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भगवान परशुराम का जंगल, भूत कोला और वराह अवतार… बॉलीवुड वालो, ‘कांतारा’ को मत छूना वरना लोक संस्कृति हटा कर ‘अच्छा मुसलमान’ डाल दोगे

भगवान परशुराम का नाम आपने सुना है? उन्हें स्वयं श्रीहरि का अवतार माना जाता है। उन्होंने कई बार इस पृथ्वी को क्षत्रिय विहीन कर दिया था – ये कथा भी आपने सुनी होगी। भारत की अधिकतर गाथाएँ पूरे देश को एक सूत्र में जोड़ती है। कर्नाटक और केरल के लोगों को भूमि प्रदान करने वाले परशुराम के नाम पर यूपी-बिहार में भी वोटों की राजनीति होती है। कन्नड़ फिल्म ‘कांतारा (Kantara)’ का कनेक्शन भी भगवान परशुराम से है।

हाल ही में एक फिल्म आई है ‘कांतारा’, जो एक कन्नड़ फिल्म है। दक्षिण कन्नड़ जिले के ऋषभ शेट्टी इसके निर्देशक हैं और साथ ही मुख्य अभिनेता भी, जिन्होंने कर्नाटक के गाँवों की संस्कृति को करीब से देखा है और इसी बीच पले-बढ़े भी हैं। ‘कांतारा’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, वनवासी समाज की संस्कृति, इतिहास, मिथक और संघर्षों की एक ऐसी दास्ताँ है जो वास्तविकता से मेल खाती है। अध्यात्म को जंगल से जोड़ने वाली कहानी है ये।

‘कांतारा’ की कहानी वनवासियों के जमीनों को सरकार और जमींदारों द्वारा कब्जाने के इर्दगिर्द घूमती है। क्या किसी जंगल क्षेत्र को रिजर्व घोषित करने से पहले सरकारें वहाँ के वनवासी समाज की संस्कृति और परंपराओं को ठेस पहुँचाए बिना उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएँ करती हैं? क्या दंबंगों के अत्याचार से वनवासी समाज आज भी मुक्त है? ये वो सवाल हैं, जो इस फिल्म को देखने के बाद उठेंगे। ये भी दिखाया गया है कि कैसे आस्था के मामले में वनवासी समाज से पूरे हिन्दुओं को सीखना चाहिए।

जो लोग दलितों और वनवासियों को हिन्दुओं से अलग देखते हैं या फिर जानबूझ कर अलग करने की कोशिश करते हैं, उनके लिए ये फिल्म एक तमाचा है। इसे देखने के बाद उन्हें पता चलेगा कि कैसे वो वास्तविकता से कोसों दूर हैं। वनवासियों को भगवान विष्णु के वराह अवतार की पूजा करते हुए दिखाया गया है। प्रोपेगंडा चलाने वालों को ये भी समझना चाहिए कि शिव को ‘पशुपति’ कहा गया है। वनवासी समाज की उनमें आस्था के बिना ये शब्द आ ही नहीं सकता है।

भगवान परशुराम, कर्नाटक के जंगल और ‘कांतारा’ फिल्म

तो हमने बात शुरू की थी भगवान परशुराम से। अत्याचारी राजाओं को हराने के लिए एक ब्राह्मण ने न सिर्फ शस्त्र उठाया, बल्कि उन्हें परास्त कर उनकी जमीनें गरीबों को दे दी। यही गरीब ब्राह्मण कालांतर में याचक से जजमान बन गए और कई जमींदार भी हो गए। दक्षिण कन्नड़ जिले में कन्नड़ नहीं, बल्कि तुलू भाषा बोली जाती है। इसीलिए, कई बार तुलू नाडु नाम से अलग राज्य बनाने की माँग भी होती रही है। हालाँकि, इस विवाद में हम नहीं पड़ेंगे।

कहते हैं, भगवान परशुराम ने सह्याद्रि पर्वत (गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल और गोवा में फैली पश्चिमी घाट की पहाड़ियाँ) पर भगवान शिव की तपस्या के लिए चले गए। भगवान शिव ने प्रकार होकर उन्हें कदली वन जाने को कहा और बताया कि वो वहीं अवतार लेने वाले हैं। वहाँ पहुँच कर परशुराम ने समुद्र में समाए इलाकों को पानी से बाहर निकाला और वहाँ लोगों को बसाया। इन्हीं इलाकों को ‘परशुराम सृष्टि’ भी कहा गया।

कर्नाटक में आज भी भगवान परशुराम द्वारा स्थापित 7 मंदिर अति माने जाते हैं – कुक्के सुब्रह्मण्य (नाग मंदिर), उडुपी स्थित श्रीकृष्ण मंदिर, कुंभाषी स्थित विनायक मंदिर, कोटेश्वर स्थित शिव मंदिर, शंकरनारायण मंदिर, मूकाम्बिका मंदिर और गोकर्ण शिव मंदिर। कर्नाटक, केरल और गोवा के तटवर्ती इलाकों को ‘परशुराम क्षेत्र’ भी कहा जाता है। इसी में स्थित तुलू नाडु के जंगलों की कहानी है ‘कांतारा’, जिसमें ‘भूत कोला’ पर्व के इर्दगिर्द कहानी बुनी गई है।

लोक-संस्कृति को दिखाती है ‘कांतारा’, वनवासी हिन्दू नहीं – ऐसा कहने वालों को मिलता है जवाब

इसे ‘दैव कोला’ या फिर ‘नेमा’ भी कहते हैं। इसमें जो मुख्य नर्तक होता है, उसे वराह का चेहरा धारण करना होता है। इसके लिए एक खास मास्क तैयार किया जाता है। वराह के चेहरे वाले इस देवता का नाम ‘पंजूरी’ है। वराह अवतार भगवान विष्णु का तीसरा अवतार था, जब उन्होंने पृथ्वी को प्रलय से बचाया था। जगंली सूअर का वेश धारण कर उन्होंने हिरण्याक्ष का वध किया था। वेदों और पुराणों में भी वराह का जिक्र मिलता है।

कर्नाटक का ‘यक्षगण’ थिएटर भी ‘भूत कोला’ से ही प्रेरित है। इसी से मिलता-जुलता नृत्य मलयालम भाषियों के बीच भी लोकप्रिय है, जिसे ‘थेय्यम’ कहते हैं। अब इसमें भी कई तरह के देवता हैं, जिनकी अलग-अलग वनवासी समाज पूजा करते हैं। इनमें से एक तो ऐसे हैं जिनका चेहरा मर्दों वाला और गर्दन के नीचे का शरीर स्त्री का है। उनके चेहरे पर घनी मूँछ होती है, लेकिन उनके स्तन भी होते हैं। उन्हें ‘जुमड़ी’ कहा जाता है।

ऐसे अनेकों देवता हैं, जिनका अध्ययन करने पर हमें उस खास समाज के इतिहास और संस्कृति के बारे में पता चलता है। हर गाँव में आपको वहाँ अलग-अलग देवता मिल जाएँगे। नर्तकों का मेकअप भी अलग-अलग रीति-रिवाजों की प्रक्रिया के लिए अलग-अलग ही होता है। स्थानीय जमींदार, प्रधान या फिर जन-प्रतिनिधि को ‘भूत कोला’ के दौरान ‘दैव’ के सामने पेश होना पड़ता है, क्योंकि वो उनके प्रति उत्तरदायी होते हैं।

‘कांतारा’ का रीमेक बनाने की सोचे भी नहीं बॉलीवुड

‘कांतारा’ फिल्म देखने के बाद आपको इस संस्कृति के बारे में और जानने-पढ़ने का मन करेगा और अनुभव करने का भी। लेकिन, अब डर ये है कि बॉलीवुड इस फिल्म का रीमेक बना सकता है। दक्षिण भारत की अधिकतर फिल्मों का रीमेक बना कर उसे बर्बाद किया जा चुका है। ‘कंचना’ का ‘राघव’ उसके रीमेक ‘लक्ष्मी बॉम्ब’ में ‘आसिफ’ बन जाता है। ‘कांतारा’ को लेकर बॉलीवुड से एक अनुरोध है – इस फिल्म को छूना भी मत।

ऋषभ शेट्टी ने इसमें जो परफॉर्मेंस दिया है, वो फ़िलहाल बॉलीवुड के किसी भी कलाकार के बूते की नहीं लगती। खासकर क्लाइमैक्स के दृश्यों में उन्होंने जो ‘दैव’ के अवतार में प्रदर्शन किया है, उसे शायद ही कोई मैच कर पाए। बॉलीवुड अगर इसका रीमेक बनाएगा तो इसमें एक ‘अच्छा मुसलमान’ घुसा देगा। भगवान विष्णु के अवतार की स्तुति ‘वराह रूपम दैव वरिष्ठम’ की जगह अजान घुसा दिया जाएगा। ये भी हो सकता है कि क्रूर जमींदार को हिन्दू धर्म में आस्था रखने वाला और वनवासियों को जबरदस्ती गैर-हिन्दू दिखा कर मुस्लिमों के साथ उनका गठबंधन दिखाया जाए।

इसी तरह इस फिल्म में ‘कंबाला’ खेल के बारे में भी दिखाया गया है। इसे भैंसों का एक रेस कह लीजिए। तुलुवा जमींदार इसका आयोजन कराते रहे हैं और जीतने वालों को इनाम मिलता रहा है। इसमें व्यक्ति को भैंसों के साथ एक कींचड़ वाले खेत में रेस लगानी होती है। हर व्यक्ति अपनी-अपनी भैंसे लेकर आता है। इसके भी कई प्रकार हैं। भैंसों को सजाया जाता है। बॉलीवुड संस्कृति और परंपराओं का अपमान करता है, ये सब दिखाना उसके बस की बात नहीं।

KFF ने ली कश्मीरी हिंदू की हत्या की जिम्मेदारी, सड़क पर लोगों का जोरदार विरोध प्रदर्शन: माँग- हमें सुरक्षित जगह शिफ्ट किया जाए

जम्मू-कश्मीर के शोपियाँ में शनिवार (15 अक्टूबर, 2022) को एक कश्मीरी हिंदू की गोली मार कर हत्या कर दी गई। हत्या की जिम्मेदारी आतंकी संगठन कश्मीर फ्रीडम फाइटर्स (KFF) ने ली है। वहीं, इस हत्या के विरोध में जम्मू-कश्मीर के की इलाकों में हिंदू सड़कों पर उतर आए हैं।

कश्मीरी हिंदू पूरन कृष्ण को तब गोली मार दी गई, जब वे चौधरी गुंड स्थित अपने घर के लॉन में बैठे हुए थे। घायल अवस्था में उन्हें नजदीकी अस्पताल में ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

मध्य कश्मीर के पुलिस उपमहानिरीक्षक (IGP) सुजीत कुमार ने कहा कि प्रारंभिक जाँच से पता चलता है कि हत्या में केवल एक आतंकवादी शामिल था। उन्होंने कहा, “एक बार जब चीजें स्पष्ट हो जाएँगी तो और विवरण साझा किया जाएगा।”

सुजीत कुमार ने कहा कि अगर सुरक्षा गार्डों या क्षेत्र के प्रभारी अधिकारी की ओर से सुरक्षा में किसी भी तरह की चूक पाई जाती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि एक आतंकवादी संगठन ने छद्म नाम ‘कश्मीर फ्रीडम फाइटर (KFF)’ से हमले की जिम्मेदारी ली है।

घटना के बाद कश्मीर के बडगाम सहित कई इलाकों के हिंदू सड़कों पर उतर आए और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। इस घटना से पीएम पैकेज के तहत कश्मीर में काम करने वाले हिंदुओं में खासा रोष है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और हिंदुओं को सुरक्षित जगह शिफ्ट करने की माँग की है।

इससे पहले मई 2022 में बडगाम के चदूरा स्थित तहसील कार्यालय में राहुल भट की टारेगट किलिंग के बाद कर्मचारियों ने कश्मीर छोड़ने की धमकी दी थी। ये कर्मचारी पीएम पैकेज के तहत काम कर रहे हैं।

पीएम पैकेज के कर्मचारी वे कश्मीरी हिंदू हैं, जो 90 के दशक में घाटी छोड़कर चले गए, लेकिन सरकारी नौकरी मिलने के बाद वापस कश्मीर लौट आए। पैकेज के तहत कश्मीर में कम-से-कम 6,000 प्रवासी कश्मीरी पंडित काम कर रहे हैं।

‘हमने 832 साल शासन किया, हिन्दू करते थे हमारी जी-हुजूरी’: AIMIM प्रदेश अध्यक्ष का भड़काऊ बयान – हम 3 बीवियाँ रखते लेकिन तुम तो…

उत्तर प्रदेश में AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष ने हिन्दुओं को लेकर भड़काऊ बयान दिया है। संभल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए शौकत अली ने कहा कि मुस्लिमों ने 832 साल हिंदुस्तान पर शासन किया है और हिन्दू लोग हमारे बादशाह के सामने हाथ जोड़ कर जी-हुजूरी किया करते थे। शौकत अली ने हिन्दुओं को धमकाते हुए कहा कि ‘तुम्हारी बहन जोधाबाई’ से निकाह कर के अकबर ने उसे मल्लिका-ए-हिंदुस्तान बनाया था।

उसने अकबर द्वारा जोधाबाई से शादी करने को सेक्युलरिज्म की एक बहुत बड़ी मिसाल करार दिया। अपनी सभा में उन्होंने भाजपा और हिन्दुओं के खिलाफ जम कर जहर उगला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा जब भी कमजोर होती है, मुस्लिमों के निकाह, तीन तलाक, मदरसों की जाँच और ज्ञानवापी जैसे मुद्दे लेकर आ जाती है। उन्होंने ज्ञानवापी शिवलिंग की कार्बन डेटिंग को करने के अदालत के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि देश संविधान से चलेगा, भाजपा की मर्जी से नहीं।

शौकत अली ने मुस्लिमों के हक़ के लिए ‘संवैधानिक लड़ाई’ लड़ने का दावा करते हुए कहा कि ये जारी रहेगी। उन्होंने कहा, “अगर हम तीन शादियाँ करते भी हैं तो तीनों पत्नियों को समाज में इज्जत भी दिलाते हैं। लेकिन, तुम लोग (हिन्दुओं) एक शादी करके तीन अन्य महिलाओं से संबंध रखते हो। न तो पत्नी को ही इज्जत देते हो, न उन अन्य महिलाओं को। हम अपनी पत्नियों को रखते हैं, इज्जत देते हैं और राशन कार्ड में अपने बच्चों के नाम भी डलवाते हैं।”

वहीं शौकत अली हिजाब के मुद्दे पर भी नाराज़ नजर आए और कहा कि किसे क्या पहनना है ये संविधान तय करेगा। उन्होंने भाजपा पर देश तोड़ने के मुद्दे उठाने का आरोप लगाते हुए कहा कि मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा है। बकौल AIMIM प्रदेश अध्यक्ष, मॉब लिंचिंग जैसे मुद्दे भी इसीलिए उठाए जा रहे हैं। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के नेता के बयान को लेकर लोग विरोध कर रहे हैं और कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

विराट कोहली के फैन ने रोहित शर्मा के फैन को बैट से पीट-पीट कर मार डाला, RCB पर किया था कमेंट: लोगों ने कहा- कोहली को गिरफ्तार करो

सोशल मीडिया पर शनिवार (14 अक्टूबर 2022) को जब #Arrest Kohli (अरेस्ट कोहली) को ट्रेंड करने लगा तो यूजर अचंभित रह गए। दरअसल, क्रिकेटर कोहली के प्रशंसक और तमिलनाडु का रहने वाले 21 वर्षीय ने विराट कोहली (Virat Kohli) का मजाक उड़ाने पर अपने दोस्त की हत्या कर दी।

24 वर्षीय पी विग्नेश और एस धर्मराज नशे में थे। इस दौरान किसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस हो गई। इसी बाच विग्नेश ने रॉयल चैलेंजर बैंगलोर (RCB) और विराट कोहली (Virat Kohli) मजाक उड़ा दिया। इतने में धर्मराज ने अपना आपा खो दिया और विग्नेश को क्रिकेट के बल्ले से मारकर मौत के घाट उतार दिया।

कीलापालुर पुलिस का कहना है कि दोनों ने शराब पी रखी थी। प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि विग्नेश इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में मुंबई इंडियंस का समर्थन कर रहा था, जबकि धर्मराज RCB का समर्थक था। क्रिकेट को लेकर दोनों के बीच बहस हो गई।

पुलिस ने बताया, “विग्नेश को हकलाने वाले धर्मराज को बॉडी शेम करने की आदत थी। उस दिन उन्होंने आरसीबी टीम की तुलना धर्मराज की बोलने की कठिनाई से करते हुए कुछ टिप्पणी की थी। इससे धर्मराज गुस्सा हो गया और विग्नेश पर बोतल से हमला किया। बाद में उसने विग्नेश के सिर पर क्रिकेट के बल्ले से हमला किया।”

घटना को अंजाम देने के बाद धर्मराज मौके से फरार हो गया। पुलिस ने जब बुधवार (12 अक्टूबर 2022) को विग्नेश का शव बरामद किया, तब जाकर मामला सामने आया। धर्मराज के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर गुरुवार (13 अक्टूबर 2022) को उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पीड़ित के शव को पोस्टमार्टम अरियालुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल कराया गया।

इसके बाद सोशल मीडिया यूजर मजा लेने के लिए ट्विटर पर #Arrest Kohli को ट्रेंड कराने लगे। कई यूजर ने मीम शेयर किए। वहीं, कोहली कै फैंस इस ट्रेंड को लेकर भड़के हुए हैं और विराट का बचाव कर रहे हैं।

हनीट्रैप, सेक्स ट्रेड, धोखा, ब्लैकमेल और वसूली – ओडिशा की इस महिला ने 4 साल में खड़ा किया ₹30 करोड़ का साम्राज्य, कई BJD नेताओं से संपर्क का दावा

हनीट्रैप, सेक्स ट्रेड, धोखा, ब्लैकमेल और वसूली – ओडिशा की एक महिला ने इन्हीं माध्यमों का इस्तेमाल कर के अपने लिए करोड़ों का साम्राज्य खड़ा कर लिया। उक्त महिला का नाम है अर्चना नाग, जिसे गिरफ्तार भी कर लिया गया है। भाजपा ने इस मामले की CBI जाँच की माँग की है। कलाहांडी की इस 26 साल की महिला की कहानी किसी बॉलीवुड फिल्म से भी ज़्यादा रोचक है। कई राजनेताओं, फिल्म निर्माताओं और कारोबारियों से उसके संबंध हैं।

कई ऐसे अमीर लोग हैं, जिन्हें ब्लैकमेल कर के इस महिला ने अपना साम्राज्य बनाया। एक महिला और एक उड़िया फिल्म निर्माता की शिकायत पर उसे गिरफ्तार किया गया है। उसके साथ-साथ उसके पति के विरुद्ध भी पुलिस ने मामला दर्ज किया है। अर्चना नाग का काम था सोशल मीडिया के माध्यम से अमीरों को दोस्त बनाना और फिर उन्हें अपने जाल में फाँस कर अंतरंग तस्वीरें क्लिक कराना। फिर शुरू होता था ब्लैकमेल का खेल।

कुछ ही वर्षों में उसने 30 करोड़ रुपए की संपत्ति अर्जित कर ली। उसके आलीशान घर में एक सफ़ेद घोड़ा और कई ब्रीड के कुत्तों सहित कई लक्जरी कारें भी हैं। उसी की रैकेट में शामिल एक लड़की की शिकायत के बाद उसे गिरफ्तार किया गया है। उड़िया फिल्म निर्माता श्रीधर मार्ता अब इस मामले पर फिल्म बनाने जा रहे हैं। भाजपा का आरोप है कि इस मामले में राज्य की सत्ताधारी पार्टी BJD के कई नेता-मंत्री शामिल हैं।

कॉन्ग्रेस भी जाँच की माँग कर रही है। अर्चना नाग का शानदार घर और उसमें के इंटीरियर व डेकोरेशन राज्य में चर्चा का विषय बने हुए हैं। लांजीगढ़ में जन्मी अर्चना का पालन-पोषण केसिंगा में हुआ। 2015 में उसने भुवनेश्वर का रुख किया। पहले उसने एक प्राइवेट सिक्योरिटी कंपनी में काम किया, फिर ब्यूटी पार्लर में जॉब किया। 2018 में बालासोर का जगबंधु चाँद से उसकी शादी हुई। ब्यूटी पार्लर में काम करते हुए ही उसने सेक्स रैकेट चलाना शुरू कर दिया था।

बताया जा रहा है कि राज्य के कई प्रभावशाली व्यक्तियों को अर्चना कंपनी देने के लिए महिलाएँ सप्लाई करती थी। जिस फिल्म प्रोड्यूसर ने उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिससे उसने 3 करोड़ रुपए माँगे थे। मात्र 4 साल में उसने 30 करोड़ रुपए की संपत्ति अर्जित कर ली। उसके बैंक खाते खँगाले जा रहे हैं। भाजपा का दावा है कि 25 BJD विधायक उसके नेटवर्क में शामिल हैं। उसका पति एक कार शोरूम चलाता है।

साथ में नंगी तस्वीरें और वीडियो डाल कर ये माँ-बेटी कमाती है ₹7.36 लाख का महीना, 5 मिनट चैट का चार्ज ₹4603: कोरोना में काम गया तो आया था आईडिया

UK में एक माँ-बेटी ऐसी है, जो ऑनलाइन प्लेटफार्म पर साथ में नंगी तस्वीरें डाल कर 8000 पाउंड्स (7.36 लाख रुपए) की कमाई करती है। 55 वर्षीय जेसिका जो और 24 वर्षीय फोनिक्स राय ब्लू अक्सर साथ स्नान करते हुए तस्वीरें भी डालती हैं और लोग ‘OnlyFans’ प्लेटफॉर्म पर इन तस्वीरों और वीडियोज देखने के लिए सब्स्क्राइब भी करते हैं। साथ ही वो अंतःवस्त्रों (ब्रा और पैंटी) में भी पोज देते हुए तस्वीरें क्लिक करवाती हैं।

जब ये दोनों ऑनलाइन आती हैं तो इनके फैंस इनसे 5 मिनट चैट करने के लिए 50 पाउंड्स (4603.68 रुपए) तक पे करते हैं। जेसी एक ग्लैमर मॉडल हैं, जिन्होंने अपनी बेटी को ये आईडिया दिया था। असल में उन्हें 2020 में काम नहीं मिल रहा था, जब कोरोना वायरस महामारी अपने शीर्ष पर था। तब उनके दिमाग में ये विचार कौंधा। फिर दोनों ने साथ में एक सेक्सुअल पोज देते हुए वीडियो डाला और लोगों की प्रतिक्रियाओं ने उन्हें हैरान कर दिया।

अब यही उन दोनों की कमाई का जरिया बन गया है। जेसी ने बताया कि महामारी के कारण उनके ग्लैमर शूट्स रद्द हो गए थे, जिसके बाद उन्होंने कुछ अलग करने का सोचा। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि प्रतिक्रिया इतनी जबरदस्त होगी। उन्होंने कहा कि वो और उनकी बेटी एक-दूसरे के साथ नंगी और ब्रा-पैंटी में पोज देने को लेकर खुश हैं। उन्होंने बताया कि वैसे भी वो घर में नंगी घूमती रही हैं, इसीलिए उन्हें इसकी आदत है।

उन्होंने बताया कि पहले तो लोग उन्हें भला-बुरा कहते थे, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें समझ आ गया कि वो लोग क्या कर रही हैं और नकारात्मक कमेंट्स कम हो गए। वहीं बेटी ने बताया कि उनकी माँ का ये आईडिया उन्हें जबरदस्त लगा था। उन्होंने देखा कि ये कोई नहीं कर रहा है। बेटी के शब्दों में, उनकी माँ के साथ उनका बॉन्ड अलग तरह का है। मॉडल होने से पहले उसकी माँ जेसी ब्यूटी शॉप चलाती थीं और बारटेंडर का काम भी करती थीं। वो 14-14 घंटे काम करती थीं।

भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने 7वीं बार अपने नाम किया एशिया कप, स्मृति-रेणुका के तूफान में उड़ा श्रीलंका: दीप्ति शर्मा बनीं ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’

भारतीय क्रिकेट टीम ने 7वीं बार एशिया कप अपने नाम किया है। अबकी हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में ये सफलता मिली है। फाइनल में भारत ने श्रीलंका को मात दी। ये टूर्नामेंट T20 फॉर्मेट में हुआ। टॉस श्रीलंका की टीम ने जीता और पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया, लेकिन 20 ओवरों में वो मात्र 69 रन ही बना सकी। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने मात्र 8.3 ओवर में सिर्फ 2 विकेट खो कर इस लक्ष्य को हासिल कर लिया।

भारतीय टीम की तरफ से सलामी बल्लेबाज स्मृति मंदना ने 51 रनों की अर्धशतकीय पारी खेली। उन्होंने मात्र 25 गेंदों पर 6 चौके और 3 छक्कों की बरसात करते हुए श्रीलंकाई गेंदबाजी की धज्जियाँ उड़ा दी। वो अंत तक नाबाद भी रहीं। अंत में कप्तान हरमनप्रीत कौर ने 14 गेंदों पर नाबाद 11 रन बना कर उनका साथ दिया। एक अन्य सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा मात्र 5 रन ही बना सकीं, जबकि तीसरे नंबर पर उत्तरी जेमिमा रोड्रिगेज मात्र 2 रन बना कर चलती बनीं।

वहीं पहले गेंदबाजी करते हुए भारतीय टीम का प्रदर्शन शानदार रहा। 11 में से श्रीलंका की 9 बल्लेबाज दहाई अंकों के आँकड़े तक पहुँचने में विफल रहीं। रेणुका सिंह ने 3 ओवर में मात्र 5 रन देकर 3 विकेट झटक लिए, वहीं राजेश्वरी गायकवाड़ और स्नेह राणा ने 4-4 ओवरों फेंके। दोनों को दो-दो विकेट मिले। हेमलता को कोई विकेट नहीं मिला, लेकिन उन्होंने 3 ओवरों में मात्र 8 रन देकर किफायती गेंदबाजी की। श्रीलंका की तरफ से 10वें नंबर पर उतरीं इनोका रणवीरा ने सर्वाधिक 18 रनों की पारी खेली।

हरमनप्रीत कौर ने गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण को जीत का क्रेडिट देते हुए कहा कि भारत के लिए पहली गेंद से ही ये दोनों अच्छा रहा। उन्होंने कहा कि हम उन्हें एक भी अतिरिक्त रन नहीं देना चाहते थे और हर एक गेंद हमारे लिए महत्वपूर्ण था। दीप्ति शर्मा ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ और रेणुका सिंह ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुनी गईं। श्रीलंका की कप्तान चमारा अट्टापट्टू ने कहा कि अपनी टीम की बल्लेबाजी से वो खासी हताश हैं, जबकि गेंदबाजी अच्छी रही।

‘CM बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने अपनी जाति को OBC में शामिल किया’- जदयू अध्यक्ष ने जो कहा, जानें उसकी सच्चाई

बिहार की सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) पर झूठा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि 2014 में पीएम मोदी ने देश में घूम-घूमकर कहा था कि वे अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) से हैं।

ललन सिंह ने कहा कि गुजरात में कोई EBC नहीं है, केवल OBC है। ये OBC में भी नहीं थे। जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने अपनी जाति को OBC में शामिल कर लिया था। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को ‘डुप्लीकेट’ कहा और कहा कि वे ऑरिजिनल नहीं हैं।

पटना में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “भारतीय जनता पार्टी का जो चरित्र है, वो गड़बड़ है। हाथी का दो दाँत होता है, एक खाने वाला और एक दिखाने वाला। 2014 के चुनाव में देश के प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदी… ये डुप्लीकेट आदमी देश भर में घूम-घूम के कह रहे हैं कि हम अति पिछड़ा हैं।”

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोध घांची जाति से हैं, जिसे गुजरात सरकार द्वारा ओबीसी के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। अन्य अभिलेखों से पता चलता है कि ललन सिंह यह कहकर झूठ बोल रहे हैं कि राज्य के सीएम के रूप में नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में उनकी जाति को OBC की सूची में शामिल किया गया था।

रिकॉर्ड बताते हैं कि नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री बनने से काफी पहले, यानी जुलाई 1994 में ही मोध घांची जाति को OBC के रूप में वर्गीकृत किया गया था। 25 जुलाई 1994 को राज्य सरकार के सामाजिक न्याय विभाग ने कई जातियों को OBC की सूची में जोड़ा था। मोध घांची जाति उनमें से एक थी।

इस संबंध में गुजरात सरकार के सामाजिक न्याय विभाग ने प्रस्ताव संख्या SSP/1194/1411/A, दिनांक 25/07/1994 जारी किया था। गुजरात सरकार के इस प्रस्ताव के संबंधित पेज को यहाँ दिया जा रहा है, जो गुजराती भाषा में है। गुजरात सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग की वेबसाइट पर पूर्ण प्रस्ताव को यहाँ देखा जा सकता है।

घांची जाति को OBC में शामिल करने के लिए गुजरात सरकार का प्रस्ताव

गौरतलब है कि मंडल आयोग की रिपोर्ट के बाद वीपी सिंह सरकार के दौरान ओबीसी आरक्षण दिया गया था। इससे पहले केवल एससी और एसटी आरक्षण के पात्र थे। मंडल आयोग की रिपोर्ट आने के बाद से अधिक जातियों को ओबीसी में शामिल करने की प्रथा शुरू हो गई थी।

इसके बाद संबंधित राज्यों ने ओबीसी जातियों की पहचान की और उन्हें 1990 के दशक में सूची में शामिल किया था। इसी तरह पीएम की जाति मोध घांची गुजरात में 1994 में OBC के रूप में सूचीबद्ध होने वाली जातियों में एक थी।

यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष ने मोदी की ओबीसी स्थिति पर सवाल उठाया है। 2014 में भी कॉन्ग्रेस (Congress) नेता शक्ति सिंह गोहिल (Shakti Singh Gohil) ने आरोप लगाया था कि नरेंद्र मोदी ‘फर्जी ओबीसी’ हैं। उन्होंने दावा किया था कि मोदी के सीएम बनने से पहले मोध घांची जाति ओबीसी सूची में नहीं थी। उस समय गुजरात सरकार ने स्पष्टीकरण जारी किया था।

इसके बाद अप्रैल 2019 में बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो मायावती (Mayawati) ने भी कहा था कि मोदी मूल रूप से पिछड़ी जाति के नहीं थे। जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने अपनी जाति को अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में जोड़ा था। मायावती ने कहा था कि चुनावों में राजनीतिक लाभ लेने के लिए मोदी ने अपनी सवर्ण जाति को OBC में शामिल किया था।

BJP से डरता हूँ माँ… पप्पू दिवस और राहुल गाँधी की ‘बेइज्‍जती’: 7 साल बाद ScoopWhoop के खिलाफ कॉन्‍ग्रेस, कानूनी कार्रवाई की धमकी

कॉन्‍ग्रेस पार्टी अक्‍सर यह राग अलापती रहती है कि भाजपा लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कमजोर करने पर तुली हुई है। पार्टी नेता राहुल गाँधी लगातार मोदी सरकार के कार्यकाल में प्रेस की आजादी को लेकर हमलावर रहते हैं। पिछले वर्ष गाँधी परिवार वाली पार्टी ने प्रेस स्वतंत्रता को लेकर भारत की रैंकिंग में गिरावट को लिए काफी हो-हल्‍ला मचाया था।

यह हालाँकि किसी से छिपा नहीं है कि जवाहरलाल नेहरू के समय से लेकर वर्तमान सोनिया गाँधी के युग तक, प्रेस की आलोचना स्वीकार करने के मामले में कॉन्‍ग्रेस पार्टी अत्यधिक असहिष्णु रही है। नेहरू-गाँधी वंश ने असहमति के लिए कभी कोई जगह नहीं छोड़ी और जब भी प्रेस ने उनके कुकर्मों से पर्दा उठाने की कोशिश कि पार्टी ने तमाम मीडिया संगठनों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की है।

हाल के ज्‍वलंत उदाहरण से यह और स्‍पष्‍ट हो जाता है। मशहूर पत्रकार अर्नब गोस्‍वामी ने सोनिया गाँधी को महज उनके पहले नाम से संबोधित किया था और कॉन्ग्रेस की पूरी फौज उनके पीछे पड़ गई थी। अर्नब को एक मनगढ़ंत टीआरपी घोटाला मामले में फँसाया गया और उनके खिलाफ कई एफआईआर की गईं।

कॉन्ग्रेस पार्टी कितनी असहिष्‍णु है, इसका एक और उदाहरण हाल ही में सामने आया है। कॉन्ग्रेस के कुछ नेताओं ने ट्विटर पर दिल्ली स्थित डिजिटल मीडिया कंपनी ScoopWhoop को राहुल गाँधी के कुछ पुराने मीम्स को लेकर कानूनी कार्रवाई की धमकी दी है।

अप्रैल 2015 में, ScoopWhoop ने एक आर्टिकल प्रकाशित किया था, जिसका शीर्षक था: “राहुल गाँधी के ये मीम्स आपको बताएँगे कि उन्हें विशेष ट्रीटमेंट की आवश्यकता क्यों है।” इस आर्टिकल में राहुल (Congress-ScoopWhoop row on Rahul) के कई मजेदार मीम्‍स साझा को साझा किया गया था। हालाँकि, यह आश्चर्यजनक है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म द्वारा साझा किए गए मीम्स पर प्रतिक्रिया देने में कॉन्‍ग्रेस नेताओं और उनके समर्थकों को सात साल से ज्‍यादा का समय लग गया।

कॉन्‍ग्रेस के युवा नेता श्रीनिवास बीवी ने शु्क्रवार ( 14 अक्टूबर) को 2015 के उन्‍हीं मीम्स के लिए ScoopWhoop की खिंचाई की। कॉन्‍ग्रेस के वफादार ने ScoopWhoop को ‘दुर्भावनापूर्ण, झूठे और मानहानिकारक’ ट्वीट्स’ को 24 घंटे के भीतर सभी प्लेटफार्मों पर माफी के साथ हटाने के लिए कहा। नेता ने साथ ही कहा कि ऐसा नहीं करने पर कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

श्रीनिवास की ही राह चलते हुए पूर्व पत्रकार और पार्टी की वर्तमान राष्ट्रीय प्रवक्ता, सुप्रिया श्रीनेत ने भी वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी (Congress-ScoopWhoop row on Rahul) पर पोस्ट किए गए मीम्‍स में से एक का स्क्रीनशॉट साझा कर ScoopWhoop की आलोचना की। उन्‍होंने कंपनी से ट्वीट को हटाने और माफी माँगने के लिए कहा।

@standon1983 हैंडल से एक ट्विटर यूजर राहुल गाँधी के मीम्स के स्क्रीनशॉट को प्रकाशित करने वाले पहले लोगों में से एक था। कॉन्‍ग्रेस चाटुकार ने न केवल स्क्रीनशॉट साझा किए बल्कि उसने मीम्‍स प्रकाशित होने के वक्‍त (2015) के को-फाउंडर और सीईओ पर यौन उत्पीड़न के मामले को भी उठाया।

इसी ट्वीट ने संभवतः कॉन्‍ग्रेस में बदले की आग को हवा दी और अचानक से राहुल गाँधी के प्रति प्‍यार और वफादारी को जगा दिया, जिसके बाद डिजिटल मीडिया साइट को कानूनी कार्रवाई की धमकी दी गई। मीडिया आउटलेट को परेशान करने के प्रयास में कॉन्‍ग्रेस समर्थकों का यह व्यवहार शायद ही आश्चर्यजनक है क्योंकि यह पार्टी पारंपरिक रूप से प्रेस की आलोचना के प्रति बेहद असहिष्णु रही है।

नेहरू-गाँधी वंश ने असहमति के लिए कभी भी कोई जगह नहीं छोड़ी है और जब भी प्रेस ने उनके कुकर्मों के खिलाफ ऊँगली उठाई हैं, पार्टी ने सख्ती से कार्रवाई की है। वास्तव में, ऑपइंडिया पहले ही कॉन्‍ग्रेस पार्टी द्वारा किए गए प्रेस स्वतंत्रता के उल्लंघन की एक सूची तैयार की थी।

जवाहरलाल नेहरू के देश के पहले प्रधानमंत्री बनने के साथ शुरू हुआ तानाशाही प्रवृत्तियों का चक्र सात दशकों के बाद भी पार्टी के जीन में पनपता रहा है। अब समय आ गया है कि लोग यह समझें कि कॉन्‍ग्रेस पार्टी के फ्री स्‍पीच का चैंपियन होने का दावा महज एक अतिशयोक्ति है।

जिस धर्म में कन्या पूजन होता है, वहाँ करवा चौथ पर उँगली मत उठाओ: यहाँ हलाला और ननों का शोषण नहीं होता, किसी तस्लीमा नसरीन को देश नहीं छोड़ना पड़ता

प्रत्येक वर्ष आश्विन महीने की पूर्णिमा के बाद चतुर्थी तिथि को ‘करवा चौथ’ का त्योहार मनाने की परंपरा भारत में रही है, खासकर पश्चिमी और उत्तर भारतीय महिलाओं में। कार्तिक के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाने वाला ये त्योहार फिल्मों और टीवी सीरियलों के माध्यम से देश-विदेश की महिलाओं में और लोकप्रिय हुआ। इस दिन महिलाएँ अपने पति की लंबी उम्र की सलामती के लिए उपवास रखती हैं और रात को चन्द्रमा के दर्शन के उपरांत पति के हाथों जल ग्रहण कर इसका समापन करती हैं।

भारतीय इतिहास में सामान्यतः ये परंपरा रही है कि पूर्व काल में पुरुष जीविकोपार्जन से लेकर युद्ध तक जैसे कार्यों के लिए दूर जाया करते थे और महीनों बाद लौटते थे। उनमें से कइयों के लौटने पर भी संशय रहता था। वो महिलाओं-बच्चों को सुरक्षित घर पर छोड़ जाते थे। ऐसे में ये महिलाएँ उनकी लंबी उम्र और सलामती के लिए इस तरह के उपवास करती थीं। ये परंपरा आज तक चली आ रही है। अब जैसा कि हिन्दू धर्म के हर त्योहार के साथ होता है, इसे भी बदनाम करने की साजिश चल निकली है।

ऐसा करने वालों में ताज़ा नाम जुड़ा है लेखिका तस्लीमा नसरीन का, जिन्हें इस्लाम के रूढ़िवाद पर पुस्तक लिखने के लिए बांग्लादेश ने निकाल बाहर किया और वो हिन्दुओं के देश भारत में शरण लेकर रहती हैं। लेकिन, इस्लामी कट्टरपंथियों का रोज निशाना बनने वाली तस्लीमा नसरीन खुद को न्यूट्रल दिखाने के लिए हिन्दू त्योहार पर निशाना साध रही हैं, बिना कुछ जाने-समझे। ये अलग बात है कि इसके बावजूद हिन्दू उन्हें देश से बाहर नहीं निकाल रहे और न ही उन्हें हत्या की धमकियाँ दे रहे।

लेकिन हाँ, सही भाषा में तथ्यों के साथ जवाब देने का अधिकार हमें हमारा संविधान और धर्म, दोनों देता है। दरअसल, बॉलीवुड अभिनेत्रियों ने करवा चौथ का त्योहार मनाते हुए तस्वीर साझा की थी। उसे ट्वीट करते हुए तस्लीमा नसरीन ने ट्विटर पर लिखा, “ये लोकप्रिय और अमीर महिलाएँ भारतीय उपमहाद्वीप के सभी वर्ग और जाति के लाखों महिलाओं एवं लड़कियों पर अपना प्रभाव डालती हैं, उस करवा चौथ त्योहार को मना कर, जो सबसे ज्यादा लोकप्रिय पितृसत्तात्मक रीति-रीवाज है। “

तस्लीमा नसरीन ने करवा चौथ त्योहार को पितृसत्ता का शीर्ष करार दिया। सबसे पहली बात तो ये कि पितृसत्ता में कोई बुराई नहीं है। पिता की सत्ता होनी चाहिए। पुरुष का शासन होना चाहिए, ठीक उसी तरह मातृसत्ता भी होनी चाहिए। माताओं का शासन भी होना चाहिए। दोनों एक-दूसरे के पूरक होते हैं, विरोधी नहीं। तभी हमारे यहाँ अर्धनारीश्वर का कॉन्सेप्ट है, जहाँ शिव-पार्वती मिल कर आधे-आधे स्त्री-पुरुष का रूप धारण करते हैं।

हिन्दू धर्म की बात से पहले कुछ सवाल। पितृसत्ता को चुनौती देने का अर्थ क्या है? किसी गर्भवती अभिनेत्री का नंगी होकर तस्वीर क्लिक कराना? या फिर किसी मॉडल का छोटे कपड़ों में मैगजीन के कवर पर आना? किसी महिला द्वारा खुलेआम सड़क पर पुरुषों को चाँटे मारना, या फिर झूठे दहेज़-बलात्कार के मामलों में फँसाना? जिस तरह रणवीर सिंह के न्यूड फोफोज का पितृसत्ता से कुछ लेना-देना नहीं है, उसी तरह महिलाओं का कम कपड़े पहनने का मातृसत्ता से कोई लेना-देना नहीं है। हाँ, ये व्यक्तिगत चॉइस का मामला हो सकता है, लेकिन इसका विरोध करना भी किसी का व्यक्तिगत चॉइस ही है।

फिर मातृसत्ता का उदाहरण क्या है? इसका उदाहरण है कि सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति के परम साहित्य वेदों की कई ऋचाएँ महिलाओं ने लिखीं। किस अन्य मजहब में ऐसा मिलता है? इसका उदाहरण है कि सती सावित्री ने यमराज के द्वार से अपने पति को वापस छीन लिया। इसका उदाहरण है कि सीता और द्रौपदी जैसी महिलाओं के अपमान करने वाले का पूरा वंश नाश हो गया। इसका उदाहरण है कि महारानी लक्ष्मीबाई जैसी वीरांगनाओं ने मातृभूमि की रक्षा के लिए तलवार उठाया।

अब तस्लीमा नसरीन जवाब दें। नवरात्री के अवसर पर हिन्दू धर्म में कन्या पूजन का विधान है। इसके तहत कुँवारी लड़कियों को घर में आमंत्रित कर भोजन कराया जाता है और उनके पाँव धोए जाते हैं? जैसे कन्याओं के पाँव धोने में कुक भी बुरा नहीं है, वैसे ही पति की लंबी उम्र की कामना के लिए प्यार से उपवास भी बुरा नहीं। कन्याओं के पाँव धोकर उन्हें ये एहसास दिलाया जाता है कि वो मातृशक्ति हैं, उनका दर्जा सबसे ऊपर है और उनके लिए लोगों के मन में सर्वोच्च सम्मान की भावना होनी चाहिए।

इसी तरह हिन्दू धर्म में ‘सुमंगली पूजा’ भी होती है। दक्षिण भारत के ब्राह्मण परिवारों में ये लोकप्रिय है। घर की विवाहित महिलाओं को ‘सुमंगली’ कहा जाता है, अर्थात घर का मंगल करने वाली। इसके तहत 3, 5, 7 या 9 महिलाओं को बुला कर उन्हें सम्मानित किया जाता है, उनकी पूजा की जाती है। इसके तहत घर की दिवंगत महिलाओं की प्रार्थना की जाती है, ताकि उनका आशीर्वाद मिले। इसमें किन्हें भाग लेना है और किन्हें नहीं, इन्हें लेकर नियम-कानून पर भी उँगली उठाने वाले निशाना साध सकते हैं। लेकिन, हिन्दू धर्म में कई पर्व-त्योहारों में पुरुषों के लिए भी तमाम नियम-कानून हैं।

आध्यात्मिक मामलों पर लिखने वाले युवा लेखक अंशुल पांडेय ने भी तस्लीमा नसरीन को अच्छा जवाब दिया है। उन्होंने याद दिलाया है कि भारत में देवी की पूजा सिर्फ नवरात्रि या दीवाली पर ही नहीं होती है, प्रतिदिन की जाती है। माँ सरस्वती को विद्या की देवी कहा गया है और सारे छात्र-छात्राएँ उनकी पूजा करते हैं, क्या ये पितृसत्ता है? घर में लड़की का जन्म होने पर छठे दिन देवी की पूजा की जाती है। ऐसे अनेकों विधि-विधान हैं।

इस्लाम में महिलाओं की क्या इज्जत है, हम जानते हैं। हलाला के नाम पर उन्हें ससुर और देवर के साथ रात गुजारने को मजबूर किया जाता है। ईसाई मजहब में चर्चों में ही पादरियों द्वारा ननों के यौन शोषण की बातें सामने आती रहती हैं। जबकि सनातन में मातृ शक्ति को ही प्रकृति कहा गया है, समस्त शक्तियों का स्रोत बताया गया है। माएँ अपने संतान के लिए छठ करें या पति के लिए करवा चौथ, उनके प्यार के बीच आने वाले हम या तस्लीमा नसरीन कौन होती हैं?

अगर आप दुर्गा सप्तशती पढ़ेंगे तो पाएँगे कि ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति ही आदिशक्ति से हुई है। जिस धर्म में कन्या पूजन होता है, वहाँ करवा चौथ पर उँगली नहीं उठाई जा सकती। यहाँ लड़कियाँ पूजित भी होती हैं, पूजा भी करती हैं। यहाँ Feminism और Patriarchy के लिए जगह नहीं है, अर्धनारीश्वर के लिए है। महिलाओं की सुरक्षा पुरुषों का कर्तव्य बताया गया है। इसीलिए तरह, महिलाएँ भी पुरुषों की सुरक्षा की कामना करती हैं। तभी रक्षा बंधन जैसे त्योहार अस्तित्व में हैं।