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नहीं Mr. President! ‘डेड’ नहीं, ‘डैशिंग’ इकॉनमी है भारत… दुनिया की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था भी: सीजफायर पर नहीं मिला क्रेडिट तो बौराओ मत

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर बुधवार (30 जुलाई, 2025) को 25% टैरिफ का ऐलान किया था। ट्रंप ने इसी के साथ कहा था कि भारत के रूस से हथियार सौदों और तेल-गैस खरीदने के चलते भारत अपर अतिरिक्त टैरिफ भी लगेगा। ट्रंप ने इसके बाद गुरुवार (31 जुलाई, 2025) को भारत और रूस को ‘डेड इकॉनमी’ बता दिया। उनका इशारा था कि दोनों देश एक साथ हैं और अब वह जो चाहें वो करें।

ट्रंप के यह ‘मूड स्विंग्स’ भारत और पाकिस्तान के बीच मई, 2025 मे हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद से जारी हैं। तब से वह कहीं ट्रेड डील की बात करते हैं, कहीं टैरिफ का ऐलान करते हैं और हर तीसरे घंटे कथित सीजफायर पर शोर मचाते हैं। हालाँकि, भारत ने एक भी बार उनकी सीजफायर वाली बात को मानने से इनकार किया है। संभवत: इसी से चिढ़ के डोनाल्ड ट्रंप अब भारत को ‘डेड इकॉनमी’ बता रहे हैं। वो यूक्रेन या किसी अफ्रीकी देश को ऐसी बात कहें तो ठीक भी है लेकिन भारत के विषय में वह पूर्णतया गलत हैं।

डेड नहीं ‘डैशिंग’ इकॉनमी है भारत

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप अपनी खीझ में भारत को डेड इकॉनमी यानी मृत अर्थव्यवस्था बता रहे हैं। उनका कहने का अर्थ है कि भारतीय अर्थव्यवस्था फेल हो चुकी है और अब वह गर्त को जाने वाली है। यह ना सिर्फ ट्रंप की अज्ञानता बल्कि उनकी मूर्खता और घमंड को तक दर्शाता है। भारत डेड इकॉनमी होने से कोसों दूर है। भारत डेड इकॉनमी तो कहीं से नहीं है बल्कि वह वर्तमान में वैश्विक अर्थव्यवस्था में रफ़्तार का इंजन है। यह सब केवल कहने की बातें नहीं हैं बल्कि आँकड़े इनकी गवाही देते हैं।

भारत वर्तमान में विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है इसका आकार लगभग 4 ट्रिलियन है। जल्द ही यह जर्मनी को पीछे छोड़ कर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाला है। भारत वर्तमान में सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है। और यह सिलसिला बीते 10 वर्षों से लगातार चल रहा है तथा आगे और भी चलना इसका पक्का है। वर्ष 2015-25 के बीच भारत की औसत GDP वृद्धि दर 6%-6.5% रही है।

जबकि इस बीच भारत ने कोविड महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और दूसरे वैश्विक संकट झेले हैं। भारत के मुकाबले चीन इस दौरान 6% या उससे नीचे की ही रफ़्तार से बढ़ा है। अब चीन की GDP वृद्धि दर और भी धीमी होती जा रही है। भारत वर्तमान में वैश्विक GDP वृद्धि में 17% का योगदान दे रहा है। यह आगे चलके 20% तक होने का अनुमान है। भारत इसी के चलते वैश्विक ग्रोथ का इंजन बना हुआ है। उसकी अर्थव्यवस्था का आकार 2015-25 में 105% बढ़ा है।

जबकि इसी दौरान चीन की GDP का आकार मात्र 44% बढ़ा है। विश्व में तेल-गैस जैसे महत्वपूर्ण चीजों की माँग में भी भारत का हिस्सा बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में विश्व में खपत होने वाले कुल ऊर्जा स्रोतों का 25% भारत में होगा। जिस भारत को डोनाल्ड ट्रंप डेड इकॉनमी बता रहे हैं, वह वर्तमान में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। भारत की आबादी 140 करोड़+ है। यह अभी और बढ़ेगी। वर्तमान में भारत का मध्यम वर्ग लगभग 60 करोड़ है।

यह मध्यम वर्ग 2047 तक 100 करोड़ पहुँचने के आसार हैं। यही मध्यम वर्ग वर्ष 2030-2031 तक लगभग 2.7 ट्रिलियन डॉलर की खपत करेगा। ऐसे में विश्व की कम्पनियों का धंधा भी चीन के अलावा भारत के ही भरोसे होगा। इतना बड़ा मध्यम वर्ग उसे और कहीं नहीं मिलेगा। यह बाजार जिस देश में है, वह कभी भी डेड इकॉनमी नहीं हो सकता। भारत सिर्फ बड़ा बाजार ही नहीं है बल्कि बहुत ऐसी ऐसी चीजों की फैक्ट्री भी है, जिन पर विश्व निर्भर है।

भारत विश्व में जेनेरिक दवाइयों का विश्व का सबसे बड़ा सप्लायर है। अमेरिका भी वर्तमान में भारत निर्मित जेनेरिक दवाओं पर निर्भर है। भारत का फार्मा एक्सपोर्ट वर्ष 2030 तक 65 बिलियन डॉलर (₹5.5 लाख करोड़) तक पहुँचने का ऐलान है। इसके अलावा भारत भले ही कच्चे तेल का बड़ा उत्पादक ना हो लेकिन वह तेल की रिफायनरी के मामले में बहुत आगे है। भारत विश्व का चौथा सबसे तेल रिफाइन करने वाला देश है। इसके अलावा गाड़ियाँ, स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक समेत बाकी कई वस्तुओं का भारत बड़ा सप्लायर है।

ट्रंप की खीझ है भारत पर रोने का कारण

ट्रंप ने बुधवार से भारत के खिलाफ लगातार अपना प्रलाप जारी रखा है। पहले उन्होंने ट्रेड डील पर जारी बातचीत के बावजूद 25% और पेनाल्टी वाले टैरिफ का ऐलान किया। इसके बाद उन्होंने कहा कि अभी बातचीत चल रही है। ट्रंप ने इसके बाद पाकिस्तान के एक ट्रेड डील का ऐलान कर दिया। उन्होंने साथ में यह भी बताया कि अमेरिका की कोई कंपनी पाकिस्तान में तेल की खोज में भी मदद करेगी। उन्होंने इसके साथ भारत पर तंज कसते हुए कहा, “क्या पता पाकिस्तान किसी दिन भारत को तेल बेचे।”

इससे पहले वह पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को भी डिनर पर बुला चुके हैं। वह लगातार पाकिस्तान के साथ ट्रेड बढ़ाने की बात करते रहे हैं। वह इसी दौरान पाकिस्तान को और भी बढ़ावा देते रहे हैं। इसके उलट उनका भारत पर प्रहार जारी रहा है। पहले उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर पर हुए सीजफायर का क्रेडिट लेने का प्रयास किया। भारत ने यह मानने से इनकार कर दिया। भारत ने ट्रंप के दावों को हर बार नकार दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी ट्रंप को सामने से मिलने से इनकार कर दिया।

ट्रंप ने अपने सीजफायर के दावों में कहा है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान से ट्रेड डील की है, जिसके चलते दोनों देश अपना-अपना युद्ध रोकने पर राजी हुए हैं। भारत ने सीजफायर में ट्रंप की मध्यस्थता के दावों के साथ ही यह मानने से इनकार कर दिया कि भारत ने किसी भी व्यापार सम्बन्धित धमकी के आधार पर यह सीजफायर किया। हालाँकि, ट्रंप ने अपने दावी जारी रखे। भारत इन्हें नकारता रहा। अपने झूठ को ट्रंप ने खुद ही 30 जुलाई, 2025 साबित कर दिया जब उन्होंने भारत के खिलाफ टैरिफ का ऐलान किया।

यदि भारत सीजफायर करने पर व्यापार के आधार पर ही मानता तो भला अब उसे टैरिफ क्यों झेलने पड़ते। इन सबकी खीझ के चलते ट्रंप अब भारत पर हमलावर हो रहे हैं। हालाँकि, उनकी इन धमकियों से भारत पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। ना ही वह दबाव में कोई ट्रेड डील करने जा रहा है, ना ही अपने अंतरराष्ट्रीय मामलों में उनका दखल स्वीकार करेगा। ट्रंप के कह भर देने से भारत डेड इकॉनमी भी नहीं बन जाएगा।

ट्रंप की खीझ को एक राजस्थानी कहावत से समझा जा सकता है। यह कहावत है- रांडा रोवती रेवे, पामणा जिमंता रेवे। इसका अर्थ है कि विधवाएँ कोसती रहती हैं जबकि दूसरों के पति ज़िंदा रहते हैं। इसी तरह ट्रंप भी भारत को लेकर रोते रह सकते हैं, हमें कोई नहीं फर्क पड़ने वाला।

भगवा आतंकी का लगा लें ठप्पा, बेगुनाही के बावजूद बन जाएँ मालेगाँव ब्लास्ट के गुनाहगार: जानें – कैसे कॉन्ग्रेस की सरकार में सेना के अधिकारियों पर ढाया गया जुल्म, पत्नी-बेटी के रेप की देते थे धमकी

मालेगाँव बम धमाका मामले में गुरुवार (31 जुलाई, 2025) को साध्वी प्रज्ञा, कर्नल श्रीकांत पुरोहित और मेजर रमेश उपाध्याय समेत 7 लोगों को बाइज्जत बरी कर दिया। कोर्ट को इन लोगों के खिलाफ मालेगाँव धमाके में कोई सबूत नहीं मिले। इसी के साथ पिछले 17 वर्षों से चली आ रही ‘भगवा आतंकवाद’ की थ्योरी का अंतिम संस्कार हो गया।

17 वर्षों तक इन हिन्दुओं को केवल इसलिए प्रताड़ित किया जाता रहा ताकि कॉन्ग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति चमक सके। कॉन्ग्रेस की इस तुष्टिकरण की राजनीति का शिकार भारतीय सेना के दो अफसर भी हुए। उनके परिवारों तक को नहीं छोड़ा गया, उनके सैन्य करियर बर्बाद कर दिए गए, देश की दशकों तक सेवा के बावजूद उन्हें जनता में शर्मिंदगी झेलनी पड़ी और वामपंथी मीडिया ने उनका वर्षों तक पीछा किया।

कर्नल का पैर तोड़ा, नंगा कर प्राइवेट पार्ट पर मारा

भारतीय सेना में देश की सेवा करने वाले लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित को कॉन्ग्रेस सरकार ने आतंकवादी साबित करने की कोशिश की। उन्हें मालेगाँव ब्लास्ट 2008 की जिम्मेदारी लेने के लिए यातनाएँ दी गईं थी। कर्नल से सेना की खुफिया जानकारी जुटाने की कोशिश की गई। कर्नल के साथ पाकिस्तान पहुँचे विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान से भी बुरा बर्ताव किया गया।

यहाँ तक कि कर्नल का पैर तोड़ा गया, नंगा कर प्राइवेट पार्ट पर मारा गया, बाल पकड़कर खींचे जाता था। उन्हें वर्षों तक जेल में रखा। इस दौरान उन्हें सेना की नौकरी से भी हाथ धोना पड़ गया। महाराष्ट्र ATS गवाहों को भी बंदूक की नोक पर बयान दिलवाती थी। कोर्ट को कर्नल पुरोहित ने बताया था कि यह सब तत्कालीन UPA सरकार और राज्य की कॉन्ग्रेस NCP सरकार के इशारे पर किया गया था।

कोर्ट के सामने कर्नल पुरोहित ने बयान दिया था कि कॉन्ग्रेस सरकार ने तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ, विश्व हिंदू परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों को फँसाने की साजिश की थी। कर्नल से भी मामले में उनका नाम लेने का दबाव डाला गया था। कर्नल के परिवार को भी फँसाने की धमकी दी गई थी।

मेजर की बेटी से रेप और पत्नी को नंगा करने की दी गई थी धमकी

मेजर रमेश उपाध्याय के सेनानी थे। उन्हें भी तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार ने मालेगाँव बम धमाका मामले में फँसाया गया था। कॉन्ग्रेस सरकार के इशारे पर ATS उन्हें प्रताड़ित करती थी। यहाँ तक कि उनकी पत्नी को नंगा घुमाने और बेटी के रेप तक की धमकी दी गई। मेजर उपाध्याय को भी बम धमाके की जिम्मेदारी लेने के लिए मानसिक और शारीरिक शोषण किया गया था।

ATS ने मेजर उपाध्याय को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया था। मेजर पर MCOCA लगाने की धमकी देकर आतंकवादी करार दिया गया, उनके किराए के घर को भी खाली करवाया गया। मेजर का परिवार सड़क पर आ गया था। मेजर के शादीशुदा बेटियों के घर पर भी ATS ने छापा मारा। मेजर का पॉलीग्राफ और नारको टेस्ट भी करवाया गया और क्लीन चिट मिलने के बाद कोर्ट के सामने पेश नहीं की।

गजवा-ए-हिंद, काफिरों पर हमला, मोदी सरकार निशाने पर… आतंकी शमा परवीन निकली अलकायदा चीफ की फैन, भाषण सुनवाकर करती थी युवाओं का ब्रेनवॉश

गुजरात ATS की ओर से पकड़ी गई अलकायदा की मास्टरमाइंड शमा परवीन के बारे में हर दिन नए खुलासे हो रहें हैं। अब जानकारी में सामने आया है कि वह अलकायदा इंडिया सबकॉन्टिनेंट (AQIS) के चीफ रहे मौलाना असीम उमर से काफी प्रभावित थी। असीम को अलकायदा के चीफ अल जवाहिरी का चेला माना जाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, AQIS से जुड़ी आतंकी शमा परवीन और उसके नेटवर्क का मकसद भारत में धार्मिक आधार बनाकर तनाव और हिंसा फैलाना था। इसके लिए वह डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का सहारा लेती थी।

जानकारी के अनुसार, ATS ने बताया है कि शमा दो फेसबुक पेज और एक इंस्टाग्राम अकाउंट को संभालती थी, इससे करीब 10 हजार यूजर जुड़े हुए थे। शमा इसके सहारे ही अलकायदा और अन्य कट्टरपंथियों के भड़काऊ भाषण साझा करती थी।

इनमें AQIS नेता मौलाना असीम उमर, अनवर अल-अवलाकी और लाहौर के लाल मस्जिद के मौलाना अब्दुल अजीज के भाषणों के वीडियो शेयर किए जाते थे। इनमें अधिकतर गजवा-ए-हिंद, काफिरों पर हमले और भारत सरकार के खिलाफ बातें कही गई होती थी।

ATS  ने बताया कि इनमें भारतीय मुस्लिम युवाओं को देश के लोकतंत्र को खारिज करके सशस्त्र विद्रोह करके शरिया कानून लागू करने के लिए उकसाया जाता था। शमा के सोशल मीडिया अकाउंट की जाँच में सामने आया है कि वह मौलाना असीम उमर के भड़काऊ बयान सोशल मीडया पर पोस्ट करके लोगों का ब्रेनवॉश करने की कोशिश करती थी।

बता दें कि 2014 में AQIS का चीफ मौलाना असीम उमर को बनाया गया था।अलकायदा चीफ अल जवाहिरी ने ही असीम को AQIS का चीफ भी बनाया था। उमर उत्तर प्रदेश के संभल का रहने वाला था, लेकिन बाद में पाकिस्तान और उसके बाद अफगानिस्तान चला गया था।

पुलिस का कहना है कि शमा और उसके साथ गिरफ्तार सभी आतंकी मौलाना असीम उमर के बयान सुनते थे और सोशल मीडिया पर शेयर भी करते थे।

अन्य जानकारियों के अनुसार, शमा के अब्बू शमशुल हक की 2019 में मौत हो गई थी। इसके बाद से शमा परवीन का पूरा परिवार बेंगलुरु में रहता है। शमा तीन बहन और दो भाइयों में सबसे छोटी है।

जाँच में ये भी सामने आया है कि शमा परवीन बचपन से ही कट्टर इस्लामी सोच की है। वह कभी भी निकाह नहीं करना चाहती थी, घर वालों से कम लगाव रखती थी और पर्दे में रहना ज्यादा पसंद करती थी। जबकि उसके घरवाले पढ़े-लिखे हैं। जहाँ उसकी एक बहन कोलकाता में एग्रीकल्चर साइंटिस्ट हैं, वहीं दोनों भाई शमशेर और आजम कंप्यूटर इंजीनियर हैं। 

क्या हिंदू होना ही है साध्वी प्रज्ञा, कर्नल पुरोहित और मेजर उपाध्याय का दोष?

मालेगाँव ब्लास्ट मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी की विशेष अदालत ने आज (31 जुलाई 2025) उन सातों आरोपितों को बरी कर दिया, जिनके नाम का इस्तेमाल करके कभी UPA सरकार ने ‘हिंदू आतंकवाद’ के नैरेटिव को गढ़ने का प्रयास किया था। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए उस बाइक वाली थ्योरी को भी खारिज किया जिसके आधार पर हिंदू संत और सेना से जुड़े लोग निशाने पर लिए गए थे।

कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा, कर्नल पुरोहित, मेजर (रिटायर्ड) रमेश उपाध्याय, समीर कुलकर्णी, अजय रहीरकर, सुधाकर चतुर्वेदी और सुधाकर द्विवेदी के खिलाफ सबूतों की कमी बताई। स्पेशल जज ए.के. लाहोटी ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष कोई ठोस सबूत पेश करने में नाकाम रहा और सबूतों में कई असंगतियाँ हैं। कोर्ट ने ‘हिंदू आतंकवाद’ की थ्योरी को सिरे से खारिज करते हुए जोर दिया कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन दोषसिद्धि नैतिक आधार पर नहीं, बल्कि ठोस सबूतों पर होनी चाहिए।

स्पेशल जज एके लाहोटी ने 500 पेज से ज्यादा के अपने फैसले में विस्तार से बताया कि अभियोजन पक्ष ने केस को साबित करने में कई गलतियाँ कीं। उन्होंने कहा, “पूरी जाँच के बाद यह साफ है कि अभियोजन कोई ठोस सबूत लाने में विफल रहा है। सबूतों में कई असंगतियाँ हैं, इसलिए सभी आरोपितों को संदेह का लाभ मिलना चाहिए।”

हिंदुत्व को बदनाम करने के लिए छाँटे गए तीन नाम

29 दिसंबर 2008, ब्लास्ट वाले दिन और 31 जुलाई 2025, यानी फैसले वाले दिन के बीच 16 साल 10 महीने (लगभग 17) बीत चुके हैं। इस लंबे अंतराल में निर्दोषों के साथ क्या-क्या हुआ ये सोच भी रूह कँपाने वाली है। केस में तीन ऐसे नाम हैं जिनके साथ अत्याचार की हर हदें पार की गईं।

ये तीन नाम- साध्वी प्रज्ञा, मेजर रमेश उपाध्याय और लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित के हैं। केस की जाँच के नाम पर राज्य एटीएस ने इन बेगुनाहों को न केवल मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया, बल्कि इन्हें शारीरिक यातनाएँ भी दीं।

इन्हें इतना तड़पाया गया कि साध्वी प्रज्ञा को तो वेंटिलेटर तक पर जाना पड़ा था और मेजर उपाध्याय को सरेआम धमकी मिलती थी कि उनकी बेटी का रेप हो जाएगा। वहीं कर्नल पुरोहित को ‘देशद्रोही’ साबित करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया गया।

आज जब ये सारे लोग अदालत की नजर में भी बेगुनाह साबित हो चुके हैं तो आइए एक बार फिर याद दिलाएँ कि जाँच के नाम पर इन ‘हिंदुओं’ को कैसे निशाना बनाया गया था।

जाँच के दौरान तीनों पर बरपाया गया कहर

साध्वी प्रज्ञा के साथ अमानवीयता की हर हद की गई पार

  • साध्वी प्रज्ञा की बात करें तो वह कई बार इस मामले में अपना दर्द साझा करके भावुक हो चुकी हैं। वह वो दर्दनाक समय को नहीं भुला पातीं जब जेल के भीतर उन्हें तरह-तरह से प्रताड़ित करने का काम हुआ था। उनके अनुसार, इस केस में हिरासत में लिए जाने के बाद पुरुष कैदियों के साथ रखकर पोर्न वीडियो दिखाए जाते थे और भद्दे सवाल होते थे।
  • इसके अलावा कथिततौर पर 4-5 पुलिसकर्मी लगाकर उन्हें मारा जाता था। उनकी पिटाई चमड़े की बेल्ट से होती थी। उनको बिन किसी सबूत के भगवा आतंकी कहा जाता था। उनपर इतने अत्याचार होते थे कि उनकी हालत खुद के पाँव पर चलने लायक नहीं बची थी।
  • उनकी रीढ़ की हड्डी में समस्या आ गई थी और उन्हें वेंटिलेटर पर जाना पड़ा था। इसके अलावा साध्वी प्रज्ञा ने ये भी बताया था कि इन्हीं सबके कारण उन्हें कैंसर और न्यूरो की बीमारी हो गई थी और उनके शरीर में पस पड़ गया था।

मेजर की पत्नी को नंगा घुमाने, बेटी का रेप करने की धमकी

  • मेजर रमेश उपाध्याय ने भी अपने बारे में बताया था कि मालेगाँव ब्लास्ट में कॉन्ग्रेस की यूपीए सरकार ने उनको फँसाया था। हिरासत में लिए जाने के बाद एटीएस उनके साथ बर्बरता करती थी। उन्हें धमकी दी जाती थी कि पत्नी को नंगा घुमाया जाएगा, बेटी का रेप किया जाएगा, बेटे का जबड़ा तोड़ दिया जाएगा।
  • इसके अलावा उनके मकान मालिक तक को उनके खिलाफ भड़काया गया- आतंकी को क्यों रख रहे हों। जिसके कारण उनके परिवार के सिर से छत छिन गई। उनकी शादीशुदा बेटियों के घरों पर दबिश दी गई । हर वो हालात पैदा कर दिए गए कि वो कैसे भी वो जुर्म कबूलें जो उन्होंने किया ही नहीं।
  • प्रशासन उन्हें इस कदर इस मामले में दोषी बनाना चाहता था कि मेजर का नार्को टेस्ट भी कराया। हालाँकि जब उसमें उन्हें क्लीनचिट मिल गई तो ये बर्दाश्त नहीं हुआ और रिपोर्ट को दबा दिया गया।

लेफ्टिनेंट कर्नल का तोड़ दिया गया पैर

  • इसी तरह प्रताड़ना की कहानी भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मालेगाँव ब्लास्ट केस में राज्य (महाराष्ट्र) एटीएस ने कथिततौर पर कर्नल पुरोहित को फँसाने के बहुत प्रयास किए।
  • ये जानते हुए कि जिस समय ये ब्लास्ट हुआ था, उस वक्त वो अपने मिशन पर थे उन्हें हिरासत में लिया गया और देशद्रोही घोषित करने की कोशिश हुई। बाद में उनपर दबाव बनाया गया कि वो पूछताछ में आरएसएस और वीएचपी नेताओं का जबरन नाम लें ताकि हिंदू आतंकवाद की थ्योरी सही साबित हो सके।
  • जब उन्होंने ऐसा नहीं किया तो उनका पैर तोड़ा गया, उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखा, उन्हें नंगा करके मारा गया, उनके प्राइवेट पार्ट पर हमला किया गया, उन्हें बाल से नोचा और खींचा गया।

मालेगाँव ब्लास्ट के इस पूरे मामले में भगवाधारी साध्वी प्रज्ञा या सेना की वर्दी वाले कर्नल पुरोहित-मेजर उपाध्याय जैसे लोग निशाने पर क्यों लिए गए, ये समझना अब कोई कठिन नहीं है। धमाका मस्जिद के पास हुआ था। कॉन्ग्रेस ने इसे अपने वोटबैंक के लिए जमकर भुनाया। रैली कर करके हिंदुओं को आतंकवादी कहा गया।

जब सवाल उठे कि ये किस आधार पर दावे हो रहे हैं तो खुद को सही साबित करने के लिए यूपीए सरकार में फँसाए गए 7 निर्दोष, जिन्हें तरह-तरह की यातना देकर मजबूर किया गया कि वो मानें ब्लास्ट में उनका हाथ था। इन निर्दोषों संत और सेना से जुड़े लोग थे।

पूर्व नौकरशाह आरवीएस मणि ने कॉन्ग्रेस के दौर में गृह मंत्रालय में एक अंडर-सेक्रेटरी के रूप में काम किया था। अपनी पुस्तक ‘हिंदू टेरर’ में, मणि ने संपूर्ण मिलीभगत का वर्णन किया हुआ है। उन्होंने बताया है कि किन-किन खिलाड़ियों ने ‘भगवा आतंक’ की कहानी गढ़ने के लिए मिलीभगत की और कैसे, कई वरिष्ठ कॉन्ग्रेसी नेता से लेकर कई अन्य लोग इस साजिश में शामिल थे।

वहीं कोर्ट में भी कोर्ट में भी गवाहों ने यह जानकारी दी थी उनके ऊपर हिंदू नेताओं को फँसाने के लिए कहा गया था। ये जानकारी चौंकाने वाली थी, लेकिन जब तक ये सच सामने आया तब तक कॉन्ग्रेस के तुष्टिकरण का शिकार ‘निर्दोष’ हो चुके थे। कॉन्ग्रेस ने देश की सेना के कर्नल पुरोहित, मेजर रमेश उपाध्याय और भगवाधारी साध्वी प्रज्ञा का इस्तेमाल ये फैलाने के लिए किया कि उनकी हिंदू आतंकवाद की थ्योरी एकदम सही है।

ये ध्यान रहे कि आज कोर्ट ने जो फैसला दिया है उससे न तो वो लोग खुश हैं जिनका मकसद हिंदुत्व को बदनाम करने का रहता है और न ही वो लोग, जिन्हें कुछ भी करके हिंदुत्व को आतंकवाद का पर्याय बताना था। 2008 के उस दौर में इस मालेगाँव ब्लास्ट के बाद एक तरफ मुस्लिमों को रैलियों के दौरान ये बताकर खुश किया जा रहा था कि इसे इस्लामी आतंकियों ने अंजाम नहीं दिया है बल्कि हिंदू आतंकवादियों ने दिया है। वहीं दूसरी तरफ, हिंदू नेताओं को पूरे मामले में फँसाने की साजिश चल रही थी।

खुद गवाहों ने इस बात को स्वीकारा था कि उन पर योगी आदित्यनाथ समेत अन्य हिंदू नेताओं का नाम लेने का दबाव था। इसके अलावा जो प्रताड़नाएँ मेजर और कर्नल को दी गई थीं उसका मकसद भी यही था कि ये अपने बयानों में हिंदू नेताओं का नाम ले… लेकिन ये सब होता कैसे? कुछ दिन यूपीए शासन में ये नैरेटिव गढ़ा-बढ़ा। मगर फिर हकीकत सामने आने लगी।

केस एनआईए के पास गया, चार्जशीट दाखिल हुई, गवाहों की पेशी हुई और हकीकत खुलती गई। ये भी सामने आया कि ये पूरा नैरेटिव सिर्फ जनता का ध्यान CWG घोटाले से हटाने के लिए किया था। इसी बीच ब्यूरोक्रेट आरवीएस मणि की किताब जनता के बीच आई, जिनसे कॉन्ग्रेस के हिंदूविरोधी चेहरे को शीशे जैसा साफ कर दिया।

रात भर पिटाई, रीढ़ की हड्डी तोड़ दी, 24 दिनों तक रखा भूखा… आज भी ‘कॉन्ग्रेस का टॉर्चर’ भोग रहीं प्रज्ञा सिंह ठाकुर, एक साध्वी को पोर्न दिखाने वालों को दंड कब?

मालेगाँव ब्लास्ट 2008 मामले में NIA की विशेष अदालत ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत सभी 7 आरोपितों को बरी कर दिया है। 17 वर्षों बाद भले ही ‘भगवा आतंकवाद’ की कहानी झूठी साबित हो गई हो लेकिन आरोपित बनाई गईं साध्वी प्रज्ञा को मिली प्रताड़ना कॉन्ग्रेस के काले कारनामों का चिट्ठा दिखाती है।

कोर्ट के निर्णय आने के बाद साध्वी प्रज्ञा ने जज के सामने अपनी बात भी रखी। उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा ही कहा कि जिन्हें भी जाँच के लिए बुलाया जाता है, उसके पीछे कोई आधार होना चाहिए। मुझे बिना किसी आधार के जाँच के लिए बुलाया गया और गिरफ्तार कर प्रताड़ित किया गया। मेरा पूरा जीवन बर्बाद हो गया। मैं एक साधु का जीवन जी रही थी, पर मुझे फँसाकर झूठे आरोप लगाए गए। कोई भी हमारे साथ खड़ा होने को तैयार नहीं था।”

अपनी बात जारी रखते हुए साध्वी प्रज्ञा ने आगे कहा, “मैं जिंदा हूँ क्योंकि मैं एक संन्यासी हूँ। एक साजिश के तहत भगवा को बदनाम किया गया। आज भगवा की जीत हुई है, हिंदुत्व की जीत हुई है और ईश्वर उन आरोपितों के दंड देगा। हालाँकि, जिन्होंने भारत और भगवा को बदनाम किया, उन्हें अभी तक आपने गलत साबित नहीं किया है।”

गौरतलब है कि 29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगाँव में भिक्खू चौक मस्जिद के पास धमाका हुआ। मोटरसाइकिल में बांधकर किए गए इस धमाके में 6 लोग मारे गए थे और 100 से भी अधिक लोग घायल हुए थे। इसके तहत साध्वी प्रज्ञा समेत 7 लोगों पर UAPA, आतंकवाद, आर्म्स एक्ट और IPC की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। 17 वर्षों तक इसे लेकर मुकदमा चला। 323 गवाह पेश किए गए। इनमें से 37 गवाह अपने बयान से मुकर गए। इसके अलावा बचाव पक्ष के भी 8 गवाह पेश हुए।

प्रताड़ना के 17 वर्ष

मध्य प्रदेश के भोपाल से भाजपा की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा को ब्लास्ट के बाद 23 अक्टूबर 2008 को ATS ने गिरफ्तार किया। साध्वी प्रज्ञा पर आरोप लगा कि विस्फोट में इस्तेमाल की गई एलएमएल फ्रीडम मोटरसाइकिल के इंजन और चेसिस नंबर से पता चला कि वह बाइक साध्वी प्रज्ञा के नाम पर रजिस्टर्ड थी। हालाँकि रजिस्ट्रेशन नंबर फर्जी पाया गया था।

महाराष्ट्र ATS ने दावा किया था कि उस मोटरसाइकिल का इस्तेमाल विस्फोटक लगाने के लिए किया गया और इसी आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया। इस दौरान उन्हें इस कदर प्रताड़ित किया गया कि मेडिकल इमरजेंसी के तहत वह वेंटिलेटर तक पहुँच गईं।

अप्रैल 2011 में यह मामला राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को सौंपा गया, जिसने ATS की जाँच में कई खामियाँ पाईं। NIA ने अपनी जाँच में ये भी कहा कि मोटरसाइकिल भले ही प्रज्ञा के नाम पर थी, लेकिन उसका इस्तेमाल रामचंद्र कलसांगरा नामक फरार आरोपित कर रहा था।

UAPA के तहत साध्वी पर की गई कार्रवाई भी दोषपूर्ण मानी गई। NIA ने जब जमानती वारंट जारी किया तब साध्वी प्रज्ञा ने साल 2020 में अपने साथ हुए अमानवीय व्यवहार को लेकर रिपब्लिक टीवी को एक साक्षात्कार दिया।

इसमें उन्होंने बताया था कि मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह के सामने 3-4 पुलिसकर्मियों ने उन्हें बहुत अधिक प्रताड़ना दी थी। उन्हें हिरासत में लेकर पूरी रात बेल्ट से इस तरह पीटा गया कि उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई और उन्हें वेंटिलेटर पर जाना पड़ा था।

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने बताया कि हिरासत के दौरान उनको पुरुष कैदियों के साथ रखकर पॉर्न वीडियो दिखाया जाता था और साध्वी होने का लिहाज किए बिना उनसे भद्दे सवाल किए जाते थे। उन्होंने बताया था कि पहले उनको भगवा आतंकी कहा गया, फिर भारत को आतंकवादी देश घोषित करवाने का प्रयास किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सारा षड्यंत्र कॉन्ग्रेस का था।

भूख, मार और बिजली के झटके

साध्वी प्रज्ञा ने बताया था कि उन्हें चमड़े की बेल्ट से पीटा जाता था। उन्हें 24 दिनों तक भूखा रखा गया था। उनको बिजली के झटके दिए जाते थे। गाली-गलौज तो उनके साथ आम बात हो गई थी। उनको लगातार पीटने के लिए 5-6 पुलिस वाले लगाए जाते थे और जब वह थक जाते थे तो दूसरे पुलिसकर्मी उनको पीटने लग जाते थे। इनके पैरे के तलवे तक में बेल्ट से पीटा गया। पिटाई के दौरान उनका पूरा नर्वस सिस्टम सुन्न पड़ जाता था।

साध्वी प्रज्ञा की यातनाएँ सिर्फ बेल्ट की मार तक ही सीमित नहीं रहीं थीं। उन्हें उल्टा लटकाकर मारा जाता था और हाथों को गर्म पानी में नमक डालकर डुबोया जाता था। हाथ फट जाते थे तो जख्मों पर नमक छिड़का जाता था।

उन्होंने बताया कि जेल में उन्हें इतनी गंदी-गंदी गालियां दी जाती थीं जिन्हें कोई स्त्री सुन भी नहीं सकती। उन्हें निर्वस्त्र किए जाने की बार-बार धमकी दी जाती थी। भोजन में उन्हें अंडा खाने के लिए मजबूर किया जाता था जबकि वे शाकाहारी हैं।

साध्वी प्रज्ञा को मिली प्रताड़नाओं से उनके पूरे शरीर में सूजन आ गई थी। कई हिस्सो में पस पड़ गया था। आज भी वह कई शारीरिक परेशानियों से जूझ रही हैं। उन्हें कैंसर और न्यूरो की बीमारी तक हो गई। अपनी प्रताड़ना के बारे में बताते हुए साध्वी प्रज्ञा कोर्ट में रो पड़ी थीं।

आज जब साध्वी प्रज्ञा ठाकुर समेत सभी आरोपितों के बरी किया गया तो साध्वी ने कहा कि षडयंत्र के तहत भगवा को बदनाम किया गया, आज हिंदुत्व की जीत हुई है।

अभिनव भारत, कर्नल ने दिए RDX, साध्वी प्रज्ञा की बाइक… कोर्ट ने खोल दिए कॉन्ग्रेस के ‘भगवा आतंकवाद’ के धागे, कहा- मालेगाँव ब्लास्ट पर थ्योरी तो गढ़ ली, पर सबूत एक भी नहीं

मुंबई की स्पेशल एनआईए कोर्ट ने गुरुवार को 2008 के मालेगाँव ब्लास्ट केस में बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी सात आरोपितों को बरी कर दिया। इनमें पूर्व बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित भी शामिल हैं।

स्पेशल जज ए.के. लाहोटी ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष कोई ठोस सबूत पेश करने में नाकाम रहा और सबूतों में कई असंगतियाँ हैं। कोर्ट ने ‘हिंदू आतंकवाद’ की थ्योरी को सिरे से खारिज करते हुए जोर दिया कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन दोषसिद्धि नैतिक आधार पर नहीं, बल्कि ठोस सबूतों पर होनी चाहिए।

यह फैसला 17 साल पुराने केस में आया है, जो राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर काफी विवादास्पद रहा है। ब्लास्ट में छह लोगों की मौत हुई थी और 100 से ज्यादा घायल हुए थे। कोर्ट ने विक्टिम्स के लिए मुआवजे का भी ऐलान किया है।

मालेगाँव ब्लास्ट में कोई सबूत नहीं पेश कर पाया अभियोजन पक्ष

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, स्पेशल जज ए.के. लाहोटी ने 500 पेज से ज्यादा के अपने फैसले में विस्तार से बताया कि अभियोजन पक्ष ने केस को साबित करने में कई गलतियाँ कीं। उन्होंने कहा, “पूरी जाँच के बाद यह साफ है कि अभियोजन कोई ठोस सबूत लाने में विफल रहा है। सबूतों में कई असंगतियाँ हैं, इसलिए सभी आरोपितों को संदेह का लाभ मिलना चाहिए।”

जज ने आगे जोड़ा, “आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन दोषसिद्धि नैतिक आधार पर नहीं की जा सकती। यहाँ सबूतों की कमी है, इसलिए बरी करना जरूरी है।”

कोर्ट ने विशेष रूप से ‘हिंदू आतंकवाद’ के आरोप को खारिज किया, जो अभियोजन की मुख्य थ्योरी थी। जज लाहोटी ने कहा, “अभियोजन ने दावा किया कि यह ब्लास्ट ‘अभिनव भारत’ नामक संगठन की साजिश थी और इसमें हिंदू आतंकवाद शामिल है। लेकिन कोई सबूत नहीं मिला कि आरोपित हिंदू आतंकवाद में लिप्त थे। आतंकवाद किसी धर्म से जुड़ा नहीं है। नैतिकता से फैसला नहीं लिया जा सकता; सबूत जरूरी हैं। यहाँ साजिश साबित नहीं हुई, इसलिए हिंदू आतंकवाद जैसी कोई अवधारणा यहाँ लागू नहीं होती।”

जज ने अभियोजन के दावों को एक-एक करके तोड़ा। उन्होंने कहा, “अभियोजन ने सात आरोपितों के बीच साजिश का आरोप लगाया, लेकिन कोई मीटिंग, कॉल रिकॉर्ड या प्लानिंग का सबूत नहीं पेश किया। सबूत असंगत हैं और पुलिस ने घटनास्थल को ठीक से सुरक्षित नहीं किया, जिससे फॉरेंसिक जाँच प्रभावित हुई।”

साध्वी प्रज्ञा ठाकुर पर क्या कहा कोर्ट ने?

फैसले में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के खिलाफ लगे आरोपों को विस्तार से खारिज किया गया। जज लाहोटी ने कहा, “अभियोजन का मुख्य दावा था कि ब्लास्ट में इस्तेमाल हुई एलएमएल फ्रीडम मोटरसाइकिल साध्वी ठाकुर की थी, जिस पर बम बंधा था। लेकिन फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने बाइक के चेसिस का पूरा सीरियल नंबर रिकवर नहीं किया। इसलिए, यह साबित नहीं होता कि बाइक उनकी थी।”

जज ने आगे कहा, “इसके अलावा, साध्वी ठाकुर ने ब्लास्ट से दो साल पहले संन्यास ले लिया था और सभी भौतिक चीजें त्याग दी थीं। ऐसे में बाइक उनके पास कैसे हो सकती है? अभियोजन यह साबित करने में पूरी तरह फेल रहा।”

कोर्ट ने ठाकुर के संन्यासी जीवन पर भी टिप्पणी की, जिसमें कहा गया, “उन्होंने दो साल पहले सब छोड़ दिया था, इसलिए मटेरियल संपत्ति से उनका कोई लेना-देना नहीं था। आरोप बेबुनियाद हैं।”

कर्नल पुरोहित के खिलाफ आरोप भी हुए धराशाई

लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित पर लगे गंभीर आरोपों को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया। जज ने कहा, “अभियोजन ने दावा किया कि पुरोहित ने कश्मीर से आरडीएक्स मँगवाया और बम असेंबल किया। लेकिन कोई सबूत नहीं – न गवाह, न डॉक्यूमेंट। यह आरोप निराधार है।”

फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस पर बात करते हुए जज लाहोटी ने बताया, “पुरोहित और आरोपित अजय रहीरकर के बीच पैसे के लेन-देन हुए थे, क्योंकि वे अभिनव भारत के पदाधिकारी थे। लेकिन यह पैसा पुरोहित ने अपने घर की निर्माण और एलआईसी पॉलिसी पर खर्च किया, न कि किसी आतंकी गतिविधि पर। अभियोजन यह साबित नहीं कर पाया कि पैसा गलत काम में लगा। इसलिए, कोई केस नहीं बनता।”

अन्य आरोपितों पर कोर्ट का रुख

कोर्ट ने बाकी आरोपितों मेजर (रिटायर्ड) रमेश उपाध्याय, समीर कुलकर्णी, अजय रहीरकर, सुधाकर चतुर्वेदी और सुधाकर द्विवेदी के खिलाफ भी सबूतों की कमी बताई। जज ने कहा, “इन सभी के बीच कोई साजिश साबित नहीं हुई। अभियोजन ने मीटिंग्स या प्लानिंग के सबूत नहीं दिए। एक आरोपित सुधाकर द्विवेदी ने तो दावा किया कि कोई ब्लास्ट हुआ ही नहीं, जिसके बाद अभियोजन ने 100 से ज्यादा विक्टिम्स की जाँच की, लेकिन फिर भी केस कमजोर रहा।”

विक्टिम्स और मुआवजे पर फैसला

कोर्ट ने ब्लास्ट के विक्टिम्स को न्याय देते हुए मुआवजे का ऐलान किया। जज लाहोटी ने कहा, “अभियोजन ने दावा किया कि छह लोग मारे गए, जो कोर्ट मानता है। लेकिन घायलों की संख्या 101 बताई गई, जबकि कुछ मेडिकल सर्टिफिकेट्स में हेराफेरी पाई गई। इसलिए सिर्फ 95 घायलों को मान्यता दी जाती है।”

मुआवजे पर उन्होंने आदेश दिया, “मारे गए छह लोगों के परिवारों को 2 लाख रुपये प्रत्येक और 95 घायलों को 50,000 रुपये प्रत्येक मुआवजा मिलेगा। यह राज्य सरकार देगी। विक्टिम्स को न्याय मिलना चाहिए, भले ही आरोपित बरी हों।”

क्या था पूरा मामला, जो 17 साल तक चला

यह केस 29 सितंबर 2008 को हुआ था, जब मालेगाँव के एक चौराहे पर रमजान के दौरान ब्लास्ट हुआ। मुस्लिम बहुल इलाके में मोटरसाइकिल पर रखे आईईडी से विस्फोट हुआ था। महाराष्ट्र एटीएस ने शुरुआती जाँच की और 12 लोगों को गिरफ्तार किया। एटीएस ने जिन 12 लोगों को गिरफ्तार किया था, उनमें प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, मेजर (सेवानिवृत्त) रमेश उपाध्याय, समीर कुलकर्णी, अजय रहिरकर, सुधाकर चतुर्वेदी और सुधाकर द्विवेदी शामिल थे। एटीएस ने दावा किया था कि यह विस्फोट अभिनव भारत संगठन की साजिश का हिस्सा था।

इस मामले में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) और महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत आरोप लगाए गए थे।

साल 2010 में जाँच एनआईए को सौंपी गई। एनआईए ने 2016 में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की और एमसीओसीए हटाने की सिफारिश की। उन्होंने कहा कि कुछ आरोपितों के खिलाफ सबूत कम हैं। दिसंबर 2017 में कोर्ट ने सात आरोपितों पर ट्रायल का आदेश दिया, जबकि तीन को डिस्चार्ज कर दिया। ट्रायल दिसंबर 2018 में शुरू हुआ, जिसमें 323 गवाहों की जाँच हुई। 34 गवाह होस्टाइल हो गए और 30 से ज्यादा मर चुके थे। अप्रैल 2024 में अंतिम बहस खत्म हुई और 19 अप्रैल को फैसला रिजर्व किया गया।

अभियोजन की तरफ से स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर अविनाश रसल थे, जबकि आरोपितों की तरफ से कई वकील, जैसे जेपी मिश्रा (ठाकुर और रहीरकर), पासबोला समेत अन्य (उपाध्याय), फड़के और बाबर (पुरोहित), रंजीत सांगले (द्विवेदी), और पुनालेकर समेत अन्य (चतुर्वेदी) ने अपनी दलीलें पेश की।

कोर्ट ने अभियोजन की कमियाँ की उजागर

जज ने पुलिस और अभियोजन की कई कमियों पर उँगली उठाई। उन्होंने कहा, “पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित नहीं किया, जिससे सबूत खराब हुए। फॉरेंसिक जाँच में गड़बड़ियाँ हैं। गवाहों की मौत और होस्टाइल होना भी केस को कमजोर किया। कुल मिलाकर अभियोजन का केस असंगत है।”

फिर से हिंदू आतंकवाद पर जज साहब ने दोहराया। “टेररिज्म का कोई धर्म नहीं। लेकिन यहाँ प्रॉसीक्यूशन ने हिंदू आतंकवाद की थ्योरी बनाई, जो सबूतों पर नहीं टिकी। नैतिक आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। सबूत जरूरी हैं, और यहाँ सबूत नहीं हैं। इसलिए, सभी आरोपितों को बरी किया जाता है।”

एनआईए कोर्ट के फैसले के बाद सुधाकर धर द्विवेदी के वकील रंजीत साँगले ने कहा, “ये साबित नहीं हुआ कि ब्लास्ट में इस्तेमाल मोटरसाइकिल साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की थी। घायलों के सर्टिफिकेट नकली थे। डीजी एटीएस को आदेश दिया गया है कि वो जाँच करें कि ये नकली सर्टिफिकेट किसने बनाए। सुधाकर चतुर्वेदी के घर पर रखा गया आरडीएक्स की भी जाँच डीजी एटीएस को करने को कहा गया है। सभी आरोपितों को यूएपीए और दूसरी धाराओं से बरी कर दिया गया है। अभियोजन यूएपीए के तहत आरोपों को साबित करने में नाकाम रहा।”

फैसला खत्म होने पर कोर्ट रूम में सन्नाटा छा गया। आरोपित खुश दिखे, प्रॉसीक्यूशन वाले निराश। यह पूरा फैसला दिखाता है कि कानून सबूतों पर चलता है, नैतिकता पर नहीं। जज साहब ने हर बयान को विस्तार से दिया, ताकि कोई शक न रहे।

पनामा नहर पर अमेरिकी कब्जे का ट्रंप का सपना टूटा, नहीं हो पाई ब्लैकरॉक-हचिसन डील: चीन बढ़ाएगा अब कंट्रोल, रणनीतिक मोर्चे पर ‘अंकल सैम’ को दी ‘धोबी पछाड़’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रणनीतिक मोर्चे पर पटखनी मिली है। जिस पनामा नहर पर वह वापस कब्जे की बात लम्बे समय से कर रहे हैं, उसका नियंत्रण चीन के हाथों में जाता दिख रहा है। पनामा नहर का संचालन वर्तमान में ऐसे व्यक्ति के हाथों में है, जो चीन का नागरिक है।

पनामा नहर अटलांटिक महासागर को प्रशांत महासागर से जोड़ती है और दुनिया के व्यापार के लिए एक बेहद अहम रास्ता है। यह नहर वर्ष 1914 में बनी थी और वर्ष 1999 में अमेरिका ने इसका नियंत्रण पनामा को सौंप दिया था। तब से पनामा ही इसका संचालन करता है और पनामा की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा इस नहर पर टिका है।

यह नहर फिर से एक बार कूटनीतिक लड़ाई के केंद्र में आ गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में चिंता जताई थी कि इस नहर के नियंत्रण पर चीन का बढ़ता दखल अमेरिकी हितों के लिए आने वाले समय में खतरा बन सकता है।

उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि अमेरिका को पनामा नहर का नियंत्रण फिर से अपने हाथ में लेना चाहिए। ट्रंप का कहना था कि चीनी सरकार की पाली पोषी कम्पनियाँ पनामा नहर और आसपास के बंदरगाहों पर अपना प्रभाव लगातार बढ़ा रही हैं। अमेरिका अपनी कम्पनियों को इस नहर के कामों में जोड़ना चाहता था।

इसी के तहत पिछले साल अमेरिका की बड़ी निवेश कंपनी ब्लैकरॉक और हांगकांग की CK हचिसन के बीच पनामा के कुछ बंदरगाहों को लेकर समझौता पर बातचीत चालू हुई थी। इस सौदे के तहत ब्लैकरॉक की अगुवाई वाले जॉइंट वेंचर पनामा के दो प्रमुख बंदरगाहों सहित कई अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों का संचालन सौंपा जाना था।

यह लगभग ₹3 लाख करोड़ की डील मानी गई थी। इसका सीधा उद्देश्य इस नहर के संचालन पर चीन का प्रभाव कम करना था। हालाँकि, इस प्रस्ताव ने अमेरिका और चीन के बीच प्रभाव की लड़ाई को और बढ़ा दिया और चीन ने इस डील पर नाराजगी जताई। अब पनामा नहर पर चीन का प्रभाव कम करने की यह धराशायी हो गई है।

इस समझौते की बातचीत आखिरकार फेल हो गई है। CK हचिसन ने आधिकारिक रूप से यह घोषणा की है कि ब्लैकरॉक के साथ बातचीत की अवधि समाप्त हो चुकी है। इसके परिणामस्वरूप, चीन समर्थित CK हचिसन को पनामा में और अधिक प्रभावी स्थिति मिल गई है।

यह बात उल्लेखनीय है कि CK हचिसन 1997 से ही पनामा के दोनों प्रमुख बंदरगाहों का संचालन कर रही है और इसका मालिकाना हक हांगकांग के अरबपति ली का-शिंग के पास है। वह चीन के नागरिक हैं। पश्चिमी विशेषज्ञों का मानना है कि चीन सरकार द्वारा ऐसे रणनीतिक निवेशों को न सिर्फ स्वीकृति दि जति है, बल्कि वे इसका राजनीतिक लाभ भी उठाते हैं।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “चीन पनामा नहर का संचालन कर रहा है और हमने इसे चीन को नहीं दिया, हमने इसे पनामा को दिया और हम इसे वापस ले रहे हैं।” उन्होंने पनामा पर अत्यधिक शुल्क वसूलने का आरोप लगाते हुए इसके प्रबंधन पर भी सवाल खड़े किए।

ट्रंप ने पनामा सरकार से निर्देश लेने की अपील की, जिससे संकेत मिलता है कि अमेरिका अब इस नहर पर दोबारा नियंत्रण की संभावनाएँ तलाश रहा है। हालाँकि, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए ऐसा लगता है कि अमेरिका को अपने प्रभाव को बहाल करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

पनामा नहर पर बढ़ता चीनी प्रभाव केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन को दिखलाने वाला बन चुका है। यह घटना स्पष्ट रूप से यह दिखाने का कोशिश कर रही है कि ग्लोबल साउथ में चीन कैसे अपने रणनीतिक निवेश और वाणिज्यिक ताकत के जरिए अपना प्रभाव बढ़ा रहा है।

वहीं अमेरिका, जिसकी कभी इस क्षेत्र में मजबूत पकड़ थी, अब अपने पुराने प्रभाव को फिर से कायम करने की कोशिशों में लगा है। लेकिन मौजूदा हालात में वह लगातार पिछड़ता दिखाई दे रहा है।

MP में मुस्लिम युवती शिफा ने छोड़ा इस्लाम, ‘शानवी’ नाम रखकर की सनातन में घरवापसी: हिन्दू युवक संग सात फेरे लेने के बाद बोली- यहाँ होता है महिलाओं का सम्मान

मध्य प्रदेश के खंडवा में एक मुस्लिम युवती ने सनातन से प्रभावित होकर घर वापसी की है। उसका कहना है कि सनातन में महिलाओं का सम्मान होता है। मुस्लिम युवती ने एक हिन्दू युवक से विवाह भी किया है। यह विवाह एक मंदिर में हुआ है। सनातन में वापसी के बाद उसने अपना नाम भी बदल लिया है।

सनातन में घर वापसी करने वाली इस युवती का नाम शिफा था। उसने सनातन में वापसी के बाद अपना नाम शानवी रखा है। यह घर वापसी खंडवा में बुधवार (30 जुलाई 2025) को हुई। युवती ने इस्लाम छोड़ने के बाद राहुल वर्मा नाम के युवक से विवाह किया। यह विवाह खंडवा के महादेवगढ़ मंदिर में हुआ। यहाँ शानवी ने महादेव का रूद्राभिषेक भी किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिफा राइन मध्य प्रदेश के खंडवा छतरपुर की रहने वाली है। उसका राहुल वर्मा से विवाह विवाह महादेवगढ़ मंदिर में पंडित अश्विन खेड़े द्वारा सनातन रीति- रिवाज से संपन्न कराया गया। विवाह के दौरान सैकड़ों की संख्या में उपस्थित महिलाओं ने मंगल गीत गाये।

सिरपुर निवासी कृष्णा पटेल ने विवाह में कन्यादान कर नव-विवाहित जोड़े को श्रीरामचरित मानस भेंट की। शिफा ने बताया है कि वह बचपन से सनातन के प्रति आकर्षित थी।

शिफा ने बताया कि बचपन से ही हिंदू देवी-देवता उसे सपने में आकर आशीर्वाद देते थे। इसलिए वह सनातन धर्म को मानने लगी थी। उसका कहना है कि सनातन धर्म में महिलाओं का सम्मान किया जाता है। माँ सीता, माँ दुर्गा के रुप में इस धर्म में स्त्री की पूजा की जाती है। यह सब देखकर उसे अच्छा लगता था।

सनातन से प्रभावित शिफा ने अपने मन से राहुल वर्मा से शादी की है। उसने बताया, “सोशल मीडिया के माध्यम से मैंने महादेवगढ़ का काफी नाम सुना था। इसीलिए संकल्प लिया था कि विवाह महादेवगढ़ मंदिर पर जाकर ही करूँगी। मेरी इच्छा भोलेनाथ ने पूरी की। अब उनका आशीर्वाद हम दोनों पर बना रहेगा।”

अमेरिकी धौंस के सामने भारत ने नहीं टेके घुटने, व्यापार वार्ता बीच में ही छोड़ी… 25% टैरिफ लगाकर ट्रंप ने निकाली खीझ, रूस के साथ संबंधों पर बोले- मुझे इसकी परवाह नहीं

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर महीनों बातचीत के बाद भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (30 जुलाई 2025) को भारत से व्यापार पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने के साथ-साथ भारत पर अतिरिक्त पैनल्टी लगाने की भी घोषणा की।

अमेरिका का ये कदम दर्शाता है कि नई दिल्ली अमेरिका के आगे झुकने को तैयार नहीं हुआ। मोदी सरकार की ‘राष्ट्र प्रथम’ नीति का भी ये एक प्रमाण है। भारत किसी भी तरह की आर्थिक अधीनता स्वीकार नहीं कर सकता।

रूस के साथ भारत के संबंध और व्यापार वर्षों पुराने हैं। भारत रूस से ऊर्जा और सैन्य हार्डवेयर खरीदता रहा है। अमेरिका ने इसे मुद्दा बनाते हुए भारत पर अतिरिक्त पैनल्टी की घोषणा कर दी।

‘असफल दबाव’ का संकेत है टैरिफ

राष्ट्रपति ट्रंप ने खास स्टाइल में भारत पर टैरिफ लगाने की घोषणा की। भारत पर टैरिफ की वजह ‘असहयोग या खराब व्यवहार’ नहीं है, बल्कि ये टैरिफ अमेरिका के तमाम दबाव के बावजूद भारत के नहीं झुकने का प्रमाण है।

ऐसे समय में जब जापान अमेरिका की शर्तों पर टैरिफ व्यवस्था में छूट दे रहा था, भारत एकतरफा समझौता करने के लिए तैयार नहीं हुआ और बातचीत छोड़कर बीच में ही निकल गया। अगर भारत अमेरिकी कृषि उत्पादों और डेयरी प्रोडक्ट को खुली छूट दे देता तो भारत के घरेलू उद्योग और किसानों पर इसका बुरा असर पड़ता।

भारत अगर अमेरिकी शर्तों को मान लेता तो शायर भारत को टैरिफ वाली मुसीबत नहीं झेलनी पड़ती। लेकिन देशहित से समझौता करने के लिए भारत तैयार नहीं हुआ। अमेरिकी टैरिफ में छूट मिलने से भले ही थोड़े समय के लिए भारत को फायदा मिलता, लेकिन दीर्घकालीन राष्ट्रीय हित प्रभावित होता।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर ट्रंप के फैलाया था झूठ

भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराने को लेकर अमेरिका राष्ट्रपति 25 से ज्यादा बार ‘सफेद झूठ’ बोल चुके हैं। यह पूरा घटनाक्रम ट्रंप के उन दावों की पोल भी खोल रहा है जिसमें राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि भारत- पाकिस्तान के बीच सीजफायर उन्होंने कराया और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तनाव कम करने में मदद की थी। लेकिन यह भारतीय सेना का अभियान था जिसने न केवल पहलगाम आतंकी हमले का बदला लिया, बल्कि सीमा पार आतंकवाद में पाकिस्तान की भूमिका को भी उजागर किया।

ऐसे आतंकवादियों के अंतिम संस्कार में पाकिस्तानी सेना के अधिकारी शामिल हुए जिसे संयुक्त राष्ट्र ने भी आतंकी घोषित कर रखा था। इसकी ऑनलाइन तस्वीरें पूरी दुनिया ने देखी। भारत ने 11 पाकिस्तानी एयरबेस और 9 से ज़्यादा आतंकी शिविरों पर बमबारी की।

ऐसा करके भारत ने ये साबित किया कि सीमा पार पाकिस्तान में बैठे आतंकवादी भी अब सुरक्षित नहीं रह सकते। आतंकवादी चाहे कहीं भी हों, भारत उन्हें ढूँढ कर मार देगा। भारत के सटीक हमले से डरे हुए पाकिस्तान ने तुरंत युद्धविराम की गुहार लगाई।

हालाँकि ट्रंप दोनों देशों के बीच युद्धविराम कराने का श्रेय लेने के लिए जरा जल्दी में थे। उन्होंने बार-बार लगातार इस दावे को दोहराया की भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध उन्होंने रुकवाया। जबकि भारत लंबे समय से कहता आ रहा है कि दोनों देशों के बीच किसी तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप हमें बर्दाश्त नहीं है।

भारत ने पाकिस्तान के लगातार अनुरोध के बाद ही हमलों को रोकने का फैसला किया। अगर भारत ने सचमुच अमेरिकी हुक्म का पालन किया होता और अपने फैसले ट्रंप की समझदारी पर छोड़ दिए होते, तो उसे अब व्यापार दंड का सामना नहीं करना पड़ता। ट्रंप का ताजा गुस्सा साफ तौर पर दर्शाता है कि भारत ने स्वतंत्र रणनीतिक फैसले लिए।

रूसी तेल और हथियारों का भारत खरीदार रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप को ये बात भी चुभती रही है। कई बार उन्होंने अपनी निराशा जताई है। लेकिन भारत ये खुद तय करता है कि उसके लिए क्या सही है।

भारत के लिए रूसी ऊर्जा फायदेमंद

भारत का रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदने का फैसला एक व्यावहारिक आर्थिक कदम रहा है। 2022 से रूस- यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस पर पश्चिमी देशों ने कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए। ऐसे में रूस काफी कम दाम पर कच्चा तेल भारत को बेचता है।

दुनिया में कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों और पश्चिमी देशों की शर्तों का विकल्प भारत को रूस के रूप में मिला है। इससे भारत को ऊर्जा बिलों में अरबों की बचत करने और मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने में मदद मिल रही है।

ऐसे में भारत से ये उम्मीद करना कि रूस- यूक्रेन युद्ध को देखते हुए भारत अमेरिकी नजरिए का समर्थन करेगा और रूस से व्यापारिक रिश्ता तोड़ देगा, पूरी तरह काल्पनिक लगता है, खास कर तक जब कई पश्चिमी देश रूस से रेयर अर्थ मिनरल्स आज भी खरीद रहे हैं।

रूस के साथ भारत के ऐतिहासिक रक्षा संबंध

भारत रूस का पारंपरिक रक्षा संबंध रहा है। रूस से हथियार खरीदने पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को सख्त ऐतराज रहा है। भारत लगातार उनकी शिकायतों की अनदेखी करता रहा है। नेहरू और इंदिरा गाँधी से लेकर वाजपेयी और मनमोहन सिंह तक के काल में भी मास्को के साथ भारत के रक्षा संबंध जरूरत पर आधारित और विश्वसनीय रहे हैं।

ट्रंप ने भारत पर टैरिफ की घोषणा के बाद ये साफ करने की भी कोशिश की कि उन्हें रूस और भारत के रिश्ते से कोई फर्क नहीं पड़ता पर असलियत इससे बिल्कुल उलट है।

शीत युद्ध के दौरान अमेरिका ने अफगानिस्तान में युद्ध लड़ने के लिए पाकिस्तान को कई रियायतें दी, जिससे भारत उसके रक्षा सौदों से बाहर हो गया। उस वक्त रूस ही था जिसने भारत की हर मुश्किल घड़ी में साथ दिया।

यहाँ तक कि 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान भी सैन्य सहायता उपलब्ध कराई। ट्रंप या अमेरिका के किसी भी राजनीतिज्ञ के लिए अब यह उम्मीद करना कि भारत दशकों पुराने रिश्तों को त्याग देगा, क्योंकि वह ऐसा चाहते हैं तो ये संभव नहीं है।

भारत के लिए संप्रभुता सर्वोपरि

ट्रंप के आगे नहीं झुकना सिर्फ व्यापार के लिए ही नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता के लिए भी जरूरी है। ट्रंप की आक्रामक लेन-देन संबंधी कूटनीति के आगे न झुक कर भारत ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि वह किसी भी वैश्विक शक्ति का जागीरदार नहीं बनेगा। चाहे सैन्य निर्णय हों, ऊर्जा स्रोत हों, या व्यापार नीति, भारत अपने राष्ट्रीय हित में कार्य करेगा। ट्रंप के सामने खड़े होकर नई दिल्ली ने दिखा दिया है कि वह अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए आर्थिक घाटा भी सहन करने को तैयार है।

हालाँकि ये टैरिफ भारत की निर्यात को थोड़े वक्त के लिए नुकसान पहुँचा सकते हैं। इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी दिख सकता है। लेकिन बड़े कैनवास पर देखें तो ये दीर्घकालिक स्वायत्तता के लिए चुकाई जाने वाली एक छोटी सी कीमत हैं। ट्रंप द्वारा भारत पर ‘दंड’ लगाना कोई कूटनीतिक हार नहीं है, बल्कि एक कूटनीतिक घोषणा है कि भारत अपनी संप्रभुता को गिरवी नहीं रख सकता।

जैसे-जैसे भारत एक स्वतंत्र विदेश नीति और आर्थिक लचीलेपन के साथ दुनिया के छोटे-बड़े हर देश से अपनी दोस्ती को मजबूत कर रहा है, इससे आने वाले वर्षों में भारत एक विकसित राष्ट्र के रूप में दुनिया के सामने खुद को स्थापित करेगा। भारत एक ऐसा संप्रभु राष्ट्र है, जो अपनी शर्तों पर निर्णय लेता है।

(ये मूल रूप से अंग्रेजी में जिनित जैन द्वारा लिखी गई है। इसे यहाँ क्लिक कर देखा जा सकता है)

J&K में चिनाब नदी पर 1856 मेगावट का पावर प्रोजेक्ट होगा तैयार, ‘सिंधु नदी’ का सारा जल भारत के काम आएगा: पाकिस्तान को मोदी सरकार ने फिर दिया झटका

भारत सरकार ने ‘सिंधु जल संधि’ रोकने के बाद एक और बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले के सिद्धू गाँव के पास चिनाब नदी पर 1,856 मेगावाट क्षमता वाले सावलकोट जलविद्युत परियोजना के निर्माण की शुरुआत कर दी है। इस परियोजना पर पहली बार 1960 में विचार किया गया था।

जानकारी के अनुसार, भारत द्वारा 22 अप्रैल 2025 को सिंधु जल संधि को निलंबित करने के बाद विकास संबंधी यह फैसला पाकिस्तान के लिए एक बड़ी समस्या का कारण हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की ओर बहने वाले पानी को रोकने के लिए भारत को जल भंडारण क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। कहा जा रहा है कि सावलकोट परियोजना पूरी होने के बाद भारत सिंधु नदी के पानी का बेहतर इस्तेमाल कर पाएगा।

यह परियोजना ऊपर की ओर बगलीहार डैम और नीचे सालाल डैम के बीच आने वाले चिनाब नदी के हिस्से पर बनाई जा रही है। यह परियोजना रामबन और उधमपुर जिलों में फैली हुई है और जम्मू और श्रीनगर दोनों से लगभग 120-130 किलोमीटर की दूरी पर है।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोजेक्ट में एक ‘रोलर कॉम्पैक्टेड कंक्रीट ग्रैविटी डैम’ बनेगा, जिसकी ऊँचाई 192.5 मीटर होगी। नदी का बहाव मोड़ने के लिए घोड़े की नाल के आकार की तीन सुरंगें बनाई जाएँगी, जिनकी लंबाई क्रमशः 965 मीटर, 1130 मीटर और 1280 मीटर होगी। यह नदी का रुख मोड़ने में सक्षम होगा।

परियोजना के तहत डैम के बाएँ किनारे पर एक भूमिगत पावर हाउस बनेगा, जिसमें 225 मेगावाट के 8 यूनिट होंगे यानी कुल मिलाकर इसकी क्षमता 1,800 मेगावाट होगी। इसके अलावा, पर्यावरणीय जल प्रवाह के लिए छोड़े गए पानी से 56 मेगावाट की अतिरिक्त बिजली बनाई जाएगी, जिसके बाद इसकी क्षमता 1856 मेगावाट हो जाएगी।

बता दें कि बाढ़ नियंत्रण के लिए भी योजना तैयार की गई है। योजना के मुताबिक, अन्य मौसम में 2,977 क्यूमेक और मॉनसून में 9,292 क्यूमेक पानी मोड़ने की क्षमता होगी। परियोजना के तहत कार्यों की देखरेख की जिम्मेदारी राष्ट्रीय जलविद्युत निगम (NHPC) को सौंपी गई है।

यह पूरी परियोजना ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ (नदी प्रवाह आधारित) सिस्टम पर आधारित है। सावलकोट जल विद्युत परियोजना से प्रतिवर्ष 7,994.73 मिलियन यूनिट ऊर्जा उत्पन्न होने की उम्मीद है, जिससे ऊर्जा की कमी वाले उत्तरी ग्रिड में बिजली की आपूर्ति को बढ़ावा मिलेगा और साथ ही क्षेत्र में औद्योगिक विकास में भी सहायता मिलेगी।