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शी जिनपिंग तानाशाह, उसको पद से हटाओ: चीन में लगे ‘राष्ट्रपति’ के खिलाफ नारे, भड़की वामपंथी सरकार ने आवाज दबाने के लिए दूतावास को थाने में बदला

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) को तीसरे कार्यकाल के लिए चुने जाने से पहले एक शख्स ने राजधानी बीजिंग के एक पुल पर उनके विरोध में पोस्टर लगा दिया। पोस्टर में जिनपिंग की जीरो-कोविड पॉलिसी की आलोचना की गई थी। इसको लेकर अब चीन में और दुनिया भर में विरोध शुरू हो गया है। वहीं, चीन विरोध को दबाने के लिए दुनिया भर के देशों में स्थित अपने दूतावासों में पुलिस थाना और कोर्ट स्थापित कर रहा है।

बता देें कि 16 अक्टूबर को चीन के राष्ट्रपति के रूप में जिनपिंग को तीसरे कार्यकाल के चुना गया था। इसके शुरू होने से पहले 13-14 अक्टूबर को बीजिंग के सिटॉन्ग ब्रिज पर एक बैनर लगाया गया था, जिसमें उन्हें तानाशाह बताते हुए उन्हें राष्ट्रपति पद से हटाने की बात कही गई थी। अब यह बैनर चीन के सोशल मीडिया ग्रुप पर वायरल हो रहा है।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, VoiceofCN नाम से गुमनाम चीनी नागरिकों का एक समूह लोकतंत्र समर्थक इंस्टाग्राम अकाउंट चलाता है। इस ग्रुप ने कहा कि जिनपिंग को हटाने के वाले नारे चीन के कम-से-कम आठ शहरों में सामने आए हैं। इन आठ शहरों में शेन्ज़ेन, शंघाई, बीजिंग, ग्वांगझू के साथ-साथ हॉन्गकॉन्ग भी शामिल है।

दिलचस्प बात यह है कि ये नारे ज्यादातर सार्वजनिक बाथरूम में या स्कूलों के नोटिस बोर्ड पर लिखे देखे गए हैं। ऐसा ही एक नारा बीजिंग में चाइना फिल्म आर्काइव आर्ट सिनेमा के बाथरूम में लिखा मिला। उस पर लिखा था ‘तानाशाही को खारिज करे’।

इसके अलावा, विदेशों में रहने वाले चीनी नागरिक भी इस बैनर को खूब शेयर कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक शी जिनपिंग के खिलाफ ये नारे अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान के 200 से अधिक विश्वविद्यालयों में भी देखे गए। एक अमेरिकी विश्वविद्यालय में हाथ से लिखे नारे में कहा गया ‘हम चीन के लोग बिना किसी सेंसरशिप के अपनी मन की बात कहना चाहते हैं’।

उधर चीन ने लोगों की आवाज दबाने के लिए अपने दूतावासों एवं वाणिज्य दूतावासों में पुलिस चौकी खोला है। इसके साथ ही वहाँ कोर्ट भी संचालित करने का आदेश दिया गया, ताकि सरकार के खिलाफ किसी भी तरह की असहमति को दबाया जा सके।

इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म रिपोर्टिका की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन विदेशी धरती पर चीन की कॉम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना की सरकार के खिलाफ आवाज को दबाकर वहाँ की लोकतांत्रिक मामलों में हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रहा है।

जिस दिन जिनपिंग तीसरे कार्यकाल के लिए चुने गए, उसी दिन ब्रिटेन के मैनचेस्टर में हॉन्गकॉन्ग के लोकतंत्र समर्थक एक व्यक्ति को चीनी दूतावास में खींच लिया गया और उसे बुरी तरह पीटा गया। ब्रिटेन की संसद ने इस घटना को बेहद चिंताजनक बताया था। इस मामले को लेकर मैनचेस्टर पुलिस ने जाँच शुरू की है।

कंसुलेट ने अपने बचाव में कहा कि वह शख्स चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के खिलाफ अपमानजनक बैनर लहरा रहा था। बता दें कि बेल्ट एंड रोड इंनीशिएटिव (BRI) के तहत चीन ने कई देशों में लीगल सर्विस या कोर्ट स्थापित किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यूके, स्पेन और इटली में ये कोर्ट है।

इसके पहले चीन यूक्रेन, फ्रांस, जर्मनी, यूके, स्पेन, कनाडा और आयरलैंड जैसे विकसित देशों सहित विभिन्न देशों में पुलिस स्टेशन खोल चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन स्टेशनों के जरिए चीन उन देशों के चुनावी प्रक्रिया को भी प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।

बिहार के 11 मजदूरों को कश्मीर में बनाया गया बंधक: अब छोड़ने के लिए 1 लाख रुपए की माँग, वरना धमकी

बिहार में पलायन और बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा है। लोग अक्‍सर काम की तलाश में राज्‍य से बाहर जाते हैं। राज्‍य सरकार पलायन रोकने के लिए बड़े-बड़े वादे तो जरूर करती है, लेकिन इसको अमल में शायद ही कभी लाया जाता है। कई बार राज्‍य से बाहर भोले-भाले मजदूरों का फायदा भी लोग उठा लेते हैं। इसी कड़ी में एक नया मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि कश्‍मीर में बिहार के शेखपुरा के 11 मजदूरों को बंधक बनाया गया है और उन्‍हें छोड़ने के लिए 1 लाख से अधिक रूपए की माँग की गई है।

प्रभात खबर की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरमा थाना क्षेत्र के पानापुर गाँव के 11 युवकों को झारखंड के दंगवार गाँव का एक ठेकेदार काम दिलाने के बहाने दिल्ली ले गया था। वहाँ से सभी को कश्मीर भेज दिया गया। युवकों ने इसका विरोध किया तो सभी को कश्मीर में ही बंधक बना लिया गया और उनके परिजनों से फोन करके 1 लाख 20 हजार रुपए माँगे गए। परिजनों ने जब पैसे देने में असमर्थता दिखाई तो उन्हें धमकी दी गई कि दूसरी कंपनी के साथ 6 महीने का एग्रीमेंट कर मजदूरों को वहाँ भेज देंगे। अब सभी मजदूरों के परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है।

ईटीवी भारत का कहना है उनकी टीम श्रम संसाधन मंत्री सुरेंद्र राम के कार्यालय पहुँची थी, लेकिन 2 घंटे इंतजार करवाने के बाद मंत्री ने मुलाकात नहीं की। इस मामले में एनडीए गठबंधन में श्रम मंत्री रहे जीवेश म‍िश्रा ने नीतीश सरकार पर हमला बोला। उन्‍होंने कहा, ”बिहार सरकार को मामले में तुरंत कार्रवाई कर मजदूरों के घरवापसी के प्रयास करने चाहिए। इस मामले में श्रम मंत्री क्‍यों चुप है, ये तो वही जानें। हमारी सरकार के समय सऊदी अरब से भी मजदूरों को घर लाया गया था। ऐसे मामले में एनडीए सरकार संवदेनशील थी और तुरंत कार्रवाई की जाती थी।”

राहत की बात यह है कि इस मामले में शेखपुरा के एसपी कार्तिकेय शर्मा ने आश्वासन दिया है। उन्‍होंने कहा, ”इन लोगों को जम्‍मू-कश्‍मीर में कहाँ रखा गया है, इसकी जानकारी लेकर हम वहाँ के स्‍थानीय अधिकारी से संपर्क करने उनको रिहा कराने की कोशिश करेंगे। यहाँ से भी हम लोगों को कश्‍मीर भेज रहे हैं, ताकि उन्‍हें रिलीज करने की स्थिति में बच्‍चों को रिसीव किया जा सके।”

इससे पहले परिजनों ने शेखपुरा के डीएम सावन कुमार से मुलाकात कर उन्‍हें ज्ञापन सौंपा था और उनकी सकुशकल यहाँ वापस लाने की गुहार लगाई थी।

उल्लेखनीय है कि बिहार में कम्पनियों और फक्ट्रियों के आभाव में काम की भरी किल्लत रहती है, इसी वजह से मजदूरों को पलायन करना पड़ता है। हालाँकि अभी हाल में ही भाजपा का साथ छोड़ राजद से हाथ मिलाने वाले नीतीश कुमार ने 20 लाख लोगों को रोज़गार देने की बात कही थी।

बच्ची को जन्म दे महिला की मौत, इरशाद सहित 6 पर FIR: पीड़ित पिता का दावा- गैंगरेप कर गौमांस खिलाया, नमाज पढ़ने को किया मजबूर

17 अक्टूबर 2022 को राजस्थान के भरतपुर में बच्ची को जन्म देने के बाद एक महिला की मौत हो गई थी। अब इस मामले में नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। मृत महिला के पिता का दावा है कि उनकी बेटी को अगवा किया गया था। उसके साथ गैंगरेप हुआ। उसे गौमांस खिलाया गया। नमाज पढ़ने को मजबूर किया गया। उन्होंने पीट पीटकर अपनी बेटी की हत्या किए जाने का आरोप लगाया है।

पीड़ित पिता ने इस मामले में इरशाद, फैयाज, वहीद, उस्मान, अल्ली और कासम के खिलाफ सीकरी थाने में मामला दर्ज कराया है। पीड़ित पिता का आरोप है कि उनकी बेटी को करीब 9 महीने पहले अगवा कर लिया गया था। उसके बाद से वे उसकी तलाश कर रहे थे। चार महीने पहले एक अनजान नंबर से उनकी बेटी का कॉल आया था। उस समय उसने खुद को अगवा किए जाने की जानकारी दी थी। बताया था कि इरशाद अपने साथियों के साथ उसके अगवा कर ले आया है। गैंगरेप के बाद उसे जान से मारने की धमकी दी जा रही है। पिता के अनुसार गौमांस खिलाकर उनकी बेटी से जबरन नमाज पढ़वाया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार मामला दर्ज होने के बाद से आरोपित फरार हैं। 366, 376, 346 और 302 के तहत मामला दर्ज कर पुलिस जाँच कर रही है। शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। उल्लेखनीय है कि मृतका के पिता हरियाणा के झज्जर के रहने वाले हैं।

यह भी कहा जा रहा है कि मृत महिला 2021 में इरशाद के संपर्क में आई थी। उसके बाद उसने भागकर उससे शादी कर ली। इरशाद ट्रक ड्राइवर बताया जाता है। साथ ही पहले से शादीशुदा भी है।

इस मामले में पुलिस कुछ और कहानी बता रही है। रिपोर्ट के अनुसार जाँच अधिकारी रोहित कुमार का कहना है कि महिला ने बेला निवासी इरशाद के साथ करीब डेढ़ वर्ष पहले कोर्ट मैरिज की थी। दोनों पति-पत्नी के तौर पर रह रहे थे। सरकारी अस्पताल में डिलीवरी के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग के कारण उसकी मौत हो गई।

प्यास से तड़पते बच्चे को माँ ने पिलाई पेशाब, क्योंकि गले में टायर डाल जिंदा जलाए जा रहे थे सिख: जिन आँखों ने देखा 1984 का नरसंहार, उनको आज भी न्याय का इंतजार

सिख विरोधी दंगों (Anti Sikh Riots) की दहशत आज भी पीड़ितों की आँखों में झलकता है। उन दिनों के हालात को याद करके आज भी लोगों के रोएँ खड़े हो जाते हैं। इन दंगों में सैकड़ों लोगों की जानें गईं और सैकड़ों महिलाओं के साथ रेप और गैंगरेप जैसी घटनाओं को अंजाम दिया गया।

31 अक्टूबर 1984 को ऑपरेशन ब्लूस्टार के विरोध में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की उनके ही दो सिख सुरक्षाकर्मियों ने हत्या कर दी। इसके बाद देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी दंगे भड़क उठे थे। इन दंगों से सबसे अधिक प्रभावित दिल्ली हुआ था। कहा जाता है कि कॉन्ग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं की अगुवाई में दंगाइयों ने सिख पर ऐसा जुल्म ढाया कि वे याद कर आज भी सिहर उठते हैं।

दिल्ली के तिलक विहार में रहने वाली 55 साल की पप्पी कौर उन भयावह दिनों को याद कर रुआँसी हो उठती हैं। अक्टूबर का महीना था। वे अपने परिवार के साथ घर में खाना खा रही थीं। उसी वक्त भीड़ ने परिवार के सामने उनके पिता के गले में टायर डालकर आग लगा दिया। उनके 18 साल के भाई को भी नहीं छोड़ा गया।

पप्पी कौर उस मनहूस रात को याद करते हुए कहती हैं, “दंगाई आए और हम महिलाओं को लाइन में लगाकर खुले में बैठा दी गईं। इसके बाद टॉर्च लिए घूमने लगे। वे एक-एक महिला के चेहरे पर रोशनी डालकर देखते और उनके शरीर को ऊपर से नीचे तक घूरते। पसंद आने पर उनको उठाकर ले जाते।”

पप्पी कौर बताती हैं कि एक-एक औरत को चार-चार लोग उठाकर ले गए। इनमें से कितनी महिलाएँ वापस नहीं लौटीं। जो महिला वापस लौटी वह पहले जैसी नहीं रह सकी। पप्पी कौर बताती हैं कि दहशत के कारण गर्भवती महिलाओं के बच्चे हो जाते और बच्चे भी ज्यादातर मुर्दा पैदा होते।

इसी तरह 50 साल की निर्मल कौर की कहानी है। निर्मल कहती हैं कि भीड़ ने उनके पिता को खींचकर उनके ऊपर कोई पाउडर डाला (संभवत: फॉस्फोरस) और उन्हें आग लगा दी। वह बचाने के लिए गई तो उन्हें पकड़कर दूर फेंक दिया गया। निर्मल बताती हैं कि इन दंगों में उनके पिता के अलावा, भाई, चाचा, ताऊ, मौसा तक मार दिया गया।

निर्मल कौर बताती हैं कि यह सिलसिला 3 नवंबर तक चलता रहा। 3 नवंबर को आर्मी और पुलिसवाले आए जले हुए लोगों को ट्रक में ठूंसने लगे। इनमें कई जिंदा थे। उनका सिर हिल रहा था। कई लोग पानी-पानी बुदबुदा रहे थे, लेकिन उन पर रहम ना करके सबको ट्रक में डालकर यमुना नदी में फेंक दिया गया।

दैनिक भास्कर को निर्मल कौर ने बताया कि उस दौरान एक महिला का बच्चा प्यास से तड़प रहा था, लेकिन उस दिन किसी के पास पानी नहीं था। आखिरकार अपने बच्चे की जान बचाने के लिए महिला ने अपना पेशाब छोटे बच्चे को पिलाया।

इन दंगों की शिकार महिलाओं के लिए तिलक नगर में 2 हजार फ्लैट वाला ‘विडो कॉलोनी’ है, जिनमें विधवा महिलाएँ रहती हैं। उनके पिता-पति को उन दंगों में मार दिया गया था। इन महिलाओं को काम के नाम पर चपरासी की नौकरी मिली, लेकिन न्याय आज तक नहीं मिला।

रिपोर्ट के मुताबिक, इन दंगों में दिल्ली में ही करीब 2700 लोग मारे गए थे, जबकि देशभर में मरने वालों का आँकड़ा करीब 3500 था। इस केस में कॉन्ग्रेस नेता सज्जन कुमार को आजीवन कारावास की सजा मिली। वहीं, अन्य आरोपित बलवान खोकर, भागमल और गिरधारी लाल को उम्रकैद की सजा मिली, जबकि महेंद्र यादव और किशन खोकर को 10 साल की सजा दी गई।

इन दंगों को लेकर इंदिरा गाँधी के बेटे और बाद में देश के प्रधानमंत्री बने राजीव गाँधी ने कहा था कि जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती ही है। 19 नवंबर 1984 को राजीव गाँधी बोट क्लब में लोगों के सामने कहा था, “जब इंदिरा जी की हत्या हुई थी तो हमारे देश में कुछ दंगे-फसाद हुए थे। हमें मालूम है कि भारत की जनता को कितना क्रोध आया, कितना ग़ुस्सा आया और कुछ दिन के लिए लोगों को लगा कि भारत हिल रहा है। जब भी कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती थोड़ी हिलती है।”

‘आजकल के एक्टरों से बढ़िया है ये एक्टिंग’: वायरल हुआ शोएब अख्तर और वसीम अकरम का मजेदार Video, लोग बोले- दिन बन गया

पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर वसीम अकरम और शोएब अख्तर की एक पुरानी वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल होनी शुरू हुई है। इस वीडियो में दोनों क्रिकेटर पाकिस्तान के एक शो ‘जियो खेलो पाकिस्तान’ का विज्ञापन करते दिख रहे हैं। विज्ञापन में दोनों ने ग्रामीण वेशभूषा धारण की हुई है और बड़े मजेदार अंदाज में शो के बारे में बात करते हैं।

देख सकते हैं कि कैसे एड में वो बताते हैं कि पूरा पाकिस्तान जानता है कि एक शो आया है जिसमें जवाब देने पर गाड़ी पैसा और गहने मिलने वाले हैं। हँसी वाली बात इसमें ये है कि इसमें शोएब अख्तर को गुस्सैल अंदाज में जबकि अकरम को शांत स्वभाव के साथ मौला-जट बने देखा जा सकता है। फिर दोनों लड़ते-लड़ते शो में पहुँचते हैं और वहाँ उन्हें कहा जाता है कि गाड़ी गहने ये सब फ्री में नहीं बल्कि खेलकर मिलेगा और खेल के लिए उन्हें सवालों के जवाब देने होंगे।

विज्ञापन अभी का नहीं है बल्कि 2017 का है। लेकिन लोगों को ये इतना पसंद आया है कि 5 साल बाद भी ये वायरल हो गया है।

इस विज्ञापन को देखने के बाद अब लोगों की हँसी नहीं रुक रही है। कहा जा रहा है कि इस एड में दी गई पर्फॉर्मेंस के लिए शोएब अख्तर और वसीम अकरम को अवार्ड दिया जाना चाहिए। वहीं कुछ लोग कह रहे हैं कि इसे देखने के बाद उनकी सारी टेंशन दूर हो चुकी है। ये इतना हँसाने वाला है कि किसी का भी दिन बन जाए।

ऐसे रिएक्शन्स के अलावा कुछ लोग दोनों क्रिकेटर्स को उनकी एक्टिंग पर भी आँक रहे हैं। कोई शोएब को बेहतर बता रहा है तो कोई कह रहा है कि वसीम अकरम में एक्टिंग का कोई स्पेशल टैलेंट हैं।

एक यूजर तो कहता है कि आजकल के एक्टर्स से तो ये दोनों बहुत बढ़िया एक्टर्स हैं।

बता दें कि शोएब अख्तर और वसीम अकरम दोनों ही पाकिस्तानी क्रिकेट का जाना-माना नाम हैं। अकरम के नाम वन डे मैच में 502 विकेट लेने का रिकॉर्ड है। वहीं अख्तर को पूरी दुनिया उनकी फास्ट बॉलिंग के कारण जानती है।

अकरम ने जहाँ क्रिकेट से साल 2003 में संन्यास ले लिया था। वहीं 1997 में अख्तर ने करियर की शुरुआत की थी। धीरे-धीरे दुनिया उन्हें रावलपिंडी एक्सप्रेस के नाम से जानने लगी। उनके खाते में 161 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बॉल फेंकने का रिकॉर्ड है। आजतक कोई भी इस रिकॉर्ड को पार नहीं कर सका है।

‘घुसपैठ-धर्म परिवर्तन से घटे हिंदू, सब पर लागू होने वाली जनसंख्या नीति बने’: प्रयागराज में RSS का मंथन, बताया- पूर्वोत्तर में भी पहुँचा ‘मैं हूँ हिंदू’ का बोध

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय कार्यकारी मण्डल की प्रयागराज में चल रही चार दिवसीय बैठक 19 अक्टूबर 2022 (बुधवार) को समाप्त हो गई। इसके बाद संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले (Dattatreya Hosabale) ने मीडिया से बात की। उन्होंने धर्म परिवर्तन की साजिशों और घुसपैठ का जिक्र करते हुए बताया कि इसके कारण देश के कई हिस्से में हिंदुओं की आबादी कम हो गई है। उन्होंने ऐसी जनसंख्या नीति की जरूरत बताई जो सब पर एक समान लागू हो। साथ ही बताया कि जनजातीय समुदाय के लोगों में स्वाभिमान जागरण के कारण ‘मैं भी हिन्दू हूँ’ का बोध पूर्वोत्तर राज्यों में भी विकसित हुआ है।

सरकार्यवाह ने कहा कि धर्मांतरण करने वालों को आरक्षण के लाभ से वंचित कर दिया जाना चाहिए। देश में जनसंख्‍या अंसतुलन को चिंता का विषय बताते हुए कहा कि हम अभी गर्व से कहते हैं कि हमारा देश युवाओं का देश है। लेकिन असंतुलन की वजह से यह स्थिति बदल सकती है।

उन्‍होंने कहा, “इस विषय पर समग्रता से विचार कर सब पर लागू होने वाली जनसंख्या नीति बननी चाहिए। मतांतरण से हिंदुओं की संख्या कम हो रही है। देश के कई हिस्सों में मतांतरण की साजिश चल रही है। कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ भी हो रही है। इस वजह से भी हिंदुओं की संख्‍या मे कमी आई है। बांग्‍लादेश के रास्‍ते बिहार के सीमावर्ती इलाकों पुर्णिया, कटिहार या पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में घुसपैठ की घटनाएँ हुई हैं। हालाँकि उसे रोकने के प्रयास हुए हैं, लेकिन धीरे-धीरे अन्‍य राज्‍यों से भी घुसपैठ की सूचना मिल रही है।”

होसबाले ने कहा कि जनसंख्या असंतुलन के कारण कई देशों में विभाजन की नौबत आई है। भारत का विभाजन भी जनसंख्या असंतुलन के कारण हो चुका है। जनसंख्‍या असंतुलन पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पिछले 40-50 सालों से जनसंख्या नियंत्रण पर जोर देने के कारण परिवारों की औसत जनसंख्या कम होकर 1.9 हो गई है। इस वजह से आने वाले समय में युवाओं की संख्‍या में कमी और बुजुर्गों की संख्‍या में वृदि देखने को मिल सकती है। यह चिंताजनक है।

सरकार्यवाह ने इस दौरान पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में संघ की स्‍वीकार्यता का भी उल्‍लेख किया। बताया कि पूर्वोत्तर राज्यों के जनजातीय समुदाय के लोगों में स्वाभिमान जागरण के कारण ‘मैं भी हिन्दू हूँ’ का बोध विकसित हुआ है। पूर्वोत्तर भारत के जनताजीय समुदाय के लोग अब संघ से जुड़ना चाहते हैं। विशेष रूप से मेघायल और त्रिपुरा के जनजातीय लोग इसी एहसास की कारण सरसंघचालक को आमंत्रित करने लगे हैं।

उन्होंने धर्मांतरण रोधी कानूनों को सख्ती से लागू करने का आह्वान किया। होसबाले ने कहा कि धर्मांतरण पर संघ जागरूकता उत्पन्न करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कई लोगों ने ‘घर वापसी’ की है और इस मुहिम के अच्छे परिणाम सामने आए हैं।

जकार्ता में मस्जिद का विशाल गुंबद आग लगने के बाद गिरा, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

इंडोनेशिया के जकार्ता (Jakarta, Indonesia) में इस्लामिक सेंटर मस्जिद का विशाल गुंबद (Jakarta Islamic Center mosque) भीषण आग लगने के बाद ढह गया। इस हादसे में किसी की जान नहीं गई है। अभी तक आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। सोशल मीडिया पर गुंबद के गिरने का वीडियो भी सामने आया है।

गल्फ टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामिक सेंटर के जीर्णोद्धार का काम चल रहा था। उसी वक्त यह आग लगी। बुधवार (19 अक्टूबर 2022) को स्थानीय समयानुसार दोपहर 3 बजे के बाद दमकलकर्मियों को आग लगने की सूचना दी गई, जिसके बाद दस दमकल की गाड़ियों को घटनास्थल पर भेजा गया।

वीडियो में देख सकते हैं कि गुंबद के एक हिस्‍से में आग लगी हुई है। काफी लोग इस आग को बुझाने की कोशिश रहे हैं, लेकिन तेज हवा के कारण आग बढ़ती ही जा रही है। देखते ही देखते गुंबद ताश के पत्‍तों की तरह ढह गई। इसके बाद वहाँ धुआँ ही धुआँ नजर आने लगा।

स्थानीय मीडिया के मुताबिक, आग किस वजह से लगी है, पुलिस इसकी जाँच कर रही है। इस संबंध में पुलिसकर्मियों ने इस्लामिक सेंटर के जीर्णोद्धार का काम करने वाले ठेकेदारों से भी पूछताछ की है। पुलिस ने कहा, “हम आग लगने के कारणों की जाँच कर रहे हैं। मस्जिद की मरम्मत कर रहे कॉन्ट्रैक्टर और कंपनी के चार मजदूरों से भी पूछताछ की जाएगी।”

सोशल मीडिया पर मस्जिद का गुबंद गिरने के बाद कई यूजर्स ने कमेंट किया है। एक यूजर ने लिखा, “मंदिर निकलेगा चेक कर लेना।” एक अन्य ने तंज कसते हुए लिखा, “6 दिसंबर तो नहीं है आज।”

बता दें कि मस्जिद के अलावा इस्लामिक सेंटर परिसर में शैक्षिक, वाणिज्यिक और अनुसंधान की सुविधाएँ भी हैं। मस्जिद के गुंबद में आखिरी बार लगभग 20 साल पहले मरम्मत के दौरान आग लग गई थी। अक्टूबर 2002 में लगी इस आग को बुझाने में करीब पाँच घंटे लग गए थे।

वाराणसी से ISIS आतंकी बासित को NIA ने पकड़ा: ब्लैक पाउडर बनाने में लगा था, आतंकी हमलों की दे रहा था ट्रेनिंग

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी एएनआई (NIA) ने वाराणसी से आतंकी बासित कलाम सिद्दीकी (Basit Kalam Siddiqui) को पकड़ा है। वह इस्लामिक स्टेट (ISIS) से जुड़ा है। वह आतंकी हमले के लिए युवाओं की भर्ती और उन्हें ट्रेनिंग देने में लगा था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बासित आईएसआईएस के हैंडलर के संपर्क में था। ‘वॉयस ऑफ खुरासान’ पत्रिका के माध्यम से आतंकी संगठन के प्रोपेगेंडा को फैलाने में जुटा था। बासित महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों के साथ-साथ नागरिकों को निशाना बनाने के लिए विस्फोटक जुटा रहा था। एनआईए की टीम ने उसके ठिकानों से आईईडी और विस्फोटक बनाने से संबंधित हाथ से लिखे कई नोट्स, मोबाइल फोन, लैपटॉप, पेन-ड्राइव के अलावा कई आपत्तिजनक लेख भी बरामद किए हैं।

एनआईए ने छापेमारी के बाद एक बयान में कहा कि बासित कलाम सिद्दीकी की उम्र 24 साल है। वह कट्टरपंथियों को आईएसआईएस में भर्ती करने का काम करता था। एनआईए ने इस्लामिक स्टेट जम्मू-कश्मीर (आईएसजेके) के आमिर उमर निसार उर्फ ​​कासिम खुरासानी समेत 6 आरोपितों को पकड़ा था। इनसे पूछताछ में जानकारी मिली थी कि ऑनलाइन पत्रिका ‘वॉयस ऑफ खुरासान’ के जरिए ये अपने एजेंडे का प्रचार करते थे।

बताया जा रहा है कि बासित कलाम ISIS के संचालकों के साथ लगातार संपर्क में था। वह आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट खुरासान (ISIS-K) की पत्रिका ‘वॉयस ऑफ खुरासान’ के माध्यम से ISIS के प्रचार, प्रसार और प्रकाशन में शामिल था। यही नहीं वह अफगानिस्तान में ISIS के अपने आकाओं के निर्देश पर विस्फोटक ‘ब्लैक पाउडर’ बनाने की कोशिश कर रहा था। साथ ही इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेस (आईईडी) में इस्तेमाल होने वाले घातक रासायनिक पदार्थों के उपयोग के बारे में जानकारी जुटा रहा था।

‘काफिरों वक्त आने पर गाड़ देंगे तुम्हें’: अरशद का जहर वाला Video वायरल, शिवलिंग पर पेशाब करने वाला शोएब गिरफ्तार

सोशल मीडिया में एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें अरशद खान काफिरों (हिंदुओं) को गाड़ देने की धमकी दे रहा है। इसी तरह का एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें एक युवक मंदिर में घुसकर शिवलिंग पर पेशाब करते दिख रहा है। उसकी पहचान शोएब के तौर पर हुई है। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

शिवलिंग पर पेशाब करने वाला वीडियो उत्तर प्रदेश के मेरठ का है। वायरल वीडियो में एक युवक मंदिर में घुसते और शिवलिंग पर पेशाब करते नजर आता है। मामला मेरठ के थाना सरूरपुर क्षेत्र के गाँव रासना का है। मंगलवार (18 अक्टूबर 2022) की सुबह जब मंदिर में पुजारी पूजा-पाठ के लिए पहुँचे, तो गेट खुला हुआ था। मंदिर के अंदर से बदबू आ रही थी। इसके बाद गाँव के युवक मोहित को बुलाकर सीसीटीवी फुटेज चेक करवाया गया, जिसमें शोएब शिवलिंग पर पेशाब करते हुए देखा गया।

मेरठ पुलिस ने बताया है कि CCTV फुटेज के आधार पर अभियुक्त की पहचान की गई। उसे गिरफ्तार कर जेल में भेज दिया गया है। इस संबंध में थाना सरूरपुर में आरोपित के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। जाँच में पाया गया कि ​घटना में शामिल अभियुक्त नशे का आदी है। नशे में धुत होने के कारण उसने यह कृत्य किया।

कोलकाता स्थित इस्कॉन ISKCON के उपाध्यक्ष राधारमण दास ने शिवलिंग पर पेशाब करने का वीडियो अपने ट्विटर हैंडल पर साझा किया है। उन्होंने लिखा, “शोएब ने शिवलिंग पर पेशाब किया। आज हिन्दुओं की स्थिति ऐसी है कि हम सब कुछ नहीं करेंगे।” इसके साथ ही उन्होंने एक और वीडियो शेयर किया है, जिसमें मुस्तफा अरशद खान नाम का शख्स हिंदुओं को धमकाते हुए दिखाई दे रहा है। इस वीडियो के साथ राधारमण दास ने लिखा, “जब समय आएगा तो वे सभी हिंदुओं का नामो-निशान मिटा देंगे। यह एक इस्लामिक इन्फ्लुएंसर है। इंस्टाग्राम पर इसके 14,000 से अधिक फॉलोअर्स हैं। मुस्लिम इस बात को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हैं कि जब उनका समय आएगा तो वे हिंदुओं के साथ क्या करेंगे। हिंदुओं, आप क्या करेंगे?”

बता दें की हिंदुओं की भावनाओं का आहत करने के लिए शिवलिंग पर पेशाब किए जाने की कई घटनाएँ पूर्व में भी सामने आ चुकी है। मार्च 2021 में आसिफ को शिवलिंग पर पेशाब करते पकड़ा गया था। जुलाई 2019 में इरशाद उर्फ ईरानी ने जहाँगीरबाद में महादेव के मंदिर में शिवलिंग पर पेशाब किया था। प्राचीन शिव मंदिर की पवित्रता को तार-तार करने वाले इरशाद के खिलाफ बजरंग दल के सदस्यों ने पुलिस में शिकायत दर्ज की थी, जिसके बाद बुलंदशहर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था।

8 साल पहले अपना लिया था इस्लाम, अब मुजफ्फरनगर में परिवार ने की घर-वापसी: मोहम्मद अहमद बने संदीप सैनी, गंगाजल छिड़क हुआ शुद्धिकरण

जैसे-जैसे लोगों में जागरूकता बढ़ रही है, वे अपनी जड़ों को तलाश कर उससे जुड़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक बार फिर मुस्लिम परिवार के पाँच सदस्यों ने घर वापसी करते हुए हिंदू धर्म अपना लिया है। इस परिवार के लोगों को अब नया हिंदू नाम दिया गया है।

बिजनौर का रहने वाला यह परिवार आठ साल पहले हिंदू धर्म छोड़ इस्लाम अपना लिया था। हालाँकि, समय बीतने के साथ ही इन्हें अपने धर्म, रीत-रिवाज और संस्कारों की याद आई तो वे दोबारा हिंदू धर्म में वापस आ गए। हिंदू धर्म में घर वापसी करने वाले परिवार के मुखिया संदीप सैनी का कहना है कि पहले भी उनका परिवार हिंदू था, अब फिर वापसी की है।

मुजफ्फरनगर जिले के बघरा स्थित योग साधना यशवीर आश्रम में एक ही परिवार के पाँच सदस्यों को पूरे विधि-विधान के साथ घर वापसी कराई गई। इस दौरान मोहम्मद अहमद को संदीप सैनी, सानिया को दोबारा सीमा सैनी नाम दिया गया। परिवार के अन्य लोगों के भी उनके पुराने नाम दिए गए।

यशवीर आश्रम के संन्यासी यशवीर ने बताया कि मुस्लिम बना बिजनौर का सैनी परिवार बुधवार (19 अक्टूबर 2022) को स्वेच्छा से हिंदू धर्म में वापसी की। वेद मंत्रों के साथ विधि-विधान से उन्होंने पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने आश्रम की परिक्रमा की।

घर वापसी के दौरान परिवार के सदस्यों पर गंगाजल का छिड़काव कर उनका शुद्धिकरण किया गया। इस दौरान आश्रम में मौजूद लोगों ने परिवार पर पुष्पवर्षा भी की। इस दौरान स्वामी यशवीर ने कहा कि इलाके के मदरसों में लोगों का धर्म परिवर्तन कराया जाता है। पुलिस-प्रशासन को इसकी जाँच करनी चाहिए।