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ब्राजील से आए 6 दर्शकों ने मस्जिद जाने के बाद अपनाया इस्लाम, FIFA वर्ल्ड कप के बहाने क़तर में खूब चल रहा जिहाद: जाकिर नाइक भी मोर्चे पर

कतर में चल रहे फीफा वर्ल्ड कप (FIFA World Cup) के बीच एक ब्राजील परिवार (Brazilian Family) के धर्मांतरण की खबर सामने आई है। ‘द गार्जियन के सहयोगी’ माजिद फ्रीमैन ने बुधवार (23 नवंबर, 2022) को ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। सोशल मीडिया पर भी इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि इस्लाम (Islam) कबूल करने से पहले ब्राजील के परिवार के 6 सदस्य मस्जिद गए थे। इसमें तीन लड़कियाँ, 1 लड़का और उनके माता-पिता हैं।

वीडियो में आप देख सकते हैं कि एक मौलवी इन लोगों को इस्लाम कबूल करवाने के बाद उनसे पूछ रहा है कि अब आपको कैसा लग रहा है। इस दौरान परिवार के सदस्य पहले कुछ भी बोलने से बचते नजर आए, लेकिन मौलवी के बार-बार पूछने पर एक महिला ने कहा कि य​ह काफी ‘टचिंग’ (दिल को छू लेने वाला) है। तभी पीछे से आवाज आती है – वेरी नाइस (बहुत अच्छा)। इसके बाद परिवार के बच्चों से पूछा जाता है कि क्या आपको इस्लाम कबूल करने के लिए किसी ने फोर्स किया, तो वे ‘ना’ में अपना सिर हिला देते हैं।

इससे पहले माजिद ने मंगलवार (22 नवंबर, 2022) को ट्वीट कर दावा किया था कि कतर में वर्ल्ड कप देखने आए लोगों में से 500 लोगों ने इस्लाम में धर्म-परिवर्तन किया। अपने ट्वीट में उसने कहा था, “अल्लाहु अकबर! हमने सुना है कि कतर में हाल में 500 लोगों ने इस्लाम कबूल कर लिया।” फ्रीमैन ने मेक्सिकन व्यक्ति की वीडियो भी शेयर किया और दावा किया कि वो इस्लाम कबूल रहा है। उसने लिखा, “दुनिया भर के हजारों फैन यहाँ हैं। उन्हें भी इस्लाम की खूबसूरती देखने का मौका मिले और अल्लाह उन्हें दिशा दिखाए।”

बता दें कि भारत में मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद को बढ़ावा देने, अवैध धर्मांतरण सहित कई मामलों का वांछित भगोड़ा जाकिर नाइक भी FIFA वर्ल्ड कप के बीच कतर पहुँचा। जाकिर नाइक को कतर में इस्लाम का प्रचार करने वाले भाषण देने के लिए आमंत्रित किया गया था।

जामा मस्जिद में अकेली लड़कियों की एंट्री पर लगा बैन, चस्पाए गए पोस्टर्स: VHP ने कहा – मस्जिदों के दरवाजे पर लट्ठ लेकर खड़े हैं हलाला-तीन तलाक की वकालत करने वाले

देश की राजधानी दिल्ली में मौजूद जामा मस्जिद में लड़कियों के अकेले प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है। यह फरमान मस्जिद प्रशासन की तरफ से जारी किया गया है। इस आदेश की एक प्लेट बाकायदा मस्जिद की दीवार पर भी चस्पा कर दी गई है। विश्व हिन्दू परिषद प्रवक्ता ने मस्जिद प्रशासन के इस निर्णय की आलोचना की है। वहीं मस्जिद प्रशासन ने अपने फैसले को सही ठहराया है।

जामा मस्जिद दिल्ली के चाँदनी चौक इलाके में लाल किले के पास मौजूद है। लड़कियों के अकेले एंट्री न करने के आदेश मस्जिद के 3 तरफ से लगा दिए गए है। ये फरमान हिंदी के अलावा उर्दू में भी लिखे गए हैं। धातु की इन पट्टियों पर काले रंग से लिखा गया है, “जामा मस्जिद में लड़की या लड़कियों का अकेले दाखिल होना मना है।” यह आदेश दफ्तर जामा मस्जिद दिल्ली की तरफ से बताया गया है। इसमें ‘[email protected]’ नाम से एक ई मेल ID भी लिखी हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मस्जिद प्रशासन के इस फैसले की आलोचना हो रही है। मुस्लिम समाज की ही सामाजिक कार्यकर्ता शहनाज अफजल ने इस फरमान का खुला विरोध करते हुए इसे गैर-संवैधानिक बताया है। उन्होंने इसे बराबरी के हक के खिलाफ बताया है। शहनाज़ के मुताबिक, इस फैसले को कतई कबूल नहीं किया जाएगा क्योंकि ऐसे फरमान देने वाले लड़कियों के समानता के अधिकार को छीनना चाहते हैं।

VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने भी जामा मस्जिद प्रशासन के इस निर्णय का विरोध किया है। बंसल ने लिखा, “तीन तलाक, हलाला, हिजाब और काले बोरे में कैद रखने वाले जिहादी ठेकेदार मुस्लिम बेटियों को व्यभिचार के अड्डे बनते मदरसों में भेजने की तो वकालत करते हैं किन्तु मस्जिदों के गेट पर लट्ठ लेकर खड़े हो जाते हैं। उन्होंने आगे कहा, “भारत को सीरिया बनाने की मानसिकता पाले ये मुस्लिम कट्टरपंथी ईरान की घटनाओं से भी सबक नहीं ले रहे। ये भारत है, जहाँ की सरकार का ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, बेटी बढ़ाओ’ का नारा है और जामा मस्जिद में नारी निषेध है?”

ऑपइंडिया से बात करते हुए जामा मस्जिद प्रशासन के सदस्य सबीउल्लाह ने कहा कि केवल अकेली लड़कियों को ही मस्जिद में घुसने पर रोक है। उन्होंने कहा कि कई लड़कियाँ ऐसी भी हैं जो आती तो अकेले हैं, लेकिन पीछे से किसी और को बुला लेती हैं। सबीउल्लाह के अनुसार, परिवार के साथ आने वाली लड़कियों के लिए कोई रोक नहीं है। मस्जिद के कायदे और कानूनों का हवाला देते हुए उन्होंने इस खबर की पुष्टि करते हुए फैसले को सही ठहराया।

वो चुनाव आयुक्त, जो 90 के दशक में लालू यादव के सामने भी नहीं झुका: अब सुप्रीम कोर्ट ने भी माना लोहा, कहा – नियुक्ति समिति में CJI भी हों

देश के धाकड़ चुनाव आयुक्त रहे टीएन शेषन (T N Seshan) एक बार फिर से चर्चा में है। दरअसल, जस्टिस केएम जोसेफ की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संवैधानिक बेंच ने चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया चिंता जाहिर की है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टी एन शेषन का संदर्भ देते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ऐसे चरित्र का होना चाहिए, जो खुद को दबने नहीं दे।

पीठ ने कहा कि टी एन शेषन जैसा व्यक्ति कभी-कभी कभार ही होता है। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रणाली में सुधार की माँग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस केएम जोसेफ, अजय रस्तोगी, अनिरुद्ध बोस, हृषिकेश रॉय और सी टी रविकुमार की 5 सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि संविधान ने सीईसी (CEC) और चुनाव आयुक्त के ‘नाजुक कंधों’ पर विशाल शक्तियाँ डाल रखी हैं।

जस्टिस जोसेफ ने कहा, “योग्यता के अलावा, महत्वपूर्ण है कि आपको सख्त चरित्र वाले किसी व्यक्ति की आवश्यकता है, कोई ऐसा व्यक्ति जो खुद को दबने न दे। ऐसे में सवाल यह है कि इस व्यक्ति की नियुक्ति कौन करेगा? नियुक्ति समिति में मुख्य न्यायाधीश की उपस्थिति होने पर कम से कम दखल देने वाली व्यवस्था होगी। हमें लगता है कि उनकी मौजूदगी से ही संदेश जाएगा कि कोई गड़बड़ नहीं होगी। हमें सबसे अच्छा आदमी चाहिए और इस पर कोई मतभेद नहीं होना चाहिए।”

टी एन शेषन तमिलनाडु कैडर से 1955 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के ऑफिसर थे। टी एन शेषन ने भारत के 18वें कैबिनेट सचिव के रूप में 27 मार्च, 1989 तक सेवा दी। वो 12 दिसंबर 1990 से 11 दिसंबर, 1996 तक भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर रहे। इस दौरान उन्होंने चुनाव को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की कोशिश की थी।

टी एन शेषण को भारतीय चुनाव प्रक्रिया में सख्ती से सुधार लाने के लिए जाना जाता है। भारत में मतदाता पहचान पत्र की शुरुआत शेषन के द्वारा ही की गई थी। उन्होंने अपने कार्यकाल में बोगस वोटिंग और बूथ कैप्चरिंग पर भी लगाम लगाई थी। 80 के दशक में जब बिहार में लालू यादव की सरकार के साथ पश्चिम बंगाल में ज्योति बसु की मार्क्सवादी सरकारें काम कर रही थीं तो ये देखा गया था कि चुनाव के दौरान इन सरकारों की दंबंगई के आगे चुनाव आयोग भी कुछ नहीं कर पाता था।

इन राज्यों से बड़े पैमाने पर चुनाव के दौरान धाँधलियों की खबरें आती थीं। केंद्रीय बल उन दिनों चुनाव के दौरान तैनात नहीं होते थे। अगर होते भी थे तो बहुत छोटी संख्या में उनकी उपस्थिति होती थी। शेषण ने ही इसे देखते हुए मतदान के दौरान केंद्रीय बलों को तैनात करना शुरू किया था।

ज्यादा पानी पीने से भी जा सकती है जान: 39 साल बाद ब्रूस ली की मौत से उठा पर्दा, नहीं थी कोई बीमारी

मार्शल आर्ट के किंग कहे जाने वाले फइल्म अभिनेता ब्रूस ली (Bruce Lee) की सिर्फ 32 साल की उम्र में मौत हो गई थी। उनकी मौत की वजह क्या है, यह आज भी एक रहस्य है। हालाँकि, वैज्ञानिकों ने एक नए अध्ययन में दावा किया है कि ब्रूस ली मौत संभवत: बहुत ज्यादा पानी पीने की वजह से हुई थी।

बता दें कि ब्रूस ली की मौत 20 जुलाई 1973 में बेहद कम उम्र में हॉन्गकॉन्ग में हो गई थी। उनकी मौत सेरेब्रल एडिमा यानी ‘मस्तिष्क की सूजन’ की वजह से हुई थी। उस समय ना ही वो बीमार थे और ना ही उन्हें किसी प्रकार की तकलीफ थी। अचानक उनकी तबीयत खराब हुई और उनकी मौत हो गई।

ब्रूस ली की मौत के समय डॉक्टरों ने कहा था कि उन्होंने पेन किलर लिया था, जिसकी वजह से उनकी मस्तिष्क में सूजन पैदा हो गई थी। यही उनकी मौत का कारण बनी। हालाँकि, नए अध्ययन में मौत की वजह किडनी का खराब होना बताया गया है।

क्लिनिकल किडनी जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं में कहा है कि मस्तिष्क में सूजन के लिए हाइपोनेट्रेमिया जिम्मेदार था। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि ब्रूस ली की मौत इसलिए हुई, क्योंकि उनकी किडनियाँ खराब हो चुकी थीं और वह शरीर के अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने में सक्षम नहीं थीं।

रिसर्च में खुलसा

बहुत अधिक पानी पीने से शरीर का सोडियम लेवल कम हो जाता है और खून में इसकी मात्रा असंतुलित हो जाती हैं। इसके कारण शरीर में हाइपोनेट्रेमिया की स्थिति पैदा होती है। इसमें शरीर की कोशिकाएँ असंतुलन के कारण सूज जाती हैं। इससे विशेष रूप से मस्तिष्क प्रभावित होता है। रिसर्चर का मानना है कि ब्रूस ली में हाइपोनेट्रेमिया के लिए कई कारक मौजूद थे। वे अधिक मात्रा में पानी पीते थे और मारिजुआना का सेवन करते थे।

शोधकर्ताओं का कहना है कि अपनी मृत्यु के दिन ब्रूस ली ने बेट्टी टिंग पेई के घर जाने से पहले मारिजुआना का सेवन किया था और आगामी फिल्म के कुछ दृश्यों में सक्रिय रूप से अभिनय किया था। वह अपनी फिल्मों के निर्माता रेमंड चाउ के साथ थे। शाम करीब साढ़े सात बजे पानी पीने के बाद उन्हें सिरदर्द और चक्कर आने लगा और टिंग पेई ने उन्हें ‘इक्वेजेसिक’ गोली दी और आराम करने के लिए बेडरूम में चले गए, जहां रात 9:30 बजे उन्हें बेहोश पाया गया।

इसके बाद एक डॉक्टर को बुलाया गया, जिसने कार्डियोपल्मोनरी पुनर्जीवन तकनीक के जरिए उन्हें साँस देने की असफल कोशिश की। इसके बाद ब्रूस ली को नजदीकी अस्पताल भेजा गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उनके शव परीक्षण में बाहरी चोटों और जीभ के काटने के कोई संकेत नहीं मिले। शोधकर्ताओं ने कहा कि सेरेब्रल एडिमा के कारण उनके मस्तिष्क का वजन सामान्य 1400 ग्राम की तुलना में बढ़कर 1575 ग्राम हो गया था।

शोधकर्ताओं ने ली के चिकित्सा इतिहास के जिन अन्य कारकों को संभावित रूप से उनकी मौत के लिए प्रासंगिक माना है, उनमें भांग-चरस, शराब, भोजन का कम सेवन, नुस्खे वाली दवाएँ लेना, मूत्रवर्धक, ओपिओइड, गुर्दे की शिथिलता, अधिक व्यायाम और उनकी मृत्यु से दो महीने पहले सेरेब्रल एडिमा शामिल हैं।

ब्रूस की मौत की कई कहानियाँ

ब्रूस ली मौत को लेकर कई तरह की कहानियाँ प्रचलित हैं। कुछ लोगों का मानना है कि उनकी हत्या चीन के गैंगस्टर्स ने की थी। कुछ का मानना था कि उनकी मौत के पीछे ब्रूस ली की ही पूर्व प्रेमिका का हाथ था। कहा गया कि ब्रूस ली की पुरानी प्रेमिका ने उन्हें जहर दे दिया था। कुछ लोग मौत का कारण लू लगना भी मानते हैं।

ब्रूस ली के बारे में कहा जाता है कि वह अपनी डाइट में ज्यादा लिक्विड लेते थे। ब्रूस ली पर लिखी गई एक पुस्तक में इसका उल्लेख किया गया है। पुस्तक में कहा गया है कि जिस दिन उनकी मौत हुई, उस दिन वे बार-बार पानी पी रहे थे। ब्रूस की पत्नी लिंडा ने भी एक बार कहा था के वे गाजर और सेब का जूस खूब पीया करते थे।

ब्रूस ली का बचपन

ब्रूस ली का जन्म 27 नवम्बर 1940 को चीन के सैन फ्रांसिस्को के चायना-टाउन स्थित चीनी अस्पताल में हुआ था। उन्हें इतिहास का सबसे बेहतरीन मार्शल आर्टिस्ट कहा जाता है। ब्रूस ली का बचपन हॉन्गकॉन्ग में बीता था। वे बचपन में दूसरे बच्चों की पिटाई कर दिया करते थे। इससे नाराज लड़कों ने मिलकर एक ग्रुप बना लिया और हर रोज ब्रूस ली को पीटने लगे।

रोज-रोज पिटने और चोटिल होकर घर आने से उनकी माँ परेशान हो गईं। एक दिन उन्होंने ब्रूस ली को मार्शल आर्ट के महान ट्रेनर इप मान के पास ट्रेनिंग के लिए भेज दिया। उन्होंने मार्शल आर्ट्स की उन्हें खूब ट्रेनिंग दी। ट्रेनिंग खत्म होने के बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका चले गए। 

अमेरिका में ब्रूस ली

वहाँ ब्रूस ली ने 18 साल की उम्र में पहली बार कुंगफू सिखाना शुरू किया। हालाँकि, स्थानीय चीनी नागरिक इसका विरोध करते थे और गैर चीनी व्यक्ति को कुंगफू सीखाने को अपराध मानते थे। कुंगफू सिखाने से जो पैसे मिलते थे, उससे वे विश्वविद्यालय की पढ़ाई पूरी करते।

26 साल की उम्र में वे अमेरिकी टेलीविजन में मार्शल आर्ट फाइटर के रूप में उनका उदय हुआ। इसके बाद उनकी प्रसिद्धि फैलने लगी। आगे चलकर वे हॉलीवुड की फिल्मों में अभिनेता बन गए और कई शानदार फिल्मों में काम किया। उनकी फिल्मों लोगों को खूब पसंद आती थीं।

ब्रूस ली को लेकर उनकी बेटी शैनॉन ने एक इंटरव्यू में कहा था, “उन्होंने अपने जीवन में मार्शल आर्ट की अपनी अलग कला विकसित की थी। वे इसे जीत कुन डो कहते थे। वे खुद को अभिनेता या लेखक से पहले एक मार्शल आर्टिस्ट मानते थे।” एक रिपोर्ट के मुताबिक, मौत के पचास साल बाद भी ब्रूस ली का नाम एक साल में 50 लाख डॉलर का कारोबार करता है।

वही शैली, वही वेशभूषा… पंजाब में पैदा हो गया है दूसरा भिंडरावाले? तिरंगे का करता है अपमान, आज तक एक FIR नहीं: हथियार लहराने वाले सहयोगी पर दर्ज हुआ मामला

कट्टरपंथी अमृतपाल पाल सिंह के सहयोगी भगवंत सिंह उर्फ ‘प्रधानमंत्री बाजेके’ पर मोगा पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए केस दर्ज कर लिया है। बाजेके पर सोशल मीडिया पर हथियारों के प्रदर्शन के आरोप में एफआईआर दर्ज किया गया है। बाजेके गाँव का रहने वाला भगवंत सिंह खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह का करीबी है। उसे अक्सर विभिन्न कार्यक्रमों में अमृतपाल के साथ देखा जाता रहा है।

कौन है अमृतपाल सिंह?

अमृतसर के जलालपुर खेड़ा गाँव का रहने वाला अमृतपाल सिंह तब सुर्खियों में आया, जब उसने ‘वारिस पंजाब दे’ नाम के संगठन की बागडोर संभाली। वह सिर्फ 12वीं तक पढ़ा है। ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन अभिनेता और एक्टिविस्ट दीप सिद्धू ने शुरू किया था। संदीप सिंह उर्फ़ दीप सिद्धू वही था, जिसने 26 जनवरी, 2021 को लालकिले पर खालसा पंथ का झंडा फहराया था। इसके बाद देश भर में उसकी आलोचना हुई थी। पुलिस ने उसे गिरफ्तार भी किया था।

15 फ़रवरी, 2022 को एक सड़क हादसे में दीप सिद्धू की मौत हो गई थी। उसकी मौत के बाद ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन का मुखिया अमृतपाल सिंह को बनाया गया। लगभग दो महीने पहले 29 सितंबर को मोगा जिले में ही अलगाववादी जरनैल सिंह भिंडरावाले के गाँव रोडे में अमृतपाल सिंह की दस्तारबंदी (पगड़ी बाँधा जाना) हुई। इस समारोह में खुलकर ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ और ‘हमें क्या चाहिए-आजादी’ जैसे नारे लगाए गए। पगड़ी पहनते ही अमृतपाल सिंह ने मंच से ‘भविष्य की जंग’ शुरू करने की घोषणा की। वह खुलेआम खालिस्तान की माँग करने लगा।

अमृतपाल की भिंडरावाले से क्यों हो रही तुलना?

खालिस्तान समर्थक अमृत पाल सिंह और भिंडरवाला (फोटो साभार: ज़ी मीडिया)

अमृतपाल सिंह ने खालिस्तानी आतंकी भिंडरावाले को प्रेरणा बताते हुए उसके रास्ते पर चलने की बात कही थी। इतना ही नहीं, अमृतपाल की वेशभूषा भी खालिस्तानी आतंकी भिंडरावाले से मिलती-जुलती है। अमृतपाल, भिंडरावाले की शैली में ही हर संवेदनशील मुद्दे पर नौजवानों को उकसाने और अलगाववाद को हवा देने की कोशिश करता है। अमृतपाल न सिर्फ जंग, खालिस्तान, आजादी, कुर्बानी और मरजीवड़े (आत्मघाती दस्ते) की बातें कर रहा है, बल्कि कानून को चुनौती देते हुए पुलिस और अदालतों को छोड़कर पंथ के दोषियों को अपने दम पर दंडित करने जैसी बातें करता है।

अमृतपाल पर राज्य सरकार मौन

इतना ही नहीं, अमृतपाल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो अपलोड कर सरेआम राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करता है। वह कहता है, “तिरंगा हमारा झंडा नहीं है क्योंकि इस झंडे ने हमारे ऊपर बेइंतहा जुल्म किए… इसे बदल डालो… मिटा डालो।”

आश्चर्य इस बात पर है कि इतना सबकुछ होने के बाद भी इस पर एक एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई। लोगों को भड़काने वाले राष्ट्र विरोधी बातें करने वाले के अमृतपाल के खिलाफ पुलिस किसी भी सख्त कार्रवाई से कतरा रही है। राज्य के आम आदमी पार्टी की सरकार को भी अमृतपाल के उकसावे वाले भाषणों में भी कुछ गलत नहीं दिख रहा। मुख्यमंत्री भगवंत मान भी चुप हैं। अमृतपाल सिंह और उसकी संस्था ‘वारिस पंजाब दे’ की संदिग्ध गतिविधियों पर पंजाब पुलिस और राज्य सरकार का नरम रुख चिंताजनक है।

हिन्दूवादी नेता सुधीर सूरी की हत्या में अमृतपाल का नाम

पिछले दिनों अमृतसर में हुए हिन्दूवादी नेता सुधीर सूरी की हत्या मामले में भी अमृतपाल सिंह का हाथ बताया जा रहा है। सुधीर के बेटे ने अपने पिता की हत्या का जिम्मेदार अमृतपाल को ठहराया है। सूरी की हत्या के मामले में जिस आरोपित संदीप को गिरफ्तार किया गया है, उसे एक वीडियो में अमृतपाल सिंह के साथ देखा गया है। इतना ही नहीं, आरोपी की कार पर भी ‘वारिस पंजाब दे’ का स्टीकर लगा हुआ था। इसके बावजूद अमृतपाल के खिलाफ केस दर्ज करने की माँग को राज्य सरकार ने खारिज कर दिया था।

इससे तो यही संदेश जाता है कि आम आदमी पार्टी पंजाब में अलगाववादियों का मूक समर्थन कर रही है। पिछले कुछ महीनों में घटी कुछ घटनाएँ पंजाब में आतंकवाद के पुनर्जीवित होने का संकेत दे रही हैं। सबसे खतरनाक बात यह है कि इन संकेतों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

मंदिर के अंदर तोड़फोड़, मूर्तियों को पहुँचाया नुकसान: मेरठ पुलिस ने आरोपित को दबोचा, हिन्दू संगठनों का विरोध प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक मंदिर में घुस कर मूर्तियों को नुकसान पहुँचाया गया है। घटना से नाराज हिन्दू संगठनों ने प्रदर्शन किया है। पुलिस द्वारा नई मूर्तियों को लगवाए जाने की जानकारी मिली है। पुलिस द्वारा एक आरोपित को हिरासत में लेने की भी जानकारी सामने आ रही है। घटना बुधवार (23 नवम्बर 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना मेडिकल थाना क्षेत्र की है। यहाँ की चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी मार्ग पर स्थित अजंता कॉलोनी में शनि देव का एक मंदिर है। इस जगह आसपास के लोग पूजा करने आते हैं। 23 नवम्बर, 2022 को जब सुबह 6 बजे पुजारी मंदिर में पूजा करने पहुँचे तब वहाँ का सामान अस्त-व्यस्त पाया। बताया जा रहा है कि मंदिर के अंदर गणेश जी और शनिदेव के साथ अन्य मूर्तियों को भारी नुकसान पहुँचाया गया था। टूटी मूर्तियों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

घटना की जानकारी हिन्दू संगठन के सदस्यों को हुई तो वो भी मंदिर पहुँचने लगे। कुछ ही देर बाद मंदिर के आगे भीड़ जमा हो गई और आरोपितों पर कार्रवाई की माँग की जाने लगी। घटना की जानकारी पुलिस को हुई तो वो भी मौके पर पहुँची और नाराज लोगों को समझा-बुझा कर शाँत करने का प्रयास करने लगी। मेरठ के पुलिस अधीक्षक नगर पियूष सिंह ने नई मूर्तियों को लगवाने और 1 संदिग्ध के हिरासत में होने की जानकारी दी।

पियूष सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि आरोपित ने ऐसा नशे की हालत में किया है। उन्होंने बताया कि आरोपित पर FIR दर्ज कर के जाँच की जा रही है।

सत्येंद्र जैन का ‘तबरेज भाई’ कौन, जेल में मालिश करवाने में 20 थे बिहार वाले ‘तबरेज आलम’: जिनसे सीख सकती है केजरीवाल एंड मंडली

वे सबके तबरेज भाई थे। नाम था- तबरेज आलम। बिहार में विधायक थे। सचीमुची के नहीं। उस बिहार के जो प्रकाश झा ने ‘अपहरण’ नाम की सनिमा में दिखाया है। तबरेज भाई बने नाना पाटेकर का जेल में गजब जोगार था। अपने गुर्गों के लिए विशेष इंतजाम कराने में उनका जोर न था। दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन भले जेल में ‘मसाज’ लेते हों पर तबरेज भाई के गुर्गे जेल में ‘मालिश’ लेते थे।

फिल्म अपहरण में जेल के भीतर मालिश का दृश्य

लेते क्या थे। अधनंगे लेट बैरक में करवाते थे। पूरा तेल चपोर के। उनको वीडियो लीक होने का टेंशन भी न था। वैसे तबरेज भाई ‘मुँहचोर’ भी नहीं थे कि गुर्गों की मालिश को फिजियोथेरेपी बता दें। तबरेज भाई के गुर्गे की सेवा के लिए जेल में पट्ठों की भी कमी न थी। थोबड़े से ही हार्डकोर लगते थे। उन्हें ‘बलात्कारी’ को ‘फिजियोथेरेपिस्ट’ बताकर छिपाना भी न पड़ता था।

तिहाड़ में मसाज लेते सत्येंद्र जैन

बाबू रमाधीर सिंह का कहना है कि हिंदुस्तान में जब तक सनिमा है लोग चुतिया बनते रहेंगे। ऐसे ही तबरेज भाई से सीख आप चुतिया बना सकती है। कहते हैं कि ‘अपहरण’ उस इंडस्ट्री पर बनी है जो ‘सामाजिक न्याय के मसीहा’ वाले बिहार में एकमात्र फलता-फूलता उद्योग था। इस इंडस्ट्री की ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ अपने तबरेज भाई ही करते थे। ये तब की बात है जब मनी लॉन्ड्रिंग में सत्येंद्र जैन जेल न पहुँचे थे।

तबरेज भाई का जलवा ही कुछ ऐसा था। उनके गुर्गे जेल में थूक चटवाते थे। बैरक में बैठे-बैठे ‘प्रोटेक्शन मनी’ वसूलते थे। मजाल कोई सुकेश चंद्रशेखर कभी शिकायत कर दे। उनके गुर्गे को जब मन होता धोती-कुर्ता पहन जेल से बाहर निकल जाते। मम्मी कसम कभी तबरेज भाई को कहना न पड़ा- गया सिंह के लिए भाभी जी बहुत चिंतित हैं। तबरेज भाई ने कभी न कहा- भाभी जी, हम समझ सकते हैं… जब गया का काम हो गया तब भी नहीं। बस भाभी जी को गुजर-बसर के लिए ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ का सांत्वना दे आए।

वक्त बदला तो नए गुर्गे के लिए तबरेज भाई ने जेल में जिम तक जोगार दी। मजाल कोई बग्गा लिख दे कि जिम का सामान बाहर से आया है। तबरेज भाई के गुर्गे कभी ड्राई फ्रूट्स और सलाद के लिए भी न रोए। भई जो ‘प्रोटेक्शन मनी’ लेता हो वो काहे का रोए। जितने देर में रोएगा उतने देर में धोती-कुर्ता पहनकर मौर्या से खाकर लौट आएगा। इसलिए वो नौबत ही न आई कि तबरेज भाई के गुर्गों को यह कहना पड़े कि वजन कम हो गया है। आयरन और प्रोटीन की कमी हो रही है।

बताते हैं कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सनिमा प्रेमी हैं। उनके नंबर दो मनीष सिसोदिया भी। AAP के संस्थापक मालिक ​सनिमा का रिव्यू भी देते रहे हैं। सो, लगता नहीं उन्होंने ‘अपहरण’ मिस की होगी। शायद वर्ल्ड क्लास स्कूल और शराब पॉलिसी बनाने में पटकथा भेजे से फ्री बिजली-पानी की तरह निकल गई होगी।

तबरेज भाई मिसाल हैं। बिना सत्ता में रहते हुए भी जेल जोगार से चलाए जाने का। कोई शोर नहीं। यहाँ तिहाड़ अपनी ही सरकार की। फिर भी बिना तेल चपोरे मसाज पर इतनी थू-थू! वो भी तबरेज भाई वाली संभावनाओं से ओत-प्रोत ‘अमानतुल्लाह’ के रहते। लाहौल विला कूवत…

‘ISIS विचारधारा हो या जिहादी, देश की सुरक्षा के लिए खतरा बनने पर क्रूरता से कुचल दिया जाएगा’: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा- गुजरात में BJP अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़ेगी

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कहा कि साल 1990 के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) गुजरात में एक भी चुनाव नहीं हारी है। चाहे वह विधानसभा का चुनाव हो या लोकसभा का। इस बार भाजपा अब तक हासिल किए गए सीटों और वोट प्रतिशत के सारे रिकॉर्ड को तोड़ने जा रही है। उन्होंने कहा कि देश में आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बनने वाले किसी भी विचारधारा, चाहे वह ISIS हो या जिहादी, क्रूरता से कुचल दिया जाएगा।

आम आदमी पार्टी (AAP) को इस चुनाव में फैक्टर मानते हुए अमित शाह ने कहा कि त्रिकोणीय चुनाव गुजरात का स्वभाव नहीं है। उन्होंने कहा कि चिमनभाई पटेल, शंकर सिंह वाघेला और केशुभाई पटेल ने कोशिश की थी, लेकिन उन लोगों को अपनी-अपनी पार्टी को खत्म करना पड़ा। इसलिए इस चुनाव में AAP का नाम सिर्फ मीडिया में है, जमीनी स्तर पर नहीं।

गुजरात में कॉन्ग्रेस के कम होते जनाधार के कारण वैक्यूम को AAP द्वारा भरने के सवाल पर केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि यह भाजपा द्वारा भी भरा जा सकता है। उन्होंने कहा कि कई बार जनता सत्ताधारी पार्टी को और मजबूत करने की कोशिश करती है। गुजरात में भाजपा के मामले में ऐसा ही है।

रिपब्लिक न्यूज के संपादक अर्णव गोस्वामी के साथ बाचतीत में अमित शाह ने कहा, “गुजरात में कॉन्ग्रेस ही विपक्षी पार्टी है, AAP नहीं। उन्होंने कहा कि वे 47 विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्यक्ष रूप से शामिल रहे हैं, जमीन स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ संवाद किए हैं और इसमें स्पष्ट है कि मुकाबला कॉन्ग्रेस से है, लेकिन भारी जीत भाजपा की होने जा रही है।”

सीएम अरविंद केजरीवाल द्वारा भारतीय मुद्रा पर लक्ष्मी-गणेश की फोटो छापने की माँगकर हिंदुत्व कार्ड खेलने की कोशिश पर अमित शाह ने कहा, “गुजरात की जनता इतनी भोली नहीं है। राजनीति में हर व्यक्ति की विश्वसनीयता का अपना एक इतिहास होता है। आप किस तरह की बात करते हो, आपकी आइडियोलॉजी क्या है और उसका लक्ष्य क्या है?”

उन्होंने आगे कहा, “जैसे हमने भारतीय जनसंघ से लेकर भारतीय जनता पार्टी तक कहा कि हम धारा 370 हटाएँगे। एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चल सकते। हमने इसे करके दिखाया। हमन रामजन्मभूमि को लेकर कहा था कि हमारा मानना है कि रामजी का जन्म इसी स्थान पर हुआ था। जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सत्ता में आई और प्रधानमंत्री ने सारी समस्याओं को दूर कर भूमि पूजन और शिलान्यास किया तो जनता में एक विश्वास बना। तो इससे क्रेडेनशियल बनते हैं।”

तीन तलाक को लेकर उन्होंने कहा, “किसी भी पंथनिरपेक्ष देश में धर्म के आधार पर कानून नहीं होने चाहिए। इसलिए हमने तीन तलाक खत्म किए। तो हमने करके दिखाया। तो बोलने से पार्टी या व्यक्ति की विश्वसनीयता नहीं बनती, करने से बनती है। भाजपा के पास उसके कामों की पूँजी है।”

समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा, “हमने कहा था कि इस देश में समान नागरिक संहिता की पैरवी करेंगे और अगर हम पावर में आते हैं तो इसे लाएँगे। हमने 1950 में ये बात कही थी और आज भारत के तीन राज्यों ने इसके लिए पहल की है। कुछ ही दिनों में तीनों राज्यों में कॉमन सिविल दिखाई देगा।”

राज्यों के बजाए केंद्र में UCC लागू करने के सवाल पर गृहमंत्री ने कहा कि भाजपा का मुख्य उद्देश्य इसे बहस में लाना है। राज्य इसे लागू करते हैं तो इस पर बहस होगी। उन्होंने कहा कि भाजपा की आइडियोलॉजी के आधार पर इतना बड़ा फैसला लेने के बजाय अच्छा हो कि इस पर एक सार्वजनिक बहस हो। अन्य लोगों के विचारों का भी महत्व है और उस पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समय देखकर इस पर संसद में भी चर्चा होगी।

विनायक दामोदर सावरकर पर राहुल गाँधी के बयान को लेकर अमित शाह ने कहा कि एक देशभक्त के लिए इस तरह के विचार निंदनीय हैं। सावरकर ने सिर्फ देश के लिए सोचा और असीम यातनाएँ सहीं। उन्होंने कहा कि सावरकर ने बिना सोचे-समझे देश के लिए दरिया में छलाँग लगा दी। ऐसे व्यक्ति के लिए देश के साथ धोखेबाजी वाली बात कहना किसी भी व्यक्ति या पार्टी को शोभा नहीं देता।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर अमित शाह ने कहा कि आजाद भारत के इतिहास में उनसे अधिक लोकप्रिय प्रधानमंत्री आज तक नहीं हुआ। वे आज भी सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने कहा, “यूपी चुनाव के बाद प्रधानमंत्री दिल्ली जाते हैं और यूक्रेन और रूस के नेताओं से कहते हैं कि हमारे बच्चे फँसे हैं। अगर 2-3 घंटे के लिए युद्ध रोक दिया जाए तो हम अपने बच्चों को निकाल लेंगे और दोनों देश उनकी बात मान जाते हैं। आज उनसे ज्यादा प्रभावशाली नेता पूरे विश्व में कोई नहीं है।”

लाल बहादुर शास्त्री का उदाहरण देते हुए अमित शाह ने कहा, “हमने शास्त्री जी के आह्वान पर देश की जनता को चावल छोड़ने की बात सुनी थी। उनके बाद पहली बार कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर देश की 130 जनता अपने घरों में बंद रही।”

गुजरात के घटलोडिया सीट की रैली में बेट द्वारका के अवैध मजारों पर अपने दिए गए बयान को लेकर अमित शाह ने कहा, “बेट द्वारका देश के करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। माना जाता है कि जब द्वारका समुद्र में डूबी तो वहीं डूबी है। इसके तथ्य भी मिले हैं। वो एक जाँच का विषय है। देश में किसी भी जगह पर, खासकर सीमांत क्षेत्र में और दरियाई सीमा पर अवैध अतिक्रमण होता है तो वह देश के लिए खतरा है और वह अवैध अतिक्रमण धार्मिक आधार पर होता है तो और बड़ा खतरा है।”

आंतरिक सुरक्षा को लेकर उन्होंने कहा, “आंतरिक सुरक्षा का मुद्दा किसी भी राज्य के चुनाव के लिए महत्वपूर्ण है और गुजरात जैसे सीमांत राज्य के लिए और महत्वपूर्ण है। मैंने अपने युवा दिनों में देखा है कि जहाँ से पोरबंदर जिले की शुरुआत होती थी, वहाँ पर बोर्ड लिखा था- ‘यहाँ से पोरबंदर जिले की सीमा शुरू होती है, यहाँ से कानून-व्यवस्था की सीमा समाप्त होती है।’ गुजरात सरकार की वेबसाइट पर आज भी लिखा है कि 1984 में नोटिफिकेशन निकालकर कर पोरबंदर जेल बंद करनी पड़ी थी, क्योंकि वहाँ कंट्रोल नहीं हो पा रहा थ।”

उन्होंने आगे कहा, “पूरे सागर के किनारे स्मगलरों का अड्डा था। यहीं से मौत का सामान पूरे देश को जाता था। 2001 में नरेंद्र भाई के शासन के बाद वहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता। स्मगलिंग की एक्टिविटी बंद हो गई। जो गैंग्स बने थे, उन्हें दूरबीन लेकर भी आज आप ढूँढ नहीं सकते। 365 दिन में 250 दिन कर्फ्यू रहता था गुजरात में। सांप्रदायिक हिंसा होती रहती थी। आज 20 साल से किसी ने कर्फ्यू नहीं देखा है।”

देश में जिहादी गतिविधियों के जारी रहने को लेकर गृहमंत्री ने कहा कि आंतरिक सुरक्षा को लेकर सरकार की जीरो टोलरेेंस नीति है। उन्होंने कहा कि इसके लिए UAPA कानून में संशोधन लाकर उसे कठोर बनाया गया। NIA में संशोधन करके विदेशों तक उसकी जाँच का दायर बढ़ाया। संगठन के साथ-साथ व्यक्ति को भी टेररिस्ट घोषित करने का अधिकार NIA को दिया गया। NIA के दायरे को बढ़ाकर नारकोटिक्स और वामपंथी उग्रवादी तक ले गए।

अमित शाह ने कहा कि अब देश में साजिश करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि ISIS हो या जिहादी हो, अगर वे देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बनेंगी तो उन्हें क्रूरता के साथ कुचल दिया जाएगा। उन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बहुत समय के बाद आज देश अपनी संस्कृति के प्रति गौरवान्वित हो रहा है। इसके मूल में गुजरात की भाजपा की सरकार रही है।

जिस क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म पर मोदी घृणा के लिए जुटाए गए पैसे, वो फिर से सक्रिय: अबकी कॉन्ग्रेस नेता जिग्नेश मेवानी जुटा रहे फंड, उमर सिद्दीकी है CEO

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नफरत करने वाले कुछ लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म ‘Our Democracy’ फिर से ऑनलाइन है। इस बार कॉन्ग्रेस नेता जिग्नेश मेवानी अपने चुनाव प्रचार के लिए फंड जुटाने के लिए इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते देखे गए। मेवानी का कैंपेन 16 नवंबर को वेबसाइट पर शुरू किया गया था। कैंपेन की लॉचिंग पर मेवानी ने एक वीडियो जारी कर दावा किया, “विधायकों की खरीद-फरोख्त के दौर में एक ‘नॉन करप्ट’ विधायक होना आसान नहीं है। भाजपा जैसे बड़े दल के सामने लड़ना मेरे लिए चुनौती है।”

जिग्नेश ने लोगों से कहा, “अगर वे मुझे ईमानदार नेता मानते हैं। उन्हें लगता है कि मैं सच्चाई से काम रहा हूँ। संविधान में जिन मूल्यों की बात की गई है, उन मूल्यों को प्रोटेक्ट करने की लड़ाई लड़ रहा हूँ, तो प्लीज मेरे इस कैंपेन को सपोर्ट किजिए। इस कैंपेन के लिंक को तमाम व्हाट्सएप्प ग्रुप और जहाँ भी आपका संपर्क है, वहाँ शेयर किजिए। इस संदेश को ज्यादा से ज्यादा फैलाएँ। पिछली बार भी मैंने कहा था कि जनता का नेता जनता के चंदे से चुनाव लड़ेगा। आप सभी से हाथ जोड़कर विनती है प्लीज मेरा सहयोग करें।”

दिलचस्प बात यह है कि जिग्नेश ने लोगों से जिस व्हाट्सएप्प पर उनके कैंपेन का लिंक फैलाने का आग्रह किया, वह लंबे समय से इस प्लेटफॉर्म का मजाक उड़ाते आ रहे हैं। उन्होंने कई बार यह कहकर भाजपा समर्थकों का मजाक उड़ाया कि वे अपनी कई जानकारी ‘व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी’ से प्राप्त करते हैं। दरअसल, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर फैली फर्जी खबरों के लिए इस तरह के शब्द प्रयोग किए जाते हैं।

जिग्नेश ने लोगों से अपने कैंपेन का लिंक फैलाने के लिए व्हाट्सएप का उपयोग करने को कहा। (फोटो साभार: ट्विटर)

‘ऑवर डेमोक्रेसी’ पर जिग्नेश के कैंपेन का एक और दिलचस्प पहलू यह है कि इसमें उनके राजनीतिक दल का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। जबकि जिग्नेश वडगाम सीट से कॉन्ग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन प्रचार पेज पर कॉन्ग्रेस पार्टी का कोई जिक्र नहीं है। पिछली बार मेवानी ने कॉन्ग्रेस के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीता था। मालूम हो कि वडगाम से 2012 का चुनाव जीतने वाले कॉन्ग्रेस के पूर्व नेता मणिलाल वाघेला बीजेपी की टिकट पर मेवानी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।

ऑवर डेमोक्रेसी पर जिग्नेश के राजनीतिक दल का कोई उल्लेख नहीं (फोटो साभार: ourdemocracy.in)

मेवानी चुनाव लड़ने के लिए 40 लाख रुपए माँग रहे हैं। अब तक उन्होंने 7.20 लाख रुपए से ज्यादा का चंदा जुटा लिया है। इसे दिव्या गौर द्वारा शुरू किया गया, इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने तक कैंपेन के 713 से अधिक समर्थक थे। चंदा देने वालों में टॉप पर तीस्ता सीतलवाड़ नाम की एक दानदाता भी शामिल हैं, जिन्होंने 30,000 रुपए का चंदा दिया है। यह स्पष्ट नहीं है कि क्या यह वही सीतलवाड़ हैं, जिसे हाल ही में गुजरात पुलिस ने तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ साजिश रचने और गुजरात की छवि खराब करने के आरोप में गिरफ्तार किया है।

चंदा दान करने वाली की वास्तविक पहचान कर पाना संभव नहीं है। वेबसाइट को 2000 रुपए से अधिक के दान के लिए पैन कार्ड की आवश्यकता होती है।

तीस्ता सीतलवाड़ का नाम टॉप डोनर की लिस्ट में (फोटो साभार: ourdemocracy)

‘Our Democracy’ का विवादास्पद इतिहास

जनवरी 2022 में, ऑपइंडिया ने बताया था कि कैसे ‘Our Democracy’ वेबसाइट अचानक से ऑफलाइन हो गई थी। यहाँ पर तत्कालीन कॉन्ग्रेस समर्थक (अब टीएमसी नेता) साकेत गोखले, कॉन्ग्रेस नेता कन्हैया कुमार, आप नेता आतिशी और कई अन्य लोगों को जगह दी गई थी। मेवानी पहले भी इस मंच का इस्तेमाल कर चुके हैं। चूँकि, गोखले पूर्णकालिक नौकरी छोड़कर 10 रुपए खर्च करके आरटीआई डालने का काम करते थे, इसलिए उन्हें धन जुटाने के लिए क्राउडफंडिंग का सहारा लेना पड़ता था।

नवंबर 2019 में गोखले ने क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म का एक लिंक ट्वीट कर कहा था कि उन्होंने ‘बीजेपी/आरएसएस से लड़ने’ के लिए अपनी नौकरी छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने मोदी से नफरत करने लोगों से इकट्ठा होने और उन्हें पैसे देने का आग्रह किया था, ताकि वे इस लड़ाई के खर्चों का वहन कर सकें और इसके लिए उन्हें नौकरी ना करनी पड़े।

ऑपइंडिया ने क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म की गहराई से पड़ताल की तो कुछ और दिलचस्प कनेक्शन पाए। इस दौरान पता चला कि टाइम्स नाउ और WION जैसे चैनलों के साथ काम कर चुके एनडीटीवी के पूर्व पत्रकार बिलाल जैदी ने आनंद मंगनाले (Anand Mangnale) के साथ मिलकर 2017 में कथित स्वतंत्र पत्रकारों के लिए ऑनलाइन क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म ‘क्राउडन्यूजिंग’ की शुरुआत की थी।

हालाँकि, 2019 के आम चुनावों से ठीक पहले उन्होंने इस प्लेटफॉर्म का विस्तार करने का फैसला किया और इसे ‘ourdemocracy’ में बदल दिया। इस पर कन्हैया कुमार, आतिशी मार्लेना जैसे नेताओं और साकेत गोखले जैसे ‘बेरोजगार’ लोगों का स्वागत किया, जिन्होंने आरटीआई भरने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी थी। जब साकेत टीएमसी में शामिल हुए थे तब OurDemocracy प्लेटफॉर्म के को-फाउंडर ने उनकी सराहना की थी। इस साल जुलाई में Our Democracy की वापसी हुई। 4 जुलाई को, ट्विटर पर घोषणा की गई कि उन्हें एक नया सीईओ उमर सिद्दीकी मिल गया है।

फोटो साभार: Our Democracy

8 जुलाई को फिर से घोषणा की गई कि वेबसाइट एक बार फिर लाइव हो गई है। हालाँकि, तब से इस पर बेहद कम गतिविधि हुई थी। लेकिन 17 नवंबर, 2022 को इस मंच से जिग्नेश के समर्थन में वीडियो और कैम्पेन लिंक को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया गया।

फोटो साभार: Our Democracy

विशेष रूप से, बहुत कम गतिविधि वाले छह अन्य कैंपेन हैं। उनमें से एक पुराना कैंपेन है, जिसे इस साल सितंबर में बीबीएमपी चुनाव के लिए AAP उम्मीदवार सिंथिया स्टीफन के लिए शुरू किया गया था। बीबीएमपी चुनाव दिसंबर में होने हैं। सिंथिया स्टीफन ने खुद अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर अभियान का लिंक साझा नहीं किया है। लेकिन, उसने इसे एक बार अपने फेसबुक अकाउंट पर शेयर किया था। कैंपेन से 64,000 रुपए से अधिक चंदा जुटाया गया है।

फोटो साभार: सिंथिया स्टीफन का फेसबुक

बता दें कि इस मंच का उपयोग करने वाले अन्य प्रचारकों में AAP नेता हरगोवन देभी (25,000 रुपए से अधिक का चंदा), AAP नेता विपुल परमार (1,000 रुपए से अधिक का चंदा), AAP नेता आशु ठाकुर (49,000 रुपए से अधिक चंदा एकत्र किया), AAP नेता कैलाशदान गधवी (कुछ भी चंदा एकत्र नहीं) और AAP नेता बीना बालगुहर (5,000 रुपए से अधिक का चंदा एकत्र किया) हैं। पैसे जुटाने के मामले में इस प्लेटफॉर्म पर मेवानी का कैंपेन अब तक का सबसे सफल कैंपेन रहा है। पुराने कैंपेन का रिकॉर्ड इस वेबसाइट से हटा दिया गया है।

यूनुस ने नाबालिग हिन्दू लड़की को फोन-सिम गिफ्ट किया, फिर वीडियो कॉल पर प्राइवेट पार्ट दिखाने को मजबूर किया: कॉल रिकॉर्ड कर यौन शोषण, निकाह-धर्मांतरण के लिए धमकी

कर्नाटक के बेंगलुरु में एक मुस्लिम युवक पर एक नाबालिग हिन्दू लड़की के धर्मांतरण के दबाव और यौन शोषण का आरोप लगा है। आरोपित का नाम यूनुस पाशा है। बताया जा रहा है कि पाशा ने पीड़िता को वीडियो कॉल पर प्राइवेट पार्ट दिखाने के लिए भी मजबूर किया। पीड़िता के पिता की तहरीर पर यूनुस के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुतबिक, मामला नागमंगला टाउन का है। पीड़िता के पिता ने पुलिस को शिकायत देते हुए बताया कि 12 नवंबर को उनकी बेटी परेशान थी। इसकी वजह पूछने पर उसने यूनुस पाशा फयाज अहमद नाम के लड़के से अपनी बातचीत होने की जानकारी दी। पीड़िता ने बताया कि फयाज ने उसके पास एक स्मार्टफोन और सिम भिजवा कर वीडियो कॉल करने के लिए कहा था। इसी दौरान उसने पीड़िता से अपना प्राइवेट पार्ट भी दिखाने की जिद की थी, जिसे पीड़िता ने मान लिया था।

अपनी शिकायत में पीड़िता के पिता ने आगे बताया कि यूनुस पाशा ने उनकी बेटी की वीडियो कॉल भी रिकार्ड की है। बाद में वो पीड़िता को उसकी आपत्तिजनक तस्वीरों के सहारे ब्लैकमेल करने लगा। 10 नवंबर, 2022 को जब पीड़िता अपनी नानी के घर गई तब आरोपित ने उसे नींद की गोलियाँ दीं जिसे उसने घर के खाने में मिलाने के लिए कहा। इसी दौरान यूनुस ने पीड़िता का यौन शोषण किया। यह यौन शोषण पीड़िता के ही घर में हुआ। बाद में उसने पीड़िता से इस्लाम कबूल कर के खुद से निकाह करने का दबाव बनाया।

शिकायतकर्ता के अनुसार, इस दौरान आरोपित ने उनकी बेटी को धमकी दी थी कि उसने अगर इन घटनाओं के बारे में किसी को बताया तो उसे जान से मार डाला जाएगा। अपनी बेटी को बेहद डरी हुई बता कर पीड़िता के पिता ने पुलिस से आरोपित पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। इस शिकायत पर पुलिस ने यूनुस पाशा के खिलाफ ‘धर्मांतरण विरोधी अधिनियम’ और पॉक्सो की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है। आरोपित की तलाश की जा रही है।