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नाबालिग को अगवा कर निकाह का डाला दबाव, शादीशुदा हिंदू महिला को 3 महीने तक बंधक बनाकर रखा: अंकिता को जलाने के लिए पेट्रोल लाने वाला नईम जमानत पर था बाहर

झारखंड के दुमका में अंकिता सिंह को जलाकर मार डालने वाले शाहरुख हुसैन के जिगरी यार नईम खान उर्फ छोटू को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। वह 2021 में भी एक नाबालिग हिंदू लड़की को अगवा कर चुका है। इस लड़की को भी उसी तरह प्रताड़ित किया जा रहा था, जैसे अंकिता के मामले में देखने को मिला है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार नईम ने नाबालिग लड़की को अगवा कर निकाह का दबाव डाला था। उसे बेचने की धमकी दी थी। इस मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत वह गिरफ्तार भी हुआ था। बाद में उसे जमानत दे दी गई। जेल से बाहर आने के बाद वह नाबालिग पीड़िता के परिवार को केस उठाने की धमकी भी दे रहा था।

अंकिता की हत्या का मामला सामने आने के बाद यह पीड़िता सामने आई है और मीडिया से आपबीती साझा की है। पुराना दुमका की रहने वाली इस पीड़िता ने बताया है कि कोचिंग जाने के दौरान नईम उससे छेड़खानी करता था। नंबर माँगता था। पीड़िता और उसके परिवार को खत्म करने की धमकी देता था। पीड़िता का दावा है कि नईम के अपराध में उसके घर वाले भी शामिल हैं।

TV9 भारतवर्ष से बात करते हुए पीड़िता ने बताया कि मैं उसे जानती भी नहीं थी। लेकिन फिर भी वो मेरा पीछा करते हुए मेरा नाम पूछा करता था। जब काफी दिन तक मैंने उसकी बात नहीं मानी तो एक दिन मुझे अगवा कर अपने घर ले गया। कुर्सी से बाँधकर जबरदस्ती निकाह का दबाव डालने लगा। इनकार करने पर नईम ने मार डालने और बेचने की धमकी दी।

पीड़िता ने यह भी बताया कि जब नईम उसके साथ ये सब कर रहा था, तब उसका पूरा परिवार वहीं मौजूद था। वे सब भी नईम का साथ दे रहे थे। उसके परिजन भी निकाह के लिए तैयार होने के दबाव बना रहे थे। पीड़िता के अनुसार नईम नशे का आदी है और कई अन्य लड़कियों के साथ भी ऐसा कर चुका है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़िता के घर वालों ने इस घटना के बाद पुलिस से शिकायत की थी। नईम पर पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई भी हुई। लेकिन कुछ समय बाद वह जमानत पर बाहर आ गया और इस परिवार को फिर धमकी देने लगा। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक नईम ने एक शादीशुदा हिंदू महिला को भी बंधक बनाकर रखा था। परिजनों ने पुलिस की मदद करीब तीन महीने बाद महिला को उसके चंगुल से छुड़वाया था।

गौरतलब है कि 22 अगस्त को शाहरुख़ ने अंकिता के घर में घुस कर पेट्रोल डाल उसे आग लगा दी थी। इससे एक दिन पहले उसने अंक‍िता को फोन पर धमकी भी दी थी। 27 अगस्‍त की देर रात अंकिता ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। शाहरुख को 23 अगस्त को ही गिरफ्तार कर लिया गया था। वहीं नईम 29 अगस्त को पकड़ा गया था। उसने ही अंकिता को जलाने के लिए शाहरुख को पेट्रोल लाकर दिया था।

नईम की गिरफ्तारी के बाद उसके मोबाइल से बांग्लादेशी आतंकी संगठन अंसार उल बांग्ला के वीडियो मिलने की भी बात सामने आई थी। यह आतंकी संगठन गैर इस्लामी लड़कियों से निकाह कर बच्चा पैदा करने और उन्हें मुस्लिम बनाने के लिए उकसाता है। नईम ने पुलिस पूछताछ में कबूल किया था कि 22 अगस्त की शाम शाहरुख उससे मिला था। वह काफी गुस्से में था। शाहरुख ने अंकिता को जलाकर मारने की बात कही थी। इसके जवाब में नईम ने कहा था कि यदि वह बात नहीं करती है तो उसकी यही सजा है। इसके बाद वह शाहरुख के लिए पेट्रोल खरीद कर लाया।

‘आमिर खान’ ने हाथ जोड़ माँगी माफी, लिखा – Micchami Dukkadam, 2019 में भी फ्लॉप फिल्म के बाद यही थी हरकत

मिच्छामि दुक्कडम्
हम सब इंसान हैं… और गलतियाँ हमसे ही होती है
कभी भूल से… कभी हरकतों से
कभी अनजाने में
कभी गुस्से में… कभी मजाक में
कभी नहीं बात करने से
अगर मैंने किसी भी तरह से कभी भी आपका दिल दुखाया हो…
तो मन, वचन, काया से क्षमा माँगता हूँ…
मिच्छामि दुक्कडम्

आमिर खान प्रोडक्शन्स ने यह ट्वीट किया है। ट्वीट किया गया है 31 अगस्त-1 सितंबर की रात को। आमिर खान प्रोडक्शन्स (Aamir Khan Productions) ने इससे पहले जो 2 ट्वीट किया था, वो है – हैप्पी गणेश चतुर्थी और हैप्पी जन्माष्टमी। कवर पिक्चर उनकी भयंकर फ्लॉप हुई फिल्म लाल सिंह चड्ढा (Laal Singh Chaddha) की लगी हुई है।

बॉलीवुड इंडस्ट्री में एक्टिंग करने वाले आमिर खान की फिल्म लाल सिंह चड्ढा को दर्शकों का प्यार नहीं मिला। इसका कारण रहा सोशल मीडिया पर उनका बायकॉट और फिल्म का बेहद ही घटिया होना। आमिर खान (Aamir Khan) के बायकॉट के पीछे उनके पुराने वक्तव्य से लेकर कुछ वीडियो और फोटो के साथ-साथ उनकी तलाक ले चुकी बीवी का एंटी-इंडिया स्टेटमेंट भी था।

फ्लॉप फिल्म लाल सिंह चड्ढा (Laal Singh Chaddha) की बात करें तो यह 100 करोड़ रुपए के घाटे तक जा सकती है। इतने बड़े घाटे को देखते हुए मीडिया में यह रिपोर्ट भी आ रहा है कि बॉलीवुड में काम करने वाले आमिर खान शायद इस फिल्म के लिए अपनी फीस भी न लें

मिच्छामि दुक्कडम् (Micchami Dukkadam) का मतलब और 2019 कनेक्शन

जैन धर्म में इसका उल्लेख है। यह प्राकृत भाषा में लिखी गई एक उक्ति है। इसका अर्थ है – मैं सभी जीवों से क्षमा माँगता हूँ, वे सभी मुझे क्षमा करें, मेरी सभी प्राणियों से मित्रता हो सकती है और किसी से भी शत्रुता नहीं है।

आमिर खान के लिए मिच्छामि दुक्कडम् नया नहीं है। ठग्स ऑफ हिन्दोस्तान (Thugs of Hindostan) के 2019 में फ्लॉप होने पर भी इन्होंने इसी उक्ति का सहारा लिया था। तब उन्होंने हालाँकि अंत में “Love, a.” भी लिखा था। इस बार ऐसा कुछ नहीं लिखने के पीछे वजह शायद वही बता पाएँगे।

आमिर खान, लाल सिंह चड्ढा और विवाद

लाल सिंह चड्ढा के प्रोमोशन के दौरान KBC के पहले शो में खुद अमिताभ बच्चन ने वंदे मातरम् कहते हुए कई बार हाथ उठाया, लेकिन आमिर खान हाथ लटकाए रहे। वंदे मातरम् भी नहीं बोला। सिर्फ एक बार ‘मातरम्’ कहा और वो भी हँसते हुए। यहाँ तक कि भारतीय सेना के सम्मान में सबने खड़े होकर वहाँ सैल्यूट किया था लेकिन आमिर खान का हाथ ऊपर की तरफ उठा ही नहीं। इसको लेकर जब एक रिपोर्टर ने सवाल किया तो लाल सिंह चड्ढा की टीम ने रिपोर्टर और मीडिया को ही धमका दिया था।

सामान्यतः विदेशों में चलने वाली आमिर खान की फिल्म ने लाल सिंह चड्ढा को भी नकार दिया। ‘ब्राउज़ ऑफिस इंडिया’ ने आँकड़े गिनाते हुए बताया है कि ‘लाल सिंह चड्ढा’ ने 15 दिनों में ओवरसीज में 7.1 मिलियन डॉलर (56.70 करोड़ रुपए) ही कमाए हैं। इस्लामी अरब मुल्कों में भी आमिर खान की फिल्म 1.5 मिलियन डॉलर (11.98 करोड़ रुपए) के आँकड़े को छूने में भी कामयाब नहीं हो पाई।

कुर्ता खींचा, हाथ पकड़ा, कहते रहे- भैया सुनिए प्लीज बैठ जाइए सर… लेकिन KCR ने नहीं कही नीतीश कुमार के ‘मन की बात’

भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए छोड़ने के बाद से ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) 2024 आम चुनावों से पहले विपक्ष को एकजुट करने की बात कह रहे हैं। उधर तेलंगाना में बीजेपी के बढ़ते प्रभाव को देख मुख्यमंत्री केसीआर भी पिछले कुछ समय से विपक्षी एकजुटता का राग अलाप रहे हैं। ऐसे में महागठबंधन के नेता माहौल बना रहे थे कि KCR बिहार यात्रा के दौरान नीतीश के विपक्ष का चेहरा होने की बात कह सकते हैं।

लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब 31 अगस्त 2022 को पटना में नीतीश और केसीआर के संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें नीतीश कुमार पत्रकारों के सवालों को नजरंदाज करने का केसीआर को संकेत देते दिख रहे हैं। दूसरी तरफ केसीआर कभी कुर्ता खींच तो कभी हाथ पकड़ उन्हें बैठने को कह रहे हैं। यह सब विपक्ष का चेहरा को लेकर पूछे गए सवाल के बाद हुआ है। दिलचस्प है कि इतने ड्रामे के बाद भी केसीआर ने नीतीश के मन की बात नहीं कही।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक पत्रकार ने सवाल पूछा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस की क्या भूमिका रहेगी और क्या राहुल गाँधी विपक्ष के उम्मीदवार रहेंगे? इस पर नीतीश कुमार बोले कि ये सब सवाल क्यों पूछ रहे हैं? वहीं, केसीआर जैसे ही इस सवाल का जवाब देने लगे नीतीश कुमार उठकर खड़े हो गए और तेलंगाना के सीएम से कहने लगे, “उठिए, चलिए ना। इनके चक्कर में काहे पड़े हैं।”

बीजेपी नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने भी यह वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, “मैंने अपने जीवन में कभी किसी सीएम का ऐसा अपमान होते नहीं देखा। KCR के लिए बहुत बुरा लग रहा है।”

आज तक ने इस घटना का पूरा वीडियो अपने यूट्यूब चैनल पर शेयर किया है। इसमें आप देख सकते हैं कि जब पत्रकारों ने विपक्ष के पीएम कैंडिडेट के बारे में सवाल किए तो नीतीश कुमार जवाब देने से बचते नजर आए। इस सवाल पर नीतीश अपनी कुर्सी से उठ गए और कहने लगे ये सवाल छोड़ दीजिए।

हालाँकि, केसीआर बोलते रहे और नीतीश को बैठने के लिए कहते रहे। केसीआर ने बिहार के सीएम का हाथ पकड़ कर बोला, ‘भैया-भैया सुनिए न प्लीज, बैठ जाइए’, लेकिन नीतीश अपनी सीट पर नहीं बैठे और KCR से भी चलने को कहने लगे। नीतीश कुमार ने कहा, “अरे इनके चक्कर में मत पड़िए। 50 मिनट तो दे दिए। इस बात पर वहाँ मौजूद सब लोग हँसने लगे। बाद में बिहार के CM भी हँसने लगे और कुर्सी से खड़े हो गए।”

इस बीच केसीआर ने मीडियाकर्मियों से कहा, “आप होशियार हैं, मैं आपसे भी ज्यादा होशियार हूँ। भाजपा के जितने भी विरोधी दल हैं, हम उनको एकजुट करने का प्रयास करेंगे। इसके बाद सर्वसम्मति से जो फैसला लिया जाएगा, उसके बारे में हम आपको विस्तार से बताएँगे। क्योंकि बिना ब्राह्मण के कोई शादी होती ही नहीं है।” यह बात उन्होंने मीडिया के संदर्भ में कही। उन्होंने आगे कहा कि आपके बिना कुछ हो नहीं सकता।

‘मुस्लिम यहाँ 90%, हमारे मजहब में आओ या गाँव छोड़ो’: घर में घुस मथुरा के एक गाँव में हिंदू को धमकाया, कहा- जान और जमीन से हाथ धो लोगे

उत्तर प्रदेश के मथुरा के एक मुस्लिम बहुल गाँव में हिंदू बुजुर्ग को धमकी दिए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि गाँव के ही कुछ मुस्लिमों ने घर में घुसकर बुजुर्ग को धमकी दी। इस्लाम कबूलने का दबाव डाला। पीड़ित ने इस संबंध में 25 जुलाई 2022 को शिकायत की थी। इस पर संज्ञान लेते हुए मथुरा पुलिस ने 31 अगस्त को कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

इस गाँव का नाम महरौली है, जो कोसीकलां थाना क्षेत्र में आता है। 60 वर्षीय पीड़ित तेजराम ने इस संबंध में पुलिस को जी शिकायत दी है, उसकी कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। इसमें उन्होंने बताया है कि करीब 18 साल पहले उन्हें और कुछ अन्य हिन्दुओं को गाँव में सरकारी प्लॉट मिले थे। कुछ समय पहले गाँव के ही ताहिर, तारिफ, आशी, आमिर, इदरीश, गुन्ना, आमिर, अमसर, बब्बू, शब्बीर व सग्गन ने उनके प्लॉट के पेड़ काट लिए। गाँव के ही गोधरन नाम के एक व्यक्ति के खेतों की मेड तोड़ कर अपने खेत में मिला लिया। इस घटना की शिकायत तेजराम ने पुलिस और पटवारी से की थी। इससे आरोपित नाराज हो गए।

तेजराम का आरोप है कि आरोपित उनसे चुनावी और धार्मिक रंजिश भी रखते हैं। तेजराम के अनुसार 23 जुलाई 2022 की शाम आशी, तारिफ, आमिर, इदरीश, बब्बू व अन्य उनके घर में घुस गए। गालियाँ दी। कहा कि पुलिस और पटवारी से शिकायत कर तुमने क्या उखाड़ लिया। जब तेजराम ने गाली-गलौज का विरोध किया तो उन्हें बुरी तरह पीटा गया।

शिकायत में कहा गया है कि पड़ोसियों ने तेजराम को बचाने की कोशिश की तो उन्हें भी धमकी दी गई। तेजराम के मुताबिक हमलावरों ने कहा, “ये गाँव हमारा है। यहाँ हमारे तौर-तरीकों से रहना होगा। हम मुस्लिम यहाँ 90% हैं। ज्यादा परेशान करोगे तो जान और जमीन से हाथ धो लोगे। हमारे मजहब में आ जाओ या ये गाँव छोड़ कर चले जाओ।” शिकायत के मुताबिक हमलावरों ने जाते-जाते तेजराम के घर का सामान भी तोड़ डाला।

तेजराम के अनुसार कुछ अन्य ग्रामीणों के साथ भी मारपीट और धमकाने की घटना हो चुकी है। लेकिन आरोपितों के डर से कोई आगे नहीं आता। उन्होंने आरोपितों के पास हथियार होने और स्थानीय अपराधियों से संपर्क उनके का भी दावा किया है। साथ ही आरोप लगाया है कि कोसीकलां पुलिस और राजस्व कर्मचारी भी आरोपितों के दबाव में काम करते हैं। तेजराम की शिकायत पर मथुरा पुलिस ने थाना प्रभारी कोसीकलां को जाँच और जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

ऑपइंडिया से बात करते हुए तेजराम ने बताया, “जब वे युवा थे तब गाँव में इतनी मुस्लिम आबादी नहीं थी। बाद के सालों में न केवल मुस्लिमों की आबादी तेजी से बढ़ी है, बल्कि गाँव के कुछ हिंदू घर छोड़कर जाने को भी मजबूर किए गए हैं। करीब 20 साल से गाँव में हिन्दू प्रधान नहीं बना है। वर्तमान मुस्लिम प्रधान भी आरोपितों का ही साथ देता है।” उनका दावा है कि कुछ समय पहले मुस्लिमों ने एक दलित महिला को बुरी तरह पीटा, फिर उसे समझौता करने को मजबूर किया। हिंदुओं को फँसाने के लिए फर्जी केस भी कई बार दर्ज करवाने की बात उन्होंने कही है।

यूपी में 7 बच्चों का बाप करने जा रहा था 5वाँ निकाह: 7 बच्चों संग मिलकर दूसरी बीवी ने शौहर को पीटा, नई दुल्हन मौके से हुई फरार

उत्तर प्रदेश के सीतापुर में 7 बच्चों का बाप चुपके से 5वीं निकाह कर रहा है। इसी दौरान उसकी दूसरी पत्नी और बच्चे अपने रिश्तेदारों के साथ पहुँचकर दुल्हा बने 45 साल के शफी अहमद की जमकर धुनाई कर दी। इस दौरान निकाह करने वाली 5वीं दुल्हन मौके से फरार हो गई।

निकाह के मौके पर दूसरी बीवी का 5वीं दुल्हन के परिजनों के साथ भी जमकर हंगामा हुआ। इस दौरान दोनों में मारपीट भी हो गई। यह तमाशा एक घंटे से अधिक समय तक चलता रहा। बाद में मामला पुलिस तक पहुँचा और थाने में शिकायत दर्ज कराई गई।

दरअसल, 45 वर्षीय शफी अहमद शहर कोतवाली क्षेत्र के पटिया मोहल्ले का रहने वाला है और वह रोड की ठेकेदारी का काम करता है। अहमद ने पहली बीवी को तलाक देने के बाद दूसरी शादी की थी। इससे उसे 7 बच्चे हैं। उसने दूसरी बीवी को भी कुछ समय बाद तलाक दे दिया। हालाँकि, बच्चों को वह अपने साथ ही रखा।

आरोप है कि शफी अहमद ने 5वीं निकाह करने के लिए उसने अपनी संपत्ति को पाँचवीं बीवी के नाम करने जा रहा था। इसकी खबर जैसे ही दूसरी बीवी को मिली, वह बच्चों और रिश्तेदारों के साथ निकाह वाली जगह पहुँच गई। 

शफी अहमद के बच्चों का कहना है कि उसकी अम्मी से निकाह करने के बाद उसके अब्बू ने उसे भी तलाक दे दिया। उसके बाद चुपके से दो और निकाह किया और दोनों को हज पर भेज दिया है। उनका आरोप है कि मंगलवार (30 अगस्त 2022) को उसके अब्बू चुपके से 5वाँ निकाह कर रहे थे।

आरोपित की बेटी का कहना है कि उसके 4 नाबालिग भाई-बहन हैं और उसके अब्बू 6 महीने से परिवार को खर्चा भी नहीं दे रहे हैं। बेटी का आरोप है कि जब वे खर्चा माँगते हैं तो शफी अहमद झूठा आरोप लगाने लगता था।

बच्चों की शिकायत के बाद पुलिस ने शफी अहमद को हिरासत में ले लिया। हालाँकि, उसने पुलिस के सामने स्वीकार किया कि वह अपने परिवार को खर्चा देगा। इसके बाद पुलिस ने उसे चेतावनी देकर रिहा कर दिया।

सोनिया गाँधी की माँ पाओला मायनो का निधन, PM मोदी ने दी श्रद्धांजलि: इटली से ही कॉन्ग्रेस की बैठक में शामिल हुए राहुल-प्रियंका

कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी की माँ पाओला माइनो का निधन शनिवार (27 अगस्त, 2022) को हो गया है। सोनिया गाँधी की माँ के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने दुःख जताया है। कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सोनिया गाँधी (Sonia Gandhi) की माँ पाओला माइनो के निधन की जानकारी दी है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा “सोनिया गाँधी की माँ पाओला माइनो का शनिवार (27 अगस्त, 2022) को इटली में उनके घर पर निधन हो गया। अंतिम संस्कार कल 30 अगस्त को हुआ।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोनिया गाँधी की माँ के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ट्वीट किया, “सोनिया गाँधी जी की माँ पाओला मायनो के निधन मैं श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं पूरे परिवार के साथ हैं।”

कॉन्ग्रेस समर्थक पत्रकार आदेश रावल ने बताया है कि पाओला माइनो के निधन के बाद सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी तीनों ही इटली में थे। इसके बाद 28 अगस्त को हुई कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में गाँधी परिवार के तीनों नेता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए। रावल ने कॉन्ग्रेस नेता के हवाले से यह भी कहा है कि गाँधी परिवार पहली बार विदेशी धरती से CWC की बैठक में शामिल हुआ।

आदेश रावल ने ट्वीट किया, “27 अगस्त को सोनिया गाँधी की माँ का निधन हो गया था। इसके बाद, गाँधी परिवार के तीनों सदस्य 28 को CWC की बैठक में इटली से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए शामिल हुए। इसी बीच एक नेता ने कहा है कि पहली बार परिवार विदेशी धरती से CWC की बैठक कर रहा है।”

खजुराहो से लापता हिंदू युवती आगरा में बरामद, दोनों पैर फ्रैक्चर मिले: हिंदू संगठनों ने लव जिहाद का लगाया आरोप, बोले- मुस्लिम लड़का भगाकर लाया है

मध्य प्रदेश के खजुराहो (Khajuraho, Madhya Pradesh) से लापता हुई एक हिंदू लड़़की उत्तर प्रदेश के आगरा (Agra, Uttar Pradesh) में बरामद की गई है। आगरा के एमएम गेट थाना पुलिस ने बुधवार (31 अगस्त 2022) को 20 वर्षीय युवती को अस्पताल से बरामद किया। युवती के दोनों पैरों में फ्रैक्चर है और उसे दिखाने के लिए अस्पताल हुई थी।

इसकी सूचना मिलते हुए हिंदू संगठनों के पदाधिकारी मौका पर पहुँच गए। उनका आरोप है कि लड़की लव जेहाद की पीड़ित है। उनका आरोप है कि लड़की को एक मुस्लिम लड़का बहला-फुसलाकर लड़की को भगा लाया है। वहीं, पुलिस ने युवती को आशा ज्योति केंद्र में रखा है और उसके परिजनों को सूचित कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, युवती छतरपुर जिले के खजुराहो की रहने वाली है और करीब एक सप्ताह पहले वह अपने घर से लापता हो गई थी। युवती की गायब होने के बाद परिजनों ने खजुराहो के राजनगर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

युवती के गायब होने के बाद से ही पुलिस लगातार उसे ट्रेस करने की कोशिश कर रही थी। इसी दौरान पुलिस ने जब बुधवार को युवती का मोबाइल लोकेशन चेक किया तो वह आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज का आया।

इसके बाद मेडिकल कॉलेज के नजदीकी थाना एमएम गेट को सूचित किया गया। इसके साथ ही पुलिस ने युवती की फोटो भी साझा की। इसके बाद स्थानीय पुलिस युवती की तलाश में अस्पताल पहुँची। दी गई जानकारी के आधार पर पुलिस ने छानबीन शुरू की तो एक युवती अस्पताल के आपातकालीन विभाग में दिखाते हुए मिली।

इसके बाद पुलिस ने उसे पकड़ लिया। पूछताछ मेें युवती ने पुलिस को बताया कि वह शनिवार (27 अगस्त 2022) को आगरा आई थी। उसने पुलिस को बताया कि गिरने के कारण उसके दोनों पैरों में फ्रैक्चर हो गया है।

फिलहाल पुलिस ने उसे आशा ज्योति केंद्र में भेज दिया। इसके साथ लड़की के परिजनों को इसकी सूचना दे दी गई है। वहीं, ऑपइंडिया से बात करते हुए हिंदू संगठन के नेता गोविंद पराशर ने कहा कि हिंदू संगठनों से लड़की का व्यवहार काफी सहयोगात्मक रहा।

गोविंद पराशर ने कहा कि आरोपित लड़का संगठन के लोगों को देखते ही वहाँ से भाग निकला। उन्होंने बताया कि लड़की के घर वालों को सूचित कर दिया गया है और वो अपनी बेटी को लेने के लिए खजुराहो से निकल चुके हैं।

गुलाम नबी के लिए कॉन्ग्रेस से ‘आज़ाद’ होंगे 5000 कार्यकर्ता, पहले ही हो चुके हैं 100+ इस्तीफे: कश्मीर में खात्मे की ओर पार्टी

गुलाम नबी आजाद के कॉन्ग्रेस छोड़ते ही यह कहा जा रहा था कि जम्मू कश्मीर में पार्टी का कमजोर होना तय है। गुलाम नबी आजाद को पार्टी छोड़े अभी एक सप्ताह भी नहीं हुआ है। लेकिन, जिस तरह से एक के बाद एक कई कार्यकर्ता कॉन्ग्रेस छोड़कर उनके समर्थन में आ रहे हैं, इससे उनका सियासी दबदबा सामने आ रहा है।

हालाँकि, कॉन्ग्रेस से ‘आजाद’ हुए गुलाम नबी पार्टी को एक और झटका देने जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि गुरुवार (1 सितंबर, 2022) को कॉन्ग्रेस के 5000 कार्यकर्ता पार्टी छोड़कर गुलाम नबी आजाद को समर्थन देंगे। यही नहीं, आम आदमी पार्टी के 50 से अधिक नेताओं ने भी इस्तीफा देते हुए आजाद को समर्थन देने का ऐलान किया है।

गौरतलब है कि गुलाम नबी आजाद ने शुक्रवार (26 अगस्त, 2022) को कॉन्ग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने इस्तीफा देते हुए कहा था, “मैं भारी मन से यह कदम उठा रहा हूँ। पार्टी को ‘भारत जोड़ो यात्रा’ से पहले ‘कांग्रेस जोड़ो यात्रा’ निकालनी चाहिए थी।” आजाद ने कहा था “कांग्रेस लड़ने की अपनी इच्छाशक्ति और क्षमता खो चुकी है।”

हालाँकि, गुलाम नबी आजाद के इस्तीफे के बाद कॉन्ग्रेस के कई नेताओं ने अपने बयानों से यह साबित करने की कोशिश की थी कि उनके इस्तीफे से पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन, जिस तरह से आज जम्मू कश्मीर में पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ता उनके समर्थन में आ चुके हैं, उससे उनकी ताकत का पता चल रहा है। साथ ही, गुरुवार को 5000 कार्यकर्ताओं का कॉन्ग्रेस से इस्तीफा देना कॉन्ग्रेस के लिए बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।

बताया जा रहा है कि कॉन्ग्रेस के ये सभी 5000 कार्यकर्ता उरी में होने वाले एक कार्यक्रम में सामूहिक रूप से इस्तीफा देते हुए गुलाम नबी का समर्थन करेंगे। इससे पहले बुधवार (31 अगस्त) को 42 और मंगलवार (30 अगस्त) को पूर्व उप-मुख्यमंत्री ताराचंद समेत 64 लोगों ने कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। कुल मिलाकर अब तक कॉन्ग्रेस से 100 कार्यकर्ता इस्तीफा देकर गुलाम नबी आजाद का समर्थन कर चुके हैं।

बता दें, गुलाम नबी आजाद ने कॉन्ग्रेस से इस्तीफा देकर नई पार्टी बनाने का ऐलान किया था। लेकिन, वह पार्टी का गठन कब करेंगे और उनकी पार्टी का नाम क्या होगा, इस बारे में अब तक कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

‘जैकलीन फर्नांडिस 26 सितंबर को हाजिर हों’: पाटियाला हाउस कोर्ट ने भेजा समन, जबरन वसूली मामले में ED ने बनाया है आरोपित

बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस (Bollywood Actress Jacqueline Fernandez) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) से जुड़े एक मामले में एक्ट्रेस को 26 सितंबर 2022 को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में हाजिर होने का समन भेजा गया है। इससे पहले 12 सितंबर को दिल्ली पुलिस अभिनेत्री से पूछताछ भी करेगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate -ED) ने 215 करोड़ रुपए के वसूली के मामले में जैकलीन फर्नांडिस को आरोपित बनाते हुए 17 अगस्त 2022 में पूरक चार्टशीट दाखिल किया था। इस चार्टशीट का दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट (Delhi Patiala House Court) ने संज्ञान लिया है, जिसके बाद दिल्ली की अदालत ने अभिनेत्री को समन भेजा।

प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) के अनुसार, अभिनेत्री जैकलीन जानती थी कि ठग सुकेश चंद्रशेखर (Sukesh Chandrashekhar) जबरन वसूली करता था। ईडी के मुताबिक, गवाहों और आरोपियों के बयानों से पता चला है कि जैकलीन वीडियो कॉल पर सुकेश से लगातार संपर्क में थी।

ईडी ने अपनी चार्टशीट में इस बात का जिक्र किया है कि सुकेश चंद्रशेखर ने अभिनेत्री को महंगे तोहफे देना कबूल किया है। जैकलीन पर यह भी आरोप है कि उन्होंने चंद्रशेखर से 10 करोड़ रुपए के महँगे गिफ्ट भी लिए हैं।

ED ने अभिनेत्री के करोड़ों के निवेश को भी किया था अटैच

कुछ समय पहले ही ED ने जैकलीन फर्नांडिस के कई फिक्स्ड डिपॉजिट जब्त किए थे। वहीं अभिनेत्री ने इस मामले में बताया था कि इन फिक्स्ड डिपॉजिट का किसी भी अपराध से कोई लेना-देना नहीं है और न ही इन्हें अवैध तरीके से खोला गया है। उन्होंने कहा था, “ये मेरी तभी की कमाई से खोला गया था, जब पता भी नहीं था कि इस दुनिया में सुकेश चंद्रशेखर नाम का कोई व्यक्ति अस्तित्व में भी है।”

आपको बताते चलें कि जैकलीन ने दिल्ली के छतरपुर स्थित गुरुजी द्वारा स्थापित मंदिर में दर्शन किए थे और वे अपनी इन तमाम किस्म की मुश्किलों से बचने के लिए गुरु मंत्र का जाप कर रही हैं। अभिनेत्री को उनके एक करीबी ने छतरपुर में गुरुजी के आश्रम जाने की सलाह दी थी।

आज ईदगाह मैदान में गणेश उत्सव से ‘दर्द’, कभी यहीं कॉन्ग्रेस सरकार ने देशभक्तों पर चलवाई थी गोली: तिरंगा फहराना भी था गुनाह

कर्नाटक के हुबली का ईदगाह मैदान चर्चा में बना हुआ है। चर्चा में इसीलिए, क्योंकि यहाँ गणेश उत्सव के आयोजन के विरोध में राज्य का वक्फ बोर्ड खड़ा हो गया है। तमाम मुस्लिम संगठन आयोजन के विरोध में हैं। कर्नाटक उच्च-न्यायालय से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इस मामले की सुनवाई हुई। अंततः हाईकोर्ट ने आयोजन के लिए स्वीकृति दे दी। मुस्लिम पक्षों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलील पेश करते हुए अधिवक्ता और सपा नेता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि ये ‘ईदगाह’ मैदान है, इसीलिए यहाँ धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं हो सकते।

ईदगाह मैदान पर तिरंगा फहराने का ऐलान, आंदोलन के केंद्र में थीं उमा भारती

वैसे हुबली के इस मैदान का इतिहास भी कुछ ऐसा ही रहा है। कभी यहाँ राष्ट्रध्वज तिरंगा फहराए जाने पर बवाल हो गया था। चर्चा के केंद्र में थीं उमा भारती, जो तब भाजपा का एक मुखर चेहरा हुआ करती थीं। 1992 में बाहरी विध्वंस होने के बाद देश में माहौल भी संवेदनशील था। ये घटना उसके 2 साल बाद की है, अगस्त 1994 की। ये वो मैदान है, जिसका इतिहास कित्तूर की रानी चेनम्मा से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने सन् 1824 में अंग्रेजों से लोहा लिया था।

इस ‘ईदगाह मैदान’ का विवाद अभी ही नहीं, बल्कि 90 के दशक में भी सामने आया था जब वक्फ बोर्ड ने इसे अपना बताते हुए अन्य प्रकार के कार्यक्रमों को लेकर आपत्ति जताई थी। कर्नाटक में जब चुनाव का माहौल था, तभी ये विवाद सामने आ गया था। याद दिला दें कि नवंबर-दिसंबर 1994 में हुए इन चुनावों में जहाँ कॉन्ग्रेस सिमट गई थी, वहीं एचडी देवगौड़ा के नेतृत्व में ‘जनता दल’ की सरकार बनी थी और बीएस येदियुरप्पा की अगुवाई में भाजपा 40 सीटों के साथ एक बड़ी ताकत बन कर उभरी थी।

अंजुमन-ए-इस्लामिया ने 1.5 एकड़ के मैदान पर अपना दावा ठोक रखा था, जो भाजपा को नागवार गुजरा। हालाँकि, भाजपा का कहना है कि नगरपालिका के अधीन होने के कारण ये सरकारी संपत्ति है। कानूनी लड़ाई के बाद अंजुमन-ए-इस्लामिया ने इसका अधिकार ले लिया था और यहाँ उसे साल में 2 बार नमाज की अनुमति मिली थी। बाकी किसी कार्यक्रम के लिए यहाँ अनुमति नहीं थी। किन्हीं अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए इसका इस्तेमाल हो न हो, तब भी ये मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित चल रहा था।

भाजपा का वहाँ तिरंगा फहराने का ये पहले प्रयास नहीं था। बीएस येदियुरप्पा राज्य में हिंदुत्व की मुखर आवाज़ बनने लगे थे और लिंगायत मठ व अनुयायियों ने उन्हें अपना नेता मानना शुरू कर दिया था। भाजपा इससे पहले भी 5 बार ईदगाह मैदान में तिरंगा फहराने की कोशिश कर चुकी थी। 1994 में कर्नाटक में कॉन्ग्रेस की सरकार थी और वीरप्पा मोइली मुख्यमंत्री थे, जो बाद में मनमोहन सिंह की केंद्र सरकार में 10 साल मंत्री भी रहे।

कॉन्ग्रेस सरकार ने देशभक्तों पर चलवाई गोली: 6 मौतें, 100+ घायल

उनकी सरकार ने पहले से ही तिरंगा फहराने से भाजपा नेताओं को रोकने के लिए सारी तैयारियाँ कर ली थीं। स्वतंत्रता दिवस के एक दिन पहले ही हुबली को सील कर दिया गया था। ‘रैपिड एक्शन फोर्स (RAF)’ के जवानों को बड़ी संख्या में तैनात किया गया था। वीरप्पा मोइली ने तब कहा था, “मैं कल्याण सिंह नहीं हूँ कि अपनी आँखें मूँद लूँ और हिंसा होने दूँ।” उनका सीधा तंज अयोध्या स्थित बाबरी ढाँचे के विध्वंस की तरफ था, क्योंकि तब भाजपा के कल्याण सिंह ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे।

याद कीजिए, कैसे कल्याण सिंह ने 1992 में बाबरी विध्वंस के समय प्रशासन को आदेश दिया था कि रामभक्तों पर गोली नहीं चलनी चाहिए। इसके लिए उन्हें मुख्यमंत्री का पद तक गँवाना पड़ा, लेकिन फिर भी उन्होंने कहा कि उन्हें इसका न कोई दुःख है और न ही पछतावा। सुप्रीम कोर्ट में उन्हें लिख कर देना पड़ा था था कि वो बाबरी को बचाएँगे, लेकिन उन्होंने एक भी निर्दोष रामभक्त को नुकसान नहीं होना दिया। उन्होंने अपनी सरकार इसके लिए बलिदान कर डाली।

वीरप्पा मोइली ने हुबली में कर्फ्यू लगवा दिया था। बेंगलुरु में भाजपा नेता सिकंदर बख्त को गिरफ्तार कर लिया गया। सिकंदर बख्त भाजपा का एक जाना-पहचाना नाम थे, जो बाद में इंद्र कुमार गुजराल और अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में मंत्री रहे। उन्हें ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया था। वो भाजपा के उपाध्यक्ष थे। उन्हें 1992 में राज्यसभा में भाजपा का नेता चुना गया था। जून 1996 में जब अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिनों की सरकार को गिरा दिया गया था, उसके बाद फिर से उन्होंने इस पद को सँभाला।

कर्नाटक के हुबली मैदान में झंडा फहराने के लिए अभियान चलाने वाले नेताओं में आगे की पंक्ति में थे, इसीलिए उन्हें कॉन्ग्रेस की राज्य सरकार ने गिरफ्तार कर लिया। लेकिन, तब सांसद रहीं उमा भारती किसी तरह हुबली में एंट्री करने में कामयाब रहीं और ऐलान किया कि किसी भी कीमत पर ईदगाह मैदान में तिरंगा फहराया जाएगा। 15 अगस्त को भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के हुजूम ने मैदान की तरफ कूच कर दिया। कर्नाटक के इस आंदोलन में बेंगलुरु के दिवंगत दिग्गज नेता अनंत सिंह का भी बड़ा योगदान था, जो मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे।

लेकिन, पुलिस ने बल प्रयोग करना शुरू कर दिया। बीएस येदियुरप्पा और उमा भारती जैसे बड़े नेता गिरफ्तार कर लिए गए। लोगों में भगदड़ मच गई और वो आक्रोशित हो उठे। इसके बाद पुलिस ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें 5 लोग मारे गए। ठीक उसी तरह, जैसे उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार ने रामभक्तों पर गोली चलवाई थी। बस तबाही का स्तर तब ज्यादा था। 100 के करीब लोग हुबली में पुलिस के बल-प्रयोग और गोली से घायल भी हुए।

भाजपा ने भी कॉन्ग्रेस सरकार की इस करतूत के विरोध में अभियान चलाया। इस घटना के 4 दिनों बाद हुबली में ‘मोइली हटाओ’ सम्मेलन का आयोजन किया गया। पूरे हुबली में ऐसी कई बैठकें हुईं। पुलिस ने लोगों के इस शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को भी बर्दाश्त नहीं किया और फिर से गोलीबारी की। एक महिला मारी गई। लोग भी और उग्र हो गए। वीरप्पा मोइली मुस्लिम तुष्टिकरण में पूरी तरह डूब चुके थे। पुलिस के बल-प्रयोग से बात और बिगड़ ही रही थी।

इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री ने ‘आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम’, अर्थात TADA लगाने की धमकी दे डाली। बगल के संवेदनशील शहर भद्रावती में भी सांप्रदायिक तनाव हुआ। भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कह दिया कि वीरप्पा मोइली का भविष्य तभी तय हो गया था, जब उन्होंने निर्दोष देशभक्तों पर गोली चलाने का आदेश दिया। उन्होंने वीरप्पा मोइली को एक दशक पहले की एक घटना की याद दिलाई।

कर्नाटक में भाजपा का उदय, बाद में उमा भारती को देना पड़ा था था CM पद से इस्तीफा

दरअसल, ये घटना 21 जुलाई, 1980 की थी, जिसकी याद आडवाणी ने मोइली को दिलाई थी। तब किसान विभिन्न माँगों को लेकर नरगुंद में प्रदर्शन कर रहे थे। पूरे देश में विपक्षी दल महँगाई के विरोध में आंदोलन चला रहे थे और यहाँ के किसानों ने उन्हें समर्थन दिया। कॉन्ग्रेस के आर गुंडु राव ने किसानों पर गोली चलवा दी, जिससे कई किसान मारे गए थे। परिणाम ये हुआ कि उनकी सरकार चली गई। आडवाणी की भविष्यवाणी सच हुई और 1994 में भी मोइली की बुरी हार हुई।

हालाँकि, इसके अगले साल जब स्वतंत्रता दिवस आया तो एचडी देवगौड़ा मुख्यमंत्री थे। वो एक चतुर नेता हैं, जिन्होंने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए अपनी शातिर बुद्धि लगाई। विधानसभा में बीएस येदियुरप्पा से उनकी बहस भी हुई। बाद में उन्होंने भी कई नेताओं को हिरासत में लेकर मुस्लिमों की सभाओं को संबोधित करना शुरू कर दिया। इससे मुस्लिम समुदाय में वो अपनी पैठ बनाना चाहते थे। कुछ मुस्लिमों से ही ईदगाह मैदान में तिरंगा फहरवा कर उन्होंने दावा कर दिया कि मुद्दा ख़त्म हो गया है। उन्होंने मुस्लिमों को खुश करने 4% आरक्षण भी दिया था।

बाद में यही मामला उमा भारती के लिए तब सिरदर्द बन कर आया, जब बंद हुए केस को वापस खोल दिया गया। उमा भारती तब मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री थीं। उन्हें इस्तीफा देकर हुबली की अदालत में आत्म-समर्पण करना पड़ा। इस तरह कर्नाटक की एक घटना से न सिर्फ वहाँ, बल्कि एक दशक बाद एक दूसरे राज्य में भी सीएम बदल गया। उमा भारती का इस्तीफा, आत्म-समर्पण और उनका जेल जाना उस समय की सबसे बड़ी खबर थी।

भाजपा के लिए ईदगाह अकेला ऐसा मुद्दा नहीं था। इस मैदान से पहले आतंकियों की धमकी के बाद मुरली मनोहर जोशी ने जम्मू कश्मीर स्थित श्रीनगर के लाल चौक पर भी झंडा फहराया था। उसके बाद ये मैदान मुद्दा बना। वीरेंद्र पाटिल को मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद कॉन्ग्रेस से लिंगायतों में गुस्सा था। उस समय अनंत सिंह ने उनके बीच भाजपा को स्थापित करना शुरू किया। असल में मुस्लिम पक्ष ने ईदगाह मैदान में जो तिरंगा फहराया, उसका उद्देश्य भाजपा से क्रेडिट लूटना और आडवाणी की चेतावनी भी थी।

2001 में जब VHP (विश्व हिन्दू परिषद) के तत्कालीन अध्यक्ष अशोक सिंघल हुगली पहुँचे थे, तब भी उनके दौरे का खासा विरोध हुआ और हिंसा भड़क गई थी। तब भी एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। 1994 के अंत में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा की सीटें 10 गुना बढ़ कर 4 से 40 हो गई थी। पार्टी का वोट प्रतिशत भी 12.85% बढ़ गया था। कॉन्ग्रेस 178 से सीधा 34 पर पहुँच गई, ये था लोगों के गुस्सा का अंजाम। मोइली को कुर्सी गँवानी पड़ी।