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‘जो 2014 में आए, वो 2024 तक रह पाएँगे’ : शपथ लेने के बाद PM मोदी को घेरने चले नीतीश कुमार, लोग बोल- ‘पलटूराम, प्रधानमंत्री बनने की सोचना भी मत’

बिहार में आठवीं दफा मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद नीतीश कुमार मीडिया से मुखातिब हुए। इस दौरान उन्होंने बताने की कोशिश की कि आखिर क्यों उन्होंने राजद का हाथ थामा। अपनी सफाई के साथ-साथ वह पीएम मोदी को निशाना बनाते भी दिखे। उन्होंने मीडिया को कहा कि 2014 में जो आए, क्या वो 2024 के आगे तक रह पाएँगे या नहीं।

उन्होंने बताया कि वो जब तक भाजपा के साथ थे तो उनकी पार्टी के लोगों को सहीं नहीं लग रहा था। उन्होंने कहा, “हम लोगों के लोगों ने उन्हें समर्थन दिया और उन लोगों ने जदयू को ही हराने की बात कर दी। उनसे पूछिए। हम तो मुख्यमंत्री भी नहीं बनना चाहते थे। पर कहा गया तो रुके। पर, पार्टी के सब लोगों के मन में यही बात थी। इसलिए हम लोग दोबारा वहीं पुरानी जगह चले गए, अब सब ठीक है।”

उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी के बीच फर्क बताते हुए कहा कि उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में प्रेम मिला। उन लोगों को तब माना जाता था, प्रेम मिलता था, वह उसे नहीं भूल सकते। लेकिन इसके बाद जो कुछ भी हुआ वो दल के लोगों को नहीं अच्छा लगा।

पत्रकारों ने जब उनसे 2024 में उनके मिशन को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा, “वह किसी पद के दावेदार नहीं हैं। लेकिन इतना तो कह दीजिए कि 2014 में जो आए वो 2024 के आगे रह पाएँगे या नहीं रह पाएँगे।”

उन्होंने सीएम पद की शपथ लेने के बाद विपक्ष को 2024 के लिए एकजुट होने को कहा है। वह ये नहीं मान रहे हैं कि वह विपक्ष की ओर से पीएम पद के दावेदार होना चाहते हैं। लेकिन उनकी बातों से साफ है कि वह 2024 की तैयारियों में लग गए हैं।

‘पलटूराम’ नीतीश कुमार!

बता दें कि नीतीश कुमार का मीडिया में सामने आया हाव-भाव देखने के बाद कहा जा रहा है कि उन्होंने ये बातें दिल से नहीं कहीं है, वो खुद भी जानते हैं कि उन्होंने गलत किया है और इसीलिए उनकी आवाज ऐसी है और वो खुद को हँसता दिखाकर चीजों को टालना चाहते हैं। नीतीश कुमार के फैसले के बाद लोग उन्हें पलटूराम कह रहे हैं। कहा जा रहा है कि नीतीश में कोई नैतिकता शेष नहीं है। कभी राजद ने उन्हें साँप, धोखेबाज जैसे शब्द कहे थे और आज वह उन्हीं के साथ हैं।

नूपुर शर्मा पर दर्ज सारे FIR दिल्ली ट्रांसफर होंगेः सुप्रीम कोर्ट का आदेश, बंगाल की ‘सबसे ज्यादा डैमेज हमारे यहाँ’ वाली दलील ठुकराई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नूपुर शर्मा के ऊपर सभी राज्यों में दर्ज FIR को दिल्ली में स्थानांतरित किया जाएगा। भविष्य में भी कोई FIR दर्ज होती है तो उसे दिल्ली वाले FIR में ही मिला लिया जाएगा। बंगाल सरकार ने बताया कि पहली FIR नूपुर शर्मा ने ही अज्ञात लोगों के विरुद्ध दर्ज की थी और इसमें वो शिकायतकर्ता हैं। नूपुर शर्मा के वकील ने बताया कि अगली FIR दिल्ली में है, जबकि मेनका गुरुस्वामी ने दावा किया कि पहली FIR महाराष्ट्र में दर्ज की गई थी।

पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा की याचिका पर बुधवार (10 अगस्त, 2022) को फिर से सुनवाई की। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई न करने के लिए पुलिस को निर्देशित किया था। नूपुर शर्मा की माँग है कि उनके ऊपर इस मामले में विभिन्न राज्यों में दर्ज FIR को एक साथ कहीं स्थानांतरित किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने दो जजों ने पहली सुनवाई के दौरान उन पर कड़ी टिप्पणी भी कर डाली थी।

नूपुर शर्मा की तरफ से अधिवक्ता मनिंदर सिंह सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए, वहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से मेनका गुरुस्वामी पेश हुईं। नूपुर शर्मा ने अपने वकील के माध्यम से बताया की अदालत के आदेश के बावजूद पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा उन्हें समन भेजे जा रहे हैं। जस्टिस सूर्यकान्त ने कहा कि हम आरोपों को जाँचने नहीं जा रहे हैं, मोहम्मद जुबैर के मामले में जो निर्णय सुनाया गया, हम उसी पर रहेंगे।

बता दें कि AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को हिन्दुओं की भावनाएँ आहत करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी थी। सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि उसके आदेश के बावजूद 2 नए FIR दर्ज कर लिए गए हैं। नूपुर शर्मा ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण दलील यह है कि उनके जीवन को खतरा है। बंगाल सरकार द्वारा दलील दी गई कि नूपुर शर्मा के बयान का सबसे ज्यादा असर पश्चिम बंगाल में देखने को मिला और आरोपित को खुद के लिए ज्यूरिडिक्शन (न्याय क्षेत्र) चुनने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

बंगाल सरकार ने कहा कि सबसे ज्यादा हंगामा वहीं हुए। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने इसे जाँच का विषय बताया। बंगाल सरकार ने इस पर आपत्ति जताई कि सभी FIR को पश्चिम बंगाल या महाराष्ट्र की जगह दिल्ली क्यों भेजा जा रहा है। जस्टिस सूर्यकान्त ने कहा कि हम आरोप-प्रत्यारोप में न जाकर FIR की बात कर रहे हैं। नूपुर शर्मा की दलील थी कि दिल्ली पुलिस की स्पेशल यूनिट में उन्होंने FIR दर्ज कराई थी, इससे जाँच की दिशा नहीं बदल जाएगी।

बंगाल सरकार ने इस पर भी आपत्ति जताई कि पहली बार जब नूपुर शर्मा की माँग को नकार दिया गया था, उसके बावजूद वो वही प्रार्थना लेकर फिर से सुप्रीम कोर्ट पहुँच गईं। बंगाल सरकार के वकील ने ये कहते हुए जॉइंट SIT की माँग की कि दोनों तरफ के कई नेताओं ने नूपुर शर्मा के बयान का समर्थन किया। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 1 जुलाई के बाद हुई कुछ घटनाओं के बाद उसने फिर से इस पर विचार करने का निर्णय लिया।

बंगाल सरकार ने कहा कि इस मुद्दे ने पूरे देश में आग लगा दी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नूपुर शर्मा के जीवन पर खतरे को देखते हुए वो दोबारा सुनवाई के लिए तैयार हुआ। तब बंगाल सरकार के वकील ने अधिकतम सुरक्षा दिए जाने का वादा किया। लेकिन, जस्टिस सूर्यकान्त ने कहा कि ऐसी स्थिति पैदा न की जाए जहाँ हम, आप और वो सभी तनाव में रहें। इसके बाद बंगाल सरकार कोर्ट के निगरानी वाली SIT पर अड़ गई।

बंगाल सरकार बार-बार जोर देती रही कि नूपुर शर्मा के बयान से कानून का उल्लंघन हुआ है और माहौल को क्षति पहुँची है। साथ ही कुछ राज्यों पर याचिकाकर्ता का समर्थन करने का आरोप भी लगाया, हालाँकि सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि ये सुनवाई इन सब पर विचार करने के लिए नहीं हो रही। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 26 मई को ‘टाइम्स नाउ’ पर आए डिबेट के बाद नूपुर शर्मा के खिलाफ देश के कई हिस्सों में FIR व शिकायतें दर्ज की गई, जिसे रद्द करने या एक साथ कहीं स्थानांतरित करने के लिए याचिकाकर्ता ने न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के पीढोने में दर्ज FIR को इस मामले की पहली FIR माना और दिल्ली में नूपुर शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई FIR का भी जिक्र किया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि नूपुर शर्मा के जीवन पर गंभीर खतरे और पिछली कई घटनाओं को देखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को इन FIR को रद्द कराने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट जाने का अधिकार है, क्योंकि ‘कॉज ऑफ एक्शन’ दिल्ली में हुआ। दिल्ली पुलिस को महाराष्ट्र में दर्ज FIR की भी साथ में जाँच करने का निर्देश दिया गया।

उस दौरान वैकेशन बेंच ने उनके बयान को पूरे देश में आग लगाने के लिए जिम्मेदार बताते हुए उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया था, जिसे न्यायिक विशेषज्ञों ने न्यायपालिका के इतिहास पर एक काला धब्बा करार दिया था। नूपुर शर्मा पर 7 राज्यों में 9 FIR दर्ज हैं, जिन्हें वो दिल्ली ट्रांसफर करने की माँग कर रही हैं। लेकिन, पिछली बार दोनों जजों ने कह दिया था कि देश में जो कुछ भी हो रहा है, उसके लिए ‘सिर्फ और सिर्फ’ नूपुर शर्मा ही जिम्मेदार हैं। उनके बयान को गैर-जिम्मेदाराना और उन्हें दंभी बता दिया गया।

घायल थे चीनी फौजी, भारतीय सेना के ‘डॉक्टर’ ने किया उपचार, फिर चीन ने उन्हें ही मार डालाः गलवान में दगाबाजी किताब से उजागर

लगभग दो साल पहले लद्दाख के गलवान घाटी (Galwan Valley, Laddakh) में चीनी सैनिकों (Chinese Troop) की दुस्साहस के लगभग दो साल बीत चुके हैं। उस दौरान भारतीय सीमा में जबरदस्ती घुस रहे चीनियों को भारतीय सैनिकों ने खदेड़ दिया था, जिसमें कई चीनियों के मारे जाने की बात भी सामने आई थी।

इस दौरान की एक शर्मनाक करतूत सामने आई है। चीन ने अपने घायल सैनिकों की इलाज के लिए भारतीय सेना के 30 वर्षीय मेडिकल सैनिक ‘डॉक्टर’ दीपक सिंह (Dr. Deepak Singh) का अपहरण कर लिया था। उनसे अपने सैनिकों का इलाज कराया और काम हो जाने के बाद हत्या कर दी थी। मेडिकल सैनिक उनको कहते हैं, जिन्हें सेना में चिकित्सकीय कार्यों का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। आम बोलचाल की भाषा में इन्हें डॉक्टर कहा जाता है, हालाँकि इनके पास MBBS की डिग्री नहीं होती है।

पत्रकार शिव अरूर और राहुल सिंह द्वारा लिखी गई किताब ‘इंडियाज मोस्ट फियरलेस 3: न्यू मिलिट्री स्टोरीज ऑफ अनइमैजिनेबल करेज ऐंड सेक्रिफाइस’ में चीन की इस शर्मनाक करतूत का खुलासा किया गया है। किताब में अधिकारियों के हवाले से बताया है कि साल 2020 की उस रात को क्या-क्या हुआ था।

15 जून 2020 की रात को गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प में एक कर्नल समेत भारतीय सेना के 20 जवान बलिदान हो गए थे। वहीं, कई सप्ताह बाद चीन ने स्वीकार किया था कि उसके भी 4 सैनिक मारे गए। हालाँकि, इस इस संख्या को लेकर चीन की हर तरफ आलोचना हुई थी और तथ्यों को छुपाने की भी आरोप लगा था।

किताब में बताया गया है कि डॉक्टर दीपक सिंह जख्मी चीनी सैनिकों का इलाज कर रहे थे, तभी ऊपर पहाड़ से एक चट्टान उनके ठीक बगल में गिरा। उसका एक टुकड़ा उनके ललाट पर लगा और वह गिर गए। तब एक इंडियन मेजर ने गुस्से में चीनियों को चेतावनी देते हुए कहा था कि वे उस डॉक्टर को निशाना बना रहे हैं, जो PLA के जख्मी जवानों का इलाज कर रहा है।

घायल होने के बावजूद दीपक सिंह ने घायल सैनिकों का इलाज करना बंद नहीं किया। उसी दौरान चीनी सैनिकों ने उन्हें बंधक बना लिया। चीनियों ने अपहरण करके अपने बाकी घायल सैनिकों का इलाज करवाया। जब चीनियों का इलाज हो गया तो उन्होंने डॉक्टर दीपक की हत्या कर दी।

करीब 30 से ज्यादा भारतीय सैनिकों की जान बचाने के लिए उन्हें मरणोपरांत युद्धकाल के दूसरे सर्वोच्च सम्मान ‘वीर चक्र’ से 26 जनवरी 2021 को सम्मानित किया गया था। वहीं, उनकी पत्नी रेखा ने मई 2022 में चेन्नै स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकैडमी को जॉइन किया है। वह 2023 में बतौर लेफ्टिनेंट इंडियन आर्मी का हिस्सा बनेंगी। वह जीवन में एक बार गलवान जरूर जाना चाहती हैं।

भारतीय सेना के कर्नल रविकांत के हवाले से किताब में कहा गया है, “दीपक ने कितने भारतीय सैनिकों को बचाया इसका हमारे पास आँकड़ा है, लेकिन उन्होंने उस रात चीन के कितने सैनिकों की जान बचाई इसका आँकड़ा नहीं है। हम इतना जरूर कह सकते हैं कि उस रात कई जख्मी चीनी सैनिक जिंदा रह पाए तो ये नायक दीपक सिंह की मेहरबानी थी।”

कर्नल रविकांत ने आगे कहा, “उन्हें (चीनी सैनिकों को) उनकी ही सेना ने उनके हाल पर छोड़ दिया था, लेकिन नायक दीपक सिंह ने उनके जख्मों का इलाज किया। हमें देश की रक्षा के लिए जान लेने की ट्रेनिंग मिली हुई है, लेकिन जिंदगी बचाने से बड़ा आखिर क्या हो सकता है?” कर्नल रविकांत उस दौरान 16 बिहार बटालियन के सेकंड-इन-कमांड थे। कर्नल बी. संतोष बाबू के सर्वोच्च बलिदान के बाद उन्होंने चीनी सेना के साथ झड़प में शामिल बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर की जिम्मेदारी सँभाली था।

किताब में कहा गया है कि उस रात झड़प के दौरान करीब 400 भारतीय सैनिक थे, जबकि चीन की तरफ से इसके करीब तीन गुना। झड़प के बाद PLA में भगदड़ मच गई थी। हवलदार धर्मवीर के हवाले से किताब में बताया गया है, “जब हम 16 जून की सुबह इलाके में इकट्ठे हुए तब आसपास कई चीनी सैनिकों की लाशें पड़ी हुई थीं। हमें आदेश था कि हम चीनियों के शवों को न छुए, क्योंकि PLA बाद में अपने मारे गए सैनिकों की लाशें ले जाती।”

मूर्ति खंडित, पत्थरबाजी, फायरिंग… मुहर्रम पर देश के कई हिस्सों में हिंसा: कुछ जगहों पर आपस में ही भिड़ कर बढ़ाया तनाव

मुहर्रम पर देश के कई हिस्सों में झड़प, गोलीबारी और हिंसा की खबरें हैं। कानपुर में जहाँ हनुमान जी की मूर्ति खंडित करके माहौल बिगाड़ने की कोशिश हुई वहीं बिहार के पूर्णिया, कटिहार, सजौर, मध्य प्रदेश के उज्जैन, उत्तर प्रदेश के बरेली, वाराणसी, मुजफ्फरपुर आदि कई जगहों पर आपसी झड़प, कहीं हिन्दू समुदाय के दुकानों में लूटपाट आदि की खबरे हैं। यहाँ ऐसी कई घटनाओं का संक्षेप में वर्णन कर रहे हैं।

मुहर्रम पर कानपुर में माहौल बिगाड़ने की कोशिश, हनुमान जी की मूर्ति को किया खंडित

मुहर्रम पर कानपुर में माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई है। मामला नौबस्ता थानाक्षेत्र स्थित यशोदा नगर बाईपास का है। जहाँ सड़क किनारे स्थित एक पेड़ के नीचे बने मंदिर में देर रात तोड़फोड़ की घटना सामने आई है। मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति को खंडित कर दिया गया था।

इलाके में हनुमान जी के मंदिर में तोड़फोड़ की खबर फैलते ही मंदिर के आसपास लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई। हालाँकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मामला बिगड़ने से पहले ही अराजक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन देकर स्थिति को काबू में किया। हालाँकि, किन लोगों मंदिर में तोड़फोड़ की इसकी जाँच की जा रही है।

मध्य प्रदेश के उज्जैन में मुहर्रम के जुलूस में भिड़े दो गुट

मध्य प्रदेश के उज्जैन में मुहर्रम के जुलूस में बड़े साहब का सेहरा लूटने के दौरान मुस्लिम समुदाय के हेलावाड़ी और बेगमबाग क्षेत्र के दो गुटों में लाठियाँ चलने लगी। जुलूस में शामिल 1 दर्जन से अधिक युवक घायल हो गए। घटना का वीडियो वायरल होते ही जैसे ही मामला उच्च अधिकारियों तक पहुँचा हड़कंप मच गया।

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों गुटों के लोगों ने एक दूसरे पर जमकर लाठियाँ भांजी। बताया जा रहा है कि इसमें दर्जनों घायल हो गए। लोगों के हाथ, पैर तो कुछ के सिर में चोटें आई है। दरअसल, मुहर्रम जुलूस निकालने के दौरान हेलावाड़ी और बेगमबाग क्षेत्र के गुटों के युवाओं में हर साल मातम की प्रतिस्पर्धा को लेकर टकराव होता है। दोनों गुटों के बीच मुहर्रम के जुलूस के दौरान वर्षों से होड़ को लेकर तनातनी भी रही है। कहा जा रहा है कि लगभग हर साल दोनों गुटों के बीत झड़प होती है।

पूर्णिया में मुहर्रम पर झड़प

बिहार के पूर्णिया में मुहर्रम के जुलुस के दौरान मातम मानते हुए अचानक भगदड़ मच गई। घटना बैसा प्रखंड क्षेत्र के सबसे बड़े शीशाबाड़ी कर्बला के मुहर्रम अखाड़े की है। यहाँ मातम मनाये जाने के दौरान पैदा हुए अराजक स्थिति को कंट्रोल करने के दौरान उपद्रवियों और पुलिस में भी झड़प हुई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अखाड़े टीम के कर्बला के मैदान में प्रवेश करते ही यहाँ भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो गई।

कटिहार में दो पक्षों में हिंसक झड़प, चली गोली

बिहार के कटिहार में देर रात ताजिया जुलूस अखाड़े के दौरान आपसी रंजिश में गोली चलने की खबर है। इस दौरान हरिगंज निवासी टीपू सुल्तान का बेटा मन्नू (उम्र 30 साल) को कमर एवं पैर में गोली लगी। रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल भेजा गया। जहाँ स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कटिहार मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।

मुजफ्फरपुर में तजिया जुलूस के दौरान दो पक्षों में जमकर पत्थरबाजी

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मुजफ्फरपुर जिले के सकरा थाना के दोनवा में ताजिया जुलूस के दौरान मातम मनाते हुए दो पक्षों में जमकर पत्थरबाजी हुई। इस घटना में आधा दर्जन लोग चोटिल हो गए। हालाँकि, मामले की सूचना मिलने पर काफी संख्या में पुलिस बल ने मौके पर पहुँचकर मामले को कण्ट्रोल में लिया। वहीं इस मामले में DSP प्रशिक्षु अबु सैफी मुर्तुजा ने कहा कि ये मातम की एक परंपरा है। लेकिन, इसे रोकवा कर स्थिति पर नियंत्रण किया गया।

वहीं एक दूसरे मामले में सकरा में ही मुहर्रम के जुलूस में मस्जिद चौक चकराबे मनियारी में दो गाँव के लोगों में हिंसक झड़प हो गई। दोनों ओर से लाठी डंडे बरसने लगे। एक-दूसरे को दौड़ा-दौड़ाकर पीटने लगे। इस मामले में घायलों ने बताया कि एक स्कूटी सवार युवक से एक साइकिल सवार अधेड़ को ठोकर लग गई थी। इसी को लेकर विवाद हुआ और फिर झड़प की नौबत आ गई। झड़प में मझौलिया पंचायत के सतपुरा गाँव के मो. इस्लाम, मो. अफरीद, मो. एजाज, मो. जुबैद, मो. मयउद्दीन, मो. गुलाम का सिर फट गया। सभी को सकरा अस्पताल में इलाज के लिए लाया गया। वहीं चकराबे मनियारी गाँव के मो. कलीम, मो. अनवर, मो. अब्दुल रहीम, मो. अहमद भी गंभीर रूप से घायल है।

रिपोर्ट के अनुसार, इनलोगों ने मुरौल अस्पताल में इलाज कराया है। घटना के बाद से दोनों गाँव में तनाव है।

सजौर में रास्ते को लेकर बिगड़ा मामला

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सजौर के राधानगर में माहौल तब गरमा गया जब एक रास्ते के विवाद को लेकर एक पक्ष के लोगों ने मुहर्रम का पहलाम नहीं किया। निशान व जुलूस भी नहीं निकाले गए। इसको लेकर दो पक्षों में पाँच वर्ष बाद फिर एक बार अंदरूनी तनाव कायम हो गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को दूसरे पक्ष से कारू चौधरी ने थाने में आवेदन देकर नए रास्ते को विवादित बताते हुए, जुलूस पर रोक लगाने की माँग की। उसके बाद से ही माहौल गरम हो गया। सूचना पर पहुंचे बीडीओ, सीओ, इंस्पेक्टर, थानाध्यक्ष, मुखिया आदि ने पहलाम कराने का काफी प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। हालाँकि, प्रशासन के समझाने के बाद दूसरे पक्ष के लोगों ने जुलूस को नए रास्ते से ले जाने की सहमति दे दी।

वाराणसी में भी हुआ बवाल

मुहर्रम पर सबसे ज्यादा बवाल वाराणसी के मिर्जामुराद इलाके में हुआ। यहाँ ईंट-पत्थर के साथ हथियारों का भी इस्तेमाल किया गया, जिसमें दर्जनों लोग घायल हो गए हैं। बताया जा रहा हैं कि करधना बाजार में ताजिया ले जाते समय जामुन का पेड़ काटने को लेकर विवाद हुआ था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग ताजिये के लिए खदेरू साव की दुकान के सामने छायादार जामुन के पेड़ को काटने लगे, जिसका विरोध करने पर विवाद बढ़ गया। लोगों ने कहा कि ताजिया जाने के लिए पर्याप्त रास्ता है। विवाद के बीच दुकानदार को लाठी डंडों से पीट दिया। उन्होंने दुकान को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। इससे पूरे गाँव में अफरातफरी मच गई।

बरेली में भी हुई जमकर पत्थरबाजी

वहीं बरेली में मुहर्रम जुलूस के दौरान भोजीपुरा के मझौआ गंगापुर में दुकानों में जमकर पत्थरबाजी की गई। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो भी सामने आया है। इसमें आप देख सकते हैं कि कैसे लोगों ने दूसरे समुदाय की दुकानों को निशाना बनाया है और वहाँ जमकर पथराव किया। पथराव करने वालों में महिलाएँ भी शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों पक्षों में करीब आधे घंटे तक पत्थरबाजी होती रही, जिसको लेकर वहाँ अफरा-तफरी मच गई।

‘मैं 48 घंटों से नहीं सोया हूँ’: लाल सिंह चड्ढा के रिलीज से पहले ‘नर्वस’ हुए आमिर खान, बोले- जिसको फिल्म नहीं देखनी उनकी भी इज्जत करूँगा

लाल सिंह चड्ढा की रिलीज की डेट जैसे-जैसे नजदीक आ रही है आमिर खान वैसे-वैसे टेंशन में डूबते जा रहे हैं। अपनी तरफ से वो इसके प्रमोशन में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। मगर सोशल मीडिया पर उनकी फिल्म के बहिष्कार की माँग लगातार बनी हुई है। यही सब वजह है कि आमिर काफी परेशान हैं और 48 घंटों से सो भी नहीं पाए।

आमिर खान ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मैं इस समय बहुत ज्यादा नर्वस हूँ। 48 घंटे हो गए हैं मैं सोया नहीं हूँ। मैं मजाक नहीं कर रहा। मैं सच में सोया हूँ। मेरा दिमाग की गति तेज है इसलिए मैं किताबें पढ़ता हूँ या ऑनलाइन शतरंज खेलता हूँ। मैं अब 11 अगस्त के बाद ही सो पाऊँगा।”

आमिर ने मीडिया को बताया कि इन दिनों उनकी और उनके डायरेक्टर अद्वैत की नींदे उड़ी हुई हैं। इसलिए 11 अगस्त के बाद वे और अद्वैत आराम से शाति से सोएँगे और जब उठेंगे तो लोग उन्हें बताएँगे कि फिल्म कैसी है।

आमिर खान ने अपनी फिल्म के बॉयकॉट किए जाने की माँग पर रिएक्शन देते हुए कहा, “अगर मैंने किसी का दिल दुखाया है किसी चीज से, तो मैं दुखी हूँ और मैं किसी का दिल नहीं दुखाना चाहता। बाकी अगर किसी को फिल्म नहीं देखनी तो मैं उस बात की इज्जत करूँगा। क्या कर सकते हैं। लेकिन मैं चाहता हूँ कि ज्यादा से ज्यादा लोग फिल्म को देखें, हमने बहुत ज्यादा मेहनत से ये फिल्म बनाई है।”

बता दें कि आमिर खान की लाल सिंह चड्ढा 11 अगस्त 2022 को रिलीज होने वाली हैं। फिल्म में आमिर खान के साथ करीना कपूर लीड रोल में होंगी। दोनों ही कलाकारों के पुराने बयान पिछले दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे जिसकी वजह से इस फिल्म के बहिष्कार की माँग उठी। अब आमिर तो जगह-जगह अपने कहे की माफी माँग रहे हैं, पर करीना कपूर से जुड़ी ऐसी कोई खबर नहीं हैं। आमिर ने लाल सिंह चड्ढा के साथ 4 साल बाद बॉलीवुड में आपसी की है, शायद यही वजह है कि वो चाहते हैं कि फिल्म किन्हीं भी कारणों से फ्लॉप न हो।

भोपाल का घर अय्याशी का अड्डा, मोबाइल में मिले अश्‍लील वीडियो और लड़कियों के नंबरः कॉन्ग्रेस के करीबी मिर्ची बाबा के स्टाफ फरार, रेप में गिरफ्तार

मध्य प्रदेश में रेप के आरोप में गिरफ्तार वैराज्ञानंद गिरी उर्फ मिर्ची बाबा को जिला कोर्ट ने 22 अगस्त तक के लिए न्यायिक हिरासत में भोपाल सेंट्रल जेल भेजा है। पुलिस उसके ठिकानों की जाँच कर रही है। पुलिस ने खुलासा किया है कि मिर्ची बाबा ने भोपाल की एक कॉलोनी में अय्याशी का अड्डा बना रखा था। बाबा के पास से एक मोबाइल फोन भी मिला है। इसमें उसने अश्लील वीडियो और लड़कियों के फोन नंबर सेव किए हुए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिनाल रेसीडेंसी का ए-53 डुप्लेक्स भोपाल में बाबा का ठिकाना था। उसने यह मकान किराए पर लिया हुआ था। घर पर त्रिपाठी रावत, अंसुल रावत के नाम की नेम प्लेट लगी हुई है। बताया जा रहा है कि बाबा ने इस मकान पर कब्जा कर लिया था। उसने काफी समय से इसका किराया भी नहीं दिया। गिरफ्तारी के डर से मिर्ची बाबा ग्वालियर भाग गया था। पुलिस जब उसके घर पहुँची तो वहाँ ताला लगा हुआ था और बाहर उसका सामान बिखरा हुआ था।

भोपाल के गोविंदपुरा थाने में 17 जुलाई 2022 को रायसेन की एक महिला ने मिर्ची बाबा पर दुष्‍कर्म का आरोप लगाया था। जानकारी के मुताबिक, बाबा की हरकतों से आस-पास रहने वाले लोग भी काफी परेशान थे, लेकिन ऊपर तक उसकी पहुँच होने के चलते उसके आगे किसी की भी नहीं चलती थी। बाबा और उसके स्टाफ के अजीब व्यवहार की वजह से घर पर कोई भी महिला कर्मचारी काम नहीं करना चाहती थी। पहली मंजिल के कमरों को छोड़कर बाबा के पूरे घर और घर के बाहरी हिस्से के हर कोने में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे। बता दें कि मिर्ची बाबा के गिरफ्तार होने के बाद उसके स्टाफ भी घर छोड़कर फरार हो गए हैं। उसके स्टाफ में एक महिला, एक पुरुष सहित चार लोग हैं। सभी बाबा के साथ इसी घर में रहते थे।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में पुलिस को बताया था कि उसकी शादी को चार साल हो चुके हैं, लेकिन कोई संतान नहीं हैं। संतान प्राप्ति की चाह में वह मिर्ची बाबा के पास पूजा-पाठ के लिए गई थी, लेकिन बाबा ने संतान होने का दावा कर उसे इलाज के नाम पर नशे की गोलियाँ खिलाकर उसके साथ बलात्कार किया। विरोध करने पर बाबा ने कहा कि बच्चा ऐसे ही होता है। पीड़िता के बयान के बाद कथित बाबा पर धारा 376, 506 और 342 के तहत एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। वैराज्ञानंद को नागा साधु का दर्जा हासिल है, वह कॉन्ग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह का बेहद करीबी माना जाता है। उसे कमलनाथ सरकार में राज्यमंत्री का दर्जा भी मिल था।

नीतीश कुमार 2024 के लिए PM मटेरियल नहींः प्रशांत किशोर बोले- चेहरा बनाने की चर्चा भी नहीं, बिहार में बदलाव का राष्ट्रीय असर नहीं

राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने साफ़ कर दिया है कि नीतीश कुमार को 2024 में प्रधानमंत्री पद के लिए विपक्ष का चेहरा बनाए जाने को लेकर राजनीतिक गलियारों में कोई चर्चा नहीं है। नीतीश कुमार ने भाजपा से नाता तोड़ते हुए फिर से राजद के साथ मिल कर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। प्रशांत किशोर ने कहा कि जदयू के ताज़ा कदम का राष्ट्रीय स्तर पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने पूछा कि नीतीश कुमार को किसने प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया है?

साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि ये सब सिर्फ मीडिया में चल रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी गठबंधन या मोर्चे ने उन्हें पीएम पद का उम्मीदवार बनाने के लिए चर्चा नहीं शुरू की है। उन्होंने कहा कि अगर किसी को पीएम पद का उम्मीदवार बनाने की चर्चा होती, तो उन्हें मालूम होता। प्रशांत किशोर ने बताया कि नीतीश कुमार जब कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए थे, तब अंतिम बार दोनों की बात हुई थी। उन्होंने इसे बिहार केंद्रित प्रयोग बताते हुए कहा कि देश के स्तर पर इस तरह के किसी महागठबंधन की कोई चर्चा नहीं है।

‘रिपब्लिक टीवी’ से बात करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा, “अगर नई सरकार अच्छा कार्य करती है और तेज़ गति से विकास करती है, तब राष्ट्रीय स्तर पर इसका कोई असर हो सकता है। 2017-22 के बीच नीतीश कुमार भाजपा के साथ सहज नहीं थे। उनके इस कदम के पीछे कोई राष्ट्रीय एजेंडा नहीं है। 2012-13 और नरेंद्र मोदी के उभरने के बाद से ही बिहार में अस्थिरता की स्थिति थी। उस समय से लेकर अब तक ये सरकार गठन का छठा प्रयोग है।”

प्रशांत किशोर ने कहा कि सभी 6 प्रयोगों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही रहे और बिहार की राजनीतिक स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया। उन्होंने आशा जताई कि नई सरकार कुछ अच्छा करेगी। उन्होंने बताया कि कैसे 2010 में उन्होंने लोगों को नीतीश कुमार की इज्जत करते हुए देखा है। उन्होंने 2015 के चुनाव प्रचार अभियान का उदाहरण देते हुए कहा कि तब महागठबंधन को वोट न देने वाले लोग और नरेंद्र मोदी के समर्थक भी नीतीश कुमार को भला-बुरा नहीं कहते थे।

बताते चलें कि 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में लालू यादव और नीतीश कुमार साथ थे। प्रशांत किशोर ने तब महागठबंधन के चुनाव प्रचार अभियान की रणनीति की कमान सँभाली थी। उन्हें जदयू में पद ही मिला था, लेकिन नीतीश कुमार से अनबन के कारण उन्होंने पार्टी छोड़ दी। प्रशांत किशोर ने कहा कि वो पहली बार लोगों को नीतीश कुमार और उनकी सरकार व प्रशासनिक स्टाइल को लेकर लोगों को वो बातें कहते हुए सुन रहे हैं, जो वो पिछली सरकारों के लिए कहते थे।

प्रशांत किशोर ने बिहार में एक नए अभियान की घोषणा करते हुए कहा कि जदयू में पुनः शामिल होने की उनकी कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार उन्हें क्या ऑफर देंगे और वो उन्हें क्या देंगे, इसका अब कोई मतलब नहीं है। IPAC के संस्थापक ने बिहार में नए राजनीतिक दल की स्थापना के लिए 3000 किलोमीटर लंबी पदयात्रा और 18,000 लोगों को अपने साथ जोड़ने की योजना बनाई है। इसकी घोषणा वो पहले ही कर चुके हैं।

सांसद भारत का, बोल खालिस्तानीः बोले सिमरनजीत मान- 15 अगस्त को तिरंगा की जगह निशान साहिब फहराएँ, भिंडरांवाले दुश्मन की सेना से लड़ते शहीद हुए

अटारी बॉर्डर पर खालिस्तानी झंडा फहराने की अपील करने वाली एक बुर्के वाली महिला का वीडियो वायरल होने के बाद अब शिरोमणी अकाली दल के सांसद ने विवादास्पद बयान दिया है। पंजाब के संगरूर से अकाली सांसद सिमरनजीत सिंह मान ने लोगों से स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा की जगह सिख झंडा निशान साहिब फहराने की अपील की है।

मान के बयान के बाद बवाल मच गया गया है। तिरंगे का बहिष्कार करने की बात कहते हुए मान ने कहा, “मैं आपसे 14-15 अगस्त को घरों और कार्यालयों में निशान साहिब को फहराने का अनुरोध करता हूँ। दीप सिद्धू, जो हमारे बीच नहीं हैं, ने कहा था कि सिख स्वतंत्र और एक अलग समुदाय है।”

भारतीय सुरक्षाबलों को ‘दुश्मन’ बताते हुए उन्होंने कहा, “जरनैल सिंह भिंडरांवाले (मारा गया खालिस्तानी आतंकवादी) दुश्मन की सेना से लड़ते हुए शहीद हो गए।” उन्होंने केंद्र सरकार के ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की भी आलोचना की।

हालाँकि, शिरोमणी अकाली दल के नेताओं ने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान पर सिमरनजीत सिंह मान के रूख की आलोचना की है। अकाली नेता डॉक्टर दलजीत चीमा ने कहा कि भारतीय ध्वज सभी का है और पंजाब के लोगों को इस पर गर्व है।

डॉक्टर चीमा ने कहा, “तिरंगा सभी का है और पंजाब के लोगों को तिरंगे पर गर्व है, क्योंकि अधिकांश बलिदान पंजाब के लोगों द्वारा दिए गए हैं। अधिकांश बलिदानी सिख परिवारों से थे।” वहीं, भाजपा और आम आदमी पार्टी ने सिमरनजीत सिंह के इस बयान की निंदा की है।

बता दें कि प्रतिबंधित सिख फॉर जस्टिस (SFJ) का का आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक वीडियो संदेश में पंजाब के लोगों को तिरंगा जलाने और स्वतंत्रता दिवस पर खालिस्तानी झंडा फहराने की अपील की थी।

वहीं, सोशल मीडिया पर एक संदिग्ध वीडियो सामने वायरल हो रहा है, जिसमें बुर्का पहनी हुई एक महिला कह रही है कि प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन सिख फॉर जस्टिस को कश्मीरी अलगाववादियों का पूरा समर्थन है।

वीडियो में बुर्कानशीं महिला कह रही है कि गुरुओं की पवित्र भूमि पर ‘हत्यारे’ तिरंगे को फहराने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। वह आगे कहती हैं, “अटारी अमृतसर गुरुओं की भूमि है, लेकिन भारत का हत्यारा तिरंगा झंडा वहाँ फहराता रहता है। सिख भूमि पर भारतीय कब्जे का यह 75वाँ वर्ष है। हमारा उद्देश्य है कि अटारी बॉर्डर पर तिरंगा की जगह खालिस्तान का झंडा फहराया जाए। यह निर्णायक समय है। हम कश्मीरी मुजाहिदीन खालिस्तान की लड़ाई में अपने सिख भाइयों और बहनों के साथ हर कदम पर हैं। अल्लाह हू अकबर।”

नीतीश कुमार ने 8वीं बार ली CM पद की शपथ, तेजस्वी यादव बने डिप्टी: विपक्ष में जाते एक्टिव हुई BJP, राज्य भर में ‘महाधरना’ का ऐलान

नीतीश कुमार ने 8वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है, वहीं तेजस्वी यादव नई राज्य सरकार में डिप्टी सीएम बने हैं। राज्यपाल फागू चौहान ने इन दोनों को शपथ दिलाई। जदयू ने भाजपा का साथ छोड़ते हुए फिर से राजद-कॉन्ग्रेस के लिए गठबंधन किया है।

वहीं बिहार में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने ताज़ा घटनाक्रम को लेकर नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें सबसे अधिक दिक्कत इस बात की भी है कि पिछड़े जाति का व्यक्ति क्यों प्रदेश अध्यक्ष बना है, पिछड़े जाति का बेटा उप-मुख्यमंत्री बना हुआ है और क्यों अति-पिछड़ी जाति की बेटी भी बिहार की उप-मुख्यमंत्री बनकर बैठी हुई है। उन्होंने कहा कि जदयू हमेशा अपनी तरह से गोटी को सेट करता है।

संजय जायसवाल ने ‘आज तक’ से बात करते हुए कहा, “RCP सिंह सरकारी नौकरी में थे, नीतीश कुमार ने इस्तीफा दिलाकर अपने साथ रखा। पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष, फिर केंद्रीय मंत्री बनाया। अब ओडिशा कैडर के मनीष वर्मा को इस्तीफा दिलाकर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया है। अफसरों का ये इस्तेमाल करते है। बिहार में लगातार आपराधिक घटनाएँ बढ़ रही थीं। अपराध नियंत्रित नहीं कर रहे थे। भाजपा की सबसे बड़ी यूएसपी अपराध नियंत्रण ही है। वो आज मनीष वर्मा को रखें या आरसीपी सिंह को, कोई फर्क नहीं पड़ता। नीतीश कुमार का दल और अवसर, राष्ट्रीय अध्यक्ष – सब बदलता रहता है।”

महागठबंधन सरकार के विरोध में 12 अगस्त को बिहार के सभी जिला मुख्यालयों में एवं 13 अगस्त को प्रखंड मुख्यालयों पर भी भाजपा द्वारा ‘महाधरना’ का आयोजन किया जाएगा। वहीं केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि नीतीश कुमार उससे आज मिले है, जिसके खिलाफ वो शुरू से लड़ते रहे। उन्होंने कहा कि RJD के आतंकराज से, गुंडाराज से जनता मुक्ति चाहती थी और भाजपा ने संघर्ष कर उन्हें मुख्यमंत्री भी बनाया।

वहीं पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि कहा जा रहा है कि JDU को तोड़ने की कोशिश की जा रही है और शिवसेना का उदाहरण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिवसेना हमारा सहयोगी दल थोड़े ही था, वो वहाँ (महाराष्ट्र) सत्ताधारी दल था। बकौल सुशील मोदी, भाजपा ने सहयोगी दल रहते हुए किसी पार्टी को नहीं तोड़ा। उन्होंने कहा, “आपको हम तोड़ भी देते तो सरकार कैसे बनती।” भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की पूरे घटनाक्रम पर नजर है।

जब हुए भारत के टुकड़े 6 साल का था मोहन, परिवार के 22 लोग मार डाले गएः 75 साल बाद चाचा सरवन सिंह से हुई मुलाकात, पाकिस्तान ने बना दिया अफजल

पंजाब के जालंधर में रहने वाले 92 साल के सरवन सिंह ने कभी सोचा नहीं था कि वो 75 साल बाद अपने बिछड़े भतीजे को देख पाएँगे। भारत-पाकिस्तान विभाजन के वक्त जब हर जगह हाहाकार मचा था, इस्लामी कट्टरपंथी हिंदुओं और सिखों को पाकिस्तान से काफिर कहकर मार-मारकर भगा रहे थे, तब उस हिंसा की गाज सरवन सिंह के परिवार पर भी गिरी थी।

पाकिस्तान के ‘चक 37’ गाँव में उस दौरान एक हमला हुआ। उस हमले में सरवन सिंह के घर के करीबन दो दर्जन (22) लोग मौत के घाट उतारे गए थे। उन्हीं परिजनों के बीच सरवन सिंह का भतीजा मोहन भी था, जो कि तब सिर्फ 6 बरस का था। मोहन उस हिंसा में बच गया था और घरवालों के गुजर जाने के बाद पाकिस्तान में ही रहने लगा था। एक मुस्लिम परिवार ने उसे पाला और उसे धर्म बदलवाकर अफजल खालिक कर दिया गया।

इतने वर्षों तकसरवन को नहीं पता था कि उनका भतीजा कहाँ है और न ही मोहन जानते थे कि उनके किसी रिश्तेदार को आज भी वह याद हो सकते हैं। लेकिन दोनों को मिलाने में जो सूत्रधार बने वो ऑस्ट्रेलिया के यूट्यूबर गुरुदेव सिंह हैं।

गुरुदेव ने विभाजन से जुड़ी वीडियोज देखने की कड़ी में एक जगह सरवन सिंह को मोहन के गायब होने का दर्द बयां करते सुना। दूसरी ओर उन्हें पाकिस्तान के एक ऐसे ही शख्स का पता चला जो अपने बारे में वही डिटेल्स बता चुके थे जो सरवन अपने भतीजे के बारे में बता रहे थे।

गुरुदेव ने दोनों बयानों में इतनी समानताएँ पाने के बाद दोनों परिवारों के नंबर जुटाए। उनसे बात की और आखिर में उन्हें मिलवाने का बीड़ा उठाया। गुरुदेव के प्रयासों के बाद अभी हाल में जब सरवन सिंह अपनी बेटी के साथ करतारपुर साहिब गए तो उनकी मुलाकात मोहन से हुई।

मोहन उनके लिए घर से लड्डू बनवाकर लाए थे। एक दूसरे को देखते ही दोनों की आँख में आँसू गए और और उन्होंने गले लगकर अपनी खुशी जताई। दोनों एक दूसरे को देख यकीन नहीं कर पा रहे थे कि वो दूसरे से 75 साल बाद मिल पा रहे हैं।

भतीजे को देख सरवन सिंह ने कहा,

“मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा, मुझे मेरा भतीजा मिल गया। कोई उम्मीद नहीं थी। भगवान ने मुझे लंबी उम्र दी कि मैं उससे मिल पाऊँ। मैं उम्मीद करता हूँ कि अगर दोनों देशों की सरकारें मान जाएँ तो वो भारत आए और हमसे मिले।”