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‘बात नहीं करती है तो उसकी यही सजा है’: अंकिता को जलाने वाले शाहरुख के जिगरी यार नईम के मोबाइल में मिले जहरीले वीडियो, रिपोर्ट में दावा

झारखंड के दुमका में हिंदू छात्रा अंकिता सिंह को जलाकर मारने वाले शाहरुख के दोस्त नईम खान उर्फ छोटू को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार उसके मोबाइल में आतंकी संगठन अंसार उल बांग्ला के वीडियो मिले हैं। बंगलादेश का यह आतंकी संगठन गैर इस्लामी लड़कियों से निकाह कर बच्चा पैदा करने और उन्हें मुस्लिम बनाने का पैरोकार है।

नईम को सोमवार (29 अगस्त 2022) को गिरफ्तार किया गया था। अंकिता को जलाने के लिए पेट्रोल लाकर उसने ही शाहरुख को दिया था। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार नईम भी पेंटर है। शाहरुख उसका जिगरी यार है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि नईम ने पुलिस पूछताछ में कबूल किया है कि 22 अगस्त की शाम शाहरुख उससे मिला था। वह काफी गुस्से में था। शाहरुख ने अंकिता को जलाकर मारने की बात कही थी। इसके जवाब में नईम ने कहा था कि यदि वह बात नहीं करती है तो उसकी यही सजा है। इसके बाद वह शाहरुख के लिए पेट्रोल खरीद कर भी लाया।

रिपोर्ट में दुमका के एसपी अंबर लकड़ा के हवाले से बताया गया है कि इस मामले की हर एंगल से विस्तृत जाँच हो रही है। शाहरुख और नईम के मोबाइल में मिले संपर्को और वीडियो की भी जाँच की जाएगी। इनका पुराना रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है।

गौरतलब है कि 22 अगस्त की रात जब अंकिता अपने घर में सो रही थी तब शाहरुख खिड़की से कमरे में दाखिल हुआ और पेट्रोल छिड़ककर उसे आग लगा दी। इससे एक दिन पहले उसने अंक‍िता को फोन पर धमकी दी थी। उसने कहा था क‍ि मुझे स्‍वीकार कर लो वरना तुम्‍हें व तुम्‍हारे पर‍िवार को जान से मार देंगे। 27 अगस्‍त की देर रात अंकिता ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।

शाहरुख को 23 अगस्त 2022 को गिरफ्तार हुआ था। अंकिता की मौत के बाद उसका एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें वह पुलिस हिरासत में हँसते हुए दिख रहा था। रिपोर्टों के अनुसार वह 2 साल से अंकिता को प्रताड़ित कर रहा था।

लालू, राबड़ी, तेजस्वी… सब बने यहाँ से MLA, पर एक पुल न बना: 1975 में नाव से गए थे नीतीश कुमार, 2022 में भी नाव ने ही लगाया पार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव मंगलवार (30 अगस्त, 2022) को पूर्व मंत्री भोला राय को श्रद्धांजलि देने के लिए दियारा क्षेत्र में स्थित राघोपुर पहुँचे। लेकिन, इस यात्रा में कथित ‘सुशासन बाबू’ के सरकार की पोल भी खुल गई। राघोपुर किस कदर राज्य से कटा हुआ है, इसका खुलासा हो गया। असल में नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव स्टीमर पर सवार होकर वहाँ पहुँचे, वहीं उनकी गाड़ियाँ दूसरे नाव से। कारण, वहाँ जाने के लिए एक अदद पुल तक नहीं है।

‘Zee Hindustan’ के मैनेजिंग एडिटर शमशेर सिंह ने बताया कि 1975 में भी नीतीश कुमार हाजीपुर के राघोपुर जाने लिए नाव का ही इस्तेमाल करते थे, क्योंकि तब भी यहाँ पक्का पुल नहीं था। उन्होंने याद दिलाया कि अब 17 वर्ष सत्ता में रहने के बाद भी नीतीश कुमार उसी तरह से राघोपुर जा रहे हैं। आपको बता दें कि वैशाली में स्थित राघोपुर लालू यादव के परिवार का गढ़ रहा है। उनके बिहार पर 15 साल लगातार राज करने के बावजूद यहाँ एक अदद पुल तक नहीं बना।

1995 में राजद सुप्रीमो लालू यादव यहाँ से विधायक चुने गए थे, जो तब मुख्यमंत्री भी थे। 2000 में हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी और तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी यहाँ से चुन कर MLA बनीं। उसी साल हुए चुनाव में लालू फिर यहीं से जीत कर विधानसभा पहुँचे। 2000 में राबड़ी फिर जीतीं। 2005 में हुए 2 चुनावों में भी उन्होंने इस सीट पर कब्ज़ा बरकरार रखा। 2015 और 2020 में तेजस्वी यादव यहाँ से विधायक हैं।

इस सीट से एक ही परिवार के दो मुख्यमंत्री और एक उप-मुख्यमंत्री विधायक रहे, लेकिन एक पुल का सपना भी साकार न हो सका। वहीं मोदी सरकार ने गंगा पर पुल बनवाने का निर्णय लिया। ये एक रेल सह सड़क पुल होगा। यह पुल महात्मा गाँधी सेतु से लगभग 10 किलोमीटर पूरब गंगा नदी पर कच्ची दरगाह और बिदुपुर के बीच बन रहा है। इससे दियारा अंचल और राघोपुर को फायदा मिलेगा। राघोपुर की स्थिति ये है कि क्लास जाने वाले बच्चे भी पूरे सप्ताह स्कूल नहीं कर पाते।

रसोई गैस जैसी वस्तुओं की सप्लाई के लिए भी नदी पार करना पड़ता है। पटना से राघोपुर पहुँचने के लिए गाँधी सेतु और जेपी सेतु तो है, लेकिन इसके बावजूद अधिकतर रास्ता नाव से तय करना पड़ता है और पूरे साल भर दोनों पुलों से संपर्क नहीं रहता। लोजपा (राम विलास) सुप्रीमो चिराग पासवान भी भोला राय को श्रद्धांजलि देने नाव से ही पहुँचे थे। आपातकाल के दौरान जयप्रकाश नारायण की सभा भी राघोपुर में हुई थी। उसी दौर में नीतीश कुमार और उदय नारायण उर्फ़ भोला राय का परिचय हुआ था। राय ने 1980, 85 और 90 में बतौर विधायक यहाँ से हैट्रिक भी लगाई थी।

पूर्व विधायकों के बेटे-बेटियों को भी पेंशन देने की तैयारी में गहलोत सरकार, कर्ज के बोझ तले दबा है राज्य: महिला उत्पीड़न में देश में नंबर वन

राजस्थान से दो बड़ी खबरें सामने आयीं हैं। पहली खबर महिला उत्पीड़न को लेकर है। हाल ही में सामने आए आँकड़ों से यह पता चला है कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा और अत्याचार के मामले में राजस्थान देश में टॉप पर है। दूसरी ओर, कर्ज के बोझ तले दबे राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार मृतक पूर्व विधायकों के 25 वर्ष तक के आश्रित पुत्र-पुत्रियों को पेंशन देने पर विचार कर रही है। यही नहीं, यदि किसी मृतक पूर्व विधायक के माता-पिता जीवित हैं तो उन्हें भी पेंशन देने का विचार किया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य के एक पूर्व विधायक की पुत्री ने पेंशन की माँग को लेकर राज्य सरकार को एक पत्र लिखा था। इसके बाद राजस्थान सरकार नए पेंशन नियम पर विचार कर रही है।

बता दें कि वर्तमान में छत्तीसगढ़, दिल्ली एवं मध्य प्रदेश में ही मृतक पूर्व विधायकों के 25 साल तक की उम्र के आश्रित बच्चों को पेंशन दी जा रही है। जबकि, राजस्थान में फिलहाल मृतक पूर्व विधायकों की पत्नी को ही पेंशन दी जा रही है। लेकिन, यदि मृतक विधायकों के पुत्र-पुत्रियों को पेंशन देने का नियम लागू किया जाता है तो राजस्थान सरकार पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है। फिलहाल राजस्थान सरकार 4 लाख 77 हजार करोड़ रुपए के कर्ज के बोझ तले दबी हुई है।

मृतक विधायकों के आश्रितों को पेंशन देने के इस प्रस्ताव को लेकर राजस्थान वित्त एवं संसदीय कार्य विभाग परीक्षण कर रहा है। मंगलवार (30 अगस्त, 2022) को इन दोनों ही विभागों के अधिकारियों की बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा की गई है। इस परीक्षण के लिए विधानसभा से ऐसे मृतक पूर्व विधायकों का विवरण मँगाया जा रहा है, जिनके आश्रित पुत्र-पुत्री 25 वर्ष से कम उम्र के हैं।

‘दैनिक जागरण’ ने अपनी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया है कि मृत विधायकों के आश्रितों से जुड़ी जानकारी विधानसभा से मिलने के बाद सरकार पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ का अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आगामी बजट में इस बारे में घोषणा कर सकते हैं। हालाँकि, राज्य सरकार मृत विधायकों के आश्रितों को कितनी पेंशन देने पर विचार कर रही है, यह अब तक स्पष्ट नहीं है।

महिला उत्पीड़न में टॉप पर राजस्थान

ये भी सामने आया है कि राजस्थान महिला उत्पीड़न के मामले में टॉप पर है। हाल ही में ‘राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (NCRB)’ ने महिलाओं पर हुई हिंसा और अत्याचार को लेकर आँकड़े जारी किए हैं। इन आँकड़ों के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ हिंसा और अत्याचार के मामले में राजस्थान देश में नंबर एक पर है। यदि सिर्फ बलात्कार के आँकड़ों की बात करें तो राजस्थान में साल 2021 में 6377 बलात्कार के मामले सामने आए। ये साल 2020 के 5310 की तुलना में कहीं अधिक है।

देर रात हथौड़ा लेकर शिव मंदिर में घुसा, तोड़ डाली कई मूर्तियाँ: CCTV से पकड़ा गया मोहम्मद आजाद, अलीगढ़ की घटना

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में शिव मंदिर में तोड़फोड़ करने के मामले में पुलिस ने 25 वर्षीय एक युवक को गिरफ्तार किया है। यह मंदिर बन्‍नादेवी थाना क्षेत्र के रसलगंज चौकी के नजदीक स्थित है। रविवार (28 अगस्त 2022) देर रात यहाँ आधा दर्जन से अधिक मूर्तियों को खंडित कर दिया गया था।

अलीगढ़ पुलिस ने गिरफ्तारी की पुष्टि की है। वरिष्‍ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कलानिधि नैथानी ने बताया कि रविवार देर रात 25 वर्षीय एक युवक को शिव मंदिर में घुसकर मूर्तियों को नुकसान पहुँचाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। सीसीटीवी फुटेज से उसकी पहचान हुई है। कुछ रिपोर्टों में गिरफ्तार युवक की पहचान मोहम्मद आजाद के तौर पर बताई गई है। आईपीसी की धारा 452, 427, 307 और 295 के तहत मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया है।

घटना की जानकारी मिलने पर बीजेपी नेता और पूर्व मेयर शकुंतला भारती भी मौके पर पहुँची। उन्होंने कहा, “मंदिर में तोड़फोड़ की घटनाओं को अंजाम देकर शहर का माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही हैं। हाल में हुई इस तरह की यह तीसरी घटना है। साजिश के तहत मंदिर की मूर्तियों को तोड़ा जा रहा है।” मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, युवक की गिरफ्तारी के बाद स्थानीय लोगों ने बताया कि वह मानसिक रूप से बीमार है। हालाँकि, अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, मंदिर में तोड़फोड़ से नाराज हिंदू सगंठनों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया

तीस्ता सीतलवाड़ और मेधा पाटेकर को AAP का खुला समर्थन: एक ने गुजरात को बदनाम किया, दूसरी ने गुजरातियों को पानी के लिए तड़पाया

गुजरात में चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी पूरी कोशिशों में है कि किसी तरह भाजपा को सत्ता से निकाल कर वहाँ सरकार बना सके। इसी उद्देश्य को हासिल करने के लिए पार्टी नेता भाजपा को निशाना बनाते हैं, लेकिन इस दौरान उन्हें ये ध्यान नहीं रहता कि ऐसा करते समय वो गुजरात के लोगों की भावना से तो नहीं खेल रहे।

हाल में आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने एक ट्वीट शेयर किया। इस ट्वीट में भाजपा और दिल्ली के उप-राज्यपाल की आलोचना के साथ तीस्ता सीतलवाड़ और मेधा पाटेकर की वाहवाही थी

जिस वीडियो को उन्होंने शेयर किया, उस वीडियो में डॉ सुनीलम कारी अपने कंधे पर हरे रंग का गमछा पहनकर दिल्ली एलजी का बैकग्राउंड बता रहे थे। डॉ सुनीलम ने कहा कि दिल्ली एलजी ने मेधा पाटेकर और तीस्ता को बदनाम करने का काम किया था।

उन्होंने कहा कि दिल्ली एलजी ऐसा सोच रहे हैं कि वो आ गए हैं तो सब सुधार देंगे लेकिन असल में तो वह खुद भी एनजीओ- ‘नेशनल काउंसिल फॉर सिविल लिबर्टी’ से जुड़े हुए हैं। आगे डॉ सुनीलम कहते हैं कि गुजरात में जब दंगे वाला समय चल रहा था, तब शांति को लेकर एक कार्यक्रम हुआ था, जहाँ हमला कराने का काम खुद वीके सक्सेना ने किया था। वो केस आज भी कोर्ट में है। उसमें वीके का नाम है जिसमें मेधा पाटेकर जाती हैं। इसके अलावा इन्होंने इंडियन एक्सप्रेस में फर्जी विज्ञापन छपवाने का काम किया, फिर अखबार को माफी माँगनी पड़ी।

डॉ सुनीलम से इतना भाजपा विरोधी कंटेंट पाकर पहले आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने इसे शेयर किया। उन्होंने लिखा, “ये LG तो बहुत ख़तरनाक आदमी है ये मैं क्या सुन रहा हूँ? ये गैंग के जरिए हमला कराने का आरोपित हैं। इन पर FIR है। जिस व्यक्ति पर भ्रष्टाचार और अपराध के संगीन मामले दर्ज हैं उसको LG क्यों बनाया मोदी जी? एल-लूट, जी-गैंग।”

इसके बाद गुजरात पार्टी अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने संजय के ट्वीट को शेयर किया। उन्होंने लिखा, “ये भाजपा मॉडल है। जितना आप गुनाह करोगे उतना आपको पद मिलेगा।”

हालाँकि, इस ट्वीट को करते हुए वह इस बात को भूल गए कि भाजपा को निशाना बनाने के चक्कर में गुजरात की जनता की भावना से खिलवाड़ भी हो सकता है और उनके खुद भी सीएम दावेदार चुने जाने में कठिनाई आ सकती है।

दरअसल, जिन मेधा पाटेकर का महिमामंडन इसुदान ने अप्रत्यक्ष तौर पर किया, उन्हें लेकर खबर ही खबर आई थी कि AAP उन्हें सीएम पद का उम्मीदवार बनाएगी। इससे पहले इसुदान को लेकर कयास थे कि वो AAP की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार हो सकते हैं।

तीस्ता सीतलवाड़ और मेधा पाटेकर

मेधा पाटेकर और तीस्ता सीतलवाड़ का गुजरात से और भी संबंध है। तीस्ता पर जहाँ बीते समय में गुजरात तो बदनाम करने के आरोप लगे। तो वहीं मेधा पर ये आरोप है कि उनकी वजह से सरदार सरोवर योजना अवरुद्ध हुई और कई गुजरातियों को लंबे समय प्रभावित होना पड़ा। मेधा पाटेकर द्वारा शुरू किए गए ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ का ही नतीजा था कि सरकारी योजनाएँ ठप्प हो गई थीं। लाखों लोगों को सूखा झेलना पड़ा था, किसानों को घाटा हो गया था।

मुस्लिम या इससे बनने वाले दलितों को आरक्षण का लाभ मिले या नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से माँगा जवाब: प्रशांत भूषण ने की ‘दलित ईसाइयों’ की पैरवी

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (30 अगस्त, 2022) को हिंदू धर्म से ईसाई और इस्लाम मजहब में धर्मांतरित हुए दलितों को आरक्षण का फायदा मिलने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से अपना पक्ष रखने को कहा। अदालत ने धर्मांतरित हुए दलितों के आरक्षण दिया जाए या नहीं, इस मुद्दे पर केंद्र से तीन सप्ताह के भीतर जवाब देने का अनुरोध किया और दूसरे पक्ष को उसके बाद जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया।।

सुनवाई के दौरान, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह कहते हुए स्थगन की माँग की कि मामले को लंबे समय के बाद सूचीबद्ध किया गया है। इस बीच, याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने शीर्ष न्यायालय के समक्ष कहा कि अगर केवल दलित हिंदुओं को आरक्षण प्रदान किया जाता है, तो दलित ईसाई जो आमतौर पर ‘काफी शिक्षित’ होते हैं, वे इसका विरोध करेंगे।

मुस्लिम और ईसाई बन चुके दलितों को आरक्षण का लाभ नहीं

गौरतलब है कि पिछले साल भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने आरक्षण को लेकर राज्यसभा में एक अहम बयान दिया था। उस वक्त वह कानून मंत्री थे। उन्होंने कहा था कि ईसाई या इस्लाम मजहब अपना चुके दलित सरकारी नौकरियों में आरक्षण लेने का दावा नहीं कर सकते हैं। ये लोग आरक्षण से जुड़े अन्य लाभ भी नहीं ले पाएँगे। उन्होंने ये भी कहा था कि धर्म परिवर्तन करने वाले दलित संसद और विधानसभा के लिए आरक्षित सीटों पर भी चुनाव लड़ने के योग्य नहीं माने जाएँगे।

सिर्फ हिन्दू, सिख या बौद्ध धर्म स्वीकार करने वाले अनुसूचित जाति के लोग आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने के योग्य होंगे।। इसके साथ ही पूर्व कानून मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया था कि संसदीय या लोकसभा चुनाव लड़ने वाले इस्लाम या ईसाई धर्म में परिवर्तित होने वाले अनुसूचित जाति/जनजाति के व्यक्ति को निषेध करने के लिए संशोधन का प्रस्ताव मौजूद नहीं।

बता दें कि 1950 में जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने केवल हिंदू धर्म के दलितों के लिए आरक्षण का आदेश पारित किया था। 1956 में इसमें सिखों और 1990 में बौद्ध को भी जोड़ दिया गया था। यानी, अनुसूचित जाति के लोग ईसाई और इस्लाम के अलावा अन्य किसी भी धर्म में कन्वर्ट हो रहे हैं, तो उन्हें पहले की तरह सारे फायदे मिलते रहेंगे।

‘गली-गली में शराब की दुकानें, भ्रष्टाचार को बढ़ावा…’: अन्ना हजारे का CM केजरीवाल को पत्र, लिखा – आपकी कथनी-करनी में फर्क, भूल गए आदर्श

दिल्ली की शराब नीति में घोटाले की खबरों के बीच वयोवृद्ध सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखा है। इस पत्र में अन्ना हजारे ने केजरीवाल की शराब नीति की आलोचना करते हुए फटकार लगाई है। अन्ना ने कहा है जिस तरह शराब का नशा होता है, उस प्रकार सत्ता का भी नशा होता है। उन्होंने लिखा कि केजरीवाल भी ऐसी सत्ता के नशा में डूब गए हैं, ऐसा लग रहा है।

अन्ना ने पत्र में लिखा है, “आपके (अरविंद केजरीवल) मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार मैं आपको खत लिख रहा हूँ। पिछले कई दिनों से दिल्ली राज्य सरकार की शराब नीति के बारे में जो खबरें आ रही हैं, उन्हें पढ़ कर बड़ा दुख होता है।”

उन्होंने इस पत्र में अरविंद केजरीवाल की पुस्तक ‘स्वराज’ का जिक्र करते हुए कहा है, “आपने किताब में कितनी आदर्श बातें लिखी थी, तब आप से बड़ी उम्मीद थी। लेकिन, ऐसा लगता है राजनीति में जाकर मुख्यमंत्री बनने के बाद आप आदर्श विचारधारा को भूल गए हैं। इसलिए दिल्ली में आपकी सरकार ने नई शराब नीति बनाई, जिससे शराब की बिक्री और शराब पीने को बढ़ावा मिल सकता है। गली-गली में शराब की दुकानें खुलवाई जा सकती हैं, इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल सकता है, यह बात जनता के हित में नहीं है।”

अन्ना हजारे ने इस पत्र में आगे लिखा है, “जब 10 साल पहले 18 सितंबर, 2012 को दिल्ली में टीम अन्ना के सदस्यों की मीटिंग हुई थी, उस वक्त आप ने राजनीतिक रास्ता अपनाने की बात रखी थी। लेकिन, आप भूल गए कि राजनीतिक पार्टी बनाना हमारे आंदोलन का उद्देश्य नहीं था। उस वक्त ‘टीम अन्ना’ के बारे में जनता के मन में विश्वास पैदा हुआ था। इसलिए मेरी सोच थी कि ‘टीम अन्ना’ का देश भर में घूम कर लोक-शिक्षण और लोक-जागृति का काम करना जरूरी है। अगर इस दिशा में काम होता तो कही पर भी शराब की ऐसी गलत नीति नहीं बनती।”

इस पत्र में केजरीवाल पर हमला बोलते हुए अन्ना हजारे ने अपने पत्र में लिखा कि भ्रष्टाचार मुक्त भारत के लिए जो ऐतिहासिक और लोकायुक्त आंदोलन हुआ, उसमें लाखों की संख्या में लोग आए। उन्होंने कहा कि उस वक्त केजरीवाल लोकायुक्त की जरूरत के बारे में मंच से बड़े बड़े भाषण दिए और आदर्श राजनीति और व्यवस्था के बारे में विचार रखते थे। लेकिन, अन्ना हजारे का मानना है कि दिल्ली के सीएम बनने के बाद अरविंद केजरीवाल लोकपाल और लोकायुक्त कानून को भूल गए।

अन्ना हजारे ने लिखा, “आपकी सरकार ने लोगों का जीवन बर्बाद करने वाली, महिलाओं को प्रभावित करने वाली शराब नीति बनाई इससे स्पष्ट होता है कि आपकी कथनी और करनी में फर्क है।”

शराब नीति में दिल्ली सरकार ने किया घोटाला

बता दें दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने नई शराब नीति लागू की थी। हालाँकि, बाद में बवाल मचने पर इस शराब नीति को वापस ले लिया गया था। लेकिन, इस शराब नीति की सबसे बड़ी बात यह रही कि इसमें करीब 144 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया। जिसमें, सीबीआई ने छापेमारी करते हुए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत 15 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इस मामले में, यह भी कहा जा रहा है कि सीबीआई किसी भी समय सिसोदिया की गिरफ्तारी कर सकती है।

‘मुगलों ने हिंदुस्तान को बनाया, मुझे उन पर गर्व’: कॉन्ग्रेस सांसद अब्दुल खालिक ने असम को भारत से बताया अलग

असम के बारपेटा में कॉन्ग्रेस के सांसद अब्दुल खालिक ने हाल में कहा है कि हिंदुस्तान को जोड़कर एक बनाने वाले मुगल थे। उनकी वजह से ही भारत को एक आकार मिला, इसलिए उन्हें मुगलों पर गर्व है।

अब्दुल खालिक ने यह टिप्पणी एएनआई से बातचीत में दी। उन्होंने कहा,

“जो भारत की अवधारणा है वो मुगलों की देन है। जो छोटे-छोटे राज्य में भारत था उसे इकट्ठा करके मुगलों ने हिंदुस्तान का नाम दिया। इसलिए मुगलों पर मैं गर्व करता हूँ। मैं मुगल वंशज नहीं हूँ। लेकिन, हाँ मुगलों ने भारत को आकार दिया था। मुगलों ने इसे हिंदुस्तान नाम दिया था।”

जब उनसे असम में हुए मुगल हमले को लेकर सवाल किया गया तो खालिक ने कहा,

“मुगलों ने जरूर असम पर हमला किया। लेकिन ये व्यक्तिगत स्तर पर नहीं हुआ था। उस समय मुगल हिंदुस्तान की हुकूमत में थे। वो यहाँ के राजा थे। राजा होने के नाते उन लोगों ने असम को अटैक किया था। हमारी अहोम सेना ने उन्हें परास्त किया था। लेकिन उस समय पर असम एक आजाद राष्ट्र था। हिंदुस्तान एक दूसरा राष्ट्र था। तो उस समय लड़ाई मुगल और अहोम की नहीं थी। लड़ाई भारत और असम के बीच थी। मगर अब असम जो है वो भारत का अभिन्न अंग है।”

अब्दुल आगे कहते हैं, “जहाँ तक मेरे क्षेत्र की बात आती है। उसमें 10 विधानसभा क्षेत्र हैं। उसमें 7 अहोम साम्नाज्य में से थे। तीन दूसरे साम्नज्य के हैं। इनमें से कुछ पर मुगलों का भी कब्जा था।”

भाजपा को लेकर अब्दुल खालिक ने कहा, “बीजेपी वाले हमेशा नफरत फैलाते हैं- वही उनका काम है। अमित शाह ने कहा कि इतिहास को दोबारा लिखेंगे। यानी इतिहास जो है उसे दोबारा से लिखेंगे। उससे आखिर क्या हो जाएगा। हिंदुस्तान तो नाम मुगलों का ही दिया है। आप इतिहास में चले जाओ वही लोग मिलेंगे आपको।”

कॉन्ग्रेस सांसद ने श्याम प्रसाद मुखर्जी को लेकर कहा कि वो अखंड भारत की बात जरूर करते थे लेकिन उन्होंने बंगाल को डिवाइड किया, क्या ये अखंड भारत की थ्योरी है। अगर आप अखंड भारत चाहते थे तो बंगाल को विभाजित नहीं करना चाहिए था। खालिक के अनुसार बहादुर शाह जफर ने आजादी की लड़ाई में सबसे पहले नेतृत्व किया था। इस बात में कोई गलती नहीं। ये गर्व की बात है।

इराक के राष्ट्रपति भवन पर शिया मौलवी के समर्थकों का कब्जा, दिखा श्रीलंका वाला नजारा: स्विमिंग पूल में मस्ती करते लोग, बगदाद में रात भर चले रॉकेट्स

श्रीलंका के बाद अब इराक में अराजकता का माहौल है। इराक (Iraq) के एक प्रभावशाली मौलवी मुक्तदा अल-सदर (Al-Sadar) के इस्तीफे के बाद उनके समर्थक भड़क उठे। राजधानी बगदाद (Baghdad) में सोमवार (29 अगस्त, 2022) को जमकर विरोध-प्रदर्शन किया गया। देखते ही देखते भारी हिंसा भड़क उठी। भारी संख्या में मुक्तदा समर्थकों ने इराक के राष्ट्रपति भवन के बाहर डेरा डाल लिया। इस दौरान, अल-सदर और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें मरने वालों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है।

‘स्पुतनिक’ न्यूज एजेंसी के मुताबिक, झड़पों में 300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। रात भर बगदाद के ग्रीन जोन में एरिया में रॉकेट दागे जाते रहे। उग्र भीड़ ने श्रीलंका के घटनाक्रम की तरह इराक के राष्ट्रपति भवन और सरकारी भवनों पर कब्जा कर लिया है। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने आँसू गैस के गोले भी छोड़े। लेकिन, वे उन्हें खदेड़ने में नाकाम रहे। भीड़ में शामिल अराजक तत्व राष्ट्रपति भवन में बने स्विमिंग पूल में मस्ती करते हुए नजर आए। ये लोग मुक्तदा अल-सदर के समर्थक बताए जा रहे हैं।

सोशल मीडिया पर इनकी तस्वीरें और वीडियो भी खूब वायरल हो रहे हैं, जिसमें प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रपति भवन पर धावा बोलते हुए देखा जा सकता है। शिया मौलवी के समर्थक बगदाद के ग्रीन जोन में स्थित संसद के बाहर एक सप्ताह से धरना दे रहे थे। जैसे ही उन्हें मुक्तदा अल-सदर के इस्तीफे के बारे में फैसले का पता चला, वे भड़क गए। इसके बाद सेना व पुलिस ने मोर्चा संभाला और प्रदर्शनकारियों से ग्रीन जोन छोड़ने की अपील की।

तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए पूरे इराक में कर्फ्यू लगाना पड़ा है और पूरे शहर के चप्पे-चप्पे पर सेना तैनात कर दी गई है। बताया जा रहा है कि इराक की सरकार में गतिरोध तब से आया है, जब मुक्तदा अल-सदर की पार्टी ने अक्टूबर के संसदीय चुनावों में सबसे अधिक सीटें जीती थीं, लेकिन वह बहुमत तक नहीं पहुँच पाए थे। उन्होंने आम सहमति वाली सरकार बनाने के लिए ईरान समर्थित शिया प्रतिद्वंद्वियों के साथ बातचीत करने से इनकार कर दिया था।

गौरतलब है कि इराक से पहले भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका (Sri Lanka) में अराजकता का माहौल देखा गया था। राजधानी कोलंबो (Colombo) में 9 जुलाई, 2022 को प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति भवन में घुस गए थे। इसके बाद राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) वहाँ से भाग गए। वहीं, सुरक्षाबलों की कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारियों घायल हो गए थे।

18 साल की लड़की को अगवा कर गैंगरेप, बांग्लादेश बॉर्डर के पास जंगल में मिली: सुलेमान, नसीरुद्दीन और रहीमुद्दीन गिरफ्तार, 1 फरार

असम के करीमगंज जिले से रविवार (28 अगस्त 2022) की सुबह पुलिस ने 18 साल की लड़की के अपहरण और सामूहिक बलात्कार के मामले में 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपितों की पहचान सुलेमान अली, नसीरुद्दीन और रहीमुद्दीन के रूप में हुई है। एक आरोपित अब भी फरार बताया जा रहा है। आरोपितों की उम्र 19-23 वर्ष के बीच है। ये भी दलग्राम गाँव के रहने वाले हैं।

बताया जा रहा है कि एक आरोपित ने पीड़िता को सुनसान जगह पर बुलाया। लड़की उस लड़के से अच्छी तरह से परिचित थी इसलिए उसने अपने घर में इस बारे में बताना उचित नहीं समझा और लड़के से मिलने पहुँच गई। वहीं से चार लोगों ने उसे अगवा कर लिया। लड़की को भारत-बांग्लादेश सीमा के पास स्थित एक जंगल में ले जाया गया। आरोपितों ने बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता नीलम बाजार की रहने वाली बताई जा रही है।

जब काफी देर होने के बाद भी लड़की घर नहीं लौटी तो माता-पिता ने नीलम बाजार थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद प्रभारी अधिकारी दीपज्योति मालाकार द्वारा तलाशी अभियान चलाया गया। पीड़िता को जंगल से बरामद किया गया और उसकी शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया।

अपहरण और बलात्कार के इस मामले में पुलिस ने 4 में से 3 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। इसमें सुलेमान अली, नसीरुद्दीन और रहीमुद्दीन पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 366 (एक महिला को शादी के लिए मजबूर करने के लिए अपहरण) और 376 D (सामूहिक बलात्कार) के तहत मामला दर्ज किया गया है। करीमगंज एसपी पद्मनाभ बरुआ ने बताया, “मुख्य आरोपित सहित तीन को गिरफ्तार किया गया है। एक आरोपित अभी भी फरार है।”

उन्होंने कहा, “मामले की जाँच जारी है। पीड़ित और आरोपितों के मेडिकल टेस्ट करवाया गया है।” वहीं आरोपितों के परिवार का दावा है कि पीड़िता एक आरोपी के साथ रिलेशन में थी और सब कुछ लड़की की सहमति से हुआ है।