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‘भारत आइए, दुनिया के लिए बनाइए’: अमेरिका से टैरिफ वॉर के बीच PM मोदी का जापान की कंपनियों को न्योता, कहा- मेट्रो से मैन्युफैक्चरिंग तक हमारी साझेदारी विश्वास का प्रतीक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी जापान यात्रा की शुरुआत में शुक्रवार (29 अगस्त 2025) को टोक्यो में भारत-जापान इकनॉमिक फोरम को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने जापान से अपने पुराने रिश्तों को याद किया और जापानी कंपनियों को भारत में निवेश करने न्योता दिया है।

Come, Make in India: पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि आज दुनिया सिर्फ भारत को देख ही नहीं रही है बल्कि भारत पर भरोसा भी कर रही है। पीएम मोदी ने वहाँ मौजूद बिजनेस लीडर्स से कहा, “मैं आपसे आग्रह करता हूँ- ‘Come, Make in India, Make for the world’ (आइए, भारत में बनाइए, विश्व के लिए बनाइए) और ‘सुजुकी’ और ‘डाइकिन’ की सफलता की कहानी आपकी भी सफलता की कहानी बन सकती है।” अमेरिका से चल रहे टैरिफ वॉर के बीच पीएम मोदी का जापानी कंपनियों को यह आमंत्रण अहम माना जा रहा है।

भारत उम्मीदों से भरा है: पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि मेट्रो से मैन्युफैक्चरिंग तक हर क्षेत्र में भारत और जापान की साझेदारी विश्वास का प्रतीक बनी है। पीएम ने इस दौरान बताया कि जापानी कंपनियों ने भारत में 40 बिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है और पिछले 2 वर्षों में 13 बिलियन डॉलर का प्राइवेट इन्वेस्टमेंट हुआ है।

उन्होंने कहा, “JBIC कहता है कि भारत सबसे अधिक उम्मीदों से भरा गंतव्य है। JETRO बताता है कि 80% कंपनियाँ भारत में विस्तार करना चाहती हैं और 75% मुनाफे में हैं।”

वैश्विक ग्रोथ में भारत का 18% योगदान: PM

पीएम मोदी ने कहा कि भारत में आज राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता है। उन्होंने कहा, “आज भारत विश्व की सबसे तेज बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है और बहुत जल्द विश्व की तीसरी सबसे बड़ी इकॉनमी बनने जा रहा है।”

उन्होंने कहा, “वैश्विक ग्रोथ में भारत 18% योगदान दे रहा है। 2017 में हमने ‘वन नेशन-वन टैक्स’ की शुरुआत की थी। अब इसमें नए और बड़े रिफार्म लाने पर काम चल रहा है।” साथ ही, भारत में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर भी बल दिया गया है और डिफेंस और स्पेस जैसे सेन्सिटिव क्षेत्रों को निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया गया है।

पीएम मोदी ने कहा कि जापान एक ‘टेक पावरहाउस’ है और भारत एक ‘टैलेंट पावर हाउस’। उन्होंने कहा, “जापान की टेक्नोलॉजी और भारत का टैलेंट मिलकर इस सदी की ‘टेक क्रांति’ नेतृत्व कर सकते हैं।” वहीं, जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने कहा कि भारतीय टैलेंट और जापानी तकनीक एक-दूसरे के लिए बने है।

PM ने याद किए जापान से अपने पुराने रिश्ते

पीएम मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए भी जापान के साथ अपने पुराने संबंधों को याद किया है। पीएम मोदी ने फोरम को संबोधित करते हुए कहा, “बहुत लोग हैं जिनसे मेरा व्यक्तिगत परिचय रहा है। जब मैं गुजरात में था, तब भी, और गुजरात से दिल्ली आया तो तब भी।”

उन्होंने आगे कहा, “आप में से कई लोगों से निकट परिचय मेरा रहा है। मुझे खुशी है की आज आप सब से मिलने का अवसर मिला है।” साथ ही उन्होंने जापान के प्रधानमंत्री इशिबा का भी धन्यवाद दिया है।”

‘चुनाव आयोग ने एक घर में बसा दिया गाँव’: फिर बिहार SIR पर झूठ फैलाते पकड़ा गया कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम, जानिए ‘मकान संख्या 6 में 947 वोटर’ के दावे की सच्चाई

‘वोट चोरी’ का प्रोपेगेंडा रचने वाली कॉन्ग्रेस मतदाता गहन पुनरीक्षण बिहार (SIR) पर एक और झूठ फैलाते पकड़ी गई है। कॉन्ग्रेस ने दावा किया कि बोधगया विधानसभा क्षेत्र के निदानी गाँव में सभी 947 मतदाताओं का मकान संख्या ‘6’ ही दिखाया गया है। पार्टी ने कहा कि ऐसा करके चुनाव आयोग ने असली मकान नंबर गायब कर दिए हैं।

मकान नंबर ‘6’ में 947 वोटर, कॉन्ग्रेस का दावा

कॉन्ग्रेस ने ‘वोट चोरी’ को लेकर यह दावा बाराचट्टी विधानसभा के निदानी गाँव के बूथ नंबर 161 को लेकर किया है। कॉन्ग्रेस ने एक सोशल मीडिया एक पोस्ट में दावा किया कि बूथ नंबर 161 की मतदाता सूची में 947 मतदाता एक ही घर (मकान नंबर ‘6’) में रहते हैं।

कॉन्ग्रेस ने कहा कि निदानी गाँव में सैकड़ों घर और परिवार हैं, मगर मतदाता सूची में पूरा गाँव एक काल्पनिक मकान में समा गया। चुनाव आयोग से 3 सवाल भी किए- BLO ने किस तरह डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन की?, असली मकान नंबर वोटर लिस्ट से क्यो गायब कर दिए? और इसका फायदा किसे पहुँचाया जा रहा है?

आगे कॉन्ग्रेस ने फर्जी वोटर, डुप्लीकेट नाम और भूतिया पहचान छिपाए जाने का भी दावा किया। कॉन्ग्रेस ने ‘लोकतंत्र की चोरी’ और ‘लोकतंत्र को लूटने’ जैसे गंभीर आरोप भी चुनाव आयोग पर लगाए।

कॉन्ग्रेस के इस दावे को विपक्ष के नेता राहुल गाँधी समेत पूरे कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम ने प्रचारित किया। उल्लेखनीय है कि इस समय INDI गठबंधन राहुल गाँधी के नेतृत्व में बिहार में वोटर अधिकार यात्रा निकाल रहा है।

बिहार SIR का ड्राफ्ट डाटा क्या कहता है?

चुनाव आयोग ने बिहार SIR को जो ड्राफ्ट अपलोड किया है, उसमें निदानी गाँव के बूथ नंबर-161 का डाटा ऑपइंडिया ने खंगाला। सभी लोगों को मकान संख्या ‘6’ दिया गया है। हमने पाया कि इस बूथ पर 947 मतदाताओं का नाम दर्ज है। इनमें 526 पुरुष और 421 महिलाएँ हैं।

मकान संख्या ‘6’ में 947 वोटर- क्या है सच्चाई?

कॉन्ग्रेस के दावे के बाद गया के जिलाधिकारी ने इस बूथ पर सभी मतदाताओं के मकान संख्या ‘6’ होने का कारण बताया है। उन्होंने एक्स पोस्ट में बताया है, “कई गाँवों में गृह संख्या आवंटित नहीं होती है, जिसके कारण वोटर रोल में सांकेतिक गृह संख्या दी जाती है। जिन मतदाताओं का उल्लेख किया गया है, वे सभी गाँव में मौजूद हैं और सही वोटर हैं। निदानी गाँँव के 161 बूथ संख्या के वोटर स्वयं स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं।”

इस जानकारी के साथ ही जिलाधिकारी ने गाँव के मतदाता का वीडियो भी जारी किया। इस वीडियो में मतदाता बताते हैं कि SIR से वे लोग संतुष्ट हैं और इससे कोई परेशानी नहीं हो रही है। साथ ही मतदाता यह भी बताते हैं कि गाँव में कोई गृह संख्या नहीं होता है। सभी मतदाताओं ने मकान संख्या ‘6’ पर फैलाई जा रही अफवाहों को झूठा करार दिया।

चुनाव आयोग ने ऑपइंडिया को बताया है, “Notional House Number एक काल्पनिक (प्रतीकात्मक) मकान संख्या होती है, जो तब दी जाती है जब किसी मतदाता के निवास स्थान पर वास्तविक मकान संख्या उपलब्ध नहीं होती। कई गाँवों, झुग्गियों या अस्थायी बस्तियों में घरों पर कोई स्थायी मकान संख्या नहीं होती। ऐसे में BLO क्षेत्र का भौतिक भ्रमण करके प्रत्येक घर को स्वतः एक क्रमांक (जैसे 1, 2, 3…) प्रदान करता है।”

चुनाव आयोग ने आगे कहा, “यह संख्या केवल सूचीकरण में सुविधा और मतदाताओं को सही क्रम में दर्ज करने के लिए दी जाती है। इसका प्रयोग मतदाता की पहचान और मतदाता सूची को क्रमबद्ध रूप से तैयार करने में होता है।”

मकान संख्या ‘6’ की तरह ही मकान संख्या ‘0’ पर भी किया था गुमराह

जिस तरीके से मकान संख्या ‘6’ को लेकर झूठ फैलाया गया है। इससे पहले भी मकान संख्या ‘0’ को लेकर कॉन्ग्रेस ने लोगों को गुमराह करने की कोशिश की थी। राहुल गाँधी ने दावा किया था कर्नाटक के महादेवपुरा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में मकान नंबर ‘0’ वाले कई मतदाता हैं। राहुल गाँधी ने इन्हें ‘फर्जी मतदाता’ बताया था, जिनके घर का पता नहीं था।

बाद में चुनाव आयोग ने राहुल गाँधी के दावे को झूठा करार दिया था। चुनाव आयोग ने बताया कि बेघर लोगों को ये नंबर दिया गया है, जिनका पता स्पष्ट नहीं होता है। ऐसे लोगों का चुनावी फॉर्म में पूरा पता दर्ज नहीं होता है।

धर्मस्थल मामले में कसा SIT का शिकंजा, कर्नाटक के साथ पड़ोसी राज्यों में बढ़ेगा छानबीन का दायरा: सफाईकर्मी ने गढ़ी थी झूठी कहानी, BJP ने की NIA जाँच की माँग

कर्नाटक के धर्मस्थल में सामूहिक दफन के मामले की जाँच का दायरा बढ़ने वाला है। विशेष जाँच दल (SIT) 7 साल पुरानी पैनल रिपोर्ट की जाँच करेगी, जिसमें धर्मस्थल के आसपास हुई महिलाओं और बच्चों की संदिग्ध मौत की जानकारी दी गई है। SIT ने कहा कि सफाईकर्मी की सारी बातें झूठी नहीं है इसीलिए जाँच के दायरे को बढ़ाया जा रहा है।

Deccan Herald की रिपोर्ट के अनुसार, SIT कर्नाटक और उसके पड़ोसी राज्यों जैसे केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और गोवा में धर्मस्थल आने वाले तीर्थयात्रियों के लापता होने के बारे में दर्ज FIR की भी जाँच करेगी। SIT ने उन खबरों को भी खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया जा रहा था कि सफाईकर्मी की गिरफ्तारी के बाद जाँच खत्म होने का दावा किया गया था।

ये 5000 पन्नों की रिपोर्ट महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न रोकने के मामले में साल 2018 में प्रस्तुत की गई थी, जिसमें कर्नाटक में महिलाओं के अचानक गायब होने के भी कई मामले उल्लेख किए गए हैं। यह मामले धर्मस्थल क्षेत्र से भी जुड़े थे।

इसके साथ SIT 1995 से 2014 के बीच अचानक लापता हुए धर्मस्थल के श्रद्धालुओं के मामले को भी खंगाल रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सफाईकर्मी की शिकायतों के अलावा भी कई ऐसे आरोप सामने आए हैं कि बिना पोस्टमार्टम के बगैर शवों को संदिग्ध तरीके से दफनाया गया।

टीम ने कई जगह खुदाई की है और अवशेष भी मिले हैं, जिनकी फॉरेंसिक जाँच रिपोर्ट का इंतजार है। शव की पहचान करने के लिए कर्नाटक के धर्मस्थल में सामूहिक दफन के मामले की जाँच का दायरा बढ़ने वाला है।ने एक तकनीकी तौर बहुआयामी फॉरेंसिक जाँच भी शुरू कर दी है।

सफाईकर्मी पर झूठे गवाही के भी लगे आरोप

धर्मस्थल में सामूहिक दफन मामले में गवाही देने वाले सफाईकर्मी पर गिरफ्तारी के कुछ दिन बाद ही झूठे सबूत पेश करने और झूठी गवाही देने के नए आरोप लगाए गए हैं।

अब तक की जाँच के बाद सफाईकर्मी पर BNS की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिनमें धारा 227 (झूठी गवाही देना), धारा 228 (झूठी गवाही गढ़ना), धारा 229 (झूठी गवाही के लिए दंड), धारा 336 (जालसाजी), धारा 230 (मृत्युदंड की सज़ा दिलाने के इरादे से झूठी गवाही गढ़ना), धारा 231 (आजीवन कारावास की सज़ा दिलाने के इरादे से झूठी गवाही गढ़ना), धारा 236 (झूठी घोषणा), धारा 240 (झूठी जानकारी देना) और धारा 248 (झूठा आरोप) शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सफाईकर्मी को 18 अगस्त 2025 को गिरफ्तार किया गया था। जब मामले की जाँच कर रही SIT ने सफाईकर्मी पर सबूत के तौर पर एक मानव खोपड़ी पेश करने का आरोप लगाया था। तब SIT ने दावा किया कि यह खोपड़ी धर्मस्थल से खोदकर निकाली गई है।

हालाँकि, जाँच के दौरान SIT ने पाया कि यह खोपड़ी सफाईकर्मी को किसी व्यक्ति ने सौंपी थी। पुलिस अब इस बात की जाँच कर रही है कि खोपड़ी किसी चिकित्सा प्रयोगशाला से आई थी या किसी दूसरी जगह से।

कर्नाटक BJP की NIA जाँच की माँग

धर्मस्थल मामले में कर्नाटक बीजेपी लगातार NIA जाँच की माँग कर रही है। कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने धर्मस्थल के खिलाफ ‘झूठे प्रचार’ के चलते जनता का विश्वास खोने का हवाला देते हुए NIA या CBI जाँच की माँग की।

कर्नाटक बीजेपी ने धर्मस्थल मामले में विरोध प्रदर्शन के लिए 01 सितंबर 2025 को ‘धर्म जागृति समावेश’ आयोजित करने की भी योजना बनाई है। इसमें 50 हजार से 1 लाख हिंदू लोग शामिल होंगे।

जानें पूरा मामला

यह मामला तब सामने आया जब एक सफाईकर्मी ने चौंकाने वाला दावा किया कि उसे 1998 से 2014 के बीच धर्मस्थल में कई जगहों पर सैकड़ों शव दफनाने के लिए मजबूर किया गया था। यह सफाईकर्मी भगवान मंजूनाथ मंदिर में काम करता था और उसने 3 जून 2025 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

उसके आरोपों की गंभीरता को देखते हुए, राज्य सरकार ने 19 जुलाई को इस मामले की जाँच के लिए SIT  का गठन किया। इसके बाद SIT उसे धर्मस्थल के स्नान घाट लेकर गई, जहाँ उसने 13 जगहों की पहचान की, जहाँ कथित रूप से शव दफनाए गए थे।

सफाईकर्मी ने अपनी शिकायत में बताया कि जिन शवों को वह दफनाता था, उनमें कई महिलाएँ और नाबालिग लड़कियाँ थीं, जिनका यौन शोषण किया गया था।

उसकी शिकायत के कुछ समय बाद, सुजाता नाम की 60 साल की एक महिला ने भी पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। उसने बताया कि उसकी बेटी धर्मस्थल की तीर्थ यात्रा के दौरान लापता हो गई थी। हालाँकि, बाद में महिला अपनी बात से पलट गई और सामने आया कि उसकी कोई बेटी नहीं है।

गायत्री मंत्र से जापान में PM मोदी का स्वागत, दोस्ताने अंदाज में मिले प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा: 15वें शिखर सम्मेलन में AI-सेमीकंडक्टर्स और वैश्विक साझेदारी पर होगी बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार (29 अगस्त 2025) को दो दिन की जापान यात्रा पर टोक्यो पहुँचे। हानेडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री मोदी का जोरदार स्वागत किया गया। इसके बाद टोक्यो में जापानी समुदाय के लोगों ने गायत्री मंत्र गाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया।

इस दौरे में पीएम मोदी जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा से मिलकर आर्थिक और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। पीएम मोदी ने तस्वीरें साझा करते हुए एक्स पर लिखा, “टोक्यो पहुँच गया हूँ। भारत और जापान अपने विकासात्मक सहयोग को निरंतर मज़बूत कर रहे हैं, और मैं इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री इशिबा और अन्य लोगों से मिलने के लिए उत्सुक हूँ, जिससे मौजूदा साझेदारियों को और मजबूत करने और सहयोग के नए रास्ते तलाशने का अवसर मिलेगा।”

यात्रा से पहले जारी एक बयान में पीएम मोदी ने कहा कि यह दौरा भारत और जापान के बीच ‘सभ्यतागत संबंधों और सांस्कृतिक जुड़ाव’ को गहरा करने का अवसर है। उन्होंने बताया कि बातचीत का मुख्य उद्देश्य ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक और ग्लोबल पार्टनरशिप’ को अगले स्तर पर ले जाना है, जो पिछले 11 सालों में लगातार मजबूत हुई है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस यात्रा में दोनों देश अपनी साझेदारी को नए पंख देने, आर्थिक और निवेश संबंधों को और विस्तार देने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) व सेमीकंडक्टर्स जैसी नई और उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाने की कोशिश करेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पीएम मोदी का सुबह 10:30 से 10:50 बजे तक व्यावसायिक कार्यक्रम है। उसके बाद वे 11:30 से 1:10 बजे तक जापान के गणमान्य व्यक्तियों से मुलाकात करेंगे। दोपहर 1:15 से 1:20 बजे के बीच शोरिनजान दारुमा जी मंदिर के मुख्य पुजारी द्वारा पीएम मोदी को दारुमा गुड़िया भेंट की जाएगी। इसके बाद दोपहर 2:30 से 5:15 बजे तक 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी शामिल होंगे।

बता दें कि जापान में पीएम मोदी का दौरा शनिवार (30 अगस्त 2025) तक चलेगा, इसके बाद पीएम मोदी चीन के शहर तिआनजिन जाएँगे। वहाँ वे 31 अगस्त और 1 सितंबर को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस दौरान उनकी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय बैठक भी होने की संभावना है।

हर परिवार में हो 3 बच्चे, धर्मांतरण-घुसपैठ से बदल रही डेमोग्राफी: मोहन भागवत, 75 की उम्र में रिटायरमेंट, आरक्षण से लेकर BJP-RSS रिश्तों पर हर सवाल का दिया जवाब

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शताब्दी वर्ष व्याख्यान शृंखला के तहत दिल्ली के विज्ञान भवन में तीन दिवसीय कार्यक्रम का गुरुवार (28 अगस्त 2025) को समापन हुआ। समापन सत्र में सरसंघचालक मोहन भागवत ने लोगों के संघ और उसकी कार्यशैली से जुड़े सवालों के जवाब दिए हैं। इस कार्यक्रम में 50 से अधिक देशों के राजदूतों, उद्योगपतियों, न्यायाधीशों, राजनीतिक नेताओं और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी हस्तियों सहित लगभग 2,000 लोगों को आमंत्रित किया गया है।

कार्यक्रम के दौरान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से पूछे गए कुछ सवाल और उनके जवाब –

प्रश्न:  देश में जनसांख्यिकीय असंतुलन की वजह क्या है?
मोहन भागवत:  धर्मांतरण और अवैध प्रवास इसके बड़े कारण हैं। धर्म व्यक्ति की व्यक्तिगत पसंद होनी चाहिए, उसमें किसी तरह का दबाव या प्रलोभन नहीं होना चाहिए।

प्रश्न: अवैध प्रवास पर सरकार की कोशिशों को आप कैसे देखते हैं?
भागवत: सरकार रोकने की कोशिश कर रही है, लेकिन समाज को भी अपनी भूमिका निभानी होगी। हमें अवैध प्रवासियों को नौकरी नहीं देनी चाहिए। पहले अपने लोगों को, चाहे वे मुसलमान ही क्यों न हों, रोजगार देना चाहिए।

प्रश्न: नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) पर आपका क्या विचार है?
भागवत: यह सही दिशा में कदम है। हमारी शिक्षा व्यवस्था विदेशी आक्रांताओं के समय नष्ट हो चुकी थी। वे देश पर शासन करना चाहते थे, विकास नहीं। अब जब हम स्वतंत्र हैं तो हमें जनता को आगे बढ़ाना है।

प्रश्न: आरएसएस और भाजपा के रिश्तों को लेकर हमेशा सवाल उठते हैं। क्या भाजपा अध्यक्ष चुनने में संघ का हाथ होता है?
भागवत: यह पूरी तरह गलत धारणा है। अगर हम तय करते तो इतना समय क्यों लगता? सुझाव दिए जा सकते हैं लेकिन फैसला उनका ही होता है।

प्रश्न: प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को हटाने वाले हालिया विधेयकों पर आपकी राय?
भागवत: नेतृत्व पारदर्शी और बेदाग होना चाहिए, यही मूल आधार है। संसद सर्वोच्च संस्था है, वही जो भी निर्णय लेगी, लागू होगा। अभी चर्चा चल रही है, देखते हैं आगे क्या होता है।

प्रश्न: भाजपा अध्यक्ष के नाम को लेकर चर्चा है, क्या संघ इसमें कोई भूमिका निभा रहा है?
भागवत: हमने कभी ऐसा फैसला नहीं किया और न करना चाहते हैं। यह पार्टी का अधिकार है। हम सिर्फ वैचारिक मार्गदर्शन देते हैं।

प्रश्न: क्या 75 साल की उम्र होते ही नेताओं को पद छोड़ देना चाहिए?
मोहन भागवत: मैंने कभी नहीं कहा कि मुझे पद छोड़ना चाहिए या किसी और को पद छोड़ देना चाहिए। जिस दिन मुझसे कहा जाएगा, “जाओ, शाखा चलाओ,” मैं चला जाऊँगा।

उन्होंने आगे कहा, “संघ में हमें काम दिया जाता है, चाहे हम चाहें या न चाहें। अगर मैं 80 साल का भी हो जाऊँ और मुझे शाखा संचालित करने के लिए कहा जाए, तो मुझे जाना ही पड़ेगा। हम वही करते हैं जो संघ कहता है। मैं सरसंघचालक हूँ लेकिन क्या आपको लगता है कि सिर्फ मैं ही सरसंघचालक हो सकता हूँ? यह किसी के लिए रिटायरमेंट का मामला नहीं है।”

वहीं, मोहन भागवत ने जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कहा, “भारत की जनसंख्या नीति 2.1 बच्चों की है। एक परिवार में तीन बच्चे हों, हर नागरिक को यह देखना चाहिए कि उसके परिवार में तीन बच्चे होने चाहिए।” उन्होंने कहा, “जनसंख्या बोझ भी हो सकती है। इसलिए जनसंख्या नीति भी है। जनसंख्या नियंत्रित रहे इसलिए तीन से बहुत ज्यादा आगे नहीं बढ़ना चाहिए। जन्मदर कम होने की अगर बात है तो वह सबका कम हो रहा है।”

कार्यक्रम के अंतिम दिन मोहन भागवत ने इस मंच से साफ किया कि संघ की विचारधारा भारत की परंपराओं से जुड़ी है और विकास की राह पर सभी को साथ लेकर चलने का लक्ष्य है। तीन दिन चली इस व्याख्यान शृंखला में दुनिया भर से आए मेहमानों और देश के अलग-अलग तबकों की मौजूदगी ने इसे खास बना दिया। 100 वर्ष पूरे होने पर संघ कई विशेष कार्यक्रम चला रहा है जिसमें यह व्याख्यान शृंखला भी शामिल है।

फायर गन से फूँक दिया कुरान, कहा- अमेरिका से खत्म कर दूँगी इस्लाम: कौन है ट्रंप की पार्टी की महिला नेता वेलेंटीना गोमेज, LGBT+ से लेकर अश्वेतों के खिलाफ भी मुखर

अमेरिका में टेक्सास की 31वीं संसदीय सीट से चुनाव लड़ रही रिपब्लिकन उम्मीदवार वेलेंटीना गोमेज (Valentina Gomez) एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें वह फ्लेमथ्रोवर गन से कुरान जलाती हुई दिख रही हैं। हालाँकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इसे बैन कर दिया गया है, लेकिन ट्विटर पर ये वीडियो अभी भी वायरल है।

कौन हैं वेलेंटीना गोमेज

रिपब्लिकन उम्मीदवार गोमेज राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (MAGA) कैम्पेन की समर्थक हैं। उनका आरोप है कि मुस्लिम हमेशा ईसाई देशों में हिंसा फैलाते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि सब लोग उनके मिशन में उनका साथ दें।

वेलेंटीना गोमेज का जन्म 8 मई 1999 को कोलंबिया के मेडेलिन शहर में हुआ था। 2009 में वह परिवार के साथ अमेरिका आ कर बस गईं। पढ़ाई-लिखाई के बाद रियल एस्टेट और फाइनेंस सेक्टर में हाथ आजमाया। वह नेस्ले से भी जुड़ी रही हैं।

राजनीति में आते ही गोमेज का करियर विवादों से घिर गया। सार्वजनिक तौर पर मुसलमानों, LGBT+ कम्युनिटी, अश्वेतों और इमिग्रेंट्स के खिलाफ उन्होंने विवादित बयान दिए।

अमेरिका से इस्लाम खत्म करना चाहती हैं गोमेज

नए वीडियो में गोमेज कहती हैं कि उनका उद्देश्य ‘टेक्सास से इस्लाम को खत्म करना है।’ इसके बाद उन्होंने गालियाँ दीं। उन्होंने कहा कि अमेरिका के मुस्लिम दुनिया के 57 मुस्लिम देशों में से किसी में भी जा सकते हैं।

गोमेज के मुताबिक, “अगर हम इस्लाम को हमेशा के लिए खत्म नहीं कर देते, तो आपकी बेटियों का बलात्कार होगा और आपके बेटों का सिर कलम कर दिया जाएगा।” फिर वह कैमरे पर कुरान जलाती हैं और कहती हैं, “अमेरिका एक ईसाई राष्ट्र है, इसलिए वे आतंकवादी मुसलमान 57 मुस्लिम देशों में से किसी में भी जा सकते हैं।”

वीडियो के अंत में गोमेज कहती हैं कि ईसा मसीह के बताए रास्ते पर वह चलती हैं। गोमेज ने एक और पोस्ट शेयर किया है, जिसमें वह कहती हैं, “मैं अपनी बातों पर कायम हूँ और मैं उस किताब के आगे कभी घुटने नहीं टेकूँगी, जो 7 अक्टूबर के नरसंहार के लिए जिम्मेदार है। उस दिन एबी गेट पर 13 अमेरिकी सैनिकों की हत्या कर दी गई थी।”

यह पहली बार नहीं है जब गोमेज ने मुस्लिमों के खिलाफ खुल कर बोला हो। मई 2025 में, उन्होंने टेक्सास में एक मुस्लिम सहभागिता कार्यक्रम में बाधा डालने की कोशिश की थी। माइक्रोफोन छीन कर जबरदस्ती अपनी बात की। उन्होंने कहा था कि टेक्सास में इस्लाम के लिए कोई जगह नहीं है। कॉन्ग्रेस उनकी मदद करे, ताकि अमेरिका के इस्लामीकरण को रोक जा सके। उन्होंने कहा कि वह सिर्फ गॉड से डरती हैं।

आज हुए लोकसभा चुनाव तो NDA को मिलेंगी 324 सीटें, मोदी सरकार के कामकाज से 58% लोग संतुष्ट: INDI गठबंधन की घटेंगी सीटें, LoP के तौर पर भी राहुल गाँधी फेल

2024 के लोकसभा चुनावों के साल भर बाद BJP के नेतृत्व वाली NDA की लोकप्रियता बढ़ी है। नरेंद्र मोदी सरकार के कामकाज से लोग संतुष्ट हैं। यदि आज चुनाव हुए तो एनडीए लोकसभा की 324 सीटें जीत सकती है। अकेले बीजेपी की सीटें भी 2024 के 240 से बढ़कर 260 होने का अनुमान है। वहीं, विपक्ष के तौर पर राहुल गाँधी की भूमिका लोगों को प्रभावित नहीं कर रही है और INDI गठबंधन की सीटें 2024 के 234 से घटकर 208 हो सकती है।

जनता का यह मिजाज इंडिया टुडे और सी-वोटर के ‘मूड ऑफ द नेशन’ सर्वे से सामने आया है। इस सर्वे के आँकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं, जब INDI गठबंधन ‘वोट चोरी’ का प्रोपेगेंडा रचकर जनादेश को खारिज करने की कोशिश में जुटा है।

प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी आज भी देश के लोगों की पहली पसंद हैं। 52 प्रतिशत लोगों का मानना है कि पीएम के तौर पर वे सबसे बेहतर हैं। वहीं, 25% लोग ही राहुल गाँधी को पीएम के तौर पर देखना चाहते हैं। एनडीए में नरेंद्र मोदी के बाद प्रधानमंत्री पद के लिए 28% लोगों की पसंद अमित शाह, 26% लोगों की पसंद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और 7% लोगों की पसंद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी हैं।

सर्वे के दौरान लोगों से प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी के प्रदर्शन को लेकर भी सवाल किया गया। 34 प्रतिशत लोगों ने उनके कार्यकाल को ‘बहुत अच्छा’ और 24 प्रतिशत लोगों ने ‘अच्छा’ बताया। यानी 58 प्रतिशत लोग उनके काम से संतुष्ट हैं। वहीं विपक्ष के नेता के तौर पर राहुल गाँधी के प्रदर्शन को 15% लोगों ने ‘खराब’ और 12% लोगों ने ‘बहुत खराब’ बताया है।

17 प्रतिशत लोग अयोध्या में राम मंदिर और वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण को एनडीए सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं। 12 प्रतिशत लोगों ने ऑपरेशन सिंदूर, 10 प्रतिशत लोगों ने बुनियादी ढाँचे के विकास, 9 प्रतिशत लोगों ने अनुच्छेद 370 के खात्मे, 7 प्रतिशत लोगों ने लोक कल्याणकारी योजनाओं और 6 प्रतिशत लोगों ने भ्रष्टाचार मुक्त सरकार को बड़ी उपलब्धि बताया है।

यह सर्वे 1 जुलाई 2025 से 14 अगस्त 2025 के बीच किया गया। 2 लाख 6 हजार 826 लोगों से रायशुमारी की गई। इसमें हर जाति, धर्म, मजहब के लोग शामिल हैं। आज तक की रिपोर्ट में इन आँकड़ों में मोटे तौर पर 3 प्रतिशत का मार्जिन एरर होने की बात कही गई है।

इन आँकडों से यह स्पष्ट है कि 11 साल से लगातार सत्ता में बने रहने के बावजूद देश के आमलोगों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साख बरकरार है। लोग उनके सरकार के कामकाज से संतुष्ट हैं। साथ ही विपक्षी प्रोपेगेंडा के झाँसे में लोग नहीं आ रहे हैं।

संभल हिंसा के पीछे सपा सांसद जियाउर रहमान बर्क, हिंदू बस्तियों पर हमले-तीर्थ स्थलों पर कब्जे की थी साजिश: बाहर से बुलाए गए थे गुंडे, CM योगी को सौंपी 450 पन्ने की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के संभल में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा पर आई 450 पन्नों की 3 सदस्यीय समिति की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह दंगा अचानक नहीं भड़का बल्कि इसे पूर्वनियोजित साजिश के तहत अंजाम दिया गया था। इसमें कई राजनीतिक और मजहबी किरदारों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जो अब कठघरे में खड़े नजर आ रहे हैं।

सपा सांसद के बयान के बाद भड़की हिंसा

रिपोर्ट के अनुसार, 22 नवंबर को समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर रहमान बर्क ने नमाजियों को संबोधित करते हुए विवादित बयान देते हुए कहा था, “हम इस देश के मालिक हैं, नौकर-गुलाम नहीं। मस्जिद थी है और कयामत तक रहेगी। अयोध्या में हमारी मस्जिद ले ली गई, यहाँ ऐसा नहीं होने देंगे।”

इस भाषण का कन्वर्टेड हिंदू पठानों ने विरोध किया, जिससे तुर्क और पठान समुदाय आमने-सामने आ गए। 24 नवंबर को यही तनाव हिंसा में बदल गया। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि इस साजिश में सांसद बर्क, विधायक के बेटे सुहैल इकबाल और जामा मस्जिद की इंतजामिया कमेटी की बड़ी भूमिका रही थी।

हिंदुओं पर हमले और तीर्थ स्थलों पर कब्जे की थी साजिश

रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि दंगे की आड़ में 68 तीर्थ स्थलों और 19 पावन कूपों पर कब्जे की कोशिश की गई। हरिहर मंदिर को भी निशाना बनाया गया, जिसने बाबर काल की यादें ताजा कर दीं।

इसके बाद योगी सरकार ने इन स्थलों के पुनरुद्धार की योजना बनाई और 30 मई 2025 को इसका शिलान्यास किया। दंगे को बढ़ाने के लिए बाहरी उपद्रवियों को बुलाया गया और हिंदू मोहल्लों को निशाना बनाने की योजना बनाई गई लेकिन पुलिस की कड़ी तैनाती से इनका यह मंसूबा विफल हो गया। फिर भी, तुर्क और पठान समुदायों के बीच हुई क्रॉस फायरिंग में चार लोगों की मौत हुई।

रिपोर्ट के मुताबिक 1936 से 2019 तक यहाँ 73 दिन कर्फ्यू लगा, जिसमें 1948 में 20 दिन, 1978 में 30 दिन और 2019 में सीएए हिंसा के दौरान 6 दिन शामिल हैं। रिपोर्ट में संभल को आतंकी संगठनों और अवैध हथियारों का अड्डा बताया गया है। अलकायदा और हरकत-उल-मुजाहिद्दीन की गतिविधियों का जिक्र है और अमेरिका द्वारा आतंकी घोषित मौलाना आसिम का कनेक्शन भी संभल से जुड़ा बताया गया।

डेमोग्राफी में भी बड़ा बदलाव हुआ है, आजादी के समय 55% मुस्लिम और 45% हिंदू थे लेकिन अब हिंदू घटकर 15% और मुस्लिम बढ़कर 85% हो गए हैं। 1947 से 2019 तक यहाँ 15 बड़े दंगे हुए जिनका सबसे ज्यादा असर हिंदू समाज पर पड़ा है।

अब AI भी हुआ ‘हलाल’, अरबी-अंग्रेजी में करता है बात: जानिए सऊदी अरब की कंपनी ने क्यों किया लॉन्च, कैसे इस्लामी रवायतों को करेगा प्रमोट

सऊदी एआई कंपनी हुमैन (Humain) ने एक अरबी भाषा का एआई चैटबॉट लॉन्च किया है। कंपनी ने इसे दुनिया का पहला ‘हलाल एआई’ होने का दावा किया है। कंपनी का कहना है कि यह अरबी भाषा, इस्लामी रिवायत, मूल्यों और विरासत को लेकर संवेदनशील है।

क्या है हलाल एआई ( Halal AI)

अरबी भाषा में तैयार किए गए चैटबॉट हुमैन चैट (Humain Chat) यानी हलाल एआई अंग्रेजी और अरबी, दोनों भाषाओं में आसानी से स्विच कर सकता है। इसके अलावा मिस्र, लेबनानी सहित कई बोलियों को भी आसानी से समझ सकता है और जवाब दे सकता है। यूजर्स टेक्स्ट या वॉइस के जरिए इससे सवाल पूछ सकते हैं। इसमें रियल टाइम सर्च बेस्ड जवाब मिल जाते हैं। इतना ही नहीं बातचीत को शेयर भी किया जा सकता है।

Humain Chat चैटबॉट की तकनीक का आधार ‘ALLAM 34B’ है। यह एक लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) है, जिसे आठ पेटाबाइट से ज्यादा डेटा पर प्रशिक्षित किया गया है। इसे सबसे बड़ा अरबी डेटासेट माना जा रहा है।

कंपनी के मुताबिक, हुमैन चैट कंपनी के अल्लाम लार्ज लैंग्वेज मॉडल (Allam model) पर आधारित है, जिसे अब तक के सबसे बड़े अरबी डेटासेट पर तैयार किया गया है।

यह चैटबॉट सबसे पहले सऊदी अरब में उपलब्ध कराया जाएगा। ये वेब, IOS, Android तीनों पर उपलब्ध होगा। उसके बाद इसे मध्य पूर्व और दुनिया के बाकी हिस्सों में भी लॉन्च किया जाएगा।

इस्लाम की बारीकियाँ ह्यूमेन चैट को पता है- कंपनी

कंपनी का कहना है कि अल्लाम मॉडल को ‘इस्लामी, मध्य पूर्वी और सांस्कृतिक बारीकियों’ वाले डेटा सेट पर प्रशिक्षित किया गया है। यह दुनिया के अग्रणी चैटबॉट ChatGPT जैसा ही है, जिसके डेवलपर OpenAI का कहना है कि इसे पश्चिमी मूल्यों के अनुरूप बनाया गया है। ह्यूमेन चैट ऐसे समय में लॉन्च हुआ है, जब स्टार्टअप और दूसरी कंपनियाँ एआई तकनीक में आगे निकलने की होड़ में हैं।

सऊदी अरब की पब्लिक फंड के पैसे से बना ह्यूमेन चैट

सऊदी सॉवरेन वेल्थ फंड के स्वामित्व वाली ह्यूमेन चैट को सऊदी पब्लिक इनवेस्टमेंट फंड से मदद मिली है। कंपनी एआई इकोसिस्टम, इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाउड, डाटा और एप्लिकेशन पर फोकस कर रही है। इसको अबू धाबी सरकार की फाल्कन अरेबिक मॉडल से चुनौती मिल सकती है। अबु धाबी की सरकारी अनुसंधान संस्थान ने साल 2025 की शुरुआत में इसे लॉन्च किया था।

ह्यूमेन चैट की घोषणा मई में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सऊदी अरब यात्रा से एक दिन पहले की गई थी। सऊदी अरब ने इस दौरान एआई की बुनियादी ढाँचा बनाने के लिए अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ अरबों डॉलर के समझौते किए थे।

सऊदी अरब में स्टोर होगा यूजर्स का डाटा

कंपनी का कहना है कि ह्यूमेन चैट पूरी तरह से सऊदी अरब के पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन लॉ को मानने वाला है। इसके यूजर्स की सारी जानकारी देश में ही स्टोर किया जाता है, ताकि प्राइवेसी बनी रहे।

उद्योगों में अंग्रेजी भाषा के वर्चस्व के बीच ह्यूमेन चैट दुनिया के 38 करोड़ अरबी-भाषियों को उनकी मूल भाषा में सेवाएँ प्रदान करने में सक्षम होगी।

कंपनी का मानना है कि अनुवाद में सक्षम होने के बावजूद, दुनिया की अग्रणी एआई कंपनियों के चैटबॉट डिफ़ॉल्ट रूप से अंग्रेजी में ही काम करते हैं, क्योंकि इनके डेटासेट अंग्रेजी में होते हैं।

चैटजीपीटी, गूगल जेमिनी और चीन के डीपसीक की तुलना में अल्लाम और फाल्कन जैसे मॉडल अरबी भाषा में विस्तार से आउटपुट देने में ज्यादा सक्षम हैं।

ब्रिटेन के 85 इलाकों में पसरा है पाकिस्तानी बलात्कारियों का गैंग, ड्रग्स-गिफ्ट से फँसाते हैं: ब्रिटिश MP की रिपोर्ट से खुलासा, बताया- 60 के दशक से एक्टिव हैं ‘ग्रूमिंग गैंग्स’

ब्रिटेन के सांसद रूपर्ट लोव की अगुवाई में हुई एक निजी जाँच में हैरान करने वाले खुलासे हुए हैं। जाँच में ब्रिटेन के कम से कम 85 इलाकों में गैंग बनाकर बच्चों का यौन शोषण किए जाने के मामलों का पता चला है।

शोषण की ये घटनाएँ ना केवल मौजूदा वक्त में हो रही हैं बल्कि कई घटनाएँ 1960 के दशक से चली आ रही हैं। जाँच रिपोर्ट का दावा है कि इस घिनौने कांड में शामिल अधिकतर आरोपी पाकिस्तानी मूल के युवक हैं।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सैकड़ों पीड़ित, उनके परिजन और व्हिसलब्लोअर्स सामने आए हैं, जिन्होंने अपनी दर्दनाक कहानियाँ बताई है। कई पीड़िताएँ बचपन में ही गैंग्स के निशाने पर आ गईं, उन्हें गिफ्ट्स और झूठे वादों से फँसाया गया, नशा दिया गया और फिर बार-बार बलात्कार का शिकार बनाया गया।

इन मामलों में हैरानी की बात ये रही कि अक्सर पुलिस और प्रशासन ने इन घटनाओं के संकेतों को नजरअंदाज किया और पीड़ितों को गंभीरता से नहीं लिया गया।

रूपर्ट लोव की जाँच और सरकार पर दबाव

सांसद रूपर्ट लोव ने अपनी जाँच टीम के साथ देशभर में सफर किया और सबूत जुटाए। उन्होंने हजारों ‘फ्रीडम ऑफ इन्फॉर्मेशन’ (सूचना अधिकार जैसी व्यवस्था) के तहत माँगी गई रिपोर्टों और सैकड़ों गवाहों के बयानों के आधार पर यह खुलासा किया है।

लोव का कहना है ‘सड़ी-गली सच्चाई’ पहले से सोची गई तुलना में कहीं ज्यादा गहरी है। उनके अनुसार, “‘”सैकड़ों, हजारों जिंदगियाँ इन पाकिस्तानी गैंग्स के हाथों बर्बाद हो चुकी हैं।”

उन्होंने लेबर सरकार पर भी तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि सरकार ने अब तक कोई  ठोस कदम नहीं उठाए हैं। लोव ने कहा, “दो महीने से ज्यादा हो गए, लेबर ने पूरे देश में एक्शन लेने का वादा किया था, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। पीड़ितों का संदेश साफ है, बस बहुत हो चुका। अब समय है सख्त कदम उठाने का।”

लोव ने यह भी ऐलान किया कि उनकी जाँच समिति संसद में एक रिपोर्ट पेश करेगी, जिसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम सुझाए जाएँगे।

उन्होंने यहाँ तक कहा कि अगर कोई विदेशी नागरिक ऐसे अपराधों में शामिल पाया जाता है या चुपचाप जानकर भी कुछ नहीं करता, तो उसे तुरंत ब्रिटेन से बाहर निकाला जाना चाहिए।

रोदरहैम से अब तक का काला सच

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग्स की समस्या कोई नई नहीं है। साल 2014 में प्रोफेसर एलेक्सिस जे की रिपोर्ट ने रोदरहैम इलाके में 1997 से 2013 के बीच कम से कम 1400 बच्चियों के यौन शोषण का पर्दाफाश किया था।

उस रिपोर्ट में साफ कहा गया था कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने जानबूझकर इन घटनाओं को दबाया, क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं उन पर नस्लभेदी होने का ठप्पा न लग जाए। यह रवैया ही अपराधियों को खुली छूट देता रहा।

अब नई जाँचों में और भी चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। कुछ पीड़िताओं ने तो यह तक आरोप लगाया कि साउथ यॉर्कशायर पुलिस के कुछ अधिकारी भी पाकिस्तानी गैंग्स के साथ मिलकर उनका शोषण करते रहे। कई पीड़िताओं के बयान फाड़कर कूड़े में फेंक दिए गए, ताकि अपराध कभी दर्ज ही न हो सके।

एक पीड़िता ने बताया कि उसे 12 साल की उम्र में ही पुलिस की गाड़ी में बलात्कार का शिकार बनाया गया। वहीं, कई बच्चियों को नशा देकर गर्भपात के लिए मजबूर किया गया। इन घटनाओं ने पीड़िताओं का पुलिस और कानूनी व्यवस्था से पूरा भरोसा तोड़ दिया। हालांकि हाल के वर्षों में कुछ पूर्व पुलिस अधिकारी गिरफ्तार किए गए हैं, लेकिन सजा का इंतजार अब भी लंबा है।

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