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रेलवे इंजन और 500 टन के पुल की चोरी के बाद बिहार में अब पूरी की पूरी सड़क ही गायब: रात को थी, सुबह उठते ही छू-मंतर

बिहार में वैसी-वैसी घटनाओं को अपराधी अंजाम दे देते हैं, जिनकी कल्पना भी कोई नहीं करता। रेलवे यार्ड में रखे इंजन और पुल को चुराने के बाद अब गाँव की सड़क गायब होने की खबर है। बांका जिले के एक गाँव में जब ग्रामीण अगले दिन सुबह जगे तो उनकी सड़क ही गायब थी। इसकी पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

घटना बांका के नवादा-खरौनी पंचायत की है। दरअसल, 29 नवंबर 2022 की सुबह जब ग्रामीणों ने देखा तो सड़क ही गायब मिली। यह सड़क खरौनी गाँव से दक्षिण दिशा में स्थित खादमपुर गाँव तक जाती है। खरौनी गाँव से कहीं भी जाने के लिए यही एकमात्र सड़क थी।

दरअसल, जहाँ सड़क थी वहाँ अब गेहूँ की खेत है। खरौनी गाँव के कुछ दबंगों ने सड़क को रातों-रात जोतकर उसमें गेहूँ की बुआई कर दी। खादमपुर गाँव के लोगों ने जब खरौनी गाँव के उन लोगों से बात करने पहुँचे तो उनके साथ मारपीट करने की कोशिश की गई। इसके बाद ग्रामीणों ने घटना की लिखित जानकारी पुलिस को दी है।

ग्रामीण बताते हैं कि करीब 500 मीटर तक सड़क का पीसीसी भी किया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि दशकों से इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि सरकारी पगडंडी थी। इस घटना के बाद दोनों गाँवों के बीच तनाव का माहौल बन गया है। प्रशासन किसी भी तरह की अनहोनी को देखते हुए इलाके में पुलिस की चौकसी बढ़ा दी है।

इससे पहले चोरों ने बरौनी के गरहरा यार्ड से पूरे रेल के एक इंजन को ही चुरा लिया था। यह चोरी सुरंग खोदकर की गई थी। बरौनी के गरहरा यार्ड में मरम्मत के लिए लाए गए डीजल इंजन पर चोरों की नजर थी। चोरों ने पुर्जों को अलग-अलग कर चुराना शुरू किया और पूरे इंजन को गायब कर दिया। इंजन चुराने के लिए चोरों के गिरोह ने स्टेशन तक सुरंग खोद डाला। अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी।

अररिया जिले में तो चोरों के दूसरे गिरोह ने सीताधार नदी पर बने लोहे के पलटनिया पुल का ताला खोलकर उसके कुछ हिस्से चुरा लिए। इसके बाद पुल की सुरक्षा के लिए एक कॉन्स्टेबल को तैनात करना पड़ा है। पलटनिया पुल अररिया के फारबिसगंज को रानीगंज से जोड़ता है।

इससे पहले पूर्णिया जिले में रेलवे स्टेशन पर सार्वजिनक प्रदर्शन के लिए रखे विंटेज मीटर गेज स्टीम इंजन को गायब कर बेच दिया गया था। जाँच के दौरान पुलिस ने पाया कि रेलवे के एक इंजीनियर ने ही फर्जी दस्तावेज बनाकर इस स्टीम इंजन को बेच दिया था।

इसी तरह रोहतास में अप्रैल 2022 में चोरों के गिरोह ने लगभग 500 टन वजनी 45 साल पुराने स्टील के पुल को तोड़कर बेच दिया। चोरी के इस वारदात में सिंचाई विभाग के अधिकारियों के शामिल होने का आरोप लगा था। बाद में इस मामले में जल संसाधन विभाग के एक सहायक अभियंता समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

अफगानिस्तान की मस्जिद में दोपहर की नमाज के दौरान धमाका: 16 की मौत, मृतकों में अधिकतर मदरसे में पढ़ने वाले छात्र

अफगानिस्तान के एक मदरसे में नमाज के दौरान धमाका हुआ है। इस धमाके में 16 लोगों के मौत की खबर है। वहीं धमाके में 24 लोग घायल हुए हैं। बम धमाका उत्तरी अफगानिस्तान के समांगन प्रांत के मध्य में स्थित ऐबक शहर के जहदिया मदरसे में हुआ है। ऐबक समांगन प्रांत की राजधानी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले में मरने और घायल होने वाले ज्यादातर पीड़ित मदरसा में पढ़ने वाले छात्र हैं। धमाका दोपहर की नमाज के दौरान हुआ। तालिबान के एक अधिकारी ने जानकारी दी है कि धमाके से मरने वाले 16 लोगों में 10 छात्र शामिल हैं।

फिलहाल किसी समूह या संगठन ने धमाके की जिम्मेदारी नहीं ली है। वहीं विस्फोट में 26 लोग ज़ख्मी हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस मदरसे में धमाका हुआ है वह हाल ही में बना था।

यह हमला ऐसे समय में हुआ है, जब हाल ही में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने अपने महीने भर के संघर्ष विराम को वापस ले लिया। टीटीपी ने अपने लड़ाकों के खिलाफ नए सैन्य अभियान को युद्धविराम की समाप्ति का कारण बताया। टीटीपी नेतृत्व के मुताबिक खैबर पख्तूनख्वा के लक्की मरवत जिले में उसके लड़ाकों के खिलाफ पाकिस्तानी आर्मी सैन्य अभियान चला रही है। संघर्ष विराम वापस लेने के बाद ही बलूचिस्तान प्रांत में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के एक आत्मघाती हमलावर ने पोलियो टीम की सुरक्षा के लिए जा रहे पुलिसकर्मियों के ट्रक को निशाना बनाकर खुद को उड़ा लिया। इस आत्मघाती हमले में तीन लोगों की मौत हो गई, और 23 अन्य घायल हो गए।

पाकिस्तान में आत्मघाती हमले के बाद का दृश्य

हालाँकि, अफगानिस्तान में आए दिन इस तरह के धमाके होते रहते हैं। खासतौर पर तालिबान के नियंत्रण में आने के बाद से अफगानिस्तान इस तरह की घटनाओं में बढ़ोत्री हुई है। कुछ धमाकों की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट खुरासान (ISKP) ने ली है। दो महीने पहले काबुल में भी गृह मंत्रालय के पास बनी मस्जिद में धमाका हुआ था। उस धमाके में 4 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 25 लोग घायल हुए थे। यह हमला भी उसी वक्त हुआ जब मदरसे में नमाज पढ़ी जा रही थी। मंत्रालय का परिसर काबुल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास स्थित है जो देश के सुरक्षित इलाकों में गिना जाता है।

‘जीसस ने विमान का दरवाजा खोलने के लिए कहा’: 37000 फीट की ऊँचाई पर 34 साल की महिला खोलने लगी इमरजेंसी गेट, रोकने पर सहयात्री के जाँघ में काटा

हवाई यात्रा के बीच में यात्रियों के अलग-अलग व्यवहार को लेकर कई तरह की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। ऐसी ही एक घटना अमेरिका से आई, जहाँ एक महिला यात्री ने अपने सहयात्री के जाँघ में काट लिया और प्लेन का दरवाजे खोलने की कोशिश की। उसने कहा कि जीसस ने उसे ऐसा करने के लिए कहा है।

यह घटना अमेरिका के साउथवेस्ट एयरलाइंस की है। हॉस्टन से ओहियो जा रही फ्लाइट नंबर 192 में 34 साल की एलोम एगबेग्निनौ नाम की यात्री ने हंगामा मचा दिया। इसके कारण फ्लाइट को अर्कांसस के लिटिल रॉक में बिल और हिलेरी क्लिंटन राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर फ्लाइट को आपातकालीन लैंडिंग कराना पड़ा।

उड़ान के दौरान एलोम ने विमान का पिछला दरवाजा खोलने की कोशिश की। इतना ही नहीं, जब एक यात्री ने उसे रोकने की कोशिश की तो उसने एक सहयात्री की जाँघ पर काट लिया। विमान की आपातकालीन लैंडिंग के बाद महिला को गिरफ्तार कर लिया गया। यह घटना 26 नवंबर 2022 की है।

महिला की करतूतों को लेकर स्थानीय अदालत में कहा गया कि विमान के चालक दल ने एलोम को विमान के पिछले हिस्से में लटका हुआ देखा। इसके बाद उसे बाथरूम का उपयोग करने या बैठने के लिए कहा गया था। वह अपनी सीट पर बैठने के बजाय विमान का आपातकालीन गेट खोलने की कोशिश करने लगी।

जमीन से 37,000 फीट की ऊँचाई पर विमान का गेट खोलने के दौरान एलोम ने से कहा, “जीसस ने उसे ओहियो के लिए उड़ान भरने और दरवाजा खोलने के लिए कहा था।” महिला के बारे में यह भी कहा जाता है कि वह बिना सामान के अकेली यात्रा कर रही थी और उसने अपने पति को नहीं बताया था कि वह उड़ान भरेगी।

अडानी की एंट्री के बाद रवीश कुमार ने NDTV से दिया इस्तीफा, कंपनी के बोर्ड से जा चुके हैं प्रणय-राधिका रॉय भी

NDTV की होल्डिंग कंपनी पर अडानी समूह के नियंत्रण के बाद रवीश कुमार ने चैनल से इस्तीफा दे दिया है। रवीश कुमार NDTV के हिंदी चैनल के माध्यम से लगातार मोदी विरोधी प्रोपेगंडा फैलाने में व्यस्त थे। उनका इस्तीफा तुरंत प्रभाव से लागू हो गया था। उन्हें चैनल में ‘सीनियर एग्जीक्यूटिव’ का पद दिया गया था। उन्होंने ‘हम लोग’, ‘रवीश की रिपोर्ट’, ‘देस की बात’ और ‘प्राइम टाइम’ समेत कई कार्यक्रमों में NDTV के लिए एंकरिंग की।

चैनल ने अपने कर्मचारियों को भेजी गई आंतरिक मेल में कहा, “काफी कम पत्रकारों ने जनता पर उतना असर डाला, जितना रवीश कुमार ने। वो जहाँ भी जाते हैं वहाँ जुटने वाली भीड़ उनके बारे में लोगों की सोच को प्रदर्शित करती है। भारत से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक उन्होंने कई प्रतिष्ठित अवॉर्ड्स अपने नाम किए हैं। दशकों तक वो NDTV का एक अभिन्न अंग रहे हैं। उनका योगदान शानदार रहा है। नई शुरुआत में वो सफल होंगे।”

बता दें कि NDTV के मालिक और संस्थापक प्रणय रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय ने भी मंगलवार (29 नवंबर 2022) को आरआरपीआर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड (RRPRH) के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया। बीएसई के साथ किए गए एक नियामक फाइलिंग में इसकी जानकारी दी गई। प्रणय रॉय और राधिका रॉय के इस्तीफा देने के तुरंत बाद कंपनी के बोर्ड में तीन नए निदेशक नियुक्त किए गए हैं। इनमें अडानी समूह के सीईओ सुदीप्त भट्टाचार्य, संजय पुगलिया और सेंथिल सिन्नैया चेंगलवारायण शामिल हैं।

बीएसई की वेबसाइट के मुताबिक, प्रणय रॉय एनडीटीवी के चेयरपर्सन हैं और राधिका रॉय एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर। उनके पास न्यू दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड के एक चौथाई से अधिक शेयर हैं। उन्होंने अपना यह फैसला आरआरपीआर होल्डिंग की 99.5% इक्विटी को अडानी समूह के स्वामित्व वाली विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड (VCPL) को हस्तांतरित करने के बाद लिया है। इस साल अगस्त में, अडानी ग्रुप ने NDTV में अप्रत्यक्ष रूप से 29.18% शेयर्स खरीदे थे। ये सौदा ‘विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड (VCPL)’ और ‘RRPR होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड’ के जरिए हुआ था।

यहूदियों के नरसंहार वाली फिल्म प्रोपगेंडा नहीं, हिंदुओं के रक्तपात वाली The Kashmir Files ‘अश्लील’: डायरेक्टर ने मारी पलटी

घाटी में हिंदुओं के नरसंहार और पलायन पर बनी ‘द कश्मीर फाइल्स’ को ‘भद्दी और प्रोपेगेंडा’ बताने के बाद IFFI जूरी हेड और इजरायल के फिल्म निर्माता नादव लैपिड (Nadav Lapid) ने पलटी मार दी है। उनके बयान को लेकर उठे विवाद के बाद उन्होंने कहा कि द कश्मीर फाइल्स एक ब्रिलियंट फिल्म है।

फिल्म निर्माता नादव लैपिड ने कश्मीर फाइल्स को बहुत लोग पसंद करते हैं और ब्रिलियंट फइल्म मानते हैं। उन्होंने कहा कि कोई यह निर्धारित निर्धारित नहीं कर सकता कि प्रोपेगेंडा क्या है। उन्होंने कहा कि IFFI के समापन समारोह में उन्होंने फिल्म के बारे में जो कुछ कहा, उस पर वे अब भी कायम हैं।

इंडिया टुडे से बातचीत करते हुए उन्होंने प्रोपेगेंडा को लेकर कहा, “कोई भी यह निर्धारित नहीं कर सकता कि प्रोपेगेंडा क्या है। मैं इस तथ्य को स्वीकार करता हूँ। यह एक शानदार फिल्म है। मैंने जो कहा वह मेरा कर्तव्य था कि मैं जो देखूँ उसे कहूँ। यह एक बहुत ही व्यक्तिपरक तरीका है।”

उन्होंने कहा कि हंगामा ‘लोगों को भड़काने के लिए उनकी टिप्पणियों में सस्ता हेरफेर’ किया गया और हंगामा कराया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य जूरी सदस्यों ने भी वही महसूस किया, जो उन्होंने किया लेकिन वे खुलकर नहीं बोले।

उन्होंने कहा, “कश्मीर में जो हुआ, ऐसे ट्रैजिक इवेंट हमें सीरियस फिल्म बनाने को प्रेरित करते हैं। ये फिल्म मेरे लिए चीप सिनेमैटिक मैनिपुलेशन है। इस फिल्म के जरिए राजनीतिक फायदा पहुँचाने की कोशिश की गई थी। मेरे बयान से दूसरे जूरी मेंबर्स भी सहमत थे। हालाँकि, डर या दबाव से वे बाद में बदल सकते हैं।”

नादव लैपिड ने कहा, “मैंने कभी भी कश्मीर और वहाँ के लोगोें के बारे में नहीं बात की। मैंने जो कुछ भी कहा, सिर्फ फिल्म को लेकर कहा था। अगर मेरे बयान से किसी को ठेस पहुँची है तो मैं माफी माँगता हूँ।”

लैपिड ने कश्मीर फाइल्स को ‘प्रोपेगेंडा और अश्लील’ बताया था। इसके साथ ही वे बाद में दो कदम आगे बढ़ते हुए कश्मीर में भारतीय नीति को ही गलत ठहरा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें फासीवादी विशेषताएँ हैं। दरअसल, कश्मीर फाइल्स फिल्म 90 के दशक में कश्मीरी हिंदुओं के पलायन पर आधारित है। नादव ने कहा कि अगर इस तरह की फिल्म आने वाले वर्षों में इजरायल में भी बनती है तो उन्हें आश्चर्य होगा।

उन्होंने स्थानीय मीडिया Ynet से बात करते हुए कहा, “इस तरह से बोलना और राजनीतिक बयान देना आसान नहीं था। मुझे पता था कि यह एक ऐसी घटना है, जो देश से जुड़ी हुई है। हर कोई यहाँ सरकार की प्रशंसा करता है। यह कोई आसान स्थिति नहीं है, क्योंकि आप एक अतिथि के तौर पर यहाँ पर हैं।”

उन्होंने आगे कहा, आगे कहा, “मैं यहाँ हजारों लोगों के साथ एक हॉल में मौजूद था। हर कोई स्थानीय सितारों को देखने और सरकार की जय-जयकार करने के लिए उत्साहित था। उन देशों में जो तेजी से अपने मन की बात कहने या सच बोलने की क्षमता खो रहे हैं, किसी को बोलने की जरूरत है। जब मैंने यह फिल्म देखी, तो मैं इसके साथ इजरायली परिस्थिति की कल्पना किए बिना नहीं रह सका, जो यहाँ मौजूद नहीं थे। लेकिन, वे निश्चित रूप से मौजूद हो सकते थे। इसलिए मुझे ऐसा लगा कि मुझे यह करना ही पड़ेगा, क्योंकि मैं एक ऐसी जगह से आया हूँ, जहाँ खुद में सुधार नहीं हुआ है। वह खुद भी इसी रास्ते पर है।”

पंजाब में मजदूरों-किसानों पर बरसी AAP सरकार की लाठियाँ, पुलिस ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा: दिहाड़ी माँग रहे थे, बढ़ाई गई CM भगवंत मान के आवास की सुरक्षा

पंजाब के संगरूर में पंजाब सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे मजदूर यूनियन के लोगों और किसानों पर पंजाब पुलिस ने लाठी चार्ज किया है। जानकारी के मुताबिक यूनियन के लोग और किसान अपनी माँगों के लेकर प्रदर्शन करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के आवास की ओर बढ़ रहे थे। तभी पुलिस ने इन पर हमला कर दिया। इस घटना में कुछ मजदूरों के चोटिल होने की खबर है।

प्रदर्शन कर रहे किसानों और मजदूरों की कई माँगे हैं। प्रदर्शनकारी पक्का रोजगार, न्यूनतम दैनिक मजदूरी में इजाफा और रहने व मकान बनाने के लिए प्लॉट की माँग कर रहे हैं। प्रदर्शानकारियों का कहना है कि मनरेगा और खेतों में काम करने पर उन्हें रोज दिहाड़ी नहीं मिलती। मजदूर संगठन के लोग मुख्यमंत्री आवास वाली कॉलोनी के गेट के आगे धरने पर बैठे हैं।

जानकारी के मुताबिक मजदूर संगठन के लोग पहले पटियाला बाईपास पर जमा हुए, उसके बाद सीएम आवास की ओर कूच करने लगे, जहाँ पहले से ही भारी पुलिस बल तैनात था। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, इस दौरान दोनों पक्षों में जमकर धक्का-मुक्की भी हुई। इसके बाद पुलिस ने लाठीजार्ज कर दिया, जिससे कई मजदूर-किसान घायल हो गए।

वहीं मामले में एसएसपी संगरूर सुरिंदर लांबा का कहना है कि कोई लाठीचार्ज नहीं किया गया और विरोध शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है। उनका कहना है कि प्रदर्शनकारियों के एक आक्रामक गुट से हाथापाई हुई, लेकिन पुलिस ने हालात नियंत्रित कर लिया। उन्होंने जानकारी दी कि प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों की माँगों का संज्ञान लिया है।

आपको बता दें कि दिल्ली की AAP सरकार ने 2020-21 में हुए तथाकथित किसान आंदोलन में बढ़-चढ़ कर प्रदर्शनकारियों का साथ दिया था। आज जब पंजाब के किसान-मजदूर अपनी माँगों को लेकर पहुँचे हैं तो उनका स्वागत लाठी से किया जा रहा है। उधर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान गुजरात में विधानसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों के लिए वोट माँग रहे हैं। मिली जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री मान के संगरूर के आवास के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

अब वक्फ बोर्ड खुद खोलेगा स्कूल-कॉलेज, मुस्लिम छात्राएँ पहनेंगी बुर्का-हिजाब: बोले आक्रोशित हिन्दू संगठन – देश के लिए खतरा बनेंगे शरिया शैक्षणिक संस्थान

कर्नाटक वक्फ बोर्ड ने राज्य में अपने खर्चे पर स्कूल और कॉलेज खोलने का ऐलान किया है। मामला कर्नाटक हिजाब विवाद से जुड़ा हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य में ऐसे स्कूल और कॉलेज खोले जाएँगे जहाँ मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनने की इजाजत होगी।

कर्नाटक वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शफी सादी ने जानकारी दी है कि वक्फ बोर्ड सेल्फ फंडेड स्कूल-कॉलेज खोलने की योजना बना रहा है। उन्होंने बताया कि इन स्कूल-कॉलेजों में हिजाब पहनने की पूरी आजादी होगी। जानकारी यह भी है कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई दिसंबर महीने के अंत तक हिजाब वाले शिक्षण संस्थानों को खोले जाने की आधिकारिक घोषणा कर सकते हैं।

वक्फ बोर्ड ने ऐलान किया है कि मुस्लिमों की बढ़ती माँगों को देखते हुए शिक्षण संस्थान खोले जाएँगे। महिलाओं के लिए 10 कॉलेज खोलने की घोषणा की गई है। वक्फ के शिक्षण संस्थान मंगलुरु, शिवमोग्गा, हासन, कोडागू, बीजापुर, हुबली और अन्य इलाकों में खोले जाएँगे। शफी सादी ने कहा कि शिक्षण संस्थान बोर्ड या यूनिवर्सिटी के शिक्षा संबंधी नियमों का ही पालन करेंगे। लेकिन, वक्फ बोर्ड के शिक्षण संस्‍थान पूरी तरह से सेल्‍फ फंडेड होने की वजह से अपने नियम लागू करने के लिए स्वतंत्र होंगे।

कर्नाटक वक्फ बोर्ड के चेयरमैन ने कहा, “5 से 6 महीने पहले इसकी घोषणा की गई थी। वक्फ बोर्ड में इसके लिए 25 करोड़ रुपए आवंटित हैं। हमारे पास अपनी जमीनें हैं।” शफी सादी ने सफाई दी कि इस फैसले का हिजाब विवाद से कोई लेना-देना नहीं है। उनके मुताबिक, ये फैसला पहले ही ले लिया गया था।

उधर दक्षिणपंथी संगठनों ने वक्फ बोर्ड के इस फैसले का विरोध शुरू कर दिया है। हिन्दू नेताओं का कहना है कि सरकार को इस तरह के फैसले का समर्थन नहीं करना चाहिए। उनका कहना है कि समुदाय विशेष के लिए अलग से शिक्षण संस्थान खोले जाने की कोई आवश्यकता नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संगठनों के नेताओं ने खोले जा रहे इन संस्थानों को ‘शरिया स्कूल’ का नाम दिया है और कहा है कि यह देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं।

आपको बता दें कि कर्नाटक में स्कूल-कॉलेजों में हिजाब पहनने को लेकर काफी विवाद हुआ था। इसी साल की शुरुआत में उडुपी के एक कॉलेज में कुछ मुस्लिम छात्राएँ जबरन हिजाब पहनकर क्लास में दाखिल होने की कोशिश करने लगीं। जिन्हें इसकी अनुमति नहीं दी गई थी। दरअसल, हिजाब कॉलेज ड्रेस कोड का हिस्सा नहीं है। इसके बाद भी मुस्लिम समुदाय की तरफ से इसका विरोध किया गया। देखते ही देखते यह राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बन गया कि शिक्षा संस्थानों में हिजाब पहनना सही है या नहीं – ये मामला हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट के बड़े बेंच तक पहुँच चुका है।

दिल्ली शराब घोटाले में ED ने मुख्य आरोपित अमित अरोड़ा को किया गिरफ्तार, कहा- मनीष सिसोदिया सहित आरोपितों ने बार-बार बदले फोन और नष्ट किए सबूत

दिल्ली (Delhi) के शराब घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आरोप लगाया है कि उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (MAnish Sisodia) सहित आरोपितों ने कई बार फोन बदले और सबूतों को नष्ट कर दिया। ED ने इसके बारे में कोर्ट को जानकारी दी। इसके साथ ही अमित अरोड़ा नाम के एक अन्य अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया है।

जाँच एजेंसी ने बुधवार (30 नवंबर 20122) को दिल्ली की एक अदालत को बताया कि गिरफ्तार किए गए दिल्ली के व्यवसायी अमित अरोड़ा और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने 11 फोन इस्तेमाल किए और बदले। ये फोन कथित शराब घोटाले की अवधि के दौरान इस्तेमाल किए गए और बदले गए थे।

प्रवर्तन निदेशालय ने राउज एवेन्यू कोर्ट में बताया, “इसकी भयावहता इतनी अधिक है कि अधिकांश संदिग्ध, शराब कारोबारी, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, दिल्ली के आबकारी मंत्री (मनीष सिसोदिया) और अन्य संदिग्धों ने कई बार अपने फोन बदले हैं। उपयोग किए गए और नष्ट किए गए उपकरणों का अनुमानित मूल्य लगभग 1.38 करोड़ रुपए है।”

प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली शराब नीति घोटाले की जाँच के सिलसिले में व्यवसायी अमित अरोड़ा की 7 दिन की ED हिरासत को मंजूर कर लिया। बता दें कि अमित अरोड़ा को वित्तीय जाँच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय ने आज (30 नवंबर 2022) को गिरफ्तार किया। इसके बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया।

अमित अरोड़ा पर आरोप

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अमित अरोड़ा के रिमांड अप्लीकेशन में ED ने कोर्ट को बताया कि अमित अरोड़ा ने दिनेश अरोड़ा के साथ साजिश और मिलीभगत में एक एल-1 थोक व्यापारी से 2.5 करोड़ की रिश्वत ली। इसे आम आदमी पार्टी के नेता विजय नायर को दिया जाना था।

ED ने यह भी कहा कि अप्रैल-मई 2022 में अमित अरोड़ा ने पंजाब सरकार और दिल्ली सरकार की मदद से महादेव लीकर को अपनी कंपनियों को सरेंडर करने और उसके बाद अपना लाइसेंस सरेंडर करने के लिए दबाव डाला था। महादेव लीकर 6% किकबैक देने के लिए तैयार नहीं था।

पता चला है कि अमित अरोड़ा ने महादेव लीकर से कहा था कि अगर होलसेल मार्जिन की 6 फीसदी रकम (यानी 12 फीसदी) रिश्वत के तौर पर नहीं चुकाते हैं तो पंजाब के उनकी शराब निर्माण की फैक्ट्रियों को वहाँ की आबकारी विभाग द्वारा बंद करा दिया जाएगा। बाद में पंजाब के आबकारी अधिकारियों के मौखिक आदेशों से कारखाने बंद कर दिए गए।

ED ने यह भी बताया कि अमित अरोड़ा ने अप्रैल-मई 2022 में जबरन वसूली और किकबैक से सहमत नहीं होने वाले अन्य कंपनियों को अपने लाइसेंस वापस करने के लिए मजबूर कर अनुचित लाभ हासिल करने में पंजाब सरकार से सहयोग लिया था और उससे राजनीतिक दबाव डलवाया था।

पूरे घोटाले में अमित अरोड़ा की मुख्य भूमिका इस बात से जाहिर होती है कि उसने न केवल एक एल-1 और दो एल-7 लाइसेंस हासिल किए, बल्कि आबकारी नीति के क्रियान्वयन से जुड़े अन्य मामलों में भी सक्रिय रूप से हस्तक्षेप रहा। अमित अरोड़ा कहता था, “हम ही सरकार हैं”।

ED ने यह भी आरोप लगाया कि मनीष सिसोदिया के प्रभाव से अमित अरोड़ा को अपनी एक दुकान तुरंत स्थानांतरित करने की मंजूरी मिल गई। एयरपोर्ट L7 जोन में H4 नंबर बिडर होने के बावजूद उसे आकर्षक एयरपोर्ट L-7 लाइसेंस मिला। जाँच के दौरान आबकारी अधिकारियों को 90 लाख और खुदरा दुकान खोलने के लिए 10 लाख रुपए घूस दिए गए। ये घूस अमित अरोड़ा के कहने पर दिए गए।

घर में घुस मुस्लिम युवकों ने दलित महिला को पीटा, गाली-गलौच कर दी जान से मारने की धमकी: मुजफ्फरनगर पुलिस ने 2 को पकड़ा, 1 फरार

उत्तर प्रदेश की मुजफ्फरनगर पुलिस ने शुक्रवार (25 नवम्बर 2022) को दलित समुदाय के लोगों के घर में घुस कर मारपीट के आरोप में 2 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों के नाम शहजाद और सनव्वर हैं। आरोपित शहजाद पर पहले से ही कई मुकदमे दर्ज बताए जा रहे हैं। मारपीट में शामिल तीसरा आरोपित गुलबहार अभी फरार चल रहा है जिसकी तलाश की जा रही है।

घटना चरथावल थानाक्षेत्र के गाँव कुल्हेड़ी की है। पीड़ित परिवार द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक घटना 25 नवम्बर शाम लगभग 7 बजे की है। पीड़ित के घर में मुस्तकीम का बेटा शहजाद, मुरसलीन का बेटा गुलबहार और खैरुद्दीन का बेटा सनव्वर अचानक ही घुस गए। इन तीनों ने पीड़ित की पत्नी को बेरहमी से मारा। इस दौरान उन्होंने पीड़िता को गंदी-गंदी गालियाँ भी दी।

इसी शिकायत में आगे बताया गया है कि शोरगुल की आवाज सुन कर आस-पास के लोग जमा होने लगे। इसके बाद शहज़ाद, गुलबहार और सनव्वर पीड़िता को जान से मार डालने की धमकी देते हुए भाग निकले। पीड़ित के मुताबिक तीनों आरोपितों के हमले में उसकी पत्नी बुरी तरह से घायल हो गई है। खुद को बाल्मीकि समाज का बताते हुए पीड़ित फूल सिंह ने तीनों आरोपितों पर कानूनी कार्रवाई की माँग की है।

आरोप है कि इस दौरान तीनों आरोपितों ने पीड़ित के घर पर तोड़फोड़ भी की थी। फूल सिंह की शिकायत पर पुलिस ने शहजाद, गुलबहार और सनव्वर के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर ली। तीनों आरोपितों पर IPC की धारा 452, 323, 504 और 506 के अलावा SC/ST एक्ट के तहत FIR दर्ज की गई। घायल महिला का इलाज करवाया गया। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। केस दर्ज कर के पुलिस ने तीनों आरोपितों की तलाश शुरू कर दी थी।

थाना प्रभारी चरथावल इंस्पेक्टर राकेश कुमार के मुताबिक आरोपितों की तलाश के दौरान शहजाद और सन्नवर उन्हें मुजफ्फरनगर जिले के ही एक इलाके दधेडू के पास मिल गए। दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया और न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। तीसरे आरोपित गुलबहार की तलाश की जा रही है।

गुरुग्राम में दलेर मेहंदी का फार्म हाउस सील: डेढ़ एकड़ में किया था अवैध निर्माण, NGT ने करवाई कार्रवाई

पंजाबी गायक दलेर मेहंदी (Daler Mehndi) का हरियाणा के गुरुग्राम में स्थित फार्म हाउस सील कर दिया गया है। उन पर अवैध तरीके से फार्म हाउस बनाने का आरोप लगा है। इसके अलावा प्रशासन ने मंगलवार (29 नवंबर 2022) को दो अन्य फार्म हाउस भी सील कर दिए। बताया जा रहा है कि ये तीनों फार्म हाउस सोहना में दमदमा झील के पास थे और अवैध रूप से बनाए गए थे। इसमें एक फार्म हाउस गायक दलेर मेहंदी का भी है, जो करीब डेढ़ एकड़ में फैला हुआ है।

प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई की गई है, क्योंकि अरावली की पहाड़ियों को नुकसान पहुँचाया जा रहा था। यह ​कार्रवाई जिला नगर नियोजक अधिकारी (डीटीपी) अमित मधोलिया ने की है। उन्होंने बताया कि ये झील के जलाशय क्षेत्र में बनाए गए अनधिकृत फार्महाउस थे। तीनों फार्महाउस को सील कर दिया गया है। इन्हें बिना किसी अनुमति के अरावली रेंज में विकसित किया गया था। एनजीटी के आदेश का पालन करते हुए पुलिस ने यह कार्रवाई की है।

क्या है कबूतरबाजी मामला

दलेर मेहंदी का विवादों से पुराना नाता है। इससे पहले भी वह कई बार विवादों में फँस चुके हैं। साल 2003 में दलेर मेहंदी के खिलाफ कबूतरबाजी (मानव तस्करी) का आरोप लगा था। इस मामले में पटियाला की सेशन कोर्ट ने 2 साल जेल की सजा सुनाई थी। उन पर 2000 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था। इससे पहले पटियाला के ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट ने भी मेंहदी को यही सजा सुनाई थी, जिसे सेशन कोर्ट में चुनौती दी गई थी। 14 जुलाई 2022 को उन्हें गिरफ्तार कर पटियाला सेंट्रल जेल में भेज दिया गया था। इसके बाद उनकी तरफ से जमानत के लिए पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। पहले उनकी याचिका को खारिज किया गया था, लेकिन फिर उन्हें सितंबर 2022 में रिहा कर दिया गया था।

लोगों को अवैध तरीके से विदेश भेजने को कबूतरबाजी कहते हैं। इस शब्द का इस्तेमाल पंजाब में अधिक किया जाता है। 2003 में पटियाला के थाना सदर की पुलिस ने बलवेड़ा गाँव के रहने वाले बख्शीश सिंह की शिकायत पर दलेर मेंहदी, उनके भाई शमशेर सिंह, ध्यान सिंह और बुलबुल मेहता के खिलाफ कबूतरबाजी का केस दर्ज किया था। आरोप था कि इन सभी ने लोगों को विदेश भेजने के नाम पर लाखों रुपए की धोखाधड़ी की थी।

बख्शीश सिंह ने पुलिस को दी गई शिकायत में ये आरोप लगाया था कि दलेर मेंहदी ने उनसे विदेश भेजने का वादा किया था। इसके बदले में उन्होंनें उनसे 13 लाख रुपए लिए थे। हालाँकि, बाद में वो इससे पलट गए। उन्होंने न तो उन्हें विदेश भेजा और न ही पैसे वापस किए। दलेर मेंहदी और उनके भाई शमशेर सिंह के खिलाफ कुल 31 केस दर्ज किए गए थे।

इस केस में न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दलेर मेंहदी को दोषी करार देते हुए उन्हें सजा सुनाई थी। कोर्ट की इसी सजा को उन्होंने चुनौती दी थी। लेकिन, पटियाला सेशन कोर्ट ने उन्हें झटका देते हुए उनकी सजा को बरकरार रखा।