बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसके अंतर्गत तैयार की गई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को निर्वाचन आयोग ने आज दोपहर 3 बजे अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दिया।
साथ ही, यह सूची राज्य के 38 जिलों के माध्यम से सभी राजनीतिक दलों को भी दे दी गई है। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में बिहार के सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों के 90,817 पोलिंग स्टेशनों का डेटा शामिल किया गया है। आम मतदाता अब ECI की वेबसाइट (https://eci.gov.in) पर जाकर यह जाँच सकते हैं कि उनका नाम इस नई सूची में शामिल है या नहीं।
विशेष गहन पुनरीक्षण -2025 विशेष कैम्प – कोई योग्य मतदाता छूटे ना !
✅बिहार के सभी निर्वाचकों को सूचित किया जाता है कि विशेष गहन पुनरीक्षण-2025 के तहत प्रारूप मतदाता सूची (Voter List) 01.08.2025 को प्रकाशित कर दिया गया है।#BiharSIR2025pic.twitter.com/Bmi7P8p8Z4
— Election Commission of India (@ECISVEEP) August 1, 2025
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर जारी की गई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में मतदाता अपना नाम जाँचने के लिए तीन तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। पहला विकल्प है EPIC नंबर के माध्यम से जाँच करना, जिसमें मतदाता को अपना ईपीिक नंबर, राज्य, भाषा और कैप्चा भरना होता है।
सही जानकारी भरने पर मतदाता की पूरी जानकारी स्क्रीन पर आ जाती है। दूसरा विकल्प है, व्यक्तिगत विवरणके आधार पर नाम खोजना। इसमें नाम, जन्मतिथि, किसी रिश्तेदार का नाम, लिंग, जिला और निर्वाचन क्षेत्र जैसी जानकारी भरनी होती है।
तीसरा मोबाइल नंबर के माध्यम से जाँच करना। इसके तहत मोबाइल नंबर दर्ज कर कैप्चा भरना होता है, जिसके बाद मोबाइल पर ओटीपी भेजा जाता है। ओटीपी लिखते ही यदि नाम सूची में होगा तो मतदाता का विवरण सामने आ जाएगा। चुनाव आयोग ने यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता और अधिक से अधिक मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू की है।
कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी भारत की अर्थव्यवस्था को ‘डेड’ करार दे रहे हैं। कुछ दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय अर्थव्यवस्था को ‘डेड’ कहा था। उनके सुर में सुर मिलाते हुए राहुल गाँधी ने अपनी बात कही है। लेकिन उनकी पार्टी के कई बड़े नेता ऐसा नहीं मानते।
कॉन्ग्रेस सांसद मनीष तिवारी, सांसद शशि थरूर, राजीव शुक्ला जैसे कई नेता भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत मानते हैं। कॉन्ग्रेस के ही सीनियर नेता भारतीय अर्थव्यवस्था को डेड कहने के राष्ट्रपति ट्रंप के बयान को गलत कहते हुए भारतीय इकोनॉमी को जीवंत बता रहे हैं, जबकि राहुल गाँधी अपनी ही पार्टी के नेताओं से सबक नहीं ले पा रहे।
भारत की अर्थव्यवस्था, एक ऐसी अर्थव्यवस्था जिसने हाल ही में जर्मनी को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का गौरव प्राप्त किया है। अनुमान है कि 2030 तक ये जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था बन जाएगी। ऐसे देश के नेता विपक्ष अर्थव्यवस्था को ही ‘डेड’ घोषित करने में तुले हुए हैं। जबकि राहुल गाँधी खुद की आर्थिक स्थिति का ही आँकलन कर लें तो देश की अर्थव्यवस्था के विकास का कुछ अंदाजा उन्हें लग जाएगा।
दरअसल भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की अर्थव्यवस्था को डेड घोषित कर दिया। उनकी हाँ में हाँ मिलते हुए कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने उन्हें शुक्रिया तक कह दिया। सरकार को घेरते हुए राहुल गाँधी ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप सही कह रहे हैं। भारत के प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को छोड़कर बाकी सब जानते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था ‘डेड’ है। उन्होंने यहाँ तक कहा कि भारत ने अडानी की मदद करने के लिए अर्थव्यवस्था को डेड कर दिया।
THE INDIAN ECONOMY IS DEAD.
Modi killed it.
1. Adani-Modi partnership 2. Demonetisation and a flawed GST 3. Failed “Assemble in India” 4. MSMEs wiped out 5. Farmers crushed
Modi has destroyed the future of India’s youth because there are no jobs.
डोनाल्ड ट्रंप का तो समझा जा सकता है कि भारत के साथ व्यापार वार्ता सफल नहीं होने और भारत द्वारा F-35 फाइटर जेट जैसे रक्षा सौदों से साफ मना कर देने की वजह से उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था को ही ‘डेड’ कह दिया। ये बयान भारत पर व्यापारिक दबाव बनाने के लिए ही दिया गया है। ट्रंप पाकिस्तान के साथ तेल सौदे की घोषणा कर भारत पर दबाव डाल रहे हैं, लेकिन वास्तव में भारत की विकास दर अमेरिका से कहीं ज्यादा है। इसलिए हमारी अर्थव्यवस्था ‘मृत’ नहीं बल्कि जीवंत है। लेकिन राहुल गाँधी भारत की अर्थव्यवस्था के विकास पर सवाल खड़े कर पूरे देश और दुनिया को क्या संदेश देना चाहते हैं? ऐसा तब है जब भारत की अर्थव्यवस्था न केवल बड़ी है, बल्कि स्वस्थ और गतिशील भी है, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
सरकार से सवाल पूछना विपक्षी दलों का अधिकार है लेकिन मोदी सरकार की खिलाफत करते- करते देश के खिलाफ बयानबाजी नेता विपक्ष की मानसिकता को दर्शाता है। वे नोटबंदी, जीएसटी और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को उठाते हैं, लेकिन इसका राग वो वर्षों से गा रहे हैं।
राहुल गाँधी का यह रुख विपक्षी राजनीति का हिस्सा है, जहां वे हर सफलता पर नकारात्मकता ढूँढते हैं, जबकि आईएमएफ और दूसरी रिपोर्ट भारत को सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था बता रही हैं।
कोरोना काल के बाद से भारत की ग्रोथ दुनिया में सबसे ज्यादा
भारत दुनिया में अभी सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है। पीआईबी के अनुसार 2024-25 में 6.5% वृद्धि के साथ भारत सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था है। दुनिया के विकास में इसका योगदान 16 फीसदी है और दुनिया के पाँच सबसे बड़ी अर्थव्यस्थाओं में भारत शामिल है। पिछले एक दशक में भारत की स्थिति कमजोर अर्थव्यवस्था वाले देश से ऊपर उठ कर दुनिया की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था वाले देशों में शामिल होना ही मोदी सरकार में देश के विकास को दर्शाता है। माना जा रहा है कि भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था वाला बन जाएगा। यहाँ तक की कोरोना काल में जब दुनिया त्रासदी से कराह रही थी और भारत में भी महामारी का व्यापक असर था, भारत की ग्रोथ रेट दुनिया में सबसे ज्यादा रही।
भारत ने इस दौरान बड़ी आबादी को गरीबी से मुक्त दिलाने, अनाज मुफ्त में देने से लेकर हर घर नल, शौचालय की व्यवस्था करने और हर व्यक्ति का बैंक खाता खोलने जैसी सुविधाएँ देकर भारतीयों की सामाजिक आर्थिक स्थिति में सुधार किया।
मनमोहन सिंह के वक्त कैसी थी अर्थव्यवस्था?
2014 में यूपीए की मनमोहन सिंह सरकार को करारी हार देने के बाद नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सत्ता पर काबिज हुई। कॉन्ग्रेस नेता मनमोहन सिंह के 2004 से 14 तक के 10 साल में महंगाई देश की बड़ी चुनौती थी। घोटालों से देश त्रस्त था। हर दिन नए घोटाले से देश दो-चार होता था।
मनमोहन सरकार के समय औसत वित्तीय घाटा 4.3 फीसदी रहा। जबकि मोदी सरकार में वित्तीय घाटे को कम करते हुए जीडीपी को दोगुना कर दिया है। विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर पर हैं और भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। मोदी के समय में संरचनात्मक सुधार हुए हैं जिसने अर्थव्यवस्था को अधिक लचीला बनाया है। डेलॉयट की रिपोर्ट में FY2024-25 के लिए 6.5% से 6.8% वृद्धि का अनुमान है, जो घरेलू माँग और निवेश पर आधारित है।
मनमोहन सरकार के वक्त से अब व्यापार करने की ज्यादा सहुलियतें हैं। दुनिया भर में व्यापार सुगमता सूचकांक के में भारत का स्थान करीब 60 है जो मनमोहन काल में 132 के आसपास था।
पीएम मोदी के पहले कार्यकाल में औसत जीडीपी विकास दर 7.7% रहा जबकि कोरोना के बाद दूसरे कार्यकाल में 6.8% रहा। कोरोना के बाद रिकवरी रेट 6.3-6.8% रहा। मुद्रास्फीति नियंत्रित रहा जिससे महंगाई से जनता को राहत मिली। जबकि मनमोहन सिंह के दस सालों में अर्थव्यवस्था में वैश्विक उछाल भी आया फिर भी जीडीपी प्रति व्यक्ति औसतन 6% से 4% रहा और असंतुलित विकास की वजह से महंगाई काफी बढ़ी।
मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से विदेशी निवेश दोगुना हुआ। जबकि मनमोहन सिंह के समय भ्रष्टाचार और घोटालों की वजह से निवेशकों का विश्वास कम हुआ और विदेशी निवेश कम हुए। | यही वजह है कि उस वक्त विदेशी मुद्रा भंडार 300 बिलियन डॉलर थे जो अब बढ़ कर 600 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गए हैं। भारत की अर्थव्यवस्था अब 5 ट्रिलियन डॉलर की ओर है।
राहुल गाँधी की खुद की संपत्ति में हुआ जबरदस्त ग्रोथ
कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के संपत्ति की बात की जाए तो उन्होंने मोदी सरकार में शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश कर भारी मुनाफा कमाया। 2014 में जहाँ राहुल गाँधी की शेयर की वैल्यू 83 लाख रुपए थी, वहीं 2024 में बढ़कर ये 8.3 करोड़ रुपए हो गई यानी 10 गुणा ज्यादा। वहीं म्यूचुअल फंड से उन्होंने पिछले 10 सालों में 6.6- 8.3 करोड़ रुपए कमाए जबकि मनमोहन सरकार के समय 60-80 लाख ही कमा पाए थे। ऐसा उन्होंने शेयर बाजार में रिस्क लेते हुए निवेश कर कमाया। ये रिस्क लेने की हिम्मत उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था पर विश्वास जताकर ही पाई होगी।
चीन और पाकिस्तान से राग मिलाते रहे हैं राहुल
राहुल गाँधी पर चीन से चंदा लेने और उनकी भाषा बोलने के आरोप लग चुके हैं। पिछले दिनों भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया था कि राहुल गाँधी ने चीन के उस दावे को सहमति दे दी, जिसमें उसने अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताया था। वहीं ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर सवाल खड़े कर उन्होंने पूछा कि कितने जेट गिरे? इतना ही नहीं सीजफायर पर पीएम मोदी और सेना के आधिकारिक बयान पर विश्वास न जता कर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान को सही मानते हुए सवाल करना भी उनके मंसूबे को बताता है।
कॉन्ग्रेस नेताओं ने राहुल के बयान से किया किनारा
मोदी सरकार को घेरने के लिए राहुल गाँधी ने जिस तरह अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान को लपका, इससे कॉन्ग्रेसी भी हैरान हैं। कॉन्ग्रेस सांसद मनीष तिवारी, शशि थरूर और राजीव शुक्ला ने राष्ट्रपति ट्रंप के बयान का खंडन करते हुए कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था मरी नहीं है बल्कि तेज गति से आगे बढ़ रही है। जो सुधार पीवी नरसिम्हा राव के समय में शुरू हुए मनमोहन काल में मजबूत हुए वो आज बिल्कुल भी कमजोर नहीं हुई है।
इसके बावजूद राहुल गाँधी भारत की अर्थव्यवस्था को ‘डेड’ कह रहे हैं तो ये देश की छवि ही खराब कर रहे हैं। साथ ही उन निवेशकों को भी गुमराह कर रहे हैं जो भारत के विकास में योगदान दे रहे हैं। कुल मिलाकर, भारत की अर्थव्यवस्था न केवल सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है बल्कि सबसे अच्छी है। हर तरह की चुनौतियों के बावजूद मजबूती से ये आगे बढ़ रही है। ट्रंप और राहुल जैसे नेताओं के बयान अपने अपने हित साधने के लिए दिए गए हैं, जो तथ्यों पर आधारित नहीं। भारत 2030 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है, और यह उपलब्धि मोदी सरकार की नीतियों की सफलता को दर्शाती है।
मालेगाँव ब्लास्ट मामले की शुरुआती जाँच में शामिल रहे महाराष्ट्र ATS के रिटायर्ड पुलिस इंस्पेक्टर मेहबूब मुजावर ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि उस वक्त उन्हें कुछ खास लोगों को गिरफ्तार करने के गुप्त आदेश दिए गए थे, जिनमें RSS प्रमुख मोहन भागवत का नाम भी शामिल था।
खास बात ये है कि ये आदेश देने वाले IPS का नाम है- परमबीर सिंह। इंस्पेक्टर मेहबूब मुजावर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि परमवीर सिंह ने ही उनसे कहा था कि ‘भगवा आतंकवाद’ की झूठी कहानी तैयार करो जबकि असल में उस समय जो कुछ हुआ वह गलत था। अंत में उन्होंने साफ कहा कि कोई ‘भगवा आतंकवाद’ नहीं था, यह सब कुछ फर्जी था।
मुजावर ने सवाल करते हुए ये भी कहा कि उन्हें अब तक समझ नहीं आया कि परमबीर को अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया है।
साध्वी प्रज्ञा ने बताई प्रताड़ना की कहानी
इस दावे के अलावा मालेगाँव ब्लास्ट में बाइज्जत बरी हुई साध्वी प्रज्ञा ने भी परमबीर सिंह पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रज्ञा ने कहा था कि मालेगाँव केस में उन्हें हिरासत में टॉर्चर किया गया, उन्हें बेल्ट से इस तरह पीटा गया कि उन्हें वेंटीलेटर तक पर जाना पड़ा।
प्रज्ञा ने आरोप लगाया कि उनकी रीढ़ की हड्डी भी टूट गई। उन्हें पोर्न दिखाकर भद्दे सवाल पूछे गए। साध्वी का दावा है कि परमबीर ने ‘भगवा आतंक’ का झूठा नैरेटिव बनाने के लिए ये सब किया।
IPS परमबीर सिंह पर लगाए गए आरोप और दावे पहली बार नहीं हैं। सिंह पर कई बार कानून को ताक पर रखने और हिंदुओं के खिलाफ साजिश करने के आरोप लग चुके हैं। परमबीर का नाम 26/11 के आतंकी हमलों समेत कई बड़े मामलों में आ चुका है, जहाँ उन पर कानूनी अनियमितताओं और हिंदुओं को फँसाने के गंभीर इल्जाम लगे हैं।
मालेगाँव में ‘हिंदू आतंक’ साबित करने की कोशिश
साल 2008 के मालेगाँव बम धमाके में जबरन गिरफ्तार की गईं साध्वी प्रज्ञा ने कहा था कि मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह के कहने पर 3-4 पुलिसकर्मियों उन्हें बहुत अधिक प्रताड़ना देते थे। थी। उन्हें हिरासत में लेकर पुलिसकर्मी उन्हें घेर कर मारते थे। उन्हें पूरी रात बेल्ट से इस कदर पीटा गया कि उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई और उन्हें वेंटिलेटर पर जाना पड़ा था।
परमबीर सिंह की देखरेख में ही साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को हिरासत के दौरान पुरुष कैदियों के साथ रखकर पोर्न वीडियो दिखाया जाता था और भद्दे सवाल किए जाते थे। उन्होंने बताया था कि पहले उनको भगवा आतंकी कहा गया, फिर भारत को आतंकवादी देश घोषित करवाने का प्रयास किया गया।
मालेगाँव ब्लास्ट में ही कर्नल श्रीकांत पुरोहित पर भी आरोप लगाए गए। उन्हें पुलिस कस्टडी में रखा गया और प्रताड़ित किया गया था। कर्नल ने कोर्ट में बताया कि परमबीर सिंह और ATS के अफसरों ने उन्हें टॉर्चर किया।
उनके साथ मारपीट, गालियाँ और प्राइवेट पार्ट्स पर हमला किया गया, ताकि वो ‘भगवा आतंकवाद’ का नैरेटिव कबूल लें। कर्नल का कहना है कि परमबीर ने कॉन्ग्रेस की शह पर उन्हें फँसाया और उनकी जिंदगी बर्बाद कर दी।
26/11 में ड्यूटी करने से किया मना
26/11 आतंकी हमलों के दौरान मुंबई के पुलिस कमिश्नर हसन गफूर थे। उन्होंने परमबीर सिंह पर आरोप लगाया था कि उन्होंने इस दौरान ड्यूटी करने से मना कर दिया था। गफूर ने कहा था कि कानून-व्यवस्था के संयुक्त आयुक्त केएल प्रसाद, अपराध शाखा के अतिरिक्त आयुक्त देवेन भारती, दक्षिणी क्षेत्र के अतिरिक्त आयुक्त के वेंकटेशम और आतंकरोधी दस्ते के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह मुंबई आतंकी हमले के दौरान अपनी ड्यूटी निभाने में विफल रहे थे।
कसाब के फोन को किया गायब जो कभी नहीं मिला
2008 में हुए इसी हमले को लेकर महाराष्ट्र के रिटायर्ड एसीपी शमशेर खान पठान ने भी परमबीर सिंह पर गंभीर आरोप लगाए। पठान ने मुंबई पुलिस कमिश्नर को लिखे पत्र में कहा कि 26/11 के बाद कसाब के पास से मिले फोन को परमबीर सिंह ने अपने पास रख लिया था। इसे उन्होंने कभी जाँच अधिकारियों को दिया ही नहीं।
कथित तौर पर इसी फोन पर कसाब को उसके आका पाकिस्तान से ऑर्डर दे रहे थे। पठान का दावा था कि इस फोन से पाकिस्तान और हिंदुस्तान के हैंडलर्स का पता चल सकता था।
पठान ने बताया था कि हमले वाले दिन वो पाईधूनी पुलिस स्टेशन में थे और उनके बैचमेट एनआर माली बतौर सीनियर इंस्पेक्टर डीबी मार्ग पुलिस थाने में कार्यरत थे। उन्होंने लिखा कि 26/11 के दिन अजमल आमिर कसाब को गिरगाँव चौपाटी इलाके में पकड़ा गया था। ऐसे में उन्होंने अपने साथी एनआर माली से फोन पर बात की।
इस दौरान उन्हें पता चला कि कसाब के पास एक फोन मिला है, जो पहले कॉन्स्टेबल कांबले के पास था और बाद में उससे परमबीर सिंह ने ले लिया।
पूर्व एसीपी के मुताबिक, इस मामले में उनकी माली से बातचीत आगे भी होती रही। उन्हें पता चला कि परमबीर सिंह ने जाँच अधिकारी को फोन नहीं दिया है। माली ने शमशेर को ये भी बताया था कि उन्होंने दक्षिण क्षेत्र के आयुक्त वेंकटेशम से मुलाकात की थी और उस फोन के बारे में बताया था।
हालाँकि इसके बावजूद उन पर कार्रवाई नहीं हुई। जब पूछने के लिए माली परमबीर के पास गए तो सिंह उन पर चिल्लाने लगे और कहा कि इससे उनका कोई लेना-देना नहीं है।
कॉन्ग्रेस ने गढ़ा ‘सैफरन टेरर’ का नैरेटिव, उनके ही नेता ने खोली पोल
29 सितंबर 2008 को हुए मालेगाँव ब्लास्ट और 26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई आतंकी हमले के दौरान केंद्र में कॉन्ग्रेस की सरकार थी। वहीं, महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस और NCP की गठबंधन सरकार थी। पी चिदंबरम उस समय केंद्रीय गृह मंत्री थे।
ये वही कॉन्ग्रेस सरकार है जिसने मालेगाँव ब्लास्ट के बाद से ही हिंदू समुदाय को बदनाम करने के लिए ‘हिंदू आतंकवादी’ या ‘भगवा आतंकवाद’ जैसे शब्दों का प्रयोग शुरू कर दिया था। चिदंबरम ने गृह मंत्री रहते हुए ‘भगवा आतंकवाद’ शब्द का इस्तेमाल किया था। यहाँ तक कि कॉन्ग्रेस नेता सुशील कुमार शिंदे और दिग्विजय सिंह ने इन शब्दों का इस्तेमाल सार्वजनिक रूप से किया।
केंद्रीय गृह मंत्री के तौर पर कार्य करते हुए 25 अगस्त 2010 को पी चिदंबरम में कहा था, “मैं आपको सावधान करना चाहता हूँ कि भारत में युवा पुरुषों एवं महिलाओं को कट्टरपंथी बनाने के प्रयासों में कोई कमी नहीं आयी है। इसके अलावा हाल में ‘भगवा आतंकवाद’ सामने आया है, जो अतीत में कई बम विस्फोटों में पाया गया है..।”
सितंबर 2010 में दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने ‘हिंदू आतंकवाद’ से देश को खतरा बता दिया था। विकीलीक्स खुलासे में ये बात सामने आई थी कि भारत में अमेरिकी राजदूत टिमोशी रोमर को 2010 में राहुल गांधी ने कहा था कि भारत को पाकिस्तान से आने वाले इस्लामिक आतंकवाद से ज्यादा बड़ा खतरा हिंदू आतंकवाद से है।
इसके बाद गृह मंत्री रहते हुए सुशील कुमार शिंदे ने 20 जनवरी 2013 को जयपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बीजेपी और आरएसएस के कैंप में हिंदू आतंकवादियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। उनके बयान के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणि शंकर अय्यर ने उन्हें मुबारकबाद दी थी।
लगभग 11 वर्षों बाद पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री और कॉन्ग्रेस के राजनेता सुशील कुमार सिंह ने 2024 में भगवा आतंकवाद पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि शब्द को इस्तेमाल करने के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी ने ही उन पर दबाव डाला था। एक पॉडकास्ट में उन्होंने कहा, “भगवा के पीछे आतंकवाद शब्द क्यों लगाया गया मुझे आज तक पता नहीं है। यह नहीं लगना चाहिए था, ये गलत था।”
कॉन्ग्रेस की माफी माँगने की उठी माँग
NIA कोर्ट ने मालेगाँव ब्लास्ट के सभी आरोपितों को बरी करते हुए कहा कि आतंक का कोई धर्म नहीं होता और अभियोजन पक्ष उन पर आरोप साबित करने में भी नाकाम रहा। इसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में चिदंबरम, सोनिया गांँधी और अन्य कॉन्ग्रेस नेताओं से सनातन धर्म को बदनाम करने के लिए सार्वजनिक माफी की माँग उठने लगी है। साथ ही परमबीर सिंह और कॉन्ग्रेस के नेताओं की गिरफ्तारी की बात भी नेटिजन्स तेजी से सोशल मीडिया पर उठा रहे हैं।
Manmohan Singh's India orchestrated a Perfect Hindu Terror Conspiracy, framing #ColPurohit, #SadhviPragya and others in the #MalegaonBlastCase. As the masterminds behind this plot Sonia Gandhi, P. Chidambaram, and Sushil Kumar Shinde should be held accountable and punished for… pic.twitter.com/YhWGyQ5JG0
सवाल ये उठता है कि ‘हिंदू आतंकवाद’ या ‘सैफरन टेरर’ का नैरेटिव गढ़ने और इसे हर हाल में साबित करने पर तुले परमबीर सिंह ने खुद ही ये पूरा खेल खेला? या फिर चिदंबरम और सोनिया गाँधी ने मिलकर इस नैरेटिव को धरातल पर लाने के लिए और हिंदुओं को बदनाम करने के लिए इस पूरी साजिश का कर्ताधर्ता परमबीर सिंह को बना दिया?
मालेगाँव विस्फोट केस में गुरुवार (31 जुलाई 2025) को मुंबई की एक विशेष NIA कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित सहित कुल 7 आरोपियों को बरी कर दिया है। वहीं अब विशेष जज एके लाहोटी ने आरोपितों को फँसाने के लिए झूठे सबूत पेश करने के आरोप में ATS के ACP शेखर बागड़े के खिलाफ जाँच के आदेश दिए हैं।
इस केस की शुरुआती जाँच महाराष्ट्र ATS ने की थी, लेकिन 2011 में मामला NIA को सौंपा गया। जाँच के दौरान दो सेना अधिकारियों ने बताया कि ATS के अधिकारी (अब ACP) शेखर बगड़े 3 नवंबर 2008 को आरोपित सुधाकर चतुर्वेदी की गैरमौजूदगी में उनके घर में घुसे थे। दोनों सैन्य अधिकारियों ने गवाही दी कि बगड़े ने वहाँ चुपचाप जाकर RDX जैसे विस्फोटक रखे, और उन्हें यह बात किसी को न बताने को कहा।
दो दिन बाद ATS की टीम ने उस घर पर छापा मारा और RDX मिलने का दावा किया। NIA की जाँच और कोर्ट में दी गई जानकारी से यह स्पष्ट हुआ कि बगड़े ने घर में जबरन घुसकर फर्जी सबूत रखे थे। कोर्ट ने कहा कि ATS की तरफ से इस मामले में कोई संतोषजनक सफाई नहीं दी गई और पूरे मामले में ‘सबूतों की प्लांटिंग’ की आशंका है।
इतना ही नहीं कोर्ट को यह भी पता चला कि विस्फोट के कथित घायलों के मेडिकल सर्टिफिकेट बिना मान्यता प्राप्त डॉक्टरों से बनवाए गए थे। कुछ सर्टिफिकेट जानबूझकर बदले भी गए थे। कोर्ट ने इस पर भी जाँच का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही 2017 में कर्नल पुरोहित को जमानत देते हुए बगड़े की संदिग्ध भूमिका पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने कहा था कि आर्मी की जाँच में भी अलग कहानी सामने आई थी और बगड़े का आरोपित के घर में जाना सवाल खड़ा करता है।
अब कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा है कि ATS और NIA दोनों ही आरोपितों के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं ला सके और पूरा मामला संदेह के घेरे में है। कोर्ट का 1000 पन्नों का यह फैसला महाराष्ट्र के DGP, ATS प्रमुख और NIA को भेजा गया है ताकि फर्जी सबूत और मेडिकल रिकॉर्ड की गहराई से जाँच हो सके।
ATS ने जाँच में कैसे की गड़बड़ी?
कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि अभियोजन पक्ष (प्रॉसिक्यूशन) किसी भी आरोपित के खिलाफ ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया। कोर्ट ने विशेष रूप से कहा कि ATS यह साबित नहीं कर पाई कि धमाके में इस्तेमाल की गई बाईक प्रज्ञा ठाकुर की थी।
कोर्ट ने यह भी ध्यान दिलाया कि प्रज्ञा ठाकुर धमाके से कम से कम दो साल पहले ही साध्वी बन चुकी थीं और अभियोजन यह नहीं दिखा सका कि उनका धमाके की साजिश से कोई संबंध था। कर्नल पुरोहित के मामले में भी अदालत ने कहा कि कोई ऐसा सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि उनके घर में कभी विस्फोटक सामग्री रखी गई थी।
जाँच एजेंसी ने मूलभूत जाँच प्रक्रियाओं का भी पालन नहीं किया। उदाहरण के तौर पर, जिस कमरे में विस्फोटक रखने का दावा किया गया, उसकी स्केच तक नहीं बनाई गई और फॉरेंसिक सैंपल भी दूषित (contaminated) पाए गए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि ‘अभिनव भारत’ नाम की जिस दक्षिणपंथी संस्था की बात की गई थी, जिसे प्रज्ञा ठाकुर और कर्नल पुरोहित से जोड़ा गया था, उसके बारे में भी यह साबित नहीं हो सका कि वह किसी आतंकवादी गतिविधि में शामिल थी या उसके फंड का इस्तेमाल इस तरह के कामों के लिए हुआ था।
मालेगाँव ब्लास्ट मामले की शुरुआती जाँच में शामिल रहे महाराष्ट्र ATS के रिटायर्ड पुलिस इंस्पेक्टर मेहबूब मुजावर ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि उस वक्त उन्हें कुछ खास लोगों को गिरफ्तार करने के गुप्त आदेश दिए गए थे, जिनमें RSS प्रमुख मोहन भागवत का नाम भी शामिल था।
मुजावर के अनुसार, इन निर्देशों का मकसद ‘भगवा आतंकवाद’ की झूठी कहानी गढ़ना था। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने बताया कि उन्हें राम कालसंगरा, संदीप डांगे, दिलीप पाटीदार और मोहन भागवत को पकड़ने को कहा गया था।
हालाँकि उन्होंने यह आदेश मानने से इंकार कर दिया। उनका कहना है कि मोहन भागवत जैसी बड़ी शख्सियत को बिना किसी ठोस वजह के पकड़ना उनके बस की बात नहीं थी। आदेश न मानने के बाद, उनके ऊपर आईपीएस अधिकारी परमवीर सिंह ने एक झूठा केस डाल दिया जिससे उनकी 40 साल की पुलिस सेवा खत्म हो गई।
Solapur, Maharashtra: Former ATS officer Mehboob Mujawar on 2008 Malegaon blast case says, "Whatever I said about Mohan Bhagwat or about my investigation was all under the orders of Param Bir Singh and even higher authorities. According to their instructions, I was provided with… pic.twitter.com/Ztx5hszU7h
मुजावर ने यह भी आरोप लगाया कि पूरी जाँच एक ‘फर्जी अफसर’ के नेतृत्व में हुई थी और जाँच का पूरा ढाँचा ही झूठ पर आधारित था। उन्होंने कोर्ट के हालिया फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि इससे यह साबित हो गया है कि उस समय जो कुछ हुआ वह गलत था। अंत में उन्होंने साफ कहा कि कोई ‘भगवा आतंकवाद’ नहीं था, यह सब कुछ फर्जी था।
बता दें कि इससे पहले भी एक ऐसा ही खुलासा हुआ था, जिसमें पता चला था कि महाराष्ट्र ATS उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, विश्व हिन्दू परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों को फँसाना चाहती थी। इसके लिए उसने मालेगाँव बम धमाकों के मामले में मुकदमे का सामना करने वाले लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित को भी प्रताड़ित किया था।
कर्नल पुरोहित ने मुंबई के एक कोर्ट को बताया था, “मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया गया जो किसी जानवर के साथ भी नहीं किया जाता। मेरे साथ युद्ध बंदी से भी बदतर व्यवहार किया गया। हेमंत करकरे, परमबीर सिंह और कर्नल श्रीवास्तव लगातार इस बात पर जोर देते रहे कि मैं मालेगाँव बम धमाके के लिए खुद को जिम्मेदार बता दूँ। उन्होंने मुझसे कहा कि मैं RSS, VHP के वरिष्ठ नेताओं और उत्तर प्रदेश के तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ का नाम लूँ। उन्होंने मुझे 3 नवम्बर, 2008 तक यातनाएँ दी।”
गौरतलब है कि 2008 के मालेगाँव ब्लास्ट मामले में NIA की विशेष अदालत ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत सभी 7 आरोपितों को बरी कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि आरोपितों के खिलाफ कोई सबूत नहीं है।
अमेरिका द्वारा लगाए गए 25 फीसदी टैरिफ के बीच भारत ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका से एफ -35 फाइटर जेट नहीं खरीदेगा। इसके बजाए भारत रूस का एसयू-57 फिफ्थ जनरेशन जेट खरीदने वाला है। अमेरिकी विमान खरीदने पर भारत को हर पुर्जे के लिए भी उस पर निर्भर रहना होगा। जबकि रूसी विमान भारत में ही बनेगा। इतना ही नहीं इसके तकनीक का भी हस्तांतरण होगा। विमान के करीब 60 फीसदी पुर्जे भी भारत में ही निर्मित होंगे । इसका फायदा रोजगार के क्षेत्र में मिलेगा साथ ही भविष्य में भारत इसका निर्माण भी कर पाएगा।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत अमेरिका से कुछ उत्पादों की खरीद बढ़ा सकता है, लेकिन रक्षा से जुड़े किसी भी उपकरण को अमेरिका से खरीदने की फिलहाल कोई योजना नहीं है।
JUST IN:
India has informed the United States that it is not interested in purchasing F-35 fighter jets – Bloomberg pic.twitter.com/V0C2AezxGR
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अमेरिका से प्राकृतिक गैस, संचार उपकरण और सोने की खरीद बढ़ाने पर विचार कर रहा है। लेकिन अमेरिकी रक्षा उपकरण, खासकर F-35 फाइटर जेट, खरीदने के लिए भारत सरकार इच्छुक नहीं है।
जानकारी के अनुसार, ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी की व्हाइट हाउस यात्रा के दौरान भारत को F-35 स्टील्थ फाइटर जेट देने की पेशकश की थी। वहीं भारत सरकार चाहती है कि रक्षा उपकरणों का संयुक्त रूप से विकास और निर्माण भारत में ही हो।
हालाँकि ट्रंप भारत पर रूस से हथियार और तेल खरीदने पर अतिरिक्त जुर्माना लगाने की धमकी दे चुके हैं, फिर भी भारत फिलहाल अमेरिका से नए रक्षा सौदे नहीं करना चाहता, खासकर तब जब पहले से ऑर्डर किए गए अमेरिकी उपकरणों की डिलीवरी में वर्षों की देरी हो रही है।
F-35 नहीं खरीदने के फैसले का मतलब है कि भारत लगभग 50-60 रूसी Su-57 फिफ्थ जनरेशन जेट खरीदेगा। भारतीय वायुसेना (IAF) को अगले कुछ वर्षों में चीन और पाकिस्तान की हवाई ताकत का मुकाबला करने के लिए करीब तीन स्क्वॉड्रन फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट्स की जरूरत है।
भारत अपने खुद के AMCA फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट पर भी काम कर रहा है, लेकिन इसके 2035 से पहले तैयार होने की संभावना नही है। इसलिए, जब तक स्वदेशी जेट तैयार नहीं होता, तब तक भारत को विदेशी विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ेगा। इस समय केवल F-35 (अमेरिका) और Su-57 (रूस) ही ऐसे उपलब्ध विकल्प हैं।
बता दें कि अमेरिका ने भारत से आने वाले सामान पर 25% टैक्स लगा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (30 जुलाई 2025) को इसकी घोषणा की थी। इस पर भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार (31 जुलाई) को लोकसभा में जवाब देते हुए कहा था कि भारत वैश्विक विकास में लगभग 16 फीसदी का योगदान दे रहा है।
"एक दशक में भारत सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था, 10 साल में 11वें से चौथे स्थान पर पहुंचे"
उन्होंने कहा, “सरकार हमारे किसानों, श्रमिकों, उद्यमियों, निर्यातकों, एमएसएमई और उद्योग के सभी वर्गों के कल्याण की रक्षा को सर्वोच्च महत्व देती है।” गोयल ने कहा, “हम किसानों और भारतीय कृषि के कल्याण के लिए लगातार काम कर रहे हैं ताकि समृद्धि को बढ़ावा दिया जा सके और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार (31 जुलाई 2025) को दुनिया के 70 देशों पर 10 फीसदी से 41 फीसदी तक नए रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। 7 अगस्त से ये लागू होगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे व्यापार असंतुलन को कम करने और अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम बताया।
व्हाइट हाउस की ओर से एक फैक्टशीट जारी की गई है जिसमें कहा गया है कि इससे न सिर्फ आयात शुल्क दरों में बदलाव होगा बल्कि ये कब लागू होगा इसको भी बता दिया गया है। ट्रंप ने पहले टैरिफ के लिए 1 अगस्त का दिन तय किया था लेकिन अब जिन 70 देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया गया है उन्हें 7 अगस्त से ये टैरिफ देना होगा। यानी अगर कोई सामान 7 अगस्त तक अमेरिका के लिए रवाना हो जाए तो उस पर नया टैरिफ लागू नहीं होगा।
नया रेसिप्रोकल टैरिफ क्या है?
व्हाइट हाउस ने गुरुवार को घोषणा की कि अमेरिका में आने वाले सामानों पर रेसिप्रोकल टैरिफ 10% ही रहेगा, जो 2 अप्रैल को लागू किया गया था। लेकिन यह 10% की दर केवल उन देशों के लिए है जिनके साथ अमेरिका का व्यापार फायदे में है। यानी वे देश जिनके साथ अमेरिका आयात कम करता है और निर्यात ज्यादा।
15% टैरिफ उन देशों पर लागू होगा जिनके साथ अमेरिका का व्यापार घाटा है। इसके अंतर्गत 40 देश हैं, जिनके साथ अमेरिका का व्यापार घाटा तुलनात्मक रूप से थोड़ा कम है।
15 फीसदी से ज्यादा टैरिफ वाले कुल 26 देश हैं। एक वरिष्ठ अमेरिकी प्रशासनिक अधिकारी के मुताबिक इन देशों का अमेरिका के साथ व्यापार घाटा ज्यादा है। भारत पर 25% टैरिफ लगाया गया है। अमेरिका का कहना है कि भारत उनके सामानों पर ज्यादा टैरिफ वसूलता है, इसलिए ये टैरिफ लगाया गया है।
15 फीसदी से ज्यादा टैरिफ वाले देश
ब्राजील 50%
म्यांमार 40%
लाओस 40%
कंबोडिया 36%
थाईलैंड 36%
बांग्लादेश 35%
सर्बिया 35%
कनाडा 35%
मेक्सिको 30%
दक्षिण अफ्रीका 30%
बोस्निया और हर्जेगोविना 30 %
श्रीलंका 30%
अल्जीरिया 30%
इराक 30%
लीबिया 30%
चीन 30%
भारत 25%
ब्रूनेई 25%
मलेशिया 25%
साउथ कोरिया 25%
वियतनाम 20%
इंडोनेशिया 19%
फिलिपींस 19%
मेक्सिको और कनाडा को उन वस्तुओं पर ज्यादा टैरिफ देना होगा जो अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा मुक्त व्यापार समझौते के तहत छूट में शामिल नहीं हैं। ऐसे वस्तुओं पर 25 फीसदी टैरिफ देना होगा।
भारत पर उम्मीद से ज्यादा टैरिफ
भारत के साथ बातचीत में राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया था कि भारत पर टैरिफ 20 फीसदी से कम रह सकता है लेकिन 25 फीसदी टैरिफ का ऐलान काफी चौकाने वाला है। इससे भारत के निर्यात पर असर पड़ेगा। भारत को वियतनाम से कई प्रमुख सेक्टर्स में चुनौती मिलेगी जिनका सामान 20 फीसदी टैरिफ की वजह से अमेरिका में सस्ता होगा। इनमें कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान, सी फूड शामिल हैं। इसी तरह इंडोनिशिया और फिलीपींस की स्थिति भी भारत की तुलना में मजबूत रहेगी जिनका कपड़ा, तेल , ज्वैलरी, पाम ऑयल का निर्यात अमेरिका से होता है।
भारत- अमेरिका वार्ता में क्यों नहीं बनी बात?
भारत के साथ व्यापार वार्ता के दौरान कृषि और डेयरी प्रोडक्ट पर अमेरिका की बात नहीं बन पाई है। हालाँकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल अगस्त के पहले सप्ताह में नई दिल्ली आने वाले हैं जहाँ अगली बातचीत होगी। अमेरिका चाहता है कि मांस खाने वाले पशुओं के दूध और उसके प्रोडक्ट, जेनेटिकली मोडिफाइड फसलों के लिए भी भारत अपना बाजार पूरी तरह खोल दे, लेकिन भारत उसके लिए तैयार नहीं है।
भारत बातचीत से सुलझाएगा मसला
आज तक के मुताबिक भारत अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा, बल्कि इस मामले में नेगोशिएशन टेबल पर बातचीत करेगा। गुरुवार को लोकसभा में केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बातचीत का दौर जारी है। टैरिफ को लेकर 10 से 15 फीसदी तक की बात हुई थी। देशहित में जो होगा, सरकार कदम उठाएगी।
ब्राजील ने दी अमेरिका को चेतावनी
सबसे ज्यादा टैरिफ ब्राजील पर लगाया गया है जिसको लेकर ब्राजील के वित्त मंत्री फर्नाडो हद्दाद ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि टैरिफ को लेकर अमेरिका से अगर उनकी वार्ता विफल हो जाती है तो वो अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में अपील दायर करेंगे।
अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर 25 परसेंट टैरिफ लगाने के बाद और देश की अर्थव्यवस्था को डेड इकॉनॉमी बोलने के बाद विपक्ष इस मुद्दे को खूब भुनाने के प्रयास में है। ऐसे में भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस मुद्दे पर लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने विपक्ष के शोर के बीच देश को इस बात की जानकारी दी कि अमेरिका की ओर से भारत पर जो 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है, उसपर सरकार गंभीरता से समीक्षा कर रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत-अमेरिका के बीच अब तक चार दौर की बात हो चुकी है। सरकार हर वो जरूरी कदम उठाएगी जिससे भारत के राष्ट्र हित सुरक्षित रहे। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि हम अपने किसानों, श्रमिकों, उद्यमियों और निर्यातकों को और उद्योग जगत के कल्याण की रक्षा और संवर्धन को सर्वोच्च महत्व देते हैं और हम अपने राष्ट्र हितों को सुरक्षित रखने और आगे बढ़ाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएँगे।
पीयूष गोयल ने आगे देश की आत्मनिर्भरता पर बात करते हुए बताया, “हमारे निर्यात में लगातार वृद्धि हो रही है। भारत आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। आज भारत टॉप 5 अर्थव्यवस्थाओं में से है। भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। भारत ने UAE, UK ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ पारस्परिक लाभकारी सौदे किए हैं। हम अन्य देशों के साथ भी ऐसे व्यापार समझौते करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने बताया कि भारत इस समय वैश्विक विकास में 16% हिस्सेदारी दे रहा है।
उन्होंने सदन को यह भी बताया कि एक दशक से भी कम समय में 5 कमजोर अर्थव्यवस्थाओं से निकलकर भारत प्रमुख अर्थव्यवस्था बन गया है। उनका उम्मीद जताई कि भारत कुछ ही वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की डीएमके सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी से जुड़े ‘नौकरी के बदले कैश’ मामले में कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि राज्य सरकार कार्यवाही को देर कर मंत्री को बचाने की कोशिश कर रही है। राज्य सरकार बनाम सेंथिल एवं अन्य मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर न्यायपालिका ने हस्तक्षेप नहीं किया होता तो राज्य सरकार इस केस को बंद कर देती। वहीं अभियुक्तों की तादाद देख उन्होंने कहा कि ट्रायल के लिए तो स्टेडियम की जरूरत पड़ेगी।
कोर्ट ने मामले में राज्य की स्टालिन सरकार को फटकार लगाते हुए कहा, “केस में लगभग असंभव काम करने की कोशिश की गई। कई अभियुक्त अपनी मौजूदगी दर्ज कराने आ जाएँगे। सरकार की अभियोजन की योजना क्या है। फिलहाल यह एक पतवार के बगैर चल रहे जहाज की तरह है।”
बता दें कि ये मामला ‘नौकरी के बदले कैश’ का है जिसमें 2000 लोगों को अभियुक्त बनाया गया है। इसमें वे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने राज्य परिवहन विभाग में नौकरी के लिए रिश्वत दी थी। केस में 2000 अभियुक्त और 500 गवाह को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि इसके ट्रायल के लिए क्रिकेट स्टेडियम की जरूरत है।
जब मामले में स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की नियुक्ति का अनुरोध किया गया तो पीठ ने कहा, “जब ताकतवर मंत्री और धनी आरोपित होते हैं तो ये आशंका होती है कि सरकारी वकील न्याय नहीं कर पाएँगे।”
तमिलनाडु सरकार के रवैये पर सवाल खड़ा करते हुए जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉय माल्या बागची की खंडपीठ ने कहा कि तमिलनाडु सरकार को पूर्व मंत्री और उनके करीबियों पर मुकदमा चलाने में दिलचस्पी होनी चाहिए थी। ये मामला अलग-अलग पदों के लिए पैसे लेने की है लेकिन राज्य सरकार ने सभी मामले को मिला दिया, इसमें रिश्वत देने वाले गरीब माँ-बाप के बच्चे भी शामिल हैं जो नौकरी चाहते थे। ऐसा लगता है कि राज्य इस मामले को भी खत्म नहीं करना चाहती है।
कोर्ट ने कहा, “ऐसा लगता है कि 2000 से ज्यादा अभियुक्तों और 500 गवाहों के साथ ये भारत का सबसे ज्यादा भीड़भाड वाला ट्रायल होगा। निचली कोर्ट का छोटा सा रूम इसके लिए पर्याप्त नहीं होगा इसलिए क्रिकेट स्टेडियम की जरूरत पड़ी होगी।”
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य से पूछे कई सवाल
2000 से ज्यादा अभियुक्तों की सूची पर कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा, “आप उन पर मुकदमा चलाने के लिए ज्यादा उत्साहित हैं, ताकि मंत्री के पूरे जीवन में ये केस कभी खत्म ही न हो। यही आपका तरीका है। ये व्यवस्था के साथ धोखाधड़ी है।”
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु से उन लोगों की पहचान करने का भी आदेश दिया, जिनकी मंत्री के साथ मिलीभगत थी। कोर्ट ने पूछा कि मंत्री के सिफारिशों को किसने माना? मामले में बिचौलिए और दलाल कौन थे और किसने इस काम में अधिकारियों को नियुक्त किया? इसकी जानकारी कोर्ट को दें।
जस्टिस बागची ने कहा, “इस मामले में कथित दलाल या बिचौलिए कौन थे? वे अधिकारी कौन थे जिन्होंने मंत्री के सिफारिशों पर काम किया। इनका चयन किसने किया और किस अधिकारी ने इन्हें नियुक्त किया?”
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी, “असली आरोपित कौन हैं, जैसे मंत्री और उनके भाई, उनके पीएम और करीबी लोग जिन्होंने ये सब करवाया। दूसरे लोगों को आरोपित बनाया जा रहा है क्या वो असली आरोपित हैं या उन्हें गवाह बनाया जा सकता है।”
वकील शंकरनारायणन ने ये भी सुझाव दिया कि मुकदमे की सुनवाई के लिए विशेष सरकारी अभियोजक नियुक्ति की जाए ताकि निष्पक्ष सुनवाई हो सके।
कोर्ट की नाराजगी के बाद दिया था इस्तीफा
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के कैबिनेट मंत्री सेंथिल बालाजी को मंत्री पद या आजादी में से किसी एक को चुनने के लिए कहा था। इसके बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। 26 सितंबर को सेंथिल बालाजी को ईडी के मनी लॉन्ड्रिंग केस में जमानत मिल गई जिसके दो दिन बार वो फिर मंत्री बन गए। उन्हें पुराने मंत्रालय वापस कर दिए गए और स्टालिन कैबिनेट में जगह मिल गई। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी भी जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि इससे गवाह भी प्रभावित होंगे क्योंकि जमानत मिलते ही आप मंत्री बन गए। इसके बाद फिर सेंथिल को पद से हटाया गया।
सेंथिल बालाजी पर नौकरी के लिए कैश का आरोप
साल 2011 से 15 के बीच सेंथिल बालाजी तमिलनाडु सरकार में राज्य परिवहन मंत्री थे। इस दौरान परिवहन विभाग में कई तरह की भर्ती की प्रक्रिया शुरू हुई। बाद में पैसे लेकर नौकरी देने का आरोप मंत्री पर लगा। ईडी ने सेंथिल बालाजी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया। इस मामले पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (30 जुलाई 2025) को भारत पर 25% टैरिफ लगाने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि भारत तेल की खरीद रूस से करता है, ऐसे में उस पर टैरिफ के साथ ही पेनाल्टी भी लगेगी। उनके इस ऐलान पर लगातार विवाद चल रहा है।
इसके साथ ही उन्होंने एक और चौंकाने वाला दावा किया कि पाकिस्तान के पास बड़े पैमाने पर तेल भंडार मौजूद हैं और अमेरिका वहाँ तेल कुओं की खुदाई के लिए एक समझौते पर काम कर रहा है। सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय रहने वाले ट्रंप ने इन बयानों के जरिए भारत की आर्थिक नीतियों और ऊर्जा सहयोग को सीधे तौर पर निशाने पर लिया।
उन्होंने कहा कि अगर भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखता है, तो उसे आर्थिक दंड झेलना पड़ सकता है। इसके अलावा, ट्रंप ने संकेत दिया कि भविष्य में भारत को तेल या गैस के लिए पाकिस्तान की ओर देखना पड़ सकता है।
ट्रंप के इन बयानों ने न सिर्फ भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है, बल्कि दक्षिण एशिया में ऊर्जा राजनीति की दिशा को भी सवालों के घेरे में ला दिया है।
ट्रुथ सोशल पर ट्रम्प की पोस्ट
यह दावा भले ही हकीकत से दूर लगे, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद को दुनिया का सबसे महान नेता और शांति स्थापित करने वाला पुरोधा बताते हुए बड़ी-बड़ी बातें करने से नहीं चूकते। वे अक्सर अपनी तारीफ खुद ही करते हैं और बढ़ा-चढ़ाकर बातें कहने की आदत भी दिखाते हैं। हालाँकि, उनके किए गए दावे कई बार सच्चाई से मेल नहीं खाते।
अब अगर हम उनके हालिया दावे कि पाकिस्तान में विशाल तेल भंडार मौजूद हैं तो जरूरी है कि पहले इस बात की सच्चाई की जाँच ली जाए।
पाकिस्तान के तेल के दावे बनाम हकीकत
पाकिस्तान में कुल मिलाकर लगभग 540 मिलियन बैरल कच्चे तेल के प्रमाणित भंडार होने का अनुमान है, जो मुख्य रूप से पोटवार पठार और निचले सिंध जैसे इलाकों में स्थित हैं।
यह मात्रा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत कम मानी जाती है और किसी भी तरह से ‘विशाल’ तो नहीं कही जा सकती। तुलना के लिए, सऊदी अरब के पास करीब 260 बिलियन बैरल और इराक के पास लगभग 140 बिलियन बैरल कच्चे तेल के भंडार हैं।
पाकिस्तान के अपतटीय सिंधु बेसिन (समुद्री क्षेत्र) में कुछ सर्वेक्षण किए गए हैं, जिनसे संकेत मिले हैं कि वहाँ मरे रिज के पास लगभग 9 बिलियन बैरल तेल के बराबर तेल-गैस के संसाधन मौजूद हो सकते हैं। लेकिन यह सिर्फ एक अनुमान है, जिसे अभी तकनीकी भाषा में ‘भंडार’ नहीं माना जाता।
इन संभावित संसाधनों की न तो अभी कोई खुदाई हुई है, न ही यह तय है कि इनमें से कितना तेल वाकई निकाला जा सकता है। इसके अलावा, इन तेल के फील्ड के विकास को लेकर कोई स्पष्ट योजना भी सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल ट्रंप का यह दावा कि पाकिस्तान के पास विशाल तेल भंडार हैं, एकदम हवा-हवाई प्रतीत होता है।
कराची तट पर 2019 के अन्वेषण के बारे में रिपोर्ट
पाकिस्तान में पहले भी कुछ तेल और गैस की खोज (जाँच पड़ताल) की कोशिशें की गई थीं, लेकिन इनमें कोई खास सफलता नहीं मिली। केकरा-1 नाम की एक बड़ी जाँच परियोजना से भी कोई तेल या गैस नहीं निकला।
जून 2023 में, दुनिया की जानी-मानी कंपनी शेल ने अपने पाकिस्तानी कारोबार की हिस्सेदारी सऊदी अरब की कंपनी अरामको को बेच दी थी। इसी साल पाकिस्तान सरकार ने 18 तेल और गैस ब्लॉकों की नीलामी की कोशिश की, लेकिन एक भी निवेशक या कंपनी ने इनमें दिलचस्पी नहीं दिखाई।
ये घटनाएँ दिखाती हैं कि फिलहाल पाकिस्तान में तेल और गैस के क्षेत्र में न तो संभावनाएँ हैं और न ही निवेशक इस पर भरोसा कर रहे हैं।
-Trump: #USA & #Pakistan will work together on developing massive Oil Reserves, they’ll be selling Oil to India Fact: -$30Bn for exploration, who will fund -Shell sold Paki business stake to Saudi Aramco -15 oil & gas blocks got no international bidders -Serious security concerns pic.twitter.com/sXZpO1b6fq
पाकिस्तान आज कई मोर्चों पर एक असफल मुल्क माना जा रहा है। चाहे वह अर्थव्यवस्था हो, जनसंख्या मैनेज करना या फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति। मुल्क पर लगभग 126 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज है और ऊर्जा आयात पर ही 17.5 अरब डॉलर खर्च करने पड़ते हैं।
ऐसे में पाकिस्तान के पास इतना पैसा ही नहीं है कि वह बड़े स्तर पर तेल और गैस की खोज, पाइपलाइन बिछाने या रिफाइनरी बनाने जैसे काम कर सके। यह तभी हो सकता है कि जब तक कि अमेरिका खुद ही यह सब फंड न करे और वह भी सिर्फ किसी राजनीतिक फायदे या सनक के तहत।
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) जैसे बड़े प्रोजेक्ट पर अब तक अरबों डॉलर और कई साल का समय लगा, लेकिन पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर इसका कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। इसके अलावा, पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम और पश्चिमी इलाकों में लगातार अशांति और हिंसा रहती है।
बलूचिस्तान वर्तमान में पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ी समस्या है। यह पाकिस्तान का करीब 44% हिस्सा है, वहाँ सुरक्षा हालात बेहद खराब हैं। वहाँ की स्थानीय आबादी (बलूच विद्रोही) बाहरी हस्तक्षेप और संसाधनों के दोहन का विरोध करती है।
ऐसे माहौल में अगर डोनाल्ड ट्रंप यह सोचते हैं कि वे पाकिस्तान जाकर आसानी से तेल निकाल पाएँगे, तो या तो वे हकीकत से अनजान हैं या फिर जानबूझकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। अफगानिस्तान का हाल देखकर भी यह समझना मुश्किल नहीं है कि पाकिस्तान में ऐसा कोई ऑपरेशन आसान नहीं होगा और वह भी बिना हिंसा या विरोध के।
ट्रंप का पाकिस्तान प्रेम और भारत के ब्रह्मोस हमले
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर ऐसा हमला किया जैसे कोई ‘Call of Duty’ जैसा वीडियो गेम खेल रहा हो। इस हमले में भारत ने ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल किया और नूर खान एयरबेस को निशाना बनाया।
यह एयरबेस पाकिस्तान की स्ट्रैटेजिक प्लान्स डिवीजन यानी उसके परमाणु कमान के काफी करीब है और पाकिस्तान की सैन्य मुख्यालय (GHQ) से भी सिर्फ 10 किलोमीटर की दूरी पर है।
बाद में कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि नूर खान एयरबेस पर अमेरिका का नियंत्रण था, लेकिन यह साफ नहीं हो पाया कि अमेरिका वहाँ क्या कर रहा था या उसकी क्या भूमिका थी।
I don’t know why I’m reading this as proof that India did something between May 7-10 that only Trump, Modi, Air Chief AP Singh, DGAO Bharti & a fighter pilot know about.
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के हमले बेहद सटीक और जोरदार थे। भारत ने न सिर्फ पाकिस्तान की चीन में बनी वायु रक्षा प्रणाली को बेकार कर दिया, बल्कि कई रनवे पर गहरे गड्ढे कर दिए और भारी सैन्य नुकसान पहुँचाया।
इन हमलों में पाकिस्तान के कई लड़ाकू विमान, Saab 2000 AEW&C विमान, Erieye रडार सिस्टम और दूसरी अहम एसेट्स नष्ट कर दी गई। इस कार्रवाई के बाद डोनाल्ड ट्रंप, जो पहले से ही असमंजस में थे, अचानक युद्धविराम समझौते की बातें करने लगे।
उन्होंने यह दावा किया कि व्यापार के जरिए शांति स्थापित करने पर बातचीत हो रही है, लेकिन ये बातें बेबुनियाद और अविश्वसनीय लगती हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि ट्रंप के पास दिखाने के लिए कोई ठोस व्यापार समझौता नहीं है वहीं दूसरी तरफ भारत ने अपनी सैन्य ताकत पूरी दुनिया के सामने साबित कर दी है।
कोई भी समझदार व्यक्ति यह नहीं मानेगा कि भारत ने इतने बड़ा सैन्य ऑपरेशन सिर्फ ट्रंप की अनुमति से किया होगा। यह फैसला भारत ने अपनी रणनीति और जरूरत के मुताबिक लिया था।NDTV के पत्रकार विष्णु सोम ने तो हल्के-फुल्के अंदाज़ में तंज कसते हुए कहा कि शायद भारत ने रहीम यार खान एयरबेस पर ब्रह्मोस मिसाइल इसलिए दागी थी कि वहाँ तेल ढूंढा जा सके!
डोनाल्ड ट्रंप के हालिया अजीब और बेवकूफाना बयानों को लेकर अब भारतीय ट्विटर पर चर्चा तेज हो गई है। लोग यह अंदाजा लगा रहे हैं कि कहीं ये बेसुध और घबराए हुए बयान भारत द्वारा ऑपरेशन सिंदूर में किए गए चौंकाने वाले और सफल हमलों की प्रतिक्रिया तो नहीं हैं।
ट्रंप जैसा व्यवहार किसी भी वैश्विक नेता के लिए असामान्य माना जाता है। भले ही वो डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेता ही क्यों न हों। सोशल मीडिया पर अब लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या भारत की यह सैन्य कार्रवाई इतनी असरदार और अप्रत्याशित थी कि उसने ट्रंप को बौखलाहट की स्थिति में डाल दिया है।
निष्कर्ष
डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों लगातार बड़े-बड़े वादे और दावे कर रहे हैं। वे अपनी काल्पनिक उपलब्धियों की जमकर तारीफ (ट्रंप-एटिंग) कर रहे हैं और MAGA (Make America Great Again) के सपने दुनिया को दिखा रहे हैं।
लेकिन आज की दुनिया और विशेषकर ग्लोबल साउथ अब पहले जैसी नहीं रही। यह नई बहुध्रुवीयता को समझती है और ट्रंप के दिखाए सपनों से प्रभावित नहीं होती। ट्रंप की धमकियों से चीन, रूस और अब भारत भी नहीं डरता। भारत पहले भी धमकियाँ और प्रतिबंध झेल चुका है।
इन मुश्किलों के बावजूद, भारत ने खुद को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में खड़ा किया है और अंतरराष्ट्रीय हालात को संभालना अच्छी तरह जानता है।
कुछ लोग भले ही इसे मजाक कहें, लेकिन ऐसा भी हो सकता है कि भारत की ब्रह्मोस मिसाइलों ने पाकिस्तान में ऐसे गहरे गड्ढे बना दिए हों कि अब पाकिस्तानी और उनके नए गार्जियन डोनाल्ड ट्रंप वहीं से तेल मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हों।
यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में संघमित्रा ने लिखी है। इसको पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करे।