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‘काशी और तमिलनाडु की संस्कृति-सभ्यता कालातीत’: वाराणसी में ‘काशी-तमिल संगमम्’ के उद्घाटन में मोदी-योगी, बोले PM- एक स्वयं में काशी तो तमिलनाडु में दक्षिण काशी है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने उत्तर भारत और दक्षिण भारत की संस्कृति को एकाकार करने के लिए बनाए गए काशी-तमिल संगमम् (Kashi-Tamil Sangamam) का वाराणसी में शुभारंभ किया। एक माह तक चलने वाले इस समारोह को BHU के एंफीथिएटर मैदान में आयोजित किया गया है। इस दौरान पीएम ने तमिल समेत 13 भाषा में लिखी गई धार्मिक पुस्तक तिरुक्कुरल और काशी-तमिल संस्कृति पर लिखी गईं पुस्तकों का विमोचन किया।

प्रधानमंत्री का संबोधन शुरू होने से पहले तमिल के प्रसिद्ध संगीतकार व राज्यसभा सांसद इळैयराजा और उनके शिष्यों ने साज-सज्जा के साथ ऊँ, गणेश, शिव, शक्ति, समेत अन्य देवगणों का मंत्र स्तुति के साथ आह्वान किया। इसके अलावा, मंच पर विशेष राग में शहनाई वादन भी हुआ। इस दौरान शहनाई वादक कासिम और बाबू संग तमिल के कलाकारों ने संगत की।

लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “एक ओर पूरे भारत को अपने आप में समेटे हमारी सांस्कृतिक राजधानी काशी है तो दूसरी ओर भारत की प्राचीनता और गौरव का केंद्र हमारा तमिलनाडु और तमिल संस्कृति है। ये संगम भी गंगा-यमुना के संगम जितना ही पवित्र है।” पीएम ने कहा कि काशी और तमिलनाडु दोनों शिवमय हैं, दोनों शक्तिमय हैं। एक स्वयं में काशी है तो तमिलनाडु में दक्षिण काशी है। काशी-काँची के रूप में दोनों की सप्तपुरियों में अपनी महत्ता है।

उन्होंने कहा, “हमें आजादी के बाद हजारों वर्षों की परंपरा और इस विरासत को मजबूत करना था, इस देश का एकता सूत्र बनाना था, लेकिन दुर्भाग्य से इसके लिए बहुत प्रयास नहीं किए गए। ‘काशी-तमिल संगमम्’ इस संकल्प के लिए एक प्लेटफॉर्म बनेगा और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए ऊर्जा देगा।”

पीएम ने कहा, “हमारे पास दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा तमिल है। आज तक ये भाषा उतनी ही लोकप्रिय है। ये हम 130 करोड़ देशवासियों की ज़िम्मेदारी है कि हमें तमिल की इस विरासत को बचाना भी है, उसे समृद्ध भी करना है। हमें अपनी संस्कृति, अध्यात्म का भी विकास करना है।”

उन्होंने कहा कि कि काशी और तमिलनाडु का प्राचीन काल से संबंध हैं। इसका प्रमाण काशी की गलियों में मिलेगा। यहां आपको तमिल संस्कृति के मंदिर मिलेंगे। हरिश्चंद्र घाट और केदार घाट पर 200 से ज्यादा वर्ष पुराना मंदिर है। काशी और तमिलनाडु दोनों ही संस्कृति और सभ्यता के कालातीत केंद्र हैं। 

प्रधानमंत्री ने कहा, “काशी और तमिलनाडु दोनों संगीत, साहित्य और कला के स्त्रोत हैं। काशी में बनारसी साड़ी मिलेगी तो कांचीपुरम का सिल्क पूरे विश्व में मशहूर है। तमिलनाडु संत तिरुवल्लुवर की पुण्य धरती है। दोनों ही जगह ऊर्जा और ज्ञान के केंद्र हैं। आज भी तमिल विवाह परंपरा में काशी यात्रा का जिक्र होता है। यह तमिलनाडु के दिलों में अविनाशी काशी के प्रति प्रेम है। यही एक भारत श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना है जो प्राचीन काल से अब तक अनवरत बरकरार है।”

इस दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने कहा कि तमिल भाषा का साहित्य अत्यंत प्राचीन और समृद्ध है। मान्यता है कि भगवान शंकर के मुँह से दो भाषाएँ निकली थीं, वे संस्कृत और तमिल थीं। उन्होंने कहा कि काशी और तमिलनाडु में भारतीय संस्कृति के सभी तत्व समान रूप से संरक्षित हैं।

काशी-तमिल संगमम्

काशी-तमिल संगमम् सनातन संस्कृति के दो केंद्रों का मिलन है। काशी और तमिलनाडु के वर्षों पुराने संबंधों को मजबूती देने के लिए शिक्षा मंत्रालय की ओर से इसे आयोजित किया गया है।इस समारोह में दोनों क्षेत्रों के धार्मिक, सांस्कृतिक और पौराणिक रिश्तों, परंपरा, खानपान, जीवनशैली पर आयोजित प्रदर्शनी व मेले का किया गया है।

इस मेले में हथकरघा व हस्तशिल्प के 10-10 स्टॉल लगाए गए हैं। तमिलनाडु से आए शिल्पियों ने थीम पवेलियन में अपने उत्पाद सजाए हैं। इसमें हथकरघा की 17 समितियों के स्टॉल लगे हैं। इसके अलावा अन्य उत्पादों की भी प्रदर्शनी लगाई गई है।

एक महीने के दौरान करीब 3 हजार तमिलभाषी लोग काशी आएँगे और अपनी तमिल संस्कृति को काशी के लोगों के साथ साझा करेंगे। हर 2 दिन पर 200 से 250 के लोगों का एक समूह वाराणसी आएगा। इसमें छात्र-छात्राएँ, उद्यमी, सामाजिक कार्यकर्ता, महिलाएँ आदि शामिल हैं। इस दौरान यहाँ पर कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। काशी तमिल संगमम् का नोडल अधिकारी स्टेट आर्कियोलॉजी विभाग के एक अधिकारी को बनाया गया है।

काशी का कन्‍याकुमारी से 2,000 साल से भी अधिक पुराना संबंध है। काशी में करीब 200 तमिल परिवार रहते हैं, जिनके दादा-परदादा आकर यहीं बस गए। इनमें तमिल के राष्‍ट्रकवि सुब्रह्मण्‍यम भारती के नाती 97 वर्षीय प्रोफेसर केवी कृष्‍णन भी हैं। राष्‍ट्रकवि ने 1898 में वाराणसी आकर चार साल पढ़ाई की थी।

तमिलनाडु के नाट्कोट्टई क्षेत्रम की ओर से काशी विश्‍वनाथ मंदिर में 210 वर्षों से निर्बाध 3 आरती की जाती है। आरती के लिए भस्‍मी और चंदन तमिलनाडु से ही मँगवाया जाता है। देश की आजादी से पहले 1926 में बनारस में दक्षिण भारतीय व्‍यंजन परोसने की शुरुआत अय्यर परिवार ने की थी।

के. वेंकटरमन्ना घनपति काशी विश्वनाथ मंदिर के पहले तमिल ट्रस्टी नियुक्त किए गए हैं। उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार ने मंदिर प्रशासन में नियुक्त किया है। इस आयोजनको गंगा-कावेरी का समागम कहा जा रहा है।

अब्बू के साथ दंगा करने वाले नाबालिग को ‘सो रहा बच्चा’ साबित करने में जुटा मीडिया गिरोह, भेजी गई है ₹2.9 लाख की देनदारी की नोटिस: बोले हिन्दू – हमारी संपत्ति अब भी भगवान भरोसे

मध्य प्रदेश का खरगोन 10 अप्रैल, 2022 को दंगों की आग तब झुलस गया था, जब रामनवमी के दिन श्रद्धालुओं पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने हमला कर दिया था। बड़ी चालाकी से इन दंगों का ठीकरा नूपुर शर्मा के बयान पर फोड़ दिया गया था। हिंसा में न सिर्फ हिन्दुओं के घरों और दुकानों को निशाना बनाया गया था, बल्कि पुलिस पर भी हमला हुआ था। दंगाइयों ने जिले के एसपी को गोली मार दी थी। हिंसा के बाद हुए नुकसान का आकलन करने के लिए सरकार ने रिटयर्ड जज की अध्यक्षता में एक ट्रिब्यूनल का गठन किया था।

इस ट्रिब्यूनल का गठन शासन द्वारा बनाए गए ‘प्रिवेंशन एन्ड रिकवरी ऑफ़ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट’ के तहत हुआ था। ट्रिब्यूनल में रिटायर्ड IAS सहित कई अन्य पूर्व सीनियर अधिकारी शामिल हैं।

इस ट्रिब्यूनल ने जाँच रिपोर्ट के आधार पर कई आरोपितों को हर्जाने और जुर्माने की नोटिसें भेजी हैं। उन्हीं नोटिसों में एक नोटिस को मीडिया के एक खास वर्ग द्वारा विवाद का मुद्दा बनाने की कोशिश की गई है। यह नोटिस एक 12 साल के नाबालिग को भेजी गई है। नाबालिग किशोर मुस्लिम समुदाय का है, जिसके अब्बा का नाम कालू खान है। ट्रिब्यूनल ने उस पर 2.9 लाख रुपए की देनदारी तय की है। ट्रिब्यूनल का मानना है कि आरोपित 12 वर्षीय किशोर हिंसा में सक्रिय रूप से शामिल था और उसने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाया।

कालू खान को भी 4.8 लाख रुपए देने के लिए कहा गया है, क्योंकि ट्रिब्यूनल का मानना है कि हिंसा में अब्बा और बेटे दोनों शामिल थे।

12 साल की उम्र बनी सुर्खियाँ

नोटिस जारी होने के थोड़े ही समय बाद 12 साल की उम्र कई मीडिया समूहों की सुर्खियाँ बन गईं। कई खबरों में हिंसा के आरोपित को ‘बच्चा’ शब्द से सम्बोधित किया गया।

खरगोन की घटना के बाद नोटिस पर मीडिया कवरेज

‘द वायर’ जैसे समूहों दंगाइयों को बचाने के लिए ने फैलाया प्रोपेगंडा

ट्रिब्यूनल के साथ खरगोन प्रशासन भी अपनी तमाम स्तरीय जाँचों के बाद हिंसा की भरपाई की नोटिसें भेज रहा था। इसके बाद भी ‘द वायर’ जैसे कुछ संस्थान हेडलाइनों में बच्चे के सोने जैसे हेडलाइन के साथ मैदान में उतर गए।

मीडिया ने कुछ यूँ दंगाइयों को बचाने की कोशिश की

हाईकोर्ट ठुकरा चुका है नोटिस रद्द करने की माँग

मीडिया रिपोर्ट्स में न्यायाधिकरण के सदस्य प्रभात परिसर का जिक्र है। उन्होंने बताया है कि आपराधिक मामलों में किशोर अथवा नाबालिगों को छूट मिलती है, लेकिन भरपाई का मामला दीवानी प्रवृत्ति का है न कि आपराधिक। पराशर का कहना है कि आरोपित के वकील बशर अली अभी तक उसे निर्दोष साबित करने योग्य तर्क या प्रमाण नहीं दे पाए हैं। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बशर अली नोटिस को रद्द करवाने के लिए इंदौर हाईकोर्ट गए थे लेकिन हाईकोर्ट ने उन्हें ट्रिब्यूनल के आगे अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया था।

ऑपइंडिया से बात करते हुए खरगोन के ADM ने बताया कि नुकसान काआकलन व वसूली गठित किए गए एक ट्रिब्यूनल द्वारा की जा रही है। उन्होंने बताया कि गठित ट्रिब्यूनल के मुखिया कोई प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि रिटायर्ड जज हैं। बकौल ADM, यह न्यायाधिकरण ठोस सबूतों के आधार पर कार्रवाई कर रहा।

प्रशासन नहीं, बल्कि पीड़ित की शिकायत पर हो रही कार्रवाई

खरगोन दंगों की जाँच व कार्रवाई के लिए गठित ट्रिब्यूनल के एक सदस्य ने ऑपइंडिया से बात की। सदस्य पूर्व सीनियर ब्यूरोक्रेट रह चुके हैं। उन्होंने हमें बताया कि मीडिया में जिस नोटिस की चर्चा हो रही, वो पहली नोटिस है, न कि इसे अंतिम फैसले के तौर पर सुना दिया गया है। इसी के साथ सदस्य ने बताया कि भरपाई की जो नोटिस जारी भी हुई है, वो ट्रिब्यूनल के या किसी प्रशासनिक अधिकारी द्वारा नहीं बल्कि हिंसा के एक पीड़ित की शिकायत पर जारी हुई है।

ट्रिब्यूनल मेंबर ने हमें आगे बताया कि नोटिस भेज कर आरोपितों को उनका पक्ष रखने का मौक़ा और समय दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि इसे तुरंत पैसा जमा करने का आदेश समझा जा रहा तो वो गलत है। बकौल ट्रिब्यूनल सदस्य, 12 साल के आरोपित के परिजनों ने अपना पक्ष न्यायाधिकरण के पास जमा करा दिया है, जिस पर एक साथ अन्य सदस्यों के साथ अंतिम फैसला जल्द लिया जाएगा।

आपराधिक मामलों में छूट पर नुकसान की भरपाई में परिजनों की जिम्मेदारी

अपना नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर ट्रिब्यूनल मेंबर ने हमें आगे बताया कि कानून आपराधिक मामलों में नाबालिग को छूट देता है, लेकिन हुए नुकसान की भरपाई भी जरूरी है। उन्होंने हमें बताया कि नाबालिग के परिजनों को भी इसकी सूचना से एक साथ अवगत करवाया गया है। बकौल मेंबर, इस हिंसा में कुछ नाबालिगों ने सक्रिय भागीदारी निभाई थी। अंत में हमें बताया गया कि किसी के भी साथ अन्याय नहीं हो रहा और ट्रिब्यूनल की कार्रवाई न्यायसंगत चल रही है।

खरगोन के VHP (विश्व हिन्दू परिषद) नेता विवेक ने ऑपइंडिया से बात की। विवेक ने हमें बताया कि ट्रिब्यूनल और प्रशासन की दंगाइयों पर हो रही कार्रवाई से न सिर्फ दंगा पीड़ित बल्कि खरगोन का बहुसंख्यक समाज संतुष्ट है। नाबालिग के मुद्दे पर विवेक ने हमें बताया कि हिंसा में हिन्दुओं के घरों और दुकानों को निशाना बनाने वालों में कई नाबालिग शामिल थे। VHP नेता ने प्रशासन से भी निष्पक्ष और बिना किसी दबाव में कार्रवाई जारी रखने की अपेक्षा जताई।

दुकान लूटने वालों में कई नाबालिग

खरगोन हिंसा में अपने लगभग 25 लाख रुपए लुट जाने का आरोप लगाते हुए राजू उर्फ़ राजेश टेलर ने हमें बताया कि उनकी दुकान को लूट कर बचे माल को जला दिया गया था। राजेश ने आगे बताया कि इस लूटपाट को करने वालों में कई नाबालिग थे जिनके चेहरे CCTV फुटेज में कैद भी हुए थे। आरोपितों से वसूली की कार्रवाई का पूरा समर्थन करते हुए राजेश ने बताया कि ट्रिब्यूनल और प्रशासन की सक्रियता से अब तक उनके कुल नुकसान में से लगभग ढाई लाख (2.5 लाख) रुपए उन्हें मिले हैं।

अपने दावों की प्रमाणिकता के तौर पर राजेश ने हमें हिंसा की कुछ वीडियो फुटेज और तस्वीरें भेजीं हैं। फुटेज में भीषण पथराव के बीच कुछ नाबालिगों को हिंसा में सक्रिय देखा जा सकता है, जिनके हाथों में पत्थर दिखाई दे रहे हैं।

हाथों में पत्थर ले कर खड़ा एक कथित नाबालिग

हालाँकि, प्रशासन द्वारा मिले सहयोग को नाकाफी बताते हुए राजेश ने हमें बताया कि वो फिर से अपने बिखरे हुए व्यापार को खड़ा करने की भरसक कोशिश कर रहे हैं। जब हमने राजेश से सवाल किया कि क्या इस बार उन्होंने अपनी दुकान की सुरक्षा के कोई अतिरिक्त इंतजाम किए हैं तो उन्होंने कहा कि उनकी ही नहीं बल्कि दंगाइयों से पूरे हिन्दू समाज की सुरक्षा ही भगवान के भरोसे है।

तौकीर ने खुद को राजपूत बता कर गरीब हिन्दू युवती को फाँसा, शादी के बाद राज़ खुलने पर कहा – अब मुस्लिम बनो: पूजा की जगह नमाज का दबाव, घर से भागी पीड़िता

देश में ‘लव जिहाद’ के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। बिहार के कटिहार में हिन्दू नाम बताकर एक मुस्लिम लड़के ने हिन्दू लड़की से शादी कर ली और अब धर्म-परिवर्तन के लिए उस पर दबाव बना रहा है। शुक्रवार (18 नवंबर, 2022) को पीड़ित महिला न्याय माँगने के लिए जब कटिहार न्यायालय पहुँची, तब जाकर ये घटना सामने आई। ‘लव जिहाद’ की यह घटना कटिहार के मनिहारी की है।

पीड़िता की मानें तो तौकीर आलम नाम के शख्स ने ‘राज राजपूत’ बन कर फेसबुक पर हिन्दू लड़की से दोस्ती की। इसके बाद मोबाइल नंबर एक्सचेंज हुए और दोनों में बातचीत होने लगी। फिर तौकीर जूली से मिलने भी आया। तौकीर ने अपने पिता का नाम ‘अमित सिंह’ बताया था और कहा था कि उसका परिवार दिल्ली में रहता है। लड़की के पिता नहीं हैं, जबकि माँ सब्जी बेचती है। गरीबी के कारण जूली ने तौकी से कोर्ट में शादी की।

शादी के बाद युवती ने ससुराल जाने और परिवार के बाकी सदस्यों से मिलने की जिद की। इस पर पहले तो तौकीर टालमटोल करता रहा, फिर वह उसे अपनी बहन के घर सुपौल ले गया। जूली के मुताबिक, उसकी बहन और आसपास के लोगों का रहन-सहन व खानपान अजीब लगा। फिर जूली को सच्चाई का एहसास हो गया। पुष्टि के लिए जूली ने आसपास पूछताछ की तो पता चला उसका असली नाम तौकीर आलम है और उसके पिता का नाम मोहम्मद नासिर है।

सच्चाई जानने के बाद पीड़िता जूली के पैरों तले जमीन खिसक गई। फिर उसे यह भी पता चला कि तौकीर पहले से शादीशुदा भी है और उसकी 11 साल की एक बेटी भी है।

नमाज पढ़ने के लिए कहा जाने लगा

युवती का आरोप है कि सच्चाई पता चलने के बाद जब उसने तौकीर को छोड़ने की बात की, तब आरोपित ने जान से मारने की धमकी दी। तौकीर और उसके परिवार के लोग धर्म-परिवर्तन का दबाव बनाने लगे। जूली ने बताया कि तौफीक उस पर अक्सर धर्म बदलने का दबाव डालता और मारपीट करता। वह उसे पूजा-पाठ करने से मना करने लगा और नमाज पढ़ने के लिए कहने लगा। पीड़िता को मुस्लिम महिलाओं की तरह ही कपड़े पहनने के लिए कहा जाने लगा।

हिम्मत दिखाकर जूली घर से फरार हो गई और पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई। जूली अपने परिजनों के पास कटिहार स्थित अपने घर वापस आ गई है। जूली ने तलाक के लिए गुहार लगाने के साथ ही आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिए जाने की माँग की है। आपको बता दें तौकीर सुपौल का रहने वाला है और दुबई में नौकरी करता है। पूरे मामले पर पुलिस का कहना है कि मामला दर्ज किया जा चुका है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

‘आपके पास आधार कार्ड है तो आपको भी मोदी सरकार से मिलेगा ₹4.78 लाख का लोन’: सोशल मीडिया पर दावा, PIB ने बताया क्या है सच

सोशल मीडिया पर आए दिन अलग-अलग तरह के दावे देखने को मिलते रहते हैं। ऐसा ही एक दावा सरकार द्वारा दिए जा रहे लोन के लिए किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार आधार कार्ड होल्डर्स को 4.78 लाख रुपए का लोन दे रही है। वायरल पोस्ट की जाँच करते हुए भारत सरकार की नोडल एजेंसी PIB ने इसे फर्जी करार दिया है।

दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल मैसेज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो और आधार कार्ड के लोगो के साथ बनी एक तस्वीर वायरल की जा रही है। इस फोटो में लिखा हुआ है, “सरकार दे रही है सभी आधार वालों को 4,78,000 रुपए का लोन।”

इस वायरल मैसेज की सच्चाई पता करने के लिए केंद्र सरकार की नोडल एजेंसी ‘प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB)’ ने इसका फैक्ट चेक किया है। इस फैक्ट चेक में पीआईबी (PIB Fact Check) ने पाया कि सोशल मीडिया पर किया जा रहा यह दावा पूरी तरह से भ्रामक है और इसमें किसी तरह की सच्चाई नहीं हैं।

इस बारे में पीआईबी फैक्ट चेक ने ट्वीट कर कहा है, “दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार सभी आधार कार्ड होल्डर्स को 4,78,000 रुपए का लोन उपलब्ध करा रही है। यह दावा फर्जी है। ऐसे मैसेज को फॉरवर्ड ना करें। कभी भी अपना निजी या बैंकिंग डिटेल किसी के साथ शेयर न करें।” बता दें कि ऐसा ही एक मैसेज इसी साल जुलाई-अगस्त के मध्य में भी वायरल हो रहा था, तब भी PIB फैक्ट चेक ने ऐसा ही ट्वीट कर लोन वाले दावे को फर्जी करार दिया था।

गौरतलब है, साइबर अपराध (फ्रॉड) करने वाले लोग सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों, खासतौर से व्हाट्सएप्प के जरिए इस तरह के ऑफर्स देते हैं। ऐसा इसीलिए किया जाता है, ताकि लोग लोन के झाँसे में आकर अपनी बैंक डिटेल, ओटीपी इत्यादि उनके साथ शेयर कर दें। ऐसा देखा गया है कि लोग ऐसे मैसेज देखने के बाद जानकारी शेयर कर देते हैं और फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं।

यही नहीं, कई बार लोग लोन के ऐसे दावों के साथ भेजे गए लिंक्स पर क्लिक करके आपनी निजी और बैंकिंग डिटेल्स शेयर कर देते हैं। इसके बाद, फ्रॉड उनके बैंक अकाउंट से पैसे निकाल लेते हैं। यही कारण है कि PIB फैक्ट चेक ने ऐसे फर्जी दावों की जाँच करते हुए कहा है कि इस तरह के ऑफर्स के झाँसे में आकर बैंकिंग डिटेल्स किसी के साथ शेयर न करें।

कभी भी मेरी हत्या… शराबी बॉयफ्रेंड से मार खाने वाली अभिनेत्री का छलका दर्द, कहा – मेरा हाल भी श्रद्धा जैसा, एक्टर के साथ लिव-इन में थी

आफताब के साथ लिव-इन में रहने वाली श्रद्धा वॉकर (Shraddha Walker) की निर्मम हत्या ने देश को झकझोर दिया है। इस बीच टीवी ऐक्ट्रेस कनिष्का सोनी (Kanishka Soni) ने अपने रिलेशनशिप के बारे में बात कही। उन्होंने नाम लिए बिना एक ऐक्टर पर गंभीर आरोप लगाया और कहा कि वह श्रद्धा वाली घटना से खुद को रिलेट कर रही हैं।

हाल ही में खुद से शादी करके चर्चा में आईं टीवी सीरियल ‘दीया और बाती हम’ अभिनेत्री कनिष्का ने रोते हुए एक वीडियो शेयर किया है और श्रद्धा की मौत पर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि इस घटना वे खुद को रिलेट कर पा रही हैं, क्योंकि उन्हें भी एक ऐक्टर ने प्रपोज किया था।

कनिष्का ने बताया कि वह ऐक्टर उनसे शादी करना चाहता था, लेकिन उसकी आदतें बहुत खराब थीं। वह हिंसक प्रवृत्ति का व्यक्ति था। वह शराब पीता था और उसे एंगर इश्यूज था। इसके बावजूद उन्होंने उसके साथ रहने का फैसला किया, क्योंकि उन्हें लगा कि एक्टर में समय के साथ बदलाव आ जाएगा।

अभिनेत्री ने कहा, “वो मुझसे लिव इन रिलेशनशिप में रहने के लिए कहा करता था। हालाँकि, मैं जिस जगह से आती हूँ, वहाँ इसकी इजाजत नहीं है और मैं खुद कभी लिव-इन रिलेशनशिप के फेवर में नहीं रही हूँ।” कनिष्का ने कहा कि शादी को लेकर ऐक्टर के साथ ज्यादा समय बीताने लगी। 

कनिष्का ने आगे कहा, “मुझे लगता था हम शादी करेंगे, जिसके चलते मैं ज्यादातर वक्त उसके घर पर रहती थी। एक दिन जब मैंने उससे पूछा कि हम शादी कब कर रहे हैं। मैं उसके साथ इसलिए ही रह रही थी, क्योंकि उसने कहा था कि जल्द ही शादी करेंगे।”

कनिष्का ने बताया, “मेरे शादी के सवाल पर ही उसे गुस्सा आ गया और उस रात उसने मुझे बहुत मारा था। उस वक्त मेरे अंदर यह डर बैठ गया था कि वो मुझे कभी भी मार सकता है। मैं उसी रात उसके घर से अपना कुछ सामान लेकर भाग निकली थी। प्यार में मैंने लड़कों का केवल यही हिंसक रूप देखा है।”

एक्ट्रेस का कहना है कि ऐसी भयावह मानसिकता वाले इंसान से शादी कर रहने से तो बेहतर है कि लड़कियाँ अकेले रहकर अपनी जिंदगी संवारें। उन्होंने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कहा कि आज भले ही माहौल बदल गया हो, किसी भी लड़की को लड़के के बारे में पूरी जानकारी लिए बिना इसके बारे में निर्णय नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हमारे देश में लड़कियाँ लिव-इन रिलेशनशिप में इसलिए जाती हैं, क्योंकि उन्हें उस इंसान के साथ जिंदगी बितानी होती है। वो सिर्फ टाइम पास करने के लिए लिव-इन में रहने जैसा बड़ा डिसीजन नहीं लेंगी।” उन्होंने इस मामले में फिल्म इंडस्ट्री पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर फिल्म स्टार अपना मुँह नहीं खोल रहे हैं, यह बहुत शॉकिंग है।

इससे पहले एक इंटरव्यू के दौरान कनिष्का ने कहा था कि रिलेशनशिप को लेकर उनके अनुभव ज्‍यादातर बुरे ही रहे हैं। उन्‍होंने कहा था, “जब मैं मुंबई आई तो कई लड़कों ने मुझे प्रपोज किया। मैंने 1200-1300 प्रपोजल रिजेक्‍ट किया है। एक बहुत ही पॉपुलर एक्‍टर ने भी शादी के लिए प्रपोज किया था, मगर सिर्फ दो महीने में ही उसका असली चेहरा सामने आ गया। वह बहुत ही हिंसक था। मैं नाम नहीं लूँगी, क्‍योंकि इससे विवाद खड़ा हो जाएगा।”

कनिष्का ने MeToo में फँसे साजिद खान पर भी आरोप लगाया था। कनिष्का सोनी ने साल 2008 में साजिद खान ने उन्हें अपने घर बुलाया था। उन्होंने कहा था कि वो अपनी माँ के साथ रहते हैं, इसलिए डरने की जरूरत नहीं है। इसके बाद वह साजिद खान के घर गईं।

कनिष्का ने आगे बताया कि जब वह साजिद खान (Sajid Khan) के घर पहुँची तो साजिद ने उनकी फिगर देखी और कहा कि ये अच्छा है। वो उस समय अपने बिस्तर पर आराम से बैठे हुए थे। उन्होंने इसके बाद उनका पेट देखने की डिमांड कर डाली। बकौल कनिष्का, उन्हें इन चीजों की आदत नहीं थी और साड़ी के अंदर से भी उनका पेट दिख जाता था तो वो असहज हो जाती थीं। उन्होंने साजिद खान से मना कर दिया। फिर साजिद खान ने उनकी पोर्टफोलियो बंद कर के कहा कि वो उन्हें फिल्म में नहीं ले सकते।

बता दें कि कनिष्का सोनी ने हाल ही में खुद से शादी की थी। इस दौरान उन्होंने खुद अपनी माँग भरी और सिंदूर लगाया है। यानी कि उन्होंने सोलोगामी मैरिज की है। इस पर कनिष्का ने 16 अगस्त को अपने इंस्टाग्राम पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने कहा था, मैंने खुद से शादी की है क्योंकि मैंने अपने सभी सपनों को पूरा किया है और मैं एकमात्र व्यक्ति हूँ जिसे मैं प्यार करती हूँ। मुझे कभी कोई आदमी नहीं चाहिए- ये जवाब उन सारे सवालों के लिए है जो मुझसे पूछे जा रहे हैं। मैं अकेले और अपने गिटार के साथ खुश हूँ। मैं देवी हूँ, मजबूत हूँ और शक्तिशाली हूँ, शिव और शक्ति मेरे अंदर सब कुछ है। धन्यवाद।

सामूहिक ईसाई धर्मांतरण के मामले में टेरर फंडिंग की आशंका: ATS की रडार पर एक स्कूल भी, खँगाले जा रहे 36 आरोपितों के बैंक खाते

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में हुए सामूहिक धर्मांतरण के एक मामले में विगत सप्ताह 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में पहले भी गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं। हालाँकि, अब उत्तर प्रदेश की आतंकवाद निरोधी शाखा (ATS) की भी इस मामले में इंट्री हो चुकी है। एटीएस को शक है कि धर्मांतरण के लिए आरोपितों को फंडिंग प्राप्त हो रही थी।

उत्तर प्रदेश एटीएस ने 7 महीने पुराने धर्मांतरण के इस मामले की जाँच को आगे बढ़ाते हुए इसमें हुई फंडिंग से जुड़े नेटवर्क को खँगालना शुरू किया है। इसके लिए, एटीएस ने धर्मांतरण के आरोपितों के बैंक खातों की डिटेल्स जुटाना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, एटीएस को इस मामले के 36 आरोपितों में से 31 आरोपितों के बैंक खातों की डिटेल्स मिल चुकी है।

उल्लेखनीय है कि सामूहिक धर्मांतरण के इस मामले में यूपी पुलिस ने इस महीने की शुरुआत में 4 नवंबर को एक पादरी समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया था। इसमें स्थानीय सीपीएस स्कूल की एक महिला टीचर का नाम भी शामिल था। वहीं एक अन्य आरोपित शिक्षक फिलहाल फरार है। इसलिए, यूपी एटीएस (UP ATS) के निशाने पर सीपीएस स्कूल भी है। इस स्कूल के संचालक व अन्य स्टाफ से भी एटीएस पूछताछ कर सकती है।

‘न्यूज 18’ ने एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि इस मामले में उत्तर प्रदेश की आतंकवाद निरोधी शाखा (ATS) यूपी पुलिस के एक अधिकारी की संदिग्ध भूमिका की भी जाँच कर रही है। एटीएस की पूछताछ के बाद कहा जा रहा है कि ईसाई मिशनरी के एक रसूखदार व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई में शिथिलता बरती गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, सामूहिक धर्मांतरण और उसके लिए की गई फंडिंग से जुड़े मामले में ATS कई अन्य संदिग्धों से भी पूछताछ कर रही है। वहीं, सदर कोतवाल और हरीगंज चौकी इंचार्ज से भी पूछताछ कर धर्मांतरण के केंद्र रहे ‘चर्च ऑफ इंडिया’ के पादरी विजय मसीह के बारे में जानकारी एकत्र की जा रही है।

बता दें कि इसी साल 15 अप्रैल 2022 को फतेहपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत हरिहरगंज मोहल्ले के चूना वाली गली स्थित ‘इवेजलिकल चर्च ऑफ इंडिया’ में देर शाम प्रार्थना सभा चल रही थी। उसी दौरान मोहल्ले के लोगों की सूचना पर विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के कार्यकर्ता पहुँच गए थे। इन कार्यकर्ताओं का कहना था कि गरीब हिंदू परिवारों को रुपयों का लालच देकर उनका मतांतरण करने की साजिश रची जा रही है।

इस बारे में जब चर्च के पादरी से पूछा गया तो उसने कबूल किया था कि चर्च के भीतर 70 से ज्यादा लोग मौजूद थे, जिनमें 50 से ज्यादा हिंदू थे। इसकी सूचना पुलिस-प्रशासन को दी गई और उनसे आग्रह किया गया कि चर्च के भीतर जितने लोग प्रार्थना सभा कर रहे थे, उनकी आईडी चेक की जाए और उन्हें बाहर निकाला जाए। माँग की गई थी कि यदि मतांतरण का आरोप सही हो तो मुकदमा दर्ज किया जाए।

इसके बाद पुलिस ने चर्च के भीतर मौजूद 55 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। बाद में, पुलिस ने 35 लोगों के खिलाफ नामजद व 20 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ धर्मांतरण की धाराओं पर एफआईआर दर्ज की थी। साथ ही 26 लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। हालाँकि, बाद में ये लोग छूट गए थे। लेकिन, फिर लगातार चली जाँच के बाद पादरी विजय मसीह, विनय कुमार, अजय सैमुअल, विजय सिंह, आशीष कुमार, प्रिंस, पूजा, रेनुका, नासिर मंसूर और विक्रम सिंह समेत कुल 14 आरोपित जेल में हैं।

चीजें हमारे नियंत्रण से बाहर… इस्लामी मुल्क के शाही परिवार के सामने झुका FIFA: जिस वर्ल्ड कप की स्पॉन्सर ही बियर कंपनी, उसमें शराब पर लगाना पड़ा बैन

कतर में रविवार (20 नवंबर, 2022) से शुरू हो रहे फीफा वर्ल्ड कप (FIFA WORLD CUP 2022) में फुटबॉल प्रेमियों को स्टेडियम में ठंडी बियर या किसी और तरह के अल्कोहल वाल पेय का मजा उठाने का मौका नहीं मिलेगा। टूर्नामेंट से दो दिन पहले आयोजकों ने बियर पीने या बेचने के मामले में यू-टर्न ले लिया है। आयोजकों ने इस वर्ल्ड कप में स्टेडियमों के अंदर बियर की बिक्री पर रोक लगा दी है।

पहले कतर ने नियमों में ढील देने की कही थी बात

फीफा वर्ल्ड कप इस्लामी मुल्क कतर में कराए जाने को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे थे। फैन्स को आशंका थी कि इस्लामी मुल्क में उन्हें दूसरे देशों की तरह वर्ल्ड कप का लुत्फ उठाने के लिए पूरी आजादी नहीं मिलेगी। हालाँकि, पहले कतर ने अपने मेहमानों के लिए नियमों में ढील देने की बात की थी। साथ ही तय हुआ था कि मैच से तीन घंटे पहले और मैच के एक घंटे बाद स्टेडियम में कुछ स्टॉल पर बीयर बेचा जा सकता है। लेकिन, वर्ल्ड कप शुरू होने से ठीक पहले फैसला बदल दिया गया।

बता दें कि कतर में शराब बेचने और पीने पर पूर्ण प्रतिबंध है, लेकिन फीफा वर्ल्ड कप के आयोजन को ध्यान में रखते हुए नियमों में नरमी बरतने की बात कही गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कतर का शाही परिवार स्टेडियमों के अंदर बियर पर पाबंदी चाहता था। खबरें हैं कि शाही परिवार के दबाव की वजह से आयोजकों को फैसले से यू-टर्न लेना पड़ा है। फीफा का कहना है कि इस मामले में चीजें उसके नियंत्रण से बाहर है, इसीलिए ये फैसला लेना पड़ा।

स्टेडियम में बिकेगी ‘अल्कोहल मुक्त बियर’

नए फैसले के तहत, देश में होने वाले 64 मैचों के दौरान स्टेडियमों में ‘अल्कोहल मुक्त बियर’ बेची जायेगी। फीफा ने जारी किए गए एक बयान में कहा, “मेजबान देश के अधिकारियों और फीफा के बीच चर्चा के बाद स्टेडियम के परिसर से बियर की बिक्री को हटा दिया गया है। फैन फेस्टिवल और प्रशंसकों के एकत्र होने वाले अन्य स्थलों पर बियर की बिक्री पर रोक रहेगी। सभी 64 मैचों के दौरान स्टेडियमों में ‘अल्काहोल रहित बियर’ की ही बिक्री की जा सकेगी। शैम्पेन, वाइन, व्हिस्की सिर्फ तय किए गए स्थानों में ही परोसी जाएगी।”

बियर पर प्रतिबंध के ऐलान के बाद से प्रशंसकों में मायूसी है। स्टेडियम में बियर और शराब पर प्रतिबंध की घोषणा के बाद से फुटबॉल प्रशंसकों ने विश्व कप आयोजकों से रिफंड की माँग शुरू कर दी है। उनका कहना है कि कतर को विश्वकप की मेजबानी सौंपा जाना गलत फैसला था जिससे टूर्नामेंट ‘बर्बाद’ हो गया है। रविवार से शुरू हो रहे टूर्नामेंट का लुत्फ उठाने के लिए पूरी दुनिया से फुटबॉल प्रशंसकों का कतर पहुँचना शुरू हो चुका है। कतर में पहले से मौजूद इंग्लैंड के प्रशंसकों ने इस प्रतिबंध को फीफा का अपमान करार दे दिया। इस साल इंग्लैंड से कुछ सौ प्रशंसक ही दोहा पहुँचे हैं।

फीफा के लिए परेशानी की बात यह भी है कि बियर बनाने वाली कंपनी बडवाइज़र इस वर्ल्ड कप के स्पॉन्सर में से एक है, जिसने फीफा वर्ल्ड कप 2022 की स्पॉन्सरशिप के लिए 75 मिलियन डॉलर (611.40 करोड़ रुपए) की राशि दी है। कंपनी ने प्रशंसकों के लिए काफी स्टॉक ब्रिटेन से कतर भेज दी थी। इसके अलावा स्टेडियम में मैच देखने वाले विदेशी प्रशंसकों की संख्या भी कम हो सकती है।

आमिर-हृतिक पर भारी पड़े अजय देवगन, जानें पहले दिन कितनी रही ‘दृश्यम 2’ की कमाई: साल की दूसरी सबसे बड़ी बॉलीवुड ओपनिंग

अजय देवगन (Ajay Devgn) की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘दृश्यम 2’ (Drishyam 2) सिनेमाघरों में रिलीज हो गई। फिल्म का ट्रेलर और टीजर देखने के बाद फैंस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। शुक्रवार (18 नवंबर, 2022) को ‘दृश्यम 2’ के रिलीज होते ही सिनेमाघरों में फैंस की भीड़ देखने को मिली। यही वजह है कि फिल्म ने आमिर खान और अक्षय कुमार से लेकर ऋतिक रोशन, कार्तिक आर्यन व आलिया भट्ट की फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है।

अजय देवगन, तब्बू और श्रिया सरन स्टारर ‘दृश्यम 2’ साल 2015 में आई ‘दृश्यम’ का सीक्वल है। फिल्म की एडवांस बुकिंग को देखते हुए अनुमान लगाए जा रहे थे कि ओपनिंग डे पर ‘दृश्यम 2’ की कमाई 10-12 करोड़ के आसपास रहेगी। हालाँकि, अनुमानों को ध्वस्त करते हुए फिल्म ने न सिर्फ 15.38 करोड़ रुपए की कमाई की, बल्कि इस साल की दूसरी सबसे बड़ी बॉलीवुड ओपनिंग के रूप में सामने आई। वहीं, पूरे भारत की फिल्मों की बात करें तो यह साल की छठी सबसे बड़ी ओपनिंग है।

दरअसल, ‘दृश्यम 2’ से पहले सिर्फ ‘ब्रह्मास्त्र’ ने पहले दिन 36 करोड़ रुपए की कमाई की थी। इस साल सबसे ज्यादा ओपनिंग लेने वाली मूवीज में दक्षिण भारतीय फिल्म ‘केजीएफ 2 (KGF 2)’ ने 53.95 करोड़, बॉलीवुड फिल्म ‘ब्रह्मास्त्र’ ने 36 करोड़, हॉलीवुड फिल्म ‘डॉक्टर स्ट्रेंज 2’ ने 28.25 करोड़ रुपए, साउथ इंडियन फिल्म ‘आरआरआर (RRR)’ ने 20.07 करोड़ रुपए और हॉलीवुड फिल्म ‘थॉर’ ने 18.20 करोड़ रुपए की कमाई की थी।

सीधे तौर पर देखें तो इस लिस्ट में दो फिल्में हॉलीवुड की और दो साउथ इंडियन फिल्में हैं। वहीं, बॉलीवुड की एक मात्र फिल्म ‘ब्रह्मास्त्र’ ही है, जिसने ‘दृश्यम 2’ से अधिक कमाई की थी। ‘दृश्यम 2’ की इस कमाई ने यह भी साबित कर दिया है कि अच्छी एक्टिंग के बल पर साउथ इंडियन फिल्मों के रीमेक भी बॉलीवुड में हिट हो सकते हैं।

दरअसल, अजय देवगन स्टारर ‘दृश्यम 2’ को लेकर फैंस और क्रिटिक शुरुआत से ही पॉजिटिव रिस्पॉन्स दे रहे थे। ऐसे में, फिल्म की कमाई ने लोगों को अधिक हैरान नहीं किया है। हालाँकि फिल्म ने पहले दिन की कमाई के मामले में, आमिर खान की ‘लाल सिंह चड्ढा’, अक्षय कुमार की ‘राम सेतु, ‘सम्राट पृथ्वीराज’, ‘बच्चन पांडे’ और ‘रक्षा बंधन’ वहीं कार्तिक आर्यन की ‘भूल भुलैया 2’, सैफ अली खान और ऋतिक रोशन की ‘विक्रम वेधा’ और आलिया भट्ट की ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ और रणबीर कपूर की ‘शमशेरा’ को पीछे छोड़ दिया है।

‘शिक्षित महिलाओं के दोहरे मानदंड होते हैं’: जया बच्चन ने बेटी श्वेता और नातिन नव्या नवेली से कहा- महिलाएँ अपनी दुश्मन खुद होती हैं

बॉलीवुड की पूर्व अभिनेत्री और राज्यसभा सांसद जया बच्चन (Jaya Bachchan) ने अपनी नातिन नव्या नवेली (Navya Naveli) के साथ पॉडकास्ट का नया एपिसोड जारी किया है। इसमें जया बच्चन की कहा कि पढ़ी-लिखी महिलाओं के दोहरे मानदंड होने हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएँ अपनी दुश्मन खुद होती हैं।

नव्या नवेली नंदा का पॉडकास्ट ‘What is Hell (व्हाट द हेल)’ हर शनिवार को एक नया एपिसोड लेकर आता है। इसमें अमिताभ बच्चन की पत्नी जया बच्चन, बेटी श्वेता बच्चन और नातिन नव्या नवेली नंदा विभिन्न विषयों जैसे कि वित्त, पालन-पोषण, रिश्ते और बहुत कुछ के बारे में खुलकर बात करती हैं।

‘वन क्राउन, कई शूज’ नाम के शीर्षक वाले हालिया एपिसोड में बच्चन परिवार की महिलाओं ने सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में बात की। शो के अंतिम सेगमेंट में नव्या ने भेदभाव पर सवाल उठाया और बेटियों की तुलना में बेटों को अलग तरह से पाले जाने की बात कही। तब जया बच्चन ने कहा कि शिक्षित महिलाओं के भी दोहरे मानदंड होते हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएँ अपनी दुश्मन खुद हैं।

पॉडकास्ट में नव्या ने कहा कि जिस तरह लोग अपनी बेटियों की परवरिश करते हैं, उसी तरह बेटों की परवरिश कैसे करनी चाहिए। इस बीच जया बच्चन ने कहा कि यह देखना दुखद है कि शिक्षित महिलाओं के भी दोहरे मापदंड होते हैं और ये महिलाएँ अपनी ही दुश्मन हैं।

उन्होंने कहा, “शिक्षित महिलाओं के भी दोहरे मापदंड होते हैं, जो बहुत दुखद है। मैं इसे कभी-कभी कहना चाहती हूँ, लेकिन यह कहना अच्छा नहीं लगता। लेकिन, महिलाएँ अपनी खुद की दुश्मन हैं।” उन्होंने कहा कि बच्चों की परवरिश सिर्फ एक माँ की ही नहीं, बल्कि पिता की भी जिम्मेदारी होती है।

इस एपिसोड के शुरू में श्वेता बच्चन ने कहा कि महिलाओं को अन्य महिलाओं के लिए अच्छा और अधिक सहायक होने की आवश्यकता है। जया बच्चन ने कहा कि वह नव्या के लिए बहुत अच्छी हैं। उन्होंने कहा, “मैं हमेशा दूसरी महिलाओं की मदद करती हूँ और हमेशा उनके लिए बोलती हूँ। अब माँ-बेटी के बारे में बात नहीं करते हैं।”

श्वेता ने कहा, “मेडेलीन के अलब्राइट एक उदाहरण हैं। नरक में उन महिलाओं के लिए एक विशेष स्थान है, जो अन्य महिलाओं की मदद नहीं करती हैं। दान घर से शुरू होना चाहिए, माँ!” इसके बाद नव्या ने अपनी माँ श्वेता से कहा, “तुम्हारे साथ भी ऐसा ही है।” जया बच्चन ने कहा कि श्वेता नव्या को अपना ‘पंचिंग बैग’ मानती हैं। श्वेता ने कहा कि नव्या को नहीं पता कि कब चुप रहना है या कब किसी का मूड खराब है।

इस दौरान नव्या नवेली नंदा ने भारत की महिलाओं के फैशन सेंस पर भी अपनी बात रखी। जया बच्चन ने कहा है कि उन्हें समझ में नहीं आता कि भारतीय कपड़ों की जगह वेस्टर्न कपड़ों को लोग तवज्जो क्यों देते हैं।

जया बच्चन ने कहा, “मुझे लगता है कि हमने शायद ऐसा मान चुके हैं कि विदेशी कपड़े महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार देते हैं, जबकि मैं चाहती हूँ कि महिला नारीशक्ति का प्रदर्शन करें। मैं यह नहीं कहती कि जाइए साड़ी पहनिए, लेकिन विदेशों में भी महिलाएँ ड्रेस पहनती हैं। यह सारा बदलाव तब आया, जबसे महिलाओं ने पैंट पहनना शुरू किया है।”

इस पर जया बच्चन की बेटी श्वेता बच्चन कहती हैं, “पैंट पहनने से महिलाओं को आने-जाने में सुविधा होती हैं और कामकाज करने में भी सुगमता होती है। हम सरलता से कहीं भी आ-जा सकती हैं। यह बहुत ही सरल होता है कि आप पैंट और टी-शर्ट पहन लें, बजाय इसके की आप साड़ी का पल्लू ठीक करती रहे।”

इस दौरान नव्या नवेली नंदा ने कई महिला सीईओ के बारे में बात कीं, जो साड़ी पहनना पसंद करती हैं। इस पर जया बच्चन ने कहा कि वे इसलिए ऐसा करती हैं, क्योंकि वे सब अपने दम पर बनी हैं और उन्हें अपने ऊपर पूरा विश्वास है। 

‘उनके पदचिह्नों पर चलना मेरे लिए सौभाग्य की बात’: अटल बिहारी वाजपेयी के किरदार में दिखेंगे पंकज त्रिपाठी, अगले साल जयंती पर रिलीज होगी फिल्म

देश के सबसे लोकप्रिय नेता और तीन बार प्रधानमंत्री पद की शोभा बढ़ाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी पर बायोपिक बनने जा रही है। इसमें अटल बिहारी वाजपेयी की भूमिका अभिनेता पंकज त्रिपाठी निभाने वाले हैं। पंकज त्रिपाठी ने इस बात की जानकारी अपने ट्विटर हैंडल पर दी। फिल्म की घोषणा करते हुए पंकज त्रिपाठी ने लिखा, “भारत जमीन का टुकड़ा नहीं, जीता-जागता राष्ट्रपुरुष है – ये पंक्तियाँ लिखने वाले महान नेता अटल बिहारी वाजपेयी की भूमिका मुझे बड़े पर्दे पर साकार करने का मौका मिल रहा है। इसे मैं अपना सौभाग्य मानता हूँ। अटल जल्द है।”

फिल्म को लेकर पंकज त्रिपाठी ने ‘इंडिया टुडे’ से बातचीत के दौरान कहा, “यह मेरे लिए सम्मान की बात है कि मैं इतनी बड़ी व्यक्तित्व की भूमिका निभाने जा रहा हूँ। अटल जी एक राजनेता होने के साथ-साथ उम्दा लेखक और चर्चित कवि भी थे। उनके पदचिह्नों पर चलना मुझ जैसे अभिनेता के लिए सौभाग्य से कम नहीं है।”

रवि जाधव बना रहे हैं फिल्म

अटल बिहारी वाजपेयी की जीवनी पर बन रही इस फिल्म के निर्देशक रवि जाधव हैं। रवि मराठी फिल्मों के प्रसिद्ध निर्देशक हैं। उन्हें 3 बार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। यह फिल्म उल्लेख एनपी की किताब ‘द अनटोल्ड वाजपेयी: पॉलिटिशियन एंड पैराडॉक्स’ पर आधारित होगी। फिल्म को लेकर निर्देशक रवि जाधव ने कहा है कि वे लोगों की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे।

25 दिसंबर 2023 को रिलीज हो सकती है फिल्म

अटल बिहारी वाजपेयी पर बायोपिक की घोषणा इसी साल 28 जून को हुई थी। लेकिन, उस समय फिल्म की स्टारकास्ट की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी। बताया जा रहा है कि रवि जाधव के निर्देशन में बन रही यह फिल्म अगले साल 25 दिसंबर पर रिलीज हो सकती है। बता दें कि 25 दिसंबर, 2023 को भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 99वीं जयंती भी है।