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प्रेग्नेंसी टेस्ट के लिए अब पेशाब-खून की जगह थूक से चल जाएगा काम, 10 मिनट में रिजल्ट: इजरायल के वैज्ञानिकों की खोज

इजरायली स्टार्टअप सैलिगोंस्टिक्स के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खोज की है, जिसके उपयोग से महिलाओं को प्रेंगनेंसी टेस्ट करने के लिए पेशाब और खून की आवश्यकता नहीं होगी। दरअसल, कंपनी ने ‘सैलीस्टिक’ नामक एक प्रेगनेंसी किट बनाई है। यह किट सलाइवा (लार) का उपयोग कर 10 मिनट में प्रेगनेंसी रिपोर्ट देती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सैलिग्नॉस्टिक्स कंपनी के वैज्ञानिकों ने COVID-19 (कोरोना वायरस) की जाँच के लिए बनाए जाने वाली किट की तकनीक के आधार पर प्रेगनेंसी टेस्ट किट तैयार की है। अगले साल, यानी साल 2023 की पहली तिमाही में यह किट दुनिया भर के कई बाजारों में उपलब्ध होगी। ‘टाइम्स ऑफ इजरायल’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, सैलीस्टिक टेस्ट किट साल 2023 में यूरोप, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बाजारों में उपलब्ध होगी। हालाँकि, किट भारत में कब तक आएगी यह कह पाना मुश्किल है।

इस प्रेगनेंसी किट को लेकर सैलिग्नॉस्टिक्स कंपनी के एक अन्य सह-संस्थापक गाइ क्रिफ का कहना है कि “इंसान का सलाइवा (लार) कई तरह की मेडिकल कंडीशंस में तेजी से डायग्नोज करने में सहायक होता है। यह हार्मोन, वायरस और यहाँ तक ​​​​कि बीमारियों का पता लगाने का एकमात्र आसान और साफ-सुथरा तरीका है। सैलीस्टिक का उपयोग कर हम इन्हीं डायग्नोज क्षमताओं का लाभ उठाएँगे। यह किट प्रेगनेंसी के दौरान खून और पेशाब के नमूनों की आवश्यकता को पूरी तरह से खत्म कर देगी।”

गाइ क्रिफ ने यह भी कहा है कि ऐसा पहली बार होगा जब कोई कपल एक साथ बैठकर प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकते हैं। इस किट की अवधारणा और तकनीक बेहद आधुनिक है। साथ ही, इसके काम करने का तरीका अब तक मौजूद तरीकों से पूरी तरह अलग है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सर्वे में सामने आया है कि प्रेगनेंसी टेस्ट के लिए सलाइवा (लार) का उपयोग करने वाली यह विधि लोकप्रिय होगी। सर्वे में 70 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि वे पेशाब आधारित किट की जगह सलाइवा वाले प्रेगनेंसी किट का उपयोग करेंगीं।

प्रेगनेंसी टेस्ट के लिए सैलीस्टिक का इस्तेमाल करने वाली एक महिला का कहना है, “अपने पार्टनर के साथ प्रेग्नेंसी टेस्ट करना बेहद खुशी की बात है। प्रेगनेंसी टेस्ट के लिए बाथरूम जाने का विचार मुझे पसंद नहीं है। इसके लिए, पेशाब का उपयोग करना फिजूल है।”

इस प्रेंग्नेंसी किट का उपयोग करना बेहद आसान होगा। अब तक उपलब्ध तकनीक में महिलाओं को प्रेगनेंसी जानने के लिए पेशाब या खून का इस्तेमाल करना पड़ता था। लेकिन, ‘सैलीस्टिक’ किट का उपयोग करने के महिलाओं को इस किट के एक हिस्से को थर्मामीटर की तरह अपने मुँह पर रखना होगा। इसके बाद, इसे एक प्लास्टिक ट्यूब में रखना होगा। जहाँ, 10 मिनट से भी कम समय में प्रेगनेंसी रिपोर्ट सामने आ जाएगी।

फारुख को संध्या पर था शक, बीच सड़क पर ‘सर तन से जुदा’ की कोशिश: धारदार हथियार से बोल दिया हमला, केरल पुलिस ने कहा – रिश्ते में अनबन का मामला

केरल के कोच्चि में एक प्रवासी महिला पर धारदार हथियार से हमला कर दिया गया। संध्या नाम की पीड़िता मूल रूप से पश्चिम बंगाल की बताई जा रही है, जो काम की तलाश में कोच्चि आई थी। हमलावर का नाम फारुख है। हमलावर और पीड़ित पहले से परिचित बताए जा रहे हैं। पुलिस ने केस दर्ज कर के फरार आरोपित की तलाश शुरू कर दी है। पीड़िता का इलाज अस्पताल में चल रहा है। घटना शनिवार (3 दिसम्बर, 2022) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता ब्यूटी पार्लर में काम करती है। घटना के दौरान पीड़िता कलूर इलाके में आज़ाद रोड पर अपने एक परिचित के साथ टहल रही थी। इस दौरान बाइक से आए फारुख ने पीड़िता पर चाकुओं से हमला कर दिया। चश्मदीदों के मुताबिक, हमले से पहले कुछ देर तक फारुख और संध्या में बहस हुई थी। बताया जा रहा है कि फारुख संध्या की गर्दन काटना चाह रहा था लेकिन घटनास्थल पर मौजूद एक तीसरे व्यक्ति ने बीच बचाव किया। इस बचाव में संध्या के दोस्त को भी हाथ में घाव हो गया है।

हमले के बाद फारुख बाइक ले कर फरार हो गया। इस दौरान उसने हमले में इस्तेमाल चाकू मौके पर ही छोड़ दिया। आस-पास मौजूद लोगों ने घायल संध्या को नजदीकी अस्पताल में भर्ती करवाया। वहाँ से उन्हें जिला अस्पताल भेज दिया गया। पुलिस के पीड़िता का बयान दर्ज करने की कोशिश की, लेकिन काफी चोट लगने के कारण ये सम्भव नहीं हो पाया। इस दौरान महिला के साथ मौजूद उसके दोस्त के बयान दर्ज किए गए हैं।

पुलिस का कहना है कि हमलावर और पीड़िता पूर्व से परिचित हैं। इन दोनों के रिश्तों में कुछ अनबन हुई जिसके बाद फारुख ने इस घटना को अंजाम दिया है। माना जा रहा है कि फारुख को संध्या के किसी और युवक के साथ रिश्तों का शक था। फारुख मूल रूप से उत्तराखंड का रहने वाला है। वह कोच्चि में एक सैलून में काम करता था। उसके दोस्त ने बताया कि पिछले कुछ समय से फारुख काफी अपसेट था।

‘मुझे अपने मित्र नरेंद्र मोदी पर भरोसा है…’: भारत को G-20 की अध्यक्षता मिलने पर फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने दी बधाई, कहा- वे सुरक्षित दुनिया बनाने में सफल होंगे

भारत को प्रभावशाली G-20 की अध्यक्षता मिलने के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की तारीफ की है। पीएम मोदी के साथ अपनी एक तस्वीर शेयर करते हुए ट्वीट किया, “मुझे अपने मित्र नरेंद्र मोदी पर भरोसा है कि वे हमें शांति और अधिक टिकाऊ दुनिया बनाने के लिए सबको साथ लाएँगे।”

राष्ट्रपति मैक्रों ने शनिवार (3 दिसंबर 2022) को ट्वीट करते हुए लिखा, “एक धरती, एक परिवार, एक भविष्य। भारत ने जी-20 की अध्यक्षता सँभाली है। मैं अपने मित्र नरेंद्र मोदी पर भरोसा करता हूँ कि वे हमें शांति और अधिक टिकाऊ दुनिया बनाने के लिए हम सबको साथ लाएँगे।”

बता दें कि 1 दिसंबर 2022 को भारत को एक साल के लिए G-20 की अध्यक्षता मिलने पर बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने भारत के सांस्कृतिक परंपरा ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ को निरूपित एक ट्वीट किया था। इसमें लिखा था, “G-20 के अध्यक्ष के रूप में भारत एकता की सार्वभौमिक भावना को प्रोत्साहित करने के लिए काम करेगा। अत: हमारा थीम है- एक धरती, एक परिवार, एक भविष्य। वसुधैव कुटुम्बकम्।”

इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरिन ज्यां-पियरे ने अपने भारत को G-20 की अध्यक्षता मिलने पर खुशी जताई थी। उन्होंने कहा था, “हम एक मजबूत वैश्विक अर्थव्यवस्था का निर्माण करने के अपने प्रयास जारी रखते हुए मौजूदा खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने समेत विभिन्न मुद्दों पर अगले साल भारत की जी-20 की अध्यक्षता का समर्थन करने के लिए उत्साहित हैं।”

मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने 2 दिसंबर 2022 को पीएम मोदी को बधाई दी थी। उन्होंने कहा था, “G-20 की अध्यक्षता सँभालने पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सरकार और भारत के लोगों को बधाई। मुझे कूटनीति एवं संवाद को बढ़ावा देने, आम सहमति बनाने और वैश्विक मामलों के अहम मुद्दों का स्थायी समाधान खोजने में भारतीय नेतृत्व पर पूरा भरोसा है।”

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी थी। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, “भारत द्वारा G-20 की अध्यक्षता सँभालने पर नरेंद्र मोदी को हर सफलता के लिए शुभकामनाएँ।” भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त बैरी ओ’फैरेल ने कहा था, “हम ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ विषय पर अपने साझा उद्देश्यों और प्रगति को प्राप्त करने के लिए इसके साथ मिलकर काम करने की आशा करते हैं।”

जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी थी। प्रधानमंत्री किशिदा ने कहा था, “G-20 की अध्यक्षता सँभालने पर बधाई पीएम मोदी। भारत-जापान वैश्विक मुद्दों पर मिलकर काम करेंगे।”

बता दें कि G-20 यानी ग्रुप ऑफ ट्वेंटी, विश्व की 20 सबसे विकसित और विकासशील देशों की एक प्रमुख संस्था है। इसके सदस्य देशों में जी-20 में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, कोरिया गणराज्य, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) शामिल हैं।

भारत इसकी एक साल तक अध्यक्ष के रूप में देश में 55 अलग-अलग जगहों पर 32 अलग-अलग कार्यक्षेत्रों को लेकर 200 से अधिक बैठकों की अध्यक्षता करेगा। भारत जिस बड़े पैमाने पर सम्मेलन के आयोजन की तैयारी कर रहा है, वैसी G-20 की बैठक अब तक नहीं हुई है। चीन के 14 और इंडोनेशिया के 25 शहरों में G-20 की बैठक आयोजित हुई थीं।

‘मुस्लिम हूँ, हिजाब के नीचे कुछ नहीं पहना है’: चीखती अर्धनग्न महिला को पुलिस ने घसीट कर बाहर निकाला, कब्ज़ा ली थी संपत्ति

इंग्लैंड के वेस्ट मिडलैंड्स में 2 पुलिस अधिकारियों को एक अर्धनग्न मुस्लिम महिला को जमीन पर घसीट कर घर से बाहर निकाल देने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। पुलिस विभाग ने इस संबंध में स्वतंत्र जाँच बिठाई थी, जिसके बाद ये कार्रवाई की गई है। ये घटना 18 नवंबर, 2022 को हुई थी। महिला को उक्त प्रॉपर्टी के मालिक ने निकाल दिया था, लेकिन इसके बावजूद वो घर खाली करने से लगातार इनकार कर रही थी।

फिर महिला को निकाल बाहर करने के लिए पुलिस को बुलाया गया। जब पुलिस वहाँ पहुँची, उस समय महिला ने अपने घुटने तक कोट पहन रखा था। वो जमीन पर बैठी हुई थी। ‘i News’ ने वीडियो फुटेज के आधार पर जानकारी दी है कि पुलिस ने पहले समझाया कि महिला को अच्छे से हटाया जाएगा और वो इस जगह को छोड़ दे। इसके बाद पुलिस ने घसीट कर बाहर करने की धमकी दी। एक पुलिसकर्मी ने कहा कि महिला बाद में उसकी शिकायत सकती है।

पुलिस ने चेताया कि अगर महिला यहाँ रुकती है तो इससे शांति का उल्लंघन हो सकता है। जब पुलिस वालों ने महिला की बाँह पकड़ने की कोशिश की तो उसने कहा, “मैंने पैंट नहीं पहन रखी है। मैं एक मुस्लिम महिला हूँ और मैंने हिजाब पहन रखा है।” इसके बाद चीखती हुई अर्धनग्न मुस्लिम महिला को हथकड़ी पहना कर पुलिस ने घर से निकाल कर बाहर कर दिया। महिला ने कहा कि दो लोगों ने उसे जकड़ लिया और उसने नीचे कुछ नहीं पहन रखा था।

महिला ने कहा कि उसकी तरफ उँगली उठाने का भी अधिकार उन पुलिस वालों को नहीं है। उसने कहा कि वो अपमानित महसूस कर रही हैं। उसने कहा कि उसे पुलिस वालों को बताना पड़ा कि वो मुस्लिम है, इसीलिए उसे ले जाने से पहले पूरी तरह शरीर ढँकने दे। महिला ने मकान मालिक की संपत्ति में बैरिकेड डाल दिया था। पुलिस का कहना है कि मुस्लिम समाज के लिए ये एक मसला हो सकता है, इसीलिए वीडियो के आधार पर आगे की जाँच अच्छी तरह की जाएगी।

वोटिंग लिस्ट से 450 भाजपा समर्थकों के काटे गए नाम: दिल्ली MCD चुनावों के बीच सांसद मनोज तिवारी का आरोप, बताया- केजरीवाल सरकार की साजिश

दिल्ली नगर निगम चुनावों के बीच उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भाजपा के सांसद मनोज तिवारी ने आम आदमी पार्टी पर बीजेपी समर्थकों के वोट काटने का इल्जाम लगाया है। मनोज तिवारी का दावा है कि आप ने शाहदरा के सुभाष मोहल्ला से 450 भाजपा समर्थक वोटरों के नाम वोटिंग लिस्ट से काट दिए हैं।

मनोज तिवारी ने कहा कि दिल्ली में आप सरकार ने साजिश के तहत वोटरों को एमडीसी चुनावों में वोट देने से रोका है। उन्होंने कहा कि वो इस संबंध में शिकायत करके चुनाव रद्द करने को कहेंगे। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, “सुभाष मोहल्ला वार्ड में 450 वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से डिलीट हैं क्योंकि वो बीजेपी को सपोर्ट देते हैं। ये दिल्ली सरकार की बहुत बड़ी साजिश है, हम शिकायत करेंगे और ये चुनाव रद्द करवाकर दोबारा चुनाव करवाने की अपील करेंगे।”

बता दें कि एक ओर जहाँ मनोज तिवारी ने कई वोटरों का नाम लिस्ट में न होने की बात कही है। वहीं कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष अनिल चौधरी ने भी दल्लूपुरा में पोलिंग बूथ पर जाकर बताया कि उनका नाम न तो वोटिंग लिस्ट में है और न ही डिलीट हुई लिस्ट में। उनकी पत्नी को वोट देने दिया गया। लेकिन उनसे कहा गया कि वो वोट नहीं दे सकते। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने इसके पीछे बीजेपी का हाथ कहा है।

उल्लेखनीय है कि केवल भाजपा और कॉन्ग्रेस के अलावा सोशल मीडिया पर सामान्य जनता भी अपना नाम वोटिंग लिस्ट से काटे जाने की बातें कह रही है।

2 दिन में ही धड़ाम हुई आयुष्मान खुराना की ‘An Action Hero’, पिछली फिल्म फ्लॉप होने पर भारत को बताया था ‘होमोफोबिक सोच में डूबा हुआ देश’

बॉलीवुड एक्टर आयुष्मान खुराना (Ayushmann Khurrana) की फिल्म ‘एन एक्शन हीरो (An Action Hero)’ की बॉक्स ऑफिस पर शुरुआत बेहद खराब रही है। रिलीज के दूसरे दिन फिल्म की कमाई में सुधार के कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन, फिल्म दर्शकों के लिए तरसती नजर आ रही है। ऐसा कहा जा रहा है कि फिल्म के इस खराब प्रदर्शन के लिए आयुष्मान खुराना का वह बयान है, जिसमें उन्होंने भारत को होमोफोबिक बताया था।

दरअसल, आयुष्मान खुराना की फिल्म ‘एन एक्शन हीरो’ शुक्रवार (2 दिसंबर, 2022) को देश भर के सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। ओपनिंग डे पर फिल्म की कमाई 1.31 करोड़ रुपए थी। हालाँकि, ऐसी उम्मीद जताई जा रही थी कि फिल्म वीकेंड पर अच्छी कमाई कर सकती है। लेकिन, अब शनिवार (3 दिसंबर, 2022) को फिल्म ने मात्र 2.16 करोड़ की कमाई की है।

इस प्रकार शुरुआती दो दिनों में ‘An Action Hero’ ने कुल मिलाकर 3.14 करोड़ रुपए की कमाई की है। इससे फिल्म के निर्माताओं को बड़ी निराशा हाथ लगी है। यदि आगामी 1-2 दिनों में फिल्म की कमाई में बड़ा सुधार नहीं आया तो आयुष्मान खुराना स्टारर यह फिल्म बड़ी फ्लॉप साबित हो सकती है।

गौरतलब है कि फिल्म समीक्षकों ने ‘An Action Hero’ को लेकर अच्छे रिव्यूज दिए थे। कई क्रिटिक्स ने तो फिल्म को 4 स्टार देते हुए बेहतरीन फिल्म करार दिया था। हालाँकि, अब तक सामने आए आँकड़े बताते हैं कि करीब 45 करोड़ रुपए की लागत वाली इस फिल्म को अपनी लागत निकालने में भी मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है। यही नहीं, हो सकता है कि फिल्म लागत भी न निकाल पाए।

भारत एक होमोफोबिक देश: आयुष्मान खुराना

सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर चर्चा की जा रही है कि बॉयकॉट ट्रेंड न होने के बाद भी फिल्म की इस आफलता के पीछे फिल्म की स्टोरी और एक्टिंग के अलावा आयुष्मान खुराना का वह बयान है जिसमें उन्होंने भारत को होमोफोबिक कहा था।

दरअसल, गत माह आयुष्मान खुराना अपनी फिल्म ‘An Action Hero’ के प्रमोशन में जुटे हुए थे। इस दौरान उनसे उनकी पिछली फिल्म ‘चंडीगढ़ करे आशिकी’ के खराब बॉक्स ऑफिस कलेक्शन को लेकर बात की गई थी। इस दौरान, एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा था, “हमारा भारत एक होमोफोबिक देश है। मैंने ऐसी फिल्मों से अपने करियर की शुरुआत की, जिनपर ज्यादातर एक्टर काम करना पसंद नहीं करते हैं। लेकिन, दुर्भाग्य है कि ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर बहुत अच्छा बिजनेस नहीं कर सकीं। इसकी असली वजह ये है कि हमारा देश अभी तक होमोफोबिक सोच में डूबा हुआ है।”

इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा था, “अगर मैंने रिस्क लेना छोड़ दिया तो दूसरों की तरह रूढ़ हो जाऊँगा, क्योंकि मुझे हमेशा से एकतरफा रहना ही पसंद है। मैं हिट या फ्लॉप की चिंता किए बिना उन प्रोजेक्ट्स पर काम करना चाहता हूँ, जिन्हें भविष्य में ले जाना सही है और मैं हमेशा उन्हीं सीमाओं को आगे धकेलता रहता हूँ। हालाँकि, मेरी फिल्में काफी कम बजट की होती हैं, जिनके फ्लॉप होने पर बहुत ज्यादा नुकसान नहीं होता है। इसलिए, मैं रिस्क लेने से नहीं भागता।”

भारतीय नौसेना के 8 पूर्व अधिकारी 3 महीने से क़तर की कैद में, कॉन्सुलर एक्सेस भी नहीं दे रहा: बोले नेवी चीफ- जल्द निकालेंगे हल

कतर (Qatar) की कैद में रखे गए भारतीय नौसेना के 8 पूर्व अधिकारियों की रिहाई को लेकर नेवी चीफ एडमिरल आर हरि कुमार ने जल्द हल निकलने की उम्मीद जताई है। बता दें कि इन भारतीय अधिकारियों को कतर की खुफिया एजेंसियों ने पिछले तीन महीनों से अवैध रूप से कैद कर रखा है। वहीं, हिरासत में लिए गए एक ओमानी अधिकारी को रिहा कर दिया गया है।

एडमिरल हरि कुमार ने शनिवार (3 दिसंबर 2022) को कहा कि सभी 8 पूर्व अधिकारी नौसेना परिवार का हिस्सा हैं और उनकी रिहाई के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नौसेना को इस मामले की पूरी जानकारी है। देश की सभी एजेंसियाँ उन्हें छुड़ाने के लिए लगी हुई हैं।

कतर की खुफिया एजेंसी State Security Bureau (SSB) की कैद में रखे गए इन पूर्व अधिकारियों से मिलने के लिए कान्सुलर एक्सेस भी नहीं दिया जा रहा है। भारत इन पूर्व अधिकारियों से मिलने की लगातार माँग कर रहा है। कतर के इस रूख से भारत के एक सैन्य शक्ति के रूप में उभार को गहरा आघात लगा है।

कतर की क्यों कैद में हैं पूर्व अधिकारी

नौसेना के ये सभी पूर्व अधिकारी कतर की राजधानी दोहा की एक प्राइवेट कंपनी में काम कर रहे थे। ये कंपनी टेक्नोलॉजी और कंसल्टेंसी का काम करती है। 30 अगस्त 2022 को कतर की खुफिया एजेंसियों ने इन पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाते हुए इन्हें हिरासत में ले लिया था।

शुरुआत में इन पूर्व अधिकारियों पर व्यवसायिक प्रतिद्वंद्विता और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप बताया गया, लेकिन बाद में सामने आया कि इन्हें जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। मिडिल-ईस्ट की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये सभी पूर्व अधिकारियों को इजरायल के लिए जासूसी करने के आरोप में हिरासत में लिया है। हालाँकि, कतर की तरफ से इस बारे में सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। 

भारतीय नौसेना से सेवानिवृत्त ये सभी अधिकारी पिछले 5 सालों से दाहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजी एंड कंसल्टेंसी नाम की एक कंपनी में काम कर रहे थे। यह कंपनी मिडिल-ईस्ट में स्थित एक देश के मिलिट्री अधिकारी की बताई जाती है। यह कंपनी कतर की नौसेना को ट्रेनिंग और कंसल्टेंसी देने का काम करती है।

जिन पूर्व अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें पूर्व कमांडर पूर्णेन्द्रु तिवारी, पूर्व कमांडर नवतेज सिंह गिल, पूर्व कमांडर वीरेंद्र कुमार वर्मा, पूर्व कमांडर सुगुनाकर पकाला, पूर्व कमांडर संजीव गुप्ता, पूर्व कमांडर अमित नागपाल, पूर्व कैप्टन सौरभ वशिष्ठ और पूर्व कैप्टन गोपा कुमार हैं।

इन अधिकारियों के साथ ओमान के एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी स्क्वाड्रन लीडर खमीस अल अजमी को भी हिरासत में लिया गया था। हालाँकि, खमीस अल अजमी को 18 नवंबर 2022 को ही रिहा कर दिया गया, बाकी सभी भारतीय अधिकारियों को अभी भी हिरासत में रखा गया है।

भारत-कतर सुरक्षा संधि का उल्लंघन

भारत के पूर्व अधिकारियों को अवैध हिरासत में रखना और उन तक भारतीय दूतावास के अधिकारियों की पहुँच को रोकना भारत-कतर के बीच हुई सुरक्षा संधि का सीधा उल्लंघन है। दोनों देशों के बीच साल 2008 मेें एक संधि हुई थी। इस संधि को और अधिक विस्तार देने का काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन में भी जारी है।

इस संधि के तहत समुद्री प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास और कतर को धमकी दिए जाने की स्थिति में भारतीय सेना भेजना शामिल था। इससे भारत का हिंद महासागर क्षेत्र और अदन की खाड़ी तक के जल क्षेत्र में पहुँच बढ़ी।

इसके साथ ही इस समझौते में रक्षा और अंतरिक्ष में कतर के साथ सहयोग के द्वार खोले, जिसमें खुफिया जानकारी साझा करना और जनशक्ति प्रशिक्षण शामिल है। वर्तमान हालात जैसी विशेष स्थिति में नाविकों के प्रत्यर्पण की भी बात कही गई है। हालाँकि, अब कतर इस पूरे फ्रेमवर्क का ही उल्लंघन करता नजर आ रहा है।

भारत में वांछित जाकिर नाइक को कतर में मंच

अधिकारियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आने के बाद इनके परिजनों ने प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय से गुहार लगाई है। विदेश मंत्रालय कतर के साथ लगातार संपर्क में है और उस पर इन भारतीयों को छोड़ने का दबाव बना रहा है। बता दें कि पिछले कुछ समय से भारत और कतर के संबंधों कुछ कड़वाहट भी देखने को मिली है।

भारत में वांछित कट्टरपंथी जाकिर नाइक को कतर में आयोजित FIFA वर्ल्ड कप के दौरान वहाँ के सरकारी टीवी चैनल पर इस्लाम के बारे में तकरीर देने के लिए बुलाया गया। हालाँकि, भारत के ऐतराज के बाद कतर ने कहा था कि जाकिर को आधिकारिक तौर पर नहीं बुलाया गया है, लेकिन इस्लामिक मुल्क के सरकारी चैनल पर वहाँ के सत्ता की जानकारी के बिना नहीं बैठाया जा सकता।

‘राजनीतिक मकसद के लिए हो रहा फिल्म फेस्टिवल का इस्तेमाल’: नादव लैपिड के समर्थन में उतरे IFFI जूरी के 3 अन्य विदेशी सदस्य, ‘द कश्मीर फाइल्स’ पर थम नहीं रही रार

गोवा में आयोजित ‘इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI)’ की जूरी के मुखिया नादव लैपिड ने जिस तरह से मंच से खुलेआम ‘द कश्मीर फाइल्स’ को भद्दी और प्रोपेगंडा फिल्म बता दिया, उसके बाद से ही सवाल उठ रहे थे कि केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और गोवा सरकार ने आखिर कैसे इस तरह के व्यक्ति को इस पद के लिए चुना। अब जूरी के अन्य सदस्यों ने भी इजरायली फ़िल्मकार नादव लैपिड का समर्थन करना शुरू कर दिया है।

IFFI जूरी के 3 सदस्यों ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ के विरोध में नादव लैपिड के बयान का समर्थन किया है। इस जूरी में भारत के एकमात्र सदस्य सुदीप्तो सेन अब भी कह रहे हैं कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ पर नादव लैपिड का बयान उनका व्यक्तिगत था और इसका IFFI से कोई लेनादेना नहीं है। अमेरिकी फिल्म निर्माता जिन्को गोटोह, फ्रेंच फिल्म एडिटर पास्कल चवांसे और फ्रेंच डॉक्यूमेंट्री फ़िल्मकार जेवियर अंगुलो बरटुरेन ने ट्विटर पर बयान जारी किया है।

53वें IFFI जूरी के इन तीनों ही सदस्यों ने इस बयान में नादव लैपिड का समर्थन किया है। हालाँकि, गोटोह के जिस ट्विटर हैंडल से ये बयान प्रकाशित हुआ वो वेरिफाइड नहीं है। इसमें उन्होंने लिखा है कि जूरी ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ को कोई अवॉर्ड नहीं दिया और केवल 5 फिल्मों को ही अवॉर्ड दिया गया। इस निर्णय को सर्व-सम्मति से हुआ फैसला बताया गया है। उन्होंने बताया कि ‘नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NDFC)’ और फिल्म फेस्टिवल के प्रशासन की अनुमति के बाद ही ऐसा किया गया।

तीनों ने दावा किया है कि फिल्म के कंटेंट के आधार पर वो कोई राजनीतिक पक्ष नहीं ले रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि ये सिर्फ कला के लिहाज से दिया गया बयान है। उन्होंने दावा किया कि फिल्म फेस्टिवल का राजनीतिक इस्तेमाल हो रहा है और नादव लैपिड पर व्यक्तिगत हमले किए जा रहे हैं। वहीं सुदीप्तो सेन का कहना है कि जूरी के लोग इस तरह एक खास फिल्म को निशाना नहीं बना सकते। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा किया जा रहा है तो ये ‘व्यक्तिगत एजेंडा’ ही कहलाएगा।

‘गुजरात के सभी मुस्लिम एकजुट होकर कॉन्ग्रेस के लिए करें वोट’: जामा मस्जिद के शाही इमाम ने जारी किया ‘फतवा’, कहा – राज्य में तीसरी पार्टी के लिए जगह नहीं

गुजरात विधानसभा चुनावों के मद्देनजर अहमदाबाद की जामा मस्जिद के शाही इमाम शब्बीर अहमद सिद्दीकी ने मुस्लिमों से एकजुट रहने की अपील की है। इस दौरान उन्होंने 2012 की याद दिलाई, जब एक मुस्लिम बहुल सीट से भाजपा प्रत्याशी ने जीत हासिल की थी। इसके अलावा शाही इमाम ने बताया कि मुस्लिमों को एक हो कर वोट डालने के प्रयास सोशल मीडिया से भी किए जा रहे हैं। शब्बीर अहमद ने ये बयान शनिवार (3 दिसंबर, 2022) को दिया है।

‘ABP न्यूज़’ से बात करते हुए इमाम शब्बीर ने बताया कि मुस्लिमों के वोटों के बँटवारे के चलते साल 2012 में अहमदाबाद की जमालपुरा सीट पर भी भाजपा ने कब्ज़ा जमा लिया था। इमाम के मुताबिक, इसकी वजह मुस्लिम वोटों का आपस से विभाजन था। इस बार को लेकर शब्बीर ने कहा है कि मुस्लिम उसी को जिताएँ जो उनका प्रतिनिधित्व करता हो। खुद शब्बीर भी दूसरे, यानी कि अंतिम चरण के चुनाव में 5 दिसंबर, 2022 को अपना वोट अहमदाबाद में डालेंगे।

साल 2012 में जमालपुरा सीट से कॉन्ग्रेस पार्टी ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारा था। उनके विरोध में एक स्थानीय नेता साबिर काबलीवाला भी चुनाव लड़े थे। काबलीवाला को लगभग 30 हजार वोट मिले थे। इस खींचतान में भाजपा प्रत्याशी ने 6000 वोटों से जीत दर्ज कर ली थी। एक बार फिर से काबलीवाला उसी जमालपुरा से चुनावी मैदान में हैं। इस बार वो ओवैसी की पार्टी AIMIM से प्रत्याशी हैं।

ओवैसी की पार्टी की गुजरात चुनावों में एंट्री पर सवाल खड़े करते हुए इमाम शब्बीर ने पूछा कि वो विधानसभा में क्या करने जा रहे हैं? बकौल शाही इमाम, मुस्लिमों की भाजपा से दुश्मनी है तो ऐसे समय पर उन्हें कॉन्ग्रेस से भी शत्रुता नहीं करनी चाहिए। इमाम ने खुले तौर पर मुस्लिमों से एकजुट हो कर कॉन्ग्रेस को वोट देने की अपील की। इमाम की इस बयानबाजी पर भाजपा उम्मीदवार भूषण अशोक मित्तल ने ऑपइंडिया से बात की।

मित्तल ने कहा कि मुस्लिम समझ चुके हैं कि कॉन्ग्रेस उन्हें वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। भाजपा प्रत्याशी ने आगे कहा कि ऐसे में कॉन्ग्रेस के पास अपने वोट बैंक को बचाने के लिए सीमित विकल्प ही बचे हैं।

‘इसी क्षण मैं कॉन्ग्रेस पार्टी छोड़ती हूँ’: ‘जो राम को लाए हैं’ भजन सुन भावुक हुईं पंजाब की पार्षद, छोड़ा हाथ का साथ

पंजाब के लुधियाना में कॉन्ग्रेस की पार्षद राशि अग्रवाल ने एक भजन संध्या के बाद मंच से अपनी पार्टी को छोड़ने का ऐलान कर दिया। राशि अग्रवाल ने लुधियाना के जगरावां ब्रिज के पास दुर्गा माता मंदिर में कन्हैया लाल मित्तल का मशहूर गाना ‘जो राम को लाए हैं हम उनको लाएँगे’ सुनने के बाद यह फैसला लिया।

कार्यक्रम के बाद राशि ने मंच पर जाकर कहा, “कॉन्ग्रेस पार्टी से मैं पार्षद के रूप में सेवा कर रही हूँ। आज इस मंच से मैं उद्घोषणा करती हूँ… मेरा शरीर यहाँ था, मेरा हृदय जहाँ था, आपने मेरा वो स्नेह, वो प्रेम, वो देशभक्ति का जज्बा आपने उजागर कर दिया है। इसी क्षण मैं कॉन्ग्रेस पार्टी से त्याग पत्र देती हूँ।”

अपने ऐलान के बाद उन्होंने कहा, “जो राम को लाए हैं हम उनको लाएँगे। मेरे मोहन की बातें मैं जानूँ या वो जाने और सारे जहाँ से प्यारी मेरी भारत की नारी…। अहो भाग्य राम मानव तन पाया, उस पर राम नाम जब गाया, पाकर राम नाम धनराशि, घोर विपद अविनाशी। जो राम को लाए हैं, हम उनको लाएँगे।”

कॉन्ग्रेस पार्षद द्वारा इस प्रकार राम नाम सुनकर पद छोड़ने का ऐलान सुनकर कन्हैया मित्तल बोले- “मैंने बहुत जिंदगी देखी लेकिन एक क्षण में पद छोड़ना कभी नहीं देखा।” उन्होंने पूर्व सीएम कल्याण सिंह को याद करते हुए कहा, “कल्याण जी ने भगवान राम के लिए पद छोड़ा। आपने भी भगवान राम के लिए पद छोड़ा है। आज हम राम मंदिर की बात करते हैं तो कल्याण सिंह याद आते हैं। हमें योगी-मोदी पर यकीन है लेकिन जो कल्याण सिंह जी ने किया, जो कोठारी भाइयों ने किया, वही आपने आज किया। मैंने हमेशा कहा है कि मैं भाजपा के लिए नहीं गाता मैं भगवान राम के लिए गाता हूँ। मैं श्याम दल और राम दल से जुड़ा हूँ।”

बता दें कि राशि को साल 2018 में पार्षद चुना गया था। अगले चुनाव 2023 में होने हैं। अभी भाजपा या कॉन्ग्रेस ने राशि द्वारा दिए त्याग पत्र पर कोई बयान नहीं दिया है। अगर इस संबंध में कोई बयान आता है तो इसे स्टोरी में जोड़ा जाएगा। फिलहाल ये वीडियो कन्हैया मित्तल ने शेयर की है। उन्होंने उन्हें हिंदू शेरनी कहा और बताया कि कैसे उन्होंने जो राम को लाए हैं सुनते ही पद छोड़ दिया।