Friday, July 19, 2024
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लेना चाहते थे 7 फेरे, लेकिन दिलवाई हिंदू विरोधी शपथ: कॉन्ग्रेसी मंत्री की मौजूदगी में ‘बौद्ध’ वाली शादी, घर पहुँच देवी-देवताओं की पूजा

'जैसे ही उनका समारोह समाप्त हुआ, इसके बाद हम इंतजार कर रहे थे घर जाने का, ताकि जल्दी से जल्दी घर जाकर हमारी (हिन्दू) परंपराओं के अनुसार देवी-देवताओं की पूजा अर्चना कर सकें।"

राजस्थान के भरतपुर में सामूहिक विवाह सम्मेलन में 11 नवविवाहित जोड़ों को हिंदू विरोधी शपथ दिलाने का वीडियो वायरल होने के बाद से बवाल खड़ा हो गया है। दावा किया जा रहा है कि सामूहिक विवाह सम्मेलन में आए दूल्हा-दुल्हन 7 फेरे लेकर हिंदू रीति रिवाज से शादी करना चाहते थे, लेकिन उन्हें उनके ही धर्म के खिलाफ 22 प्रतिज्ञाएँ दिलवाई गईं। वायरल वीडियो में नवविवाहित जोड़ों को यह कहते हुए सुना गया, “मैं ब्रह्मा, विष्णु, महेश और गणेश को नहीं मानूँगा और ना ही उनकी पूजा करूँगा।”

इस कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री विश्वेन्द्र सिंह, भरतपुर मेयर, जिला कलेक्टर से लेकर 20 से ज्यादा अधिकारियों मौजूद थे।

दैनिक भास्कर’ ने उन दूल्हों और उनके परिवार वालों से बातचीत की, जिनके धर्म-परिवर्तन को लेकर दावा किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, तुईया गाँव के रहने वाले दूल्हे विपिन के घर में अभी भी हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीर लगी हुई है। 22 वर्षीय विपिन ने बताया, “समारोह में हिंदू जोड़ों की शादी बौद्ध धर्म के अनुसार करवाई गई। मैं भी सात फेरे लेकर शादी करना चाहता था, लेकिन जब दूसरे दूल्हों ने विरोध नहीं किया, तो मैं भी चुपचाप उनके बताए अनुसार सब कुछ करता रहा।”

उन्होंने बताया, “महज वरमाला पहनाकर हमारी शादी करवाई गई। इसके बाद 22 प्रतिज्ञाओं की शपथ दिलाई गई। विवाह समारोह के लिए मैंने और मेरे पत्नी के पिता ने 11 हजार रुपए देकर रजिस्ट्रेशन करवाया था।”

विपिन ने आगे बताया, “शादी का आयोजन कैसे हुआ, हमें इससे मतलब नहीं था। न ही हमें किसी प्रकार की सूचना दी गई थी कि वे इस तरह से शपथ दिलाएँगे। जैसे ही उनका समारोह समाप्त हुआ, इसके बाद हम इंतजार कर रहे थे घर जाने का, ताकि जल्दी से जल्दी घर जाकर हमारी (हिन्दू) परंपराओं के अनुसार देवी-देवताओं की पूजा अर्चना कर सकें। घर आकर हमने हिंदू रीति रिवाज से भगवान की पूजा-अर्चना की और शादी के बाद की सभी रस्में निभाई।”

‘बौद्ध धर्म में 22 प्रतिज्ञा का कोई जिक्र नहीं’

वहीं, नवविवाहित प्रमोद ने बताया कि उन पर किसी का दबाव नहीं था, लेकिन शादी समारोह में जो 22 प्रतिज्ञाएँ दिलाई गईं, वो उन्हें याद नहीं हैं। हालाँकि, बौद्ध धर्म विशेषज्ञ के मुताबिक, इस धर्म में कहीं भी 22 प्रतिज्ञा को कोई जिक्र नहीं है। ‘महाकारुणिक बुद्ध विहार’ के अध्यक्ष नरेंद्र बुद्ध ने बताया कि बौद्ध धर्म में किसी भी धर्म की खिलाफत की एक भी ​प्रतिज्ञा नहीं है, और जो 22 प्रतिज्ञाएँ भरतपुर के वायरल वीडियो में सुनी गई, उनका गौतम बुद्ध की प्रेरणाओं से कोई लेना देना नहीं है।

इस मामले पर संत रविदास समिति के प्रदेश अध्यक्ष लालचंद तेलगुरिया ने कहा कि शादी समारोह में उन्होंने बाबा अंबेडकर की 22 प्रतिज्ञाओं की शपथ दिलाई थी। समिति ने दावा किया कि ये वहीं 22 प्रतिज्ञाएँ हैं, जो नागपुर में 15 अक्टूबर 1956 को डॉ भीमराव अंबेडकर ने ली थी।

‘डॉक्यूमेंट्स में आज भी ये हिंदू हैं’

वहीं नवविवाहित प्रमोद ने बताया कि उन पर किसी का दबाव नहीं था, लेकिन शादी समारोह में जो 22 प्रतिज्ञाएं उसे दिलाई गईं, वो उसे याद नहीं हैं। हालाँकि, बौद्ध धर्म एक्सपर्ट के मुताबिक, इस धर्म में कहीं भी 22 प्रतिज्ञा को कोई जिक्र नहीं है। हिंदू विरोधी इस शपथ पर आपत्ति जताने वाले विश्व हिंदू परिषद के प्रांत सेवा प्रमुख नरेश खंडेलवाल और विभाग मंत्री सिद्धार्थ सिंह फौजदार ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। खंडेलवाल ने आरोप लगाया कि कुछ लोग फंड लेकर हिंदुओं को दूसरे धर्मों में परिवर्तित करना चाहते हैं।

हिन्दू धर्म को अंधविश्वास बताकर ये गरीब लोगों को झाँसे में लेते हैं। कई लोग मजबूरियों के चलते इनके झाँसे में आ जाते हैं। यह रिकॉर्ड में धर्म-परिवर्तन नहीं होता। सिद्धार्थ सिंह फौजदार ने बताया कि यह गरीब तबके के लोगों को अपना निशाना बनाते हैं। धर्म-परिवर्तन करवाने के लिए इनके पास बड़ा फंड आता है। उन्होंने दावा किया कि समाज में दिखावे के लिए ये बौद्ध धर्म अपना रहे हैं, लेकिन आरक्षण के लाभ के लिए डॉक्यूमेंट्स में आज भी ये हिंदू हैं।

धर्म परिवर्तन जैसी बात सामने नहीं आई: पुलिस

भरतपुर के एसपी श्याम सिंह ने बताया कि इस मामले में कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ, लेकिन पुलिस ने अपने स्तर पर जाँच करवाई है। उनकी टीम ने शादी करने वाले दूल्हे और दुल्हनों के घर जाकर पड़ताल की। 22 तरह की प्रतिज्ञाएँ जरूर दिलाई गई हैं। लेकिन जबरन शादी और धर्म-परिवर्तन जैसी बात सामने नहीं आई है।

बता दें कि मामला तूल पकड़ने के बाद संत रविदास समिति के संयोजक गिरधारी लाल बैरवा ने माफी माँगी है। उन्होंने कहा कि समिति का उद्देश्य केवल गरीब लोगों के बच्चों की सामूहिक शादी करवाना था। उन्होंने कहा कि हमने किसी का धर्म-परिवर्तन नहीं करवाया है और अगर किसी की भावना आहत हुई है, तो क्षमा प्रार्थी हूँ।

गौरतलब है कि भरतपुर के कुम्हेर कस्बे में 20 नवंबर, 2022 को संत रविदास सेवा समिति की ओर से सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित किया गया था। समिति की ओर से यह पाँचवाँ आयोजन था। सबसे पहले 11 जोड़ों को बौद्ध धर्म में कन्वर्ट करवाया गया। फिर इसके बाद सभी विवाहित जोड़ों को शपथ दिलाई गई। शपथ में कहा गया था, “मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश को ईश्वर नहीं मानूँगा। उनकी पूजा नहीं करूँगा। राम और कृष्ण को ईश्वर नहीं मानूँगा। उनकी पूजा नहीं करूँगा।”

गौरी-गणपति आदि हिंदू धर्म के किसी देवी-देवता को नहीं मानूँगा और ना ही उनकी पूजा करूँगा। ईश्वर ने अवतार लिया है इस पर मेरा विश्वास नहीं है। मैं ऐसा कभी नहीं मानूँगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार हैं। ऐसे प्रचार को मैं पागलपन और झूठा समझता हूँ। मैं बौद्ध धर्म के विरोध में कभी कोई बात नहीं करूँगा।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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