Home Blog Page 2215

मैड्रिड के US एंबेसी-स्पेन के राष्ट्रपति को भेजा लेटर बम, लिफाफा खोलते ही यूक्रेन दूतावास में हो गया था ब्लास्ट

यूक्रेनी दूतावास में धमाके के बाद स्पेन की राजधानी मैड्रिड में स्थित अमेरिकी दूतावास में भी विस्फोटकों से भरा एक संदिग्ध लिफाफा मिला है। पुलिस के मुताबिक विस्फोटकों से भरे कई लिफाफों को मैड्रिड के अलग-अलग पतों पर भेजा गया है। इसी तरह के एक लिफाफे से यूक्रेनी दूतावास में विस्फोट हुआ था। इस तरह का एक लेटर बम स्पेन के राष्ट्रपति को भी भेजा गया था, जिसे समय रहते नष्ट कर दिया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी दूतावास से बरामद विस्फोटकों से भरे पैकेट को भी नष्ट कर दिया गया है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि पिछले दो दिनों में पोस्टल पैकेट में छुपाए गए इसी तरह के विस्फोटक कई अहम लोकेशन पर भेजे गए, जिसमें स्पेन का रक्षा मंत्रालय, स्पेन स्थित यूरोपीय यूनियन का सेटेलाइट सेंटर और उत्तरी स्पेन के जारगोजा शहर के ग्रेनेड बनाने वाली फैक्टरी शामिल है। जानकारी के मुताबिक इस कारखाने में ग्रेनेड लांचर बनाया जाता है। जिनका निर्यात यूक्रेन को भी किया गया है।

स्पेन के रक्षा राज्य मंत्री राफेल पेरेज़ ने कहा है कि मामले की शुरुआती जाँच से संकेत मिला है कि पहले पाँच लेटर बम स्पेन के भीतर से ही भेजे गए थे। पुलिस ने कहा कि एक लेटर बम को छोड़कर बाकी सभी को नष्ट कर दिया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जारागोजा और दूतावास में मिले दोनों लेटर बम पर भेजने वाले का एक ही ई-मेल एड्रेस दर्ज था। स्पेनिश अधिकारियों ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि बरामद किए गए लेटर बमों के लिए कौन जिम्मेदार है। उन्होंने बताया कि मामले में आगे की जाँच की जा रही है।

आपको बता दें कि स्पेन के मैड्रिड स्थित यूक्रेनी दूतावास में उस समय धमाका हुआ जब एक कर्मचारी ने राजदूत के नाम से आए पत्र को खोला। हालाँकि, इस घटना में कर्मचारी को गंभीर चोट नहीं आई है। घटना के तुरंत बाद यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने यूक्रेन के सभी दूतावासों की सुरक्षा बढ़ाने का निर्देश दिया। उन्होंने अपने स्पेनी समकक्ष से भी तत्काल जाँच के लिए कदम उठाने का अनुरोध किया। स्पेन की राष्ट्रीय अदालत इस घटना की जाँच आतंकवादी घटना मानकर कर रही है।

तमिलनाडु के ऐतिहासिक अरुणाचलेश्वर मंदिर में देवता के मुख पर ठोका CCTV: BJP बोली- अल्पसंख्यकों को खुश करने के लिए ऐसा कर रही DMK सरकार

तमिलनाडु (Tamil Nadu) के एक मंदिर में देवता के चेहरे पर ही सीसीटीवी (CCTV) कैमरा लगाने का मामला सामने आया है। भाजपा (BJP) ने इसकी आलोचना करते हुए राज्य की डीएमके सरकार (DMK Government) को कठघरे में खड़ा किया है।

मामला तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई जिले (Tiruvannamalai District) के अरुणाचलेश्वर मंदिर (Arunachaleshwara Temple) का है। इस मंदिर में स्थित एक मूर्ति के चेहरे पर कैमरा लगा दिया गया था। तमिलनाडु के भाजपा अध्यक्ष ने इसकी आलोचना की है।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अन्नामलाई ने कहा कि राज्य की सत्तारूढ़ डीएमके सरकार में मूर्तियों के लिए कोई सम्मान नहीं है। उन्होंने कहा, “एक देवता के चेहरे पर कील ठोक कर एक कैमरा लगा दिया गया, क्योंकि नास्तिक हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग का प्रबंधन कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “सही दिमाग का कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं करेगा। यह डीएमके की एक सुनियोजित कार्रवाई है, क्योंकि वे बहुमत के लिए मुद्दे बनाकर अल्पसंख्यक समुदाय को खुश करना चाहते हैं। इस बर्बरता की जिम्मेदारी कौन लेगा?”

राज्य के बंदोबस्ती विभाग में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, “देवताओं के प्राचीन आभूषणों और गहनों को पिघलाकर सोने की छड़ों में बदला जा रहा है। इससे भ्रष्टाचार का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। डीएमके आध्यात्मिक मान्यताओं का लगातार अनादर कर रही है। इसे न तो लोग माफ करेंगे और न ही देवता।”

अन्नामलाई ने आरोप लगाया कि मंदिर के पुजारियों के लिए प्रशिक्षण की अवधि को भी पाँच साल से घटाकर एक साल कर दी गई है। यह बेहद निंदनीय है। डीएमके अपनी विचारधारा को परंपराओं और आध्यात्मिक मठों पर थोपने की कोशिश कर रही है।

भाजपा के राज्य प्रमुख ने कहा कि यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह नास्तिक होने के बावजूद भी लोगों की संस्कृति, परंपरा, विश्वास और अगम नियमों को संरक्षित करे और उसके साथ किसी तरह की छेड़छाड़ ना करे।

बता दें कि कार्तिगई दीपम उत्सव के मद्देनजर पुलिस द्वारा मंदिर के अंदर कुल 55 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। कोविड-19 महामारी के बाद पहली बार आयोजित इस उत्सव में लगभग 30 लाख भक्तों के आने की उम्मीद है। इसको ध्यान में रखकर सुरक्षा के लिए कैमरे लगाए गए हैं।

दीपम उत्सव 5 और 6 दिसंबर को होगा। 6 दिसंबर को अयोध्या के बाबरी ढाँचा गिराए जाने की भी बरसी है। पुलिस का कहना है कि यह सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है कि किसी भी तरह की कोई अनहोनी ना हो।

सावधानी के मद्देनजर इस पाँच मंजिला ऐतिहासिक मंदिर के अंदर 70 फुट ऊँचे कट्टई गोपुरम पर द्वारपाल (संरक्षक देवता) के चेहरे पर एक सीसीटीवी कैमरा लगाया गया था। मंदिर में चार मुख्य गोपुरम और 5 छोटे गोपुरम हैं।

जब भक्तों ने द्वारपाल के चेहरे पर सीसीटीवी कैमरा देखा तो हंगामा कर दिया। कैमरा लगाने से वहाँ का प्लास्टर हट गया और मूर्ति का चेहरा क्षतिग्रस्त हो गया। हंगामे को देखते हुए अधिकारियों ने मंदिर का निरीक्षण किया और वहाँ से कैमरा हटाने के लिए कहा। इसके साथ ही क्षतिग्रस्त चेहरे का भी मरम्मत कर दिया गया है।

FIFA World Cup: कतर में नोरा फतेही ने किया तिरंगे का अपमान, हरा ऊपर-भगवा नीचे करके लहराया, Video देख नेटीजन्स भड़के

नोरा फतेही (Nora fatehi) अपने धमाकेदार डांस और ग्लैमर की वजह से इंटरनेट पर छाई रहती हैं। इसी शोहरत की वजह से नोरा को कतर में चल रहे फीफा वर्ल्ड कप 2022 (FIFA World Cup 2022) में परफॉर्म करने का मौका मिला। फीफा वर्ल्ड कप 2022 के फैन फेस्टिवल में नोरा ने अपनी जबरदस्त अदाओं से हर किसी का दिल जीत लिया। उनकी कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। इन्हीं में से एक में वो स्टेज पर जय हिंद का नारा लगाते हुए भारतीय तिरंगा लहरा रही हैं। इसी वीडियो की वजह से नेटीजन्स ने नोरा की क्लास भी लगा दी है।

फीफा वर्ल्ड कप फैन फेस्टिवल के इस वीडियो को अर्शिन के मधु (Arshin k madhu) नाम के इंस्टा पेज पर अपलोड किया गया है। इस वीडियो में तिरंगे को लेकर नोरा फतेही पहले कई बार माइक पर जय हिंद के नारे लगाती हैं। उसके बाद नोरा कहती हैं, “इंडिया चाहे फीफा वर्ल्ड कप में नहीं है, लेकिन हम हमारे म्यूजिक और डांस से इस फेस्ट का हिस्सा हैं। नोरा की ये बातें सुनकर वहाँ मौजूद लोग हूटिंग करने लगते हैं। नोरा के साथ लोग जय हिंद के नारे लगाने लगते हैं। स्टेडियम में इंडिया, इंडिया का नारा गूँजने लगता है।

इसी बीच जोश-जोश में नोरा से कई गलतियाँ हुईं। नोरा पर तिरंगे को गलत तरीके से पकड़ने, लहराने और इसका अपमान करने का आरोप लग रहा है। सबसे पहले तो नोरा को स्टेज पर फेंककर तिरंगा दिया गया। जो लोगों को नागवार गुजर रहा है। स्टेज पर गिरे राष्ट्रीय ध्वज को नोरा ऐसे लहरा रही थीं जैसे वह तिरंगा नहीं कोई दुपट्टा हो। नोरा ने तिरंगे को दुपट्टे की तरह खुद पर लपेटा। हद तो तब हुई जब नोरा ने तिरंगे को उल्टा लहरा दिया। नोरा ने जिस तरह स्टेज से तिरंगे को नीचे खड़े शख्स को लौटाया, उसकी भी आलोचना हो रही है।

नोरा के वीडियो पर यूजर्स के कमेंट (साभार इंस्टाग्राम अर्शिन के मधु)

उसी वीडियो पर यूजर्स नोरा फतेही को तिरंगे के सम्मान का पाठ पढ़ा रहे हैं। एक यूजर ने कमेंट किया,”तिरंगे को गलत तरह से पकड़ा गया है। ग्रीन रंग ऊपर की तरफ नहीं होना चाहिए। यह ऑरेंज होता है।” दूसरे यूजर ने लिखा, “इंडियन फ्लैग जो देने का तरीका था वह बहुत ही खराब था, यह देश के झंडे के अपमान करने के जैसा था।” अन्य यूजर ने लिखा, “ओह माय गॉड अपने देश के तिरंगे के लिए कोई आदर ही नहीं है। एक्टिंग करना और परफॉर्म करना सब कुछ नहीं होता, जिस तरह से वह फ्लैग फेंक रहे हैं वह बहुत ही अनादर पूर्ण है।” एक दूसरे यूजर ने कमेंट में लिखा, “वह भारतीय ध्वज का सम्मान नहीं कर रही हैं, वह उसका अपमान कर रही हैं।”

‘PM मोदी की मोरबी यात्रा में ₹30 करोड़ खर्च किए गए’: TMC प्रवक्ता साकेत गोखले ने फर्जी न्यूज क्लिपिंग से फैलाई फेक न्यूज, BJP ने रिपोर्ट को नकारा

पूर्व आरटीआई कार्यकर्ता और वर्तमान में तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता साकेत गोखले (TMC Leader Saket Gokhale) पर एक आरटीआई क्वेरी और उसके जवाब के बारे में एक मनगढ़ंत समाचार रिपोर्ट साझा करने का आरोप लगाया गया है। उन्होंने दावा किया था कि पीएम मोदी की मोरबी यात्रा पर ₹30 करोड़ खर्च किए गए थे।

इसके लिए उन्होंने एक अनाम गुजराती समाचार पत्र की क्लिपिंग साझा किया था, जिसे गुजरात समाचार होने का दावा किया गया था। वहीं, बीजेपी ने कहा है कि यह मनगढ़ंत है और ऐसी कोई रिपोर्ट प्रकाशित नहीं हुई है और ऐसा कोई आरटीआई नहीं आया था। वहीं, गुजरात समाचार ने भी कहा है कि उसने ऐसी कोई रिपोर्ट प्रकाशित नहीं की है।

टीएमसी के प्रवक्ता साकेत गोखले ने 1 दिसंबर 2022 को दावा किया कि पुल ढहने की त्रासदी के बाद गुजरात में पीएम मोदी की मोरबी यात्रा की व्यवस्था पर ₹30 करोड़ खर्च किए गए थे। गोखले ने ट्विटर पर एक गुजराती अखबार की क्लिपिंग पोस्ट की, जिसमें दावा किया गया कि एक आरटीआई के जवाब में कहा गया है कि पीएम की मोरबी यात्रा के लिए सिर्फ कुछ घंटों के लिए 30 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।

इस तथाकथित रिपोर्ट का हवाला देते हुए गोखले ने दावा किया कि ₹5.5 करोड़ विशुद्ध रूप से ‘स्वागत, कार्यक्रम प्रबंधन और फोटोग्राफी’ के लिए थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि ‘मोदी के इवेंट मैनेजमेंट और पीआर की लागत 135 लोगों के जीवन से अधिक है’, क्योंकि त्रासदी के 135 पीड़ितों के परिवारों में से प्रत्येक को ₹4 लाख की अनुग्रह राशि दी गई, जो कुल ₹5 करोड़ रुपए है।

इस खबर को पोस्ट करने वाले साकेत गोखले अकेले नहीं थे। उनसे पहले डैक्स पटेल नाम के एक ट्विटर यूजर ने कल यही क्लिपिंग पोस्ट की थी। कथित समाचार रिपोर्ट में कहा गया है कि यह खुलासा मोरबी जिला कलेक्टर के कार्यालय ने दीपक पटेल की आरटीआई अर्जी पर किया था। कथित खर्च का ब्रेकअप देते हुए रिपोर्ट में दावा किया गया कि ₹8 करोड़ अस्पताल की पेंटिंग, सफाई, नए बेड और वाटर कूलर पर खर्च किए गए, ₹11 करोड़ नई सड़कों के लिए, ₹3 करोड़ पीएम मोदी के स्वागत के लिए, ₹2.5 करोड़ पीएम की सुरक्षा में, ₹2 करोड़ इवेंट मैनेजमेंट के लिए और ₹50 लाख फोटोग्राफी के लिए खर्च किए गए।

इसके बाद कई ट्विटर यूजर ने इस क्लिप को साझा किया। हालाँकि, गुजरात भाजपा ने कहा है कि यह फेक न्यूज है और इस तरह की कोई आरटीआई दाखिल नहीं की गई और न ही किसी आरटीआई का ऐसा कोई जवाब दिया गया। गुजरात भाजपा ने ट्विटर पर पोस्ट किया कि नई क्लिपिंग मनगढ़ंत है और वास्तव में ऐसी कोई रिपोर्ट कहीं भी प्रकाशित नहीं हुई थी।

गुजरात भाजपा ने कहा, “टीएमसी झूठों की पार्टी है। यह @MamataOfficial से शुरू होकर आप जैसे नीचे के प्रवक्ताओं तक है।” इस ट्वीट में गुजरात भाजपा ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी टैग किया है। वहीं, पश्चिम बंगाल बीजेपी ने भी कहा कि गोखले फर्जी खबरें फैला रहे हैं। ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं है और न ही ऐसा कोई आरटीआई जवाब है।

कई अन्य सोशल मीडिया यूजर्स ने भी क्लिपिंग पर संदेह जताया और कहा कि यह फर्जी है। खास बात यह है कि ऑनलाइन सर्च करने पर ऐसी कोई गुजराती रिपोर्ट नहीं मिली। हालाँकि, कई क्षेत्रीय समाचार पत्रों की ऑनलाइन उपस्थिति नहीं होती है और कुछ केवल अपने मुद्रित पत्रों की फोटो को समाचार पत्रों के रूप में प्रकाशित करते हैं। इसलिए उन्हें ऑनलाइन खोजा नहीं जा सकता है। हालाँकि, गोखले द्वारा साझा की गई गुजराती समाचार क्लिपिंग में अखबार का नाम और रिपोर्ट की तारीख नहीं है, जिससे ‘रिपोर्ट’ का पता लगाना और उसे सत्यापित करना मुश्किल हो जाता है।

मूल रूप से इस क्लिपिंग को पोस्ट करने वाले डैक्स पटेल ने दावा किया है कि यह गुजरात समाचार की क्लिपिंग है। एक ट्विटर यूजर द्वारा अखबार का नाम और रिपोर्ट के लिंक के बारे में पूछने पर, डैक्स पटेल ने बिना किसी लिंक के सिर्फ ‘गुजरात समाचार’ कहकर जवाब दिया।

जैसा कि इस रिपोर्ट के लिए कोई लिंक नहीं दिया गया है, इसलिए ऑपइंडिया ने गुजरात समाचार वेबसाइट पर रिपोर्ट के बारे में पता लगाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं मिली। हमने पिछले हफ्ते के गुजरात समाचार अख़बार के ई-संस्करणों को पढ़ा, लेकिन अख़बार में ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं देखी गई।

उसके बाद ऑपइंडिया की टीम ने गुजरात समाचार के वेब विभाग से बात की कि क्या यह क्लिपिंग वास्तव में उनके अखबार की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके द्वारा ऐसी कोई रिपोर्ट प्रकाशित नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि क्लिपिंग गुजरात समाचार की तरह दिखती है, लेकिन उन्होंने इसे प्रकाशित नहीं किया है।

उल्लेखनीय है कि क्लिपिंग का फ़ॉन्ट और लेआउट गुजरात समाचार के जैसा है, लेकिन ‘रिपोर्ट’ का प्रारूप वास्तविक रिपोर्ट से मेल नहीं खाता है। गुजरात समाचार हमेशा रिपोर्ट की शुरुआत में तारीख या दिन, शहर का नाम और रिपोर्ट के स्रोत को प्रिंट करता है। ये सारी चीजेें इस क्लिपिंग में नहीं हैं।

तथाकथित रिपोर्ट में बताए गए ‘आरटीआई कार्यकर्ता दीपक पटेल’ के बारे में पूछताछ करने के लिए ऑपइंडिया की टीम ने मोरबी के कुछ निवासियों से भी बात की, लेकिन किसी ने ऐसे व्यक्ति के बारे में नहीं सुना। इसलिए, भाजपा का यह दावा कि यह मनगढ़ंत रिपोर्ट है, सच प्रतीत होता है।

ऑपइंडिया ने मोरबी कलेक्टर कार्यालय और गुजरात विभाग के सूचना विभाग से संपर्क किया है और मामले के बारे में और जानकारी माँगी है कि क्या इस तरह का कोई आरटीआई जवाब जारी किया गया था। जवाब मिलने के बाद रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा।

‘एक से ज्यादा क्यों करे कोई शादी, एक देश में क्यों चले दो विधान’: MP में UCC लाने का मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया ऐलान, कहा- कमेटी बन रही है

उत्तराखंड (Uttarakhand) और गुजरात (Gujarat) के बाद अब मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में भी ‘समान नागरिक संहिता’ (Uniform Civil Code) लागू होगी। इसकी घोषणा प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chouhan) ने गुरुवार को की और कहा कि राज्य सरकार इसके लिए एक कमिटी बनाएगी।

सीएम चौहान ने कहा कि देश में अब समान नागरिक संहिता लागू होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बार बड़े खेल हो जाते हैं। खुद जमीन नहीं ले सकते तो किसी आदिवासी के नाम से जमीन ले ली जाती है। कई बदमाश तो आदिवासी बेटी से शादी करके जमीन उसके नाम से ले लेते हैं।

बड़वानी के सेंधवा में आयोजित एक रैली में बोलते हुए मुख्यमंत्री चौहान ने कहा, “मैं अलख जगाने आया हूँ। बेटी से शादी की और जमीन ले ली। एक से ज्यादा शादी क्यों? एक देश में दो विधान क्यों चले? नियम एक ही होना चाहिए। इसलिए अब देश भर में समान नागरिक संहिता लागू होना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि राज्य की भाजपा सरकार समान नागरिक संहिता के लिए एक कमिटी बना रही है। उन्होंने कहा कि अगर समान नागरिक संहिता में एक पत्नी का अधिकार है तो यह सबके लिए लागू होना चाहिए।

बता दें कि इससे पहले उत्तराखंड और गुजरात ने भी एक कमिटी की घोषणा की है। उत्तराखंड में तो इसका फाइनल ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। इसकी जानकारी प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने खुद दी थी।

वहीं, राज्य में वनवासी महिलाओं से दूसरी-तीसरी शादी और धर्मांतरण को रोकने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में PESA कानून लागू करने की घोषणा की थी। इसमें वनवासी समुदाय की ग्राम सभा को सशक्त बनाया गया है।

PESA कानून को लेकर मुख्यमंत्री चौहान ने कहा था, “कई बार धोखे से, छल-कपट से, हमारी जनजातीय बहनों-बेटियों को लालच देकर विवाह कर लिया जाता है, उनके नाम पर जमीन दे दी जाती है और वह जनजातीय भूमि कहलाती है। कभी-कभी धर्मांतरण का भी उपयोग किया जाता है। अब हम मध्य प्रदेश में ऐसा नहीं दिया जाएगा।”

क्या है समान नागरिक संहिता

समान नागरिक संहिता को सरल शब्दों में समझा जाए तो यह एक ऐसा कानून है, जो देश के हर समुदाय पर समुदाय लागू होता है। व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म का हो, जाति का हो या समुदाय का हो, उसके लिए एक ही कानून होगा। अंग्रेजों ने आपराधिक और राजस्व से जुड़े कानूनों को भारतीय दंड संहिता 1860 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872, भारतीय अनुबंध अधिनियम 1872, विशिष्ट राहत अधिनियम 1877 आदि के माध्यम से सब पर लागू किया, लेकिन शादी, विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति आदि से जुड़े मसलों को सभी धार्मिक समूहों के लिए उनकी मान्यताओं के आधार पर छोड़ दिया।

इन्हीं सिविल कानूनों को में से हिंदुओं वाले पर्सनल कानूनों को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने खत्म किया और मुस्लिमों को इससे अलग रखा। हिंदुओं की धार्मिक प्रथाओं के तहत जारी कानूनों को निरस्त कर हिंदू कोड बिल के जरिए हिंदू विवाह अधिनियम 1955, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956, हिंदू नाबालिग एवं अभिभावक अधिनियम 1956, हिंदू दत्तक ग्रहण और रखरखाव अधिनियम 1956 लागू कर दिया गया।

वहीं, मुस्लिमों के लिए उनके पर्सनल लॉ को बना रखा, जिसको लेकर विवाद जारी है। इसकी वजह से न्यायालयों में मुस्लिम आरोपितों या अभियोजकों के मामले में कुरान और इस्लामिक रीति-रिवाजों का हवाला सुनवाई के दौरान देना पड़ता है।

इन्हीं कानूनों को सभी धर्मों के लिए एक समान बनाने की जब माँग होती है तो मुस्लिम इसका विरोध करते हैं। मुस्लिमों का कहना है कि उनका कानून कुरान और हदीसों पर आधारित है, इसलिए वे इसकी को मानेंगे और उसमें किसी तरह के बदलाव का विरोध करेंगे। इन कानूनों में मुस्लिमों द्वारा चार शादियाँ करने की छूट सबसे बड़ा विवाद की वजह है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी समान नागरिक संहिता का खुलकर विरोध करता रहा है।

बिन बुलाए शादी में खाना खाने पहुँचा MBA छात्र, पकड़े जाने पर धुलवाए गए बर्तन: Video वायरल होने पर की कार्रवाई की माँग

भोपाल में एमबीए के एक छात्र का बर्तन धोते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वह बिना बुलाए एक शादी में दावत उड़ाने पहुँच गया था और पकड़ा गया। पकड़े जाने के बाद उसे बर्तन धोने की सजा दी गई। साथ ही उस छात्र से बातचीत करते हुए वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। वीडियो वायरल होने के बाद छात्र सामने आया है और उसने पुलिस से वीडियो वायरल करने वालों पर सख़्त कार्रवाई की माँग की है।

बिना बुलाए विवाह समारोह में पहुँच गया था सम्राट

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एमबीए कर रहा एक युवक शादी समारोह में पहुँच गया। बिन बुलाए मेहमान की तरह खाना खाने के लिए पहुँचे छात्र को लोगों ने पकड़ लिया। शादी में फ्री का खाना खाने के लिए उसे बर्तन धोने की सजा दी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है वीडियो में युवक बर्तन साफ करते दिख रहा है और उससे एक दूसरा व्यक्ति बातचीत भी कर रहा है। वीडियो में एमबीए छात्र अपना नाम सम्राट कुमार बता रहा है। जो जबलपुर का रहने वाला है।

बर्तन धोते छात्र का इंटरव्यू

वीडियो बनाने वाले ने छात्र का बर्तन धोते हुए ही इंटरव्यू किया। वीडियो बनाने वाला शख्स पूछता है कि दावत में कैसे आए थे? जवाब में छात्र कहता है कि ऐसे ही खाना खाने आ गए थे। पूछा गया कि किसी ने तुम्हें कहा था क्या ऐसा करने को, तो छात्र जवाब देता है कि नहीं। इस पर वीडियो बनाने वाला शख्स कहता है कि यह फ्री में खाना खाने की सजा है। बर्तन धोइए। जब यह पूछा गया कि कैसा लग रहा है तो प्लेट धोते हुए छात्र जवाब देता है कि फ्री में खाना खाया है तो कुछ तो करना ही पड़ेगा।

छात्र ने वीडियो बनाने और वायरल करने वालों के खिलाफ शिकायत की

वीडियो में हो रही बातचीत के आधार पर समझा जा सकता है कि युवक अच्छा खाना खाने के लिए भोपाल के एक भव्य शादी समारोह में पहुँचा था, लेकिन पकड़ा लिया गया। फिर उसके साथ गलत व्यवहार करते हुए उसका वीडियो भी बना लिया गया। वीडियो वायरल होने के बाद एमबीए स्टूडेंट सम्राट कुमार ने इसकी शिकायत पुलिस से की है। सम्राट ने पुलिस से वीडियो वायरल करने वालों पर कार्रवाई की माँग की है।

‘तुम्हारे बड़े होने का नहीं कर सकता इंतजार…’ : मिस मार्वेल के एक्टर पर नाबालिग के यौन शोषण का इल्जाम, पीड़िता ने कहा- ‘मुझको D*^k की फोटो भेजी’

डिज्नी प्लस हॉटस्टार की मशहूर वेब सीरीज मिस मार्वल में नजर आने वाले एक्टर मोहन कपूर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा है। पीड़िता का आरोप है कि जब वह 15 साल की थी, तब मोहन कपूर ने उसका यौन उत्पीड़न किया था। पीड़िता ने ट्विटर में अपनी #MeToo स्टोरी शेयर करते हुए मोहन कपूर से मुलाकात और यौन उत्पीड़न तथा आखिरी बार बातचीत के बारे में बताया है।

पीड़िता के पोस्ट का स्क्रीनशॉट

मोहन कपूर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली पीड़िता ने कई ट्वीट किए हैं। उसने पहले ट्वीट में कहा है, “जब मैं 14 साल की थी तो मैं इस सीरियल एक्ट्रेस की फैन थी और हम दोस्त बन गए। उस वक्त उनके पार्टनर रहे मोहन कपूर की भी मुझसे दोस्ती हो गई थी। मैं उन दोनों की बहुत इज्जत करती थी और उन्हें अपना दूसरे पैरेंट्स मानती थी। मैंने उन्हें अपनी स्ट्रेस से भरी जिंदगी के बारे में भी बताया था। लेकिन, मोहन कपूर ने मेरा फायदा उठाया।”

पीड़िता के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

पीड़िता ने अगले ट्वीट में लिखा, “हम लोग लगातार बातें कर रहे थे। लेकिन, फिर मुझे लगा कि वह मेरे साथ फ्लर्ट कर रहे हैं। जब, मैं जब 15 साल की थी तो मोहन कपूर ने मुझे अपने डि* की फोटो भेजी। वो लगातार मुझसे माफी माँग रहे थे और परेशान थे। मैंने उन्हें माफ कर दिया था, लेकिन उसके बाद उन्होंने मेरा शोषण करना शुरू कर दिया।”

अपने ट्वीट में पीड़िता ने यह भी कहा है, “उसने मुझसे कहा कि वह मुझसे प्यार करता है और शादी करना चाहता है। वह मेरे साथ बड़ों के जैसा व्यवहार करना चाहता था और वह मेरे बड़े होने का इंतजार नहीं कर सकता ताकि मैं उसके साथ सो सकूँ। तब, मुझे पता चला कि मोहन कपूर मुझे सेक्स के लिए तैयार कर रहे थे।”

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया “मोहन कपूर की पार्टनर (अब एक्स) जानती थी कि वह किस तरह का आदमी है। वह यह भी जानती थी कि वह मुझसे बात कर रहा था। जब मैं उससे व्यक्तिगत रूप से मिली, तो मैंने उसे वो सब कुछ बताया जो हो रहा था। एक साल बाद जब उसने मुझे मैनुपुलेट करना शुरू किया तो मैंने उससे बात करना बंद कर दिया। मैं इस स्थिति से बहुत उदास थी।”

पीड़िता के ट्वीट् का स्क्रीनशॉट

पीड़िता ने मोहन कपूर पर आरोप लगाते हुए अपने अगले ट्वीट में कहा है, “मैंने उनसे साल 2020 में आखिरी बार बात की थी। मैंने कहा था कि अब मैं यह सब और नहीं झेल सकती। मैं उम्मीद कर रही थी कि उसने मुझे जो ट्रॉमा दिया है उसके लिए वो माफी माँगेंगे और समझेंगे। लेकिन, उन्होंने कहा कि वो मुझ पर यकीन नहीं कर सकते। उन्हें, फिर से यकीन दिलाने का एक ही रास्ता है कि मैं उनसे वीडियो चैट करूँ और न्यूड फोटो भेजूँ। इसके बाद ही दोनों में दोस्ती होगी।”

एक्टर मोहन कपूर पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने वाली पीड़िता ने फिलहाल अपना ट्विटर अकाउंट प्राइवेट कर लिया है। हालाँकि, उसके ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। अब तक यह साफ नहीं हो सका है कि पीड़िता आखिर कौन है और वह मोहन कपूर की जिस एक्स के बारे में बात कर रही है वह कौन है। यह मामले में, अब तक मोहन कपूर की सफाई भी सामने नहीं आयी है।

NDTV और रवीश कुमारः अब वो फिरते हैं तन्हा लिए दिल को, एक जमाने में मिजाज उनका सर-ए-अर्श-ए-बरीं था

धनबाद रेलवे स्टेशन के बाहर रामचरितर की चाय की दुकान है। एनडीटीवी (NDTV) से मेरा पहला परिचय यहीं हुआ था। यह तब की बात है जब पत्रकारिता से अपना रिश्ता जुड़ा नहीं था। एनडीटीवी का 24 घंटे वाला टीवी चैनल बस शुरू ही होने वाला था। एनडीटीवी नामक टीवी चैनल के आगमन की मुनादी करता हुआ एक होर्डिंग रामचरितर की चाय की दुकान के सामने लगा था।

चाय पी रहे लोगों में आईएसएम धनबाद के एक प्रोफेसर भी थे। उन्होंने होर्डिंग पर लिखे ‘जुबां पर सच, दिल में इंडिया’ की मीमांसा से अपनी बात शुरू की। प्रणय रॉय वगैरह तक कई बातें बोली। सच कहूँ तो उस समय उन बातों से खुद को जुड़ा हुआ नहीं पा रहा था। क्योंकि न प्रणय रॉय को जानता था, न एनडीटीवी को। सालों बाद जब इसी धंधे में रच-बस गया तो एनडीटीवी, उसके टैग लाइन और प्रणय रॉय को लेकर उन प्रोफेसर साहब की कही हर बात से जुड़ता गया।

ऐसा नहीं है कि होर्डिंग दर्शन ने मुझे एनडीटीवी से जोड़ दिया। मैं एनडीटीवी से तब भी नहीं जुड़ा जब अचानक से एक दिन उसके स्टूडियो में एंट्री मिली गई। मैं दिल्ली एक शादी में शामिल होने आया था। मेरे गृह जिले मधुबनी के एक सीनियर उस समय दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ते थे। उनसे मिलने गया। उन्होंने बताया कि एनडीटीवी की गाड़ी आ रही है। कुछ लोगों को बतौर गेस्ट ले जाना है एनडीटीवी के एक कार्यक्रम में। कार्यक्रम का नाम था शायद ‘गुगली’। नवजोत सिंह सिद्धू उसमें बतौर एक्सपर्ट आते थे। एंकर कोई महिला थी, नाम याद नहीं। मैं भी उसी गाड़ी में सवार हो अर्चना कॉम्पलेक्स पहुँच गया। एक सवाल भी मिला था, एक्सपर्ट से पूछने को। लेकिन उस कार्यक्रम के बीच में ही कोई ब्रेकिंग न्यूज आ गई और उस दिन गुगली का वह एपिसोड पूरा नहीं हुआ। अपन न सवाल पूछ सके, न टीवी की स्क्रीन पर चेहरा जूम हो पाया।

समय बीतता गया। लक बाय चांस पत्रकारिता के ही धंधे में आ गया। प्रभात खबर धनबाद में काम करते हुए पहली बार एनडीटीवी से जुड़ा। एनडीटीवी के एक संपादक धनबाद आए। उन्हें झरिया में जमीन के नीचे लगी आग पर स्टोरी करनी थी। उसी सिलसिले में मुलाकात हुई। उन्होंने काफी सराहा। कहा कि यदि दिल्ली में काम करने का मूड बने तो आओ। नंबर, पता सब कुछ दिया। कुछ महीने बाद अपन दिल्ली पहुँच गए।

राजधानी एक्सप्रेस का वो सफर कल्पनाओं में कटा। कल्पनाओं में एनडीटीवी का स्टाफ बन गया। बीट भी खुद से ही तय कर लिया। दिल्ली पहुँच संपादक जी को कॉल किया और अर्चना कॉम्पलेक्स पहुँच गया। संपादक जी नहीं मिले। रिसेप्शन से ही एक सज्जन के पास भेज दिया गया। उन्होंने बात की और विदा कर दिया। उन सज्जन का कहना था कि NDTV में काम करने के लिए जो ‘योग्यता’ चाहिए वह मेरे पास नहीं है। आश्चर्यजनक तौर पर जिस बॉयोडाटा के आधार पर एनडीटीवी में खारिज हो गया था, बाद में उसी बॉयोडाटा ने उसी दिल्ली में दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आउटलुक जैसे मीडिया संस्थानों के दरवाजे खोले।

ऐसा नहीं है कि नौकरी नहीं मिलने के कारण मुझे एनडीटीवी से नफरत हुई। इससे भी नाराज नहीं हुआ कि बुलाकर भी धनबाद आने वाले उसके संपादक ने दिल्ली में मिलना उचित न समझा। मुझे एनडीटीवी से तब भी घिन न हुई, जब प्रभात खबर से ही इस संस्थान में पहुँचे एक शख्स ने यह कहा कि तुमने इंटरव्यू के दौरान एबीवीपी से अपने जुड़ाव के बारे में खुलकर क्यों बातें की। इससे मुझे घिन होनी भी नहीं चाहिए, क्योंकि एबीवीपी की पहचान से ही मुझे प्रभात खबर में नौकरी मिली थी।

दिल्ली की इस यात्रा ने मेरे भीतर एनडीटीवी के लिए प्रेम ही पैदा किया, क्योंकि मैं रवीश कुमार (Ravish Kumar) को जानने लगा। तब रवीश ब्लॉग लिखते थे। मुझे यह नहीं पता कि उस समय एनडीटीवी में उनकी क्या भूमिका थी। कुछ सालों बाद जब ‘रवीश की रिपोर्ट’ चली तो यह रिश्ता खत्म हो गया। दैनिक भास्कर में मेरे साथ काम करने वाले जानते हैं कि रवीश ने मुझे 2010 के आसपास एक दिन सोशल मीडिया पर ब्लॉक कर दिया। ऐसा नहीं कि मैंने उन्हें कोई अपशब्द कहे, जिसका वे अक्सर रोना रोते हैं। वजह केवल इतनी सी थी कि ‘रवीश की रिपोर्ट’ की सफलता के बाद भी उनको लेकर मेरी सोच नहीं बदली। आज पूरा देश उस सोच से अवगत है।

इन्हीं सालों में ये भी जाना कि मेरे बॉयोडाटा में जेएनयू नहीं था। आईआईएमसी नहीं था। लेफ्ट लॉबी की मुहर नहीं थी। सेटिंग वाले लिंक मेरे पास नहीं थे। वगैरह वगैरह। उन सज्जन ने सही कहा था कि एनडीटीवी में काम करने की मेरी ‘योग्यता’ नहीं थी। लेकिन इसका मुझे अफसोस नहीं है। मीडिया के जितने भी दुकान हैं वे इसी तरह चलते हैं। सबने अपनी अपनी तरफ से ‘विशिष्ट योग्यता’ तय कर रखी है।

कुल मिलाकर प्रणय रॉय का एनडीटीवी कोई पवित्र गाय नहीं था। न ही अकेला सूअर। जैसे धंधा चलाने के लिए मीडिया के अन्य दुकान विष्ठा में लेटते हैं, वैसा एनडीटीवी भी करता रहा। जैसे कर्मचारियों के चयन, उन्हें आगे बढ़ाने में विविध तरह की ‘योग्यता’ का ध्यान रखा जाता है, वैसा ही एनडीटीवी भी करता रहा। जैसे रवीश कुमार गए, पहले भी लोग जाते रहे हैं। आगे भी जाते रहेंगे।

एनडीटीवी और रवीश कुमार केवल इस मायने में अलग हैं कि वे विष्ठा को भस्म बताकर बेचते और खुद को बुद्धिजीवी बताते रहे। रवीश कुमार ने सच कहा है कि भारत में पत्रकारिता का कभी स्वर्ण युग नहीं रहा। पर यह भी उतना ही सच है कि स्वतंत्र भारत में परिवार की गोद में बैठ जाने वाली भारत की मुख्यधारा की मीडिया को सहलाने और चाटने की ‘योग्यता’ से विभूषित एनडीटीवी ने ही किया। इसी सहलाने और चाटने में रवीश कुमार यह भूल गए कि आलोचना और भौंकने में फर्क होता है। भौंकने से स्वर्ण युग नहीं आता, भस्म युग ही आता है, जिसमें खुद ही भस्मासुर होना पड़ता है।

भारत की पत्रकारिता को जिंदा रहने के लिए न तो एनडीटीवी की जरूरत है और न रवीश कुमार की। इसलिए लिबरल-सेकुलर विलाप में बहकर गले को गीला न करिए। कुछ करना है तो देखने-पढ़ने का नजरिया बदलिए। जब तक नजरिया नहीं बदलेंगे तब तक इसी तरह थेथरई को पत्रकारिता और थेथर को प्राइम टाइम एंकर बताकर ये मीडिया संस्थान आप पर थोपते रहेंगे।

‘जो कॉन्ग्रेस राम को नहीं मानती, उसने मुझे रावण कहा’: PM मोदी ने किया खड़गे के बयान पर पलटवार, बोले- जितना कीचड़ उछालोगे, उतना कमल खिलेगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार (01 दिसंबर,2022) को गुजरात के कलोल में चुनाव प्रचार करने पहुँचे। इस सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कॉन्ग्रेस पर जमकर निशाना साधा। प्रधानमंत्री मोदी ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के रावण वाले बयान का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस में मुझे गाली देने की होड़ लगी है। जितना कीचड़ उछाला जाएगा, उतना ज्यादा कमल खिलेगा।”

गुजरात ने मुझे जो ताकत दी है कॉन्ग्रेस उससे परेशान है- मोदी

पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष खड़गे के बयान को पूरे गुजरात का अपमान बताया। पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस रामभक्तों का सम्मान नहीं करती। न ही राम के अस्तित्व को मानती है। कॉन्ग्रेस अयोध्या में राममंदिर के पक्ष में भी नहीं थी। पीएम मोदी ने आगे कहा, “मैं कॉन्ग्रेस के नए अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का सम्मान करता हूँ। लेकिन वे मुझे 100 सिर वाला रावण बता रहे हैं।”

पीएम ने कहा, कॉन्ग्रेस पार्टी नहीं जानती कि ये रामभक्तों का गुजरात है। वे राम भक्तों की धरती पर रामभक्तों के सामने बोले कि मोदी के रावण की तरह 100 सिर हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “गुजरात ने मुझे जो ताकत दी है, वह कॉन्ग्रेस को परेशान करती है। पीएम मोदी ने इस बात पर हैरानी जताई कि उनपर निजी हमलों के बाद भी कॉन्ग्रेस के पदाधिकारी कोई पछतावा नहीं करते। पीएम ने कहा, कॉन्ग्रेस में एक परिवार को खुश करना फैशन बन गया है।

खड़गे ने क्या कहा था ?

इससे पहले 29 नवंबर, 2022 को गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान एक सभा को संबोधित करते हुए खड़गे ने पीएम मोदी के चेहरे पर बीजेपी के वोट माँगने को लेकर तंज किया था। खड़गे ने कहा था कि प्रधानमंत्री कहते हैं, मोदी को देखकर वोट दो। कितनी बार तुम्हारी सूरत देखें? हमने कॉर्पोरेशन चुनाव में तुम्हारी सूरत देखी। MLA चुनाव में, MP इलेक्शन में सूरत देखी। हर जगह पर, क्या रावण की तरह आपके 100 मुख हैं।

कॉन्ग्रेस को जनता देगी जवाब- अमित शाह

खड़गे के इस बयान के बाद से ही बीजेपी कॉन्ग्रेस पर हमलावर थी। उधर अहमदाबाद में चुनाव प्रचार करने पहुँचे गृह मंत्री अमित शाह ने भी खड़गे के बयान पर पलटवार किया है। अमित शाह ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने जब-जब प्रधानमंत्री मोदी का अपमान किया है, गुजरात की जनता ने वोट से जवाब दिया है। इस बार भी जनता कॉन्ग्रेस को जवाब देगी।

खून बहेगा… ब्राह्मणों वापस जाओ, भारत छोड़ो: JNU में वामपंथियों का आतंक, क्लास से लेकर प्रोफेसरों तक को धमकी

दिल्ली का जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर विवादों में है। विश्वविद्यालय परिसर में स्थित कई इमारतों की दीवारों पर विवादास्पद नारे लिखे गए। इसके साथ ही कुछ प्रोफेसरों के चैंबरों के गेट पर विश्वविद्यालय के बजाए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में जाने के लिए कहा गया है। इसका फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

छात्रों ने दावा किया कि विश्वविद्यालय परिसर के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज- II भवन की दीवारों पर ब्राह्मण और वैश्य समुदायों के खिलाफ नारे लिखे गए हैं। एक जगह लिखा है ‘ब्राह्मण-बनिया, हम आ रहे हैं बदला लेने’। एक जगह लिखा है ‘ब्राह्मण परिसर छोड़ो, ब्राह्मण भारत छोड़ो’। वहीं, एक जगह ‘अब खून बहेगा’ लिखा हुआ है।

वहीं, तीन प्रोफसरों के चैंबर के गेट पर ‘शाखा में जाओ’ लिखा गया है। इसको लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं, संघ से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने इसे वामपंथियों की बर्बरता बताया है।

JNU एबीवीपी के अध्यक्ष रोहित कुमार ने कहा, “एबीवीपी कम्युनिस्ट गुंडों द्वारा अकादमिक स्थानों में बड़े पैमाने पर जातिसूचक नारे लिखने की निंदा करता है। कम्युनिस्टों ने स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज- II बिल्डिंग में जेएनयू की दीवारों पर अपशब्द लिखे हैं। उन्होंने उन्हें डराने के लिए स्वतंत्र सोच वाले प्रोफेसरों के कक्षों को विरूपित किया है।”

रोहित कुमार ने कहा, “हमारा मानना है कि अकादमिक जगहों का इस्तेमाल बहस और चर्चा के लिए होना चाहिए, न कि समाज और छात्रों के समुदाय में जहर घोलने के लिए। यहाँ नफरत और गाली के लिए कोई स्थान नहीं है।”

रोहित कुमार ने कहा कि जिस महिला प्रोफेसर के गेट पर ‘गो बैक टू शाखा’ लिखा हुआ है, उन्हें साल 2019 में 3 दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया था। उन्होंने कहा कि आज जेएयू को हेट फैक्ट्री बना दिया गया है।