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पहाड़ से गिरे बड़े-बड़े पत्थर, ट्रैक पर मलबा ही मलबा: वैष्णो देवी मार्ग पर भूस्खलन के बाद और बढ़ा मौतों का आँकड़ा; 3 पुल क्षतिग्रस्त, यात्रा स्थगित

माता वैष्णो देवी मार्ग पर मंगलवार (26 अगस्त 2025) को हुए भूस्खलन में अब तक 30 लोगों के मरने की खबर है। हादसे में 23 लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज चल रहा है। हादसे में मारे गए 9 लोगों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। भूस्खलन में तीन पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। न्यूज एजेंसी एएनआई ने भूस्खलन में 30 लोगों की मौत की पुष्टि की है।

भूस्खलन करीब 3 बजे हुआ

ये हादसा त्रिकुटा पहाड़ी पर मंदिर से करीब 12 किलोमीटर दूर अर्धकुमारी के पास हुआ। ये रास्ता घुमावदार है। भूस्खलन के कारण अर्धकुमारी से भवन तक का रास्ता बंद कर दिया गया। मंगलवार को करीब 3 बजे भूस्खलन हुआ। पहाड़ से बड़े पत्थर और मलबा ट्रैक पर गिरे, जिससे रास्ते के टिनशेड और रैलिंग टूट गए और मंदिर मार्ग मलबे में तब्दील हो गया। बचाव कार्य जारी है। मलबे के नीचे और लोगों के फँसे होने की आशंका जताई जा रही है। वैष्णो देवी दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को फिलहाल यात्रा रद्द करने के लिए कहा गया है।

माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने हेल्प नंबर जारी किए हैं, ताकि श्रद्धालुओं की जानकारी ली जा सके।

बारिश बाढ़ से बेहाल हुआ जम्मू- कश्मीर

लगातार हो रही बारिश से हालात ज्यादा बिगड़ गए हैं। बारिश और बाढ़ के कारण इस केन्द्र शासित प्रदेश का जनजीवन बुरी तरह अस्त व्यस्त हो गया है। करीब 3500 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के साथ सेना राहत कार्य में जुटी हुई है। लोगों को अस्थाई शेल्टर होम में रखा गया है जहाँ मेडिकल सुविधाएँ और खाना-पानी की व्यवस्था है।

भारी बारिश के कारण नॉर्दन रेलवे ने 22 ट्रेनों को रद्द कर दिया है। जबकि 27 ट्रेनों को बीच में ही रोक दिया गया है। इनमें वैष्णो देवी बेस कैंप से चलने वाली 9 ट्रेनें भी शामिल हैं। हालाँकि कटरा-श्रीनगर मार्ग पर आवाजाही हो रही है।

हिमकोटी मार्ग पर यात्रा स्थगित थी

हिमकोटी ट्रेक मार्ग पर मंगलवार को हादसे के दिन सुबह से ही आवाजाही बंद कर दी गई थी, लेकिन पुराने मार्ग पर यात्रा चल रही थी। इसकी वजह से यात्री भूस्खलन की चपेट में आए।

हमारा मकसद देश को ‘विश्वगुरु’ बनाना, 100 साल पूरे होने का सार ‘भारत माता की जय’: मोहन भागवत ने बताया हिंदू राष्ट्र का असली मतलब, कहा- हमें खुद ही बनना होगा राम-शिव, मिलकर करना होगा काम

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत अक्सर अपने बयानों से चर्चा में रहते हैं, और इस बार उन्होंने एक ऐसा संदेश दिया है जिस पर चर्चा होनी तय है। अपने संगठन के 100 साल पूरे होने के मौके पर उन्होंने साफ कहा कि लोग आरएसएस को अटकलों और सुनी-सुनाई बातों पर नहीं, बल्कि सच्चाई और तथ्यों के आधार पर जानें।

मोहन भागवत ने कहा कि संघ का मकसद भारत को एक ‘विश्वगुरु’ बनाना है। उनके अनुसार, संघ के 100 साल के सफर का सार सिर्फ एक ही वाक्य में है- ‘भारत माता की जय‘। यह वाक्य सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि पूरे देश को एकजुट करने का एक संकल्प है।

संघ प्रमुख ने हिंदू की एक नई और उदार परिभाषा देते हुए कहा कि हिंदू वह है जो अपने रास्ते पर चलता है, लेकिन दूसरों के अलग-अलग विचारों और मान्यताओं का भी सम्मान करता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब हम ‘हिंदू राष्ट्र’ की बात करते हैं, तो इसका मतलब किसी का विरोध करना नहीं है, बल्कि सबको साथ लेकर चलना है। इस बयान से भागवत ने संघ की छवि को और अधिक समावेशी बनाने की कोशिश की है।

हिंदू राष्ट्र का मतलब: सबको साथ लेकर चलना

RSS पर अक्सर ये आरोप लगते हैं कि वो सिर्फ हिंदुओं की बात करता है और बाकी मजहबों को किनारे करता है। लेकिन संघ प्रमुख मोहन भागवत ने खुद इस बात को लेकर सफाई दी है। उन्होंने साफ कहा कि हिंदू राष्ट्र का मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि हम किसी का विरोध कर रहे हैं या सत्ता पर कब्जा करना चाहते हैं।

उनका कहना है कि ‘हिंदू’ वो होता है जो अपने रास्ते पर चलता है और साथ ही दूसरों के रास्तों का भी इज्जत से सम्मान करता है। यानी जो खुद भी अपने धर्म, संस्कृति से जुड़ा हो और दूसरों को भी उनके तरीके से जीने दे- वही असली हिंदू है। भागवत ने यहाँ तक कहा कि अगर कोई खुद को हिंदू नहीं मानता, तब भी वो हमारे अपने ही हैं। उनका मकसद साफ है- समाज को बाँटना नहीं, जोड़ना।

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भारत की असली ताकत इसकी विविधता में है। कई मत, कई विचार, फिर भी सब एक साथ चलें- यही संघ की सोच है। और इसी सोच से देश को एकजुट करना ही संघ का असली मकसद है।

संघ का उद्देश्य: भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाना

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ का असली मकसद देश को ताकतवर बनाना है, ताकि भारत दुनिया में अपना हक का मुकाम पा सके। उन्होंने साफ कहा कि संघ किसी के खिलाफ खड़ा नहीं हुआ, बल्कि समाज को जोड़ने और एकजुट करने के लिए खड़ा हुआ है। भागवत ने स्वामी विवेकानंद का हवाला देते हुए कहा कि हर देश का दुनिया के लिए एक योगदान होता है और अब वक्त आ गया है कि ‘भारत अपना योगदान दे, अपनी आवाज़ दुनिया तक पहुँचाए।’

मोहन भागवत ने उन लोगों का भी जिक्र किया जो कभी संघ के खिलाफ थे लेकिन आज उसके साथ खड़े हैं। इस पर उन्होंने बड़ी ही सहज बात कही, “वो पहले भी हमारे अपने थे और आज भी अपने ही हैं।” मोहन भागवत ने बताया कि ‘संघ का काम है समाज में एकता लाना, चाहे किसी की सोच, मान्यता या धर्म कुछ भी हो। और यही रास्ता है जिससे भारत फिर से उस ऊँचाई तक पहुँच सकता है, जहाँ वो कभी था- एकं विश्वगुरु की तरह।

क्रांतिकारियों और कॉन्ग्रेस पर विचार

मोहन भागवत ने अपने भाषण में देश की आज़ादी की लड़ाई का ज़िक्र करते हुए कहा कि एक दौर था जब देश में क्रांतिकारियों की एक जबरदस्त लहर उठी थी। उस दौर के लोग देश के लिए जीते थे, मरते थे, और उन्हीं में से एक चमकता हुआ नाम था ‘सावरकर‘। उन्होंने कहा कि ‘सावरकर जैसे लोग उस दौर की प्रेरणा थे’, लेकिन अफसोस कि आजादी मिलने के बाद वो जोश धीरे-धीरे गायब हो गया।

भागवत ने कहा कि 1857 की क्रांति के बाद कुछ लोगों ने राजनीति को आजादी पाने का जरिया बनाया और फिर वही आंदोलन धीरे-धीरे ‘कॉन्ग्रेस’ के रूप में सामने आया। उस आंदोलन से देश को आजादी तो मिली, लेकिन अगर आजादी के बाद भी वही भावना और सोच जारी रहती, तो ‘शायद आज देश की तस्वीर कुछ और होती।’

भागवत ने ये भी साफ कहा कि ‘वो किसी पर उंगली नहीं उठा रहे, बस इतिहास की सच्ची बात रख रहे हैं।’ उनका मकसद दोष देना नहीं, बल्कि ये याद दिलाना है कि हम कहाँ से चले थे और आज कहाँ खड़े हैं।

‘ठेका’ लेने की आदत छोड़ें, सब मिलकर काम करें

मोहन भागवत ने एक बड़ी और सोचने वाली बात कही- देश को सुधारने या बचाने की जिम्मेदारी सिर्फ किसी एक नेता या संगठन की नहीं है। ये सोच कि कोई आएगा और सब ठीक कर देगा, अब छोड़नी होगी। मोहन भागवत ने साफ-साफ कहा, “राम या शिवाजी कब तक आएँगे? अब हमें खुद ही राम या शिव बनना होगा।”

मोहन भागवत का मतलब ये था कि अगर हम चाहते हैं कि देश आगे बढ़े, मजबूत बने, तो हर एक नागरिक को अपनी भूमिका निभानी होगी। सिर्फ नेताओं या संस्थाओं को दोष देकर कुछ नहीं होगा। देश हम सबका है और इसकी जिम्मेदारी भी हम सबकी है।

इस तरह, भागवत ने ये दिखाने की कोशिश की कि संघ सिर्फ नारेबाज़ी या राजनीति नहीं करता, बल्कि समाज को जोड़ने और जिम्मेदारी का भाव जगाने की कोशिश करता है। उनका ये संदेश लोगों से सीधा जुड़ता है- क्योंकि बदलाव कहीं और नहीं, हमारे अपने अंदर से शुरू होता है।

द वायर और न्यूजलॉन्ड्री की बिहार SIR रिपोर्ट्स को चुनाव आयोग ने बताया भ्रामक, फैक्ट चेक करते हुए रखी पूरी बात: वामपंथी मीडिया पोर्टल्स ने किए थे गड़बड़ी के दावे, मिला करारा जवाब

भारत का चुनावी तंत्र दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक ढांचों में से एक है और इसकी विश्वसनीयता मतदाता सूची की सटीकता पर निर्भर करती है। बिहार में हाल ही में आयोजित विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) का उद्देश्य 7.89 करोड़ मतदाताओं की पात्रता को सत्यापित करना था।

हालाँकि द वायर और न्यूज़लॉन्ड्री ने अपनी हालिया ग्राउंड रिपोर्ट्स में बिहार SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, जिसमें मतदाता सूची में अनियमितताओं का दावा किया गया है। ये दोनों पोर्टल्स अक्सर वामपंथी विचारधारा से जुड़े माने जाते हैं और उनकी रिपोर्ट्स से ऐसा लगा जैसे बिहार चुनाव की निष्पक्षता पर खतरा है। इन दोनों मीडिया समूहों की रिपोर्ट्स में समान सामग्री और शब्दावली का उपयोग हुआ, जिसे बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (Chief Electoral Officer, Bihar) ने भ्रामक और तथ्यों से परे करार दिया है।

बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इन दावों का फैक्ट चेक कर दिया है। 26 अगस्त 2025 को X (पहले ट्विटर) पर पोस्ट करके और आधिकारिक बयान में उन्होंने साफ कहा कि ये रिपोर्ट्स भ्रामक हैं, तथ्यों से परे हैं और पूरी प्रक्रिया पर बेवजह सवाल उठा रही हैं।

दरअसल, इन दोनों प्रोपेगेंडा पोर्टल्स की रिपोर्ट्स लगभग एक जैसी हैं। हेडलाइन भी वैसी ही: “On the Ground in Bihar: How a Booth-by-Booth Check Revealed What the Election Commission Missed”। मतलब, बिहार में ग्राउंड पर जाकर बूथ-बूथ चेक किया तो चुनाव आयोग की गलतियाँ पकड़ी गईं। उन्होंने चार जिलों कटिहार, पूर्णिया, मधुबन और हरसिद्धि में 14 मामलों की जाँच की। दावा ये कि पाँच निर्वाचन क्षेत्रों में 1.5 लाख मतदाता सिर्फ 1200-1300 घरों में क्लस्टर किए गए हैं। एक ही पते पर दर्जनों से सैकड़ों नाम हैं, और ज्यादातर लोग वहाँ रहते ही नहीं।

उदाहरण के तौर पर-

  • पूर्णिया के बूथ नंबर 12 में घर नंबर 2 पर 153 मतदाता दर्ज थे, लेकिन वो पता एक मंदिर का था। मंदिर के मालिक चंदन यादव को कोई जानकारी नहीं। एक मतदाता कृष्ण मोहन राय का असली घर नंबर 269 था।
  • कटिहार के बूथ 222 में घर नंबर 82 पर 197 मतदाता, लेकिन वो घर 20 साल से बंद है। पड़ोसी शंभु नाथ झा ने बताया कि मालिक डॉ. ए.के. मिश्रा बेगूसराय चले गए।
  • मधुबन के बूथ 160 में घर नंबर 50 पर 274 मतदाता, लेकिन राजेश मंडल कहते हैं कि सिर्फ उनका परिवार वहाँ रहता है।
  • हरसिद्धि के बूथ 114 में घर नंबर 5 पर 48 मतदाता, लेकिन सिर्फ लालबाबू बिन और उनकी पत्नी रहते हैं।

इन रिपोर्ट्स में बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) के बयान हैं। जैसे, पूर्णिया के BLO चंदन कुमार ने कहा कि वे नाम से काम करते हैं, घर नंबर से नहीं। मधुबन के BLO पतित पवन कुमार ने बताया कि गलतियाँ पुरानी हैं, और वे सुधार के इंतजार में हैं। हरसिद्धि के BLO असगर अली ने कहा कि ऊपर से निर्देश थे कि सिर्फ मृत या स्थानांतरित नाम हटाओ, पता न बदलो।

दावे ये हैं-

  • चुनाव आयोग ने ठीक से घर-घर सत्यापन नहीं किया।
  • मतदाता क्लस्टरिंग अनियमितता है, जो सामाजिक संरचना से मेल नहीं खाती (जैसे एक घर में हिंदू-मुस्लिम मिलकर दर्ज)।
  • कई नाम अपरिचित हैं, और पते गलत या गैर-मौजूद।
  • इससे बिहार चुनाव की निष्पक्षता खतरे में है।

दोनों ने चुनाव आयोग से सवाल पूछे, लेकिन जवाब न मिलने का कहा। रिपोर्ट्स में फोटो भी हैं, जैसे बंद घरों की तस्वीरें।

अब आते हैं मुख्य बिंदु पर। बिहार चुनाव आयोग ने इन रिपोर्ट्स को सीधे भ्रामक बताया। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने X पर पोस्ट किया और आधिकारिक पड़ताल जारी की। उन्होंने पाँच मुख्य बिंदुओं में जवाब दिया, जो हर दावे को काटते हैं।

  1. विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का दायरा और प्रक्रिया: बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण अवधि में 7.89 करोड़ मतदाताओं का घर-घर जाकर सत्यापन बूथ लेवल अधिकारियों द्वारा किया गया। दिनांक 01 अगस्त को प्रकाशित Draft सूची के 7.24 करोड़ निर्वाचकों में से 99.11 प्रतिशत निर्वाचकों के दस्तावेज़ पहले ही प्राप्त हो चुके हैं और शेष मामलों में सत्यापन कार्य चल रहा है। अतः यह दावा कि “विशेष गहन पुनरीक्षण में घर-घर सत्यापन नहीं हुआ” तथ्यों से परे एवं मनगढ़ंत है।
  2. मतदाता क्लस्टरिंग (Voter Clustering) का दावा गलत: बिहार के ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में एक ही मकान संख्या / एक ही खाता (Khata Number) / टोला / मोहल्ला के अंतर्गत समान पते पर कई परिवार रहते हैं।राजस्व अभिलेखों में भूमि या मकान संख्या के अभाव के कारण कभी-कभी “एक ही पते” पर सैकड़ों मतदाता दर्ज दिखाई देते हैं।यह स्थानीय सामाजिक-भौगोलिक वास्तविकता है, न कि किसी प्रकार की गड़बड़ी।
    इसीलिए केवल डेटा देखकर क्लस्टरिंग को “अनियमितता” मानना भ्रामक एवं तथ्यों से परे है।
  3. तथाकथित गलत पते और अपरिचित नाम: कई बार छात्र, प्रवासी मजदूर या किराएदारों के नाम वोटर लिस्ट में दर्ज होते हैं, लेकिन वर्तमान स्थानीय निवासियों को उनकी जानकारी नहीं होती। दावा आपत्ति के दौरान ऐसे मामलों में BLOs द्वारा फॉर्म-7 (Deletion) या पता सुधार हेतु फॉर्म-8 भरने की कार्रवाई की गई है। अतः यह कहना कि “स्थानीय लोगों को निर्वाचकों नामों की जानकारी नहीं” अपने आप में प्रमाणित त्रुटि नहीं है साथ ही ऐसे दावों का कोई भी युक्तिसंगत आधार नहीं है।
  4. निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता : ड्राफ्ट रोल जारी होने के बाद भी सभी राजनीतिक दलों और नागरिकों को ऑनलाइन/ऑफलाइन दावा आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया गया है और यह प्रक्रिया 1 अगस्त से लेकर अभी तक जारी है और आगामी 1 सितंबर 2025 तक चलेगी। इस प्रकार, प्रक्रिया न केवल पारदर्शी है, बल्कि किसी भी नागरिक/राजनीतिक दल द्वारा पाई गई त्रुटि को सुधारने के लिए खुली हुई है।
  5. मीडिया रिपोर्ट की सीमाएँ: Newslaundry की रिपोर्ट केवल कटिहार, पूर्णिया, मधुबन और हरसिद्धि विधानसभा क्षेत्रों में 14 मामलों (जांच अंतर्गत)पर आधारित है, जबकि SIR का दायरा 243 विधानसभा क्षेत्रों के 7.89 करोड़ मतदाताओं तक फैला हुआ रहा है। इतने छोटे आंशिक चयनित मामलों (14 मामले जांच अंतर्गत)के आधार पर पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाना न तो युक्ति-संगत है और न ही वस्तुनिष्ठ

क्यों लगते हैं ये पोर्टल्स प्रोपेगेंडा वाले?

द वायर और न्यूजलॉन्ड्री पर अक्सर वामपंथी झुकाव का आरोप लगता है। उनकी रिपोर्ट्स में सरकार या आयोग जैसी संस्थाओं पर सवाल उठाना आम है। यहाँ भी उन्होंने छोटी कमियों को बड़ा मुद्दा बनाया, बिना पूरा संदर्भ दिए। जैसे क्लस्टरिंग को गड़बड़ी कहा, लेकिन बिहार की ग्रामीण हकीकत को नजरअंदाज किया। इस फैक्ट चेक से साफ है कि दावे भ्रामक हैं। शायद चुनाव से पहले माहौल बिगाड़ने का प्रयास? लेकिन आयोग का जवाब मजबूत है – सबूतों से।

भ्रम फैलाने वाली खबरों से सावधान

चुनाव आयोग का ये फैक्ट चेक बताता है कि द वायर और न्यूजलॉन्ड्री की रिपोर्ट्स भ्रामक हैं। चुनाव आयोग ने हर दावे का खंडन किया और SIR प्रक्रिया पारदर्शी है। बिहार चुनाव निष्पक्ष होंगे, लेकिन ऐसी खबरें भ्रम फैला सकती हैं।

‘देशभर में सबसे ज्यादा शराब MP की महिलाएँ पीती हैं…’ मध्य प्रदेश के कॉन्ग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बताया पियक्कड़ तो बिफर गए CM मोहन यादव: कहा- देश की संस्कृति का अपमान, जनता देगी जवाब

कॉन्ग्रेस के नेता जीतू पटवारी के महिलाओं पर दिए गए विवादित बयान ने इन दिनों हलचल मचाई हुई है। कॉन्ग्रेस ने जिसे मध्य प्रदेश का अध्यक्ष बनाया है, उसी प्रदेश की महिलाओं पर जीतू पटवारी ने अभद्र टिप्पणी की है। कॉन्ग्रेस नेता ने दावा किया कि देशभर में सबसे ज्यादा शराब मध्य प्रदेश की महिलाएँ पीती हैं।

जीतू पटवारी ने नशा, बेरोजगारी और कुपोषण के मुद्दे को लेकर बीजेपी पर हमला बोला। इस दौरान महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी कर बैठे। उन्होंने दावा किया, “हमे तमगा मिला है कि महिलाएँ पूरे देश में सबसे ज्यादा शराब कहीं पीती हैं तो मध्य प्रदेश में पीती हैं।”

सीएम मोहन यादव ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष से माफी माँगने को कहा

कॉन्ग्रेस नेता के विवादित बयान पर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पलटवार किया। सीएम ने कहा कि पटवारी कि टिप्पणी उनकी संकीर्ण सोच को दिखाती है और यही कॉन्ग्रेस की असल मानसिकता है। सीएम ने कहा कि इसका जवाब जनता जरूर देगी।

सीएम ने यही भी कहा कि कॉन्ग्रेस ने कभी भी महिलाओं का सम्मान नहीं किया है। साथ ही सीएम मोहन यादव ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से माफी माँगने और जीतू पटवारी को पद से हटाने की माँग की है। सीएम ने कहा, “लाडली बहनों को शराबी कहना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह बयान न सिर्फ महिलाओं बल्कि पूरे प्रदेश की संस्कृति के लिए अपमान है।”

प्रधेश के सीएम ने आगे कहा, “कांग्रेस के नेताओं के ऐसे बयान नए नहीं हैं। पहले भी एक नेता ने कहा था कि लाडली बहनों को बोरे में बंद कर देंगे। आज हरतालिका तीज के दिन ऐसा बयान देना और भी शर्मनाक है। हमारी सरकार इस तरह का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगी। जनता कॉन्ग्रेस को इसका पूरा हिसाब चुकाएगी।”

जीतू पटवारी का यह विवादित बयान अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिस पर महिलाएँ उन्हें खूब खरी-खोटी सुना रही हैं।

जब कॉन्ग्रेस MLA ने RSS पर की थी अभ्रद टिप्पणी

यह पहली बार नहीं है जब प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी (PCC) अध्यक्ष जीतू पटवारी विवादित बयान के कारण चर्चा में हों। जीतू पटवारी पर दर्ज FIR के खिलाफ प्रदर्शन करने पहुँचे कॉन्ग्रेस MLA साहब सिंह गुर्जर ने भी RSS पर अभद्र टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था, “जो मर्द थे वे जंग में गए, जो हि@$ थे वे संघ में गए।

कॉन्ग्रेस MLA के इस विवादित बयान पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तारी तर की घोषणा कर दी थी। तब भी जीतू पटवारी ने कॉन्ग्रेस MLA के बयान का विरोध नहीं किया बल्कि मामले पर चुप्पी साध ली थी।

अलीगढ़ में रजबहे पर अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए चला योगी का बुलडोजर, मस्जिद-मदरसे की सीढ़ियाँ तोड़ीं: विरोध के बावजूद हुई कार्रवाई, अब खेतों को मिलेगा पानी

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ शहर में मुसलमानों की बस्ती के लोगों ने एक रजबहे के ऊपर अवैध रूप से कहीं मकान, कहीं दुकान बनाकर, कहीं मस्जिद व मदरसे की सीढ़ियाँ बनाकर तो कहीं चाय, बिरयानी की रेहड़ी लगाकर उसे पूरी तरह से बँद कर दिया। समाजवादी पार्टी के राज में शुरू हुए रजबहे पर अतिक्रमण के खिलाफ एएमयू के पूर्व छात्र ने जब डीएम से लेकर सीए योगी तक शिकायत की तो विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया।

इसके बाद हुई बुलडोजर की कार्रवाई का मुसलमानों ने विरोध किया। हालाँकि पुलिस ने कायदे से लोगों को बुलडोजर कार्रवाई के फायदे बताते हुए शाँत कर दिया और फिर बुलडोजर की कार्रवाई को जारी रखा। सोमवार दोपहर करीब 12 बजे हल्की फुल्की बारिश के बीच सिंचाई विभाग की टीम तीन बुलडोजर लेकर पुलिस फोर्स के साथ महेशपुर फाटक पहुँच गई। बुलडोजर देख कब्जेधारियों में अफरा-तफरी मच गई। पूर्व में की गई निशानदेही के आधार पर बुलडोजर से अतिक्रमण को हटाया जाने लगा।

इस बीच भीड़ हँगामा करने लगी माहौल बिगड़ते देख पुलिस ने सख्ती से काम लिया और कुछ लोगों को कायदे से समझाते हुए शाँत कर दिया। इसके बाद करीब पाँच घंटे तक चले तीन बुलडोजर ने अधिकांश अतिक्रमण को हटा दिया गया। वहीं शेष कुछ पक्के मकान वाले कब्जेधारियों को अधिकारियों ने स्वयं कब्जा हटाने के लिए 10 दिन का समय दिया है।

अलीगढ निवासी एएमयू के पूर्व छात्र व भाजपा नेता डॉ. निशित शर्मा ने बताया कि गंग नहर बुलंदशहर से निकलने वाला 45 किलोमीटर का रजबहा अलीगढ़ के भरतुआ गाँव(टेल) तक जाकर सेंगुर नदी में मिलता है। इस रजबहे पर कोल विधानसभा क्षेत्र में महेशपुर फाटक से लेकर कमिश्नरी तक करीब 5 किलोमीटर के हिस्से पर अतिक्रमण है और इसी कारण यह रजबहा आज पूरी तरह से बंद है।

इसके चलते भदेशी, कमालपुर, ओछोड़, रूस्तमपुर, गजनीपुर, गडराना, भरतुआ आदि करीब 20 से अधिक गाँव के किसानों की फसल की सिंचाई रजबहे में आने वाले गँग नहर के पानी से नहीं हो पाती थी। डॉ. शर्मा का दावा है कि करीब 15 वर्ष पहले तक इस रजबहे से किसान अपनी फसलों की सिंचाई करते थे और इसमें नहाते भी थे।

सपा के शासनकाल में हुआ सबसे अधिक अतिक्रमण

डॉ. निशित शर्मा ने बताया कि कोल रजबहे पर पिछले करीब 15 वर्षों से कब्जा है। शर्मा का दावा है कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में तत्कालीन कोल विधायक हाजी जमीरउल्लाह की सह पर मुस्लिम समाज के लोगों ने धीरे-धीरे महेशपुर फाटक के पास रजबहे पर अतिक्रमण शुरू कर दिया था। विधायक की सह पर पहले अस्थाई और फिर स्थाई दुकानें व मकान बनाकर जीवनगढ़ की पुलिया तक अतिक्रण कर लिया गया।

यहाँ तक कि इस पाँच किलोमीटर के हिस्से में मौजूद मस्जिद, मदरसे व दरगाह की सीढ़ियाँ भी रजबहे को बँद करके बना ली गईं। इतना ही नहीं तत्कालीन विधायक हाजी जमीरउल्लाह ने विधायक निधि से एक स्वागत द्वार एएमयू सँस्थापक सर सैयद अहमद खाँ के नाम से जीवनगढ़ की पुलिया पर और दूसरा स्वागत द्वार कैप्टन अब्बास अली के नाम से द्धौर्रा माफी की पुलिया पर बनवाया गया।

डॉ. निशित ने पिछले वर्ष डीएम से की थी शिकायत

डॉ. निशित शर्मा को स्थानीय लोगों द्वारा रजबहे पर अतिक्रमण की जानकारी मिली तो उन्होंने सबसे पहले सिंचाई विभाग के द्वारा आरटीआई के माध्यम से रजबहे का नक्शा निकलवाया और फिर पूरी जानकारी जुटाने के बाद निशित शर्मा ने पिछले वर्ष अलीगढ़ जिलाधिकारी से लिखित में शिकायत करके अतिक्रमण को हटाए जाने की माँग की। इस पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने एक कमेटी गठित कर जांच के आदेश दिए।

इसके बाद डॉ. निशित शर्मा ने पीड़ित किसानों के बीच जाकर गाँव-गाँव पँचायतें की और किसानों को जागरुक करके अपने साथ जोड़ा। इस बीच योगी सरकार में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को पत्र लिखकर रजबहे से अतिक्रण हटाए जाने की माँग की। इस पर फिर से डीएम संजीव रंजन ने एक जाँच कमेटी बनाई। जिसमें एडीएम वित्त प्रमोद कुमार ने विशेष भूमिका निभाते हुए विभागीय अधिकारियों के हाथों सभी कब्जेधारियों को नोटिस थमा दिए और लिखित चेतावनी देते हुए रजबहे से कब्जा हटाने के लिए 20 दिन का समय दे दिया।

इस बीच भाजपा नेता डॉ. निशित शर्मा 22 अगस्त को लखनऊ में सीएम योगी आदित्यनाथ से उनके आवास पर मुलाकात की। इस दौरान डॉ. शर्मा ने कोल रजबहे पर अतिक्रमण के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। इस मुलाकात का असर इतना तेजी से हुआ कि मुलाकात के चौथे दिन ही अतिक्रमण पर बुलडोजर की कार्रवाई शुरू हो गई। हालाँकि पूरा अतिक्रमण हटना अभी बाकी है।

एएमयू के पूर्व छात्र नेता और मौजूदा समय में बीजेपी से जुड़े डॉ. निशित शर्मा ने सरकार और प्रशासन को धन्यवाद दिया। निशित ने कहा, “मेरी शिकायत का संज्ञान लेकर अतिक्रमण की कार्रवाई करने के लिए जिलाधिकारी महोदय का धन्यवाद। ये किसानों के हित की, सामाजिक न्याय की और जल संरक्षण के साथ धार्मिक अतिक्रमण के खिलाफ एक अहम लड़ाई है। यह लड़ाई जब तक जारी रहेगी तब तक कि टेल तक किसानों को पानी नहीं मिल जाता। मुझे योगी सरकार पर पूरा भरोसा है कि वह रजबहे को अतिक्रमण मुक्त कराकर किसानों को न्याय दिलाएगी।”

गौरतलब है कि डॉ. निशित शर्मा की शिकायत के बाद सिंचाई विभाग ने तीन बुलडोजरों के साथ तोड़फोड़ और अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की थी। जिसका भीड़ ने विरोध भी किया, लेकिन पुलिस ने समझाकर शांति बनाए रखी।

मृत, डुप्लीकेट, घुसपैठियों को वोटर लिस्ट से बाहर करो: ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट में बिहार की पब्लिक ने जो कहा, चुनाव आयोग ने अब जनता से वही 5 सवाल पूछे

बिहार में मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा (SIR) पर INDI गठबंधन की नौटंकी के बीच चुनाव आयोग ने हर नागरिक से 5 सवाल पूछे हैं। ये वही सवाल हैं जिस तरह के स्वर ऑपइंडिया को बिहार में अपनी ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान सुनने को मिले।

बिहार के लोगों ने राहुल गाँधी और तेजस्वी यादव के ‘वोट चोरी’ कैंपेन को नकारते हुए कहा है कि वोटर लिस्ट से मृत, डुप्लीकेट और बांग्लादेश से आए लोगों को बाहर किया जाना चाहिए। ऑपइंडिया के संवाददाता ने इनलोगों से भागलपुर, पूर्णिया, कटिहार और अररिया के उन्हीं इलाकों में बात की, जहाँ से राहुल गाँधी अपनी ‘वोटर अधिकार यात्रा’ लेकर गुजरे हैं।

मतदाता सूची शुद्धिकरण के लिए सहयोग माँगते हुए चुनाव आयोग ने जो सवाल पूछे हैं, वे हैं;

  1. क्या मतदाता सूची की गहन जाँच होनी चाहिए या नहीं?
  2. क्या दिवंगत लोगों के नाम हटाए जाने चाहिए या नहीं?
  3. अगर किसी का नाम मतदाता सूची में दो या अधिक स्थानों पर है तो क्या उसे केवल एक ही स्थान पर रखा जाना चाहिए या नहीं?
  4. क्या उन लोगों के नाम हटाए जाने चाहिए, जो दूसरी जगह चले गए हैं?
  5. क्या विदेशियों के नाम हटाए जाने चाहिए या नहीं?

जनता ने भी ‘वोट चोरी’ को नकारा, कॉन्ग्रेस पर लगाए आरोप

बिहार की जनता से जब वोटर लिस्ट में नाम जोड़े जाने का सवाल किया तो हर किसी ने कहा कि उनका नाम जुड़ चुका है। जनता ने बताया कि ऑनलाइन वोट जुड़वा रहे हैं और BLO भी खुद घर पर आकर वोटर लिस्ट में नाम जुड़वा रहे हैं। भागलपुर जिला, जहाँ के लोगों का मुद्दा विकास है, उन लोगों पर ‘वोट चोरी’ का मुद्दा थोपा जा रहा है। कटिहार के लोगों में राहुल गाँधी और तेजस्वी यादव के लिए गुस्सा दिखा।

पूर्णिया के विपिन कहते हैं, “मैंने अपने बेटा-बेटी का ऑनलाइन ही वोटर लिस्ट में नाम जोड़ दिया।” वोट काटे जाने पर उन्होंने कहा, “मरे हुए लोगों का नाम तो कटेगा ही। अगर नाम रहेगा तो कोई भी उसका आधार कार्ड लेकर वोट डाल देगा।”

भागलपुर में चाय की टपरी लगाने वाले राकेश रंजन कहते हैं, “आप (कॉन्ग्रेस) कर्नाटक जीत गए, तेलंगाना जीत गए, तब चुनाव आयोग खराब नहीं था। तब आयोग स्वच्छता से काम कर रहा था। अब बिहार में ऐसा क्या हुआ जो मतगणना चोरी हो रही है। तुम जहाँ जीतते हो वहाँ वोट सही होते हैं और जहाँ हार जाते हो वोट चोरी हो जाती है। बिहार की जनता अंधी नहीं है। नीतीश-मोदी की सरकार अच्छी है।”

भागलपुर में ही जीरो माइल निवासी मिधुरंजन कहते हैं, “इससे पहले भी वोट चोरी करवाने वाले यही (कॉन्ग्रेस) होते थे। पेटी से पेटी नदी में बहा दी जाती थी। एक पंचायत में एक वोटर 10 बार वोट डालते थे। अब मोदी सरकार के बाद EVM से वोट चोरी बंद हुई है। अब काफी कुछ बदला है। SIR अच्छी प्रक्रिया है, हर जगह होनी चाहिए।”

वे आगे कहते हैं, “BLO घर-घर घूमकर वोट में करेक्शन करवा रहे हैं। आंगनबाड़ी की सेविकाएँ पूरा दिन काम करती हैं। कहीं वोट चोरी नहीं हो रही है। तेजस्वी यादव गोद में पले हुए लोग हैं। गरीब लोगों की पीड़ा नहीं समझ सकते। हमने नीतीश सरकार में बिहार को बदलते देखा है।”

कटिहार जिले के कुमड़ी प्रखंड निवासी भीम कुमार शाह बताते हैं, “राहुल गाँधी की वोट अधिकार यात्रा की वजह से चाय की दुकान तोड़ दी गई। मैंने राहुल गाँधी को काला झंडा दिखाया है। राहुल गाँधी ने गरीबों का नुकसान किया है। तेजस्वी यादव जीवन में कभी मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे। जिसका बाप चारा घोटाला करता है वो मुख्यमंत्री कैसे बनेगा।”

शाह आगे कहते हैं, “मोदी 5 किलो राशन दे रहा है। हिंदू राष्ट्र के लिए अच्छा काम कर रहा है। पहले मृतक व्यक्ति का भी वोट हुआ करता था। मैं पूर्व वार्ड सदस्य हूँ, मेरे समय में भी ऐसा होता था। मैंने इसकी शिकायत करने के लिए अमित शाह को चिट्ठी लिखी थी।”

जब ‘वोटर अधिकार यात्रा’ में पहुँचे कार्यकर्ता तक नहीं दे सके हिसाब

राहुल गाँधी और तेजस्वी यादव की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ में शामिल होने कार्यकर्ता जब आए तो उन्होंने कहा कि हमारा नाम तो है लेकिन बाकी का नहीं है। यहाँ बाकी क्या है ये किसी को नहीं मालूम। रैली में पहुँचे बूढ़े आदमी जो ठीक से सुन भी नहीं सकते वे कहते हैं कि राशन 5 किलो मिलता है लेकिन मोदी-नीतीश गरीबों को परेशान कर रहा है।

हाथ में RJD का झंडा लिए इस्लामुद्दीन कहते हैं, “मेरा नाम जुड़ा हुआ है लेकिन हजारों आदमी का नाम कट गया है।” जब उनसे पूछा कि कितने लोगों का कटा और वो कौन हैं तो वह बता नहीं सके। उन्ही के पास में खड़े शहजाद आलम को तो ‘वोट चोरी’ के बारे में कुछ मालूम ही नहीं। शहजाद ने कहा, “परिवर्तन और विकास के लिए यात्रा में आए हैं। वोट चोरी के बारे में कुछ नहीं जानते।”

उधर विक्टर यादव जो राहुल गाँधी का नाम भी सही से ना ले सके उन्होंने आरोप लगाया कि BLO गड़बड़ी कर रहा है। लेकिन उनका भी कहना वही सेम- ‘मेरा नाम जुड़ गया है।’ पास में खड़े एक व्यक्ति बोलते हैं कि लालू यादव के नाम पर झंडा लेकर आए हैं। वे इस उम्मीद में बैठे हैं कि जब तेजस्वी सरकार आएगी तो उनकी सुनेगी।

कुछ तो रैली में ऐसे भी लोग पहुँचे जिन्हें पता तक नहीं कि आखिर किस मुद्दे पर रैली की जा रही है। ऐसे ही व्यक्ति विपिन सैनी बोलते हैं, “अगली पार्टी ने जाने के लिए बोला तो हम चले गए। हमें नहीं पता वोट चोरी क्या है।”

हैरानी तो तब हुई जब वोटर अधिकार यात्रा में पहुँचे एक व्यक्ति ने बताया कि वे ‘मोदी सपोर्टर’ हैं। रैली पर ही सवाल उठाते हुए बोले- “वोट चोरी कहीं नहीं होती है। जहाँ हुई है उसका हिसाब दो। चुनाव आयोग जब सच बता रहा है तो वोट चोरी के आरोपों का क्या मतलब है।”

बिहार की डबल इंजन सरकार से खुश दिखी महिलाएँ

जब महिलाओं से ‘वोट चोरी’ के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “जो चोर है, वहीं तो चोरी की बात करेगा।” महिलाओं ने बिहार की डबल इंजन सरकार से खुशी जताई। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार गरीबों के मसीहा हैं।

कटिहार की नित्या देवी कहती हैं, “हमारा नाम जुड़ गया है, कोई दिक्कत नहीं हुआ। जिसका मन में हर%$ है तो वो बोलता है। मोदी-नीतीश हमको सब देता है। पेंशन बढ़ा दिया। 400 से 1100 कर दी पेंशन। मोदी-नीतीश ने महिलाओं के लिए काम किया है।”

माला देवी कहती हैं, “जो चोर है वही तो चोरी की बात करेगा। राहुल गाँधी वोट खिलाफ करना चाहते हैं। मोदी-नीतीश सरकार विकास के लिए काम करते हैं। राशन-पानी देते हैं। फ्री में गैस, बिजली दी है।”

हलदरपुर निवासी झुगिया देवी कहती हैं, “BLO ने घर पर आकर वोटर लिस्ट में नाम जोड़ा है। मोदी-नीतीश अच्छे से काम कर रहे हैं। आने वाले चुनाव में उन्हें ही वोट देंगे।”

अररिया निवासी महिला कहती हैं, “राशन, बिजली, गैस सिलंडर मिल रहा मोदी-नीतीश सरकार में। वोटर लिस्ट में नाम जुड़ने में भी कोई दिक्कत नहीं हुई। मोदी-नीतीश वोट चोर नहीं है।”

बांग्लादेशी घुसपैठियों ने छीना अधिकार

बिहार के सीमावर्ती जिले भागलपुर, पूर्णिया में लोगों का मुद्दा बांग्लादेशी घुसपैठ है। लगातार घुसपैठिए सीमावर्ती जिलों में आकर बस रहे हैं। लोग बताते हैं कि इसके कारण उनका अधिकार छीना जा रहा है।

भागलपुर के मिधुरंजन बताते हैं, “हमारी परेशानी बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं, वोट चोरी का मुद्दा बताकर बरगलाया जा रहा है। घुसपैठिए कटिहार-पूर्णिया होते हुए भागलपुर फिर दिल्ली में बसते हैं। इनका (तेजस्वी यादव और राहुल गाँधी) का मुद्दा होना चाहिए कि घुसपैठियों को कैसे रोके।”

कटिहार के रहने वाले एक व्यक्ति कहते हैं, “जो बाहर से आकर बस गए हैं वो यहाँ के लोगों का अधिकार छीन रहे हैं। SIR से उन्हें छाँट लिया जाएगा। बंगाल से आकर बांग्लादेशी बस गए। मोदी-नीतीश जबसे आए हैं तब से सुधार हुआ है। सुरक्षा व्यवस्था बेहतर हुई है। डुप्लीकेट वोटर का तो नाम छटना चाहिए। दोगुना पैसा देकर बांग्लादेशियों ने घर बना लिया। हमारी 2000 की दिहाड़ी को उन्होंने 10 हजार में छीन लिया।”

भीम कुमार शाह कहते हैं, “बाहर से आने वाले लोग पूरा राशन खा रहे हैं। हमारे हिस्से के अधिकार इन लोगों को मिल रहे हैं। हमारी जमीनों पर घर बसाकर कमा-खा रहे हैं। बांग्लादेशी की संख्या ज्यादा हो गई है।”

बिहार की जनता ने एक बात तो साफ कर दी कि जो शायद तेजस्वी यादव और राहुल गाँधी ना समझ पाए कि जनता बेवकूफ नहीं है। जनता को ‘वोट चोरी’ का मुद्दा देकर विकास और बाकी मुद्दों को दबाया नहीं जा सकता है। जनता 20 साल पहले चलने वाले गुंडाराज को भी नहीं भूली, जिसे मोदी-नीतीश की डबल इंजन सरकार ने खत्म किया है। बिहार के लोगों को SIR के नाम पर विपक्ष अब बरगलाना बंद करे।

क्या देवी की पूजा में है बानू मुश्ताक को आस्था? दशहरा पर मुख्य आयोजन के उद्घाटन का कर्नाटक सरकार ने दिया न्यौता: लोग बोले- बंद हो हिंदू आस्था से खिलवाड़, ये धार्मिक अनुष्ठान- सरकारी कार्यक्रम नहीं

मैसूर का विश्व प्रसिद्ध दशहरा, जिसे सदियों से एक पवित्र धार्मिक अनुष्ठान के रूप में मनाया जाता रहा है, इस बार राजनीति के विवाद में उलझ गया है। कर्नाटक सरकार ने दशहरा महोत्सव 2025 के उद्घाटन के लिए बुकर पुरस्कार विजेता लेखिका बानू मुश्ताक को आमंत्रित किया है। इस फैसले ने राज्य में सियासी तूफान ला दिया है। मुद्दा सिर्फ इतना नहीं कि बानू मुश्ताक मुस्लिम हैं- असली सवाल यह है कि क्या कोई ऐसी महिला, जिसकी हिंदू देवी-देवताओं में आस्था तक नहीं है, दशहरे जैसे गंभीर धार्मिक अनुष्ठान का नेतृत्व कर सकती है?

बीजेपी ने इस पर सख्त ऐतराज जताते हुए कहा है कि दशहरा कोई ‘सरकारी’ बटन-दबाने का समारोह नहीं, बल्कि एक गहरी धार्मिक परंपरा है। हर वर्ष देवी चामुंडेश्वरी की पूजा के साथ इसकी शुरुआत होती है और इसे शुरू करने वाले को पूरे मन से भक्त होना जरूरी माना जाता है। ऐसे में बानू मुश्ताक को इस आयोजन की शुरुआत करने देना हिंदू आस्था का सीधा अपमान नहीं तो और क्या है?

क्या है विवाद की जड़?

दशहरा हिंदुओं का प्रमुख धार्मिक पर्व है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। मैसूर में इसका विशेष महत्व है, जहाँ चामुंडी पहाड़ियों पर देवी चामुंडेश्वरी की पूजा के साथ उत्सव की शुरुआत होती है। इस परंपरा में दशकों से देवी की पहली पूजा कोई श्रद्धालु अतिथि करता रहा है। टीपू सुल्तान की सोच रखने वाले मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने धर्म का अपमान करके बानू मुश्ताक को बतौर मुख्य अतिथि बुलाने की घोषणा कर रहे, जिसका विवाद बीजेपी कर रही है।

बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह परंपरा मैसूर के राजाओं ने शुरू की थी और यह पूरी तरह से देवी चामुंडेश्वरी के प्रति भक्ति से जुड़ी है। केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने सीधे तौर पर कहा है कि यह एक पवित्र त्योहार है, न कि कोई सांस्कृतिक उत्सव और इसे तुष्टिकरण की राजनीति का मंच नहीं बनाया जा सकता।

वहीं, बीजेपी के पूर्व सांसद प्रताप सिम्हा ने सवाल उठाया, “हम बानू मुश्ताक की साहित्यिक उपलब्धियों का सम्मान करते हैं, लेकिन क्या वह देवी चामुंडी में विश्वास करती हैं? क्या उन्होंने कभी हमारे रीति-रिवाजों का पालन किया है? अगर नहीं, तो उन्हें क्यों आमंत्रित किया गया?” सवाल का सीधा मतलब यह है कि अगर यह एक धार्मिक कार्यक्रम है तो इसका उद्घाटन वही व्यक्ति क्यों करे, जिसकी उस धर्म में आस्था ना हो? बीजेपी का मानना है कि यह केवल राजनीतिक लाभ के लिए उठाया गया कदम है, जिसका धार्मिक परंपराओं से कोई लेना-देना नहीं है।

सरकार कहती है सबके लिए है दशहरा- लेकिन क्या पूजा भी ‘सब’ के लिए है?

वहीं, कर्नाटक सरकार ने अपने फैसले का बचाव किया। गृह मंत्री परमेश्वर ने कहा कि मैसूर दशहरा एक ‘राजकीय उत्सव’ है और इसे सिर्फ धर्म के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अतीत में भी अन्य मजहबी लोगों, जैसे निसार अहमद और मिर्ज़ा इस्माइल ने इस उत्सव में भाग लिया है। उनका तर्क है कि यह सभी के लिए एक उत्सव है और इसमें धर्म को मिलाना सही नहीं है। कॉन्ग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने भी बानू मुश्ताक के आमंत्रण का समर्थन करते हुए कहा कि यह उनकी साहित्यिक उपलब्धियों के सम्मान में किया गया है और इसे उनकी धार्मिक पृष्ठभूमि से नहीं जोड़ना चाहिए।

सरकार का दावा है कि दशहरा सबका उत्सव है। मंत्री एचके पाटिल ने कहा, “दशहरा सभी के लिए है, इसमें किसी को राजनीति नहीं करनी चाहिए।” लेकिन सवाल यही है- क्या पूजा करने का हक भी उस व्यक्ति को दिया जा सकता है, जो उस पूजा में विश्वास ही नहीं रखता?

अगर ऐसा है, तो क्या मुस्लिम मस्जिदों के उद्घाटन में किसी हिंदू संन्यासी को बुलाया जाएगा? क्या कोई नास्तिक हज का नेतृत्व करेगा? यदि नहीं- तो फिर हिंदू पर्वों को क्यों इस तरह के प्रयोगों का अखाड़ा बनाया जा रहा है?

क्या है मैसूर दशहरा की परंपरा?

मैसूर का दशहरा उत्सव कोई साधारण कार्यक्रम नहीं है, यह एक धार्मिक अनुष्ठान है जो सदियों से चला आ रहा है। यह विजयादशमी के दिन चामुंडी पहाड़ियों में देवी चामुंडेश्वरी की पूजा के साथ शुरू होता है। इस दौरान, भव्य जुलूस निकाला जाता है, जिसे ‘जंबू सवारी’ कहते हैं। इस जुलूस में सजे-धजे हाथी देवी चामुंडेश्वरी की मूर्ति को लेकर चलते हैं। यह उत्सव पूरी तरह से भक्ति और आस्था का प्रतीक है, जिसमें हर अनुष्ठान शास्त्रों के अनुसार किया जाता है।

बीजेपी का मूल सवाल यही है कि क्या एक धार्मिक कार्यक्रम का उद्घाटन ऐसा व्यक्ति कर सकता है, जिसकी उस धर्म में आस्था न हो? यह सवाल राजनीतिक भले ही लगे, लेकिन यह करोड़ों भक्तों की भावनाओं से जुड़ा है जो इस उत्सव को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक पवित्र अनुष्ठान मानते हैं। जिस प्रकार इस्लाम में मूर्ति पूजा वर्जित है। उसी प्रकार हिंदू उत्सव में किसी मुस्लिम से उद्घाटन करवाना भी एक तरह से गलत है। जो लोग हिंदुओं का विरोध करते हैं, उन्हें माता चामुंडेश्वरी की पूजा क्यों करनी चाहिए?

HC ने गायों की हत्या के लिए ले जाने वाले आसिफ की जमानत याचिका की खारिज, कहा- गोहत्या से शांति भंग होती है: जीवित प्राणियों के प्रति करुणा प्रत्येक नागरिक का दायित्व

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने गायों की हत्या के लिए राजस्थान ले जाने वाले आरोपित आसिफ की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि गाय भारत में पूजनीय है और गोहत्या जैसे कृत्य बड़ी आबादी की आस्था को ठेस पहुँचाते हैं, जिससे सार्वजनिक शांति को खतरा होता है।

रिपोर्ट के अनुसार, आसिफ पर हरियाणा पुलिस ने अप्रैल 2025 में गोवंश संरक्षण अधिनियम और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। उसके साथ दो अन्य लोग भी थे। इन पर गायों की हत्या के लिए राजस्थान ले जाने के आरोप में इसी साल अप्रैल में हरियाणा गोवंश संरक्षण एवं गोसंवर्धन अधिनियम, 2015 तथा क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत मामला दर्ज किया गया था। 

इस पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा है, “संविधान केवल अमूर्त अधिकारों की रक्षा नहीं करता बल्कि एक न्यायपूर्ण, करुणामय और एकजुट समाज के निर्माण का प्रयास भी करता है।”

हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

हाईकोर्ट ने कहा है कि गाय भारत की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। संविधान का अनुच्छेद 51(ए)(जी) सभी नागरिकों को जीव-जंतुओं के प्रति करुणा का भाव रखने को बाध्य करता है।

जाँच में कोर्ट ने पाया कि आसिफ ने पहले जमानत का दुरुपयोग किया और बार-बार गोहत्या जैसे अपराधों में शामिल रहा। कोर्ट ने कहा, “रिकॉर्ड पर रखी गई सामग्री से यह स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता ने पहली बार अपराध नहीं किया है। उस पर पहले भी इसी प्रकार के अपराधों से शामिल होने के आरोप वाली तीन अन्य प्राथमिकियाँ हैं।”

जिसके बाद कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जमानत देने से आसिफ जाँच में हस्तक्षेप या साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है। कोर्ट के अनुसार, व्यक्तिगत स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है लेकिन बार-बार अपराध की प्रवृत्ति दिखाने वाले व्यक्ति को इसका लाभ नहीं दिया जा सकता है।

कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए कहा, ‘यह कोर्ट इस तथ्य से अनभिज्ञ नहीं रह सकती कि हमारे जैसे बहुलवादी समाज में कुछ कृत्य जो वैसे तो निजी होते हैं लेकिन तब सार्वजनिक शांति पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं जब वे किसी बड़ी आबादी वाले समूह की गहरी आस्थाओं को ठेस पहुँचाते हैं।’

आदेश में कहा गया है, “भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51ए(जी) के तहत प्रत्येक नागरिक पर यह दायित्व है कि वह सभी जीवित प्राणियों के प्रति करुणा दिखाए। इसी संदर्भ में, गोहत्या का कथित कार्य जिसे बार-बार, जानबूझकर और उकसावे की नीयत से अंजाम दिया गया, संवैधानिक नैतिकता और सामाजिक व्यवस्था की मूल भावना पर प्रहार करता है।”

बता दें कि हरियाणा पुलिस के अनुसार नूंह के रहने वाले आसिफ पर आरोप है कि वह दो गायों को हरियाणा से राजस्थान ले जाकर उनकी हत्या करने की योजना बना रहा था। यह अमानवीय कार्य हरियाणा गोवंश संरक्षण एवं गो संवर्धन अधिनियम, 2015 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 का उल्लंघन है।

पुलिस ने बताया कि आसिफ का आपराधिक इतिहास रहा है और उसके खिलाफ पहले भी गोहत्या से संबंधित तीन FIR दर्ज हो चुकी हैं। हालाँकि इसमें उसे जमानत दे दी गई थी, लेकिन इस बार कोर्ट ने ऐसा करने से साफ इंकार कर दिया है।

नाबालिग से रेप, जमीन पर कब्जा और मदरसे से धर्मांतरण नेटवर्क… छांगुर पीर गैंग का फरीदाबाद-बरेली-बलरामपुर कनेक्शन खुला: ‘मास्टरमाइंड’ अब्दुल मजीद के साथ सलमान, आरिफ और फहीम भी अरेस्ट

धर्मांतरण के मास्टरमाइंड जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर के नेटवर्क का जाल अब और भी गहरा होता जा रहा है। उनके पुराने मामलों के साथ ही, अब नए और चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। यह नेटवर्क सिर्फ जबरन धर्मांतरण ही नहीं, बल्कि शोषण, ब्लैकमेलिंग और यहाँ तक कि गायब करने जैसे गंभीर अपराधों में भी शामिल है। हाल ही में, फरीदाबाद में एक नाबालिग लड़की के साथ दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है, जबकि बलरामपुर में एक परिवार पर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने का आरोप है। वहीं, बरेली में पुलिस ने एक ऐसे ही नए गिरोह को पकड़ा है, जो पूरे देश में धर्मांतरण करा रहा था और जिसका सरगना एक मदरसा संचालक है।

फरीदाबाद में नाबालिग लड़की से रेप

फरीदाबाद में एक नाबालिग लड़की ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि वह छांगुर पीर गैंग के प्रेम जाल में फँस गई थी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस पूछताछ में पीड़ित लड़की ने बताया कि उसकी पहचान एक कॉलोनी में रहने वाली नेहा से हुई, जिसने उसे अपने भाई आमिर हुसैन से मिलवाया था। ये लोग उसे दिल्ली की निजामुद्दीन दरगाह पर ले गए थे, जहाँ उसकी मुलाकात सीधे छांगुर पीर से हुई।

छांगुर पीर ने लड़की को धर्म बदलने और निकाह करने के लिए कहा। बाद में, आमिर अपनी भाभी सबीना के घर पर ले गया, जहाँ उसके साथ जबरदस्ती गलत काम करने लगा, इसका वीडियो उसकी बहन नेहा ने रिकॉर्ड किया और फिर दोनों मिलकर नाबालिग को ब्लैकमेल करने लगे। वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर आमिर ने कई बार रेप किया।

पीड़िता ने बताया कि दिल्ली वाले घर में जब कोई नहीं होता, तब आमिर का अब्बू अबरार घर में घुसकर छेड़छाड़ करता है और प्राइवेट पार्ट को छूने की कोशिश करता है। विरोध करने पर मारपीट करता है। पुलिस ने इस मामले में पहले ही आमिर और नेहा को गिरफ्तार कर लिया था। अब पुलिस ने आमिर के 56 साल के अब्बू अबरार को भी दिल्ली से गिरफ्तार किया है, जिस पर नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप है।

बलरामपुर: पति गायब, जमीन पर कब्जा

‘छांगुर पीर’ के नेटवर्क का एक और डरावना चेहरा बलरामपुर में सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, शीला देवी नाम की एक महिला ने आरोप लगाया है कि उनके पति राजेंद्र कुमार को 2013 से गायब कर दिया गया है। महिला का आरोप है कि छांगुर गैंग के लोग उनके पति पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बना रहे थे। जब परिवार ने मना किया तो दबंगों ने उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया।

शीला देवी का कहना है कि आरोपित लगातार उन्हें धमका रहे हैं कि अगर वे धर्म नहीं बदलेंगी तो उनकी जमीन नहीं छोड़ी जाएगी। इस मामले में विशेष जाँच बल (STF) ने संज्ञान लिया है और जाँच शुरू कर दी है।

बरेली में पकड़ा गया नया धर्मांतरण गैंग

छांगुर गैंग की सक्रियता को देखते हुए बरेली पुलिस भी सतर्क हो गई थी, जिसकी वजह से एक और धर्मांतरण गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। जानकारी के अनुसार, इस गिरोह का सरगना अब्दुल मजीद है, जो एक मदरसा चलाता है। पुलिस ने उसके साथ सलमान, आरिफ और फहीम को भी गिरफ्तार किया है। यह गिरोह लोगों का ब्रेनवाश कर उनका धर्मांतरण कराता था। उन्होंने बरेली में एक पूरे परिवार को निशाना बनाया। बृजपाल नाम के एक व्यक्ति का ब्रेनवाश करके उसकी शादी एक मुस्लिम लड़की से कराई गई, फिर उसकी बहन का निकाह कराया गया और अंत में मजबूर होकर उनकी माँ ने भी धर्म बदल लिया।

पुलिस को शक है कि इस गिरोह को विदेश से फंडिंग मिल रही थी। सरगना अब्दुल मजीद के खाते में पिछले आठ महीनों में लगभग ₹13 लाख के 2,000 से ज्यादा लेनदेन हुए हैं। साथ ही, उसके सदस्यों के पास भी कई बैंक खाते पाए गए हैं, जिनकी जाँच जारी है।

छांगुर पीर का अबतक का काला-चिट्ठा

जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर यूपी बलरामपुर में अवैध धर्मांतरण का नेटवर्क चलाने वाला गिरोह सरगना है, जो गरीबों, दलितों और महिलाओं को प्रेमजाल, लालच व धमकी के जरिए इस्लाम कबूल करवाता था। छांगुर पीर ने 40+ बैंक खातों के जरिए विदेशों से ₹100 करोड़ से ज्यादा की फंडिंग पाई है। सिंधी परिवार समेत कई हिंदुओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें गैंग में शामिल किया और सरकारी जमीन पर अवैध कब्ज़ा कर संपत्ति बनाई। मामले में लखनऊ से उसकी और नीतू रोहरा उर्फ नसरीन की गिरफ्तारी हुई, कोठी पर बुलडोजर चला, पुणे में संपत्ति जब्त हुई। मामले में लगातार ATS, ED, STF जाँच कर रही हैं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे राष्ट्रविरोधी कार्रवाई बताकर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

भारत पर अमेरिका का 50% टैरिफ बुधवार से होगा लागू, रूस से तेल खरीदने के खिलाफ US ने उठाया था कदम: ट्रंप ने पहले लगाया था 25% इंपोर्ट ड्यूटी

अमेरिका ने भारतीय सामानों पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जिससे कुल शुल्क अब 50% हो जाएगा। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की औपचारिक सूचना जारी कर दी गई है। यह टैरिफ 27 अगस्त 2025 की रात 12:01 बजे (ईस्टर्न डेलाइट टाइम) से लागू होगा।

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह अतिरिक्त टैक्स रूस की सरकार से मिलने वाले कथित खतरे के जवाब में लगाया गया है और भारत को उसी वजह से निशाना बनाया गया है।

होमलैंड सुरक्षा विभाग ने अधिसूचना में कहा कि अतिरिक्त कर रूसी संघ की सरकार द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका को दी गई धमकियों की प्रतिक्रिया स्वरूप लगाया गया है और भारत को भी इसी के लिए निशाना बनाया गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 6 अगस्त को कार्यकारी आदेश 14329 (Executive Order 14329) पर हस्ताक्षर कर इस कदम को अधिकृत किया। ऐसा अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा (CBP) के माध्यम से होमलैंड सुरक्षा विभाग द्वारा जारी एक सार्वजनिक नोटिस में बताया गया।

नोटिस के अनुसार, जिन भारतीय सामानों को इस टैरिफ में शामिल किया गया है, उनकी सूची एक परिशिष्ट (Annexure) में दी गई है। 27 अगस्त की समयसीमा के बाद जो भी सामान अमेरिका पहुँचेगा या गोदामों से निकाला जाएगा, उन पर यह नया शुल्क लागू होगा।

ट्रंप ने पहले 25% टैक्स लगाया था लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 50% कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन में युद्ध को ‘फंड’ कर रहा है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर कोई समाधान नहीं निकला, तो वह रूस के साथ व्यापार करने वाले और देशों पर भी सख्त कार्रवाई करेंगे।

उन्होंने खासतौर पर भारत और ‘धनी भारतीय परिवारों’ को निशाना बनाया है, जबकि चीन और यूरोपीय देशों पर ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर जवाब देते हुए कहा था, “किसान, पशुपालक और लघु उद्योग हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं। दबाव बढ़ेगा, लेकिन हम सह लेंगे।”

वहीं विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने भी भारत की ऊर्जा नीति का मजबूती से समर्थन किया और कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हित और रणनीतिक स्वायत्तता के अनुसार फैसले लेता रहेगा। जयशंकर ने यह भी कहा कि अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ को गलत ढंग से ‘तेल विवाद’ के रूप में पेश किया जा रहा है।

उन्होंने यह सवाल उठाया कि चीन और यूरोप जैसे बड़े तेल आयातकों पर अमेरिका ने वैसी सख्ती क्यों नहीं दिखाई जैसी भारत पर की जा रही है। भारत और अमेरिका के रिश्तों में तनाव तब से और बढ़ गया है, जब से ट्रंप ने यह दावा किया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान संघर्षविराम में मध्यस्थता की थी। इसे भारत सरकार ने साफ तौर पर नकार दिया था।