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रतन लाल को पीट-पीट कर मार डाला, 2.5 साल से वेश बदल छिपती रही: हेड कॉन्स्टेबल की हत्या में शामिल 50000 की ईनामी 27 वर्षीय महिला गिरफ्तार

साल 2020 में हुए हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों (Delhi Riots 2020) के दौरान दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल की हत्या करने के अपराध में एक महिला को गिरफ्तार किया गया है। यह महिला गिरफ्तारी से बचने के लिए पिछले ढाई सालों से वेश बदलकर छिप रही थी।

इस महिला पर दिल्ली पुलिस ने 50,000 रुपए का ईनाम भी घोषित किया था। 27 वर्षीय यह महिला अपराधी दिल्ली के भजनपुरा स्थित सुभाष मोहल्ला की रहने वाली है। इसे गुरुवार (13 अक्टूबर 2022) की शाम करीब 05:30 बजे नोएडा के सेक्टर-63 स्थित कॉगेंट बिल्डिंग के इलाके से गिरफ्तार किया गया।

कॉन्स्टेबल की हत्या और उस मामले में उसे आरोपित बनाए जाने के बाद वह महिला अपने घर से भाग गई। पुलिस को चकमा देने के लिए वह अलग-अलग इलाके के किराए के मकानों में रह रही थी।

इस दौरान एक व्यक्ति से निकाह भी किया। उस शख्स ने आरोपित महिला के लिए नोएडा की एक कंपनी में कस्टमर केयर एक्जीक्यूटिव की नौकरी की व्यवस्था की थी। नौकरी के दौरान वह अपने परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों से लगातार संपर्क में थी। इसके लिए वह कंपनी के कस्टमर केयर नंबर का इस्तेमाल करती थी।

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (DCP) संजय कुमार सैनी ने बताया कि इस महिला को गिरफ्तार करने के लिए एक स्पेशल टीम बनाई गई थी। ऑपरेशन विंग दंगों के दौरान हत्या के मामले में फरार आरोपियों की तलाश में जुटी थी।

महिला की तलाश में दिल्ली पुलिस की टीम उसके रिश्तेदारों पर भी नजर रख रही थी। इसी बीच उसका एक करीबी रिश्तेदार अपने मोबाइल से नोएडा वाली कंपनी के कस्टमर केयर नंबर पर बार-बार कॉल करता था। पुलिस ने जब उसकी CDR खंगाली तो उसे संदेह हुआ और इस आधार पर महिला को गिरफ्तार कर लिया गया।

पूछताछ के दौरान महिला ने अपना अपराध कबूल कर लिया है। उसने बताया कि फरवरी 2020 में दंगों के दौरान वह CAA-NRC के विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से शामिल थी। वहीं, लापता होने के बाद दिल्ली पुलिस ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था।

बता देें कि दिल्ली दंगों के दौरान मुख्य वजीराबाद रोड स्थित चाँद बाग में ड्यूटी के दौरान इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने रतन लाल को पीट-पीट कर मार डाला था। रतन लाल के अलावा इस हमले में शाहदरा के तत्कालीन DCP अमित शर्मा और गोकुलपुरी के तत्कालीन ACP अनुज कुमार को भी गंभीर चोटें आई थीं। इनके साथ ही 50 अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे।

गौरतलब है कि 42 वर्षीय रतन लाल राजस्थान के सीकर जिले के फतेहपुर तिहवाली गाँव के निवासी थे। वे साल 1998 में दिल्ली पुलिस में कॉन्स्टेबल पद पर बहाल हुए थे और गोकुलपुरी पुलिस स्टेशन में तैनात थे। वे अपने परिवार के साथ दिल्ली के बुराड़ी इलाके में रहते थे।

‘तुम युवा पीढ़ी के दिमाग को दूषित कर रही हो’: ‘XXX’ पर सुप्रीम कोर्ट ने एकता कपूर को फटकारा, कहा – बड़े वकील हायर करने का मतलब ये नहीं कि…

वेब सीरीज ‘XXX’ में आपत्तिजनक कंटेंट दिखाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ‘ALTBalaji’ की संस्थापक एकता कपूर को कड़ी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एकता कपूर ने इस देश की युवा पीढ़ी के दिमाग को दूषित कर दिया है। एकता कपूर पर आरोप है कि उन्होंने अपनी वेब सीरीज के जरिए न सिर्फ देश के सैनिकों का अपमान किया है, बल्कि उनके परिवार वालों की भावनाओं को भी आहत किया है।

इस संबंध में उनके खिलाफ गिरफ़्तारी के वॉरंट्स जारी हुए थे, जिसके खिलाफ वो सुप्रीम कोर्ट पहुँची थीं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “कुछ तो करना पड़ेगा। तुम इस देश की युवा पीढ़ी के दिमाग को दूषित कर रही हो। ये सबके लिए उपलब्ध है। OTT (ओवर द टॉप) कंटेंट्स को कोई भी देख सकता है। तुम लोगों को किस तरह के विकल्प दे रही हो?” जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस सीटी रविकुमार ने इस मामले में सुनवाई करते हुए ये कहा।

एकता कपूर की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी पेश हुए। उन्होंने कहा कि पटना उच्च न्यायालय के समक्ष एक याचिका दायर की गई है, लेकिन आशा नहीं है कि इसे सुनवाई के लिए जल्दी सूचीबद्ध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एकता कपूर को ऐसे ही एक मामले में पहले भी राहत मिल चुकी है। उन्होंने देश में ‘फ्रीडम ऑफ चॉइस’ की बात करते हुए कहा कि ये कंटेंट सब्सक्रिप्शन के आधार पर उपलब्ध है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि ये आप किस प्रकार की चॉइस दे रहे हैं? हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने एकता कपूर पर कोई जुर्माना नहीं लगाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप हमेशा ऐसे मामलों में यहाँ आ जाते हो, ऐसे में अगली बार ऐसी याचिका आई तो जुर्माना लगाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने मुकुल रोहतगी से कहा, “अपने क्लाइंट से कह दीजिए। केवल इसीलिए कि वो बड़े वकील हायर कर सकती हैं या अफॉर्ड कर सकती हैं, बार-बार ऐसी याचिका लाना सही नहीं है।”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये अदालत ऐसे लोगों के लिए काम करती है, जिनकी आवाज़ नहीं सुनी जाती। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि जब ऐसी सुख-सुविधाओं वाले लोग सोचते हैं कि उन्हें न्याय नहीं मिल सकता है तो फिर आम आदमी की सोच लीजिए। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पेंडिंग रखते हुए सलाह दी कि हाईकोर्ट की सुनवाई की सूचना के लिए एक लोकल वकील को रखा जा सकता है। बेगूसराय के एक ट्रायल कोर्ट ने एकता कपूर की गिरफ़्तारी का वॉरंट जारी किया था।

गाजियाबाद में फिर एक पालतू पिट्बुल कुत्ते ने 11 साल की छात्रा को काटा, दोनों पैरों पर 21 जख्म: डॉग के मालिक ने शिकायत को नजरअंदाज किया

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद (Ghaziabad, Uttar Pradesh) में एक बार फिर एक कुत्ते ने हमला कर एक बच्ची को जख्मी कर दिया। इस हमले में बच्ची के दोनों पैरों में 21 जख्म आए हैं। बता दें कि देश में कुत्तों के हमलों की खबरें लगातार आ रही हैं।

मामला गाजियाबाद के वैशाली का है। यहाँ एक सोसायटी में रहने वाले शख्स ने पिट्बुल नस्ल का कुत्ता पाल रखा है। इस कुत्ते ने सातवीं में पढ़ने वाली 11 साल की छात्रा पर हमला कर उसे बुरी तरह जख्मी कर दिया। वहाँ मौजूद लोगों ने किसी तरह कुत्ते को वहाँ से भगाया और बच्ची की जान बची।

वैशाली स्थित रामप्रस्थ ग्रीन्स सोसायटी में रहने वाली बच्ची पार्क में खेलने गई थी। उसी दौरान खुला घूम रहा एक पिटबुल कुत्ते ने उस पर हमला कर दिया। जिस पर कुत्ता खुला घूम रहा था, उस वक्त उसके गले में चेन था। कुत्ते के साथ उसका मालिक नहीं था।

बच्ची के दोनों पैरों में 21 जख्म आए हैं। जानकारी मिलने के बाद परिजन आए और उसे इलाज के लिए तुरंत अस्पताल लेकर गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस पिटबुल ने हमला किया है, उसका नगर निगम में पंजीकरण नहीं कराया गया है। वह पहले भी हमला कर चुका है।

लोगों का कहना है कि जब वे कुत्ते के मालिक के पास शिकायत लेकर पहुँचे तो उसने अनसुना कर दिया। इस पर लोग भड़क गए। इसके बाद मामले में FIR दर्ज कराई गई है। हालाँकि, FIR में किसी का नाम नहीं है। उसमें अज्ञात लिखा गया है।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से 3 सितंबर 2022 को पालतू कुत्तों के हमले के दो मामले सामने आए। पहला मामला पार्क का था, जहाँ घुमाने के लिए लाई लड़की के हाथ से छूटकर पालतू कुत्ते ने वहाँ खेल रहे बच्चे को काट लिया था। कुत्ते के इस हमले में 10 साल का मासूम बच्चा घायल हो गया था। उसके शरीर पर 150 टाँके लगे थे।

दूसरा मामला गाजियाबाद की एक सोसाइटी का है। सोसायटी की लिफ्ट में एक पालतू कुत्ते ने एक बच्चे को काट लिया था। इस घटना के सीसीटीवी में फुटेज सामने आया था कि कुत्ते के काटने के बाद पीड़ित बच्चा काफी देर तक लिफ्ट में ही रोता रहा, लेकिन कुत्ते की मालकिन चुपचाप खड़ी देखती रही थी।

इससे पहले जुलाई में भी ऐसी ही घटना उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सामने आयी थी। लखनऊ में एक जिम ट्रेनर के पालतू पिटबुल कुत्ते ने उसकी माँ को नोच कर मार डाला था। यह घटना पूरे देश में कुत्तों के पालने को लेकर सतर्कता बरतने की बात कही गई थी। लेकिन, इसके बाद भी कुत्तों के हमले वाली घटनाएँ आए दिन सामने आती रहती हैं।

इसी तरह मुंबई के पनवेल स्थित इंडियाबुल्‍स कॉम्‍प्‍लेक्‍स में एक डिलीवरी बॉय डिलीवरी के बाद लिफ्ट से बाहर आ रहा था। जैसे ही उसने बाहर आने की कोशिश की वहाँ मौजूद एक पालतू कुत्ते ने डिलीवरी बॉय पर हमला कर दिया। इस हमले में उसके प्राइवेट पार्ट पर गहरा घाव हो गया।

‘आप अपनी बेटी को बिकिनी पहनाओ, मुस्लिम लड़कियों को बुर्का पहनने दो’: AIMIM प्रमुख ओवैसी ने कहा- हिजाब कुरान में अल्लाह का हुकुम है

कर्नाटक के शिक्षण संस्थानों में बुर्का-हिजाब बैन मामले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने विभाजित फैसला दिया था। इसके बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (AIMIM) के सुप्रीमो और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन औवेसी (MP Asaduddin Owaisi) ने एक विवादित बयान दिया है। ओवैसी ने कहा कि मुस्लिम लड़कियाँ हिजाब पहनेंगी और जिसे पसंद है वह बिकिनी पहने।

ओवैसी ने कहा, “वे (भारत के लोग) कहते हैं कि मुस्लिम छोटे बच्चों को हिजाब पहनने के लिए मजबूर कर रहे हैं। क्या हम वाकई अपनी लड़कियों को मजबूर कर रहे हैं? हमारी बेटियों को हिजाब पहनने दो, अगर तुम चाहो तो अपनी बिकनी पहनो।”

AIMIM प्रमुख ओवैसी ने कहा कि केंद्र सरकार मुस्लिम लड़कियों को अपना हिजाब हटाने के लिए मजबूर कर रही है। इसके लिए उन्होंने केंद्र को फटकार लगाई है। ओवैसी ने कहा, “अगर मुस्लिम महिलाएँ अपना सिर ढँकना चाहती हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि वे अपनी बुद्धि को ढँक रही हैं।”

गोलकुंडा किले में एक सभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा, हमसे पूछा जा रहा है कि हमारी बेटियाँ हिजाब क्यों पहन रही हैं। ये तो बैकवर्डनेस (पिछड़ेपन) की निशानी है। हम हिजाब इसलिए पहनते हैं, क्योंकि कुरान में अल्लाह ने हुकुम फरमाया है।”

ओवैसी ने कहा कि मुस्लिम बच्चियों को बुर्का पहनने के लिए मजबूर नहीं किया जाता। उन्होंने आगे कहा, “हैदराबाद की सड़कों पर सबसे खतरनाक मोटरसाइकल कोई चलाता है तो हमारी बहनें चलाती हैं बुर्के के साथ। कभी इनके पीछे मोटरसाइकल गाड़ी लेकर मत जाना। मैं अपने ड्राइवर से खुद बोलता हूँ कि मियाँ जरा एहतियात से। हैदराबाद में गाड़ी चला रहे हो।”

कर्नाटक हिजाब प्रतिबंध पर ओवैसी ने कहा, “जब एक हिंदू, एक सिख और एक ईसाई छात्रा अपने धार्मिक कपड़ों के साथ क्लास में जाने की अनुमति दी जाती है और एक मुस्लिम को कहा जाता है कि अपनी बुर्का उतारो तो वे मुस्लिम के बारे में क्या सोचते होंगे। जाहिर है, वे सोचेंगे कि मुस्लिम हमसे नीचे हैं।” ओवैसी ने कहा, “एक दिन हिजाब पहने एक लड़की भारत की प्रधानमंत्री बनेगी। ये मेरा सपना है।”

‘मुलायम सरकार ने हिन्दुओं को श्रृंगार गौरी मंदिर से बाहर निकाला, हमने कभी नहीं की कार्बन डेटिंग की माँग’: ज्ञानवापी में हिन्दू पक्ष के वकील से EXCLUSIVE बातचीत

वाराणसी कोर्ट द्वारा ज्ञानवापी ढाँचे में वैज्ञानिक जाँच की माँग वाली याचिका को खारिज करने के बाद यह मामला गरमा गया है। अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और वरिष्ठ अधिवक्ता हरि शंकर जैन याचिका दायर करने वाली पाँचों महिला याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इनकी मंशा हिंदुओं को उनका पूजा करने का अधिकार दिलाना है। इस सिलसिले में ऑपइंडिया ने एडवोकेट विष्णु शंकर जैन का साक्षात्कार लिया है। बातचीत में उन्होंने ज्ञानवापी से जुड़े कई रहस्यों का खुलासा किया है।

मामले की योजना कैसे बनी? चूँकि यह एक विवाद था जो लंबे समय तक बना रहा, लेकिन याचिकाकर्ता इसके लिए अब क्यों खड़े हुए?

विष्णु शंकर जैन ने कहा, “सबसे पहले, हमें यह समझने की जरूरत है कि एक देवता स्थायी है। यदि किसी स्थान पर किसी देवता को स्थापित किया जाता है, तो वह उसी स्थान पर रहता है। इसलिए इस प्रश्न के बजाए, मैं यह पूछना चाहूँगा कि 1991 में पूजास्थल अधिनियम क्यों बनाया गया था और अब इसे विरोध का सामना क्यों करना पड़ रहा है। देश लगातार 30 साल क्यों सो रहा था?”

उन्होंने बताया, “ऐसी बहुत सी बातें हैं जो समय के साथ जानी जाती हैं। मैं 2010 में जब अपने पेशे में आया। तब मैंने इस मामले का अध्ययन किया। दरअसल, मुझे राम मंदिर मामले में शामिल होने का अवसर मिला। मैंने हिंदू देवताओं के अधिकारों का अध्ययन किया, तो मुझे पता चला कि इस देश में हिंदुओं पर बहुत अन्याय किया गया है। उनमें से एक काशी विश्वनाथ में श्रृंगार गौरी मंदिर से संबंधित मामला है, जहाँ भक्तों को नवंबर 1993 तक पूजा करने की अनुमति थी, लेकिन उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी सरकार ने उन्हें रोक दिया और उनके अधिकारों का हनन किया गया।”

वह अपनी बात को जारी रखते हुए कहते हैं, “इसलिए, जब मुझे इन सबके बारे में पता चला तो मैंने हिंदुओं को न्याय दिलाने का फैसला किया। अगर कानून मुझे ऐसा करने की इजाजत देता है, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मैं इस मुद्दे को कब और कैसे उठाता हूँ। समय बिल्कुल भी अहम नहीं है। महत्वपूर्ण बात यह है कि हिंदू जाग गए और उन्होंने अपने साथ हुए अन्याय को न्याय की अदालतों के माध्यम से सुधारने का फैसला किया, न कि सड़कों पर।”

जैसा कि आपने पूजा स्थल अधिनियम 1991 का उल्लेख किया है, आप उसके बारे में क्या कहना चाहते हैं? क्या आपको लगता है कि इसे निरस्त किया जाना चाहिए?

अधिवक्ता के शब्दों में, “मेरे अनुसार, पूजास्थल अधिनियम एक खराब मसौदा और अस्पष्ट रूप से तैयार किया गया कानून है, जो कई व्याख्याओं के लिए अतिसंवेदनशील है और एक ऐसी गड़बड़ी है, जिसका हिंदुओं के कानूनी अधिकारों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। चाहे वह देवताओं का अधिकार हो, या हिंदुओं के अपने धार्मिक स्थलों को पुनः प्राप्त करने और पुनर्स्थापित करने का अधिकार हो। इस अधिनियम के खराब प्रारूप ने हिंदुओं के अधिकारों में बाधा डालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुझे लगता है कि केंद्र सरकार को इस अधिनियम को निरस्त कर देना चाहिए।”

क्या पूजा स्थल अधिनियम में कोई खामियाँ हैं, जिनका उपयोग हिंदुओं के लिए किया जा सकता है?

वह कहते हैं, “ऐसा पहले ही किया जा चुका है। अधिनियम किसी जगह के धार्मिक प्रतीक को तय करने की अनुमति देता है। हमने इसे काशी और मथुरा दोनों मामलों में ट्रायल कोर्ट में लागू किया है और हमारे पक्ष में फैसले आए हैं।”

जैसा कि श्रृंगार गौरी मामले की खूबियों को भी सभी जानते हैं, जिसमें भारतीय विरासत और विशेष रूप से हिंदू मंदिरों को नष्ट करने वाले इस्लामी अत्याचारियों का इतिहास भी शामिल है, इस मामले में आप क्या कहना चाहते हैं?

एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने कहा, “मैं केवल यह कहना चाहता हूँ कि सभी इस्लामी संगठन पूजास्थल अधिनियम के कानून के दौरान बनाए गए नरैटिव के साथ जा रहे हैं। उन्हें यह समझने की जरूरत है कि अधिनियम का प्रारूप बहुत खराब है और यदि हम अधिनियम के प्रारूप को देखते हैं तो सभी वादे और चर्चाएँ अप्रासंगिक हैं। वे खोखले वादे हैं। अधिनियम की धारा 3 में कहा गया है कि किसी धार्मिक स्थान का कोई प्रतीक नहीं बदला जाएगा, लेकिन कानून बनने के बाद भी इसका उल्लंघन किया गया है। जैसे 1993 में जब हिंदुओं को श्रृंगार गौरी मंदिर से बाहर निकाल दिया गया था , जहाँ वे सदियों से पूजा कर रहे थे। यह धारा 3 का उल्लंघन था और धारा 6 में सजा का प्रावधान है, लेकिन एक भी व्यक्ति को आज तक दंडित नहीं किया गया है।

जैन ने कहा, “दूसरे, कश्मीर में 15 अगस्त 1947 के बाद, या भारत के लगभग हर राज्य में, कई हिंदू मंदिरों को तोड़कर इस्लामी स्थलों में बदल दिया गया है, जिसके परिणामस्वरूप धारा 3 और 6 के तहत कोई कार्रवाई और सजा नहीं हुई है। साथ ही, यह स्पष्ट रूप से समझने की जरूरत है कि हम यह नहीं कह रहे हैं कि हम किसी स्थल के धार्मिक स्वरूप को परिवर्तित करना चाहते हैं, हम यह भी नहीं कह रहे हैं कि यदि उचित कानूनी तरीकों से किसी स्थान पर मस्जिद का निर्माण किया जाता है और हम उस पर अतिक्रमण करना चाहते हैं या उसे मंदिर में परिवर्तित करना चाहते हैं। यही कारण है कि मैंने धारा 4 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है, धारा 3 को नहीं। हम सिर्फ यह चाहते हैं कि यदि कोई स्थान या मस्जिद, जो पहले एक हिंदू मंदिर था, तो उसे पुनर्स्थापित और पुनः प्राप्त किया जाना चाहिए ताकि हिंदू अपने अधिकारों का प्रयोग कर सकें और कुछ नहीं है जिसकी हमें आवश्यकता है। पूजास्थल अधिनियम 1991 इसमें बाधा नहीं डालता है, लेकिन फिर भी, अधिनियम विभिन्न व्याख्याओं के लिए खुला है और इसे विभिन्न तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है। मुझे लगता है कि केंद्र सरकार को इस अधिनियम को पूरी तरह से निरस्त कर देना चाहिए ताकि हिंदू अपने अधिकारों का ठीक से प्रयोग कर सकें। यदि यह अधिनियम अस्तित्व में नहीं है, तो भी लोग अपने मामलों को दीवानी अदालतों में कानूनी मुकदमे और दीवानी वाद के रूप में दर्ज करेंगे और गुण व तथ्यों के आधार पर निर्णय प्राप्त करेंगे।”

शिवलिंग के बारे में, वज़ूखाना के बारे में ….

वह कहते हैं, “सबसे पहले, जब 14, 15, और 16 मई को परिसर का सर्वेक्षण हुआ, तो उस जगह से बहुत सारी चीजें खोजी गईं। मैं ऑपइंडिया को बताना चाहूँगा कि यही कारण है कि बड़े पैमाने पर सर्वेक्षण का विरोध किया गया था। मस्जिद कमेटी के सचिव ने खुलेआम धमकी देते हुए कहा कि उनके शव पर ही सर्वे किया जा सकता है। ये सिर्फ सच छिपाने के लिए था। अब निष्कर्षों पर आते हैं, विवादित ढाँचे के अंदर हिंदू मंदिर होने के पर्याप्त सबूत हैं। मस्जिद के गुंबदों के नीचे हिंदू मंदिर का शिखर है। हमने उसे देखा है और इसे रिकॉर्ड भी किया है। साथ ही अदालत में भी जमा कराया है। हिंदू मंदिर के शिखर को क्षतिग्रस्त कर दिया गया है और इसे मस्जिद के गुंबदों से ढक दिया गया है। गुंबदों में छोटी-छोटी खिड़कियाँ हैं, जिनमें से हम अर्ध-टूटे हुए शिखर को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं।”

उन्होंने बातचीत में आगे कहा, “इसके बाद विवादित ढाँचे की दीवारों पर हिंदू संस्कृति और परंपरा के कई चिह्न और प्रतीक मिले हैं। विवादित ढाँचे की सभी दीवारों पर त्रिशूल, डमरू, स्वास्तिक और कई अन्य चिन्ह स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। गुंबद के नीचे एक ज्ञानवापी कैलेंडर भी है और उसके पीछे दीवार पर खुदा हुआ स्वास्तिक चिन्ह है। इससे पता चलता है कि किस तरह सच्चाई को छुपाने की कोशिश की गई। मस्जिद के खंभों और दीवारों पर भी संस्कृत के श्लोक लिखे हुए हैं।”

वह बताते हैं, “दीवारों पर देवताओं की तोड़ी गई मूर्तियाँ दिख रही हैं। तहखाने में, चारों ओर छोटे-छोटे मंदिर हैं। सर्वेक्षण के दौरान, हम वज़ूखाना में आए और वज़ू तालाब के केंद्र में एक संरचना मिली। मैंने परिसर के केयरटेकर ऐजाज़ भाई से कहा कि पानी निकाल दो ताकि हम जाँच सकें कि अंदर क्या है। वे विभिन्न कारण बताते हुए इनकार करते रहे लेकिन हमने अपनी बात जारी रखी। अंत में, उन्होंने इसका पानी निकाला। इसके बाद हमने जो पाया वह आश्चर्यजनक था। उस तालाब के केंद्र में एक विशाल शिवलिंग बना हुआ था, जिसे उन्होंने एक फव्वारा होने का दावा किया। इसलिए, हमने शिवलिंग का वैज्ञानिक परीक्षण कराने के लिए एक याचिका दायर की। वे इस कदम का विरोध भी कर रहे हैं। अगर वे कहते हैं कि यह एक फव्वारा है तो चिंता क्यों कर रहे हैं? सच को सामने आने दें।”

वह बताते हैं, “यह इतना घृणित है कि शिवलिंग को वज़ूखाना में छिपाया गया था, जहाँ मुस्लिम अपने पैर धोने और कुल्ला करने गए थे। इस तरह उन्होंने हिंदुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया। वे इस बात पर जोर देते हुए सुप्रीम कोर्ट भी गए कि उन्हें उसी तालाब में वुज़ू करने की अनुमति दी जानी चाहिए। मैं सॉलिसिटर जनरल और केंद्र सरकार का बहुत-बहुत आभारी हूँ, जिन्होंने अदालत में कहा कि अगर कोई शिवलिंग को भी छूता है, तो यह कानून का उल्लंघन होगा। यह हास्यास्पद है कि औरंगजेब ने अपने शासनकाल के दौरान एक भी मस्जिद नहीं बनाई। सिर्फ मंदिरों को तोड़कर उन्हें इस्लामिक स्थलों में बदल दिया। मुस्लिम पक्ष की ओर से केवल सच्चाई छुपाने के लिए धमकियाँ दी जा रही हैं। यह सच्चाई केवल वैज्ञानिक जाँच और विशेषज्ञों के माध्यम से सामने आ सकती है, न कि जनमत संग्रह के माध्यम से। यह न्याय का मामला है और इसका फैसला किसी भी संसद में नहीं किया जा सकता है। यह केवल न्याय की अदालत में, कानून की अदालत में तय किया जा सकता है। ये लोग अदालतों को धमका भी रहे हैं, जो कल्पना से बाहर है। मुझे लगता है कि प्रशासन को उन पर भारी पड़ना चाहिए।”

वैज्ञानिक जाँच की बात करें तो हिंदुओं की तरफ से कार्बन डेटिंग की माँग क्यों की गई है?

उन्होंने कहा, “मुझे इस बारे में बहुत कुछ समझाना है। कार्बन डेटिंग से जुड़े तथ्य को गलत रूप में पेश किया गया है। पूरे मामले को पटरी से उतारने की बहुत बड़ी साजिश रची गई है। इस प्रश्न का उत्तर देने से पहले, मैं इस मामले की पृष्ठभूमि पर जोर देना चाहूँगा।”

वह बताते हैं, “इस साल 5 मई को हमने वाराणसी में सभी पाँचों याचिकाकर्ताओं से मुलाकात की और सर्वेक्षण के लिए रूट मैप तय किया गया। हालाँकि, 8 मई को राखी सिंह के एक प्रतिनिधि (पाँच में से एक याचिकाकर्ता) ने अदालत में एक आवेदन दायर किया कि वह मामला वापस लेना चाहती हैं। फिर, अन्य चार याचिकाकर्ताओं ने कहा कि वे किसी भी कीमत पर केस वापस नहीं लेंगे और अगर राखी सिंह चाहें तो वह अपने पक्ष से हट सकती हैं। बाद में चारों याचिकाकर्ताओं को राखी सिंह के प्रतिनिधि द्वारा एक होटल के कमरे में आमंत्रित किया गया और उनसे कहा गया कि यदि वे मामला वापस लेते हैं, तो उन्हें एक तरह से लाभ होगा। चारों याचिकाकर्ताओं ने उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया और कहा कि अगर उन्हें जहर का सेवन करने के लिए मजबूर किया जाता है तो भी वे मामला वापस नहीं लेंगे। इसके बाद कोर्ट ने सर्वे का आदेश दिया और इसे 14, 15 और 16 मई 2022 को पूरा किया गया।”

उन्होंने आगे बताया, “इस सबके बाद मीडिया में तुच्छ अभियान चलाए गए कि मुझे और मेरे पिता को इस मामले से हिंदू पक्ष के वकील के रूप में हटा दिया गया। यह सब एक विवाद के तहत किया जा रहा था। मुस्लिम पक्ष अच्छी तरह से जानता है कि जब तक हम याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, तब तक वे इस मामले को नहीं जीत सकते। मुझे और मेरे पिता को केस छोड़ने और अपनी जान बचाने के लिए कई बार जान से मारने की धमकियाँ मिलीं। लेकिन हम अड़े थे। हम अड़े हैं और महादेव के आशीर्वाद से हम इस केस को जरूर जीतेंगे। अब कार्बन डेटिंग की बात करें तो, हिंदू पक्ष के रूप में, हमने कभी इसके लिए नहीं कहा। हमने अदालत में इसके लिए कभी नहीं पूछा। हमने विवादित जगह की वैज्ञानिक जाँच के लिए कहा। लेकिन एक साजिश के तहत इसे सार्वजनिक किया गया कि हम कार्बन डेटिंग की माँग कर रहे हैं। हमने कभी कार्बन डेटिंग की माँग नहीं की और मैं चाहता हूँ कि यह ऑपइंडिया के माध्यम से जन-जन तक पहुँचे।”

उनके मुताबिक, “एक षडयंत्र के तहत सार्वजनिक रूप से यह संकेत दिया गया था कि हम शिवलिंग की कार्बन डेटिंग चाहते हैं और इससे शिवलिंग को शारीरिक रूप से नुकसान होगा। राखी सिंह और मुस्लिम पक्ष का हलफनामा पूरी तरह से एक ही था और दोनों ने साइट के वैज्ञानिक जाँच का विरोध किया था। राखी सिंह ने समझौता कर लिया है। हम केवल साइट का वैज्ञानिक जाँच चाहते हैं और यह अदालत को तय करना है कि शिवलिंग की उम्र की जाँच करने के लिए किस तरह के परीक्षण किए जाने की जरूरत है।”

(नोट: वकील विष्णु शंकर जैन का यह इंटरव्यू वज़ूखाना में मिले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग पर कोर्ट के फैसले से पहले लिया गया था। अंग्रेजी में इंटरव्यू पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)

अमेरिका में चोर-चोर के नारों के साथ पाकिस्तान के वित्त मंत्री का स्वागत, साथी नेता गुस्से में बकने लगे गालियाँ: मदीना और लंदन में भी हो चुकी है ऐसी बेइज्जती

पाकिस्तान की हरकतों की वजह से पूरी दुनिया में उसकी छवि धूमिल हो चुकी है। यही कारण है कि सार्वजनिक और वैश्विक मंचों में भी उसे विरोध का सामना करना पड़ता है। हालिया घटना अमेरिका से सामने आयी है। वहाँ पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डार को ‘चोर-चोर…’ के नारों का सामना करना पड़ा है। इन नारों के बाद इशाक डार के साथी नेता ने नारेबाजी करने वालों को गालियाँ दी हैं। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डार गुरुवार (13 अक्टूबर 2022) को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की सालाना बैठक में हिस्सा लेने अमेरिका पहुँचे थे, जहाँ वाशिंगटन डीसी में एक हवाई अड्डे पर लोगों ने इशाक डार को देखते ही चोर-चोर के नारे लगाने शुरू कर दिए।

इन नारों के बीच पाकिस्तानी वित्त मंत्री इशाक डार किसी तरह आगे निकल गए। हालाँकि, उनके साथ चल रहे एक व्यक्ति ने नारे लगाने वालों को गालियाँ दीं हैं। उसने नारेबाजी कर रहे लोगों पर चिल्लाते हुए कहा, “अपना मुँह बंद रखो, चिल्लाओ मत।” इसके बाद भी नारे लगा रहा एक व्यक्ति चुप नहीं हुआ तो उसने कहा, “I Will Fu%k You, माद&#@$ तू मुझे नहीं जानता।” 

एक रिपोर्ट के अनुसार, जिस व्यक्ति ने नारेबाजी करने वालों के साथ गाली-गलौज की है, वह पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज पार्टी के वर्जीनिया चैप्टर का अध्यक्ष मणि बट है।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान के नेताओं को इस तरह से अपमान झेलना पड़ा हो। इससे पहले नवाज शरीफ की बेटी और पाकिस्तान की सूचना मंत्री मरियम औरंगजेब को भी बीते महीने लंदन में ऐसे ही नारों का सामना करना पड़ा था। दरअसल, वह एक कॉफी शॉप में जा रही थीं। तब, वहाँ रह रहे पाकिस्तानियों ने उन्हें घेर लिया था और उनके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी थी। ये लोग मरियम औरंगजेब के खिलाफ ‘चोरनी-चोरनी’ के नारे लगा रहे थे।

यही नहीं, हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल को भी ऐसे ही विरोध का सामना करना पड़ा था। दरअसल, शहबाज शरीफ के प्रतिनिधि मण्डल के सदस्य सऊदी अरब के मदीना में मस्जिद-ए-नबावी में प्रवेश कर रहे थे। इस दौरान उनका स्वागत ‘चोर आया चोर’ के नारों से किया गया था।

भारतीय छात्र पर ऑस्ट्रेलिया में 11 बार चाकू से हमला: चेहरे, छाती, पेट में कई वार – IIT से पढ़ने के बाद सिडनी में कर रहे पीएचडी

ऑस्ट्रेलिया में एक बार फिर भारतीय छात्र पर हमले की खबर सामने आ रही है। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक पैसों की माँग करने वाले एक व्यक्ति ने 28 वर्षीय भारतीय छात्र शुभम गर्ग के चेहरे, छाती और पेट में कई बार चाकू से वार कर उन्हें गंभीर रूप से घायल (Indian student stabbed in Australia) कर दिया। शुभम गर्ग IIT चेन्नै से पढ़ने के बाद इंजीनियरिंग में पीएचडी की पढ़ाई करने ऑस्ट्रेलिया गए हैं।

ऑस्ट्रेलिया की पुलिस के अनुसार यह घटना 6 अक्टूबर को रात करीब 10.30 बजे हुई। उस समय शुभम गर्ग पेसिफिक हाईवे से कहीं जा रहे थे। तभी डेनियल नॉरवुड ने गर्ग के चेहरे, छाती और पेट पर चाकू से 11 बार वार कर दिया। पुलिस ने आरोपित डेनियल नॉरवुड को गिरफ्तार कर लिया है। उस पर हत्या के प्रयास का आरोप लगाया गया है।

समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, सिडनी में भारतीय वाणिज्य दूतावास ने शुभम गर्ग को कांसुलर सहायता प्रदान की है। शुभम आगरा के रहने वाले बताए जा रहे हैं और दूतावास उनके परिवार को वीजा सुविधा देने में मदद कर रहा है।

ऑस्ट्रेलिया की पुलिस ने यह भी बताया है कि अपने ऊपर हुए हमले के बाद रॉयल नॉर्थ शोर अस्पताल ले जाने से पहले शुभम गर्ग ने पास के एक घर से मदद माँगी थी। अस्पताल में शुभम की कई सर्जरी हुई है और उनकी हालत गंभीर लेकिन स्थिर बनी हुई है।

स्थानीय अखबार द कोव की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार (6 अक्टूबर 2022) को पैसिफिक हाईवे लेन कोव के पास एक अज्ञात व्यक्ति (बाद में जिसकी पहचान आरोपित डेनियल नॉरवुड के तौर पर हुई) ने पैसों की माँग करते हुए शुभम को धमकी दी थी। जब उन्होंने पैसे देने से इनकार कर दिया तो हमलावार ने कथित तौर पर उन पर चाकू से कई बार वार (Indian student stabbed in Australia) किया। घटना के बाद आपातकालीन सेवाओं को बुलाया गया और भारतीय छात्र को सहायता प्रदान की गई।

रिपोर्ट के अनुसार, नॉर्थ शोर पुलिस एरिया कमांड से जुड़े अधिकारी इस दुर्भाग्‍यपूर्ण घटना की जाँच कर रहे हैं और स्ट्राइक फोर्स प्रोसी का गठन किया गया है। बयान में कहा गया है कि गोस्फोर्ड के रहने वाले संदिग्‍ध नॉरवुड को घटनास्थल के पास से गिरफ्तार किया गया है और उसे चैट्सवुड पुलिस स्टेशन ले जाया गया है। उस पर छुरा घोंपने के बाद हत्या के प्रयास का आरोप लगाया गया है। हमलावर के घर से कई सामान जब्त किए गए हैं और उन चीजों को फॉरेंसिक जाँच के लिए ले जाया गया है।

द कोव की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपित को जमानत देने से इनकार कर दिया गया है और अगली बार कोर्ट के समक्ष पेश होने तक वह हिरासत में ही रहेगा। पुलिस ने यह भी कहा है कि शुभम गर्ग और आरोपित घटना से पहले एक-दूसरे को नहीं जानते थे।

पाकिस्तान के अस्पताल की छत पर 500 लाशें, अधिकतर के कई अंग गायब: वीडियो देख काँप जाएगी रूह, आनन-फानन में जाँच के आदेश

पाकिस्तान के मुल्तान शहर में स्थित पंजाब निश्तार हॉस्पिटल की छत पर शवों का ढेर सामने आया है। बताया जा रहा है कि हॉस्पिटल की छत पर मिले सभी शवों में चीर-फाड़ की जा चुकी है। इन शवों से शरीर के अंग भी गायब हैं। जिनमें से कुछ शवों के सीने खुले हुए हैं। इससे इस बात की आशंका जताई जा रही है कि शवों से हृदय व अन्य अंग निकाले गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स में पंजाब निश्तार हॉस्पिटल की छत पर मिले इन शवों की संख्या 500 के आसपास बताई जा रही है। ये शव किसके हैं और हॉस्पिटल की छत पर क्यों रखे गए थे, इस बारे में अब तक कोई भी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालाँकि, ऐसा कहा जा रहा है कि या तो इन शवों का उपयोग मानव अंगों की तस्करी के लिए किया जा रहा था या फिर इन पर चिकित्सा प्रयोग किया गया होगा।

पंजाब निश्तार हॉस्पिटल की छत पर मिले इन शवों का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हालाँकि, ये वीडियो आपको विचलित कर सकता है, क्योंकि दृश्य काफी भयावह हैं।

इस मामले में, पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र के मुख्यमंत्री के सलाहकार चौधरी जमां गुर्जर ने पंजाब निश्तार हॉस्पिटल का दौरा किया है। इस दौरे में उन्होंने सभी शवों का अंतिम संस्कार करने का आदेश देते हुए संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों को मामले की जाँच कर आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आदेश दिया है।

वहीं, मुख्यमंत्री चौधरी परवेज इलाही ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए जाँच के आदेश जारी किए हैं। उन्होंने शव को गलत तरीके से रखने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भी आश्वासन दिया है। इस मामले की जाँच के लिए दक्षिण पंजाब के अतिरिक्त मुख्य सचिव साकिब जफर ने विशेष स्वास्थ्य विभाग के सचिव की अध्यक्षता में 6 सदस्यों की टीम गठित कर, तीन दिन के अंदर जाँच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

गौरतलब है कि हॉस्पिटल में करीब 500 शव मिलने के इस मामले में निश्तार मेडिकल यूनिवर्सिटी के एक छात्र ने कहा है कि यूनिवर्सिटी के छात्र इन शवों का उपयोग चिकित्सा प्रयोगों के लिए कर रहे थे। इन सभी शवों पर चिकित्सा प्रयोग पहले ही किया जा चुका है। इन शवों से हड्डियों और खोपड़ी को निकालकर आगे के प्रयोग के लिए छत पर रखा गया था।

500 bodies found on the roof of a hospital in Pakistan

वाराणसी कोर्ट ने नहीं दी ज्ञानवापी शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की इजाजत, कहा – इसे क्षति पहुँचने की आशंका: अब हिन्दू पक्ष जाएगा सुप्रीम कोर्ट

वाराणसी की एक अदालत (Varanasi Court) ने शुक्रवार (14 अक्टूबर, 2022) को 4 हिंदू पक्षों द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को वैज्ञानिक जाँच करने के लिए निर्देश देने की माँग की गई थी। इसकी माँग इसीलिए की गई थी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के सर्वेक्षण के दौरान मिली वस्तु शिवलिंग (Shivinga) है या फव्वारा। न्यायाधीश डॉ एके विश्वेश ने याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का हवाला दिया, जिसमें शिवलिंग पाए जाने वाले स्थान को सील करने को कहा गया था।

इसको ध्यान में रखते हुए न्यायाधीश ने निर्णय सुनाया कि किसी भी वैज्ञानिक जाँच की अनुमति नहीं दी जा सकती है। जिला अदालत ने कहा कि शिवलिंग को क्षति पहुँचने से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन होगा और लोगों की धार्मिक भावनाएँ भी आहत हो सकती हैं।

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे का प्रबंधन करने वाली अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद समिति ने हिंदू उपासकों द्वारा दायर याचिका पर आपत्ति जताई थी। समिति ने इस संरचना को ‘फव्वारा’ कहा है, जिसको लेकर हिंदू पक्ष ने अदालत का रुख किया था। उन्होंने कहा था कि एक अधिवक्ता आयुक्त द्वारा सर्वेक्षण के बाद उस जगह पर खोजी गई वस्तु एक शिवलिंग है, जो हिंदू भक्तों के लिए पूजनीय है। यह प्राचीन काल से ही विवादित परिसर के अंदर मौजूद है।

बताया जा रहा है कि अपनी याचिका में पाँच हिंदू महिलाओं ने ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के वजूखाने में मिली शिवलिंग की उम्र, लंबाई और चौड़ाई का पता लगाने के लिए इस वैज्ञानिक जाँच की माँग की थी। इस जाँच के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को आदेश देने की अपील की गई थी। आज याचिका लगाने वाली महिलाओं में से राखी सिंह को छोड़कर बाकी चार महिलाएँ सीता साहू, मंजू व्यास, रेखा पाठक और लक्ष्मी देवी सुनवाई के दौरान मौजूद थीं।

बता दें कि वाराणसी में 16 मई 2022 को ज्ञानवापी का सर्वे पूरा किया था। इस दौरान हिन्दू पक्ष ने शिवलिंग मिलने का दावा किया था। शिवलिंग उस स्थान से मिलने का दावा किया गया था, जहाँ पर नमाज से पहले वज़ू किया जाता था। वज़ूखाना वो जगह होती है, जहाँ नमाज़ी नमाज़ से पहले अपने हाथों और पैरों को साफ़ करते हैं। इस्लामी मान्यताओं के मुताबिक, ऐसा इबादत से पहले साफ-सफाई के लिए किया जाता है। वज़ूखाना मूलतः 2 शब्दों से मिल कर बना है। पहला वज़ू जिसका अर्थ होता है शरीर के अंगों को साफ़ करना और दूसरा खाना जिसका मतलब उस जगह से है जहाँ वज़ू किया जाता है।

साइको किलर और सीरियल रेपिस्ट है केरल का मोहम्मद शफी, महिलाओं को तड़पते देख होता था खुश: 75 साल की महिला का रेप कर भी पा गया था बेल

केरल (Kerala) में अमीर बनने के लिए दो महिलाओं की दी गई नरबलि के मामले में हैरान करने वाले तथ्य सामने आए हैं। घटना का मास्टरमाइंड मोहम्मद शफी उर्फ राशिद बलात्कार के एक अन्य मामले में जमानत पर बाहर था। उसने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया था। वहीं, यह बात भी सामने आई है कि जिस दंपत्ति के साथ मिलकर उसने दो महिलाओं की हत्या की थी, उनमें एक की हत्या की भी वह योजना बना चुका था।

केरल की घटना का मुख्य आरोपित मोहम्मद शफी साइको किलर और सीरियल रेपिस्ट है। उसे महिलाओं के निजी अंगों को जख्मी करना ‘अच्छा’ लगता था और इस दौरान उन्हें तड़पता देख वह खुश होता था। हत्या से पहले 75 साल की बुजुर्ग महिला से रेप के बाद उसे बुरी तरह प्रताड़ित किया था। उसके शरीर पर चोट के 24 निशान मिले थे।

मोहम्मद शफी ने फेसबुक पर ‘श्रीदेवी’ बनकर नेचुरल थैरेपिस्ट भगवल सिंह को फँसाया और उसे नरबलि देने के लिए राजी किया था। उसने भगवल को आश्वासन दिया था कि दो महिलाओं की बलि देने के बाद उसकी सारी आर्थिक समस्याएँ दूर हो जाएँगी।

इसके बाद मोहम्मद शफी ने भगवल से महिलाओं को खोजने के लिए दो लाख रुपए भी ठगे और उन्हें लाने के लिए दंपत्ति से कार भी खरीदवाया। यह बात भी सामने आई कि नरबलि देने के लिए भगवल की पत्नी लैला ने तैयार किया था। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मुख्य आरोपित मोहम्मद शफी और लैला की नजदीकियाँ बढ़ गईं।

यह बात भी सामने आई है कि मोहम्मद शफी लैला के साथ मिलकर उसके पति भगवल को रास्ते से हटाने की योजना बना चुका था। अगर इन महिलाओं की हत्या का भंडाफोड़ नहीं होता तो इनका अगला शिकार भगवल ही होता। लैला भगवल की दूसरी पत्नी है। उसकी पहली पत्नी और बच्चे विदेश में रहते हैं। वहीं, पुलिस की पूछताछ में आरोपितों ने किसी भी इंसान का मांस नहीं खाया था।

उधर, जाँच के दौरान खुलासा हुआ कि आरोपित मोहम्मद शफी ने इन दो महिलाओं की हत्या से पहले अगस्त 2020 में 75 साल की एक बुजुर्ग का बलात्कार किया था। इसके बाद महिला को बुरी तरह घायल कर दिया था। इस मामले में उसे गिरफ्तार किया गया। हालाँकि, बाद में कोर्ट ने उसे कुछ शर्तों के साथ उसे जमानत दी थी, लेकिन इन शर्तों का भरपूर उल्लंघन किया।

शर्त के बावजूद मोहम्मद शफी ने शहर से बाहर जाकर पठानमथिट्टा की यात्रा की और भगवल और उसकी पत्नी लैला के साथ मानव बलि दी। पुलिस का कहना है कि वह मामले को सत्यापित कर रही है।

वहीं, दो महिलाओं की नरबलि के मामले में जाँच टीम ने मोहम्मद शफी द्वारा ‘श्रीदेवी’ के नाम से बनाई गई फर्जी फेसबुक आईडी को बरामद कर लिया है। इसी आईडी से शफी साल 2019 से भगवल से करता था।

टीम ने भगवल और ‘श्रीदेवी’ के बीच हुई सारी चैट को रिकवर कर लिया है। यह बातचीत करीब 100 पेज लंबी है और इसमें काले जादू पर विस्तार से चर्चा की गई है। इस फर्जी आईडी के बायो में लिखा है: “अगर आपको आर्थिक समस्या है तो मुझसे संपर्क करें।”