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पार्था-अर्पिता मामले में ममता बनर्जी को पाक साफ़ साबित करने में जुटा ‘इंडिया टुडे’ का पत्रकार: बंगाल CM पर लिख चुका है किताब, सरकार में मिला था खास पद

पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले के मामले में ‘इंडिया टुडे’ के कंसल्टिंग एडिटर जयंत घोषाल पश्चिम बंगाल सरकार का बचाव किया है। 28 जुलाई ,2022 को चैनल पर एक डिबेट के दौरान इस घोटाले के मामले में घोषाल ने सीएम ममता बनर्जी को डिफेंड करने की कोशिश की। डिबेट के दौरान होस्ट राजदीप सरदेसाई थे और उसी दौरान जयंत घोषाल ने दावा किया कि उन्हें इस बात का पूर्ण विश्वास है कि ममता बनर्जी इस घोटाले से पूरी तरह से अनजान थीं।

अपने दावे को सही ठहराते हुए घोषाल ने कहा, “मैं कल कोलकाता में था और उनसे इस बारे में बात की और समझने की कोशिश की। वो बहुत परेशान थीं। उन्होंने पार्था के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए इसलिए समय लिया क्योंकि वो ये समझना चाहती थीं कि ये क्या हो रहा है।” घोषाल दावा करते हैं कि ममता बनर्जी को इस बात का बिल्कुल भी पता नहीं ता कि आखिर शिक्षक भर्ती घोटाले की आरोपित अर्पिता मुखर्जी कौन है। इस दावे के उलट ऐसी कई तस्वीरें और वीडियो हैं, जो कि कुछ और ही बयाँ करते हैं। वहीं घोषाल के दावों का खंडन करते हुए बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने एक वीडियो दिखाया जिसमें सीएम बनर्जी अर्पिता मुखर्जी की उनके “अच्छे काम” के लिए प्रशंसा कर रही थीं।

कौन हैं जयंत घोषाल?

1962 में जन्मे जयंत घोषाल ने 40 साल से भी अधिक समय से राजनीतिक पत्रकार के रूप में काम किया है। उनका मुख्य जुड़ाव बंगाली समाचार पत्र ‘आनंद बाजार पत्रिका’ से रहा है, जहाँ वे एक पत्रकार के तौर पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा वो इंडिया टीवी, बार्टमैन, एबीपी न्यूज और अन्य के लिए लिखते है। वो ‘इंडिया टुडे समूह’ के लिए सलाहकार संपादक के रूप में भी काम कर रहे हैं।

ममता सरकार के लिए करते हैं पीआर का काम

गौरतलब है कि जयंत घोषाल को टीएमसी चीफ ममता बनर्जी के करीबी माने जाते हैं। ममता सरकार ने सितंबर 2020 में उन्हें सूचना एवं विकास अधिकारी (IDO) बनाया था। आईडीओ के तौर पर उनका मुख्य काम राज्य और केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के बीच संपर्क स्थापित करना था।

पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा 18 सितंबर 2020 को जारी आदेश के अनुसार, राज्य सरकार के लिए पीआर के तौर पर उनकी प्रोफ़ाइल उन्हें अन्य गतिविधियों में शामिल होने से रोकेगी। आदेश में कहा गया है, “जब से वो इस प्रकार के संपर्क, समन्वय और सूचना प्रसार के लिए पश्चिम बंगाल सरकार के लिए काम करते रहेंगे, तब तक को उन्हें अन्य कार्यों की इजाजत नहीं होगी। अगर वो ऐसे कोई भी अन्य कार्य करते हैं तो उन्हें पहले इसके बारे में राज्य सरकार को बताना होगा।”

इस पद के तहत उन्हें प्रधान आवासीय आयुक्त कार्यालय और कोलकाता सूचना केंद्र के ऑफिस में स्थान दिया गया था। 1.5 लाख रुपए की सैलरी के अलावा दिल्ली-कोलकाता-दिल्ली सेक्टर में ड्यूटी पर हवाई यात्रा खर्च जैसे भत्ते भी दिए गए थे। उल्लेखनीय है कि यह पद विशेष रूप से पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा बनाया गया था।

साल 2020 में पीटीआई के पत्रकार सौम्यजीत मजूमदार ने एक ट्वीट में कहा था, “पश्चिम बंगाल सरकार ने सूचना एवं विकास अधिकारी का एक पद सृजित किया है जो राज्य की ओर से केंद्र से संपर्क करेगा। वरिष्ठ पत्रकार जयंत घोषाल को इस पद पर नियुक्त किया गया है।”

ममता ने दिया बंग भूषण सम्मान

इस बीच पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने जयंत घोषाल को 25 जुलाई 2022 को बंग भूषण सम्मान से नवाजा। ये पुरस्कार इंडिया टुडे पर डिबेट में शामिल होने से ठीक तीन पहले दिया गया। बंग भूषण पुरस्कार विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों को सम्मानित करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा स्थापित एक पुरस्कार है। पुरस्कारों की शुरुआत राज्य सरकार ने 2011 में की थी।

घोषाल ने सीएम बनर्जी पर लिखी किताब

यहीं नहीं घोषाल के ममता बनर्जी का समर्थन करने को इस तरह से समझा जा सकता है कि उन्होंने ममता बनर्जी को लेकर ‘ममता: बियॉन्ड 2021’ नामक एक पुस्तक लिखी है, जो कि फरवरी 2022 में जारी हुई थी। ये किताब पूरी तरह से ममता बनर्जी के इर्द-गिर्द ही घूमती है। इस किताब में इस बात को जानने की कोशिश की गई है कि पिछले विधानसभा चुनावों में टीएमसी की जीत में किन कारकों ने योगदान दिया था।

इसमें लिखा था, “भाजपा की बंगाली पहचान की समझ में भारी अंतर था, जिसका ममता फायदा उठा सकीं। अर्धसैनिक बलों, खुफिया एजेंसियों से लेकर प्रमुख टीएमसी नेताओं को निशाना बनाने तक केंद्र सरकार के हस्तक्षेप ने भाजपा को मतदाताओं को अलग कर दिया। इस कारण से प्रदेश के लोगों को लगा कि नई दिल्ली और बंगाल के बीच खाई बढ़ती जा रही है।” इस किताब में उन सवालों पर भी प्रकाश डाला गया है कि क्या ममता बनर्जी खुद को पीएम पद के लिए उपयुक्त उम्मीदवार मानती हैं।

घोषाल ने ममता बनर्जी के जीवन पर ‘ममता: बियॉन्ड 2021’ नामक पुस्तक लिखी है

उन्होंने लिखा, “बीजेपी और आरएसएस के कई नेता इस बात को मानते हैं कि 2021 की तरह ही 2024 में ममता को कम करके आँकना मोदी सरकार के लिए बड़ी भूल होगी। ममता बनर्जी को खुद को व्यापक तौर पर स्वीकार्य नेता बनाने के लिए कई और अभिनव कदम उठाने होंगे, जो नरेंद्र मोदी का विकल्प हो सकते हैं। इस मोर्चे पर निष्क्रियता तो दूर वह चुपचाप तैयारी कर रही हैं। उनका मिशन ‘नई दिल्ली 2024’ देखने लायक होगा।”

उन्होंने आगे बताया है कि बंगाल की सीएम रहते हुए ममता बनर्जी मुस्लिम तुष्टिकरण करती रही हैं, लेकिन खुद को एक राष्ट्रीय नेता के रूप में चित्रित करने के लिए वो अपनी इस छवि को पीछे छोड़ने की कोशिश करेंगी। यहीं नहीं, अगर क्षेत्रीय दल 2024 के चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो वो अरविंद केजरीवाल को राष्ट्रीय छवि के नेता के तौर पर पीछे छोड़ देंगी। बता दें कि जयंत घोषाल की डिबेट लेख और ऑप-एड ज्यादातर ममता बनर्जी को राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करने की उच्च संभावना के साथ एक प्रिय नेता के रूप में चित्रित करने का प्रयास करते हैं।

‘मोहम्मद ही अंतिम पैगंबर’ – अब पंजाब में निकाह से पहले मियाँ-बीवी को भरना पड़ेगा फॉर्म, न मानने पर पाकिस्तान में मिलेगी कड़ी सज़ा

पाकिस्तान में पंजाब प्रान्त की सरकार अब निकाह में ‘मोहम्मद ही अंतिम पैगंबर’ का फॉर्म भरवाएगी। मार्च 2022 के इस प्रस्ताव को पंजाब सरकार की कैबिनेट ने मंजूरी दे कर अनिवार्य बना दिया है। पंजाब मुस्लिम परिवार नियम के मुस्लिम फॅमिली लॉ ऑर्डिनेंस 1961 के कागजातों में में अब ‘खत्म ए नबूवत’ का फार्म जोड़ दिया गया है। यह फैसला शनिवार (30 जुलाई 2022) को लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाब की प्रांतीय सरकार ने अपने अधीनस्थ सभी क्षेत्रों के अधिकारियों को इस नए कानून को फ़ौरन लागू कर के अमल में लाने के आदेश दिए है। वर्तमान में पाकिस्तान के पंजाब में चौधरी परवेज इलाही के नेतृत्व में सरकार चल रही है। सरकार द्वारा इस आदेश का उल्लंघन करने वालों को कड़ी सजा का अभी फरमान सुनाया गया है।

इस नए फार्म के मुताबिक, अब मियाँ-बीवी को लिखित देना होगा कि वो इस बार पर विश्वास करते हैं कि मोहम्मद ही अंतिम पैगंबर हैं। पाकिस्तान में ईसाई समुदाय के फ़राज़ ने मुख्यमंत्री के इस आदेश को ट्वीट किया है। फ़राज़ ने खुद को ईसा मसीह को मानने वाला घोषित करते हुए ईशनिंदा का आरोपित भी लिखा है। ट्वीट के साथ उन्होंने हैशटैग के रूप में #Blasphemy लगाया है।

पाकिस्तान की पंजाब सरकार ने इस नियम का प्रस्ताव मार्च 2022 में पारित किया था। उस समय वहाँ के कई लोगों ने निकाहनामे के इस नए संशोधन का समर्थन किया था तो पाकिस्तान की निगत दाद और बुशरा ख़ालिक़ जैसी महिला एक्टिविस्टों ने इसका विरोध किया था।

₹5000 करोड़ का बंगाल भर्ती घोटाला, वकील का दावा: 6वीं पास भी बना टीचर, सामने आई लिस्ट; नाम/मोबाइल सबका खुलासा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (West Bengal CM Mamata Banerjee) की कैबिनेट के पूर्व सहयोगी पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) जिस शिक्षक भर्ती (Teacher Recruitment Scam) में गिरफ्तार हुए हैं, उसकी परतें खुलने लगी हैं। मामले में गिरफ्तार अर्पिता मुखर्जी सहित TMC के कई नेताओं ने अपने-अपने लोगों की नौकरी की सिफारिश की थी।

खबर सामने आ रही है कि साल 2014 के इस घोटाले को कई तरह से अंजाम दिया गया था। इसमें बिना मेरिट वालों को नौकरी दी गई। जो छठी कक्षा पास थे, उन्हें भी टीचर बना दिया गया। इतना ही नहीं, जिन्होंने एग्जाम ही नहीं दिया, उनका भी सिलेक्शन हो गया था।

इन भर्तियों के लिए अभ्यर्थियों से लाखों रुपए लिए गए। इस भर्ती घोटाले से संबंधित तीन सूची सामने आई है। इसकी एक लिस्ट किसी एजेंट की बताई जा रही है। इस लिस्ट में उन लोगों के नाम दिए गए हैं, जिनसे रिश्वत ली गई थी। इसमें उनके नाम, मोबाइल नंबर और कितना पैसा लिया गया है, दर्ज है।

इसके साथ ही एक दूसरी लिस्ट है। यह लिस्ट बंगाल के सत्ताधारी दल तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के विधायकों से जुड़ी है। इसमें उन विधायकों और मंत्रियों के नाम दिए गए हैं, जिन्होंने उम्मीदवारों को नौकरी देने के लिए उनका नाम आगे बढ़ाया था।

दैनिक भास्कर ने अपनी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में बताया है कि TMC नेता मुकुल रॉय के बेटे सुभ्रांशु रॉय, पार्टी के राज्य सचिव असीम माझी और अखिल गिरी के साइन किए हुए अलग-अलग लेटर मिले हैं। ये पत्र साल 2013 में लिखे गए हैं और इनमें परीक्षार्थियों के नाम और उनके रोल नंबर लिखकर भर्ती बोर्ड को भेजे गए थे।

यह बात भी सामने आई है कि पार्थ चटर्जी के पूर्व बॉडीगार्ड के परिवार के 13 लोगों को शिक्षा विभाग में नौकरी दी गई है। इनमें एक महिला ऐसी भी है, जो छठी पास है। इसी तरह अर्पिता की सिफारिश पर भी उसके कई रिश्तेदारों को नौकरी दी गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में पिटीशन दाखिल करने वाले वकील तरुण ज्योति तिवारी ने बताया कि शिक्षक भर्ती का पैसा TMC के कई नेताओं के जरिए तत्कालीन शिक्षा मंत्री तक पहुँच रहा था। तिवारी के मुताबिक, यह पूरा घोटाला 5,000 करोड़ का है, क्योंकि हर कैंडिडेट से 18-20 लाख रुपए लिए गए और यह सब पिछले 10 साल से चल रहा था।

बता दें कि हाईकोर्ट के निर्देश पर इस भर्ती घोटाले की सीबीआई जाँच कर रही है। वहीं, मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है। दूसरी तरफ, भर्ती प्रक्रिया में शामिल विद्यार्थी पिछले 503 दिनों से कोलकाता के मेयो रोड पर कोर्ट की अनुमति के बाद प्रदर्शन कर रहे हैं। हालाँकि, इन अवैध भर्ती वालों में से अभी तक किसी को हटाया नहीं गया है।

नेताजी बोस हों या पंडित नेहरू… दोनों की किताबों में वो शख्स थे कॉमन, जिनके लिए भारत माता ही थी आराध्य देवी

किसी भी ऐतिहासिक जीवन चरित्र के दो मुख्य साहित्यिक स्रोत होते हैं। पहला वो जीवनी जिसमें व्यक्ति के निजी जीवन, क्या किया, कैसे किया और क्यों किया सम्मिलित रहता है। दूसरा उनका दर्शन सहित्य, जो उनके स्वयं के लिखे हुए या बोले हुए शब्द होते हैं, जिससे व्यक्ति के विचार क्या थे, किस-किस सम्बन्ध में थे, यह जानकारी मिलती है।

19वीं शताब्दी में जन्में भारत के महान योगी स्वामी विवेकानंद आधुनिक इतिहास के उन न्यून व्यक्तियों में से हैं, जिनकी वाणी और कर्म में एक समावेश है। उन्होंने जो बोला और जैसा जीवनयापन किया, उसमें कोई भिन्नता या अंतर न था।

“मनसा, वाचा, कर्मणा” अर्थात हमारे मन के विचार, हम जो बोलते हैं और कर्म या कार्य करते हैं, उनमें समानता और संयोग होना। स्वामी विवेकानंद के जीवन में यह संयोग दिखता है। उनके शब्द जितने निर्भीक और साहसी हैं, उतना ही निर्भीक और साहसी उनका जीवन था। उनका स्वयं का जीवन भी भयमुक्त यानि अभय था और उनकी वाणी भी मनुष्य को अभय बनने के लिए आग्रह और प्रेरित करती है। वह तो भय को मृत्यु मानते थे और साहस को जीवन।

सुभाष चंद्र बोस जो 15 वर्ष की उम्र से लेकर जीवन के अंतिम समय तक स्वामी विवेकानंद से प्रेरणा लेते हैं और जिनका जीवन स्वयं निर्भीकता से भरा था, वह विवेकानंद के बारे में अपनी पुस्तक ‘द इंडियन स्ट्रगल’ (1920-34) पृष्ठ- 18 में लिखते हैं:

“उन्होंने भारत की नवसन्तति में अपने अतीत के प्रति गर्व, भविष्य के प्रति विश्वास और स्वयं में आत्मविश्वास तथा आत्मसम्मान की भावना फूँकने का प्रयत्न किया। यद्यपि स्वामी विवेकानन्द ने कोई राजनीतिक विचार या सन्देश नहीं दिया, तथापि हर व्यक्ति जो उनके सम्पर्क में आया या जिसने भी उनके लेखों को पढ़ा, वह देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत हो गया और स्वतः ही उसमें राजनीतिक चेतना पैदा हो गई।”

स्वामी विवेकानंद के जीवन के हर पहलु में एक निरंतरता दिखती है। यह निरंतरता थी भारत या कहें भारत की विचार के लिए जीने की, भारत के आध्यात्मिक पुनर्जागरण के कार्य करने की, भारत के प्रति अपने स्नेह और भारतीयों में आत्मविश्वास जगाने के लिए… जिसके लिए उन्हें पश्चिम तक जाना पड़ा। यह निरंतरता थी अपनी सनातन संस्कृति के प्रति गर्व करने की, यह निरंतरता थी एक विचार से ओत-प्रोत होकर जीवन भर कार्य करने की। यह निरंतरता ही थी, जो स्वामी विवेकानंद को शायद सबसे अलग ही नहीं बनाती बल्कि युवाओं को उन तक खींच लाती है।

हर युवा अनेकों चुनौतियों से जूझता है, जिसमें सबसे मुख्य है एक विचार या कार्य के प्रति एकाग्रता का अभाव और निरंतर भटकाव आना। यदि वह स्वामी विवेकानंद की जीवनी या उनका अन्य साहित्य पढ़ते हैं तो उनको एक निरंतरता दिखती है, जिसकी वो खोज में हैं। उन्हें अपने प्रश्नों का उत्तर मिलने लगता है और यही कारण है जिससे स्वामी विवेकानंद की प्रासंगिकता वर्ष दर वर्ष बढ़ती ही जा रही है।

ऐसा नहीं है कि स्वामी विवेकानंद के जीवन में कोई चुनौतियाँ नहीं आई या वातावरण हमेशा अनुकूल रहा। 25 वर्ष की उम्र के बाद जब से वह परिव्राजक संन्यासी बने, तब से उनके जीवन के अंतिम वर्ष 39 साल यानी 14 वर्षों तक तो उनको यह भी नहीं पता था की उनको अगले दिन भोजन कहाँ से मिलेगा और वह विश्राम कहाँ करेंगे।

  • 1884 में अपने पिता विश्वनाथ दत्त की मृत्यु के बाद घर पर आया हुआ आर्थिक संकट
  • अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस की समाधी (1886) के बाद उनके शिष्य और अपने गुरु भाइयों को एकत्रित करके शिक्षा और दीक्षा का कार्य
  • गुरु के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने का काम
  • परिव्राजक जीवन में बिना साधन-सुविधा भारत को जानने की लालसा
  • जल-वायु परिवर्तन से जूझना
  • दिनों-दिनों तक भोजन ना मिलना
  • अमेरिका में ठण्ड और भूख के कारण संघर्ष या रंग भेद का सामना
  • अमेरिका के शिकागो शहर में 11 सितम्बर 1893 को आयोजित विश्व धर्म महासभा का विश्व दिग्विजय, जिससे उनकी ख्याति विश्व स्तर तक… जिसका मूल्यांकन करना कठिन
  • 1897 के शुरुआत तक का पश्चिम का प्रवास, जहाँ उन्होंने व्याख्यान भी दिए और भारतीय दर्शन पर कक्षाएँ भी लीं
  • 15 जनवरी 1897 को भारत वापस आकर यहाँ अपने व्याख्यानों के द्वारा या 1 मई 1897 को रामकृष्ण मठ की स्थापना के बाद एक संगठन के रूप में कार्य

ऊपर जितनी चुनौतियाँ हैं, इन सबके बावजूद उनमें एक निरंतरता थी, जो उनको सबसे अलग बनाती है ।

स्वामी विवेकानंद स्पष्ट थे कि अकेले साधन से साधना नहीं होती इसीलिए वह अडिग, अटल, अचल खड़े रहे हर चुनौती के सामने और अपने मनुष्य निर्माण, लोगों में आत्मविश्वास और आत्मसम्मान की भावना जगाने के कार्य में लगे रहे। पंडित जवाहरलाल नेहरू भी स्वामी विवेकानंद के जीवन को देख कर अपनी पुस्तक ‘डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया’ पेज 337 में लिखते हैं:

“स्वामी विवेकानंद एक गतिशील और जोशीली ऊर्जा और भारत को आगे बढ़ाने के जुनून से भरपूर थे। वह उदास और निराश हिंदू मन के लिए एक टॉनिक के रूप में आए। उनके लिए भारत को राजनैतिक ही नहीं बल्कि मानसिक तौर पर भी आज़ाद करवाना जरूरी था, जिसके लिए उन्होंने भारत के हर भाग में जाकर युवाओं को प्रेरित किया।”

1897 में मद्रास में दिए हुए अपने व्याख्यान “भारत के भविष्य” में वह हर प्रकार की गुलामी त्यागने के लिए आह्वान करते हैं। स्वामी विवेकानंद कहते हैं कि आगामी पचास वर्ष के लिए यह जननी जन्मभूमि भारत माता ही मानो आराध्य देवी बन जाए। अपना सारा ध्यान इसी एक ईश्वर पर लगाओ, हमारा देश ही हमारा जाग्रत देवता है।

उनसे प्रेरणा लेते हुए आज तक करोड़ों लोग अपना जीवन भारत के लिए और भारत के विचार के साथ जीते हैं।

‘इतनी फ्लॉप फिल्मों के बाद कौन दे रहा इन्हें काम’ : तापसी पन्नू की ‘दोबारा’ का ट्रेलर देख लोगों ने उठाए सवाल, बताया- स्पेनिश फिल्म की फुल कॉपी

बॉलीवुड अभिनेत्री तापसी पन्नू की आने वाली फिल्म ‘दोबारा’ रिलीज से पहले विवादों में आ गई है। कुछ दिन पहले ही इसका ट्रेलर जारी हुआ था, लेकिन लोगों ने इसे देखने के बाद कहा कि ये फ़िल्म स्पेनिश फिल्म ‘मिराज’ की कॉपी है। इसके अलावा लोग इस बात पर भी सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इतनी सारी फ्लॉप फ़िल्म देने के बाद भी तापसी को काम कैसे मिल रहा है।

27 जुलाई 2022 को ‘बालाजी मोशन पिक्चर्स’ के यूट्यूब चैनल पर फिल्म का ट्रेलर रिलीज किया गया था। 3 दिन में इस ट्रेलर को 45 लाख से ज्यादा व्यूज मिले हैं जबकि 62 हजार से ज्यादा लोगों ने इसे लाइक किया है। कई लोग सोशल मीडिया पर इस ट्रेलर की तारीफ कर रहे हैं और कुछ पूछ रहे हैं कि क्या बॉलीवुड में अब ओरिजनल फिल्में नहीं बनतीं जो एक-एक सीन मिराज फिल्म का कॉपी कर दिया है।

एक यूजर ने कहा, “मिराज फिल्म से एक एक सीन लेकर कॉपी कर दिया है। ऐसे तो हमारा लुलू हलवाई भी डायरेक्टर और एक्सप्रेशनलेस शालू भाभी भी हिरोइन बन सकते हैं।”

निकी सिकारवार नाम की यूजर ने तापसी को लिखा, “आखिरी बार आपकी एक फिल्म देखी थी। आँखों में हारपिक डालना पड़ा था। बॉयकॉट दोबारा।”

अमित कुमार लिखते हैं, “देख रहा है ना विनोद टुकड़े-टुकड़े गैंग कैसे एक दूसरे को कॉपरेट करते हैं। फ्लॉप दर फ्लॉप फिर भी लीड रोल। अरे अनुराग कश्यप स्वरा को भी फिल्म दो इतना गाली सुनती हैं आपके इको सिस्टम के लिए, फिर भी उसको काम नही देते बेचारी।”

अमित लिखते हैं, “मैं एक बात जानता हूँ, जब इतने सारे टैलेंटेड लोग हैं, तो खराब अभिनय कौशल और इतनी फ्लॉप फिल्मों के साथ इन्हें एक के बाद एक फिल्म कैसे मिलती है।”

बता दें कि तापसी की फिल्म ‘दोबारा’ की तुलना जिस स्पेनिश फिल्म से की जा रही है वो ‘मिराज’ फिल्म 2018 की है। वो एक मिस्ट्री-ड्रामा फिल्म थी जिसे ओरिओल पाउलो द्वारा लिखा व निर्देशित किया गया था। वहीं तापसी की ‘दोबारा’ फिल्म ‘साइको-थ्रिलर’ फिल्म कही जा रही है। इसे अनुराग कश्यप ने निर्देशित किया है। फिल्म 19 अगस्त को रिलीज होगी। बीते दिनों तापसी की शाबाश मिट्ठू फिल्म पर्दे पर आई थी, जिसके कारण पनन्नू की बहुत फजीहत हुई थी।

‘खेल और खिलौनों की दुनिया में भारत उभरती हुई ताकत’: PM मोदी ने उधम सिंह को दी श्रद्धांजलि, बताया – आयुर्वेदिक दवाओं की हो रही रिकॉर्ड बिक्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 31 जुलाई 2022 (रविवार) को 91 वीं बार ‘मन की बात’ (Mann Ki Baat) की है। इस बार मन की बात को उन्होंने 15 अगस्त को आने वाली आज़ादी की 75वीं वर्षगाँठ के चलते विशेष बताया है। मोदी ने अपने सम्बोधन की शुरुआत देश के लिए सब कुछ बलिदान कर देने वाले क्रांतिकारी उधम सिंह के बलिदान दिवस पर उन्हें याद कर के की।

प्रधानमंत्री मोदी ने रेल मंत्रालय के ‘आज़ादी की रेलगाड़ी’ नाम के अभियान की सराहना की। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत भारतीय रेल मंत्रालय स्वतंत्रता अभियान में रेलवे की भूमिका को लोगों तक पहुँचाने का प्रयास कर रहा है। इसके उदाहरण के तौर पर उन्होंने अब नेताजी सुभाष जंक्शन के नाम से प्रसिद्ध झारखंड का गोमो स्टेशन बताया, जहाँ से नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंग्रेजों को चकमा दे कर कालका मेल से कहीं और चले गए थे। इसी के साथ उन्होंने UP के काकोरी और तमिलनाडु के थुडुकुड़ी स्टेशनों के इतिहास की भी चर्चा की।

‘मन की बात’ में मोदी ने आगे आज़ादी के अमृत महोत्स्व में 13 से 15 अगस्त तक चलने वाले ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का भी जिक्र किया। उन्होंने हर व्यक्ति से अपने घरों पर तिरंगा लगाने की भी अपील की। सम्बोधन में मोदी ने 2 अगस्त को राष्ट्रध्वज निर्माता पिंगली वेंकैया की जयंती के बारे में बताया।

मोदी ने दुनिया भर में बढ़ती आयुर्वेदिक दवाओं की माँग के बारे में भी बताया। उन्होंने आयुष उत्पादों की बिक्री में रिकॉर्ड बढ़त होने की जानकारी दी।

मोदी ने मधुमखी पालन और शहद उत्पादन को किसानों की आय में बढ़ोत्तरी करने वाला कदम बताया।

मोदी ने देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित होने वाले मेलों में हर किसी से भाग लेने की भी अपील की। इस दौरान उन्होंने हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में होने वाले मेलों का जिक्र किया। मेलों को उन्होंने ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ अभियान में सहायक बताया।

मोदी ने खिलौनों के निर्यात में भारत को उभरती हुई शक्ति बताया और खिलाडियों के वैश्विक स्तर पर प्रदर्शन में सुधार पर ख़ुशी जताई।

चित्र साभार- @PMOIndia

इसके अलावा मोदी ने क्लास 10 और 12 की परीक्षा में सफल हुए सभी छात्रों को बधाई और भविष्य के लिए शुभकामना भी दी है।

संजय राऊत के घर ED की छापेमारी, समन पर हाजिर ना होकर दी थी गिरफ्तारी की चुनौती: रेड के बाद बाला साहेब की खाई कसम, कहा- निर्दोष हूँ

पात्रा चॉल जमीन से संबंधित 1,034 करोड़ रुपए घोटाले (Patra Chawl Land Scam) मकी जाँच कर रही ED (प्रवर्तन निदेशालय) ने रविवार (31 जुलाई 2022) को शिवसेना नेता संजय राऊत (Sanjay Raut) के मुंबई में भांडुप स्थित घर पर छापेमारी की।

छापेमारी और संजय राऊत से पूछताछ पिछले 4 घंटों से अधिक समय से जारी है। ED की कार्रवाई पर संजय राऊत ने कहा है कि वे मर सकते हैं, पर समर्पण नहीं करेंगे। उन्होंने बाला साहब ठाकरे की कसम खाते हुए खुद को निर्दोष बताया।

ED की टीम रविवार की सुबह ही संजय राऊत के आवास ‘मैत्री’ पर पहुँच गई। उनके साथ मुंबी पुलिस के साथ-साथ पैरामिलिट्री के जवान भी हैं। इस कार्रवाई के विरोध में शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के कई कार्यकर्ता मौके पर पहुँचे और भाजपा तथा ED के खिलाफ नारेबाजी की।

राऊत ने कहा, “बाला साहेब की कसम मेरा इस मामले से कोई वास्ता नहीं है। हमने बाला साहेब ने लड़ना सिखाया है और हमारी लड़ाई जारी रहेगी। मैं शिवसेना नहीं छोड़ने वाला भले ही मेरे खिलाफ झूठे सबूतों के आधार पर झूठी कार्रवाई की जा रही है। भले मैं मर जाऊँ पर झुकने के लिए तैयार नहीं।” संजय राऊत ने अपनी लड़ाई शिवसेना और महाराष्ट्र के लिए बताई है।

बता दें कि 1 जुलाई 2022 को ED ने उन्हें पूछताछ के बुलाया था और उस दौरान लगभग 10 घंटे तक पूछताछ की थी। तब संजय राऊत ने कहा था, “मैंने पूरा सहयोग करते हुए उनके सभी सवालों का जवाब दिया। अगर वे मुझे बुलाएँगे तो मैं फिर जाऊँगा।”

चित्र साभार- @rautsanjay61

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शिवसेना के शिंदे गुट ने ED की इस कार्रवाई का समर्थन किया है। शिवसेना विधायक संजय शिरसाट ने कहा, “जो व्यक्ति गुवाहाटी से हमारी लाश लाने की बात करता था वो आज परेशान है। भगवान के घर देर है पर अंधेर नहीं। जैसी करनी, वैसी भरनी”

गौरतलब है कि पात्रा चॉल घोटाले में 5 अप्रैल 2022 को ED ने संजय राऊत और उनकी पत्नी वर्षा राऊत से जुड़ी 11 करोड़ रुपए से अधिक की सम्पति कुर्क कर ली थी। ED ने उन्हें 28 जून को पेश होकर जवाब देने के लिए कहा गया था, पर वो उपस्थित नहीं हुए। तब उन्होंने खुद को गिरफ्तार करने की चुनौती भी दी थी। राऊत को सबसे हालिया समन 27 जुलाई को भेजा गय था।

पैसों की जानकारी पार्टी में सभी टॉप नेताओं को, जो बरामद हुआ… वह सिर्फ छोटा सा हिस्सा: पार्थ चटर्जी ने सब उगल दिया

पार्टी से सस्पेंड कर दिए गए TMC नेता पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) सुर्खियों में हैं। ममता सरकार में मंत्री रहे पार्थ की करीबी अर्पिता मुखर्जी के अलग-अलग फ्लैटों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी में करोड़ों रुपए नकद और सोना बरामद किया। अब पार्थ चटर्जी का कहना है कि इन पैसों की जानकारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) में सभी शीर्ष नेताओं को थी। आपको बता दें कि TMC की सबसे बड़ी नेता और सर्वेसर्वा ममता बनर्जी हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) को पूछताछ में अर्पिता मुखर्जी ने बताया था कि पार्थ उनके फ्लैटों को बैंक की तरह प्रयोग करते थे। फिलहाल पार्थ चटर्जी गिरफ्तार हैं। पूछताछ में उन्होंने बताया है कि उनके द्वारा लिए जा रहे पैसों की जानकारी पार्टी में सभी शीर्ष नेताओं को थी।

पैसों के बारे में TMC के टॉप लीडर को सब पता

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्टी से सस्पेंड होने और मंत्री पद से हटा दिए जाने के बाद पार्थ चटर्जी ने जाँचकर्ताओं को खुद ही सब कुछ बताना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा:

“स्कूल में अध्यापक बनाने के नाम पर कैंडिडेट्स से लिए जा रहे पैसों की जानकारी पार्टी में शीर्ष नेतृत्व सहित बाकी सबको थी। मैंने तो सिर्फ पैसों को अपने पास रखा था। न ही मैंने किसी कैंडिडेट से पैसे लिए और न ही माँगे। यह पार्टी का एक आदेश था, जिसे मैंने माना। पैसे कई अन्य नेताओं ने भी लिए, जो सब मुझे रखने को दे दिया गया था।”

जो मिला वो तो एक छोटा सा हिस्सा

पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) ने आगे कहा, “जो पैसे मेरे पास रखे हुए थे, उसमें से सैकड़ों करोड़ रुपए पार्टी ने प्रयोग कर डाले। मेरे पास जो बरामद हुआ, वह तो एक छोटा सा हिस्सा है। मेरे अलावा कई अन्य नेताओं ने अपने पैसे से अर्पिता मुखर्जी के नाम पर जमीनें खरीदी हैं। सबके पैसे मेरे पास रखने के लिए पार्टी ने लम्बा समय विचार करने में लिया था। अब पार्टी द्वारा मुझे मेरे हाल पर छोड़ दिया गया है।”

टीचरों के अलावा रेलवे में नौकरियों के लिए भी पैसे

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक पार्थ चटर्जी ने जाँचकर्ताओं को जानकारी दी है कि न सिर्फ टीचरों बल्कि रेलवे की नौकरियों के लिए भी TMC नेताओं ने कैंडिडेट्स से पैसे लिए हैं। उन्होंने बताया, “मेरा काम दूसरे नेताओं द्वारा बनाए गए कागजातों पर साइन करने तक सीमित था। मजेरहाट इलाके में बाकायदा ऐसी डील करने के लिए ऑफिस खोले गए हैं। रेलवे की नौकरियों के नाम पर भी पैसे जमा किए गए हैं।”

पार्थ चटर्जी के अनुसार तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) जब सत्ता में नहीं थी, तब भी वो पैसे लेकर नौकरी लगा देने के खेल खेलती थी। तृणमूल को पैसे देकर रेलवे में कई लोगों ने नौकरी जॉइन की है। पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) की मानें तो शिक्षा और रेलवे के अलावा भी कई अन्य विभागों में पैसे लेकर नौकरी देने का भ्रष्टाचार तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) ने किया है।

अर्पिता को उसके पैरों पर खड़ा करना चाहता था

अपनी करीबी अर्पिता मुखर्जी के अलग-अलग फ्लैटों में मिले करोड़ों रुपए को लेकर पार्थ चटर्जी ने अलग ही कहानी बयां की। पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) ने बताया:

“मैं अर्पिता को आत्मनिर्भर बनाना चाहता था। मैं चाहता था कि वो मॉडलिंग और फिल्म इंडस्ट्री में अपना खुद का मुकाम हासिल करे। पार्टी को अपने ढेर सारे पैसे छिपाने के लिए एक सेफ जगह की तलाश थी। इस काम के बदले अर्पिता को कमीशन देने का वादा किया गया था। कई बड़े अधिकारी अर्पिता के नाम पर लिए गए घरों का दौरा भी कर चुके हैं।”

पहली बार नहीं लगा पैसे के बदले नौकरी का आरोप

गौरतलब है कि नौकरी के बदले पैसे का आरोप तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) पर पहली बार नहीं लगा है। अप्रैल 2022 में भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल ने TMC कार्यकर्ताओं पर मेडिकल कॉलेजों में ग्रुप बी, सी कैटेगरी में नौकरी दिलाने का झाँसा देकर पैसे लेने का आरोप लगाया था। भाजपा नेता के मुताबिक तब टीएमसी पार्षद ने लगभग 530 ऐसे लोगों को 50 हजार रुपए से 1 लाख रुपए के बीच में ठगा था, जो गरीब परिवारों से आते थे।

दुकान में काम करने वाली 2 दलित बहनों से शहाबुद्दीन ने की अश्लील हरकत, वीडियो से किया ब्लैकमेल, बात नहीं मानी तो कर दिया वायरल

उत्तर प्रदेश के मऊ (Mau, Uttar Pradesh) से दो दलित बहनों से सरेआम छेड़खानी और अश्लील हरकत करने का वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो का संज्ञान लेते हुए यूपी पुलिस ने आरोपित मोहम्मद शहाबुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया है।

मामला मोहम्मदाबाद थाना क्षेत्र के आईमार्ट कॉम्पलेक्स का है। इस कॉम्प्लेक्स की एक दुकान में दो दलित बहनें काम करती थीं। एक दिन वे 9:30 बजे दुकान खुलने से थोड़ी देर पहले ही वहाँ पहुँच गईं और दुकान खुलने का इंतजार करते हुए गेट पर खड़ी हो गईं।

इसी दौरान बगल में ही जोया कलेक्शन नाम की दुकान चलाने वाला शहाबुद्दीन उन लड़कियों से छेड़छाड़ और अश्लील हरकत करने लगा। उसकी सारी हरकत कॉम्प्लेक्स के सीसीटीवी में रिकॉर्ड हो गई। सीसीटीवी फुटेज में घटना की तारीख 20 जून 2022 दिख रही है।

इतना नहीं, नदवा सराय निवासी शहाबुद्दीन ने इस हरकत के बाद लड़कियों को धमकाया भी। शहाबुद्दीन ने उन दोनों युवतियों से यह भी कहा कि अगर इस बात उन्होंने किसी से बताई तो उनकी वीडियो वह वायरल कर देगा। इसके साथ ही उसने युवतियों के दुकान मालिक से शिकायत कर उन्हें नौकरी से निकलवाने की भी धमकी दी।

धमकी के बाद डरी-सहमी युवतियों ने इसके बारे में किसी को कुछ नहीं बताया। इसके बाद शहाबुद्दीन ने उस वीडियो को दिखाकर उन्हें ब्लैकमेल करने का प्रयास करने लगा। जब लड़कियों ने उसकी बात नहीं मानी तो उसने वीडियो को वायरल कर दिया।

वीडियो जब युवतियों के कस्बे में भी सामने आया तो उन्होंने घटना के बारे में अपनी माँ को सारी बात बताई। इसके बाद वे भाजपा नेता एवं पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष लालजी वर्मा को इसकी जानकारी दी। वर्मा युवतियों को लेकर थाने गए और मामला दर्ज करवाया।

इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गुरुवार (28 जुलाई 2022) की देर रात तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। अपर पुलिस अधीक्षक त्रिभुवन नाथ त्रिपाठी ने बताया कि आरोपित को जेल भेजने की कार्रवाई की है।

‘बच्चों को नमाज पढ़ने के लिए छुट्टी क्यों नहीं देते हो’- झारखंड के हिंदू शिक्षक रमेंद्र दुबे को अकबर खान ने विद्यार्थियों के सामने मारा, मंत्री का है करीबी

झारखंड (Jharkhand) के मुस्लिम बहुल इलाकों के स्कूलों में रविवार की जगह शुक्रवार को साप्ताहिक छुट्टी करने के बाद अब नमाज पढ़ने के लिए छुट्टी नहीं देने पर एक शिक्षक को पीटने को मामला सामने आया है। सत्ताधारी पार्टी के एक नेता ने स्कूल में घुसकर बच्चों के सामने शिक्षक को पीट दिया।

मामला पश्चिमी सिंहभूम जिले के गोइलकेरा प्रखंड का बताया जा रहा है। यहाँ के सरकारी स्कूल के एक शिक्षक कहना है कि बच्चों को नमाज पढ़ने की छुट्टी नहीं देने का आरोप लगाकर उन्हें पीटा गया। शिक्षक की पिटाई करने वाला सीएम हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) का स्थानीय नेता अकबर खान है।

पीड़ित शिक्षक रमेंद्र दुबे है। उनका कहना है कि जब वह मामले की शिकायत लेकर शुक्रवार (29 जुलाई) को गोइलकेरा थाना में गए तो सत्ताधारी पार्टी का नेता होने के कारण उनकी शिकायत नहीं ली गई। अगले दिन शनिवार (30 जुलाई) को उनसे शिकायत ली गई और 24 घंटे के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई।

कहा जा रहा है कि पुलिस ने FIR लिखने के लिए शिकायत दोबारा लिखवाई और उसमें से नमाज सहित अन्य बातों को हटवा दिया। शिक्षक दुबे ने झामुमो नेता अकबर खान से अपनी जान को भी खतरा बताया है और सुरक्षा की माँग की है। शिक्षक का कहना है कि अकबर राज्य के मंत्री जोबा मांझी का करीबी है।

पिटाई के बाद जब शिक्षक रमेंद्र दुबे ने अकबर से अपनी गलती पूछी तो उसने कहा कि बच्चों को 11.30 बजे नमाज पढ़ने के लिए छुट्टी क्यों नहीं देते हो। दुबे का कहना है कि उन्होंने बच्चों को नमाज पढ़ने से कभी नहीं रोका, लेकिन अकबर ने कहा कि बच्चों ने ऐसा कहा है।

उधर अकबर खान का कहना है कि मारपीट की कोई घटना नहीं हुई है। अगर 11.50 में छुट्टी होती है तो कोई बच्चा पूजा करने या नमाज पढ़ने या घर जाना चाहता है तो उसे जाने दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें राजनीतिक षड्यंत्र के तहत फँसाया जा रहा है।