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34000 FIR, मुकदमा किसी पर नहीं: SC ने पंजाब की AAP सरकार को फटकारा, BJP बोली- घरों में पानी नहीं, मोहल्लों में शराब पहुँच गई

सुप्रीम कोर्ट ने बड़े पैमाने पर अवैध शराब के निर्माण और बिक्री को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार (punjab Government) को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि राज्य में ड्रग्स और शराब की समस्या एक गंभीर मुद्दा है। पंजाब सरकार ऐसे मामलों में केवल एफआईआर (FIR) दर्ज कर रही है और आगे की कार्रवाई नहीं कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार से अवैध शराब बनाने के खतरे को रोकने के लिए उठाए गए विशिष्ट कदमों की सूची बनाने के लिए भी कहा। कोर्ट ने चिंता जताते हुए यह भी कहा कि पंजाब एक सीमावर्ती राज्य है और अगर कोई देश को खत्म करना चाहता है, तो वह सीमाओं से ही शुरुआत करेगा।

पंजाब सरकार से सवाल करते हुए कोर्ट ने जब्त किए गए पैसे के इस्तेमाल की जानकारी माँगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार को इस पैसे का इस्तेमाल नशा विरोधी अभियानों के लिए करना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि अब तक 2 सालों में 34000 से ज्यादा एफआईआर हो चुकी है, लेकिन किसी पर मुकदमा नहीं हुआ है। पंजाब सरकार की ओर से जवाब देते हुए एएसजी ने कहा कि चीजें आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि धारा 302 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है और आगे कार्रवाई भी होगी।

वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी भगवंत मान सरकार पर इस मुद्दे को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ”नशीले पदार्थों और शराब की बढ़ती समस्या के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आप की अगुवाई वाली पंजाब सरकार को फटकार लगाई है। आप ने पंजाब और दिल्ली को नशामुक्त के बजाय नशायुक्त बना दिया है। नशा माफिया को खुली छूट दी गई है। उनके साथ संभवतः दिल्ली की तरह ही सौदा किया गया है। आप पंजाब के युवाओं को बर्बाद कर रही है।”

इसके साथ ही ट्वीट के साथ उन्होंने एक वीडियो भी पोस्ट किया, जिसमे उन्होंने कहा, ”आज सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को नशा, अवैध ड्रग्स फटकार लगाई है। आम आदमी पार्टी की सरकार जब से पंजाब में आई है, ड्रग्स से संबंधित मामलों में 168 लोगों की मौत हुई है। कई तरह के युवाओं के वीडियो सामने आ रहे हैं, जिसमें वह ड्रग्स की वजह से पैरों पर खड़े नहीं हो पाते। आम आदमी पार्टी ने कहा था कि एक महीने में शराब माफियाओं को समाप्त कर देंगे, लेकिन इन्होंने शराब माफियाओं को खुली छूट दी है, जिस वजह से घर-घर साफ़ पानी तो नहीं पहुँचा है बल्कि मोहल्ले-मोहल्ले नशा जरुर पहुँच चुका है।

उन्होंने आगे कहा, ”वहीं जब पुलिस इनसब पर कार्रवाई करती है तो आप के कार्यकर्ता पुलिस के सामने खड़े हो जाते हैं। आज आम आदमी पार्टी के तहत राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। आज आप को सुप्रीम कोर्ट से जो फटकार मिली है, वह दिखाता है कि पार्टी ने दिल्ली और पंजाब को नशा मुक्त बनाने के बदले नशा युक्त बना दिया है।”

लड़की को गोली मारी, डेड बॉडी से रेप किया, फिर काट-काटकर खाया… ‘पागल’ बन सजा से बचा, निमोनिया से मरा नरभक्षी

जापान के नरभक्षी इंसान सगावा की 73 साल की उम्र में निमोनिया से मौत हो गई है। उसने एक डच छात्रा की हत्या कर उसके शव के साथ रेप किया था। हालाँकि जुर्म कबूलने के बावजूद उसे कभी इसके लिए सजा नहीं हुई। 24 नवम्बर 2022 को उसकी मौत के बाद अंतिम संस्कार में गिने-चुने रिश्तेदार ही शामिल हुए। परिजन उसकी मौत को सार्वजानिक नहीं करना चाहते थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 1981 में सगावा पेरिस में रहकर पढ़ाई करता था। वहाँ उसने नीदरलैंड की रेनी हर्टवेल्ट नाम की छात्रा को अपने घर पर बुलाया। सगावा ने अपने घर आई रेनी के गर्दन पर गोली मारी। बाद में उसके शव के साथ रेप किया। हत्या के कई दिनों बाद तक वह डच छात्रा के शव के अलग-अलग हिस्सों को खाता रहा। रेनी की लाश के बचे टुकड़ों को सगावा ने पेरिस के ही बोइस डी बोलोग्ने पार्क में ठिकाने लगाने की पूरी कोशिश की थी।

बाद में उसे पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उसने अपना अपराध भी कबूल कर लिया था। लेकिन साल 1983 में उसे फ्रांस में केस के ट्रायल के लिए फिट नहीं माना गया। फ़्रांसिसी डॉक्टरों ने सगावा को एक मनोरोगी बताया और उसे एक मनोरोग संस्थान में शिफ्ट कर दिया। एक साल बाद 1984 में सगावा को वापस जापान भेज दिया गया। हालाँकि मृतका रेनी के परिजनों ने उसे सजा दिलाने की अपनी कोशिशें जारी रखीं। रेनी के घर वाले चाहते थे कि आरोपित पूरा जीवन जेल में काटे।

सगावा के जापान भेजे जाने के बाद जापानी अधिकारीयों ने पाया कि उसे अस्पताल में भर्ती करने की कोई जरूरत नहीं है। जापानी प्रशासन ने रेनी की हत्या के आरोपित सगावा की समस्या को चारित्रिक दोष बताया। जापानी अधिकारियों ने फ्रांसीसी प्रशासन से सगावा के खिलाफ चल रहे रेनी मर्डर केस की फाइलें सौंपने के लिए कहा। हालाँकि फ़्रांस की तरफ से पूरे मामले को बंद कर दिया गया था और जापान को रेनी की हत्या से जुड़े कागज़ात नहीं मिल पाए।

सगावा ने बाद में रेनी की हत्या को अपनी प्रसिद्धि के लिए इस्तेमाल किया। कुछ समय बाद उसने ‘इन द फॉग’ नाम का एक उपन्यास भी लिखा। इस नॉवेल में सगावा ने रेनी की हत्या के बारे में विस्तार से बताया है। सगावा द्वारा की गई रेनी की हत्या का जिक्र जापान के प्रसिद्ध उपन्यासकार जुरो कारा ने भी अपने नॉवेल ‘लेटर फ्रॉम सागावा-कुन’ में किया है। इस नॉवेल ने साल 1982 में जापान का सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक इनाम भी जीता था।

इसके अलावा सगावा लगातार जापान की नेशनल और विदेशी मीडिया को इंटरव्यू भी देता रहा। उसे एक एडल्ट पत्रिका में भी छपने का मौक़ा मिला। बाद में उसने ब्लू फिल्म में भी काम किया। सगावा द्वारा की गई रेनी की हत्या पर कई ग्राफ़िक़ों के साथ एक कॉमिक भी बनी थी। अपनी क्रूरता के चलते सगावा को रोलिंग स्टोन्स और द स्ट्रेंजलर्स के गीतों में स्थान मिला था।

पिछले काफी समय से वह व्हील चेयर पर था। साल 2017 में सगावा के बयानों और नरभक्षी हरकतों पर एक डॉक्यूमेंट्री भी बनी थी। अपना अंतिम समय सगावा ने अपने भाई के साथ बिताया।

‘हिरण के खून से नहाया, कुत्तों और बाज की दी कुर्बानी…’ : रूसी राष्ट्रपति पुतिन को लेकर पत्रकार का दावा, यूक्रेन से युद्ध के पीछे भी अंधविश्वास को वजह बताया

रूस के राष्ट्रपति व्लामिदीर पुतिन को लेकर नए-नए दावे होते रहते हैं। कभी उनके सूटकेस को लेकर खबर आती है तो कभी कहा जाता है कि वो अपने साथ अपना वॉशरूम लेकर चलते हैं। इन्हीं खबरों के बीच अब विशेषज्ञों के हवाले से बताया जा रहा है कि पुतिन कुछ गतिविधियों में भी खासी दिलचस्पी लेते हैं। उन्हें मन पढ़ना या फिर खून से जुड़े कई रिवाज आदि करना पसंद है।

द सन की रिपोर्ट में एक रूसी पत्रकार ओलेग काशिन के हवाले से पुतिन को अंधविश्वासी बताते हुए कहा गया कि वह काले कुत्ते और बाज की कुर्बानी दे चुके हैं। इसके अलावा वह अपनी सेक्स ड्राइव को बढ़ाने के लिए एक तरह के जादुई हिरण के खून से भी नहाए थे। रिसर्चरों के मुताबिक पुतिन और उन्हें जानने वाले कई करीबी जादू-टोने वाली चीजों में यकीन रखते हैं। उन लोगों के इसी रवैये के चलते यूक्रेन पर हमला हुआ…ऐसा भी रिसर्चर्स का ही मानना है।

बता दें कि पुतिन को लेकर पहली दफा ऐसी खबरें नहीं आई हैं। 2017 में भी इस संबंध में छपा था। रूस की खोजी पत्रकारिता करने वाली Proekt ने यह दावा किया था। अब दोबारा पत्रकार काशिन के दावे के बाद ये चर्चा तेज हैं कि वो सत्ता में रहने के लिए कुर्बानी दे रहे हैं, खून में स्नान कर रहे हैं।

कथिततौर पर पुतिन में केजीबी एजेंट जियॉर्जी रोगोजिन द्वारा ये अंधविश्वास के प्रति रूचि भरी गई है। रोजोगिन खुद एक केजीबी कमांडर थे जिन्हें पैरानॉर्मल रिसर्चिंग टेलीपैथी, पैरासाइकलॉजी जैसे क्षेत्रों में इंटरस्ट था। उनका देहांत 2014 में हो गया। मगर उनका असर आज भी पुतिन पर है।

रिपोर्टर के मुताबिक पहले जॉर्जी ने बताया था कि वो दूसरों का दिमाग पढ़ सकते हैं। इसके बाद उन्होंने पुतिन से कहा कि पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री मेडेलीन अलब्राइड रूस से नफरत करते हैं और इस फिराक में थे कि रूस से साइबीरिया छीन लिया जाए ताकि वो रिजर्ब ऑयल तक पहुँच सकें। बताते हैं कि इस दावे के बाद रूस ने बिन तथ्यों के ये बातें दोहराईं थी और कहा था कि उन्हें करीबी सलाहकार से यह सब पता चला है।

कथिततौर पर पुतिन को साइबीरिया के एक तांत्रिक एलेक्जेंडर गैबीशेव का डर भी सताता है। उसने एक बार कहा था कि वो अपने तंत्र से पुतिन के ईर्द-गिर्द से शैतानों को हटा देगा। यह सुन पुतिन घबरा गए थे और बाद में उसे पकड़कर जेल में डरवा दिया था। फिलहाल गैबीशेव एक साइकेट्रिक अस्पताल में है।

बच्चे कहलाएँगे बम, बंदूक, सैटेलाइट… ड्रेस और हेयर कट के बाद उत्तर कोरिया में नाम को लेकर भी फरमान: स्किनी ​जींस, लेदर जैकेट पहले से है बैन

उत्तर कोरिया और उसका तानाशाह किम जोंग उन (Kim Jong) अजीबोगरीब फरमानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहता है। अब फरमान बच्चों के नाम को लेकर आया है। इसके तहत बच्चों के नाम के लिए वे कोरियाई शब्द तय किए गए हैं जिनका अर्थ बम, बंदूक, सैटेलाइट वगैरह है। कहा गया है कि बच्चों के नाम नाजुक होने की जगह सख्त होने चाहिए और उससे देशभक्ति की झलक मिलनी चाहिए।

बच्चों के चोंग इल (बंदूक), चुंग सिम (वफादारी), पोक इल (बम) और यूआई सॉन्ग (सैटेलाइट) जैसे नाम रखने के आदेश दिए गए हैं। वे हैं-देशभक्ति वाले नाम रखने को कहा है। साथ ही दक्षिण कोरिया में ए आरई (प्यार करने वाला) और सु एमआई (सुपर ब्यूटी) जैसे प्रचलित नाम जिनसे प्यार, सुंदरता जैसे भावनाओं का प्रकटीकरण होता है उनको बदलने के भी आदेश दिए गए हैं। किम जोंग के मुताबिक ये नाम पश्चिमी संस्कृति से प्रेरित हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नवंबर 2022 से ही उत्तर कोरिया के निवासियों को नाम बदलने के लिए लगातार नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इस साल के अंत तक नागरिकों को अपना नाम बदल कर कुछ क्रांतिकारी नाम रखने का समय दिया गया है। यही नहीं उन्हें अपने नाम के आखिरी में कुछ ऐसा जोड़ना होगा, जिससे राजनीतिक संदेश जाए। इस आदेश से उत्तर कोरिया के अधिकतर लोग नाखुश हैं। कुछ लोगों ने यह पूछने का साहस भी जुटाया है कि क्या वे अपने बच्चों को ऐसे नाम दे सकते हैं, जो वर्तमान में भुखमरी और उत्पीड़न के युग को दर्शा सके।

डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, एक नागरिक ने रेडियो फ्री एशिया (RFA) को बताया कि निवासी इस बात की शिकायत कर रहे हैं कि अधिकारी लोगों को अपना नाम बदलने को मजबूर कर रहे हैं। इस आदेश से नाराज माता-पिता कह रहे हैं कि अत्याचार अपने चरम पर है। एक परेशान नागरिक ने कहा, “मनुष्य अपना नाम कैसे रखें, इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। उत्तर कोरिया के लोग मजाक बना रहे हैं कि क्या वह अपने बच्चों को योंग चोल, मैन बोक या सन हुई जैसे नाम देंगे। ये सभी पुराने जमाने के नाम हैं।”

बता दें कि नॉर्थ कोरिया में जींस से लेकर लेदर जैकेट तक प्रतिबंधित है। हेयर कट का भी विशिष्ट तरीका तय है। देश के युवा तानाशाह का मानना है कि पश्चिमी फैशन देश के युवाओं को भटका सकता है। यहाँ तक कि बालों को रंगने और पश्चिमी ब्रांड की शर्ट पहनने पर भी प्रतिबंध है। अधिकारियों का कहना है कि उत्तर कोरियाई शैली के पोशाक और बाल ने देश में समाजवादी जीवन शैली स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन नियमों को तोड़ने वालों को प्रशासन ‘पूँजीवादी अपराधी’ मानता है।

केरल में बेटा-बेटी एक समान नहीं? मौलवियों के दबाव में वामपंथी सरकार को योजना में करना पड़ा बदलाव, मुस्लिम संगठनों ने दिया था शरिया का हवाला

गरीबी उन्मूलन को लेकर केरल सरकार द्वारा चलाई जा रही योजना ‘कुदुम्बश्री’ को लेकर विवाद हो गया है। दरअसल, ‘कुदुम्बश्री योजना’ के अंतर्गत स्वयंसेवी सहायता समूह ने अपनी स्वयंसेविकाओं को बेटे-बेटियों को समान अधिकार देने वाली शपथ लेने के लिए कहा था। लेकिन, मौलवियों ने इस शपथ को शरिया (इस्लामिक कानून) के खिलाफ बताते हुए विरोध किया। इसके बाद अब, राज्य सरकार ने इस शपथ पर रोक लगा दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केरल के मुस्लिमों का एक समूह ‘समस्थ केरल जाम-इयुथुल कुतबा कमेटी’ ने ‘कुदुम्बश्री योजना’ के अंतर्गत कार्य कर रही महिलाओं की शपथ का यह कहते हुए विरोध किया है कि यह शरिया (इस्लामी कानून) के खिलाफ है। साथ ही, मौलवियों का कहना है कि इस शपथ के माध्यम से राज्य सरकार, केंद्र सरकार को समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने में मदद कर रही थी।

दरअसल, ‘कुदुम्बश्री योजना’ से जुड़ी महिलाओं द्वारा ली जा रही इस शपथ के एक भाग में कहा गया था, “हम अपने बेटे-बेटियों को संपत्ति में बराबर का अधिकार देंगे।” शपथ के इसी हिस्से को लेकर ‘समस्थ केरल जाम-इयुथुल कुतबा कमेटी’ ने कहा है कि ‘कुदुम्बश्री योजना’ से जुड़ी महिलाओं को यह शपथ नहीं लेनी चाहिए।

मुस्लिम संगठन समस्थ केरल जाम-इयुथुल कुतबा कमेटी के नेता नजर फैजी कूडथाई ने विरोध जताते हुए फेसबुक में एक पोस्ट किया है। इस पोस्ट में उन्होंने कहा है, “यह शपथ संविधान के खिलाफ है। कुरान के अनुसार, एक पुरुष के पास दो महिलाओं के बराबर संपत्ति का हिस्सा होता है और महिला को पिता की संपत्ति से पुरुष को मिलने वाली संपत्ति का केवल आधा हिस्सा दिया जाता है।”

फैजी ने यह भी कहा, “लैंगिक समानता के नाम पर सरकार धर्म के मूल सिद्धांतों में हस्तक्षेप कर रही है। इस तरह के उपायों से देश में समान नागरिक संहिता लागू करने के केंद्र के कदम में मदद मिलेगी।” फैजी कूडाथाई के इस बयान के बाद जमात-ए-इस्लामी सहित कई अन्य मुस्लिम संगठनों ने भी उनका समर्थन किया है। नाम न छापने की शर्त पर ‘कुदुम्बश्री मिशन’ के एक अधिकारी ने कहा, “हमें शपथ न कराने का आदेश दिया गया है और कहा गया है कि कुछ समय बाद एक अन्य शपथ उपलब्ध कराई जाएगी।”

हालाँकि, इस मामले में विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर हमला बोला है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने कहा, “सरकार ने कट्टरपंथी ताकतों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। सबरीमाला आंदोलन के मद्देनजर पुनर्जागरण आंदोलन और सरकार द्वारा बनाई गई मानव श्रृंखला कहाँ है? हजारों तीर्थयात्रियों पर हमला किया गया और पुलिस ने दो महिला कार्यकर्ताओं को मंदिर में प्रवेश करने में भी मदद की। इस बार आत्मा क्यों गायब है?” भाजपा की ओर से यह भी कहा गया है कि स्कूलों में समान यूनिफॉर्म पेश करने का सरकार का कदम भी इन ताकतों के प्रकोप के डर से वापस ले लिया गया था।

अमेरिका का पैसा और सिक्योरिटी, चीन का लैब… ऐसे लीक हुआ कोरोना वायरस: वुहान में काम कर चुके वैज्ञानिक की किताब में खुलासा – मानव निर्मित है कोविड

कोरोना की उत्पत्ति को लेकर तरह-तरह के दावे किए जाते रहे हैं। कई इसे जीव-जनित बताते हैं तो कई लोगों का मानना है कि यह चीन स्थित वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (WIV) से लीक हुआ था। अब इस दावे को और बल मिल रहा है। यहाँ काम कर चुके एक वैज्ञानिक ने इस संबंध में एक अहम खुलासा किया है।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान ‘द सन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन स्थित ‘वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी’ में काम करने वाले वैज्ञानिक एंड्रयू हफ का दावा है कि कोविड-19 एक मानव निर्मित वायरस है, जो WIV से लीक हो गया था।

एंड्रयू हफ ने वायरस का अध्ययन करने वाले न्यूयॉर्क स्थित एक गैर-लाभकारी संस्था के लिए भी काम किया है। उन्होंने कहा कि कोविड को ढाई साल से पहले चीन में वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से लीक किया गया। हफ ने इसे 9/11 के बाद की सबसे बड़ी अमेरिकी खुफिया विफलता बताया और इसके लिए अधिकारियों को दोषी ठहराया।

यह प्रयोगशाला कोविड की उत्पत्ति के बारे में बहस के केंद्र रहा है। हालाँकि, चीन के सरकारी अधिकारियों और प्रयोगशाला कर्मियों ने हमेशा इससे इनकार किया है कि वायरस लैब से लीक हुआ था। महामारी वैज्ञानिक हफ ने अपनी नई पुस्तक ‘द ट्रूथ अबाउट वुहान’ में कहा कि चीन में कोरोना वायरस अमेरिकी सरकार के वित्त पोषण का परिणाम था। उन्होंने कहा कि चीन में एक्सपेरिमेंट को LAX सुरक्षा के साथ किया गया, जिसके कारण वुहान लैब में लीक हुआ। ‘लॉस एंजिल्स एयरपोर्ट सिक्योरिटी (LAX सुरक्षा)’ लॉस एंजिल्स एयरपोर्ट पुलिस का एक प्रभाग है।

उन्होंने अपनी पुस्तक में कहा, “विदेशी प्रयोगशालाओं में बायो-सेफ्टी (खतरनाक रोगाणुओं से निपटने के उपाय), बायो-सिक्योरिटी (वायरस के प्रसार को रोकना) और को सुनिश्चित करने और जोखिम प्रबंधन के लिए जरूरी तैयारियाँ नहीं की गई थीं। अंततः यही चीजें WIV से वायरस लीक होने का कारण बनीं। पिछले दो वर्षों में लगातार ऐसे सबूत सामने आए हैं जिससे पता चलता है कि वायरस लैब से लीक हो गया था।

हफ ‘इकोहेल्थ एलायंस’ के एक पूर्व उपाध्यक्ष हैं, जो न्यूयॉर्क स्थित एक गैर-लाभकारी समूह है। ये अमेरिका के ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH)’ के साथ एक दशक से अधिक समय से चमगादड़ों में अलग-अलग कोरोना वायरस का अध्ययन कर रहा है और इस संस्था ने वुहान लैब से भी घनिष्ठ संबंध बनाए थे।

वैज्ञानिक हफ ने लिखा, “चीन पहले दिन से यह जानता था कि कोरोना वायरस को जेनेटिक इंजीनियरिंग के माध्यम से बनाया गया था। इसका जिम्मेदार अमेरिका को ठहराया जाना चाहिए, क्योंकि बायोटेक्नोलॉजी की ये तकनीक उसी ने चीन को दी थी।” बता दें कि ‘जेनेटिक इंजिनयरिंग’ के माध्यम से किसी जीव के जीन्स में छेड़छाड़ कर के उसके स्वभाव को बदला जा सकता है।

हवाई सफर हुआ आसान, अब करिए Digi Yatra: आपका चेहरा ही बोर्डिंग पास, जानिए FRT का कब-कहाँ-कैसे मिलेगा फायदा

डिजी यात्रा (Digi Yatra)। डिजी यात्रा सेंट्रल इकोसिस्टम (DYCE)। चेहरा पहचान प्रणाली (FRT)। यदि हवाई यात्रा करते हैं तो इन शब्दों से खुद का नाता जोड़ लीजिए, क्योंकि अब चेहरा ही आपका बोर्डिंग पास है।

1 दिसंबर 2022 को केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ‘डिजी यात्रा’ (Digi Yatra) की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य, कॉन्टैक्ट लेस-पेपर लेस यात्रा को बढ़ावा देते हुए यात्रियों को सुविधा उपलब्ध कराना है। फिलहाल, यह सुविधा कुछ चुनिंदा एयरपोर्ट पर ही शुरू की गई है। लेकिन आने वाले समय में, देशभर के सभी एयरपोर्ट पर यह सुविधा शुरू की जानी है।

क्या है डिजी यात्रा

प्लेन में यात्रा करने वाले यात्रियों को एयरपोर्ट में एंट्री के लिए लाइन में लगना पड़ता था। जहाँ, मौजूद अधिकारी उनके बोर्डिंग पास और आईडी की जाँच करते थे। लेकिन Digi Yatra के उपयोग से यात्रियों का चेहरा ही उनका बोर्डिंग पास होगा। यानी जिस एयरपोर्ट पर यह सुविधा उपलब्ध होगी, वहाँ यात्रियों को बोर्डिंग पास और आईडी कार्ड ले जाने की जरूरत नहीं है।

डिजी यात्रा के अंतर्गत एयरपोर्ट पर यात्रियों के डेटा की डिजिटल प्रोसेसिंग होगी। एयरपोर्ट के चेक प्वाइंट्स (जाँच केंद्रों) पर बोर्डिंग पास और आईडी की जाँच की जगह अब चेहरे की जाँच होगी। एयरपोर्ट में एंट्री से लेकर सिक्योरिटी और एग्जिट तक सब कुछ फेस रिकॉगनिशन (चेहरे की पहचान) से होगा। यही नहीं, सेल्फ-बैग ड्रॉप और ड्रॉप इन जैसी सुविधाएँ भी इसमें शामिल की गईं हैं।

डिजी यात्रा के लिए कैसे करें रजिस्ट्रेशन

डिजी यात्रा सुविधा का लाभ लेने के लिए यात्रियों को Google Play Store या iOS ऐप स्टोर से Digi Yatra ऐप डाउनलोड करना होगा। इसके बाद, आधार कार्ड से लिंक मोबाइल नंबर एंटर करते हुए रजिस्ट्रेशन की शुरुआत करनी होगी। फिर, यात्री नाम, ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर और एक पहचान पत्र (आधार, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी इत्यादि) का उपयोग कर खुद को रजिस्टर्ड कर सकते हैं।

इस दौरान, यात्रियों को अपनी एक फोटो (सेल्फी) भी अपलोड करनी होगी। ये सभी जानकारियाँ दर्ज करने के बाद डिजी यात्रा आईडी बन जाएगी। टिकट बुक करते समय इस आईडी को शेयर करना होगा। इसके बाद, एयरलाइन कंपनियाँ, इस आईडी और यात्री के डेटा को एयरपोर्ट के साथ शेयर करेंगीं।

एयरपोर्ट पर कैसे काम करेगा डिजी यात्रा

एयरपोर्ट पर पहुँचने के बाद यात्री को एंट्री गेट यानी ई-गेट पर अपने बोर्डिंग पास या ई-टिकट (प्रिंट या मोबाइल में सॉफ्ट कॉपी) को स्कैन करेगा। इसके बाद, बार कोड/क्यूआर कोड को स्कैन करने पर सिस्टम यात्री की जानकारी और उसकी फ्लाइट से संबंधित जानकारी दिखाएगा।

फिर, डिजी यात्रा आईडी फेस रिकॉग्निशन (FRT) द्वारा पहचान को वेरिफाई करेगा। ई-गेट पर टिकट और डिजी यात्रा आईडी के वेरिफिकेशन होने के बाद यह गेट खुल जाएगा। 

डिजी यात्रा के लाभ

हम आज एक ऐसे युग में हैं जहाँ लगभग सभी चीजें सिंगल क्लिक में उपलब्ध हैं। चाय-पान से लेकर बड़े-बड़े उद्योगों में ऑन लाइन सर्विस का उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में एयरपोर्ट पर यात्रियों की सुविधा के लिए शुरू की गई ‘डिजी यात्रा’ सर्विस बेहद कारगर साबित होने वाली है।

डिजी यात्रा के उपयोग से एयरपोर्ट पर यात्रियों को लाइन में अधिक समय नहीं लगेगा। साथ ही, सभी चेक पॉइंट्स पर बोर्डिंग पास और आईडी कार्ड दिखाने की जरूरत नहीं होगी। चूँकि, सिस्टम यात्रियों के चेहरे को स्कैन करने के बाद एयरपोर्ट में एंट्री देता है, ऐसे में सुरक्षा जाँच में भी कम समस्याएँ आएँगीं।

इसके अलावा, एयरपोर्ट संचालकों के पास वहाँ मौजूद लोगों की संख्या की भी जानकारी भी उपलब्ध रहेगी। इससे वह, भीड़ को आसानी से मैनेज कर पाएँगे। दुबई, सिंगापुर, अटलांटा और जापान सहित दुनिया भर के विभिन्न एयरपोर्ट पर ‘डिजी यात्रा’ जैसी ही फेस रिकग्निशन सर्विस का उपयोग किया जा रहा है।

इन एयरपोर्ट पर शुरू की गई है ‘डिजी यात्रा’ सर्विस

फिलहाल, डिजी यात्रा सर्विस की शुरुआत देश के तीन एयरपोर्ट दिल्ली, बेंगलुरु और वाराणसी में की गई है। इसके बाद, मार्च 2023 तक हैदराबाद, कोलकाता, पुणे और विजयवाड़ा एयरपोर्ट पर भी इस सर्विस को लॉन्च किया जाएगा। उड्डयन मंत्रालय की योजना डिजी यात्रा सर्विस को देशभर के सभी एयरपोर्ट में लॉन्च करने की है।

बता दें कि एयर इंडिया, विस्तारा और इंडिगो एयरलाइंस से जुड़ी फ्लाइट से यात्रा करने वाले सभी यात्री डोमिस्टिक यात्रा के दौरान इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। वहीं, स्पाइसजेट, गोफर्स्ट और अकासा एयर ने अब तक डिजी यात्रा सर्विस की शुरुआत नहीं की है। ऐसा कहा जा रहा है कि इस सर्विस का उपयोग बढ़ने के बाद सभी एयरलाइन कंपनियाँ इसका इस्तेमाल करती दिखाई देंगीं।

आज Moonlighting पर चली जाती है नौकरी, कभी CJI भी यही करते थे: जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने बताया – आकाशवाणी में RJ था, संगीत से अब भी प्रेम

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ ने खुलासा किया कि वह ऑल इंडिया रेडियो (AIR) में एक रेडियो जॉकी के तौर मूनलाइटिंग कर चुके हैं। सीजेआई ने शनिवार (3 दिसंबर, 2022) को इंडिया इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लीगल एजुकेशन एंड रिसर्च, गोवा के पहले शैक्षणिक सत्र का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने ‘प्ले इट कूल, ए डेट विद यू और संडे रिक्वेस्ट’ जैसे कार्यक्रमों को भी होस्ट किया था।

डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा, “बहुत से लोग इस बारे में नहीं जानते हैं कि मैं अपने शुरुआती दिनों (20वें दशक) में रेडियो जॉकी के तौर पर मूनलाइटिंग भी करता था। संगीत के लिए मेरा प्यार आज भी कायम है। कानून के क्षेत्र में संगीत सुनना मुश्किल होता है। इसलिए जब भी मैं अपने काम से फ्री होकर घर जाता हूँ, तो संगीत का आनंद जरूर लेता हूँ।” उनकी वीडियो क्लिप को बार एंड बेंच ने अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है।

इस कार्यक्रम में उन्होंने 20 के दशक की शुरुआत में अपने जीवन, कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) के अलावा कई और मुद्दों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि शायद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज के सामने एक समस्या यह थी कि वे कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) को क्रैक करने के लिए छात्रों की क्षमता को जाँचते हैं। उनके अनुसार, जरूरी नहीं है कि जिन छात्रों ने सीएलएटी (CLAT) क्रैक कर लिया हो, वे कानून की पढ़ाई के लिए सही सोच रखते हों।

क्या है मूनलाइटिंग?

मूनलाइटिंग (Moonlighting), यानी एक समय में एक से अधिक कंपनी के लिए काम करना। विप्रो के चेयरमैन ऋषद प्रेमजी (Rishad Premji) ने इसको लेकर सितंबर 2022 में ट्वीट किया था। उन्होंने ‘मूनलाइटिंग’ की तुलना धोखाधड़ी से करते हुए अपने ट्वीट में लिखा था, “तकनीक उद्योग में मूनलाइटिंग करने वाले लोगों के बारे में बहुत सारी बकवास है। सादा और सरल भाषा में यह धोखा है।” वहीं, ऋषद प्रेमजी से उलट ‘टेक महिंद्रा’ के सीईओ सीपी गुरनानी ने ‘मूनलाइटिंग (Moonlighting)’ का समर्थन करते हुए लिखा था, “समय के साथ बदलते रहने के लिए मूनलाइटिंग जरूरी है।”

खुद को ‘पैगंबर’ बता कर ली 20 शादी, बेटी को भी बनाया बीवी: चेलों से भी कहता- मेरी बेटियों से सेक्स करो, अब जेल पहुँचा

अमेरिका के अरीजोना में बहुविवाह (Polygamist) की पैरवी करने वाले सैमुअल रैपली बेटमैन (Samuel Rappylee Bateman) नाम के कट्टरपंथी की 20 बीवियाँ निकली हैं। आरोपित खुद को ‘पैगंबर’ बताते हुए अपनी बेटी से शादी कर चुका है। उसने ज्यादातर शादियाँ 15 साल से कम उम्र की लड़कियों से की है। उसके ऊपर व्यभिचार, वयस्कों और बच्चों से ग्रुप सेक्स, बाल यौन तस्करी जैसे आरोप हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार सैमुअल ने 2019 में 50 लोगों का एक छोटे समूह का नेतृत्व शुरू किया था। समूह का नाम फंडामेंटालिस्ट चर्च ऑफ जीसस क्राइस्ट ऑफ लेटर-डे सेंट्स (Fundamentalist Church of Jesus Christ of Latter-Day Saints) हैं। वो इस समूह को कंट्रोल करते-करते ही खुद को ‘पैगंबर’ बताने लगा। एक समय आया जब उसने अपनी ही बेटी से शादी करने की इच्छा व्यक्त की। इसके अलावा उसने अपने तीन फॉलोवर्स को ये तक कहा कि वो लोग भी उसकी बेटियों के साथ सेक्स करें वो भी तब जब उनमें से एक लड़की सिर्फ 12 की थी।

सैमुअल लड़कियों से भी कहता था कि वो अपनी इज्जत ईश्वर के नाम पर त्यागें। ईश्वर फिर से उनके शरीर को सही कर देगा और उनके शरीर में दोबारा वो झिल्ली आ जाएगी।

एफबीआई दस्तावेजों के मुताबिक 46 साल का सैमुअल अब तक 20 औरतों से शादी कर चुका है। इनमें अधिकतर 15 से कम की थीं। जब पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया उस समय भी राज्य में गाड़ियों से लड़कियों को इधर-उधर लेकर जा रहा था। गाड़ी में एक सोफा और टॉयलेट की बाल्टी थी। तब, पुलिस ने उसे पकड़ा था। पुलिस ने कहा था कि इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि वो अरीजोना, उताह, नेवादा में लड़कियों को ट्रांस्पोर्ट कर रहा था।

जब पुलिस ने उसकी गाड़ी रोकी तो उसमें दो लड़कियाँ थीं। इसके बाद ही पुलिस ने बाल शोषण करने पर उस पर मुकदमा दर्ज कर लिया। पहले उसे इस केस में बेल मिल गई। लेकिन उसे दोबारा अन्य आरोपों में पकड़ा गया। सबूत जुटाने के लिए पुलिस ने छापेमारी की और 9 पीड़ितों को अपने संरक्षण में ले लिया। एफबीआई ने छापेमारी के बाद उसको अरीजोना जेल में डाल दिया। सितंबर से उसके विरुद्ध सबूत जुटाए जा रहे हैं कि उसने कम उम्र की औरतों से शादी की और उनसे शारीरिक संबंध बनाए।

मजदूरी कर पैसे भेजता था पति, मकान मालिक संग लूडो खेलती पत्नी, एक दिन खुद को ही हार गई: मैसेज भेज कहा- मेरा चक्कर छोड़ो, आकर लिखा-पढ़ी कर लो

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। मकान मालिक से लूडो के खेल में एक महिला ने खुद को दांव पर लगाया और हार गई। इसके बाद राजस्थान के जयपुर में मजदूरी करने वाले अपने पति को संदेश भेजा कि वह अब उसका चक्कर छोड़ दे। आकर लिखा-पढ़ी कर ले। पीड़ित पति ने पुलिस से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।

बताया जा रहा है कि मकान मालिक ने इस व्यक्ति की पत्नी और दो बच्चों को अपने पास रख रखा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लूडो में हारने वाली महिला मूल रूप से अमेठी की रहने वाली ही ,प्रतापगढ़ के बेल्हा क्षेत्र में किराए के एक मकान में रहती है। महिला का पति पिछले 6 माह से जयपुर में मजदूरी कर रहा है। उसके भेजे पैसे से महिला मकान का भाड़ा और घर का अन्य खर्च चलाती थी। इस बीच उसे मकान मालिक के साथ लूडो खेलने की लत लग गई। यही लत आगे चल कर जुए में बदल गई। महिला लूडो के माध्यम से हार-जीत के लिए कभी पैसे तो कभी अन्य सामान दाँव पर लगाने लगी थी।

बताया जा रहा है कि जुए की लत में महिला धीरे-धीरे एक-एक सामान हारती रही। वो अपने सारे पैसे भी हार चुकी थी। एक दिन महिला ने मकान मालिक के आगे खुद को ही दांव पर लगा दिया। वो बाजी भी मकान मालिक ने जीत ली। इसके बाद महिला को उसकी बेटी सहित मकान मालिक ने अपने पास रख लिया। महिला के 2 बच्चे हैं जो मकान मालिक के ही पास हैं। कहा जा रहा है कि महिला के पति ने अपनी पत्नी को समझाने की कोशिश भी की लेकिन वो मानने के लिए तैयार नहीं है।

महिला के पति ने पुलिस को बताया है कि पत्नी ने ही उसको फोन कर पर खुद के लूडो में हार जाने की जानकारी दी थी। अपनी शिकायत में पीड़ित पति ने लिखा है कि फोन पर उससे पत्नी ने प्रतापगढ़ आकर लिखा-पढ़ी करने के लिए कहा। साथ ही उसे धमकी देते हुए कहा है कि अगर हमारे चक्कर में पड़ोगे तो काट कर फेंक दिए जाओगे।