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‘तुम्हारे बड़े होने का नहीं कर सकता इंतजार…’ : मिस मार्वेल के एक्टर पर नाबालिग के यौन शोषण का इल्जाम, पीड़िता ने कहा- ‘मुझको D*^k की फोटो भेजी’

डिज्नी प्लस हॉटस्टार की मशहूर वेब सीरीज मिस मार्वल में नजर आने वाले एक्टर मोहन कपूर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा है। पीड़िता का आरोप है कि जब वह 15 साल की थी, तब मोहन कपूर ने उसका यौन उत्पीड़न किया था। पीड़िता ने ट्विटर में अपनी #MeToo स्टोरी शेयर करते हुए मोहन कपूर से मुलाकात और यौन उत्पीड़न तथा आखिरी बार बातचीत के बारे में बताया है।

पीड़िता के पोस्ट का स्क्रीनशॉट

मोहन कपूर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली पीड़िता ने कई ट्वीट किए हैं। उसने पहले ट्वीट में कहा है, “जब मैं 14 साल की थी तो मैं इस सीरियल एक्ट्रेस की फैन थी और हम दोस्त बन गए। उस वक्त उनके पार्टनर रहे मोहन कपूर की भी मुझसे दोस्ती हो गई थी। मैं उन दोनों की बहुत इज्जत करती थी और उन्हें अपना दूसरे पैरेंट्स मानती थी। मैंने उन्हें अपनी स्ट्रेस से भरी जिंदगी के बारे में भी बताया था। लेकिन, मोहन कपूर ने मेरा फायदा उठाया।”

पीड़िता के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

पीड़िता ने अगले ट्वीट में लिखा, “हम लोग लगातार बातें कर रहे थे। लेकिन, फिर मुझे लगा कि वह मेरे साथ फ्लर्ट कर रहे हैं। जब, मैं जब 15 साल की थी तो मोहन कपूर ने मुझे अपने डि* की फोटो भेजी। वो लगातार मुझसे माफी माँग रहे थे और परेशान थे। मैंने उन्हें माफ कर दिया था, लेकिन उसके बाद उन्होंने मेरा शोषण करना शुरू कर दिया।”

अपने ट्वीट में पीड़िता ने यह भी कहा है, “उसने मुझसे कहा कि वह मुझसे प्यार करता है और शादी करना चाहता है। वह मेरे साथ बड़ों के जैसा व्यवहार करना चाहता था और वह मेरे बड़े होने का इंतजार नहीं कर सकता ताकि मैं उसके साथ सो सकूँ। तब, मुझे पता चला कि मोहन कपूर मुझे सेक्स के लिए तैयार कर रहे थे।”

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया “मोहन कपूर की पार्टनर (अब एक्स) जानती थी कि वह किस तरह का आदमी है। वह यह भी जानती थी कि वह मुझसे बात कर रहा था। जब मैं उससे व्यक्तिगत रूप से मिली, तो मैंने उसे वो सब कुछ बताया जो हो रहा था। एक साल बाद जब उसने मुझे मैनुपुलेट करना शुरू किया तो मैंने उससे बात करना बंद कर दिया। मैं इस स्थिति से बहुत उदास थी।”

पीड़िता के ट्वीट् का स्क्रीनशॉट

पीड़िता ने मोहन कपूर पर आरोप लगाते हुए अपने अगले ट्वीट में कहा है, “मैंने उनसे साल 2020 में आखिरी बार बात की थी। मैंने कहा था कि अब मैं यह सब और नहीं झेल सकती। मैं उम्मीद कर रही थी कि उसने मुझे जो ट्रॉमा दिया है उसके लिए वो माफी माँगेंगे और समझेंगे। लेकिन, उन्होंने कहा कि वो मुझ पर यकीन नहीं कर सकते। उन्हें, फिर से यकीन दिलाने का एक ही रास्ता है कि मैं उनसे वीडियो चैट करूँ और न्यूड फोटो भेजूँ। इसके बाद ही दोनों में दोस्ती होगी।”

एक्टर मोहन कपूर पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने वाली पीड़िता ने फिलहाल अपना ट्विटर अकाउंट प्राइवेट कर लिया है। हालाँकि, उसके ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। अब तक यह साफ नहीं हो सका है कि पीड़िता आखिर कौन है और वह मोहन कपूर की जिस एक्स के बारे में बात कर रही है वह कौन है। यह मामले में, अब तक मोहन कपूर की सफाई भी सामने नहीं आयी है।

NDTV और रवीश कुमारः अब वो फिरते हैं तन्हा लिए दिल को, एक जमाने में मिजाज उनका सर-ए-अर्श-ए-बरीं था

धनबाद रेलवे स्टेशन के बाहर रामचरितर की चाय की दुकान है। एनडीटीवी (NDTV) से मेरा पहला परिचय यहीं हुआ था। यह तब की बात है जब पत्रकारिता से अपना रिश्ता जुड़ा नहीं था। एनडीटीवी का 24 घंटे वाला टीवी चैनल बस शुरू ही होने वाला था। एनडीटीवी नामक टीवी चैनल के आगमन की मुनादी करता हुआ एक होर्डिंग रामचरितर की चाय की दुकान के सामने लगा था।

चाय पी रहे लोगों में आईएसएम धनबाद के एक प्रोफेसर भी थे। उन्होंने होर्डिंग पर लिखे ‘जुबां पर सच, दिल में इंडिया’ की मीमांसा से अपनी बात शुरू की। प्रणय रॉय वगैरह तक कई बातें बोली। सच कहूँ तो उस समय उन बातों से खुद को जुड़ा हुआ नहीं पा रहा था। क्योंकि न प्रणय रॉय को जानता था, न एनडीटीवी को। सालों बाद जब इसी धंधे में रच-बस गया तो एनडीटीवी, उसके टैग लाइन और प्रणय रॉय को लेकर उन प्रोफेसर साहब की कही हर बात से जुड़ता गया।

ऐसा नहीं है कि होर्डिंग दर्शन ने मुझे एनडीटीवी से जोड़ दिया। मैं एनडीटीवी से तब भी नहीं जुड़ा जब अचानक से एक दिन उसके स्टूडियो में एंट्री मिली गई। मैं दिल्ली एक शादी में शामिल होने आया था। मेरे गृह जिले मधुबनी के एक सीनियर उस समय दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ते थे। उनसे मिलने गया। उन्होंने बताया कि एनडीटीवी की गाड़ी आ रही है। कुछ लोगों को बतौर गेस्ट ले जाना है एनडीटीवी के एक कार्यक्रम में। कार्यक्रम का नाम था शायद ‘गुगली’। नवजोत सिंह सिद्धू उसमें बतौर एक्सपर्ट आते थे। एंकर कोई महिला थी, नाम याद नहीं। मैं भी उसी गाड़ी में सवार हो अर्चना कॉम्पलेक्स पहुँच गया। एक सवाल भी मिला था, एक्सपर्ट से पूछने को। लेकिन उस कार्यक्रम के बीच में ही कोई ब्रेकिंग न्यूज आ गई और उस दिन गुगली का वह एपिसोड पूरा नहीं हुआ। अपन न सवाल पूछ सके, न टीवी की स्क्रीन पर चेहरा जूम हो पाया।

समय बीतता गया। लक बाय चांस पत्रकारिता के ही धंधे में आ गया। प्रभात खबर धनबाद में काम करते हुए पहली बार एनडीटीवी से जुड़ा। एनडीटीवी के एक संपादक धनबाद आए। उन्हें झरिया में जमीन के नीचे लगी आग पर स्टोरी करनी थी। उसी सिलसिले में मुलाकात हुई। उन्होंने काफी सराहा। कहा कि यदि दिल्ली में काम करने का मूड बने तो आओ। नंबर, पता सब कुछ दिया। कुछ महीने बाद अपन दिल्ली पहुँच गए।

राजधानी एक्सप्रेस का वो सफर कल्पनाओं में कटा। कल्पनाओं में एनडीटीवी का स्टाफ बन गया। बीट भी खुद से ही तय कर लिया। दिल्ली पहुँच संपादक जी को कॉल किया और अर्चना कॉम्पलेक्स पहुँच गया। संपादक जी नहीं मिले। रिसेप्शन से ही एक सज्जन के पास भेज दिया गया। उन्होंने बात की और विदा कर दिया। उन सज्जन का कहना था कि NDTV में काम करने के लिए जो ‘योग्यता’ चाहिए वह मेरे पास नहीं है। आश्चर्यजनक तौर पर जिस बॉयोडाटा के आधार पर एनडीटीवी में खारिज हो गया था, बाद में उसी बॉयोडाटा ने उसी दिल्ली में दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आउटलुक जैसे मीडिया संस्थानों के दरवाजे खोले।

ऐसा नहीं है कि नौकरी नहीं मिलने के कारण मुझे एनडीटीवी से नफरत हुई। इससे भी नाराज नहीं हुआ कि बुलाकर भी धनबाद आने वाले उसके संपादक ने दिल्ली में मिलना उचित न समझा। मुझे एनडीटीवी से तब भी घिन न हुई, जब प्रभात खबर से ही इस संस्थान में पहुँचे एक शख्स ने यह कहा कि तुमने इंटरव्यू के दौरान एबीवीपी से अपने जुड़ाव के बारे में खुलकर क्यों बातें की। इससे मुझे घिन होनी भी नहीं चाहिए, क्योंकि एबीवीपी की पहचान से ही मुझे प्रभात खबर में नौकरी मिली थी।

दिल्ली की इस यात्रा ने मेरे भीतर एनडीटीवी के लिए प्रेम ही पैदा किया, क्योंकि मैं रवीश कुमार (Ravish Kumar) को जानने लगा। तब रवीश ब्लॉग लिखते थे। मुझे यह नहीं पता कि उस समय एनडीटीवी में उनकी क्या भूमिका थी। कुछ सालों बाद जब ‘रवीश की रिपोर्ट’ चली तो यह रिश्ता खत्म हो गया। दैनिक भास्कर में मेरे साथ काम करने वाले जानते हैं कि रवीश ने मुझे 2010 के आसपास एक दिन सोशल मीडिया पर ब्लॉक कर दिया। ऐसा नहीं कि मैंने उन्हें कोई अपशब्द कहे, जिसका वे अक्सर रोना रोते हैं। वजह केवल इतनी सी थी कि ‘रवीश की रिपोर्ट’ की सफलता के बाद भी उनको लेकर मेरी सोच नहीं बदली। आज पूरा देश उस सोच से अवगत है।

इन्हीं सालों में ये भी जाना कि मेरे बॉयोडाटा में जेएनयू नहीं था। आईआईएमसी नहीं था। लेफ्ट लॉबी की मुहर नहीं थी। सेटिंग वाले लिंक मेरे पास नहीं थे। वगैरह वगैरह। उन सज्जन ने सही कहा था कि एनडीटीवी में काम करने की मेरी ‘योग्यता’ नहीं थी। लेकिन इसका मुझे अफसोस नहीं है। मीडिया के जितने भी दुकान हैं वे इसी तरह चलते हैं। सबने अपनी अपनी तरफ से ‘विशिष्ट योग्यता’ तय कर रखी है।

कुल मिलाकर प्रणय रॉय का एनडीटीवी कोई पवित्र गाय नहीं था। न ही अकेला सूअर। जैसे धंधा चलाने के लिए मीडिया के अन्य दुकान विष्ठा में लेटते हैं, वैसा एनडीटीवी भी करता रहा। जैसे कर्मचारियों के चयन, उन्हें आगे बढ़ाने में विविध तरह की ‘योग्यता’ का ध्यान रखा जाता है, वैसा ही एनडीटीवी भी करता रहा। जैसे रवीश कुमार गए, पहले भी लोग जाते रहे हैं। आगे भी जाते रहेंगे।

एनडीटीवी और रवीश कुमार केवल इस मायने में अलग हैं कि वे विष्ठा को भस्म बताकर बेचते और खुद को बुद्धिजीवी बताते रहे। रवीश कुमार ने सच कहा है कि भारत में पत्रकारिता का कभी स्वर्ण युग नहीं रहा। पर यह भी उतना ही सच है कि स्वतंत्र भारत में परिवार की गोद में बैठ जाने वाली भारत की मुख्यधारा की मीडिया को सहलाने और चाटने की ‘योग्यता’ से विभूषित एनडीटीवी ने ही किया। इसी सहलाने और चाटने में रवीश कुमार यह भूल गए कि आलोचना और भौंकने में फर्क होता है। भौंकने से स्वर्ण युग नहीं आता, भस्म युग ही आता है, जिसमें खुद ही भस्मासुर होना पड़ता है।

भारत की पत्रकारिता को जिंदा रहने के लिए न तो एनडीटीवी की जरूरत है और न रवीश कुमार की। इसलिए लिबरल-सेकुलर विलाप में बहकर गले को गीला न करिए। कुछ करना है तो देखने-पढ़ने का नजरिया बदलिए। जब तक नजरिया नहीं बदलेंगे तब तक इसी तरह थेथरई को पत्रकारिता और थेथर को प्राइम टाइम एंकर बताकर ये मीडिया संस्थान आप पर थोपते रहेंगे।

‘जो कॉन्ग्रेस राम को नहीं मानती, उसने मुझे रावण कहा’: PM मोदी ने किया खड़गे के बयान पर पलटवार, बोले- जितना कीचड़ उछालोगे, उतना कमल खिलेगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार (01 दिसंबर,2022) को गुजरात के कलोल में चुनाव प्रचार करने पहुँचे। इस सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कॉन्ग्रेस पर जमकर निशाना साधा। प्रधानमंत्री मोदी ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के रावण वाले बयान का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस में मुझे गाली देने की होड़ लगी है। जितना कीचड़ उछाला जाएगा, उतना ज्यादा कमल खिलेगा।”

गुजरात ने मुझे जो ताकत दी है कॉन्ग्रेस उससे परेशान है- मोदी

पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष खड़गे के बयान को पूरे गुजरात का अपमान बताया। पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस रामभक्तों का सम्मान नहीं करती। न ही राम के अस्तित्व को मानती है। कॉन्ग्रेस अयोध्या में राममंदिर के पक्ष में भी नहीं थी। पीएम मोदी ने आगे कहा, “मैं कॉन्ग्रेस के नए अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का सम्मान करता हूँ। लेकिन वे मुझे 100 सिर वाला रावण बता रहे हैं।”

पीएम ने कहा, कॉन्ग्रेस पार्टी नहीं जानती कि ये रामभक्तों का गुजरात है। वे राम भक्तों की धरती पर रामभक्तों के सामने बोले कि मोदी के रावण की तरह 100 सिर हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “गुजरात ने मुझे जो ताकत दी है, वह कॉन्ग्रेस को परेशान करती है। पीएम मोदी ने इस बात पर हैरानी जताई कि उनपर निजी हमलों के बाद भी कॉन्ग्रेस के पदाधिकारी कोई पछतावा नहीं करते। पीएम ने कहा, कॉन्ग्रेस में एक परिवार को खुश करना फैशन बन गया है।

खड़गे ने क्या कहा था ?

इससे पहले 29 नवंबर, 2022 को गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान एक सभा को संबोधित करते हुए खड़गे ने पीएम मोदी के चेहरे पर बीजेपी के वोट माँगने को लेकर तंज किया था। खड़गे ने कहा था कि प्रधानमंत्री कहते हैं, मोदी को देखकर वोट दो। कितनी बार तुम्हारी सूरत देखें? हमने कॉर्पोरेशन चुनाव में तुम्हारी सूरत देखी। MLA चुनाव में, MP इलेक्शन में सूरत देखी। हर जगह पर, क्या रावण की तरह आपके 100 मुख हैं।

कॉन्ग्रेस को जनता देगी जवाब- अमित शाह

खड़गे के इस बयान के बाद से ही बीजेपी कॉन्ग्रेस पर हमलावर थी। उधर अहमदाबाद में चुनाव प्रचार करने पहुँचे गृह मंत्री अमित शाह ने भी खड़गे के बयान पर पलटवार किया है। अमित शाह ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने जब-जब प्रधानमंत्री मोदी का अपमान किया है, गुजरात की जनता ने वोट से जवाब दिया है। इस बार भी जनता कॉन्ग्रेस को जवाब देगी।

खून बहेगा… ब्राह्मणों वापस जाओ, भारत छोड़ो: JNU में वामपंथियों का आतंक, क्लास से लेकर प्रोफेसरों तक को धमकी

दिल्ली का जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर विवादों में है। विश्वविद्यालय परिसर में स्थित कई इमारतों की दीवारों पर विवादास्पद नारे लिखे गए। इसके साथ ही कुछ प्रोफेसरों के चैंबरों के गेट पर विश्वविद्यालय के बजाए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में जाने के लिए कहा गया है। इसका फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

छात्रों ने दावा किया कि विश्वविद्यालय परिसर के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज- II भवन की दीवारों पर ब्राह्मण और वैश्य समुदायों के खिलाफ नारे लिखे गए हैं। एक जगह लिखा है ‘ब्राह्मण-बनिया, हम आ रहे हैं बदला लेने’। एक जगह लिखा है ‘ब्राह्मण परिसर छोड़ो, ब्राह्मण भारत छोड़ो’। वहीं, एक जगह ‘अब खून बहेगा’ लिखा हुआ है।

वहीं, तीन प्रोफसरों के चैंबर के गेट पर ‘शाखा में जाओ’ लिखा गया है। इसको लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं, संघ से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने इसे वामपंथियों की बर्बरता बताया है।

JNU एबीवीपी के अध्यक्ष रोहित कुमार ने कहा, “एबीवीपी कम्युनिस्ट गुंडों द्वारा अकादमिक स्थानों में बड़े पैमाने पर जातिसूचक नारे लिखने की निंदा करता है। कम्युनिस्टों ने स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज- II बिल्डिंग में जेएनयू की दीवारों पर अपशब्द लिखे हैं। उन्होंने उन्हें डराने के लिए स्वतंत्र सोच वाले प्रोफेसरों के कक्षों को विरूपित किया है।”

रोहित कुमार ने कहा, “हमारा मानना है कि अकादमिक जगहों का इस्तेमाल बहस और चर्चा के लिए होना चाहिए, न कि समाज और छात्रों के समुदाय में जहर घोलने के लिए। यहाँ नफरत और गाली के लिए कोई स्थान नहीं है।”

रोहित कुमार ने कहा कि जिस महिला प्रोफेसर के गेट पर ‘गो बैक टू शाखा’ लिखा हुआ है, उन्हें साल 2019 में 3 दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया था। उन्होंने कहा कि आज जेएयू को हेट फैक्ट्री बना दिया गया है।

1500 फीट ऊँचा पहाड़, कँटीले रास्ते: बिहार के गनौरी पासवान ने 8 साल में बनाई शिव मंदिर के लिए 400 सीढ़ियाँ, दशरथ माँझी को मानते हैं आदर्श

बिहार में पत्नी के लिए पहाड़ का सीना चीरकर रास्ता बनाने वाले दशरथ माँझी को पूरी दुनिया जानती है। उन्हीं के रास्ते पर चलते हुए जहानाबाद के शिव भक्त गनौरी पासवान ने 1500 फीट ऊँचे पहाड़ को काटकर शिव मंदिर तक सीढ़ियाँ बना दीं।

बिहार के जहानाबाद से 30 किलोमीटर दूर हुलासगंज थाना क्षेत्र के जारु बनवरिया गाँव के पास ऊँची पहाड़ी पर बाबा योगेश्वर नाथ मंदिर है। जहाँ गनौरी भजन कीर्तन के लिए जाते थे। मंदिर जाने के लिए पहाड़ी की दुर्गम चढ़ाई करनी पड़ती थी। घंटों की मशक्कत के बाद भक्त यहाँ पहुँच पाते थे। कांटे और नुकीले पत्थरों से शिव भक्त घायल भी हो जाते थे। मंदिर तक पहुँचने में महिलाओं को तो और भी कठिनाई होती थी।

यह देख शिव भक्त गनौरी पासवान ने बाबा योगेश्वर नाथ धाम तक सीढियाँ बनाने की ठान ली। माउंटेन मैन दशरथ माँझी को अपना आदर्श समझने वाले गनौरी ने पत्थरों को काटकर सीढ़ी बनाने का काम शुरू कर दिया। लोगों के सहयोग और अपने पूरे परिवार के श्रमदान से लगभग 8 साल में काम पूरा हुआ। अब मंदिर तक पहुँचने के लिए एक नहीं बल्कि दो रास्ते बना दिए गए हैं। एक रास्ता जारू गाँव की ओर से और दूसरा बनवरिया गाँव की ओर से बनाया गया है। अब इस मंदिर तक पहुँचने में समय भी कम लगता है और ज्यादा परेशानी भी नहीं होती।

बाबा योगेेश्वर नाथ (फोटो साभार दैनिक भास्कर)

गाँव वालों की मानों तो गनौरी पासवान पहाड़ की तलहटियों में जाकर पुरानी मूर्तियों की भी खोज करते हैं। फिर उन मूर्तियों को योगेश्वर नाथ मंदिर के रास्ते पर स्थापित कर देते हैं। उन्होंने काले पत्थर की भगवान बुद्ध की छह फीट की ऐतिहासिक प्रतिमा भी खोज निकाली थी। गनौरी पासवान अब योगेश्वर नाथ मंदिर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होते देखना चाहते हैं।

गनौरी पासवान पहले ट्रक ड्राइवर थे। इसके बाद उन्होंने राज मिस्त्री का काम शुरू किया। काम के बाद उनका ध्यान भगवान शिव की भक्ति में लगा रहता था। गाँव की गायन मंडली के साथ गनौरी पहाड़ पर बाबा योगेश्वर नाथ मंदिर में भजन कीर्तन के लिए जाते थे। मंदिर जाने में होने वाली कठिनाई ने उन्हें मंदिर का रास्ता सुगम बनाने के लिए प्रेरित किया।

FIFA World Cup: ईरान की हार का जश्न मनाने सड़कों पर उतरे हिजाब विरोधी प्रदर्शनकारी, सुरक्षाबलों ने सिर में मारी गोली, 1 की मौत

कतर (Qatar) में खेले जा रहे फीफा वर्ल्ड कप (FIFA World Cup) से ईरान (Iran) के बाहर होने का जश्न मनाने रहे एक ईरानी व्यक्ति को सुरक्षाबलों ने गोली मार दी। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, उस व्यक्ति का नाम मेहरान सामक (Mehran Samak) है। वह बंदर-ए-अंजली शहर में ईरान की हार का जश्न मना रहा था।

द गार्जियन के अनुसार, अमेरिका ने ईरान को 1-0 से हराकर उसे फीफा वर्ल्ड कप से बाहर कर दिया है। मंगलवार (29 नवंबर 2022) को क्रिस्टियन पुलिसिच के 38वें मिनट में किए गए गोल की मदद से अमेरिका ने नॉकआउट राउंड में प्रवेश किया। मैच के खत्म होते ही ईरान के कई शहरों में लोग सड़कों पर निकले और अमेरिका की जीत का जश्न मनाया।

वहीं, टीम के वर्ल्ड कप से बाहर होने का जश्न मनाने वाले एक 27 वर्षीय ईरानी व्यक्ति को बंदर-ए-अंजली शहर में सुरक्षाबलों ने गोली मार दी। ईरान की हार को सेलिब्रेट करने वाले लोगों में प्रदर्शनकारी भी शामिल थे, जो महसा अमीनी की मौत को लेकर कई महीनों से हिजाब के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षाबलों ने मेहरान पर गोली चलाई, जो सीधा उसके सिर में लगी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। ईरान के लोग इस घटना से बेहद दुखी हैं। वहाँ की पत्रकार ने मेहरान सामक का एक वीडियो शेयर किया है। इसमें वह केक लेकर डांस करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान उनके दोस्त भी मौजूद हैं।

पत्रकार मसीह अलीनेजाद ने अपने ट्विटर पर लिखा, “अमेरिकी फुटबॉल टीम की जीत का जश्न मनाने के कारण ईरान के सुरक्षा बलों ने उसे मार डाला। मेहरान सामक ने अपने इंस्टाग्राम पर लिखा था कि हमें परवाह नहीं है कि ईरान की टीम राष्ट्रगान गाती है या नहीं, लेकिन हम आईआरआई (IRI) के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करने के लिए सड़कों पर उतरेंगे।”

वह आगे लिखती हैं, “मेहरान अपनी मंगेतर के साथ कार में बैठकर ईरान की हार का जश्न मना रहे थे। इसी दौरान उनके सिर में गोली मार दी गई।” वह यूएस मेन फुटबॉल टीम और Tyler Adams के ट्विटर हैंडल को टैग करते हुए कहती हैं कि ‘आप ही उसकी आवाज बन सकते हैं। ईरान के अंदर ऐसा कोई नहीं है’।

बता दें कि इससे पहले ईरान की फुटबॉल टीम ने महिला प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए FIFA वर्ल्ड कप में अपना राष्ट्रगान गाने से इनकार कर दिया था। 21 नवंबर, 2022 को खलीफा इंटरनेशनल स्टेडियम में (Khalifa International Stadium) जब राष्ट्रगान बजाया गया तो सभी 11 खिलाड़ी खामोश खड़े रहे।

इस दौरान ईरानी खिलाड़ी काफी भावुक दिखाई दिए। वहीं, स्टैंड में जमा हुए ईरानी फैंस ने राष्ट्रगान बजते ही चिल्लाना शुरू कर दिया। इनमें से कुछ थम डाउन करने का इशारे करते हुए नजर आए।

IHR के अनुसार, ईरान के सुरक्षा बलों ने हिजाब विरोधी प्रदर्शनों पर कार्रवाई में कम से कम 448 लोगों को मार डाला है, जिनमें 18 वर्ष से कम उम्र के 60 बच्चे और 29 महिलाएँ भी शामिल हैं।

नार्को टेस्ट में रिलैक्स होकर जवाब देता रहा आफताब, जाँचकर्ता भी हैरान: 2 घंटों में बताया मोबाइल और श्रद्धा के कपड़े कहाँ फेंके

लिव-इन पार्टनर श्रद्धा वालकर (Shraddha Walker) की हत्या करने के बाद शव को 35 टुकड़ों में काटकर अलग-अलग फेंकने वाले आरोपित आफताब पूनावाला (Aaftab Poonawala) का नार्को टेस्ट सफल रहा। आफताब ने पॉलीग्राफ टेस्ट के बाद नार्को टेस्ट में भी श्रद्धा की हत्या की बात कबूल की है। उसने श्रद्धा के मोबाइल और कपड़े कहाँ फेंके हैं, इसकी भी जानकारी दी।

इसके साथ ही टेस्ट के दौरान आफताब ने बताया कि श्रद्धा के शव के टुकड़े करने में उसने कौन-कौन से हथियारों का इस्तेमाल किया और शव को काटने के बाद उन्हें कहाँ फेंका। दिल्ली पुलिस अब उन स्थानों को खंगालेगी, जिनके बारे में उसने जानकारी दी है।

आफताब को सुबह 8.40 बजे दिल्ली पुलिस रोहिणी के बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल लेकर पहुँची थी। वहाँ नार्को टेस्ट से पहले उसका स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। उसका नार्को टेस्ट करीब 10 बजे शुरू हुआ और लगभग 2 घंटे तक चला। टेस्ट सफल रहा है, लेकिन अगर किसी तरह की गड़बड़ी होती है तो पुलिस ब्रेन मैपिंग करने की माँग कर सकती है।

जाँच में शामिल एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया कि आफताब बहुत शातिर है और वह कभी भी मामले में नया मोड़ ला सकता है। अभी तक वह पुलिस की हर बात मान रहा है और जाँच में सहयोग कर रहा है। यहाँ तक कि उसने पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट के लिए भी अपनी सहमति दी। यही व्यवहार पुलिस अधिकारियों को परेशान कर रहा है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान आफताब बहुत ज्यादा कॉन्फिडेंट था। वह बहुत रिलैक्स होकर जवाब दे रहा था। इससे लगा कि वह पहले से सोच-समझकर जवाब देता है। पुलिस को शक यह भी है कि जब सितंबर-अक्टूबर में आफताब को मुम्बई पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया था, उस वक्त भी श्रद्धा के कुछ बॉडी पार्ट्स उसके दिल्ली वाले फ्लैट में मौजूद थे।

जाँचकर्ताओं का यह भी कहना है कि आफताब ने प्रसिद्ध हत्याओं में कानूनी प्रक्रिया और कार्रवाई, पहले के महत्वपूर्ण मामलों और बिहैवियर पैटर्न पर गहन शोध किया था। उसने हॉलीवुड सिलिब्रेटी कपल के तलाक केस के मामलों का बहुत गहराई से फॉलो कर रहा था और यह पता लगा रहा था कि बिहैवियर पैटर्न किसी केस को कैसे प्रभावित करता है।

आफताब का नार्को टेस्ट के बाद एक पोस्ट टेस्ट FSL में होगा। इसमें उसकी काउंसलिंग की जाएगी। यहाँ बताना जरूरी है कि आफताब ने भले ही नार्को टेस्ट में श्रद्धा की हत्या से जुड़े राज का खुलासा कर दिया हो, लेकिन इन्हें कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता। हालाँकि, मजिस्ट्रेट के सामने दिया गया गया बयान कोर्ट में सबूत के रूप में पेश किया जा सकता है।

टेस्ट के दौरान आफताब द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर पुलिस सबूत इकट्ठा कर सकती है। अगर उसके बताए जगह पर श्रद्धा का मोबाइल, कपड़े और शवों को काटने वाले अन्य हथियार बरामद कर लिए जाते हैं तो यह पुलिस के लिए बड़ी सफलता होगी।

आफताब कितना शातिर है, इसका अंदाजा श्रद्धा की हत्या को लेकर बताई गई वजहों से पता चलता है। एक बार उसने पूछताछ में बताया था कि श्रद्धा उस पर शादी का दवाब डाल रही थी, इसलिए उसने हत्या कर दी। वहीं, अब उसने कहा है कि श्रद्धा उससे ब्रेकअप करना चाहती थी। यह बात उसे पसंद नहीं आई और उसने हत्या कर दी।

10 साल की सजा, ₹50 हजार तक का जुर्माना: उत्तराखंड में सख्त होगा धर्मांतरण विरोधी कानून, विधेयक पास; CM धामी ने बताया- ये बेहद घातक चीज

उत्तराखंड सरकार ने राज्य विधानसभा में उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक-2022 पेश किया। इस विधेयक को सर्वसम्मति व ध्वनि मत से पारित किया गया है। इस विधेयक में जबरन धर्मांतरण के दोषियों के लिए 10 साल तक की सजा और 50 हजार रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा, महिलाओं को 30% आरक्षण वाला विधेयक भी पारित हो गया है। राज्यपाल की मोहर के बाद ये विधेयक कानून बन जाएँगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तराखंड सरकार के इस विधेयक के कानून बन जाने के बाद जबरन धर्मांतरण पूरी तरह से संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध होगा। एकल धर्मांतरण कराए जाने पर दोषियों को न्यूनतम 3 वर्ष व अधिकतम 7 वर्ष की सजा होगी। वहीं, सामूहिक धर्मांतरण पर तीन से 10 साल की सजा होगी।

इसके अलावा, अवयस्क महिला, दलितों व जनजातियों के एकल धर्मांतरण पर 3 से 10 साल तक की सजा और 25 हजार रुपए का जुर्माना तथा सामूहिक धर्म परिवर्तन पर 3 से 10 साल तक की सजा और 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। यही नहीं, धर्मांतरण के आरोपितों के खिलाफ सख्ती से निपटने के लिए इस विधेयक में दोषियों को कम से कम पाँच लाख रूपए की मुआवजा राशि का भुगतान भी करना पड़ सकता है। यह मुआवजा पीड़ित को दिया जाएगा।

इससे पहले, साल 2018 में भी जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए कानून लाया गया था। तब, जबरन धर्मांतरण पर 1 से 5 साल की सजा और दलितों व जनजातीय समुदाय के मामले में 2 से 7 साल की कैद की सजा का प्रावधान था। हालाँकि, अब कानून को और अधिक कड़ा किया गया है।

धर्मांतरण जैसी चीजें बेहद घातक: CM धामी

इस विधेयक को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है “उत्तराखंड देवभमि है। यहाँ धर्मांतरण जैसी चीजें बहुत घातक हैं, इसलिए सरकार इस पर रोक के लिए कठोर कानून लेकर आई है। इस कानून को पूरी दृढ़ता से प्रदेश में लागू किया जाएगा। इसी तरह उत्तराखंड राज्य निर्माण में मातृशक्ति का बड़ा योगदान रहा है, सरकार ने यह पहले ही तय किया था कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस प्रदेश में मातृशक्ति का सम्मान करते हुए उन्हें क्षैतिज आरक्षण का लाभ दिया जाएगा।”

बता दें कि राज्य विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले दिन मंगलवार (29 नवंबर 2022) को उत्तराखंड के धर्म और संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने इस विधेयक को पेश किया था।

इस विधेयक को पेश करते हुए उन्होंने कहा था कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25, 26, 27 और 28 के अनुसार, प्रत्येक धर्म को समान रूप से मजबूत करने के उद्देश्य में आ रही कठिनाइयों के निराकरण के लिए यह संशोधन विधेयक लाया गया है। विधेयक में विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन को संज्ञेय और गैर जमानती अपराध बनाते हुए दोषियों के लिए न्यूनतम तीन साल से लेकर अधिकतम 10 साल तक के कारावास का प्रावधान है।

अन्य राज्यों में धर्मांतरण पर कानून

गौरतलब है कि उत्तराखंड के अलावा, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश समेत कुछ अन्य राज्यों में भी धर्मांतरण पर कड़े कानून बनाए गए हैं। मध्यप्रदेश के धर्मांतरण विरोधी कानून की बात करें तो यहाँ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2020 के अनुसार कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे को प्रलोभन, धमकी या जबरन शादी के नाम पर या अन्य किसी प्रकार की धोखाधड़ी से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से उसका धर्म परिवर्तन नहीं करवा सकता है।

इस कानून का उल्लंघन करने पर एक से 10 साल तक की कैद और एक लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। यही नहीं धर्म छिपाकर शादी के अपराध में तीन वर्ष से 10 वर्ष तक की सजा और 50 हजार रुपए के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। साथ ही दूसरे धर्म में विवाह के लिए सूचना दो महीने पहले देनी होगी यदि बिना सूचना के विवाह होता है तो उसे शून्य माना जाएगा।

उत्तरप्रदेश के धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश, 2020 की बात करें तो यहाँ, जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर न्यूनतम 15,000 रुपये के जुर्माने के साथ एक से पाँच साल की कैद का प्रावधान है। इसके अलावा, एससी/एसटी समुदाय के नाबालिगों और महिलाओं के धर्मांतरण पर तीन से 10 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। जबरन सामूहिक धर्मांतरण के लिए 3 से 10 साल तक की सजा 50,000 रुपए जुर्माने का प्रावधान किया गया है। यही नहीं, यदि यह पाया जाता है कि विवाह का एकमात्र उद्देश्य धर्म परिवर्तन कराना था तो ऐसी शादियों को अवैध करार दिया जाएगा।

इंडिया का डिस्काउंट देख के पाकिस्तान की जीभ लपलपाई… लेकिन रूस बोला- तेरे को नहीं दूँगा सस्ता तेल

भारत की तर्ज पर पाकिस्तान भी रूस से सस्ते दामों में क्रूड ऑयल खरीदने की इच्छा जताई है। हालाँकि, रूस ने उसे किसी तरह का डिस्काउंट देने से इनकार कर दिया है। साथ ही यह भी कहा कि उसके पास देने के लिए अभी तेल का स्टॉक नहीं है।

दरअसल, भारत रूस से सस्ते दामों पर कच्चे तेल का आयात करता है। इसको देखते हुए पाकिस्तान ने भी रूस से संपर्क साधा था। पाकिस्तान ने रूस से कहा था कि उसे 30-40 प्रतिशत के डिस्काउंट पर उसे कच्चा तेल उपलब्ध कराए, जिसे रूस ने इनकार कर दिया।

पाकिस्तान के पेट्रोलियम राज्य मंत्री मुसादिक मलिक, संयुक्त सचिव और मास्को में पाकिस्तानी दूतावास के अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल मास्को में रूस के अधिकारियों से मिला था। यह वार्ता बिना किसी निष्कर्ष के ही समाप्त हो गई। रूस ने इस मामले में पाकिस्तान के माँगों पर विचार कर सूचित करने की बात कही।

उधर यूरोपीय यूनियन अपने पूर्वी ब्लॉक के सदस्यों के साथ रूसी कच्चे तेल की उच्चतम दर तय करने के लिए बुलाई गई बैठक में समझौता करने में विफल रहा। पोलैंड, एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया जैसे कई देशों ने कहा कि रूसी कच्चे तेल के लिए प्रस्तावित $60- $70 प्रति बैरल बहुत अधिक है और रूस द्वारा वर्तमान में बेचे जा रहे दर से बहुत अधिक है।

बता दें कि रूस के राजस्व में कच्चा तेल एक महत्वपूर्ण कारक है। भारत और चीन उसके सबसे बड़े एवं महत्वपूर्ण खरीदारों में शामिल हैं, जो रूस से कच्चे तेल आधी कीमत पर हासिल कर रहे हैं। रूस के प्रमुख यूराल कच्चे तेल में पिछले सप्ताह के अंत में $33.28, या अंतरराष्ट्रीय ब्रेंट कच्चे तेल के लगभग 40% की भारी छूट पर कारोबार हुआ।

इससे पहले, अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए 80% आयात करने भारत रूसी कच्चे तेल का कभी भी बड़ा खरीदार नहीं था। भारत रूस से अपने कच्चे तेल का केवल 2-5% आयात करता था। भारत ने 2021 में केवल 12 मिलियन बैरल रूसी कच्चे तेल का आयात किया था।

हालाँकि, मई 2022 में भारत के लिए रूसी तेल आयात में स्पष्ट वृद्धि देखी गई। रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन पर रूस के हमले से पहले भारत रूसी तेल, गैस और कोयले पर 5.1 अरब डॉलर खर्च किए, जो एक साल पहले के मूल्य से पाँच गुना अधिक था।

सेना के लिए छोड़ी IIT, दीवारों को इंटरव्यू दिया: NDA में गोल्ड पाने वाले गौरव यादव की कहानी, परिवार ने कहा- हमें मानसिक स्थिति को लेकर चिंता होती थी

राजस्थान के अलवर जिले के गौरव यादव ने नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) में शामिल हो कर देश सेवा का सपना तो लाखों युवा देखते होंगे लेकिन गौरव यादव ने न सिर्फ उस सपने को देखा बल्कि उसे अर्जित भी किया। राजस्थान के अलवर जिले के रहने वाले गौरव यादव ने अपने सपने को पूरा करने के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) में एडमिशन को भी ठुकरा दिया था। गौरव सिर्फ ट्रेनिंग में ही आगे नहीं रहे बल्कि एनडीए की 143वें परेड में उन्हें प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया।

गोल्ड मेडलिस्ट गौरव शुरुआत से ही सेना में करियर बनाना चाहते थे। बचपन से ही खेल-कूद और पढ़ाई में आगे रहने वाले गौरव ने IIT एंट्रेंस टेस्ट पास कर लेने वाली बात को परिवार वालों से छिपाए रखा क्योंकि उन्हें सेना में शामिल होने के अपने सपने को पूरा करना था। गौरव ने दिल्ली के एक कॉलेज में प्रवेश ले लिया और एनडीए की तैयारी भी करने लगे।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, गौरव ने दो बार एनडीए प्रवेश परीक्षा पास की लेकिन दोनों ही बार सर्विस सेलेक्शन बोर्ड (SSB) इंटरव्यू स्टेज को पार नहीं कर पाए। इस नाकामी से शिक्षा लेते हुए उन्होंने तीसरे मौके को हाथ से जाने नहीं दिया। उनकी मेहनत रंग लाई और गौरव खड़कवासला में नेशनल डिफेंस एकेडमी का हिस्सा बन गए। बुधवार (30 नवंबर,2022) को पासिंग आउट परेड के बाद गौरव ने कहा, “मैं अपने कमरे की दीवार के सामने खड़ा होता था। इस दौरान मैं सोचता था कि मैं एसएसबी पैनल को इंटरव्यू दे रहा हूँ और उनके सवालों का जवाब दे रहा हूँ।”

पासिंग आउट परेड के बाद गौरव यादव (फोटो साभार टाइम्स ऑफ इंडिया)

गौरव यादव एक किसान परिवार से आते हैं। उनका पैतृक निवास राजस्थान के अलवर जिले के जाजौर-बास गाँव में है। गौरव के भाई विनीत भी भारतीय सेना में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक विनीत ने बताया कि एक समय ऐसा भी था, जब परिवार को गौरव के मानसिक स्थिति को लेकर चिंता होने लगी थी।

विनीत ने बताया कि जब उन्होंने अपने भाई से IIT रिजल्ट को लेकर पूछा तो, गौरव ने बताया कि एग्जाम क्लियर नहीं हो पाया। गौरव जब NDA के लिए चुने गए तब कहीं जाकर उन्होंने परिवार के लोगों को जानकारी दी कि उनका IIT एंट्रेंस क्लियर हो गया था। विनीत कहते हैं कि गौरव ने इस असाधारण उपलब्धि को हासिल कर के खुद को सही साबित कर दिया है। हमें उस पर गर्व है।

एनडीए में गौरव ने ना सिर्फ एकेडमिक फ्रंट पर शानदार प्रदर्शन किया, बल्कि मिलिट्री ट्रेनिंग में भी वह सबसे आगे रहे। परिणामस्वरूप उन्हें गोल्ड मेडल से नवाजा गया। इतना ही नहीं गौरव को परेड की कमान संभालने का अवसर भी मिला जो सोने पर सुहागा जैसा था। खुद गौरव ने भी इसकी कल्पना नहीं की थी।