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‘₹1400 करोड़ का घोटाला कर के जाँच से भाग रहे’: AAP विधायकों पर लीगल एक्शन लेंगे LG सक्सेना, विधानसभा में लगाए गए थे आरोप

दिल्ली में सियासी पारा सातवें आसमान में पहुँचता जा रहा है। एक ओर जहाँ भाजपा और आप आमने-सामने हैं, वहीं दूसरी ओर उप-राज्यपाल को भी सियासी घमासान में शामिल कर लिया गया है। दरअसल, आम आदमी पार्टी के नेता बीते कुछ दिनों से उप-राज्यपाल वीके सक्सेना पर 1400 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगा रहे हैं। इसके बाद अब LG ने इन नेताओं पर कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है।

गौरतलब है कि आप (AAP) नेताओं ने उपराज्यपाल वीके सक्सेना (LG Vk Saxena) पर खादी ग्रामोद्योग के अध्यक्ष रहते हुए 1400 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाया था। जिस पर अब एलजी हाउस की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि “दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना आप नेताओं सौरभ भारद्वाज, आतिशी मर्लेना, दुर्गेश पाठक और जैस्मीन शाह सहित अन्य पर भ्रष्टाचार के झूठे आरोपों और मानहानि के लिए कानूनी कार्यवाही करेंगे।”

बता दें कि आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक दुर्गेश पाठक ने उप-राज्यपाल वीके सक्सेना पर 1400 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाया था। पाठक ने विधानसभा में दावा किया था कि नोटबंदी के दौरान ‘खादी ग्रामोद्योग’ के प्रमुख रहते हुए वीके सक्सेना ने कालेधन को सफेद किया है। यही नहीं, उन्होंने उप-राज्यपाल को ‘भ्रष्ट’ बताते हुए सीबीआई और ईडी की जाँच की माँग की थी और कहा था कि सक्सेना को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

पाठक ने कहा था, “यह घोटाला राष्ट्रपति महात्मा गाँधी और खादी के नाम पर हुआ है। बड़े दुख और शर्म के साथ कह रहा हूँ कि यह किसी और ने नहीं बल्कि दिल्ली के उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने किया, जब वह खादी ग्रामोद्योग के चेयरमैन थे।”

इसके अलावा, आप नेता आतिशी मर्लेना ने कहा था, “मैं तो यह पूछना चाहती हूँ कि विनय सक्सेना सीबीआई जाँच से भाग क्यों रहे हैं? कुछ नहीं किया होगा तो बच जाएँगे। सीबीआई और ईडी को जाँच करने दीजिये। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा था, “हम उम्मीद कर रहे हैं कि ये पता चल जाए की सीबीआई इंडिपेंडेंट एजेंसी है या बीजेपी के ऑपरेशन लोटस की एजेंसी है?”

‘5 स्टार होटल, 47 कमरे, मुर्गा के साथ विदेशी शराब’: आलीशान होटल में झारखंड के विधायकों को हर सुख-सुविधा, 1 दिन का किराया लाखों में

छत्तीसगढ़ के जिस आलीशान होटल में झारखंड से आए विधायकों को ठहराया गया है, उसको लेकर बवाल हो गया है। खबर है कि इस होटल में सोरेन सरकार के विधायकों की हर सुख-सुविधा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। यहाँ उनके लिए विदेशी शराब का भी इंतजाम किया गया है। बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग की एक गाड़ी शराब की पेटियों को लेकर मेफेयर रिसॉर्ट पहुँची थी। इसको लेकर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने भूपेश बघेल और झारखंड के विधायकों को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा, “जनता के पैसों से रिसॉर्ट में दारू और मुर्गा खिलाया जा रहा है।”

रमन सिंह ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो भी शेयर किया है। इसमें एक गाड़ी शराब की पेटियों को ले जाते हुए दिख रही है। उन्होंने लिखा, “भूपेश जी कान खोलकर सुन लीजिए। छत्तीसगढ़ अय्याशी का अड्डा नहीं है, जो छत्तीसगढ़ियों के पैसे से झारखंड के विधायकों को दारू-मुर्गा खिला रहे हैं। असम, हरियाणा के बाद अब झारखंड के विधायकों का डेरा, इन अनैतिक कार्यों के लिए छत्तीसगढ़ महतारी आपको कभी माफ नहीं करेगी।”

खनन लीज मामले में चुनाव आयोग की अनुशंसा पर राज्यपाल ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Jharkhand CM Hemant Soren) की विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी है। हालाँकि, उनके चुनाव लड़ने पर रोक नहीं लगाई गई है। सोरेन की सदस्यता खत्म किए जाने के बीच सत्ताधारी गठबंधन विधायकों को एकजुट रखने की चुनौती से जूझ रहा है। झारखंड में सत्तारूढ यूपीए के करीब 40 विधायक मंगलवार (30 अगस्त, 2022) शाम को करीब 6.30 बजे स्पेशल फ्लाइट से रायपुर के विवेकानंद एयरपोर्ट पर पहुँचे। रायपुर के मेफेयर रिसॉर्ट में इनके रुकने का बेहतर इंतजाम किया गया। यहाँ उनके लिए 47 कमरे बुक करवाए गए हैं।

इस रिसॉर्ट के अंदर दुनिया की तमाम लग्जरी सुविधाएँ मौजूद हैं जैसे लेक में डल झील की तरह बोटिंग, हॉट टब और फिटनेस रूम, रिसॉर्ट के अंदर शानदार बार। इस रिसॉर्ट को 2015 में बनाया गया था। छत्तीसगढ़ सरकार ने 99 साल की लीज पर इसकी जमीन दी है। इस होटल के मालिक पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक,आठ महीने पहले मेफेयर लेकव्यू रिसॉर्ट में ही छत्तीसगढ़ सीएम भूपेश बघेल ने अपने बेटे की शादी की थी। इस होटल में करीब 178 कमरे हैं। कमरे के अंदर खूबसूरत पेंटिग से लेकर आधुनिक सुविधाओं की भरमार है। बताया जा रहा है कि होटल के अंदर 1.25 लाख रुपए तक के कमरे हैं।

ताजमहल को ‘तेजो महालय’ करने का प्रस्ताव आगरा नगर निगम में पेश, BJP पार्षद ने कहा- इमारत पर हिंदू सभ्यता के कई चिह्न

एक बार फिर ताजमहल (Taj Mahal) का नाम बदलने की माँग उठ रही है। बीजेपी पार्षद शोभाराम राठौर आज (31 अगस्त 2022) आगरा नगर निगम में ताजमहल का नाम ‘तेजो महालय’ करने का प्रस्ताव पेश किया। हालाँकि, विपक्षी दलों ने सदन में जमकर हंगामा किया।

आगरा नगर निगम के सदन में भारी हंगामे के बीच ताजमहल के नाम परिवर्तन के प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हो सकी। बहुजन समाज पार्टी (BSP) और बीजेपी (BJP) के पार्षदों के बीच जुबानी जंग के कारण सदन में कई घंटे हंगामा चलता रहा और अंतत: सदन स्थगित हो गया।

शोभाराम राठौर का कहना है कि अब समय आ गया है कि ताजमहल का नाम बदला जाए। पार्षद के प्रस्ताव पर सवाल खड़े करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अमीर अहमद जाफरी ने कहा कि क्या नगर निगम को यह अधिकार है कि वह ऐतिहासिक स्मारक ताजमहल का नाम बदल सके।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस जगह ताजमहल है, उस क्षेत्र के पार्षद शोभाराम राठौर हैं। उन्होंने (बीजेपी पार्षद) तर्क देते हुए कहा कि नगर निगम में पिछले साढे़ 4 साल में करीब 80 सड़क और चौराहों के नाम बदले गए हैं। ताजमहल का भी बदला जाना चाहिए।

शोभाराम राठौर ने कहा कि ताजमहल का नाम बदलने की माँग भी लंबे समय से उठ रही है। ताजमहल नगर निगम की सीमा में है। ताजमहल में हिंदू सभ्यता से जुडे़ कई चिन्ह मिलने की बात कही जाती है। इसको देखते हुए उन्होंने नाम बदलने का प्रस्ताव रखा है।

इस मामले में ASI के पुरातत्वविद अधीक्षक डॉक्टर राजकुमार पटेल का कहना है कि उनके पास इस तरह की कोई भी लिखित सूचना नहीं आई है। ऐसे में वह इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते हैं।

गौरतलब है कि ओडिशा के पुरी में स्थित गोवर्धन मठ के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने वर्ष 2020 में ताजमहल को लेकर बड़ा दावा किया था। शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश के आगरा में यमुना नदी के किनारे स्थित मुगलिया इमारत के बारे में कहा था कि ये प्राचीन काल में भगवान शिव का मंदिर था और इसका नाम ‘तेजो महालय’ था। उनके शब्दों में, “जिसे आजकल ताजमहल कहते हैं, उसका पुराना नाम ‘तेजो महालय’ है। वहाँ शिवजी प्रतिष्ठित थे।“

शंकराचार्य के मुताबिक, जयपुर राजपरिवार के पास ताजमहल का पूरा इतिहास सुरक्षित है। विदेशी यात्रियों ने भी अपनी यात्रा को लेकर जो संस्मरण लिखे हैं, उनसे ताजमहल का वास्तविक नाम ‘तेजो महालय’ ही सिद्ध होता है।

मुस्लिम नेता की 3 साल की बेटी, हिजाब न पहनने पर स्कूल ने निकाला: अब्बू ने कहा- ये न हिंदी पढ़ाते हैं और न राष्ट्रगान करवाते हैं

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में नर्सरी क्लास की बच्ची को हिजाब पहनकर न आने पर स्कूल से निकाल दिया गया। यह घटना अलीगढ़ के इस्लामिक मिशन स्कूल की है। जिस बच्ची को स्कूल से निकाला गया है उसके पिता मोहम्मद आमिर ने इस मामले को लेकर सोमवार (29 अगस्त 2022) को जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह से शिकायत की थी। आमिर मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के नेता भी हैं।

मोहम्मद आमिर ने जिलाधिकारी को लिखे शिकायती पत्र में कहा था कि महज तीन साल की बच्ची को हिजाब पहनकर स्कूल भेजने का दबाव बनाया गया था। स्कूल में न तो हिंदी पढाई जाती और न ही राष्ट्रगान होता है। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा था कि उनकी बेटी अभी तक हिन्दी के शब्दों को भी नहीं पहचान पाती। जब बच्ची से उन्होंने इस बारे में बात की तो पता चला कि स्कूल में सिर्फ उर्दू ही पढ़ाई जाती है।

नर्सरी क्लास की बच्ची के पिता मोहम्मद आमिर ने कहा, “मैंने अपनी बेटी का इस्लामिक मिशन स्कूल में नर्सरी में एडमिशन कराया था। एडमिशन के 6 महीने बाद जब हम लोग स्कूल गए और पूछा था हमारी बेटी को हिंदी क्यों नहीं पढ़ाई गई है? अभी तक होमवर्क क्यों नहीं चेक किया गया है? बच्ची की परफॉर्मेंस कैसी है? इस दौरान स्कूल के संचालक ने कहा आपसे पूछ कर पढ़ाई नहीं होगी और फिर मेरे ऊपर बदसलूकी का आरोप लगा दिया।”

आमिर ने आगे कहा, “हद तब पार हो गई जब इसी बात को लेकर हमारी बेटी को स्कूल से निकाल दिया गया। 6 महीने में हमारी बेटी को हिंदी नहीं पढ़ाई गई और न ही वहाँ राष्ट्रगान होता है। स्कूल में साल में सिर्फ दो बार राष्ट्रगान होता है 15 अगस्त और 26 जनवरी को।”

पीड़ित बच्ची के पिता आमिर ने कहा है कि जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायत करने के बाद स्‍कूल से उनके ऊपर दबाव डाला जा रहा है। स्कूल द्वारा कहा जा रहा है कि वह बेटी की फीस के पैसे वापस ले लें और किसी अन्य स्‍कूल में एडमिशन करा लें।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मोहम्मद आमिर ने इस पूरे मामले को लेकर जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह से शिकायत की थी। जिसके बाद उन्होंने, तत्काल संज्ञान लेते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) को जाँच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। बीएसए का कहना है कि इस मामले की जाँच के लिए कमेटी गठित कर दी गई है। जाँच के बाद ही कार्रवाई की जाएगी।

वहीं इस मामले की शिकायत होने और मीडिया में आने के बाद स्कूल प्रबंधन की ओर से सफाई में कहा गया है कि उस बच्ची के पिता स्कूल आए थे। यहाँ उन्होंने, गलत अंदाज में बातचीत करते हुए और हंगामा किया था। जब स्कूल प्रबंधन से हिंदी न पढ़ाने को लेकर सवाल किया गया तो उन्‍होंने कहा, बच्ची नर्सरी क्लास में पढ़ती है। इस उम्र के बच्चों को हिंदी पढ़ने-लिखने में दिक्कत होती है।

NCW की टीम ने दुमका में अंकिता के परिजनों से की मुलाकात, घटनास्थल का लिया जायजा: कपिल मिश्रा ने परिजनों को सौंपा ₹25 लाख का चेक

झारखंड (Jharkhand) नाबालिग अंकिता की हत्या के मामले को राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने गंभीरता से लिया है। महिला आयोग की टीम दुमका स्थित अंकिता के घर पहुँच कर परिजनों से बातचीत की। वहीं, भाजपा नेताओं ने भी चंदा इकट्ठा कर अंकिता के परिजनों को सौंपा।

NCW की लीगल काउंसलर शालिनी सिंह ने कहा, “खबर मिलते ही हमने स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की और मामले को डीजीपी के सामने उठाया। हमने जो भी यहाँ देखा या पाया है, उसे NCW की अध्यक्ष को रिपोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद वे इसको लेकर आगे के कदम के बारे में बताएँगी। हम अभी कुछ भी नहीं बता सकते।”

शालिनी ने मृतक अंकिता सिंह की गरिमा का ख्याल रखने की लोगों से अपील की। उन्होंने कहा, “सोशल मीडिया पर लोग पीड़िता की तस्वीरें शेयर कर रहे हैं। कृपया इसे रोका जाए। महत्वपूर्ण जानकारी का दुरुपयोग न हो और एक महिला की गरिमा की रक्षा की जाए।”

राष्ट्रीय महिला आयोग की दो सदस्यीय टीम ने अंकिता सिंह के परिजनों से बात कर पूरे मामले की जानकारी ली। इसके साथ ही टीम ने घटनास्थल का भी मुआयना किया। टीम ने उस कमरे का बारीकी से अवलोकन किया, जिसमें अंकिता सो रही थी और शाहरुख हुसैन ने खिड़की से पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया था।

इससे पहले राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने सोमवार (29 अगस्त 2022) को झारखंड के डीजीपी नीरज सिन्हा (Jharkhand DGP Niraj Sinha) को नोटिस देेते हुए अंकिता की हत्या के संबंध में कार्रवाई की रिपोर्ट माँगी थी।

उधर, भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने पीड़ित परिवार के लिए लोगों से फंड इकट्ठा किया है और दुनिया भर के लोगों ने अंकिता के परिजनों के लिए 25 लाख रुपए से अधिक की राशि दी है। वहीं, भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने दुमका के सांसद निशिकांत दुबे के साथ अंकिता के परिजनों से भेंट कर उन्हें 25 लाख रुपए का चेक सौंपा।

बता दें कि जेहादी मानसिकता वाले शाहरुख हुसैन की शिकार हुई अंकिता की मौत पर राज्य की हेमंत सोरेन सरकार ने सिर्फ 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी है। इसको लेकर सोशल मीडिया पर हेमंत सरकार की खूब आलोचना हो रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि विधायकों को छत्तीसगढ़ के रिसॉर्ट में भेजकर करोड़ों रुपए उड़ा सकती है सरकार, लेकिन एक हिंदू पीड़िता को पर्याप्त मुआवजा नहीं दे सकती।

कपिल मिश्रा ने इसकी जानकारी ट्वीट कर लोगों के साथ शेयर की थी। बात दें कि पड़ोसी शाहरुख हुसैन के हमले में 90 प्रतिशत तक जली अंकिता ने 5 दिनों तक अस्पताल में जीवन और मौत से संघर्ष करने के बाद 23 अगस्त 2022 को प्राण त्याग दिया था। इसके बाद राज्य में जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं। वहीं, पुलिस की गिरफ्त में शाहरुख का हँसते हुए फोटो वायरल हुई थी।

बिहार में अब BPSC के छात्रों पर बरसी पुलिस की लाठियाँ, तेजस्वी ने किया था 10 लाख नौकरियों का वादा: शिक्षक अभ्यर्थी को ADM ने कर दिया था लहूलुहान

बिहार में एक बार फिर अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज की खबर सामने आई है। पटना स्थित ‘बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC)’ कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों पर बुधवार (31 अगस्त, 2022) को पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया, जिससे कई छात्र घायल हो गए। पुलिस ने अभ्यर्थियों के नेता दिलीप कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया है। उन्होंने पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाया है।

पत्रकार शुभांकर मिश्रा ने अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज को लेकर ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा, “लाखों नौकरी का ऐलान करने वाली सरकार की पुलिस ने अब पटना में BPSC छात्रों पर लाठीचार्ज किया है। छात्र परीक्षा का पैटर्न बदलने का विरोध कर रहे थे। उधर पटना के लाठीचार्ज ADM, जिन्होंने 22 August को ‘तिरंगा’ पकड़े छात्र की बेरहमी से पिटाई की थी, उन पर भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिहार लोक सेवा आयोग की 67वीं BPSC परीक्षा के पैटर्न में बदलाव को लेकर छात्र लगातार विरोध कर रहे हैं। पटना में जुटे बीपीएससी अभ्यर्थियों ने एक दिन में ही परीक्षा आयोजित करने की माँग की है। उनका कहना है कि इसी के आधार पर मेरिट लिस्ट भी तैयार की जाए। उनका कहना है कि दो दिन परीक्षा आयोजित की जाएगी तो दोनों दिन परीक्षा के सवाल का लेवल अलग-अलग होगा। इसलिए, दो दिन की जगह परीक्षा एक ही दिन में ली जाए। इन दोनों माँगों को लेकर बुधवार को सैकड़ों अभ्यर्थी पटना की सड़कों पर उतरे। इसके बाद पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया।

बता दें कि इसी तरह 22 अगस्त 2022 को पटना ADM ने लाठी बरसा कर एक शिक्षक अभ्यर्थी को लहूलुहान कर दिया था। ADM का गुस्सा सिर्फ शिक्षक अभ्यर्थियों पर ही नहीं बरसा, बल्कि उन्होंने एक मीडियाकर्मी की भी धुनाई कर दी थी। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो खूब वायरल हुआ था। वीडियो में पटना ADM को खुलेआम उस शिक्षक अभ्यर्थी पर लाठियाँ बरसाते हुए देखा गया, जो हाथ में तिरंगा लिए हुए था। वो जमीन पर गिर गया था, इसके बाद भी ADM लगातार उसकी पिटाई करते रहे। अधिकारी ने इस दौरान भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे पर लाठी बरसाने से भी परहेज नहीं किया।

पंजाब के चर्च में तोड़ी गई जीसस और मेरी की मूर्तियाँ, फूँक डाली पादरी की कार: CCTV फुटेज आया सामने, निहंगों से हुई थी ईसाईयों की झड़प

पंजाब के तरनतारन शहर में एक चर्च में जीसस की मूर्ति और मदर मेरी की प्रतिमा को तोड़े जाने का मामला सामने आया है। घटना 31 अगस्त 2022 रात 12:30 बजे घटी। सीसीटीवी फुटेज में सिख युवकों को रॉड से मूर्तियाँ तोड़ते देखा जा सकता है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, चर्च में कुल 4 लोग जबरदस्ती घुसे थे। इन्होंने पहले गार्ड के सिर पर पिस्तौल रखी और उसके बाद उसे बाँध दिया। इसके बाद उन्होंने चर्च में तोड़फोड़ शुरू की। इन लोगों ने मदर मेरी और यीशु की मूर्तियों से सिर तोड़ा और अपने साथ ले गए। इन लोगों ने पादरी की कार में आग भी लगाई।

चर्च में हुए इस हमले के बाद ईसाइयों ने पट्टी खेमकरण राज्य मार्ग को ब्लॉक कर दिया और आरोपितों को पकड़ने की माँग करने लगे। पुलिस ने उन्हें समझाने का प्रयास किया।

पत्ती स्थित चर्च के फादर थॉमस ने बताया, “4 लोग यहाँ आए। उन्होंने मूर्तियाँ खंडित कीं और हमारे वाहन को आग लगाया। वे 25 मिनट तक यहीं थे। उन्होंने बंदूक की नोक पर गार्ड को धमकाया। आईजी हमसे मिलने आए हैं और गिरफ्तारी का आश्वासन दिया है।”

ईसाइयों पर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप

उल्लेखनीय है कि इससे पहले रविवार (28 अगस्त 2022) को ईसाइयों और सिखों में झड़प की घटना प्रकाश में आई थी। जंडियाला गुरु के गाँव डडुआना में कुछ निहंग सिखों ने ईसाई कार्यक्रम को रुकवाया था। इसके बाद बाबा मेजर सिंह और उनके करीबन 150 समर्थकों पर केस दर्ज हुआ। जिसे देख श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने पंजाब सरकार का विरोध किया।

उन्होंने आरोप लगाया था कि ईसाई पादरी अपने पाखंडी तरीकों से हिंदुओं औक सिखों को बहकाकर धर्म परिवर्तन करवा रहे हैं। कई दफा सिखों ने इसकी शिकायत की लेकिन सरकार ने उनकी नहीं सुनी। ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने भाई तारू सिंह के शहादत दिवस पर इस मुद्दे को उठाते हुए कहा था,

“पंजाब में धर्म परिवर्तन बड़े पैमाने पर हो रहा है। यह चिंता का कारण है। लोग, विशेष रूप से गाँवों में रहने वाले, आसान लक्ष्य हैं। वे क्षुद्र लालच के बदले अपना धर्म परिवर्तित करते हैं। भाई तारू सिंह कठिन समय का सामना करने के लिए दृढ़ रहे। उन्होंने मुगल साम्राज्य के दौरान अपने बाल काटने और इस्लाम में परिवर्तित होने के बजाय अपना सिर कटा दिया था।” उन्होंने कहा कि भाई तारू सिंह सिखों के रोल मॉडल होने चाहिए। लेकिन आज कई युवा सिख धर्म के रास्ते से भटक गए हैं।”

8000 गाँवों में ईसाई समितियाँ, अकेले 2 जिलों में 600+ चर्च

इसी तरह न्यूज़ नेशन ने यूनाइटेड क्रिश्चियन फ्रंट के आँकड़ों के हिसाब से बताया था कि पंजाब के 12,000 गाँवों में से 8,000 गाँवों में ईसाई धर्म की मजहबी समितियाँ हैं। वहीं अमृतसर और गुरदासपुर जिलों में 4 ईसाई समुदायों के 600-700 चर्च हैं। इनमें से 60-70% चर्च पिछले 5 सालों में अस्तित्व में आए हैं।

पैसों के लालच में अपनाया था ईसाई मजहब, पंजाब के एक दर्जन परिवारों ने की घर-वापसी: CM से गुरुद्वारा कमिटी की अपील – बैन करें धर्म-परिवर्तन

पंजाब में हाल के दिनों में ईसाई धर्मांतरण की घटनाएँ बढ़ गई हैं। अब अमृतसर में लगभग एक दर्जन परिवारों द्वारा घर-वापसी करने का मामला सामने आया है। धर्मांतरण के मुद्दे पर ‘दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमिटी’ ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से अपील भी की है कि वो इस पर हिमाचल प्रदेश की तरह राज्य भर में पाबंदी लगाएँ। इस मुद्दे को लेकर निहंग जत्थेबंदियों ने भी हाल में विरोध प्रदर्शन किया है।

दैनिक जागरण’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब के अमृतसर जिले में स्थित कोहलेवाल गाँव में तकरीबन एक दर्जन परिवारों ने सिख धर्म में वापसी की है। इन परिवारों का पैसे का लालच देकर मतांतरण किया गया था। DSGMC के प्रयासों के बाद इन परिवारों ने ‘घर वापसी’ का फैसला किया।

DSGMC ने 3 अगस्त से इस मुहिम की शुरुआत की थी और उसके बाद इन परिवारों से मिलकर इन्हें घर वापसी के लिए मनाया गया। दिल्ली में गुरुद्वारों के प्रबंधन के कार्य देखने वाली संस्था DSGMC ‘धर्म प्रचार’ के लिए अभियान चला रही है और इसके लिए इसकी एक अलग कमिटी भी है। इसकी ‘धर्म प्रचार कमिटी’ के अध्यक्ष मंजीत सिंह भोमा ने बताया कि लालच देकर इन परिवारों का ईसाई धर्मांतरण कराया गया था।

सीएम भगवंत मान से की ये अपील

पंजाब में इस समय ‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ की सरकार है और DSGMC की ‘धर्म प्रचार कमेटी’ के चेयरमैन मनजीत सिंह भोमा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से मतांतरण पर प्रतिबंध की अपील की। उन्होंने कहा कि जिस तरह से हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों में मतांतरण पर पाबंदी है, ठीक उसी तरह पंजाब में भी पाबंदी लगाई जाए। वहीं उन्होंने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की विफलता को भी इसका जिम्मेदार बताया।

जिन 12 परिवारों ने हाल ही में घर वापसी की है, उन्होंने मतांतरण की पूरी कहानी भी बताई। उन्होंने कहा कि ईसाई धर्म प्रचारक गाँवों में दौरा कर तरह-तरह के लालच देते हैं। इन परिवारों के सदस्यों के मुताबिक, वो कुछ समय के लिए भटक गए थे। उन्होंने कहा कि अब वह वापस आ गए हैं और श्री गुरु ग्रंथ साहिब को मानकर ही अपना जीवन व्यतीत करेंगे। बताया जा रहा है कि जो परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा होता है, उसे धर्मांतरण के लिए ईसाई मिशनरी निशाना बनाते हैं।

कुछ दिनों पहले भी हुआ था बवाल

गौरतलब है कि बीते दिनों अमृतसर के ही एक ओर गाँव डडुआना में भी बवाल हुआ था। निहंग जत्थेबंदियों ने एक ईसाई कार्यक्रम को बंद करवाया था। जत्थेबंदियों ने धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन भी किया था। इसके बाद अमृतसर पुलिस द्वारा जत्थेबंदियों को यह आश्वासन दिया गया कि यहाँ किसी प्रकार का कोई धर्मांतरण नहीं होगा, तब जाकर जत्थेबंदियों ने अपना प्रदर्शन रोका।

क्लब के चुनाव में भी ऐसा नहीं होता… पता ही नहीं वोट डालने वाला कौन, फिर कैसे चुना जाएगा कॉन्ग्रेस अध्यक्ष? पार्टी नेता ने ही उठाए सवाल

लंबे इंतजार के बाद आखिरकार कॉन्ग्रेस में अध्यक्ष पद के लिए चुनाव (Congress presidential elections) का ऐलान किया गया है। इस चुनाव के लिए 17 अक्टूबर की डेट निर्धारित की गई है वहीं दो दिन बाद यानी 19 अक्टूबर को मतगणना होगी। हालाँकि, इस चुनाव को लेकर पार्टी नेताओं ने बागी तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। कॉन्ग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने पार्टी अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगाए हैं।

मनीष तिवारी ने कहा है कि मतदाता सूची के बिना कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद के निष्पक्ष चुनाव कैसे होंगे? उन्होंने माँग करते कहा है कि निष्पक्ष चुनाव के लिए पार्टी के वोटर का नाम-पता प्रकाशित किया जाना चाहिए। दरअसल, मनीष तिवारी (Manish Tewari) ने कॉन्ग्रेस के ‘केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण’ के प्रमुख मधुसूदन मिस्त्री के उस बयान के बाद चुनाव प्रक्रिया में सवाल उठाए हैं। मिस्त्री ने कहा था कि पार्टी अध्यक्ष के चुनाव के लिए मतदाता सूची सार्वजनिक नहीं की जाएगी।

मधुसूदन मिस्त्री के इस बयान को लेकर मनीष तिवारी ने ट्वीट करते हुए कहा, “मधुसूदन मिस्त्री जी, बहुत सम्मान के साथ मैं पूछना चाहता हूँ कि जब तक मतदाता सूची सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होती, तब तक निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कैसे हो सकता है? एक निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव का सार यह है कि सभी मतदाताओं के नाम और पते पार्टी की वेबसाइट पर पारदर्शी तरीके से प्रकाशित किए जाएँ।”

उन्होंने यह भी कहा, “मैं बहुत सम्मान के साथ बताना चाहता हूँ कि किसी क्लब के चुनाव में भी ऐसा नहीं होता है। निष्पक्षता और पारदर्शिता के हित में, मैं स्वयं आपसे मतदाताओं की पूरी सूची कॉन्ग्रेस की वेबसाइट पर जारी करने का निवेदन करता हूँ।”

मनीष तिवारी ने अपने अगले ट्वीट में कहा, “अगर कोई इस चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करना चाहता है, तो नियमों के मुताबिक उसे 10 प्रस्तावकों की जरूरत होगी। यदि उसे मालूम ही नहीं होगा कि मतदाता सूची में कौन-कौन है, तो क्या वो इसके लिए देश भर के प्रदेश कॉन्ग्रेस कार्यालयों की दौड़ लगाएगा? ऐसी स्थिति में केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण यह कहकर उसका नामांकन निरस्त कर देगा कि प्रस्तावक इस चुनाव के लिए वैध मतदाता नहीं हैं।”

बता दें कि मनीष तिवारी पहले व्यक्ति नहीं हैं जिन्होंने कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए होने वाले चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। इससे पहले पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा व पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम भी सवाल उठा चुके हैं।

अलकायदा से जुड़े असम के तीसरे मदरसे पर चला CM सरमा की सरकार का बुलडोजर, मौलवी सहित 37 हो चुके हैं गिरफ्तार

असम की हिमंता बिस्वा सरमा सरकार (Assam Himanata Biswa Sarama Government) उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार का मॉडल (UP Yogi Adityanath Model) पूरी तन्मयता के साथ राज्य में लागू कर रही है। असम सरकार ने आतंकी गतिविधियों से जुड़े अब तीसरे मदरसे (Madarasa) को ध्वस्त कर दिया है।

असम के बोंगाईगाँव जिले के कबाईतारी भाग-IV गाँव में स्थित मरकजुल मा-आरिफ क्वारियाना मदरसे को गिराया जा रहा है। इस मदरसे के इमाम और मौलवी एवं शिक्षक सहित 37 लोगों के आतंकी संगठन ‘अल कायदा भारतीय उपमहाद्वीप (AQIS)’ और ‘अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT)’ लोगों को गिरफ्तार किया गया था। यह मदरसा आतंकी गतिविधियों का ठिकाना बना गया था।

एसपी स्वप्निल डेका ने न्यूज एजेेंसी ANI को बताया, “जिला प्रशासन ने एक आदेश में कहा है कि मदरसा संरचनात्मक रूप से कमजोर और मानव निवास के लिए असुरक्षित है। मदरसा की इमारत को APWD के निर्देशों/ IS के मानदंडों के अनुसार नहीं बनाया गया है।”

एसपी डेका ने आगे बताया, “कल गोलपाड़ा जिला पुलिस ने भी मदरसे में AQIS/ABT से जुड़े एक गिरफ्तार व्यक्ति के साथ तलाशी अभियान चलाया था। जिला प्रशासन के निर्देश पर हमने मदरसे को गिराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।”

सोमवार (29 अगस्त 2022) को असम सरकार ने बारपेटा में एक मदरसा को ध्वस्त करने का आदेश दिया था। इस मदरसे से जुड़े AQIS/ABT के दो आतंकियों को भी असम पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

बारपेटा के एसपी अमिताव सिन्हा ने बताया था, “पुलिस ने बारपेटा में एक मदरसे में बेदखली का अभियान चलाया है, क्योंकि यह अवैध रूप से सरकारी जमीन पर बनाया गया था। पकड़े गए दोनों संदिग्धों का लिंक अलकायदा भारतीय उपमहाद्वीप (AQIS) और अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) से है।”

अतिरिक्त उपायुक्त लचित कुमार दास के मुताबिक, “यह मदरसे देश विरोधी गतिविधियों, जिहादी संगठनों में शामिल है। जाँच में सामने आया आया है कि ये मदरसा सरकारी जमीन पर बनाया गया है और इसका कोई मालिक नहीं नहीं। इसलिए हमने इसे तुरंत ध्वस्त करने का फैसला किया।”

सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने बारपेटा जिले से दो संदिग्ध आतंकियों के गिरफ्तार होने के बाद मीडियाकर्मियों से कहा था, “यह दूसरा मदरसा है, जिसे हमने ध्वस्त किया। क्योंकि वे एक संस्था के रूप में नहीं चल रहे थे, बल्कि एक आतंकवादी केंद्र के रूप में चल रहे थे। मैं सामान्यीकरण नहीं करना चाहता, लेकिन जब कट्टरवाद की शिकायत आती है तो हम जाँच करते हैं और उचित कार्रवाई करते हैं।”