Tuesday, April 14, 2026
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खुद कर रहे रूस से व्यापार, भारत को दे रहे शांति का ज्ञान: तेल खरीद पर ट्रंप ने टैरिफ बढ़ाने की कही बात, विदेश मंत्रालय ने दिखा दिया आईना

भारत के विदेश मंत्रालय ने एक्स पर लिखा कि अमेरिका भी रूस से परमाणु उद्योग के लिए यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, ईवी उद्योग के लिएपैलेडियम के साथ उर्वरक और रसायन आयात करता है। ऐसे में भारत को निशाना बनाना न केवल अनुचित है, बल्कि गलत भी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार (4 अगस्त 2025) को कहा कि भारत रूसी तेल खरीद कर यूक्रेन के साथ युद्ध को बढ़ावा दे रहा है इसलिए अमेरिका भारत से आने वाले सामानों पर और अधिक टैरिफ लगाएगा। इसके बाद भारत ने भी अमेरिका को करारा जवाब दिया है।

ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर भारत पर टैरिफ को लेकर पोस्ट साझा की। ट्रंप ने लिखा, “भारत भारी मात्रा में रूसी तेल खरीद कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसे ऊँचे दामों पर बेच रहा है और भारी मुनाफा कमा रहा है। भारत को इस बात की कोई परवाह नहीं है कि रूस के कारण यूक्रेन में कितने लोगों की जान जा रही है। इस वजह से मैं भारत से आने वाले सामानों पर अधिक टैरिफ लगाऊँगा।”

इससे पहले 30 जुलाई को ट्रंप ने भारत से आयात पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की थी।

भारत ने दिया करारा जवाब

ट्रंप के इस पोस्ट के बाद भारत ने भी जवाब दिया है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा, “अमेरिका भी रूस से परमाणु उद्योग के लिए यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, ईवी उद्योग के लिएपैलेडियम के साथ उर्वरक और रसायन आयात करता है। ऐसे में भारत को निशाना बनाना न केवल अनुचित है, बल्कि गलत भी है। भारत हर बड़ी अर्थव्यवस्था की तरह अपने राष्ट्रीय हित और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।”

विदेश मंत्रालय की ओर से साझा की गई जानकारी में भारत ने अमेरिका के साथ यूरोपियन यूनियन पर भी जमकर निशाना साधा। मंत्रालय ने लिखा कि यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद भारत को रूस से तेल आयात करने पर अमेरिका और यूरोपीय संघ द्वारा निशाना बनाया जा रहा है, जबकि भारत ने यह आयात तब शुरू किया जब यूरोप ने पारंपरिक आपूर्ति को अपनी ओर मोड़ लिया था। उस समय अमेरिका ने भी भारत को ऐसे आयात के लिए प्रोत्साहित किया ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर रह सके।

अमेरिका को करारा जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि जो देश भारत की आलोचना कर रहे हैं वे खुद रूस से व्यापार कर रहे हैं और उनके लिए यह कोई मजबूरी नहीं है। भारत का तेल आयात पूरी तरह से घरेलू उपभोक्ताओं को सस्ती और स्थिर ऊर्जा कीमतें देने के उद्देश्य से किया गया है और यह वैश्विक बाजार की स्थिति से मजबूरी में उठाया गया कदम है।

डेटा के साथ यूरोपियन यूनियन को दिया जवाब

अपने पोस्ट में विदेश मंत्रालय ने महज कोरी बात ही नहीं की, बल्कि तथ्यों को भी साथ ही साथ सबके सामने रख दिया। पोस्ट में रणधीर ने लिखा, “2024 में यूरोपीय संघ ने रूस से 67.5 बिलियन यूरो का व्यापार किया और 2023 में सेवाओं का व्यापार 17.2 बिलियन यूरो रहा। ये भारत-रूस व्यापार से कहीं अधिक है।”

विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि यूरोपीय संघ ने 2024 में 16.5 मिलियन टन LNG (गैस) आयात किया, जो 2022 के रिकॉर्ड 15.21 मिलियन टन से भी ज्यादा था। यूरोप रूस के साथ जो व्यापार करता है उसमें ऊर्जा के अलावा उर्वरक, खनिज, रसायन, स्टील, मशीनरी और ट्रांसपोर्ट उपकरण भी शामिल हैं।

ट्रंप पहले भी ब्रिक्स देशों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दे चुके हैं। अगर ऐसा होता है, तो भारतीय सामानों के आयात पर प्रभावी टैरिफ 35% होगा। अमेरिका में एक विधेयक भी पारित होने वाला है। इसके तहत रूस के साथ भारत, चीन और ब्राजील के लेन-देन पर 500% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है।

भारत ने भी साफ तौर पर बता दिया है कि वह बातचीत के जरिए समाधान चाहता है लेकिन किसी के भी दबाव में नहीं आकर ऐसा नहीं होगा।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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