प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त, 2022) पर गुलामी की हर चीज से मुक्त होने की बात कही थी। इसके बाद, ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि कई स्थानों के नाम बदले जाएँगे। उनमें से राजधानी दिल्ली के ‘राजपथ’ का नाम भी शामिल था। बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने राजपथ का नाम बदलने का फैसला किया है।
Government of India to rename New Delhi’s historic Rajpath & Central Vista lawns as ‘Kartavya Path’: Sources pic.twitter.com/9wgi7j6fx8
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली के राजपथ का नाम बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ रखने का विचार किया जा रहा है। इस बारे में, बुधवार (7 सितंबर, 2022) को नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में राजपथ का नाम कर्तव्य पथ करने का प्रस्ताव रखा जाएगा। वहाँ ही इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई जाएगी।
बताया जा रहा है कि इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा से लेकर राष्ट्रपति भवन तक के पूरे मार्ग का नाम बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ किया जाना है। बता दें कि अंग्रेजी हुकूमत के समय राजपथ को ‘KingsWay ‘ कहा जाता था। किंग्सवे, अंग्रेज राजा जॉर्ज पंचम के नाम पर रखा गया था। हालाँकि, अब ऐसा लग रहा है सरकार अंग्रेजी हुकूमत से लेकर मुगलिया हुकूमत तक के सभी नामों में बदलाव करने का विचार कर रही है।
ये भी याद दिला दें कि सरकार ने हाल ही में भारतीय सेना के ध्वज से सेंट जॉर्ज क्रॉस को हटाया था। जबकि, इससे पहले जिस सड़क पर प्रधानमंत्री आवास स्थित है, उसका नाम भी बदलकर रेसकोर्स रोड से ‘लोक कल्याण मार्ग’ किया गया था।
केरल के सेंसर बोर्ड ने 27 जू,न 2022 को फिल्म निर्देशक अली अकबर उर्फ रामसिम्हन अबूबकर (Ali Akbar aka Ramasimhan Aboobakker) की आगामी मलयालम फिल्म ‘Puzha mutual Puzha Vare’ (नदी से नदी तक) को सर्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया था। यह फिल्म केरल में वर्ष 1921 में हुए मोपला नरसंहार पर आधारित है। बताया जाता है कि मोपला मुस्लिमों ने जमकर हिन्दुओं का नरसंहार किया था और बाद में इतिहासकारों ने इसे ‘जमींदारों के खिलाफ विद्रोह’ का नाम दे दिया था।
अली अकबर उर्फ रामसिम्हन ने इस संदर्भ में ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, “सेंसर बोर्ड ने मुझे अपनी फिल्म में तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाते हुए फटकार लगाई है और फिल्म के कुछ सीन्स कट करने के लिए कहे हैं।” यह निश्चित रूप से मोपला मुस्लिमों द्वारा हिंदुओं के नरसंहार को क्लीन चिट देने जैसा है।
ऑपइंडिया से बात करते हुए रामसिम्हन ने कहा कि वो लोग कई सीन्स पर कैंची चलाकर फिल्म के किरदार बदल देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने अपनी समीक्षा समिति की बैठक के दौरान उन्हें अपना मुस्लिम नाम अली अकबर को निर्देशक के रूप में इस्तेमाल करने के लिए मजबूर किया था। मलयाली फिल्मों के निर्देशक अली अकबर ने दिसंबर 2021 में इस्लाम मजहब छोड़ने का ऐलान किया था। जब मजहबी कट्टरपंथियों ने सीडीएस जनरल बिपिन रावत का हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद खुशी का इजहार किया था, तब उन्होंने 13 जनवरी 2022 को पत्नी लुसिम्मा के साथ हिन्दू धर्म अपनाया था। उसके बाद वे रामसिम्हन के नाम से जाने जाते हैं।
अली अकबर ने कहा था, “करीब आठ दशक पहले मालाबार में इसी तरह एक व्यक्ति ने इस्लाम त्याग कर अपना नाम रामसिम्हन रखा था। कल अली अकबर को राम सिंह कहा जाएगा। यह सबसे अच्छा नाम है।” रामसिम्हन और उनके भाई दयासिम्हन, दयासिम्हन की पत्नी कमला, उनके रसोइया राजू अय्यर और परिवार के अन्य सदस्यों को आजादी से ठीक दो हफ्ते पहले 1947 में इस्लाम से हिंदू धर्म अपनाने के कारण इस्लामवादियों ने मार डाला था।
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) की समीक्षा बैठक के दौरान रामसिम्हन से सवाल किया गया था कि उन्होंने फिल्म के निर्देशक के रूप में हिन्दू नाम का इस्तेमाल क्यों किया। सेंसर बोर्ड ने यह बात जोर देकर कही थी कि वह अपने इस्लामी नाम अली अकबर का उपयोग निर्देशक के रूप में करते। दरअसल, रामसिम्हन ने फिल्म के निर्देशक के रूप में अपने हिंदू नाम और निर्माता के रूप में अपने इस्लामी नाम का उपयोग करने का फैसला किया था, लेकिन बोर्ड इस बात से सहमत नजर नहीं आया। उनके मुताबिक, निर्देशक के रूप में भी उनका नाम अली अकबर ही होना चाहिए।
उन्होंने ऑपइंडिया को बताया, “मुझे लगता है कि उन्हें एक समस्या यह भी है कि एक मुस्लिम व्यक्ति ने हिंदू धर्म अपना लिया और हिंदुओं के मालाबार नरसंहार पर एक फिल्म बना रहा है।”, उन्होंने कहा, “वे नहीं चाहते कि यह संदेश जाए।”
केरल सेंसर बोर्ड द्वारा फिल्म को सर्टिफिकेट देने से इनकार करने के बाद, उन्होंने समीक्षा के लिए फिल्म को सीबीएफसी (CBFC) के पास भेज दिया। निर्देशक के अनुसार, समिति की 2 बैठकों में फिल्म के किरदार को बदलने वाले कटों का सुझाव दिया गया था। अकबर को संदेह है कि स्थानीय सेंसर बोर्ड ने केंद्रीय बोर्ड के फैसले को प्रभावित किया है और फिल्म की रिलीज को रोकने के लिए उन पर PFI का दबाव है।
यह पूछे जाने पर कि केंद्रीय बोर्ड इस तरह से क्यों व्यवहार कर रहा है, निर्देशक ने इस्लामवादियों और वामपंथियों का जिक्र करते हुए कहा, “कृपया विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ के के फेमस डायलॉग को याद करें- ‘सरकार उनकी है तो क्या हुआ, सिस्टम तो हमारा है’।
मोपला नरसंहार
मोपला नरसंहार को लेकर इतिहास में कई हृदय विदारक घटनाएँ दर्ज हैं। एक शिशु अपनी माता का स्तनपान कर रहा था। मोपला मुस्लिमों ने उस बच्चे को उसकी माता की छाती से छीन कर उसके दो टुकड़े कर दिए। एक जगह एक महिला का बार-बार इस तरह क्रूरता से रेप किया गया कि उसकी मृत्यु हो गई। उसका छोटा सा बच्चा काफी देर तक अपनी मरी हुई माँ के शरीर पर खेलता रहा और स्तनपान करने की कोशिश करता रहा। 10,000 हिन्दुओं का नरसंहार किया गया। उनकी जमीनें, मंदिर और खेत – सब छीन कर नष्ट कर दी गई।
दिल्ली पुलिस ने शनिवार (3 सितंबर, 2022) को फेक सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए लड़की को बदनाम करने के आरोप में आस मोहम्मद नाम के युवक को गिरफ्तार किया है। पीड़िता ने आस मोहम्मद पर उसका पीछा करने का भी आरोप लगाया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आरोपित आस मोहम्मद ने दिल्ली में रहने वाली 12वीं की एक छात्रा से सोशल मीडिया के जरिए दोस्ती की थी। इस दौरान उसने खुद को सेना का जवान बताते हुए अपना नाम ‘आसु राणा बताया था। इसके बाद पीड़ित लड़की और आरोपित के बीच सोशल मीडिया में ही बातचीत होने लगी और फिर दोनों ने अपने मोबाइल नंबर एक्सचेंज किए थे।
बताया जा रहा है कि आरोपित और पीड़िता इस दौरान चार-पाँच बार मिल भी चुके थे। लेकिन, जब लड़की की माँ को इनकी दोस्ती के बारे में पता चला और आरोपित की सच्चाई भी सामने आ गई तब लड़की ने दोस्ती तोड़ दी थी।
जब लड़की ने आस मोहम्मद से संपर्क बंद कर दिया, तब उसने लड़की को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया पर कई फेक एकाउंट्स बनाए। इन एकाउंट्स के जरिए आरोपित ने पीड़िता के दोस्तों और टीचर्स से संपर्क किया। साथ ही इन अकाउंट्स में उसने अश्लील फोटोज शेयर करने शुरू कर दिए। साथ ही इसने, फेक अकाउंट के जरिए, पीड़िता के टीचर्स और दोस्तों से पैसे भी माँगे थे। जिन लोगों ने उसे पैसे देने से मना कर दिया, उसे यह गाली देता था।
इसके बाद, लड़की ने तंग आकर इस मामले की शिकायत उत्तरी जिले की पुलिस से की। जहाँ, पुलिस ने जाँच के बाद आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने इस मामले में आरोपित के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 419, 500, 354-डी, 509 और पॉस्को एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।
इस मामले में पुलिस का कहना है जाँच के दौरान, उस इंस्टाग्राम अकाउंट की जानकारी निकाली गई। इससे पता चला कि इंस्टाग्राम अकाउंट को बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया मोबाइल नंबर उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के एक गाँव के निवासी आस मोहम्मद के नाम पर था। इसके बाद आरोपित को गिरफ्तार किया गया है। उसके पास से दो सिम कार्ड और एक मोबाइल फोन बरामद किया गया है। आरोपित, मुंबई के कलिना कैंट में भारतीय सेना में कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर रसोइया के रूप में काम कर चुका है। इसका पिछला रिकॉर्ड भी निकाला जा रहा है।
युवा क्रिकेटर अर्शदीप सिंह को ‘खालिस्तानी’ कहे जाने पर भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा (Manjinder Singh Sirsa) ने सोमवार (5 सितंबर, 2022) को ‘ऑल्ट न्यूज’ के मोहम्मद जुबैर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने मोहम्मद जुबैर के खिलाफ कथित तौर पर पाकिस्तान एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने और कैच छोड़ने पर क्रिकेटर अर्शदीप सिंह को ‘खालिस्तानी’ कहने का आरोप लगाया है।
Police complaint agnst @zoo_bear who worked with Pak agencies to set “Khalistani” narrative agnst #ArshdeepSingh in India. Zubair’s screenshots were used by Pak handles to defame India and fuel hate campaign against Sikhs in India. He was a part of planned conspiracy agnst Sikhs pic.twitter.com/wtQAdr8May
पुलिस शिकायत में सिरसा ने बताया कि जुबैर द्वारा शेयर किए गए कुछ ट्वीट ऐसे अकाउंट से किए गए से थे, जिन्हें क्रिकेटर को ‘खालिस्तानी’ कहने और उनके खिलाफ नैरेटिव बनाने के उद्देश्य से बनाया गया था। उन्होंने कहा कि कैसे जुबैर के ट्वीट को पाकिस्तानियों द्वारा सिख विरोधी भावनाओं को भड़काने और भारत को बदनाम करने के साथ-साथ अशांति फैलाने के लिए आगे बढ़ाया गया था। उन्होंने दिल्ली पुलिस आयुक्त से जुबैर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और जाँच शुरू करने का अनुरोध किया है।
His screenshots were used by Pak handles to defame India and fuel hate campaign against Sikhs in India. This is a planned conspiracy to create communal disharmony in our nation. We demand an enquiry into who supported Zubair in creating this “Khalistani” agenda@ANI@PTI_Newspic.twitter.com/DeXoOHrIqK
सिरसा ने आगे बताया कि कैसे मोहम्मद जुबैर ने क्रिकेटर को ‘खालिस्तानी’ कहने वाले स्क्रीनशॉट ढूँढने में मेहनत की और उसे अपने ट्विटर पर साझा किया, जिसमें दावा किया जा रहा है कि 4 सितंबर को एशिया कप 2022 में पाकिस्तान से हारने के बाद नाराज भारतीय क्रिकेटर अर्शदीप को गाली दे रहे हैं और उन्हें खालिस्तानी कह रहे हैं। सिरसा ने कहा कि जुबैर के ट्वीट का इस्तेमाल पाकिस्तानी एजेंसियों ने भारत को बदनाम करने और देश में सिखों के खिलाफ नफरत फैलाने के लिए किया।
उन्होंने कहा कि जुबैर का यह कदम भारत में सांप्रदायिक वैमनस्य पैदा करने की एक सोची-समझी साजिश थी। सिरसा ने इस बात की भी जाँच कराने की माँग की कि इस ‘खालिस्तानी’ एजेंडे को बनाने में किसने जुबैर का साथ दिया।
पाकिस्तान और अरब देशों से किए गए ट्वीट
पाकिस्तान के खिलाफ मैच में अर्शदीप ने 18वें ओवर की तीसरी गेंद में आसिफ अली का कैच छोड़ा था, जिसके बाद देखा गया कि अचानक उनको सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जाने लगा। कुछ अकॉउंट्स से उन्हें देश विरोधी जैसे शब्द तक कहे गए। जो ट्वीट अर्शदीप को देशद्रोही आदि बताते हुए किए गए हैं, वो अधिकतर पाकिस्तान और अरब देशों के लोगों ने भारतीय बनकर किए हैं।
विकिपीडिया पर भी अर्शदीप का डाटा बदला
पाकिस्तानियों ने केवल सोशल मीडिया पर ही अर्शदीप को खालिस्तानी दिखाने की कोशिश नहीं की। बल्कि उन्होंने विकिपीडिया पर भी अर्शदीप का डाटा बदला। देख सकते हैं कि जहाँ-जहाँ अर्शदीप के नाम के साथ भारतीय होना चाहिए वहाँ जानबूझकर खालिस्तान लिखा गया।
अंशुल सक्सेना के ट्विटर हैंडल पर इस संबंध में स्क्रीनशॉट हैं। इनसे पता चलता है कि पहले अर्शदीप को खालिस्तान स्क्वॉड का बताया गया और फिर हर जगह भारत हटाकर उनके नाम के साथ खालिस्तान जोड़ा गया। ये सारी एडिटिंग जिस आईपी एड्रेस से की गई, वो सर्च करने पर देखा जा सकता है कि पाकिस्तान का मिला है। ‘केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)’ ने इस मामले में विकिपीडिया को समन भी किया है।
हाल में कई रिपोर्टें आई हैं जो बताती हैं कि नेपाल से लगी भारत की सीमा पर तेजी से डेमोग्राफी में बदलाव हो रहा है। मस्जिद-मदरसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए 20 से 27 अगस्त 2022 तक ऑपइंडिया की टीम ने भारत से लगे नेपाल के इलाकों का दौरा किया। हमने जो कुछ देखा, वह सिलसिलेवार तरीके से आपको बता रहे हैं। इस कड़ी की तीसरी रिपोर्ट:
नेपाल में बढ़ रही मुस्लिम आबादी और इबादतगाहों की ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान ऑपइंडिया को वहाँ लव जिहाद जैसी घटनाओं के प्रमाण भी मिले। स्थानीय नेपाली लड़कियों से झूठ बोल कर, प्यार के जाल में फँसा कर निकाह करने का खेल वहाँ भी चल रहा है। इसी के साथ भारत-नेपाल की सीमा का प्रयोग तस्करी और अन्य अपराधों में भी किया जा रहा है। हमने ऐसे अपराधों से संबंधित कुछ जानकारियाँ जुटाईं, कुछ आँकड़े निकाले।
यह रिपोर्ट एक सीरीज के तौर पर है। इस पूरी सीरीज को एक साथ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
लव जिहाद: झूठ बोल कर प्यार का नाटक और निकाह
जून 2022 में रुपनदेही जिले की सीना लामा नाम की एक युवती ने केस दर्ज करवाया। कपिलवस्तु जिले में दर्ज केस में सनाउल्लाह नाम के व्यक्ति पर झूठ बोल कर निकाह करने का मामला था। सीना लामा ने नेपाली पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में कहा था कि सनाउल्लाह उसके गाँव में ईंट का कारोबार करने आया था और उसे प्रेम जाल में फँसा लिया।
सीना लामा के मुताबिक सनाउल्लाह ने खुद को अविवाहित बताया था। पुलिस की शिकायत में सीना ने यह भी बताया कि सनाउल्लाह ने उससे लगभग 11 लाख नेपाली रुपए और 4 तोला सोना झूठ बोल कर हड़प लिया।
सनाउल्लाह और सीना लामा
सीना लामा का निकाह इस्लामी तौर-तरीके से हुआ था। सीना ने इस केस में सनाउल्लाह के अब्बा, उसकी अम्मी और खुद सनाउल्लाह को नामजद किया है।
FIR कॉपी
निकाहनामा के फॉर्म की प्रिंटिंग दिल्ली में
सीना लामा और सनाउल्लाह का निकाह कपिलवस्तु जिले के एक मौलाना ने करवाया था। इस निकाहनामा को मौलाना ने फ़ारसी में लिखा था। अंत में ‘अहमदुल्लाह इस्लामपुर’ दर्ज था। इसके लिए प्रयोग होने वाला फॉर्म दिल्ली के पिनकोड 06 (जामा मस्जिद, चांदनी चौक, हौज काजी, चावड़ी बाजार आदि वाला एरिया) के पते पर किसी खुर्शीद बुक डिपो द्वारा प्रिंट और डिजायन किया गया था।
निकाहनामा
भारत-नेपाल सीमा पर तस्करी: आँकड़े-आरोपितों से समझें साजिश किसकी?
नेपाल की खुली सीमा का फायदा दोनों तरफ के असामाजिक तत्व गैर-कानूनी कार्यों के लिए उठाया करते हैं। 25 अगस्त 2022 को नेपाल सीमा से सटे उत्तर प्रदेश की सिद्धार्थनगर पुलिस ने 26 बोतल नेपाली शराब के साथ सद्दाम उर्फ़ जलालुद्दीन को गिरफ्तार किया था। जलालउद्दीन भारत के सिद्धार्थनगर का रहने वाला है।
18 अगस्त 2022 को उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर की ही शोहरतगढ़ पुलिस ने भारत से चुराई बाइक नेपाल में बेचने की फिराक में घूम रहे वाहन चोर महमूद शेख को गिरफ्तार किया था। महमूद शेख सिद्धार्थनगर का ही निवासी है।
चोरी की बाइकों के साथ महमूद शेख (चित्र साभार- सिद्धार्थनगर पुलिस)
अगस्त 2022 में ही बिहार के सीतामढ़ी जिले में बॉर्डर इलाके सुरसंड में सशस्र सीमा बल (SSB) ने अवैध रूप से भारत में घुस रही पाकिस्तानी युवती खुदीजा नूर को गिरफ्तार किया था। खुदीजा पाकिस्तान के फैसलाबाद की रहने वाली है।
31 जुलाई 2022 को उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में जिला पुलिस और SSB ने साझा गश्त करते हुए नेपाल सीमा से 51 लाख रुपए की स्मैक के साथ मोहम्मद आबिद को गिरफ्तार किया था। आबिद बहराइच का रहने वाला है।
23 जुलाई 2022 को सिद्धार्थनगर पुलिस ने नेपाल से खाद की अवैध तस्करी करने वाले सलमान अहमद को बजहा नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार किया था। आरोपित के पास तस्करी के लिए प्रयोग होने वाली 2 बाइकें और 39 बोरी खाद बरामद हुई थी। सलमान सिद्धार्थनगर का ही रहने वाला है।
9 जुलाई 2022 को उत्तर प्रदेश की शाहजहाँपुर पुलिस ने नेपाल से भारत में चरस की तस्करी करने वाले शाहनवाज को गिरफ्तार किया था। शाहनवाज के पास से लगभग 70 लाख रुपए मूल्य की चरस भी बरामद हुई थी। शाहनवाज शाहजहाँपुर जिले का ही रहने वाला है।
6 जुलाई 2022 को उत्तर प्रदेश की सिद्धार्थनगर पुलिस ने नेपाल से खाद की तस्करी करने वाले मज्जीबुला को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने तस्करी में प्रयोग होने वाली मज्जीबुल्ला की मार्शल जीप भी जब्त कर ली थी। आरोपित सिद्धार्थनगर का ही रहने वाला है, जिसके पास से 16 बोरी खाद बरामद हुई।
3 जुलाई 2022 को सिद्धार्थनगर पुलिस ने मोहना क्षेत्र में नशीले कैप्सूल और चाकू के साथ नेपाल के रूपनदेही जिले के जियाउद्दीन को गिरफ्तार किया था। जियाउद्दीन के पास प्रतिबंधित 280 कैप्सूल बरामद किए गए थे।
26 जून 2022 को उत्तर प्रदेश की सिद्धार्थनगर पुलिस ने भारत में चोरी की बाइक लेकर घुसे नेपाल के रूपनदेही जिले के निवासी तौफीक अहमद को गिरफ्तार किया था। तौफीक के पास से 70 नशीली गोलियाँ भी बरामद की गई थीं।
4 जून 2022 को उत्तर प्रदेश की बहराइच पुलिस ने 60 बोतल नेपाली शराब के साथ नबी अहमद को केवलपुर बॉर्डर क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। नबी अहमद बहराइच का रहने वाला है।
भारत-नेपाल बॉर्डर, मिर्जा दिलशाद बेग और दाऊद कनेक्शन
नेपाल के कपिलवस्तु जिले में तमाम लोग अभी भी 1990 के दशक में दुर्दांत अपराधी और वहाँ के 2 बार के विधायक रहे मिर्जा दिलशाद बेग का नाम ले रहे थे। हमने जिससे भी 1998 में छोटा राजन गैंग द्वारा मारे गए दिलशाद बेग का घर पूछा, उसने हाथ से उसके घर जाने वाली सड़क की तरफ इशारा किया।
दिलशाद बेग का घर बॉर्डर से लगभग 1 किलोमीटर अंदर नेपाल के कृष्णानगर में है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वो पाकिस्तान के दाऊद गैंग का प्रमुख चेहरा बताया जाता था और ISI की गतिविधियों को बॉर्डर इलाके में संचालित करता था। दिलशाद बेग के घर पर कोई चहल-पहल नहीं दिखी।
इसी घर में रहता था मिर्ज़ा दिलशाद बेग
बॉर्डर पर कत्ल कर दिए गए थे हिन्दूवादी नेता मंगरे सिंह
बलरामपुर जिले के संघ के सीमा जागरण मंच के कार्यकर्ता ओपी मिश्रा और विद्याभूषण ने ऑपइंडिया को बताया, “70 के दशक में जनसंघ से हिंदूवादी नेता मंगरे सिंह भारत के बलरामपुर के तुलसीपुर विधायक बने थे। वो इलाके में हिन्दू धर्म को बचाने के लिए काफी सक्रिय थे। बाद में 90 के दशक में उनकी हत्या नेपाल के बॉर्डर जरवा के जंगलों में कर दी गई थी। इस हत्या में फ़िरोज़ पप्पू और मसूद अहमद का नाम सामने आया था। दोनों हत्यारोपित बाद में समाजवादी पार्टी से जुड़ गए थे।”
शराब घोटाले में फँसे दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के झूठ का एक बार फिर पर्दाफाश हो गया है। मनीष सिसोदिया ने सोमवार (5 सितंबर, 2022) को कहा था कि CBI के अधिकारी जितेंद्र कुमार ने इसलिए आत्महत्या कर ली है, क्योंकि उस अधिकारी पर उन्हें झूठे केस में फँसाने के लिए दबाव डाला जा रहा था। CBI ने सिसोदिया के इस आरोप का सिरे से खंडन करते हुए उनके बयान को ‘शरारती और भ्रामक’ बताया है।
सीबीआई (CBI) की ओर से सिसोदिया के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा गया है, “मृतक जितेंद्र कुमार सीबीआई से सीधे तौर पर नहीं जुड़े हुए थे। वह सीबीआई में बतौर डिप्टी लीगल एडवाइजर प्रॉसिक्यूशन के इंजार्च थे। जितेंद्र कुमार का काम सीबीआई द्वारा चार्जशीट किए गए केसों की ट्रायल को देखना था।”
CBI strongly refutes mischievous and misleading statement by Manish Sisodia. It is clarified that the gentleman officer Late Jitendra Kumar was in no way connected with the investigation of the case: CBI on the statement by Delhi Dy CM Manish Sisodia on the death of a CBI officer pic.twitter.com/L8Yyek3Efo
इसके अलावा, सीबीआई सीबीआई की ओर यह भी स्पष्ट किया गया कि आबकारी मामले में फिलहाल किसी को भी क्लिन चिट नहीं दी गई है। इस मामले में अभी जाँच की जा रही है। एजेंसी ने कहा कि मनीष सिसोदिया का बयान शरारती और भ्रामक होने के साथ ही इस मामले में चल रही जाँच से ध्यान भटकाने की कोशिश है।
बता दें, मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाते हुए कहा था कि सीबीआई के एक अधिकारी ने इसलिए आत्महत्या कर ली क्योंकि उस पर उन्हें झूठे आबकारी मामले में फँसाने के लिए दबाव डाला गया था।
सिसोदिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा था। उन्होंने कहा था, “पीएम मोदी से आज मैं कहना चाहता हूँ यदि आप मुझे फर्जी तरीके से फँसाना चाहते हैं, फँसा लीजिए। रेड करा लीजिए। लेकिन, अधिकारियों पर इस तरह का दबाव बनाकर उनको सुसाइड के लिए मजबूर मत करिए। उनका घर उजड़ रहा है। आप हर समय यही सोचते रहते हैं कि मैं सीबीआई और ईडी का इस्तेमाल कैसे करूँ और चुनी हुई सरकार को कैसे गिराऊँ।”
144 करोड़ के घोटाले में आरोपित हैं मनीष सिसोदिया
बता दें, दिल्ली की नई आबकारी नीति के अंतर्गत दिल्ली सरकार पर 144 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप है। इसमें, सीबीआई ने मनीष सिसोदिया समेत 15 अन्य लोगों पर एफआईआर दर्ज की है। इस एफआईआर में सिसोदिया आरोपित नंबर 1 हैं। इस बड़े घोटाले की जाँच में सीबीआई ने गत 18 अगस्त को मनीष सिसोदिया के घर समेत 31 जगहों पर छापेमारी की थी, जिसके बाद से सिसोदिया सीबीआई पर हमलावर हैं।
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल सोमवार (5 सितंबर 2022) को आत्मघाती बम धमाके से दहल उठी। यह धमाका रूस के दूतावास के बाहर हुआ। धमाके में रूस के दो राजनयिकों की भी मौत हुई है। हालाँकि कुल मौतों को लेकर मीडिया रिपोर्टों में अलग-अलग नंबर बताए जा रहे हैं। कुछ में यह संख्या 25 तो कुछ में 20 बताई गई है। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। कई लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है।
रिपोर्ट के अनुसार एक संदिग्ध रूसी दूतावास के बाहर घूम रहा था। गेट पर सुरक्षाकर्मियों ने उसे रोकने की कोशिश की। जब वह नहीं रुका तो उस पर फायरिंग की। इसमें वह जख्मी हो गया बावजूद उसने खुद को उड़ा लिया। जब यह धमाका हुआ कई अफगानी नागरिक भी दूतावास में वीजा कार्य के लिए मौजूद थे।
काबुल पुलिस के प्रमुख खालिद जादरान का कहना है कि हमलावर भीड़ के बीच में घुसकर आत्मघाती हमला करने की फिराक में था। यदि वह अपने मंसूबों में कामयाब हो जाता तो जान-माल की भारी क्षति हो सकती थी। खबर लिखे जाने तक हमलावर की पहचान सामने नहीं आई थी। न ही किसी आतंकी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी ली थी। 2016 में भी यहाँ धमाका हुआ था। उस समय 12 लोगों की मौत हो गई थी।
सोमवार को हुए हमले में अपने दो राजनयिकों की मौत की रूसी विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है कि काबुल में हुए आतंकवादी हमले में दूतावास में तैनात दो अधिकारियों की मौत हो गई है।
Security has been stepped up at the Russian embassy in Kabul – Russian FM Lavrov
बता दें इससे पहले अफगानिस्तान के हेरात प्रांत में शुक्रवार (2 सितंबर 2022) को जुमे की नमाज के दौरान एक मस्जिद में धमाका हुआ था। इस धमाके में तालिबान के बड़े मौलवियों में से एक मुल्ला मुजीब उर रहमान अंसारी मारा गया था। हमले में 20 लोग मारे गए थे, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। उससे पहले 18 अगस्त को काबुल की ही एक मस्जिद में हुए धमाके में 21 लोग मारे गए थे।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री चुनावों में भले ही लिज ट्रस (81326 वोटों के साथ) के बाजी मारने से भारतीय मूल के ऋषि सुनक (60399 वोट पाकर) पीएम बनने से चूक गए हों, लेकिन ब्रिटेन की राजधानी लंदन में प्रॉपर्टी खरीदने में भारतीय अंग्रेजों से भी आगे हैं। यहाँ भारतीयों के पास सबसे अधिक संपत्ति है। इन भारतीयों में कई पीढ़ियों से यूके में रह रहे लोग, एनआरआई (NRI), अन्य जगहों पर रहने वाले निवेशक, एजुकेशन के लिए यूके जाने वाले स्टूडेंट्स और परिवार शामिल हैं।
भारतीयों के बाद लंदन में अंग्रेज और पाकिस्तानी सबसे अधिक प्रॉपर्टी मालिक हैं। लंदन बेस्ड रेजिडेंशियल डेवलपर Barratt London ने यह जानकारी दी है। बताया जा रहा है कि ये भारतीय निवेशक लंदन और भारत दोनों जगहों पर रह रहे हैं। भारतीय लंदन में एक, दो या तीन बेडरूम वाले अपार्टमेंट के लिए 290,000-450,000 जीबीवी (Stands for Great Britain Pound) भी खर्च करने को तैयार हैं।
Barratt London के इंटरनेशनल सेल्स और मार्केटिंग डायरेक्टर स्टुअर्ट लेस्ली (Stuart Leslie) ने FinancialExpress को बताया, “लंदन में प्रॉपर्टी खरीदने के लिए भारतीय निवेशकों की डिमांड काफी बढ़ रही है। वे स्टेबल और लॉन्ग टर्म प्रॉपर्टी मार्केट में पैसा लगाना चाहते हैं। लंदन के बाहर हमारे अधिकांश प्रोडक्ट यूके के स्थानीय खरीदारों को बेचे जा रहे हैं, जो इन प्रॉपर्टीज को खरीदते हैं और उनमें रहते हैं।”
उन्होंने यह भी कहा, “इस साल हमें भारतीय खरीदारों की संख्या में इजाफा देखने को मिल रहा है। ये विदेशी मार्केट प्लेयर्स का 7-8 फीसदी हिस्सा हैं। नाइट फ्रैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के 10 फीसदी यूएचएनडब्ल्यूआई (UHNWI) ने 2022 में नया घर खरीदने की योजना बनाई है। वे घरेलू बाजार में प्रॉपर्टीज में निवेश करना पसंद करते हैं।”
बता दें कि कई वर्षों से भारतीय लंदन में प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं। लंदन की प्रॉपर्टी की कीमतों में गिरावट से भारतीय खरीदारों का रुझान इस ओर बढ़ा है। यूरोपीय संघ को लेकर जनमत संग्रह और अक्टूबर 2019 के बीच प्राइम सेंट्रल लंदन की प्रॉपर्टी में लगभग 20 फीसदी दाम गिरने की वजह से भारतीय खरीदारों को फायदा हुआ है। ये संपत्ति खरीदने वाले अधिकतर लोग युवा हैं। सितंबर 2019 तक लगभग 73% सुपर प्राइम बायर्स की उम्र 50 साल से कम रही है।
उत्तर प्रदेश के आगरा में सुजैन नाम की मुस्लिम महिला द्वारा हिंदू धर्म अपनाने का मामला प्रकाश में आया है। खबर है कि हिंदू प्रेमी दीपक से शादी करने के लिए सुजैन खान परिवर्तित होकर सुजाता आर्या बनी थी। लेकिन उसके घरवालों को दीपक के साथ ये रिश्ता मंजूर नहीं था। उन्होंने गुस्से में दीपक के खिलाफ मुकदमा दायर करवा दिया है। अब दोनों पति-पत्नी परेशान हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करके मदद माँगी है।
वायरल वीडियो में सुजैन उर्फ सुजाता शादी के बाद कह रही हैं, “मैंने आज से एक डेढ़ साल पहले ही हिंदू धर्म अपना लिया था। बिना किसी दबाव के। 4 सितंबर 2022 को मैंने अपनी मर्जी से आर्य समाज मंदिर में दीपक से शादी की है। लेकिन मेरे घरवाले दीपक और मेरी हत्या करना चाहते थे। दीपक को झूठे केस में फँसाना चाहते हैं। आगरा पुलिस से मेरी विनती है कि मुझे, दीपक और उसके घरवालों को सुरक्षा दें।”
बता दें कि सुजैन जहाँ, अपने अब्बू पर आरोप लगा रही है कि वह उसे दीपक से अलग करना और जान से मारना चाहते हैं। वहीं दूसरी ओर उसके अब्बू ने शाहगंज थाने में शिकायत देकर कहा है कि उनकी बेटी 3 सितंबर को सब्जी लेने गई थी। मगर समय गुजरने के बाद जब वह नहीं लौटी तो उन लोगों ने छानबीन करवाई। इस दौरान पता चला कि दीपक उसे बहला-फुसला के ले गया है।
लड़की के घरवालों की शिकायत के बाद सुजैन द्वारा दिया गया एक शपथ पत्र भी सामने आया है। इसमें उसने अपने मजहब में कमियाँ बताते हुए अपना नाम सुजाता आर्य करने की माँग की थी। इसमें उसने कहा था कि वह बालिग है और अपनी मर्जी से धर्मांतरण करना चाहती हैं। हालाँकि 4 सितंबर को शादी के बाद उसे पता चला कि उसके पिता पर दबाव बन रहा है कि वो दीपक के ऊपर केस करवाएँ। ऐसे में उसने वीडियो जारी करके ये साफ किया कि सारे दावे झूठे हैं और वो अपनी मर्जी से दीपक के पास आई है। उसे और दीपक को उसके घरवालों से खतरा है।
TATA समूह के पूर्व CEO साइरस मिस्त्री की रविवार (4 सितंबर, 2022) को एक कार दुर्घटना में मौत हो गई। साइरस मिस्त्री के साथ उनकी मर्सिडीज गाड़ी में उनकी पत्नी और पत्नी के भाई भी थे। सूर्या नदी पर स्थित एक पुल पर ये दुर्घटना हुई। मुंबई से 135 किलोमीटर दूर चरोटी नाका पर कार एक रोड डिवाइडर से जा टकराई। अब साइरस मिस्त्री की मौत के बाद पूर्व राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने रतन टाटा को लेकर बड़ा दावा किया है।
सुब्रमण्यम स्वामी ने बड़ा आरोप लगाया कि ‘रतन टाटा’ और टाटा समूह में उनके मातहत काम करने वाले तमिलों ने एक मलयाली तांत्रिक को रुपए देकर तत्र-मंत्र करवाया। सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि कंपनी के तथाकथित दुश्मनों को निशाना बनाने के लिए ऐसा किया गया। सुब्रमण्यम स्वामी इससे पहले रतन टाटा को ‘भ्रष्ट’ बताते हुए ये भी कह चुके हैं कि वो टाटा परिवार पर एक ‘कलंक’ है। वहीं साइरस मिस्त्री को वो ईमानदार बताते रहे हैं।
2016 में जब कंपनी को लेकर रतन टाटा और साइरस मिस्त्री के बीच विवाद चल रहा था, तब सुब्रमण्यम स्वामी ने भारत सरकार को हस्तक्षेप करने की सलाह दी थी और यहाँ तक कहा था कि ज़रूरत पड़ने पर टाटा का अधिग्रहण कर लेना चाहिए। उन्होंने एयर एशिया मामला, डोकोमो मामला, राडिया केस और शिव शंकरन जैसे मामलों को गिनाते हुए कहा था कि रतन टाटा काफी कुछ छिपाते रहे हैं। उन्होंने दावा किया था कि साइरस मिस्त्री घाटे में चल रही कंपनी को आगे ले जाना चाहते थे।
हालाँकि, सुब्रमण्यम स्वामी ने अपने ताज़ा ट्वीट में साइरस मिस्त्री का नाम नहीं लिया है और न ही उनकी कार दुर्घटना में मौत वाली खबर का जिक्र किया है, लेकिन कई लोगों का मानना है कि उनका इशारा इसी तरफ है। उन्होंने रतन टाटा का भी प्रत्यक्ष रूप से नाम नहीं लिया और इसके बदले ट्वीट में ‘Rotten Tata’ लिखा। इससे पहले भी वो इस शब्दावली का प्रयोग करते रहे हैं। सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी के लिए भी उन्होंने अलग-अलग किस्म के शब्द गढ़ रखे हैं।
सुब्रमण्यम स्वामी का ट्वीट
दिसंबर 2012 में 44 वर्ष की उम्र में साइरस मिस्त्री ने टाटा समूह के चेयरमैन के रूप में कार्यभार सँभाला था। उनसे पहले रतन टाटा इस पद पर काबिज थे। जून 2022 में ही उनके पिता खरबपति पल्लोनजी मिस्त्री की 93 वर्ष की आयु में मौत हुई थी। इस परिवार के पास टाटा समूह में 18.37% हिस्सेदारी है। टाटा परिवार से साइरस मिस्त्री की लंबी कानूनी लड़ाई चली। ‘राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT)’ ने उनके पक्ष फैसला दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने टाटा परिवार के पक्ष में निर्णय सुनाया। कोरोना महामारी काल में भी मिस्त्री परिवार को बड़ा घाटा हुआ था।