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‘साजिद खान ने अपना प्राइवेट पार्ट टच करवाया था’: पुलिस के पास पहुँची शर्लिन चोपड़ा, कहा- तब हिम्मत नहीं थी, लेकिन आज है

बॉलीवुड के प्रोड्यूसर-डायरेक्टर साजिद खान (Sajid Khan) के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली अभिनेत्री शर्लिन चोपड़ा (Sherlyn Chopra) ने गुरुवार (20 अक्टूबर 2022) को पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है। चोपड़ा ने समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) को बताया, “पहले मुझमें हिम्मत नहीं थी साजिद खान जैसे बड़े लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की। मीटू (MeToo) कैंपन के बाद महिलाओं का हौंसला बढ़ा है। उसे जेल में होना चाहिए।”

उन्होंने बताया, “मैंने हाल ही में MeToo के आरोपित साजिद खान के खिलाफ यौन शोषण और धमकी देने की शिकायत दर्ज करवाई है। इस दौरान पुलिस ने मुझसे पूछा कि यह घटना कब हुई थी। इस पर मैंने जवाब दिया कि यह 2005 में हुई थी।। उन्होंने मुझसे आगे पूछा कि मुझे उन तक पहुँचने में इतना समय क्यों लगा? मैंने कहा कि तब मुझमें साजिद खान जैसे बड़े नाम के खिलाफ यौन शोषण की शिकायत दर्ज कराने की हिम्मत नहीं थी।” उन्होंने कहा, “2018 में मीटू कैंपन के बाद मुझे ये हिम्मत मिली, जब मैंने महिलाओं को अपना अनुभव साझा करते हुए देखा और सुना।”

अभिनेत्री के शब्दों में, “कोई भी उन मीडिया इंटरव्यू को पढ़ सकता है या सोशल मीडिया पर जाकर यह जान सकते हैं कि MeToo आरोपित साजिद खान ने उन महिलाओं के साथ कितनी गंदी गंदी बातें कीं। इनमें से कुछ महिलाओं से उसने पूछा कि आप दिन में कितनी बार सेक्स करती हैं, उनके कितने बॉयफ्रेंड हैं। मुझे उसने अपना प्राइवेट पार्ट दिखाया और उसे टच करवाया। सवाल यह उठता है कि क्या एक महिला घटना के सालों बाद भी अपना दर्द साझा नहीं कर सकती? जाहिर है वह कर सकती है। तब मुझमें हिम्मत नहीं थी, लेकिन आज है। आज मुझे लगता है कि साजिद खान हो या राज कुंद्रा, अगर उन्होंने गलत किया है, तो मैं उनके खिलाफ आवाज उठा सकती हूँ।”

उन्होंने खान के खिलाफ सबूत होने के सवाल पर कहा, “वह मेरे लिए एक प्रोफेशनल मीटिंग थी। मैं एक डायरेक्टर के साथ प्रोफेशनल मीटिंग करने के लिए हिडेन कैमरा लेकर नहीं जाती। लेकिन उसके लिए यह एक प्रोफेशनल मीटिंग नहीं थी। वह फराह खान का भाई है, जो शाहरुख खान और सलमान खान की चहेती है। तो इनके सामने मेरी क्या औकात है? मैं सिर्फ एक आउटसाइडर हूँ और उनके लिए कुछ नहीं हूँ। हम अपनी सच्चाई कैसे साबित करें?”

एक्ट्रेस ने आगे कहा, “जिस तरह हार्वे वेनस्टेन को 23 साल जेल की सजा सुनाई गई है, मैं चाहती हूँ कि साजिद खान को भी उसी तरह जेल में डाला जाए। उसकी सजा की अवधि जज उन सभी महिलाओं के बयानों को ध्यान में रखते हुए तय करें, जिन्होंने उसके खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। मैं चाहती हूँ कि देश की जनता इस बात को जाने कि कोई भी आरोपित, चाहे वह अमीर हो या गरीब, साजिद खान हो या राज कुंद्रा कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।”

गौरतलब है कि जब से साजिद खान को टेलीविजन के सबसे चर्चित और विवादास्पद रिएलिटी शो ‘बिग बॉस 16’ में एक कंटेस्टेंट के रूप में लिया गया है, तब से सोशल मीडिया पर हंगामा मचा हुआ है। कनिष्का सोनी, शर्लिन चोपड़ा और मंदाना करीमी (Mandana Karimi) ने ‘बिग बॉस 16’ में साजिद खान को एक प्रतिभागी के रूप में लेने पर निर्माताओं के प्रति नाराजगी जाहिर की थी। ये उन अभिनेत्रियों में शामिल हैं, जिन्होंने साजिद खान पर MeeToo का आरोप लगाया था।

जिहाद पर ‘गीता पाठ’ के बाद शिवराज पाटिल ने पत्रकारों को दिखाई हेकड़ी, गृह मंत्री रहते दिल्ली सीरियल ब्लास्ट के समय धड़ाधड़ बदल रहे थे सूट

मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाल यूपीए सरकार में शिवराज पाटिल (Shivraj Patil) गृ​ह मंत्री हुआ करते थे। 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमलों (26/11 Mumbai Attack) के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। उससे पहले जब उसी साल दिल्ली में सीरियल ब्लास्ट (Delhi Serial Bomb blast 2008) हुए थे तो वे बार-बार अपने कपड़े बदलने को लेकर विवादों में आ गए थे। अब उन्हीं पाटिल ने जिहाद पर ‘गीता ज्ञान’ दिया है। उनका कहना है कि गीता में श्रीकृष्ण ने अर्जुन से जो कहा वह ‘जिहाद’ ही था।

जब इस बयान पर विवाद मचा तो पाटिल ने पत्रकारों को ही इसके लिए जिम्मेदार ठहरा दिया। इस संबंध में सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जिहाद का संदेश देने की बात मीडिया कह रही, मैं नहीं कह रहा। इस दौरान पत्रकारों को चुप रहने के लिए कहते हुए भी वे दिखाई पड़े। न्यूज एजेंसी एएनआई का यह वीडियो आप नीचे देख सकते हैं।

वैसे कॉन्ग्रेस नेताओं के लिए हिंदू धर्म को अपमानित करना नया नहीं है। भगवा आतंकवाद की थ्योरी भी कॉन्ग्रेसियों ने उसी तरह गढ़ी थी, जैसे पाटिल ने गुरुवार (20 अक्‍टूबर 2022) को जिहाद को गीता से जोड़ा। उन्‍होंने यह बताने की कोशिश की कि जिहाद का कॉन्‍सेप्‍ट गीता का भी हिस्सा है और श्रीकृष्‍ण ने अर्जुन को इसका पाठ पढ़ाया था।

पाटिल ने कॉन्‍ग्रेस नेता मोहसिना किदवई (Mohsina Kidwai) की किताब के विमोचन के मौके पर यह व‍िवादास्‍पद बयान द‍िया। उन्‍होंने कहा, “इस्लाम में जिहाद के बारे में बहुत चर्चा हुई है। भारतीय संसद में हमारा काम जिहाद के बारे में नहीं, बल्कि आदर्शों के बारे में है। जिहाद तभी पैदा होता है जब स्वच्‍छ दिमाग से किए गए सभी प्रयास विफल हो जाते हैं।”

पूर्व गृह मंत्री ने आगे कहा, “ऐसा कहा जाता है कि जब सभी प्रयास विफल हो जाते हैं, तो एक-दूसरे के खिलाफ शक्‍ति का उपयोग कर सकते है।” पाटिल दरअसल शक्ति और जिहाद की अवधारणा के बीच झूठी समानता का चित्रण कर रहे थे। जिहाद इस्लामवादियों द्वारा दुनिया भर में गैर-मुसलमानों को मारने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है।

पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने दावा किया, “यह (जिहाद) केवल कुरान में नहीं है, बल्कि महाभारत, गीता में भी है। श्रीकृष्ण भी अर्जुन से जिहाद के बारे में बात करते हैं और यह चीज केवल कुरान या गीता में ही नहीं, बल्कि ईसाई धर्म में भी है।” पाटिल ने कहा, “अपनी पूरी कोशिश करने के बावजूद, अगर कोई आपके पास हथियार लेकर आता है, तो आप वहाँ से भाग के नहीं जा सकते। उसको आप जिहाद भी नहीं कह सकते हैं और आप इसे गलत भी नहीं कह सकते।”

बाद में उन्‍होंने हालाँकि बल प्रयोग को सहीं नहीं बताते हुए खुद को ठीक करने का प्रयास किया और कहा, “हाँ, किसी को कुछ समझाने के लिए बल प्रयोग नहीं करना चाहिए। यही मोहसिना जी ने अपनी किताब में लिखा है।”

गाजियाबाद गैंगरेप निकला फेक: प्रॉपर्टी विवाद की वजह से 5 लोगों को फँसाया, झूठी कहानी गढ़ने में महिला के मददगार थे आजाद और उसके साथी

गाजियाबाद के कथित गैंगरेप मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। जाँच में सामने आया है कि खुद को पीड़िता बताने वाली महिला ने संपत्ति विवाद के चलते शाहरुख, शाहरुख के भाई जावेद, औरंगजेब, जहीर उर्फ ढोला और दीनू को फँसाने की साजिश रची थी। पुलिस ने गुरुवार (20 अक्टूबर 2022) को फर्जी गैंगरेप मामले में 5 लोगों को फँसाने वाली महिला के साथ साजिश करने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।

गुरुवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस ने बताया कि गाजियाबाद में महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म नहीं हुआ है, बल्कि संपत्ति विवाद में महिला ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर यह साजिश रची। इस मामले में पुलिस ने महिला के दोस्त आजाद और उसके दो दोस्तों गौरव और अफजल को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने कहा है कि गिरफ्तार किए गए लोगों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।

मेरठ रेंज के आईजी प्रवीण कुमार ने इस घटना का खुलासा करते हुए मीडियाकर्मियों को बताया, “इन लोगों ने मिलकर षड्यंत्र रचा था। पुलिस जाँच में इन लोगों ने अपना जुर्म कबूल किया है। उनके कबूलनामे के अलावा इस घटना से संबंधित फोरेंसिक और वैज्ञानिक साक्ष्य मिलने के बाद चीजें स्पष्ट हो गई हैं।”

उन्होंने कहा, “आजाद नाम के शख्स के रिकॉर्ड की जाँच करने पर पता चला कि उसने कई आधार कार्ड बनाए हैं। उसने महिला के पति के नाम से भी आधार कार्ड बनवाया है। इसको लेकर अलग से मामला दर्ज किया गया है। पहले से चल रहे एक कानूनी केस में बाधा डालने के लिए यह साजिश रची गई थी। उस पर भी अलग से एक मामला दर्ज किया गया है। हम साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।”

पुलिस द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए आईजी प्रवीण कुमार ने कहा, “पूरी टीम ने इस मामले में बहुत अच्छा काम किया है। खासतौर पर मैं क्राइम ब्रांच के एसपी का उल्लेख करना चाहूँगा, जिन्होंने बुधवार (19 अक्टूबर 2022) को इस मामले को पूरा समय दिया और अस्पताल गए। गुरुवार सुबह उन्होंने सभी मेडिकल रिपोर्ट्स को समझने की कोशिश की। इस मामले की सभी एंगल से जाँच करने के बाद हमने अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इन लोगों द्वारा इस्तेमाल की गई कार के साथ कुछ और चीजें भी बरामद की गई हैं। इस मामले में आगे की जाँच जारी है।”

उन्होंने आगे कहा, “इस मामले को लेकर तरह-तरह की भ्रामक जानकारियाँ फैलाई जा रही थी। जब जाँच चल रही होती है तो हम बीच में प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं कर सकते। लेकिन इस मामले को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा था। इसलिए हमने सभी तथ्यों को प्रेस के सामने रखना जरूरी समझा।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आजाद ने रेप केस को और ज्यादा पब्लिसिटी देने के लिए पेटीएम के जरिए एक शख्स को पैसे भी दिए थे। इसके सबूत भी मिले हैं। महिला के लापता होने के बाद आजाद का मोबाइल भी स्विच ऑफ था और जब ऑन किया गया तो उसकी लोकेशन वही थी, जहाँ महिला पड़ी मिली थी। आजाद महिला को अपने दोस्तों के साथ ले गया था और वह 2 दिन उनके साथ रही। आजाद के खिलाफ पहले से ही तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं।

पुलिस के मुताबिक, महिला को पहले गाजियाबाद के एक सरकारी अस्पताल में मेडिकल जाँच के लिए ले जाया गया और फिर मेरठ जाने को कहा गया, लेकिन उसने दोनों जगहों पर मेडिकल जाँच कराने से इनकार कर दिया। उसके जिद करने पर उसे दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जाँच में पता चला कि पीड़िता ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर 5 लोगों को फँसाने की साजिश रची थी, जिनके खिलाफ वह पहले से ही जमीनी विवाद का केस लड़ रही है।

बता दें कि 18 अक्टूबर की सुबह करीब साढ़े तीन बजे नंदग्राम थाने को सूचना मिली कि आश्रम रोड पर एक महिला पड़ी है। पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और महिला को अस्पताल ले गई। महिला ने दावा किया था कि उसे 5 लोगों ने अगवा किया और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया, जिन्हें वह जानती है। इस मामले में पुलिस ने शाहरुख, शाहरुख के भाई जावेद, औरंगजेब, जहीर उर्फ ढोला और दीनू के खिलाफ गैंगरेप का मामला दर्ज किया था। उसके बयान के आधार पर पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार भी किया था।

मिल रही थी धमकियाँ, फिर भी ईसाइयत को ठुकरा 500 लोगों ने की घर वापसी: ओडिशा में शुद्धि महायज्ञ के बाद प्रबल प्रताप जूदेव ने पखारे चरण

ओडिशा में अनुसूचित जनजाति (schedule tribes) वर्ग के 173 परिवारों ने घर वापसी (Ghar Wapsi) की है। जनजातीय समाज के इन परिवारों के करीब 500 सदस्य गुरुवार (20 अक्टूबर 2022) को हिंदू धर्म में लौटे। धर्मांतरण कर ईसाई बनाए गए इन परिवारों की घर वापसी के लिए सुंदरगढ़ जिले के ग्राम जमूरला में विश्व कल्याण महायज्ञ का आयोजन किया गया था।

यह आयोजन धर्म जागरण समन्वय विभाग ओडिशा ने आर्य समाज, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के सहयोग से किया था। शुद्धि कार्यक्रम के बाद प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने चरण पखारकर सभी लोगों की हिंदू धर्म में वापसी करवाई। जूदेव छत्तीसगढ़ बीजेपी के महामंत्री हैं। छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड सहित कई राज्यों में वे जनजातीय समाज के धर्मांतरित लोगों की घर वापसी के लिए अभियान चला रहे हैं।

अखिल भारतीय घर वापसी अभियान के प्रमुख जूदेव ने ऑपइंडिया को बताया कि जमूरला में जिन लोगों ने घर वापसी की है वे भगवान बिरसा मुंडा के समाज से आते हैं। यहाँ घर वापसी के लिए कार्यक्रम न करने का दबाव डाला जा रहा था। उन्होंने बताया, “अभियान से जुड़े लोगों को धमकियाँ मिल रही थी। बावजूद करीब 500 लोगों की घर वापसी करवाने में हम सफल रहे।”

शुद्धि कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के प्रदेश अध्यक्ष राज कुमार बरपंडा, राष्ट्रीय जनजातीय आयोग के पूर्व अध्यक्ष नंदकुमार साय, विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक गाँधी, आचार्य अंशुदेव आर्य (अध्यक्ष छत्तीसगढ़ प्रतिनिधि सभा), आचार्य डॉ. कमल नारायण आर्य, कपिल आर्य, आचार्य राकेश, सुभाष दुआ (शुद्धि महासभा दिल्ली), विनय भुइयां (क्षेत्र प्रमुख धर्म जागरण समन्वय विभाग ओडिशा), विक्रम आचार्य (प्रांत संयोजक धर्म जागरण प्रमुख) भी शामिल हुए।

सुंदरगढ़ में आयोजित विश्व कल्याण महायज्ञ में शामिल लोग

गौरतलब है कि जशपुर राजपरिवार से जुड़े प्रबल प्रताप के दिवंगत पिता दिलीप सिंह जूदेव भी इसी तरह धर्मांतरित हिंदुओं की घर वापसी का अभियान चलाते थे। वे वाजपेयी सरकार में मंत्री भी रहे। अगस्त 2013 में उनके निधन के बाद से इस सिलसिले को प्रबल प्रताप सिंह जूदेव आगे बढ़ा रहे हैं।

विश्व कल्याण महायज्ञ में घर वापसी करवाते प्रबल प्रताप सिंह जूदेव

बीते साल ऑपइंडिया से बातचीत में प्रबल प्रताप जूदेव ने बताया था, “पिता जी के दिवंगत होने के बाद से मैं इस कार्य को आगे बढ़ा रहा हूँ। छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों में हमलोग 10 हजार से अधिक लोगों की इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए घर वापसी करवा चुके हैं। कोरोना महामारी के कारण बीच में करीब दो साल हमारा यह अभियान रुक गया था। अब फिर से हम इसे गति दे रहे हैं। यह पवित्र काम है। देश निर्माण का काम है। इसे मेरे पिता ने शुरू किया और इससे जुड़कर मैं बहुत गौरवान्वित हूँ।”

दिवाली में पटाखों पर बैन, पर AAP कार्यकर्ता ‘नए मंत्री’ के लिए करें आतिशबाजी: केजरीवाल सरकार पर BJP ने साधा निशाना, पूछा- इससे ऑक्सीजन निकली क्या

दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने आदेश जारी कर पटाखे फोड़ने और इसकी बिक्री पर रोक लगाते हुए जुर्माने के साथ ही सजा का भी ऐलान किया था। हालाँकि, गुरुवार (20 अक्टूबर 2022) को आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता आतिशबाजी करते नजर आए हैं। आप (AAP) कार्यकर्ताओं ने यह आतिशबाजी पटेल नगर से विधायक राजकुमार आनंद को केजरीवाल सरकार में मंत्री बनाए जाने के बाद की है। जिस पर, भाजपा केजरीवाल सरकार पर हमलावर हैं।

दरअसल, धर्मांतरण विवाद और हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले राजेंद्र पाल गौतम को हटाए जाने के बाद राजकुमार आनंद को केजरीवाल सरकार में मंत्री बनाया गया है।

अरविंद केजरीवाल के नए-नवेले मंत्री बने राजकुमार आनंद के समर्थकों द्वारा आतिशबाजी किए जाने के बाद भाजपा नेताओं ने कहा है कि अरविंद केजरीवाल को सिर्फ हिंदुओं के त्योहारों में समस्या होती है। दिवाली में पटाखे जलाने से प्रदूषण फैलता है लेकिन उनके पार्टी नेताओं की आतिशबाजी से नहीं।

दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता हरीश खुराना ने केजरीवाल सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा है “हम हिंदू दिवाली पर पटाखे जलाएँ तो प्रदूषण फैलेगा। तुम्हारे कार्यकर्ता मंत्री बनने पर पटाखे जलाएँ तो ठीक। वैसे मंत्री जी द्वारा जलाए पटाखे तो स्पेशल होंगे इससे प्रदूषण नहीं फैलेगा क्यों? सारे कानून वैसे हिंदुओं के त्यौहारों के लिए होते हैं।”

वहीं, भाजपा नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने ट्वीट कर कहा है, “हिंदू दिवाली पर पटाखे जलाते है तो प्रदूषण होगा। अरविंद केजरीवाल उन्हें जेल भेजेगा। लेकिन, मंत्री बनने की खुशी में अगर पटाखे जलाए जाते हैं तो उसमें से ऑक्सीजन निकलेगा। केजरीवाल तुम्हारा हिंदू विरोधी चेहरा आज फिर सामने आ गया, तुम्हें दिक्कत दिवाली से है पटाखों से नहीं।”

इसके अलावा, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा है, “प्रदूषण के कारण हिंदुओं द्वारा दिवाली पर पटाखे जलाने पर प्रतिबंध। लेकिन, अगर आप (AAP) के राजकुमार आनंद के चमचे उनके मंत्री पद का जश्न मनाने के लिए पटाखे फोड़ते हैं तो यह धर्मनिरपेक्ष प्रदूषण है? वैसे, आप के शासन वाले पंजाब में पराली जलाने से एक्यूआई 9 दिनों में 3 गुना बढ़ गया, जबकि दिल्ली में एक्यूआई घट गया है।

बता दें, दिल्ली सरकार में पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने बुधवार (19 अक्टूबर 2022) को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि दिल्ली में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जा रहा है। इस दौरान जो लोग पटाखों के पूर्ण प्रतिबंद्ध (उत्पादन/भंडारण/बिक्री) का उल्लंघन करते पाए जाएँगे उनके खिलाफ एक्प्लोसिव एक्ट के सेक्शन 9 B के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी। जिसमें, 5 हजार रूपए का जुर्माना और 3 साल की सजा का प्रावधान है साथ ही जो व्यक्ति पटाखे जलाते हुए पाए जाएँगे उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 268 के तहत कार्रवाई की जाएगी जिसमें 200 रूपए का जुर्माना और 6 महीने की सजा का प्रावधान है।

एशिया के सबसे बड़े कब्रिस्तान में अवैध रूप से रह रहे 250+ लोग: सिर्फ 25 के पास भारतीय पहचान पत्र, बाकियों के बांग्लादेशी और रोहिंग्या होने की आशंका

आगरा के पंचकुइयाँ कब्रिस्तान की जमीन पर 100 परिवारों के 250 से अधिक लोग बसे हुए हैं। इसको लेकर खुलासा हुआ है कि इनमें से सिर्फ 25 लोग ही भारतीय नागरिक हैं। रिपोर्ट में दावा किया है कि जिन लोगों के पास भारतीय नागरिकता नहीं है, उनमें से अधिकांश बांग्लादेशी या रोहिंग्या घुसपैठिए हो सकते हैं।

पंचकुइयाँ कब्रिस्तान को एशिया का सबसे बड़ा कब्रिस्तान कहा जाता है। इस कब्रिस्तान में दफन किए गए लोगों के परिजनों द्वारा अवैध अतिक्रमण की कई बार शिकायत की गई थी। इसके बाद कब्रिस्तान प्रबंधन समिति ने हाल ही में घोषणा की कि वे अब कब्रों पर स्थायी ढाँचे का निर्माण नहीं होने देंगे। 

कब्रिस्तान समिति के सचिव मोहम्मद ज़हरुद्दीन बाबर सैफी का कहना है, “हमने तय किया है कि किसी को भी सीमेंटेड कब्रिस्तान बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी और हमने लोगों से पुराने सीमेंटेड कब्रिस्तानों को भी जल्द से जल्द ध्वस्त करने के लिए कहा है।”

दरअसल, करीब 100 परिवारों कब्रिस्तान की इस जमीन पर अवैध रूप से रह रहे हैं। हालाँकि, वक्फ बोर्ड की नोटिस के बाद स्थानीय खुफिया इकाइयों (LIU) ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। इसके साथ ही प्रशासन भी जल्द ही कार्रवाई कर सकता है।

इस कब्रिस्तान में अस्थायी झोपड़ियाँ बनाकर रहने वाले लोग गुब्बारे बेचते हैं और रेस्टोरेंट में खाना बनाने जैसे कम वेतन वाले काम करते हैं। इन परिवारों के बच्चे अक्सर सड़कों पर भीख माँगते हुए देखे जाते हैं। 

मीडिया रिपोर्ट्स में यह बताया गया है कि यहाँ रहने वाले सिर्फ 20-25 लोगों के पास ही आधार कार्ड है, जबकि शेष अन्य लोगों के पास अपनी पहचान या नागरिकता साबित करने के लिए कोई दस्तावेज नहीं है। यही नहीं, इनमें से कई परिवार ऐसे हैं, जिन्होंने कब्रिस्तान की जमीन पर अवैध निर्माण किया है।

इस मामले में महफूज संगठन के कॉ-ऑर्डिनेटर चाइल्ड राइट एक्टिविस्ट नरेश पारस को बंगलादेशी घुसपैठियों के बारे में जानकारी मिली थी। इसके बाद उन्होंने इन घुसपैठियों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए मुख्यमंत्री और आगरा के जिलाधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने अधिकारियों से मामले में तत्काल कार्रवाई करने की अपील की है।

झोंपड़ी पाने के लिए हिंदुओं को मुस्लिम के रूप में पेश किया गया

दैनिक भास्कर ने नरेश पारस के हवाले से कहा है कि कई हिंदू परिवारों ने कब्रिस्तान की जमीन पर झोपड़ियाँ बनवाने के लिए खुद को मुस्लिम के रूप पेश किया है। उन्होंने कहा है, “यहाँ कई परिवार ऐसे भी हैं, जो हिंदू हैं। नाम बदलकर मुस्लिम बन कर रह रहे हैं। कमेटी ने निजी स्वार्थ के चलते सालों से यहाँ अवैध बस्ती बसा कर रखी है।”

एसएसपी के आदेश पर एलआईयू (स्थानीय खुफिया इकाइयों) की टीम मामले की जाँच कर रही है। वहीं, जिनके पास पहचान पत्र नहीं हैं या जो लोग अपनी पहचान छिपाने की कोशिश कर रहे हैं, वे बांग्लादेशी घुसपैठिए या रोहिंग्या हो सकते हैं। इस बारे में जाँच पूरी होने के बाद प्रशासन उचित कदम उठाएगा।

शुक्रवार को चलेगा अतिक्रमण विरोधी अभियान

गत 13 अक्टूबर 2022 को एसीएम पंचम व अन्य अधिकारियों की टीम ने कब्रिस्तान का दौरा किया था। निरीक्षण के बाद उन्होंने यहाँ रहने वाले लोगों को चेतावनी दी थी कि दस्तावेज नहीं दिखाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस निरीक्षण के बाद वक्फ बोर्ड की एक टीम ने भी रविवार (18 अक्टूबर 2022) को इस कब्रिस्तान का दौरा करते हए नोटिस चस्पा किया है। यहाँ रहने वाले लोगों को तीन दिनों के भीतर पहचान दस्तावेज जमा करने के बाद कब्रिस्तान की जमीन पर रहने की अनुमति देने को कहा गया है। 

इस मामले में एडीएम सिटी अंजनी श्रीवास्तव का कहना है, “कब्रिस्तान समिति ने पत्र लिखा है। शिकायत के आधार पर मामले की जाँच की जा रही है। जाँच पूरी होने के बाद प्रशासन उचित कार्रवाई करेगा। जिनके पास पहचान पत्र हैं वे कब्रिस्तान समिति की अनुमति से रह सकते हैं।” वहीं, कब्रिस्तान समिति के सचिव मौलाना जुबैर ने कहा है, “यहाँ रहने वाले लोग बेहद गरीब हैं। प्रशासन जो भी फैसला करेगा, हम उसका सम्मान करेंगे।”

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने ही कई बार भारत में अवैध घुसपैठियों की समस्या को लेकर आगाह किया है। हाल ही में ऑपइंडिया ने नेपाल के निकट सीमावर्ती जिलों में मुस्लिम समुदाय की बढ़ती जनसंख्या पर रिपोर्ट्स की एक सीरीज जारी की थी। इन रिपोर्ट्स से यह सामने आया था कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का एक बड़ा वर्ग अवैध घुसपैठिया हो सकता है।

‘मैंने META वाली रिपोर्ट को नहीं दिया समर्थन’: द वायर के ‘फर्जीवाड़े’ पर बोले प्राइवेसी रिसर्चर, व्हॉट्सएप पर वायरल संदेश को झूठा बताया

‘मेटा वर्सेज द वायर’ मामला खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। अब वी आनंद नाम के एक प्राइवेसी र‍िसर्चर ने 20 अक्टूबर को ट्विटर पर इस दावे को खारिज कर दिया कि उन्होंने मेटा विवाद में ‘द वायर’ के देवेश कुमार के काम का समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि कुछ व्हाट्सएप ग्रुप ऐसे दावों पर चर्चा कर रहे हैं।

आनंद ने कहा, “मैं व्हाट्सएप ग्रुुप में कुछ दावों को देख रहा हूँ कि मैंने मेटा पर देवेश के काम का समर्थन किया है। वे दावे फर्जी हैं, और मैंने केवल अधिक विवरण के लिए जोर दिया जैसे प्रणेश ने किया, जो संयोग से कभी सामने नहीं आया।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं वास्तव में लगातार धोखाधड़ी से थक गया हूँ । यह वास्तव में हतप्रभ करने वाला है कि ये सब अब स्पष्ट रूप से एक मृत कहानी पर विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए हो रहा है। इस बारे में सिद्धार्थ वरदराजन को सूचित कर दिया है ।”

यह संभव है कि उनके 18 अक्टूबर के ट्वीट की व्‍याख्‍या गलत तरीके से की गई, उनके ट्वीट से संभवतः यह अनुमान लगाया गया कि वायर की मेटा और बीजेपी के बारे में उनकी फर्जी रिपोर्ट के दावों का उन्‍होंने सम‍र्थन किया था। बाद में वेबसाइट ने इस स्‍टाेेरी को हटा लिया था। उन्होंने कहा था,” टेक रिपोर्टिंग की बात करें तो यह न्यूजरूम की दर्दनाक हकीकत। प्रोसेस फेलियर का पूरी तरह से ब्रेकडाउन। मैंने विवरणों की समीक्षा की है, और जितने चौंकाने वाले तथ्‍य हैं, वे सच हैं।”

एक बार फिर हम अनुमान ही लगा रहे हैं, क्योंकि इस समय, इस ‘मेटा बनाम द वायर’ विवाद में, सब कुछ बहुत ही बेतरतीब तरीके से है।

दरअसल आनंद एक रिसर्चर कनिष्क का हवाला दे रहे थे, जिसके बारे में द वायर ने दावा किया था कि उसने मेटा के संचार प्रमुख एंडी स्टोन के ईमेल को मान्य किया है। हालाँकि ट्विटर पर कनिष्क ने बयान दिया कि उनके नाम का ईमेल मनगढ़ंत था और उन्होंने कभी भी द वायर के लिए कुछ भी सत्यापित नहीं किया। इसके बाद द वायर ने एक बयान जारी किया कि वह रिपोर्ट को वापस ले रहा हैं और एक आंतरिक जाँच बिठा रहा है।

द वायर ने अपनी रिपोर्ट में भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय को मेटा से ताकतवर बता दिया था। हालाँकि द वायर ने अपनी साइट से इस स्‍टोरी को हटाने का निर्णय लिया। भारी फजीहत करवाने के बाद द वायर ने कहा कि वो अब मेटा के खिलाफ रिपोर्ट बनाने के लिए इस्तेमाल हुए हर दस्तावेज और हर सूत्र पर आंतरिक समीक्षा करने वाले हैं।

द वायर ने बयान जारी कर बताया कि उनकी मेटा कवरेज को लेकर जो सवाल उठे, उसके लिए वह एक आंतरिक समीक्षा करेंगे। इसमें दस्तावेजों, सूचनाओं, स्रोत सामग्री और स्रोतों की जाँच की जाएगी।

बता दें कि वामपंथी वेबसाइट ने अपनी ही स्टोरीज पर ऐसा एक्शन तब लिया जब डोमेन एक्सपर्ट्स और इंडिपेंडेंट रिसर्चर्स ने उनकी स्टोरी खारिज की। साथ ही बताया कि शायद इस स्टोरी को गढ़ने के लिए फर्जी दस्तावेजों का प्रयोग हुआ। एक्सपर्ट्स के ऐसे दावे के बाद ही मेटा ने अपने प्लेटफॉर्म से स्टोरी हटाई और आंतरिक समीक्षा की बात कहकर अप्रत्यक्ष रूप से मान लिया कि मेटा पर की गई उनकी स्टोरी कितनी गलत थी।

अहमदाबाद नगर निगम ने ‘अफजल खान नो टेकरो’ का नाम बदलकर किया ‘शिवाजी नो टेकरो’: वक्फ समिति ने जताई आपत्ति, कहा- यह 400-500 साल पुरानी दरगाह

गुजरात उच्च न्यायालय ने बुधवार (19 अक्टूबर 2022) को अहमदाबाद नगर निगम (AMC) को निर्देश दिया एक आवासीय कॉलोनी का नाम ‘अफजल खान नो टेकरो’ से बदलकर ‘शिवाजी नो टेकरो’ पर मुस्लिम समुदाय की आपत्ति पर विचार करे। अहमदाबाद में। दरअसल, 14 अक्टूबर को AMC की नगर नियोजन समिति ने नाम बदलने का प्रस्ताव रखा और इसे अनुमोदन के लिए स्थायी समिति के पास भेज दिया।

AMC की इस कार्यवाही पर अहमदाबाद सुन्नी मुस्लिम वक्फ समिति ने आपत्ति जताई और कहा कि यह क्षेत्र पिछले 400-500 वर्षों से मौजूद है। याचिकाकर्ता वक्फ ने दावा किया कि न्यू क्लॉथ मार्केट के सामने स्थित सारंगपुर में वह 3,116 वर्ग मीटर भूभाग का वह मालिक है।

इसके अतिरिक्त, उस एरिया में एक कब्रिस्तान, पीर अफजल खान नाम का एक मस्जिद और पीर अफजल खान नाम का एक ‘दरगाह’ होने की बात कही। वक्फ की याचिका के अनुसार, मस्जिद और ‘दरगाह’ का महत्वपूर्ण ऐतिहासिक महत्व है और इसे 400-500 साल पहले बनाया गया था।

याचिका में यह भी कहा गया है कि मस्जिद और दरगाह की सीमा से सटी कुछ झोपड़ियाँ और इमारतें हैं, जो मुस्लिम और हिंदू से संबंधित हैं। इनमें से कुछ अतिक्रमण करने वाले हैं और अन्य वक्फ के किरायेदार हैं। याचिका में दावा किया गया है कि वक्फ की जमीन लंबे समय से ‘अफजल खान नो टेकरो’ के नाम से मशहूर है।

हालाँकि, याचिकाकर्ता ने अदालत की सुनवाई में कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दे को हल किया जा सकता है, यदि निगम सभी प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रखते हुए अपने प्रतिनिधित्व के अनुसार निर्णय लेता है। इस पर अदालत ने AMC को एक सप्ताह के भीतर वक्फ समिति के तर्क के बारे में त्वरित निर्णय लेने का आदेश दिया।

क्या यह वही अफजल खान है, जिसे छत्रपति शिवाजी महाराज ने मारा था?

किसी भी रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि याचिका में जिस पीर अफजल खान का जिक्र किया गया है, क्या वह वही है, जिसे छत्रपति शिवाजी महाराज ने मारा था या फिर यह कोई स्वघोषित सूफी संत का नाम है, जो मजार के साथ सामने आया है।

वक्फ बोर्ड यह दावा कर रहा है कि साइट पर मौजूद मस्जिद लगभग 500 साल पहले की है, जो समय के हिसाब से छत्रपति शिवाजी महाराज से पहले की है। जाहिर सी बात है कि ‘शिवाजी नो टेकरो’ नाम पर आपत्ति केवल इसलिए है, क्योंकि इस हिंदू राजा ने 10 नवंबर 1659 को आदिलशाह के सेनापति अफजल खान को मार डाला था।

यह अफजल खान कभी अहमदाबाद नहीं गया। हालाँकि, छत्रपति शिवाजी महाराज ने मुगलों द्वारा परोक्ष रूप से शासित सूरत पर धन जुटाने के उद्देश्य से दो बार चढ़ाई की। अहमदाबाद के कुछ क्षेत्रों का नाम छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर रखना कम-से-कम विचार करने योग्य है, क्योंकि राजा ने स्वराज्य के विस्तार की भविष्यवाणी की थी।

वहीं, अत्याचारी अफजल खान कभी अहमदाबाद नहीं गया। अफजल खान का सामान्य रूप से भारतीय संस्कृति और सभ्यता से कोई लेना-देना नहीं था और ना ही गुजरात या अहमदाबाद से उसका कोई संबंध था।

छत्रपति शिवाजी महाराज ने प्रतापगढ़ की लड़ाई में एक ‘अफजल खान’ को मारा था

प्रतापगढ़ की लड़ाई 10 नवंबर 1659 को छत्रपति शिवाजी महाराज और आदिलशाही सेनापति अफजल खान की सेनाओं के बीच महाराष्ट्र के सतारा शहर के पास लड़ी गई थी। इस लड़ाई में अफजल खान की सेना अधिक होने के बावजूद शिवाजी महाराज की सेना विजयी हुई थी।

इसके बाद सन 1657 में उदारवादियों द्वारा वर्णित ‘सोने का दिल वाला’ मुगल आक्रांता औरंगजेब दक्कन छोड़कर उत्तर की ओर लौटने के लिए बाध्य हुआ था। छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने साम्राज्य का विस्तार करने के लिए कोंकण और अन्य आदिलशाही राज्यों पर जीत हासिल करना शुरू कर दिया। इसके बाद एक साम्राज्य का उदय हुआ था।

ईरान: 16 साल की छात्रा ने अयातुल्ला खामेनेई की शान में गीत गाने से किया इनकार, सुरक्षाबलों ने पीट-पीटकर ले ली जान

ईरान में सरकार की ज्‍यादती इन दिनों चरम पर है। वहाँ पहले से ही हिजाब नहीं पहनने को लेकर बवाल मचा हुआ है और लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। वहीं महसा अमिनी के बाद एक और लड़की की पीटकर हत्या करने का नया मामला सामने आ गया है।

कथिततौर पर ईरान के स्कूल में (13 अक्टूबर) को सुरक्षाबलों ने एक 16 वर्षीया छात्रा असरा पनाही की महज इसलिए बेरहमी से पिटाई कर दी, क्‍योंकि उसने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के पक्ष में गीत गाने से इनकार कर दिया। घटना के बाद से देश में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

द गाज‍िर्यन की र‍िपोर्ट के अनुसार, कोर्डिनेटिंग कॉि‍न्‍सल ऑफ ईरानियन टीचर्स ट्रेड एसोसिएशन ने कहा,  ”16 वर्षीय असरा पनाही की मृत्यु 13 अक्टूबर 2022 को अर्दबिल में शाहद गर्ल्स हाई स्कूल में सुरक्षा बलों के छापे के बाद हुई। दरअसल लड़कियों के एक समूह ने ईरान के सर्वोच्च नेता, अयातुल्ला अली खामेनेई की प्रशंसा में गीत गाने से मना कर दिया था।”

बकौल एसोसिएशन, ”जब उन्होंने इनकार किया, तो सुरक्षाबलों ने छात्राओं को पीटना शुरू कर दिया, जिससे कई लड़कियाँ घायल हो गईं और उन्‍हें अस्पताल ले जाया गया। अन्य को गिरफ्तार कर लिया गया। शुक्रवार (14 अक्‍टूबर 2022)  को, पनाही की कथित तौर पर चोटों के कारण अस्पताल में मौत हो गई।”

हालाँकि ईरानी अधिकारियों ने इस बात से इनकार किया है कि छात्रा की मौत के लिए देश के सुरक्षाबल जिम्मेदार हैं। असरा पनाही के कथित चाचा होने का दावा करने वाले एक शख्स ने टीवी पर कहा है कि उसकी मौत जन्म से ही मौजूद दिल की बीमारी से हुई है।

बीबीसी की र‍िपोर्ट के अनुसार, हाल ही में प्रदर्शन के दौरान मारी गईं दो अन्य किशोर लड़कियों के रिश्तेदारों (नीका शकरमी और सरीना इस्माइलज़ादेह) ने सरकारी टीवी पर इसी तरह केबयान दिए थे कि इन घटनाओं के ल‍िए सुरक्षा बल जिम्मेदार नहीं थे।

ईरान में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का केंद्र स्‍कूली छात्राएं रही हैं। सरकार इनके हौसले को कुचलना चाह‍ती है। इसकी के चलते ईरानी अधिकारियों ने पिछले हफ्ते देश भर के स्कूलों पर छापे की एक श्रृंखला शुरू की है और छात्राओं को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है।

अल्लू अर्जुन की ‘पुष्पा 2’ मोस्ट अवेटेड फिल्मों की लिस्ट में सबसे टॉप पर: शाहरुख खान की ‘पठान’ और सलमान खान की ‘टाइगर 3’ को पीछे छोड़ा

दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपरस्टार अल्लू अर्जुन (Allu Arjun) की फिल्म ‘पुष्पा’ ने बॉक्स ऑफिस पर कई बड़ी फिल्मों को पटखनी देकर शानदार कमाई का रिकॉर्ड बनाया है। दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत के दर्शकों का फिल्म को भरपूर प्यार मिला। हर कोई फिल्म के दूसरे पार्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।

अल्लू अर्जुन की फिल्म ‘पुष्पा 2’ को आने वाले समय में पैन इंडिया की मोस्ट अवेटेड फिल्मों में से एक माना जा रहा है। इस बीच खबर है कि मोस्ट अवेटेड फिल्मों की लिस्ट में अल्लू अर्जुन की फिल्म ‘पुष्पा 2′ ने शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) की ‘पठान’ और सलमान खान (Salman Khan) की ‘टाइगर 3’ को पीछे छोड़ दिया है।

औरमैक्स मीडिया ने 18 अक्टूबर 2022 ​को अपने ट्विटर हैंडल पर एक लिस्ट जारी की। इस लिस्ट में ‘पुष्पा 2’ साल 2023 की मोस्ट अवेटेड फिल्मों में टॉप पर है। ‘पुष्पा 2’ के बाद दूसरे स्थान पर शाहरुख खान की फिल्म ‘पठान’ और तीसरे स्थान पर सलमान खान की ‘टाइगर 3’ है। इसके अलावा, चौथे और पाँचवे स्थान पर शाहरुख खान की फिल्म ‘जवान’ और ‘डंकी’ है।

बता दें कि ‘पुष्पा: द राइज’ 17 दिसंबर 2021 को सिनेमा घरों में रिलीज हुई थी। सुकुमार के डायरेक्शन में बनी एक्शन-थ्रिलर फिल्म ‘पुष्पा’ को हिंदी, तमिल, तेलुगू, मलयालम और कन्नड़ भाषा में रिलीज किया गया था।

‘पुष्पा’ ने दुनिया भर में कुल 325 करोड़ रुपए का वर्ल्ड वाइड कलेक्शन किया था। इस फिल्म ने सिर्फ हिंदी भाषा में ही 100 करोड़ रुपए से अधिक का बिजनेस किया था। नॉर्थ बेल्ट में 100 करोड़ रुपए का आँकड़ा छूने वाली ‘पुष्पा’ 5वीं साउथ इंडियन फिल्म है।

‘पुष्पा’ की तरह ’83’ फिल्म को भी हिंदी के अलावा सभी दक्षिण भारतीय भाषाओं और 3डी फॉर्मेट में रिलीज किया गया था। रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण की यह फिल्म 1983 विश्व कप में भारतीय क्रिकेट टीम की जीत पर आधारित थी, जो दर्शकों को प्रभावित नहीं कर पाई।

इस फिल्म ने 19 दिनों में केवल 101.32 करोड़ रुपए की कमाई की थी। वहीं, अल्लू अर्जुन की फिल्म मात्र 2 दिनों में वर्ल्ड वाइड बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपए से अधिक का बिजनेस करने में कामयाब रही।