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1500 फीट ऊँचा पहाड़, कँटीले रास्ते: बिहार के गनौरी पासवान ने 8 साल में बनाई शिव मंदिर के लिए 400 सीढ़ियाँ, दशरथ माँझी को मानते हैं आदर्श

बिहार में पत्नी के लिए पहाड़ का सीना चीरकर रास्ता बनाने वाले दशरथ माँझी को पूरी दुनिया जानती है। उन्हीं के रास्ते पर चलते हुए जहानाबाद के शिव भक्त गनौरी पासवान ने 1500 फीट ऊँचे पहाड़ को काटकर शिव मंदिर तक सीढ़ियाँ बना दीं।

बिहार के जहानाबाद से 30 किलोमीटर दूर हुलासगंज थाना क्षेत्र के जारु बनवरिया गाँव के पास ऊँची पहाड़ी पर बाबा योगेश्वर नाथ मंदिर है। जहाँ गनौरी भजन कीर्तन के लिए जाते थे। मंदिर जाने के लिए पहाड़ी की दुर्गम चढ़ाई करनी पड़ती थी। घंटों की मशक्कत के बाद भक्त यहाँ पहुँच पाते थे। कांटे और नुकीले पत्थरों से शिव भक्त घायल भी हो जाते थे। मंदिर तक पहुँचने में महिलाओं को तो और भी कठिनाई होती थी।

यह देख शिव भक्त गनौरी पासवान ने बाबा योगेश्वर नाथ धाम तक सीढियाँ बनाने की ठान ली। माउंटेन मैन दशरथ माँझी को अपना आदर्श समझने वाले गनौरी ने पत्थरों को काटकर सीढ़ी बनाने का काम शुरू कर दिया। लोगों के सहयोग और अपने पूरे परिवार के श्रमदान से लगभग 8 साल में काम पूरा हुआ। अब मंदिर तक पहुँचने के लिए एक नहीं बल्कि दो रास्ते बना दिए गए हैं। एक रास्ता जारू गाँव की ओर से और दूसरा बनवरिया गाँव की ओर से बनाया गया है। अब इस मंदिर तक पहुँचने में समय भी कम लगता है और ज्यादा परेशानी भी नहीं होती।

बाबा योगेेश्वर नाथ (फोटो साभार दैनिक भास्कर)

गाँव वालों की मानों तो गनौरी पासवान पहाड़ की तलहटियों में जाकर पुरानी मूर्तियों की भी खोज करते हैं। फिर उन मूर्तियों को योगेश्वर नाथ मंदिर के रास्ते पर स्थापित कर देते हैं। उन्होंने काले पत्थर की भगवान बुद्ध की छह फीट की ऐतिहासिक प्रतिमा भी खोज निकाली थी। गनौरी पासवान अब योगेश्वर नाथ मंदिर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होते देखना चाहते हैं।

गनौरी पासवान पहले ट्रक ड्राइवर थे। इसके बाद उन्होंने राज मिस्त्री का काम शुरू किया। काम के बाद उनका ध्यान भगवान शिव की भक्ति में लगा रहता था। गाँव की गायन मंडली के साथ गनौरी पहाड़ पर बाबा योगेश्वर नाथ मंदिर में भजन कीर्तन के लिए जाते थे। मंदिर जाने में होने वाली कठिनाई ने उन्हें मंदिर का रास्ता सुगम बनाने के लिए प्रेरित किया।

FIFA World Cup: ईरान की हार का जश्न मनाने सड़कों पर उतरे हिजाब विरोधी प्रदर्शनकारी, सुरक्षाबलों ने सिर में मारी गोली, 1 की मौत

कतर (Qatar) में खेले जा रहे फीफा वर्ल्ड कप (FIFA World Cup) से ईरान (Iran) के बाहर होने का जश्न मनाने रहे एक ईरानी व्यक्ति को सुरक्षाबलों ने गोली मार दी। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, उस व्यक्ति का नाम मेहरान सामक (Mehran Samak) है। वह बंदर-ए-अंजली शहर में ईरान की हार का जश्न मना रहा था।

द गार्जियन के अनुसार, अमेरिका ने ईरान को 1-0 से हराकर उसे फीफा वर्ल्ड कप से बाहर कर दिया है। मंगलवार (29 नवंबर 2022) को क्रिस्टियन पुलिसिच के 38वें मिनट में किए गए गोल की मदद से अमेरिका ने नॉकआउट राउंड में प्रवेश किया। मैच के खत्म होते ही ईरान के कई शहरों में लोग सड़कों पर निकले और अमेरिका की जीत का जश्न मनाया।

वहीं, टीम के वर्ल्ड कप से बाहर होने का जश्न मनाने वाले एक 27 वर्षीय ईरानी व्यक्ति को बंदर-ए-अंजली शहर में सुरक्षाबलों ने गोली मार दी। ईरान की हार को सेलिब्रेट करने वाले लोगों में प्रदर्शनकारी भी शामिल थे, जो महसा अमीनी की मौत को लेकर कई महीनों से हिजाब के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षाबलों ने मेहरान पर गोली चलाई, जो सीधा उसके सिर में लगी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। ईरान के लोग इस घटना से बेहद दुखी हैं। वहाँ की पत्रकार ने मेहरान सामक का एक वीडियो शेयर किया है। इसमें वह केक लेकर डांस करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान उनके दोस्त भी मौजूद हैं।

पत्रकार मसीह अलीनेजाद ने अपने ट्विटर पर लिखा, “अमेरिकी फुटबॉल टीम की जीत का जश्न मनाने के कारण ईरान के सुरक्षा बलों ने उसे मार डाला। मेहरान सामक ने अपने इंस्टाग्राम पर लिखा था कि हमें परवाह नहीं है कि ईरान की टीम राष्ट्रगान गाती है या नहीं, लेकिन हम आईआरआई (IRI) के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करने के लिए सड़कों पर उतरेंगे।”

वह आगे लिखती हैं, “मेहरान अपनी मंगेतर के साथ कार में बैठकर ईरान की हार का जश्न मना रहे थे। इसी दौरान उनके सिर में गोली मार दी गई।” वह यूएस मेन फुटबॉल टीम और Tyler Adams के ट्विटर हैंडल को टैग करते हुए कहती हैं कि ‘आप ही उसकी आवाज बन सकते हैं। ईरान के अंदर ऐसा कोई नहीं है’।

बता दें कि इससे पहले ईरान की फुटबॉल टीम ने महिला प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए FIFA वर्ल्ड कप में अपना राष्ट्रगान गाने से इनकार कर दिया था। 21 नवंबर, 2022 को खलीफा इंटरनेशनल स्टेडियम में (Khalifa International Stadium) जब राष्ट्रगान बजाया गया तो सभी 11 खिलाड़ी खामोश खड़े रहे।

इस दौरान ईरानी खिलाड़ी काफी भावुक दिखाई दिए। वहीं, स्टैंड में जमा हुए ईरानी फैंस ने राष्ट्रगान बजते ही चिल्लाना शुरू कर दिया। इनमें से कुछ थम डाउन करने का इशारे करते हुए नजर आए।

IHR के अनुसार, ईरान के सुरक्षा बलों ने हिजाब विरोधी प्रदर्शनों पर कार्रवाई में कम से कम 448 लोगों को मार डाला है, जिनमें 18 वर्ष से कम उम्र के 60 बच्चे और 29 महिलाएँ भी शामिल हैं।

नार्को टेस्ट में रिलैक्स होकर जवाब देता रहा आफताब, जाँचकर्ता भी हैरान: 2 घंटों में बताया मोबाइल और श्रद्धा के कपड़े कहाँ फेंके

लिव-इन पार्टनर श्रद्धा वालकर (Shraddha Walker) की हत्या करने के बाद शव को 35 टुकड़ों में काटकर अलग-अलग फेंकने वाले आरोपित आफताब पूनावाला (Aaftab Poonawala) का नार्को टेस्ट सफल रहा। आफताब ने पॉलीग्राफ टेस्ट के बाद नार्को टेस्ट में भी श्रद्धा की हत्या की बात कबूल की है। उसने श्रद्धा के मोबाइल और कपड़े कहाँ फेंके हैं, इसकी भी जानकारी दी।

इसके साथ ही टेस्ट के दौरान आफताब ने बताया कि श्रद्धा के शव के टुकड़े करने में उसने कौन-कौन से हथियारों का इस्तेमाल किया और शव को काटने के बाद उन्हें कहाँ फेंका। दिल्ली पुलिस अब उन स्थानों को खंगालेगी, जिनके बारे में उसने जानकारी दी है।

आफताब को सुबह 8.40 बजे दिल्ली पुलिस रोहिणी के बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल लेकर पहुँची थी। वहाँ नार्को टेस्ट से पहले उसका स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। उसका नार्को टेस्ट करीब 10 बजे शुरू हुआ और लगभग 2 घंटे तक चला। टेस्ट सफल रहा है, लेकिन अगर किसी तरह की गड़बड़ी होती है तो पुलिस ब्रेन मैपिंग करने की माँग कर सकती है।

जाँच में शामिल एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया कि आफताब बहुत शातिर है और वह कभी भी मामले में नया मोड़ ला सकता है। अभी तक वह पुलिस की हर बात मान रहा है और जाँच में सहयोग कर रहा है। यहाँ तक कि उसने पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट के लिए भी अपनी सहमति दी। यही व्यवहार पुलिस अधिकारियों को परेशान कर रहा है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान आफताब बहुत ज्यादा कॉन्फिडेंट था। वह बहुत रिलैक्स होकर जवाब दे रहा था। इससे लगा कि वह पहले से सोच-समझकर जवाब देता है। पुलिस को शक यह भी है कि जब सितंबर-अक्टूबर में आफताब को मुम्बई पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया था, उस वक्त भी श्रद्धा के कुछ बॉडी पार्ट्स उसके दिल्ली वाले फ्लैट में मौजूद थे।

जाँचकर्ताओं का यह भी कहना है कि आफताब ने प्रसिद्ध हत्याओं में कानूनी प्रक्रिया और कार्रवाई, पहले के महत्वपूर्ण मामलों और बिहैवियर पैटर्न पर गहन शोध किया था। उसने हॉलीवुड सिलिब्रेटी कपल के तलाक केस के मामलों का बहुत गहराई से फॉलो कर रहा था और यह पता लगा रहा था कि बिहैवियर पैटर्न किसी केस को कैसे प्रभावित करता है।

आफताब का नार्को टेस्ट के बाद एक पोस्ट टेस्ट FSL में होगा। इसमें उसकी काउंसलिंग की जाएगी। यहाँ बताना जरूरी है कि आफताब ने भले ही नार्को टेस्ट में श्रद्धा की हत्या से जुड़े राज का खुलासा कर दिया हो, लेकिन इन्हें कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता। हालाँकि, मजिस्ट्रेट के सामने दिया गया गया बयान कोर्ट में सबूत के रूप में पेश किया जा सकता है।

टेस्ट के दौरान आफताब द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर पुलिस सबूत इकट्ठा कर सकती है। अगर उसके बताए जगह पर श्रद्धा का मोबाइल, कपड़े और शवों को काटने वाले अन्य हथियार बरामद कर लिए जाते हैं तो यह पुलिस के लिए बड़ी सफलता होगी।

आफताब कितना शातिर है, इसका अंदाजा श्रद्धा की हत्या को लेकर बताई गई वजहों से पता चलता है। एक बार उसने पूछताछ में बताया था कि श्रद्धा उस पर शादी का दवाब डाल रही थी, इसलिए उसने हत्या कर दी। वहीं, अब उसने कहा है कि श्रद्धा उससे ब्रेकअप करना चाहती थी। यह बात उसे पसंद नहीं आई और उसने हत्या कर दी।

10 साल की सजा, ₹50 हजार तक का जुर्माना: उत्तराखंड में सख्त होगा धर्मांतरण विरोधी कानून, विधेयक पास; CM धामी ने बताया- ये बेहद घातक चीज

उत्तराखंड सरकार ने राज्य विधानसभा में उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक-2022 पेश किया। इस विधेयक को सर्वसम्मति व ध्वनि मत से पारित किया गया है। इस विधेयक में जबरन धर्मांतरण के दोषियों के लिए 10 साल तक की सजा और 50 हजार रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा, महिलाओं को 30% आरक्षण वाला विधेयक भी पारित हो गया है। राज्यपाल की मोहर के बाद ये विधेयक कानून बन जाएँगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तराखंड सरकार के इस विधेयक के कानून बन जाने के बाद जबरन धर्मांतरण पूरी तरह से संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध होगा। एकल धर्मांतरण कराए जाने पर दोषियों को न्यूनतम 3 वर्ष व अधिकतम 7 वर्ष की सजा होगी। वहीं, सामूहिक धर्मांतरण पर तीन से 10 साल की सजा होगी।

इसके अलावा, अवयस्क महिला, दलितों व जनजातियों के एकल धर्मांतरण पर 3 से 10 साल तक की सजा और 25 हजार रुपए का जुर्माना तथा सामूहिक धर्म परिवर्तन पर 3 से 10 साल तक की सजा और 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। यही नहीं, धर्मांतरण के आरोपितों के खिलाफ सख्ती से निपटने के लिए इस विधेयक में दोषियों को कम से कम पाँच लाख रूपए की मुआवजा राशि का भुगतान भी करना पड़ सकता है। यह मुआवजा पीड़ित को दिया जाएगा।

इससे पहले, साल 2018 में भी जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए कानून लाया गया था। तब, जबरन धर्मांतरण पर 1 से 5 साल की सजा और दलितों व जनजातीय समुदाय के मामले में 2 से 7 साल की कैद की सजा का प्रावधान था। हालाँकि, अब कानून को और अधिक कड़ा किया गया है।

धर्मांतरण जैसी चीजें बेहद घातक: CM धामी

इस विधेयक को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है “उत्तराखंड देवभमि है। यहाँ धर्मांतरण जैसी चीजें बहुत घातक हैं, इसलिए सरकार इस पर रोक के लिए कठोर कानून लेकर आई है। इस कानून को पूरी दृढ़ता से प्रदेश में लागू किया जाएगा। इसी तरह उत्तराखंड राज्य निर्माण में मातृशक्ति का बड़ा योगदान रहा है, सरकार ने यह पहले ही तय किया था कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस प्रदेश में मातृशक्ति का सम्मान करते हुए उन्हें क्षैतिज आरक्षण का लाभ दिया जाएगा।”

बता दें कि राज्य विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले दिन मंगलवार (29 नवंबर 2022) को उत्तराखंड के धर्म और संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने इस विधेयक को पेश किया था।

इस विधेयक को पेश करते हुए उन्होंने कहा था कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25, 26, 27 और 28 के अनुसार, प्रत्येक धर्म को समान रूप से मजबूत करने के उद्देश्य में आ रही कठिनाइयों के निराकरण के लिए यह संशोधन विधेयक लाया गया है। विधेयक में विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन को संज्ञेय और गैर जमानती अपराध बनाते हुए दोषियों के लिए न्यूनतम तीन साल से लेकर अधिकतम 10 साल तक के कारावास का प्रावधान है।

अन्य राज्यों में धर्मांतरण पर कानून

गौरतलब है कि उत्तराखंड के अलावा, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश समेत कुछ अन्य राज्यों में भी धर्मांतरण पर कड़े कानून बनाए गए हैं। मध्यप्रदेश के धर्मांतरण विरोधी कानून की बात करें तो यहाँ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2020 के अनुसार कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे को प्रलोभन, धमकी या जबरन शादी के नाम पर या अन्य किसी प्रकार की धोखाधड़ी से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से उसका धर्म परिवर्तन नहीं करवा सकता है।

इस कानून का उल्लंघन करने पर एक से 10 साल तक की कैद और एक लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। यही नहीं धर्म छिपाकर शादी के अपराध में तीन वर्ष से 10 वर्ष तक की सजा और 50 हजार रुपए के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। साथ ही दूसरे धर्म में विवाह के लिए सूचना दो महीने पहले देनी होगी यदि बिना सूचना के विवाह होता है तो उसे शून्य माना जाएगा।

उत्तरप्रदेश के धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश, 2020 की बात करें तो यहाँ, जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर न्यूनतम 15,000 रुपये के जुर्माने के साथ एक से पाँच साल की कैद का प्रावधान है। इसके अलावा, एससी/एसटी समुदाय के नाबालिगों और महिलाओं के धर्मांतरण पर तीन से 10 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। जबरन सामूहिक धर्मांतरण के लिए 3 से 10 साल तक की सजा 50,000 रुपए जुर्माने का प्रावधान किया गया है। यही नहीं, यदि यह पाया जाता है कि विवाह का एकमात्र उद्देश्य धर्म परिवर्तन कराना था तो ऐसी शादियों को अवैध करार दिया जाएगा।

इंडिया का डिस्काउंट देख के पाकिस्तान की जीभ लपलपाई… लेकिन रूस बोला- तेरे को नहीं दूँगा सस्ता तेल

भारत की तर्ज पर पाकिस्तान भी रूस से सस्ते दामों में क्रूड ऑयल खरीदने की इच्छा जताई है। हालाँकि, रूस ने उसे किसी तरह का डिस्काउंट देने से इनकार कर दिया है। साथ ही यह भी कहा कि उसके पास देने के लिए अभी तेल का स्टॉक नहीं है।

दरअसल, भारत रूस से सस्ते दामों पर कच्चे तेल का आयात करता है। इसको देखते हुए पाकिस्तान ने भी रूस से संपर्क साधा था। पाकिस्तान ने रूस से कहा था कि उसे 30-40 प्रतिशत के डिस्काउंट पर उसे कच्चा तेल उपलब्ध कराए, जिसे रूस ने इनकार कर दिया।

पाकिस्तान के पेट्रोलियम राज्य मंत्री मुसादिक मलिक, संयुक्त सचिव और मास्को में पाकिस्तानी दूतावास के अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल मास्को में रूस के अधिकारियों से मिला था। यह वार्ता बिना किसी निष्कर्ष के ही समाप्त हो गई। रूस ने इस मामले में पाकिस्तान के माँगों पर विचार कर सूचित करने की बात कही।

उधर यूरोपीय यूनियन अपने पूर्वी ब्लॉक के सदस्यों के साथ रूसी कच्चे तेल की उच्चतम दर तय करने के लिए बुलाई गई बैठक में समझौता करने में विफल रहा। पोलैंड, एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया जैसे कई देशों ने कहा कि रूसी कच्चे तेल के लिए प्रस्तावित $60- $70 प्रति बैरल बहुत अधिक है और रूस द्वारा वर्तमान में बेचे जा रहे दर से बहुत अधिक है।

बता दें कि रूस के राजस्व में कच्चा तेल एक महत्वपूर्ण कारक है। भारत और चीन उसके सबसे बड़े एवं महत्वपूर्ण खरीदारों में शामिल हैं, जो रूस से कच्चे तेल आधी कीमत पर हासिल कर रहे हैं। रूस के प्रमुख यूराल कच्चे तेल में पिछले सप्ताह के अंत में $33.28, या अंतरराष्ट्रीय ब्रेंट कच्चे तेल के लगभग 40% की भारी छूट पर कारोबार हुआ।

इससे पहले, अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए 80% आयात करने भारत रूसी कच्चे तेल का कभी भी बड़ा खरीदार नहीं था। भारत रूस से अपने कच्चे तेल का केवल 2-5% आयात करता था। भारत ने 2021 में केवल 12 मिलियन बैरल रूसी कच्चे तेल का आयात किया था।

हालाँकि, मई 2022 में भारत के लिए रूसी तेल आयात में स्पष्ट वृद्धि देखी गई। रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन पर रूस के हमले से पहले भारत रूसी तेल, गैस और कोयले पर 5.1 अरब डॉलर खर्च किए, जो एक साल पहले के मूल्य से पाँच गुना अधिक था।

सेना के लिए छोड़ी IIT, दीवारों को इंटरव्यू दिया: NDA में गोल्ड पाने वाले गौरव यादव की कहानी, परिवार ने कहा- हमें मानसिक स्थिति को लेकर चिंता होती थी

राजस्थान के अलवर जिले के गौरव यादव ने नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) में शामिल हो कर देश सेवा का सपना तो लाखों युवा देखते होंगे लेकिन गौरव यादव ने न सिर्फ उस सपने को देखा बल्कि उसे अर्जित भी किया। राजस्थान के अलवर जिले के रहने वाले गौरव यादव ने अपने सपने को पूरा करने के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) में एडमिशन को भी ठुकरा दिया था। गौरव सिर्फ ट्रेनिंग में ही आगे नहीं रहे बल्कि एनडीए की 143वें परेड में उन्हें प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया।

गोल्ड मेडलिस्ट गौरव शुरुआत से ही सेना में करियर बनाना चाहते थे। बचपन से ही खेल-कूद और पढ़ाई में आगे रहने वाले गौरव ने IIT एंट्रेंस टेस्ट पास कर लेने वाली बात को परिवार वालों से छिपाए रखा क्योंकि उन्हें सेना में शामिल होने के अपने सपने को पूरा करना था। गौरव ने दिल्ली के एक कॉलेज में प्रवेश ले लिया और एनडीए की तैयारी भी करने लगे।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, गौरव ने दो बार एनडीए प्रवेश परीक्षा पास की लेकिन दोनों ही बार सर्विस सेलेक्शन बोर्ड (SSB) इंटरव्यू स्टेज को पार नहीं कर पाए। इस नाकामी से शिक्षा लेते हुए उन्होंने तीसरे मौके को हाथ से जाने नहीं दिया। उनकी मेहनत रंग लाई और गौरव खड़कवासला में नेशनल डिफेंस एकेडमी का हिस्सा बन गए। बुधवार (30 नवंबर,2022) को पासिंग आउट परेड के बाद गौरव ने कहा, “मैं अपने कमरे की दीवार के सामने खड़ा होता था। इस दौरान मैं सोचता था कि मैं एसएसबी पैनल को इंटरव्यू दे रहा हूँ और उनके सवालों का जवाब दे रहा हूँ।”

पासिंग आउट परेड के बाद गौरव यादव (फोटो साभार टाइम्स ऑफ इंडिया)

गौरव यादव एक किसान परिवार से आते हैं। उनका पैतृक निवास राजस्थान के अलवर जिले के जाजौर-बास गाँव में है। गौरव के भाई विनीत भी भारतीय सेना में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक विनीत ने बताया कि एक समय ऐसा भी था, जब परिवार को गौरव के मानसिक स्थिति को लेकर चिंता होने लगी थी।

विनीत ने बताया कि जब उन्होंने अपने भाई से IIT रिजल्ट को लेकर पूछा तो, गौरव ने बताया कि एग्जाम क्लियर नहीं हो पाया। गौरव जब NDA के लिए चुने गए तब कहीं जाकर उन्होंने परिवार के लोगों को जानकारी दी कि उनका IIT एंट्रेंस क्लियर हो गया था। विनीत कहते हैं कि गौरव ने इस असाधारण उपलब्धि को हासिल कर के खुद को सही साबित कर दिया है। हमें उस पर गर्व है।

एनडीए में गौरव ने ना सिर्फ एकेडमिक फ्रंट पर शानदार प्रदर्शन किया, बल्कि मिलिट्री ट्रेनिंग में भी वह सबसे आगे रहे। परिणामस्वरूप उन्हें गोल्ड मेडल से नवाजा गया। इतना ही नहीं गौरव को परेड की कमान संभालने का अवसर भी मिला जो सोने पर सुहागा जैसा था। खुद गौरव ने भी इसकी कल्पना नहीं की थी।

AC स्टूडियो में बैठ The Kashmir Files को नहीं समझ पाएँगे: रवीश कुमार, नसीरुद्दीन सबको लताड़ा पीयूष मिश्रा ने

‘द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files)’ को लेकर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) के जूरी हेड नादव लैपिड (Nadav Lapid) ने विवादित टिप्पणी की। इसी मामले पर बॉलीवुड अभिनेता पीयूष मिश्रा (Piyush Mishra) ने फिल्म की तारीफ करते हुए उन्हें लताड़ा। साथ-ही-साथ इसे प्रोपेगेंडा बताने वाले नसीरुद्दीन शाह और रवीश कुमार की भी अच्छे से क्लास लगाई।

पीयूष मिश्रा ने ‘द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files)’ पर बोलते हुए कहा:

“इन लोगों ने देखा नहीं है कश्मीर। ये लोग कश्मीर जानते नहीं हैं, ये कभी गए नहीं हैं कश्मीर। मैंने पहले भी पढ़ा था नसीरुद्दीन शाह ने बोला था, रवीश कुमार ने बोला था कि ये एक झूठी और प्रोपेगेंडा फिल्म है। मेरे पास आएँ, मैं दिखाता हूँ आपको डॉक्यूमेंट्री, जो कश्मीरी पंडितों के जीवन पर बनाई गई हैं। उसमें एक-एक डायलॉग और घटना मैच करती हैं, जो उन्होंने खुद कहा है कैमरा पर।”

अपनी बात जारी रखते हुए पीयूष मिश्रा ने कहा कि AC स्टूडियो में बैठ कर, पेरी क्रॉस रोड बांद्रा में बैठ कर हिंदुस्तान का आकलन नहीं होता। उनके अनुसार हिंदुस्तान का आकलन तब होता है, जब इंसान बाहर निकलता है, जिंदगी देखनी पड़ती है और धूप में चलना पड़ता है। पीयूष मिश्रा ने कहा कि जो ऐसा करेगा, उसे ही ऐसी फिल्म पसंद आएगी।

पीयूष मिश्रा से पहले बुधवार (30 नवंबर 2022) को अनुपम खेर ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो शेयर किया था। इसमें उन्होंने ‘द कश्मीर फाइल्स’ को प्रोपेगेंडा फिल्म बताने वालों को लेकर कहा था कि लोगों को सच जैसा है, उसे वैसा देखने और दिखाने की आदत नहीं होती। उनके अनुसार ऐसे लोग अपनी मनपसंद खुशबू, अपना मनपसंद जायका, अपने मनपसंद रंग लेप कर, सजा कर देखने-दिखाने के आदी होते हैं। अनुपम खेर ने कहा था:

“उन्हें कश्मीर का सच पच नहीं रहा है। वे चाहते हैं कि उसे किसी रंगीन और खुशनुमा चश्मे से देखा और दिखाया जाए। पिछले 25-30 साल से वे यही करते आए हैं। आज जब ‘द कश्मीर फाइल्स’ ने सच को जैसा है वैसा दिखाकर पेश किया, तो उन्हें तकलीफ हो रही है।”

कट्टरपंथी इस्लामी आतंक के कारण कश्मीरी हिंदुओं ने जो सालों-साल झेला है, उस पर अनुपम खेर ने यह भी कहा था कि जो इस भयावह सच को नहीं देख पाते हैं, वो अपना मुँह सिल लीजिए और आँखें बंद कर लीजिए। लेकिन, उसका मजाक उड़ाना बंद करिए। उन्होंने इसके पीछे तर्क दिया था कि उनके जैसे कई लोग इस सच के भुक्तभोगी हैं।

गौरतलब है कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ 1990 में कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार और उनके पलायन पर आधारित फिल्म है। यह फिल्म 11 मार्च, 2022 को सिनेमाघरों में रिलीज की गई थी। फिल्म में अनुपम खेर, मिथुन चक्रबर्ती, दर्शन कुमार, पल्लवी जोशी मुख्य किरदार में हैं।

‘द कश्मीर फाइल्स’ की रिलीज के वक्त भी कट्टरपंथी-वामपंथी समूह इस फिल्म से नाराज थे। एनडीटीवी ने तो इस फिल्म की रिलीज से पहले इसे प्रोपेगेंडा फिल्म बता दिया था। लेकिन विरोध के बाद उन्हें अपनी रिपोर्ट से प्रोपेगेंडा शब्द हटाना पड़ा था।

दिल्ली के जज का महिला स्टेनोग्राफर के साथ आपत्तिजनक Video वायरल: HC ने लिया संज्ञान, दोनों निलंबित

बीते कुछ दिनों से एक जज का महिला स्टेनोग्राफर के साथ आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा था। वीडियो सामने आने के बाद, न्यायपालिका के ‘क्रियाकलापों’ पर सवाल खड़े किए जा रहे थे। हालाँकि अब, इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जज और महिला स्टेनोग्राफर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही इस वीडियो को सोशल मीडिया से ब्लॉक करने का भी आदेश दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के सेशन जज और महिला स्टेनोग्राफर का है। यह वीडियो इसी साल 9 मार्च का बताया जा रहा है। साथ ही कहा जा रहा है कि जज के चैम्बर में लगे सीसीटीवी कैमरे में यह वीडियो रिकॉर्ड हुआ था। वीडियो सामने आने के बाद अधिवक्ताओं ने जज और महिला स्टेनोग्राफर के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की थी।

इस मामले में, दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जज एवं महिला स्टेनोग्राफर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही जिला एवं सत्र न्यायाधीश को संबंधित महिला अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया है। यही नहीं, इस मामले की जाँच के लिए समिति गठित करने की प्रक्रिया भी चल रही है।

इससे पहले बुधवार (30 नवंबर 2022) को महिला स्टेनोग्राफर की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस यशवंत वर्मा की बेंच ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म से उपरोक्त वीडियो को ब्लॉक करने और इसके सर्कुलेशन को रोकने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 354C के साथ-साथ सूचना और प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 67A के प्रावधानों को ध्यान में रखा है। इसके अंतर्गत वीडियो के आगे सर्कुलेशन, शेयरिंग और डिस्ट्रीब्यूशन से प्रथम दृष्टया कानूनों का उल्लंघन होता है। वीडियो के कंटेंट और गंभीर, अपूरणीय क्षति को भी ध्यान में रखा गया है।

एबीपी की रिपोर्ट के मुताबिक, राउज रेवेन्यू कोर्ट परिसर में जज और महिला स्टेनोग्राफर के बीच संबंधों को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही थी। इसलिए, ऐसी आशंका भी जताई जा रही है कि कोर्ट के किसी कर्मचारी ने ही वीडियो रिकॉर्ड के वायरल किया हो।

AAP जिसे MLA बनाने के सपने देख रही, उसे कोर्ट ने सुनाई 6 महीने जेल की सजा: बैंक अकाउंट में पैसे के बिना साइन किया था चेक

गुजरात (Gujarat) की भरुच कोर्ट ने अंकलेश्वर से आम आदमी पार्टी (AAP) के MLA उम्मीदवार अंकुर पटेल को छह महीने की कारावास की सजा सुनाई है। यह सजा चेक बाउंस के मामले से जुड़ा है। वहीं, राज्य में कॉन्ग्रेस के प्रत्याशी अनंत पटेल पर भाजपा प्रत्याशी पीयूष पटेल पर हमला करने का आरोप लगा है।

AAP प्रत्याशी अंकुर पटेल ने फरवरी 2021 में सलीम वाडिया नाम के एक व्यक्ति को 5 लाख और 2 लाख रुपए का चेक दिया था। इसमें 2 लाख रुपए की चेक बाउंस होने के बाद सलीम ने अंकुर पटेल के खिलाफ कार्रवाई की थी। कोर्ट ने निगोशिएबल इंट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत अंकुर पटेल को दोषी ठहराया है।

सलीम ने वकील बाबा सैयद ने कहा, मेरे मुवक्किल ने अंकुर पटेल को कुल 8 लाख रुपए दिए थे और वह उन पैसों की माँग कर रहा था। पटेल ने मेरे मुवक्किल को पाँच लाख और दो लाख रुपए के कुल दो चेक जारी किए। पिछले साल दोनों चेक वापस हो गए।”

सैयद ने आगे कहा, “कुछ तकनीकी कारणों की वजह से हम पाँच लाख रुपए वाले चेक को लेकर शिकायत नहीं कर पाए, लेकिन 2 लाख रुपए का चेक बाउंस NI Act के तहत चैलेंज करने के लिए अनुकूल था।” बता दें कि अंकुर पटेल के पास फ्यूल पंप है। वहीं, सलीम सेकेंड गाड़ियों का व्यवसाय करते हैं। कुछ साल पहले दोनों में नजदीकी बढ़ी थी।

उधर गुजरात में मतदान से एक दिन पहले यानी बुधवार (30 नवंबर 2022) को वंसडा से भाजपा उम्मीदवार पीयूष पटेल पर कुछ अज्ञात लोगों ने हमला कर दिया। पीयूष ने इसके लिए कॉन्ग्रेस प्रत्याशी अनंत पटेल पर आरोप लगाया है।

पीयूष पटेल ने कहा कि उनकी गाड़ी पर हमला करने वाले कॉन्ग्रेस प्रत्याशी अनंत पटेल के समर्थक थे और उनके ही इशारे पर उनकी गाड़ी पर हमला किया गया। इसको लेकर पुलिस थाने में मामला दर्ज करा दिया गया है। वहीं, भाजपा प्रत्याशी के समर्थकों ने थाने के सामने कॉन्ग्रेसी प्रत्याशी के खिलाफ नारे भी लगाए।

कर्नाटक के हरिहर सुब्रमण्यम मंदिर में न हों मुस्लिमों की दुकान: फर्जी ID पर कर रहे व्यापार, सच खुलने पर प्रतिबंध लगाने की माँग

कर्नाटक (Karnataka) में मंदिर परिसर से मुस्लिमों की दुकानों को हटाए जाने का सिलसिला जारी है। मंगलवार (29 नवंबर 2022) को कोडगु (Kodagu) जिले के हरिहर सुब्रमण्य मंदिर से मुस्लिमों की दुकानों को हटाया गया है। इससे पहले राज्य के कई जिलों में ऐसी घटनाएँ सामने आ चुकीं हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कोडगु जिले के पोन्नमपेट में स्थित हरिहर सुब्रमण्य मंदिर परिसर में कई मुस्लिमों में दुकानें लगा रखीं थीं। हालाँकि अब, हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं व दुर्गा वाहिनी की जिला समन्वयक और प्रोफेसर अंबिका ने विरोध जताते हुए मुस्लिम व्यापारियों से कहा है कि अब उन्हें मंदिर परिसर के निकट व्यवसाय करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

दुर्गा वाहिनी की जिला समन्वयक अंबिका ने कहा, “यहाँ व्यापार करने के लिए मुस्लिमों को अपनी पहचान छिपाने की आवश्यकता नहीं थी। वे अपना असली पहचान पत्र दिखाकर यहाँ व्यापार कर सकते थे। हमारे यह कहने के बावजूद कि हम हिंदुओं के अलावा किसी और को मंदिर परिसर में व्यापार नहीं करने देंगे। उन लोगों ने यहाँ फर्जी आईडी कार्ड के साथ यहाँ व्यापार करना शुरू कर दिया था।”

कर्नाटक में चला अभियान

दरअसल, कर्नाटक में बड़े पैमाने पर मुस्लिम व्यापारियों का बहिष्कार किया जा रहा है। इसके अंतर्गत कोडगु जिले में भी यह बहिष्कार अभियान चलाया जा रहा है। इस हफ्ते की शुरुआत में, हिंदू संगठनों ने बेंगलुरु के वीवी पुरम में सुब्रमण्य स्वामी मंदिर में आयोजित धार्मिक मेले के दौरान मुस्लिम व्यापारियों के बहिष्कार का आह्वान किया था।

मंगलवार (29 नवंबर 2022) को विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) के आयुक्त तुषार गिरि नाथ और दक्षिण बेंगलुरु के पुलिस उपायुक्त पी कृष्णकांत को एक ज्ञापन सौंपा था। इस ज्ञापन में मुस्लिम व्यापारियों पर प्रतिबंध लगाने की माँग की गई थी।

हिजाब के लिए किया था बंद

गौरतलब है कि इससे पहले इसी साल मार्च में कर्नाटक (Karnataka) के उडुपी जिले के होसा मारीगुडी मंदिर ने भी मुस्लिमों को दुकान लगाने की इजाजत नहीं देने का फैसला किया था। यह निर्णय मंदिर परिसर में मौजूद मुस्लिम दुकानदारों द्वारा हिजाब पर 17 मार्च 2022 को कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के विरोध में आयोजित बंद में शामिल होने के बाद लिया गया था। इस बंद से स्थानीय श्रद्धालुओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।

इसके अलावा, मार्च में ही, हिंदू संगठनों ने दक्षिण कन्नड़ जिले के मुल्की में बप्पनाडु मंदिर मेले से मुस्लिम व्यापारियों को बाहर कर दिया था। कर्नाटक में ऐसे कई अन्य मामले भी सामने आए हैं।

उल्लेखनीय है कि कर्नाटक के कई हिन्दू मंदिरों में मुस्लिमों द्वारा दुकानें लगाए जाने से रोक के बाद राज्य सरकार के कानून मंत्री ने भी सरकार का रूख स्पष्ट किया था। जेसी मधुस्वामी ने इसे सरकारी नियम बताते हुए मंदिर प्रशासन के निर्णय पर सहमति जताई थी। इस मुद्दे पर कर्नाटक विधानसभा में बुधवार (23 मार्च, 2022) को चर्चा हुई थी। यह आदेश सभी गैर हिन्दुओं पर लागू है।