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प्रयागराज में काँवड़ पर हमले का पहले से प्लान बना चुके थे इस्लामी कट्टरपंथी, हिन्दुओं से ली थी टाइम की जानकारी: रिपोर्ट, जुमे की नमाज के समय बनाया निशाना; पुलिस के एक्शन से गाँव छोड़ भागे

प्रयागराज में काँवड़ यात्रा पर इस्लामी कट्टरपंथियों पर हमला किया। डीजे बजाने को लेकर काँवड़ियों से मारपीट की। अब सामने आया है कि इस हमले की प्लानिंग पहले से ही हो गई थी। गाँव के मुस्लिम पक्ष ने काँवड़ यात्रा ले जाने की सारी जानकारी ली, फिर जैसे ही निकले तो हमला कर दिया।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीणों ने बताया कि गाँव में 60 प्रतिशत मुस्लिम आबादी रहती है, जो कि हिंदुओं को दबाव में रखने की कोशिश रखते हैं। आए दिन गाँव में किसी न किसी बात को लेकर बवाल मचाते हैं। 18 जुलाई 2025 को काँवड़ यात्रा पर भी उन्होंने यही किया।

हिंदू पीड़िता गाँव की निवासी उस्मिला ने दैनिक भास्कर से कहा, “यह सब प्लानिंग के तहत हुआ, तभी तो वह (मुस्लिम भीड़) तलवार और लाठियाँ लेकर पहले से ही तैयार थे।” उन्होंने बताया, “जानबूझकर विवाद किया गया था। हमें भी चोट आई हैं। हमारे दामाद ने किसी तरह बचा लिया। हमारे हर धार्मिक कार्य में बाधा डाली जाती है।”

वहीं, गाँव में ही रहने वाली सुनीता देवी ने बताया कि कुछ दिन पहले गाँव में बिजली नहीं थी, ठीक करने पर वो लोग (मुस्लिम पक्ष) विवाद करने लगे थे। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी को भी उठाकर ले गए और बुरी तरह पीटा।

घटना वाले दिन काँवड़ यात्रा में शामिल राजेंद्र कुमार ने दैनिक भास्कर से कहा, “हमारा घर मुस्लिम लोगों के बीच में है। वहीं पर हमारी पान की दुकान भी है। पिछले एक हफ्ते से अयान, जिशान, मोहम्मद राजू, तौफीक हमसे जानकारी ले रहे थे कि तुम लोग काँवड़ लेकर कब जाओगे? कितने बजे जाओगे?”

उन्होंने आगे कहा, “इन लोगों (मुस्लिम पक्ष) की पहले से ही प्लानिंग थी। तभी जैसे ही हम लोग डीजे के साथ निकले। उसे बंद कराने लगे। फिर हम लोगों पर हमला कर दिया। हम लोगों ने भागकर अपनी जान बचाई।”

ग्रामीण सोनू पासी ने बताया कि मुहर्रम पर 4 से 5 दिन लगातार हॉर्न और डीजे बजाए जाते हैं। गाँव में मुहर्रम के नाम पर 4-5 दिन तक स्कूल बंद कर दिए जाते हैं, जबकि सरकारी छुट्टी सिर्फ एक दिन की होती है। सोनू कहते हैं के लेकिन जब भी हिंदुओं का त्योहार आता है, तो यह लोग (मुस्लिम पक्ष) हंगामा करने का प्रयास करते हैं।

जानें पूरा मामला ?

दरअसल, 18 जुलाई 2025 को प्रयागराज के मऊआइमा के सराय ख्वाजा गाँव में काँवड़िये डीजे बजाते हुए काँवड़ यात्रा निकाल रहे थे। इसी दौरान जुमे की नमाज भी हो रही थी। तभी नमाजियों ने डीजे बजाने का विरोध लाठी-डंडों से हमला किया। काँवड़यों को तलवार लेकर दौड़ा दिया। घटना में कई काँवड़िये घायल हुए। जबरदस्ती डीजे भी बंद करवा दिया। घटना के बाद से इस्लामी कट्टरपंथी फरार हैं।

मामले में पुलिस ने 15 नामजद समेत 65 अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया। रविवार (20 जुलाई 2025) को पुलिस ने मामले में आरोपित बेलाल उर्फ बब्बू, तुफैल अहमद, मोहम्मद तस्लीम, मोहम्मद आरिफ, शाहबे आलम, गुड्डू उर्फ अहमद अली समेत 7 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस अन्य आरोपितों के ठिकाने पर भी छापेमारी कर रही है। फिलहाल गाँव में भारी पुलिस बल और PAC के जवान तैनात हैं।

पायलट ने रोड पर लैंड करने का किया था प्रयास, लेकिन रोटर फँसा केबल में: AAIB ने केदारनाथ जा रहे हेलीकॉप्टर के क्रैश पर जारी की रिपोर्ट, 6 की हुई थी मौत

वायुयान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो (AAIB) ने मई, 2025 में केदारनाथ जा रहे हेलीकॉप्टर के क्रैश मामले में जाँच रिपोर्ट जारी कर दी है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि हेलीकॉप्टर का रोटर ब्लेड एक फाइबर केबल में फँस गया था। इसकी वजह से आपातकालीन लैंडिंग नहीं हो पाई और हादसा हो गया। AAIB ने कहा है कि मामले में जाँच अभी जारी है।

यह हादसा उत्तराखंड के उत्तरकाशी में गंगनानी के पास 8 मई, 2025 को हुआ था। AAIB की इस मामले में जाँच रिपोर्ट हादसे के लगभग ढाई महीने के बाद 20 जुलाई, 2025 को जारी की गई है। AAIB ने इस मामले में पाँच पन्नों की यह प्रारम्भिक जाँच रिपोर्ट जारी की है, जिसमें हेलीकॉप्टर के मेंटेनेंस और दुर्घटना के पहले क्या हुआ, यह बताया गया है।

AAIB की जाँच रिपोर्ट के अनुसार, दुर्घटना एयरो ट्रांस सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड का यह एक बेल 407 हेलीकॉप्टर था जो एकदम फिट था। AAIB ने यह भी बताया है कि इस हेलीकॉप्टर ने दुर्घटना वाली उड़ान से पहले दो और उड़ान उसी दिन भरी थीं, जिनमें कोई समस्या नहीं आई थी।

यह हेलीकॉप्टर देहरादून के सहस्त्रधारा हेलीपैड से उड़ा था। AAIB ने बताया है कि केदारनाथ जाने के रूट में इसे खरसाली और झाला हेलीपैड पर उतरना था। इसके बाद यह केदारनाथ वाले हेलीपैड फाटा पर उतरता। AAIB ने बताया है कि हेलीकॉप्टर ने सहस्त्रधारा से खरसाली तक की उड़ान बिना किसी समस्या के भर ली थी।

AAIB की रिपोर्ट के अनुसार, यह उड़ान भरने के बाद खरसाली से इसमें 6 यात्री सवार हुए थे, यहाँ से हेलीकॉप्टर उड़ने के 20 मिनट बाद इसमें खराबी आ गई। AAIB रिपोर्ट में बताया गया है कि इसके बाद पायलट ने इमरजेंसी लैंडिंग के लिए प्रयास किया।

AAIB की जाँच रिपोर्ट के अनुसार,”हेलीकॉप्टर अपनी निर्धारित ऊँचाई से नीचे उतरने से पहले 20 मिनट तक उड़ान भरता रहा। शुरुआत में, पायलट ने उत्तरकाशी में गंगनानी के पास उत्तरकाशी-गंगोत्री मार्ग (NH 34) पर उतरने का प्रयास किया।”

रिपोर्ट में आगे बताया गया है, “लैंडिंग के प्रयास के दौरान, हेलीकॉप्टर का मुख्य रोटर ब्लेड सड़क के समानांतर चल रही एक ओवरहेड फाइबर केबल से टकरा गया। इससे सड़क किनारे लगे कुछ मेटल बैरिकेड भी क्षतिग्रस्त हो गए। हालाँकि, हेलीकॉप्टर लैंड नहीं कर सका और पहाड़ी से नीचे खिसक कर गिर गया।”

AAIB की रिपोर्ट कहती है कि इसके बाद यह हेलीकॉप्टर लुढकते हुए नीचे गया और 250 फीट नीचे जा कर एक पेड़ से टकरा कर रुक गया। AAIB ने बताया है कि इसके चलते ही इस हादसे में लोग घायल हुए। गौरतलब है कि इस हादसे में पायलट समेत 6 लोग मारे गए थे।

AAIB ने कहा है कि हादसे की जाँच के लिए अमेरिका की NTSB और कनाडा कीई TSB ने अपने तकनीकी सलाहकार नियुक्त किए हैं। AAIB ने कहा है कि जाँच टीम मूल कारणों का पता लगाने के लिए आवश्यक आगे की कार्रवाई के लिए उनके साथ बातचीत में जुटी हुई है।

आगरा का धर्मांतरण गिरोह निकला ‘छांगुर पीर’ से भी ज्यादा खतरनाक, ISIS के पैटर्न पर करता था ब्रेनवॉश: PFI से लेकर PAK तक कनेक्शन, 6 राज्यों में छापे के बाद 10 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश पुलिस ने हाल ही में ‘ऑपरेशन अस्मिता’ चलाया। इसमें एक बड़ा धर्मांतरण गिरोह पकड़ा गया। इस ऑपरेशन में छह राज्यों से 10 लोग गिरफ्तार हुए। यह नेटवर्क लव जिहाद के जरिए धर्मांतरण कराने, विदेशों से फंडिंग हासिल करने और कट्टरता फैलाने का काम कर रहा था। पुलिस मानती है कि यह तरीका ISIS जैसे आतंकी संगठन इस्तेमाल करते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस गिरोह के तार पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI), सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) और पाकिस्तान के आतंकी संगठनों से जुड़े हैं। इन्हें कनाडा, UAE और अमेरिका से फंडिंग मिलती थी। यह मामला आगरा की दो लापता बहनों की जाँच से सामने आया।

जाँच में 7 लोगों के खिलाफ सबूत मिले। उनके खिलाफ वारंट जारी हुए। फिर पुलिस ने 11 टीमें छह राज्यों में भेजीं। आगरा पुलिस ने यूपी, गोवा, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, दिल्ली और राजस्थान में छापे मारे। यह गिरोह बलरामपुर के छांगुर पीर वाले गैंग से भी खतरनाक बताया जा रहा है।

आगरा पुलिस कमिश्नर ने जानकारी दी कि इस गिरोह में हर सदस्य का काम तय था। कुछ लोग ब्रेनवॉश करते थे। कुछ पैसा जमा करते थे और विदेशों से आए फंड को दूसरों तक पहुँचाते थे। कुछ सदस्य गिरोह के लोगों को छिपने की जगह देते थे। कुछ कानूनी सलाह देते थे और कुछ नए फोन व सिम का इंतजाम करते थे।

कैसे शुरू हुई जाँच?

मार्च 2025 में आगरा के सदर बाजार थाने में दो सगी बहनों के गायब होने की शिकायत दर्ज की गई थी। इनमें एक की उम्र 33 और एक की 18 साल थी। शुरुआत में यह गुमशुदगी का मामला था, लेकिन बाद में इसे अपहरण में बदल दिया गया।

जानकारी के मुताबिक, दोनों बहनें अपना फोन नहीं ले गई थीं और सोशल मीडिया पर अपने असली नामों से एक्टिव नहीं थी, इसलिए पुलिस के लिए उनका पता लगाना मुश्किल था। पुलिस आयुक्त के निर्देश पर अपर पुलिस उपायुक्त ने इस ऑपरेशन की कमान संभाली।

I’D से खुली धर्मांतरण की पोल

पुलिस को परिवार से जो भी जानकारी प्राप्त थी उसी के आधार पर साइबर सेल ने काम करना शुरू किया था। उन्हें इंस्टाग्राम पर एक ‘कनेक्टिंग रिवर्ट आईडी‘ मिली। आईडी की जब जाँच की गई, तब कोलकाता लोकेशन का पता चला।

इस आईडी से जो भी लोग जुड़े थे उनकी जाँच की गई। पुलिस की एक महिला दारोगा ने फेक नाम बताकर खुद का धर्मांतरण के लिए संपर्क किया। फिर महिला दरोगा को आईडी से जवाब आता है। जवाब देने वाली एक महिला होती है। यहीं से पुलिस को आयशा का सुराग मिलता है। इसके बाद बैंक खातों की जानकारी भी हाथ लगती है।

छह राज्यों में एक साथ छापेमारी

लापता बहनों को खोजने के लिए पुलिस ने ‘ऑपरेशन अस्मिता’ चलाया। कोलकाता में बहनों के होने का मजबूत सुराग था। इसलिए वहाँ एसीपी के साथ चार टीमें भेजी गईं। दिल्ली, राजस्थान, गोवा, उत्तराखंड और यूपी के बाकी इलाकों में भी टीमें भेजी गईं, जिनमें चार से पाँच पुलिसकर्मी थे।

गोवा के लिए पुलिस एयरप्लेन से भी गई। एक ही समय पर पुलिस ने सभी 6 राज्यों में छापा मारा। 50 पुलिसकर्मियों ने चार दिन तक दिन-रात काम किया और आखिरकार बहनें मिल गईं, साथ ही इस गिरोह के लोग भी पकड़े गए।

कैसे काम करता था यह गिरोह?

पुलिस ने बताया कि यह गिरोह बहुत ही व्यवस्थित था। ये लोग लव जिहाद करते थे। यानी, लड़कियों को प्रेमजाल में फँसाते थे। फिर उन्हें धर्म बदलने के लिए उकसाते थे। वे धर्म बदलने के कागजात भी बनाते थे। लड़कियों को कट्टर भी बनाते थे।

इन्हें विदेशों से पैसा मिलता था। ये पैसे को सही जगह लगाते थे। छिपने के लिए सुरक्षित घर भी देते थे। कानूनी सलाह भी देते थे। नए फोन और सिम का भी इंतजाम करते थे। यह गिरोह दिल्ली, जयपुर, कोलकाता, गोवा, देहरादून और यूपी के कई शहरों में फैला था।

‘लव जिहाद देश के लिए खतरा’: हरियाणा की अदालत ने शहबाज को सुनाई 7 साल की जेल, हिन्दू नाबालिग पर मुस्लिम लड़के से दोस्ती करने का बनाता था दबाव

हरियाणा की एक अदालत ने लव जिहाद को देश के लिए खतरा करार दिया है। अदालत ने कहा है कि भले ही कानून में इसको लेकर कुछ ना कहा गया हो लेकिन यह एक षड्यंत्र है। यह टिप्पणियाँ अदालत ने एक नाबालिग हिन्दू लड़की की FIR पर दायर मुकदमे में सुनाई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हरियाणा के यमुनानगर में जगाधरी की एक अदालत ने 17 जुलाई, 2025 को यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि उसके सामने आया मामला लव जिहाद है। अदालत ने लव जिहाद को देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा बताया।

अदालत ने कहा कि भले ही भारतीय न्याय संहिता (BNS) और POCSO में लव जिहाद को लेकर कोई परिभाषा नहीं दी गई है लेकिन यह असल में मुस्लिम पुरुषों का गैर-मुस्लिम महिलाओं के साथ प्रेम में होकर उन्हें इस्लाम में धर्मांतरित करने का एक षड्यंत्र है।

यह फैसला जज रंजना अग्रवाल ने सुनाया। उन्होंने इस मामले में दोषी शहबाज को कुल 7 साल की सजा सुनाई। उसे एक मामले में 4 साल, एक में 2 साल और एक में 1 साल की सजा सुनाई गई है। उस पर POCSO समेत बाकी धाराओं में लगाए गए आरोप में यह सजाए सुनाई गईं।

अदालत ने उस पर ₹1 लाख का जुर्माना भी ठोंका। शहबाज एक 14 वर्षीय हिन्दू बच्ची को स्कूल जाते समय परेशान करता था। वह हिन्दू बच्ची पर दबाव बनाता था कि वह एक मुस्लिम नाबालिग के साथ रिश्ते में आ जाए।

वह इसके लिए लगातार बच्ची का पीछा करता था और उसका उत्पीड़न करता था। बच्ची ने इस मामले में नवम्बर, 2024 में मामला दर्ज करवाया था। अब कोर्ट ने इस मामले में अंतिम फैसला सुनाया है।

गौरतलब है कि लम्बे समय से मुस्लिम युवक, हिन्दू युवतियों को फँसाने के लिए पहचान बदल कर, कलावा पहन और तिलक आदि लगा कर भ्रमित करते रहे हैं। ऐसे मामलों में पहचान तब सामने आती है जब हिन्दू पीड़िता पूरी तरह से फँस चुकी होती है। केरल में ईसाई युवतियाँ भी इसकी शिकार हुई हैं।

असम सरकार कर रही घुसपैठियों पर कार्रवाई, ममता दीदी ने लगा दिया ‘बंग भाषियों पर अत्याचार’ का आरोप: हिमंता सरमा ने दिखाया आईना – हमें बंगालियों से नहीं, सीमा पार की ‘आबादी’ से दिक्कत

असम में हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार घुसपैठियों और अवैध कब्जे से लोगों को हटाने के लिए अतिक्रमण विरोधी अभियान चला रही है। हालाँकि इसमें ममता दीदी ने ‘बंगालियों पर अत्याचार’ होने का झूठा दावा शुरू कर दिया है। इसके चलते शनिवार (19 जून 2025) को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और असम सीएम सरमा के बीच सोशल मीडिया पर वाकयुद्ध शुरू हो गया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर TMC सुप्रीमो ने लिखा कि देश की दूसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा बांग्ला असम में भी सबसे ज्यादा बोली जाती है। वहाँ की बंगाली जनसंख्या को निशाना बनाने के लिए हिमंता सरकार उत्पीड़न कर रही है। यह भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक है।

उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी का यह विभाजन का एजेंडा अपनी सभी सीमाओं को पर कर चुका है और असम के लोग इसके लिए लड़ेंगे।

ममता की इस ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए असम सीएम ने कहा, “दीदी मैं आपको याद दिला दूँ- असम में हम अपने लोगों से नहीं लड़ रहे। बिना डरे उन मुस्लिम घुसपैठियों को हटा रहे हैं जो हमारी आबादी में बढ़ते चले जा रहे हैं। कई जिलों में अब हिंदू अल्पसंख्यक बन गए हैं।”

हिमंता सरमा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी घुसपैठ को बाहरी आक्रमण कहा है। ऐसे में जब हम अपनी जमीन, संस्कृति, पहचान की रक्षा के लिए कदम उठा रहे हैं तो आप इसे राजनीति का रंग दे रही हैं।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी बांग्ला भाषियों के लिए खुद को मसीहा साबित करने में तुली है ताकि बंगाली हिंदू वोट को भी अपनी ओर खींच सके। इस चक्कर में वह बिना सच्चाई जानें किसी भी आरोप को बेतरतीबी से लोगों के सामने परोस दे रही हैं।

बांग्लादेशी फौज ने गोपालगंज में हिंदुओं का नहीं, धर्मनिरपेक्ष पहचान का किया नरसंहार: मोहम्मद यूनुस की सरकार ने फैलाया जिहादी एजेंडा, खत्म कर रहे शांति और सांस्कृतिक विरासत

बांग्लादेश के इतिहास में बुधवार (16 जुलाई 2025) का ये दिन हमेशा एक ‘काले दिन’ के रूप में याद किया जाएगा। जिस फौज को कभी संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में अपनी भूमिका के लिए विश्व स्तर पर सराहा गया था, उसी बांग्लादेशी फौज ने उस दिन वहाँ के गोपालगंज जिले में जो किया, उसने मानवता को झकझोर कर रख दिया।

‘कानून-व्यवस्था बनाए रखने’ के नाम पर, फौज ने प्रधानमंत्री शेख हसीना के गृहनगर में निहत्थे नागरिकों पर अंधाधुंध गोलियाँ चलाई, जिसमें दर्जनों लोगों की जान चली गई और सैकड़ों घायल हुए।

अंतर्राष्ट्रीय अपराध अनुसंधान प्रतिष्ठान (ICRF) द्वारा संयुक्त राष्ट्र नैतिकता कार्यालय (UNEO) को सौंपे गए दस्तावेजों में इस घटना को ‘नरसंहार के बराबर’ बताया गया है। ICRF की रिपोर्टों में न केवल गोपालगंज की भयावह घटना का ब्योरा है, बल्कि बांग्लादेश में लगातार बढ़ रही राजनीतिक हिंसा, सांस्कृतिक विरासत के संगठित विनाश और मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन के एक खतरनाक पैटर्न की ओर भी इशारा किया गया है।

यह घटना न सिर्फ बांग्लादेश की लोकतांत्रिक अस्मिता पर एक गहरा धब्बा है, बल्कि वैश्विक समुदाय के लिए भी एक चेतावनी है कि अगर सत्ता की आड़ में ऐसी बर्बरता पर मौन साधा गया, तो मानवाधिकारों का विचार ही खतरे में पड़ सकता है।

बांग्लादेश फौज के दावे बनाम जमीनी सच्चाई – एक डरावनी तस्वीर

गोपालगंज में हुई हिंसा के बाद, बांग्लादेश फौज ने एक आधिकारिक बयान में दावा किया कि उसने ‘आत्मरक्षा’ में गोलीबारी की। फौज का कहना है कि हालात इतने खराब थे कि घातक हथियारों का इस्तेमाल करना उनकी मजबूरी बन गई।

यह बयान तेजी से सरकारी मीडिया और यूनुस शासन के समर्थकों द्वारा फैलाया जा रहा है। इनमें कई ऐसे चेहरे भी शामिल हैं जिनका पहले अंतरराष्ट्रीय संस्थानों जैसे एएफपी से जुड़ाव रहा है, जिससे वे विदेशी मीडिया में भी प्रभाव रखते हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान बताते हैं कि नागरिकों ने किसी तरह का विरोध नहीं किया था। इसके बजाय, फौज की तरफ से रात के अंधेरे में घर-घर छापेमारी की जा रही है। पुरुषों, महिलाओं और यहाँ तक कि बच्चों को भी जबरन उठा लिया जा रहा है।

सबसे परेशान करने वाली बात यह है कि अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इनके नाम दीप्टो साहा, रमजान काजी, सोहेल राणा और इमोन तालुकदार हैं। इनके शवों का पोस्टमार्टम तक नहीं हुआ। कुछ ही घंटों के अंदर या तो उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया या उन्हें गुपचुप तरीके से दफना दिया गया, बिना किसी फोरेंसिक जाँच के। यह सिर्फ एक सच्चाई को छुपाने की कोशिश नहीं थी। यह एक राज्य प्रायोजित हत्या थी, जिसका मकसद सबूत मिटाना और सच्चाई को दबा देना था।

मुहम्मद यूनुस का इस्लामी शासन

गोपालगंज की घटना कोई अकेली या अचानक हुई हिंसा नहीं थी, बल्कि यह बांग्लादेश में जारी एक सुनियोजित और गहरी साजिश का हिस्सा है। इस साजिश के पीछे कट्टरपंथी इस्लामवादी और जिहादी ताकतें हैं, जिन्हें नोबेल पुरस्कार विजेता से इस्लामी राजनीति के आकांक्षी बने मुहम्मद यूनुस का संरक्षण प्राप्त है।

2024 में हुए राजनीतिक बदलाव को अब कई लोग जिहादी तख्तापलट कह रहे हैं, जिसके जरिए इन ताकतों ने बांग्लादेश की सत्ता पर कब्जा कर लिया। इस नई इस्लामी शासन व्यवस्था के तहत हिंदू समुदाय पर अत्याचार तेजी से बढ़ गए हैं।

मंदिरों को जलाया जा रहा है, हिंदुओं के घरों को ढहाया जा रहा है और जिन जिलों में हिंदुओं की आबादी अधिक है, उनके ऐतिहासिक नाम तक मिटाने की कोशिश की जा रही है। गोपालगंज जिला, जो शेख हसीना का गृहनगर है और जहाँ हिंदू समुदाय की बड़ी उपस्थिति है, लंबे समय से इस्लामी चरमपंथियों के निशाने पर रहा है।

2014 में बीएनपी नेता खालिदा ज़िया ने इस जिले का नाम बदलने की माँग की थी और इसके निवासियों को ‘गोपाली’ जैसे अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया था। आज वही नफरत खुलकर हिंसा का रूप ले चुकी है। इस्लामी भीड़ खुलेआम अल-कायदा, आईएसआईएस, तालिबान और हमास के झंडे लहरा रही है और उग्रवादी नारे लगा रही है। ‘इस्लामी शशोन्तोंत्रो’ आंदोलन के एक प्रमुख नेता मुफ़्ती फैज़ुल करीम ने तो बांग्लादेश को ‘अगला अफगानिस्तान’ बनाने की खुली धमकी दी है।

स्थिति और भी चिंताजनक तब हो गई जब अंतरराष्ट्रीय जिहादी नेटवर्क के कई शीर्ष नेता हाल के महीनों में बांग्लादेश पहुँचे। गेटस्टोन इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, तख्तापलट के बाद से हमास के खालिद कुद्दूमी और खालिद मिशाल, पाकिस्तानी इस्लामी नेता मुफ़्ती तकी उस्मानी और मौलाना फ़ज़लुर रहमान सहित कई जिहादी नेता बांग्लादेश का दौरा कर चुके हैं।

खुफिया सूत्रों का कहना है कि इन यात्राओं का उद्देश्य रोहिंग्या शरणार्थियों और ‘फंसे हुए पाकिस्तानियों’ (बिहारियों) को कट्टरपंथी बनाना है, ताकि उन्हें भारत, इजराइल, अमेरिका और यहाँ तक कि सऊदी अरब और बहरीन जैसे देशों के खिलाफ आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल किया जा सके। यह स्पष्ट है कि बांग्लादेश अब न केवल एक राजनीतिक संकट का सामना कर रहा है, बल्कि एक उभरते हुए आतंकवादी और इस्लामी कट्टरपंथी केंद्र में बदलता जा रहा है।

बांग्लादेश की बहुलवादी पहचान को एक-एक करके मिटाना

बांग्लादेश में इस्लामवादी ताकतों का मकसद सिर्फ शारीरिक हिंसा फैलाना नहीं है, बल्कि वे देश की धर्मनिरपेक्ष और बहुलतावादी पहचान को जड़ से मिटाना चाहते हैं। रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित बांग्लादेश के राष्ट्रगान को ‘हिंदू गीत’ कहकर हटाने की माँग जोर पकड़ रही है।

साथ ही, गोपालगंज का नाम बदलने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। उनका दावा है कि यह नाम मुस्लिम भावनाओं को ठेस पहुँचाता है। लेकिन ये माँगें धार्मिक भावनाओं से नहीं, बल्कि एक कट्टर और फासीवादी सोच से निकली हैं।

ऐतिहासिक तौर पर, गोपालगंज का विकास हिंदू ज़मींदारों ने किया था और यह क्षेत्र रानी रासमोनी जैसी बंगाली संस्कृति की प्रतिष्ठित शख्सियत की विरासत से जुड़ा हुआ है। यह इलाका हमेशा से सांप्रदायिक सौहार्द और साझा संस्कृति का प्रतीक रहा है।

मगर मौजूदा इस्लामी शासन इसे मिटाना चाहता है। सांस्कृतिक सफाई की एक खतरनाक मुहिम के तहत बंगाली कला और संस्कृति को निशाना बनाया जा रहा है। प्रसिद्ध फिल्म निर्माता सत्यजीत रे के पैतृक घर को मैमनसिंह जिले में गिरा दिया गया।

भले ही दशकों से वह घर सत्यजीत रे के परिवार से जुड़ा रहा हो, अधिकारियों ने इस रिश्ते को झूठ कहकर नकार दिया। यह कोई सामान्य हादसा नहीं था, बल्कि बंगाली और हिंदू विरासत को खत्म करने की एक सुनियोजित कार्रवाई थी।

इसी तरह, बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान और नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर से जुड़े स्थलों को भी निशाना बनाया जा रहा है। जहाँ एक ओर भौतिक विरासत को मिटाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर एक मनोवैज्ञानिक युद्ध भी चल रहा है, जिसका मकसद लोगों की सोच और आत्मसम्मान को तोड़ना है।

गोपालगंज में जो हुआ, वह सिर्फ एक दर्दनाक घटना नहीं थी, बल्कि एक बड़ी साजिश का संकेत है। इस नरसंहार में कम से कम पाँच लोगों की जान गई। मारे गए लोगों को पोस्टमार्टम जैसी बुनियादी गरिमा तक नहीं दी गई।

इसके बाद पूरे इलाके में फौज का कब्जा हो गया और मीडिया को पूरी तरह चुप करा दिया गया। यह साफ दिखाता है कि बांग्लादेश सिर्फ राजनीतिक संकट में नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति, इतिहास और आत्मा को बचाने की लड़ाई में फँसा हुआ है।

बांग्लादेश की आत्मा पर हमला

इतिहास में गोपालगंज को हमेशा सांप्रदायिक शांति और सौहार्द का प्रतीक माना गया है। यहाँ तक कि जमात-ए-इस्लामी और बीएनपी जैसी विवादित पार्टियों ने भी कभी वहाँ शांतिपूर्वक रैलियाँ की थी। लेकिन इस बार, नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) की रैली के दौरान कुछ अलग ही हुआ।

इस रैली की आड़ में जानबूझकर हिंसा फैलाई गई और जब फौज आई, तो उसने हालात संभालने की जगह और ज्यादा खून-खराबा किया। इस घटना के बाद पूरे गोपालगंज जिले में कर्फ्यू लगा दिया गया। लेकिन यह लोगों की सुरक्षा के लिए नहीं था। इसका असली मकसद था सच्चाई को छुपाना, इलाके को बाकी देश से अलग-थलग करना और आम लोगों को चुप कराना।

यूनुस शासन ने इस रैली को एक युद्धक्षेत्र में बदलकर ये साफ कर दिया कि अब बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के लिए कोई जगह सुरक्षित नहीं है। आज बांग्लादेश में सिनेमा हॉल, सूफी दरगाहें, हिंदू मंदिर और सांस्कृतिक संस्थान लगातार हमलों का शिकार हो रहे हैं।

ये सब संकेत हैं कि देश की वर्तमान सरकार एक सुनियोजित कोशिश कर रही है जिससे बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्ष और विविध पहचान को खत्म किया जा सके। यह किसी लापरवाही का नतीजा नहीं, बल्कि  सोची-समझी साजिश है, बांग्लादेश की आत्मा पर सीधा हमला।

जहाँ कभी यह देश अपने संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान के सपनों के अनुसार एक धर्मनिरपेक्ष और समावेशी राष्ट्र था, वहाँ अब एक बिखरा हुआ, डरा हुआ और कट्टरता की गिरफ्त में फंसा बांग्लादेश खड़ा है, जिसे उसके अपने ही नेता और संस्थाएँ धोखा दे रही हैं।

बुधवार (16 जुलाई 2025) को गोपालगंज में जो हुआ, वह सिर्फ एक त्रासदी नहीं थी, वह एक युद्ध अपराध था। यह नरसंहार, देश में व्यवस्था बहाल करने के नाम पर चल रहे एक बड़े और खतरनाक अभियान का हिस्सा है।

इस अभियान का निशाना हैं, देश के अल्पसंख्यक, उसकी सांस्कृतिक विरासत और उसका इतिहास। दुनिया को अब चुप नहीं रहना चाहिए। अगर संयुक्त राष्ट्र और पश्चिमी देश आंखें मूंदे बैठे रहे, तो वे उसी तख्तापलट का हिस्सा माने जाएँगे जिसने इन जिहादी ताकतों को सत्ता में लाने में मदद की।

अगर आज गोपालगंज को भुला दिया गया, तो कल यही त्रासदी फरीदपुर, नारायणगंज, ब्राह्मणबरिया और देश के बाकी हिस्सों में दोहराई जाएगी। अब चुप्पी की कोई गुंजाइश नहीं बची है, हर बीतते मिनट के साथ एक और जान जा रही है, एक और सच्चाई दफन हो रही है और बांग्लादेश का एक और हिस्सा मारा जा रहा है। दुनिया को बाद में नहीं बल्कि अभी ही बोलना होगा।

मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में ये रिपोर्ट सलाह उद्दीन शोएब चौधरी ने लिखी है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

भोपाल के मुस्लिम गैंग के सरगना फरहान ने रेप का वीडियो दिखाकर धमकाया, कहा- तेरे साथ भी ऐसा ही करूँगा: चार्जशीट में पुलिस ने दिए जबरन दोस्ती-रेप-ब्लैकमेलिंग से जुड़े कई सबूत

भोपाल रेप केस के मामले में पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। कोर्ट में इस केस की सुनवाई 22 जुलाई 2025 को होगी। केस के मुख्य आरोपित फरहान और उसके साथियों से जुड़ी कई अहम जानकारियों का खुलासा इस चार्जशीट में किया गया है।

मुख्य आरोपित फरहान लड़कियों के साथ रेप करने वाले वीडियो दिखलाकर धमकी देता था कि वह पीड़िताओं के साथ भी वैसा ही करेगा। इसके अलावा सबसे पहले जिस पीड़िता ने FIR करवाई थी, उसे फरहान ने शिकायत करने से मना किया था। वह उसे कागज पर लिखकर देने को तैयार था कि उसके साथ वह दोबारा दुष्कर्म नहीं करेगा। हालाँकि पीड़िता उसके बहकावे में नहीं आई।

क्या था मामला

भोपाल के पिपलानी थाना क्षेत्र के कोकता स्थित निजी कॉलेज में ‘मुस्लिम गैंग’ ने कई छात्राओं से रेप किया। छात्राओं को दोस्ती का झाँसा देकर फँसाया गया। आरोपितों ने पहले लड़कियों को अपने प्रेम जाल में उलझाया, फिर उनके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए। इतना ही नहीं, उन्होंने पीड़िताओं पर धर्म बदलने का दबाव डाला और हिंदू धर्म के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाँ कीं।

रेप कर उनका वीडियो बनाया गया। वायरल करने की धमकी दी गई। इसके बाद 12 अप्रैल 2025 को भोपाल के बागसेवनिया थाने में दो लड़कियों ने एफआईआर लिखवाई कि फरहान और उसके साथियों ने मिलकर उसके साथ रेप और ब्लैकमेलिंग समेत कई घटनाओं को अंजाम दिया है। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 13 अप्रैल को फरहान को गिरफ्तार किया।

एक शिकायत के बाद 5 अन्य पीड़िताओं ने भी हिम्मत दिखाई और FIR दर्ज करवाई। मामले की तह खुलती गई तो फरहान के अलावा 6 और आरोपित भी पुलिस के हत्थे चढ़े। इसके बाद पुलिस ने मामले की गहन पड़ताल की और मामले की चार्जशीट दाखिल की। इसमें मेडिकल रिपोर्ट, डिजिटल सुबूत और गवाहों के बयान आदि को शामिल किया गया।

कब कौन हुआ गिरफ्तार

दो बहनों की ओर से पहली प्राथमिकी दर्ज होने के बाद 13 अप्रैल 2025 को फरहान को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद 20 अप्रैल 2025 को दूसरे आरोपित साद को पुलिस ने गिरफ्तार किया। इसके बाद लगातार FIR दर्ज होने के साथ साथ आरोपितों के पकड़े जाने की कड़ी चलती रही।

तीसरे आरोपित साहिल पन्ना को पुलिस ने 27 अप्रैल तो वहीं चौथे आरोपित अली को 28 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया। इसी के दो दिन बाद 1 मई 2025 को पाँचवा आरोपित नबील भी पुलिस के हत्थे चढ़ गया। हालाँकि छठा आरोपित अबरार काफी दिनों की पुलिस की गिरफ्त से फरार रहा। 30 जून 2025 को इटारसी से पुलिस ने अबरार को पकड़ा

दोस्ती, रेप और ब्लैकमेल

रिपोर्ट्स के अनुसार, पूरे मामले में 57 गवाहों की सूची के साथ 240 पन्नों का चालान तैयार कर जिला न्यायालय में जज नीलम मिश्रा की कोर्ट में पेश किया गया। पीड़िताओं ने जाँच के दौरान अपने बयान में ये भी बताया कि उन्हें जबरन मटन-चिकन खिलाया गया। इसके अलावा उनके वीडियो बनाए गए और ब्लैकमेल किया गया। आरोपितों ने उन पर इस्लाम कबूलने के लिए दबाव डाला।

एक पीड़िता ने बताया कि फरहान से उसकी मुलाकात बहन के कॉलेज में हुई थी। उसने जबरदस्ती दोस्ती की। पीड़िता ने बताया कि इसके बाद अप्रैल 2023 में मुझे बाहर घुमाने के बहाने फरहान अशोका गार्डन स्थित अपने घर लेकर गया। वहाँ उसने मेरे साथ रेप किया।

साथ ही उसने मोबाइल में लड़कियों के साथ रेप के वीडियो दिखलाकर कहा था कि तेरे साथ भी ऐसे ही करूँगा। फरहान ने पीड़िता को धमकी भी दी थी कि अगली बार सेक्स नहीं किया तो पापा-भाई को मार देगा।

इसके बाद घरवालों को हिम्मत करके उसने सारी बात बताई तो परिवार ने शिकायत दर्ज करवाने का साहस दिया। हालाँकि शिकायत से एक दिन पहले फरहान ने पीड़िता को धमकी भरा कॉल किया और कहा कि वह फरार हो जाएगा। पुलिस उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी।

इसी तरह दूसरी FIR करवाने वाली पीड़िता को भी फरहान ने अपने रिश्ते में मामा लगने वाले अली से मिलवाया। उसके बाद 2024 में अली उसे अबरार के घर पर लेकर गया। वहाँ फरहान और अली ने रेप कर वीडियो बनाई। साथ ही पीड़िता के घरवालों को बताने की धमकी के साथ लगातार मिलने की बात कही।

पुलिस के सामने दिया बयान- कोई पछतावा नहीं

फरहान ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसे हिन्दू लड़कियों का रेप करने, उन्हें फँसाने और ब्लैकमेल करने का कोई भी पछतावा नहीं है। इस्लाम के हिसाब से ये सब उसके लिए सवाब का काम है।

फरहान ने यह भी बताया है ‘मुस्लिम गैंग’ हिन्दू लड़कियों का जीवन बर्बाद करना चाहता था और इस काम को जिहाद मानता था, इसलिए हिंदू लड़कियों को ही निशाना बनाया जाता था। फरहान ने तो पुलिस से ये तक कहा कि हिन्दू लड़कियों को फँसा कर रेप करने का उसे गर्व है।

सलमान शेख ने हिन्दू युवती को फँसाया, फिर मजार-दरगाह की बातें कर बहन और भांजी को भी भगा ले गया: सोना-चाँदी और ₹1.65 लाख भी गायब किए, लखनऊ में पुलिस ने दर्ज की FIR

लखनऊ में हिंदू युवक के पूरे परिवार को धर्म परिवर्तन के लिए भगाने का मामला सामने आया है। परिवार के घर पर मुस्लिम युवक सलमान ने घर पर आवाजाही शुरू की। घर की महिलाओं को इस्लाम का पाठ पढ़ाने लगा और फिर पीड़ित युवक की पत्नी, साली और 5 साल की बेटी को धर्मांतरण के इरादे से घर से भगा ले गया। घर में रखे आभूषण और लाखों रुपए भी चुरा कर ले गया।

ऑपइंडिया के पास उपलब्ध FIR के अनुसार, पीड़ित हिंदू युवक लखनऊ के मड़ियाँ थाना क्षेत्र में रहता है। वह एक निजी कंपनी में काम करता है। दो महीने पहले उसकी पत्नी की तबियत खराब हुई तो देखरेख के लिए उसने अपनी साली को सीतापुर से लखनऊ बुला लिया। यहाँ पर उससे मिलने के लिए आशिक सलमान शेख भी आने लगा। घर पर आकर वह ज्यादातर इस्लाम संबंधित बातें ही करता था।

ऑपइंडिया के पास मामले से संबंधित FIR कॉपी उपलब्ध है

जब पीड़ित ने इस पर आपत्ति जताई तो वह उसकी अनुपस्थिति में घर पर आने लगा। उसने पीड़ित की पत्नी और साली को इस्लाम स्वीकार करने के लिए बरगलाने लगा। उनसे मजार, दरगाह समेत कई बातें करने लगा। घर पर भी पत्नी और साली इन्हीं विषयों पर चर्चा करने लगीं। जब इस बात पर पीड़ित ने दोनों को फटकारा तो उन्होंने पीड़ित पर नाराजगी जाहिर की।

इसके बाद 15 जुलाई 2025 को पीड़ित काम के बाद घर लौटा तो पत्नी, साली और 5 साल की बेटी घर पर नहीं मिले। घर में सामान भी बिखरा था। सोने की चेन, करधनी, पायजेब समेत सभी गहने और 1,65,000 से अधिक की रकम भी घर से गायब थी। पीड़ित ने दो दिनों तक खोजबीन करने के बाद पुलिस को शिकायत दी।

सलमान शेख पत्नी, साली और बेटी को फुसला कर भगा ले गया है। साथ ही उसने बहन की शादी के लिए पैसे और आभूषण जमा किए थे। उन्हें भी चुराया है। पीड़ित ने बताया कि सभी के फोन उसी दिन से बंद हैं।

पुलिस के अनुसार, सर्विलांस की मदद से आरोपी की लोकेशन का पता लगाया जा रहा है। आरोपी के साथ और कितने लोग मिले हैं, इसकी जानकारी भी की जा रही है। पुलिस सलमान क तलाश में कई जगहों पर दबिश भी दे रही है। पुलिस का कहना है कि जल्दी ही आरोपित को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

रथ यात्रा से लौटी हिंदू नाबालिग का BNP नेताओं ने किया रेप, Video बनाकर धमकाया भी: बच्ची के जहर खाने पर खुला मामला, बांग्लादेश में 6 अरेस्ट

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के छह गुंडों ने 27 जून, 2025 को एक नाबालिग हिन्दू जनजातीय लड़की के साथ रेप किया। यह घटना बांग्लादेश के चटगाँव डिवीजन के खगराछारी में हुई थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता कक्षा आठ की छात्रा है। घटना वाले दिन वह रथ यात्रा मेले में गई थी और फिर एक रिश्तेदार के घर रुकी थी। आरोपित जबरन घर में घुस गए और पीड़िता के साथ सामूहिक बलात्कार किया। आरोपितों की पहचान अरमान हुसैन, इमोन हुसैन, इनायत हुसैन, सद्दाम हुसैन, मोहम्मद सोहेल इस्लाम और मोहम्मद मुनीर इस्लाम के रूप में हुई है।

आरोपितों ने रेप के दौरान उसका वीडियो भी बनाया और पीड़िता को चुप रहने के लिए धमकाया। चारो आरोपित BNP की छात्र शाखा, छात्र दल, युवा शाखा और जुबो दल के नेता हैं। डर और लोक-लाज के कारण नाबालिग हिंदू लड़की ने अपने साथ हुई घटना के बारे में परिवार वालों को नहीं बताया।

इसके चलते वह जल्द ही डिप्रेशन में आ गई। 12 जुलाई 2025 को उसने आत्महत्या का प्रयास किया। पीड़िता ने खुद को जान से मारने के लिए जहर पी लिया। परिजनों ने उसे खगराछारी सदर अस्पताल में भर्ती कराया। यहाँ अस्पताल में इलाज के बाद उसकी जान बचा ली गई।

मामले पर बात करते हुए अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टर रिपोल बप्पी चकमा ने कहा, “छात्रा की हालत गंभीर है और वह मानसिक रूप से अवसादग्रस्त है। उसे आवश्यक उपचार दिया जा रहा है।” होश में आने पर पीड़िता ने अपने परिजनों को सच्चाई बताई।

16 जुलाई 2025 की रात को लड़की के पिता ने खगराछारी सदर थाने में BNP के छः नेताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। खगरछारी के एसपी आरोफिन ज्वेल ने बताया कि गुरुवार (17 जुलाई 2025) को पुलिस ने छापेमारी कर आरोपित अरमान हुसैन, इमोन हुसैन, इनायत हुसैन और सद्दाम हुसैन को गिरफ्तार कर लिया गया है।  

BNP नेता फजोर अली ने भी किया था हिन्दू महिला से रेप

इससे पहले 26 जून 2025 को BNP के एक प्रमुख नेता फजोर अली ने एक हिंदू महिला के घर में जबरन घुसकर उसका रेप किया था। उसने अपनी साथियों संग मिलकर महिला का चाकू की नोंक पर रेप किया था। इतना ही नहीं उसने उसकी वीडियो भी बनाकर वायरल कर दी थी।

पीड़िता 21 साल की थी और उसके दो बच्चे भी हैं। उसका पति दुबई में रहकर नौकरी करता था । घटना के 15 दिन पहले ही वह मुरादनगर अपने पिता के घर रहने आई थी। तब से ही 38 वर्षीय फजोर अली उसके पीछे पड़ा था। बाद में उसने घर

आगरा की ‘द केरल स्टोरी’ में इब्राहिम, रहमान और हसन समेत 6 का गैंग पकड़ाया, हिन्दू बहनों का किया था धर्मांतरण: J&K, बंगाल, राजस्थान समेत 7 राज्यों में है नेटवर्क, पढ़े-लिखे युवा थे टारगेट

उत्तर प्रदेश के आगरा में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें दो सगी बहनों के अपहरण और धर्मांतरण की कहानी ने पूरे देश का ध्यान खींच लिया है। आगरा पुलिस ने इस मामले में तेजी दिखाते हुए सात राज्यों में छापेमारी की और कई आरोपितों को गिरफ्तार किया।

इस रैकेट की जड़ें इतनी गहरी हैं कि इसके तार विदेशी फंडिंग से भी जुड़े होने का शक है। यह मामला फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ की तर्ज पर सामने आया है, जिसमें लालच, लग्जरी लाइफ का वादा और ब्रेनवॉश का कॉकटेल इस्तेमाल कर युवाओं को धर्मांतरण के लिए फँसाया जाता है। आइए ये पूरा मामला समझते हैं।

क्या है पूरा मामला?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये घटना शुरू होती है आगरा के सदर थाना क्षेत्र से, जहाँ पंजाबी समाज की दो सगी बहनें रहती थीं। ये बहनें 24 मार्च 2025 को अचानक अपने घर से गायब हो गईं। परिवार वालों ने पहले तो खुद तलाश की, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। 4 मई 2025 को सदर थाने में अपहरण की धारा में मुकदमा दर्ज हुआ। परिवार का आरोप था कि उनकी बेटियों को जम्मू-कश्मीर के ऊधमपुर की रहने वाली एक युवती सायमा उर्फ खुशबू ने बहला-फुसलाकर ले गई है।

पुलिस की जाँच में जो खुलासा हुआ, वो चौंकाने वाला था। ये कोई साधारण अपहरण का मामला नहीं था, बल्कि एक बड़े धर्मांतरण रैकेट का हिस्सा था। पुलिस को पता चला कि इन बहनों का ब्रेनवॉश कर उनका धर्म परिवर्तन कराया गया है और अब वो खुद इस रैकेट का हिस्सा बन चुकी हैं।

कैसे शुरू हुई कहानी?

यह कहानी 2021 से शुरू होती है। उस वक्त बड़ी बहन, जो आगरा के दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में पढ़ती थी, सायमा उर्फ खुशबू नाम की एक युवती के संपर्क में आई। सायमा ने धीरे-धीरे उसका ब्रेनवॉश शुरू किया। उसे लग्जरी लाइफ और बड़े-बड़े वादों का लालच दिया गया। नतीजा ये हुआ कि 2021 में बड़ी बहन सायमा के साथ चली गई। परिवार वालों ने पुलिस को सूचना दी और रास्ते में लैंडस्लाइड होने की वजह से पुलिस और परिवार वाले उसे वापस घर ले आए।

लेकिन घर आने के बाद भी बड़ी बहन की हरकतें बदल चुकी थीं। वो पूजा-पाठ का विरोध करने लगी और इस्लाम की पैरवी करने लगी। परिवार वालों के लिए ये किसी सदमे से कम नहीं था। धीरे-धीरे उसने अपनी छोटी बहन को भी अपने प्रभाव में ले लिया। बड़ी बहन ने छोटी बहन का भी ब्रेनवॉश किया और दोनों 24 मार्च 2025 को घर से गायब हो गईं।

पुलिस ने कैसे पकड़ा?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब परिवार ने पुलिस से गुहार लगाई, तो आगरा पुलिस ने फौरन हरकत में आते हुए सात टीमें बनाईं। इनमें साइबर सेल, सर्विलांस और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की टीमें शामिल थीं। डीजीपी राजीव कृष्ण के निर्देश पर पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने इस मामले को गंभीरता से लिया।

पुलिस ने सर्विलांस और साइबर सेल की मदद से दोनों बहनों का सुराग तलाशा। उनकी लोकेशन पश्चिम बंगाल के बैरकपुर में मिली। पुलिस ने तुरंत वहाँ छापेमारी की और दोनों बहनों को सुरक्षित बरामद कर लिया। इसके साथ ही बैरकपुर से दो लोगों, शेखर रॉय उर्फ हसन अली और रीत बनिक उर्फ मोहम्मद इब्राहिम को गिरफ्तार किया गया। हसन अली बारासात कोर्ट में कर्मचारी है।

पुलिस यहीं नहीं रुकी। उसने सात राज्यों – पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली-एनसीआर और बिहार में एक साथ छापेमारी की। उत्तराखंड के ऋषिकेश से रहमान नाम के एक शख्स को पकड़ा गया। बरेली और राजस्थान से भी एक-एक आरोपित को गिरफ्तार किया गया। सभी आरोपितों को ट्रांजिट रिमांड पर आगरा लाया जा रहा है।

धर्मांतरण गैंग का हाईटेक तरीका

पुलिस की जाँच में पता चला कि ये धर्मांतरण गैंग कोई छोटा-मोटा गिरोह नहीं है। ये एक हाईटेक नेटवर्क है, जो 2015 से सक्रिय है। ये गैंग पहले पढ़े-लिखे युवक-युवतियों को टारगेट करता है। उन्हें लग्जरी लाइफ, पैसे और बड़े-बड़े वादों का लालच दिया जाता है। फिर सोशल मीडिया के जरिए हाईटेक तरीके से ब्रेनवॉश किया जाता है। जो लोग इनके जाल में फँस जाते हैं, उनका धर्म परिवर्तन कराया जाता है और फिर उन्हें गैंग का हिस्सा बना लिया जाता है।

ये गैंग इतना शातिर है कि धर्मांतरण के बाद लोग खुद इसके लिए काम करने लगते हैं। वे सोशल मीडिया पर इस्लाम के पक्ष में मुहिम चलाते हैं और नए लोगों को फंसाने का काम करते हैं। पुलिस को कुछ ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स मिले हैं, जिनकी गतिविधियाँ संदिग्ध हैं और धर्मांतरण से जुड़ी हुई हैं।

विदेशी फंडिंग का शक

पुलिस की शुरुआती जाँच में ये भी खुलासा हुआ कि इस गैंग के तार विदेशों से जुड़े हो सकते हैं। ठीक वैसे ही, जैसे बलरामपुर के छांगुर पीर उर्फ जलालुद्दीन के मामले में विदेशी फंडिंग की बात सामने आई थी। छांगुर पीर का मामला इन दिनों चर्चा में है, जहाँ ईडी, एटीएस और एसटीएफ ने छापेमारी की थी। हालाँकि, आगरा पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने साफ किया कि इस मामले का छांगुर पीर से कोई सीधा कनेक्शन नहीं है। फिर भी विदेशी फंडिंग की जाँच चल रही है और जल्द ही बड़ा खुलासा होने की उम्मीद है।

क्या कह रहा है पीड़ित परिवार?

पीड़ित परिवार का कहना है कि उनकी बेटियों को सायमा उर्फ खुशबू ने अपने जाल में फँसाया। सायमा ने पहले बड़ी बेटी को ब्रेनवॉश किया और फिर उसने अपनी छोटी बहन को भी उसी रास्ते पर ले गई। परिवार का आरोप है कि सायमा उनकी बेटियों को शादी के बहाने ले गई। पिता ने पुलिस को बताया कि उनकी बेटी सायमा के प्रभाव में आकर दूसरे मजहब की बात करने लगी थी। परिवार ने पुलिस से जल्द से जल्द कार्रवाई की गुहार लगाई थी।

‘द केरल स्टोरी’ जैसी है ये कहानी भी…

लोगों का कहना है कि ये मामला फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ से मिलता-जुलता है। इस फिल्म में दिखाया गया था कि कैसे युवतियों को प्रलोभन और ब्रेनवॉश के जरिए धर्मांतरण के लिए फँसाया जाता है। ठीक उसी तरह इस मामले में भी सायमा ने पहले बड़ी बहन को अपने जाल में फँसाया और फिर उसने छोटी बहन को भी उसी रास्ते पर ले गई।

आगरा पुलिस इस मामले में और गहराई से जाँच कर रही है। पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने बताया कि बाकी आरोपितों की तलाश में छापेमारी जारी है। साइबर सेल सोशल मीडिया अकाउंट्स और आरोपियों के मूवमेंट की बारीकी से जाँच कर रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस रैकेट का और बड़ा खुलासा होगा।

ये मामला न सिर्फ आगरा बल्कि पूरे देश के लिए एक चेतावनी है। धर्मांतरण का ये हाईटेक रैकेट पढ़े-लिखे युवाओं को टारगेट कर रहा है। सोशल मीडिया के इस दौर में ऐसे गैंग आसानी से लोगों को अपने जाल में फँसा लेते हैं। परिवार वालों को अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखनी होगी और पुलिस को भी ऐसे मामलों में और तेजी से कार्रवाई करनी होगी। आगरा पुलिस की इस कार्रवाई से एक बात तो साफ है कि कानून का शिकंजा अब इन गैंगों पर कस रहा है। लेकिन सवाल ये है कि क्या ये रैकेट पूरी तरह खत्म हो पाएगा?