बरेली में हिन्दू युवकों को हनी ट्रैप में फँसाकर इस्लाम कबूल करवाने वाले बड़े गिरोह का पर्दाफाश होने के बाद हर दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं। युवकों को 4 बार निकाह करने और ऐशो आराम की जिंदगी जीने का सपना दिखाया जाता था। युवकों का ब्रेशवॉश कर इस्लाम कबूल करवाया जाता था। यहाँ तक कि दिव्यांग लोगों को भी फँसा कर उनका धर्मपरिवर्तन कराया जाता था और निकाह कराए जाते थे।
पुलिस ने कुछ दिन पहले नेत्रहीन प्रोफेसर प्रभात उपाध्याय को मदरसे से बरामद किया था। उन्हें बंधक बनाकर धर्मपरिवर्तन कराया जा रहा था। मदरसे में खतने की प्रक्रिया चल रही थी, उसी दौरान पुलिस ने दबिश देकर उन्हें मुक्त कराया। गिरोह ने उनका नाम ‘हामिद’ रखा था। इस मामले में मदरसे का मौलवी अब्दुल मजीद, सलमान, मोहम्मद आरिफ समेत 4 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था। आरोपितों के पास से ज़ाकिर नाइक की सीडी, धर्मांतरण प्रमाणपत्र, 22 बैंक खातों में संदिग्ध ट्रांजैक्शन और विदेशी फंडिंग से जुड़े सुराग मिले थे।
दैनिक भास्कर के रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार (31अगस्त 2025) को जब उनकी टीम सुभाषनगर के करेली गाँव और फैजनगर पहुँची। आरोपित सलमान और मोहम्मद आरिफ इस गाँव के रहने वाले हैं। इनलोगों ने गाँव के बृजपाल, उसकी माँ और बहन को इस्लाम कबूल करवाया था। इनलोगों ने ही फैजनगर के पीयूष और एक नाबालिग का धर्मांतरण करवाया था। गाँव के लोगों में इस गैंग को लेकर दहशत है। इन्हें डर है कि कहीं उनके बच्चों को ये शिकार न बना लें।
व्हाट्सएप ग्रुप बना ‘हनी ट्रैप’ किया जाता था
गिरोह के 20 से अधिक व्हाट्सएप ग्रुप थे। इसमें हर दिन फोटो और वीडियोज डाले जाते थे। धीरे-धीरे अश्लील फोटो और वीडियोज डालकर हिन्दू युवकों को फँसाया जाता था। अगर युवक दिलचस्पी दिखाए, तो उसे मदरसे में बुलाया जाता था।वहाँ लड़कियाँ होती थी, जो उसका ब्रेनवॉश करती थी। मौलाना उसे समझाता था कि अगर चार लड़कियाँ चाहिए, जन्नत चाहिए और ऐशो-आराम से रहना है, तो मुस्लिम बन जाओ।
हिन्दू देवी-देवताओं को लेकर अपशब्द बोले जाते थे। गिरोह के सदस्य इस्लाम की अच्छाई बताते हुए ये जानकारी भी देते थे कि कैसे आसानी से इस्लाम कबूल किया जा सकता है। इसके फायदे क्या हैं। चार बीवियाँ, घर, नौकर, पैसे और दूसरी चीजें आसानी से मिल सकती हैं। युवकों को उर्दू सिखाया जाता, कुरान-हदीस पढ़ाया जाता। अगर युवक सीख जाता, तो उसे मौलाना और मौलवी बनने का मौका मिलने की बात भी कही जाती।
फैजपुर के पीयूष को बनाया मोहम्मद अली
प्रभात मामले में गिरफ्तार अब्दुल माजिद ने अपनी बहन आयशा की फोटो और वीडियो भेज कर पीयूष को चंगुल में फँसाया था। उसे पहले मदरसा बुलाया गया और आयशा से निकाह करने मौका मिलने की बात कही गई। लेकिन पहले इस्लाम कबूल करने को कहा गया। पीयूष के ब्रेनवॉश के बाद उसका खतना किया गया। नया नाम दिया गया- मोहम्मद अली। धीरे-धीरे पीयूष खुद ही गिरोह का हिस्सा बन गया और 5 वक्त नमाज अदा करने लगा।
बरेली का ये मदरसा 2014 में अस्तित्व में आया है। पुलिस की जाँच में बरेली में 6 लोगों के धर्मांतरण की बात अब तक सामने आई है। लेकिन ये आँकड़ा और भी बढ़ सकता है।
गिरोह के सदस्यों को अलग-अलग काम दिए गए
गिरोह का मास्टमाइंड अब्दुल माजिद था। उसने गिरोह के सदस्यों को काम बाँट दिया था। सलमान दर्जी का काम करता था। लेकिन उसका असली काम इस्लाम से जुड़े किताब, सीडी और दूसरी सामग्री उपलब्ध करना था। आरिफ उसकी मदद करता था। जबकि फहीम नाई की दुकान चलाता था। उसे आने-जाने वालों की सारी जानकारी होती थी। वह इसे माजिद से शेयर करता था।
मदरसा संचालक अब्दुल माजिद के 27 जिलों से जुड़े तार
पुलिस का मानना है कि ये लोग अलग-अलग राज्यों से चंदा इकट्ठा करते थे और इसी पैसे से धर्मांतरण का धंधा चलाते थे। इस बड़े लेन-देन को देखते हुए एजेंसियाँ पाकिस्तान समेत अन्य देशों से फंडिंग की संभावना की जाँच कर रही हैं।
एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने बताया कि इस गिरोह का नेटवर्क सिर्फ बरेली तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई राज्यों में फैला हुआ है। अब्दुल माजिद के ट्रेवल की हिस्ट्री 27 से अधिक जिलों से जुड़ी हुई है। उसके अकाउंट से 13 लाख रुपए बरामद हुए हैं। साथ ही कई बैंकों के चेकबुक और 21 बैकखाते मिले हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस इस मामले में और भी लोगों को गिरफ्तार करेगी। इस घटना ने एक बार फिर से धर्मांतरण गिरोहों की गंभीरता को उजागर कर दिया है, जो हमारे समाज के लिए एक बड़ा खतरा हैं।
चीन के तियानजिन में हुए शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के बाद सभी देशों ने संयुक्त रूप से घोषणा पत्र जारी किया। इसमें पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई और हमले में जान गवाए लोगों को सहानुभूति दी।
पत्र में कहा गया कि हमले के दोषियों, योजनाकारों और मददगारों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए। इसके साथ सभी देशों ने आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता दिखाई और इस लड़ाई में दोहरे रवैये को अस्वीकार्य किया।
घोषणापत्र के बयान में कहा गया, “सदस्य देशों ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने मृतकों और घायलों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना और सहानुभूति व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसे हमलों के अपराधियों, आयोजकों और प्रायोजकों को कटघरे के सामने लाया जाना चाहिए।”
घोषणापत्र में यह भी कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संयुक्त राष्ट्र के नियमों और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, सुरक्षा परिषद के फैसलों और वैश्विक आतंकवाद-रोधी रणनीति को लागू करते हुए सभी आतंकी संगठनों के खिलाफ मिलकर लड़ना होगा। साथ ही कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर एक व्यापक समझौते को सभी देशों की सहमति से अपनाना बहुत जरूरी है।
SCO शिखर सम्मेलन में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी आतंकवाद को दुनिया के लिए खतरा बताया था। पीएम ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए आतंकवाद की फंडिंग करने वाले देशों पर नकेल कसने की बात कही थी। साथ ही पीएम ने आतंकवाद के खिलाफ दोहरे रवैये पर भी सवाल उठाया था और जीरो टोलरेंस नीति अपनाने का आग्रह किया था।
SCO घोषणापत्र में भारत की पहलों की सराहना
SCO शिखर सम्मेलन के घोषणापत्र में भारत की पहलों की सराहना की गई। घोषणापत्र में ‘एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य’ थीम का जिक्र किया गया
सदस्य देशों ने 3 से 5 अप्रैल 2025 को नई दिल्ली में आयोजित 5वें SCO स्टार्टअप फोरम के परिणामों का स्वागत किया, जिसने विज्ञान, तकनीकी उपलब्धियों और इनोवेशन के क्षेत्र में सहयोग को गहरा किया।
साथ ही 21 से 22 मई 2025 को नई दिल्ली में आयोजित 20वें SCO थिंक टैंक फोरम का भी जिक्र किया। सदस्य देशों ने भारतीय विश्व मामलों की परिषद (ICWA) के SCO अध्ययन केंद्र की सांस्कृतिक और मानवीय आदान-प्रदान को मजबूत करने में योगदान की भी सराहना की।
अमेरिका के टेक्सास राज्य में ह्यूस्टन में शनिवार (30 अगस्त 2025) की रात ‘डिंग डोंग डिचिंग’ प्रैंक खेलते समय 11 साल के बच्चे को गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, बच्चा अपने दोस्तों के साथ घर-घर की घंटी बजाकर भागने की शरारत कर रहा था। तभी घर के अंदर मौजूद शख्स ने गोली चला दी। बच्चे को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रविवार (31 अगस्त 2025) को उसने दम तोड़ दिया।
ह्यूस्टन पुलिस विभाग ने बताया कि यह घटना शहर के पूर्वी इलाके में रात 11 बजे से ठीक पहले हुई। मृतक बच्चा अपने कई दोस्तों के साथ पड़ोस में गया और एक घर की घंटी बजाई। पुलिस के मुताबिक, ‘डिंग डोंग डिचिंग’ या ‘डोरबेल डिच’ नाम की इस शरारत में कोई व्यक्ति दरवाजे की घंटी बजाकर दरवाजा खुलने से पहले ही भागने की कोशिश करता है। इसी दौरान घर के अंदर मौजूद व्यक्ति बाहर आया और बच्चे पर गोली चला दी।
ह्यूस्टन पुलिस ने स्थानीय मीडिया को बताया कि बच्चे को दो गोलियाँ लगीं। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बच नहीं सका। पुलिस ने कहा कि गोलीबारी के बाद एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है, हालाँकि उसकी पहचान या उस पर लगे आरोपों के बारे में फिलहाल जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
अधिकारियों ने बताया कि जाँच अभी जारी है और जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। अमेरिका में पहले भी इस तरह की घटनाएँ हो चुकी हैं। मई 2023 में वर्जीनिया में एक किशोर की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी,
क्या है ‘डिंग डोंग डिचिंग’ प्रैंक
यह विदेश का फेमस और आम तौर पर कोई हानि न पहुँचाने वाला शरारत से भरा खेल है, जिसे बच्चे और बड़े अक्सर करते हैं। इस प्रैंक में किसी घर या अपार्टमेंट के दरवाजे पर जाकर दरवाजे की घंटी बजाता है (डिंग-डोंग), और फिर तुरंत भागकर छिप जाता है, ताकि घर के लोग दरवाजा खोलें और उसे देख न पाएँ।
लेकिन इस खेल के चक्कर में वर्जीनिया में एक व्यक्ति ने 18 साल के लड़के को गोली मार दी, जो TikTok वीडियो के लिए यह प्रैंक कर रहा था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे TikTok पर एक वक्त पर यह प्रैंक ट्रेंड बन गया था, जब वह अपने दोस्तों के साथ ‘डिंग डोंग’ प्रैंक का वीडियो बना रहा था।
इसी तरह कैलिफ़ोर्निया में 2023 में एक व्यक्ति ने गुस्से में किशोरों की कार को टक्कर मार दी थी, जिसमें तीन बच्चों की मौत हो गई थी। जिससे बच्चे इसे मजे के लिए करने लगे थे। लेकिन यह शरारत अब खतरनाक साबित हो रही है। घर के मालिकों की प्रतिक्रिया कभी-कभी हिंसक हो जाती है, जिससे अनहोनी हो जाती है।
भारतीय डाक सेवा ने अमेरिका के लिए सभी श्रेणियों की डाक सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। इसके तहत पत्र, दस्तावेज, पार्सल और उपहार शामिल हैं। असल में यह फैसला अमेरिका के हाल ही में लागू किए गए नए सीमा शुल्क नियमों में अस्पष्टता के कारण लिया गया है।
अमेरिकी प्रशासन ने 30 जुलाई 2025 को एक कार्यकारी आदेश जारी किया। इसके तहत 29 अगस्त 2025 से $100 (लगभग ₹8,820) से अधिक मूल्य के किसी भी अंतरराष्ट्रीय पार्सल पर सीमा शुल्क लागू किया गया है।
इससे पहले तक अमेरिका में $800 (लगभग ₹70,569) तक के सामान पर कोई शुल्क नहीं लगता था। इसे ‘डि मिनिमिस छूट’ कहा जाता था। यह छूट अब पूरी तरह से समाप्त कर दी गई है।
भारत समेत कई देशों के लिए परेशानी ये है कि अमेरिका के सीमा शुल्क लागू करने के इस नियम में अमेरिकी कस्टम्स और बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) की ओर से यह साफ नहीं किया गया है कि शुल्क कैसे वसूला जाएगा, किस एजेंसी के माध्यम से यह प्रक्रिया चलेगी? इसी के चलते भारत समेत 25 अन्य देशों ने भी अमेरिका की डाक सेवाओं पर रोक लगा दी है।
नियम की अस्पष्टता के कारण एयरलाइंस ने अमेरिका के लिए डाक सामग्री ले जाने से इनकार कर दिया है। चूंकि भारत पोस्ट मुख्य रूप से इन्हीं एयरलाइंस के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय डाक भेजता है, इसलिए उनके पास कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बची है। इसी वजह से भारत पोस्ट को अमेरिका के लिए सभी डाक सेवाओं को रोकना पड़ा।
भारत की ओर से यह निलंबन विशेष रूप से उन लोगों को प्रभावित कर सकता है जो अमेरिका में अपने परिवारजनों को उपहार या जरूरी सामान भेजते हैं।
कई लोग त्योहारों या विशेष अवसरों पर उपहार भेजते हैं। इनमें छात्र, प्रवासी भारतीय और छोटे व्यापारी मुख्य तौर पर शामिल हैं। यह निर्णय उनके लिए असुविधाजनक साबित हो सकता है।
निलंबन के साथ भारत पोस्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन ग्राहकों ने पहले से बुकिंग की है लेकिन उनका सामान भेजा नहीं जा सका है, वे पोस्टेज शुल्क का रिफंडले सकते हैं। हालाँकि अब जब तक अमेरिका की ओर से नियमों की पूरी स्पष्टता नहीं आती, तब तक इस सेवा के बंद रहने के ही आसार हैं।
इन देशों ने लगाया बैन
अमेरिका में 1930 के दशक में ‘डि मिनिमिस छूट’ लागू किया गया था। इसका उद्देश्य था कि छोटे मूल्य के आयातित सामानों पर सीमा शुल्क न लगाया जाए ताकि व्यापार सरल और बेरोक-टोक बना रहे। इससे सीमा शुल्क अधिकारियों को ऐसे मामूली शुल्क वसूलने में समय और संसाधन की बचत करना भी एक मकसद था।
2016 में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस सीमा को $200 से बढ़कार $800 कर दिया था। इसके बाद अब जुलाई 2025 में अमेरिकी राषट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस छूट को पूरी तरह से खत्म कर दिया है।
भारत के साथ साथ जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, बेल्जियम, मेक्सिको, स्पेन, यूनाईटेड किंगडम, इटली, नीदरलैंड्स, पुर्तगाल, स्वीडन, नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, स्विट्जरलैंड, जापान, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, कनाडा, आयरलैंड, ऑस्ट्रिया, पोलैंड, चेक रिपब्लिक, साउथ कोरिया, ताइवान और न्यूजीलैंड आदि देश शामिल हैं।
नए नियमों में क्या हैं मुख्य बातें
डि मिनिमस छूट को खत्म करने के साथ साथ इस नियम में कई बदलाव किए गए हैं। 29 अगस्त 2025 से लागू हुए नए नियमों के अनुसार, यदि किसी पार्सल का मूल्य $100 से अधिक है, तो उस पर सीमा शुल्क लगाया जाएगा। यह नियम उपहारों, व्यक्तिगत सामानों और व्यापारिक वस्तुओं सभी पर लागू होता है।
अमेरिका ने अलग-अलग देशों पर अलग-अलग टैरिफ दरें लागू की हैं। 15% तक टैरिफ वाले देशों के पार्सल पर $80 अतिरिक्त शुल्क, 16%- 25% टैरिफ वाले देशों पर $160 शुल्क, 25% से अधिक टैरिफ वाले देशों पर $200 तक का शुल्क जैसी दरें तय की गई हैं।
उदाहरण के लिए, भारत पर अमेरिका ने 25% से अधिक टैरिफ लगाया है, जिससे भारत से भेजे गए $30 (लगभग ₹2500) के पार्सल पर ₹17,000 तक का शुल्क लग सकता है।
किन लोगों पर पड़ेगा इसका असर
डाक निलंबन का असर कई वर्गों पर पड़ेगा, खासकर उन लोगों पर जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छोटे पैमाने पर व्यापार या व्यक्तिगत वस्तुओं का आदान-प्रदान करते हैं। यह डाक निलंबन केवल एक लॉजिस्टिक मुद्दा नहीं है बल्कि वैश्विक व्यापार, व्यक्तिगत संबंधों और कस्टमर सर्विस पर भी असर डालेगा।
इसका असर छोटे व्यापारी और ई-कॉमर्स विक्रेताओं पर सबसे ज्यादा पड़ने वाला है। जो विक्रेता कम मूल्य के उत्पाद अमेरिका भेजते थे, वे अब डि मिनिमिस छूट न होने के चलते और डाक निलंबन के कारण भारी शुल्क और जटिल कस्टम प्रक्रियाओं का सामना करेंगे।
पहले जहाँ $800 तक के सामान पर कोई शुल्क नहीं लगता था, अब हर पार्सल पर टैरिफ लागू होगा। इससे उनकी लागत बढ़ेगी, प्रतिस्पर्धा में पिछड़ने का खतरा रहेगा और अमेरिका में ग्राहकों तक पहुँचना कठिन हो जाएगा। छोटे व्यवसायों के लिए यह एक बड़ा झटका है, क्योंकि उनकी मार्जिन पहले ही सीमित होती है।
इसके अलावा प्रवासी भारतीय और छात्र भी प्रभावित होंगे। अमेरिका में रहने वाले भारतीय प्रवासी और छात्र अक्सर अपने परिवार से जरूरी सामान, जैसे घरेलू खाद्य पदार्थ, कपड़े, किताबें या उपहार मँगवाते हैं।
डाक निलंबन के चलते न सिर्फ इन वस्तुओं की डिलीवरी में देरी होगी बल्कि उन्हें अब अतिरिक्त शुल्क भी देना पड़ेगा। त्योहारों या खास मौकों पर भेजे गए उपहार भी समय पर नहीं पहुँच पाएँगे। छात्रों के लिए यह विशेष रूप से कठिन होगा, क्योंकि वे सीमित बजट में रहते हैं।
इन नए नियमों की जद में केवल भारतीय ही नहीं पर साथ ही अमेरिकी उपभोक्ता भी आ रहे हैं। अमेरिकी नागरिक पहले अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से सस्ते दामों पर सामान मँगवा सकते थे, लेकिन अब वही सामान महँगे दामों पर मिलेगा।
इससे उनकी खरीदारी पर असर पड़ेगा और उन्हें स्थानीय विकल्पों की ओर मुड़ना पड़ सकता है, जो अक्सर अधिक महँगे होते हैं। कुल मिलाकर उपभोक्ता की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और विकल्प सीमित हो जाएँगे।
अब भारत समेत प्रतिबंध लगाने वाले सभी देशों के डाक विभागों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जब तक अमेरिका अपने नए नियमों की प्रक्रिया और शुल्क वसूली की व्यवस्था को साफ तौर पर सामने नहीं लाता तब तक कोई भी देश डाक सेवाएँ बहाल करने के पक्ष में नहीं होगा। अब देखना होगा कि ट्रंप इसे लेकर अपने रुख में बदलाव करते हैं या फिर इसके नतीजे को लेकर बेफिक्र रहेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के तियानजिन में शंगाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन को संबोधित किया। संबोधन में पीएम ने कहा कि आतंकवाद दुनिया के लिए खतरा है। इस दौरान पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र भी किया और हमले को आतंकवाद का ‘सबसे बुरा रूप’ बताया। यह बातें पीएम मोदी ने पाकिस्तान की पीएम शहबाज शरीफ की मौजूदगी में कहीं।
पीएम मोदी ने कहा, “पहलगाम में आतंकी हमला न केवल भारत पर हमला था बल्कि मानवता में विश्वास करने वाले सभी देशों के लिए एक चुनौती थी। यह एक बड़ा सवाल उठाता है- क्या कोई देश जो आतंकवाद का खुलेआम समर्थन करता है, हमें स्वीकार करना चाहिए?”
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “हमें स्पष्ट कहना होगा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कोई दोहरा रवैया नहीं चलेगा।” इस दौरान पीएम ने आतंकवाद के लिए फंडिंग को सबसे बड़ी चिंता बताते हुए SCO समूह से जुड़े सभी देशों से आतंकवाद पर जीरो टोलरेंस नीति अपनाने का भी आग्रह किया।
आतंकवाद पर सभी देशों को आगाह करते हुए पीएम ने कहा, “आतंकवाद और उग्रवाद मानवता के लिए एक साझा चुनौती है। जब तक ये खतरे हैं, कोई भी देश या समाज सुरक्षित महसूस नहीं कर सकता।” पीएम ने जोर देकर कहा कि सुरक्षा हर देश का अधिकार है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “भारत ने अल-कायदा जैसे आतंकवादी संगठनों के खिलाफ लड़ाई में आगे बढ़कर काम किया है और हम आतंकवाद के लिए किसी भी तरह के फंडिंग का विरोध करते हैं।”
पहलगाम आतंकी हमले पर आगे बोलते हुए पीएम ने कहा, “पहलगाम में आतंकवाद का बहुत ही बुरा रूप देखा। मैं उन सभी मित्र देशों का धन्यवाद करता हूँ जो हमारे साथ खड़े रहे।” पीएम ने आगे कहा, “हमने अपने बच्चों को खोया है और कई बच्चे अनाथ हो गए हैं। भारत पिछले चार दशकों से आतंकवाद की समस्या का सामना कर रहा है।”
प्रधानमंत्री मोदी ने SCO समिट से अलग नेपाल, मालदीव, मिस्र, बेलारूस, ताजिकिस्तान, कजाकिस्तान, वियतनाम, म्यांमार, लाओस, तुर्कमेनिस्तान और आर्मेनिया के राष्ट्राध्यक्षों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की। इस दौरान व्यापार से लेकर सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।
रविवार (31 अगस्त 2025) को तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के राष्ट्राध्यक्षों के आधिकारिक स्वागत समारोह में पीएम मोदी पहुँचे, तो चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी पत्नी ने पूरे जोश ने उनका स्वागत किया।
चीनी राष्ट्रपति ने शिखर सम्मेलन में आए सभी राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों का भी आधिकारिक रूप से स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी ने भव्य रात्रिभोज से पहले विश्व नेताओं से मुलाकात की। शी जिनपिंग के साथ स्वागत समारोह के बाद सभी नेताओं की पारंपरिक सामूहिक तस्वीर ली गई।
इसके बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम स्थल पर कई राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों से बातचीत की। उन्होंने सबसे पहले नेपाली प्रधानमंत्री केपी ओली से मुलाकात की। उन्होंने एक्स पर एक तस्वीर पोस्ट करते हुए कहा, “नेपाल के साथ भारत के संबंध गहरे और बेहद खास हैं।”
Interacted with President Muizzu of Maldives on the sidelines of the SCO Summit in Tianjin. India’s developmental cooperation with Maldives is greatly beneficial for our people.@MMuizzupic.twitter.com/DyQJH77Snc
इसके बाद उन्होंने मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू से मुलाकात की। करीब एक महीने पहले पीएम मोदी ने मालदीव का दौरा किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया, “तियानजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू से बातचीत की। मालदीव के साथ भारत का विकासात्मक सहयोग दोनों देशों के लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है।”
Met PM Mostafa Madbouly of Egypt at the SCO Summit. Fondly recalled my Egypt visit a few years ago. India-Egypt friendship is scaling newer heights of progress! pic.twitter.com/SvPSY7llZ8
प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ शिखर सम्मेलन में मिस्र के प्रधानमंत्री मुस्तफा मदबौली से भी मुलाकात की। बातचीत के दौरान उन्होंने कुछ साल पहले की अपनी मिस्र यात्रा को याद किया। उन्होंने कहा कि भारत-मिस्र मित्रता प्रगति की नई ऊँचाइयों को छू रही है।
Glad to have met President Alexander Lukashenko of Belarus. We both are very optimistic about the beneficial opportunities ahead as far as our nations are concerned. pic.twitter.com/GWd2k5Xs33
इसके बाद, उन्होंने बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको से मुलाकात की। मोदी ने एक्स पर लिखा, “जहाँ तक हमारे देशों का सवाल है, हम दोनों ही भविष्य में मिलने वाले अवसरों को लेकर बेहद आशान्वित हैं।” गौरतलब है कि यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में बेलारूस रूस का एक अहम सहयोगी रहा है।
Always a pleasure to interact with Mr. Emomali Rahmon, the President of Tajikistan. India’s trade and cultural linkages are increasing and this is a wonderful sign. pic.twitter.com/9J5oRm8HXN
प्रधानमंत्री मोदी ने ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमान से भी बात की। उन्होंने कहा कि मध्य एशियाई देश ताजिकिस्तान के साथ भारत के व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध बढ़ रहे हैं।
Productive exchange of views with President Tokayev of Kazakhstan. Our nations are working closely in many key sectors, including energy, security, healthcare and pharma.@TokayevKZpic.twitter.com/l74Wyhem6X
मध्य एशिया के देश, कजाकिस्तान के राष्ट्रपति तोकायेव से भी प्रधानमंत्री मोदी ने मुलाकात की। उन्होंने एक्स पर ट्वीट किया, “हमारे देश ऊर्जा, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा और फार्मा सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं।”
Very productive conversation with PM Phạm Minh Chính of Vietnam. India is very keen to further deepen ties with Vietnam in defence, trade, green energy and more. pic.twitter.com/EYzpOnG8FE
SCO शिखर सम्मेलन में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वियतनाम के प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चिन के साथ संक्षिप्त चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत रक्षा, व्यापार, हरित ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में वियतनाम के साथ संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए उत्सुक है।
Senior General Min Aung Hlaing and I held talks in Tianjin. Myanmar is a vital pillar of India’s Act East and Neighbourhood First Policies. We both agreed that there is immense scope to boost ties in areas like trade, connectivity, energy, rare earth mining and security. pic.twitter.com/Sxs32TsiTK
म्यांमार के कार्यवाहक राष्ट्रपति, वरिष्ठ जनरल मिन आंग ह्लाइंग से भी पीएम मोदी ने मुलाकात की। प्रधानमंत्री मोदी ने ? पर एक पोस्ट में कहा, “म्यांमार भारत की एक्ट ईस्ट और नेबरहुड फर्स्ट नीतियों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। हम दोनों इस बात पर सहमत हुए कि व्यापार, संपर्क, ऊर्जा, रेयर मिनरल्स और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में संबंधों को बढ़ावा देने की अपार संभावनाएँ हैं।”
Happy to have met President of Lao PDR, Mr. Thongloun Sisoulith on the sidelines of the Tianjin SCO Summit. Closer friendship between our nations is greatly beneficial, especially ties in trade as well as culture. pic.twitter.com/08s0FxlQLp
इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण पूर्व एशियाई देश लाओ पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक के प्रधानमंत्री थोंगलाउन सिसोउलिथ से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि “हमारे देशों के बीच घनिष्ठ मित्रता, विशेष रूप से व्यापार और संस्कृति के क्षेत्र में, अत्यंत लाभकारी है।”
Exchanged perspectives on diverse issues with Mr. Serdar Berdimuhamedow, President of Turkmenistan during our conversation in Tianjin earlier this evening. pic.twitter.com/HzB4yYPpqS
प्रधानमंत्री मोदी ने तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति सरदार बर्दीमुहामेदोव से भी बातचीत की। उन्होंने अलग-अलग मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।
Very good interaction with Prime Minister of Armenia, Mr. Nikol Pashinyan. India and Armenia share warm and growing ties, rooted in friendship and mutual cooperation.@NikolPashinyanpic.twitter.com/fiK1q3kLOe
अर्मेनिया के राष्ट्रपति निकोल पाशिनयान से मुलाकात और वार्ता को प्रधानमंत्री मोदी ने एक ‘बहुत अच्छी बातचीत’ कहा। उन्होंने ट्वीट किया, “भारत और आर्मेनिया के बीच मधुर और प्रगाढ़ संबंध हैं, जो मित्रता और आपसी सहयोग पर आधारित हैं।” अमेरिका की मध्यस्थता से आर्मेनिया और अज़रबैजान के बीच हुए समझौते के बाद, यह भारत और अर्मेनियाई राष्ट्रपति के बीच पहली सीधी बातचीत थी।
Met President Shavkat Mirziyoyev of Uzbekistan. India and Uzbekistan are bound by a dynamic partnership that continues to expand across culture, economy and people-to-people ties. pic.twitter.com/iysjTCJv2K
प्रधानमंत्री मोदी ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव से मुलाकात के बारे में भी एक्स पर पोस्ट किया। उन्होंने कहा, “भारत और उज्बेकिस्तान एक अहम साझेदार हैं। ये संस्कृति, अर्थव्यवस्था और लोगों के बीच संबंधों के माध्यम से निरंतर आगे बढ़ रहा है।”
A very productive conversation with Kyrgyz President Sadyr Japarov in Tianjin. Our nations share a robust partnership and we will keep working together to add more vigour to our developmental cooperation. pic.twitter.com/e9v3vsSOgY
इसके अलावा, उन्होंने किर्गिज़स्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव से भी बातचीत की। इसके बारे में एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा, “तिआनजिन में किर्गिज राष्ट्रपति सदिर जापारोव के साथ बहुत ही अहम बातचीत हुई। हमारे देशों के बीच एक मजबूत साझेदारी है और हम अपने विकास के इस सहयोग को और मज़बूत बनाने के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।” दरअसल पीएम मोदी ने व्यक्तिगत रूप से सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात कर आपसी रिश्तों को मजबूत करने पर जोर दिया है। इस मुलाकात से व्यापार, रक्षा, संपर्क, सांस्कृतिक संबंध समेत कई क्षेत्रों में दूरगामी परिणाम सामने आएँगे।
राजस्थान की बीजेपी सरकार धर्म परिवर्तन के खिलाफ विधानसभा में विधेयक पेश करने जा रही है। इस राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक 2025 में जबरन धर्मांतरण करवाने पर उम्रकैद की सजा के प्रावधान हैं। वहीं विधेयक में ‘घर वापसी’ को धर्मांतरण नहीं माना गया है।
कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि यह विधेयक प्रलोभन, बल, कपट या अन्य अनुचित तरीकों से कराए जाने वाले धर्मान्तरण को रोकने के लिए लाया गया है। रविवार (31 अगस्त 2025) को राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा ने कैबिनेट की बैठक में विधेयक को कुछ संशोधनों के साथ मंजूरी भी दे दी है। अब सरकार सोमवार (01 अगस्त 2025) से शुरू हो रहे राजस्थान विधानसभा सत्र में विधेयक को पेश कर सकती है।
मंत्री ने कहा कि राज्य में अवैध रूप से धर्मान्तरण को रोकने के संबंध में कोई विशिष्ट कानून नहीं थे इसीलिए राजस्थान विधिविरूद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक-2025 को पिछले सत्र (फरवरी 2025) में विधानसभा में लाया गया था। अब कठोर प्रावधान करते हुए विधेयक का नया प्रारूप विधानसभा के आगामी सत्र (सितंबर 2025) में पेश किया जाएगा।
जबरन धर्म परिवर्तन पर उम्रकैद की सजा
विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक 2025 के तहत जबरन धर्मांतरण करवाने पर उम्रकैद की सजा होगी। साथ ही 50 लाख रुपए का जुर्माना भी भरना होगा। इसके अलावा भी धर्मांतरण को अपराध की अलग-अलग श्रेणी में सजा का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
इसमें अवैध धर्मांतरण करवाते पकड़े जाने पर 7 से 14 साल तक की सजा और 5 लाख रुपए तक का जुर्माना देना होगा। नाबालिग, दिव्यांग, महिला, एससी, एसटी वर्ग पर धर्मांतरण का दबाव बनाने पर 10 से 20 साल की सजा और 10 लाख रुपए का जुर्माना होगा।
वहीं, सामूहिक धर्मांतरण करवाने पर 20 साल से उम्रकैद तक की सजा हो सकती है और साथ में 25 लाख रुपए तक का जुर्माना भी देना होगा। धर्मांतरण करवाने के लिए फंडिंग के सबूत मिलने पर 10 से 20 साल की सजा और 20 लाख रुपए जुर्माना भरना होगा।
लव जिहाद, जबरन निकाह और नाबालिग लड़कियों संग अवैध व्यापार जैसे अपराधों में पकड़े जाने पर 20 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा सुनाई जा सकती है। इसके साथ 30 लाख रुपए का जुर्माना भी देना होगा।
संपत्ति को जब्त या ध्वस्तीकरण की भी होगी कार्रवाई
सरकार ने विधेयक में यह भी प्रावधान रखा है कि अवैध धर्मांतरण में लिप्त संस्था का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा। साथ ही संस्थान को मिलने वाली सरकारी अनुदान भी बंद कर दी जाएगी। जिस संपत्ति पर अवैध धर्मांतरण हुआ है, उसकी जाँच कर जब्ती और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
विधेयक में प्रस्तावित कानून में सबूत का भार उस व्यक्ति पर होगा, जिसने धर्मांतरण करवाया है। फरवरी 2025 में पेश किए गए विधेयक में अधिकतम 10 वर्ष की सजा का प्रावधान था, जिसे अब संशोधित कर आजीवन कारावास तक बढ़ा दिया गया है।
राजस्थान में धर्मांतरण के लिए अपनाए जा रहे हथकंडे
राजस्थान में अलग-अलग हथकंडे अपनाकर धर्म परिवर्तन के जाल में हिंदुओं को फँसाया जा रहा है। परंतु अब तक इसके विरुद्ध कानून लागू ना होने पर ये अपराधी खुले में धर्मांतरण का खेल रच रहे हैं। राजस्थान के झुंझुनू, हनुमानगढ़, श्रीगंगागनर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, भरतपुर समेत इलाकों में गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
यहाँ धर्मांतरण गैंग हिंदू ग्रामीण महिलाओं को प्रार्थना सभाओं में बुलाते हैं। यहाँ महिलाओं का ब्रेनवॉश किया जाता है। उनके माथे से बिंदी, सिंदूर और गले से मंगलसूत्र हटा दिए जाते हैं। इसकी जगह उनके गले में क्रॉस लटका देते हैं। इन महिलाओं को घर के बाकी सदस्यों का धर्मांतरण करवाने के लिए 8 लाख रुपए तक ऑफर किए जाते हैं।
इस लालच में फँसकर गरीब लोग धर्मांतरण कर रहे हैं। ऐसे लोगों को ईसाई बनाने के नाम पर पैसे, घर, कपड़े और राशन देने का लालच भी दिया जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांसवाड़ा के जनजातीय समुदाय के इलाके में ईसाइयों ने लोगों को लालच दिया कि अगर वे 10 लोगों को ईसाई बनवाएँगे तो उन्हें हर महीने वेतन, राशन और कपड़े दिए जाएँगे। इसके अलावा ईसाई बनने पर 1 लाख रुपए भी दिए जाएँगे।
राजस्थान सरकार इन्हीं अपराध और अपराधियों पर नकेल कसने के लिए विधेयक को नए संशोधनों के साथ आगामी विधानसभा सत्र में पेश करने जा रही है।
कश्मीर घाटी जिसे प्राचीन काल से ऋषियों की भूमि कहा जाता है, कभी ज्ञान, अध्यात्म और विविध संस्कृतियों का गढ़ रही है। यहाँ आदिकाल से कई प्राचीन मंदिर और तीर्थ रहे हैं, जिनका उल्लेख नीलमत पुराण सहित विभिन्न ग्रंथों में मिलता है।
माना जाता है कि महान ऋषि कश्यप से ही कश्मीर का नाम पड़ा। लेकिन बीते दशकों में आतंकवाद और पलायन के चलते इस भूमि की सांस्कृतिक पहचान पर गहरी चोट पहुँची। इसी घाटी के बडगाम जिले में अब एक बार फिर नई शुरुआत हुई है। 35 साल बाद यहाँ का शारदा भवानी मंदिर फिर से खोला जा चुका है।
कश्मीरी पंडित समुदाय ने तीन दशक से भी अधिक समय बाद घाटी में अपनी आस्था और जड़ों की ओर वापसी का एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। रविवार (31 अगस्त 2025) को बडगाम जिले के इचकूट गाँव में स्थित शारदा भवानी मंदिर को फिर से खोला गया।
समारोह के दौरान विधिवत पूजा और प्राण प्रतिष्ठा की गई। यह वही मंदिर है जो 1990 में आतंकवाद शुरू होने के बाद बंद हो गया था और कश्मीरी पंडितों के पलायन के बाद खंडहर में बदल गया था।
लंबे समय बाद जब पंडित परिवार यहाँ लौटे तो स्थानीय लोगों ने न केवल उनका स्वागत किया बल्कि आयोजन को सफल बनाने में भी सक्रिय भूमिका निभाई। शारदा स्थापना समुदाय के अध्यक्ष सुनील कुमार भट ने कहा कि यह मंदिर पाकिस्तान स्थित शारदा माता मंदिर की एक शाखा माना जा सकता है।
उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों की इच्छा भी लंबे समय से यही थी कि मंदिर को फिर से खोला जाए। भट ने कहा, “जब हम यहाँ पहली बार आए थे तब केवल चार लोग थे, लेकिन आज पूरा गाँव हमारे साथ खड़ा है। यह स्थानीय लोगों के सहयोग का सबसे बड़ा प्रमाण है।”
समारोह में शामिल एक बुज़ुर्ग ने कहा, “ये लोग इसी गाँव के रहने वाले हैं। हालात बिगड़ने से पहले हम सब साथ रहते और खाते-पीते थे। हमें खुशी है कि वे वापस आए और प्रार्थना की। कश्मीर उनकी जन्मभूमि है और हम उनका स्वागत करते हैं।”
मंदिर के पुनः उद्घाटन के साथ ही पुनर्निर्माण की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। कुछ कश्मीरी पंडित, जो प्रधानमंत्री पैकेज के तहत घाटी में काम कर रहे हैं, मंदिर के जीर्णोद्धार और नए निर्माण के लिए जिला प्रशासन से संपर्क में हैं। उन्होंने राना मंदिर में भी एक शिवलिंग स्थापित किया है, जो सफाई और मरम्मत के दौरान मिला था।
बिहार में वोटर लिस्ट को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राज्य में 67,826 डुप्लिकेट वोटर हैं, जिससे मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। हालाँकि, बिहार के मुख्य चुनाव अधिकारी ने इस रिपोर्ट को गलत और भ्रामक बताया है। उन्होंने साफ किया है कि अभी जारी की गई लिस्ट केवल एक ड्राफ्ट है, फाइनल नहीं। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट में अगर कोई गलती है तो उसे बाद में सुधारा जाएगा। इस रिपोर्ट को प्रकाशित करने वाले समूह पर विदेशी फंडिंग से जुड़े होने का भी आरोप लगा है।
रिपोर्ट में क्या दावें किए गए
दरअसल, कुछ पत्रकारों की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 15 विधानसभा क्षेत्रों में 67,826 ऐसे नाम मिले हैं जो दो बार दर्ज हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ये नाम एक जैसे दस्तावेजों के साथ रजिस्टर्ड हैं। इससे मतदाता सूची की सच्चाई पर सवाल उठने लगे हैं।
रिपोर्ट का दावा है कि यह जानकारी डेटा माइनिंग से निकाली गई है। इसमें कहा गया है कि 2025 के वोटर लिस्ट सुधार अभियान के दौरान जारी की गई लिस्ट में कई नाम दोहराए गए हैं। इस पर अब चुनाव आयोग ने जवाब दिया है।
बिहार के मुख्य चुनाव अधिकारी ने कहा कि ये आरोप गलत और भ्रम फैलाने वाले हैं। उन्होंने कहा कि जो लिस्ट अभी जारी हुई है, वो आखिरी नहीं है। यह सिर्फ जाँच के लिए है। अभी भी कोई गलती हो तो लोग उस पर दावा या आपत्ति दर्ज कर सकते हैं।
बिहार के मुख्य चुनाव अधिकारी ने सोशल मीडिया X (पहले ट्विटर) पर एक बयान दिया। उन्होंने कहा कि जो रिपोर्ट आई है, उसमें सच्चाई पूरी नहीं बताई गई है। रिपोर्ट में उस प्रक्रिया की अनदेखी की गई है जिससे वोटर लिस्ट को ठीक किया जाता है। उन्होंने कहा कि जो लिस्ट अभी जारी हुई है, वह सिर्फ़ ड्राफ्ट है। इसे बाद में सही करके ही फाइनल लिस्ट बनाई जाती है।
FactCheck
Rebuttal on Allegations of Duplicate Voters in Bihar’s Draft Rolls (SIR 2025) on the report of the reporters collective
1. The SIR is an ongoing statutory process carried out under the Representation of the People Act, 1950 and the Registration of Electors Rules,… https://t.co/0FxixtmCJM
— Chief Electoral Officer, Bihar (@CEOBihar) August 31, 2025
ये केवल ड्राफ्ट, फाइनल लिस्ट नहीं
मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) ने एक रिपोर्ट पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट को लेकर जो बातें कही जा रही हैं, वो अधूरी हैं। SIR अभी खत्म नहीं हुआ है। जो लिस्ट अभी जारी हुई है, वह सिर्फ़ ड्राफ्ट है। ये फाइनल नहीं है।
सीईओ ने साफ किया कि यह लिस्ट लोगों की जाँच के लिए जारी की गई है। इसमें लोग अपना नाम देख सकते हैं। अगर कोई गलती है, तो वे दावा या आपत्ति कर सकते हैं। राजनीतिक दल और बाकी लोग भी सुझाव दे सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर इस लिस्ट में कोई नाम दो बार है तो उसे अभी गलती या गड़बड़ी नहीं माना जा सकता। नियमों के मुताबिक लोगों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाता है। उसके बाद ही लिस्ट को ठीक कर फाइनल किया जाएगा।
पत्रकारों की रिपोर्ट को बताया गलत, कहा- डुप्लीकेट मतदाता नहीं
चुनाव अधिकारी (CEO) ने रिपोर्ट में बताए गए 67,826 नकली वोटरों के दावे को गलत बताया। उन्होंने कहा कि यह दावा कुछ समान जानकारियों पर ही बना है। जैसे नाम, उम्र और रिश्तेदारों का नाम। इन बातों से यह साबित नहीं होता कि वोटर फर्जी हैं।
CEO ने कहा कि बिहार के गाँवों में बहुत से लोगों के नाम और उम्र एक जैसे होते हैं। माता या पिता के नाम भी मिलते-जुलते होते हैं। यह आम बात है। ऐसा होना कोई गड़बड़ी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि सिर्फ नाम और उम्र एक जैसे होने से दोहराव साबित नहीं होता।
उन्होंने कहा कि ऐसी समान जानकारी वाली एंट्रीज को जाँच के दौरान पहचाना जाता है। अगर कोई गलती होती है, तो उसे ठीक भी किया जाता है। किसी को भी अगर शक है, तो वह चुनाव अधिकारी के पास आपत्ति दर्ज करा सकता है। यह अधिकार हर वोटर और पार्टी को है।
चुनाव आयोग ने बताया, कैसे हटते हैं डुप्लीकेट नाम
CEO ने यह साफ किया कि डुप्लिकेट वोटरों की जाँच नहीं होती, यह बात पूरी तरह गलत है। उन्होंने बताया कि भारत का चुनाव आयोग इसके लिए एक खास तकनीक इस्तेमाल करता है। ECI का एक ईआरओनेट 2.0 सॉफ्टवेयर है। यह सॉफ्टवेयर एक जैसे नाम, उम्र या रिश्तेदारों के नाम वाले वोटरों की पहचान करता है। इन्हें ‘समान प्रविष्टियाँ’ या DSE कहा जाता है।
लेकिन यह सिस्टम ऐसे नामों को सीधे हटाता नहीं है। पहले इनकी पूरी जाँच की जाती है। बूथ लेवल अफसर और चुनाव अधिकारी खुद जाकर देखते हैं कि यह डुप्लिकेट है या नहीं। यह तरीका इसलिए अपनाया जाता है ताकि गलती से किसी असली वोटर का नाम न हट जाए। यानी मशीन की बजाय इंसान ही आखिरी फैसला करते हैं।
वाल्मीकिनगर की बात करते हुए CEO ने कहा कि वहाँ जिन 5,000 वोटरों को नकली बताया गया है, उस पर सबूत के साथ रिपोर्ट होनी चाहिए। बिना जानकारी और बिना जाँच के कोई भी संख्या बता देना सही नहीं है।
डुप्लीकेट मतदाताओं के उदाहरण
रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि त्रिवेणीगंज की ‘अंजलि कुमारी’ और लौकहा के ‘अंकित कुमार’ जैसे नामों के दोहराव मिले हैं। इसे दिखाकर कहा गया कि वोटर लिस्ट में गड़बड़ी है।
इस पर बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामले इक्का-दुक्का हैं। ये गलतियाँ लिखते समय हो सकती हैं। कभी-कभी लोग एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं तो दो बार नाम जुड़ जाता है। कई बार घर पर गलत जानकारी दे दी जाती है।
उन्होंने यह भी बताया कि सुधार का काम पहले से ही शुरू हो गया है। अंजलि कुमारी और अंकित कुमार दोनों के लिए फॉर्म-8 भर दिया गया है। इसका मतलब है कि गलतियों को सुधारने की प्रक्रिया पहले से जारी है।
पत्रकारों के आरोप पर चुनाव आयोग का जवाब
कुछ पत्रकारों ने आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट के डेटा को जानबूझकर लॉक कर दिया गया है। उनका कहना था कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि मशीन से जाँच न हो सके। इस पर बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह आरोप गलत है।
मतदाता सूची को एक तय फॉर्मेट में दिया जाता है। ऐसा कानून के मुताबिक किया जाता है ताकि डेटा की सुरक्षा बनी रहे और उसका गलत इस्तेमाल न हो। उन्होंने साफ किया कि डेटा को लॉक करना एक सुरक्षा तरीका है। इसका मकसद दोहराव छुपाना नहीं है।
सीईओ ने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का भी जिक्र किया। कमलनाथ बनाम भारत निर्वाचन आयोग (2018) केस में अदालत ने भी इन सुरक्षा तरीकों को सही माना था।
अनुमान पर आपत्ति
कुछ लोगों ने कहा था कि 15 इलाकों में पाए गए दोहराव पूरे राज्य में हो सकते हैं। इस पर बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सुझाव का कड़ा विरोध किया। सीईओ ने इसे गलत बताया। उनका कहना था कि इतने बड़े स्तर पर डुप्लिकेट होने का विचार बस कल्पना है।
उन्होंने कहा कि कानून के हिसाब से ऐसे आरोपों को सही साबित करने के लिए ठोस सबूत होना जरूरी है। सिर्फ आँकड़ों या अनुमान से ऐसे बड़े आरोप नहीं लगाए जा सकते। सीईओ ने बताया कि अदालतें भी बार-बार कह चुकी हैं कि बिना प्रमाण के आरोप स्वीकार नहीं किए जाएँगे।
कानूनी उपाय मौजूद
बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि कानून में पहले से ही डुप्लिकेट नाम हटाने के लिए कड़े नियम हैं। उन्होंने बताया कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 22 के तहत, अगर कोई पक्का सबूत मिलता है, तो निर्वाचन अधिकारी डुप्लिकेट नाम हटाने का अधिकार रखते हैं। इसलिए दोहराव से निपटने का एक मजबूत कानून पहले से मौजूद है।
उन्होंने ट्विटर पर भी बताया कि अगर किसी मतदाता या बूथ के एजेंट को कोई डुप्लिकेट नाम दिखे तो वे मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 13 के अनुसार आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। इस तरह हर कोई शिकायत कर सकता है और मामले की जाँच हो सकती है।
खंडन और निष्कर्ष
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने खंडन खत्म करते हुए कहा कि ड्राफ्ट रोल में कुछ डुप्लिकेट नाम होना सामान्य है। यह प्रक्रिया को गलत या अमान्य नहीं करता। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि रिपोर्ट का यह कहना कि SIR से धोखाधड़ी बढ़ेगी या डुप्लिकेट वोटिंग होगी, गलत है। यह सिर्फ अटकलें हैं और समय से पहले बनी राय है। मतदाता सूची के नियम और कानून ऐसा होने नहीं देते।
विदेशी फंडिंग और संदिग्ध रिपोर्ट
रिपोर्टर्स कलेक्टिव के पीछे जो संगठन काम कर रहे हैं, उन्हें समझना बहुत जरूरी है। इसका संचालन एक NGO करता है, जिसका नाम ‘नेशनल फाउंडेशन फॉर इंडिया‘ है। यह संस्था सरकार से एफसीआरए लाइसेंस लेकर विदेशी चंदा ले सकती है।
इस फाउंडेशन को पैसा देने वालों में कुछ बड़े और विदेशी नाम शामिल हैं। जैसे– फोर्ड फाउंडेशन, जॉर्ज सोरोस का ओपन सोसाइटी फाउंडेशन, ओमिडयार नेटवर्क, और रॉकफेलर फाउंडेशन। ये सभी संगठन ऐसे नेटवर्क से जुड़े माने जाते हैं जिन्हें अमेरिका की छुपी हुई ताकत या ‘डीप स्टेट’ कहा जाता है।
इन संगठनों पर पहले भी आरोप लगे हैं कि इन्होंने भारत के खिलाफ कई अभियान चलाए हैं। रिपोर्टर्स कलेक्टिव को भी इन्हीं ताकतों का हिस्सा माना जा रहा है। दिसंबर 2024 में इस ग्रुप ने जो रिपोर्टें छापीं, वे कई मामलों में झूठी और भ्रामक पाई गईं। कहा जा रहा है कि ये रिपोर्टें जॉर्ज सोरोस के एजेंडे के मुताबिक थीं। इनका मकसद लोगों की सोच को गलत दिशा में मोड़ना और देश के अंदर गलतफहमी फैलाना था।
बिहार में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के दौरान करीब 65 लाख नामों के हटाए जाने पर कॉन्ग्रेस ने दावा किया कि उसने चुनाव आयोग को 89 लाख शिकायतें दी हैं। लेकिन चुनाव आयोग ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि एक भी फॉर्म आधिकारिक रूप से जमा नहीं कराया गया है।
इसके अलावा चुनाव आयोग ने कहा कि राहुल गाँधी ने ना तो कोई शपथ पत्र दिया और ना ही अपने आरोपों का प्रमाण। ऐसे में बार-बार चुनाव आयोग पर आरोप लगाकर खुद की ही फजीहत कराने में अब कॉन्ग्रेस को काफी मजा आ रहा है।
फर्जी आँकड़ों का दावा, बिना प्रक्रिया अपनाए
कॉन्ग्रेस ने जब यह कहा कि उसने 89 लाख शिकायतें दर्ज करवाई हैं, तो यह सुनकर सभी चौंक गए। पार्टी के नेता पवन खेड़ा और राजेश राम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस दावे को पूरे आत्मविश्वास से रखा। उन्होंने कहा कि पार्टी के पास शिकायतों की रसीदें भी मौजूद हैं और यह सब चुनाव आयोग को सौंपा गया है।
चुनाव आयोग अपने 'सोर्स' के माध्यम से खबरें प्लांट करवाता रहता है कि किसी राजनीतिक पार्टी से कोई शिकायत नहीं आ रही है।
सच्चाई ये है कि कांग्रेस पार्टी ने 89 लाख शिकायतें चुनाव आयोग को दी हैं।
जब हमारे BLAs शिकायत लेकर जाते हैं, तो उनसे शिकायतें नहीं ली जाती। उनसे कहा जाता है… pic.twitter.com/l2xVuu0c99
पवन खेड़ा ने अपने बयान में कहा कि 20,000 से अधिक बूथों पर 100 से ज्यादा नाम काटे गए। कई बूथों पर महिलाओं के नाम 70 फीसदी तक हटाए गए। पवन खेड़ा ने इसे एक ‘पैटर्न‘ बताया। पवन खेड़ा ने यह भी कहा कि BLOs के जरिए आवेदन इकट्ठा कर DEO को सौंपे गए हैं।
पूर्वी चंपारण और सुपौल DM ने दावों को झूठलाया
लेकिन अगले ही दिन पूर्वी चंपारण के DM ने खुद कॉन्ग्रेस के पोस्ट पर जवाब देते हुए बताया कि बिहार में 1 अगस्त 2025 को जो ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित हुई, उस पर कॉन्ग्रेस की ओर से न तो फॉर्म 6 (नाम जोड़ने के लिए) और न ही फॉर्म 7 (नाम हटाने पर आपत्ति) में कोई आवेदन जमा हुआ है।
इसके अलावा कॉन्ग्रेस के इसी पोस्ट पर सुपौल के DM ने भी जवाब में कहा कि अब तक बिहार में कॉन्ग्रेस पार्टी के किसी भी जिला अध्यक्ष द्वारा अधिकृत किसी बूथ लेवल एजेंट (BLA) ने 1 अगस्त 2025 को जारी की गई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में किसी भी नाम को लेकर ना तो नाम जोड़ने का फॉर्म (फॉर्म 6) भरा है और न ही किसी नाम पर आपत्ति (फॉर्म 7) दर्ज कराई है और ये सब तय फॉर्मेट में होना चाहिए था।
ऐसे में सवाल उठना लाज़मी है कि 89 लाख शिकायतों का यह आँकड़ा आखिर आया कहाँ से? और अगर वाकई शिकायतें थीं तो वो किसको दी गईं, और कैसे दी गईं?
राहुल गाँधी का आरोप भी खोखला, आयोग को नहीं मिला कोई शपथ पत्र
कॉन्ग्रेस के इस दावे की अगुवाई राहुल गाँधी खुद कर रहे थे। राहुल गाँधी ने दावा किया कि बड़े पैमाने पर विपक्षी मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और यह लोकतंत्र की हत्या है। लेकिन जब चुनाव आयोग ने उनसे शपथ पत्र और प्रमाण माँगा, तो राहुल गाँधी चुप हो गए।
निर्वाचन आयोग ने खुद कहा है कि राहुल गाँधी की तरफ से कोई शपथ पत्र नहीं दिया गया। ना तो कोई आधिकारिक दस्तावेज, ना डेटा और न ही किसी तरह का ठोस प्रमाण। यानी जो भी बातें राहुल मंच से बोलते रहे, वो सिर्फ भाषण तक सीमित रहीं। कानूनन ना तो कोई कार्रवाई की गई और न ही किसी स्तर पर कॉन्ग्रेस ने प्रक्रिया का पालन किया।
शिकायतें तो छोड़िए, अनुमति भी नहीं माँगी राहुल ने
एक और फजीहत तब हुई जब यह खबर चली कि राहुल गाँधी को पटना के गाँधी मैदान में रुकने की अनुमति नहीं दी गई। कॉन्ग्रेस ने इसे लेकर भी प्रशासन पर सवाल उठाए। लेकिन जब पटना जिला प्रशासन ने स्पष्टीकरण जारी किया, तो कॉन्ग्रेस का यह आरोप भी झूठा निकला।
प्रशासन ने साफ किया कि न राहुल गाँधी और न ही कॉन्ग्रेस की ओर से रात रुकने की कोई अनुमति माँगी गई थी। जो दो अनुमतियाँ माँगी गई थीं, वो सभा और रैली के लिए थी, जो दे दी गई थी।