दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार ने एक बार फिर से दीपावली-छठ पर पटाखों पर प्रतिबंध लगा दिया है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने ये ऐलान किया। पिछले साल भी हिन्दुओं के विरोध के बावजूद दिल्ली की ‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ सरकार ने दीपावली-छठ पर पटाखों को प्रतिबंधित कर दिया था। दीपावली के दिन रात में गश्त करते हुए दिल्ली पुलिस पटाखे उड़ाने वालों को गिरफ्तार भी करती है।
मंत्री गोपाल राय ने ऐलान किया, “दिल्ली में लोगों को प्रदूषण के खतरे से बचाने के लिए पिछले साल की तरह ही इस बार भी सभी तरह के पटाखों के उत्पादन, भंडारण, बिक्री और उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जा रहा है, ताकि लोगों की जिंदगी बचाई जा सके। इस बार दिल्ली में पटाखों की ऑनलाइन बिक्री/डिलीवरी पर भी प्रतिबंध रहेगा। यह प्रतिबंध 1 जनवरी 2023 तक लागू रहेगा। प्रतिबंध को कड़ाई से लागू करने को लेकर दिल्ली पुलिस, DPCC और राजस्व विभाग के साथ मिलकर कार्य योजना बनाई जाएगी।”
कुछ लोगों ने दिल्ली सरकार को याद दिलाया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण का कारण मुख्यतः खेतों में पराली का जलाया जाना है, लेकिन उसका न कोई समाधान निकाला जाता है और न ही कोई कार्रवाई की जाती है। वहीं कुछ लोगों ने पूछा कि अब इसके विज्ञापनों पर कितना खर्च किया जाएगा? किसी ने सवाल किया कि दिल्ली में ईद-बकरीद पर पशुओं की हत्या या फिर अवैध बूचड़खानों पर बैन क्यों नहीं लगाया जाता है?
इस बार दिल्ली में पटाखों की ऑनलाइन बिक्री / डिलीवरी पर भी प्रतिबंध रहेगा। यह प्रतिबंध 1 जनवरी 2023 तक लागू रहेगा।
प्रतिबंध को कड़ाई से लागू करने को लेकर दिल्ली पुलिस, DPCC और राजस्व विभाग के साथ मिलकर कार्य योजना बनाई जाएगी।
पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने दिल्ली सरकार के इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि कोर्ट में साबित हो गया है कि पटाखे प्रदूषण का स्रोत नहीं हैं, और ये चीज वैज्ञानिक रिपोर्ट्स में भी आ चुकी है, लेकिन जब केजरीवाल सरकार दिल्ली में प्रदूषण रोकने में फेल हो गयी तो सिर्फ पटाखों को बैन करके दिखावा क्यों? उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता ये बैन नहीं मानेगी। लोगों ने दिल्ली सरकार के फैसले को मुस्लिम तुष्टिकरण से जोड़ कर देखना शुरू कर दिया है।
कर्नाटक के शिवमोगा (Shivamogga, Karnataka) में बजरंग दल के कार्यकर्ता हर्षा (Bajarang Dal Activist Harsha) की हत्या के मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने 750 पेज की चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में साफ कहा है कि हर्षा की हत्या ‘नफरत’ के कारण की गई थी।
शिवमोगा के रहने वाले 26 वर्षीय हर्षा की 20 फरवरी 2022 की रात को भारती नगर इलाके में चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील इस इलाके में धारा 144 लगानी पड़ी थी। इसके साथ ही राज्य के अलग-अलग इलाकों में भारी प्रदर्शन हुए थे। इसके बाद हत्या की जाँच NIA को सौंप दी गई थी।
जिस समय हर्षा की हत्या हुई थी, उस समय राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में बुर्का को लेकर विवाद चल रहा था। कहा जा रहा था कि हर्षा लंबे समय से कट्टरपंथियों के निशाने पर थे। जब हिजाब विवाद भड़का तो उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाला था। इस पोस्ट के बाद उनकी हत्या को अंजाम दिया गया।
पहले अंदाजा लगाया जा रहा था कि हिजाब पर हर्षा का किया गया पोस्ट ही इस हत्या का का कारण है, लेकिन जैसे जैसे कट्टरपंथियों के पोस्ट सामने आते गए उससे स्थिति साफ होती गई। इन पोस्ट को देखने से पता चला कि हिजाब का विरोध एक कारण था, लेकिन हर्षा की हत्या की साजिश उससे पहले से ही रची जा रही थी।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई ने इस वारदात को साजिश और योजनाबद्ध तरीके से की गई हत्या बताया था। उन्होंने कहा था, “हर्षा, जिसे हर्षा हिंदू के नाम से भी जाना जाता था। वो एक कार्यकर्ता था। वो हर तरह के धार्मिक कार्यक्रमों में सबसे आगे रहता था। उसने हाल ही में हिंदुओं के कई अहम मामलों को उठाया था, जिससे कई लोग काफी चिढ़े हुए थे। कई स्थानीय लोग उसके खिलाफ थे। ये हत्या बहुत ही भयानक थी। ये हत्या से बढ़कर है। ये हार्डकोर दुश्मनी है, जिसे एक छोटे से लड़के पर दिखाया गया है। उसकी हत्या पीछे का सबसे बड़ा कारण यह था कि वो एक हिंदू एक्टिविस्ट था और बहुत ही मुखर तरीके से अपनी आवाज को उठाता था।”
हर्षा की हत्या में रियाज, नदीम, मुजाहिद, कासिफ, आसिफ, अफान (रिहान) सहित कई कट्टरपंथियों को गिरफ्तार किया गया है। शिवमोगा पुलिस ने कहा था कि आरोपित कार में आए और हर्षा का पीछा किया, फिर उसे मारा। इन सभी के ऊपर UAPA की धाराएँ लगाई गई थीं।
पुलिस के मुताबिक पीड़ित के ऊपर साल 2016-17 में मजहबी भावनाएँ आहत करने के आरोप में केस दर्ज हुआ था। हर्षा की हत्या करने में रियाज, मुजाहिद, कासिफ, आसिफ का हाथ था जबकि इसकी साजिश रचने में नदीम और अफान शामिल थे। पुलिस के अनुसार, इस पूरे हत्याकांड में कासिफ मुख्य आरोपित है।
दिल्ली पुलिस ने देश के सबसे बड़े कार चोर को गिरफ्तार किया है। इस चोर का नाम है- अनिल चौहान। उसे मंगलवार (6 सितंबर 2022) को गिरफ्तार किया गया। कभी ऑटो चलाने वाले चौहान ने 5000 से ज्यादा कारों की चोरी की है। इससे हुई कमाई से वह आलीशान जिंदगी जीता था।
दिल्ली पुलिस ने करीब तीन महीने की मशक्कत के बाद उस पकड़ा है। 52 साल के अनिल ने चोरी की कमाई से दिल्ली, मुंबई और नॉर्थ ईस्ट में कई प्रॉपर्टी खरीद रखी है। उसकी तीन पत्नी और सात बच्चे हैं। 10 करोड़ रुपए के विला में वह रहता था। रिपोर्ट के अनुसार कई बार वह कार चोरी करने के लिए फ्लाइट से सफर करता था।
पुलिस के अनुसार उसने 27 साल के भीतर देश के अलग-अलग हिस्सों से 5000 से ज्यादा कार चुराए हैं। उसके पास से पिस्टल और कारतूस भी बरामद हुए हैं। वह 25-30 सहयोगियों की मदद से गंगटोक, असम के कुछ हिस्सों, नेपाल और अन्य स्थानों पर चोरी की कारों को आसानी से बेच रहा था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक कभी अनिल दिल्ली के खानपुर इलाके में ऑटो रिक्शा चलाता था। 1995 के बाद उसने कार चोरी शुरू की। 27 साल में उसने सबसे ज्यादा मारुति 800 मॉडल चुराया। चोरी के दौरान उसने कई टैक्सी ड्राइवरों की हत्या भी की। इसके बाद वह असम जाकर रहने लगा। कार चोरी के पैसों से उसने दिल्ली, मुंबई और पूर्वोत्तर राज्यों में प्रॉपर्टी खरीदी। वह असम में सरकारी कॉन्ट्रैक्टर बन गया था और वहाँ के स्थानीय नेताओं से उसकी अच्छी जान-पहचान हो गई थी। अनिल को पुलिस ने पहले भी गिरफ्तार किया था। 2015 में एक बार वह कॉन्ग्रेस MLA के साथ गिरफ्तार किया गया था। तब उसे 5 साल की जेल हुई थी। उसके खिलाफ 181 केस दर्ज हैं।
एक अधिकारी ने बताया, “इंस्पेक्टर संदीप गोदारा के नेतृत्व में सेन्ट्रल दिल्ली में हाई-एंड एसयूवी और सेडान (High End SUVs and Sedans ) की चोरी की जाँच कर रही टीम को चौहान पर शक हुआ। उसकी तलाश में टीमों को असम, सिक्किम, नेपाल और एनसीआर भेजा गया। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह महँगी कारों में घूमता है और खुद को एक बिजनेसमैन या फिर सरकारी अधिकारी बताता था।” 23 अगस्त को पुलिस को सूचना मिली कि चौहान दिल्ली में है और अपने साथियों के साथ चोरी करने की योजना बना रहा है। अधिकारी ने आगे बताया, “हमने उसे देशबंधु गुप्ता रोड से एक बाइक और पिस्तौल के साथ गिरफ्तार किया। बाद में उसके पास से 5 पिस्तौल बरामद की गई।”
ब्रिटेन के लिसेस्टर शहर से हिंदुओं पर हमले की लगातार वीडियोज आ रही है। इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ इकट्ठा करके हिंदुओं के घरों को निशाना बना रहे हैं। उनके हाथों में हथियार और मुँह पर हिंदुओं के लिए गालियाँ हैं। सड़कों से पुलिस नदारद है। कोई उन्हें नहीं रोक रहा। वहीं सोशल मीडिया पर वामपंथी हिंदुओं को ही हमले का दोषी बता रहे हैं।
हिंदुओं पर हमले की वीडियोज
सामने आई एक वीडियो में दिख रहा है कि कैसे कट्टरपंथी भारी तादाद में सड़कों पर जुटे हुए है। हिंदू लोग अपने घरों से उनकी वीडियो बना रहे हैं और यह देख हैरान हो रहे हैं कि आखिर क्यों पुलिस इनको नहीं रोक रही, ये कैसे हाथों में हथियार लेकर खुलेआम घूम पा रहे हैं।
वीडियो में हिंदुओं से मारपीट, उनके घरों में तोड़फोड़, घर के बाहर लगे भगवा झंडे को उखाड़ना साफ तौर पर दिख रहा है। वीडियो बनाने वाले आपस में कह रहे हैं कि ये उपद्रव करने वाले मुस्लिम हैं। इनके हाथों में चाकू जैसे धारदार हथियार हैं।
कुछ अन्य विदेशी भी इन वीडियोज को लेकर यही बता रहे हैं कि इंग्लैंड में कैसे हिंदुओं को मुस्लिम भीड़ अपना शिकार बना रही है और मेनस्ट्रीम मीडिया ने इसे कवर करने की जगह अपनी आँख मूँदी हुई है।
Mobs of Muslims trawling the streets of Leicester, England this week on the hunt for Hindus, mainstream media turning a blind eye as not to show how multiculturalism really works. pic.twitter.com/RLL69WGSZW
यूजर्स इसे एक सुनियोजित हमला बता रहे हैं। उनका कहना है, “ये हमला सुनियोजित था। ये अचानक नहीं हुआ। वो लोग हथियार के साथ और पूरी तैयारी के साथ आए थे। नस्लीय टिप्पणी कर रहे थे, पुलिस के सामने लोगों को धमका रहे थे और मार रहे थे।”
This was a well organised planned attack on Hindus in Leicester by Muslims. This doesn’t just happen! They came with weapons and prepared. Shouting racial slurs, attacking/threatening people and generally being lawless in presence of police!#Leicester#HindusUnderAttackpic.twitter.com/htaeXwTWie
हिंदुओं से घृणा करने वाला पत्रकार हमले का जिम्मेदार
बता दें कि हिंदुओं के विरुद्ध ब्रिटेन में नजर आ रही घृणा फैलाने के पीछे विदेशी मीडिया द इंडिपेंडेंट के पत्रकार सनी हुंडल का नाम सामने आ रहा है। सनी ने अपने ट्विटर पर 30 अगस्त को एक वीडियो शेयर करके हिंदुत्व को बीच में घसीटा था। वीडियो में कुछ लोग पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगा रहे थे। ऐसे में सनी ने लिखा, “लिसेस्टर में हिंदुत्व चरमपंथी समूहों ने सड़कों पर उपद्रव किया। हैरानी की बात है।”
In Leicester extremist Hindutva groups go on the rampage in Leicester. Shocking stuff https://t.co/WUuCWHZSaq
अब इसी ट्वीट को हिंदुओं पर होते हमलों के पीछे वजह माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि सनी हुंडल अक्सर भारतीयों को और हिंदुओं को निशाना बनाते हैं। उनकी वजह से पाकिस्तानी मुस्लिम हिंदुओं को और उनके घर को निशाना बना रहे हैं।
वायरल ट्वीट में एक पाकिस्तानी ने बताई ‘सच्चाई’ , मुस्लिमों बोले- ये ब्रिटेन की घटना नहीं
इन दावों के साथ-साथ एक ट्वीट भी शेयर हो रहा है जिसे लेकर दावा है कि ये एक पाकिस्तानी ने किया है। इसमें लिखा है कि लोग इस उपद्रव के पीछे मान रहे हैं कि हिंदुओं ने एक निर्दोष मुस्लिम को पीट दिया। लेकिन हकीकत में वो पाकिस्तानी निर्दोष नहीं था। जब पाकिस्तान मैच हारा और भारतीय खुशी मनाने लगे तो वो शख्स उनके पास गया और ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद, पाकिस्तान जिंदाबाद’ कहने लगा। उसने उन लोगों को इशारे में गाली भी दी। वहाँ और भी पाकिस्तानी थे मगर किसी भारतीय ने किसी को कुछ नहीं कहा।
मालूम हो कि यह ट्वीट लिसेस्टर की घटना के संदर्भ में शेयर किया जा रहा है। हालाँकि कुछ मुस्लिम इस पोस्ट को फेक बता रहे हैं। पोस्ट की सच्चाई क्या है ये तो पुष्टि नहीं हो पाई है लेकिन हिंदुओं पर हमले कट्टरपंथियों के हमले लगातार हो रहे हैं और इसके प्रमाण भी सोशल मीडया पर मौजूद हैं।
कन्याकुमारी भारत के दक्षिणतम छोर पर स्थित है। यहीं से 7 सितंबर 2022 को राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) अपनी भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) शुरू कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के करीब दो दशक पुराने राजनीतिक जीवन का यह एक बड़ा चैप्टर है। वे राजनीतिक तौर पर श्रम नहीं करने के लिए कुख्यात हैं। ऐन मौकों पर पार्टी को बेसहारा छोड़ विदेश निकल लेने के लिए चर्चा में रहते हैं। कॉन्ग्रेस को उसके सबसे बुरे दौर में लाकर खड़ा कर देने के जिम्मेदार हैं।
इस तरह की भारी-भरकम उपलब्धियों वाला शख्स जब 150 दिन लंबी राजनीतिक प्लानिंग करे तो उसकी प्रशंसा उदार मन से होनी चाहिए। वैसे भी वाजपेयी कहकर गए हैं- कोई छोटे मन से बड़ा नहीं होता। करीब 3500 किलोमीटर की इस यात्रा में राहुल गाँधी कथित आर्थिक असमानता, सामाजिक भेदभाव और सत्ता के केंद्रीकरण से लड़ेंगे।
2024 के आम चुनावों से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने खुद को खड़ा करने के प्रयासों के तहत प्रायोजित इस यात्रा का नाम ‘भारत जोड़ो’ रखना किसी भी तरह से तार्किक नहीं लगता है। ऐसा लगता है कि अपनी राजनीति को चमकाने के लिए कॉन्ग्रेस ने भारत को जानबूझकर घसीटा है, क्योंकि देश के अस्तित्व के सामने ऐसा कोई खतरा नहीं दिखता कि उसे जोड़ने की बात की जाए। बावजूद इसके राहुल गाँधी कन्याकुमारी से नई लकीर खींच सकते हैं। वे उन ताकतों पर वार कर सकते हैं जो भारत को बाँटने की साजिशों में जुटे हैं। मसलन, ईसाई मिशनरी।
जिस कन्याकुमारी में ब्रह्मा-विष्णु-महेश लिंग स्वरूप में मौजूद हैं और जहाँ के मंदिर के स्तंभों से भी संगीत की ध्वनि निकलती है, वहाँ हिंदुओं का हक ‘क्रिप्टो क्रिश्चियन (Crypto Christian)’ खा रहे हैं। यह खुद मद्रास हाई कोर्ट ने माना है। इसी साल जनवरी में एक पादरी को राहत देने से इनकार करते हुए हाई कोर्ट ने कन्याकुमारी के जनसांख्यिकी बदलाव की तरफ ध्यान खींचा था।
हाई कोर्ट ने कहा था, “धार्मिक तौर पर कन्याकुमारी की जनसांख्यिकी में बदलाव देखा गया है। 1980 के बाद से जिले में हिंदू बहुसंख्यक नहीं रहे। हालाँकि 2011 की जनगणना बताती है कि 48.5 फीसदी आबादी के साथ हिंदू सबसे बड़े धार्मिक समूह हैं। पर यह जमीनी हकीकत से अलग हो सकती है। इस पर गौर किया जाना चाहिए कि बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति के लोग धर्मांतरण कर ईसाई बन चुके हैं, लेकिन आरक्षण का लाभ पाने के लिए खुद को हिंदू बताते रहते हैं।”
जिस पादरी के मामले को लेकर हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी की थी, अब उसकी भी करतूत जान लीजिए। उसने ‘भारत माता’ को ‘बीमारी’ बताया था। हाई कोर्ट ने भी कहा था कि पादरी का मकसद हिंदुओं को नीचा दिखाना था। कन्याकुमारी में हिंदुओं को लक्षित कर गतिविधियाँ सामान्य है। यहाँ के सरकारी स्कूल में भी यीशु की प्रार्थना के लिए बच्चों को मजबूर किया जाता है। इसी प्रताड़ना से तंग आकर एक हिंदू छात्रा ने इसी साल अप्रैल में अपने ही शिक्षक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इसके मुताबिक छात्रा से कहा जाता था कि ‘भगवदगीता बुरी है। बाइबल में अच्छी चीजें हैं। इसलिए हमें बाइबल पढ़नी चाहिए।’ ये हालिया मामले हैं। कन्याकुमारी की हालत यह है कि ईसाइयों ने उस शिला पर स्मारक बनाने का भी विरोध किया था, जिस पर स्वामी विवेकानंद ने चिंतन किया था।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या राहुल गाँधी कन्याकुमारी से हिंदुओं पर हो रहे इस आक्रमण के खिलाफ कुछ बोलने की भी हिम्मत जुटा पाएँगे? वैसे इसकी उम्मीद कम दिखती है क्योंकि कॉन्ग्रेस की पहचान ही इस्लामी कट्टरपंथियों का तुष्टिकरण और ईसाई मिशनरियों को पोषित करने वाले की रही है। ये उस इकोसिस्टम के महत्वपूर्ण अंग हैं, जिनके कारण कॉन्ग्रेस इतने सालों तक देश की सत्ता पर काबिज रही और आज भी भारत विरोधी वैश्विक दुष्प्रचार में उसके काम आते हैं।
लेकिन राहुल गाँधी को यह समझना होगा कि ईसाई मिशनरियों की साजिशों के खिलाफ लड़ाई में भारत को जोड़ने की बात कहे बिना वे 2024 के पहले परिद्श्य में नहीं उभर सकते। क्योंकि आज का भारत यह जानता है कि उसे जुड़ने की जरूरत केवल इस्लामी कट्टरपंथ और ईसाई मिशनरियों के धर्मांतरण अभियानों के खिलाफ ही है। क्या राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस इस सत्य से साक्षात्कार को तैयार हैं?
खुद को सबसे बड़ा बीफ लवर बताने वाले बॉलीवुड एक्टर रणबीर कपूर और उनकी पत्नी आलिया भट्ट को मंगलवार (6 सितंबर 2022) को महाकाल के दर्शन नहीं मिल पाए। मंदिर के बाहर खड़े हिंदू संगठनों ने काली पट्टी दिखाकर उनका जमकर विरोध किया। लोगों ने कहा कि वह रणबीर जैसे गौ-भक्षक को महाकाल के मंदिर में नहीं जाने देंगे।
बिन महाकाल के दर्शन के लौटे रणबीर-आलिया
बता दें कि ब्रह्मास्त्र फिल्म की रिलीज से पहले रणबीर कपूर और आलिया भट्ट महाकाल मंदिर में आशीर्वाद लेने गए थे। उनके साथ फिल्म डायरेक्टर अयान मुकर्जी भी थे। इस दौरान हिंदू संगठन के कई लोग वहाँ आए और रणबीर की 11 साल पुरानी ‘बीफ’ टिप्पणी पर उनके खिलाफ प्रदर्शन किया। विरोध के दौरान प्रदर्शनकारी वीवीआईपी गेट पर जुटे रहे और जय श्रीराम के नारे लगाए गए।
The 'Beef Guy' Ranbir Kapoor, his arrogant wife Alia Bhatt & the confused 'Brahmastra' director, Ayan Mukherjee were booted out of Ujjain's Mahakal temple by the protesting hindus there. The trio escaped b4 completing their temple run.?#BoycottBramhashtra#CulturalGenocidepic.twitter.com/Wm1rhwenHd
भीड़ को देख रणबीर कपूर और आलिया भट्ट मौके से निकल गए जबकि ब्रह्मास्त्र की टीम के अन्य लोगों ने महाकाल के दर्शन भी किए और पूजा-अर्चना भी की। फिल्म डायरेक्टर अयान मुकर्जी ने भी मंदिर के गर्भगृह में पहुँच प्रार्थना की।
उन्होंने कहा कि उनका मंदिर आने का बहुत मन था और अब उन्हें अच्छा लग रहा है। उन्होंने बताया, “मेरी ख्वाहिश है कि फिल्म बहुत सफल हो। हमने बहुत अच्छी फिल्म बनाई है, लेकिन हमें अभी इस बारे में बात नहीं करनी। बस लोगों को फिल्म अच्छी लगे।”
हिंदू प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने पीटा
इस बीच पुलिसकर्मियों द्वारा बजरंग दल कार्यकर्ताओं को पीटे जाने की वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आई बजरंग दल के नेता अंकित चौबे ने बताया, “हम लोग रणबीर कपूर का विरोध करने आए थे। उसने हमारी गाय माता को लेकर अश्लील बयान दिए हैं। उनके बीफ पर टिप्पणी की है। हम उसका विरोध करने आए थे। लेकिन प्रशासन ने हमारे कार्यकर्ता के साथ मारपीट की। हम प्रशासन की इस कार्रवाई का विरोध करते हैं और इसके खिलाफ आंदोलन करेंगे।”
"We won't allow Ranbir Kapoor and Alia Bhatt into the temple over the liking for beef remark. We'll protest in big manner against local administration and police over the assault on our worker," Bajrang Dal leader Ankit Chaube said. @NewIndianXpress@TheMornStandard@santwana99pic.twitter.com/ohJXZJLru1
बजरंग दल के नेता ने कहा, “रणबीर कपूर-आलिया भट्ट को महाकाल बाबा के मंदिर में नहीं घुसने देंगे। वो मीडिया में कहता है कि बीफ खानी अच्छी चीज है तो ऐसे गौभक्षक को हम महाकाल के मंदिर में नहीं घुसने देंगे। पूरे देश में उसका विरोध होगा। हम यहाँ काले झंडे दिखाने आए थे। हम शांतिप्रिय ढंग से विरोध कर रहे थे, लेकिन प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया जाएगा। अब पहले हम रणबीर-आलिया के विरोध में प्रदर्शन करेंगे और फिर प्रशासन के खिलाफ।”
रणबीर कपूर की बीफ टिप्पणी के कारण विरोध
बता दें कि रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की फिल्म 9 सितंबर 2022 को रिलीज होने जा रही है। इसी कारण वह महाकाल मंदिर आए थे। हालाँकि विरोध के बाद वह उज्जैत के जिला अधिकारी आशीष सिंह के घर रुके। आशीष फिल्म डायरेक्टर अयान के दोस्त बताए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर मंगलवार को उज्जैन में हुई घटना की अधिकतर वीडियो है। इसके अलावा वो वीडियो भी मौजूद है जिसमें रणबीर खुद ‘बिग बीफ गाय’ कह रहे हैं।
भारत के दो राज्यों उत्तर प्रदेश और असम में अवैध मदरसों पर बुलडोजर चलने की खबरें सुर्ख़ियों में हैं, लेकिन देश की राजधानी दिल्ली में इससे बिल्कुल विपरीत माहौल देखने को मिला है। हाल ही में LnDO (Land And Development Office) की जमीन पर खड़े अवैध मदरसे का सच दिखाने जब एक मीडिया की टीम पहुँची तो कैमरामैन और रिपोर्टर को ही मदरसा संचालक व उसके साथियों द्वारा बंधक बना लिया गया।
अवैध बताया जा रहा ये मदरसा दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में स्थित हैं, जिसे ‘मदरसा जामिया अरबिया’ के नाम से जाना जाता है। जब ‘हेडलाइंस इंडिया‘ की एक टीम इस मदरसे की पोल खोलने यहाँ पहुँची, तो शुरू में तो थोड़ी बहसबाजी की गई, लेकिन जब रिपोर्टर सवाल पूछता गया तो उसे और कैमरामैन को बंधक बना लिया गया।
यूपी और असम में हो रही हैं कार्यवाही
उल्लेखनीय है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने आदेश दिया है कि प्रदेश के सभी मदरसों का सर्वे किया जाए और उनकी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी जाए। वहीं यूपी सरकार राज्य की शिक्षा व्यवस्था के कायाकल्प की दिशा में नई कोशिशों में जुटी हुई है। इसको लेकर मदरसों के सर्वे को लेकर सभी जिलों के डीएम को आदेश दिया गया है।
बताया जा रहा है कि इसके लिए 5 अक्टूबर, 2022 तक की समयसीमा भी तय की गई है। उन मदरसों का सर्वे होगा, जो गैर-मान्यता प्राप्त हैं। एक अहम बैठक के बाद उसमें स्पष्ट कर दिया गया कि सर्वे में SDM, BSA (बेसिक शिक्षा अधिकारी) और जिला अल्पसंख्यक अधिकारी मौजूद रहेंगे। ये रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी, जिसे वो आगे सरकार को बढ़ाएँगे। वहीं इसका उद्देश्य मदरसों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर और आधुनिक बनाना है।
गौरतलब है कि यूपी के अलावा असम में भी पिछले कुछ दिनों से मदरसों को लेकर सरकार गंभीर बनी हुई है। हाल ही में राज्य की हिमंता बिस्वा सरमा सरकार ने प्रदेश के तीन मदरसों को ध्वस्त कर दिया था। इन मदरसों का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के केंद्र रूप में होता था। इन मदरसों से जुड़े कई मौलवियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। गोलपारा में चौथे मदरसे को खुद जनता ने ही ध्वस्त कर डाला।
नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की जब से गठबंधन वाली सरकार बिहार में बनी है, तब से उनके मंत्रियों पर अलग-अलग आरोपों की खबरें भी सामने आ रही हैं। इसी क्रम में कानून मंत्री बने कार्तिकेय सिंह को तो अपने मंत्री पद से इस्तीफा तक देना पड़ गया, लेकिन उनके ऊपर चल रहा अपहरण का केस अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है। वहीं कार्तिकेय सिंह इस समय अंडरग्राउंड बताए जा रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पूर्व कानून मंत्री कार्तिकेय सिंह पर अब पटना के एक बिल्डर राजू सिंह के अपहरण (Builder Raju Singh Abduction Case) का आरोप तो था ही, अब उन पर उन्हें जान से मार डालने की धमकी दिलवाने का आरोप भी लगा है। वहीं उन पर ये आरोप किसी ओर ने नहीं, बल्कि बिल्डर राजू सिंह की पत्नी दिव्या सिंह ने लगाए हैं। उन्होंने ने तो इस मामले में पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को एक पत्र भी लिखा है।
क्या बोलीं बिल्डर की पत्नी दिव्या सिंह
‘एबीपी न्यूज’ से से बातचीत करते हुए दिव्या सिंह ने बताया कि 20 अगस्त को कुछ लोग गाड़ियों के साथ पटना की बेउर जेल (जहाँ राजू सिंह बंद हैं) पहुँचे और उनके पति राजू सिंह को बुला कर समझौता करने का दबाव बनाया गया। दिव्या सिंह ने बताया कि उनके घर पर भी बहुत सारे लोग आ रहे हैं।
दिव्या ने आगे कहा कि उनके घर पर खुद को कार्तिकेय सिंह का आदमी बताने वाले लोग आ रहे हैं और कह रहे हैं कि समझौता कर लो, वरना दिक्कत हो जाएगी। दिव्या ने बताया कि इस मामले में उन्होंने SSP को पत्र भी लिखा और उनसे खुद मुलाकात भी की। वहीं उनसे सुरक्षा की माँग भी की, लेकिन अभी तक दिव्या सिंह तथा उनके परिवार को सुरक्षा नहीं दी गई है।
Patna, Bihar | Alok Singh, his (Kartikeya Singh’s) relative,said Raju Singh will be killed if he doesn’t compromise in the case…We are scared,can be killed anytime:Divya Singh, wife of Raju Singh, whose alleged kidnapping led to former Law Minister Kartikeya Singh’s resignation pic.twitter.com/ORV6fBBf8q
दिव्या सिंह बताया कि इसकी शुरुआत वर्ष 2014 से हुई थीं, उनके पति बिल्डर राजू सिंह का अपहरण किया गया और उनको मारने की भी कोशिश की गई। दिव्या ने आरोप लगाया कि कार्तिकेय सिंह का केस जानने के बाद भी, उन पर अपहरण का इतना बड़ा मामला होने के बाद भी, वो चुनाव लड़ते हैं और कानून मंत्री बनते हैं। दिव्या के मुताबिक, जब सरकार में ही आपराधिक किस्म के इंसान मौजूद रहेंगे तो आम जनता कैसे सुरक्षित रहेगी?
जब दिव्या सिंह से यह पूछा गया कि नीतीश कुमार को सुशासन बाबू के नाम से जाना जाता है, कानून के राज का दावा करने की बातें की जाती रहीं, क्या आपको लगता है कि ऐसा कुछ है? इसके जवाब में सिंह ने कहा कि अभी तक उन्हें ऐसा कुछ नहीं लगता, क्योंकि उन्होंने सुरक्षा की माँग की, लेकिन अभी तक उन्हें सुरक्षा नहीं मिली है। दिव्या ने कहा कि अगर कानून मंत्री ही अपराधी हो, तो कैसा सुरक्षा मिलेगी और कैसी सरकार चलेगी।
गौरतलब है कि दिव्या सिंह ने पटना हाई कोर्ट के जज को भेजे गए पत्र में लिखा, “मेरे पति से मिलने आए लोगों और उनके सीसीटीवी फुटेज का ब्यौरा निकाला जाए। मुझे कोर्ट पर पूरा भरोसा है।” दिव्या के अनुसार, कभी भी कुछ भी हो सकता है। उन्होंने बताया, “मेरे बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं, मैं बाहर नहीं जा रही हूँ। मुझे नीतीश जी से बहुत उम्मीदें हैं। मैं उनसे सही लोगों का समर्थन करने और कार्तिकेय सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध करती हूँ।”
उत्तर प्रदेश सरकार ने हाथरस हिंसा की साजिश में गिरफ्तार सिद्दीकी कप्पन (Siddique Kappan Case) की जमानत याचिका का विरोध किया है। इस मामले के जाँच अधिकारी, डिप्टी एसपी, एसटीएफ यूनिट आगरा और यूपी सरकार की तरफ से हलफनामा दाखिल किया गया है। कप्पन एक स्वतंत्र पत्रकार होने का दावा करता है, जबकि हलफनामे में कहा गया है कि कप्पन के राष्ट्रविरोधी एजेंडा रखने वाले पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) जैसे चरमपंथी संगठन से गहरे संबंध रहे हैं।
वो दूसरे आरोपितों के साथ मिलकर देश में आंतक, धार्मिक कलह भड़काने की साजिश में शामिल था। हलफनामे में यूपी सरकार ने कहा है कि जाँच से पता चला है कि कप्पन के पीएफआई और सीएफआई के शीर्ष नेतृत्व, उनके छात्र संगठन से व्यक्तिगत संबंध हैं। वह तुर्की में IHH जैसे संगठनों के माध्यम से CFI और इस्लामिक आतंकवादी संगठन अलकायदा के बीच संपर्क स्थापित करता है।
हलफनामे में कहा गया है, “इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने पिछले महीने कप्पन की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।” हलफनामे में कप्पन की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा गया है कि आरोपित जानता था कि कानून की खामियों का फायदा कैसे उठाया जाता है और अगर उसे रिहा कर दिया गया, तो इस मामले से जुड़े गवाहों का जीवन खतरे में पड़ सकता है। हलफनामे में, उत्तर प्रदेश सरकार ने उन मुद्दों को भी सूचीबद्ध किया है, जिनके बारे में सिद्दीकी कप्पन ने झूठ बोला था और जिन तथ्यों को उसने जमानत के लिए अदालत से छिपाया था।
1. सऊदी अरब में रोजगार
अपनी जमानत याचिका में सिद्दीकी कप्पन ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह 2002-2011 से सऊदी अरब में काम करता था। कप्पन ने आगे कहा कि 2011 में उसने सऊदी अरब में अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया और केरल में बस गया। उसका कहना है कि वह पत्रकारिता के प्रति बहुत जुनूनी और एक सामयिक लेखक था, इसलिए उसने कोझीकोड में ‘Thejas’ समाचार पत्र में बतौर उप-संपादक शामिल होने का विकल्प चुना।
लेकिन, इसमें उसने यह उल्लेख नहीं किया कि उसने सऊदी अरब में लगभग एक दशक तक किसके लिए और किस कंपनी के लिए काम किया। उत्तर प्रदेश सरकार की जाँच में पता चला है कि सिद्दीकी कप्पन करीब 2009 से जेद्दा में गल्फ तेजस डेली में एक रिपोर्टर के रूप में कार्यरत था। आगरा में उसके लैपटॉप के एफएसएल से पुलिस को “Sidhique Kappan Resume.docx” नाम से एक फाइल मिली, जिसमें उसकी नौकरी के बारे में लिखा हुआ है।
सिद्दीकी कप्पन का रिज्यूमे
हलफनामे में कहा गया है, “Thejas चरमपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का मलयालम भाषा का मुखपत्र है, जिसके केरल में छह संस्करण हैं और सऊदी अरब, कतर और बहरीन में अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो है। न्यूज पेपर की कवरेज का उद्देश्य धार्मिक कलह पैदा करना था। 2018 में इसे भारत में बंद करने के लिए कहा गया था।”
यूपी सरकार के हलफनामे में आगे कहा गया है, मई 2011 में जब अमेरिका ने इस्लामिक आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को मारा था, उस वक्त जिस मैगजीन के लिए कप्पन ने काम किया था, उसके संस्करण को कुरान की आयतों और उस पर शहीद लिख कर कवर पेज पर ओसामा की तस्वीर के साथ प्रकाशित किया गया था।
2011 में तेजस के कवर पेज पर ओसामा बिन लादेन
कवर पेज पर कुरान की आयत का अनुवाद है, “यह मत सोचो कि वे मर चुके हैं, अल्लाह की राह में क़त्ल करने वाले लोग, वे अल्लाह के साथ हैं उन्हें वहाँ उपहार दिए जाते हैं।” हलफनामे में यह भी कहा गया है कि जब यह मैगजीन प्रकाशित हुई थी, तब सिद्दीकी कप्पन इसमें कार्यरत था और एक दशक से अधिक समय तक वह इस मैगजीन के साथ जुड़ा रहा, जो एक आतंकवादी विचारधारा का समर्थन करती है।
2. कप्पन का झूठ- मेरे पास Tejhas का ID कार्ड नहीं
अपनी जमानत याचिका में सिद्दीकी कप्पन ने दावा किया कि जब उसे हाथरस जाते समय गिरफ्तार किया गया था, तो उसके पास तेजस का आईडी कार्ड नहीं था, बल्कि उसके पास केवल प्रेस क्लब ऑफ इंडिया का कार्ड था। हालाँकि, उत्तर प्रदेश के हलफनामे में कप्पन के इस झूठ को भी उजागर किया गया है। हलफनामे में बताया गया है कि जब कप्पन को 5 अक्टूबर, 2020 में हाथरस में सामूहिक बलात्कार पीड़िता की मौत के बाद वहाँ जाते वक्त रास्ते में गिरफ्तार कर लिया गया था, तब उसके पास से 4 पहचान पत्र बरामद किए गए थे।
इसमें से 2 Thejas Daily के थे, 1 दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स का था और 1 प्रेस क्लब ऑफ इंडिया का कार्ड था।
कप्पन के आईडी कार्ड
3. सिद्दीकी कप्पन को पीएफआई/सीएफआई ने नहीं कहा था
कप्पन का कहना है कि हाथरस जाने के लिए उसे पीएफआई या सीएफआई ने नहीं बल्कि उनकी कंपनी के मालिक ने कहा था। उत्तर प्रदेश सरकार ने उन लोगों का विवरण दिया है जिनके साथ वह हाथरस जाने के दौरान था और वह कैसे पीएफआई और सीएफआई से जुड़ा था। सरकार ने कहा कि वह उन लोगों के साथ यात्रा कर रहा था जिन्हें पिछले दंगों में आरोपित बनाया गया था।
अतीकुर्रहमान, सीएफआई का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष, मुजफ्फरनगर दंगों का आरोपित (केस क्राइम नंबर 1161/2019, पीएस कोतवाली नगर, मुजफ्फरनगर)
2. सीएफआई के दिल्ली चैप्टर के पूर्व महासचिव मसूद अहमद पर बहराइच दंगों का आरोप लगाया गया था। (केस क्राइम नंबर 225/2020, पीएस जारवाल रोड, बहराइच)
3. कार में सवार तीसरा सह-आरोपित यानि ड्राइवर आलम, सह-आरोपित दानिश खान का साला था, जो दिल्ली दंगों के मामले में आरोपित है (केस क्राइम नम्बर 59/2020, पीएस क्राइम ब्रांच सेल, दिल्ली)।
सरकार का तर्क है कि अगर वह केवल अपनी पत्रकारिता कर रहा था, तो वह दंगा आरोपितों के साथ क्यों जा रहा था? कप्पन से यह सवाल किया गया था और वह इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया था। हलफनामे में आगे कहा गया है, जाँच में यह भी सामने आया है कि याचिकाकर्ता वास्तव में आतंक फैलाने के लिए पीएफआई/सीएफआई के सदस्यों का हिस्सा था। सह-आरोपित रऊफ शरीफ (राष्ट्रीय महासचिव, सीएफआई) के निर्देश पर उसे हाथरस भेजा गया था, यहाँ जाने के लिए उसे पैसे भी दिए गए थे।
इसके अलावा, रऊफ शरीफ ने 05/10/2020 को दोपहर 12:26 बजे कप्पन को एक व्हाट्सएप मैसेज भेजा था। हलफनामे में कहा गया है, “व्हाट्सएप मैसेज में विशेष रूप से पूछा गया है कि वहाँ की स्थिति क्या है, जिसका अर्थ यह है कि शरीफ याचिकाकर्ता की जगह से अच्छी तरह वाकिफ था। सह-आरोपित रऊफ शरीफ के बयानों से भी इसकी पुष्टि होती है।
ऐसे में स्पष्ट है कि कप्पन को पीएफआई/सीएफआई द्वारा नियुक्त किया गया था। क्योंकि अज़ीमुखुम के संपादक के बयान में भी कहीं नहीं कहा गया है कि उन्होंने हाथरस की घटना को कवर करने के लिए याचिकाकर्ता को नियुक्त किया था। याचिकाकर्ता ने 5.10.2022 को दोपहर 12.10 बजे ऑफिस को एक व्हाट्सएप मैसेज भेजा था कि वह हाथरस जा रहा है।
5. सिद्दीकी कप्पन को पैसे किसलिए मिले?
कप्पन ने अपनी जमानत याचिका में दावा किया है कि सितंबर में मिले 25,000 रुपए और अक्टूबर में मिले 20,000 रुपए सिक्रेट वर्कशॉप और हाथरस की यात्रा करने के लिए नहीं मिले थे। यूपी सरकार का कहना है कि कप्पन के दावे झूठे और उच्च न्यायालय में दिए गए उसके बयान के विरोधाभासी हैं।
सरकार के हलफनामे में कहा गया है, “वर्तमान याचिका में, याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि 15.09.2020 को 25,000 रुपए उसके द्वारा जमा कराए गए थे, जिसे उसने एक घर बनाने के लिए बचाया था। वहीं, 4.10.2020 के 20,000 रुपए उसने अपने दोस्तों से जो उधार लिया था उसे वापस कर दिया था। हालाँकि, हाई कोर्ट के सामने याचिकाकर्ता ने (364 पृष्ठ पर) कहा है कि उसे ये रुपए तेजस डेली में काम करने के लिए उसके वेतन के रूप में दिए गए हैं।” इस प्रकार, याचिकाकर्ता के बयानों में स्पष्ट विरोधाभास है।”
इसके अलावा, सरकार का कहना है कि कप्पन और पीएफआई के महासचिव कमल केपी के बीच बातचीत हुई है, जिससे पता चलता है कि सितंबर में कप्पन को एक सीक्रेट वर्कशॉप आयोजित करनी थी। कप्पन ने कमल केपी को अपने वॉयस नोट में यह भी कहा था, “वॉयस नोट सुनने के बाद उसे हटा दें।” इस वर्कशॉप के बाद कप्पन को दो बार 25,000 रुपए का भुगतान किया गया। हलफनामे में कहा गया है, “आगे सह-आरोपित रऊफ शरीफ ((Annexure R/7) के बयान में बताया गया है कि कमल केपी ने हाथरस यात्रा के लिए याचिकाकर्ता के खाते में पैसे जमा कराए थे। याचिकाकर्ता ने बाद में उच्च न्यायालय में दलील दी कि 09.01.2020 के वॉयस नोट में संदर्भित वर्कशॉप केवल एक विकिपीडिया वर्कशॉप थी।
6. सिद्दीकी कप्पन का दावा, पीएफआई/सीएफआई के साथ कोई संबंध नहीं
हलफनामे में कहा गया है, “जाँच में याचिकाकर्ता का चरमपंथी संगठन पीएफआई और सीएफआई के साथ गहरे संबंध का खुलासा किया गया है। पीएफआई/सीएफआई (मूल रूप से सिमी के पूर्व सदस्यों से बना है) के शीर्ष नेतृत्व के साथ उसके अच्छे संबंध है। यही नहीं उसके तुर्की में IHH जैसे अलकायदा से जुड़े संगठनों के साथ भी संबंध पाए गए हैं। याचिकाकर्ता और पीएफआई के शीर्ष नेतृत्व के बीच व्हाट्सएप चैट से इस बारे में पता चला है।”
वह केवल Thejas के साथ नहीं, इनके साथ भी जुड़ा हुआ था। सुप्रीम कोर्ट 9 सितंबर को कप्पन की जमानत याचिका पर सुनवाई करेगा। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर हलफनामे में कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं। यूपी सरकार के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में अपनी जमानत याचिका में झूठ बोला है।
बता दें कि सिद्दीकी कप्पन को यूपी पुलिस ने 5 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था, जब वह हाथरस मामले को कवर करने के लिए गया हुआ था। PFI के चार सदस्य सिद्दीक कप्पन, अतीकुर्रहमान, आलम और मसूद को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ के बाद यह खुलासा हुआ था कि उनकी हाथरस में दंगा फैलाने की साजिश थी। साथ ही रऊफ शरीफ का नाम सामने आया था।
हाल में कई रिपोर्टें आई हैं जो बताती हैं कि नेपाल-भारत सीमा पर तेजी से डेमोग्राफी में बदलाव हो रहा है। मस्जिद-मदरसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए 20 से 27 अगस्त 2022 तक ऑपइंडिया की टीम ने सीमा से सटे इलाकों का दौरा किया। हमने जो कुछ देखा, वह सिलसिलेवार तरीके से आपको बता रहे हैं। इस कड़ी की चौथी रिपोर्ट;
उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में बौद्धों के आस्था केंद्रों के पास दरगाह और मजारों का होना सामान्य है। अंगुलीमाल गुफा के आसपास के कई गाँव मुस्लिम बहुल हैं।
यह रिपोर्ट एक सीरीज के तौर पर है। इस पूरी सीरीज को एक साथ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
पुरैनिया गाँव में अर्ध निर्मित मजार और ईदगाह
अंगुलीमाल गुफा से लगभग 1 किलोमीटर दूर भिनगा रोड पर हाइवे से लगभग 100 मीटर दूर बाग़ में एक अर्धनिर्मित मज़ार दिखी। इमारत के निर्माण का काम पूरा चुका था और प्लास्टर का काम बाकी था। निर्माण कौन करवा रहा था, इसका जवाब देने के लिए मौके पर कोई मौजूद नहीं था।
पुरैनिया में अर्ध निर्मित इबादतगाह
इस इबादतगाह से करीब आधा किलोमीटर आगे बढ़ने पर एक ईदगाह दिखी। यह ईदगाह मुख्य हाईवे से गाँव को जोड़ने वाले लिंक रोड से सटी हुई है। ईदगाह में लगभग 200 लोगों के एक साथ जमा होने की क्षमता है। ईदगाह को पक्की बॉउंड्री से घेरकर मुख्य द्वार पर लोहे का गेट लगा हुआ है।
सड़क के पास बनी ईदगाह
ग्राम पंचायत के तालाब पर भी मज़ार
श्रावस्ती के ही इकौना क्षेत्र में आने वाले गाँव पंचायत कटरा में हमने देखा कि जल संचयन के लिए मनरेगा के माध्यम से बने तालाब पर भी मज़ार बननी शुरू हो गई है। तालाब के बाँध पर कर्बला की आकृति बना उसे सीमेंट से पक्का कर दिया गया है। उस जगह पर इस्लामी झंडे भी लगे थे।
तालाब के बंधे पर बनी मज़ार
ग्राम पंचायत कटरा के जिस सर्वजनिक तालाब के बाँध पर मजार बन रही है, उसका निर्माण शासकीय योजना के अंतर्गत हुआ था। तालाब में पानी नाममात्र का था और उसमें हमें कई ताजिया फेंकी मिली। यह तालाब मुख्य हाईवे से अधिकतम 100 मीटर अंदर की तरफ है जो कटरा गाँव की कनेक्टेड सड़क पर है।
सर्वजनिक तालाब में फेंकी गई ताजिया के अवशेष
खंभों पर अयूब खान
श्रावस्ती जिले में बने हाईवे पर आगे बढ़ते हुए हमने राजनैतिक तौर पर सबसे अधिक डॉक्टर अयूब खान के बोर्ड देखे। ये बोर्ड हाइवे से सटे बिजली के खंभों पर लगे हुए थे। इन बोर्डों में सम्पूर्ण स्वराज्य रैली का आह्वान किया गया था। ये बोर्ड बलरामपुर जिले की सीमाओं से ले कर भिनगा तक लगभग 20 किलोमीटर के क्षेत्रों में लगे दिखाई दिए।
अयूब खान के बोर्ड
गौरतलब है कि डॉक्टर अयूब को भड़काऊ पर्चे बाँटने के आरोप में UP पुलिस 1 अगस्त 2021 को गिरफ्तार किया था। अक्टूबर 2021 में उन्हें जमानत मिली थी।
गोपियापुर में एक साथ कई कर्बला
श्रावस्ती से हाईवे के रास्ते बलरामपुर लौटते हुए हमें गोपियापुर नाम की जगह दिखाई दी। इस जगह पर सड़क के एकदम बगल में इस्लामी झंडे लगे हुए थे। कुछ झंडे हरे रंग के थे और कुछ लाल रंग। यहाँ हमें सड़क से सटे कम से कम 3 पक्के निर्माण दिखे, जिन्हें हरे रंग से रंगा गया था। स्थानीय लोगों से बताया कि यह कर्बला है।
गोपियापुर में बने कर्बला और टूटे ताज़िया
घरों पर इस्लामी झंडे, दरगाह और मदरसा
भले ही उस समय देश आज़ादी का 75वां साल मनाया रहा हो लेकिन गोपियापुर के पास सड़क के किनारे बने कई घरों पर इस्लामी झंडे फहराते दिखाई दिए। इन घरों के नीचे आमीन मोबाइल और यादव ट्रेवल्स के बोर्ड लगे दिखे। हरे झंडे के बीच में एक तिरंगा भी लहरा रहा था।
छतों पर लहराते इस्लामी झंडे
श्रावस्ती जाने वाले मुख्य हाईवे पर गोपियापुर के ही पास सड़क से सटी हुई एक दरगाह दिखी। इस दरगाह के आसपास चादरें बिक रहीं थीं और कई लोग जमा थे।
सड़क के किनारे बनी एदरगाह
इस दरगाह से महज 200 मीटर और आगे श्रावस्ती की तरफ बढ़ते ही सड़क से सटा एक मदरसा दिखाई दिया। मदरसे में काले रंग का गेट लगा हुआ था और बाहर अरबी भाषा में कुछ शब्द लिखे हुए थे।
गोपियापुर का मदरसा
मदरसे के पास ही चाय की दुकान पर एक व्यक्ति ने हमें बताया कि जितना आपको सड़क पर दिख रहा है, उसका कई गुना अंदर गाँवों में दिखेगा। एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि अगर आप इसी जिले के भिनगा क्षेत्र में जाएँगे तो आपको इससे अधिक मस्जिद और मदरसे दिखाई देंगे।