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बिंद्यारानी ने देश को दिलाया चौथा मेडल, गोल्ड जीत राष्ट्रगान पर हुईं भावुक मीराबाई: Commonwealth Games 2022 में भारत की धमाकेदार शुरुआत

Commonwealth Games 2022 में भारत को चौथा मेडल मिल गया है। भारोत्तोलक बिंद्यारानी देवी ने महिलाओं के 55 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक (Bindyarani Devi wins CWG 2022 Silver medal) जीता।

बिंद्यारानी देवी (Bindyarani Devi) ने सिल्वर मेडल के लिए कुल 202 किलोग्राम (86 किलोग्राम + 116 किलोग्राम) भार उठाया। क्लीन एंड जर्क लिफ्ट में 116 किलोग्राम बिंद्यारानी देवी का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा।

Commonwealth Games 2022 में महिलाओं के 55 किलोग्राम वर्ग में नाइजीरिया के ऐडिजैट एडेनिके ओलारिनोय (Adijat Adenike Olarinoye) ने गोल्ड मेडल जीता। जबकि फ्रायर मोरो (Fraer Morrow) तीसरे स्थान पर रह कर कांस्य पदक विजेता बनीं।

इससे पहले इंग्लैंड के बर्मिंघम में चल रहे कॉमनवेल्थ खेलों (Commonwealth Games 2022) में भारत की भारोत्तोलक मीराबाई चानू (Mirabai Chanu) ने देश को पहला स्वर्ण पदक (Gold Medal) दिलाया है। चानू ने यह पदक 49 किलोग्राम वर्ग में जीता है। यह 2022 के कॉमनवेल्थ खेलों में भारत को तीसरा पदक है। मीराबाई ने यह पदक शनिवार (30 जुलाई 2022) को जीता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक मीराबाई ने क्लीन एन्ड जर्क के अपने पहले ही प्रयास में 109 KG वजन उठाया। उनकी प्रतिद्वंद्वी मॉरीशस की मारी रानाइवोसोआ दूसरे और कनाडा की हानाह तीसरे नंबर पर रहीं। कॉमनवेल्थ खेलों में 27 साल की मीराबाई चानू का यह लगातार दूसरा स्वर्ण पदक है। पदक जीतने के बाद मीराबाई ने कहा, “मुझे ख़ुशी है कि मैंने देश के लिए गोल्ड मेडल जीता। मेरी जीत के बाद बज रहे राष्ट्रगान ने मुझे भावुक कर दिया।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मीराबाई चानू की इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी है। उन्होंने लिखा, “हर भारतीय को आप पर गर्व है। आप कई लोगों, ख़ास कर खिलाड़ियों की प्रेरणा हैं।”

गौरतलब है कि इससे पहले भारत के 2 और खिलाड़ी बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेल 2022 में पदक जीत चुके हैं। भारत के लिए पदक की शुरुआत संकेत महादेव सरगर ने 55kg की वेट लिफ्टिंग में रजत पदक से की थी। यह पदक उन्होंने एक दिन पहले 30 जुलाई 2022 को जीता था। चोट लगने के कारण वो थोड़े से अंतर से स्वर्ण पदक से चूक गए थे।

भारत को दूसरा पदक भी वेटलिफ्टिंग में ही आया था। भारत के वेटलिफ्टर गुरुराज पुजारी ने पुरुषों के 61 किलोग्राम वर्ग के मुकाबले में कांस्य पदक जीता था। गुरुराज का भी लगातार दूसरे कॉमनवेल्थ खेलों में दूसरा पदक है।

बंगाल में अब गाड़ी में कैश, धराए कॉन्ग्रेस के 3 MLA, एक ने कहा था – ‘देश खून से लथपथ हो जाएगा’: इंडिया टुडे कर रहा CM ममता के लिए बैटिंग

झारखंड कॉन्ग्रेस (Jharkhand Congress) के तीन विधायकों को भारी मात्रा में कैश के साथ पश्चिम बंगाल में पकड़ा गया है। पुलिस ने बताया कि विधायकों के पास इतनी रकम मिली है कि इसकी गिनती के लिए मशीन मँगवाया गया है। उधर, इंडिया टुडे के कंसल्टिंग एडिटर जयंतो घोषाल बंगाल की ममता बनर्जी का लगातार बचाव कर रहे हैं। इसी काम के लिए उन्हें बंगाल सरकार द्वारा नियुक्त करने की जानकारी सामने आई है।

हावड़ा की एसपी स्वाती भंगालिया ने बताया कि जिन तीन विधायकों को पकड़ा गया है, वो हैं झारखंड के जामताड़ा से विधायक इरफान अंसारी, खिजरी से विधायक राजेश कच्छप और कोलेबिरा से विधायक नमन बिक्सल।

शनिवार (31 जुलाई 2022) की देर रात हावड़ा पुलिस को कैश से भरी गाड़ियों के जाने की सूचना मिली। हालाँकि, ये नहीं पता चला कि इनमें कौन लोग हैं। पुलिस ने तीनों विधायकों की गाड़ियों को रोका और उनकी तलाशी ली तो उसमें भारी मात्रा में कैश बरामद किया गया और पता चला कि ये तीनों विधायक हैं। इसके बाद पुलिस ने ड्राइवर सहित कार में सवार पाँच लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया।

बता दें कि झारखंड के जामताड़ा से कॉन्ग्रेस (Congress) के विधायक इरफान अंसारी वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने अग्निपथ योजना का विरोध करते हुए कहा था कि ‘देश खून से लथपथ हो जाए, लेकिन अग्निपथ लागू नहीं होने देंगे।’

उन्होंने पैगंबर मुहम्मद को लेकर जुमे की नमाज के बाद राँची में हुए दंगे में मारे गए दंगाइयों का समर्थन भी किया था। इरफान अंसारी ने दंगाइयों पर गोली चलाने वाले पुलिसकर्मियों का विरोध करते हुए मृतक दंगाइयों के परिजनों को 50 लाख रुपए देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की माँग थी। 

इस घटना के बाद झारखंड भाजपा के महासचिव आदित्य साहू ने कॉन्ग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “जब से उनकी सरकार सत्ता में आई है, भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। इससे पहले भी झारखंड में अधिकारियों के घरों में बड़ी मात्रा में नकदी पकड़ी गई थी। वे जनता की गाढ़ी कमाई का इस्तेमाल दूसरे कामों में करते हैं। पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और यह सामने आया।”

उधर, झारखंड कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा, “जब तक जाँच नहीं हो जाती, तब तक इस बारे में बात करना मुनासिब नहीं होगा, लेकिन देश के हालात को देखते हुए… पकड़े गए विधायक मामले को बेहतर ढंग से समझा सकते हैं। बहरहाल घटना दुखद है। हम अपने आलाकमान को एक रिपोर्ट सौंपेंगे।”

इंडिया टुड़े के कंसल्टिंग एडिटर जयंतो घोषाल को साल 2020 में ममता बनर्जी की सरकार ने सूचना विभाग में लाइजनिंग ऑफिसर के रूप में नियुक्त किया था। घोषाल का काम केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के साथ राज्य सरकार के लिए लाइजनिंग करना है। इसके साथ ही राज्य के कार्यों और उसकी नजरिए को मीडिया के जरिए देश के सामने पेश करना है।

एक ट्विटर यूजर ने घोषाल बंगाल सरकार द्वारा घोषाल की की नियुक्ति का नोटिफिकेशन ट्विटर पर शेयर किया है। इसमें कहा गया है घोषाल को इसके लिए हर महीने 1.5 लाख रुपए दिए जाएँगे और उनका कार्यालय दिल्ली में पश्चिम बंगाल के रेजिडेंट कमिश्नर के कार्यालय में होगा।

जयंतो घोषाल ने यह इंडिया टुडे के पैनल डिस्कशन में यह काम किया भी। बहस के दौरान घोषाल ने हाल में TMC नेता पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी और उनकी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के यहाँ से भारी मात्रा में कैश और जेवरात की बरामदगी पर उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का बचाव करने की कोशिश की।

डिबेट में घोषाल ने कहा कि उन्हें यकीन है कि सीएम एसएससी घोटाले और उसमें अपने मंत्री पार्थ चटर्जी एवं उनके सहयोगियों की मिलीभगत से बेखबर थीं। बता दें कि पार्थ चटर्जी को मंत्रालय और पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया था, जब ईडी ने उनकी ‘करीबी’ अर्पिता मुखर्जी से सोने और आभूषणों के साथ 50 रुपये से अधिक नकद बरामद किया था, और यह माना जाता है कि अवैध धन शिक्षा में एसएससी भर्ती घोटाले की आय है। विभाग जब चटर्जी मंत्री थे।

इस मुद्दे पर एक पैनल चर्चा के दौरान इंडिया टुडे के एंकर राजदीप सरदेसाई से बात करते हुए सलाहकार संपादक जयंतो घोषाल ने कहा, “मैं पूरी तरह से आश्वस्त हूँ कि इसके बारे में ममता बनर्जी को नहीं पता था।” अपने दावे को सही ठहराते हुए उन्होंने कहा, “क्योंकि मैंने समझने की कोशिश की, मैं कल कलकत्ता में था, मैंने उनसे बात की। वह बहुत परेशान थीं और उन्होंने कार्रवाई करने में समय इसलिए लिया, क्योंकि वह पार्थ का समर्थन कर रही थी, बल्कि इसलिए कि वह समझने की कोशिश कर रही थी कि क्या हो रहा है।”

‘तिरंगे को ऊँचा देखना मेरा सपना था’ : संकेत के बाद अब गुरुराज ने भारत को दिलाया CWG में पदक, 1 दिन में दूसरी उपलब्धि

इंग्लैंड के बर्मिंघम में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 के दूसरे दिन भारत के हिस्से दो पदक आ चुके हैं। ये दोनों पदक वेटलिफ्टिंग में आए हैं। आज (30 जुलाई 2022) सुबह जहाँ भारत के संकेत महादेव सरगर ने 55 किग्रा वेट उठाने में सिल्वर पदक जीता था। वहीं अब गुरुराज पुजारी ने 61 किग्रा के इवेंट में कास्य पद जीता है।

जानकारी के मुताबिक. गुरुराज ने स्नैच में 118 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 151 किग्रा का भार उठाया। उन्होंने 269 किलो का कुल भार उठाकर कास्य को जीता जबकि मलेशिया के अजनिल बिन ने 285 भारत उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वहीं पापुआ न्यू गिनी के मोरिया बारू ने 273 किलोग्राम वजन उठाकर सिल्वर मेडल जीता।

बता दें कि भारत को दूसरा मेडल दिलाने वाले गुरुराज 29 साल के हैं। उनका जन्म 15 अगस्त 1992 को कुंडापुरा में हुआ था। वह कर्नाटक के उडुपी जिले के रहने वाले हैं। साल 2018 में भी उन्होंने गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ खेलों में 56 किलो वर्ग में भारत को सिल्वर पदक दिलाया था। अब दूसरी दफा ऐसा मौका है कि देश के नाम उन्होंने मेडल जोड़ा। उनकी इस उपलब्धि के बाद गृहमंत्री अमित शाह और पीएम मोदी ने भी उन्हें बधाई दी।

उन्होंने कहा, “मैं बहुत खुश हूँ। आज का दिन अच्छा था। संकेत ने सिल्वर जीता और मैंने ब्रॉन्ज। ये देश के लिए दूसरा मेडल है। मैं अच्छा कर सकता था। मैं हाल में बीमार हो गया था और रिकवर करके अब सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास किया। मैं अपना मेडल अपनी पत्नी और समर्थकों को समर्पित करता हूँ।” उन्होंने कहा, “मैं शब्दों में नहीं समझा सकता। तिरंगे को ऊँचा देखना मेरा सपना था।”

गुरुराज से पहले वेटलिफ्टर संकेत महादेव ने 55 किलो की वेट लिफ्टिंग में देश को रजत पदक दिलवाया था। बर्मिंघम में हो रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टर संकेत ने पहले प्रयास में 113 किग्रा भार उठाया था और दूसरे राउंड में 135 किग्रा वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया था।

संकेत के कोहनी में चोट आने की वजह से वह गोल्ड लाते लाते चूक गए थे और केवल 248 किलोग्राम वजन उठा पाए थे। इस इवेंट में मलेशिया के अनीक कासदान ने 1 किलो ज्यादा उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। वहीं श्रीलंका के दिलांका कुमारा ने 225 किलोग्राम उठाकर कास्य पदक को जीता था।

दरगाहों से हिंदुओं ने मोड़ा मुँह तो गैर इस्लामी हुआ ‘सिर तन से जुदा’, उस PFI की कुर्बानी भी कबूल जो भारत को मुस्लिम मुल्क बनाने का हथियार

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल (Ajit Doval) शनिवार (30 जुलाई 2022) को एक ऐसे मंच पर दिखे, जिस पर मजहबी नुमाइंदे मौजूद थे। मौका था अंतर धार्मिक सम्मेलन का। आयोजन अखिल भारतीय सूफी सज्जादनशीन परिषद ने किया था।

इस सम्मेलन के दौरान ‘सिर तन से जुदा’ का नारा गैर इस्लामी घोषित किया गया। कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर प्रतिबंध लगाने की माँग हुई। वैसे जो नारा काफिरों में दहशत पैदा करने के लिए, हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के लिए इस्तेमाल होना सामान्य है, उसको लेकर यह बात न तो डोभाल ने कही और न ही किसी हिंदू ने। जिस कट्टरपंथी संगठन के जरिए मुस्लिम युवाओं को हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा, 2047 तक काफिरों को घुटने पर लाकर भारत को इस्लामी मुल्क बनाने के मंसूबें हैं, उस पर प्रतिबंध की बात भी न तो डोभाल ने कही और न किसी हिंदू ने। यह बात सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कही जो इस सम्मेलन का आयोजन करने वाली परिषद के अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा, “सर तन से जुदा हमारा नारा नहीं है। यह इस्लाम विरोधी नारा है।” उन्होंने यह भी कहा कि यदि पीएफआई के खिलाफ सबूत हैं तो उस पर प्रतिबंध लगाया जाए।

इस दौरान डोभाल ने भी कहा कि कुछ ऐसे तत्व है जो माहौल खराब कर भारत की तरक्की को बाधित कर रहे हैं। वे धर्म और विचारधारा के नाम पर नफरत पैदा कर हिंसा चाहते हैं। देश के साथ विदेश में भी इसका असर दिख रहा है।

वैसे डोभाल चाहते तो इस मौके का इस्तेमाल यह बताने के लिए भी कर सकते थे कि कन्हैया लाल का गला काटने वाले कौन थे? किशन से लेकर प्रवीण नेट्टारू तक की हत्या करने वाले कौन हैं? फुलवारी शरीफ से भारत को इस्लामी मुल्क बनाने की साजिश रचने वालों से लेकर मुस्लिम पट्टी बनाने तक के मंसूबे बाँधने वाले कौन हैं? नूपुर शर्मा के बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत कर इस्लामी मुल्कों तक ले जाने वाला कौन है? पर शायद एनएसए होना खुलकर उनके बोलने के आड़े आ गया होगा। वैसे डोभाल का एक अपना अलग ही प्रभाव है। उनके बिना बोले भी काफी कुछ हो जाता है। जब उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़के तो यह डोभाल ही थे जिनके सड़क पर दिखने के बाद राजधानी का यह इलाका शांत हो गया था। उससे पहले इस इलाके में हिंदुओं को लक्षित कर हिंसा हुई और पुलिस असहाय दिख रही थी। इसी तरह वैश्विक कोरोना संक्रमण के दौरान जब मरकज का संकट खड़ा हुआ था तो ये डोभाल ही थे, जिनके मौलाना साद के साथ दिखने के बाद मरकज खाली हो गया था। इसलिए, आप यह मान सकते हैं कि उनकी मौजूदगी ने यह असर डाला होगा कि मजहबी नुमाइंदे सिर तन से जुदा से पल्ला झाड़ने लगे, पीएफआई को बैन करने की बात करने लगे।

डोभाल का उपस्थित होना मजहबी नुमाइंदों के सरेंडर की एक वजह हो सकती है। एकमात्र वजह कतई नहीं। दरअसल, यह हिंदुओं की उस बेरुखी का असर है जिससे मुस्लिमों के लिए भविष्य का संकट खड़ा होता दिख रहा है। मुस्लिमों के आर्थिक बहिष्कार की अरसे से बात हो रही है। यह पूरी तरह आज भी मुमकिन नहीं हो पाया है। लेकिन थोड़े से ही पैमाने पर अब इसका असर दिखने लगा है।

हाल ही में यह खबर आई थी कि अजमेर में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर सन्नाटा पसरा हुआ है, क्योंकि यहाँ आने वाले हिंदुओं की संख्या में भारी कमी आई है। यह तथ्य इस दरगाह के खादिमों की करतूतें सामने आने के बाद सामने आया था। वीडियो सामने आए थे जिसमें दरगाह के बाहर भड़काऊ नारे लगे थे। नूपुर शर्मा की हत्या के लिए उकसाया गया था। पीएफआई से खादिमों का संपर्क सामने आया था। यह बात भी सामने आई थी कि उदयपुर में कन्हैया लाल का गला काटने के बाद मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद पनाह लेने के लिए अजमेर दरगाह के ही एक खादिम के पास आ रहे थे, लेकिन रास्ते में पकड़े गए।

ऐसा नहीं है कि यह असर केवल अजमेर तक ही सीमित है। ऑपइंडिया ने अपनी पड़ताल में पाया था कि दिल्ली में हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर आने वाले हिंदू भी करीब 60 फीसदी तक कम हो चुके हैं। दरगाह के दीवान अली मूसा निजामी ने हमें बताया था, “पहले यहाँ खूब हिंदू आते थे। हर रोज। दोपहर के 2 बजे से रात के 11 बजे तक दरगाह पर आने वालों में खूब हिंदू होते थे। लेकिन अब इक्का.दुक्का हिंदू ही आते रहते हैं। उन्होंने बताया कि पहले यहाँ हिंदू भंडारे भी करते थे। करीब.करीब रोज। अन्न.पैसा बाँटते थे। लेकिन अब वैसी स्थिति नहीं रही।”

इसी तरह के असर की रिपोर्टें देश के अन्य हिस्सों के दरगाहों और मजारों से भी आई है। इन जगहों की रौनक ही हिंदुओं से थी। हिंदुओं के पैसों से ही इनके घरों का चुल्हा जलता है। हिंदुओं के पैसों से ही वे काफिरों का सर तन से जुदा करने का संदेश फैलाते हैं। हिंदुओं के पैसों से ही वे हिंदुओं को घुटने पर लाकर भारत को इस्लामिक मुल्क बनाने की साजिश पर काम करते हैं। उनके इस आर्थिक स्रोत पर मार केवल दरगाह की घटती कमाई से ही नहीं पड़ी है। कर्नाटक में जिस प्रवीण नेट्टारू को कुल्हाड़ी से काट डाला गया, उन्होंने हिंदुओं के लिए चिकन शॉप खोली थी। यह काफी लोकप्रिय हुआ जो कट्टरपंथियों को सुहा नहीं रहा था। ऐसे छोटे प्रयास भी इस्लामी कट्टरपंथ के आर्थिक स्रोत पर वार कर रहे हैं।

हालाँकि ऐसा नहीं है कि पूर्ण रूप से हिंदुओं ने इनका आर्थिक बहिष्कार कर दिया है। वह संभव भी नहीं है, क्योंकि इस देश में हिंदुओं की एक जमात ऐसी भी है जिसे सेकुलर कीड़े ने काट रखा है। हम इस लिबरल जमात से उम्मीद कर भी नहीं सकते। हम अजीत डोभाल से ही उम्मीद लगाकर नहीं बैठ सकते। हम इसी भरोसे नहीं बैठ सकते कि सरकार पीएफआई पर प्रतिबंध लगा देगी। वैसे भी प्रतिबंध यदि इनका इलाज होता तो सिमी के बाद पीएफआई नहीं आता। दुनिया भर के आतंकी संगठन खत्म हो गए होते। प्रतिबंध इनका इलाज है ही नही। आप प्रतिबंध लगाएँगे कल ये किसी और नाम से खड़े हो जाएँगे। फिर से हिंदुओं को काटेंगे। भारत को इस्लामी मुल्क बनाने के अपने मिशन को आगे बढ़ाएँगे। इसलिए जरूरी है कि दरगाहों से हमारी यह बेरुखी बनी रहे। जरूरी है कि प्रवीण नेट्टारू की दुकान जैसे प्रयास हर गली-मोहल्ले में हो। छिटपुट प्रयासों ने उन्हें आज पीएफआई की कुर्बानी देने को मजबूर किया है। यह दबाव बना रहेगा तो वे कट्टरपंथ के हर उस अध्याय की कुर्बानी देने को मजबूर हो जाएँगे, जिसका प्रसार ये आसमानी किताब की रोशनी में करते हैं।

‘वो बार सिर्फ हमारा है, इसमें ईरानी परिवार का कोई अधिकार नहीं’ : कॉन्ग्रेस नेताओं के झूठ की खुली पोल, बार मालिकों ने आरोपों को बताया ‘निराधार’

गोवा ‘सिली सोल्स’ बार के मालिकाना अधिकार मामले में अब कॉन्ग्रेस के झूठ की पोल खुलने लगी है। कॉन्ग्रेस अब तक जहाँ दावे कर रही थी कि बार की मालकिन स्मृति ईरानी की बेटी जोएश ईरानी हैं। वहीं गोवा के स्थानीय डगामा परिवार ने दावा किया है कि वो बार उनका है और उस पर सिर्फ उनका अधिकार है। इसका ईरानी फैमिली से कोई लेना-देना नहीं है।

29 जुलाई 2022 को बार मालिक मर्लिन एंथनी डगामा और उनके बेटे डीन डगामा ने एक्साइज कमिश्नर नारायण एम गढ़ के शो कॉज नोटिस पर अपना ये जवाब दिया है। उन्होंने इसमें स्पष्ट कहा है कि उनके इस बिजनेस में उनके साथ कोई साथी नहीं है और उन्होंने किसी भी तरह एक्‍साइज ड्यूटी एक्‍ट 1964 के नियमों का कोई उल्‍लंघन नहीं किया है।

उन्होंने गोवा के एक्टिविस्ट आयरेज रॉड्रिगेज द्वारा की गई शिकायत को पूर्ण रूप से निराधार बताया। साथ ही जानकारी दी कि साल 2021 में एंथनी डगामा की मृत्यु के बाद बार का लाइसेंस कानूनी ढंग से उनके उत्तराधिकारी यानी कि डीन को दिया जाना था। ऐसे में जब इस वर्ष डीन एंथनी ने अपना लाइसेंस रीन्यू कराने को दिया तो उन्होंने साथ में एंथनी की मृत्यु का प्रमाण पत्र भी जमा करवाया। तभी, उनसे एक अंडरटेकिंग देने को कहा गया और ये बताया गया कि इसके बाद लाइसेंस 6 महीने में उनके नाम ट्रांस्फर हो जाएगा।

डगामा परिवार के मुताबिक, इसी मामले को लेकर गोवा एक्साइज कमिश्नर ने अपना नोटिस भेजा था, लेकिन गोवा के एक्टिविस्ट आयरेज ने इसे आधार बनाकर ईरानी परिवार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा दिया।

वकील ने बताया,

“हम पुर्तगाली नागरिक संहिता के तहत शासित हैं। संहिता के तहत, संपत्ति का स्वामित्व संयुक्त रूप से पति और पत्नी के नाम पर अनुच्छेद 1117 (पुर्तगाली नागरिक संहिता, 1867 के) के अनुसार है। कानून की दृष्टि से प्रशासन हमेशा पति के नाम पर होता है। लेकिन जब किसी पति या पत्नी की मृत्यु हो जाती है तो प्रशासन स्वत: ही उसके जीवनसाथी को चला जाता है। तो, यहाँ पति या पत्नी स्वतः ही संपत्ति के प्रशासक बन जाते हैं। इसमें कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं है।”

बता दें कि अब इस पूरे मामले में 22 अगस्त को अगली सुनवाई होगी। गोवा परिवार के वकील बेन्नी नजरेथ ने साफ किया कि रेस्टोरेंट से स्मृति ईरानी का कोई संबंध नहीं है। इसके मालिक केवल डगामा परिवार है।

कॉन्ग्रेस को दिल्ली HC का समन

29 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट ने जयराम रमेश, पवन खेड़ा और नेट्टा डिसूचा को समन भेजा था। इसमें कॉन्ग्रेस नेताओं से उनके उन ट्विट्स को डिलीट करने को कहा गया था जिसमें उन लोगों ने स्मृति ईरानी की बेटी पर इल्जाम लगाए थे। दिल्ली कोर्ट ने कहा था कि अगर ये लोग ट्वीट डिलीट नहीं करते तो ट्विटर इनपर कार्रवाई करे।

स्मृति ईरानी ने मानहानि का किया केस

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी इन नेताओं को लीगल नोटिस भेजा था। उन्होंने 2 करोड़ रुपए की मानहानि केस दायर करते हुए आरोप लगाया था कि कॉन्ग्रेस नेताओं ने उनकी बेटी को जबरन इस पूरे केस में घसीटा और झूठी जानकारी देकर उन्हें व उनकी बेटी को बदनाम करने की कोशिश की। वह डगामा परिवार के बयान आने से पहले बार-बार दोहरा रही थीं कि उनकी बेटी कोई बार नहीं चलाती है और न ही एक्साइज डिपार्टमेंट से उन्हें कोई शो कॉज नोटिस आया है।

अलीगढ़ की एक विधवा ने CM योगी आदित्यनाथ से माँगी सपरिवार इच्छामृत्यु: गाँव के दबंगों पर प्रताड़ित करने का आरोप, बेटे को अगवा कर मूत्र पीने को किया मजबूर

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ की एक महिला ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर पूरे परिवार के साथ इच्छामृत्यु की इजाजत देने की माँग की है। महिला का आरोप है कि गाँव के कुछ दबंग उसके परिवार को प्रताड़ित कर रहे हैं। उसके बेटे को चार महीने पहले अगवा कर बुरी तरह पीटा गया। उसे मूत्र पीने को मजबूर किया गया।

आरोप है कि पड़ोस के ही एक दलित दबंग परिवार ने निखिल शर्मा का अपहरण कर उसकी पिटाई की और मूत्र पीने को मजबूर किया। 21 साल का निखिल कथित तौर पर अगवा किए जाने के करीब 4 महीने बाद अपने घर से 20 किलोमीटर दूर दोनों मिला। उसके दोनों हाथ बँधे थे। पुलिस ने इस मामले में कुल 9 लोगों पर FIR दर्ज की है। एक की गिरफ्तारी हुई है।

पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक घटना 24 फरवरी 2022 की है। मामला हरदुआगंज थानाक्षेत्र के गाँव बरोठा की है। मामले में FIR 11 अप्रैल 2022 को दर्ज हुई है। शिकायतकर्ता निखिल की माँ राजकुमारी शर्मा हैं, जो विधवा हैं। शिकायत में उन्होंने कहा है, “आरोपित पक्ष रास्ते में जानवर बाँधते थे। जिसका विरोध मेरे बेटे ने किया। एक दिन दोनों पक्षों को पुलिस पकड़ कर ले गई और थाने में ग्राम प्रधान के आगे समझौता हो गया। वहाँ से लौटकर आने के बाद विपक्षियों ने एकजुट होकर मेरे बेटों के साथ मुझे और मेरी बेटी को सरिया और डंडों से मारा और हमारे साथ अभद्रता भी की।”

उन्होंने आगे बताया है, “उसी दिन (24 फरवरी) से मेरा बेटा निखिल गायब है। मेरी शिकायत थाने पर नहीं लिखी गई और न ही हमारा मेडिकल करवाया गया। विपक्षियों में सुरेश नाम का व्यक्ति पुलिसकर्मी है।” पीड़िता ने अपने बेटे के साथ किसी अनहोनी की आशंका भी जताई थी।

पीड़िता द्वारा दी गई नई शिकायत के मुताबिक इस घटना के लगभग 4 माह 6 दिनों के बाद उनका बेटा 30 जून 2022 को घर से लगभग 20 किलोमीर दूर मिला। शिकायत पत्र में कहा गया है, “मेरे बेटे को कैद में रखने के दौरान प्रताड़ना दी गई। उसे नशे की गोलियाँ खिलाकर पेशाब पिलाई गई और मारपीट की गई। वह मंजूरगढ़ी हाइवे के नजदीक मरणासन्न हालत मे हाथ बँधे हुए मिला था।”

मुख्यमंत्री को लिखा गया पत्र

पीड़िता ने पुलिस पर समझौते का दबाव बनाने का आरोप लगते हुए न्याय न मिलने पर स्वतंत्रता दिवस के दिन परिवार के साथ मुख्यमंत्री आवास के पास जान देने के बात कही है। इस मामले में दर्ज एफआईआर की कॉपी ऑपइंडिया के पास उपलब्ध है।

पुलिस ने इस घटना में IPC की धारा 147, 148, 323, 504, 506, 452, 364 व 354 (ख) के तहत 7 पुरुषों और 2 महिलाओं को आरोपित किया है। पीड़ित के मुताबिक आरोपितों में अभी तक सिर्फ बंटी नाम के व्यक्ति की गिरफ्तारी 15 जून को हुई थी। वह 30 जून को जमानत पर बाहर आया। इसी दिन निखिल भी मिला था। निखिल की बहन नम्रता ने ऑपइंडिया से बताया कि बाकी आरोपित अभी खुलेआम खूम रहे हैं। उन्हें किसी कार्रवाई का डर नहीं है।

नम्रता ने 4 माह बाद मिले अपने भाई का वीडियो भी ट्वीट किया है जिस पर अलीगढ़ पुलिस ने मामले को पुराना बताते हुए कानूनी कार्रवाई जारी होने की बात कही है।

ऑपइंडिया ने अपहृत निखिल से बात की। निखिल ने कहा, “मेरे अपहरण के पहले आरोपित मनोज नाम के एक व्यक्ति को पीट चुके थे। मैं तो उसकी उलाहना ले कर गया था। यही बात उन सभी को रास नहीं आई। मेरे अपहरण के समय गाँव का प्रधान भी मौके पर मौजूद था। मुझे आँखों पर पट्टी बाँध कर न जाने कहाँ ले जाया गया था। मेरी रखवाली में एक ऐसे व्यक्ति को रखा गया था जो भावनाशून्य था और मुझसे कोई बात नहीं करता था। मुझको खाने में पारले बिस्किट दिया जाता था। मुझे पेशाब सुरेश ने पिलाया था जो UP पुलिस में सब इंस्पेक्टर है। 4 महीने बाद मुझे अचेत हालत में वे मेरे घर से 20 किलोमीटर दूर मुझे छोड़ कर चले गए। पुलिस इस मामले में संतोषजनक जाँच नहीं कर रही है, क्योंकि दूसरी तरफ पैसे वाले लोग हैं। आरोपित के घर में सब इंस्पेक्टर के साथ रोडवेज विभाग में कर्मचारी, खाद के व्यापारी और बिजली विभाग से रिटायर्ड लोग हैं।”

ऑपइंडिया से बात करते हुए SHO हरदुआगंज राजेश कुमार ने कहा, “हम पूरी निष्पक्षता से जाँच और कार्रवाई कर रहे हैं। घटना से जुड़े सभी सबूत जमा किए जा रहे हैं। पीड़ित के फोन कॉल डिटेल से भी हमें कुछ सुराग मिले हैं जिनको हम सार्वजानिक नहीं कर सकते। जल्द ही हम अंतिम निष्कर्ष पर पहुँचकर मामले का सबूतों के साथ खुलासा करेंगे।”

4 जगह, 30000 किलो ड्रग्स राख: ₹100 करोड़ के मादक पदार्थ NCB ने जलाए, गृह मंत्री अमित शाह ने खुद देखा लाइव

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने शनिवार (30 जुलाई 2022) को 30 हजार किलो से ज्यादा ड्रग्स नष्ट किए। जलाए गए ड्रग्स की कीमत करीब 100 करोड़ रुपए है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वीडियो के जरिए मादक पदार्थों को नष्ट होते देखा।

शाह चंडीगढ़ में एनसीबी की ओर से नशीली दवाओं की तस्करी और राष्ट्रीय सुरक्षा पर आयोजित सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुँचे थे। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री ने ड्रग्स को आतंकवाद से भी अधिक खतरनाक बताया। उन्होंने कहा कि आतंकी घटनाओं का नुकसान सीमित होता है, लेकिन ड्रग्स हमारी पीढ़ियों को बर्बाद कर देती है।

शाह ने ड्रग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर जोर दिया। कहा कि नशीले पदार्थों की तस्करी पर लगाम लगाए बिना समृद्ध राष्ट्र का निर्माण संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि इस दिशा में कठोर कानून के लिए राज्यों के साथ बातचीत भी चल रही है। ड्रग्स से जुड़े मामलों के तेजी से निपटारे के लिए आधुनिक फोरेंसिक लैब भी खोले गए हैं।

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ड्रग्स के विरुद्ध लड़ाई को मजबूती से लड़ रहा है। मोदी सरकार न भारत में ड्रग बनने देगी, न बाहर से भारत की सीमा में आने देगी और न ही यहाँ से कहीं बाहर जाने देगी।” सम्मेलन में पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, हरियाणा के सीएम मनोहर लाल, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजीव सैजल भी मौजूद थे।

केंद्रीय गृह मंत्री के सामने एनसीबी की टीम ने दिल्ली, चेन्नई, गुवाहाटी और कोलकाता में मादक पदार्थों को नष्ट किया। एडीजीपी हरमीत सिंह ने इसे ऐतिहासिक करार देते हुए बताया है कि इससे पहले कभी गृह मंत्री के सामने देश की चार जगहों पर एक साथ ड्रग्स नष्ट नहीं किए गए थे।

गौरतलब है कि एक जून 2022 से एनसीबी मादक पदार्थों को नष्ट करने का विशेष अभियान चला रही है। इसके तहत 29 जुलाई तक 11 राज्यों में 51,217 किलोग्राम से अधिक मादक पदार्थ नष्ट किए जा चुके थे। शनिवार को एक साथ चार जगहों पर ड्रग्स के निपटान के बाद यह आँकड़ा बढ़कर 81686 किलोग्राम हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से आजादी का अमृत महोत्सव मनाने को लेकर किए गए आह्वान को ध्यान में रखते हुए एनसीबी ने देश की स्वतंत्रता के 75 साल पूरे होने पर 75000 किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट करने का संकल्प लिया था।

तीस्ता सीतलवाड़ को नहीं मिली बेल, रिटायरमेंट वाले दिन AAP नेता को भी झटका: गुजरात दंगों में मोदी को बदनाम करने की रची थी साजिश

गुजरात दंगों से जुड़े मामले में गिरफ्तार हुईं तीस्ता सीतलवाड़ की बेल याचिका को अहमदाबाद के सेशन कोर्ट ने खारिज कर दिया है। उनके साथ पूर्व डीजीपी व आम आदमी पार्टी नेता आरबी श्रीकुमार की जमानत याचिका भी उनकी रिटायरमेंट वाले दिन खारिज हुई। सत्र न्यायालय के जज डीडी ठक्कर के फैसले के बाद अब सीतलवाड़ और श्रीकुमार दोनों जेल में ही रहेंगे।

बता दें कि जाकिया जाफरी केस में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीतलवाड़, पूर्व डीजीपी श्रीकुमार और पूर्व आईपीएस संजीव भट्ट की गिरफ्तारी हुई थी। कोर्ट ने इनको न्यायिक हिरासत में भेजा था। इन सबके ऊपर आरोप है कि इन्होंने गोधरा दंगा मामले में निर्दोष लोगों को दोषी दिखाने के लिए दस्तावेज गढ़े और उस समय के गुजरात मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम करने का प्रयास भी किया।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि तीस्ता ने अपने फायदे के लिए जाकिया जाफरी की भावनाओं का मजाक बनाया जबकि आरबी श्रीकुमार और संजीव भट्ट ने नरेंद्र मोदी के खिलाफ फर्जी की गवाही दी। इस आदेश के बाद ही गुजरात पुलिस ने तीनों आरोपितों के विरुद्ध आईपीसी की धारा 468, 471, 194, 211, 218, 120 बी के तहत केस दर्ज किया था।

केस दर्ज होने के बाद पुलिस ने सीतलवाड़ और श्रीकुमार को पकड़ा जबकि भट्ट कुछ दिन पहले पहले गिरफ्तार हुए। इन लोगों के विरुद्ध दर्ज एफआईआर में कहा गया कि आरोपितों ने गुजरात दंगों में फर्जी दावे करके चीजों को संवेदनशील बनाया जो कि एसआईटी जाँच में पूरी तरह उजागर हो गए हैं।

उल्लेखनीय है कि बीते दिनों एसआईटी ने अपने हलफनामे में खुलासा किया था कि कैसे कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल गुजरात दंगों की आड़ में भारतीय जनता पार्टी को प्रदेश में गिराना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने तीस्ता सीतलवाड़ को 30 लाख रुपए भी दिए थे। इस संबंध में बीते दिनों तीस्ता के करीबी रईस पठान ने भी खुलासा किया था। रईस ने बताया था, “जो बात सामने आ रही 30 लाख रुपयों की वो बिलकुल दंगों के शुरुआती दिनों की बात है। तीस्ता बहुत पहले से अहमद पटेल को जानती थीं। लेकिन जब दंगे हुए उसके कुछ दिन बाद की मुलाकात जो है वो शाही बाग के सर्किट हाउस में हुई थी। वहाँ उनके साथ मैं भी गया था।”

तकिए से करो सेक्स, सहपाठी लड़कियों से दुर्व्यवहार: महात्मा गाँधी मेडिकल कॉलेज में रैगिंग, एक-दूसरे को थप्पड़ मारने के लिए जूनियर्स को किया मजबूर

मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित महात्मा गाँधी मेडिकल कॉलेज (MGM) में रैगिंग की घटना सामने आई है। फर्स्ट ईयर के छात्रों ने थर्ड ईयर के सीनियर्स पर रैगिंग और प्रताड़ना का आरोप लगाया है। इन छात्रों को कथित तौर पर तकिए के साथ सेक्स करने के लिए कहा गया। सहपाठी लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार को मजबूर किया गया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक MGM के पीड़ित छात्रों ने इसकी शिकायत UGC की एंटी रैगिंग हेल्पलाइन में की। UGC ने इसकी सूचना कॉलेज के डीन को दी। MGM मेडिकल कॉलेज के डीन संजय दीक्षित के मुताबिक, “एक लड़के ने UGC की एंटी रैगिंग हेल्पलाइन पर कुछ दिनों पहले शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत का संज्ञान लेते हुए फ़ौरन ही एंटी रैगिंग टीम की मीटिंग करवाई गई। मीटिंग के बाद कमेटी ने घटना की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई। FIR संयोगिता गंज थाने में दर्ज हुई है।

SHO तहजीब काज़ी ने के मुताबिक 8-10 छात्रों के खिलाफ IPC की धारा 294, 323 और 506 के तहत FIR दर्ज की गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने 700 छात्रों से पूछताछ की तैयारी की है। इनके बयानों को गोपनीय रखा जाएगा।

नई दुनिया की रिपोर्ट के अनुसार एमजीएम मेडिकल कॉलेज के जूनियर्स को उनके सीनियर गीता भवन क्षेत्र के फ्लैटों पर बुलाते थे। वहीं उनकी रैगिंग की जाती थी। जूनियर छात्रों को समूह में बुलाया जाता था। घंटों खड़ा रखकर एक-दूसरे को थप्पड़ मारने के लिए मजबूर किया जाता। इस दौरान सीनियर धड़ल्ले से अपशब्दों का इस्तेमाल भी करते थे।

रतलाम में भी रैगिंग

इंदौर के अलावा रतलाम मेडिकल कॉलेज से भी रैगिंग की खबर आई है। यहाँ जूनियर छात्रों को थप्पड़ मारे गए। बताया जा रहा है कि रैगिंग की शिकायत मिलने पर जब वार्डन डॉ. अनुराग जैन हॉस्टल पहुँचे तब उनके ऊपर भी शराब की बोतलें फेंकी गई। घटना की शिकायत कॉलेज की अनुशासन समिति से की है। रैंगिंग करने वाले छात्रों की पहचान कर ली गई है।

मध्य प्रदेश के राज्य के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने 30 जुलाई 2022 (शनिवार) को इन घटनाओं का संज्ञान लेते हुए जाँच और कार्रवाई का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा, “नियमानुसार रैंगिंग पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इसके बावजूद हमें शिकायत मिली है। आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हम इस घटना की गहनता से जाँच कर रहे हैं। ऐसे मामलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

उद्धव सरकार के कारण बुलेट ट्रेन ही नहीं हुई लेट, देश को ₹52000 करोड़ का लगेगा चूनाः देरी से प्रोजेक्ट का खर्च ₹1.6 लाख करोड़ के पार जाने का अनुमान

महाराष्ट्र (Maharashtra) में सरकार बदलते ही मुंबई-अहमदाबाद (Mumbai-Ahmedabad Bullet Train Project) के बीच प्रस्तावित भारत की पहली बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का टेंडर 22 जुलाई 2022 जारी कर किया। हालाँकि, पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) की केंद्र विरोधी रवैए एवं अन्य कारणों की वजह से इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत बढ़कर 1.6 लाख करोड़ रुपए हो गई है।

उद्धव ठाकरे की नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी की सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। राज्य में इसके लिए जरूरी भूमि अधिग्रहण का काम पूरा नहीं किया।

इस प्रोजेक्ट के लिए गुजरात में भूमि अधिग्रहण का काम 98.9% पूरा हो गया है, जबकि महाराष्ट्र में भूमि अधिग्रहण का काम सिर्फ 73% ही पूरा हुआ है। इस कारण यह पूरा प्रोजेक्ट लटक गया है और इसकी देरी की मुख्य वजह बना।

इस परियोजना की समय सीमा 2022और शुरुआती लागत 1.08 लाख करोड़ रुपए थी, लेकिन ठाकरे सरकार ने राजनीतिक महत्वाकांक्षा के कारण इस प्रोजेक्ट को नजरअंदाज कर दिया। इसके बाद उसे शुरू करने की समय सीमा 2027 तय की है। साल 2026 में इसके सारे ट्रायल पूरे हो जाएँगे।

हालाँकि, राज्य में एकनाथ शिंदे की सरकार आते ही नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने इस रूट के लिए बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में भूमिगत स्टेशन बनाने के लिए जारी कर दिया।

इसके पहले NHSRCL ने नवंबर 2019 में ब्रांदा-कुर्ला कॉप्लेक्स में भूमिगत स्टेशन बनाने के लिए निकाली गई निविदाओं को इस साल की शुरुआत में रद्द कर दिया था। NHSRCL द्वारा 11 बार समय सीमा बढ़ाने के बाद भी राज्य सरकार जमीन उपलब्ध नहीं करा पाई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, भूमि अधिग्रहण में देरी के साथ-साथ बीती अवधि में जमीन, सीमेंट, लोहे, स्टील आदि के दामों में वृद्धि के कारण इस प्रोजेक्ट की लागत बढ़ गई है। हालाँकि, NHSRCL का कहना है कि प्रोजेक्ट की नई लागत की सही जानकारी अभी नहीं दी जा सकती। भूमि अधिग्रहण का काम और सभी कॉन्ट्रैक्ट्स पूरे होने के बाद ही इसकी घोषणा की जा सकेगी।