Homeरिपोर्टराष्ट्रीय सुरक्षाबाहरी हो या NGO अब असम में आसानी से नहीं खरीद पाएँगे जमीन, हिमंता...

बाहरी हो या NGO अब असम में आसानी से नहीं खरीद पाएँगे जमीन, हिमंता सरकार ने बनाई नई SOP: अलग धर्म के लोग भी नहीं कर पाएँगे लैंड ट्रांसफर डील

यह SOP सिर्फ व्यक्तिगत सौदों तक सीमित नहीं है। असम के बाहर से आने वाले NGOs जो जमीन खरीदकर स्कूल, कॉलेज या अन्य संस्थान बनाना चाहते हैं, उन्हें भी इस SOP के तहत जाँच से गुजरना होगा।

असम में जनसांख्यिकीय बदलाव और संभावित सुरक्षा खतरों को लेकर चिंताओं को देखते हुए असम कैबिनेट ने एक नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को मंजूरी दी है। यह SOP अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच भूमि हस्तांतरण की जाँच के लिए बनाई गई है। इसके अलावा असम के बाहर से आने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) द्वारा जमीन खरीदने की प्रक्रिया को भी इस SOP के तहत जाँचा जाएगा।

बुधवार (27 अगस्त 2025) को कैबिनेट बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस नीति के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि असम जैसे संवेदनशील राज्य में जमीन के लेन-देन को बहुत सावधानी से संभालना जरूरी है, ताकि कोई धोखाधड़ी न हो और समाज में शांति बनी रहे।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अगर जमीन का ट्रांसफर (खरीद-बिक्री, दान) एक ही धर्म के लोगों के बीच हो रहा है, तो इस SOP का कोई असर नहीं होगा और ऐसे सौदे बिना किसी अतिरिक्त रुकावट के हो सकेंगे। लेकिन अगर यह ट्रांसफर अलग-अलग धर्मों के बीच हो, जैसे हिंदू और मुस्लिम या इसके उलट, तो इसके लिए कई स्तरों पर जाँच होगी।

हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, “जब कोई प्रस्ताव सब-डिविजनल ऑफिसर के पास आएगा, तो अगर यह एक ही धर्म के लोगों के बीच का सौदा है, तो कोई दिक्कत नहीं। लेकिन अगर यह इंटर-रिलीजन सौदा है, जैसे हिंदू और मुस्लिम के बीच तो पहले यह जाँचा जाएगा कि जमीन का मालिक असली है या नहीं, जमीन असली है या नहीं। इसके बाद प्रस्ताव डिप्टी कमिश्नर के पास जाएगा।”

मुख्यमंत्री ने आगे बताया, “डिप्टी कमिश्नर इस प्रस्ताव को राजस्व विभाग को भेजेगा। वहाँ से यह असम पुलिस की स्पेशल ब्रांच को जाएगा। स्पेशल ब्रांच यह देखेगी कि कहीं यह सौदा जबरदस्ती, धोखाधड़ी या गैरकानूनी तो नहीं है। साथ ही खरीदार के पैसे का स्रोत भी जाँचा जाएगा कि वह काला धन तो नहीं है।”

इसके अलावा स्थानीय लोगों की राय भी ली जाएगी कि वे इस सौदे से सहमत हैं या नहीं, खासकर जब जमीन किसी अलग धर्म के व्यक्ति को बेची जा रही हो। मुख्यमंत्री ने कहा, “स्पेशल ब्रांच यह भी देखेगी कि इस सौदे से स्थानीय सामाजिक ढाँचे पर कोई बुरा असर तो नहीं पड़ रहा या इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को कोई खतरा तो नहीं है। उनकी रिपोर्ट डिप्टी कमिश्नर को वापस भेजी जाएगी, जो अंतिम फैसला लेगा कि सौदा मंजूर करना है या नहीं।”

स्पेशल ब्रांच की रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी, जो डिप्टी कमिश्नर को अंतिम फैसला लेने के लिए कहेगी। सरमा ने जोर देकर कहा कि यह सख्त जाँच जरूरी है ताकि धोखाधड़ी या गैरकानूनी काम, पैसे के स्रोत, स्थानीय सामाजिक ढाँचे पर प्रभाव और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों को ठीक से देखा जा सके। उन्होंने कहा, “SOP के तहत, असम पुलिस की स्पेशल ब्रांच यह जाँचेगी कि क्या भूमि हस्तांतरण में कोई धोखाधड़ी या गैरकानूनी काम है, खरीदार के पैसे का स्रोत क्या है, जमीन के आसपास के सामाजिक ढाँचे पर क्या असर होगा और राष्ट्रीय सुरक्षा का कोई मुद्दा तो नहीं है।”

हिमंता ने यह भी बताया कि पिछले छह महीनों से रुके हुए कई भूमि हस्तांतरण के मामलों का अब इस नए ढाँचे के तहत जल्दी निपटारा किया जाएगा।

यह SOP सिर्फ व्यक्तिगत सौदों तक सीमित नहीं है। असम के बाहर से आने वाले NGOs जो जमीन खरीदकर स्कूल, कॉलेज या अन्य संस्थान बनाना चाहते हैं, उन्हें भी इस SOP के तहत जाँच से गुजरना होगा।

सरमा ने हाल के रुझानों पर चिंता जताई, जहाँ कुछ NGOs ने असम में जमीन खरीदी है। उन्होंने कहा, “हाल ही में हमने देखा कि केरल से कुछ NGOs ने यहाँ जमीन खरीदी। उन्होंने कुछ आयोजन किए, जो भविष्य में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। अगर कोई बाहरी NGO शिक्षण संस्थान, मेडिकल कॉलेज या नर्सिंग कॉलेज के लिए जमीन खरीदना चाहता है, तो उसे भी इस SOP की प्रक्रिया से गुजरना होगा।”

असम के मुख्यमंत्री ने खास तौर पर बराक वैली, श्रीभूमि और बरपेटा जैसे इलाकों का जिक्र किया, जहाँ बाहरी NGOs, जो अक्सर किसी खास धर्म से जुड़े होते हैं, स्कूल या अन्य सुविधाओं के नाम पर बड़ी मात्रा में जमीन खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा, “वे कहते हैं कि वे स्कूल बनाना चाहते हैं, लेकिन उनका असली मकसद कुछ और हो सकता है। पुलिस इन सभी पहलुओं की जाँच करेगी।”

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह SOP असम में रजिस्टर्ड NGOs पर लागू नहीं होगी। यह सिर्फ बाहरी NGOs पर लागू होगी, ताकि किसी भी अनुचित प्रभाव या छिपे मकसद को रोका जा सके। उन्होंने दोहराया, “असम जैसे संवेदनशील राज्य में भूमि हस्तांतरण के मुद्दे को बहुत सावधानी से संभालना जरूरी है।” इस नीति का मकसद राज्य के जनसांख्यिकीय संतुलन को बनाए रखना और राष्ट्रीय सुरक्षा को किसी भी खतरे से बचाना है।

पीएम मोदी 13-14 सितंबर को करेंगे असम का दौरा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिमंता बिस्वा सरमा ने यह भी घोषणा की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की असम यात्रा, जो पहले 8 सितंबर को होने वाली थी, अब उप-राष्ट्रपति चुनाव के कारण टल गई है। चुनाव आयोग ने 9 सितंबर को उप-राष्ट्रपति चुनाव की तारीख तय की है, इसलिए अब पीएम मोदी 13 सितंबर को असम आएँगे और 14 सितंबर को वापस जाएँगे। इस वजह से 8 सितंबर को होने वाले सभी कार्यक्रम अब 13 और 14 सितंबर को होंगे।

पीएम मोदी डॉ. भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी समारोह का उद्घाटन करेंगे और कई बड़े बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

दिलजीत दोसांझ की ‘सतलुज’ पर फैलाया जा रहा ‘अर्धसत्य’: इसे कानूनी वजहों से ZEE5 ने हटाया, सरकार ने नहीं लगाया कोई बैन; जानिए पूरा...

सतलुज पर सरकार ने बैन नहीं लगाया बल्कि फिल्म पहले IT नियम, 2021 के नियम 9 के तहत ZEE5 पर रिलीज हुई और बाद में उसी व्यवस्था के तहत उसे हटा भी दिया गया।

बाबू जगजीवन राम: वो दलित नेता जिन्हें कॉन्ग्रेस और लेफ्ट से कभी उनका हक नहीं मिला, क्योंकि वे हिंदू धर्म से नहीं करते थे...

डॉ. आंबेडकर ने जाति व्यवस्था से तंग आकर बौद्ध धर्म अपनाया, तो जगजीवन राम जीवनभर हिंदू समाज के भीतर रहकर ही कुरीतियों को सुधारने के पक्षधर रहे।
- विज्ञापन -