकारी संस्थाओं को साइबर अटैक से बचाने के लिए कई तरह के पुख्ता इंतजाम करती है, लेकिन AIIMS एक स्वायत्त संस्थान है, जो इस काम के लिए प्राइवेट एजेंसियों को हायर करती है। सरकार भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए एक स्टैंडर्ड तय करेगी। 

‘अल्लाह के पास बुलाओ, इस्लाम न कबूले तो जजिया वसूलो’: कतर के प्रोफेसर का ‘इस्लामी पाठ’, कहा- इनकार करे तो जंग लड़कर मार डालो

कतर यूनिवर्सिटी में इस्लामी स्टडीज पढ़ाने वाले प्रोफेसर डॉ शफी अल हाजरी ने अल-रय्यन टीवी पर 25 नवंबर को बयान दिया है कि इस्लाम को फैलाने का तीसरा और आखिरी कदम सिर्फ जंग है।

डॉ अल हाजरी ने कहा पहले लोगों को इस्लाम में आने के लिए बुलाओ। वो न आएँ तो उन्हें जिंदा रहने के लिए जजिया देने को कहो। वो तब भी मना करें तो उनपर बिन कोई दया दिखाए उन्हें मार डालो।

अल हाजरी ने कहा, “जंग, दावत का तीसरा चरण है। पहले हम अल्लाह के पास लोगों को बुलाते हैं। वो आते हैं तो उनके पास वही अधिकार होते हैं जो हमारे पास हैं। अगर वो नहीं आते तो उन्हें जजिया देना चाहिए। जजिया इसलिए ताकि वो दूसरों से सुरक्षित रह सकें। तीसरा चरण होता है कि अगर वो जजिया देने से भी मना करें तो उनसे जंग की जाए।”

बता दें कि जजिया एक कर की तरह होता है जिसे गैर मुस्लिमों से राज्य में उनकी सुरक्षा के नाम पर माँगा जाता है। इसी जजिया के नाम पर भारत में लंबे समय तक मुगलों ने हिंदुओं का शोषण किया था। इसे न दिए जाने पर मुगल शासकों को जहाँ अधिकार था कि वह गैर मुस्लिमों की संपत्ति को अयोग्य घोषित कर दें। वहीं हिंदुओं के पास धर्मांतरण के सिवा या जान देने के अलावा कोई रास्ता नहीं था।

कतर में धर्मांतरण का प्रयास

आज भी जजिया लेने की बात उस समय सामने आई है जब कतर आए दिन धर्मांतरण की खबरों को लेकर विवादों में है। वर्ल्ड कप के समय पता चल रहा है कि किस तरह-तरह के हथकंडे आजमा कर गैर-मुस्लिमों को मुस्लिम बनाया जा रहा है। मस्जिदों में बहुभाषी पुरुष और महिलाएँ इस्लाम और सहिष्णुता का पाठ लोगों को पढ़ा रहे हैं।

यात्रियों को वो बोर्ड दिखाए जा रहे हैं जिनमें इस्लाम के बारे में 30 से ज्यादा भाषाओं में लिखा है। इसके अलावा इस्लाम से जुड़ी किताबें भी लोगों को बाँटी जा रही हैं।

जाकिर नाइक और कतर

कतर में इस्लाम को बढ़ावा देने के कितने प्रयत्न किए जा रहे हैं इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि उन्होंने विजिटर्स को इस्लाम का पाठ पढ़वाने के लिए जाकिर नाइक को बुलाया था। हालाँकि भारत के विरोध के बाद बताया गया कि उन्होंने फीफा के लिए जाकिर नाइक को कोई भी इन्विटेशन नहीं भेजा।

‘नाम में सिंह क्यों लगाया, पगड़ी उतारो’: इंग्लिश मीडियम स्कूल के वाइस प्रिंसिपल फादर जेम्स ने सिख छात्र को धमकाया, कहा- ईसाई बनो

महाराष्ट्र (Maharashtra) के अहमदनगर स्थित एक क्रिश्चियन स्कूल के शिक्षकों पर सिख छात्र का धर्मांतरण (Religious Conversion) करने का दबाव डालने आरोप लगा है। जब छात्र ने मना किया तो उसे जान से मारने की धमकी दी गई। इस मामले में छात्र के परिजनों ने स्कूल के दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।

अहमदनगर के राहुरी फैक्ट्री इलाके में डी पॉल इंग्लिश मीडियम स्कूल है। यहाँ 14 साल का एक सिख विद्यार्थी पढ़ाई करता है। आरोप है कि स्कूल के दो पादरियों ने उसके बाल काट दिए और ईसाई धर्म अपनाने के लिए बाध्य किया। जब छात्र ने मना किया तो उसे जान से मारने की धमकी दी गई।

इस मामले में छात्र के परिजनों ने स्कूल के फादर जेम्स और फादर सैंटो के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। दोनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 295A, 298, 153A और 506 के तहत मामला दर्ज कराया गया है। दोनों शिक्षकों पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का मामला दर्ज किया गया है।

सामाजिक कार्यकर्ता हरजीत सिंह वाधवा ने कहा कि इस घटना को लेकर सिख समुदाय में गुस्सा है और इस संबंध समुदाय के लोग जल्दी ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। उनका कहना है कि आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की माँग की जाएगी।

आरोप है कि नाबालिग सिख छात्र से स्कूल के उप प्रधानाध्यापक फादर जेम्स और सैंटो ने कहा, “नाम के आगे सिंह क्यों लगाते हो? पगड़ी क्यों लगाती हो, केश क्यों रखती हो, हाथों में कड़े क्यों पहनती हो? अगर तुम स्कूल में आना चाहते हो तो इन सबको हटा दो और दूसरे बच्चों की तरह बनो।”

छात्र का कहना है कि उसके पिता की पाँच साल पहले मौत हो गई थी। उसकी माँ और परिवार के अन्य सदस्य मजदूरी करके जीवनयापन करते हैं। वह इस स्कूल में कक्षा 9 में पढ़ता है। वहाँ फादर सैटों प्रिंसिपल, फादर जेम्स वाइस प्रिंसिपल और बबीता क्लास टीचर हैं।

छात्र ने आरोप लगाया, “अगस्त 2022 में एक दिन आरुष तानपुरे क्लास ले रहे थे, तभी रूबी सिस्टर क्लास में आ गईं। वह मेरे करीब आईं और मेरे दाहिने हाथ में हमारे सिख धर्म के निशान को देखकर मुझे खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि इसे हटाओ या फिर प्रिंसिपल से इसे पहनने की अनुमति लो। फिर मैं माँ को लेकर आया। प्रधानाध्यापक ने इसे निकालने के लिए कहा। उसके अनुसार मैंने स्कूल जाना शुरू किया।”

छात्र ने आगे बताया, “30 नवंबर 2022 को हमारे स्कूल में खेल प्रतियोगिता चल रही थी। मैं भी अपने दोस्तों के साथ एक तरफ खड़ा थ। उसी दौरान फादर जेम्स आए और कहा कि तुम्हारा नाम क्या है। मैंने नाम बताया तो उन्होंने कहा कि नाम में सिंह क्यों लगाए हो। मैंने कहा कि हमारे धर्म में नाम के आगे सिंह लगाना जरूरी है। फिर उन्होंने पगड़ी के बारे में पूछा और अंत में कहा कि इसको हटाओ और बाल कटाओ। अन्य बच्चों की तरह स्कूल आओ। हमारे धर्म को अपनाओ।”

छात्र ने बताया कि उसने फादर जेम्स को जवाब देते हुए कहा कि वह ना तो पगड़ी हटाएगा, ना ही बाल कटवाएगा और ना ही ईसाई बनेगा। इसके बाद फादर जेम्स उस पर चीखने लगे और मारने के लिए उसकी तरफ दौड़े। इसके बाद छात्र वहाँ से भागकर क्लास में आ गया। छात्र का कहना है कि फादर जेम्स उसके पीछे क्लास में आए और कहा कि अगर कैंसर हो जाए तो बाल कटवाना पड़ेगा। इसलिए ईसाई बन जाओ।

छात्र का कहना है कि घर आकर उसने इस बारे में अपनी दादी और माँ को बताया। उसके बाद उसकी दादी ने छात्र के चाचा को फोन कर उसके घर गई और घटना के बारे में जानकारी दी। इसके बाद छात्र का चाचा उसे लेकर पुलिस स्टेशन गए और मामले में मुकदमा दर्ज कराया।