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ब्रिटिश नहीं चाहते थे बँटवारा फिर भी कॉन्ग्रेस को था स्वीकार: विभाजन विभीषिका में राजनीतिक इस्लाम और मुस्लिम लीग की हिंसा पर क्या कहता है NCERT का नया मॉड्यूल?

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए दो अलग-अलग मॉड्यूल जारी किए हैं। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस हर वर्ष 14 अगस्त को मनाया जाता है।

NCERT एक स्वायत्त संस्था है जो शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत काम करती है। यह राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा तैयार करती और किताबें प्रकाशित करती है। इन किताबों का उपयोग CBSE के कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों द्वारा किया जाता है।

अब हाल ही में जारी किए गए NCERT के एक मॉड्यूल में यह बताया गया है कि भारत के बँटवारे के पीछे सबसे बड़ी ताकत राजनीतिक इस्लाम और उसकी विचारधारा थी। इसमें हिंदुओं पर हुए अत्याचार, मुस्लिम लीग की हिंसा, कॉन्ग्रेस पार्टी की जिम्मेदारी और यह बात भी शामिल की गई है कि पाकिस्तान के लिए वोट करने वाले ज्यादातर मुसलमान भारत में ही रह गए थे।

राजनीतिक इस्लाम और बंटवारा, पाक नहीं गए ज्यादातर मुस्लिम

मॉड्यूल में कहा गया कि मुस्लिमों के लिए अलग देश बनाया गया था फिर भी ज्यादातर मुस्लिम पाकिस्तान नहीं गए।

मॉड्यूल के पेज नंबर 4 पर लिखा गया है, “मुसलमानों के लिए एक पृथक देश बना दिया गया, फिर भी लगभग 3.5 करोड़ मुसलमान भारत में ही रह गए। पाकिस्तान की माँग और उस का निर्माण इसी आधार पर हुआ था कि यह समस्त भारतीय मुसलमानों का अलग देश होगा।”

मॉड्यूल में कहा गया है कि 1946 में हुए संविधान सभा के चुनावों में मुस्लिम लीग ने मुसलमानों के लिए आरक्षित 78 में से 73 सीटें जीत लीं। इस मुस्लिम लीग की मुख्य माँग पाकिस्तान थी।

मॉड्यूल में साफ तौर पर कहा गया है कि पाकिस्तान बनाने वाली संदेह, द्वेष और शत्रुता-भावना आज भी भारत में मौजूद है। इसमें बँटवारा और पाकिस्तान आंदोलन का मुख्य कारण राजनीतिक इस्लाम की विचारधारा को माना गया है।

इसमें पेज 6 पर लिखा है, “धर्म, संस्कृति, साहित्य, रीति-रिवाज, इतिहास, प्रेरणा-स्रोत और जीवन-दृष्टि के सभी आधारों पर मुस्लिम नेताओं ने अपने को हिन्दुओं से स्थाई रूप से भिन्न घोषित किया। इस की जड़ राजनीतिक इस्लाम की विचारधारा में थी, जो गैर-मुसलमानों के साथ किसी स्थायी या समान संबंध की संभावना को सिद्धांत रूप से ही नकारती है। यह सिद्धांत विश्व के विभिन्न हिस्सों में सदियों से लागू होता आया है, और आज भी अनेक देशों में देखा जा सकता है।”

इस मॉड्यूल में मुस्लिम लीग के नेता मुहम्मद अली जिन्ना के 22 मार्च 1940 के भाषण का भी जिक्र किया गया है। जिसमें जिन्ना ने मुस्लिमों के लिए अलग राष्ट्र की स्पष्ट माँग की थी।

जिन्ना ने कहा था, “हिंदू और मुसलमान दो भिन्न-भिन्न धार्मिक दर्शनों, सामाजिक रीति-रिवाजों, और साहित्य से जुड़े रहे हैं। वे न तो आपस में विवाह सम्बन्ध करते हैं, न ही साथ-साथ खाते-पीते हैं। वस्तुतः दोनों दो भिन्न सभ्यताओं से जुड़े हैं जिन के विचार और धारणाएं एक-दूसरे से विपरीत हैं।”

भारतीय नेताओं को विभाजन के भयावह परिणामों का अनुमान नहीं था। उन्होंने इस निर्णय के पहलुओं पर विचार नहीं किया था। इसमें विभाजन को जल्दबाजी में लिया गया फैसला बताया गया है।

मॉड्यूल में पेज 12 पर कहा गया है, “जिन कारणों से विभाजन स्वीकार किया गया था, वे आज भी बने हुए हैं। यह भी दिखाता है कि नेताओं ने उस मूल प्रश्न पर गंभीरता से विचार नहीं किया – मजहबी अलगाववाद की विचारधारा और किसी एक मजहब के लिए विशेष अधिकारों की माँग।”

NCERT ने बताया है कि भारतीय नेताओं ने हिंदू-मुस्लिम संबंधों की सच्चाइयों को नजरअंदाज कर सांप्रदायिकता का दोष भी ब्रिटिश शासकों पर डाल दिया।

इसमें पेज 11-12 पर लिखा है, “भारतीय नेताओं ने…अपने विमर्श को मुख्यतः ‘देशी बनाम विदेशी’ के रूप में सीमित रखा। भारत का वास्तविक इतिहास उपेक्षित किया गया। 1919 से, खलीफत-असहयोग आंदोलन से शुरू करके, राष्ट्रीय नेताओं ने हिन्दू-मुस्लिम संबंधों की ऐतिहासिक सच्चाइयों को लगातार नजरअंदाज किया। उन्होंने प्रत्येक समस्या, यहाँ तक कि सांप्रदायिकता का दोष भी, केवल ब्रिटिश शासकों पर डाल दिया। यह एक अतिशयोक्तिपूर्ण दोषारोपण था। यदि वे सच्चे इतिहास के आधार पर विचार कर निर्णय करते तो वे मुस्लिम लीग की सांप्रदायिक राजनीति को प्रारंभ से ही रोक सकते थे।”

जिहादी आतंक फैलाता है पाकिस्तान, दूसरे देशों से मिलती है मदद

NCERT के मॉड्यूल में पाकिस्तानी की भारत में जिहादी आतंकवाद फैलाने की कोशिशों और ‘हजार घाव’ देने की नीति का भी जिक्र किया गया है।

मॉड्यूल में लिखा है, “पाकिस्तान ने कश्मीर को हथियाने के लिए तीन युद्ध किए, और उस में बार-बार हारने पर अंदर-बाहर से ‘हजार घाव’ देने की नीति अपनाई। इस के अंतर्गत भारत में जिहादी आतंकवाद फैलाने की कोशिशें चलती रही है। इस के फलस्वरूप और इस से निपटने में अब तक हजारों भारतीय नागरिक और सैनिक मारे जा चुके हैं। यह सब भारत विभाजन के परिणाम हैं।”

साथ ही, इसमें पाकिस्तान को कई देशों से मिलने वाले हथियारों और भारत के खिलाफ पाकिस्तान का उपयोग किए जाने की भी बात की गई है।

पेज 5 पर मॉड्यूल में लिखा है, “कुछ महत्वपूर्ण देश पाकिस्तान का उपयोग भारत पर दबाव बनाने के लिए करते रहते हैं। कई देश आज भी पाकिस्तान को सैन्य और रणनीतिक समर्थन देते रहते हैं। परिणामस्वरूप, भारत को अपने रक्षा व्यय पर लगातार भारी खर्च करना पड़ता रहा है।”

विभाजन के लिए कॉन्ग्रेस भी जिम्मेदार: NCERT

मॉड्यूल में NCERT ने विभाजन के लिए लॉर्ड माउंटबेटन और जिन्ना के साथ-साथ कॉन्ग्रेस को भी जिम्मेदार बताया है।

इसमें कहा गया है, “ऐतिहासिक दृष्टि से भारत विभाजन के लिए तीन तत्व जिम्मेदार थे। जिन्ना, जिन्होंने इस की माँग की। दूसरे, कॉन्ग्रेन जिस ने इसे स्वीकार किया। तीसरे, माउंटबेटन जिन्होंने इसे औपचारिक रूप देकर कार्यान्वित किया।”

इसमें बताया गया है कि ब्रिटिश सरकार ने अंत तक भारत को एक बनाए रखने की कोशिश की थी और वायसराय लिनलिथगो और वायसराय वावेल दोनों विभाजन के खिलाफ थे। लॉर्ड वावेल ने 1940 से लेकर मार्च 1947 तक बार-बार कहा था कि विभाजन से हिन्दू-मुस्लिम समस्या का समाधान नहीं होगा।

पेज 9 पर मॉड्यूल में लिखा गया है, “यह जल्दबाजी और करोड़ों लोगों के भविष्य, जीवन व सुरक्षा का ऐसे फैसला करना एक गंभीर राजनीतिक लापरवाही थी। जो भी लोग सत्ता-हस्तांतरण की तिथि घटाकर निकट कर लेने पर सहमत हुए, वे सभी इस के उत्तरदायी थे।”

मॉड्यूल में कहा गया है कि ब्रिटिश सरकार हमेशा विभाजन के खिलाफ थी और कॉन्ग्रेस नेताओं ने जिन्ना को कम आँका था।

इसमें कहा गया है, “1947 में पहली बार भारतीय नेताओं ने ही देश का एक विशाल भाग कई करोड़ नागरिकों सहित स्वेच्छा से स्थायी रूप से राष्ट्रीय सीमा के बाहर कर दिया। वह भी बिना उन करोडों नागरिकों की सहमति के। यह मानव इतिहास में एक अद्वितीय दुर्घटना थी, जब किसी देश के नेताओं ने बिना युद्ध के, शांतिपूर्वक और बंद कमरों में अचानक करोड़ो लोगों को अपने ही देश से काट दिया!”

विभाजन के दौर में कैसे हुआ हिंदुओं का उत्पीड़न?

मॉड्यूल में पेज 3-4 पर विभाजन से हुईं हानि को लेकर लिखा गया है, “साम्प्रदायिक हिंसा में लाखों लोगों की जा गई और करोड़ों विस्थापित हुए। बहुत-से परिवारों को अपने प्राण सम्मान या संपत्ति बचाने के लिए जबरन इस्लाम कबूल करना पड़ा।”

बँटवारे के बाद जम्मू-कश्मीर की सामाजिक संरचना में परिवर्तन और कश्मीरी पंडितों की खराब होती गई स्थितियों का भी इस मॉड्यूल में जिक्र किया गया है। इसमें लिखा है, “कश्मीरी पंडितों की स्थिति दयनीय होती गई। आगे आने वाले दशकों में यह स्थिति और अधिक बिगड़ी जब वहाँ आंतरिक और बाहरी आतंकवाद ने अपना दबदबा बनाया।”

NCERT ने बताया कि कैसे जिन्ना ने अपनी माँग मनवाने के लिए हिंसा का सहारा लिया था और 16 अगस्त 1946 को ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ की घोषणा की थी।

मॉड्यूल में लिखा है, “इस ‘डायरेक्ट एक्शन’ के मात्र दो-तीन दिनों में कलकत्ता में लगभग 6000 लोग मारे गए। यह हिंसा मुस्लिम लीग और उस के स्थानीय शासन द्वारा आयोजित थी, जिस के मुख्यमंत्री हुसैन सुहरावर्दी थे।”

मुस्लिम लीग को वोट देने के बाद भी भारत में बड़ी संख्या में रह गए मुस्लिम

1946 के प्रांतीय चुनावों में मुसलमानों ने बड़े पैमाने पर मुस्लिम लीग को वोट दिया। मुस्लिम लीग ने उस समय मजहब के आधार पर लोगों की भावनाएँ भड़काते हुए यह माँग उठाई थी कि मुस्लिमों के लिए अलग इस्लामिक देश बने।

मुस्लिम लीग का कहना था कि हिंदू और मुस्लिम एक ही देश में साथ नहीं रह सकते है। मुसलमानों के लिए भारत से अलग एक देश बनना चाहिए।

1946 के चुनावों में पूरे भारत में मुस्लिम लीग ने लगभग 87% सीटें जीतीं। अगर 1937 और 1946 के चुनावों की तुलना करें तो साफ दिखाई देता है कि 1946 में जिन्ना की मुस्लिम लीग द्वारा जीते गए प्रांतों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई थी।

बिहार में 1937 में मुस्लिम लीग को एक भी सीट नहीं मिली थी लेकिन 1946 में 40 में से 34 सीटें जीत गई।मद्रास में 1937 में 9 सीटें मिली थीं लेकिन 1946 में सभी 29 सीटें जीत लीं।

यह पैटर्न उस समय सभी प्रांतों में दिखाई दिया। हमें याद रखना चाहिए कि द्वि-राष्ट्र सिद्धांत स्वयं बहुत लंबे समय तक अस्तित्व में रहा फिर भी मुसलमानों के लिए एक अलग राज्य की औपचारिक राजनीतिक माँग 1940 में की गई।

असल में 1940 में जिन्ना ने मुस्लिम लीग के लाहौर अधिवेशन में साफ-साफ पाकिस्तान की मांग रखी थी। जिन्ना ने पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान, उत्तर-पश्चिमी प्रांत और बंगाल जैसे इलाकों को मिलाकर मुसलमानों के लिए एक स्वतंत्र और संप्रभु देश बनाने का लक्ष्य रखा था।

इसे ही लाहौर प्रस्ताव कहा गया जिसे बंगाल के मुख्यमंत्री ए.के. फजलुल हक ने पेश किया था और 23 मार्च 1940 को यह पास हो गया था। प्रस्ताव में गैर-मुस्लिम धर्मों के संरक्षण की भी गारंटी दी गई थी। यही पाकिस्तान के पहले संविधान की नींव बना था।

स्रोत: शिकागो विश्वविद्यालय

1940 में पाकिस्तान की माँग औपचारिक रूप से सामने आने के बाद मुस्लिम लीग को मुसलमानों का जबरदस्त समर्थन मिलने लगा। यह सीधे तौर पर अलग इस्लामी राष्ट्र पाकिस्तान की माँग को बढ़ावा था।

फिर भी यह हैरानी की बात है कि कुछ लोग आज यह तर्क देते हैं कि ज्यादातर मुसलमान भारत में अपनी इच्छा से ही रहे और उस समय वे अलग इस्लामी देश नहीं चाहते थे।

यह सच है कि उस समय कई मुसलमान भी पाकिस्तान की माँग के खिलाफ थे लेकिन राजनीतिक बयान और असल में वोट डालने के समय लिए गए फैसले, दोनों बहुत अलग बातें होती हैं।

अगर मुसलमान सचमुच पाकिस्तान चाहते थे और भारी संख्या में उसके पक्ष में वोट भी दिया था तो फिर इतने बड़े पैमाने पर मुसलमान भारत में क्यों रह गए?

पाकिस्तान के निर्माण के लिए मिले भारी समर्थन का मुकाबला करने के लिए बिना किसी ठोस तथ्य के यह दिया जाता है कि अगर ज्यादातर मुसलमानों ने दो-राष्ट्र सिद्धांत का समर्थन किया था, तो फिर वे भारत में क्यों ठहरे? और अगर वे ठहर गए तो इसका मतलब है कि उन्होंने दो-राष्ट्र सिद्धांत को ठुकरा दिया।

दरअसल, विभाजन के बाद कई नेता पूरी आबादी के आदान-प्रदान के पक्ष में थे। इनमें डॉ. भीमराव अंबेडकर भी शामिल थे।

विभाजन पर अपनी किताब में अंबेडकर ने साफ लिखा था कि वे क्यों पूरी तरह से जनसंख्या के आदान-प्रदान के पक्ष में हैं। इसका मतलब था कि पाकिस्तान में रहने वाले सभी हिंदू और अन्य धर्मों के लोग भारत आ जाएँ और भारत के सभी मुसलमान पाकिस्तान चले जाएँ। उन्होंने तो जनसंख्या से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने के लिए एक खाका भी तैयार किया था।

यहाँ तक कि सरदार पटेल ने भी विभाजन के बाद भी इस बारे में विस्तार से बात की थी कि कैसे मुसलमानों ने पाकिस्तान बनाने में मदद की थी। 1948 में कोलकाता में एक भाषण में कहा था, “ज्यादातर मुसलमान जिन्होंने हिंदुस्तान में रहना चुना वे पाकिस्तान बनाने में मददगार रहे। अब मुझे समझ नहीं आता कि एक रात में ऐसा क्या बदल गया कि वे हमसे अपनी वफादारी पर शक ना करने की उम्मीद कर रहे हैं।

इसी तरह, कई बड़े नेताओं ने उस समय पूरी आबादी की अदला-बदली की माँग का समर्थन किया था।

Sunday Guardian की एक रिपोर्ट के मुताबिक, “डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और राजकुमारी अमृत कौर, गाँधी से मिलने गए थे ताकि वे जिन्ना के प्रस्ताव (आबादी की अदला-बदली) पर सहमत हों। उन्होंने (गाँधी) साफ कह दिया कि विभाजन तो क्षेत्रीय आधार पर हुआ है, धार्मिक आधार पर नहीं। इसलिए हिंदुओं और मुसलमानों के आदान-प्रदान का सवाल ही नहीं उठता। जबकि सच्चाई यही थी कि विभाजन पूरी तरह हिंदू और मुसलमान के आधार पर हुआ था।”

शाकिर, हसन अली, नासिर ढिल्लो… पाकिस्तान के इन एजेंटों से ज्योति मल्होत्रा की होती थी बात: SIT को जासूसी के मिले सबूत, 2500 पन्नों की चार्जशीट दायर

पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा के खिलाफ SIT ने 14 अगस्त 2025 को चार्जशीट दाखिल कर दी है। चार्जशीट लगभग 2,500 पन्नों की है। पुलिस ने बताया कि ज्योति पाकिस्तानी एजेंट्स के साथ लगातार संपर्क में थी और उनके लिए जानकारी इकट्ठा करती थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस की SIT टीन ने अपनी चार्जशीट में बताया है कि यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा लंबे समय से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के जासूसों के संपर्क में थी। वह पाकिस्तान उच्चायोग में तैनात एहसान-उर-रहीम के अलावा हसन अली, शाकिर और नासिर ढिल्लों से भी लगातार बातचीत करती थी।

जाँच में यह भी सामने आया है कि ज्योति पिछले साल 2024 पाकिस्तान, चीन और नेपाल भी गई थी। पुलिस को शक है कि इन यात्राओं के दौरान ज्योति ने कई जरूरी जानकारी पाकिस्तान को दी।

पुलिस ने ज्योति के मोबाइल और लैपटॉप से डिलीट की गई कुछ फाइलों और चैट्स को भी वापस निकाला है, जिनसे यह साबित होता है कि वह जासूसी कर रही थी।

जाँच अभी बाकी- SIT

पुलिस ने यह चार्जशीट 14 अगस्त 2025 को इसलिए दाखिल की, ताकि ज्योति को जमानत न मिल सके। अगर वे 90 दिन की समय सीमा में चार्जशीट दाखिल नहीं करते तो ज्योति को जमानत मिल जाती।

फिलहाल, पुलिस का कहना है कि कुछ मामलों में जाँच अभी बाकी है और वे बाद में एक और पूरक चार्जशीट दाखिल करेंगे। 18 अगस्त 2025 को इस मामले की अदालत में सुनवाई होगी।

चार्जशीट दाखिल मामले में ज्योति मल्होत्रा के वकील का भी बयान सामने आया है। वकील ने कहा, “हो सकता है कि ज्योति को पुलिस रिमांड पर लिया जाए और नियमों के मुताबिक उन्हें चार्जशीट की कॉपी दी जाएगी।”

मामला क्या है?

यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को मई 2025 में हरियाणा के हिसार से गिरफ्तार किया गया था। ज्योति मल्होत्रा पर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने का आरोप लगा था।

पुलिस को ज्योति पर तब शक हुआ, जब उन्होंने देखा कि ज्योति मल्होत्रा की कमाई और खर्च में बहुत ज़्यादा अंतर है। ज्योति के पिता एक बढ़ई हैं और उनका परिवार आमदनी के हिसाब से साधारण है, लेकिन ज्योति अचानक बहुत महंगी-महंगी यात्राएँ करने लगी थीं।

ज्योति मल्होत्रा ने पाकिस्तान में कई बड़े और प्रभावशाली लोगों से मुलाकात की, जिससे पुलिस का शक और बढ़ गया। पुलिस का कहना है कि ज्योति पाकिस्तानी एजेंटों के लिए एक ‘टूल किट’ यानी एक हथियार या साधन के तौर पर काम कर रही थीं।

‘हम जिंदा हैं तब भी हमें मार दिया, हमारा वोट चोरी कर लिया’: AI वीडियो से SIR पर प्रोपेगेंडा फैला रही थी कॉन्ग्रेस, चुनाव आयोग ने कहा- बिहार के लोगों को न करें गुमराह

चुनाव आयोग ने AI की मदद से तैयार की गई कॉन्ग्रेस की वीडियो की मंशा पर सवाल उठाया है। इस वीडियो में एक बुजुर्ग महिला समेत कुछ लोग ‘वोट चोरी’ की बातें करते हुए अपना गुस्सा दिखा रहे हैं।

कॉन्ग्रेस ने यह वीडियो अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर साझा किया था। वीडियो में दिखाया गया कि एक बुजर्ग महिला कह रही है- “हम जिंदा है तब भी हमें मार दिया। हमारा वोट चोरी कर लिया गया। हमारा अधिकार चोरी कर लिया।”

ऐसे ही एक बुज़ुर्ग व्यक्ति ने दावा किया कि उसके घर पर 80 फर्जी मतदाता पंजीकृत हैं। इसके अलावा, कई अन्य लोगों की आवाजों के जरिए भी मतदाता सूची में गड़बड़ी और वोटिंग प्रक्रिया में धांधली का आरोप लगाया गया।

बता दें कि ये वीडियो राहुल गाँधी की बिहार सासाराम में यात्रा शुरू होने से पहले जारी की गई थी। कैप्शन में लिखा था- “17 अगस्त से हमारे साथ आना है, वोट चोरों को गद्दी से हटाना है।”

कॉन्ग्रेस द्वारा साझा की गई इस वीडियो का मकसद स्पष्ट तौर पर बिहार की जनता को भ्रमित करने का है, क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो चालाकी से छोटे फॉन्ट में एआई जनरेटेड नहीं लिखते। चुनाव आयोग ने भी इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ये वीडियो सिर्फ एआई से बनाई गई है जिसमें कोई सच्चाई नहीं है। ये सिर्फ और सिर्फ बिहार के लोगों को भ्रमित करने के लिहाज से बनाई गई है।

सोशल मीडिया पर भी लोग इसे देख बोल रहे हैं कि कॉन्ग्रेसियों को अब झूठ बोलने से बाज आ जाना चाहिए। कुछ बोल रहे हैं कि कॉन्ग्रेस को आरोप सिद्ध करने के लिए वास्तविक लोग नहीं मिल रहे इसलिए वो AI वीडियो को जनरेट कर रही है।

विपक्ष के आरोप और चुनाव आयोग

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस और विपक्षी दलों का गठबंधन इंडी ब्लॉक लंबे समय से चुनाव आयोग पर पक्षपात और केंद्र सरकार के साथ मिलकर चुनाव प्रक्रिया में हेराफेरी करने के आरोप लगाता रहा है। हाल ही में राहुल गाँधी ने भी एक विरोध मार्च के दौरान वोट चोरी का मुद्दा उठाया था, जिसे चुनाव आयोग ने तथ्यात्मक रूप से गलत बताया था।

चुनाव आयोग ने इस मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही है। आयोग ने इसके सबूत भी सार्वजनिक किए हैं। इनमें विभिन्न राजनीतिक दलों राजद, कॉन्ग्रेस और भाकपा के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठकों के रिकॉर्ड, मसौदा मतदाता सूची पर उनकी प्रतिक्रियाएँ और प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।

आयोग का कहना है कि मतदाता सूची के प्रकाशन से पहले और बाद में सभी स्तरों पर राजनीतिक दलों से परामर्श किया गया और किसी भी गड़बड़ी की शिकायत का निवारण किया गया। तथ्य-जाँच से यह साफ हो गया कि कॉन्ग्रेस  का साझा किया गया ‘वोट चोरी’ का वीडियो वास्तविक नहीं है।

बिहार SIR पर 17 दिन में एक भी आपत्ति नहीं दे पाया INDI गठबंधन, पर ‘चारा चोर’ परिवार के साथ ‘वोट चोरी’ रोकने निकल पड़ा राहुल गाँधी का गैंग: 16 दिन चलेगी सासाराम से शुरू हुई यात्रा

बिहार के सासाराम से कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने 17 अगस्त 2025 को अपनी 16 दिन की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ शुरू की। यह यात्रा लगभग 1,300 किलोमीटर लंबी होगी और 1 सितंबर 2025 को पटना में एक रैली के साथ खत्म होगी।

इस रैली की शुरुआत में ही चारा चोरी के मामले में सजा याफ्ता और मेडिकल ग्राउंड पर जमानत पर चल रहे लालू प्रसाद यादव, लैंड फॉर जॉब स्कैम के सह-आरोपित तेजस्वी यादव जैसे नेता मंच पर नजर आए और राहुल गाँधी के साथ ‘संविधान बचाने’ के नाम पर अपनी पारिवारिक पार्टी के लिए वोट माँगे।

विपक्षी INDI गठबंधन इसे आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के सिद्धांत को बचाने का बड़ा अभियान बता रहा है। राहुल गाँधी ने इस मौके पर बीजेपी और आरएसएस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि ये दोनों संगठन पूरे देश में संविधान को खत्म करने की साजिश रच रहे हैं।

हैरानी की बात नहीं है कि राहुल गाँधी समेत तमाम नेताओं ने रैली में उन्हीं पुराने आरोपों को दोहराया, जिनके खुद वो जवाब नहीं दे रहे हैं। यहाँ तक कि चुनाव आयोग भी बता चुका है कि बिहार SIR को लेकर कॉन्ग्रेस हो या आरजेडी, किसी ने भी एक भी औपचारिक शिकायत दर्ज कराई ही नहीं है।

राहुल ने सासाराम की रैली में कहा कि जहाँ भी चुनाव होते हैं, वहाँ बीजेपी गड़बड़ी करके जीत हासिल करती है। उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच वोटरों की संख्या में अंतर का हवाला दिया। राहुल ने दावा किया कि जाँच में पता चला कि एक करोड़ नए वोटर जोड़े गए, जिससे बीजेपी को फायदा हुआ।

राहुल ने कर्नाटक का उदाहरण देते हुए कहा कि एक विधानसभा में एक लाख वोटों की चोरी हुई, जिसके चलते बीजेपी ने वहाँ जीत हासिल की। यहाँ भी चुनाव आयोग ने राहुल गाँधी से शिकायत दर्ज कराने को कहा, लेकिन कॉन्ग्रेस ने इसकी जहमत नहीं उठाई। यही नहीं, चुनाव आयोग ने साफ कहा था कि मतदाता सूची 2 बार कॉन्ग्रेस के साथ साझा की गई थी, लेकिन कॉन्ग्रेस ने एक बार भी शिकायत दर्ज नहीं कराई।

सासाराम में राहुल गाँधी (फोटो साभार : INC Bihar)

राहुल ने चुनाव आयोग पर भी निशाना साधा और कहा कि जब उन्होंने इस मुद्दे को उठाया, तो आयोग ने उनसे एफिडेविट माँगा, लेकिन बीजेपी से कोई सवाल नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने वोटिंग की वीडियोग्राफी देने से भी इनकार कर दिया। राहुल ने बिहार की जनता को भरोसा दिलाया कि वे बिहार का चुनाव चोरी नहीं होने देंगे।

रैली में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव ने भी भाषण दिया। उन्होंने कहा कि बिहार में वोट का अधिकार छोटे लोगों का राज है, जैसा कि लोहिया और लालू यादव कहते थे। तेजस्वी ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर मिलीभगत का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में गड़बड़ी करके लोगों के वोट छीने जा रहे हैं।

तेजस्वी ने तंज कसते हुए कहा कि जिन लोगों को मृत घोषित किया गया, उनके साथ राहुल गाँधी ने चाय पी, जो चुनाव आयोग की नाकामी को दिखाता है। उन्होंने इसे ‘लोकतंत्र पर डकैती’ करार दिया और कहा कि बिहार की जनता धोखा नहीं सहेगी।

चारा-चोरी के दोषी ने भी वोट चोरी पर रखी बात

चारा-चोरी के मामले में सजायाफ्ता और मौजूदा समय में मेडिकल ग्राउंड पर चल रहे लालू यादव ने भी रैली को संबोधित किया। खुद सरकारी खजाने से फंड चोरी के दोषी ने कहा- “चोरों को हटाइए, बीजेपी को भगाइए, हमारी पार्टी को जिताइए।” आखिर में उन्होंने कहा- “लागल-लागल झुलनिया में धक्का, बलम कलकता चले. राहुल गाँधी जिंदाबाद, खड़गे जी जिंदाबाद, तेजस्वी यादव जिंदाबाद।” और बेटे के जिंदाबाद का नारा लगाकर मंच पर बैठ गए।

उधर, बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने राहुल गाँधी पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि बिहार में जननायक सिर्फ कर्पूरी ठाकुर हैं, और राहुल गाँधी को ‘तिरंगे का खलनायक’ करार दिया। मालवीय ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस ने अपने पोस्टर से तिरंगे का भगवा रंग हटाकर ‘घुसपैठिया बचाओ यात्रा’ शुरू की है, जो सिर्फ वोट बैंक की राजनीति है। उन्होंने दावा किया कि बिहार की जनता इसका जवाब देगी।

‘वोटर अधिकार यात्रा’ बिहार में विपक्ष की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है। यह यात्रा न सिर्फ मतदाता जागरूकता बढ़ाने की कोशिश है, बल्कि विपक्ष जनता को एकजुट करना चाहता है। इस अभियान से बिहार विधानसभा चुनाव में नया माहौल बन सकता है। हालाँकि इंडी गठबंधन इसमें कितना सफल हो पाएगा, ये देखने वाली बात होगी।

न माथ से बिंदी हटी, न हिली कटार: धराली में मलबे से निकली 400 साल पुरानी राजराजेश्वरी माता की प्रतिमा देख ग्रामीण हैरान, बताया- 2 अग्निकांड भी नहीं पहुँचा पाए थे मूर्ति को नुकसान

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली में बीते 5 अगस्त को आए सैलाब के बाद लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इस बीच आपदा के 12वें दिन रेस्क्यू टीम को करीब 400 साल पुरानी माँ राजराजेश्वरी की चाँदी की मूर्ति पूरी तरह सुरक्षित मिली है। यह मूर्ति मलबे में करीब 25 फीट नीचे दबी थी। हैरानी की बात यह है कि इस मूर्ति को लगाई गई बिंदी भी जस की तस थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मूर्ति एक पेड़ के नीचे दबी मिली है। साथ ही, गलाणथोक की कुलदेवी माँ राजराजेश्वरी के साथ रखी कटार और 5 पांडवों व भगवान शिव की पंचमुखी मूर्तियाँ भी सुरक्षित मिली हैं।

धराली गाँव के प्रवेश द्वार के पास राजराजेश्वरी माता का देवदार से बना प्राचीन मंदिर था। इसी मंदिर में हिमाचल प्रदेश से लाई गई यह मूर्ति भी रखी थी। सैलाब में यह मंदिर ध्वस्त हो गया और मूर्ति मलबे में दब गई थी।

शनिवार (16 अगस्त) को एक ग्रामीण को माता की चुनरी दिखाई दी जिसके बाद उन्होंने बीआरओ से उस स्थान पर खुदाई करने की माँग की थी। इस खुदाई के दौरान प्राचीन मंदिर से कुछ ही फीट की दूरी पर करीब 25 फीट नीचे माँ राजराजेश्वरी की व अन्य मूर्तियाँ सुरक्षित मिलीं।

ग्रामीणों ने मूर्ति को सुरक्षित निकालकर माँ राजराजेश्वरी की पूजा अर्चना की है। फिलहाल माता की मूर्ति को एक होटल के कमरे में विराजित किया गया है। ग्रामीणों ने इस घटना को चमत्कार बताते हुए कहा है कि आपदा का दौर बीतने के बाद भव्य मंदिर तैयार कर उसमें माता की मूर्ति को स्थापित किया जाएगा।

ग्रामीणों का कहना है कि यह तीसरी बार है जब आपदा की स्थिति में माँ की मूर्ति सुरक्षित मिली है। बताया जा रहा है कि इस गाँव में 1971 व 1982-83 में दो बार भीषण अग्निकांड हुआ था और तब भी माता की मूर्ति वाला भवन आग की चपेट में आने से बचा रहा था।

धराली में आए सैलाब के बाद से ही रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। रेस्क्यू टीमें लगातार लापता लोगों को तलाशने में जुटी हुई हैं। सर्च टीमें लापता लोगों को ढूंढने के लिए तकनीक का बडे़ स्तर पर इस्तेमाल कर रही है। साथ ही, धराली के लोगों के पुनर्वास की प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है।

15 जगह दिखाकर कहा- महिलाएँ-बच्चे यहीं दफन, कर्नाटक SIT ने 17 जगहों पर की खुदाई पर कोई सबूत नहीं मिला: क्या धर्मस्थल को बदनाम करने की थी साजिश?

कर्नाटक के धर्मस्थल में सामूहिक दफन का मामला अब कमजोर पड़ता दिख रहा है। SIT की खुदाई में अब तक कोई बड़ा सबूत नहीं मिला है। एक सफाईकर्मी ने आरोप लगाया था कि धर्मस्थल में महिलाओं और बच्चियों के शवों को दफनाया गया और उनके शरीर पर यौन उत्पीड़न के निशान भी थे। उसने 15 जगहों का भी जिक्र किया था। SIT ने 17 जगहों की छानबीन कर खुदाई की, लेकिन अभी तक कुछ हाथ नहीं लगा है।

इस मामले में राजनीति गरमा गई है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि मंदिर को बदनाम किया जा रहा है और साजिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। वहीं, कॉन्ग्रेस ने बीजेपी पर आरोप मढ़ते हुए इसे राजनीति का नाम दिया है और कहा कि अगर आरोप झूठे साबित हुए तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कैसे शुरू हुआ मामला

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब धर्मस्थल मंदिर के एक पूर्व सफाईकर्मी ने आरोप लगाया था कि उसे 1995 से 2014 के बीच महिलाओं और लड़कियों के शवों को दफनाने के लिए मजबूर किया गया था।

सफाईकर्मी ने 3 जून को अपनी शिकायत के साथ कुछ ‘सबूत’ भी दिखाए थे। एक हफ्ते बाद, वह अपनी पहचान छिपाकर और नाकाब के साथ चेहरा ढके कोर्ट में पेश हुआ था। उसने कुछ हड्डियाँ भी दिखाईं और कहा कि ये कब्र से निकाली गई हैं। मामले में एक महिला ने भी शिकायत दर्ज कर बताया था कि उसकी बेटी धर्मस्थल यात्रा के दौरान लापता हो गई थी।

SIT की जाँच

यह पूरा मामला बहुत गंभीर था। इसलिए, कर्नाटक सरकार ने इसकी जाँच के लिए 19 जुलाई 2025 को एक SIT गठित की। शिकायत करने वाले ‘सफाईकर्मी’ ने टीम को 15 जगहों के बारे में बताया, जहाँ शव दफनाने का आरोप था। SIT ने 17 जगहों की खुदाई शुरू कर दी।

खोदे गए 17 स्थानों में से कुछ भी नहीं मिला। यहाँ तक कि उस व्यक्ति ने कोर्ट में जो खोपड़ी दी थी, वह भी एक आदमी की निकली। जाँच से पता चला कि वह खोपड़ी करीब 30 साल पहले मरे हुए एक शख्स की थी। खुदाई के समय एक जगह पर कुछ पहचान पत्र भी मिले, जो एक ऐसे व्यक्ति के थे जिसकी बीमारी से मौत हो चुकी थी।

सफाईकर्मी ने दावा किया था कि एक जगह पर 16 फीट की गहराई में 60 से 100 शवों को दफन किया गया था। SIT ने रडार से वहाँ की भी जाँच की, लेकिन कुछ नहीं मिला। जाँच के दौरान सफाईकर्मी का बर्ताव भी थोड़ा अजीब था।

एक जगह की खुदाई करते समय, उसे अचानक याद आया कि असली जगह तो वहाँ से 150 मीटर दूर है। जब टीम वहाँ गई तो उन्हें जमीन पर 81 हड्डियाँ मिलीं, जो दफन नहीं थीं।

जो हड्डियाँ मिली थीं, उन्हें डॉक्टरों ने देखा। पहली नजर में ये हड्डियाँ किसी आदमी की लग रही थीं। वहाँ एक पेड़ से लटकी हुई लाल साड़ी भी मिली। पास में मर्दों के कपड़े भी पड़े थे। डॉक्टरों का कहना है कि यह आत्महत्या का मामला लग रहा है। जब उस जगह की खुदाई की गई तो वहाँ और कुछ नहीं मिला।

SIT अब एक और जगह की जाँच करेगी। यह वह जगह है जहाँ एक दूसरे गवाह ने कहा था कि उसने एक 13 साल की बच्ची को दफनाते देखा था।

SIT ने पहले ही दो जगहों से मिले कंकालों के मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। वे इसकी जाँच कर रहे हैं। साथ ही, वे लापता हुई अनन्या भट्ट के मामले की भी जाँच कर रहे हैं। अनन्या की माँ ने उसकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी।

राजनीति और परिणाम

धर्मस्थल में जो कुछ हो रहा था, उसे लेकर वहाँ के पुजारी और भक्तों ने ‘सफाईकर्मी’ और उसका समर्थन करने वालों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। ये लोग धर्मस्थल पुजारियों पर झूठे आरोप लगा रहे थे।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शुक्रवार (15 अगस्त 2025) को कहा कि धर्मस्थल की छवि खराब करने की जो कोशिश की जा रही है, उसकी जाँच से सच्चाई सामने आ जाएगी। डीके शिवकुमार ने यह भी चेतावनी दी कि अगर धर्मस्थल में ‘सामूहिक दफन’ की बात झूठी निकली तो सख्त कदम उठाए जाएँगे।

वहीं, बीजेपी ने शनिवार (16 अगस्त 2025) को धर्मस्थल मंदिर तक एक बड़ी रैली निकाली। इस रैली में उन्होंने उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की, जो मंदिर की छवि को बदनाम करने की साजिश रच रहे।

बीजेपी नेता एसआर विश्वनाथ ने बताया कि पार्टी पहले चुप थी क्योंकि उन्हें लगा था कि आरोपों में कुछ सच्चाई हो सकती है। लेकिन, अब जब खुदाई में कोई शव नहीं मिल पाया है तो पार्टी ने मंदिर के पक्ष में खड़े होने का फैसला किया है। वे इस झूठे प्रचार के खिलाफ हैं। फिल्हाल सफाईकर्मी राज्य सरकार की सुरक्षा में है।

प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली को दी ₹11 हजार करोड़ की सौगात: द्वारका एक्सप्रेसवे और UER-II का उद्घाटन भी किया, अब 20 मिनट में पूरा होगा दिल्ली से गुरुग्राम का सफर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (17 अगस्त 2025) को दिल्ली-NCR के दो बड़े सड़क प्रोजेक्ट्स ‘अर्बन एक्सटेंशन रोड-II’ (UER-II) और ‘द्वारका एक्सप्रेसवे’ के दिल्ली सेक्शन का उद्घाटन कर दिया। इन नई सड़कों के शुरू होने से अब गुरुग्राम से दिल्ली के इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI एयरपोर्ट) तक का सफर सिर्फ 20 मिनट में पूरा हो सकेगा। इससे लाखों यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी और दिल्ली-NCR के ट्रैफिक की समस्या भी काफी हद तक कम होगी। इसकी लागत ₹11000 करोड़ से भी अधिक है।

इन सड़कों के चालू होने से दिल्ली-NCR के पश्चिमी इलाकों से आने-जाने वाले लोगों का सफर अब पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। अभी तक इन इलाकों से आने वाले लोगों को दिल्ली की व्यस्त रिंग रोड से होकर गुजरना पड़ता था, जहाँ ट्रैफिक जाम की वजह से घंटों लग जाते थे। लेकिन अब UER-II और द्वारका एक्सप्रेसवे के खुलने से रिंग रोड पर गाड़ियों का बोझ कम होगा। इसका फायदा न सिर्फ रिंग रोड, बल्कि NH-48, NH-44 और बारापुला जैसे बड़े रास्तों पर भी दिखेगा, जहाँ अब जाम में फंसने की परेशानी कम होगी।

उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री मोदी के साथ केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और कई बड़े भाजपा नेता मौजूद रहे। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि ये सड़कें न सिर्फ यात्रा को आसान बनाएँगी, बल्कि दिल्ली-NCR के विकास को भी नई गति देंगी।

UER-II: दिल्ली की नई आउटर रिंग रोड

ER-II दिल्ली की एक नई सड़क है, जो अलीपुर से शुरू होकर महिपालपुर तक जाती है। यह सड़क 76 किलोमीटर लंबी है और इसे बनाने में करीब 6,445 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। यह पाँच हिस्सों में बनकर तैयार हुई है। इस सड़क की खास बात यह है कि यह गुरुग्राम, वेस्ट दिल्ली और साउथ दिल्ली के लोगों के लिए सफर को बहुत आसान बना देगी। अब लोगों को ट्रैफिक से भरे पुराने रास्तों से नहीं गुजरना पड़ेगा।

यह सड़क NH-44 से सीधे जुड़ती है, जिससे चंडीगढ़, पंजाब और जम्मू-कश्मीर की यात्रा भी आसान हो जाएगी। धौला-कुआँ और रिंग रोड जैसे इलाकों में अब ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी। UER-II में आठ लेन हैं, साथ ही सर्विस रोड, चार बड़े इंटरचेंज और कई अंडरपास भी बनाए गए हैं, जिससे यातायात सुगम रहेगा।

UER-II को दिल्ली मास्टर प्लान 2021 के हिसाब से बनाया गया है। यह सड़क दिल्ली में 54 किलोमीटर और हरियाणा में 21 किलोमीटर लंबी है। इसे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से भी जोड़ा जा रहा है। साथ ही, एक नई 65 किलोमीटर लंबी सड़क बन रही है, जो ट्रॉनिका सिटी से FNG एक्सप्रेसवे तक जाएगी। इससे नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद जैसे इलाकों के हाईवे भी आपस में जुड़ जाएंगे।

खास बात यह है कि UER-II बनाने में 10 लाख मीट्रिक टन पुराने मलबे का इस्तेमाल किया गया, जो दिल्ली के कूड़ेदानों से निकाला गया था। इससे न सिर्फ सड़क बनी, बल्कि पर्यावरण को भी फायदा हुआ।

द्वारका एक्सप्रेसवे से IGI एयरपोर्ट तक तेज रास्ता

द्वारका एक्सप्रेसवे का दिल्ली वाला हिस्सा 10 किलोमीटर लंबा है। इसमें 5 किलोमीटर से ज्यादा लंबी एक सुरंग भी शामिल है, जो सीधे IGI एयरपोर्ट तक जाती है। इस सुरंग की वजह से एयरपोर्ट तक पहुँचना अब बहुत आसान और तेज हो गया है। इस एक्सप्रेसवे का हरियाणा वाला हिस्सा मार्च 2024 में पहले ही शुरू हो चुका था। अब दिल्ली वाला हिस्सा भी चालू होने से गुरुग्राम और दिल्ली के बीच का सफर और भी आरामदायक हो गया है।

इन दोनों सड़कों की वजह से दिल्ली के अंदर के रास्तों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा। लोग अब बाहर से आने-जाने के लिए इन नए रास्तों का इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे दिल्ली-NCR में रहने वाले लोगों का समय बचेगा और उनकी रोजमर्रा की जिंदगी आसान होगी।

‘वोट चोरी’ के आरोपों पर चुनाव आयोग ने कॉन्ग्रेस को दिया करारा जवाब: पूछा- जब राजनैतिक दलों को पहले ही मिल जाती है वोटर लिस्ट, तब गलती क्यों नहीं बताई

चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट पर उठे सवालों का जवाब दिया है। आयोग ने कहा कि कुछ विपक्षी दल (कॉन्ग्रेस) अब गलतियों का आरोप लगा रहे हैं। ये गलतियाँ पहले क्यों नहीं बताई गईं? राजनीतिक दलों को वोटर लिस्ट की जाँच के लिए काफी समय दिया गया था। उन्हें लिस्ट की कॉपी भी मिलती थी। अगर कोई गलती थी तो उन्हें समय रहते शिकायत करनी चाहिए थी।

चुनाव आयोग का कहना है कि वोटर लिस्ट बनाने की प्रक्रिया पारदर्शी होती है। इसमें सभी दल शामिल होते हैं। चुनाव आयोग रविवार (17 अगस्त 2025) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करेगा, जिसमें वह इस मुद्दे पर और जानकारी देगा।

सही समय पर उठानी थी आपत्तियाँ

ECI का कहना है कि वोटर लिस्ट से जुड़ी आपत्तियाँ ड्राफ्ट प्रकाशन के समय उठानी चाहिए थी। उस समय दावों और आपत्तियों के लिए एक महीना दिया गया था। वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट प्रकाशित होने के बाद, इसकी डिजिटल और फिजिकल कॉपी सभी राजनीतिक दलों को दी जाती है।

साथ ही, इसे आयोग की वेबसाइट पर भी डाला जाता है ताकि कोई भी इसे देख सके। ड्राफ्ट प्रकाशित होने के बाद, मतदाताओं और राजनीतिक दलों को आपत्ति और सुधार के लिए एक महीने का पूरा समय मिलता है। इस दौरान, वे किसी भी गलती को सुधारने के लिए आवेदन कर सकते थे।

वोटर लिस्ट बनाने की प्रक्रिया

भारत में चुनाव के लिए वोटर लिस्ट बनाना एक तय प्रक्रिया है। यह काम कई स्तरों पर किया जाता है। वोटर लिस्ट बनाने की जिम्मेदारी SDM स्तर के अधिकारियों की होती है। इन्हें ERO यानी इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर कहा जाता है। ये अधिकारी बूथ-लेवल ऑफिसर (BLO) की मदद लेते हैं।

इनका काम होता है कि वोटर लिस्ट सही और पूरी हो। हर योग्य वोटर का नाम उसमें हो। चुनाव आयोग इन अधिकारियों को साफ निर्देश देता है। इन्हीं निर्देशों के आधार पर लिस्ट तैयार की जाती है।

गलती होने पर की जाती है अपील

अगर किसी को अंतिम वोटर लिस्ट में भी कोई गलती लगती है, तो वह शिकायत कर सकता है। पहली अपील जिला मजिस्ट्रेट (DM) के पास की जा सकती है। अगर बात नहीं बनती, तो दूसरी अपील राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) के पास की जा सकती है।

चुनाव आयोग ने कहा कि आपत्ति दर्ज करने का सही समय ड्राफ्ट लिस्ट के बाद था। उस समय सभी को एक महीना दिया गया था। अब कुछ पार्टियाँ और लोग पुरानी लिस्ट की गलतियों पर सवाल उठा रहे हैं। अगर ये बातें सही समय पर कही जातीं, तो SDM या ERO उन्हें ठीक कर सकते थे।

साफ-सुथरी वोटर लिस्ट जरूरी- चुनाव आयोग

चुनाव आयोग ने कहा है कि वह वोटर लिस्ट की जाँच का स्वागत करता है। आयोग ने कहा कि हर पार्टी और हर मतदाता को वोटर लिस्ट देखनी चाहिए। अगर कोई गलती दिखे तो समय पर बतानी चाहिए। इससे SDM और ERO को गलती ठीक करने में मदद मिलेगी।

इस कार्य से वोटर लिस्ट और सही और साफ बन सकेगी। आयोग का मानना है कि साफ-सुथरी वोटर लिस्ट बहुत जरूरी है। सही लिस्ट ही लोकतंत्र को मजबूत बनाती है।

पूजा की इजाजत नहीं, नमाज के लिए जगह भरपूर: केरल में CPIM के हिंदुओं और मुस्लिमों के लिए अलग-अलग नियम, कम्युनिस्टों का सनातन विरोधी चेहरा फिर आया सामने

केरल की सत्ताधारी पार्टी सीपीआई(एम) का धर्म को लेकर जो रुख है, वो बार-बार सवालों के घेरे में आता है। ऐसा लगता है कि पार्टी हिंदुओं और मुस्लिमों के साथ एक जैसा व्यवहार नहीं करती। वह एक तरफ तो धर्मनिरपेक्षता की बात करती है, लेकिन जब बात हिंदू या इस्लाम की आती है, तो उसका रवैया अलग-अलग दिखता है।

हाल ही में केरल के पूर्व गृह मंत्री कोडियारी बालकृष्णन के बेटे और सीपीआई(एम) के सदस्य बिनीश कोडियारी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में एक टोपी पहने हुआ व्यक्ति, जिसने टोपी पहनी हुई थी, सीपीआई(एम) के पार्टी ऑफिस के अंदर नमाज़ अदा कर रहा था।

आनंद नाम के एक्स यूजर के मुताबिक, वीडियो में दिखने वाला शख्स कोल्लम का एक फेरीवाला है, जो चादर बेचकर अपनी आजीविका चलाता है। इस मुस्लिम शख्स ने बारिश की वजह से स्थानीय सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं से नमाज पढ़ने के लिए जगह माँगी थी। पार्टी ने तुरंत उसकी बात मान ली और उसे अपने ऑफिस में नमाज पढ़ने की इजाजत दे दी।

बिनीश ने अपने पोस्ट में सीपीआई(एम) की तारीफ की और कहा कि पार्टी ने उस शख्स को नमाज़ पढ़ने की जगह देकर उसकी धार्मिक भावनाओं का ख्याल रखा। उन्होंने इसे प्यार और भाईचारे का उदाहरण बताया और कहा कि यह केरल की ताकत है। यह पोस्ट सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रहा, क्योंकि इससे पार्टी का एक खास रवैया सामने आया।

सीपीआई(एम) ने नमाज़ की घटना को बहुत सकारात्मक तरीके से पेश किया और इसे भाईचारे का प्रतीक बताया। लेकिन संयोग से हिंदुओं के मामले में ऐसी उदारता, सहनशीलता और समायोजन का रवैया अक्सर दिखाई नहीं देता। क्योंकि जब बात हिंदुओं की आती है, तो पार्टी का रवैया अक्सर अलग होता है। यह अंतर लोगों के बीच चर्चा का विषय बनता है। कुछ उदाहरण हम आपके सामने रख रहे हैं।

CPIM ने रोक दिया था गणपति हवन

बता दें कि फरवरी 2024 में केरल के कोझिकोड जिले के नेदुमन्नूर एलपी स्कूल में आयोजित गणपति हवन पर CPIM ने आपत्ति जताई थी। जानकारी के अनुसार, CPIM से जुड़े लोगों को जब इस पूजा के बारे में पता चला तो उन्होंने वहाँ पहुँचकर अनुष्ठान रुकवा दिया और आयोजकों के साथ मारपीट भी की। इसके बाद पुलिस ने मामले को अपने हाथ में लिया और आयोजकों को गिरफ्तार कर लिया।

सीपीएम के गुंडों ने गणपति हवन रोका, आयोजकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया

घटना यहीं नहीं रुकी। सीपीआईएम कार्यकर्ताओं ने बाद में स्कूल तक विरोध मार्च भी निकाला। जबकि यह पूजा स्कूल प्रशासन की पूर्व अनुमति से हो रही थी और हर साल महानवमी के अवसर पर परंपरा के तौर पर आयोजित की जाती रही है।

इस बार, जब नियमित कार्यक्रम रद्द हो गया था, तब स्कूल ने गणपति हवन का आयोजन किया। लेकिन इसके बावजूद CPI M ने इस धार्मिक आयोजन को सहन नहीं किया और विरोध जताया।

CPIM ने मंदिर में प्रार्थना करने पर पार्टी नेता को फटकार लगाई

सितंबर 2017 में CPIM ने अपने ही मंत्री कडकम्पल्ली सुरेंद्रन को फटकार लगाई। वे त्रिशूर के प्राचीन श्री गुरुवायुर मंदिर गए थे और वहाँ परिवार के आग्रह पर पुष्पांजलि अर्पित की थी। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें वायरल हुईं, जिनमें वे पारंपरिक मुंडू और मेलमुंडू पहने हुए दिखे।

उनके माथे पर चंदनकुरी भी थी और उनके बच्चे भगवान कृष्ण की वेशभूषा में नजर आए। उस समय सुरेंद्रन केरल के देवस्वओम मंत्री के पद पर कार्यरत थे। इस घटना के बाद CPIM की आंतरिक समिति ने कहा कि उनका आचरण पार्टी के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।

मामले पर एक जाँच रिपोर्ट भी तैयार की गई। पार्टी ने साफ किया कि श्री गुरुवायुर मंदिर में पूजा-अर्चना करना माकपा के सिद्धांतों के खिलाफ है और सुरेंद्रन को पार्टी नेताओं की परंपरा का पालन करने की हिदायत दी गई।

ज्योतिषी से मुलाकात के लिए CPIM नेता जाँच के घेरे में

अगस्त 2024 में CPIM के राज्य सचिव एम वी गोविंदन विवाद में आ गए। उन पर आरोप लगा कि वे महावा पोडुवल नामक एक हिंदू ज्योतिषी से ज्योतिष पर चर्चा करने गए थे। इस वजह से उन्हें पार्टी की नाराज़गी झेलनी पड़ी।

बाद में ज्योतिषी महावा पोडुवल ने सफाई दी कि गोविंदन सिर्फ उनके परिवार से मिलने और चाय पीने आए थे। उन्होंने कहा कि मुलाकात के दौरान ज्योतिष पर कोई चर्चा नहीं हुई। पोडुवल ने स्पष्ट किया, “व्यक्तिगत संबंधों को ज्योतिष से जोड़ना गलत है।

अगर कोई कहे कि गोविंदन गुरु ने ज्योतिष जाँच करवाई, तो यह असहनीय है।” उन्होंने यह भी बताया कि CPIM नेता एम वी गोविंदन और केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन दोनों से उनके व्यक्तिगत रिश्ते हैं।

हर ‘हिंदू’ चीज पर आपत्ति

जुलाई 2022 में CPIM ने राष्ट्रीय प्रतीक के अनावरण कार्यक्रम के दौरान किए गए पूजन-विधि पर आपत्ति जताई थी। पार्टी का मानना था कि ऐसे सरकारी कार्यक्रम धर्मनिरपेक्ष होने चाहिए।

इसके अलावा, CPIM नेपाल की राजनीति में भी सक्रिय रही है और उसने वहाँ की दुनिया की एकमात्र हिंदू राजशाही को खत्म करने में बड़ी भूमिका निभाई थी।

CPIM का हिंदू विरोधी प्रचार

फरवरी 2025 में ऑपइंडिया ने खुलासा किया कि CPIM ने अपने 64 पन्नों के राजनीतिक मसौदे में हिंदू-विरोधी एजेंडा साफ तौर पर सामने रखा। मसौदे में नेपाल के हिंदू राष्ट्र और वहाँ की राजशाही समर्थक ताकतों के खिलाफ बयानबाजी की गई और दावा किया गया कि हिंदुत्व समर्थक और आरएसएस इन ताकतों का समर्थन कर रहे हैं।

पार्टी ने अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन को हिंदुत्व अभियान की निरंतरता बताया और काशी-मथुरा विवादों पर भी आपत्ति जताई। उसने धार्मिक जुलूसों को अल्पसंख्यक इलाकों में हिंसा फैलाने का साधन करार दिया और हिंदू समुदाय को दोषी ठहराने की कोशिश की।

पार्टी ने ग्रूमिंग जिहाद विरोधी कानूनों और आदिवासियों के धर्मांतरण पर लगाम लगाने की कोशिशों का भी विरोध किया। नए संसद भवन के उद्घाटन को हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों से जोड़ने पर भी पार्टी ने आपत्ति जताई और सेंगोल रखने का मजाक उड़ाया।

CPIM ने हिंदू इतिहास को पौराणिक कथा कहकर खारिज करने की कोशिश की और मीडिया, फिल्म और ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म पर हिंदुओं की सकारात्मक छवि दिखाए जाने को भी नकारात्मक बताया। मसौदे में RSS पर इतिहास को सांप्रदायिक नजरिए से फिर से लिखने का आरोप लगाया गया।

सीपीआई(एम) के ड्राफ्ट रिज़ॉल्यूशन का पेज 54 पर लिखा था, “इस्लामी कट्टरवादी और उग्रवादी संगठन जैसे जमात-ए-इस्लामी और एसडीपीआई (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का राजनीतिक विंग) मुस्लिम जनता के बीच अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। वे अल्पसंख्यक समुदाय के बीच अलगाव और डर का फायदा उठाते हैं, जो हिंदुत्व ताकतों के लगातार हमलों का शिकार हैं… हालाँकि अल्पसंख्यक सांप्रदायिकता को सत्ता में मौजूद हिंदुत्व सांप्रदायिक ताकतों के बराबर नहीं माना जा सकता, यह समझना ज़रूरी है कि अल्पसंख्यक उग्रवादी गतिविधियाँ केवल बहुसंख्यक सांप्रदायिकता को और मजबूत करती हैं।”

सीपीआई(एम) की बातों को सरल तरीके से समझें, तो उसका कहना है कि इस्लामी कट्टरवादी संगठन अपनी ताकत बढ़ा रहे हैं, क्योंकि हिंदुत्व की ताकतें मुस्लिम समुदाय को परेशान कर रही हैं। उसका ये भी कहना है कि मुस्लिम कट्टरता को हिंदुत्व जितना बड़ा खतरा नहीं माना जा सकता। उसका साफ मानना है कि मुस्लिम कट्टरता दरअसल हिंदुत्व की वजह से बढ़ रही है। यह उनकी सोच को दिखाता है कि हिंदुत्व हर समस्या की जड़ है।

यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में लिखी गई है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

‘रूस-अमेरिका में 20% बढ़ा व्यापार…’: डोनाल्ड ट्रंप के सामने ही व्लादिमीर पुतिन ने दोहराई भारत की बात, दुनिया के आगे बेनकाब कर दिया USA का पाखंड

अमेरिका के अलास्का में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लंबी बैठक हुई। इस बैठक में रूस-यूक्रेन विवाद का तो समाधान नहीं निकला लेकिन पुतिन ने एक ऐसी बात कह दी जिससे अमेरिका का दोहरा चरित्र दुनिया के सामने बेनकाब हो गया।

ट्रंप दुनिया के तमाम देशों को धमकाते रहते हैं कि वे रूस से व्यापार बंद कर दें। उनका तर्क होता है कि इससे यूक्रेन युद्ध की फंडिंग हो रही है। अब पुतिन ने ट्रंप की मौजूदगी में ही कह दिया है कि उनका अमेरिका के साथ व्यापार ट्रंप सरकार में बढ़ा है।

पुतिन ने क्या कहा?

अलास्का में ट्रंप और पुतिन ने बैठक के बाद एक साझा न्यूज कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। अपने बयान में पुतिन ने कहा, “नया अमेरिकी प्रशासन आने के बाद हमारे आपसी व्यापार में बढ़ोतरी हुई है। अभी यह आँकड़ा प्रतीकात्मक ही है लेकिन फिर भी व्यापार 20% ज्यादा है। हमारे पास सहयोग के लिए कई महत्वपूर्ण क्षेत्र मौजूद हैं।”

पुतिन ने आगे कहा कि रूस और अमेरिका के बीच व्यापार और निवेश की साझेदारी में बहुत बड़ी संभावनाएँ हैं। व्यापार, ऊर्जा, डिजिटल और उच्च तकनीक और अंतरिक्ष विकास जैसे क्षेत्रों में दोनों देश एक-दूसरे को बहुत कुछ दे सकते हैं।

पुतिन ने कहा कि अमेरिका और रूस को पुराने पन्ने पलटते और फिर से सहयोग की राह पर लौटने की आवश्यकता है।

भारत ने अमेरिका को दिखाया था आईना

हालाँकि, भारत पहले ही रूस से व्यापार को लेकर अमेरिका को आईना दिखा चुका है। ट्रंप ने बीते 4 अगस्त को भारत के रूसी तेल खरीदने पर सवाल उठाए थे। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा था, “भारत ना केवल भारी मात्रा में रूसी तेल खरीद रहा है बल्कि उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊँचे दामों पर बेचकर भारी मुनाफा कमा रहा है।”

ट्रंप ने लिखा था, “भारत को इस बात की कोई परवाह नहीं है कि रूस के कारण यूक्रेन में कितने लोगों की जान जा रही है। इस वजह से मैं भारत से आने वाले सामानों पर अधिक टैरिफ लगाऊँगा।”

भारत ने ट्रंप की पोस्ट के कुछ समय बाद ही अमेरिका को आईना दिखा दिया था। भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया था कि अमेरिका भी रूस से परमाणु उद्योग के लिए यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, ईवी उद्योग के लिएपैलेडियम के साथ उर्वरक और रसायन आयात करता है।

विदेश मंत्रालय ने कहा, “ऐसे में भारत को निशाना बनाना न केवल अनुचित है, बल्कि गलत भी है। भारत हर बड़ी अर्थव्यवस्था की तरह अपने राष्ट्रीय हित और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।” भारत ने यूरोप और रूस के बीच हो रहे व्यापार की भी पोल खोल दी थी।

ट्रंप ने कहा था- रूस से खरीद की जानकारी नहीं

भारत के इस बयान के बाद ट्रंप से जब यह पूछा गया कि क्या अमेरिका, रूस से रसायन और उर्वरक आयात करता है तो उन्होंने इसकी जानकारी होने से ही इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था, “मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता। हमें इसकी जाँच करनी होगी।”

इसके कुछ समय बाद ही आईना दिखाए जाने के बाद भन्नाए ट्रंप ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी थी। इससे पहले 30 जुलाई को वह 25% टैरिफ लगाने का ऐलान कर चुके थे। यानी भारत पर कुल टैरिफ 50% हो गया था। हालाँकि, ट्रंप ने 25% अतिरिक्त टैरिफ पर बातचीत के लिए 21 दिनों का समय दिया था।

अमेरिकी सरकार के एक कार्यकारी आदेश में इस अतिरिक्त टैरिफ की वजह को लेकर बताया गया कि भारत, रूस से सीधे या परोक्ष रूप से तेल खरीद रहा है। अब पुतिन ने जो अमेरिकी नकाब दुनिया के सामने उतारा है उसने ट्रंप की सारी हकीकत उजागर कर दी है। उम्मीद है अब जब ट्रंप से व्यापार बढ़ने को लेकर सवाल पूछा जाएगा तो वो यह नहीं कह पाएँगे कि ‘उन्हें जानकारी नहीं है’।