मद्रास हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि मंदिर का धन केवल धार्मिक और धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए ही इस्तेमाल हो सकता है। इसका इस्तेमाल किसी व्यावसायिक काम के लिए किया जा सकता है। कोर्ट ने तमिलनाडु की एमके स्टालिन सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत 5 मंदिरों के धन का इस्तेमाल विवाह के लिए हॉल बनाने में किया जाना था।
हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह भले ही एक संस्कार है लेकिन वह करारनुमा शर्तों से बँधा होता है। इसलिए इसे धार्मिक उद्देश्य नहीं माना जा सकता है। कोर्ट ने सरकार को चेतावनी दी कि मंदिर निधि भक्तों और दानदाताओं की आस्था से जुड़ी है, इसे किसी अन्य उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करना उनके अधिकारों का उल्लंघन है।
जस्टिस एस एम सुब्रमण्यम और जस्टिस जी अरुल मुरुगन की पीठ ने यह निर्णय सुनाते हुए कहा कि राज्य सरकार का यह आदेश हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम 1959 और उसके नियमों के खिलाफ है।
कोर्ट ने साफ किया कि अधिनियम की धारा 66 के अनुसार मंदिर की बची हुई धनराशि को न तो किसी व्यावसायिक गतिविधि में और न ही लाभ कमाने वाली योजनाओं में लगाया जा सकता है। इसका इस्तेमाल केवल धार्मिक कार्यक्रमों, मंदिरों के रखरखाव और भक्तों की सुविधाओं के लिए ही होना चाहिए।
याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि मंदिर के धन का उपयोग इस तरह से करना कानून का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी बताया कि विवाह हॉल बनाने के लिए न तो कोई भवन योजना ली गई थी और न ही नियमों के तहत आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई थी, इसके बावजूद धनराशि जारी कर दी गई।
दूसरी ओर सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि हिंदू विवाह धार्मिक गतिविधि है और इस तरह के विवाह हॉल गरीब परिवारों को कम खर्च में विवाह करने की सुविधा देंगे। कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने सरकारी आदेश की समीक्षा करते हुए पाया कि बनाए जा रहे विवाह हॉल मुफ्त में उपलब्ध नहीं थे बल्कि किराए पर दिए जा रहे थे। यानी यह एक व्यावसायिक गतिविधि थी, न कि कोई दान या धार्मिक सेवा। कोर्ट ने कहा कि मंदिर निधि का उद्देश्य केवल मंदिर और उससे जुड़े धार्मिक कार्यों तक सीमित है। इस धन का उपयोग भक्तों की आस्था से खिलवाड़ किए बिना होना चाहिए।
फैसले में कोर्ट ने यह भी कहा कि मंदिरों में जमा धन, आभूषण और अचल संपत्तियाँ भक्तों और दानदाताओं की ओर से भगवान को अर्पित की जाती हैं। यह सार्वजनिक या सरकारी धन नहीं है, जिसे राज्य अपनी सुविधा से कहीं भी खर्च कर दे।
सरकार की भूमिका केवल मंदिर निधि और संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने की है, न कि उन्हें किसी नए काम में लगाने की। अंत में कोर्ट ने यह कहते हुए आदेश को रद्द कर दिया कि राज्य ने न तो नियमों का पालन किया और न ही भवन निर्माण की अनुमति ली।
यदि मंदिर निधि का इस तरह इस्तेमाल किया गया तो यह भक्तों के धार्मिक अधिकारों का हनन होगा और मंदिर की पवित्रता पर आघात करेगा। कोर्ट के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि मंदिर का धन सिर्फ मंदिर और धार्मिक गतिविधियों के लिए ही है, किसी और उद्देश्य के लिए नहीं।
अहमदाबाद के सेवेंथ डे स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग तेज हो गई है। हाल ही में एक हिंदू छात्र की एक मुस्लिम नाबालिग ने चाकू मारकर हत्या कर दी थी, जिसके बाद पीड़ित परिवार और अन्य अभिभावकों ने स्कूल पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
मृतक छात्र के माता-पिता और ‘जन आक्रोश वाली मंडल संघर्ष समिति’ के सदस्यों ने गुरुवार (28 अगस्त 2025) को अहमदाबाद के मेयर, DEO, स्थायी समिति और AMC कमिश्नर को आवेदन सौंपकर स्कूल के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की माँग की। उनका कहना है कि स्कूल में पहले भी आपराधिक गतिविधियाँ हो रही थीं और छात्रों के हथियार लाने की शिकायत भी की गई थी, लेकिन प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि स्कूल को AMC की लीज पर मिली सरकारी जमीन पर चलाया जा रहा है। यहाँ न सिर्फ हत्या जैसी गंभीर घटनाएँ हुई हैं, बल्कि ईसाई धर्मांतरण जैसी गतिविधियाँ भी चल रही हैं। अभिभावकों ने माँग की है कि स्कूल की लीज तुरंत रद्द की जाए और अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाकर कार्रवाई की जाए।
मृतक छात्र के माता-पिता ने अपने बेटे को ‘वीर’ बताते हुए कहा कि उनके बेटे की आत्मा को तभी शांति मिलेगी जब स्कूल पर सख्त कार्रवाई होगी। अभिभावकों ने कहा कि इस घटना से सबक लेते हुए प्रशासन को एक ऐसी मिसाल कायम करनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और बच्चे को अपनी जान न गँवानी पड़े।
‘उचित कार्रवाई की उम्मीद’ – मृतक छात्र की माँ
समिति के अध्यक्ष ने बताया कि स्कूल ने जिन शर्तों पर सरकारी जमीन पट्टे पर ली थी, उनका उल्लंघन किया है। उनका कहना है कि स्कूल प्रशासन की लापरवाही के कारण ही यह घटना हुई। उन्होंने माँग की है कि सरकार को तुरंत स्कूल का अधिग्रहण कर लेना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई और छात्र ऐसी घटना का शिकार न बने।
मृतक छात्र की माँ ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि उन्होंने अधिकारियों से हाथ जोड़कर स्कूल पर सख्त कार्रवाई करने की विनती की है। उन्होंने कहा कि अब तक मिले जवाब से वे संतुष्ट हैं, लेकिन वे जल्द से जल्द ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रही हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि उनके बेटे को न्याय जरूर मिलेगा।
यूपी के मुजफ्फरनगर में एक चौकाने वाला मामला सामने आया है। शाहपुर के एक गाँव में नरेंद्र शर्मा नाम के एक हिंदू युवक का जबरन धर्मांतरण कराया गया और उसकी सारी संपत्ति भी हड़प ली गई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इस मामले में मुख्य आरोपित यामीन समेत 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि आरोपित ने शादी का झांसा देकर नरेंद्र शर्मा को नशा दिया, उसका खतना करवाया, चोटी काट और फिर धोखे से उसकी जमीन अपने और रिश्तेदारों के नाम करा ली।
दोस्ती का झाँसा, खतना और संपत्ति पर कब्जा
जानकारी के अनुसार, पीड़ित नरेंद्र शर्मा ने अपनी शिकायत में बताया कि गाँव के ही यामीन ने पहले उससे दोस्ती बढ़ाई। यामीन ने उसे नशीली दवाइयाँ खिलाकर कागजात पर दस्तखत करवा लिए। नरेंद्र शर्मा जब होश में आया तो उसे पता चला कि उसके साथ कितना बड़ा धोखा हुआ है।
नरेंद्र शर्मा ने रोते हुए बताया कि नशे की हालत में उसका खतना किया गया और उसकी चोटी भी काट दी गई। आरोपित ने उसकी पौना बीघा जमीन अपनी बीवी के नाम करवाई और दो बीघा जमीन बेचकर उससे प्लॉटिंग कराई। इस पैसे से ट्रैक्टर और गाड़ी भी खरीदी गई। बाकी संपत्ति भी रिश्तेदारों के नाम कर दी गई।
पुलिस की कार्रवाई
शाहपुर पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई की और यामीन, गुलजार, इकराम, हाफिज, नई मुरसिद और यामीन के नाबालिग बेटे को गिरफ्तार कर लिया। SSP मुजफ्फरनगर संजय कुमार वर्मा ने बताया कि यामीन ने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। पुलिस ने आरोपितों पर धोखाधड़ी, धमकी, आपराधिक साजिश और धर्मांतरण कानून 2021 की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। मुजफ्फरनगर पुलिस ने X (पहले ट्विटर) पर पोस्ट कर इस संबध में जानकारी साझा की है।
पुलिस ने इस मामले को ‘टेस्ट केस’ मानकर जाँच शुरू कर दी है। आरोपितों पर जल्द ही गैंगस्टर एक्ट लगाया जाएगा और उनकी बाकी संपत्तियों की भी जाँच की जाएगी। पुलिस का कहना है कि वे इस मामले में आरोपितों को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाने की पूरी कोशिश करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार (29 अगस्त 2025) को दो दिन की यात्रा पर जापान पहुँच चुके हैं। इस दौरान वे जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा से मुलाकात करेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री SCO सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन के शहर तिआनजिन जाएँगे। यहाँ उनकी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय बैठक भी होने की संभावना है।
SCO सम्मेलन के दौरान ही पीएम मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भी मुलाकात होगी। टैरिफ को लेकर भारत की अमेरिका के साथ संबंधों में तल्खी के बीच जापान, रूस और चीन के प्रमुखों से पीएम मोदी की बातचीत को अहम माना जा रहा है।
पीएम मोदी की यात्रा से पहले चीन के सरकारी मीडिया ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने एक संपादकीय लिखा है। इसमें प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को ऐतिहासिक बताया गया है।
#Editorial: Today, as the “twin engines” of Asia’s economic growth, key representatives of the Global South, and members of the SCO, BRICS, and the G20, China and India share a mission to push the international order toward greater democracy and fairness. https://t.co/FjvsXryBirpic.twitter.com/9RTuzx8WbT
‘ग्लोबल टाइम्स’ ने लिखा है, “भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक चीन के तियानजिन शहर में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने जा रहे हैं। यह 7 वर्षों में उनकी पहली चीन यात्रा है। इसे दोनों देशों के बीच संबंधों में आई ठंडक के बाद इसे एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और चीन अपने कूटनीतिक संबंधों के 75 साल पूरे कर रहे हैं।”
आगे लिखा है कि हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच कुछ सकारात्मक घटनाएँ हुई हैं, जैसे हिमालयी सीमा पर सैनिकों द्वारा मिठाइयों का आदान-प्रदान, भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए तिब्बत की यात्रा फिर से शुरू होना और भारत-चीन के बीच सीधी उड़ानों को फिर से शुरू करने की संभावना जताई जाना। यह सब इस ओर इशारा करता है कि दोनों देश धीरे-धीरे अपने रिश्तों को सुधारने की दिशा में बढ़ रहे हैं।
‘ग्लोबल टाइम्स’ ने लिखा कि गलवान की घटना के बाद दोनों देश यह मानने लगे हैं कि सीमा विवादों के बजाय, संसाधनों को आर्थिक विकास और रणनीतिक प्राथमिकताओं पर लगाना अधिक तर्कपूर्ण है। सुस्त वैश्विक आर्थिक सुधारों के बीच दोनों देशों को आर्थिक विकास के लिए स्थिरता जरूरी है। 2024 में द्विपक्षीय व्यापार साल-दर-साल 1.7% की बढ़ोतरी के साथ 138.478 अरब डॉलर तक पहुँच गया था।
संपादकीय में लिखा है कि 2025 की शुरुआत से ही दुनिया में ‘रूस-यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट की अशांति और अमेरिका की घरेलू राजनीति और विदेश नीति में बदलाव’ जैसी कई समस्याएँ आई हैं। अमेरिका अब अपने सहयोगियों को समर्थन देने के बजाय ‘लेन-देन की राजनीति’ अपना रहा है, कुछ जगहों पर तो अमेरिका ने सहयोगियों और साझेदारों की कीमत पर लाभ लेने की नीति अपनाई है। इससे भारत-अमेरिका संबंधों में भी खटास आई है।
इस संपादकीय में पीएम मोदी के भारत के स्वतंत्रता दिवस पर दिए गए संबोधन का भी उल्लेख किया गया है। इसमें लिखा है, “प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर कहा था कि ‘भारत अपने किसानों के हितों पर कोई समझौता नहीं करेगा और किसी भी दबाव के सामने दीवार बनकर खड़ा रहेगा’। भारत अब व्यापार में विविधता लाने के लिए करीब 40 देशों के साथ मिलकर नीतियों पर काम कर रहा है। यह रणनीतिक स्वतंत्रता चीन की विदेश नीति से मेल खाती है, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग की नई संभावनाएँ बन रही हैं।”
इसमें स्पष्ट रुप से लिखा हुआ है कि कुछ पश्चिमी मीडिया संस्थान इस सुधार को ‘अमेरिका-विरोधी गठबंधन’ के रूप में दिखाने की कोशिश करते हैं, लेकिन यह सच्चाई को गलत ढंग से पेश करता है। भारत और चीन की विदेश नीति स्वतंत्र और अपने-अपने राष्ट्रीय हितों पर केंद्रित है।
संपादकीय के अनुसार, “CNN की एक टिप्पणी में सही कहा गया कि भारत-चीन संबंधों में बदलाव भारत की ‘रणनीतिक स्वतंत्रता’ की नीति का उदाहरण है, जो किसी भी गुट का हिस्सा बनने के बजाय अपने हितों को प्राथमिकता देती है।”
संपादकीय में आगे लिखा है कि इतिहास की ओर देखें तो भारत उन पहले देशों में से था, जिन्होंने पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना को मान्यता दी थी। भारत और चीन ने 1950 के दशक में ‘पंचशील सिद्धांत’ का प्रस्ताव दिया था जो आज भी अंतरराष्ट्रीय संबंधों की एक मूल भावना है।
इसमें कहा गया है, “एशिया के आर्थिक विकास के ‘डबल इंजन’ होने के साथ-साथ, ग्लोबल साउथ के प्रमुख प्रतिनिधि और एससीओ (SCO), ब्रिक्स (BRICS) और जी20 (G20) के सदस्य होने के नाते, चीन और भारत की साझा जिम्मेदारी है कि वे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को और अधिक लोकतांत्रिक और न्यायपूर्ण दिशा में आगे बढ़ाएँ।”
‘ग्लोबल टाइम्स’ ने आखिर में लिखा, “मोदी की चीन यात्रा भारत-चीन संबंधों को सुधारने का एक बढ़िया अवसर है। पर्यवेक्षकों का मानना है कि अब दोनों बड़े देश अपने रिश्तों को विरोधी नहीं बल्कि साझेदार की तरह सँभालने की कोशिश कर रहे हैं।”
अखबार ने लिखा, “जब भारत-चीन कूटनीतिक संबंधों के 75 साल पूरे कर रहे हैं, तब उम्मीद की जा रही है कि नई दिल्ली और बीजिंग दोनों मिलकर एक नया अध्याय लिखेंगे, जहाँ ‘ड्रैगन और हाथी’ मिलकर दुनिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि की दिशा में योगदान देंगे।”
बरेली के फैज नगर में 24 अगस्त 2025 को पुलिस ने एक मदरसे में चल रहे धर्मांतरण रैकेट का पर्दाफाश किया। जब पुलिस पहुँची तो वहाँ दो हिंदू युवकों का जबरन खतना कराया जा रहा था। मौके से कई मुस्लिम युवक पकड़े गए। इस खुलासे के साथ एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है कि गैंग की कमान एक जीजा-साले की जोड़ी के हाथ में थी।
अब्दुल मजीद ने जयपुर के हिंदू युवक पीयूष को पहले इस्लाम कबूल करवाया, फिर उसका नाम बदलकर मोहम्मद अली रखा। इसके बाद अपनी बहन आयशा से उसका निकाह करवा दिया। नया मुस्लिम जीजा अब हिंदुओं को बहकाने का ‘प्रूफ’ बन गया। वह खुद को पहले हिंदू बताकर कहता, ‘सनातन धर्म बेकार है, इस्लाम में जन्नत है।’
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, गिरोह पहले युवाओं को पाकिस्तानी मौलाना इंजीनियर अली मिर्जा के विचार सुनवाता, जो मजहब की आधुनिक व्याख्या करता है। जब दिमाग काबू में आ जाता, तो जाकिर नाइक की कट्टर और भड़काऊ किताबें पढ़ाई जातीं। ‘मीडिया और इस्लाम –जंग या अमन’, ‘हिंदू धर्म और इस्लाम में समानता’ जैसी किताबें देकर दिखाया जाता और फिर इस्लाम को ‘बेहतर’ साबित किया जाता।
ये लोग कुरान और बाइबिल की बहस वाले वीडियो दिखाते और साबित करने की कोशिश करते कि इस्लाम सबसे बेहतर है। साथ ही वादा करते कि अगर वो धर्म बदलते हैं तो किसी मुस्लिम लड़की से शादी भी करा देंगे। जो लोग फँस जाते, उनके लिए फर्जी सर्टिफिकेट भी बनवाए जाते। ये सर्टिफिकेट दिल्ली की एक मस्जिद से जारी होते थे।
पुलिस जाँच के मुताबिक, धर्मांतरण गैंग कई राज्यों में फैला है। कॉल डिटेल से पता चला है कि ये लोग दक्षिण भारत के कई लैंडलाइन नंबरों पर बात करते थे। पुलिस अब उन राज्यों में जाकर भी जाँच करेगी। अगर और आरोपित सामने आए तो उन पर भी कार्रवाई होगी।
धर्मांतरण जबरन या अपनी मर्जी से?
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, अब्दुल मजीद की बहन आयशा खातून इस मदरसे में ही रहती हैं और उसका कहना है कि कोई भी जबरदस्ती मुस्लिम नहीं बना। आयशा खातून के मुताबिक, लोग इस्लाम की खूबसूरती देखकर खुद ही उसे अपना रहे हैं। आयशा खातून ने यह भी कहा कि कोई किसी को जबरदस्ती मुस्लिम कैसे बना सकता है।
हालाँकि, आयशा ने कैमरे पर सिर्फ इतना कहा कि उनकी भाभी को बेटी हुई है और उनकी माँ उनसे मिलने जेल गई हैं। यह सब उन आरोपों के ठीक उलट है, जो पुलिस और जाँच में सामने आए हैं।
जयपुर का ‘पीयूष’ बना ‘मोहम्मद अली’
गाँव के एक बुजुर्ग ने बताया कि अब्दुल मजीद हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराने के लिए किसी भी हद तक जा सकता था। उसने जयपुर के पीयूष से अपनी बहन की बातचीत करवाई। वॉट्सऐप पर फोटो-वीडियो भेजकर उसे निकाह का लालच दिया।
पहले उसका खतना कराकर नाम मोहम्मद अली रखा गया, फिर 2022 में उसका निकाह आयशा से करा दिया गया। उसे इस्लामिक किताबें और जाकिर नाइक के ऑडियो सुना-सुनाकर कट्टर मुस्लिम बनाया गया। इसके बाद वह खुद इस गिरोह में शामिल होकर अन्य हिंदुओं का ब्रेनवॉश करने लगा। पुलिस ने बताया कि बरामद साहित्य और तकरीरें काफी भड़काऊ हैं।
सुंदर लड़कियों की तस्वीरें भेज फँसाते
इस गिरोह का पर्दाफाश करने वाली एसपी साउथ ने बताया कि यह एक बड़ा गैंग है और इनका निशाना तलाकशुदा, आर्थिक रूप से कमजोर लोग होते है। गैंग लोगों को मुस्लिम लड़कियों से शादी का लालच देकर वॉट्सऐप ग्रुप्स में सुंदर लड़कियों की तस्वीरें भेजकर उन्हें फँसाते हैं।
अब्दुल मजीद गिरोह का मुख्य संचालक था। उसके नीचे सलमान, आरिफ और फहीम जैसे लोग काम करते थे। सलमान कपड़े सिलता था और मजहबी किताबें व CD उपलब्ध कराता था, आरिफ उसकी मदद करता था और फहीम नाई का काम करता था और लोगों की जानकारी जुटाकर गैंग तक पहुँचाता था।
विदेशी फंडिंग और देशभर में नेटवर्क
जाँच में पता चला है कि अब्दुल मजीद की ट्रैवल हिस्ट्री 27 से भी ज्यादा जिलों से जुड़ी है। वह अलग-अलग जगहों से चंदा इकट्ठा करता था। उसके बैंक खातों में ₹13 लाख से ज्यादा मिले हैं और 21 अलग-अलग बैंक खातों का भी पता चला है। पुलिस को विदेशी फंडिंग का भी शक है।
बरेली के इस गिरोह के तार देश के 13 राज्यों से जुड़े हैं। इसमें 200 से ज्यादा मौलानाओं के शामिल होने की आशंका है। पुलिस ने गिरोह के पाँचवें सदस्य महबूब बेग की तलाश में भी दबिश दी है। पुलिस को इस गिरोह के तार नशीले पदार्थों की तस्करी से भी जुड़े होने का शक है। कुछ ऐसे तस्कर जो पहले जेल जा चुके हैं, वे भी अब्दुल मजीद के संपर्क में थे।
खुफिया एजेंसियाँ भी इस मामले की जाँच कर रही हैं। इस गिरोह ने सुभाषनगर के ब्रजपाल साहू और उसके पूरे परिवार का भी धर्मांतरण करा दिया था, जिससे ब्रजपाल अब्दुल्ला, उसकी बहन राजकुमारी आयशा और माँ ऊषा देवी अमीना बन गईं। पुलिस अब इन परिवारों की भी तलाश कर रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगा दिया है, जो बुधवार (27 अगस्त 2025) से लागू हो गया। इसके बाद भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर कुल शुल्क 50% हो गया है। यह कदम अमेरिका ने भारत के रूस से तेल खरीदने के कारण उठाया है।
इस फैसले का सबसे बड़ा असर भारत के हीरा उद्योग पर बताया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, सूरत का हीरा कारोबार पहले से ही गहरी मंदी का सामना कर रहा था और अब टैरिफ बढ़ने से हालात और बिगड़ सकते हैं। इस मंदी से हजारों नौकरियों पर संकट मंडराने की आशंका है।
सूरत भारत का हीरा निर्यात केंद्र है, जहाँ से हर साल हजारों करोड़ रुपए के हीरे अमेरिका समेत कई देशों में भेजे जाते हैं। रॉयटर्स और बीबीसी जैसी अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थाओं ने रिपोर्टिंग करते हुए इस मंदी को ट्रंप के टैरिफ से जोड़कर प्रस्तुत किया। बाद में गुजराती और हिंदी मीडिया ने भी यही नैरेटिव आगे बढ़ाया।
रिपोर्ट के अनुसार, सूरत की कई हीरा फैक्ट्रियों में पहले बड़ी संख्या में लोग काम करते थे, लेकिन अब ऑर्डर न मिलने की वजह से कर्मचारियों की संख्या घटा दी गई है और कई लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जिन लोगों की नौकरी बची है, उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा। कई ज्वेलर्स का कहना है कि उनकी सैलरी कम कर दी गई है या फिर उन्हें काम से हटा दिया गया है।
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, टैरिफ से पैदा हुई मंदी का सीधा असर अब मजदूरों पर दिखने लगा है। रिपोर्ट में कुछ लोगों के हवाले से कहा गया है कि एक लाख से ज्यादा ज्वेलर्स की नौकरियाँ खतरे में हैं और उनका भविष्य अनिश्चित है।
रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में सूरत के डायमंड बोरस पर फोकस किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ समय पहले इसका उद्घाटन किया था, लेकिन यह अब तक पूरी तरह शुरू नहीं हो पाया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि टैरिफ बढ़ने से ऑर्डर कम हो गए हैं, कई दफ़्तर खाली पड़े हैं और कई कारोबारी यहाँ अपना बिजनेस शिफ्ट करने से कतराने लगे हैं।
रिपोर्ट में छोटे हीरा कारोबारियों के हवाले से भी मंदी की बात कही गई है। कई गुमनाम लोगों ने भी यही दावे दोहराए हैं। विदेशी मीडिया के बाद अब गुजराती मीडिया ने भी इस मुद्दे को उठाया है।
गुजरात समाचार ने 28 अगस्त को एक रिपोर्ट प्रकाशित की और दावा किया कि ट्रंप के 50% टैरिफ से सूरत के हीरा-टेक्सटाइल उद्योग में 50 हजार से अधिक नौकरियाँ खतरे में पड़ सकती हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि सूरत के हीरा व्यापार का लगभग 30% हिस्सा अमेरिका से जुड़ा है, इसलिए टैरिफ का असर उद्योग पर ज्यादा पड़ेगा।
सत्य क्या है?
सूरत गुजरात की आर्थिक राजधानी है और गुजरात प्रधानमंत्री मोदी का गृह राज्य है। अगर यह प्रचार किया जाए कि सूरत का सबसे बड़ा उद्योग टैरिफ और वैश्विक हालात की वजह से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, तो इससे यह संदेश जाता है कि ट्रंप सीधे मोदी और उनके राज्य को निशाना बना रहे हैं।
लेकिन जरूरी है यह समझना कि कई रिपोर्ट्स में पूरी तस्वीर या सही संदर्भ नहीं दिए जा रहे, जिससे गलत नैरेटिव फैल रहा है।
असलियत यह है कि सूरत का हीरा उद्योग पिछले एक साल से मंदी का सामना कर रहा है। इस दौरान कई रिपोर्ट्स प्रकाशित हुईं, जब जो बाइडेन राष्ट्रपति थे, तब टैरिफ का कोई मुद्दा सामने नहीं था। यानी अगर बीबीसी की टीम ट्रंप के आने से पहले सूरत गई होती, तो वहाँ की स्थिति वही मिलती, जो अब दिखाई दे रही है।
यह सही है कि अमेरिकी टैरिफ का असर हीरा उद्योग पर पड़ेगा, लेकिन यह भी सच है कि भारतीय हीरा कारोबारियों की पकड़ मज़बूत है। भारत के पास अमेरिका के अलावा अन्य बाजार भी हैं, जबकि अमेरिका के पास ऐसे वैकल्पिक सप्लायर नहीं हैं जो इतने बड़े पैमाने पर हीरे निर्यात कर सकें। अमेरिका में हीरों की माँग बहुत अधिक है, जिसे केवल भारत ही पूरा कर सकता है।
जहाँ तक डायमंड बोरस का सवाल है, उसकी स्थिति पर सवाल इसके उद्घाटन के समय से ही उठते रहे हैं। कई दफ़्तर अब तक शुरू नहीं हुए हैं, लेकिन इसका सीधा संबंध अमेरिकी टैरिफ से नहीं है। जब टैरिफ का मुद्दा नहीं था, तब भी डायमंड बोरस की यही हालत थी। हकीकत यह है कि सरकार लगातार इसे सक्रिय बनाने की कोशिश कर रही है।
विशेषज्ञों का क्या कहना है?
सूरत डायमंड एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीशभाई खुंट के अनुसार, हीरा उद्योग में भयंकर मंदी आने की बातें ज्यादातर मीडिया की बनाई हुई हैं।
उन्होंने बताया कि सूरत में पिछले दो साल से मंदी का माहौल है और पिछले एक साल में यह और बढ़ा है। यह स्थिति टैरिफ विवाद से पहले से ही मौजूद थी। अमेरिकी टैरिफ के असर पर बोलते हुए खुंट ने कहा कि इसका असर शॉर्ट टर्म जरूर होगा, लेकिन लंबे समय में उद्योग इस स्थिति को संभाल लेगा।
‘अमेरिका भारत पर निर्भर है, अगर नुकसान भी होगा तो अल्पकालिक होगा’
उन्होंने कहा कि आज करीब 90% हीरों का उत्पादन भारत में होता है और अमेरिका भी यह अच्छी तरह जानता है। इसलिए दुनिया का कोई भी देश अमेरिका की जरूरत के हिसाब से इतने बड़े पैमाने पर हीरे निर्यात नहीं कर सकता। अमेरिका पूरी तरह भारत पर निर्भर है, जबकि भारत किसी एक देश पर निर्भर नहीं है।
खुंट ने कहा कि अगर अमेरिका टैरिफ बढ़ाता भी है तो असली नुकसान वहीं के आम नागरिकों को होगा। अमेरिका में हीरे शादी और सामाजिक जीवन का अहम हिस्सा हैं, जैसे भारत में सोने का महत्व है। अगर वहाँ लोगों को हीरे नहीं मिलेंगे तो असंतोष पैदा होगा या फिर लोग महँगे दाम देकर भी खरीदेंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को इससे नुकसान नहीं होगा। जो हीरे पहले अमेरिका भेजे जाते थे, उन्हें अन्य देशों को भेजकर आसानी से भरपाई की जा सकती है। क्योंकि भारत दुनिया के लगभग सभी देशों में हीरे निर्यात करता है।
इसी लिए उनके अनुसार, अमेरिकी टैरिफ से भारत के हीरा उद्योग पर कोई बड़ा संकट नहीं आएगा। बल्कि अमेरिका ही भारत पर ज्यादा निर्भर है, भारत अमेरिका पर नहीं।
यह रिपोर्ट झूठी है कि मंदी का कारण टैरिफ था
उन्होंने वही तर्क दिया कि अमेरिका में हीरे उतने ही अहम हैं जितना भारत में सोना। इसलिए हीरे महंगे होने पर भी अमेरिकी इन्हें खरीदेंगे। अगर वे नहीं खरीदते, तो भारत अन्य देशों को हीरे बेच सकता है।
असली नुकसान अमेरिका को होगा, क्योंकि भारत के अलावा कोई और देश इतनी मात्रा में हीरे नहीं दे सकता। सूरत में 10-12 फैक्ट्रियों का संचालन करने वाले ठाकरसिभाई पटेल ने भी यही बात दोहराई। उन्होंने कहा कि मंदी से कोई इनकार नहीं कर सकता, लेकिन यह मंदी अमेरिकी टैरिफ की वजह से नहीं है। टैरिफ का असर थोड़े समय के लिए जरूर पड़ सकता है, लेकिन लंबे समय तक इसका कोई बड़ा असर नहीं होगा। इसी तरह, एक अन्य फैक्ट्री मालिक लक्ष्मणभाई और कुछ ज्वेलर्स ने भी यही राय रखी।
गौर करने वाली बात यह है कि 2024 में भी गुजराती मीडिया ने हीरा उद्योग में मंदी की रिपोर्ट प्रकाशितकी थी, जबकि तब टैरिफ विवाद का कोई मुद्दा नहीं था। यानी यह साफ है कि सूरत की हीरा इंडस्ट्री में मंदी पहले से थी, लेकिन यह अमेरिकी टैरिफ की वजह से नहीं आई।
इसके अलावा, उद्योग जगत ने अमेरिका पर निर्भरता घटाने और अन्य देशों को हीरे बेचने की योजना भी बनाई है। खुंट के अनुसार, राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों हीरा उद्योग के साथ खड़ी हैं और जरूरत पड़ने पर हमेशा सकारात्मक कदम उठाती हैं।
मूल रूप से यह रिपोर्ट गुजराती में भार्गव राजगुरु ने लिखी है, इस लिंक पर क्लिक कर विस्तार से पढ़ें।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ में मुँह की खाया पाकिस्तान अपनी हार झुठलाने के लिए लगातार प्रोपेगेंडा का सहारा ले रहा है लेकिन वहाँ भी उसके झूठ की हर बार पोल खुल रही है। हाल ही में सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा हैंडल्स ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें दावा किया गया कि भारत के नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने कहा है, “मोदी सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर को रोक दिया, जिसकी वजह से भारतीय वायुसेना को नुकसान हुआ।”
इस वायरल वीडियो में एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी को यह कहते सुना जा सकता है, “महोदय, कुछ दिन पहले, विक्रांत (INS विक्रांत) के डेक पर भारतीय नौसेना को संबोधित करते हुए आपने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है और जरूरत पड़ने पर, भारतीय नौसेना को अगली बार हमला करने का मौका मिल सकता है। हमें उम्मीद थी कि सरकार हमें लड़ाई (ऑपरेशन सिंदूर) में हिस्सा लेने की इजाजत देगी, लेकिन सरकार ने हमें लड़ाई में शामिल होने की कमान नहीं दी। यही वजह है कि भारतीय वायुसेना को नुकसान उठाना पड़ा।”
वीडियो में एडमिरल त्रिपाठी को यह कहते हुए दिखाया गया कि सरकार ने नौसेना को लड़ाई में हिस्सा लेने का आदेश नहीं दिया और इसलिए वायुसेना को नुकसान उठाना पड़ा। यह वीडियो पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा हैंडल्स द्वारा सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर फैलाया गया, ताकि भारत के खिलाफ गलत जानकारी फैलाई जा सके।
भारत सरकार के प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने इस वीडियो का फैक्ट-चेक किया है और साफ बताया कि यह वीडियो एडिट किया गया है। एडमिरल त्रिपाठी ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया था। PIB ने एडमिरल त्रिपाठी का असली वीडियो भी जारी किया, जिसमें उन्होंने मोदी सरकार की तारीफ की है और कहा है कि भारतीय नौसेना आधुनिक हथियारों और तकनीक से लैस है।
?प्रोपेगेंडा से सावधान❗
कुछ पाकिस्तान-समर्थित अकाउंट्स डिजिटल छेड़छाड़ कर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी का वीडियो फैला रहे हैं, जिसमें दिखाया जा रहा है कि नौसेना प्रमुख #OperationSindoor के दौरान सरकार पर कार्रवाई रोकने का आरोप लगा रहे हैं, और दावा कर रहे हैं कि… pic.twitter.com/1Csn1LH7Uj
रियल वीडियो में वे कह रहें हैं, “सर, कुछ दिन पहले आपने INS विक्रांत के डेक पर भारतीय नौसेना को संबोधित करते हुए कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है और अगर जरूरत पड़ी, तो अगली बार नौसेना को पहला हमला करने का मौका मिल सकता है। मैं कहना चाहता हूँ कि INS उदयगिरि और INS हिमगिरि जैसे आधुनिक प्लेटफॉर्म हमें दुश्मन पर पहला जबरदस्त हमला करने में सक्षम बनाते हैं।”
जाहिर है कि सोशल मीडिया पर जो वीडियो फैलाया गया, वह झूठा और भ्रामक था। एडमिरल त्रिपाठी ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया। असल में उन्होंने भारत की सरकार और नौसेना की ताकत की सराहना की थी।
गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना द्वारा पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था। इस हमले में आतंकियों ने 26 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी थी। इस हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी, जो कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा एक ग्रुप है।
हमले के बाद भारत ने एक बड़ी सैन्य कार्रवाई की तैयारी की थी, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था।
उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के कुंदावली गाँव में बीते छह सालों से ईसाई धर्मांतरण का खेल चल रहा था। कासगंज का रहने वाला पास्टर हृदयेश गाँव में आता-जाता था और लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर करता था।
उसकी पत्नी नीतू और गाँव की कुछ महिलाएँ भी इस काम में शामिल थीं। गाँव में बने एक मकान में अस्थायी चर्च बनाकर वहाँ लोगों का ईसाई धर्म में धर्मांतरण कराया जाता था। गाँव में लगभग 20 लोगों को पानी की टंकी में खड़ा कर उन्हें शपथ दिलाने के फोटो और वीडियो भी सामने आए हैं।
इसी के बाद यह मामला सामने आया, लेकिन पुलिस ने पहले इसे नजरअंदाज किया। थाने से लेकर सीओ स्तर तक के अधिकारी शुरुआत में पूरे मामले को दबाने की कोशिश करते दिखे।
मामले में पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने भी एक्स पर शपथ दिलाने की फोटो शेयर करते हुए पुलिस की लापरवाही का खुलासा किया। उन्होंने लिखा, उत्तर प्रदेश के बदायूं में हिंदुओं के अवैध धर्मांतरण के मामले को स्थानीय थाने और यहाँ तक कि सर्किल ऑफिसर ने भी दबा दिया। उन्होंने यह कहकर पूरी बात को रफा-दफा कर दिया कि किसी ने धर्मांतरण नहीं किया (हालाँकि स्क्रीनशॉट में दिखाई गई धर्मांतरण की तस्वीरें भी मौजूद हैं)।”
Truth out
Local thana and even Circle Officer brushed the case of illegal conversion of Hindus in UP’s Budaun under the carpet. They dismissed the entire thing saying nobody converted (despite pictures of conversion such the one seen in screenshot)
रिपोर्ट्स के अनुसार, सीओ बिल्सी संजीव कुमार ने जल्दबाजी में बयान देते हुए कहा कि उन्हें ट्विटर के जरिए जानकारी मिली थी कि गाँव में प्रार्थना सभाएँ होती हैं। जब पुलिस मौके पर पहुँची तो उन्हें कोई पीड़ित नहीं मिला जिसने सीधे तौर पर धर्मांतरण की शिकायत की हो।
हालाँकि दूसरी ओर सोशल मीडिया पर लगातार फोटो और वीडियो सामने आते रहे, जिनमें लोगों को धर्म बदलने के लिए प्रलोभन दिया जा रहा था। इन साक्ष्यों के सामने आने के बाद पुलिस की सफाई और झूठ पकड़े गए।
अंत में किसी तरह पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया। हालाँकि अब भी पुलिस की कार्यवाही पर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस ने मौके से चार लोगों को पकड़ा था, जिनमें दो महिलाएँ भी थीं। लेकिन अब सिर्फ पास्टर हृदयेश को हिरासत में लेने की बात कही जा रही है और महिलाओं की तलाश जारी होने का दावा किया जा रहा है।
इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका शुरू से ही संदिग्ध और लापरवाह नजर आई, लेकिन जनता और सोशल मीडिया के दबाव में आकर आखिरकार कार्रवाई करनी पड़ी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी जापान यात्रा की शुरुआत में शुक्रवार (29 अगस्त 2025) को टोक्यो में भारत-जापान इकनॉमिक फोरम को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने जापान से अपने पुराने रिश्तों को याद किया और जापानी कंपनियों को भारत में निवेश करने न्योता दिया है।
Come, Make in India: पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि आज दुनिया सिर्फ भारत को देख ही नहीं रही है बल्कि भारत पर भरोसा भी कर रही है। पीएम मोदी ने वहाँ मौजूद बिजनेस लीडर्स से कहा, “मैं आपसे आग्रह करता हूँ- ‘Come, Make in India, Make for the world’ (आइए, भारत में बनाइए, विश्व के लिए बनाइए) और ‘सुजुकी’ और ‘डाइकिन’ की सफलता की कहानी आपकी भी सफलता की कहानी बन सकती है।” अमेरिका से चल रहे टैरिफ वॉर के बीच पीएम मोदी का जापानी कंपनियों को यह आमंत्रण अहम माना जा रहा है।
भारत उम्मीदों से भरा है: पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि मेट्रो से मैन्युफैक्चरिंग तक हर क्षेत्र में भारत और जापान की साझेदारी विश्वास का प्रतीक बनी है। पीएम ने इस दौरान बताया कि जापानी कंपनियों ने भारत में 40 बिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है और पिछले 2 वर्षों में 13 बिलियन डॉलर का प्राइवेट इन्वेस्टमेंट हुआ है।
उन्होंने कहा, “JBIC कहता है कि भारत सबसे अधिक उम्मीदों से भरा गंतव्य है। JETRO बताता है कि 80% कंपनियाँ भारत में विस्तार करना चाहती हैं और 75% मुनाफे में हैं।”
वैश्विक ग्रोथ में भारत का 18% योगदान: PM
पीएम मोदी ने कहा कि भारत में आज राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता है। उन्होंने कहा, “आज भारत विश्व की सबसे तेज बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है और बहुत जल्द विश्व की तीसरी सबसे बड़ी इकॉनमी बनने जा रहा है।”
उन्होंने कहा, “वैश्विक ग्रोथ में भारत 18% योगदान दे रहा है। 2017 में हमने ‘वन नेशन-वन टैक्स’ की शुरुआत की थी। अब इसमें नए और बड़े रिफार्म लाने पर काम चल रहा है।” साथ ही, भारत में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर भी बल दिया गया है और डिफेंस और स्पेस जैसे सेन्सिटिव क्षेत्रों को निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया गया है।
पीएम मोदी ने कहा कि जापान एक ‘टेक पावरहाउस’ है और भारत एक ‘टैलेंट पावर हाउस’। उन्होंने कहा, “जापान की टेक्नोलॉजी और भारत का टैलेंट मिलकर इस सदी की ‘टेक क्रांति’ नेतृत्व कर सकते हैं।” वहीं, जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने कहा कि भारतीय टैलेंट और जापानी तकनीक एक-दूसरे के लिए बने है।
PM ने याद किए जापान से अपने पुराने रिश्ते
पीएम मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए भी जापान के साथ अपने पुराने संबंधों को याद किया है। पीएम मोदी ने फोरम को संबोधित करते हुए कहा, “बहुत लोग हैं जिनसे मेरा व्यक्तिगत परिचय रहा है। जब मैं गुजरात में था, तब भी, और गुजरात से दिल्ली आया तो तब भी।”
उन्होंने आगे कहा, “आप में से कई लोगों से निकट परिचय मेरा रहा है। मुझे खुशी है की आज आप सब से मिलने का अवसर मिला है।” साथ ही उन्होंने जापान के प्रधानमंत्री इशिबा का भी धन्यवाद दिया है।”
‘वोट चोरी’ का प्रोपेगेंडा रचने वाली कॉन्ग्रेस मतदाता गहन पुनरीक्षण बिहार (SIR) पर एक और झूठ फैलाते पकड़ी गई है। कॉन्ग्रेस ने दावा किया कि बोधगया विधानसभा क्षेत्र के निदानी गाँव में सभी 947 मतदाताओं का मकान संख्या ‘6’ ही दिखाया गया है। पार्टी ने कहा कि ऐसा करके चुनाव आयोग ने असली मकान नंबर गायब कर दिए हैं।
मकान नंबर ‘6’ में 947 वोटर, कॉन्ग्रेस का दावा
कॉन्ग्रेस ने ‘वोट चोरी’ को लेकर यह दावा बाराचट्टी विधानसभा के निदानी गाँव के बूथ नंबर 161 को लेकर किया है। कॉन्ग्रेस ने एक सोशल मीडिया एक पोस्ट में दावा किया कि बूथ नंबर 161 की मतदाता सूची में 947 मतदाता एक ही घर (मकान नंबर ‘6’) में रहते हैं।
कॉन्ग्रेस ने कहा कि निदानी गाँव में सैकड़ों घर और परिवार हैं, मगर मतदाता सूची में पूरा गाँव एक काल्पनिक मकान में समा गया। चुनाव आयोग से 3 सवाल भी किए- BLO ने किस तरह डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन की?, असली मकान नंबर वोटर लिस्ट से क्यो गायब कर दिए? और इसका फायदा किसे पहुँचाया जा रहा है?
बिहार में चुनाव आयोग का करिश्मा
➡️ निदानी गांव, बोधगया (बूथ नं. 161, बाराचट्टी विधानसभा) में EC ने चमत्कार कर दिखाया ➡️ आधिकारिक वोटर लिस्ट में – 947 वोटर एक ही घर (मकान नं. 6) में रहते हैं
➡️ हकीकत? निदानी में सैकड़ों घर और परिवार हैं, मगर लिस्ट में पूरा गांव एक काल्पनिक मकान… pic.twitter.com/EKu5u4Uom3
आगे कॉन्ग्रेस ने फर्जी वोटर, डुप्लीकेट नाम और भूतिया पहचान छिपाए जाने का भी दावा किया। कॉन्ग्रेस ने ‘लोकतंत्र की चोरी’ और ‘लोकतंत्र को लूटने’ जैसे गंभीर आरोप भी चुनाव आयोग पर लगाए।
कॉन्ग्रेस के इस दावे को विपक्ष के नेता राहुल गाँधी समेत पूरे कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम ने प्रचारित किया। उल्लेखनीय है कि इस समय INDI गठबंधन राहुल गाँधी के नेतृत्व में बिहार में वोटर अधिकार यात्रा निकाल रहा है।
बिहार SIR का ड्राफ्ट डाटा क्या कहता है?
चुनाव आयोग ने बिहार SIR को जो ड्राफ्ट अपलोड किया है, उसमें निदानी गाँव के बूथ नंबर-161 का डाटा ऑपइंडिया ने खंगाला। सभी लोगों को मकान संख्या ‘6’ दिया गया है। हमने पाया कि इस बूथ पर 947 मतदाताओं का नाम दर्ज है। इनमें 526 पुरुष और 421 महिलाएँ हैं।
मकान संख्या ‘6’ में 947 वोटर- क्या है सच्चाई?
कॉन्ग्रेस के दावे के बाद गया के जिलाधिकारी ने इस बूथ पर सभी मतदाताओं के मकान संख्या ‘6’ होने का कारण बताया है। उन्होंने एक्स पोस्ट में बताया है, “कई गाँवों में गृह संख्या आवंटित नहीं होती है, जिसके कारण वोटर रोल में सांकेतिक गृह संख्या दी जाती है। जिन मतदाताओं का उल्लेख किया गया है, वे सभी गाँव में मौजूद हैं और सही वोटर हैं। निदानी गाँँव के 161 बूथ संख्या के वोटर स्वयं स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं।”
कई गांवों में गृह संख्या आवंटित नहीं होती है, जिसके कारण वोटर रोल में सांकेतिक गृह संख्या दी जाती है। जिन मतदाताओं का उल्लेख किया गया है, सभी गांव में मौजूद हैं, सही वोटर हैं। निदानी गांव के 161 बूथ संख्या के वोटर स्वयं स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं।@CEOBihar@ECISVEEPpic.twitter.com/7w7GLuFyDl
इस जानकारी के साथ ही जिलाधिकारी ने गाँव के मतदाता का वीडियो भी जारी किया। इस वीडियो में मतदाता बताते हैं कि SIR से वे लोग संतुष्ट हैं और इससे कोई परेशानी नहीं हो रही है। साथ ही मतदाता यह भी बताते हैं कि गाँव में कोई गृह संख्या नहीं होता है। सभी मतदाताओं ने मकान संख्या ‘6’ पर फैलाई जा रही अफवाहों को झूठा करार दिया।
चुनाव आयोग ने ऑपइंडिया को बताया है, “Notional House Number एक काल्पनिक (प्रतीकात्मक) मकान संख्या होती है, जो तब दी जाती है जब किसी मतदाता के निवास स्थान पर वास्तविक मकान संख्या उपलब्ध नहीं होती। कई गाँवों, झुग्गियों या अस्थायी बस्तियों में घरों पर कोई स्थायी मकान संख्या नहीं होती। ऐसे में BLO क्षेत्र का भौतिक भ्रमण करके प्रत्येक घर को स्वतः एक क्रमांक (जैसे 1, 2, 3…) प्रदान करता है।”
चुनाव आयोग ने आगे कहा, “यह संख्या केवल सूचीकरण में सुविधा और मतदाताओं को सही क्रम में दर्ज करने के लिए दी जाती है। इसका प्रयोग मतदाता की पहचान और मतदाता सूची को क्रमबद्ध रूप से तैयार करने में होता है।”
मकान संख्या ‘6’ की तरह ही मकान संख्या ‘0’ पर भी किया था गुमराह
जिस तरीके से मकान संख्या ‘6’ को लेकर झूठ फैलाया गया है। इससे पहले भी मकान संख्या ‘0’ को लेकर कॉन्ग्रेस ने लोगों को गुमराह करने की कोशिश की थी। राहुल गाँधी ने दावा किया था कर्नाटक के महादेवपुरा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में मकान नंबर ‘0’ वाले कई मतदाता हैं। राहुल गाँधी ने इन्हें ‘फर्जी मतदाता’ बताया था, जिनके घर का पता नहीं था।
बाद में चुनाव आयोग ने राहुल गाँधी के दावे को झूठा करार दिया था। चुनाव आयोग ने बताया कि बेघर लोगों को ये नंबर दिया गया है, जिनका पता स्पष्ट नहीं होता है। ऐसे लोगों का चुनावी फॉर्म में पूरा पता दर्ज नहीं होता है।