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‘इस्लाम कबूलो, निकाह करो…’: अंकिता पर शाहरुख हुसैन बनाता था धर्मांतरण का दबाव, 16 साल की ही थी जलाकर मार डाली गई हिंदू युवती-POCSO की धाराएँ लगेंगी

झारखंड के दुमका में अंकिता कुमारी की हत्या से माहौल अब भी गरमाया हुआ है। केस की जाँच कर रहे दुमका के DSP नूर मुस्तुफा पर आरोपित को बचाने के इल्जाम लगने के बाद उन्हें जाँच से हटा दिया गया है। इस बीच अंकिता के पिता का एक बयान सामने आया है जिसमें वह बता रहे हैं कि कैसे अंकिता डॉक्टर बनने के सपने देखती थी, लेकिन शाहरुख उसे धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाता था।

अंकिता को इस्लाम कबूल करवाना चाहता था शाहरुख

शाहरुख की हरकतों पर अंकिता के पिता का बयान चौंकाने वाला है। स्वराज्य की पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा की रिपोर्ट के अनुसार संजीव सिंह ने बताया,

“शाहरुख हुसैन मेरी बेटी को परेशान करके रखा था। बेटी ने बताया भी था कि शाहरुख उसे तंग कर रहा है। वह उसे कहता था- मुझसे दोस्ती कर, निकाह कर, इस्लाम कबूल कर, वरना मैं तेरी जिंदगी को जहन्नुम बना दूँगा।”

सुभी विश्वकर्मा द्वारा शेयर की गई रिकॉर्डिंग में संजीव सिंह कहते हैं,

“मैं एक प्राइवेट जॉब करता हूँ। सुबह निकलकर रात में घर आता हूँ। ऐसे में 22 अगस्त को शाहरुख ने बेटी को बहुत धमकी दी थी। मैं रात में घर पहुँचा तो अंकिता ने मुझे सब बताया कि बहुत दिन से शाहरुख तंग करता है और अब धमकी देकर गया है कि शादी करो, दोस्ती करो और इस्लाम कबूल करो। बेटी ने उसे कहा भी कि उसे इन सबसे मतलब नहीं है उसे अभी पढ़-लिखकर डॉक्टर बनना है। लेकिन शाहरुख ने कहा तुम्हें डॉक्टर नहीं आईपीएस अधिकारी बना देंगे।”

अंकिता का बयान

गौरतलब है कि अंकिता के पिता के बयान से साफ है कि शाहरुख अंकिता पर धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहा था, जबकि अंकिता के नाम से जो बयान पेश किया गया है उसमें पीछा करके परेशान करने की बातों का, बात न मानने पर धमकी देने का, पेट्रोल छिड़क कर आग लगाने का जिक्र है। उस बयान में अंकिता की उम्र 19 साल लिखी गई है जो दस्तावेजों में केवल 16 की है। आगे कहा गया है कि शाहरुख ने अंकिता की सहेली से उसका नंबर लेकर उसे तंग करना शुरू किया था। फिर सड़क पर आते जाते भी परेशान करता था। 

22 अगस्त भी उसने धमकी दी थी। इस संबंध में अंकिता ने घर में बताया और अपने कमरे में खिड़की के पास जाकर सो गई। सुबह जब नींद खुली तो उसका शरीर जल रहा था और खिड़की के बाहर शाहरुख नईम खड़े थे। उनके पास पेट्रोल की खाली कैन थी। अंकिता के अनुसार, वही कैन उस पर उड़ेली गई थी जिससे उसके शरीर के भाग जलकर गल गए और इलाज के वक्त तक उससे पेट्रोल की गंध आती रही।

16 साल की अंकिता, बयान में DSP नूर मुस्तुफा ने 19 लिखा: आरोप

बता दें कि अंकिता को इंसाफ दिलाने के क्रम में डीएसपी नूर मुस्तुफा को केस की जाँच से हटाया गया है। नूर मुस्तुफा वही पुलिस अधिकारी हैं जिन्होंने अस्पताल में लड़की का बयान जाकर लिया था और बयान में ये लिखा था कि लड़की ने खुद को 19 साल का बताया है। जबकि, दस्तावेजों के अनुसार लड़की 16 साल की थी।

उम्र के हेरफेर के चलते नूर मुस्तुफा पर आरोपित को बचाने के इल्जाम लगे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि नूर पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के लिए काम करता है। अब इस केस में पॉक्सो एक्ट लगेगा।

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने भी इस पर बयान दिया। वह बोले- “ये कोई सामान्य बात नहीं है। डीएपी ने ऐसा शाहरुख हुसैन को बचाने के लिए किया। लड़की पहले ही छोटू खान पर बता चुकी थी। लेकिन उसकी गिरफ्तारी तब हुई जब उसने दम तोड़ दिया। इसी डीएसपी ने पहले एससी-एसटी प्रीवेंशन एक्ट में फँसे जुल्फीकार भुट्टो को बचाने का काम किया था।”

गरबा टैक्स और GST से लेकर कर्ज माफ़ी तक, ‘विश्वास मत’ के नाम पर CM केजरीवाल के 5 झूठ का पोस्टमॉर्टम, भ्रष्टाचार से हटाना चाहते हैं ध्यान

सोमवार (29 अगस्त, 2022) को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा में ‘विश्वास मत’ पेश किया। इस दौरान उन्होंने अपने भाषण में कई गलत आँकड़ों और झूठे दावों के सहारे ये बताने की कोशिश की है कि आने वाले समय में पार्टी का रुख कैसा रहने वाला है।

‘गेहूँ, चावल, दाल की कीमतों के पीछे जीएसटी’

अपने भाषण की शुरुआत में अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि लोगों ने सब्जियाँ खरीदनी बंद कर दी हैं और महँगाई के कारण दूध और दूध से बने उत्पादों की खपत कम कर दी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार दही, शहद, गेहूँ, चावल और अन्य उत्पादों पर टैक्स लगाया गया है। उन्होंने दावा किया कि आजादी से पहले ब्रिटिश सरकार ने भी इन चीजों पर टैक्स नहीं लगाया था।

गौरतलब है कि जब दूध, दही, गेहूँ, चावल सहित खाद्य पदार्थों पर जीएसटी लगने के कारण महँगे होने की खबरें सामने आ रहीं थीं तब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ट्वीट्स के जरिए साफ किया था कि जीएसटी लागू होने से पहले सभी राज्य सरकारें खाद्य पदार्थों पर 1 से 6% तक टैक्स वसूल रहे थे।

जीएसटी लागू होने के बाद, ब्रांडेड और गैर-ब्रांडेड पैक की गई वस्तुओं को टैक्स के दायरे में लाया गया था। सबसे बड़ी बात यह है कि खाद्य पदार्थों पर लगाए गए जीएसटी के लिए सभी राज्यों के प्रतिनिधियों द्वारा स्वीकृति दी गई थी। इसमें सिर्फ पैकेट-बंद खाद्य पदार्थों पर टैक्स लगाने के लिए कहा गया था। मतलब साफ है कि अगर कोई सामान खुले में बेचा जाता है, तो उस पर कोई जीएसटी लागू नहीं होगा। जिन वस्तुओं को खुले में बेचे जाने पर टैक्स लागू नहीं होगा, उनमें दाल, गेहूँ, जई, मक्का, चावल, दही, लस्सी, बेसन और बहुत कुछ शामिल हैं।

केजरीवाल का दावा – ‘गरबा पर सरकार ने लगाया टैक्स’

दूसरा सीधा झूठ जो केजरीवाल ने विधानसभा में कहा, वह गरबा पर टैक्स लगाने के बारे में था। केजरीवाल द्वारा विधानसभा में दिए गए इस अधूरे और गैर-सूचित बयान का हफ्तों पहले भंडाफोड़ हो चुका है।केजरीवाल ने कहा, “गुजरात गरबा डांस के लिए जाना जाता है। लोग नवरात्रि के दौरान देवी माँ की पूजा करते हैं और भक्ति के साथ गरबा करते हैं। लेकिन अब उन्होंने गरबा पर भी टैक्स लगा दिया है।”

उल्लेखनीय है कि 4 अगस्त को, ऑपइंडिया ने गरबा आयोजनों पर टैक्स के बारे में सोशल मीडिया पर चल रहे दावों की जाँच की थी। इस जाँच में यह सामने आया था कि कॉन्ग्रेस और AAP फेक खबर फैला रहे थे। इस बारे में सच्चाई यह है कि राज्य सरकार ने गरबा या ऐसे किसी आयोजन पर कोई नया जीएसटी नहीं लगाया है। 

मूल रूप से, जीएसटी के लागू होने से पहले, ऐसे आयोजनों के प्रवेश द्वार पर सेवा कर (सर्विस टैक्स) 15% की दर से लगाया जाता था, जहाँ प्रति व्यक्ति टिकट की कीमत 500 रुपए से अधिक होती थी। तब सर्विस टैक्स के अलावा, इस्तेमाल किए गए सामानों पर भी वैट लगाया जाता था।

खासतौर से, जीएसटी केवल उन टिकटों पर लगाया जाता है, जिनकी कीमत पार्टी स्थलों, क्लबों और स्टेडियमों में आयोजित गरबा कार्यक्रमों के लिए 500 रुपए से अधिक है। यदि आवासीय समितियाँ गरबा का आयोजन कर रही हैं और टिकट 500 से कम होने की स्थिति में कोई टैक्स नहीं लगाया जाता है।

विशेष रूप से, जब वस्तु और सेवा कर (GST) 1 जुलाई, 2017 को सरकार की ‘एक राष्ट्र, एक कर’ नीति के तहत लागू हुआ। तब, इसमें 17 बड़े कर और केंद्र तथा राज्य सरकारों द्वारा 13 उपकर जैसे वैट, चुंगी, लग्जरी टैक्स, परचेज टैक्स और सेंट्रल टैक्स जैसे कस्टम ड्यूटी, सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी और सर्विस टैक्स लगाए गए।

कर्ज माफी के बारे में फिर फैलाया झूठ

इसके बाद सीएम केजरीवाल ने कर्ज माफी की बात की, जो कभी हुई ही नहीं। केजरीवाल ने कहा, “इस सरकार के दोस्त हैं, ये दोस्त अरबपति हैं। उन्होंने बैंकों से हजारों करोड़ रुपए का कर्ज लिया। कर्ज लेने के बाद उन्होंने उन्हें चुकाने के विषय में कभी नहीं सोचा। उन्होंने सरकार से संपर्क किया और कर्ज माफी की माँग की। सरकार ने खाद्य पदार्थों पर टैक्स लगाया और उस पैसे का इस्तेमाल उनका कर्ज माफ करने के लिए किया।”

केवल केजरीवाल ही नहीं, बल्कि कई अन्य विपक्षी नेता कर्ज माफी और कर्ज माफी के बीच भ्रम का इस्तेमाल करते रहे हैं। यहाँ तक ​​कि भाजपा नेता वरुण गाँधी, जो कि लगातार पार्टी से विद्रोह का संकेत देते रहे हैं, उन्होंने भी कर्ज माफी को लेकर भ्रम फैलाने का काम किया है।

7 अगस्त को, ऑपइंडिया ने कर्ज माफी और कर्ज बट्टे खाते में डालने के बारे में विस्तार से बताया था। ऑपइंडिया की रिपोर्ट में यह बताया गया है कि कैसे इन नेताओं ने संसद में सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आँकड़ों को गलत तरीके से दिखाने का प्रयास किया। इन नेताओं के ट्वीट अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) द्वारा किए गए एक पोस्ट पर आधारित थे।

2 अगस्त को, वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री, डॉ भागवत कराड ने लोकसभा में बताया था कि पिछले 5 वित्तीय वर्षों में, कॉमर्शियल बैंकों ने 9,91,640 करोड़ रुपये के कर्ज को बट्टे खाते में डाल दिया है।

उन्होंने यह भी बताया था कि भारतीय रिजर्व बैंक के बड़े क्रेडिट (सीआरआईएलसी) डेटाबेस पर सूचना के केंद्रीय भंडार द्वारा उपलब्ध कराए गए आँकड़ों के अनुसार, 2019 में 2207 विलफुल डिफॉल्टर्स थे। इन डिफॉल्टर्स का कुल क्रेडिट एक्सपोजर 5 करोड़ रुपए या उससे अधिक था। 2020 में यह संख्या 2469 हो गई, इसके बाद 2021 में 2840 विलफुल डिफॉल्टर्स और 2022 में यह संख्या 2790 थी।

बैड लोन्स की रिकवरी पर बोलते हुए भागवत कराड ने बताया था कि एसबीआई ने उस समय के दौरान माफ किए गए 41,006.94 करोड़ रुपए के बैड लोन्स की वसूली की थी, और शेष बैड लोन्स की वसूली की प्रक्रिया बैंक प्रोसेस में है। इसी तरह यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने 6955.12 करोड़ रुपए, पंजाब नेशनल बैंक ने 11,821.37 करोड़ रुपए, बैंक ऑफ बड़ौदा ने 9,540.04 करोड़ रुपए और केनरा बैंक ने 7,348.52 करोड़ रुपए की वसूली की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि भारत सरकार बैड लोन्स की वसूली के लिए हर संभव प्रयास कर रही है और परिणाम आँकड़ों में दिखाई दे रहे हैं।

आप सभी को याद होगा सरकार ने इसी साल फरवरी में यह बताया था कि विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी सहित तीन डिफॉल्टरों से 18,000 करोड़ रुपए वसूल किए गए हैं।

कुल मिलाकर देखें तो केजरीवाल द्वारा किए गए दावों के विपरीत, संबंधित एजेंसियों की मदद से सभी प्रकार के कर्जों की वसूली की जा रही है। भले ही आरोपी भारत से भाग गए हों, जैसे विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के मामले में, सरकारी एजेंसियाँ ​​और न्यायपालिका पैसे की वसूली के लिए मिलकर काम कर रही हैं।

‘ऑपरेशन लोटस’ में उपयोग हो रहा है ‘फ्यूल टैक्स’

दिल्ली विधानसभा में बोलते हुए केजरीवाल ने यह दावा किया कि भारत सरकार “ऑपरेशन लोटस” को फंड देने लिए फ्यूल पर टैक्स लगा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पेट्रोल और डीजल पर टैक्स लगाकर जो पैसा इकट्ठा करती है, उसका इस्तेमाल राज्यों में “विधायकों की खरीद” के लिए किया जा रहा है। उन्होंने आगे दावा किया कि भाजपा ने उनके 12 विधायकों को 20 करोड़ रुपए की पेशकश की, लेकिन उन्होंने आप छोड़ने और भाजपा में शामिल होने से इनकार कर दिया। केजरीवाल ने कहा, “अगर वे हाल के वर्षों में खरीदे गए सभी विधायकों को 20 करोड़ रुपए की पेशकश कर रहे हैं, तो उन्होंने अलग-अलग राज्यों में 277 विधायकों को खरीदने के लिए 5540 करोड़ रुपए खर्च किए होंगे।”

सबसे पहले केजरीवाल ने आसानी से इस तथ्य को छोड़ दिया कि उनकी सरकार भी फ्यूल पर टैक्स वसूलती है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने 28 अप्रैल को एक रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली ने पेट्रोल पर 17.13 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 14.12 रुपये प्रति लीटर का वैट लगाया हुआ है। पेट्रोल का बेस प्राइस 56.32 रुपए प्रति लीटर था, माल भाड़ा 0.20 रुपए था, केंद्र सरकार का उत्पाद शुल्क 27.90 रुपए था और पेट्रोल के मामले में डीलर का कमीशन 3.86 रुपए प्रति लीटर था।

डीजल के मामले में बेस प्राइस 57.94 रुपए, माल भाड़ा 0.22 रुपए, उत्पाद शुल्क 21.80 रुपए और डीलर कमीशन 2.59 रुपए था। रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2021 से दिसंबर 2021 तक दिल्ली ने फ्यूल पर वैट और बिक्री कर से 2713 करोड़ रुपए एकत्र किए। सबसे छोटा राज्य होने के बावजूद, दिल्ली ने जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, सिक्किम और मिजोरम सहित नौ राज्यों से अधिक वैट इकट्ठा किया।

‘ऑपरेशन लोटस’ का आना ‘आम आदमी पार्टी’ की कल्पना मात्र है। ‘ऑपरेशन लोटस’ का नाम आम आदमी पार्टी इसलिए सामने ला रही है क्योंकि वह अपने विधायकों और मंत्रियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से ध्यान हटाना चाहती है। यह विडंबना ही है कि सीएम केजरीवाल ने बीजेपी पर भ्रष्टाचार का आरोप तो लगाया है। लेकिन, एक मंत्री सत्येंद्र जैन हिरासत में हैं और दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया शराब नीति में घोटाले के आरोपों का सामना कर रहे हैं। साथ ही उन पर गिरफ्तारी की तलवार भी लटक रही है।

‘इतने सारे स्कूल बनाने से नाराज है बीजेपी’

यही नहीं, अपने भाषण में केजरीवाल ने यह भी दावा किया कि उनकी सरकार ने दिल्ली में कई स्कूल बनाए हैं। हालाँकि, जब भी यह सवाल उठता है कि दिल्ली सरकार ने कितने स्कूल बनाए हैं तब केजरीवाल सरकार की ओर से कोई भी जानकारी आज तक नहीं दी गई है। केजरीवाल ने हाल ही में असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा के सवाल को भी टाल दिया था। जहाँ, उन्होंने केजरीवाल से उनकी सरकार द्वारा बनाए गए नए स्कूलों के बारे में पूछा था।

उन्होंने कक्षाओं को अपग्रेड तो किया है लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इससे कितना फर्क पड़ा है। बिना हेडमास्टर के स्कूलों के चलने की हालिया रिपोर्ट और 60 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में विज्ञान की कक्षाएं नहीं चलने से दिल्ली सरकार की शिक्षा नीति पर भी सवाल खड़े होते हैं।

‘भक्तों का Di#k काफी छोटा है’: अपने पिता को संघी बताने वाली करण जौहर की अधिकारी लोगों को कह रही भला-बुरा, दाँव पर लगे हैं ‘ब्रह्मास्त्र’ के ₹300 Cr

जहाँ एक तरफ करण जौहर की ‘धर्मा प्रोडक्शंस’ की ‘ब्रह्मास्त्र’ 9 सितंबर, 2022 को रिलीज होने के लिए तैयार है, वहीं दूसरी तरफ कंपनी की एक अधिकारी सोशल मीडिया पर खुलेआम हिन्दुओं को भला-बुरा कह रही है। श्रीमी वर्मा ने सोमवार (29 अगस्त, 2022) को लिखा, “भक्तों के पास सचमुच ‘स्मॉल Di#k इनर्जी’ है, ये काफी परेशान करने वाला है।” जब उनका विरोध होने लगा तो उन्होंने ट्वीट किया, “अरे बाप रे, सब पगला गए हैं। असल में वो सब मेरी बात को सही साबित कर रहे हैं।”

श्रीमी वर्मा ने आगे की ट्वीट्स में लिखा, “कम से कम एक गूगल सर्च तो कर लो ये समझने के लिए कि इसका मतलब क्या होता है। यहाँ तक कि भक्तों से फैक्ट-चेक करने की उम्मीद रखना भी मजाकिया है। जो मुझसे यह पूछ रहे हैं कि मुझे कैसे पता कि तुम सब के ‘Di#k’ छोटे हैं, तुम्हारी माँओं ने मुझे इस बारे में बताया। क्योंकि, कोई और महिला ये नहीं देखने वाली है।” लोगों ने उनका जम कर विरोध किया और कहा कि वो लोगों को ऐसा कैसे बोल सकती हैं।

श्रीमी वर्मा करण जौहर की कंपनी ‘धर्मा प्रोडक्शंस’ में बतौर ‘डेवलपमेंट एग्जीक्यूटिव (नॉन फिक्शन)’ कार्यरत हैं। अंकित जैन ने उन्हें जवाब देते हुए लिखा, “ये करण जौहर के लिए काम करती है। 300 करोड़ रुपए दाँव पर लगे हुए हैं और ये जनता को ही भला-बुरा कह रही है। पब्लिक पहले ही बॉलीवुड का इलाज कर चुकी है। नुकसान तो इसके प्रोडक्शन हाउस का होगा, इसका नहीं।” श्रीमी वर्मा का एक पुराना ट्वीट भी वायरल हो रहा है।

17 जुलाई, 2019 को एक ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा था, “मेरे पिता संघी हैं, लेकिन मैं नहीं हूँ। हाँ, हम जैसों का भी अस्तित्व है। लोग मेरे पिता को फेसबुक पर या कहीं खोज लें, उससे पहले ये जान लीजिए।” ऋषि बागरी ने कहा कि अगर ये अपने पिता के बारे में इस तरह की बात कर सकती है तो ये सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर किसी भी तरह की गंदी भाषा का इस्तेमाल कर सकती है। ‘ब्रह्मास्त्र’ फिल्म पहले से ही विवादों में है।

‘ब्रह्मास्त्र’ के गानों में उर्दू भाषा का जम कर इस्तेमाल किया गया है। सोशल मीडिया में एक वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें रणबीर कपूर खुद को बीफ का प्रेमी बता रहे हैं। उनकी पत्नी आलिया भट्ट भी कह चुकी हैं कि अगर वो किसी को नहीं पसंद तो उनकी फिल्म न देखे। रणबीर जहाँ इस फिल्म में मुख्य अभिनेता हैं, आलिया फीमेल लीड रोल में हैं। इस फिल्म को अयान मुखर्जी ने निर्देशित किया है। अब श्रीमी वर्मा के ट्वीट्स के बाद फिल्म के बॉयकॉट की अपील तेज़ हो सकती है।

ज्ञानवापी की तरह श्रीकृष्ण जन्मभूमि की भी होगी वीडियोग्राफी: इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश, 4 महीने में सर्वे रिपोर्ट दाखिल करनी होगी

मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि के विवादित हिस्से की वीडियोग्राफी की जाएगी। इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने यह आदेश दिया है। यह उसी तरह होगा जैसे वाराणसी में ‘ज्ञानवापी मस्जिद’ की हुई थी।

हाई कोर्ट ने सोमवार (29 अगस्त 2022) को श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही ईदगाह विवाद (Sri Krishna Janmabhoomi Shahi Idgah) मामले में यह आदेश दिया। जस्टिस पीयूष अग्रवाल की बेंच ने मामले की सुनवाई की। वीडियोग्राफी कराकर 4 महीने में सर्वे रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया गया है।

मनीष यादव ने पिछले साल मथुरा की जिला अदालत में याचिका दाखिल कर मथुरा के विवादित परिसर की वीडियोग्राफी सर्वे कराने की माँग की थी। लेकिन अब हाई कोर्ट ने इस मामले में पूरी तस्वीर ही साफ कर दी है। वीडियोग्राफी सर्वे के लिए एक वरिष्ठ वकील को आयुक्त और दो अन्य वकील सहायक आयुक्त नियुक्त किए जाएँगे।

आज तक से बात करते हुए मनीष यादव ने कहा, “विवादित ढाँचे के सर्वे की अर्जी पर सुनवाई मथुरा की जिला अदालत में एक साल से लंबित थी। हाई कोर्ट ने अब साफ कह दिया है कि 4 महीने के अंदर सर्वे कराकर रिपोर्ट सौंपिए।” उन्होंने कहा, “हाई कोर्ट ने जो आदेश दिया है उसे हम मथुरा जिला अदालत में दाखिल करेंगे। उसके बाद से चार महीने के अंदर सर्वे और वीडियोग्राफी पूरी की जाएगी। ज्ञानवापी की ही तरह यहाँ भी वीडियोग्राफी सर्वे होगा और सर्वे ही इस मुकदमे की पहली सीढ़ी है।”

मनीष यादव ने खुद को भगवान श्रीकृष्ण का प्रत्यक्ष वंशज बताते हुए कोर्ट में आवेदन देकर ईदगाह ढाँचे का सर्वेक्षण कराने के लिए पैनल बनाने की माँग की थी। अपने आवेदन में यादव में कहा था कि सर्वे के लिए तीन सदस्यीय कोर्ट कमिश्नर का पैनल नियुक्त किया जाए और ईदगाह के बंद कमरों को खोल कर इसका सर्वे कराया जाए। इस दौरान उन्होंने पुलिस सुरक्षा की भी माँग की थी। बता दें कि मथुरा सिविल कोर्ट में 26 मई 2022 को सुनवाई के दौरान श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट ने कहा था कि शाही ईदगाह ढाँचा की जमीन सहित आसपास के 13.37 एकड़ जमीन मंदिर के हैं। इसके साक्ष्य के रूप में ट्रस्ट ने कोर्ट को दस्तावेज भी सौंपे थे।

अंकिता को जलाकर मारने के केस से हटाया गया DSP नूर मुस्तफा: शाहरुख को बचाने का आरोप, पूर्व CM ने दिए हिंदू विरोधी होने के और भी सबूत

झारखंड के दुमका में शाहरुख़ हुसैन नामक व्यक्ति ने अंकिता सिंह नाम की नाबालिग हिन्दू लड़की के शरीर पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दिया, जिससे इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। उधर राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने विधायकों संग लतरातू में पिकनिक मनाते रहे। शाहरुख़ को पुलिस की हिरासत में हँसते हुए और मूँछों पर ताव देते हुए देखा गया, जिससे पता चलता है कि उसे पुलिस-प्रशासन का कोई भय नहीं है।

इसका कारण है स्थानीय DSP नूर मुस्तफा, जिस पर आरोप है कि वो हत्यारे को बचा रहा है। विरोध प्रदर्शन कर रहे हिन्दुओं ने कहा कि उन्हें प्रशासन से शिकायत हैं, क्योंकि वो हमेशा से हिन्दुओं का विरोध करती है। वहीं झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कुछ दस्तावेज साझा करते हुए कहा है कि अंकिता हत्या कांड में अभियुक्त शाहरुख़ को बचाने के प्रयास में निशाने पर आये डीएसपी नूर मुस्तफ़ा के आदिवासी विरोधी एवं कम्यूनल होने का यह एक प्रमाण है।

उन्होंने जानकारी दी कि आदिवासियों के एक शोषक ज़ुल्फ़िकार पर ST एक्ट का मामला दर्ज हुआ और वह जेल भी गया, लेकिन मुस्तफ़ा ने 90 दिनों तक चार्जशीट नहीं की। उनके द्वारा शेयर किए गए दस्तावेज में जज के हस्ताक्षर के साथ यही बात लिखी है। भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि इसी आधार पर ज़ुल्फ़िकार को जमानत मिल है। उन्होंने जानकारी दी कि उसके बाद डीएसपी नूर मुस्तफ़ा ने उसके जेल से निकल जाने के कुछ देर बाद चार्जशीट कर दिया।

बाबूलाल मरांडी ने पूछा, “आदिवासियों के नाम पर घड़ियाली आँसू बहाने वाले सीटीबाज मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी, बताइए न, ऐसे अधिकारी को जेल में होना चाहिए या नहीं?” फ़िलहाल इस केस से नूर मुस्तफा को हटा दिया गया है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने भी झारखंड में डेमोग्राफी बदलाव की साजिश को लेकर बड़े आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि दुमका की घटना से सारा मानवता, समाज और झारखंड शर्मसार हुआ है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में आदिवासी बच्चियों और महिलाओं के साथ 1000 से ज़्यादा मामले हुए हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुबर दास ने कहा, “यह साधारण घटना नहीं है, क्योंकि एक संप्रदाय विशेष के लोग ‘लव जिहाद’ के माध्यम से डेमोग्राफी बदलना चाहते हैं। यह सिर्फ डेमोग्राफी ही नहीं बदलना चाहते हैं, बल्कि ज़मीन का भी जिहाद कर रहे हैं। बंग्लादेशी जिहादियों ने अब तक 10,000 एकड़ ज़मीन हड़प ली है। मैं सरकार से माँग करता हूँ की SIT गठन कर इसपर फ़ास्ट ट्रैक मामला चलाया जाए।” भाजपा दुमका की घटना को लेकर JMM-कॉन्ग्रेस सरकार पर लगातार हमलावर है।

‘जिस तरह मैं मर रही हूँ, वैसी ही मौत वो भी मरे’ : उस अंकिता का आखिरी Video जिसे शाहरुख ने जलाया, नईम खान भी गिरफ्तार

झारखंड के दुमका में अंकिता कुमारी के ऊपर पेट्रोल छिड़कर उसे जलाने वाले शाहरुख के बाद अब पुलिस ने उसके साथी को गिरफ्तार कर लिया है। अंकिता को मारने में शाहरुख का साथ देने वाले की पहचान नईम खान उर्फ छोटू खान के तौर पर हुई है। इस केस में यह दूसरी गिरफ्तारी है।

दुमका के एसपी अंबर लकरा ने बताया, “दुमका मर्डर केस का दूसरा आरोपित नईम उर्फ छोटू खान गिरफ्तार हो चुका है। अब उसे दुमका कोर्ट में पेश करके जेल भेजा जाएगा।”

बता दें कि इससे पहले शाहरुख की गिरफ्तारी 23 अगस्त 2022 को हुई थी। जिसकी वीडियो आज (29 अगस्त 2022) सोशल मीडिया पर वायरल होना शुरू हुई। वीडियो में देखा गया कि कैसे शाहरुख को अपने किए का कोई पछतावा तक नहीं। वो वीडियो में हँसते हुए, सीना चौड़ा करके पुलिस के साथ जाता दिख रहा था।

इस वीडियो को देखने के बाद लोगों में और गुस्सा भर गया। सड़कों पर प्रदर्शन के साथ सोशल मीडिया पर #justiceforankita ट्रेंड करने लगा। इसी बीच अंकिता की एक वीडियो सामने आई। ये वीडियो तब की है जब वो अस्पताल में भर्ती हुई थी। अंकिता ने हिंदूवादी संगठनों से बात करते हुए कहा था, “जिस तरह से मैं मर रही हूँ, वैसी ही मौत वो भी मरेगा”

अंकिता पर शाहरुख धर्मांतरण का दबाव बना रहा था

बता दें कि शाहरुख को लेकर अंकिता के पिता संजीव सिंह ने भी स्वराज्य की पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा से बातचीत में कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए।

अंकिता के पिता संजीव सिंह ने बताया, “शाहरुख हुसैन मेरी बेटी को एक साल से परेशान करके रखा था। वह उसे कहता था-मुझसे निकाह कर, इस्लाम कबूल कर, वरना मैं तेरी जिंदगी को जहन्नुम बना दूँगा।”

संजीव सिंह ने बताया कि शाहरुख उनकी बेटी को कई महीनों से तंग करता था। अंकिता उससे तंग आकर स्कूल जाना, कोचिंग जाना भी छोड़ देती थी। अंकिता के पिता बताते हैं कि कुछ महीने पहले भी शाहरुख ने हर हद्द को पार कर दिया था, जब वो घर में घुसता चला आया था। हालाँकि, उस समय बच्चों ने शोर मचाया तो पड़ोसी आए और उन्होंने उसे खींचकर बाहर किया। संजीव सिंह के अनुसार, पड़ोसियों ने उसे पीटा भी था लेकिन वो नहीं सुधरा।

अंकिता के जाने के बाद अब उसके पिता केवल अपनी बेटी के लिए इंसाफ चाहते हैं। पुलिस ने शाहरुख के ऊपर आईपीसी की धारा 328, 307 और 506 लगाकर केस दर्ज किया है। वो जेल में भी बंद है। लेकिन इन सबसे अंकिता के परिजनों का दुख कम नहीं हो जाता। सबको वही रात याद आ रही है जब अंकिता ने पिता से शाहरुख की शिकायत की थी और अगले ही दिन उसे पेट्रोल डालकर जला दिया गया था। इस घटना को अंजाम देने से पहले 22 अगस्त को शाहरुख ने अंकिता को धमकाया था- “अगर तूने मुझसे बात की तो तुझे मार डालूँगा।”

मदरसे से आतंकी गतिविधियाँ चला रहे थे अकबर अली और अबुल कलाम आजाद, असम पुलिस ने पकड़ा: बोले CM सरमा – ध्वस्त किया दूसरा मदरसा

असम (Assam) के बारपेटा (Barpeta) जिले से दो संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है। इनकी पहचान अकबर अली और अबुल कलाम आजाद के रूप में की गई है। इनका कनेक्शन आतंकी ग्रुप अलकायदा (AQIS) और ‘अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT)’ से है।

बारपेटा के एसपी अमिताव सिन्हा ने बताया, “पुलिस ने बारपेटा में एक मदरसे में बेदखली का अभियान चलाया है, क्योंकि यह अवैध रूप से सरकारी जमीन पर बनाया गया था। पकड़े गए दोनों संदिग्धों का लिंक अलकायदा भारतीय उपमहाद्वीप (AQIS) और अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) से है।”

अतिरिक्त उपायुक्त लचित कुमार दास के मुताबिक, “यह मदरसे देश विरोधी गतिविधियों, जिहादी संगठनों में शामिल है। जाँच में सामने आया आया है कि ये मदरसा सरकारी जमीन पर बनाया गया है और इसका कोई मालिक नहीं नहीं। इसलिए हमने इसे तुरंत ध्वस्त करने का फैसला किया।”

सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने बारपेटा जिले से दो संदिग्ध आतंकियों के गिरफ्तार होने के बाद मीडियाकर्मियों से कहा, “यह दूसरा मदरसा है, जिसे हमने ध्वस्त किया। क्योंकि वे एक संस्था के रूप में नहीं चल रहे थे, बल्कि एक आतंकवादी केंद्र के रूप में चल रहे थे। मैं सामान्यीकरण नहीं करना चाहता, लेकिन जब कट्टरवाद की शिकायत आती है तो हम जाँच करते हैं और उचित कार्रवाई करते हैं।”

एक पुलिस अधिकारी ने बताया, “अकबर अली और अबुल कलाम आजाद को शनिवार रात (27 अगस्त, 2022) को हिरासत में लेकर रात भर पूछताछ की गई थी, जिसके बाद दोनों को 28 अगस्त को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उनको 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।”

गौरतलब है कि आतंकी लिंक मामले में पुलिस ने पिछले 10 दिनों में 6 संदिग्ध लोगों की गिरफ्तारी की है। इससे पहले गोलपारा से चार की गिरफ्तारी हुई थी। बीते 26 अगस्त को पुलिस ने असम के बोंगाईगाँव जिले से एक और संदिग्ध आतंकी को गिरफ्तार किया था। शुरुआती जाँच में इस आतंकी का संबंध भी अल-कायदा भारतीय उपमहाद्वीप (AQIS) और अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) से जुड़ा पाया गया है। फिलहाल यह आतंकी पुलिस हिरासत में है, जहाँ इससे कड़ी पूछताछ की जा रही है। गिरफ्तार संदिग्ध आतंकी की पहचान हाफिजुर रहमान मुफ्ती के रूप में हुई है। हाफिजुर इलाके के एक मदरसे में पढ़ाता है।

बिहार में BJP नेता की हत्या: तेजस्वी यादव के ‘ठंडा कर देंगे’ बयान पर महिला MP ने कहा- मेरे पति की भी हत्या करवाई थी

बिहार के समस्तीपुर में बीजेपी की एक नेता की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। मृतक रघुवीर स्वर्णकार भाजपा मंडल प्रभारी थे। 27 अगस्त 2022 की रात खानपुर थाना क्षेत्र के सिरोपट्टी गाँव में उनकी हत्या कर दी गई। दूसरी ओर बीजेपी की महिला सांसद रमा देवी ने आरोप लगाया है कि उनके पति बृजबिहारी प्रसाद की हत्या लालू यादव के परिवार ने ही कराई थी।

रमा देवी ने यह बात उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के ‘ठंडा कर देंगे’ वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कही। उन्होंने कहा, “ऐसा ठंडा इनलोगों ने कितनों को किया है। हमारे पति को भी ठंडा किया ये लोग मिलकर कि कहीं मुख्यमंत्री की कुर्सी पर न बैठ जाएँ बृज बिहारी बाबू। लेकिन मैं इन लोगों को जवाब देने के लिए खड़ी हूँ। राबड़ी देवी को अपना नाम लिखने तक में समय लगता है, ऐसे लोगों को सीएम बनाया। उन्हें खुद पर शर्म आनी चाहिए।”

इस बयान के बाद रमा देवी से पूछा गया कि वह बेहद गंभीर आरोप लगा रही हैं। फिर भी वे अपने बात पर डटी रहीं। उन्होंने कहा, “हाँ, इन लोगों ने मेरे पति की हत्या करवाई है। आज भी ये लोग जंगलराज और गुंडाराज लाने के लिए सत्ता में बैठे हुए हैं।” बृज बिहारी प्रसाद राजद में ही थे। 13 जून 1998 को पटना में उनकी हत्या कर दी गई थी।

गौरतलब है कि उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय के बीच इस समय जुबानी जंग चल रही है। जमीन के बदले नौकरी घोटाले को लेकर राजद नेताओं के घर हुई छापेमारी के बाद तेजस्वी यादव ने कहा था “एक केंद्रीय मंत्री जिनका सीएम बनने का सपना टूटा है, इधर-उधर कर रहे हैं। वो लाइन पर आ जाएँ नहीं तो ठंडा कर देंगे। बिहार के सांसद जो केंद्र में मंत्री हैं वो बिहार में महाराष्ट्र वाला खेला करना चाह रहे थे। वो ज्यादा सपने न देखें, दिल्ली वाले नहीं बचाएँगे।” तेजस्वी के इस बयान के बाद नित्यानंद राय ने कहा था “आओ दोनों लोग भैंस का दूध निकालते हैं। जो जल्दी भैंस दुहेगा वो जीत जाएगा और जो दूध दुहते-दुहते ठंडा हो जाएगा वो हार जाएगा। तेजस्वी को पता नहीं कि हम किसान के बेटे हैं, उनसे कौन मुँह लगाए?”

‘अर्बन नक्सल’ मेधा पाटकर को गुजरात में AAP का मुख्यमंत्री चेहरा बनाने की चर्चा, एक बार जॉइन कर छोड़ चुकी हैं पार्टी: कच्छ तक पानी पहुँचाने से रोका था

राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को ‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ गुजरात में मुख्यमंत्री का चेहरा बना सकती है। मेधा पाटकर कई विकास परियोजनाओं पर ग्रहण लगाने के लिए भी जानी जाती हैं। उनके ‘आंदोलनों’ के कारण कई इलाके विकास में पीछे रह गए और वहाँ सरकारी परियोजनाएँ ठप हो गईं। AAP इस बार गुजरात में पूरे दमखम के साथ उतर रही है और उसे वहाँ एक चेहरे की तलाश भी है।

पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने इन अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मेधा पाटकर होगी AAP की गुजरात CM कैंडिडेट! हाँ, वहीं पानी रोकने वाली, बाँध के ख़िलाफ़ साज़िश रचने वाली, गुजरात को बदनाम करने वाली, आंदोलन के नाम पर दुकान चलाने वाली मेधा पाटकर। अरविंद केजरीवाल जी, चुनाव लड़ना चाहते हो या बस गुजरात को बदनाम करने का प्लान हैं?” वहीं मुंबई भाजपा के प्रवक्ता सुरेश नखुआ ने मेधा पाटकर को विकास विरोधी और गुजरात विरोधी बताया है।

दिसंबर 2022 में गुजरात में विधानसभा चुनाव होने हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा है कि मेधा पाटकर एक अर्बन नक्सल हैं, जिन्हें राजनीतिक समर्थन प्राप्त है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने कच्छ के हालिया दौरे में लोगों को उन लोगों की याद दिलाई, जो गुजरात का विकास रोकना चाहते थे। उन्होंने कहा कि कोई कल्पना नहीं कर सकता था कि कभी टप्पर, फतेहगढ़ और सुवाई बाँधों में भी नर्मदा का पानी पहुँच सकता है और अब कच्छ के गाँव-गाँव में पानी पहुँचने से हजारों हेक्टेयर में सिंचाई की समस्या खत्म हुई, जिसका लोगों ने उत्सव मनाया।

बता दें कि मेधा पाटकर ने ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ चला कर नर्मदा पर बाँध बनाने से रोका था, जिससे लाखों लोगों को सूखे में रहना पड़ा और किसानों को घाटा हुआ। सीएम पटेल ने भी याद दिलाया कि कैसे कुछ लोगों ने कच्छ तक पानी पहुँचाने के रास्ते में 5 दशक तक अड़ंगा लगाया। उन्होंने कहा कि ये ‘अर्बन नक्सल’ कौन हैं, हमें पता है। सीएम पटेल ने कहा कि हमें पता है कि कौन सी पार्टी नक्सली विचारधारा को गुजरात में लाना चाहती है, हमें उसे हराना है।

ये भी याद दिला दें कि मेधा पाटकर कभी AAP में शामिल होकर उसे छोड़ भी चुकी हैं। उन्होंने जनवरी 2013 में ही AAP जॉइन किया था, लेकिन इसके लगभग एक साल बाद ही मार्च 2015 में उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। तब AAP ने अपने कुछ वरिष्ठ नेताओं को पार्टी से निकाल बाहर किया था, जिसके बाद मेधा पाटकर ने इस्तीफा देते हुए कहा था कि उनकी गतिविधियों के लिए इस पार्टी में कोई जगह नहीं है, ऐसे में में वो इससे निकल रही हैं।

‘शमशीर (तलवार) से मिलेगी जन्नत’ : 12वीं के छात्रों को ‘जिहाद’ सिखा रहा तुर्की, 2 साल में 18 लाख बच्चों को दी गाजी वाली तालीम

तुर्की में 12 वीं के छात्र-छात्राओं को ‘जिहाद’ की तालीम दी जा रही है। बच्चे-बच्चे को पढ़ाया जा रहा है कि जिहाद चाहे कैसा भी हो अल्लाह के नाम पर अगर इसे अंजाम दिया जाए तो जन्नत के रास्ते खुल जाते हैं। ये खुलासा हाल में कुछ रिपोर्ट्स के जरिए हुआ है जिनमें दावा किया गया कि तुर्की के शिक्षा मंत्रालय ने 12 वीं के सिलेबस में जिहाद के टॉपिक को एड करवा रखा है।

इन रिपोर्ट्स में बताया गया है कि तुर्की के शिक्षा मंत्रालय ने साल 2019 में 12वीं के बच्चों के लिए दो खंड की किताब प्रकाशित की थी। इस किताब का नाम ‘फंडामेंटल्स ऑफ रिलिजियस नॉलेज- इस्लाम 2’ है। इसी में एक चैप्टर है जो जिहाद की तालीम देता है।

यह कहता है, युद्ध समेत हर कार्य जो अल्लाह के नाम पर किए जाएँ वो इस जिहाद के कॉन्सेप्ट में आते हैं। इसमें बताया गया कि जिहाद को दिल से, जुबान से, हाथ से या हथियार से कैसे भी किया जा सकता है।

किताब में लिखा गया, “हमारे पूर्वज जिन्होंने शहादत को सबसे बड़ी चीज समझी और जिहाद के लिए निकल पड़े… उन्होंने यही कहा था- अगर मैं मरा तो शहीद कहलाऊँगा और बचा तो गाजी…इस तरह पूर्वज हमारे कभी भी शहीद होने से पीछे नहीं हटे।”

बता दें कि जिहाद से जुड़ी तालीम 2019 में तुर्की में 891000 छात्रों को दी गई जबकि 2020 में यही पढ़ाई 894100 छात्रों को करवाई गई। इसमें सिखाया गया।

MEMRI की रिपोर्ट से आइए समझते हैं कि किताब में जिहाद के चैप्टर में मुख्य बातें कौन सी हैं:

  • इसमें सिखाया गया है कि जिहाद, इस्लाम में इबादत का सबसे महत्वपूर्ण तरीका है। जिहाद में युद्ध समेत सभी कार्य आते हैं जो अल्लाह के नाम को और रौशन करने के लिए किए गए हों।
  • स्कूल की किताब में उल्लेख है कि जिहाद को बढ़ावा देने की बात कुरान में भी है और इसका जिक्र पैगंबर मोहम्मद ने हदीस में भी किया है।
  • जिहाद का अर्थ- किताब में अच्छाई की बुराई से लड़ाई को, सरजमीं के लिए दुश्मनों के साथ हुए युद्ध को, किसी बुरी ताकत या शैतान को हराने के लिए किए गए संघर्ष को, अपने भीतर की बुराई को खत्म के लिए की गई कोशिश को, कहा गया है। ये भी जानकारी दी गई है कि जो इसे करता है वो मुजाहिद कहलाता है।

किताब में कई जगह कुरान का हवाला देकर भी बातों को समझाने की कोशिश हुई है। इसमें कहा गया है, “असली ईमान वाले वहीं हैं जो अल्लाह तथा रसूल पर बिन संदेह यकीन करें और अल्लाह के लिए अपने प्राण और धन का प्रयोग करें।”

इसमें यह भी बताया गया कि पैगंबर मोहम्मद ने भी जिहाद की आवश्यकता को समझाया था। उन्होंने कहा था कि जो लोग अल्लाह के रास्ते पर चलते हुए, बिन लड़े मरते हैं वो पाखंडी हैं। उन्होंने जिहाद पर कहा था, कभी भी दुश्मन से मिलने की इच्छा मत रखो, अल्लाह से माफी माँगो। लेकिन अगर कभी दुश्मन से मुलाकात हो भी जाए तो धैर्य रखो और जान लो शमशीर के साए में ही जन्नत का रास्ता है।

पाठ्यक्रम में समझाया गया है कि कैसे जिहाद कयामत के दिन तक करना हर मुस्लिम के लिए जरूरी है। इसमें कहा गया है कि मुस्लिमों को अपना भूमि, मजहब, झंडा बचाना ही है। वह कभी इससे पीछे नहीं हट सकते। जिहाद इबादत का ऐसा ढंग है कि मुस्लिम इसे शहीद होने की सोचकर, अपनी जान देकर, या संपत्ति या उस ज्ञान के जरिए कर सकते हैं जो अल्लाह ने उनको दिया है। इसमें बताया गया है कि अल्लाह ने उन लोगों के लिए जन्नत के रास्ते खोले हुए हैं जो अपनी जिंदगी और संपत्ति देकर जिहाद करते हैं।