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‘वह पढ़ रहा है सारे कमेंट’ : माता-पिता बोले- एक दिन जरूर छाएगा अर्शदीप, विकिपीडिया से छेड़छाड़ कर बताया था खालिस्तानी

एशिया कप 2022 में भारत-पाकिस्तान मैच के दौरान अर्शदीप सिंह से छूटी एक कैच के बाद वह लगातार चर्चा में हैं। उन्हें खालिस्तानी दिखाने के लिए पाकिस्तान से नए-नए अकॉउंट बनाए गए और बदनाम भारतीयों को किया गया। इस बीच दुबई में मैच देखने गए अर्शदीप के माता-पिता भी वापस लौटे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में उन सब सवालों पर प्रतिक्रिया दी जो इस समय अर्शदीप को लेकर उठ रहे हैं।

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए, अर्शदीप के पिता, सीआईएसएफ में सेवा दे चुके दर्शन सिंह ने कहा, “हम मैच देखने गए थे। भारत-पाक मैच हमेशा दिलचस्प होता है। जब कोई टीम हार जाती है तो उनके प्रशंसक भावुक हो जाते हैं, गुस्सा हो जाते हैं और कुछ शब्द भी कह देते हैं। हम इसे सकारात्मक रूप से ले रहे हैं और इसमें कोई समस्या नहीं है।”

अर्शदीप की माँ बलजीत कौर कहती हैं, “हमने पहला मैच भी देखा था और दूसरा मैच भी अच्छा था। लेकिन कुछ गलतियाँ हो जाती हैं और वो किसी से भी हो सकती हैं। लोगो की आदत होती है कहना। उन्हें कहने दो। अगर लोग आप पर कमेंट कर रहे हैं तो इसका मतलब है कि वो आपको प्यार करते हैं।”

खुद सारी आलोचना पढ़ रहे हैं अर्शदीप

चंडीगढ़ में भी स्पोर्ट्स तक से बातचीत के दौरान अर्शदीप के पिता से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, “मैं इसके बारे में ज्यादा बात नहीं करना चाहता। खेल में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। बिना फैन्स के कोई गेम कुछ नहीं है। कुछ फैन्स समर्थन में होते हैं कुछ आलोचना करते हैं। खिलाड़ी का काम ये होता है कि वह उसे पॉजिटिव ले। फैन तो चाहता है कि उनकी टीम हर मैच जीते। लेकिन जीतना तो उनमें से किसी एक को है जो ग्राउंड पर हैं। मैच अच्छा हुआ है।”

अर्शदीप के पिता ने खेल के अलावा किसी भी चीज पर टिप्पणी करने से बिलकुल मना किया। उन्होंने अर्शदीप के लिए ‘खालिस्तानी’ जैसे शब्द कहे जाने पर भी कोई बात नहीं की और न ही इस विषय पर कुछ कहा जहाँ सरकार ने विकिपीडिया से जवाब माँगा है।

उन्होंने कहा कि दुबई में अर्शदीप उनके साथ था और वो सारे कमेंट खुद पढ़ रहा था ताकि खुद को मजबूत बना सके। वह आलोचनाओं को सकारात्मक ढंग से ले रहा था और इसी तरह वो अपने खेल को आगे सुधार पाएगा। उसके तो शब्द यही थे, “मैं ये ट्वीट और मैसेज देखकर हँस रहा हूँ। मैं इसको पॉजिटिव ही लूँगा। इससे मुझे और आत्मविश्वास मिला है।” अर्शदीप के माता-पिता कहते हैं, “अभी बहुत सारे टूर्नामेंट बाकी बचे हैं। वो जरूर छाएगा।”

अर्शदीप को बदनाम करने की कोशिश, विकिपीडिया से सरकार का सवाल

बता दें कि एक ओर जहाँ अर्शदीप सिंह के माता-पिता हैं जो अपने बेटे की ट्रोलिंग पर कुछ भी टिप्पणी करने से ज्यादा भारत के लिए ट्रॉफी और बेटे के खेल पर बात कर रहे हैं। वहीं आम आदमी पार्टी के नेता व पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह और ऑल्ट न्यूज के सह संस्थापक जुबैर समेत तमाम लिबरल भारत को बदनाम करने में व्यस्त हैं। ये दिखाया जा रहा है कि भारतीय अर्शदीप को खालिस्तानी बता रहे हैं जबकि हकीकत ये है कि ऐसे ट्वीट करने वाले पाकिस्तान हैंडल्स हैं। इसी बीच आईटी मंत्रालय ने विकिपीडिया को समन भेजकर पूछा है कि कैसे अर्शदीप सिंह के विकि पेज के साथ छेड़छाड़ हुई और ऐसी हरकतों को रोकने के लिए उनके पास क्या सुरक्षा मापदंड हैं।

भारत की मदद से बांग्लादेश को मिलेगी सस्ती बिजली, जल बँटवारे से असम को भी लाभ: बांग्लादेशी प्रधानमंत्री से मिले मोदी, कहा – बढ़ रहे हमारे संबंध

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की उनकी समकक्ष शेख हसीना ने दिल्ली में मंगलवार (6 सितंबर, 2022) को एक जॉइंट प्रेस मीट को सम्बोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने या दिलाया कि पिछले वर्ष हमने बांग्लादेश की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगाँठ, हमारे राजनयिक संबंधों की स्वर्ण जयंती, और बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की जन्म शताब्दी को एक साथ मनाया था। उन्होंने ये भी याद दिलाया कि पिछले वर्ष 6 दिसंबर को हमने पहला ‘मैत्री दिवस’ भी साथ मिलकर पूरी दुनिया में मनाया।

पीएम मोदी ने कहा कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री शेख हसीना जी की यात्रा हमारी आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान हो रही है, ऐसे में उन्हें पूरा विश्वास है कि अगले 25 वर्षों के अमृत काल में भारत-बांग्लोदश मित्रता नई ऊँचाइयाँ छूएगी। उन्होंने जानकारी दी कि आज बांग्लादेश भारत का सबसे बड़ा विकास साझीदार और क्षेत्र में हमारा सबसे बड़ा व्यापार पार्टनर है। उन्होंने कहा कि हमारे घनिष्ठ सांस्कृतिक और दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों में भी निरंतर वृद्धि हुई है।

पीएम मोदी ने कहा, “हमने आईटी, अंतरिक्ष और न्यूक्लियर एनर्जी जैसे सेक्टर में भी सहयोग बढ़ाने का निश्चय किया, जो हमारी युवा पीढ़ियों के लिए रुचि रखते हैं। हम जलवायु परिवर्तन और सुंदरबन जैसी साझा धरोहर को संरक्षित रखने पर भी सहयोग जारी रखेंगे। मैत्री सुपर थर्मल पॉवर प्लांट के उद्घाटन से बांग्लादेश के लोगों को सस्ती बिजली मिलेगी। बिना किसी बाधा के बिजली की सप्लाई हो, इसके लिए पॉवर लाइन हेतु भी हमारे बीच बात चल रही है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी 54 नदियाँ हैं जो भारत-बांग्लादेश सीमा से गुज़रती हैं, और सदियों से दोनों देशों के लोगों की आजीविका से जुड़ी रही हैं। उन्होंने कहा कि ये नदियाँ, इनके बारे में लोक-कहानियाँ, लोक-गीत, हमारी साझा सांस्कृतिक विरासत के भी साक्षी रहे हैं। उन्होंने ये जानकारी भी दी कि भारत-बांग्लादेश ने कुशियारा नदी से जल बँटवारे पर एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे भारत में दक्षिणी असम और बांग्लादेश में सिलहट क्षेत्र को लाभ होगा।

पीएम मोदी ने कहा कि आज हमने आतंकवाद और कट्टरवाद के खिलाफ सहयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने ध्यान दिलाया कि 1971 की भावना को जीवंत रखने के लिए भी यह बहुत आवश्यक है कि हम ऐसी शक्तियों का मिल कर मुकाबला करें, जो हमारे आपसी विश्वास पर आघात करना चाहती हैं। शेख हसीना के इस 4 दिवसीय दौरे में कई MoU पर भी हस्ताक्षर हुए हैं। उन्होंने ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए बधाई भी दी।

‘एक खास समुदाय को खुश करने के लिए मेरे पति को जेल में रखा है’: MLA राजा सिंह की पत्नी पहुँचीं हाईकोर्ट, त्वरित सुनवाई की माँग

भाजपा के निलंबित नेता और तेलंगाना के हैदराबाद स्थित गोशमहल के विधायक राजा सिंह की हिरासत के खिलाफ उनकी पत्नी उच्च-न्यायालय पहुँची हैं। उन्हें हैदराबाद पुलिस द्वारा ‘प्रिवेंटिव डिटेंशन एक्ट (PD Act)’ के तहत हिरासत में रखा गया है। उन्हें पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। साथ ही इस मामले में त्वरित सुनवाई की माँग भी की गई है। हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार कर लिया है और जल्द ही इस पर सुनवाई होने की उम्मीद है।

विधायक राजा सिंह की पत्नी ने कहा है कि उनके पति को सिर्फ इसीलिए जेल में रखा गया है, ताकि एक खास समुदाय को संतुष्ट किया जा सके। उन्होंने कहा कि सिर्फ एक खास समुदाय के तुष्टिकरण के लिए ये किया गया है और इसका अन्य कोई कारण नहीं है। राजा सिंह को 25 अगस्त, 2022 को चेरलापल्ली जेल में डाल दिया गया था। पुलिस का कहना है कि राजा सिंह के खिलाफ 101 आपराधिक मामले दर्ज हैं और उन पर सांप्रदायिक तनाव के भी 18 FIR दर्ज हैं।

हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर के आदेश पर राजा सिंह को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने दावा किया है कि वो आदतन भड़काऊ और उत्तेजक भाषण देने के आरोपित हैं, जिससे तेलंगाना और हैदराबाद के ‘शांतिपूर्ण माहौल’ में दो समुदायों के बीच संघर्ष का ख़तरा बना रहता है। पुलिस ने उन पर पैगंबर मुहम्मद और उनके जीवन के खिलाफ ‘काफी ईशनिंदा वाला बयान’ देने के आरोप भी लगाए हैं। इससे पहले 23 अगस्त को उन्हें हिरासत में लिया गया था, लेकिन फिर अदालत के आदेश के बाद रिहा कर दिया गया था।

दबीरपुरा पुलिस थाने में उनके खिलाफ कई धाराओं में FIR दर्ज की गई है। भाजपा ने कहा था कि उनका बयान पार्टी लाइन के विरुद्ध था। राजा सिंह ने YouTube पर एक वीडियो जारी किया था, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की। PD एक्ट के तहत पुलिस को किसी व्यक्ति को सिर्फ इसीलिए हिरासत में रखने का अधिकार मिल जाता है, क्योंकि उससे कानून-व्यवस्था को खतरा होने की आशंका रहती है, भले ही उसने कोई अपराध किया हो या नहीं।

3 बच्चों की माँ से जबरन निकाह करना चाहता था मुर्तजा, इनकार करने पर सीने में चाकू घोंप मार डाला: राजस्थान की घटना, बर्थडे पार्टी से लौट रही थी महिला

राजस्थान (Rajasthan) के बांसवाड़ा (Banswara) में एक सिरफिरे ने सोमवार (5 सितंबर 2022) की रात बर्थडे पार्टी से घर लौट रही महिला के सीने में चाकू घोंपकर उसकी हत्या कर दी। वह महिला पर कई दिनों से निकाह का दबाव बना रहा था। हत्या से कुछ दिन पहले उसने महिला से मारपीट भी की थी।

पुलिस ने बताया कि मुस्लिम कॉलोनी गली नंबर-6 की रहने वाली शहनाज अपनी भाभी के साथ रिश्तेदार की बर्थ डे पार्टी से घर लौट रही थी। तभी मुर्तजा ने रास्ते में उससे कुछ बात की और फिर उसके सीने में चाकू मार दिया। चाकू लगने के बाद शहनाज एक मकान के सामने गिर गई और आरोपित मौके से फरार हो गया। पुलिस जब घटनास्थल पर पहुँची तो वहाँ चारों और खून बिखरा था। शहनाज को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शहनाज तीन बच्चों की अम्मी थी। पहले शौहर से उसकी दो बेटियाँ हैं। ये रिश्ता ज्यादा नहीं चला। पहले शौहर को तलाक देने के बाद करीब सात साल पहले उसका दूसरा निकाह हुआ था, जिससे उसकी 1 बेटी है। वहीं, मुस्लिम कॉलोनी में गली नंबर-7 में रहने वाला मुर्तजा भी शादीशुदा था। लेकिन शहनाज से निकाह करने के लिए उसने अपनी बीवी को तलाक दे दिया। हत्यारा पेशे से ड्राइवर है।

मृतका की भतीजी फातेमा ने बताया कि मुर्तजा से चार साल पहले शहनाज ने उधार पैसे लिए थे। पैसे के बदले वह उससे दुर्व्यवहार करता था। उस पर निकाह के लिए दबाव बनाता था। घटना से चार दिन पहले ही मुर्तजा ने निकाह से इनकार करने पर शहनाज से मारपीट की थी। जाँच में सामने आया है कि मृतका ने बाजार से काफी कर्ज ले रखा था। ब्याजखोरों से उसने 20 से 30 प्रतिशत मासिक दर पर ब्याज से पैसे लिए थे। वह कर्ज नहीं चुका पा रही थी।

बताया जा रहा है कि वारदात के बाद मुर्तजा ने अपने दोस्तों को फोन किया था। उसने दोस्तों से कहा कि वह मर जाएगा, लेकिन पुलिस के हाथ नहीं आएगा। शहनाज ने उसे प्यार में धोखा दिया। उसने उसे इसकी सजा दी है। पुलिस आरोपित की तलाश कर रही है।

‘कोई मिनी-मिडी में स्कूल आना चाहे तो उसे आने दें क्या’ : कर्नाटक बुर्का विवाद पर SC का सवाल, जस्टिस ने कहा- पगड़ी और हिजाब एक नहीं

कर्नाटक के हिजाब विवाद पर हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए जाने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने केस की सुनवाई की तारीख 7 सितंबर 2022 तय की। इससे पहले कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से सवाल किया कि क्या स्कूल में छात्र कुछ भी पहन सकते हैं जो उनकी इच्छा हो और क्या मजहबी अभ्यासों को स्कूल से अलग नहीं रखना चाहिए?

जस्टिस हेमंत गुप्ता और सुधांशु धुलिया ने मुख्य याचिकाकर्ता के वकील संजय हेगड़े से पूछा,

“क्या छात्र मिनी, मिडी जो चाहें उसे पहनकर स्कूल में आ सकते हैं। आपके पास धार्मिक अधिकार हो सकता है। पर ये अधिकार क्या शैक्षणिक संस्थानों के भीतर भी ला सकते हैं जहाँ यूनिफॉर्म निर्धारित की गई हों?”

बेंच ने कहा, “आप हिजाब या स्कार्फ पहनने के हकदार हो सकते हैं, लेकिन क्या एक यूनिफॉर्म निर्धारित जगह पर इस अधिकार का लाना ठीक है?

सुप्रीम कोर्ट के सवालों पर हेगड़े ने उत्तर देने की बजाय कहा, “क्या किसी को सिर्फ इसलिए कॉलेज से निकाला जा सकता है क्योंकि उसने तय यूनिफॉर्म कोड का पालन नहीं किया, ये उचित है क्या?” उन्होंने सुनवाई के दौरान कहा राज्य के कानून में कॉलेज डेवलपमेंट कमेटी की कोई मान्यता नहीं है जबकि यही कमेटी ड्रेस कोड तय करती है।

हेगड़े की दलील पर एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को बताया, “डेवलपमेंट कमेटी यूनिफॉर्म निर्धारित करती है क्योंकि राज्य सरकार ने उन्हें अधिकार दे रखा है। इस कमेटी में शिक्षक, पेरेंट्स, स्थानीय विधायक होते हैं। मुस्लिम कॉलेज में भी यूनिफॉर्म वहाँ की कमेटी तय करती है।”

वहीं, जस्टिस गुप्ता ने हेगड़े की बात सुन कहा कहा कि पब्लिक प्लेस पर ड्रेस कोड लागू होता ही है। एक महिला वकील बीते दिनों जींस पहनकर आ गईं थीं, उन्हें भी तुरंत मना किया है। इसी तरह गोल्फ कोर्स का भी अपना ड्रेस कोड होता है। इसके बाद कोर्ट ने कहा, “हिजाब का जो पूरा विवाद है वो धार्मिक नहीं है। केस की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी।”

मालूम हो कि इस सुनवाई में हिजाब को उचित ठहराने के लिए पगड़ी और तिलक पर भी वकील राजीव धवन ने प्रश्न खड़े किए। हालाँकि जस्टिस गुप्ता ने कहा, “पगड़ी को हिजाब के समान नहीं कहा जा सकता, वह धार्मिक नहीं होती। इसे राजशाही दरबारों में पहना जाता था। मेरे दादा जी कानून की प्रेक्टिस करते हुए उसे पहनते थे। इसकी तुलना हिजाब से मत कीजिए।”

हिजाब विवाद पर हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया था?

बता दें कि कर्नाटक हाईकोर्ट में 14 मार्च को हाईकोर्ट का फैसला आया था। इसमें कहा गया था कि छात्राएँ तय यूनिफॉर्म को पहनकर आने से मना नहीं कर सकती हैं। इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में 23 याचिकाएँ डालकर चुनौती दी गई। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील राजीव धवन, कपिल सिब्बल, दुष्यंत दवे और संजय हेगड़े पक्ष को रख रहे हैं।

कॉन्ग्रेस की महिला नेता ने तिरुपति मंदिर में की मारपीट, दी गालियाँ, फिर सोशल मीडिया पर खेला ‘विक्टिम कार्ड’: TTD ने बताई पूर्व ‘मिस बिकनी’ की करतूत

कॉन्ग्रेस की महिला नेता व अभिनेत्री अर्चना गौतम ने आंध्र प्रदेश स्थित तिरुमला तिरुपति मंदिर में दर्शन के दौरान उन्हें प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाया था। साथ ही उन्होंने एक वीडियो भी जारी किया था। अब मंदिर प्रबंधन ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। ‘तिरुमला तिरुपति देवस्थानम’ ने कहा है कि अभिनेत्री अर्चना गौतम द्वारा उसके कर्मचारी पर निशाना साधना एक घृणित कृत्य है। TTD ने कहा कि वो पूरी मजबूती से अभिनेत्री द्वारा किए गए दावों को ख़ारिज करता है।

TTD ने कहा कि उत्तर प्रदेश के शिवकांत तिवारी और अभिनेत्री अर्चना गौतम सहित 7 लोग मंगलवार (30 अगस्त, 2022) दर्शन के लिए एक केंद्रीय मंत्री का पत्र लेकर यहाँ आए थे। संस्था ने बताया कि एडिशनल EO दफ्तर में उन लोगों ने दर्शन के लिए पंजीकरण कराया, जिसके बाद उनके अनुशंसा पत्र के आधार पर उन्हें 300 रुपए के टिकट्स दिए गए। संस्था ने बताया कि तिवारी के नंबर पर इस सम्बन्ध में SMS भी गया था।

TTD ने बताया कि इसके बावजूद उन्होंने दर्शन नहीं किया। अगले दिन जब वो लोग फिर से पहुँचे तो कर्मचारी ने उन्हें बताया कि उनके टिकट्स अब एक्सपायर हो चुके हैं और उन्होंने समय पर दर्शन नहीं किया। TTD का कहना है कि इसी बीच अर्चना गौतम दफ्तर में घुस कर हंगामा करने लगीं और कर्मचारियों के विरुद्ध अपशब्दों का इस्तेमाल किया। मंदिर प्रबंधन ने कहा कि इस दौरान शिवकांत तिवारी चुपचाप ये सब देखते रहे।

TTD ने कहा, “हमारे कर्मचारियों ने अर्चना गौतम को शांत करने के लिए उन्हें नियम समझाए, लेकिन उन्होंने हमारे एक कर्मचारी के साथ धक्का-मुक्की भी कर डाली। उन्हें फिर से 300 रुपए वाले टिकट्स दिए गए और दर्शन करने के लिए कहा गया। लेकिन, दर्शन करने की जगह अभिनेत्री पुलिस थाने में चली गईं और हमारे एक कर्मचारी के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज करा दी कि उसने उनके साथ मारपीट की और गालियाँ बकी।”

‘तिरुपति तिरुमला देवस्थानम’ ने कहा कि पुलिस ने भी वीडियो देखने के बाद यही पाया कि महिला ने कर्मचारियों के खिलाफ भद्दी भाषा का इस्तेमाल किया था। संस्था ने बताया कि जब उन्हें वीडियो दिखाया गया कि वो कर्मचारियों के साथ मारपीट कर रही हैं, तब वो पुलिस थाने से निकल गईं। दर्शन के लिए जिद की तो उन्हें 10,500 रुपए का टिकट कटा कर VIP दर्शन के लिए कहा गया। लेकिन, उन्होंने सोशल मीडिया में वीडियो डाल कर आरोप लगा दिए। TTD ने इन आरोपों को झूठा और आधारहीन करार दिया है।

बता दें कि बतौर मॉडल और अभिनेत्री काम करने वाली अर्चना गौतम अक्सर सोशल मीडिया पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राजस्थान के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट जैसे कॉन्ग्रेस नेताओं के साथ तस्वीरें डालती रहती हैं। 2018 में ‘मिस बिकनी इंडिया’ का ख़िताब जीत चुकीं अर्चना गौतम ने मेरठ की जिले के हस्तिनापुर विधानसभा क्षेत्र से 2022 में चुनाव भी लड़ा था, लेकिन उनकी जमानत भी जब्त हो गई थी।

जुलाई में माय लव, सितंबर में न फोटो-न नाम: ललित मोदी ने इंस्टाग्राम पर किया बदलाव, सुष्मिता सेन के साथ ब्रेकअप के लग रहे कयास

चंद महीनों में ही बॉलीवुड अभिनेत्री सुष्मिता सेन (Sushmita Sen) और ललित मोदी (Lalit Modi) के रिश्तों में खटास की खबरें आने लगी है। कहा जा रहा है कि दोनों के बीच ब्रेकअप हो गया है। ललित मोदी ने सुष्मिता सेन के साथ अपना रिश्ता खत्म कर दिया है। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट में भी बदलाव किया है। इससे ब्रेकअप की खबर ने जोड़ पकड़ लिया है।

दरअसल, IPL के पूर्व चेयरमैन और भगोड़े कारोबारी ललित मोदी ने 14 जुलाई 2022 को पूर्व मिस यूनिवर्स के साथ कुछ तस्वीरें साझा करते हुए उन्हें ‘माय लव’ बताया था। साथ ही अपने इंस्टाग्राम की प्रोफाइल पिक्चर में भी सुष्मिता सेन के साथ वाली तस्वीर लगाई थी। उन्होंने बायो में लिखा था, “फाइनली मैं अपनी पार्टनर इन क्राइम के साथ अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करने जा रहा हूँ। माय लव सुष्मिता सेन।”

फोटो साभार:ललित मोदी का इन्स्टाग्राम

अब ललित मोदी अपनी प्रोफाइल पिक्चर बदल डाली है। इसमें सुष्मिता नहीं हैं। इंस्टा बायो से भी सुष्मिता का नाम हटा दिया है। हालाँकि पूर्व मिस यूनिवर्स उन्हें अभी भी फॉलो कर रही हैं।

फोटो साभार:ललित मोदी का इन्स्टाग्राम

बता दें कि जब ललित मोदी के सुष्मिता सेन के साथ पहली बार रोमांटिक तस्वीरें शेयर की थी तो दोनों के शादी करने के कयास लगने लगे थे। इसके बाद मोदी ने साफ़ किया था कि वे रिलेशनशिप में हैं। दरअसल, ललित मोदी ने अपने ट्वीट में सुष्मिता सेन के लिए ‘Betterhalf’ लिखा था। इससे लोगों को लगा कि दोनों ने शादी कर ली है।

ललित मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा था, “परिवार के साथ मालदीव्स, सार्डिनिया सहित एक लम्बे वैश्विक दौरे के बाद अभी वापस लंदन में, मेरे साथ हैं मेरी बेटरहाफ सुष्मिता सेन, एक नई शुरुआत एक नया जीवन आखिरकार, चाँद के पार चलें टाइप!”

ललित मोदी की इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया यूजर्स और सेलेब्स उन्हें बधाई देने लगे थे। ऐसे में ललित मोदी ने कुछ ही देर बाद दूसरा ट्वीट किया और लिखा, “साफ कर दूँ कि शादी नहीं हुई है, हम एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं। लेकिन शादी भी बहुत जल्दी होगी एक दिन।” दोनों के बीच ब्रेकअप की वजह सुष्मिता के पूर्व बॉयफ्रेंड रोहमन शॉल को बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि जिस तरह अब भी सुष्मिता के साथ उनकी नजदीकियाँ दिख रही हैं, उसके कारण ही ललित मोदी ने अपनी राहें अलग की है। हालाँकि इस मसले पर अब तक तीनों में से किसी की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

क्या 2024 से पहले जमीन का मिजाज बदल देंगे राजनीति के ‘पलटू’ और ‘पप्पू’?

एक ने अपने राजनीतिक जीवन में इतनी बार पाला बदला है कि विरोधी तंज कसते हुए उन्हें ‘पलटू’ बताते हैं। दूसरी की राजनीतिक छवि ऐसी है कि स्वरा भास्कर जैसी पार्ट टाइम अभिनेत्री को आगे आकर कहना पड़ता है कि ‘मैं उनसे मिली हूँ। वे पप्पू नहीं हैं।’ ऐसे ही दो नेता बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की सोमवार (5 सितंबर 2022) को नई दिल्ली में मुलाकात हुई।

करीब 50 मिनट तक दोनों की बातें हुई। मीडिया में जो बातें आईं वो 2024 से पहले विपक्षी एकता के सुने-सुनाए राग पर केंद्रित थी। हाल ही में बिहार में लालू प्रसाद यादव से हाथ मिलाने वाले नीतीश कुमार इससे पहले तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर से मिल चुके हैं। कर्नाटक वाले कुमारस्वामी से मुलाकात हुई है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मिलने वाले हैं। आगे और उन क्षेत्रीय क्षत्रपों से मिलने की योजना है, जिनकी राजनीति साँस नरेंद्र मोदी और बीजेपी की फिसलन नहीं देख उखड़ रही है।

चर्चा यह भी है कि चुनाव से पहले ऐसे कुछ दलों का आपस में विलय भी हो सकता है जो जनता परिवार के बिखरने से पैदा हुए हैं। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि अब ऐसे ज्यादातर दलों में दूसरी पीढ़ी का नेतृत्व आ चुका है जो अपने-अपने राज्यों में ही राजनीतिक तलाश रहा है। उनकी राष्ट्रीय राजनीति की महत्वाकांक्षाओं में वह टकराहट नहीं है जो उनसे पहले की पीढ़ी में था और जनता परिवार बिखर गया। वैसे कहीं का ईंट, कहीं का रोड़ा भानुमती का कुनबा जोड़ा टाइप की सियासत भारत में कई बार दिखी है। ऐसे प्रयासों को तार्किक बताने के लिए समाजवादियों के पास राम मनोहर लोहिया का एक सूत्र वाक्य भी है जो कहता है- जुड़ो, लड़ो और टूटो…

एक तरफ कथित समाजवादी 2024 से पहले विपक्षी एकता का झुनझुना बजा रहे हैं, दूसरी ओर राहुल गाँधी 7 सितंबर 2022 से एक यात्रा शुरू करने वाले हैं। इस यात्रा का नाम रखा गया है- भारत जोड़ो यात्रा। दिलचस्प यह है कि इस यात्रा की तुलना भी एक समाजवादी (पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर) की ही यात्रा से हो रही है। लेकिन नाम में ‘भारत’ होने के अलावा न तो इन दो यात्राओं और न उनकी अगुवाई करने वाले में समानता दिखती है।

भारत जोड़ो यात्रा

7 सितंबर 2022 को कन्याकुमारी से यह यात्रा शुरू हो रही है। 150 दिन तक चलने वाली यह यात्रा भारत के 12 राज्यों और 2 केंद्रशासित प्रदेशों से होकर गुजरेगी। करीब 3500 किमी लंबी यह यात्रा जम्मू-कश्मीर में समाप्त होनी है। इसके तीन उद्देश्य बताए गए हैं। पहला, मोदी सरकार में बढ़ी आर्थिक असमानता से लड़ाई। दूसरा, समाज में बढ़ते भेदभाव और अपराध से लड़ाई। तीसरा, केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग से लड़ाई।

भारत जोड़ने की जरूरत क्यों?

कॉन्ग्रेस के लिए अपने राजनीतिक फायदे के लिए भारत को बदनाम करना नई बात नहीं है। चाहे चीन की सत्ताधारी दल से समझौता हो या, उसके दूतों से गुपचुप मिलना या पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अपनी ही सेना से शौर्य का सबूत माँगना। कॉन्ग्रेस अपने चाल-चरित्र से इसका लगातार प्रदर्शन करती रहती है। एक बार फिर अपने राजनीतिक यात्रा को ‘भारत जोड़ो’ नाम देकर उसने यही मानसिकता दिखाई है।

कोरोना जैसी वैश्विक आपदा के बावजूद हम दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुके हैं। नक्सली हिंसा में कमी आई है। आतंकी लगातार ढेर किए जा रहे हैं। 26/11 के बाद कोई बड़ा आतंकी हमला नहीं हुआ है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहे हैं। रसोई गैस हो या शौचालय, आवास हो या स्वच्छ पानी… ग्रामीण इलाकों तक पहुँच रहा है। आम आदमी की पहुँच में हैं। ऐसे में भारत को टूट का खतरा कहाँ से दिखता है जो उसे जोड़ने की बात की जाए। या फिर सिमटते जनाधार से परेशान कॉन्ग्रेस इस यात्रा के जरिए उन ताकतों को हवा देना चाहती है, जिससे देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौतियाँ बढ़े। आंतरिक हालात बिगाड़ने के मकसद से प्रायोजित सीएए विरोधी हिंसा हो या दिल्ली के बॉर्डर पर कथित किसानों का जमावड़ा, इनके पीछे कॉन्ग्रेस और उसके नेताओं की संलिप्तता सार्वजनिक है। तो क्या 2024 से पहले कॉन्ग्रेस इस यात्रा के जरिए वैसे हालात पैदा करना चाहती है, जिससे सरकार को देश के भीतर ही कई मोर्चों पर जूझना पड़े? वैसे भी इस्लामी कट्टरपंथियों के तुष्टिकरण का उसका इतिहास रहा है।

क्या चंद्रशेखर की यात्रा से तुलना उचित?

चंद्रशेखर ने स्वतंत्र भारत की समस्याओं को अपने पैरों से नापने की कोशिश की थी। उन्होंने 6 जनवरी 1983 को कन्याकुमारी के विवेकानंद स्मारक से भारत यात्रा शुरू की। करीब 4200 किमी की यह पदयात्रा 25 जून 1984 को दिल्ली के राजघाट पर समाप्त हुई।
इस यात्रा के दौरान वे कई जगहों पर ठहरे और उनमें से कुछ को ​भारत यात्रा केंद्र के नाम से विचारों का केंद्र बनाया। इनमें से ही एक है लगभग 600 एकड़ में फैला भोंडसी स्थित भारत यात्रा केंद्र। बाद के वर्षों में सियासत का केंद्र बनने की वजह से भोंडसी आश्रम तो याद रहा, लेकिन वह यात्रा जेहन से मिटा दी गई।

लेकिन उस यात्रा के मर्म में कोई सियासत नहीं थी। केवल पाँच बुनियादी मसले थे,

  • सबको पीने का पानी
  • कुपोषण से मुक्ति
  • हर बच्चे को शिक्षा
  • स्वास्थ्य का अधिकार
  • सामाजिक समरसता

क्या हासिल होगा?

देश में आपातकाल जैसी कोई असामान्य स्थिति नहीं है कि विपक्षी दल अपने-अपने हितों का त्याग कर किसी छतरी के नीचे आ सकें। नीतीश कुमार जो कोशिश कर रहे हैं, कुछ महीने पहले उसी तरह का प्रयास ममता बनर्जी कर रहीं थीं। 2019 से पहले ऐसी ही हवा चंद्रबाबू नायडू ने बनाई थी। नतीजा सबको पता है।

राजनीतिक यात्राओं से सत्ता पाने का इतिहास में कई उदाहरण हैं। लेकिन उन सभी यात्राओं के पीछे कुछ कॉमन फैक्टर थे। मसलन, सत्ता से आम लोग नाराज थे। यात्रा की अगुआई करने वाले अपने राजनीतिक तेवर के लिए जाने जाते थे या फिर उनके साथ सहानुभूति थी, जैसे जगनमोहन के मामले में देखने को मिला। हाल के तमाम सर्वे बताते हैं कि नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता जस की तस है। भारत की आम जनता की उम्मीदों के नायक आज भी वही हैं। वहीं राहुल गाँधी आज भी इस देश की जनता की नजर में एक गंभीर राजनीतिज्ञ की छवि नहीं बना पाए हैं।

ऐसे में चाहे नीतीश कुमार का प्रयास हो या राहुल गाँधी की यात्रा, एक ऐसे झुनझुने की तरह लगती है जो भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में चुनावों से पहले शोर तो बहुत करता है, लेकिन अपनी कर्कश ध्वनि से लोगों को लुभा नहीं पाती।

‘गोबर खा लेते तो जीत पाते’ : ब्रिटेन में ऋषि सुनक की हार से खुश भारत के वामपंथी, हिंदू धर्म का उड़ाया मजाक, गौ-पूजन की Video देख भड़के थे

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री चुनावों में भारतीय मूल के ऋषि सुनक पीएम बनने से जैसे ही चूके वैसे ही भारत के वामपंथी और कट्टरपंथी गिरोह में खुशी की लहर दौड़ गई। ट्विटर पर सुनक को तरह-तरह के ताने दिए जाने लगे। इसी क्रम में हिंदू धर्म का और हिंदुओं में पूजनीय गौ-माता का भी खुलकर मजाक बनाया गया। किसी ने ऋषि को इसलिए कोसा क्योंकि वो खुद को हिंदू दिखाकर मंदिर आदि जा रहे थे, तो किसी ने उन्हें याद दिलाया कि वो जो गौ-पूजन का ‘नाटक’ कर रहे थे, उससे ब्रिटेन में जीत नहीं मिल सकती।

ऋषि सुनक की हार से वामपंथी क्यों है खुश?

ट्विटर पर ऋषि सुनक की गाय के साथ फोटो शेयर कर करके दिखाया जा रहा है कि उन्हें चुनाव में जीत मिल सकती थी लेकिन जो उन्होंने ब्रिटेन में गौ पूजन किया उसके कारण उन्हें हार झेलनी पड़ी।

फेक न्यूज के लिए कुख्यात हिंदूफोबिक ट्विटर यूजर अशोक स्वेन ने ऋषि की वीडियो को शेयर करते हुए कहा, “इन हथकंडों के बावजूद ऋषि सुनक को लिज ट्रस ने हरा दिया और वह ब्रिटेन की नई प्रधानमंत्री बन गईं। जरूरी है खुद के साथ ईमानदार रहना- ब्रिटेन कोई उत्तर प्रदेश नहीं है।”

जिम्मी खान लिखता है, “ये जरूर दुख में होगा कि काश ये थोड़ा गौ मूत्र पी लेता तो शायद ब्रिटेन का प्रधानमंत्री बन जाता।”

एक कॉमरेड नाम की आईडी से कहा गया, “मुझे लगता है कि ये गाय का गोबर और गौमूत्र पीना भूल गया, इसलिए इसे हार मिली।”

शबीना हुसैन लिखती हैं, “गौ माता ने ऋषि सुनक को आशीर्वाद देने से मना कर दिया।”

एक यूजर ने ऋषि की पूजा पाठ पर तंज कसते हुए कहा, “ऋषि सुनक, ये मंदिर और गाय की राजनीति सिर्फ उत्तर प्रदेश में काम आती है ब्रिटेन में नहीं।”

निधि राजदान को ब्रिटिशरों ने लगाई लताड़

इसके अलावा मीडिया गिरोह की जानी-मानी सदस्य निधि राजदान ने भी इस जीत-हार के मुद्दे में ‘नस्लवाद’ के एंगल को घुसाया और पूछा कि कहीं और किसी वजह से तो ऋषि नहीं हारे। उन्होंने ट्वीट किया, “लिज ट्रस ने ऋषि सुनक को पीएम बनने की रेस में हरा दिया। क्या नस्लवाद के कारण ऋषि हारे या फिर इसके पीछे और कोई कारण है।”

निधि के ट्वीट के बाद कई ब्रिटिशर भड़क गए। उन्होंने निधि राजदान की ऐसी हरकत को एकदम घटिया करार दिया। ब्रिटिश पत्रकार टॉम हैरवुड ने कहा ये ओछेपन की भी हद्द है। शर्म आनी चाहिए।

गौरतलब है कि ब्रिटेन में प्रधानमंत्री चुनाव से पहले ऋषि सुनक की एक वीडियो सामने आई थी। उस वीडियो में वह अपनी पत्नी अक्षता के साथ गौ पूजन कर रहे थे। पूजा के दौरान सामने खड़े पुजारी उन्हें विधियों के बारे में बता रहे थे। इसी वीडियो को देख वामपंथी उनसे नाराज थे और चुनाव में जब नतीजे आए, ऋषि को हार का मुँह देखना पड़ा तो यही लोग सबसे पहले उन्हें इसलिए कोसने लगे क्योंकि वो चुनाव के दौरान मंदिर जाने का काम, गौ-पूजन का काम कर रहे थे।

‘इस्लाम कबूल कर, वरना गोली मार दूँगा’ : नर्सिंग की हिंदू छात्रा पर जांबाज मंसूरी बना रहा था निकाह का दबाव, बीच सड़क बाइक पर बैठाया; एसिड फेंकने की धमकी

मध्य प्रदेश के खंडवा में एक हिंदू युवती के ऊपर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाए जाने का मामला सामने आया है। युवती नर्सिंग कॉलेज की छात्रा है। उसका आरोप है कि उसके गाँव का जांबाज मंसूरी उर्फ मोनू उसे काफी समय से परेशान कर रहा था और अब वह उसे बंदूक के साथ फोटो भेजकर धमकियाँ देता है। युवती ने हिंदू संगठनों की मदद से थाने में शिकायत दी है।

दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर के अनुसार, युवती ने पुलिस के पास जाने का यह फैसला तब उठाया जब जांबाज ने सोमवार को (5 सितंबर 2022) उसे रास्ते पर रोककर उसके सिर पर फूल बरसाए और फिर उसे इस्लाम कबूलने को कहा। युवती के मुताबिक जांबाज ने इस दौरान उसे जबरन बाइक पर भी बैठाया, फिर गाड़ी स्पीड से चला दी। युवती इतना घबरा गई कि उसने चलती बाइक से छलांग लगा दी।

युवती को इस हालात में देख वहाँ भीड़ जुट गई। लोगों ने जांबाज को पकड़ने का प्रयास भी किया। हालाँकि वो हाथ नहीं आया। इसके बाद युवती हिंदू संगठन की मदद लेकर थाने गई। उसने जांबाज के खिलाफ शिकायत देते हुए जानकारी दी कि वह शहर में प्राइवेट नर्सिंग कॉलेज में प्रथम वर्ष की छात्रा है। 5 अगस्त को दोपहर 3 बजे वह अपने कॉलेज से घर आशापुर जा रही थी। तभी, गाँव का जांबाज मंसूरी उसके रास्ते में आया और उस पर फूल बरसाकर शादी के लिए बोला।

पीड़िता के अनुसार, जांबाज पिछले एक साल से उसका पीछा कर रहा है। पहले वह हरसूद कॉलेज में पढ़ती थी, तब भी वह बीच रास्ते में आकर उसका रास्ता रोकता और शादी का दबाव बनाता था। हालाँकि तब लड़की ने ये बात अपने परिजनों को बता दी थी। परिवार वालों ने जांबाज के घर उसकी शिकायत भी की थी।

अब दोबारा वही हाल है। इस बार जांबाज ने कहीं से लड़की का नंबर निकाल लिया है। अब वह उसे धमकी देता है, “शादी कर लो वरना पूरे परिवार को जान से मार दूँगा।” लड़की के मुताबिक, सिरफिरा जांबाज अपनी बंदूक के साथ फोटो भेजकर धमकाता है, “धर्म परिवर्तन कर लो वरना गोली मार दूँगा।” पिछले महीने भी उसने खंडवा में रास्ता रोककर एसिड फेंकने की धमकी दी थी।

अब इस पूरे मामले से हिंदू स्टूडेंट आर्मी जुड़ गई है। वही लोग छात्रा को थाना लेकर गए और युवती की शिकायत के बाद आवश्यक कार्रवाई की माँग की।