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खुदाई में मिला हजारों साल पुराना ‘फ्रिज’ और उसमें रखा खाना, साथ में सूर्य देवता की वेदी भी: वैज्ञानिक भी नहीं समझ पा रहे कैसे करता है काम

यूरोपीय देश बुल्गारिया (Bulgaria) में पुरातत्वविदों ने एक प्राचीन फ्रिज (Fridge) बरामद किया है, जिसमें अभी भी बचा हुआ खाना है। जिस जगह यह फ्रिज मिला है, वह पहले रोमन साम्राज्य (Roman Empire) का एक सैन्य शिविर था। यह पहली शताब्दी ईस्वी का होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

यह बुल्गारिया के Svishtov शहर से लगभग चार किलोमीटर पूर्व में स्थित नोवा (Novae) पुरातात्विक स्थल में पाई गई है। यह फ्रिज सिरेमिक प्लेटों से बनाया गया है। इसमें अभी भी जानवरों की हड्डियाँ, व्यंजन के टुकड़े और पके हुए मांस के निशान हैं।

पोलैंड में वारसॉ विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने इसे 7 अक्टूबर 2022 को दुनिया के सामने लाया है। यूनिवर्सिटी के एंटिकिटी ऑफ साउथईस्टर्न यूरोप रिसर्च सेंटर के प्रोफेसर पिओट्र डाइजेक के अनुसार, फ्रिज और अंदर की सामग्री की सही उम्र के बारे में अभी पता लगाया जाना बाकी है।

विशेषज्ञों ने यह नहीं बताया कि फ्रिज कैसे काम करता था, लेकिन आमतौर पर उन्हें जमीन के नीचे गड्ढों में रखा जाता था, जो गर्मियों में सामग्री को अच्छी तरह से ठंडा रखने के लिए बर्फ से ढके होते थे। डाइजेक ने बताया कि ऐसे ‘रेफ्रिजरेटर’ की खोज दुर्लभ है, क्योंकि इमारतों के पुनर्निर्माण के दौरान शायद ही ये बचते हैं।

फ्रिज के अलावा, पुरातत्वविदों को सिक्कों का एक संग्रह मिला, जिनमें से अधिकांश कांस्टेंटाइन द ग्रेट के शासनकाल की शुरुआत से लेकर तीसरी शताब्दी के मध्य में तक के हैं। तीसरी शताब्दी के मध्य में गोथ आक्रमण हुआ था। उन्होंने घर के अवशेषों के साथ-साथ दीवारों की एक पूरी लाइन का भी खुलासा किया, जिसमें क्वार्न पत्थरों, बुनाई और मछली पकड़ने, हड्डियों और पोत के टुकड़े शामिल हैं।

प्रोफेसर ने बताया कि इस क्षेत्र में चल स्मारकों का भी पता लगाया गया है और उनमें से सबसे महत्वपूर्ण हैं, दो रोमन वेदियाँ। इन वेदियों पर अभिलेख भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, “वे बहुत ही अनोखे हैं, हम मिथ्रा को समर्पित वेदियों के बारे में ज्यादा नहीं जानते हैं।”

इनमें से एक सूर्य देवता को समर्पित है, जिन्हें मिथ्रा कहा जाता था। वहीं, दूसरा वेदी कैपिटोलिन ट्रिनिटी (बृहस्पति, मिनर्वा, जूनो) को समर्पित है। इसे इटली की पहली सैन्य टुकड़ी के सेनापति द्वारा दान किया गया था।

डाइजेक ने कहा, “वेदियों के दाताओं के कार्य बहुत दिलचस्प हैं। सेनापति सेना का निशान पहनता था और यह एक उच्च पद था। अब तक, ऐसे पदों पर बैठे पुरुषों को चित्रित करने वाले कुछ शिलालेख पाए गए हैं।”

विशेषज्ञों का कहना है कि नोवा शहर को पहली शताब्दी ईस्वी में रोमन सैनिकों के लिए डेन्यूब नदी पर एक स्थायी सैन्य शिविर के रूप में बसाया गया था। यहाँ बने किले में पाँचवीं शताब्दी के मध्य तक सैनिक रहते थे। माना जाता है कि लगभग 6.2 मील नहर और दो बड़े पानी के टैंकों से बुल्गारिया स्थित रोमन सेना को पानी पहुँचाया जाता था।

इस कन्नड़ फिल्म ने IMDb पर अब तक की सभी भारतीय फिल्मों को पछाड़ा, 14 दिनों में लागत से 5 गुना अधिक कमाई: टीम से मिले मोदी सरकार के मंत्री

कन्नड़ फिल्म ‘कांतारा (Kantara)’ गत 30 सितंबर को रिलीज हुई है। रिलीज के महज 14 दिन में ही फिल्म ने लागत से करीब 5 गुना अधिक की कमाई कर ली है। यह फिल्म IMDb पर सबसे अधिक रेटिंग वाली भारतीय फिल्म भी बन गई है। फिल्म के निर्माताओं ने शुक्रवार (14 अक्टूबर, 2022) को केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर से मुलाकात की है।

ऋषभ शेट्टी (Rishab Shetty) और सप्तमी गौड़ा (Sapthami Gowda) स्टारर फिल्म ‘कांतारा’ बॉक्स ऑफिस पर लगातार धमाल मचा रही है। इस बीच केंद्रीय केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने ट्वीट कर बताया है कि कांतारा के निर्माताओं ने उनसे मुलाकात की है।

अनुराग ठाकुर ने ट्वीट कर कहा, “मैं Hombale Films की टीम से मिला और उनकी फिल्म ‘कांतारा’ के लिए उनकी सफलता की कामना की। साथ ही भारत को फिल्म दुनिया का हब बनाने के विषय में बातचीत की।”

इस फिल्म की लोकप्रियता की बात करें तो IMDb (इंटरनेट मूवी डेटाबेस) पर यह फिल्म सबसे अधिक रेटिंग वाली भारतीय फिल्म बन गई है। IMDb पर ‘कांतारा’ को 10 में से 9.5 रेटिंग मिली है। इस फिल्म को करीब 13,000 लोगों ने रेटिंग दी है। दिलचस्प बात यह है कि इसे 90 प्रतिशत से अधिक लोगों ने 10 में से 10 रेटिंग दी है। मात्र दो प्रतिशत लोगों ने ही फिल्म को एक रेटिंग दी है।

यह कहना गलत नहीं होगा कि ‘कांतारा’ ने साउथ की ही ‘KGF 2’ और ‘RRR’ जैसी सुपरहिट फिल्मों को भी पीछे छोड़ दिया है। IMDb पर KGF 2 को 8.4 रेटिंग मिली है। वहीं, RRR को 8 रेटिंग दी गई है। इसका सीधा मतलब है कि ‘कांतारा’ ने दर्शकों के दिल में सीधे जगह बनाने में कामयाबी पाई है।

गौरतलब है कि इस फिल्म के कन्नड़ वर्जन की लोकप्रियता के बाद हिंदी पट्टी में भी इसकी माँग की जा रही थी। अब दर्शकों की माँग के आधार पर फिल्म 14 अक्टूबर को हिंदी में भी रिलीज की गई है। जिसके बाद इस फिल्म की कमाई बढ़ने की और तेजी से बढ़ने की संभावनाएँ जताई जा रहीं हैं।

‘कांतारा’ के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की बात करें तो फिल्म शुरुआत से ही बेहतरीन प्रदर्शन करती आ रही है। हालाँकि, रिलीज के कुछ दिनों बाद फिल्म की कमाई में अप्रत्याशित बढ़त भी देखने को मिली है। मसलन, रिलीज के बाद 9वें और 10 वें दिन फिल्म ने 17 करोड़ से अधिक की कमाई की थी, जो कि फिल्म की लागत मूल्य 16 करोड़ से भी अधिक है। ‘Sachnik’ की रिपोर्ट के अनुसार, ‘कांतारा’ ने अब तक कुल 85.6 करोड़ रुपए की कमाई कर ली है। यानी फिल्म जल्द ही 100 करोड़ के क्लब में भी शामिल हो सकती है।

फिल्म की कहानी

इस फिल्म की कहानी जल्लीकट्टू जैसे दक्षिण भारत के खेल पर आधारित है, जो आधुनिक और सांस्कृतिक विरासत के बीच एक टकराव को दिखाती है। फिल्म की कहानी कुछ यूँ है कि एक राजा ने देवता माने जाने वाले एक पत्थर के बदले अपनी कुछ जमीन गाँव वालों को दे दी थी। राजा को देवता ने पहले ही बता दिया था कि अगर उसने जमीन वापस ली तो अनर्थ हो जाएगा।

दूसरी तरफ एक वन विभाग के अधिकारी को लगता है कि गाँव के लोग अंधविश्वास के कारण जंगल को नुकसान पहुँचा रहे हैं और पशुओं के साथ क्रूरता कर रहे हैं। यही टकराव फिल्म की कहानी है। फिल्म में गाँव वालों के जंगल और जानवरों से जुड़े अपने विश्वास हैं और उनका मानना है कि जब वो जंगल की सेवा करते हैं तो जंगल पर सिर्फ उनका अधिकार है।

कॉन्ग्रेस ने किया था जल्लीकट्टू का विरोध

2011 में कॉन्ग्रसे के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने उत्सव में सांडों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया था। साल 2009 के जल्लीकट्टू अधिनियम संख्या 27 के तमिलनाडु विनियमन के तहत त्योहार जारी रहा। वहीं, 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के कानून को रद्द कर दिया और जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध लगा दिया था।

हालाँकि, तमिलनाडु में जल्लीकट्टू का आयोजन जारी रहा। साल 2017 में तमिलनाडु सरकार ने भारत के प्रधानमंत्री के समर्थन से एक विधेयक पारित किया, जिसमें जल्लीकट्टू को पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (1960) से छूट दी। पहला कानूनी जल्लीकट्टू उत्सव 1 फरवरी 2017 को मदुरै जिले में आयोजित किया गया था। हालाँकि, साल 2021 के जलीकट्टू आयोजन में शामिल होने राहुल गाँधी खुद गए।

साल 2014 में तत्कालीन पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध का स्वागत किया था और कहा था, “मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करता हूँ। यह एक बर्बर प्रथा को समाप्त कर देगा।” मीडिया से बात करते हुए रमेश ने बाद में उत्सव को जारी रखने के भाजपा के प्रयासों की भी आलोचना की थी। उन्होंने इसे एक ‘बर्बर प्रथा’ कहा था और कहा था कि भाजपा चुनाव से पहले कुछ स्थानीय नेताओं को खुश करने के लिए उनका समर्थन कर रही है।

इसके पहले पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह से लेकर कॉन्ग्रेस के कई नेताओं तक पार्टी ने हमेशा जल्लीकट्टू का विरोध किया। ह्यूमेन सोसाइटी इंटरनेशनल के एनजी जयसिम्हा को संबोधित एक पत्र में डॉ सिंह ने त्योहार को मनोरंजन का एक क्रूर रूप बताया। उन्होंने कहा, “हमें बुलफाइट्स को हतोत्साहित करना होगा, जो मनोरंजन का एक क्रूर रूप प्रदान करते हैं।”

हिमाचल प्रदेश के लिए EC ने बजाया चुनावी बिगुल, गुजरात पर फैसला नहीं: 12 नवंबर को एक ही चरण में हो जाएगा मतदान, देखें कब आएँगे परिणाम

चुनाव आयोग ने शुक्रवार (14 अक्टूबर, 2022) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। हिमाचल प्रदेश में 25 अक्टूबर तक नामांकन होगा। 12 नवंबर को चुनाव होंगे और 8 दिसंबर को मतगणना होगी।

बात गुजरात की करें तो वहाँ के लिए अभी फैसला नहीं लिया गया है। 2001 से लेकर अब तक लगातार भाजपा की सरकार है। 21 वर्षों का ये क्रम आगे भी चलता रहेगा, ऐसा भाजपा को उम्मीद है। 2017 में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 182 में से 99 सीटें अपने नाम की थी। उसकी 16 सीटें कम हो गई थीं। वहीं कॉन्ग्रेस ने 16 सीटें ज्यादा जीतते हुए 77 सीटों को अपने नाम किया था। हालाँकि, इस बार कॉन्ग्रेस की स्थिति डाँवाडोल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के गृह राज्य में भाजपा मजबूत है।

गुजरात में तो भाजपा ने बीच में ही विजय रुपाणी को हटा कर भूपेंद्र पटेल को मुख्यमंत्री बनाया, लेकिन हिमाचल प्रदेश में पार्टी आलाकमान का भरोसा 2017 से ही मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पर ही रहा है। 68 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने पिछली बार 18 सीटें जोड़ते हुए 44 सीटें अपने नाम की थी। कॉन्ग्रेस की 15 सीटें कम हुईं और वो 21 विधायकों के साथ सत्ता से बेदखल हो गई। भाजपा के वयोवृद्ध नेता प्रेम कुमार धूमल चुनाव हार गए, जिस कारण भाजपा ने जयराम ठाकुर पर भरोसा जताया।

फ़िलहाल राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ भी चल रही है, ऐसे में इन दोनों राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस की भी परीक्षा होगी कि वो कितनी सीटें जीत पाती है। किसी भी सर्वे या ओपिनियन पोल में वो मजबूत नहीं दिख रही। अरविंद केजरीवाल की AAP ज़रूर दोनों राज्यों में हाथ-पाँव मार रही है और खासकर गुजरात को लेकर उसका रुख आक्रामक है, लेकिन पार्टी अपना खाता खोल ले यही बड़ी बात होगी।

हिजाब विरोधी लड़कियों को मानसिक अस्पताल भेज रहा ईरान, इस्लामी मुल्क ने सितंबर में 23 बच्चों की ले ली जान: अब तक 144 की हत्या

इस्लामी मुल्क ईरान (Islamic Country Iran) में हिजाब के खिलाफ महिलाएँ महीने भर से अधिक समय से सड़कों उतर कर प्रदर्शन (Anti-Hijab Protest) कर रही हैं। इनमें स्कूल छात्राओं की भी बड़ी संख्या है। इन प्रदर्शनों में भाग लेने वाली छात्र-छात्राओं को पुलिस हिरासत में लेकर मानसिक अस्पतालों में भेज रही है।

ईरान के शिक्षा मंत्री यूसेफ नूरी ने इस बात पुष्टि एक इंटरव्यू के दौरान भी किया। नूरी ने कहा कि कुछ स्कूली छात्र-छात्राओं को हिरासत में लिया गया है और उन्हें ‘मनोवैज्ञानिक संस्थान’ में ले जाया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि अधिकारी छात्राओं को सुधारने और उनके ‘असामाजिक’ व्यवहार को रोकने के लिए ऐसा कर हैं। हालाँकि, शिक्षा मंत्री ने ये नहीं बताया कि इनकी संख्या कितनी है।

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International) ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा है कि ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान पिछले महीने लगभग दो दर्जन बच्चे मारे गए थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सुरक्षा बलों ने जानबूझकर युवाओं को निशाना बनाया।

एमनेस्टी ने गुरुवार (13 अक्टूबर 2022) को जारी 19 पन्नों की अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अकेले सितंबर के आखिरी 10 दिनों में कम-से-कम 23 बच्चे मारे गए। इनमें से कुछ की उम्र 11 साल थी। एमनेस्टी के बयान में कहा गया कि पीड़ितों में 11 से 17 साल की उम्र के 20 लड़के और 3 लड़कियाँ शामिल हैं, जिनमें से दो की उम्र 16 साल और एक 17 साल की है।

एक बयान में एमनेस्टी ने कहा कि ईरानी अधिकारियों की इस ‘क्रूर कार्रवाई’ पर ईरान में कई लोग इस्लामिक गणराज्य प्रणाली के खिलाफ चल रहे लोकप्रिय विद्रोह को दबाया जा रहा है। इसके लिए छोटे-छोटे प्रदर्शनकारियों पर भी हमला किया जा रहा है, जो राजनीतिक उत्पीड़न और असमानता के बिना अपने भविष्य को तलाशने के लिए साहसपूर्वक सड़कों पर उतरे हैं।

एमनेस्टी ने कहा कि मारे गए बाल पीड़ितों में से लगभग आधे अल्पसंख्यक समूह के थे और ईरानी सुरक्षा बलों द्वारा ‘ब्लडी फ्राइडे’ कहलाने वाले 30 सितंबर को मारे गए थे। इस दिन को अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने सबसे घातक दिन बताया है। संगठन का कहना है कि ईरान के सुरक्षा बलों द्वारा मारे गए बच्चों की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक है।

रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर 2022 में पुलिस द्वारा मारी गई महसा अमीनी की मौत के बाद से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन से 3 अक्टूबर के बीच ईरान के सुरक्षा बलों ने 144 लोगों की हत्या कर दी है। इनमें महिला, पुरुष और बच्चे शामिल हैं। हालाँकि, मृतकों की वास्तविक संख्या इनसे कहीं अधिक बताई जा रही है।

बता दें कि महसा अमीनी की हत्या के बाद से महिलाएँ सड़कों पर उतर कर विरोध कर रही हैं। वे हिजाब फेंककर, जलाकर और अपने बालों को काटकर हिजाब के लिए इस्लामी सरकार का विरोध कर रही हैं। प्रदर्शनकारियों ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खुमेनाई की तस्वीरें भी जलाईं। इन प्रदर्शनकारी महिलाओं को देश-दुनिया से भर से भारी समर्थन मिल रहा है।

भारत से भी ईरानी की महिलाओं को लगातार समर्थन मिल रहा है। बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा और मंदाना करीमी ने हिजाब (Hijab) का विरोध किया है। वहीं, बॉलीवुड में काम करने वाली ईरानी अभिनेत्री एलनाज नोरौजी (Elnaaz Norouzi) ने हिजाब का विरोध करते हुए अपने कपड़े उतार दिए। इसका एक वीडियो उन्होंने इंस्टाग्राम पर भी शेयर किया।

बता दें कि गत 13 सितंबर को हिजाब न पहनने की वजह से महसा अमीनी को मोरल पुलिस ने गिरफ्तार किया था। हिरासत में उसे इतना मारा गया कि वह कोमा में चली गई। तीन दिन बाद यानी 16 सितंबर को उसकी मौत हो गई। इसके बाद से ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हुए, जो कि सरकार की दमनकारी नीतियों के कारण हिंसक होते चले गए।

दिल्ली शराब घोटाले में 25 ठिकानों पर ED की छापेमारी, मनीष सिसोदिया भी हैं आरोपित: बिहार में जदयू नेता के 31 ठिकानों पर IT की रेड

दिल्ली के शराब घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार (14 अक्टूबर, 2022) को 25 ठिकानों पर फिर से छापेमारी की। दिल्ली के कई बड़े शराब कारोबारियों के आवास और अन्य ठिकानों पर यह रेड मारी गई। इस केस में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी आरोपित हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आज जिन लोगों के ठिकानों पर छापेमारी चल रही है, उनमें कुछ बड़े कारोबारी भी शामिल हैं। इस मामले में जाँच एजेंसी ने काफी सबूत भी इकट्ठा कर लिए हैं। छापेमारी के बाद कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया जा सकता है। इससे पहले ईडी 7 अक्टूबर 2022 को दिल्ली समेत हैदराबाद और पंजाब में 35 ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिनमें कुछ नेता, पूर्व नौकरशाह और कारोबारी शामिल हैं।

वहीं, बिहार में भ्रष्टाचारियों की धर-पकड़ के लिए लगातार कार्रवाई जारी है। एक बार फिर आयकर विभाग ने जेडीयू नेता और बिल्डर गब्बू सिंह के घर पर छापा मारा है। गब्बू सिंह जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह के करीबी माने जाते हैं। बताया जा रहा है कि बिल्डर गब्बू सिंह (Builder Gabbu Singh) के लगभग 31 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी चल रही है। आयकर विभाग की यह छापेमारी गब्बू सिंह के ठिकानों के साथ साथ उनके स्टाफ के अलग-अलग ठिकानों पर भी चल रही है।

बता दें कि जाँच एजेंसियाँ दिल्ली के शराब घोटाले में अब तक तीन आरोपितों विजय नायर, समीर महेंद्रू और अभिषेक बोइनपल्ली को गिरफ्तार कर चुकी हैं। आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा अंजाम दिए गए शराब घोटाले (Liquor Scam) में 27 सितंबर, 2022 को पहली गिरफ्तारी हुई थी। CBI ने विजय नायर को गिरफ्तार किया था। सीबीआई ने शराब घोटाले में जो प्राथमिकी दर्ज की थी, उसमें दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) के अलावा विजय नायर का भी नाम था।

कहा जाता है कि नायर ने नई आबकारी नीति बनाने और शराब की सप्लाई और बिक्री को चंद कंपनियों तक सीमित करने की धांधली में अहम भूमिका निभाई थी। इस प्राथमिकी में कुल 14 लोगों को आरोपित बनाया गया था। विवादास्पद YouTube शो ‘ऑल इंडिया बकचोद (AIB)’ के पीछे विजय नायर का हाथ माना जाता है। गाली-गलौच से भरे इस शो के आते ही बवाल हो गया था और लोगों ने इस पर सवाल उठाना शुरू कर दिया था।

पंजाब का अजीबोगरीब ब्यूटी कॉन्टेस्ट, जीतने वाली लड़की को मिलेगा कनाडा वाला NRI दूल्हा: BJP नेता ने दर्ज कराई शिकायत, कहा – शोषण के लिए फँसाने की चाल

पंजाब के बठिंडा में ब्यूटी कॉन्टेस्ट का अजीबोगरीब मामला सामने आया है। इस ब्यूटी कॉन्टेस्ट के विज्ञापन में कहा गया है कि कॉन्टेस्ट जीतने वाली लड़की की शादी कनाडा में रहने वाले लड़के से कराई जाएगी। यानि, प्रतियोगिता जीतने वाली लड़की को ‘एनआरआई दूल्हा’ मिलेगा। इन पोस्टर्स को लेकर पंजाब बीजेपी के सचिव सुखपाल सिंह सरा ने पुलिस से शिकायत की थी, जिसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज करते हुए आयोजकों को गिरफ्तार किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह ‘ब्यूटी कॉन्टेस्ट’ आगामी 23 अक्टूबर को बठिंडा के एक होटल में होना था। इसके पोस्टर्स शहर में कई जगह पर लगाए गए थे। जिसके बाद, पुलिस ने इस प्रतियोगिता के दो आयोजकों सुरिंदर सिंह और रामदयाल सिंह को गिरफ्तार कर आईपीसी की धारा 501, 509 और 109 के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल पुलिस दोनों ही गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ कर रही है।

इस मामले में, भाजपा नेता सुखपाल सिंह सरा ने कहा है कि इस तरह का ऑफर देकर लोग कनाडा में रहने वाले लड़के की शादी भारतीय लड़की से कराकर शोषण कर सकते हैं। पुलिस को इस पूरे मामले की जाँच करनी चाहिए।

पुलिस का मानना ​​है कि यह ब्यूटी कॉन्टेस्ट कनाडा जाने की इच्छा रखने वाली भोली-भाली लड़कियों को फँसाने की एक चाल थी। गौरतलब है कि इस पोस्टर में कहा गया था कि यह प्रतियोगिता केवल ‘सामान्य जातियों’ की लड़कियों के लिए है। साथ ही यह भी दावा किया गया था कि ‘एनआरआई दूल्हा’ भी ‘सामान्य जाति’ का ही होगा।

गौरतलब है कि पंजाब में कनाडा जाकर जॉब करने का क्रेज है। इसके चलते है हर साल सैकड़ों लोग कनाडा जा रहे हैं। हालाँकि, इसमें ऐसे भी कई मामले सामने आए हैं जब कनाडा जाने के नाम पर लोगों ने शादियाँ तो की थीं लेकिन इसके बाद उन्हें ठग लिया गया था। पंजाब में कनाडा जाने के नाम पर दिखावटी शादी करने के बाद, दूल्हा द्वारा दुल्हन को छोड़ने के कई मामले सामने आते रहे हैं।

44 उम्मीदवार, नौकरी के लिए हर एक ने दिए ₹7 लाख: बंगाल शिक्षक घोटाले में ED को मिला CM ममता बनर्जी के नाम पत्र, एक और TMC विधायक गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले में तृणमूल कॉन्ग्रेस के विधायक माणिक भट्टाचार्य (Manik Bhattacharya) की गिरफ्तारी के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कई बड़े खुलासे किए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घोटाले में कई हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों के शामिल होने की बात सामने आई है। ईडी ने इस एवज में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल सबूत भी एकत्रित किए हैं।

जाँच एजेंसी ने कई बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने का सुझाव देने वाले एक पत्र के अलावा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को संबोधित एक पत्र को जब्त किया है। ये सभी इस तथ्य की ओर इशारा करते हैं कि लोगों को नौकरी देने के बदले में काफी पैसा लिया गया था। केंद्रीय जाँच एजेंसी ने करोड़ों रुपए के शिक्षक भर्ती घोटाले में अन्य महत्वपूर्ण सबूतों के अलावा राज्य की प्राथमिक शिक्षक परीक्षा के लिए चुने गए उम्मीदवारों के नाम और रोल नंबर वाली एक सीडी को भी जब्त करने का दावा किया है।

बताया जा रहा है कि एजेंसी ने सीएम ममता बनर्जी को कथित तौर पर संबोधित एक पत्र मिलने की बात भी कही है। इसमें पुष्टि की गई है कि 44 उम्मीदवारों में से हर एक ने नौकरी के बदले में 7 लाख रुपए का भुगतान किया था। यह राशि कथित तौर पर एक टीएमसी नेता द्वारा एकत्र की गई थी।

बता दें कि पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी के बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने 11 अक्टूबर 2022 को तृणमूल कॉन्ग्रेस के विधायक माणिक भट्टाचार्य को गिरफ्तार किया था। ईडी की ओर से दायर चार्जशीट में यह खुलासा किया गया था कि पार्थ चटर्जी और माणिक भट्टाचार्य ने मिलकर शिक्षक भर्ती में धांधली की है। पार्थ चटर्जी के फोन से भी जाँच एजेंसी को माणिक भट्टाचार्य के बारे में कई जानकारियाँ मिली थीं।

इस मामले में पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी को ईडी ने 23 जुलाई 2022 को गिरफ्तार किया था। अपनी करीबी अर्पिता मुखर्जी के अलग-अलग फ्लैटों में मिले करोड़ों रुपए को लेकर पार्थ चटर्जी ने अलग ही कहानी बयाँ की थी।

राजस्थान में आदमी से ज्यादा अहमियत कॉन्ग्रेसी पोस्टर की: कन्हैया लाल को नहीं दी सुरक्षा, लेकिन CM गहलोत की होर्डिंग के लिए 24 घंटे पुलिस की तैनाती

एक राजस्थान (Rajasthan) में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और क्राइम अपने चरम पर पहुँच गया है तो दूसरी तरफ पुलिस मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) की होर्डिंग की सुरक्षा में लगी हुई है। राजस्थान भारत का अकेला राज्य है, जहाँ मुख्यमंत्री की होर्डिंग की सुरक्षा के लिए पुलिस को तैनात किया गया है।

भाजपा ने राज्य सरकार की इस व्यवस्था को लेकर निशाना साधा है। पार्टी के सोशल मीडिया इंचार्ज अमित मालवीय ने कहा कि राज्य सरकार कन्हैयालाल को सुरक्षा नहीं दे सकी, लेकिन होर्डिंग की सुरक्षा में पुलिस 24 घंटे तैनात है।

जिस होर्डिंग की सुरक्षा में पुलिस को तैनात किया गया है, वह राजधानी जयपुर के राजस्थान यूनिवर्सिटी के सामने गाँधी सर्किल के चौराहे पर लगा हुआ है। इसमें प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार की योजनाओं के बारे में बताया गया है और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की तस्वीर लगी हुई है।

दरअसल, राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में गहलोत सरकार शहर-शहर में होर्डिंग-पोस्टर लगवा कर सरकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार कर रही है। इसी के तहत गाँधी सर्किल चौराहे पर भी पोस्टर लगाया गया है।

गाँधी सर्किल VIP एरिया में स्थित है। यहाँ से गुजरने वाली हर छोटी-बड़ी गाड़ी की स्पीड को कम करना पड़ता है। ऐसे में यहाँ लगे होर्डिंग-पोस्टर पर लोगों का ध्यान सबसे अधिक जाता है। यहाँ में हर कोई पोस्टर लगाना चाहता है।

कई बार होर्डिंग पर लोग पोस्टर चिपका देते हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की तस्वीर वाली होर्डिंग पर कोई दूसरा पोस्टर ना चिपका दिया जाए या उसे कोई फाड़ ना दे, इसके लिए पुलिस को सादी वर्दी में तैनात कर उसकी रखवाली की जा रही है।

होर्डिंग की रखवाली के लिए पुलिस की तैनाती पर भाजपा के अमित मालवीय ने कहा, “राजस्थान सरकार कन्हैया लाल को सुरक्षा नहीं दे सकी और जिसकी वजह से उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। लेकिन कॉन्ग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के होर्डिंग की सुरक्षा में 24 घंटे पुलिस तैनात रहती है। होर्डिंग की सुरक्षा जनता की जान से ज़्यादा ज़रूरी है?”

राजस्थान भाजपा के अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा, “राजस्थान के इतिहास में इतना असुरक्षित मुख्यमंत्री कभी नहीं देखा होगा। ये नजारा देखकर तो बिनोद भी हैरान है, अपराध कैसे रुकेंगे, मुख्यमंत्री तो बस अपने पोस्टर के लिए परेशान हैं।”

वहीं, बीजेपी आईटी सेल के सह संयोजक हीरेंद्र ने होर्डिंग की सुरक्षा में तैनात पुलिस वालों पर तंज कसते हुए कहा, “साब को खतरा है कि आलाकमान कहीं रातों-रात आकर पायलट का होर्डिंग ना चस्पा करवा दे।”

नूपुर शर्मा की हत्या की साजिश: ISIS के आतंकी से पूछताछ करने मॉस्को जाएगी NIA, उधर पाकिस्तान से आए आमिर का होगा नार्को टेस्ट

रूस ने तुर्की में इस्लामिक स्टेट (ISIS) द्वारा प्रशिक्षित एक उज़्बेक आतंकवादी से तीन महीने तक पूछताछ करने के लिए राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को मॉस्को आने की इजाजत दी है। भारत ने रूस से एनआईए को मॉस्को में आने देने का अनुरोध किया था। रूस ने पैगंबर मुहम्मद के कथित अपमान बदला लेने के लिए भारत के किसी बड़े नेता पर आत्मघाती हमला करने की साजिश रचने के लिए इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) के आतंकवादी को पकड़ा था।

रूस ने इस आत्मघाती हमलावर को अगस्त 2022 में दबोचा था। ISIS ने उसकी भर्ती ‘सुसाइड बॉम्बर’ के रूप में की थी। तुर्की की राजधानी इस्ताम्बुल में इस साजिश को लेकर कई बार आतंकियों के साथ व्यक्तिगत बैठकें भी हुई थीं। साथ ही वो टेलीग्राम एप के जरिए अपने आकाओं से जुड़ा हुआ था। उसने ISIS के आमिर नाम के आतंकी आका के प्रति वफादारी की कसम खाई थी। इसके बाद उसे रूस जाने का आदेश मिला था। साजिश थी कि वहाँ कागजी कार्यवाही पूरी कर के वो भारत आता और हाई प्रोफाइल हत्याकांड को अंजाम देता।

ऐसे में एनआईए से भारत में आतंकवादी हमला करने के लिए आईएस की बड़ी साजिश के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियाँ इकट्ठा करने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके तहत यह भी पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि हमले करने के लिए किसी भारतीय लिंक या फिर मॉड्यूल ने तो उज़्बेक, मशरब कोन आजमोव को विस्फोटक और अन्य सामानों की जानकारी तो मुहैया नहीं कराई थी। मालूम हो कि ‘फ़ेडरल सिक्योरिटी सर्विस फॉर रुस्सियन फेडरेशन (Russia’s Federal Security Service) ने यह जानकारी दी थी।

भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा की पैगंबर पर की गई टिप्पणी के बाद उन्हें मिल रही धमकियों के बाद इस आतंकी योजना का खुलासा हुआ था। वहीं, नूपुर शर्मा को मारने के लिए भारत आने वाले 22 वर्षीय पाकिस्तानी इजवान अशरफ का शुक्रवार (14 अक्टूबर, 2022) को गाँधीनगर की फोरेंसिक लैब में नार्को टेस्ट करने की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि सोमवार (10 अक्टूबर, 2022) को उसे जाँच एजेंसियों द्वारा गाँधीनगर लाया गया था।

उसकी सभी जाँच पूरी हो चुकी है। एनएफएसयू के अधिकारियों ने रिजवान के लिए सवालों की लिस्ट तैयार की है। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने राजस्थान के श्रीगंगानगर सीमा से रिजवान को जुलाई, 2022 में पकड़ा था। वह अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में बंद था। नूपुर शर्मा की हत्या के लिए पाकिस्तान से आए रिजवान अशरफ के पास से कई संदिग्ध वस्तुएँ भी बरामद हुई थीं। पूछताछ में उसने बताया था कि वो उत्तरी पाकिस्तान स्थित मंडी बहाउद्दीन शहर का रहने वाला है। ये शहर पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में स्थित है। उसने नूपुर शर्मा की हत्या के लिए बॉर्डर क्रॉस किया था।

AAP के पूर्व मंत्री की ‘हिंदू विरोधी शपथ’ से उखड़े बौद्ध संगठन: राष्ट्रपति को लिखा पत्र, कहा- देश बाँटने वालों पर कार्रवाई हो

दिल्ली की केजरीवाल सरकार में मंत्री रहे राजेंद्र पाल गौतम (Rajendra Pal Gautam) के खिलाफ बौद्ध संगठनों ने भी मोर्चा खोल दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) को पत्र लिखकर उस कार्यक्रम की निंदा की है, जिसमें ‘हिंदू विरोधी शपथ’ ली गई थी। साथ ही उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है जो इस तरह की गतिविधियों के जरिए देश को बाँटने का प्रयास कर रहे हैं।

इस साल दशहरे के दिन (5 अक्टूबर 2022) नई दिल्ली के अंबेडकर भवन में हुए इसी कार्यक्रम का वीडियो सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता गौतम को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इस कार्यक्रम में 10 हजार हिंदुओं को धर्मांतरित किया गया था। वीडियो में गौतम समेत कई लोग हिंदू विरोधी शपथ लेते दिख रहे थे। शपथ में कहा जा रहा था, “मैं हिंदू धर्म के देवी देवताओं ब्रह्मा, विष्णु, महेश, श्रीराम और श्रीकृष्ण को भगवान नहीं मानूँगा, न ही उनकी पूजा करूँगा। मुझे राम और कृष्ण में कोई विश्वास नहीं होगा, जिन्हें भगवान का अवतार माना जाता है।” इस मामले में दिल्ली पुलिस ने भी गौतम को पूछताछ के लिए बुलाया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अब बौद्ध संगठनों ने इस कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुए कानूनी कार्यवाही की माँग की है। इन संगठनों का कहना है कि राजेंद्र गौतम की मौजूदगी में जो कुछ हुआ वह बौद्ध के अनुसार नहीं है। न ही इसका भगवान बुद्ध के उपदेशों से लेना-देना है।

इस संबंध में राष्ट्रपति को लिखे पत्र पर 19 लोगों के हस्ताक्षर हैं। इनमें धर्म संस्कृति संगम के राष्ट्रीय महासचिव राजेश लांबा, सचिव डॉक्टर विशाखा सैलानी, महाबोधि सोसायटी ऑफ इंडिया के महासचिव भंते वेन पी सिवाली थेरो, संयुक्त सचिव भंते सुमिहानंद थेरो, इंटरनेशनल बौद्ध रिसर्च के शांति मित्र भी शामिल हैं। पत्र में आश्चर्य जताया गया है कि इस तरह के देश विरोधी कार्यक्रम में दिल्ली सरकार के मंत्री भी शामिल हुए।

पत्र में कहा है कि गौतम की उपस्थिति में हुए धर्मांतरण कार्यक्रम में जो कुछ भी हुआ वह बाबा साहब अंबेडकर और भारतीय संविधान के भी खिलाफ है। पत्र में बौद्ध संगठनों ने कहा है, “बौद्ध धर्म अन्य धर्मों के खिलाफ जहर उगलने की शिक्षा नहीं देता। बौद्ध धर्म अन्य देवी-देवताओं को ‘अस्वीकार’ करने या उनका अनादर करने का समर्थन नहीं करता। भगवान बुद्ध की शिक्षाएँ सदियों से ‘स्वयं प्रबुद्ध’ की भावना और सभी धर्मों के प्रति सम्मान का प्रतीक हैं। बौद्ध और हिंदू शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के साथ रहते हैं और इनके बीच एक समृद्ध अंतरधार्मिक संवाद रहा है।”

पत्र में यह भी कहा गया है “दिल्ली सरकार के मंत्री के वहाँ जाने की किसी ने निंदा नहीं की। हमें उम्मीद है कि जल्द से जल्द ऐसा किया जाएगा। हम संबंधित अधिकारियों से आग्रह करते हैं कि देश को बाँटने का प्रयास करने के लिए उनके (गौतम) साथ-साथ वहाँ उपस्थित अन्य लोगों के खिलाफ भी तत्काल कार्रवाई की जाए।”