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मनोवैज्ञानिक थी, फिर भी आफताब को नहीं पहचान पाई नई GF: श्रद्धा का मर्डर सुन बोली- वो किसी को भी मार सकता था

दिल्ली के महरौली में हुए श्रद्धा मर्डर केस में आरोपित आफताब की दरिंदगी से उसकी दूसरी प्रेमिका भी हैरान है। आफ़ताब की नई प्रेमिका ने कहा कि उसको भी श्रद्धा की ही तरह काटा जा सकता था। इसी के साथ उन्होंने बताया कि वो कभी आफ़ताब को भाँप भी नहीं पाई। नई प्रेमिका ने आफताब के अपने साथ व्यवहार को पूरी तरह से नॉर्मल बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आफ़ताब की नई प्रेमिका ने खुद का श्रद्धा के मर्डर से कोई भी लेना-देना नहीं होने की जानकारी दी है। उनका कहना है कि श्रद्धा के कटे टुकड़ों से भी उनका कोई वास्ता नहीं है। लड़की का यहाँ तक कहना है कि आफ़ताब के फ़्लैट पर आने-जाने के दौरान आफताब ने उसे भनक भी नहीं लगने दी कि उसी घर में श्रद्धा की लाश टुकड़ों में कटी रखी हुई थी।

जानकारी के मुताबिक श्रद्धा की हत्या के महज 12 दिनों के ही अंदर आफताब ने नई गर्ल फ्रेंड बना ली थी। ऐसा उसने उसी डेटिंग एप के जरिए किया था जिससे वो कभी श्रद्धा से मिला था। आफ़ताब की नई प्रेमिका साइकेट्रिस्ट है जो पुलिस द्वारा किए जा रहे तमाम खुलासों से हतप्रभ है। लड़की का कहना है कि उसे आफ़ताब के व्यवहार में कभी भी कुछ असमान्य नहीं लगा। वो अपनी नई प्रेमिका को कभी डरा-सहमा भी नहीं दिखा। वह अक्सर अपने मुंबई वाले घर की बातें किया करता था।

साथ ही यह भी जानकारी दी कि आफताब खुद के लिए काफी केरयिंग था और कई परफ्यूम का कलेक्शन रखता था। उसने कुछ पर्फ्यूम अपनी नई प्रेमिका को भी गिफ्ट किए थे। दोनों 12 अक्टूबर 2022 को आफ़ताब के ही फ़्लैट पर मिले थे और काफी देर तक साथ में समय भी बिताया था। हालाँकि अब आफ़ताब की नई प्रेमिका काफी घबराई हुई है और लड़की का कहना है कि आफ़ताब किसी की भी जान ले सकता है। हालाँकि दिल्ली पुलिस ने एक लम्बे सवाल जवाब के बाद उसे वापस भेज दिया है।

बालों का DNA मिला श्रद्धा के पिता के DNA से

एक अन्य जानकारी के मुताबिक आफ़ताब लगभग 15 से 20 अलग-अलग लड़कियों के सम्पर्क में था। इन लड़कियों से वो अलग-अलग डेटिंग एप के जरिए मिला था। बताया जा रहा है कि आफ़ताब ने श्रद्धा के सिर को धड़ से अलग कर के उसके बालों को काटा था। उन्ही बालों के कुछ हिस्से दिल्ली के एक हिस्से में मिले हैं। दावा किया जा रहा है कि बालों का DNA श्रद्धा के पिता के DNA से मिल गया है।

‘द कश्मीर फाइल्स में जो देखा वो सिर्फ 5% है’: इजरायली फिल्मकार लैपिड के खिलाफ प्रदर्शन, हिंदू बोले- हमारे घावों पर छिड़का जा रहा नमक

घाटी में पंडितों के नरसंहार पर बनी ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म को IFFI जूरी हेड और इजरायल के फिल्म निर्माता नादव लैपिड (Nadav Lapid) द्वारा ‘अश्लील और प्रोपेगेंडा’ बताए जाने पर कश्मीरी पंडित भड़क गए हैं। जम्मू में कश्मीर पंडितों ने लैपिड के बयानों की निंदा की और उसे ‘घाव को नमक मलने’ जैसा बताया।

नादव लैपिड के विरोध में कश्मीरी पंडितों ने प्रदर्शन किया। कश्मीरी पंडितों का कहना है कि लैपिड ने वहाँ के नरसंहार, नस्लीय उत्पीड़न, बलात्कार और पलायन पर एक शब्द नहीं बोला, लेकिन उस तथ्य को दिखाने वाली फिल्म को ही प्रोपेगेंडा बता दिया। कश्मीरी पंडितों का पूछना है कि लैपिड की नजर में कश्मीरी पंडितों का नरसंहार और पलायन हुआ ही नहीं।

रंजन नाम के प्रदर्शनकारी कहते हैं, नादव लैपिड का बयान निंदनीय है। उन्होंने ऐसा बयान देकर जख्म पर नमक रगड़ने का काम किया है। वहीं, एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि पिछले 32 सालों से वे न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन न्याय की जगह इसे प्रोपेगेंडा प्रसारित किया जा रहा है।

एक प्रदर्शनकारी योगेश पंडिता का कहना है, “कश्मीर फाइल्स सिर्फ 5% है। जो हुआ उसका 95% उन्होंने देखा ही नहीं। हम इज़राइल के राजदूत के बयान का स्वागत करते हैं, जो इजरायली फिल्म निर्माता के बयान की निंदा करता है।”

कश्मीरी ऐक्टविस्टस्ट का कहना है कि आजकल हर कोई इस फिल्म को प्रोपेगेंडा बता रहा है और कश्मीरी पंडितों की न्याय की बात कर रहा है, लेकिन सवाल है कि किससे न्याय? इसकी बात कोई नहीं कर रहा है। उन्होंने का कि 30 साल से यही नैरेटिव रचा गया कि कश्मीरी पंडितों को कुछ नहीं हुआ। यह बेहद सोच-समझकर प्रचारित किया गया।

अमित रैना ने कहा कि पहले कश्मीर के पूर्व राज्यपाल जगमोहन को दोषी बताया गया फिर इस फिल्म को बताया जाने लगा। जिन लोगों ने हथियार उठाए और कश्मीरी हिंदुओं की हत्या की, उनको लेकर सवाल नहीं उठाए जा रहे हैं। इस फिल्म ने 32 साल पुराने इस नैरेटिव का भंडाफोड़ कर दिया।

वहीं, एक अन्य कश्मीरी ऐक्टविस्ट सुशील पंडित ने कहा, जहाँ तक कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार का सवाल है तो वह (महबूबा) हिस्ट्रीशीटर हैं। अब तक उन्होंने अपना और अपने पिता का रोल लिमिट करने की कोशिश नहीं की। उस नरसंहार के लिए आज तक किसी को दोषी नहीं ठहराया गया, किसी को सजा नहीं हुई।”

सुशील पंडित ने कहा कि महबूबा जेहादी हैं और हमेशा जेहाद की बात करती हैं। उन्होंने हमेशा जेहादियों को बचाने की कोशिश की है। महबूबा कश्मीरियों की दुश्मन हैं। उन्होंने अपने समय में 300 से अधिक पत्थरबाजों को हायर किया था।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने लैपिड के बयान का समर्थन किया है। उन्होंने कहा, “अंतत: किसी ने फिल्म का नाम लिया, जिसे सत्ताधारी दल द्वारा मुस्लिमों, विशेष रूप से कश्मीरियों को नीचा दिखाने और पंडितों एवं मुस्लिमों के बीच की खाई को चौड़ा करने के लिए प्रचारित किया गया था। दुख की बात है कि अब सच को खामोश करने के लिए कूटनीतिक माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है।”

लैपिड ने कश्मीर फाइल्स को ‘प्रोपेगेंडा और अश्लील’ बताने के बाद दो कदम आगे बढ़ गए और कश्मीर में भारतीय नीति को ही गलत ठहरा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें फासीवादी विशेषताएँ हैं। दरअसल, कश्मीर फाइल्स फिल्म 90 के दशक में कश्मीरी हिंदुओं के पलायन पर आधारित है। नादव ने कहा कि अगर इस तरह की फिल्म आने वाले वर्षों में इजरायल में भी बनती है तो उन्हें आश्चर्य होगा।

उन्होंने स्थानीय मीडिया Ynet से बात करते हुए कहा, “इस तरह से बोलना और राजनीतिक बयान देना आसान नहीं था। मुझे पता था कि यह एक ऐसी घटना है, जो देश से जुड़ी हुई है। हर कोई यहाँ सरकार की प्रशंसा करता है। यह कोई आसान स्थिति नहीं है, क्योंकि आप एक अतिथि के तौर पर यहाँ पर हैं।”

उन्होंने आगे कहा, आगे कहा, “मैं यहाँ हजारों लोगों के साथ एक हॉल में मौजूद था। हर कोई स्थानीय सितारों को देखने और सरकार की जय-जयकार करने के लिए उत्साहित था। उन देशों में जो तेजी से अपने मन की बात कहने या सच बोलने की क्षमता खो रहे हैं, किसी को बोलने की जरूरत है। जब मैंने यह फिल्म देखी, तो मैं इसके साथ इजरायली परिस्थिति की कल्पना किए बिना नहीं रह सका, जो यहाँ मौजूद नहीं थे। लेकिन, वे निश्चित रूप से मौजूद हो सकते थे। इसलिए मुझे ऐसा लगा कि मुझे यह करना ही पड़ेगा, क्योंकि मैं एक ऐसी जगह से आया हूँ, जहाँ खुद में सुधार नहीं हुआ है। वह खुद भी इसी रास्ते पर है।”

बता दें कि लैपिड वामपंथी विचारधारा से ग्रसित इजरायली फिल्म निर्माता है। इसने अब तक कुल 13 फिल्में डायरेक्ट की हैं। नादव लैपिड को इजरायल से नफरत वाले व्यक्ति के रूप में देखा जाता है। यहूदियों के एक मात्र देश और उसकी मातृभूमि को लेकर नादव लैपिड के विचार कितने अच्छे हैं, इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि उसके विचारों में इजरायल के विरोधी देश फिलीस्तीन की तरफदारी नजर आती है।

एक इंटरव्यू में लैपिड ने अपनी फिल्म ‘सिनोनिम्स’ पर बात करते हुए इजरायल को लेकर कहा था, “फिल्म इजरायल की आत्मा के बारे में बात करती है। इजरायल की आत्मा एक बीमार आत्मा है। इजरायल के अस्तित्व के गहरे सार में कुछ गलत सा सड़ा हुआ है। यह गलत सिर्फ बेंजामिन नेतन्याहू (इजरायल के प्रधानमंत्री) नहीं है। बल्कि, मुझे लगता है कि इस इजरायली बीमारी या प्रकृति की विशेषता युवा इजरायली लोग हैं जो मस्कुलर बॉडी देखकर खुश होते हैं। लेकिन, न तो कोई सवाल नहीं उठाते हैं और न ही कोई संदेह नहीं करते। उन्हें सिर्फ इजरायली होने में गर्व होता है।”

मॉर्निंग वॉक पर निकली मंदिर के हथिनी ‘लक्ष्मी’ की मौत, लोगों ने रोते हुए दी अंतिम विदाई: लोगों ने एक्टिविस्ट्स को बताया जिम्मेदार

पुडुचेरी के मनाकुला विनयागर मंदिर (Manakula Vinayagar Temple) की प्रसिद्ध हथिनी लक्ष्मी की बुधवार (30 नवंबर, 2022) को अचानक गिरने से मौत हो गई। लक्ष्मी की मौत से इलाके में लोग बेहद दुखी हैं। सोशल मीडिया पर उसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वहीं, भारतीय वन सेवा के अधिकारी वंजुलवल्ली श्रीधर और एनिमल वेलफेयर के एस मुरलीधरन ने तोड़-फोड़ का संदेह जताया है और उसकी मौत के लिए मंदिर के कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, लक्ष्मी अपने महावत के साथ आज सुबह मॉर्निग वॉक पर निकली थी। इस दौरान वह अचानक बेहोश होकर सड़क पर गिर गई। उसे इलाज के लिए पशु चिकित्सकों के पास ले जाया गया, लेकिन कार्डियक अरेस्ट के कारण उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद उसे क्रेन से उठाकर मंदिर के सामने रखा गया, ताकि भक्त लक्ष्मी को श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें। वहीं, लक्ष्मी के मौत की खबर सुनते ही पुडुचेरी के लोग उसे देखने के लिए उमड़ पड़े। उन्होंने उसे रोते हुए अंतिम विदाई दी।

बताया जा रहा है कि हथिनी लक्ष्मी साल 1995 में 5 साल की उम्र में मनाकुला विनायगर मंदिर में आई थी। तब से उसे यहाँ भक्तों का बहुत प्यार मिला है। लोग उसे प्रसाद खिलाते थे। उसका आशीर्वाद लेते थे, लेकिन उसके इस तरह से जाने से उनका रो-रोकर बुरा हाल है।

मंदिर के कार्यकर्ताओं ने लक्ष्मी की मौत को साजिश करार दिया है। उनका आरोप है कोरोना महामारी के दौरान भाजपा नेता मेनका गाँधी द्वारा लक्ष्मी को मनाकुला विनयागर मंदिर से जबरदस्ती उठा लिया गया था। उनके मुताबिक, “हम तत्कालीन पुडुचेरी के मुख्यमंत्री नारायणसामी, कॉन्ग्रेस नेता अमेरिकाई नारायणन और इंदु मक्कल काची की मदद से लक्ष्मी को यहाँ वापस लाए। लेकिन, उसके बाद मेनका ने वन विभाग पर दबाव डाला कि वह हाथी को टहलाने तक के लिए न ले जाएँ। उसकी वजह से उसके (लक्ष्मी) शरीर में वॉटर रिटेंशन था, जिसके कारण उसे दिल का दौरा पड़ा और आज सुबह उसकी मौत हो गई।”

वहीं, दूसरी ओर भारतीय वन सेवा के अधिकारी वंजुलवल्ली श्रीधर और एनिमल वेलफेयर कार्यकर्ता एस मुरलीधरन ने तोड़-फोड़ का संदेह जताया है। मुरलीधरन ने पूछा, “किसके निर्देश पर वह हाथी को टहलाने ले गए। इसके बाद उसे शेड में बंद कर दिया और पोस्टमॉर्टम हुआ।”

‘प्रिंसिपल फ़िरोज़उद्दीन ने रेप का प्रयास किया, विरोध करने पर कर्मचारियों से पिटवाया’: सरकारी स्कूल में काम करती है हिन्दू विधवा, बताया जान का खतरा

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में सरकारी स्कूल के एक प्रिंसिपल पर हिन्दू महिला से रेप के प्रयास का आरोप लगा है। प्रिंसिपल का नाम फिरोजउद्दीन है। पीड़िता विधवा है, जिसे उसी स्कूल में बच्चों की देखभाल की नौकरी मिली हुई है। आरोप है कि प्रिंसिपल पिछले 7 वर्षों से पीड़िता पर गंदी नजर रखे हुए था। महिला की शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज कर के मामले की जाँच शुरू कर दी है। घटना शनिवार (26 नवम्बर 2022) की बताई जा रही है।

मामला मौदहा थानाक्षेत्र के तिंदूही स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय का है। यहाँ परिचायिका के पद कर काम करने वाली पीड़िता ने पुलिस में शिकायत देते हुए बताया कि वह अपने अध्यापक पति की मृत्यु के बाद ‘मृतक आश्रित कोटे’ में स्कूल में नौकरी करती है। उसकी नियुक्ति 25 अगस्त, 2015 से हुई है। महिला का कहना है कि तैनाती के बाद से ही स्कूल का प्रिंसिपल फ़िरोज़उद्दीन उन पर जबरन शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बना रहा है। शिकायत में यह भी बताया गया है कि पीड़िता ने लोकलाज के डर से उसकी हरकतों की शिकायत नहीं की तो इसका आरोपित ने गलत फायदा उठाया।

महिला ने शिकायत में आगे बताया है कि फ़िरोज़उद्दीन उसके साथ लगातार छेड़खानी कर रहा था, जिसका वो विरोध करती थी। 26 नवम्बर, 2022 को जब वो स्कूल में आने के बाद प्रिंसिपल के कमरे में रखे रजिस्टर पर दस्तखत करने गई, तब प्रिंसिपल ने अंदर से अचानक ही कुण्डी लगा ली। इस दौरान फ़िरोज़उद्दीन पीड़िता से जबरन शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश करने लगा। महिला द्वारा इसका विरोध करने पर उसकी पिटाई भी की गई। जैसे-तैसे पीड़िता खुद को छुड़ा कर कमरे से बाहर निकल पाई।

पीड़िता ने शिकायत में आगे बताया है कि बाहर निकल कर उसने शोर मचाया तो लोग जमा हो गए। इस बीच फ़िरोज़उद्दीन भी बाहर निकल आया। उसके प्रभाव में उसी स्कूल की 3 अन्य महिला स्टाफ ने उसका पक्ष लिया और पीड़िता की पिटाई की। शिकायत में यह भी बताया गया है कि स्कूल में आने वाले मिड डे मील में भी धाँधली की जाती है। कुछ टीचरों के न आने के बावजूद भी उनके हस्ताक्षर होने और उन्हें वेतन दिए जाने की बात भी कही गई है।

महिला ने अपनी शिकायत में फ़िरोज़उद्दीन को काफी दबंग किस्म का बताते हुए अपनी जान को खतरा बताया है। बताया ये भी गया है कि फ़िरोज़उद्दीन के अब्बा पत्रकार हैं, जिनकी धौंस पर वह पीड़िता को ही गलत साबित करने पर तुला हुआ है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

पुलिस ने इस FIR में फ़िरोज़उद्दीन के साथ मारपीट की आरोपित 3 अन्य महिला टीचरों को को भी नामजद किया है। यह केस IPC की धारा 354 (ख), 452 और 323 के तहत लिखा गया है। ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़िता ने बताया कि वो 2 बच्चों की माँ है और ये नौकरी ही उनके साथ दोनों बच्चों का भी सहारा है। उन्होंने हमें आगे बताया कि जिस जगह स्कूल है, वहाँ आबादी में मुस्लिम बहुलता में हैं। महिला का आरोप है कि FIR दर्ज हुए 3 दिन बीत गए, लेकिन अभी तक आरोपित फ़िरोज़उद्दीन की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है और वो खुलेआम घूम रहा है। पीड़िता के मुताबिक, उसे केस वापस लेने की धमकी और दबाव भी मिल रहा है।

पीड़िता ने हमें बताया कि वो फ़िरोज़उद्दीन की प्रताड़ना के चलते कहीं और ट्रांसफर करवाना चाह रही थी, लेकिन आरोपित ने अपने प्रभाव से ये भी नहीं होने दिया। इसी के साथ प्रिंसिपल के अब्बा पर यह भी आरोप है कि उसने पीड़िता के भाई को भी फोन पर धमकाया और केस वापस लेने का दबाव बनाया। महिला का कहना है कि शिक्षा विभाग ने भी अभी तक उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की है।

स्कूल में करता है योगी-मोदी विरोध बातें

पीड़िता का आरोप है कि फ़िरोज़उद्दीन स्कूल में अक्सर योगी और मोदी के खिलाफ लोगों से बातें किया करता है। महिला ने हमें बताया कि फ़िरोज़ लोगों को स्कूल परिसर में भी अक्सर यह बताते सुना जा सकता है कि भाजपा सरकार EVM में गड़बड़ी कर के बनी है।

‘हिस्ट्रीशीटर जिहादी हैं PDP की मुखिया’: महबूबा मुफ़्ती ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ को प्रोपेगंडा बताने वाले विदेशी फ़िल्मकार का किया समर्थन, भड़के कश्मीरी हिन्दू

IFFI जूरी हेड और इजरायल के फिल्म निर्माता नादव लैपिड (Nadav Lapid) का जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) ने समर्थन किया है। लैपिड ने फिल्म कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files) के नाम पर कश्मीरी हिंदुओं के बलिदान का मजाक उड़ाया था।

महबूबा ने ट्विटर पर कहा, “अंतत: किसी ने फिल्म का नाम लिया, जिसे सत्ताधारी दल द्वारा मुस्लिमों, विशेष रूप से कश्मीरियों को नीचा दिखाने और पंडितों एवं मुस्लिमों के बीच की खाई को चौड़ा करने के लिए प्रचारित किया गया था। दुख की बात है कि अब सच को खामोश करने के लिए कूटनीतिक माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है।”

इसको लेकर कश्मीरी ऐक्टविस्ट ने कहा कि आजकल हर कोई इस फिल्म को प्रोपेगेंडा बता रहा है और कश्मीरी पंडितों की न्याय की बात कर रहा है, लेकिन सवाल है कि किससे न्याय? इसकी बात कोई नहीं कर रहा है। उन्होंने का कि 30 साल से यही नैरेटिव रचा गया कि कश्मीरी पंडितों को कुछ नहीं हुआ। यह बेहद सोच-समझकर प्रचारित किया गया।

अमित रैना ने कहा कि पहले कश्मीर के पूर्व राज्यपाल जगमोहन को दोषी बताया गया फिर इस फिल्म को बताया जाने लगा। जिन लोगों ने हथियार उठाए और कश्मीरी हिंदुओं की हत्या की, उनको लेकर सवाल नहीं उठाए जा रहे हैं। इस फिल्म ने 32 साल पुराने इस नैरेटिव का भंडाफोड़ कर दिया।

वहीं, एक अन्य कश्मीरी ऐक्टविस्ट सुशील पंडित ने कहा, जहाँ तक कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार का सवाल है तो वह (महबूबा) हिस्ट्रीशीटर हैं। अब तक उन्होंने अपना और अपने पिता का रोल लिमिट करने की कोशिश नहीं की। उस नरसंहार के लिए आज तक किसी को दोषी नहीं ठहराया गया, किसी को सजा नहीं हुई।”

सुशील पंडित ने कहा कि महबूबा जेहादी हैं और हमेशा जेहाद की बात करती हैं। उन्होंने हमेशा जेहादियों को बचाने की कोशिश की है। महबूबा कश्मीरियों की दुश्मन हैं। उन्होंने अपने समय में 300 से अधिक पत्थरबाजों को हायर किया था।

लैपिड ने कहा है कि वह कश्मीर फाइल्स को ‘प्रोपेगेंडा और अश्लील’ बताते हुए कहा है कि इसमें भारतीय नीति को सही ठहराने वाली फिल्म से हैरान थे। साथ ही आरोप लगाया कि इसमें फासीवादी विशेषताएँ हैं और यह फिल्म 90 के दशक में कश्मीरी हिंदुओं के पलायन पर आधारित है। नादव ने कहा कि अगर इस तरह की फिल्म आने वाले वर्षों में इजरायल में भी बनती है तो उन्हें आश्चर्य होगा।

उन्होंने स्थानीय मीडिया Ynet से बात करते हुए कहा, “इस तरह से बोलना और राजनीतिक बयान देना आसान नहीं था। मुझे पता था कि यह एक ऐसी घटना है, जो देश से जुड़ी हुई है। हर कोई यहाँ सरकार की प्रशंसा करता है। यह कोई आसान स्थिति नहीं है, क्योंकि आप एक अतिथि के तौर पर यहाँ पर हैं।”

उन्होंने आगे कहा, आगे कहा, “मैं यहाँ हजारों लोगों के साथ एक हॉल में मौजूद था। हर कोई स्थानीय सितारों को देखने और सरकार की जय-जयकार करने के लिए उत्साहित था। उन देशों में जो तेजी से अपने मन की बात कहने या सच बोलने की क्षमता खो रहे हैं, किसी को बोलने की जरूरत है। जब मैंने यह फिल्म देखी, तो मैं इसके साथ इजरायली परिस्थिति की कल्पना किए बिना नहीं रह सका, जो यहाँ मौजूद नहीं थे। लेकिन, वे निश्चित रूप से मौजूद हो सकते थे। इसलिए मुझे ऐसा लगा कि मुझे यह करना ही पड़ेगा, क्योंकि मैं एक ऐसी जगह से आया हूँ, जहाँ खुद में सुधार नहीं हुआ है। वह खुद भी इसी रास्ते पर है।”

बता दें कि लैपिड वामपंथी विचारधारा से ग्रसित इजरायली फिल्म निर्माता है। इसने अब तक कुल 13 फिल्में डायरेक्ट की हैं। नादव लैपिड को इजरायल से नफरत वाले व्यक्ति के रूप में देखा जाता है। यहूदियों के एक मात्र देश और उसकी मातृभूमि को लेकर नादव लैपिड के विचार कितने अच्छे हैं, इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि उसके विचारों में इजरायल के विरोधी देश फिलीस्तीन की तरफदारी नजर आती है।

एक इंटरव्यू में लैपिड ने अपनी फिल्म ‘सिनोनिम्स’ पर बात करते हुए इजरायल को लेकर कहा था, “फिल्म इजरायल की आत्मा के बारे में बात करती है। इजरायल की आत्मा एक बीमार आत्मा है। इजरायल के अस्तित्व के गहरे सार में कुछ गलत सा सड़ा हुआ है। यह गलत सिर्फ बेंजामिन नेतन्याहू (इजरायल के प्रधानमंत्री) नहीं है। बल्कि, मुझे लगता है कि इस इजरायली बीमारी या प्रकृति की विशेषता युवा इजरायली लोग हैं जो मस्कुलर बॉडी देखकर खुश होते हैं। लेकिन, न तो कोई सवाल नहीं उठाते हैं और न ही कोई संदेह नहीं करते। उन्हें सिर्फ इजरायली होने में गर्व होता है।”

रूस में जिंदा हुआ 48500 साल पुराना Zombie Virus, दुनिया पर मँडरा रहा कोरोना से भी बड़ा ख़तरा? सदियों से बर्फ में जमे थे, ग्लोबल वार्मिंग से निकल रहे बाहर

अभी लोग कोरोना महामारी (Pandemics) से उबर भी नहीं सके थे और दुनिया में एक नई और बड़ी महामारी का खतरा मंडराने लगा है। माना जा रहा है कि इस बार खतरा कोरोना महामारी से भी खतरनाक हो सकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि फ्रांस के वैज्ञानिकों ने रूस में जमी हुई झील के नीचे दबे 48,500 साल पुराने जॉम्बी वायरस (Zombie Virus) को जिंदा किया है। वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि ‘जॉम्बी वायरस’ बहुत अधिक संक्रामक है। जो तेजी के साथ फैल सकता है।

ब्लूमबर्ग’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने रूस के साइबेरिया क्षेत्र में पर्माफ्रॉस्ट से एकत्रित प्राचीन नमूनों की जाँच की है। रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिकों ने 13 रोगजनक वायरसों की विशेषता बताते हुए उन्हें जिंदा कर दिया। इन्हें ‘जॉम्बी वायरस’ नाम दिया गया है। वैज्ञानिकों ने पाया कि कई शताब्दियों तक जमीन के नीचे बर्फ में दबे रहने के बावजूद भी वायरस संक्रामक बने रहे हैं।

न्यूयॉर्क पोस्ट’ के अनुसार, बहुत प्राचीन अज्ञात वायरस के जीवित होने से पौधों, पशुओं और मनुष्यों में घातक रोग उत्पन्न हो सकते हैं। शुरुआती शोध के अनुसार, ग्लोबल वार्मिंग के कारण स्थायी रूप से जमे हुए वो इलाके पिघल रहे हैं जो उत्तरी गोलार्ध के एक-चौथाई हिस्से को कवर करती हैं। शोधकर्ता कहते हैं, “10 लाख सालों तक जमे कार्बनिक पदार्थों के इलाके में पुनर्जीवित सेलुलर रोगाणुओं जैसे प्रोकैरियोट्स, यूनिसेल्यूलर, यूकेरियोट्स के साथ-साथ वायरस भी शामिल हैं, जो प्रागैतिहासिक काल से निष्क्रिय रहे हैं।”

वैज्ञानिक लंबे समय से ग्लोबल वॉर्मिंग को दुनिया के लिए खतरा बता रहे हैं। लगातार चेतावनी दी जा रही है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण जमी हुई बर्फ पिघलने से जलवायु परिवर्तन होगा जिससे पारिस्थितिक तंत्र बिगड़ जाएगा। इतना ही नहीं जलवायु परिवर्तन से जमीन में दबी मीथेन विघटित हो जाएगी, जिससे ग्रीनहाउस प्रभाव पड़ेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल वार्मिंग से यह संभावना है कि प्राचीन परमाफ्रॉस्ट (बर्फ से ढके इलाके) पिघलने पर कई अज्ञात वायरस बाहर आ जाएँगे। जिसका दुनिया पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

जाँच अभी शुरुआती दौर में है। इसके बाद वैज्ञानिक प्रकाश, गर्मी, ऑक्सीजन और अन्य बाहरी पर्यावरणीय माहौल के संपर्क में आने पर इन अज्ञात विषाणुओं की संक्रामकता के स्तर का आकलन करेंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे पुराना वायरस जिसे पैंडोरावायरस येडोमा कहा जाता है, इसकी उम्र 48,500 साल से ज्यादा बताई जा रही है। इस वायरस ने इसी टीम द्वारा 2013 में खोजे गए उस वायरस का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया जिसकी उम्र 30,000 साल से ज्यादा बताई गई थी।

कंडोम, पिल्स, सिगरेट और शराब… बेंगलुरु में स्कूली बच्चों के बस्ते से मिला सामान, टीचर देखकर हैरान, छात्रों को 10 दिन छुट्टी पर भेजा

बेंगलुरु के स्कूलों में स्टूडेंट्स के बैग की चेकिंग की गई है। इस चेकिंग में स्टूडेंट्स के बैग से कंडोम, गर्म निरोधक दवाइयाँ, लाइटर, सिगरेट, व्हाइटनर और कुछ नगद पैसे मिले हैं। यही नहीं, कुछ स्टूडेंट्स के पास से शराब की बोतलें व पानी को बोतलों में भी शराब मिली है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बेंगलुरु के कई स्कूलों में ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि स्टूडेंट्स अपने स्कूल बैग में मोबाइल फोन छिपाकर क्लास में आ रहे हैं। इस शिकायत के चलते प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के जुड़े प्रशासन एसोसिएटेड मैनेजमेंट्स ऑफ प्राइमरी एंड सेकंडरी स्कूल्स इन कर्नाटक (KAMS) ने सभी स्कूलों से छात्रों के बैग की जाँच शुरू करने को कहा था। इसके बाद, कई स्कूलों में स्टूडेंट्स के बैग की तलाशी करने के लिए अभियान चलाया गया।

इस तलाशी में, क्लास 8, 9 और 10 के स्टूडेंट्स के स्कूल बैग की तलाशी ली गई तो उनके बैग से मोबाइल फोन तो मिला ही, साथ ही कंडोम समेत कई आपत्तिजनक सामग्री भी मिली है। स्टूडेंट्स के बैग में ऐसी सामग्री मिलने के बाद स्कूल प्रशासन सख्ती बरत रहा है।

यही नहीं, स्टूडेंट्स के बैग से मिली इन सामग्री को लेकर कुछ स्कूलों ने छात्रों के पेरेटन्स (माता-पिता) को बुलाकर मीटिंग भी की है। हालाँकि इस बारे में जब, स्कूल प्रशासन द्वारा पैरेंट्स को बताया गया तो वह भी हैरान रह गए।

इस पूरे मामले पर, बेंगलुरु के नगरभावी में स्थित एक स्कूल के प्रिंसिपल ने कहा, “स्कूल द्वारा जब छात्रों के माता-पिता को उनके बैग से मिली आपत्तिजनक सामग्री के बारे में बताया तो वह हैरान हो गए। पेरेंट्स ने हमसे छात्रों के व्यवहार में अचानक हुए परिवर्तन को लेकर भी बात की है।”

फिलहाल, मौजूदा स्थिति को संभालने के लिए स्कूलों ने छात्रों को सस्पेंड करने के बजाए पेरेंट्स को नोटिस जारी किया है। साथ ही, स्कूल प्रशासन ने पैरेंट्स से बच्चों की काउंसिलिंग कराने को कहा है। इसके लिए बच्चों को 10 दिनों की छुट्टी भी दी गई है।

एक अन्य स्कूल के प्रिंसिपल ने कहा है कि 10 वीं की एक छात्रा के बैग में कंडोम मिला था। इस बारे में जब उससे पूछा गया तो उसने कहा कि वह प्राइवेट ट्यूशन में पढ़ने जाती है। वहाँ, उसके साथ पढ़ने वाले अन्य छात्रों ने उसके बैग में कंडोम रख दिया होगा।

एसोसिएटेड मैनेजमेंट्स ऑफ प्राइमरी एंड सेकंडरी स्कूल्स इन कर्नाटक (KAMS) के महासचिव डी शशि कुमार ने कहा है कि 80 प्रतिशत स्कूलों में चेकिंग की गई है। बच्चों के बैग से गर्भनिरोधक गोलियाँ भी मिली हैं। इसके अलावा उनके बैग में शराब की बोतलें भी मिली हैं। हम इस सदमे से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ बच्चे शिक्षकों और दूसरे स्टूडेंट्स को परेशान कर रहे हैं, उनके लिए गंदे शब्दों का उपयोग कर रहे हैं और उनकी ओर गलत इशारे कर रहे हैं। ऐसी हरकतें 5वीं पढ़ने वाले छात्रों में भी देखने को मिल रहीं हैं।

ब्रिटेन में 44% बढ़ी मुस्लिमों की जनसंख्या, पहली बार आधे से भी कम रह गए ईसाई: रिपोर्ट

ब्रिटेन में इन दिनों ईसाइयों की आबादी तेजी से घट रही है और मुस्लिमों की जनसंख्या बढ़ रही है। मंगलवार (29 नवंबर 2022) को जारी किए गए जनसंख्या के आँकड़ों के मुताबिक इंग्लैंड और वेल्स में ईसाइयों की आबादी पहली बार कुल आबादी के आधे से भी कम हो गई है। ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स के ताजा जनगणना के आँकड़ों के अनुसार, ब्रिटेन में मुस्लिमों की आबादी (Muslim Population) एक दशक में 44 प्रतिशत बढ़ी है। देश की कुल आबादी में से 6.5 प्रतिशत यानी 3.9 मिलियन (3900000) लोग इस्लाम मजहब को मानने वाले हैं। रिपोर्ट में यह खुलासा भी हुआ है कि ब्रिटेन में ईसाइयों के बाद ‘नो रिलीजन’ यानी कोई धर्म नहीं वाली आबादी दूसरे नंबर पर है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटेन में ईसाइयों की आबादी में 13.1 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं, मुस्लिमों की आबादी 4.9 फीसदी से बढ़कर 6.5 फीसदी हो गई है। ऐसा पहली बार हुआ है, जब ईसाइयों की आबादी आधी से भी कम रह गई है। ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स के अनुसार, इंग्लैंड और वेल्स में ईसाइयों की आबादी घटकर 46.2 प्रतिशत रह गई है।

इंग्लैंड और वेल्स की ओएनएस जनगणना (फोटो साभार: गार्जियन)

इस मामले में यॉर्क के आर्कबिशप स्टीफन कोट्रेल का कहना है कि ये सच में चौंकाने वाला है कि ब्रिटेन में ईसाइयों की जनसंख्या तेजी से घटी है। उनका कहना है, “यूरोप में चल रहे युद्ध और रहने-खाने के संकट के बीच लोगों को धार्मिक मदद की जरूरत है। हम उनके लिए हैं। कई मामलों में हमारी तरफ से जरूरतमंदों को खाना और अन्य मदद दी जाती है। क्रिसमस पर लाखों लोग चर्च आते हैं और हमारी मदद लेते हैं।”

2021 की जनगणना में पाया गया है कि यूके के लगभग 10 प्रतिशत परिवारों में अब कम से कम दो अलग-अलग जातीय समूहों के सदस्य हैं। इनमें 8.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके साथ ही यह भी सामने आया है कि यहाँ पंजाबी और उर्दू क्रमशः 291,000 और 270,000 लोगों द्वारा बोली जाती है। पंजाबी और उर्दू यूके में बोली जाने वाली 5वीं और छठी सबसे आम भाषा बन गई है। आँकड़ों से यह भी पता चलता है कि लंदन इंग्लैंड का सबसे धार्मिक रूप से विविध क्षेत्र बना हुआ है। ब्रिटेन की राजधानी के उत्तर में हैरो शहर में हिंदू आबादी का प्रतिशत सबसे अधिक 25.8 है, जो 2011 में 25.3 प्रतिशत था।

बता दें कि ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स के मुताबिक 2001 में ब्रिटेन की जनगणना में धर्म का सवाल जोड़ा गया था। इसमें करीब 94 फीसदी लोगों ने अपनी इच्छा से जवाब दिया था। इंग्लैंड और वेल्स में लगभग 46.2 प्रतिशत जनसंख्या ईसाई हैं। 2011 की तुलना में इनकी आबादी में करीब 13.1 फीसदी की गिरावट आई है। इनके अलावा ‘नो रिलीजन’ यानी कोई धर्म नहीं वाली आबादी का आँकड़ा 2.22 करोड़ यानी 37.2 फीसदी है। मुस्लिमों की आबादी बढ़कर 39 लाख हो गई है। इसके बाद हिंदुओं की आबादी 10 लाख है। सिखों की आबादी 5,24,000 है। बौद्ध धर्म की आबादी 2.73 लाख से बढ़कर 2.71 लाख हो गई है। यहूदी यहाँ सबसे क​म हैं।

AAP से ‘रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुस्लिमों’ को फायदा: घुसपैठियों के साथ केजरीवाल की पार्टी? देखें वीडियो

अहमदाबाद के जुहापुरा में मुस्लिमों के एक संगठन ‘मुस्लिम फाइटर्स क्लब’ की तरफ से एक बड़ी सभा आयोजित की गई थी। ‘नारा-ए-तकबीर’ के साथ शुरू हुई इस बैठक का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में ‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ समर्थक स्वीकार कर रहे हैं कि कैसे दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने हर तरह के मुस्लिमों के उत्थान के लिए काम किया है। वीडियो में कहा जा रहा है कि केजरीवाल ने बिहारी मुस्लिम, गुजराती मुस्लिम या कहीं के मुस्लिम चाहे ‘शरणार्थी मुस्लिम (रिफ्यूजी या अवैध घुसपैठिए)’ ही क्यों न हो, इनकी भी आर्थिक स्थिति सुधारी है।

वीडियो में, ‘मुस्लिम फाइटर्स क्लब’ चलाने वाले ‘इमरान भाई’ नाम के शख्स ने दावा किया कि मुस्लिम समुदाय हमेशा से नफरत का शिकार रहा है और सिर्फ केजरीवाल ही मुस्लिमों के सच्चे हितैषी हैं। इमरान ने आगे कहा, “मैंने दिल्ली में अपने मुस्लिम भाइयों से बात की है और उन्होंने कहा है कि उनकी स्थिति में सुधार हुआ है। अरविंद केजरीवाल दुनिया के हर हिस्से के मुस्लिमों का ख्याल रखते हैं।” उन्होंने कहा कि केजरीवाल ‘मुस्लिम शरणार्थियों’ का भी ख्याल रखते हैं। वीडियो में इमरान को ये कहते सुना जा सकता है कि मैं नाम नहीं लूँगा, मैं शरणार्थी कहूँगा, आप लोग जानते ही हैं, मैं किनकी बात कर रहा हूँ।

बता दें कि जनवरी 2020 में ऐसी मीडिया रिपोर्ट्स सामने आई थी कि AAP के विधायक अमानतुल्लाह खान और अरविंद केजरीवाल की दिल्ली सरकार व्यवस्थित रूप से दिल्ली में अवैध रोहिंग्या मुस्लिमों को बसाने का काम कर रहे थे। यही नहीं, अवैध रोहिंग्या उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई विभाग की लगभग 5.2 एकड़ जमीन पर भी गैरकानूनी रूप से बसे हुए हैं। इस जमीन का खसरा नंबर 612 है। इस जमीन पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुस्लिम गैरकानूनी रूप से रह रहे हैं।

भाजपा भी दिल्ली की AAP सरकार पर यह आरोप लगाती रही है कि केरजीवाल सरकार अवैध रोहिंग्या मुस्लिमों को राजधानी में बसाने में पूरी मदद कर रही है और उनके भारतीय दस्तावेज़ भी बनवाए जा रहे हैं। ऑपइंडिया ने अपने एक रिपोर्ट में यह भी बताया था कि कैसे ओखला के गरीबों ने अमानतुल्लाह खान पर राशन वितरण में धार्मिक भेदभाव का आरोप लगाया था। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि उन्हें राशन इसलिए नहीं दिया जाता क्योंकि वे हिंदू थे और उन्होंने AAP को वोट नहीं दिया।

पहले तोड़े बैरिकेड, फिर नगर निगम कर्मचारियों से बदसलूकी की: सूरत में केजरीवाल के रोड में AAP कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी, 3 के खिलाफ FIR दर्ज

सूरत नगर निगम के कर्मचारियों के काम में बाधा डालने और हंगामा करने के आरोप में बुधवार (30 नवंबर 2022) को आम आदमी पार्टी के तीन कार्यकर्ताओं के खिलाफ कटारगाम थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।

दरअसल, सोमवार (28 नवंबर 2022) को गुजरात विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए अरविंद केजरीवाल का सूरत में रोड शो हुआ। इस रोड शो की तैयारी के लिए कटारगाम इलाके धनमोरा चौराहे के पास सड़क किनारे बने डिवाइडर पर गार्ड पत्थरों को आप (AAP) कार्यकर्ताओं ने तोड़ दिया था। 

इसके बाद, स्थानीय लोगों से मिली सूचना के आधार पर सूरत नगर निगम के कर्मचारी इंजीनियर हेमंत पटेल के नेतृत्व में टूटे हुए पत्थरों की मरम्मत करने के लिए पहुँचे थे। तभी, वहाँ पहुँचे आप कार्यकर्ताओं ने पहले तो हंगमा करना शुरू कर दिया इसके बाद कर्मचारियों से बदसलूकी करने लगे। इस कारण नगर निगम कर्मचारियों को मौके से भागने पर मजबूर होना पड़ा।

इस मामले में पुलिस ने आम आदमी पार्टी के तीन कार्यकर्ताओं के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की। इन कार्यकर्ताओं की पहचान पीयूष वारसानी, तुलसी ललैया और रजनी वघानी के रूप में हुई है। 

बता दें कि आम आदमी पार्टी के कार्यकता केजरीवाल का रोड शो पूरी चौड़ाई के साथ करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने, सूरत नगर निगम से बैरिकेड्स हटाने का अनुरोध किया था। हालाँकि, बैरिकेड्स हटाने की जगह आप कार्यकर्ताओं ने डिवाइडरों को नष्ट कर दिया था। इस कारण, स्थानीय लोगों को समस्या का सामना करना पड़ रहा था। डिवाइडर तोड़ने के मामले में, सूरत नगर निगम ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया था कि कुल 12 पत्थरों को नुकसान पहुँचा है, जिसमें 5436 रुपए का नुकसान हुआ है।

गौरतलब है कि गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए दो चरणों में मतदान होना है। पहले चरण का मतदान गुरुवार (1 दिसंबर 2022) और दूसरे चरण का सोमवार (5 दिसंबर 2022) को होगा। पहले चरण में सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात की 93 सीटों और दूसरे चरण में उत्तर और मध्य गुजरात की 89 सीटों पर मतदान होगा। गुजरात विधानसभा चुनाव के परिणाम 8 दिसंबर को घोषित किए जाएँगे। अब तक सामने आए ओपिनियन पोल में भारतीय जनता पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ एक बार फिर गुजरात में सरकार बनाते हुए दिख रही है।